Category: राज्य

  • पेयजल को और सुरक्षित बनाने की तैयारी, योगी सरकार गहन जांच में शामिल करेगी माइक्रोप्लास्टिक और PFAS

    पेयजल को और सुरक्षित बनाने की तैयारी, योगी सरकार गहन जांच में शामिल करेगी माइक्रोप्लास्टिक और PFAS

    योगी सरकार करेगी पेयजल की गुणवत्ता का परीक्षण ज्यादा गहनता से, माइक्रोप्लास्टिक और पीएफएएस की भी होगी जांच 

    विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से लैस नई स्टेट लैबोरेटरी भवन का कराया जा रहा तेजी से निर्माण 

    माइक्रोप्लास्टिक एवं पीएफएएस जैसे उभरते प्रदूषक के परीक्षण के लिए आवश्यक उन्नत उपकरणों का प्रस्ताव वार्षिक कार्ययोजना में शामिल 

    पेयजल एवं स्वच्छता विभाग भारत सरकार के सचिव ने मौजूदा स्टेट लैब का किया था निरीक्षण 

    प्रदेश में 1 स्टेट, 3 क्षेत्रीय, 72 जिला एवं 62 वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रयोगशालाओं का नेटवर्क 

     राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं में उन्नत स्तर की परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध, इसके 50 मानक एनएबीएल प्रमाणित 

     लखनऊ
     प्रदेश में ग्रामीण पेयजल की गुणवत्ता जांच व्यवस्था को और अधिक उन्नत एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। जल निगम (ग्रामीण) द्वारा विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से लैस नई स्टेट लैबोरेटरी भवन का निर्माण कराया जा रहा है, जिसका कार्य तेजी से पूर्ण कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। नई स्टेट लैब में अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक सुविधाओं के साथ पेयजल में उभरते प्रदूषक (इमर्जिंग कंटेमिनेंट्स) जैसे माइक्रोप्लास्टिक या पीएफएएस की जांच क्षमता विकसित करने की योजना है।

    केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव ने मौजूदा स्टेट लैब का किया था निरीक्षण
    हाल ही में उत्तर प्रदेश के दौरे पर आए भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव ने उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) की मौजूदा स्टेट लैबोरेटरी का निरीक्षण किया था। इस दौरान जल गुणवत्ता परीक्षण सुविधाओं, उन्नत उपकरणों तथा भविष्य में विकसित की जाने वाली परीक्षण क्षमताओं पर चर्चा हुई। इस दौरान उन्होंने माइक्रोप्लास्टिक तथा पीएफएएस जैसे उभरते प्रदूषकों की जांच की सुविधा भी स्टेट लैब स्तर पर विकसित किए जाने पर जोर दिया। 

    प्रदेश में व्यापक जल गुणवत्ता प्रयोगशाला नेटवर्क
    उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पेयजल गुणवत्ता की निगरानी एवं परीक्षण के लिए बहुस्तरीय प्रयोगशाला नेटवर्क कार्यरत है। इसमें 1 राज्य स्तरीय,  3 क्षेत्रीय, 72 जिला स्तरीय तथा 62 जल शोधक संयंत्र प्रयोगशालाएं हैं। राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं में उन्नत स्तर की परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके 50 मानक एनएबीएल प्रमाणित हैं। इस नेटवर्क के माध्यम से जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल गुणवत्ता की नियमित निगरानी एवं आवश्यकतानुसार विस्तृत प्रयोगशाला परीक्षण किया जाता है।

    माइक्रोप्लास्टिक और पीएफएएस दो अलग श्रेणियों के प्रदूषक
    माइक्रोप्लास्टिक और पीएफएएस को एक ही पदार्थ मानना तकनीकी रूप से सही नहीं है। माइक्रोप्लास्टिक सामान्यतः 5 मिमी से छोटे प्लास्टिक कणों को कहा जाता है, जबकि पीएफएएस फ्लोरीन युक्त कृत्रिम रसायनों का व्यापक समूह है, जिन्हें पर्यावरण में अत्यधिक स्थायित्व के कारण इसे फॉरएवर कैमिकल कहा जाता है। दोनों की नमूना परीक्षण तथा तकनीकी जांचें अलग-अलग होती हैं।

    कैसे होगी माइक्रोप्लास्टिक की जांच
    माइक्रोप्लास्टिक परीक्षण में प्रदूषक मुक्त सैंपलिंग अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नमूने को इस प्रकार एकत्र एवं संभाला जाता है कि इसे इकट्ठा करने का फ्लास्क या बर्तन, वातावरण, कपड़ों अथवा प्रयोगशाला सामग्री से बाहरी प्लास्टिक कण नमूने में न मिलें। इसके बाद जल शोधन एवं आवश्यक नूमने परीक्षण के माध्यम से कणों को अलग किया जाता है। माइक्रोस्कोपित परीक्षण से सैंपल या नमूनों में संदिग्ध कणों की संख्या, आकार, आकृति और रंग जैसी विशेषताओं का आकलन किया जा सकता है, जबकि पॉलीमर की पुष्ट पहचान के लिए एफटीआरआर या रमन माइक्रोस्कोपी जैसी स्पेकट्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग किया जाता है।

    बीआईएस मानकों एवं जल जीवन मिशन के प्रोटोकॉल के अनुरूप पेयजल गुणवत्ता निगरानी
    जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल गुणवत्ता की निगरानी निर्धारित राष्ट्रीय प्रोटोकॉल तथा लागू भारतीय मानकों के अनुरूप की जाती है। प्रयोगशालाओं के साथ-साथ ग्राम स्तर पर प्रशिक्षित महिलाओं/जल गुणवत्ता निगरानी समूहों द्वारा फील्ड टेस्टिंग किट से प्रारंभिक निगरानी की व्यवस्था भी इस प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आवश्यकता एवं निर्धारित परीक्षण कार्यक्रम के अनुसार नमूनों को प्रयोगशालाओं में भेजकर विस्तृत जांच की जाती है।

    भविष्य की जल गुणवत्ता चुनौतियों के लिए तैयार होगी नई स्टेट लैब
    नई स्टेट लैबोरेटरी को आधुनिक एवं विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से लैस करने का उद्देश्य प्रदेश में मजबूत राज्य रेफरल, आधुनिक रेफरल प्रयोगशाला की क्षमता विकसित करना है। माइक्रोप्लास्टिक एवं पीएफएएस जैसे प्रदूषक की परीक्षण सुविधा विकसित होने से भविष्य में बेसलाइन डाटा तैयार करने, संभावित प्रदूषण स्रोतों की पहचान, वैज्ञानिक निगरानी तथा राष्ट्रीय स्तर पर विकसित होने वाले मानकों एवं दिशानिर्देशों के अनुरूप परीक्षण व्यवस्था स्थापित करने में मदद मिलेगी।

    तेज गति से पूरा कराया जाएगा कार्यः प्रबंध निदेशक
    उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने बताया कि नई स्टेट लैबोरेटरी भवन का निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है और इसे विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से सुसज्जित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। स्टेट लैब की उन्नत परीक्षण क्षमता से जल निगम के साथ-साथ आवश्यकता के अनुसार अन्य सरकारी विभागों एवं संस्थाओं को भी उच्च स्तरीय जल परीक्षण में सहयोग मिल सकेगा। माइक्रोप्लास्टिक एवं पीएफएएस जैसे उभरते प्रदूषकों की जांच को विकसित करना, भविष्य की जल गुणवत्ता चुनौतियों के दृष्टिगत महत्वपूर्ण पहल है।

  • दिल्ली-पटना-दरभंगा का सफर होगा आसान, नए एक्सप्रेसवे से चार राज्यों की कनेक्टिविटी को मिलेगा बूस्ट

    दिल्ली-पटना-दरभंगा का सफर होगा आसान, नए एक्सप्रेसवे से चार राज्यों की कनेक्टिविटी को मिलेगा बूस्ट

    पटना

    बिहार में 170 किमी के गया-दरभंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण की रफ्तार तेज हो गई है. इसे आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे (NH-119D) भी कहते हैं. इसकी लंबाई लिंक रूट को मिलाकर 230 किमी तक बढ़ जाती है. 4 लेन के एक्सप्रेसवे को NHAI भारतमाला परियोजना के फेज-1 के तहत बनाया  रहा है, जिसे छह लेन किया जा सकता है. एक्सप्रेसवे दक्षिण में औरंगाबाद, गया जिले से गुजरते हुए उत्तर में दरभंगा तक जाता है. औरंगाबाद और गया जिले के बॉर्डर के पास आमस से इसकी शुरुआत होगी, जो दिल्ली-कोलकाता NH-19 से कनेक्ट होगा. इसका आखिरी प्वाइंट दरभंगा का बेला नवादा है, जो NH-27 ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को जोड़ता है।

    आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे का रूट
    आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे (NH-119D) 198 किमी लंबा है और 5 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है. यह गया जिले के आमस से दरभंगा तक जाएगा. यहां से लिंक रोड के जरिये ये बोधगया और राजगीर से जुड़ जाएगा. ये बिहार का पहला ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है. यह एक्सप्रेसवे उत्तर और दक्षिण बिहार को आपस में जोड़ता है. ये ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक केंद्रों को जोड़ेगा।

    गया-दरभंगा एक्सप्रेसवे का रूट

    1. औरंगाबाद
    2. गया
    3. जहानाबाद
    4. पटना
    5. वैशाली
    6. समस्तीपुर
    7. दरभंगा
    आगे बोधगया और राजगीर से लिंक

    दरभंगा से गया 3-4 घंटे में 
    अभी गया, आमस से दरभंगा की दूरी तय करने में 6 से 7 घंटे लगते हैं और एक्सप्रेसवे से ये 3-4 घंटे रह जाएगा. बोधगया, राजगीर, पटना और वैशाली जैसे बुद्ध और जैन सर्किट स्थल कनेक्ट होगी. देश-विदेश के पर्यटकों को आवाजाही में आसानी होगी.उत्तरी बिहार के खाद्य उत्पादों जैसे मखाना, लीची को दक्षिण बिहार और दिल्ली-कोलकाता कॉरिडोर से बंदरगाह तक पहुंचने में आसानी होगी. साथ ही यूपी, झारखंड और पश्चिम बंगाल से आने वाले पर्यटकों की आवाजाही आसान होगी. आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे चालू होने और इसके वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ जाने के बाद बिहार से दिल्ली, कोलकाता और अन्य शहरों की यात्रा कम समय में हो पाएगी।

        दरभंगा से दिल्ली – 18 से 22 घंटे- 10 से 12 घंटे- आमस-दरभंगा से पूर्वांचल और यमुना एक्सप्रेसवे
        पटना से दिल्ली- 16 से 18 घंटे- 9 से 10 घंटे – पटना-बक्सर, पूर्वांचल, यमुना एक्सप्रेसवे
        दरभंगा से कोलकाता-  14 से 16 घंटे- 7 से 8 घंटे- आमस-दरभंगा, वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे
        गया, आमस से कोलकाता- 10 से 12 घंटे – 5 से 6 घंटे- वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे  से रास्ता
        वाराणसी से गया आने में पहले 5-6 घंटे लगते थे, जो घटकर 2 से 2.5 घंटे रह जाएंगे
        वाराणसी से दरभंगा जाने में पहले 10-12 घंटे लगते थे जो अब 5 से 6 घंटे में तय होगा रास्ता
        आमस-दरभंगा और वाराणसी-कोलकाता के जरिये रांची का सफर 5-6 घंटे में पूरा हो जाएगा
        आमस-दरभंगा के उत्तरी छोर से जुड़ने से उत्तर बिहार से सिलीगुड़ी की दूरी 6 से 7 घंटे रह जाएगी

    पटना में आउटर रिंग रोड – गंगा पर नया पुल
    इस एक्सप्रेसवे के लिए गंगा नदी पर नया पुल कच्ची दरगाह-बिदुपुर ब्रिज बन रहा है. पटना के पास ये एक्सप्रेसवे गंगा नदी को पार करने के लिए निर्माणाधीन 9.75 किमी लंबे 6 लेन के कच्ची दरगाह-बिदुपुर महासेतु से आवाजाही आसान होगी.ये पटना आउटर रिंग रोड के जरिये राजधानी को बेहतर कनेक्टिविटी देगा.एक्सप्रेसवे को नेपाल बॉर्डर पर जयनगर तक विस्तार दिया जा सकता है,इससे भारत-नेपाल व्यापार में इजाफा होगा. बिहार सरकार ने इस एक्सप्रेसवे से लिंक रोड से बोधगया और राजगीर को भी सीधे जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया है. पटना, जहानाबाद, गया जैसे भीड़भाड़ वाले शहरों के अंदर गए बिना सीधे आउटर रिंग रोड से गाड़ियां निकल जाएंगी।

    राजगीर और बोधगया से कनेक्टिविटी
    बिहार सरकार ने बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए 35 हजार करोड़ की योजना को हरी झंडी दी है. प्रदेश के धार्मिक पर्यटन स्थलों को जोड़कर एक सर्किट बनाने के लिए ये प्रस्ताव तैयार किया गया है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को ये प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा गया है. पटना से शुरू होने वाले इस एक्सप्रेसवे से गयाजी, राजगीर, बोधगया जैसे धार्मिक केंद्रों को जोड़ा जाएगा. इस योजना में आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से बोधगया और राजगीर को जोड़ा जाएगा. साथ ही वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे से इंटरलिंक किया जाएगा.राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण  (NHAI) राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाले इस एक्सप्रेसवे और लिंक एक्सप्रेसवे निर्माण की जिम्मेदारी संभालेगा।

    वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे का रूट
    वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे (NH-319B) से भी ये कनेक्ट होगा. 6 लेन के ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे भी कहा जाता है. भारत के चार बडे़ राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल हाईस्पीड कनेक्टिविटी मिलेगी.वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे बिहार के चार जिलों कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया से होकर गुजरता है. इस एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट में बदलाव कर सासाराम के पहाड़ी इलाके में सुरंग का प्रस्ताव दिया गया है. इससे एक्सप्रेसवे की दूरी करीब 15 किलोमीटर घट जाएगी. साथ ही इस बदलाव से गया और राजगीर को भी सीधी कनेक्टिविटी मिल जाएगी.बिहार की ये एक्सप्रेसवे परियोजना करीब 610 किलोमीटर होगी. इस एक्सप्रेसवे का लगभग 170 किलोमीटर हिस्सा बिहार में बनाया जाएगा और बाकी दूसरे राज्यों से होकर गुजरेगा।

    वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे की यूपी के 4 राज्यों से कनेक्टिविटी
    उत्तर प्रदेश में वाराणसी रिंग रोड से चंदौली जिले के बरहुली गांव तक सीमा. 
    बिहार में कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जिले, कुल दूरी 170 किमी 
    झारखंड में चतरा, हजारीबाग, रामगढ़ और बोकारो तक, 187 किलोमीटर 
    बंगाल में पुरुलिया, बांकुड़ा, हुगली और हावड़ा से कोलकाता के उलुबेरिया तक 

  • हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: आय की गलती से योजनाओं से वंचित परिवारों की होगी जांच और सुधार

    हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: आय की गलती से योजनाओं से वंचित परिवारों की होगी जांच और सुधार

    चंडीगढ़
    हरियाणा सरकार परिवार पहचान पत्र (फैमिली आइडी) में आय संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाएगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर इस अभियान के तहत आय से जुड़ी त्रुटियों और विसंगतियों का सत्यापन ग्राम सभाओं के माध्यम से किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र परिवार केवल आय संबंधी गलती के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।

    पीपीपी कोआर्डिनेट डा. सतीश खोला ने बताया कि मुख्यमंत्री ने ग्राम सभाओं की भूमिका को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। ग्राम सभाओं में निर्धारित कोरम पूरा कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्राप्त जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर आय संबंधी शिकायतों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाएगा।

    उन्होंने बताया कि अभियान का पहला चरण दो अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सभी जिलों में प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। हरियाणा के मुख्य सचिव ने सभी उपायुक्तों, अतिरिक्त उपायुक्तों और जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक कर अभियान की रूपरेखा और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    डा. खोला ने कहा कि फैमिली आइडी में आय का सही और अद्यतन विवरण सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने आय संबंधी शिकायत वाले परिवारों से संबंधित ग्राम सभा में आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की।

  • जयपुर में NEET-PG परीक्षा प्रभावित, बिजली संकट के बाद NBEMS ने री-एग्जाम का किया ऐलान

    जयपुर में NEET-PG परीक्षा प्रभावित, बिजली संकट के बाद NBEMS ने री-एग्जाम का किया ऐलान

    जयपुर
    सीतापुरा स्थित आईओएन डिजिटल जोन (iON Digital Zone) सेंटर पर नीट-पीजी 2026 की परीक्षा को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। बिजली गुल होने की समस्या के चलते दो परीक्षा केंद्रों पर प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए पुनः परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) के मुताबिक, इस सेंटर पर परीक्षा के लिए आवंटित सभी अभ्यर्थियों की परीक्षा अब 5 सितंबर 2026 को दोबारा आयोजित की जाएगी।

    अव्यवस्थाओं के चलते भड़के अभ्यर्थी
    दरअसल, सीतापुरा स्थित आईओएन डिजिटल जोन सेंटर पर नीट-पीजी की परीक्षा सुबह 9 बजे से शुरू होनी थी और दोपहर 12:30 बजे तक चलनी थी। इसके लिए अभ्यर्थी तय समय से पहले ही परीक्षा केंद्र पर पहुंच गए थे। सभी जरूरी तैयारियां पूरी होने के बाद परीक्षार्थियों को परीक्षा शुरू होने का इंतजार था। लेकिन परीक्षा शुरू होने के दौरान ही बिजली से जुड़ी परेशानी सामने आ गई। बिजली जाने के बाद कंप्यूटर सिस्टम बंद हो गए और परीक्षा आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद सिस्टम को दोबारा शुरू करने की कोशिश की गई, लेकिन बार-बार आ रही दिक्कत के चलते परीक्षा ठीक से शुरू ही नहीं हो पाई। काफी देर तक जब स्थिति साफ नहीं हुई तो बाहर बड़ी संख्या में छात्र जमा हो गए और अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा।

    इन दो केंद्रों पर होगी दोबारा परीक्षा
    जयपुर के आईओएन डिजिटल जोन आईडीजी सीतापुर के टीसी नंबर 41682 एवं 41683 पर केंद्र में केंद्र में आंतरिक बिजली आपूर्ति में समस्या के कारण परीक्षा पूरी नहीं हो सकी। एनबीईएमएस ने इस असुविधा के लिए प्रभावित अभ्यर्थियों के प्रति खेद व्यक्त किया है।

    बोर्ड ने प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए 5 सितंबर 2026 (शनिवार) को दोपहर 3 बजे जयपुर में पुनः परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। पुनः परीक्षा के केंद्र सहित अन्य विस्तृत जानकारी अलग से जारी की जाएगी। संबंधित अभ्यर्थियों को संशोधित एडमिट कार्ड भी जारी किए जाएंगे।

    कांग्रेस ने किया बीजेपी पर वार
    जयपुर में NEET-PG परीक्षा के दौरान हुई अव्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधा। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर लिखा, “जयपुर में सुबह 9 बजे से होने वाली NEET-PG की परीक्षा 12 बजे तक शुरू ही नहीं हो पाई। छात्र और उनके परिजन मोदी के घटिया सिस्टम के कारण परेशान होते रहे और पूरी सरकार चादर ताने सोती रही। एक बार फिर साबित हो गया कि मोदी सरकार एक परीक्षा ठीक से नहीं करवा सकती। धिक्कार है।”

    देशभर में 2.73 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा
    एनबीईएमएस के अनुसार 30 अगस्त को देशभर में 2,73,096 पंजीकृत अभ्यर्थियों के लिए 1111 केंद्रों पर नीट -पीजी 2026 परीक्षा आयोजित की गई। इनमें से 2,65,980 अभ्यर्थी परीक्षा में उपस्थित हुए और लगभग 2,63,535 अभ्यर्थियों की परीक्षा पूरी हुई।

    जयपुर
    सीतापुरा स्थित आईओएन डिजिटल जोन (iON Digital Zone) सेंटर पर नीट-पीजी 2026 की परीक्षा को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। बिजली गुल होने की समस्या के चलते दो परीक्षा केंद्रों पर प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए पुनः परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) के मुताबिक, इस सेंटर पर परीक्षा के लिए आवंटित सभी अभ्यर्थियों की परीक्षा अब 5 सितंबर 2026 को दोबारा आयोजित की जाएगी।

    अव्यवस्थाओं के चलते भड़के अभ्यर्थी
    दरअसल, सीतापुरा स्थित आईओएन डिजिटल जोन सेंटर पर नीट-पीजी की परीक्षा सुबह 9 बजे से शुरू होनी थी और दोपहर 12:30 बजे तक चलनी थी। इसके लिए अभ्यर्थी तय समय से पहले ही परीक्षा केंद्र पर पहुंच गए थे। सभी जरूरी तैयारियां पूरी होने के बाद परीक्षार्थियों को परीक्षा शुरू होने का इंतजार था। लेकिन परीक्षा शुरू होने के दौरान ही बिजली से जुड़ी परेशानी सामने आ गई। बिजली जाने के बाद कंप्यूटर सिस्टम बंद हो गए और परीक्षा आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद सिस्टम को दोबारा शुरू करने की कोशिश की गई, लेकिन बार-बार आ रही दिक्कत के चलते परीक्षा ठीक से शुरू ही नहीं हो पाई। काफी देर तक जब स्थिति साफ नहीं हुई तो बाहर बड़ी संख्या में छात्र जमा हो गए और अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा।

    इन दो केंद्रों पर होगी दोबारा परीक्षा
    जयपुर के आईओएन डिजिटल जोन आईडीजी सीतापुर के टीसी नंबर 41682 एवं 41683 पर केंद्र में केंद्र में आंतरिक बिजली आपूर्ति में समस्या के कारण परीक्षा पूरी नहीं हो सकी। एनबीईएमएस ने इस असुविधा के लिए प्रभावित अभ्यर्थियों के प्रति खेद व्यक्त किया है।

    बोर्ड ने प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए 5 सितंबर 2026 (शनिवार) को दोपहर 3 बजे जयपुर में पुनः परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। पुनः परीक्षा के केंद्र सहित अन्य विस्तृत जानकारी अलग से जारी की जाएगी। संबंधित अभ्यर्थियों को संशोधित एडमिट कार्ड भी जारी किए जाएंगे।

    कांग्रेस ने किया बीजेपी पर वार
    जयपुर में NEET-PG परीक्षा के दौरान हुई अव्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधा। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर लिखा, “जयपुर में सुबह 9 बजे से होने वाली NEET-PG की परीक्षा 12 बजे तक शुरू ही नहीं हो पाई। छात्र और उनके परिजन मोदी के घटिया सिस्टम के कारण परेशान होते रहे और पूरी सरकार चादर ताने सोती रही। एक बार फिर साबित हो गया कि मोदी सरकार एक परीक्षा ठीक से नहीं करवा सकती। धिक्कार है।”

    देशभर में 2.73 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा
    एनबीईएमएस के अनुसार 30 अगस्त को देशभर में 2,73,096 पंजीकृत अभ्यर्थियों के लिए 1111 केंद्रों पर नीट -पीजी 2026 परीक्षा आयोजित की गई। इनमें से 2,65,980 अभ्यर्थी परीक्षा में उपस्थित हुए और लगभग 2,63,535 अभ्यर्थियों की परीक्षा पूरी हुई।

  • 35 KG दूध देने वाली ‘राधा’ का निधन, PM से सम्मान पाने वाली हरियाणा की शान अब नहीं रही

    35 KG दूध देने वाली ‘राधा’ का निधन, PM से सम्मान पाने वाली हरियाणा की शान अब नहीं रही

    नारनौंद.

    कभी पशु प्रतियोगिताओं के रैंप पर अपनी कद-काठी से लोगों का ध्यान खींचने वाली और फिर 35 किलो 669 ग्राम दूध देकर विश्व स्तर पर हरियाणा की मुर्रा नस्ल का नाम चमकाने वाली ‘राधा’ अब नहीं रही। शनिवार को उसकी मौत की खबर सिंघवा खास पहुंची तो उसे विश्व चैंपियन बनाने वाले पशुपालक ईश्वर सिंह के लिए यह किसी गहरे सदमे से कम नहीं थी।

    करीब एक माह पहले ही उन्होंने राधा को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी पशुपालक सुनील यादव को उपहार में दिया था, लेकिन उससे उनका लगाव कम नहीं हुआ था। वह प्रतिदिन फोन कर राधा की सेहत और खानपान की जानकारी लेते थे। शुक्रवार को राधा ने एक स्वस्थ कटडी को जन्म दिया था। पशुपालक के अनुसार इसके बाद रात तक स्थिति सामान्य थी, लेकिन शनिवार सुबह वह नहीं उठी।

    मुर्रा नस्ल को विश्व स्तर पर अलग पहचान दिलाई
    चिकित्सक को बुलाकर जांच कराई गई। पशुपालक के अनुसार बीमारी के कारण उसकी मौत होने की आशंका जताई गई है। राधा की मौत के साथ ही पशुपालन के क्षेत्र में सिंघवा खास की उस उपलब्धि का एक यादगार अध्याय भी समाप्त हो गया, जिसने मुर्रा नस्ल को विश्व स्तर पर अलग पहचान दिलाई थी। मुर्रा नस्ल की बेहतरीन भैंसों के लिए पहचान रखने वाले सिंघवा खास के ईश्वर सिंह लंबे समय से पशुपालन कर रहे हैं। उनकी धन्नो और हेमा मालिनी नाम की भैंसें भी पशु प्रतियोगिताओं में पहचान बना चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने दूध उत्पादन का नया कीर्तिमान बनाने के लिए राधा को तैयार किया। ईश्वर सिंह के अनुसार उन्होंने इंटरनेट पर अधिक दूध देने वाली भैंसों के रिकार्ड की जानकारी जुटाई। इससे पहले 33 किलो 800 ग्राम दूध का रिकार्ड कैथल के बूढा खेडा के पशुपालक नरेश की भैंस रेशमा के नाम होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद राधा ने 35 किलो 669 ग्राम दूध देकर कीर्तिमान बनाया।

    चार लाख में खरीदी, चैंपियन बनाने के लिए तैयार की खास दिनचर्या
    ईश्वर सिंह ने बताया कि राधा को पिछले वर्ष फतेहाबाद के गांव कन्हेडी से चार लाख रुपये में खरीदा था। उसके लिए साफ गद्दे बिछाए जाते थे। दिन में तीन बार स्नान, महीने में एक बार कटिंग और प्रतिदिन सरसों के तेल से मालिश की जाती थी। गर्मी में कूलर की व्यवस्था रहती थी। आहार में आठ किलो चने, चार किलो बिनोला, दो किलो गेहूं का दलिया और दो किलो गुड सहित विशेष फीड दी जाती थी। राधा को प्रधानमंत्री भी सम्मानित कर चुके थे।

    खबर मिली तो घर में नहीं जला चूल्हा: ईश्वर
    ईश्वर सिंह ने बताया कि राधा को उपहार में देने के बाद भी वह लगातार उसकी जानकारी लेते थे। शनिवार को उसकी मौत की सूचना मिली तो पूरा परिवार दुखी हो गया और घर में चूल्हा तक नहीं जला। उन्होंने कहा कि राधा उनके लिए केवल पशु नहीं थी, बल्कि वर्षों की मेहनत और पशुपालन से जुडे सपने की पहचान बन चुकी थी।

    पशु पालकों में शोक, राधा की उपलब्धि बनी रहेगी याद
    राधा की मौत की सूचना मिलने के बाद क्षेत्र के पशुपालकों ने भी दुख जताया। पशुपालकों का कहना है कि 35.669 किलो दूध देकर राधा ने अकेले अपने पालक का ही नहीं, बल्कि हरियाणा की मुर्रा नस्ल का नाम विश्व स्तर पर पहुंचाया। उसकी उपलब्धि पशुपालकों को बेहतर नस्ल और वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन के लिए प्रेरित करती रहेगी।

  • रेलवे ने जारी किया बड़ा अपडेट: कई ट्रेनें रहेंगी रद्द, कुछ का सफर बीच में होगा खत्म

    रेलवे ने जारी किया बड़ा अपडेट: कई ट्रेनें रहेंगी रद्द, कुछ का सफर बीच में होगा खत्म

     चक्रधरपुर
     दक्षिण पूर्व रेलवे ने 31 अगस्त से 09 सितंबर तक आद्रा रेल मंडल में रोलिंग ब्लॉक कार्यक्रम के कारण 08 ट्रेनों का परिचालन विभिन्न तिथियों में रद करने की घोषणा कर दी है। इसके अलावे रेलवे ने 10 ट्रेनों को उनके गंतव्य से पहले ही शॉर्ट टर्मिनेशन और शॉर्टओरिजिनेशन कर चलाएगी।

    रेलवे के इस फैसले का असर झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के हजारों यात्रियों पर पड़ेगा। रेल प्रशासन ने यात्रियों अनुरोध किया है कि अपनी यात्रा से पहले ट्रेनों की स्थिति की जानकारी वेबसाइट ऐप या 139 हेल्पलाइन से अवश्य प्राप्त कर लें।

    ये ट्रेनें इन तिथियों में रद रहेगी:
        31 अगस्त, 02 और 06 सितंबर को ट्रेन नंबर 68046/68045 आद्रा – आसनसोल-आद्रा मेमू का परिचालन रद रहेगी ।
        31 अगस्त, 03, 04 और 06सितंबर को ट्रेन नंबर 63594/ 63593 आसनसोल – पुरूलिसा -आसनसोल मेमू को परिचालन रद रहेगी।
        01, 04 और 06 सितंबर को ट्रेन नंबर 68090/68089 आद्रा – मेदिनीपुर – आद्रा मेमू का परिचालन रद रहेगी ।
        06 सितंबर को ट्रेन नंबर 68077/68078 आद्रा-भागा-आद्रा मेमू का परिचालन रद रहेगी ।

    ये ट्रेनें शॉर्ट टर्मिनेशन और शॉर्टओरिजिनेशन कर चलेगी 
        चक्रधरपुर – गोमो- चक्रधरपुर एक्सप्रेस (18116/18115 ) : 01, 04 और 06 सितंबर को यह ट्रेन महुदा तक चलेगी। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में महुदा से गोमो के बीच रद रहेगी।
        टाटानगर-आसनसोल मेमू ( 68056 ) : 04 और 06 सितंबर को यह ट्रेन आद्रा स्टेशन तक चलेगी। इस ट्रेन का परिचालन आद्रा और आसनसोल स्टेशनों के बीच रद रहेगी।
        आसनसोल-बाराभूम मेमू (68060) : 04 और 06 सितंबर को यह ट्रेन आद्रा तक चलेगी। इस ट्रेन का परिचालन आसनसोल और आद्रा स्टेशनों के बीच रद रहेगी।
        आसनसोल – पुरूलिया – आसनसोल मेमू (63594/63593 ) : 01, 02 और 05 सितंबर को यह ट्रेन आद्रा तक चलेगी। इस ट्रेन का परिचालन दोनों दिशाओं में आद्रा और पुरूलिया स्टेशनों के बीच रद रहेगी।
        खड़गपुर – हटिया मेमू- खड़गपुर एक्सप्रेस (18035/18036 ) : 01 , 02 और 05 सितंबर को यह ट्रेन आद्रा स्टेशन तक चलेगी । इस ट्रेन का परिचालन दोनों दिशाओं में आद्रा और हटिया स्टेशनों के बीच रद रहेगी।
        टाटानगर-आसनसोल – टाटानगर मेमू ( 68056 /68055 ) : 31 अगस्त, 03 और 05 सितंबर को यह ट्रेन आद्रा स्टेशन तक चलेगी। इस ट्रेन का परिचालन आद्रा और टाटानगर स्टेशनों के बीच रद रहेगी।

  • पंजाब में बदलेंगे सियासी समीकरण? BJP और अकाली दल के फिर साथ आने की चर्चा तेज

    पंजाब में बदलेंगे सियासी समीकरण? BJP और अकाली दल के फिर साथ आने की चर्चा तेज

    चंडीगढ़.

    पंजाब विधानसभा चुनाव में अभी करीब छह महीने का समय बाकी है, लेकिन सियासी दलों ने चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होगा कि कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा, बल्कि यह होगा कि कौन किसके साथ खड़ा होगा।

    15 सितंबर के बाद पंजाब की राजनीति में गठबंधन और दल-बदल को लेकर तस्वीर तेजी से साफ होने की उम्मीद है। खासतौर पर भाजपा की रणनीति पर सबकी नजर रहेगी, क्योंकि पार्टी को अपने संभावित चुनावी साथी को लेकर अहम फैसला करना है। भाजपा 15 सितंबर से पंजाब में नशा विरोधी रैलियों का सिलसिला शुरू करने जा रही है। इन रैलियों को पार्टी की चुनावी तैयारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रैलियों में मिलने वाला जनसमर्थन भाजपा के लिए पंजाब की राजनीतिक जमीन का संकेतक होगा। पार्टी यह परखना चाहेगी कि नशे के मुद्दे पर उसका अभियान जनता के बीच कितना असर पैदा कर रहा है और संगठन चुनावी माहौल बनाने में कितना सक्षम है।

    पंजाब प्रभारी दो दिवसीय दौर पर 
    इसी बीच भाजपा के नवनियुक्त पंजाब प्रभारी डाॅ. सतीश पूनिया 31 अगस्त से दो दिवसीय पंजाब दौरे पर पहुंच रहे हैं। दौरे के दौरान प्रदेश नेतृत्व के साथ-साथ संगठन के विभिन्न स्तरों पर बैठकें होंगी। इन बैठकों में चुनावी तैयारियों, संगठन की स्थिति और आगामी रणनीति पर चर्चा होगी। साथ ही संभावित गठबंधन को लेकर पंजाब भाजपा के नेताओं से फीडबैक लिए जाने की संभावना है।

    भाजपा के सामने अकाली दल को लेकर सबसे बड़ा पेच
    भाजपा के लिए सबसे अहम सवाल शिरोमणि अकाली दल को लेकर है। पार्टी के सामने दो रास्ते दिखाई दे रहे हैं। पहला, सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल के साथ दोबारा तालमेल का रास्ता और दूसरा, ज्ञानी हरप्रीत सिंह के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के साथ नया राजनीतिक समीकरण। दोनों विकल्पों के अपने अलग राजनीतिक मायने हैं। यदि भाजपा किसी एक अकाली धड़े के साथ गठबंधन करती है तो कई विधानसभा सीटों पर वोटों का गणित बदल सकता है। इस संभावित गठबंधन में बसपा की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में भाजपा के लिए गठबंधन का फैसला केवल सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया जाने वाला फैसला होगा।

    कांग्रेस और आप अलग हुए तो बढ़ेगा रोमांच
    वहीं कांग्रेस और आप के अलग-अलग चुनाव लड़ने की स्थिति में पंजाब का चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। शिरोमणि अकाली दल भी यदि अलग मैदान में रहता है तो कई सीटों पर त्रिकोणीय और बहुकोणीय मुकाबले बन सकते हैं। ऐसे में कुछ सीटों पर कुछ हजार वोटों का अंतर भी परिणाम बदल सकता है। चुनाव से पहले दल-बदल भी सियासी तस्वीर को प्रभावित कर सकता है। अलग-अलग दलों के असंतुष्ट नेता अपने राजनीतिक भविष्य को देखते हुए पाला बदल सकते हैं। ऐसे नेताओं पर सभी प्रमुख दलों की नजर रहेगी।

    गठबंधन और फेरबदल से तय होगी दिशा
    इसलिए 15 सितंबर के बाद पंजाब की राजनीति में रैलियों से ज्यादा नजर गठबंधन की चाल और नेताओं की राजनीतिक पारी बदलने पर रहेगी। भाजपा के नशा विरोधी अभियान को मिलने वाला जनसमर्थन डाॅ. सतीश पूनिया की बैठकों से मिलने वाला फीडबैक और अकाली दल को लेकर पार्टी का फैसला आने वाले चुनावी रण की दिशा तय कर सकता है। फिलहाल पंजाब की सियासत में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि अगले कुछ महीने गठबंधन, दल-बदल और वोटों के बंटवारे के लिहाज से बेहद अहम रहने वाले हैं।

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से कोरोना काल में शुरू हुई रामलीला, 15 से 25 जनवरी तक अयोध्या में आयोजन

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से कोरोना काल में शुरू हुई रामलीला, 15 से 25 जनवरी तक अयोध्या में आयोजन

    देश की सबसे बड़ी रामलीला में पहली बार तीन वर्ष के बच्चे करेंगे अभिनय

    अयोध्या से चर्चित फिल्मी कलाकारों की रामलीला का आठवां संस्करण दिल्ली में

    -दो माह बाद जनवरी में नौवां संस्करण अयोध्या में किया जाएगा आयोजित

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से कोरोना काल में शुरू हुई रामलीला, 15 से 25 जनवरी तक अयोध्या में आयोजन

    दिल्ली में 10 से 20 अक्टूबर तक सजेगा राममंच, देश-विदेश के दर्शकों को दिखेगी भव्य प्रस्तुति

    -62 करोड़ दर्शकों का आंकड़ा पार कर चुकी प्रस्तुति, 60 देशों तक पहुंचेगा रामभक्ति का संदेश

    अयोध्या
    अयोध्या से चर्चित फिल्मी कलाकारों की रामलीला को देश की सबसे बड़ी रामलीला माना जाता है। इस वर्ष पहली बार दिल्ली में अपना आठवां संस्करण प्रस्तुत करेगी। इस भव्य आयोजन में तीन वर्ष के छोटे बच्चों से लेकर सोलह वर्ष तक के बाल कलाकार सुबह के सत्र में अभिनय करेंगे, जबकि शाम को साठ से अधिक फिल्मी सितारे मंच पर नजर आएंगे। नवां संस्करण दो माह बाद जनवरी में अयोध्या में आयोजित होगा। यह रामलीला कोरोना काल में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से शुरू हुई थी और अब यह विश्व स्तर पर रामभक्ति का संदेश पहुंचा रही है।

         दिल्ली में आयोजन 10 से 20 अक्टूबर तक नई दिल्ली स्थित रफी मार्ग पर कांस्टीट्यूशन क्लब के मावलंकर हॉल में होगा। यहां सुबह 10 बजे से 12 बजे तक तीन से सोलह वर्ष के बच्चे अयोध्या की रामलीला में भाग लेंगे। शाम 7 बजे से 10 बजे तक फिल्मी कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। आयोजन स्थल पर शाम 4 बजे से रात 11 बजे तक मेले का भी आयोजन होगा। हॉल की बैठने की क्षमता करीब 600 लोगों की है। 120 फीट लंबी एलईडी टीवी स्क्रीन लगाई जाएगी, ताकि दर्शकों को भव्य दृश्य स्पष्ट रूप से दिखाई दें। माना जा रहा है कि इतनी कम उम्र के बच्चों वाली रामलीला पहली बार हो रही है। इसमें भगवान श्रीराम के बचपन के स्वरूपों को भी विशेष रूप से दिखाया जाएगा। यह आयोजन न केवल कलाकारों के अभिनय से यादगार बनेगा, बल्कि तकनीकी व्यवस्थाओं जैसे विशाल एलईडी स्क्रीन और बहुभाषी प्रसारण से भी नए आयाम स्थापित करेगा। संस्थापक सुभाष मलिक (बॉबी)और शुभम मलिक की अगुवाई में टीम लगातार तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सहयोग से शुरू हुई यह रामलीला अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है। दिल्लीवासियों और देश-विदेश के रामभक्तों के लिए यह सुनहरा अवसर है कि वे मावलंकर हॉल में पहुंचकर या टीवी पर बैठकर इस अद्वितीय रामलीला का आनंद लें। अक्टूबर में दिल्ली और जनवरी में अयोध्या दोनों स्थानों पर रामकथा का मंच सजेगा और करोड़ों दिलों में भक्ति का संचार होगा। 

    राम के अभिनय में पहली बार सामने आयेंगे सांसद रवि किशन
    प्रभु श्रीराम की भूमिका में गोरखपुर सांसद और भोजपुरी-बॉलीवुड स्टार रवि किशन नजर आएंगे। 19 अक्टूबर को वे पहली बार राम का किरदार निभाएंगे। इससे पहले वे केवट, भगवान परशुराम और भरत की भूमिकाएं अदा कर चुके हैं। लंकापति रावण की भूमिका में अरुण बख्शी होंगे। बिंदु दारा सिंह भगवान शिव के रूप में, पुनीत इस्सर भगवान परशुराम के रूप में, रजा मुराद अहिरावण के रूप में और अवतार गिल मेघनाद के रूप में मंच पर आएंगे। कुल मिलाकर साठ से अधिक फिल्मी सितारे इस रामलीला में अभिनय करेंगे। रिहर्सल दिल्ली और मुंबई के कलाकार कर रहे हैं।

    अयोध्या में दस दिन चलेगी रामलीला
    अयोध्या में नवां संस्करण 15 जनवरी 2027 से 25 जनवरी 2027 तक होगा। अब तक अयोध्या में सात संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित हो चुके हैं। कोरोना काल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस रामलीला को अनुमति दी थी, जो आज संसार की सबसे बड़ी रामलीला बन चुकी है।

    80 से अधिक सैटेलाइट चैनलों व 40 भाषाओं में होगा प्रसारण
    सुभाष मलिक बताते हैं कि पिछले वर्ष इस प्रस्तुति को 62 करोड़ से अधिक रामभक्तों ने अपने घर बैठे देखा। इस वर्ष भी 80 से अधिक सैटेलाइट चैनलों पर 40 भाषाओं में इसका प्रसारण होगा। साठ से अधिक देशों तक रामभक्ति का संदेश पहुंचेगा। देश-विदेश के दर्शक इस भव्य प्रस्तुति का आनंद ले सकेंगे।

    राजधानी के लोगों को अयोध्या की भव्यता का होगा अनुभव
    अयोध्या की रामलीला न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, बल्कि यह बच्चों को रामकथा से जोड़ने का भी माध्यम बन रही है। तीन वर्ष के छोटे बच्चे मंच पर आकर भगवान के बाल स्वरूप को जीवंत करेंगे, जो इस आयोजन को और भी विशेष बनाता है। दिल्ली में पहली बार होने वाला यह संस्करण राजधानी के लोगों को अयोध्या की भव्यता का अनुभव कराएगा। मेले के साथ जुड़ी गतिविधियों से पूरा माहौल राममय हो जाएगा।

  • एआई से इलाज के विश्लेषण, शिकायत निवारण, अस्पतालों की निगरानी और सुविधाओं के सुधार में मिलेगी मदद

    एआई से इलाज के विश्लेषण, शिकायत निवारण, अस्पतालों की निगरानी और सुविधाओं के सुधार में मिलेगी मदद

    योगी सरकार एआई आधारित वाइस बॉट से मरीजों से लेगी फीडबैक  
     
     सीएम योगी के निर्देश पर साचीज विकसित कर रहा एआई आधारित वाइस बॉट, मरीजों के अनुभव बनेंगे सुधार का आधार

    डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक बोले, फोन पर मरीजों से ली जाएगी इलाज और अस्पताल के बारे में जानकारी 
                                                                                                    
     एआई से इलाज के विश्लेषण, शिकायत निवारण, अस्पतालों की निगरानी और सुविधाओं के सुधार में मिलेगी मदद

    लखनऊ
     योगी सरकार द्वारा प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक और नवाचार के इस्तेमाल को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नोडल स्टेट हेल्थ एजेंसी ‘साचीज’ द्वारा प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए मरीजों के अनुभव और उनकी राय को महत्वपूर्ण आधार बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि साचीज आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए एआई आधारित वाइस बॉट विकसित किया जा रहा है। इसके जरिए मरीजों से फोन पर सीधे उनके इलाज और अस्पताल में मिले अनुभव की जानकारी ली जाएगी।

    मरीजों से फोन पर सीधे पूछा जाएगा अनुभव
    डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि सीएम योगी की मंशा के अनुरूप एआई आधारित वाइस बॉट का उद्देश्य केवल मरीजों से फीडबैक लेना नहीं है, बल्कि उनकी प्रतिक्रियाओं का तकनीक की मदद से विश्लेषण कर ऐसी जानकारी सामने लाना है, जिस पर समय रहते कार्रवाई की जा सके। इससे अस्पतालों की निगरानी, शिकायतों के समाधान, ऑडिट और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि एआई वाइस बॉट के माध्यम से इलाज करा चुके मरीजों से फोन पर बातचीत कर उनके अनुभव के बारे में जानकारी ली जाएगी। मरीज से यह पूछा जा सकेगा कि उसे अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत उपचार मिला या नहीं। इलाज के दौरान उसे किसी तरह की परेशानी हुई या नहीं, अस्पताल में उपलब्ध सेवाएं कैसी रहीं और अस्पताल के कर्मचारियों का व्यवहार कैसा रहा। यह भी पता लगाया जा सकेगा कि योजना के तहत मिलने वाले उपचार के लिए मरीज या उसके परिवार से कोई अनधिकृत राशि तो नहीं ली गई। इलाज के बाद मरीज कितना संतुष्ट है, इसकी जानकारी भी फीडबैक के माध्यम से प्राप्त की जा सकेगी। इस तरह मरीज की आवाज सीधे स्वास्थ्य महकमे तक पहुंचेगी और उसके अनुभव के आधार पर कमियों की पहचान करना आसान होगा।

    फीडबैक से सामने आएंगे कार्रवाई योग्य मामले
    साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि पहल का उद्देश्य मरीजों की प्रतिक्रियाओं में से उन मामलों की पहचान करना है, जिनमें आगे कार्रवाई की जरूरत है। एआई आधारित विश्लेषण के जरिए बड़ी संख्या में प्राप्त फीडबैक को व्यवस्थित किया जा सकेगा। यदि किसी मरीज द्वारा उपचार न मिलने, अनधिकृत शुल्क लेने, खराब व्यवहार या किसी अन्य समस्या की जानकारी दी जाती है, तो ऐसे मामलों को संबंधित संचालन टीमों तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे शिकायतों पर कार्रवाई करने और अस्पतालों की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। इस व्यवस्था से स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मरीज के वास्तविक अनुभव को भी इसमें शामिल किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सीमित संख्या में मरीजों से मैनुअल कॉल के माध्यम से फीडबैक लिया जाता है। इसमें समय और मानव संसाधन अधिक लगता है। एआई वाइस बॉट के माध्यम से बड़ी संख्या में मरीजों तक पहुंचकर उनसे फीडबैक लेने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इससे कम समय में अधिक मरीजों से जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। बड़ी संख्या में प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर बेहतर डेटा तैयार होगा। इस डेटा का विश्लेषण कर अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं की पहचान की जा सकेगी।

    मरीज के अनुभव को स्वास्थ्य व्यवस्था में मिलेगा अधिक महत्व
    साचीज की सीईओ ने बताया कि पहल का उद्देश्य केवल लाभार्थियों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उन्हें सही, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्राप्त हो। मरीजों का प्रत्यक्ष अनुभव स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। एआई वाइस बॉट के माध्यम से प्राप्त फीडबैक का व्यवस्थित विश्लेषण कर आवश्यक कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा फैसला संभव, आंगनबाड़ी और सहायिकाओं का मानदेय बढ़ाने की तैयारी

    चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा फैसला संभव, आंगनबाड़ी और सहायिकाओं का मानदेय बढ़ाने की तैयारी

    लखनऊ 

    चुनावी साल में आधी आबादी को साधने के लिए प्रदेश सरकार एक और बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में 50 फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 8 हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये और सहायिकाओं का 4 हजार से बढ़ाकर 6 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के प्रस्ताव को जल्द कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है।

    इस फैसले से प्रदेश की करीब 1.89 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और 1.67 लाख सहायिकाओं को लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अप्रैल में ही उनके मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करने की घोषणा की थी। इसी के क्रम में विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है, जिस पर वित्त, कार्मिक और न्याय विभाग के स्तर पर सहमति मिल चुकी है।

    मानदेय वृद्धि से प्रदेश सरकार के खजाने पर सालाना 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने का अनुमान है। खास बात यह है कि प्रस्तावित बढ़ोतरी का पूरा अतिरिक्त भार राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी और इसके लिए केंद्र सरकार से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी।

    इतना हो जाएगा मानदेय
    वर्तमान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 8 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 4500 रुपये और राज्य सरकार की 3500 रुपये है। प्रस्ताव के अनुसार राज्य सरकार अपनी हिस्सेदारी 3500 से बढ़ाकर 5500 रुपये कर देगी, जिससे कुल मानदेय 12 हजार रुपये हो जाएगा। इसी तरह सहायिकाओं के मानदेय में राज्य सरकार अपनी हिस्सेदारी में 2 हजार रुपये की वृद्धि करेगी और उन्हें कुल 6 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे।

    महिला मतदाताओं पर बढ़ा फोकस
    सरकार के इस संभावित फैसले को केवल आर्थिक राहत के रूप में नहीं, बल्कि चुनावी साल में महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का नेटवर्क गांवों से लेकर शहरी मोहल्लों तक फैला है। लंबे समय से मानदेय वृद्धि की मांग कर रहे इस बड़े महिला वर्ग को राहत देने के साथ सरकार को अपने महिला सशक्तीकरण और कल्याणकारी कार्यों को प्रमुखता से रेखांकित करने का अवसर मिलेगा।