Category: राज्य

  • जालंधर में फैक्ट्री में लगी भयंकर आग से मचा हड़कंप, दूर तक दिखा धुआं; 10 दमकल गाड़ियां जुटीं रेस्क्यू में

    जालंधर में फैक्ट्री में लगी भयंकर आग से मचा हड़कंप, दूर तक दिखा धुआं; 10 दमकल गाड़ियां जुटीं रेस्क्यू में

     जालंधर
     थाना बस्ती बावा खेल के बस्ती पीर दाद रोड पर स्थित गद्दे बनाने की एक फैक्ट्री में वीरवार सुबह अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे परिसर में धुआं फैल गया।

    गनीमत रही कि समय रहते फैक्ट्री के अंदर मौजूद करीब 12 लोगों को बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया। जानकारी के मुताबिक वीरवार सुबह करीब नौ बजे फैक्ट्री के अंदर से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया। आसपास के लोगों ने जब फैक्ट्री से निकलता धुआं देखा तो तुरंत वहां मौजूद कर्मचारियों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। कुछ ही देर में आग तेजी से फैल गई। गद्दे और उनमें इस्तेमाल होने वाला सामान ज्वलनशील होने के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया।

    फैक्ट्री के अंदर केमिकल होने के कारण आग काफी भड़क गई है, जिससे इसे बुझाने में दिक्कत हुई। आग लगने के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट से आग लगने की बात कही जा रही है।

    केशव नामक व्यक्ति ने बताया कि एक व्यक्ति घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। आग लोगों के घरों तक पहुंच गई। पुलिस प्रशासन को सूचना दी गई, लेकिन पुलिस एक घंटे के बाद मौके पर पहुंची। किसी भी फैक्टरी के संचालक ने घटना स्थल का आकर जायजा नहीं लिया गया।

    इस घटना के दौरान एक लैंटर भी गिर गया। व्यक्ति ने प्रशासन से फैक्ट्री को रिहायशी इलाके से बाहर निकालने की अपील की। केशव के अनुसार, 10 साल पहले भी एक फैक्टरी में आग लगने की घटना सामने आई थी।

    तक फैक्ट्री कर्मी ने कहा था कि इस यूनिट को इलाके से बाहर ले जाया जा रहा है और इसे गोदाम के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। लेकिन फैक्ट्री में आज भी गद्दे बनाने का काम चल रहा है। केशव के अनुसार फैक्टरी में भारी मात्रा में एलपीजी कॉमर्शियल सिलेंडर मौजूद है।

    आग की लपटें और घना धुआं देखकर आसपास के लोगों में भी दहशत फैल गई। धुआं इतना अधिक था कि करीब दो किलोमीटर दूर तक इसे आसानी से देखा जा रहा था। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया।

    आग की भयावहता को देखते हुए करीब 10 दमकल गाड़ियों को मौके पर लगाया गया। दमकल कर्मियों ने कई दिशाओं से पानी की बौछार कर आग पर काबू पाने का प्रयास किया। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शार्ट सर्किट बताया जा रहा है। हालांकि, आग से फैक्ट्री में कितना नुकसान हुआ है, इसका अभी आकलन नहीं हो सका है। थाना बस्ती बावा खेल की पुलिस भी मौके पर पहुंचकर मामले की जांच कर रही है।

  • अमृतसर में स्कूल बसों का चक्का जाम, कई स्कूलों में परिवहन सेवा ठप; 25 हजार छात्र परेशान

    अमृतसर में स्कूल बसों का चक्का जाम, कई स्कूलों में परिवहन सेवा ठप; 25 हजार छात्र परेशान

    अमृतसर
    स्कूल बस ऑपरेटरों की हड़ताल का असर आज अमृतसर के स्कूलों में साफ दिखाई दिया। बस ऑपरेटरों की ओर से तीन सितंबर को बसें बंद रखने के ऐलान के बाद सुबह कई स्कूलों के बाहर अभिभावकों की भीड़ नजर आई। स्कूल बसें नहीं पहुंचने के कारण अभिभावकों को खुद अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए पहुंचना पड़ा। कई अभिभावक बच्चों को कार, दोपहिया और अन्य निजी वाहनों से स्कूल लेकर पहुंचे।

    स्कूल एंड कॉलेज बस आपरेटर एसोसिएशन पंजाब की ओर से रोड टैक्स और पार्किंग फीस सहित अन्य मांगों को लेकर हड़ताल की गई है। एसोसिएशन का दावा है कि मौजूदा टैक्स और खर्चों के कारण स्कूल बसों का संचालन करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

    हड़ताल के कारण जिले के करीब 20 स्कूलों की बस सेवा प्रभावित हुई है। इससे लगभग 25 हजार विद्यार्थी प्रभावित होने की बात कही जा रही है। कई स्कूलों ने अभिभावकों को पहले ही बस सेवा बंद रहने की सूचना दे दी थी, जबकि कुछ अभिभावकों को सुबह बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए अचानक अपनी व्यवस्था करनी पड़ी।

    बस सेवा बंद होने के कारण सुबह स्कूलों के आसपास निजी वाहनों की संख्या बढ़ गई। अभिभावकों को बच्चों को छोड़ने और लेने के लिए खुद पहुंचना पड़ा। इससे कई स्कूलों के बाहर कुछ समय के लिए ट्रैफिक का दबाव भी बढ़ा।

    एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार को स्कूल बसों से रोड टैक्स हटाने, पार्किंग फीस कम करने तथा अन्य मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। ऑपरेटरों ने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया है।

    डीपीएस इंटरनेशनल, होली हार्ट, स्प्रिंग डेल, सेंट फ्रांसिस, यूनिवर्सिटी स्टडीज, केवी-1, श्री गुरु हरिकृष्ण पब्लिक स्कूल, बसंत एवेन्यू, गोल्डन एवेन्यू पब्लिक स्कूल और दून इंटरनेशनल समेत करीब 20 स्कूलों की बस सेवा आज प्रभावित रही।

  • श्री स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह का करेंगे उद्घाटन, पीएम और सीएम आवास के लाभार्थियों को सौंपेंगे चाबी

    श्री स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह का करेंगे उद्घाटन, पीएम और सीएम आवास के लाभार्थियों को सौंपेंगे चाबी

    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ब्रज क्षेत्र को मुख्यमंत्री योगी देंगे 1051 करोड़ रुपये की 229 योजनाओं की सौगात

    – 540 करोड़ से अधिक की 62 परियोजनाओं का लोकार्पण और 437 करोड़ से अधिक की 167 नई योजनाओं का होगा शिलान्यास

    -आवास योजना के लाभार्थियों को 72 करोड़ से अधिक की सहायता राशि का वितरण करेंगे मुख्यमंत्री

    श्री स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह का करेंगे उद्घाटन, पीएम और सीएम आवास के लाभार्थियों को सौंपेंगे चाबी

     दो दिवसीय मथुरा प्रवास के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि में दर्शन और गो पूजन करेंगे मुख्यमंत्री

    मथुरा
     श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ब्रज क्षेत्र को विकास की नई सौगात देने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री 3 सितंबर को दो दिवसीय प्रवास पर मथुरा आ रहे हैं, जहां वे ब्रजवासियों को करीब 1051 करोड़ रुपये की 229 विकास परियोजनाओं का बड़ा उपहार देंगे। इस भव्य समारोह के दौरान 540 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 62 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा, जिससे शहर के बुनियादी ढांचे और पर्यटन को नई मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही 437 करोड़ रुपये की लागत वाली 167 नई योजनाओं का शिलान्यास करेंगे। समारोह में मुख्यमंत्री पीएम आवास (शहरी) और सीएम आवास (ग्रामीण) योजना के लाभार्थियों को 72 करोड़ से अधिक की सहायता राशि का वितरण करेंगे। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को ट्रैक्टर की चाबी, चेक और प्रमाण पत्र भी सौंपेंगे।

    श्री स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह का करेंगे लोकार्पण
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दो दिवसीय मथुरा प्रवास विकास और धर्म के अद्भुत संगम का साक्षी बनेगा। तय कार्यक्रम के अनुसार 3 सितंबर को दोपहर में सीएम योगी का राजकीय हेलीकॉप्टर वृंदावन स्थित पवनहंस हेलीपैड पर उतरेगा। वहां से वे गीता शोध संस्थान पहुंचेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री नवनिर्मित और अत्याधुनिक 'श्री स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह' का भव्य लोकार्पण करेंगे। जहां एक हजार लोगों के बैठने की उत्कृष्ट व्यवस्था है।

    संतों से मिलेंगे और बच्चों को कराएंगे अन्नप्राशन संस्कार
    इस कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी प्रो-पुअर प्रदर्शनी का अवलोकन, वृक्षारोपण, संतों से मुलाकात करेंगे और बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार संपन्न कराएंगे। साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र व चेक वितरित कर जनसभा को संबोधित करेंगे।  इसके बाद मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के कार्यों की प्रगति जानने के लिए अहम समीक्षा बैठक करेंगे।

    'कान्हा भक्ति स्तम्भ मार्ग' का भ्रमण और अवलोकन
    समीक्षा बैठक के पश्चात मुख्यमंत्री वृंदावन के होटल विवान्ता में 'आज तक' न्यूज चैनल के 'पंचायत आज तक' कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे। इसके बाद वे वृंदावन में विकसित किए गए भव्य 'कान्हा भक्ति स्तम्भ मार्ग' का भ्रमण और अवलोकन करेंगे। इन कार्यक्रमों के बाद शाम को वे पं. दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, मथुरा पहुंचेंगे और परिसर स्थित अशोका अतिथि गृह में रात्रि विश्राम करेंगे।

    जन्मभूमि में दर्शन और गो पूजन करेंगे सीएम योगी
    अगले दिन शुक्रवार 4 सितंबर को सुबह सीएम योगी श्री कृष्ण जन्मभूमि परिसर पहुंचेंगे। यहां वे सबसे पहले गो पूजन करेंगे और उसके बाद मुख्य मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन व विशेष पूजन अर्चना करेंगे। इसके पश्चात मुख्यमंत्री प्रस्थान कर जाएंगे।

  • चंदौली में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें, तीन बड़े डैम हुए ओवरफ्लो; पानी छोड़े जाने से बाढ़ का अलर्ट

    चंदौली में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें, तीन बड़े डैम हुए ओवरफ्लो; पानी छोड़े जाने से बाढ़ का अलर्ट

    चंदौली 
    उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में पिछले तीन-चार दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते लतीफ शाह, चंद्रप्रभा और मूसाखांड डैम पूरी तरह से लबालब भरकर ओवरफ्लो हो गए हैं. जलाशयों के तटबंधों को सुरक्षित रखने और पानी के स्तर को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन द्वारा नियमित रूप से जल डिस्चार्ज किया जा रहा है. लतीफ शाह डैम से करीब 7 से 8 फीट पानी नीचे गिर रहा है, जिसे देखने और सेल्फी लेने के लिए स्थानीय लोग जुट रहे हैं. इस स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें अलर्ट मोड पर हैं। 

    डैमों से ओवरफ्लो और निचले इलाकों में खतरा
    लतीफ शाह और चंद्रप्रभा डैम में क्षमता से अधिक पानी भरने के कारण छोटी-छोटी नदियों के माध्यम से पानी निचले इलाकों की ओर बह रहा है. इससे निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बाढ़ जैसी स्थिति और समस्याएं उत्पन्न होने का खतरा बन गया है। 

    स्थानीय लोगों ने जताई चिंता
    चकिया के लतीफ शाह और नौगढ़ के चंद्रप्रभा डैम पर मौजूद स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार जलाशयों में अधिक पानी भरा है. पिछले दो दिनों से हो रहे ओवरफ्लो के कारण पानी नीचे जाकर लोगों की परेशानियां बढ़ा रहा है। 

    जिला प्रशासन और डीएम की निगरानी
    चंदौली के जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग खुद पूरी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं. आपदा प्रबंधन की टीमों को एक्टिवेट कर दिया गया है. डीएम ने बताया कि जलाशयों से थोड़ा-थोड़ा करके पानी इसलिए छोड़ा जा रहा है ताकि निचले इलाकों में अचानक बाढ़ न आए। 

  • Rajasthan Civic Polls: टिकट कटने पर बागियों ने खोला मोर्चा, BJP-कांग्रेस के हजारों प्रत्याशी निर्दलीय मैदान में

    Rajasthan Civic Polls: टिकट कटने पर बागियों ने खोला मोर्चा, BJP-कांग्रेस के हजारों प्रत्याशी निर्दलीय मैदान में

    जयपुर.

    राजस्थान निकाय चुनाव में इस बार बीजेपी और कांग्रेस के सामने मुकाबला सिर्फ एक-दूशरे से नहीं है. दोनों पार्टियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती उनके अपने खुद के ही लोग बन गए हैं. टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों ने बड़ी संख्या में निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया है और अब मैदान छोड़ने को तैयार नहीं हैं. कुल मिलाकर देखें तो ये दोनों पार्टियों के बीच ऐसे लोग हैं जो ये समझने में मुश्किल हालात बना रहे कि कौन जीत दर्ज कर सकता है.

    आंकड़ों और पार्टी पदाधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेशभर में मोटे तौर पर बीजेपी के करीब 9 हजार और कांग्रेस के 8 हजार से ज्यादा बागी चुनाव मैदान में हैं. दोनों पार्टियों के पास अभी सभी निकायों का पूरा आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन आंकड़ों को मोटा अनुमान माना जा रहा है. लेकिन संख्या से ज्यादा चिंता इस बात की है कि इन बागियों में केवल सामान्य दावेदार ही नहीं हैं. कई पुराने पार्टी पदाधिकारी, पूर्व जनप्रतिनिधि, पूर्व पार्षद और स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ रखने वाले नेता भी अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में उतर गए हैं. यही वजह है कि टिकट वितरण के बाद अब दोनों दलों की पूरी रणनीति बदलती दिखाई दे रही है. पहले टिकट देने की लड़ाई थी, अब टिकट बचाने के बाद वोट बचाने की लड़ाई शुरू हो गई है

    किन इलाकों में सबसे ज्यादा बागी
    पार्टी    बागियों की अनुमानित संख्या    सबसे ज्यादा चर्चा वाले इलाके
    बीजेपी    करीब 9 हजार    श्रीगंगानगर, बालोतरा, निम्बाहेड़ा, कोटपूतली, जैसलमेर
    कांग्रेस    8 हजार से ज्यादा    बालोतरा, जैसलमेर, बाड़मेर, टपूतली, सीसवाली, कुचेरा, झालरापाटन

    यहां सबसे अहम बात यह है कि यह पूरे प्रदेश का मोटा अनुमान है. दोनों पार्टियों के पास अभी हर निकाय का पूरा आंकड़ा नहीं है. इसलिए इसे अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता

    बीजेपी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द श्रीगंगानगर
    बीजेपी की बगावत में श्रीगंगानगर सबसे ऊपर दिखाई दे रहा है. यहां नगर परिषद में 70 बागी मैदान में हैं. यह संख्या अपने आप में बताती है कि टिकट वितरण के बाद पार्टी के अंदर असंतोष किस स्तर तक पहुंचा है. इसके बाद बालोतरा में 57, निम्बाहेड़ा में 37, कोटपूतली में 35, जैसलमेर में 30 और पदमपुर में 25 बागी चुनाव लड़ रहे हैं. इसके अलावा बाड़मेर में 23, बारां में 22, सीसवाली में 24 और भीलवाड़ा में 21 बागियों ने बीजेपी के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है. बीकानेर नगर निगम में 15, सादुलशहर में 17 और श्रीविजयनगर में 12 बागी मैदान में हैं.

    बीजेपी के प्रमुख बागी आंकड़े
    निकाय    बीजेपी के बागी
    श्रीगंगानगर    70
    बालोतरा    57
    निम्बाहेड़ा    37
    कोटपूतली    35
    जैसलमेर    30
    पदमपुर    25
    सीसवाली    24
    बाड़मेर    23
    बारां    22
    भीलवाड़ा    21

    सादुलशहर    17
    बीकानेर    15
    श्रीविजयनगर    12

    बीजेपी में सिर्फ दावेदार नहीं, बड़े नाम भी मैदान में
    बीजेपी की परेशानी इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि कई जगह बगावत करने वालों की स्थानीय पहचान मजबूत है. डीग में बीजेपी के वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश कौशिक निर्दलीय मैदान में हैं. बूंदी में नेता प्रतिपक्ष मुकेश माधवानी ने भी मोर्चा खोल दिया है. सादड़ी में पूर्व पालिकाध्यक्ष दिलीप सोनी, पूर्व पालिका उपाध्यक्ष घीसाराम जाट और बीजेपी युवा मोर्चा अध्यक्ष नारायण राइका निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. राजसमंद में पूर्व पार्षद गोवर्धन लड्ढा, सुरेश माली और हिम्मत मेहता भी अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनाव मैदान में हैं. यह सामान्य टिकट नाराजगी से थोड़ा अलग मामला है. ऐसे नेताओं के अपने समर्थक और स्थानीय संपर्क होते हैं. अगर ये लोग चुनाव तक मैदान में टिके रहते हैं तो बीजेपी के अधिकृत उम्मीदवार को सीधे नुकसान पहुंच सकता है.

    कांग्रेस की कहानी भी बहुत अलग नहीं
    कांग्रेस में भी बगावत का आंकड़ा बड़ा है. श्रीगंगानगर में कांग्रेस के 45 बागी मैदान में हैं. बालोतरा में 34, जैसलमेर में 24 और बाड़मेर में 21 बागी कांग्रेस प्रत्याशियों की राह मुश्किल कर रहे हैं. सीसवाली और कुचेरा में 21-21 बागी चुनाव लड़ रहे हैं. झालरापाटन में 19 और पिड़ावा में 18 बागी मैदान में हैं. कोटपूतली और पदमपुर में कांग्रेस के 25-25 बागी बताए जा रहे हैं, जबकि बीकानेर में 13 बागियों ने पार्टी का गणित बिगाड़ा है.

    कांग्रेस के प्रमुख बागी आंकड़े
    निकाय    कांग्रेस के बागी
    श्रीगंगानगर    45
    बालोतरा    34
    कोटपूतली    25
    जैसलमेर    24
    बाड़मेर    21
    सीसवाली    21
    कुचेरा    21
    झालरापाटन    19
    पिड़ावा    18
    पदमपुर    25
    बीकानेर    13

    मान लीजिए किसी वार्ड में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है. दोनों पार्टियों का अपना मजबूत वोट बैंक है. इसी बीच बीजेपी का कोई मजबूत स्थानीय दावेदार टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ता है. ऐसे में वह वोट सीधे कांग्रेस को नहीं देता, लेकिन बीजेपी के उम्मीदवार के वोट जरूर काट सकता है. इसलिए बागी उम्मीदवार कई सीटों पर जीतने के लिए नहीं, बल्कि अधिकृत प्रत्याशी की जीत रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है. निकाय चुनाव में कई वार्डों में जीत और हार का अंतर बहुत कम रहता है. ऐसे में कुछ सौ वोट भी पूरा चुनाव पलट सकते हैं. अगर किसी मजबूत बागी को एक-दो हजार वोट मिल जाते हैं तो वह अपनी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार की जीत का रास्ता रोक सकता है.

    अब दोनों पार्टियों का फोकस एक ही है , बागी बैठाओ
    नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों दलों की कोशिश अब यही है कि प्रभावशाली बागियों को किसी तरह चुनाव मैदान से हटाया जाए. पार्टी के नेता ऐसे दावेदारों से संपर्क कर रहे हैं. उन्हें समझाया जा रहा है कि चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ जाने से संगठन को नुकसान होगा. लेकिन मुश्किल यह है कि कई बागी सिर्फ टिकट के लिए नाराज नहीं हैं. वे लंबे समय से संगठन में काम कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि चुनाव जीतने की स्थिति में होने के बावजूद उनका टिकट काट दिया गया. ऐसे लोगों के लिए सिर्फ यह कहना कि पार्टी का फैसला मानिए, काफी नहीं होगा. यहीं से मान-मनुहार की राजनीति शुरू होती है.

    वापसी की आखिरी कोशिश क्यों जरूरी है?
    पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि बागी अगर नाम वापसी तक मैदान छोड़ देते हैं तो नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है. लेकिन अगर नाम वापसी के बाद भी वे चुनाव मैदान में बने रहते हैं तो पार्टी के पास उन्हें रोकने का रास्ता काफी सीमित हो जाएगा. इसीलिए आने वाले समय में दोनों पार्टियों के बड़े नेता और स्थानीय संगठन अपने-अपने प्रभावशाली बागियों से संपर्क बढ़ाएंगे. किसी को संगठन में जिम्मेदारी का भरोसा दिया जा सकता है, किसी को आगे राजनीतिक मौका मिलने की बात कही जा सकती है और कहीं स्थानीय नेताओं के जरिए समझाइश की जा सकती है.

    बीजेपी के सामने पांच बड़ी चुनौतियां

        करीब 9 हजार बागियों के अनुमान से बड़ी संख्या में सीटों पर वोट बंटने का खतरा
        श्रीगंगानगर, बालोतरा और निम्बाहेड़ा जैसे इलाकों में ज्यादा बगावत
        पुराने पदाधिकारी और पूर्व जनप्रतिनिधि भी मैदान में
        निर्दलीय बागी पार्टी के पारंपरिक वोट को प्रभावित कर सकते हैं
        मजबूत बागियों को समय रहते बैठाना सबसे बड़ी प्राथमिकता

    कांग्रेस के सामने पांच बड़ी चुनौतियां

        8 हजार से ज्यादा बागियों का अनुमान
        बालोतरा, जैसलमेर और बाड़मेर में ज्यादा असंतोष
        कई जगह पुराने नेताओं और पदाधिकारियों का मैदान में उतरना
        पिड़ावा जैसे इलाकों में संगठन से बाहर जाने वाले नेताओं का असर
        अधिकृत प्रत्याशियों के वोट बंटने का सीधा खतरा

     

  • Punjab Election Update: पहली बार वोट डालने वालों के लिए आवेदन शुरू, Form-6 से 12 सितंबर तक करें रजिस्ट्रेशन

    Punjab Election Update: पहली बार वोट डालने वालों के लिए आवेदन शुरू, Form-6 से 12 सितंबर तक करें रजिस्ट्रेशन

    चंडीगढ़
     मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) पंजाब और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा राज्य में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-2026' (SIR) का काम तेजी से चलाया जा रहा है। अगर आपकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है, या फिर आप 1 अक्टूबर 2026 तक 18 साल के हो रहे हैं, तो आप आवेदन कर सकते है। 

    फर्स्ट टाइम वोटर्स के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आयोग द्वारा जारी शेड्यूल के मुताबिक, नया वोटर कार्ड बनवाने और ड्राफ्ट वोटर सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरकर 12 सितंबर 2026 तक आवेदन किया जा सकता है।

    निर्वाचन आयोग की ओर से जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में किसी भी तरह की गलती, गलत नाम, पते में सुधार या किसी फर्जी/अयोग्य वोटर का नाम हटाने को लेकर यदि कोई दावे और आपत्तियां हैं, तो इन्हें 13 सितंबर तक संबंधित कार्यालयों या ऑनलाइन पोर्टल पर जमा करवाया जा सकता है।

    यदि किसी नागरिक का नाम ड्राफ्ट रोल में छूट गया है या वोटर आईडी में संशोधन की आवश्यकता है, तो आयोग की ओर से अलग-अलग प्रकार के फॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं। यह अभियान राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में चलाया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे। नए मतदाता बनने, NRI वोटर के रूप में पंजीकरण कराने, नाम कटवाने या पते में सुधार के लिए आवेदन प्रक्रिया को आसान और डिजिटल बनाया गया है।

    फर्स्ट टाइम वोटर्स कैसे कर सकते हैं आवेदन जानिए…

        चुनाव आयोग की अपील : चुनाव आयोग ने फर्स्ट टाइम वोटर्स बनने वाले युवाओं से अपील की है कि जो भी वोटर्स बनने की शर्तों को पूरा करते हैं वो अपनी वोट जरूर बनवाएं। 12 सितंबर तक वो ऑनलाइन या ऑफ लाइन सिस्टम को अपनाकर अपना नाम फाइनल मतदाता सूची में शामिल करवाएं ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में वो मतदान कर सकें।

        ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया: सबसे पहले भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल voters.eci.gov.in पर जाएं या अपने स्मार्टफोन में ECINet App (वोटर हेल्पलाइन ऐप) डाउनलोड करें। पोर्टल या ऐप पर मोबाइल नंबर के जरिए रजिस्ट्रेशन/लॉगिन करना होगा।

        फार्म-6 भरना होगा: आन लाइन रजिस्ट्रेशन करते हुए फर्स्ट टाइम वोटर्स को फार्म-6 का विकल्प चुनना होगा। उसके बाद फार्म में जो जानकारियां मांगी गई सभी भरनी अनिवार्य होंगी। फार्म भरते समय नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, वर्तमान व स्थाई पता आदि ध्यानपूर्वक भरें ताकि बाद में किसी तरह का बदलाव न करवाना पड़े।

        दस्तावेज अपलोड: फार्म नंबर छह के साथ आवेदक को पासपोर्ट साइज फोटो, आयु प्रमाण पत्र (जैसे 10वीं का सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, पैन कार्ड या पासपोर्ट) और निवास प्रमाण पत्र (बिजली बिल, राशन कार्ड, बैंक पासबुक आदि) की कॉपी अपलोड करें। फॉर्म सबमिट करने के बाद एक रेफरेंस आईडी मिलेगी, जिससे आप अपने आवेदन का स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं।

        ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया: जो युवा ऑनलाइन प्रक्रिया में सहज नहीं हैं, वे अपने नजदीकी बीएलओ से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा ERO के दफ्तर जाकर हार्ड कॉपी में फॉर्म-6 प्राप्त कर सकते हैं। फॉर्म को पूरी तरह भरकर आवश्यक दस्तावेजों की फोटोकॉपी सेल्फ अटेस्ट करके BLO या ERO दफ्तर में 12 सितंबर 2026 से पहले जमा कराएं।

  • फर्रुखाबाद में बाढ़ पीड़ितों का दर्द जानेंगे मुख्यमंत्री

    फर्रुखाबाद में बाढ़ पीड़ितों का दर्द जानेंगे मुख्यमंत्री

    फर्रुखाबाद

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को फर्रुखाबाद पहुंचेंगे। वह बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर वास्तुस्थिति का जायजा लेंगे। इसके बाद बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात कर उनकी परेशानियों को भी जानेंगे। मुख्यमंत्री यहां राहत व आवश्यक सामग्री भी वितरित करेंगे। 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को लखनऊ से फर्रुखाबाद पहुंचेंगे। इस दौरान वह बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के हाल से अवगत होंगे। सुबह 11:30 बजे उनका हेलीकॉप्टर फतेहगढ़ स्थित पुलिस लाइन परेड ग्राउंड उतरेगा।

    मुख्यमंत्री सुबह 11:40 बजे पुलिस लाइन में बने बाढ़ राहत शिविर पहुंचेंगे। वहां राहत सामग्री वितरित करेंगे। यहां जनपद के बाढ़ पीड़ित एक हजार परिवारों को आवश्यक सामग्री और राशन समेत राहत किट प्रदान करेंगे। साथ ही बाढ़ से बेघर हुए परिवारों को नए मकान बनाने के लिए भूमि आवंटन प्रमाण पत्र और आपदा मोचक निधि से आर्थिक सहायता के चेक भी सौंपेंगे। 

    यहां आमजन से संवाद के उपरांत मुख्यमंत्री मथुरा रवाना हो जाएंगे।

  • केयर टेकर्स के हितों और सम्मान के प्रति सरकार संवेदनशील: ब्रजेश पाठक

    केयर टेकर्स के हितों और सम्मान के प्रति सरकार संवेदनशील: ब्रजेश पाठक

    लखनऊ

    विधानसभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बुधवार को प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में संचालित सामुदायिक शौचालयों की सफाई एवं बेहतर प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले केयर टेकर्स से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों को लेकर आयोजित बैठक को संबोधित किया।
    उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार केयर टेकर्स के हितों, सम्मान एवं सुविधाओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने में केयर टेकर्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके योगदान से स्वच्छ, स्वस्थ एवं सशक्त ग्रामीण उत्तर प्रदेश के संकल्प को निरंतर गति मिल रही है।
    उन्होंने कहा कि सामुदायिक शौचालयों के बेहतर संचालन और स्वच्छता व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए केयर टेकर्स पूरी निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रहे हैं। सरकार उनके कार्यों को सम्मान देते हुए उनकी समस्याओं के समाधान और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
    बैठक में केयर टेकर्स से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा उनके हितों से संबंधित आवश्यक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
    इस अवसर पर मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार ओम प्रकाश राजभर, सदस्य, विधान परिषद डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल, जन कल्याण केयर टेकर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार, प्रदेश अध्यक्ष (महिला प्रकोष्ठ) सविता सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

    इन मुद्दों पर हुई चर्चा
    बैठक में मुख्य रूप से केयर टेकर्स का मानदेय सीधे उनके बैंक खातों के माध्यम से भुगतान, रुके मानदेय का शीघ्र भुगतान एवं मानदेय में बढ़ोतरी को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा की गई। डिप्टी सीएम ने बताया कि इस संबंध में जल्द ही सरकार द्वारा आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।

  • इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) की जांच सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क कराएं, निजी संस्थान निर्धारित शुल्क से अधिक न लें: मुख्यमंत्री योगी

    इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) की जांच सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क कराएं, निजी संस्थान निर्धारित शुल्क से अधिक न लें: मुख्यमंत्री योगी

    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) की जांच सभी जिला अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी, मेडिकल कॉलेजों सहित सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क कराए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अधिक मामलों वाले जिलों में निगरानी और उपचार व्यवस्था को और मजबूत किया जाए तथा अस्पतालों में दवा, जांच और आइसोलेशन की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित रहे। गंभीर मरीजों के लिए अलग आईसीयू वार्ड तैयार किए जाएं। मुख्यमंत्री ने एच1एन1 की रोकथाम और उपचार के संबंध में विस्तृत गाइडलाइन जारी करने तथा टेलिकन्सल्टेशन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के भी निर्देश दिए।

    बुधवार को उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक एवं राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह की उपस्थिति में प्रदेश में इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) एवं सीजनल इन्फ्लुएंजा की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीजों की समय से पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जाए। जहां भी मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, वहां निगरानी बढ़ाने के साथ तत्काल आवश्यक चिकित्सा व्यवस्थाएं की जाएं। निजी चिकित्सा संस्थानों द्वारा जांच के लिए पूर्व में निर्धारित शुल्क से अधिक शुल्क न लिया जाए, यह भी सुनिश्चित किया जाए।

    बैठक में विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1), इन्फ्लुएंजा-ए वायरस की एक प्रजाति है और यह सीजनल इन्फ्लुएंजा की श्रेणी में आता है। इसका संक्रमण मुख्य रूप से खांसी और छींक से निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों के माध्यम से फैलता है। बुखार, नाक बहना, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द, ठंड लगना और आंखों में लालिमा इसके प्रमुख लक्षण हैं। बताया गया कि 2 सितंबर तक प्रदेश में इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) के 685 प्रयोगशाला-पुष्ट मामले सामने आए हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सामान्य लक्षण वाले मरीजों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार घर पर आराम और सेल्फ आइसोलेशन की सलाह दी जाए, जबकि गंभीर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बच्चों, गर्भवती महिलाओं, 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। एएनएम, आशा एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के सहयोग से सघन जांच अभियान चलाकर संभावित मरीजों की पहचान करने तथा जरूरत के अनुसार होम क्वारंटीन, मास्क और संक्रमण से बचाव के अन्य उपायों की जानकारी एवं सहायता उपलब्ध कराने को कहा। अस्पतालों में इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण वाले मरीजों के लिए अलग काउंटर बनाने के भी निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव न बढ़े और गंभीर मरीजों को समय से उपचार मिल सके, इसके लिए मरीजों की स्थिति के अनुसार रेफरल की व्यवस्था की जाए। गंभीर लक्षण वाले मरीजों को ही अस्पताल भेजने के साथ ऐसे मरीजों के लिए समुचित उपचार और आईसीयू की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विशेषज्ञों ने बताया कि सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, अत्यधिक सुस्ती, रक्तचाप कम होना, खून मिला बलगम अथवा नाखूनों का नीला पड़ना गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं। बच्चों में लगातार तेज बुखार, भोजन लेने में असमर्थता, झटके आना, तेज सांस चलना या सांस लेने में कठिनाई तथा पहले से मौजूद बीमारी की स्थिति बिगड़ना भी गंभीर संकेत हैं। 

    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में ओसेल्टामिविर कैप्सूल और सिरप तथा एच1एन1 वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता है। जनपदीय चिकित्सालयों में हेल्प डेस्क, जांच के लिए नमूना संग्रह और पृथक फ्लू ओपीडी की व्यवस्था है। सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में भी फ्लू हेल्प डेस्क, आवश्यक जांच, दवाओं और आइसोलेशन बेड की व्यवस्था उपलब्ध है।  

    निदेशक एसजीपीजीआई डॉ. आरके धीमान, कुलपति केजीएमयू डॉ. सोनिया नित्यानंद और राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने मुख्यमंत्री को अपने-अपने संस्थानों में उपलब्ध उपचार, टेस्टिंग और दवाओं की उपलब्धता के संबंध में अवगत कराया। बैठक में बताया गया कि चिकित्सा महाविद्यालयों में फ्लू ओपीडी और आइसोलेशन बेड की व्यवस्था है तथा जांच के लिए पर्याप्त आरटीपीसीआर किट उपलब्ध हैं।  

    मुख्यमंत्री ने कहा कि संक्रमण की रोकथाम के लिए जनजागरूकता अभियान को प्रभावी बनाया जाए। क्या करना है और क्या नहीं करना है, इसकी सरल, सही और तथ्यपरक जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाए, ताकि अनावश्यक पैनिक की स्थिति न बने। अस्पतालों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर हाथों की स्वच्छता, खांसी और छींक के दौरान सावधानी तथा संक्रमण से बचाव के उपायों के बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि एच1एन1 की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी जिले में मामलों में बढ़ोतरी दिखाई देने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि बीमारी की समय पर पहचान, जरूरतमंद मरीज को त्वरित उपचार, पर्याप्त चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता और लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना संक्रमण से निपटने की प्रभावी रणनीति है।

  • बॉन्डेड डॉक्टर्स का लागू होगा समान वेतनमान: ब्रजेश पाठक

    बॉन्डेड डॉक्टर्स का लागू होगा समान वेतनमान: ब्रजेश पाठक

    लखनऊ

    प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में कार्यरत बॉन्डेड डॉक्टर्स की वेतन संबंधी मांगों को लेकर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक बुधवार को हजरतगंज स्थित अटल चौक पहुंचे। बारिश के बीच धरना स्थल पर पहुंचे उप मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से भेंट कर उनकी समस्याओं और मांगों को आत्मीयता से सुना एवं समान वेतनमान लागू करने हेतु आश्वस्त किया।  

    बॉन्डेड डॉक्टर्स द्वारा वेतन में असमानता और वेतन विसंगति का मुद्दा उठाए जाने पर उप मुख्यमंत्री ने समान वेतनमान लागू करने की घोषणा की। उन्होंने चिकित्सकों को आश्वस्त किया कि उनकी मांग के संबंध में कल तक शासनादेश जारी कर दिया जाएगा। डिप्टी सीएम ने इस संबंध में मौके से ही संबंधित अधिकारियों को फोन कर आवश्यक निर्देश दिए। 

    डिप्टी सीएम के इस कथन से बॉन्डेड चिकित्सकों के चेहरे खिल गए। इस दौरान ब्रजेश पाठक ने कहा कि “आप सभी मेरे परिवार का हिस्सा हैं। आपका सम्मान, अधिकार और हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। हर परिस्थिति में प्रदेश सरकार और व्यक्तिगत रूप से मैं आपके साथ मजबूती से खड़ा हूं।” उप मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद बॉन्डेड डॉक्टर्स ने अपनी मांगों के समाधान की दिशा में उनकी पहल का स्वागत किया।