Category: राज्य

  • बारिश के बाद पटना में डेंगू का प्रकोप बढ़ा, कंकड़बाग समेत कई इलाके हॉटस्पॉट

    बारिश के बाद पटना में डेंगू का प्रकोप बढ़ा, कंकड़बाग समेत कई इलाके हॉटस्पॉट

    पटना 
    पटना में डेंगू के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। दस दिनों में 40 तो पांच दिनों में 18 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। 31 अगस्त तक पटना में इस साल डेंगू के कुल 167 मरीज मिल चुके हैं। अगस्त में 97 मरीज मिले हैं। जनवरी से जून तक डेंगू के 44 मरीज मिले थे। जुलाई में 26 नए मामले सामने आए थे। अगस्त में संक्रमण की रफ्तार तेज हो गई है। अगस्त में मिले मरीजों की संख्या जुलाई के मुकाबले कई गुना है। सात अगस्त तक जिले में कुल मामलों की संख्या 89 पहुंच चुकी थी।

    पटना के सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल ने बताया कि इस वर्ष अबतक 167 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सरकारी अस्पतालों और लैब के साथ-साथ निजी अस्पतालों एवं पैथोलॉजी लैब में जांच के दौरान भी मरीजों की पहचान हुई है। उन्होंने बताया कि नगर निगम के सहयोग से प्रभावित इलाकों में फॉगिंग और एंटी-लार्वा अभियान चलाया जा रहा है। डेंगू मरीज मिलने पर उसके आसपास के क्षेत्रों में मच्छरों के प्रजनन स्रोतों की जांच और लार्वीसाइडल छिड़काव की कार्रवाई भी की जानी है।

    ये अंचल और मोहल्ले हॉटस्पॉट
    बांकीपुर और पाटलिपुत्र अंचल में डेंगू के मरीज अधिक पाए गये हैं। इसमें कंकड़बाग, हनुमान नगर, पत्रकार नगर, अशोक नगर, पाटलिपुत्र, पोस्टल पार्क, अजीमाबाद, योगीपुर, जक्कनपुर जैसे घनी आबादी वाले इलाके शामिल है। इन इलाकों में संक्रमण बढ़ने के प्रमुख कारण बारिश के बाद जलजमाव, खाली प्लॉटों और निर्माण स्थलों पर जमा पानी, नालियों की समस्या तथा घरों के आसपास छोटे-छोटे जलस्रोत माने जा रहे हैं।

    रुकनपुरा में आज कटी रहेगी बिजली
    रुकनपुरा में सड़क किनारे दो विशाल पेड़ काटे जाएंगे। इसे देखते हुए काटेगा। इसे देखते हुए मंगलवार की रात 11 बजे से 1 बजे तक रुकनपुरा क्षेत्र, बीकानेर स्वीट्स और मुशहरी के आसपास बिजली आपूर्ति बंद रहेगी। सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक लोटस अपार्टमेंट, पाटलिपुत्र, इमारत अपार्टमेंट, विकास विहार की बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी।

    सुबह 7 बजे से 9 बजे तक ईस्ट बोरिंग कैनाल रोड, सुर सुधा लेन और रामसूचित मिश्रा पथ की आपूर्ति प्रभावित रहेगी। सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे तक आईओबी नगर, सर्वोयोनि सिटी, सरारी, शिवाला, भगवतीपुर में बिजली बाधित रहेगी।

  • 2.55 करोड़ की लागत से हुआ तैयार, 237 वाहन रखने की क्षमता, जल्द मिलेगा हेंडओवर

    2.55 करोड़ की लागत से हुआ तैयार, 237 वाहन रखने की क्षमता, जल्द मिलेगा हेंडओवर

    लखनऊ

    राजधानी में जब्त वाहनों को रखने की वर्षों पुरानी समस्या का अब जल्द समाधान हो जाएगा। परिवहन विभाग के लिए अहिमामऊ में तैयार किया गया डिटेंशन/डम्पिंग यार्ड निर्माण का काम पूरा हो चुका है और अब तकनीकी समिति के निरीक्षण के बाद इसे परिवहन विभाग को हस्तांतरित किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। करीब 2.55 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस यार्ड में एक साथ 136 हल्के वाहन, 15 भारी वाहन और 86 दोपहिया वाहन, यानी कुल 237 वाहन खड़े किए जा सकेंगे। विभाग ने इसे योगी सरकार के सड़क सुरक्षा से जुड़े विजन की ओर अच्छा व बड़ा कदम बताया है।

    अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) केडी सिंह गौर ने बताया कि यह व्यवस्था लखनऊ में परिवहन विभाग और प्रवर्तन टीमों की कार्रवाई के बाद जब्त या निरुद्ध होने वाले वाहनों को व्यवस्थित तरीके से रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अभी पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं होने के कारण कई बार कार्रवाई के बाद वाहनों को थानों व उपलब्ध खुले स्थानों में खड़ा करना पड़ता है। इससे थानों में जगह की समस्या के साथ-साथ सड़क किनारे या अन्य खुले स्थानों पर यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है।

    अहिमामऊ में मिली 83 हजार स्क्वायर फीट से अधिक भूमि

    उत्तर प्रदेश परिवहन आयुक्त उत्तर के निर्देश पर लखनऊ में डिटेंशन यार्ड के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके बाद नगर आयुक्त लखनऊ से जमीन उपलब्ध कराने के लिए कहा गया। नगर निगम की ओर से ग्राम अहिमामऊ में 0.780 हेक्टेयर (83,958 स्क्वायर फीट) भूमि परिवहन विभाग द्वारा निरुद्ध वाहनों की पार्किंग के लिए अस्थायी रूप से उपलब्ध कराई गई।

    2.55 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ यार्ड

    इसके बाद परिवहन आयुक्त के निर्देश पर मुख्य भवन, गार्ड रूम और बाउंड्रीवाल आदि के निर्माण के लिए 2.55 करोड़ रुपये से अधिक स्वीकृत किए गए। 21 अगस्त 2026 को संबंधित कार्यदायी संस्था ने बताया कि डिटेंशन यार्ड/डम्पिंग यार्ड से संबंधित सभी निर्माण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। अब कार्य पूर्ण होने के बाद इसे परिवहन विभाग को हस्तांतरित किया जाना है। हस्तांतरण से पहले तकनीकी समिति द्वारा यार्ड का निरीक्षण किया जाएगा। इस समिति में लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, सिंचाई विभाग आदि के अभियंताओं को शामिल किया गया है। समिति स्थल का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देगी, जिसके बाद हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

    अब तक 5628 वाहनों का चालान, 491 निरुद्ध

    आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2026-27 में लखनऊ के प्रवर्तन दलों ने कुल 5,628 वाहनों का चालान किया है, जबकि 491 वाहनों को निरुद्ध किया गया। हालांकि वर्तमान में प्रवर्तन अधिकारियों के पास वाहनों को निरुद्ध करने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है। कई बार थानों में भी जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण वाहनों को निरुद्ध नहीं किया जा पाता और चालान करके वाहन छोड़ना पड़ता है।

    यह समस्या नए डम्पिंग यार्ड के संचालन के बाद काफी हद तक दूर हो जाएगी। निर्धारित यार्ड उपलब्ध होने से कार्रवाई के बाद वाहनों को आसानी से निरुद्ध किया जा सकेगा। साथ ही वाहनों को निर्धारित परिसर में सुरक्षित रूप से रखा जा सकेगा।

    पी-4 पार्किंग और कल्ली यार्ड से भी होगी व्यवस्था बेहतर

    फिलहाल पी-4 पार्किंग और कल्ली यार्ड पीजीआई में वाहन खड़े किए जाते हैं। नए अहिमामऊ डम्पिंग यार्ड के उपलब्ध होने से इन स्थानों पर खड़े वाहनों को भी आवश्यकता के अनुसार नए यार्ड में शिफ्ट किया जा सकेगा। इससे अलग-अलग स्थानों पर जब्त वाहनों के बिखरे रहने की समस्या कम होगी और वाहनों के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था विकसित होगी।

    शहर की यातायात व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी

    नया डिटेंशन यार्ड सिर्फ परिवहन विभाग के लिए पार्किंग सुविधा नहीं है, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जब्त या निरुद्ध वाहन लंबे समय तक थानों के आस-पास खड़े रहने से पुलिस परिसरों में जगह घिरती है। कई स्थानों पर ऐसे वाहनों की वजह से अव्यवस्था भी पैदा होती है। अहिमामऊ यार्ड के संचालन के बाद कार्रवाई के बाद वाहनों को निर्धारित परिसर में भेजना संभव होगा। इससे थानों पर दबाव कम होगा, खुले स्थानों में वाहनों के जमावड़े में कमी आएगी और सड़क किनारे वाहनों के खड़े रहने से होने वाली यातायात संबंधी परेशानी कम होगी।

    केडी सिंह गौर ने बताया कि सड़क सुरक्षा प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में है। यह विभागीय कार्रवाई के साथ आम जनता के लिए जाम जैसी समस्या से बड़ी राहत प्रदान करने की योजना है। ऐसे में लखनऊ समेत कई जिलों में डंपिग यार्ड का निर्माण तेजी से जारी है। लखनऊ के डपिंग यार्ड-डिटेंसन सेंटर का इस्तेमाल जल्द ही शुरू कराया जाएगा।

  • बच्चों के लिए बड़ी खबर! पंजाब के 3 जिलों में वीरवार को स्कूल बंद रखने का ऐलान

    बच्चों के लिए बड़ी खबर! पंजाब के 3 जिलों में वीरवार को स्कूल बंद रखने का ऐलान

    बठिंडा.

    पंजाब में वीरवार को स्कूलों में छुट्टी की खबर सामने आई है। 3 जिलों बठिंडा, मानसा और बरनाला के सभी प्राइवेट स्कूल 3 सितंबर को बंद रहेंगे। दरअसल, पंजाब भर के प्राइवेट स्कूल और कॉलेज के बस ऑपरेटरों ने 3 सितंबर को बठिंडा में राज्य स्तरीय महापंचायत करने का ऐलान किया है। इसमें सभी जिलों के प्राइवेट स्कूल बस ड्राइवर, कंडक्टर और बस मालिक हिस्सा लेंगे।

    इसलिए, इस फैसले से स्कूलों की ट्रांसपोर्ट सर्विस पर काफी असर पड़ सकता है, जिसके चलते निजी स्कूल बंद रखे जाएंगे। ये फैसला फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स एंड एसोसिएशन ऑफ पंजाब (FAP) द्वारा स्कूल बस औ र वैन आप्रेटरों की महापंचायत को लेकर  लिया है। इस संबंधी जानकारी देते हुए फेडरेशन अध्यक्ष जगीत सिंह धूर ने बताया कि, स्कूल बसों और वैनों के लिए प्रशासन द्वारा लागू किए गए नियमों के खिलाफ बस आप्रटेरों द्वारा 3 सितंबर को बठिंडा से राज्य स्तरीय महापंचायत की जा रही है।

    इस बारे में जानकारी देते हुए पंजाब स्कूल और कॉलेज प्राइवेट बस ट्रांसपोर्ट यूनियन के प्रेसिडेंट गुरप्रीत सिंह सरां ने कहा कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर 3 सितंबर को बठिंडा की अनाज मंडी में महापंचायत रैली रखी है, जिसमें पूरे पंजाब के सभी ड्राइवर, कंडक्टर और बस मालिक हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि सरकारों ने लंबे समय से मांगों को नजरअंदाज किया है। कोई ट्रांसपोर्ट अधिकारी या कोई मंत्री हमें समय नहीं दे रहा है, जबकि लाखों परिवार हमसे जुड़े हैं, क्योंकि हम उन बच्चों को स्कूलों तक पहुंचाते हैं जिनके माता-पिता हम पर भरोसा करते हैं। हजारों ड्राइवर और कंडक्टर हमसे जुड़े हैं और हमें ही सरकारों ने दरकिनार कर दिया है। उन्होंने कहा कि जो ट्रांसपोर्ट पॉलिसी बड़ी बसों के लिए है, वही पॉलिसी हमारे लिए (छोटी बसों के लिए) है।

    लेकिन हमारी बसें 50 km चलती हैं और दूसरी बसें 500-500 km चलती हैं। हमारे लिए अलग पॉलिसी बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ट्रांसपोर्ट पॉलिसी बदलने, सड़कों पर RTO को परेशान करने, भारी टैक्स कम करने, उम्र 15 साल से बढ़ाकर 25 साल करने, टैक्स में छूट देने जैसी हमारी मांगें नहीं मानती है, तो आने वाले दिनों में यह संघर्ष जिला लेवल से शुरू होगा। उन्होंने कहा कि हम सरकार से रिक्वेस्ट करते हैं कि हमसे बात करके हमारी मांगें पूरी करें।

  • लगातार बारिश से झारखंड में जलजमाव, सोन नदी का बढ़ा जलस्तर, ग्रामीणों को चेतावनी

    लगातार बारिश से झारखंड में जलजमाव, सोन नदी का बढ़ा जलस्तर, ग्रामीणों को चेतावनी

    रांची 
    झारखंड में मानसून की सक्रियता के बीच सोमवार सुबह से राजधानी रांची में रुक-रुक कर हो रही बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश के कारण नदियों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कहीं घरों में पानी घुस गया है तो कहीं पुल-पुलियों के ऊपर से पानी का तेज बहाव देखने को मिल रहा है। प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    लगातार बारिश से जलजमाव
    मेदिनीनगर समेत पूरे पलामू में सोमवार से रिमझिम बारिश जारी है। कई सड़कों पर जलजमाव से आम लोगों की परेशानी बढ़ी है।

    ग्रामीण सड़कों पर बढ़ा दबाव
    कई प्रखंडों में ग्रामीण सड़क और पुलिया पर पानी का दबाव बढ़ गया है। आवागमन प्रभावित होने की आशंका है।

    सोन नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा
    अपस्ट्रीम के बराज और जलाशयों से करीब 2 लाख क्यूसेक अतिरिक्त पानी सोन नदी में पहुंचने के बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है।

    हुसैनाबाद में प्रशासन का अलर्ट
    नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों को प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने सतर्क रहने की सलाह दी है।

    कई गांवों में कटाव जारी
    सोनपुरवा, देवरी खुर्द, देवरी कला, बुधुआ, बड़ेपुर और दंगवार समेत कई गांवों में सोन नदी के किनारे कटाव जारी है।

    तटबंध निर्माण की मांग
    कटाव से परेशान ग्रामीण लंबे समय से तटबंध निर्माण की मांग कर रहे हैं। ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।

    नदी के बीच खेती करने वालों को सलाह
    सोन नदी के बालू के टीलों पर किसान परवल, खीरा समेत मौसमी सब्जियों की खेती करते हैं। कुछ लोग मवेशी भी रखते हैं।

    सुरक्षित स्थानों पर लौटने की अपील
    जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नदी के बीच और किनारे रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर लौटने की सलाह दी है।

    मलय डैम पर भी बढ़ा पानी
    सतबरवा में मलय डैम का स्पीलवे मंगलवार सुबह ओवरफ्लो के करीब पहुंच गया।

    कोयल नदी में बाढ़ की स्थिति
    लगातार बारिश के कारण कोयल नदी में भी बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

  • व्हाट्सएप पर बॉस बनकर लाखों की ठगी, राजस्थान पुलिस ने बताए बचने के तरीके

    व्हाट्सएप पर बॉस बनकर लाखों की ठगी, राजस्थान पुलिस ने बताए बचने के तरीके

    जयपुर 
    राजस्थान में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक खतरनाक और नया तरीका ढूंढ निकाला है, जिसे साइबर सुरक्षा की भाषा में 'बॉस स्कैम' (Boss Scam) कहा जा रहा है। राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार शर्मा के कड़े निर्देशों के बाद राज्य की साइबर क्राइम शाखा ने प्रदेश भर के प्राइवेट कंपनियों, कॉर्पोरेट दफ्तरों में काम करने वाले मैनेजर्स, अकाउंटेंट्स और अन्य कर्मचारियों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल कर कंपनी के वास्तविक मालिक, एमडी या सीनियर अफसर का रूप धारण कर व्हाट्सएप, ईमेल या एसएमएस के जरिए कर्मचारियों से संपर्क साधते हैं और अर्जेंट वित्तीय लेन-देन या गोपनीय डेटा साझा करने का दबाव बनाकर लाखों रुपये की चपत लगा रहे हैं।

    राजस्थान के कॉर्पोरेट और बिजनेस सेक्टर में तेजी से पैर पसार रहे इस नए साइबर फ्रॉड को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है।

    फर्जी आईडी- असली नाम, ऐसे बनाते हैं शिकार
    अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (ADG) साइबर क्राइम वी.के. सिंह ने बताया कि यह गिरोह बहुत ही योजनाबद्ध तरीके से काम करता है। ठग सबसे पहले किसी लक्षित कंपनी, उसके वरिष्ठ अधिकारियों के सोशल मीडिया प्रोफाइल, उनके आधिकारिक ईमेल पैटर्न और जारी प्रोजेक्ट्स के बारे में पूरी रिसर्च करते हैं।

    इसके बाद कर्मचारी के मोबाइल या ईमेल पर कंपनी के बॉस का नाम और फोटो लगाकर मैसेज भेजा जाता है। मैसेज में लिखा होता है कि बॉस एक बेहद जरूरी गुप्त मीटिंग में व्यस्त हैं, इसलिए तुरंत किसी नए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर की जाए या अर्जेंट गिफ्ट कार्ड खरीदे जाएं। कर्मचारी अपने बॉस का नाम, पद और असली प्रोजेक्ट का जिक्र देखकर झांसे में आ जाता है और बिना वेरिफिकेशन किए पैसे भेज देता है।

    वेब हाईजैक और ट्रोजन हॉर्स मालवेयर का इस्तेमाल
    एडीजी वी.के. सिंह ने साइबर ठगों की हाईटेक कार्यप्रणाली का खुलासा करते हुए बताया कि अपराधी दफ्तरों के कंप्यूटर और लैपटॉप में ट्रोजन हॉर्स मालवेयर भेजकर सिस्टम का एक्सेस हासिल करने की कोशिश करते हैं।

    यदि सिस्टम में व्हाट्सएप वेब लॉग-इन है, तो अपराधी क्यूआर कोड हाईजैक करके सीधे कर्मचारी के व्हाट्सएप तक पहुंच बना लेते हैं। इसके बाद नकली बॉस की डीपी लगाकर अर्जेंट पेमेंट का मैसेज भेजा जाता है। इस ठगी की रकम को फर्जी म्यूल अकाउंट्स, क्रिप्टोकरेंसी या तुरंत कैश निकालकर एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

    'बॉस स्कैम' को पहचानने के 7 मुख्य संकेत
    राजस्थान पुलिस की साइबर शाखा ने आमजन और कर्मचारियों को सतर्क रहने के लिए कुछ बेहद महत्वपूर्ण लक्षण साझा किए हैं:

    ईमेल एड्रेस के स्पेलिंग या डोमेन नेम में अचानक या मामूली बदलाव होना।

    दफ्तर का समय समाप्त होने के बाद देर रात या असामान्य समय पर अचानक संदेश आना।

    बिना किसी पूर्व सूचना के अत्यधिक अर्जेंट या गोपनीय वित्तीय ट्रांसफर करने का दबाव।

    किसी अनजान या नए बैंक खाते में तुरंत धनराशि भेजने का निर्देश मिलना।

    सामने वाले व्यक्ति द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर बात करने से बार-बार बचना।

    मैसेज या ईमेल की भाषा और व्याकरण में अजीब गलतियां होना।

    व्हाट्सएप, एसएमएस या पर्सनल ईमेल पर असामान्य वित्तीय निर्देश मिलना।

    क्या करें और क्या न करें?
    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल व्हाट्सएप मैसेज या ईमेल देखकर किसी भी अनजान खाते में भुगतान न करें। जब भी कंपनी के बॉस या वरिष्ठ अधिकारी के नाम से ऐसा कोई मैसेज आए, तो तुरंत उनके व्यक्तिगत या आधिकारिक फोन नंबर पर सीधे कॉल करके पुष्टि करें।

    कंपनियों को अपने सिस्टम में सुरक्षा के कड़े नियम लागू करने चाहिए:

    बड़े भुगतान या असामान्य वित्तीय लेन-देन के लिए मल्टीलेवल अप्रूवल (Multilevel Approval) सिस्टम लागू करें।

    व्हाट्सएप वेब और लिंक्ड डिवाइसेज (Linked Devices) को काम खत्म होते ही तुरंत लॉगआउट करें।

    व्हाट्सएप में टू-फैक्टर वेरिफिकेशन (Two-Factor Verification) हमेशा एक्टिव रखें।

    सिस्टम में एंटीवायरस और सुरक्षा सॉफ्टवेयर नियमित रूप से अपडेट रखें।

    साइबर फ्रॉड होते ही तुरंत 1930 पर करें शिकायत
    राजस्थान पुलिस ने अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति या कर्मचारी इस प्रकार की ठगी का शिकार हो जाता है, तो बिना समय गंवाए तुरंत कार्रवाई करें:

    वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।

    राजस्थान पुलिस साइबर हेल्पडेस्क के नंबरों 9256001930 और 9257510100 पर तुरंत सूचित करें।

    आधिकारिक शिकायत के लिए National Cyber Crime Reporting Portal पर विजिट करें।

    राजस्थान पुलिस के आधिकारिक अपडेट्स के लिए Rajasthan Police Portal का अवलोकन करें।

  • 177 KM का नया हाईवे, टोल से राहत; हरियाणा में बदलेगी सफर की तस्वीर

    177 KM का नया हाईवे, टोल से राहत; हरियाणा में बदलेगी सफर की तस्वीर

    अंबाला.

    साल 2027 में हरियाणा के लोगों को एक नई सौगात मिलेगी। अंबाला से शामली तक छह लाइन का हाइवे बनाया जा रहा है। इसका काम तकरीबन 70 फीसदी पूरा भी हो चुका है। इस राजमार्ग से बन जाने से पश्चिमी यूपी का सफर आसान हो जाएगा। वहीं, इस रूट का फायदा हरियाणावासियों को भी खूब मिलेगा। हरियाणा से वेस्ट यूपी तक बन रहा यह हाइवे मार्च, 2027 तक पूरा हो जाएगा।

    4900 करोड़ की लागत से हो रहा निर्माण
    हरियाणा के अंबाला से लेकर उत्तर प्रदेश के बीच बन रहा 122 किलोमीटर लंबा यह हाइवे की लागत 4800 करोड़ रुपये है। जिसके पूरा होने का लक्ष्य मार्च, 2027 रखा है। इस हाइवे को भारतमाला परियोजना के तहत किया जा रहा है। यह साल 2024 में शुरू हुआ था।

    हरियाणा के किन जिलों को फायदा?
    करनाल
    पानीपत
    कुरुक्षेत्र
    यमुनानगर
    अंबाला
    कैथल
    जींद
    रोहतक

    कहां से लेकर कहां तक बना रहा यह हाईवे?
    इस हाइवे का निर्माण अंबाला से शामली के बीच हो रहा है। इस बीच यह छह जिलों से होकर गुजरेगा। हरियाणा के अंबाला के अंतर्गत सोदापुर गांव से इसकी शुरुआत होगी। इसके बाद कुरुक्षेत्र, करनाल और यमुनानगर से होते हुए यह यूपी के सहारनपुर से होकर शामली को जोड़ेगा। खास बात है कि इस पूरे हाइवे पर कोई टोल प्लाजा नहीं होगा। 

    हाइवे से जुड़ी खास बातें…
    हाइवे पर कई स्थानों पर दिल्ली-देहरादून इकोनामिक काॉरिडोर की तर्ज पर रेस्ट एरिया बनाया जाएगा।
    पेट्रोल, सीएनजी पंप, रेस्टोरेंट और शौचालय आदि की सुविधा सुलभ कराई जाएगी।  NHAI बागपत डिवीजन द्वारा शामली से सहारनपुर तक 45 किमी हाइवे का निर्माण कराया जा रहा है। इस हाइवे का 77 किमी का दरमियां अंबाला डिवीजन के अंतर्गत आता है। हाइवे का लगभग 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। मार्च-2027 तक निर्माण कार्य पूरा करा लिया जाएगा।

  • नेशनल हाईवे पर किसान आंदोलन का असर, पांच राज्यों तक ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित

    नेशनल हाईवे पर किसान आंदोलन का असर, पांच राज्यों तक ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित

    मोहाली.

    खेती की मोटरों के लिए पर्याप्त बिजली न मिलने से नाराज पंजाब के किसानों ने मंगलवार को लालडू में अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर जाम लगाया। इससे पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ समेत हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के वाहन चालकों को परेशानी हुई।

    किसानों ने भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के नेतृत्व में पावरकाम के एक्सईएन कार्यालय लालड़ू के बाहर धरना दिया। प्रदर्शन की अगुआई संगठन के जिला प्रधान लखविंदर सिंह हैप्पी मलकपुर ने की। किसानों ने पंजाब सरकार और पावरकाॅम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग उठाई। आरोप था कि खेती की मोटरों को जरूरत के मुताबिक बिजली नहीं मिलने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    धरने के दौरान एक्सईएन की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर किसानों का रोष बढ़ गया और उन्होंने अंबाला-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा दिया। इससे मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। करीब एक घंटे तक चले जाम के बाद पुलिस प्रशासन और पावरकाम अधिकारियों ने किसान नेताओं के साथ बैठक की। बातचीत के दौरान पावरकाॅम अधिकारियों ने किसानों को लिखित आश्वासन दिया कि आगे से खेती की मोटरों के लिए 20 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। लिखित आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग से जाम हटा लिया और धरना समाप्त करने की घोषणा कर दी।

  • 40 अधिकारियों का हुआ चयन, 21 विभिन्न आईआईटी से शिक्षित, 8 महिला अधिकारी भी शामिल

    40 अधिकारियों का हुआ चयन, 21 विभिन्न आईआईटी से शिक्षित, 8 महिला अधिकारी भी शामिल

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में समूह ‘ख’ के अधिकारियों की नियमित भर्ती पूरी होने के बाद नवचयनित 40 अधिकारियों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की। मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि लंबे अंतराल के बाद हुई इस भर्ती से बोर्ड की कार्यक्षमता मजबूत होगी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सरकारी सेवाओं में ऐसी चयन व्यवस्था को मजबूत करना है, जिसमें पारदर्शिता के साथ योग्यता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में लागू की गई नई भर्ती प्रक्रिया इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जिम्मेदारी सीधे प्रदेश के पर्यावरण और लोगों के स्वस्थ जीवन से जुड़ी है। ऐसे में नवचयनित अधिकारी अपनी तकनीकी दक्षता का इस्तेमाल पूरी जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ करें। उन्होंने अधिकारियों को प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने और विभागीय कार्यप्रणाली के साथ मैदानी स्तर की चुनौतियों को समझने के निर्देश दिए। 

    प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में समूह ‘ख’ के 26 सहायक पर्यावरण अभियंता और 14 सहायक वैज्ञानिक अधिकारी, कुल 40 अधिकारियों का चयन किया गया है। चयनित अधिकारियों में 21 विभिन्न आईआईटी से शिक्षित हैं, जबकि अन्य अधिकारियों ने देश और प्रदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है। चयनित अधिकारियों में 8 महिलाएं भी शामिल हैं।

    इस भर्ती की खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री के निर्देश और सिद्धांतों के अनुरूप चयन प्रक्रिया में बदलाव किया गया। पहले बोर्ड में समूह ‘ख’ के अधिकारियों की भर्ती मुख्य रूप से केवल साक्षात्कार के आधार पर की जाती थी। पुरानी विनियमावली, 1995 में संशोधन कर चयन प्रक्रिया को लिखित परीक्षा और साक्षात्कार आधारित द्विस्तरीय व्यवस्था में बदला गया। नई व्यवस्था में लिखित परीक्षा को 85 प्रतिशत और साक्षात्कार को 15 प्रतिशत अंक का वेटेज दिया गया। इससे चयन में शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता को प्रमुख आधार बनाया गया।

    संशोधित विनियमावली के बाद 27 फरवरी, 2026 को 26 सहायक पर्यावरण अभियंता और 14 सहायक वैज्ञानिक अधिकारी पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया। 27 अप्रैल को प्रदेश के विभिन्न शहरों में एक साथ लिखित परीक्षा आयोजित हुई, जिसका आयोजन आईआईटी कानपुर के माध्यम से कराया गया। लिखित परीक्षा का परिणाम 8 जून को घोषित किया गया। इसके बाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में चार साक्षात्कार पैनल गठित किए गए । पैनल में विभिन्न आईआईटी और विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया। 4 जुलाई को साक्षात्कार पूरा हुआ और 8 जुलाई को अंतिम परिणाम घोषित किया गया।

    इस बार नवचयनित अधिकारियों को सीधे क्षेत्र में तैनाती देने के बजाय प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार अधिकारियों के लिए एक माह का प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण के तहत एक सप्ताह का कार्यक्रम आईआईएम, लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि तकनीकी रूप से दक्ष अधिकारियों की नियमित भर्ती और उन्हें प्रशिक्षण देने से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी, पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन और मैदानी कार्यों की प्रभावशीलता में सुधार होगा।

  • 4800 करोड़ से बन रहा अंबाला-शामली हाईवे, टोल फ्री सफर की मिलेगी सुविधा

    4800 करोड़ से बन रहा अंबाला-शामली हाईवे, टोल फ्री सफर की मिलेगी सुविधा

    अंबाला
     साल 2027 में हरियाणा के लोगों को एक नई सौगात मिलेगी। अंबाला से शामली तक छह लाइन का हाइवे बनाया जा रहा है।

    इसका काम तकरीबन 70 फीसदी पूरा भी हो चुका है। इस राजमार्ग से बन जाने से पश्चिमी यूपी का सफर आसान हो जाएगा। वहीं, इस रूट का फायदा हरियाणावासियों को भी खूब मिलेगा। हरियाणा से वेस्ट यूपी तक बन रहा यह हाइवे मार्च, 2027 तक पूरा हो जाएगा।
    4900 करोड़ की लागत से हो रहा निर्माण

    हरियाणा के अंबाला से लेकर उत्तर प्रदेश के बीच बन रहा 122 किलोमीटर लंबा यह हाइवे की लागत 4800 करोड़ रुपये है। जिसके पूरा होने का लक्ष्य मार्च, 2027 रखा है। इस हाइवे को भारतमाला परियोजना के तहत किया जा रहा है। यह साल 2024 में शुरू हुआ था।

    हरियाणा के किन जिलों को फायदा?
        करनाल
        पानीपत
        कुरुक्षेत्र
        यमुनानगर
        अंबाला
        कैथल
        जींद
        रोहतक

    कहां से लेकर कहां तक बना रहा यह हाईवे?
    इस हाइवे का निर्माण अंबाला से शामली के बीच हो रहा है। इस बीच यह छह जिलों से होकर गुजरेगा। हरियाणा के अंबाला के अंतर्गत सोदापुर गांव से इसकी शुरुआत होगी।

    इसके बाद कुरुक्षेत्र, करनाल और यमुनानगर से होते हुए यह यूपी के सहारनपुर से होकर शामली को जोड़ेगा। खास बात है कि इस पूरे हाइवे पर कोई टोल प्लाजा नहीं होगा। 

    हाइवे से जुड़ी खास बातें…
        हाइवे पर कई स्थानों पर दिल्ली-देहरादून इकोनामिक काॉरिडोर की तर्ज पर रेस्ट एरिया बनाया जाएगा।
        पेट्रोल, सीएनजी पंप, रेस्टोरेंट और शौचालय आदि की सुविधा सुलभ कराई जाएगी। 
        NHAI बागपत डिवीजन द्वारा शामली से सहारनपुर तक 45 किमी हाइवे का निर्माण कराया जा रहा है।
        इस हाइवे का 77 किमी का दरमियां अंबाला डिवीजन के अंतर्गत आता है।
        हाइवे का लगभग 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
        मार्च-2027 तक निर्माण कार्य पूरा करा लिया जाएगा।

  • SIR के बाद झारखंड में वोटर लिस्ट पर बड़ा एक्शन, 27 हजार नाम हटाए गए

    SIR के बाद झारखंड में वोटर लिस्ट पर बड़ा एक्शन, 27 हजार नाम हटाए गए

    रांची 
    झारखंड में एसआईआर को लेकर मैपिंग का काम खत्म होने के बाद प्रारूप वोटर लिस्ट का प्रकाशन किया गया। प्रारूप मतदाता सूची में शामिल 16,52,203 वोटरों में से 4,45,901 वोटरों के नाम, उम्र, पिता के नाम समेत अन्य तरह की विसंगतियां पाई गई हैं। अब इन वोटरों को जिला निर्वाचन विभाग की ओर से नोटिस भेजा जा रहा है। जिन वोटरों को नोटिस भेजा जा रहा है, वह इन गलतियों को सुधारने के लिए दस्तावेज लेकर सुनवाई में शामिल होंगे। आइए जानते हैं चुनाव आयोग ने क्या कहा है।

    जिला निर्वाचन विभाग ने जिले के 50 अधिकारियों को सुनवाई के काम में लगाया है। नगर निगम, जिला प्रशासन से लेकर लगभग सभी सरकारी विभाग के अधिकारी और कर्मी एसआईआर की सुनवाई में लगे हुए हैं। चार-पांच बूथों को मिलाकर एक जगह केंद्र बनाया गया है, वहीं अधिकारी बैठकर सुनवाई कर रहे हैं। लोग वोटर लिस्ट में हुई गलतियों को सुधारने के लिए पहुंच रहे हैं। सबसे अधिक गलती नाम की स्पेलिंग को लेकर है। इससे संबंधित मैट्रिक का प्रमाणपत्र देकर नाम सुधारा जा रहा है। जिनके पास नोटिस पहुंच रहा है, सिर्फ उन्हें अपने दस्तावेज लेकर सुनवाई में शामिल होना है।
    नो मैपिंग की श्रेणी में आनेवाले वोटरों को नोटिस

    भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार वैसे मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है, जो मतदाता सूची की मैपिंग प्रक्रिया में नो-मैपिंग की श्रेणी में पाए गए हैं अथवा जिनकी मतदाता सूची में दर्ज प्रविष्टियों में किसी प्रकार की विसंगति पाई गई है। सुनवाई का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के दावों का नियमानुसार सत्यापन करते हुए मतदाता सूची की शुद्धता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। सुनवाई के दौरान संबंधित मतदाताओं को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित 12 मान्य दस्तावेजों में से किसी एक दस्तावेज के माध्यम से अपनी पात्रता प्रमाणित करने का अवसर दिया जा रहा है। दस्तावेजों के परीक्षण एवं आवश्यक सत्यापन के उपरांत पात्र मतदाताओं के नाम एवं विवरण को नियमानुसार मतदाता सूची में सुरक्षित एवं अद्यतन रखने की कार्रवाई की जा रही है।
    गोविंदपुर में 27 हजार वाटरों के नाम हटाए

    गोविंदपुर। गोविंदपुर प्रखंड में 27,301 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे कुल वोटरों की संख्या 2,32,993 से घटकर 2,05,693 रह गई है। 38,954 मतदाताओं के नाम विसंगति सूची में डाले गए हैं। बीडीओ जहीर आलम और सीओ यशवंत कुमार सिन्हा ने बताया कि मृत, स्थायी रूप से शिफ्ट, दोहरी प्रविष्टि वाले या नोटिस पर हस्ताक्षर न करने वाले मतदाताओं के नाम जांच के बाद हटाए गए हैं।