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  • GeM में यूपी का शानदार प्रदर्शन, तीन राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने पर CM योगी ने दी बधाई

    GeM में यूपी का शानदार प्रदर्शन, तीन राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने पर CM योगी ने दी बधाई

    जेम पर यूपी की उपलब्धि को सीएम योगी ने सराहा, तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर दी बधाई

    शासकीय खरीद में पारदर्शिता और समावेशिता के लिए प्रदेश को मिला राष्ट्रीय सम्मान

    जेम पर अब तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक की प्रदेश सरकार की खरीद, एमएसई की भागीदारी ₹55,972 करोड़ से अधिक

    चालू वित्तीय वर्ष में सरकारी खरीद में एमएसई की हिस्सेदारी बढ़कर 59 प्रतिशत, यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी 86 प्रतिशत

    महिला उद्यमियों, एससी/एसटी उद्यमों और स्टार्टअप्स की भी जेम पर बढ़ी भागीदारी

    लखनऊ, 
     गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) के माध्यम से शासकीय खरीद में पारदर्शिता एवं समावेशिता सुनिश्चित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश को मिली राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सराहना की है। प्रदेश को जेम पर श्रेष्ठ योगदान के लिए तीन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। मंगलवार को एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी, प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल एवं स्टेट जेम नोडल एवं डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने मुख्यमंत्री से भेंट कर उन्हें इस उपलब्धि के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

    उल्लेखनीय है कि जेम के माध्यम से प्रदेश सरकार ने प्रारंभ से अब तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक की शासकीय खरीद की है। इसमें ₹55,972 करोड़ से अधिक की खरीद एमएसई से हुई है। इस प्रकार कुल शासकीय खरीद में एमएसई की भागीदारी 55 प्रतिशत से अधिक रही है। मुख्यमंत्री ने जेम के माध्यम से सरकारी खरीद में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ छोटे उद्यमों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की।

    तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों से यूपी का सम्मान
    जेम पर उत्तर प्रदेश की उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। विगत दिनों नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित जेम के 10वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश को सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए तीन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया। उत्तर प्रदेश को मिले पुरस्कारों में, जेम ओवरऑल एक्सीलेंस अवार्ड, हाईएस्ट जेम प्रोक्योरमेंट वैल्यू और बेस्ट आउटरीच बिल्डिंग अवार्ड शामिल हैं। इन पुरस्कारों को एमएसएमई के प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील ने प्राप्त किया।

    चार साल में 43 से बढ़कर 59 प्रतिशत हुई एमएसई की हिस्सेदारी
    वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई तक जेम के माध्यम से प्रदेश की कुल ₹7,235 करोड़ की शासकीय खरीद हुई। इसमें एमएसई (पैन इंडिया) से ₹4,253 करोड़, यानी 59 प्रतिशत की खरीद की गई, जिसमें उत्तर प्रदेश के अपने उद्यमों की हिस्सेदारी 86 प्रतिशत, यानी ₹3,646 करोड़ रही। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल ₹22,337 करोड़ की जेम खरीद में एमएसई (पैन इंडिया) से ₹12,181 करोड़ यानी 55 प्रतिशत की खरीद हुई थी, जिसमें यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी 82 प्रतिशत यानी ₹9,976 करोड़ रही। 

    वर्ष 2024-25 में ₹16,830 करोड़ की कुल जेम खरीद में एमएसई का योगदान ₹8,952 करोड़ यानी 53 प्रतिशत था, जिसमें यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत यानी ₹7,264 करोड़ रही। इसी तरह 2023-24 में कुल ₹20,248 करोड़ की जेम खरीद में एमएसई से ₹8,771 करोड़ यानी 43 प्रतिशत की खरीद हुई थी, जिसमें यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत यानी ₹6,680 करोड़ थी। इस तरह चार वर्षों में जेम पर कुल सरकारी खरीद में एमएसई की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत से बढ़कर 59 प्रतिशत हो गई है। एमएसई से हुई इस खरीद में प्रदेश के अपने उद्यमों की हिस्सेदारी भी 76 प्रतिशत से बढ़कर 86 प्रतिशत पहुंच गई है।

    महिला, एससी/एसटी उद्यमियों और स्टार्टअप्स को मिला अवसर
    जेम ने उत्तर प्रदेश के छोटे उद्यमियों को प्रदेश की सीमाओं से बाहर देशभर के सरकारी खरीदारों तक पहुंच उपलब्ध कराई है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई तक प्रदेश के एमएसई को जेम के माध्यम से ₹16,953 करोड़ का कुल कारोबार मिला। इसमें महिला उद्यमियों को ₹2,202 करोड़, एससी/एसटी उद्यमियों को ₹255 करोड़ और स्टार्टअप्स को ₹2,360 करोड़ का कारोबार प्राप्त हुआ। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के छोटे उद्यमियों को जेम से ₹27,235 करोड़ का कारोबार मिला था। इसमें महिला उद्यमियों को ₹4,755 करोड़, एससी/एसटी उद्यमियों को ₹752 करोड़ और स्टार्टअप्स को ₹3,203 करोड़ का कारोबार प्राप्त हुआ। इसी तरह, वर्ष 2024-25 में सभी एमएसई को ₹21,275 करोड़ का कारोबार मिला, जिसमें महिला उद्यमियों का हिस्सा ₹3,310 करोड़, एससी/एसटी का ₹507 करोड़ और स्टार्टअप्स का ₹2,139 करोड़ था। 2023-24 में एमएसई को ₹18,230 करोड़ का कारोबार मिला था, जिसमें महिला उद्यमियों को ₹2,583 करोड़, एससी/एसटी को ₹438 करोड़ और स्टार्टअप्स को ₹2,435 करोड़ का कारोबार मिला।

    योगी सरकार की समावेशी खरीद नीति का दिख रहा असर
    जेम के यूपी स्टेट नोडल और डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने बताया कि प्रदेश में एमएसई को सरकारी खरीद में अधिक अवसर देने के लिए योगी सरकार ने 26 नवंबर 2024 को शासनादेश जारी कर समावेशी सरकारी खरीद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया था। इसके बाद जेम पर एमएसई की भागीदारी और खास तौर पर उत्तर प्रदेश के एमएसई से होने वाली सरकारी खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। सरकार का फोकस छोटे उद्यमों के साथ महिला उद्यमियों, एससी/एसटी उद्यमियों और स्टार्टअप्स को भी सरकारी बाजार से जोड़ने पर है। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों और सेवाओं के लिए बाजार बढ़ने के साथ उद्यमिता और रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। योगी सरकार जेम को ई-गवर्नेंस, पारदर्शी सरकारी खरीद और स्थानीय उद्यमों को बाजार उपलब्ध कराने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर रही है। एक तरफ सरकारी विभागों को प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए उत्पाद और सेवाएं खरीदने का विकल्प मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के छोटे उद्यमों, महिलाओं, एससी/एसटी उद्यमियों और स्टार्टअप्स को बड़े सरकारी बाजार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

    ₹6.39 करोड़ के प्लॉट-शेड की नीलामी से मिले ₹32.54 करोड़
    जेम सरकारी खरीद के साथ सरकारी परिसंपत्तियों का बेहतर मूल्य दिलाने का भी माध्यम बन रहा है। इसका बड़ा उदाहरण कानपुर में एमएसएमई विभाग के औद्योगिक प्लॉट और शेड की नीलामी में सामने आया। उद्योग निदेशालय, कानपुर ने 13 से 21 जुलाई 2026 के बीच औद्योगिक आस्थानों के 34 औद्योगिक प्लॉट एवं शेड की 99 वर्ष की लीज के लिए नीलामी की। इनका अपेक्षित/आरक्षित मूल्य ₹6.39 करोड़ था। प्रतिस्पर्धी बोली के बाद इनका विक्रय मूल्य ₹32.54 करोड़ पहुंच गया। इससे सरकार को आरक्षित मूल्य की तुलना में ₹26.15 करोड़ की अतिरिक्त आय हुई। प्राप्त मूल्य आरक्षित मूल्य से 409 प्रतिशत अधिक रहा। यह नीलामी डिजिटल और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए सरकारी परिसंपत्तियों का बेहतर मूल्य हासिल करने का उदाहरण बनी है।

  • चाय खत्म होते ही दिल्ली से पटना! बिहार और UP को जोड़ेगी बुलेट ट्रेन

    चाय खत्म होते ही दिल्ली से पटना! बिहार और UP को जोड़ेगी बुलेट ट्रेन

    पटना / नई दिल्ली

    देश के कई हिस्‍सों में हाई-स्‍पीड यानी बुलेट ट्रेन का जाल बिछाने का काम पूरे जोरशोर से चल रहा है. मुंबई से अहमदाबाद के बीच देश में पहली बुलेट ट्रेन दौड़ाने की तैयारी अपने चरम पर है. साल 2027 में इस रूट के कुछ हिस्‍सों पर हाई-स्‍पीड ट्रेन ऑपरेट करने का प्रयास है. भारत सरकार ने बिहार और उत्‍तर प्रदेश में भी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनाने की योजना बनाई है. अब दिवाली-छठ से पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने इसपर बड़ा अपडेट दिया है. उन्‍होंने बताया कि दिल्‍ली से कानपुर, लखनऊ और पटना के बीच बुलेट ट्रेन चलाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है. बता दें कि दिल्‍ली से पटना का रेल रूट सबसे व्‍यस्‍ततम रेल मार्गों में से एक है, ऐसे में इस सेक्‍शन में बुलेट ट्रेन चलने से हजारों-लाखों लोगों को काफी राहत मिलेगी. रेल मंत्री ने बताया कि हाई-स्‍पीड ट्रेन से दिल्‍ली से पटना महज 4.5 घंटे में पहुंचा जा सकेगा. फिलहाल यह सफर 12 घंटों का है. इस तरह जो काम राजधानी, वंदे भारत और दुरंतो जैसी प्रीमियम सुपरफास्‍ट ट्रेनें नहीं कर सकीं वो बुलेट ट्रेन से संभव हो सकेगा. साथ ही बिहार-यूपी वालों का सपना भी पूरा होगा। 

    बिहार-यूपी वालों का सपना साकार करने की दिशा में मोदी सरकार लगातार काम कर रही है. आने वाले कुछ सालों में दिल्‍ली से कानपुर, लखनऊ और पटना के बीच बुलेट ट्रेन के दौड़ने का सपना साकार होने वाला है. देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा संकेत दिया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद बताया कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना को उत्तर प्रदेश और बिहार तक ले जाने की योजना पर काम चल रहा है. इस हाई-स्‍पीड रेल कॉरिडोर के बनने के बाद दिल्ली से लखनऊ का सफर करीब दो घंटे और राष्ट्रीय राजधानी से पटना की यात्रा महज साढ़े चार घंटे में पूरी की जा सकेगी. दिल्‍ली से पटना की दूरी 1000 किलोमीटर है. इस तरह बुलेट ट्रेन की संभावित रफ्तार 250 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रहने की संभावना है. प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर दिल्ली को उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों से जोड़ेगा। 

    बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में कौन से बड़े शहर
    रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने बताया कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में आगरा, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और पटना जैसे प्रमुख शहर शामिल होंगे. इससे दिल्ली और इन शहरों के बीच मौजूदा रेल यात्रा समय में भारी कमी आने की उम्मीद है. वैष्णव के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजना के तहत दिल्ली से आगरा की करीब 200 किलोमीटर दूरी केवल 58 मिनट में तय की जा सकेगी. वहीं 455 किलोमीटर दूर कानपुर पहुंचने में करीब 1 घंटे 50 मिनट लगेंगे. दिल्ली से लखनऊ की करीब 495 किलोमीटर दूरी 2 घंटे 12 मिनट में पूरी होने का अनुमान है. इसी तरह 750 किलोमीटर दूर प्रयागराज तक पहुंचने में लगभग तीन घंटे और 945 किलोमीटर दूर वाराणसी तक करीब 3 घंटे 33 मिनट लग सकते हैं. दिल्ली से पटना की करीब 1,170 किलोमीटर की दूरी लगभग 4.5 घंटे में पूरी करने का लक्ष्य होगा। 

    हाई-स्‍पीड रेल नेटवर्क का बढ़ता दायरा
    बुलेट ट्रेन का दायरा लगातार बढ़ रहा है. रेल मंत्री ने कहा कि परियोजना के साकार होने पर यह मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के बाद देश में बुलेट ट्रेन नेटवर्क का अगला बड़ा चरण होगा. साथ ही यह राष्ट्रीय राजधानी को उत्तर प्रदेश और बिहार के कई प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला पहला व्यापक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बन सकता है. इससे दिल्ली-उत्तर प्रदेश-बिहार बेल्ट में रहने वाले लाखों यात्रियों को तेज और सुविधाजनक परिवहन विकल्प मिलने की उम्मीद है. आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और पटना जैसे धार्मिक और पर्यटन केंद्रों तक तेज कनेक्टिविटी से पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है. इसके अलावा कारोबार, निवेश और रीजनल इकोनोमिक एक्टिविटीज में भी तेजी आने की उम्मीद है। 

    180 किलोमीटर वाली सेमी हाई-स्‍पीड ट्रेन
    फिलहाल भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम डिजाइन स्पीड वाली सेमी हाई स्पीड सर्विसेज ऑपरेट हो रही हैं. इसके मुकाबले मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे और परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटे निर्धारित है. इस परियोजना के तहत मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा समय घटकर करीब 1 घंटे 58 मिनट होने की उम्मीद है. देश की पहली हाई स्पीड रेल सेवा अगस्त 2027 में शुरू होने की संभावना है और शुरुआती चरण में सूरत-वापी सेक्शन खोले जाने की योजना है। 

  • यूपीपीईटी-2026: अब अभ्यर्थी 7 सितंबर तक कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन

    यूपीपीईटी-2026: अब अभ्यर्थी 7 सितंबर तक कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपी एसएसएससी) ने प्रारम्भिक अर्हता परीक्षा-2026 (पीईटी-2026) के अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। आयोग ने पीईटी-2026 के लिए पंजीकरण, शुल्क जमा करने और ऑनलाइन आवेदन पत्र सबमिट करने की अंतिम तिथि 1 सितंबर से बढ़ाकर 7 सितंबर 2026 कर दी है। इस संबंध में आयोग की ओर से सूचना जारी कर दी गई है।

    आयोग द्वारा जारी पत्र के अनुसार प्रारम्भिक अर्हता परीक्षा-2026 (पीईटी-2026) का विज्ञापन 1 अगस्त 2026 को प्रकाशित किया गया था। इसके तहत ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 3 अगस्त 2026 से शुरू हुई थी। पहले पंजीकरण, शुल्क जमा करने और ऑनलाइन आवेदन पत्र सबमिट करने की अंतिम तिथि 1 सितंबर 2026 निर्धारित की गई थी। अब आयोग ने अभ्यर्थियों को अतिरिक्त अवसर देते हुए इस अंतिम तिथि को 7 सितंबर 2026 तक विस्तारित कर दिया है।

    7 सितंबर तक जमा कर सकेंगे शुल्क और आवेदन

    नई व्यवस्था के अनुसार पीईटी-2026 में शामिल होने के इच्छुक अभ्यर्थी अब 7 सितंबर 2026 तक पंजीकरण कर सकते हैं, निर्धारित आवेदन शुल्क जमा कर सकते हैं और ऑनलाइन आवेदन पत्र सबमिट कर सकते हैं। इससे उन अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी जो किसी कारणवश निर्धारित समय सीमा में आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके हैं। आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाए जाने के बाद अभ्यर्थियों को अपना आवेदन समय रहते पूरा करने का अतिरिक्त अवसर मिल गया है।

    आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 8 सितंबर

    आयोग ने स्पष्ट किया है कि शुल्क समायोजन एवं आवेदन पत्र में संशोधन की अंतिम तिथि 8 सितंबर 2026 ही रहेगी। यानी अभ्यर्थियों को आवेदन सबमिट करने के बाद यदि निर्धारित प्रावधानों के तहत किसी प्रकार का संशोधन करना है तो उसके लिए 8 सितंबर तक का समय रहेगा। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन की नई समय सीमा का ध्यान रखते हुए प्रक्रिया पूरी करें और अंतिम समय का इंतजार न करें। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल पंजीकरण, शुल्क जमा करने और ऑनलाइन आवेदन पत्र सबमिट करने की अंतिम तिथि में बदलाव किया गया है। पीईटी-2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया, आवेदन शुल्क, चयन का आधार, निर्धारित शर्तें एवं अन्य दिशा-निर्देश वही रहेंगे, जो आयोग द्वारा पूर्व में जारी विज्ञापन में प्रकाशित किए गए हैं। इसलिए अभ्यर्थियों को पीईटी-2026 के मूल विज्ञापन में दिए गए सभी नियमों और निर्देशों के अनुसार ही आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

  • साढ़े दस लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़े सवा करोड़ ग्रामीण परिवारों की बदली तकदीर

    साढ़े दस लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़े सवा करोड़ ग्रामीण परिवारों की बदली तकदीर

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश के गांवों में स्वयं सहायता समूह अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला आत्मनिर्भरता के बड़े केंद्र बन रहे हैं। योगी सरकार के ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रदेश में सक्रिय 10.58 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर लगभग सवा करोड़ ग्रामीण परिवारों को आजीविका के नए अवसर मिले हैं। इन समूहों ने महिलाओं को रोजगार और उद्यम से जोड़ने के साथ परिवारों की आय बढ़ाने और गांवों में आर्थिक गतिविधियों को गति देने का काम किया है। वहीं इन समूहों से जुड़ी 82 लाख से ज्यादा महिला किसान ग्रामीण बदलाव की नई अग्रदूत बनकर उभर रही हैं।

    समूहों से निकली आत्मनिर्भरता की नई कहानी

    ग्रामीण आजीविका मिशन का फोकस महिलाओं को केवल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। उन्हें प्रशिक्षण, ऋण, उद्यम और बाजार से जोड़कर स्थायी आय के अवसर तैयार किए जा रहे हैं। इसका असर अब गांवों में साफ दिखाई देने लगा है। महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई-कढ़ाई, डेयरी, हस्तशिल्प और स्वच्छता उत्पादों के निर्माण सहित कई क्षेत्रों में छोटे उद्यम संचालित कर रही हैं। इन गतिविधियों से महिलाओं के हाथ में कमाई आई है तो परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। घर की जरूरतों में योगदान देने के साथ महिलाएं अपने फैसले खुद लेने और दूसरे परिवारों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं।

    बचत-ऋण के जरिये कारोबार तक पहुंचीं ग्रामीण महिलाएं

    मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि ग्रामीण आजीविका मिशन की बड़ी उपलब्धि यह है कि महिलाओं को बचत और ऋण की पारंपरिक व्यवस्था से आगे बढ़ाकर उद्यमिता के अवसर दिए गए। प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के साथ बाजार से जुड़ाव ने हजारों गांवों में छोटे-छोटे उद्योगों की नींव रखी है। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपनी पहचान कारोबारी के रूप में बना रही हैं। महिला समूहों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार हो रहे हैं। एक महिला के उद्यमी बनने का असर उसके परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समूह की दूसरी महिलाएं भी उससे प्रेरणा लेकर आर्थिक गतिविधियों से जुड़ती हैं।

    82 लाख महिला किसान बनीं बदलाव की वाहक
    ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए कृषि क्षेत्र में भी उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है। 82 लाख महिला किसानों का जुड़ाव इस बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश करता है। खेती से जुड़े काम में महिलाओं की भागीदारी को आय बढ़ाने वाले अवसरों से जोड़ने से ग्रामीण परिवारों की आजीविका के स्रोतों में विविधता आई है। महिला समूह अब गांवों में आर्थिक गतिविधियों के साथ सामाजिक बदलाव की भी मजबूत धुरी बन चुके हैं। समूहों में साथ काम करने से महिलाओं के बीच सहयोग और अनुभव साझा करने की संस्कृति मजबूत हुई है। सफल महिलाएं दूसरी महिलाओं को भी रोजगार और उद्यम की राह दिखा रही हैं।

    वित्तीय समावेशन से मजबूत हुई आर्थिक नींव

    ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ना भी मिशन की अहम उपलब्धियों में शामिल है। वित्तीय समावेशन के जरिए महिलाओं को बचत, ऋण और अन्य आर्थिक अवसरों तक पहुंच मिली है। इससे गांवों में छोटी पूंजी के आधार पर कारोबार शुरू करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। सरकार का जोर अब इन समूहों को केवल समूह के रूप में सक्रिय रखने के बजाय उन्हें उद्यम, रोजगार और बाजार के अवसरों से जोड़कर आय के स्थायी स्रोत तैयार करने पर है। यही वजह है कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण विकास के साथ महिला सशक्तीकरण का भी प्रभावी माध्यम बनते जा रहे हैं।

    गांव की अर्थव्यवस्था को मिल रही नई ऊर्जा
    मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि प्रदेश में साढ़े दस लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों का नेटवर्क अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा भर रहा है। एक ओर इससे आजीविका के अवसर मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान की नई पहचान मिल रही है। ग्रामीण आजीविका का यह मॉडल आने वाले समय में गांवों में रोजगार और उद्यम के और अधिक अवसर पैदा करने की क्षमता रखता है।

  • अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में बेडशीट व गॉज बैंडेज की आपूर्ति को लेकर समीक्षा

    अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में बेडशीट व गॉज बैंडेज की आपूर्ति को लेकर समीक्षा

    लखनऊ

     प्रदेश की योगी सरकार हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग को प्रोत्साहन देने तथा प्रदेश के बुनकरों को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरकारी संस्थानों में स्थानीय स्तर पर निर्मित हथकरघा उत्पादों की खरीद को बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में मंगलवार को विधान भवन स्थित कक्ष संख्या-80 में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग एवं अन्य सरकारी विभागों तथा शासकीय उपक्रमों में प्रयुक्त होने वाले बेडशीट एवं गॉज बैंडेज की खरीद और आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

    बैठक में मंत्री राकेश सचान ने कहा कि प्रदेश के बुनकरों को सरकारी खरीद का बाजार उपलब्ध कराना योगी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकारी संस्थानों में स्थानीय बुनकरों द्वारा निर्मित गुणवत्तापूर्ण वस्त्रों की खरीद बढ़ने से प्रदेश के लाखों बुनकर परिवारों को रोजगार और आर्थिक मजबूती मिलेगी तथा प्रदेश में उत्पादित वस्त्रों के लिए स्थायी बाजार भी विकसित होगा।

    उल्लेखनीय है कि 07 अगस्त 2026 को लोकभवन, लखनऊ में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग निदेशालय, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग सहित सरकारी विभागों एवं शासकीय उपक्रमों में प्रमुख रूप से प्रयुक्त होने वाले बेडशीट एवं गॉज बैंडेज की खरीद सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में बैठक के दौरान इसकी कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में लगभग 2,13,107 बुनकर कार्यरत हैं। बेडशीट तथा गॉज बैंडेज सहित विभिन्न वस्त्रों का उत्पादन प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में बुनकरों द्वारा किया जा रहा है। सरकारी खरीद में इन उत्पादों को प्राथमिकता मिलने से बुनकरों के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा सकेगा और परंपरागत बुनकरी व्यवसाय से नई पीढ़ी को जोड़ने में भी मदद मिलेगी।

    समीक्षा बैठक में प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आवश्यकतानुसार बेडशीट, तकिया कवर तथा गॉज बैंडेज क्लॉथ की आपूर्ति उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम लिमिटेड के माध्यम से सुनिश्चित किए जाने पर चर्चा हुई। इसके लिए प्रदेश के बुनकर सहकारी समितियों एवं बुनकरों से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कराया जाएगा। संबंधित चिकित्सा संस्थानों द्वारा अपनी आवश्यकता के अनुरूप मांग एवं क्रय आदेश समय से जारी किए जाने की व्यवस्था विकसित करने पर भी विचार किया गया।

    मंत्री राकेश सचान ने उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सरकारी संस्थानों को उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए।  बैठक में आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए नोडल अधिकारी नामित किए जाने पर भी चर्चा हुई। नोडल अधिकारी विभिन्न चिकित्सालयों, मेडिकल कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों से समन्वय स्थापित करते हुए उनकी आवश्यकताओं, निर्धारित विशिष्टियों एवं आपूर्ति से संबंधित सूचनाएं प्राप्त कर  विभाग को उपलब्ध कराएगा। इससे मांग के अनुरूप समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि योगी सरकार द्वारा हथकरघा क्षेत्र के लिए निर्धारित आरक्षित वस्तुओं की खरीद का उद्देश्य केवल सरकारी खरीद की प्रक्रिया पूरी करना नहीं, बल्कि प्रदेश के बुनकर परिवारों को स्थायी रोजगार और बाजार उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि जब बुनकरों को उनके उत्पाद का सुनिश्चित बाजार मिलेगा तो परंपरागत बुनकरी से जुड़ी युवा पीढ़ी भी इस व्यवसाय की ओर आकर्षित होगी और प्रदेश की समृद्ध हथकरघा परंपरा को नई गति मिलेगी।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप पूरी कार्ययोजना को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए। उत्पादों के मानक, गुणवत्ता जांच, दर निर्धारण, मांग प्राप्त करने, क्रय आदेश जारी करने, भुगतान तथा समयबद्ध आपूर्ति सहित सभी बिंदुओं को शामिल करते हुए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जाए। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय से कार्य करते हुए अगले सप्ताह तक आवश्यक बिंदुओं को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए।

    बैठक में प्रमुख सचिव हथकरघा-वस्त्रोद्योग अनिल सागर, विशेष सचिव शेषमणि पांडेय, संयुक्त आयुक्त पी. सी. ठाकुर सहित स्वास्थ्य विभाग एवं हथकरघा-वस्त्रोद्योग विभाग के अधिकारियों के साथ अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

  • सोन नदी जल विवाद पर 25 साल बाद करार, बिहार को 5.75 और झारखंड को 2 MAF

    सोन नदी जल विवाद पर 25 साल बाद करार, बिहार को 5.75 और झारखंड को 2 MAF

    पटना
     आखिरकार बिहार और झारखंड के बीच 25 सालों से चला आ रहा सोन नदी जल बंटवारा विवाद (Sone River Dispute) समाप्त हो गया। दोनों ही राज्यों के बीच दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समझौता कराया।

    31 अगस्त को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने सोन नदी बंटवारे को लेकर हुए करार पर हस्ताक्षर किए। इस विवाद के सुलझने से मुख्य रूप से बिहार और झारखंड के 10 जिलों को लाभ मिलेगा।

    चलिए समझते हैं कि आखिरसोन नदी जल विवाद क्या है और इससे किन-किन जिलों को लाभ मिलेगा?

    क्या है सोन नदी जल बंटवारा विवाद?
    सोन नदी जल बंटवारा विवाद मुख्य रूप से बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी के अधिकार और उसके उपयोग को लेकर चला आ रहा अंतर-राज्यीय जल विवाद था।

    विवाद की मुख्य कड़ी: 1973 का बाणसागर समझौता
    दरअसल, सोन नदी के जल प्रबंधन के लिए 1973 में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और तत्कालीन अविभाजित बिहार के बीच 'बाणसागर समझौता' हुआ था।

    इस एग्रीमेंट के मुताबिक, बिहार को सोन नदी से 7.75 मिलियन एकड़-फीट (MAF) जल आवंटित किया गया था। यहां तक तो सब ठीक था, लेकिन फिर जब साल 2000 में झारखंड बिहार से अलग होकर नया राज्य बना तो इस विवाद ने फिर तूल पकड़ लिया।

    झारखंड का पक्ष:
    15 नवंबर, 2000 को बिहार से अलग होने वाले झारखंड का कहना था कि सोन नदी का उद्गम (जहां से नदी निकलती है), इसका जलग्रहण क्षेत्र (जिस इलाके का पानी नदी में आता है) और इसके बहाव का एक बड़ा हिस्सा गढ़वा और पलामू जैसे झारखंड के इलाकों में पड़ता है।

    इसी वजह से बिहार को मिले कुल 7.75 MAF पानी में से झारखंड को भी उसका जायज हिस्सा मिलना चाहिए।

    बिहार का पक्ष:
    दूसरी ओर, बिहार का कहना था कि 1973 का बाणसागर समझौता अंतिम है और दक्षिण बिहार के कृषि आधारित जिलों जैसे कि भोजपुर, बक्सर, रोहतास, औरंगाबाद और पटना की सिंचाई व्यवस्था सोन नदी पर पूरी तरह निर्भर है, इसलिए 7.75 MAF पानी पर बिहार का ही अधिकार है।

    इंद्रपुरी जलाशय प्रोजेक्ट पर पड़ा असर, योजना अटकी
    अब बिहार और झारखंड के बीच सालों चले इस विवाद के कारण रोहतास जिले में प्रस्तावित इंद्रपुरी जलाशय परियोजना पिछले कई दशकों से रुकी हुई थी।

    क्या है इंद्रपुरी जलाशय प्रोजेक्ट?
    इंद्रपुरी जलाशय परियोजना सोन नदी पर प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण और जल संसाधन परियोजना है। यह परियोजना बिहार के रोहतास जिले और झारखंड के गढ़वा जिले की सीमा पर स्थित है।
    अब चूंकि बिहार और झारखंड के बीच विवाद खत्म हो गया है कि इंद्रपुरी जलाशय प्रोजेक्ट को भी अंतिम मंजूरी मिल गई है।

    सोन नदी जल आवंटन
    राज्य     आवंटित सोन जल
    बिहार     5.75 MAF
    झारखंड     2.00 MAF
    कुल     7.75 MAF

    किन-किन जिलों को मिलेगा लाभ?
    बिहार के 8 जिले: इस जलाशय से सोन नहर प्रणाली को निर्बाध पानी मिलेगा, जिससे दक्षिण बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना जिलों की लगभग 10 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की गारंटी मिलेगी।

    झारखंड के 2 जिले: पलामू और गढ़वा जैसे गंभीर जल-संकट वाले जिलों को सिंचाई और पीने के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा।

    बिहार और झारखंड में कहां-कहां से गुजरती है सोन नदी?
    झारखंड की सीमा पार कर सोन नदी बिहार के मैदानों में प्रवेश करती है। यह बिहार के 6 मुख्य जिलों से होकर गुजरती है।

        रोहतास (डेहरी ऑन सोन, इंद्रपुरी बराज)
        औरंगाबाद (दाउदनगर)
        अरवल
        भोजपुर (आरा) (कोइलवर)
        पटना (मनेर के पास गंगा नदी में विलय)
        बक्सर (रोहतास व भोजपुर के पास का सीमावर्ती क्षेत्र)

    अंत में सोन नदी पटना जिले के मनेर (दानापुर के पास) में जाकर गंगा नदी में मिल जाती है।

    झारखंड में कहां-कहां से गुजरती है सोन नदी?
    झारखंड के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सोन नदी राज्य में प्रवेश करती है और मुख्य रूप से गढ़वा तथा पलामू जिलों की सीमा बनाते हुए गुजरती है।

  • 2 से 4 सितंबर तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रहेगी धूम, कन्हैया मित्तल समेत कई कलाकारों के भजनों के भक्तिरस से सराबोर होगी कान्हा नगरी

    2 से 4 सितंबर तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रहेगी धूम, कन्हैया मित्तल समेत कई कलाकारों के भजनों के भक्तिरस से सराबोर होगी कान्हा नगरी

    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में जन्माष्टमी पर्व को भव्य और दिव्य स्वरूप देने के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मथुरा इस बार जन्माष्टमी पर श्रद्धा, भक्ति के साथ आधुनिक तकनीक के अनूठे संगम की साक्षी बनेगी। इस अवसर पर जहां देश-प्रदेश से आने वाले श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में शामिल होंगे, वहीं अनेक प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से भक्तिमय माहौल को और भव्य बनाएंगे। इसके साथ ही पहली बार 500 ड्रोन के जरिए आसमान में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उनकी विभिन्न लीलाओं को जीवंत किया जाएगा। 

    तीन से चार किमी. तक दिखाई देगी कृष्णलीला

    ब्रज तीर्थ विकास परिषद की सीईओ लक्ष्मी नागप्पन ने बताया कि इस बार ड्रोन शो मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा, जो चार सितंबर को रात करीब नौ बजे से शुरू होगा। यह शो लगभग एक घंटे तक चलेगा। इस दौरान 500 ड्रोन एक साथ आसमान में उड़ान भरेंगे और अलग-अलग आकृतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म तथा उनकी लीलाओं से जुड़े दृश्य प्रदर्शित करेंगे। ड्रोन शो की खास बात यह होगी कि आसमान में बनने वाली कृष्णलीला की आकृतियां जन्मभूमि के आसपास करीब तीन से चार किलोमीटर की दूरी तक दिखाई दे सकेंगी। इससे श्रीकृष्ण जन्मभूमि और उसके आसपास मौजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को एक साथ इस अनूठे आयोजन का साक्षी बनने का अवसर मिलेगा। इससे पहले 2 सितंबर से विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे, जो 4 सितंबर तक चलेंगे। यह सभी कार्यक्रम डैम्पियर नगर स्थित पांचजन्य प्रेक्षागृह में होंगे। 
     
    2 सितंबर से शुरू होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम

    नागप्पन ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत 2 सितंबर को दोपहर तीन बजे उद्घाटन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ होगी। इसके बाद दोपहर 3:10 से 3:15 बजे तक श्याम जी शंख वादन करेंगे। शाम 4:15 बजे से भारत भूषण भजन, कीर्तन और लोकगायन की प्रस्तुति होगी। शाम 6:15 से 7:40 बजे तक गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी, वृंदावन की ओर से ‘मुदरिया प्रेम एवं नंदोत्सव’ की झांकी गीत और नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद शाम 7 से 9 बजे तक श्रुति अनंदिता वर्मा के निर्देशन में आरुष वर्मा, कमला बैरवा, निष्ठा शर्मा, रालीग खान और सम्राट कुमार कृष्णा कॉन्सर्ट-डिवोशनल म्यूजिकल प्रस्तुति देंगे। इस प्रस्तुति में भक्ति संगीत के साथ आधुनिक संगीत का भी समावेश होगा। तीन सितंबर को शाम 4 से 5 बजे तक देवेश शर्मा भजन गायन करेंगे। इसके बाद शाम 5 से 7 बजे तक कृष्णा सागर कलेक्टिव की भजन जेमिंग होगी। शाम 6:15 से 7:40 बजे तक गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी की ओर से ‘मुदरिया प्रेम एवं नंदोत्सव’ की झांकी गायन और नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत की जाएगी। शाम 7 से 9 बजे तक भी कई प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इनमें श्रुति अनंदिता वर्मा के निर्देशन में आरुष वर्मा, कमला बैरवा, निष्ठा शर्मा, रालीग खान और सम्राट कुमार कृष्णा की संगीत प्रस्तुति शामिल होगी। इसके साथ ही चार सितंबर को दोपहर तीन से पांच बजे तक मोहित शैवानी ‘कृष्णानयन-कृष्णप्रिय वो जो कभी कहा नहीं गया’ की प्रस्तुति देंगे।

    4 सितंबर को कन्हैया मित्तल के भजनों से गूंजेगी कान्हा नगरी 

    चार सितंबर को शाम 5 से 7 बजे तक हार्टफुलनेस फाउंडेशन की प्रस्तुति होगी। इसमें सुनीति मिश्रा ‘कृष्ण : अनंत रंग, अनंत भाव’ प्रस्तुत करेंगी। इसके बाद अनिरबान भजन एवं बांसुरी वादन और मैत्रेयी राय भजन गायन करेंगी। शाम 7 से 9 बजे तक प्रसिद्ध भजन गायक कन्हैया मित्तल की भजन संध्या आयोजित होगी। तीन दिवसीय आयोजन के दौरान शहर में पांच बड़े और 21 छोटे मंच भी बनाए जाएंगे। इन मंचों पर ब्रज के कलाकार अपनी लोककला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। इससे स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को ब्रज की पारंपरिक संस्कृति से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इसके अलावा पहली बार पांचजन्य प्रेक्षागृह परिसर में फूड स्टॉल भी लगाए जाएंगे। इससे श्रद्धालु सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने के साथ विभिन्न खान-पान का भी लुत्फ उठा सकेंगे।
     
    सुरक्षा के किए गए पुख्ता इंतजाम, 16 वॉच टावर बनाए गए

    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए हैं। शहर में 129 स्थानों पर बैरियर लगाए जाएंगे और 24 पार्किंग स्थल बनाए जाएंगे, ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 16 वॉच टावर बनाए जाएंगे। पुलिसकर्मी इन टावरों से भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। इसके साथ ही ड्रोन कैमरों के जरिए भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और प्रमुख मार्गों की निगरानी की जाएगी। किसी स्थान पर भीड़ बढ़ने या संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर पुलिस अधिकारियों को तत्काल सूचना देने की व्यवस्था रहेगी। जन्माष्टमी के दौरान करीब 350 मुख्य आरक्षी और आरक्षी तथा 50 महिला आरक्षियों की तैनाती की जाएगी। रूट डायवर्जन और ट्रैफिक प्लान लागू कर शहर में यातायात व्यवस्था को नियंत्रित किया जाएगा।

  • प्याज की कीमतों पर दिल्ली सरकार का एक्शन, 1000 टन प्याज किया गया आवंटित

    प्याज की कीमतों पर दिल्ली सरकार का एक्शन, 1000 टन प्याज किया गया आवंटित

    नई दिल्ली
    दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से प्याज की बढ़ती कीमतों से लोग परेशान हैं। इसे देखते हुए दिल्ली सरकार ने उचित दर की दुकानों (सरकारी राशन दुकानों) और वैन के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार राजधानी में प्याज का संकट पैदा नहीं होने देगी। सरकार का उद्देश्य दिल्लीवासियों को आवश्यक खाद्य वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें उचित और सस्ती दरों पर प्याज उपलब्ध कराना है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्याज आम लोगों की पहुँच से बाहर न हो।

    दिल्ली के लिए 1000 टन प्याज आवंटित
    उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने दिल्ली के लिए 1000 टन प्याज आवंटित करने का निर्णय लिया है। इसे उचित दर की दुकानों के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही दिल्ली के सभी 13 जिलों में एक-एक वैन के माध्यम से भी प्याज की बिक्री की जाएगी।

    प्रत्येक जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में वैन पहुँचने से लोगों को प्याज खरीदने में आसानी होगी। इससे राजधानी के विभिन्न इलाकों में प्याज की उपलब्धता बढ़ेगी और अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकेंगे।

  • नई इकाइयों के साथ बंद प्लांट भी हुए चालू, उत्पादन क्षमता बढ़ने से रोजगार की संभावनाएं भी मजबूत

    नई इकाइयों के साथ बंद प्लांट भी हुए चालू, उत्पादन क्षमता बढ़ने से रोजगार की संभावनाएं भी मजबूत

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में निर्यात की बढ़ती रफ्तार अब केवल विदेशी बाजारों तक पहुंचने वाली बोतलों और उत्पादों की कहानी नहीं रह गई है। इसकी शुरुआत गन्ने के खेत, शीरा और अनाज से होकर उद्योगों तक पहुंच रही है और वहां से पैकेजिंग, भंडारण व परिवहन के रास्ते विदेशी बाजार तक जा रही है। योगी सरकार की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति 2026-29 ने इस पूरी एक्सपोर्ट चेन को नई गति दी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में प्रदेश के आबकारी निर्यात में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 45.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इसी अवधि में राष्ट्रीय वृद्धि 18.3 प्रतिशत रही – इस तरह प्रदेश की वृद्धि राष्ट्रीय औसत की दोगुनी से भी अधिक रही। वहीं मात्रा की दृष्टि से प्रदेश का निर्यात 163 प्रतिशत बढ़ा। सबसे अहम उपलब्धि यह रही कि यूपी ने करीब 39.9 लाख डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की।

    बस्ती के शीरे से विदेशी बाजार तक पहुंची कमाई

    निर्यात की इस बढ़ती श्रृंखला में कृषि उत्पादों की भूमिका भी अहम है। बस्ती से 25 हजार कुंतल शीरे का विदेश निर्यात किया गया, जिससे करीब पांच लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। शीरा भिन्न शुल्क वर्गीकरण में आता है, इसलिए यह अर्जन उपरोक्त आंकड़ों से अतिरिक्त है। यानी खेतों में तैयार होने वाले कृषि उत्पाद अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रसंस्करण के बाद सीधे वैश्विक बाजार का हिस्सा बन रहे हैं। निर्यात बढ़ने के साथ अप्रैल-जुलाई 2026 के मध्य यूपी की इकाइयों ने अन्य राज्यों को भी पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 1.64 करोड़ अधिक बोतलें भेजीं, जो करीब 45.7 प्रतिशत की वृद्धि है।

    नई इकाइयों से बढ़ा निवेश, बंद प्लांट भी हुए सक्रिय

    निर्यात की बढ़ती संभावनाओं ने प्रदेश में नए निवेश के साथ पुरानी औद्योगिक क्षमता को भी सक्रिय किया है। उन्नाव में यूनाइटेड ब्रुअरीज और हरदोई में माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। फर्रुखाबाद में वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने इकाई स्थापित की है। वहीं एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स ने मुरादाबाद की बंद पड़ी इकाई को दोबारा शुरू किया है। गोरखपुर की कियान डिस्टिलरी ने एथेनॉल उत्पादन के साथ पेय आसवनी और ब्रुअरी के लिए भी आवेदन किया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, रैडिको खेतान भी अन्य राज्यों से अपने सीतापुर और रामपुर संयंत्रों में निर्यात उत्पादन स्थानांतरित कर रही है।

    127.8 लाख अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा यूपी का निर्यात 

    अप्रैल-जून 2026 में देश से करीब 10.17 करोड़ अमेरिकी डॉलर का आबकारी निर्यात हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 127.8 लाख डॉलर रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 87.9 लाख डॉलर था। यानी महज एक साल में प्रदेश ने करीब 39.9 लाख डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि हासिल की। राष्ट्रीय निर्यात में यूपी की हिस्सेदारी भी 10.2 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई और प्रदेश महाराष्ट्र एवं पंजाब के बाद देश में तीसरे स्थान पर है। प्रदेश ने तिमाही के प्रत्येक माह में वृद्धि दर्ज की।

    कृषि से पैकेजिंग तक दिख रहा असर

    आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि निर्यात में वृद्धि का असर केवल आबकारी इकाइयों तक सीमित नहीं है। उद्योग की पिछली कड़ी गन्ना, शीरा और अनाज जैसे कृषि उत्पादों से जुड़ी है, जबकि आगे कांच की बोतल, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन जैसे अनेक क्षेत्र जुड़े हैं। उत्पादन और निर्यात बढ़ने के साथ इन सभी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं। इस तरह निर्यात नीति ने खेत से लेकर फैक्ट्री और फैक्ट्री से विदेशी बाजार तक यूपी की एक व्यापक एक्सपोर्ट चेन को गति देने का काम किया है।

  • सिवान में 39 हजार लोगों के ‘जिंदा होने के सबूत’ का इंतजार, प्रशासन अलर्ट

    सिवान में 39 हजार लोगों के ‘जिंदा होने के सबूत’ का इंतजार, प्रशासन अलर्ट

    सिवान.

    जिले के 39 हजार हजार पेंशनधारकों का जीवन प्रमाणीकरण अभी भी लंबित (पेंडिंग) है। इस कारण इन लाभुकों की पेंशन की राशि का भुगतान अटक गया है। सामाजिक सुरक्षा विभाग ने सभी लंबित पेंशनधारियों का जीवन प्रमाणीकरण कराने को निर्देशित किया है।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल तीन लाख 57 हजार 147 लाभार्थियों में से तीन लाख आठ हजार 987 लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा हो चुका है। वहीं, अभी भी 39012 लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन लंबित है। इसके अलावा इसमें 3015 लाभार्थी ऐसे हैं, जिनका आधार अब तक मैप नहीं हुआ है। प्रखंडवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बरहरिया में सबसे अधिक 32 हजार 838 लाभार्थी दर्ज हैं। इनमें 28 हजार 108 का बायोमेट्रिक सत्यापन हो चुका है, जबकि 4085 लाभार्थियों का सत्यापन अभी बाकी है।

    वहीं, सिवान सदर प्रखंड में कुल 27 हजार 247 लाभार्थियों में से 22 हजार 540 का सत्यापन हुआ है। यहां 4323 लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन लंबित है। इसी प्रकार भगवानपुर हाट में 26 हजार 717 में 23057 का सत्यापन पूर्ण व 2197 का सत्यापन नहीं हुआ है। गोरेयाकोठी में कुल 25 हजार 546 में से 22 हजार 367 का सत्यापन पूर्ण व 2432 का लंबित, दारौंदा में 23193 में से 19023 और महाराजगंज में 23075 में से 19362 लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, आंदर में 13481 में से 12259, बसंतपुर में 12509 में से 10829, दरौली में 17586 में से 15747, गुठनी में 13156 में 12032 और हसनपुरा में 16154 में से 14625 लाभार्थियों का सत्यापन पूर्ण किया है।

    सामाजिक सुरक्षा के सहायक निदेशक मो. मिनहाजुद्दीन ने कहा कि सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि को 400 रूपये से बढ़ाकर 1100 रूपये प्रतिमाह कर दिया है। यह राशि सीधे लाभुकों के बैंक खाते में ऑनलाइन भेजी जा रही है, लेकिन जीवन प्रमाणीकरण नहीं कराने वाले लाभुकों को पेंशन की राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने सभी पेंशनधारकों से यह अपील की है कि वे जल्द से जल्द जीवन प्रमाणीकरण सत्यापन कार्य पूर्ण करा लें।