Category: राज्य

  • ₹233 करोड़ से बदलेगी रेलवे की तस्वीर, समस्तीपुर के 21 स्टेशनों पर लगेगा इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलिंग सिस्टम

    ₹233 करोड़ से बदलेगी रेलवे की तस्वीर, समस्तीपुर के 21 स्टेशनों पर लगेगा इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलिंग सिस्टम

    पटना.

    रेल परिचालन को और सुरक्षित एवं आधुनिक बनाने के लिए समस्तीपुर मंडल में सिग्नलिंग व्यवस्था को अपग्रेड किया जाएगा। रेल मंत्रालय ने मंडल के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलाकिंग (EI) लगाने के लिए 233 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

    इसके तहत इन स्टेशनों पर वर्तमान में कार्यरत पैनल इंटरलाॅकिंग व्यवस्था को हटाकर आधुनिक कंप्यूटर आधारित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलाॅकिंग सिस्टम लगाया जाएगा। इससे स्टेशनों की सिग्नलिंग व्यवस्था अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित हो सकेगी।

    कवच के लिए मजबूत होगा सिग्नलिंग नेटवर्क
    रेलवे के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलाॅकिंग की व्यवस्था कवच के क्रियान्वयन के लिए भी महत्वपूर्ण होगी। स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच को लागू करने के लिए आधुनिक और विश्वसनीय सिग्नलिंग ढांचा आवश्यक है। ऐसे में 21 स्टेशनों पर ईआई की स्थापना से कवच से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी।

    कंप्यूटर आधारित तकनीक से बढ़ेगी विश्वसनीयता
    वर्तमान पैनल इंटरलाकिंग की तुलना में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलाकिंग अधिक आधुनिक कंप्यूटर आधारित तकनीक है। इसमें सिग्नल, प्वाइंट और रूट से संबंधित कार्यों को अधिक सटीक तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सिग्नलिंग उपकरणों की निगरानी और संचालन में भी सुधार होगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलाॅकिंग का एक बड़ा लाभ तकनीकी खराबी का तेजी से पता लगाना है। इससे फाॅल्ट डायग्नोसिस में लगने वाला समय कम होगा और रखरखाव कार्य भी अपेक्षाकृत आसान हो जाएगा। इससे सिग्नलिंग सिस्टम की उपलब्धता और परिचालन विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी। 

    ट्रेनों के परिचालन में आएगा सुधार
    स्टेशनों पर सिग्नलिंग व्यवस्था मजबूत होने का सीधा असर ट्रेन परिचालन पर भी पड़ेगा। प्वाइंट और सिग्नल के संचालन में अधिक सटीकता आने से ट्रेनों के आवागमन को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे परिचालन में लचीलापन बढ़ने के साथ सुरक्षा मानकों को भी मजबूती मिलेगी। समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलाॅकिंग की स्थापना भारतीय रेलवे के सिग्नलिंग आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है। रेलवे लगातार पुराने सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक तकनीक से बदल रहा है, ताकि बढ़ते रेल यातायात के बीच सुरक्षित, सुगम और अधिक भरोसेमंद ट्रेन परिचालन सुनिश्चित किया जा सके।

  • LPG के दाम बढ़े, होटल-रेस्टोरेंट कारोबारियों की बढ़ेगी लागत, घरेलू उपभोक्ताओं को राहत

    LPG के दाम बढ़े, होटल-रेस्टोरेंट कारोबारियों की बढ़ेगी लागत, घरेलू उपभोक्ताओं को राहत

    लखनऊ
    महीने के पहले दिन आम लोगों और कारोबारियों को रसोई गैस के दाम में बदलाव का सामना करना पड़ा है। तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलिंडर की कीमत में 9.50 रुपये की बढ़ोतरी की है।

    एलपीजी स्टेट हेड राजेश कुमार के अनुसार लखनऊ में भी अब 19 किलो का कमर्शियल सिलिंडर 9.50 रुपये महंगा हो गया है। नई कीमतें मंगलवार से प्रभावी हो गई हैं।

    कमर्शियल सिलिंडर के दाम बढ़ने से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, मिठाई और खानपान से जुड़े छोटे-बड़े कारोबारियों की लागत पर असर पड़ने की संभावना है। कारोबारियों का कहना है कि पहले से बढ़ी हुई परिचालन लागत के बीच गैस की कीमत में हुई यह बढ़ोतरी सीधे उनके खर्च को प्रभावित करेगी। इसका असर आगे चलकर खाद्य पदार्थों और तैयार भोजन की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

    वहीं, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलिंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है। घरेलू रसोई गैस की मौजूदा कीमत यथावत रहेगी।

    तेल कंपनियां आम तौर पर LPG की कीमतों की समीक्षा महीने की शुरुआत में करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों और अन्य लागतों के आधार पर कमर्शियल सिलिंडर के दाम में बदलाव किया जाता है। इस बार सितंबर की शुरुआत में कमर्शियल सिलिंडर की कीमत बढ़ाई गई है, जबकि घरेलू सिलिंडर के दाम स्थिर रखे गए हैं।

  • चंडीगढ़ में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, राहुल-राजा वड़िंग के समर्थन में उतरे कार्यकर्ता; कई हिरासत में

    चंडीगढ़ में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, राहुल-राजा वड़िंग के समर्थन में उतरे कार्यकर्ता; कई हिरासत में

    चंडीगढ़.

    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खिलाफ अनुसूचित जाति आयोग की ओर से जारी गिरफ्तारी संबंधी आदेशों के विरोध में मंगलवार को चंडीगढ़ में पंजाब कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया।

    सेक्टर-15 स्थित पंजाब कांग्रेस भवन के बाहर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच काफी देर तक खींचतान की स्थिति बनी रही। हालात को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में चंडीगढ़ पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शन का नेतृत्व पंजाब कांग्रेस के वर्किंग प्रेसिडेंट डॉ. राजकुमार वेरका ने किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और अनुसूचित जाति आयोग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मामले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया।

    वहीं, उत्तराखंड के हल्द्वानी में कथित ‘शुद्धिकरण’ मामले को लेकर कार्रवाई तथा राजा वड़िंग के खिलाफ गिरफ्तारी के आदेशों का भी विरोध किया गया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने डॉ. राजकुमार वेरका और उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया। पुलिस उन्हें सेक्टर-11 थाने ले गई, जहां करीब आधे घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। डॉ. वेरका ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति आयोग बंधुआ मजदूरों की तरह काम कर रहा है। उन्होंने राजा वड़िंग के खिलाफ गिरफ्तारी आदेशों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि मामला हाई कोर्ट के विचाराधीन होने के बावजूद आयोग इस तरह के आदेश जारी नहीं कर सकता। प्रदर्शन के चलते करीब एक घंटे तक मध्य मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा और मार्ग को बंद करना पड़ा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाकर यातायात व्यवस्था बहाल कराई।

  • अखिलेश का दौर याद कर आज भी लोगों की रूह कांप जाती है, राजभर ने सपा पर लगाए गंभीर आरोप

    अखिलेश का दौर याद कर आज भी लोगों की रूह कांप जाती है, राजभर ने सपा पर लगाए गंभीर आरोप

    अखिलेश राज में सपा कार्यकर्ताओं के घरों की महिलाओं को भी डर लगता था, ओपी राजभर ने बोला तीखा हमला

    'पुराने पाप याद आ जाते हैं क्या?' अखिलेश पर ओपी राजभर का हमला, बोले- जनता का सामना करने से क्यों घबरा रहे हैं?

    अखिलेश का दौर याद कर आज भी लोगों की रूह कांप जाती है, राजभर ने सपा पर लगाए गंभीर आरोप

    एसी-पीसी से कब तक लड़ेंगे चुनाव, अखिलेश भाई? ओपी राजभर बोले- जमीन पर आइए, दो-दो हाथ हो जाएं

    ‘हवाबाजी छोड़िए अखिलेश भाई, जमीन पर आइए’… ओपी राजभर ने दिया सीधी सियासी लड़ाई का चैलेंज

    लखनऊ
     सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से पूछा कि आखिर कब तक एसी और पीसी यानी एयर कंडीशनर वाले कमरों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के सहारे राजनीति चलती रहेगी।

    राजभर ने लिखा, 'अखिलेश भाई, कब तक ये हवाबाजी चलती रहेगी। एसी और पीसी से ही चुनाव लड़ लेंगे? एसी कमरे में बैठकर पीसी करके चुनाव लड़ेंगे? जमीन पर आइए महाराज। आइए दो-दो हाथ हो जाएं। एकतरफा चुनाव में मजा नहीं आता है।'

    अपने पोस्ट में राजभर ने अखिलेश यादव पर जनता के बीच जाने से बचने का आरोप भी लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर अखिलेश सीधे जनता का सामना करने में क्यों घबरा रहे हैं। राजभर ने तंज कसते हुए लिखा कि क्या जनता के बीच जाने पर उन्हें अपने पुराने कार्यकाल की बातें और 'पुराने पाप' याद आ जाते हैं।

    सपा कार्यकर्ता के घरों की महिलाएं भी थीं असुरक्षित

    ओपी राजभर ने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहने के दौरान 2012 से 2017 के बीच के सपा सरकार के कार्यकाल को लेकर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने पोस्ट में दंगा, अपराध, भ्रष्टाचार, लूट-खसोट और महिलाओं के खिलाफ अपराध के मुद्दों को उठाया।

    राजभर ने लिखा कि उस दौर की घटनाओं को याद करके 'रूह कांप जाती है' और कई बार ऐसा लगता है कि '2012-2017 के बीच उत्तर प्रदेश में सरकार थी ही नहीं।' उन्होंने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए यहां तक कहा कि अगर उन्हें यकीन न हो तो अपने ही किसी कार्यकर्ता के घर की महिलाओं से बात करके उस दौर के बारे में पूछ लें।

    ‘ट्विटर, एसी और पीसी करते रहिए भाई’

    राजभर का हमला यहीं नहीं रुका। उन्होंने अखिलेश यादव पर सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि जमीन पर उन्हें लेकर माहौल अच्छा नहीं है। उन्होंने लिखा, 'ट्विटर, एसी, पीसी करते रहिए भाई। जमीन पर आपको लेकर बहुत खराब माहौल है।' साथ ही राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के साथ अब उनके स्वजातीय और एक धर्म विशेष के कुछ लोगों को छोड़कर कोई नहीं है।

    पोस्ट के आखिर में राजभर ने कहा कि 10 साल बीत जाने के बाद भी लोग सपा सरकार के उस कार्यकाल को भूले नहीं हैं, जिसे उन्होंने 'विनाशकारी कार्यकाल' बताया।

  • बिहार में NSD कैंपस के बाद फिल्म सिटी की तैयारी, 54 फिल्मों को मिली मंजूरी

    बिहार में NSD कैंपस के बाद फिल्म सिटी की तैयारी, 54 फिल्मों को मिली मंजूरी

    पटना 
    बिहार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय यानी NSD का नया कैंपस बनेगा। एनएसडी के नए कैंपस की स्थापना को केंद्र सरकार की सहमति मिलने पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को कहा है कि यह निर्णय बिहार की समृद्ध नाट्य एवं प्रदर्शन कला परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और नई संभावनाएं प्रदान करेगा। बिहार की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध रही है।

    सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि यह कालिदास, रामवृक्ष बेनीपुरी और भिखारी ठाकुर जैसी महान विभूतियों की भूमि है। राज्य की लोक नाट्य एवं प्रदर्शन कलाओं की अपनी विशिष्ट और गौरवशाली परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में एनएसडी कैंपस की स्थापना से राज्य के युवा कलाकारों को पेशेवर नाट्य प्रशिक्षण, स्टेजक्राफ्ट, प्रदर्शन कला और उन्नत शोध के लिए बेहतर संस्थागत अवसर मिलेंगे।

    सीएम ने बिहार में फिल्म सिटी का किया था ऐलान
    बता दें कि अभी कुछ ही दिनों पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऐलान किया था कि बिहार में फिल्म सिटी बनाई जाएगी। सीएम 'भोजपुरी बवाल' कार्यक्रम के ग्रैंड फिनाले का उद्घाटन करने पहुंचे थे। सीएम ने इस मौके पर भोजपुरी जगत के कलाकारों से आग्रह किया था कि वो सभी मिलकर फिल्म सिटी के लिए उपयुक्त जगह का चयन करें। सीएम ने कहा था कि बिहार के बच्चों में अभिनेता, निर्देशक, लेखक, संगीतकार और फिल्म निर्माण से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने की प्रतिभा है।

    सीएम ने कहा था कि फिल्म जगत से जुड़े लोगों का बिहार में स्वागत है औऱ सरकार फिल्म निर्माण से जुड़े कलाकारों और निर्माताओं को हरसंभव मदद भी देगी। बता दें कि सरकार ने बिहार में करीब 54 फिल्मों की शूटिंग के लिए अनुमति प्रदान की है।

    सुनील शेट्टी ने सीएम से की थी मुलाकात
    बता दें कि मशहूर अभिनेता सुनील शेट्टी ने भी कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद सुनील शेट्टी ने कहा था कि वो जल्द ही बिहार में फिल्म निर्माण करेंगे।

  • RVT-7 ने जंगल में जमाया कब्जा, 6 शिकार किए और बाघिन से बढ़ाई नजदीकी

    RVT-7 ने जंगल में जमाया कब्जा, 6 शिकार किए और बाघिन से बढ़ाई नजदीकी

     बूंदी
    राजस्थान के चौथे और तेजी से उभरते रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण को लेकर उत्साहजनक खबर सामने आई है। प्रदेश में पहली बार वन विभाग को बिना मां के पले एक बाघ शावक को पूरी तरह से जंगल के अनुकूल ढालने (री-वाइल्डिंग) में सफलता मिली है। वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए तैयार किए गए इस युवा नर बाघ RVT-7 को 23 जून को टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक वन क्षेत्र में 'हार्ड रिलीज' किया गया था। महज दो महीनों के भीतर ही इस बाघ ने न केवल जंगल की कठिन परिस्थितियों से तालमेल बिठा लिया है, बल्कि अपनी टेरिटरी बनाने के स्पष्ट संकेत भी दिए हैं।

    वन विभाग की ओर से सेटेलाइट रेडियो कॉलर के जरिए बाघ की 24 घंटे निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। प्राप्त मूवमेंट मैप से पता चला है कि RVT-7 अब तक लगभग 41 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में घूम चुका है और उसने आधा दर्जन शिकार भी किए हैं।

    वन अधिकारियों के अनुसार, कुछ खास इलाकों में बाघ की गतिविधियां नियमित रूप से केंद्रित होने लगी हैं। इसके अलावा, बाघ द्वारा पेड़ों पर पंजों से खरोच बनाने और सेंट स्प्रे करने जैसे ठेठ टेरीटोरियल व्यवहार भी देखे जा रहे हैं, जो यह साबित करते हैं कि वह प्राकृतिक रूप से आत्मनिर्भर हो चुका है।

    RVT-1 के साथ आमना-सामना
    टाइगर रिजर्व के लिए सबसे राहत देने वाली बात यह रही कि RVT-7 का सामना इस जंगल में अब तक एकछत्र राज करने वाले वरिष्ठ नर बाघ RVT-1 से दो-तीन बार हुआ। इसके बावजूद, दोनों शक्तिशाली नर बाघों के बीच किसी भी प्रकार की हिंसा या आक्रामक संघर्ष नहीं देखने को मिला। RVT-7 अन्य बाघों के गतिविधि क्षेत्रों में आने-जाने के बाद भी बिना किसी टकराव के अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा है।

    बाघिन RVT-6 के साथ देखा गया
    जंगल में RVT-7 की स्वीकार्यता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि इसे ज्यादातर टाइगर रिजर्व की युवा बाघिन RVT-6 के साथ घूमते हुए देखा गया है। इतना ही नहीं, दोनों के बीच मैटिंग (प्रजनन) व्यवहार भी रिकॉर्ड किया गया है। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि री-वाइल्डिंग की प्रक्रिया पूरी तरह सफल रही है और बाघ का प्राकृतिक व्यवहार वन्य परिस्थितियों के बिल्कुल अनुकूल हो चुका है।

    रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व में बाघ RVT-7 की यह वैज्ञानिक री-वाइल्डिंग बाघ संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और उत्साहजनक उपलब्धि है। बाघ की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।
    -सुगनाराम जाट, वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व

  • हरियाणा की राजनीतिधानी से पंजाब यूनिवर्सिटी तक, अंकित बिढान बने छात्र राजनीति के नए सरताज

    हरियाणा की राजनीतिधानी से पंजाब यूनिवर्सिटी तक, अंकित बिढान बने छात्र राजनीति के नए सरताज

    चंडीगढ़.

    पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के छात्र संघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जीत दर्ज की है। प्रधान बने हैं अंकित बिढान, जिन्होंने आम आदमी पार्टी की स्टूडेंट ईकाई एएसएपी के आदिल बराड़ को हराकर भगवा लहराया।

    अंकित बिढान जींद के पेगां गांव के रहने वाले हैं। जींद को हरियाणा की राजनीतिक राजधानी के नाम से भी जाना जाता है। विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव हर बड़ी पार्टी यहां रैली कर चुनावी अभियान का आगाज करती हैं।  जींद के डीएवी स्कूल से 12वीं पास करने के बाद अंकित बिढान ने चंडीगढ़ का रुख किया। एलएलबी, एलएलएम की और फिलहाल पीएचडी स्काॅलर हैं। छह साल से पंजाब यूनिवर्सिटी में हैं। यहां एबीवीपी से जुड़कर विद्यार्थियों में अपनी पैठ बनाई और अब पीयू के सरताज बन गए। अंकित बिढान के पिता जींद शुगर मिल में निदेशक रह चुके हैं। फिलहाल उन्होंने गांव में ही पाइप की फैक्ट्री लगा रखी है। मां गृहिणी हैं। अंकित के बड़े भाई सुमित शिक्षा विभाग में क्लर्क के पद पर हैं, वहीं बड़ी बहन नीरू शादीशुदा है। 

    अंकित बोले-मेरी नहीं, जेन जी की जीत
    अंकित बिढ़ान ने अपनी जीत को पूरी जेन- जी की जीत बताया। उन्होंने कहा कि इस जीत से साबित हो गया है कि जेन- जी के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्वीकार्यता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद पहली बार किसी यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव हुए हैं। पीयू में हुआ यह चुनाव विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि यह जीत उनके पुराने रिपोर्ट कार्ड का हिस्सा है। विद्यार्थियों ने उनके काम और सक्रियता पर भरोसा जताया है। अब घोषणा पत्र में किए गए सभी वादों को पूरा करना उनकी प्राथमिकता होगी।

    अंकित की पात्रता और नाकांकन पर सवाल
    वहीं, अंकित बिढान की पात्रता और नामांकन पर आम आदमी पार्टी (आप) ने हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी है। आप के विधायक एवं पीयू चुनाव प्रभारी अमृतपाल सिंह सुखानंद का आरोप है कि अंकित के नामांकन में अब तक छह खामियां सामने आ चुकी हैं, इसके बावजूद उनका नामांकन रद नहीं किया गया। सुखानंद ने आरोप लगाया कि अंकित को नकल करते पकड़े जाने के बाद पीयू ने दो साल के लिए प्रतिबंधित किया था। इसके अलावा सेक्टर-11 में मारपीट का एक मामला दर्ज होने का भी दावा किया। उन्होंने अंकित की साबरमती यूनिवर्सिटी की डिग्री की मान्यता की भी जांच कराने की मांग की। कहा कि यदि यूनिवर्सिटी नियमों के अनुसार प्रत्याशी चुनाव लड़ने के योग्य नहीं है तो नामांकन स्वीकार कैसे किया गया। इसे लेकर हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी है।

  • बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव! 6105 गांवों में 24 घंटे सप्लाई, पोल बदलने का काम शुरू

    बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव! 6105 गांवों में 24 घंटे सप्लाई, पोल बदलने का काम शुरू

    चंडीगढ़.

    हरियाणा सरकार ने बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे आपूर्ति और पुराने बिजली ढांचे को बदलने पर जोर दिया है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने सोमवार को विधानसभा में बिजली विभाग से जुड़े अलग-अलग सवालों के जवाब में बताया कि प्रदेश के 7,250 गांवों में से 6,105 यानी 84.2 प्रतिशत गांवों को 24 घंटे बिजली मिल रही है।

    शेष 1,145 गांवों में 16 घंटे आपूर्ति की जा रही है और उन्हें भी चरणबद्ध तरीके से 24 घंटे बिजली से जोड़ा जाएगा। कालांवाली के कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाला के सवाल के जवाब में अनिल विज ने विधानसभा में बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश ने 40,918.30 करोड़ रुपये की बिजली खरीदी गई। प्रदेश के सभी 95 शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। अनिल विज ने पिहोवा के कांग्रेस विधायक मनदीप चट्ठा के सवाल के जवाब में सदन में कहा कि पिहोवा क्षेत्र में भी बिजली ढांचे में बदलाव होगा। गुलदेहरा और ठसका मीरांजी गांवों के बाहरी क्षेत्र में 11 केवी कृषि फीडरों पर मिले 107 लोहे के पोलों में 16 रेल पोल हैं। शेष 91 लोहे के पोल जनवरी 2027 तक पीसीसी पोल से बदले जाएंगे।

    6,105 गांवों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति – विज
    ऊर्जा मंत्री ने बताया कि हरियाणा सरकार की ‘म्हारा गांव-जगमग गांव’ योजना’’ के तहत प्रदेश के गांवों को चरणबद्ध तरीके से 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दायरे में लाया जा रहा है। प्रदेश के कुल 7,250 गांवों में से 6,105 गांवों यानी 84.2 प्रतिशत गांवों में पहले से ही 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है, जबकि 1,145 गांवों में 16 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है। उन्होंने कहा कि शेष गांवों को भी चरणबद्ध तरीके से 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दायरे में लाया जा रहा है। इसके लिए संबंधित क्षेत्रों में बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने तथा फीडरों के लोड को निर्धारित सीमा के भीतर लाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के तहत 55 शहरी क्षेत्रों तथा 2686 गांवों में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है जबकि 980 गांवों में 16 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है। इसी प्रकार, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के तहत 40 शहरी क्षेत्र तथा 3419 गांवों में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है जबकि 165 गांवों में 16 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है।

    बिजली विभाग में 27,746 नियमित कर्मचारी कार्यरत – विज
    विज ने विधानसभा में बताया कि ऊर्जा विभाग में विभिन्न श्रेणियों के कुल 53,289 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 27,746 पदों पर नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं तथा 25,543 पद रिक्त हैं। उन्होंने बताया कि नियमित कर्मचारियों के अतिरिक्त 15,362 कर्मचारी एचकेआरएनएल/ हारट्रोन/कॉन्ट्रैक्टर/पार्ट-टाइम व सीधे आउटसोर्सिंग के माध्यम से विभिन्न कार्यों में सेवाएं दे रहे हैं। इससे बिजली वितरण एवं आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में विभाग को अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने बताया कि ऊर्जा विभाग में श्रेणी-ए के मंजूर पदों की संख्या 1209, कार्यरत पद 1021 तथा रिक्त पदों की संख्या 188 है। इसी प्रकार, श्रेणी-बी के मंजूर पदों की संख्या 1436, कार्यरत पद 1130 तथा रिक्त पदों की संख्या 306 है। इसी तरह, श्रेणी-सी के मंजूर पदों की संख्या 47717, कार्यरत पद 24654 तथा रिक्त पदों की संख्या 23036 है। इसी प्रकार, श्रेणी-डी के मंजूर पदों की संख्या 2927, कार्यरत पद 941 तथा रिक्त पदों की संख्या 1986 है।

    तूफान के कारण टूटे खम्भों को ठीक किया- विज
    उन्होंने कहा कि हालांकि यह सही है कि सिरसा के गांवों में मई, 2026 से जुलाई, 2026 के दौरान बिजली बाधित हुई है, क्योंकि इस दौरान कई तूफान आएं हैं जिसके कारण से 37892 बिजली कें खम्भे टूटकर गिरे थे। उन्होंने बिजली के अधिकारियों व कर्मचारियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे उन सभी कर्मचारियों का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने इन टूटे हुए बिजली के खम्भों को थोंडे ही समय में ठीक किया। इसके अलावा, श्री विज ने कहा कि जिन गांवो में 16 घंटे बिजली दी जा रही है उन गांवों में 24 घंटे बिजली देने के लिए बिजली विभाग का स्टाफ लगातार प्रयत्नशील है और जब यह गांव 24 घंटे बिजली लेने के लिए तय शर्तें पूरी कर लेंगें तब इन गांवों में 24 घंटे बिजली देना आरंभ कर दी जाएगी।

    सरकार का लक्ष्य निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति – विज
    ऊर्जा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को पर्याप्त, गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली उपलब्ध करवाई जाए। बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, फीडरों के सुदृढ़ीकरण और चरणबद्ध तरीके से अधिक से अधिक गांवों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति से जोड़ने के लिए विभाग द्वारा लगातार कार्य किया जा रहा है।

  • ‘कभी वेश्या तो कभी जाति पूछकर अपमान, ब्राह्मणों की सहनशीलता की परीक्षा ले रहा सपा’, अखिलेश पर भड़के मनोज पांडेय

    ‘कभी वेश्या तो कभी जाति पूछकर अपमान, ब्राह्मणों की सहनशीलता की परीक्षा ले रहा सपा’, अखिलेश पर भड़के मनोज पांडेय

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    ब्राह्मणों के स्वाभिमान से मत खेलिए… सपा को मंत्री मनोज पांडेय की खुली चेतावनी

    लखनऊ
     समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर लगी गए एक होर्डिंग को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने इस होर्डिंग पर कड़ी आपत्ति जताते हुए समाजवादी पार्टी पर ब्राह्मण समाज का अपमान करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर किसी समाज की धार्मिक पहचान और आस्था का उपहास करना न सिर्फ निंदनीय है, बल्कि यह सामाजिक मर्यादाओं का भी उल्लंघन है।

    मंत्री मनोज पांडेय ने कहा कि होर्डिंग में ब्राह्मणों को घुटनों के बल बैठा हुआ दिखाया गया है। उसके त्रिपुंड और जनेऊ जैसे धार्मिक प्रतीकों को प्रदर्शित करते हुए उसे ‘चंदा चोरी’ जैसे आरोपों से जोड़ने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल पर टिप्पणी नहीं, बल्कि ब्राह्मण समाज की धार्मिक पहचान को अपमानजनक संदर्भ में पेश करने का मामला है।

    ‘राजनीति कीजिए, लेकिन समाज का अपमान मत कीजिए’

    मनोज पांडेय ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध और वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन किसी समाज की पहचान, उसकी आस्था और धार्मिक प्रतीकों को निशाना बनाना राजनीति नहीं हो सकती।

    उन्होंने कहा कि किसी ब्राह्मण को घुटनों के बल बैठाकर दिखाना और उसके त्रिपुंड व जनेऊ को अपमानजनक आरोपों से जोड़ना किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक दल को शोभा नहीं देता। उन्होंने समाजवादी पार्टी नेतृत्व से इस पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लेने, आपत्तिजनक होर्डिंग हटाने और ब्राह्मण समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

    *सपा ब्राह्मणों की सहनशीलता की परीक्षा न ले?’

    कैबिनेट मंत्री ने सवाल उठाया कि आखिर समाजवादी पार्टी और उससे जुड़े लोग बार-बार ब्राह्मण समाज को निशाना क्यों बना रहे हैं। कभी सपा के लोग ब्राह्मणों को वेश्या कहते हैं तो कभी जाति पूछकर उन्हें अपमानित करते हैं। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज की सहनशीलता को उसकी कमजोरी समझने की भूल नहीं की जानी चाहिए।

    मनोज पांडेय ने कहा कि ब्राह्मण समाज राष्ट्र का और सनातन का ध्वजावाहक रहा है। कभी ऋषि और विद्वान के रूप में, कभी कवि और समाज सुधारक के रूप में तो कभी स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देकर ब्राह्मण समाज ने अपनी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि मंगल पांडेय से लेकर चंद्रशेखर आजाद तक देश के लिए बलिदान देने वाले अनेक नाम इस इतिहास का हिस्सा रहे हैं।

    ‘सुदामा भी, परशुराम भी और चाणक्य भी’

    मनोज पांडेय ने सख्त लहजे में कहा कि ब्राह्मण समाज को उसकी शांत और सहनशील प्रकृति के आधार पर कमजोर समझना गलत होगा। उन्होंने कहा, ब्राह्मण समाज सुदामा भी रहा है, परशुराम भी रहा है और चाणक्य भी रहा है।

    उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि किसी समाज के सम्मान और स्वाभिमान को बार-बार चुनौती दी जाएगी, तो उसका राजनीतिक जवाब भी सामने आएगा। ब्राह्मण समाज अपने सम्मान और आस्था के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ स्वीकार नहीं करेगा।

    सपा से सार्वजनिक माफी की मांग

    मंत्री मनोज पांडेय ने साफ कहा कि समाजवादी पार्टी को इस होर्डिंग के मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अगर पार्टी कार्यालय के बाहर किसी समाज की धार्मिक पहचान को अपमानजनक तरीके से पेश किया गया है, तो पार्टी नेतृत्व इससे किनारा नहीं कर सकता।

    उन्होंने कहा कि राजनीतिक लड़ाई अपनी जगह है, लेकिन समाज और उसकी आस्था का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसलिए समाजवादी पार्टी नेतृत्व को तत्काल इस होर्डिंग को हटाकर ब्राह्मण समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। 

    बता दें कि लखनऊ में सपा कार्यालय के बाहर एक होर्डिंग लगी है जिसमें ब्राह्मणों को घुटने के बल बैठा हुआ दिखाया गया है और उन्हें राम मंदिर की कथित दान चोरी से जोड़ा गया है। इसी को लेकर विवाद तेज है।

  • जो लोग खुद को नामदार मानते, वे कामगारों के बारे में कैसे सोच सकते: बृजलाल

    जो लोग खुद को नामदार मानते, वे कामगारों के बारे में कैसे सोच सकते: बृजलाल

    राहुल गांधी का चायवाला बयान दलितों का अपमान: बृजलाल 

    चाय की दुकानों पर अलग गिलास का दावा सरासर झूठ, कांग्रेस नेता ने बनाया फर्जी नैरेटिव: राज्यसभा सदस्य

    जो लोग खुद को नामदार मानते, वे कामगारों के बारे में कैसे सोच सकते: बृजलाल

    दलितों का अपमान करना कांग्रेस की खानदानी परंपरा, बृजलाल ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

    लखनऊ
     कांग्रेस नेता राहुल गांधी के चाय की दुकानों पर दलितों के लिए अलग गिलास रखे जाने वाले बयान पर राज्यसभा सदस्य ब्रजलाल ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को दलितों का अपमान बताते हुए कहा कि चाय की दुकानों पर दलितों और सवर्णों के लिए अलग-अलग गिलास रखने की बात सरासर झूठ और बे-सिर-पैर का फर्जी नैरेटिव है। आज स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए मिट्टी के कुल्हड़ और कागज के गिलास का इस्तेमाल बढ़ा है, जिन्हें एक बार प्रयोग के बाद फेंक दिया जाता है।

    राज्यसभा सदस्य बृजलाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कारीगरों और कामगार जातियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना शुरू की। कांग्रेस ने 60 वर्ष से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बावजूद इन कामगार और वंचित वर्गों के बारे में नहीं सोचा। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग खुद को नामदार मानते हैं, वे कामगारों के बारे में कैसे सोच सकते हैं।

    चाय के गिलास का बयान दलितों की गरिमा पर चोट

    बृजलाल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के चाय के गिलास वाले बयान ने दलित समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। कांग्रेस और गांधी परिवार पर दलितों के प्रति उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि ‘दलितों का अपमान करना कांग्रेस की खानदानी परंपरा रही है। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल से जुड़े कई राजनीतिक प्रसंगों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं करने का आरोप लगाया। 1946 में संविधान सभा के चुनाव में कांग्रेस ने बाबा साहब को हराने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी। 

    राहुल गांधी अपनी मोहब्बत की दुकान में जहर बेच रहे

    बृजलाल ने राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि वह अपनी मोहब्बत की दुकान में जहर बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से समाज में भ्रम और विभाजन पैदा होता है। इसलिए उन्हें को पहले देश के दलित समाज की गरिमा और वास्तविक समस्याओं को समझना चाहिए।