Category: राज्य

  • गले में फंसी चाइना डोर ने काटी गर्दन, लड़की के 10 इंच तक लगा गहरा जख्म

    गले में फंसी चाइना डोर ने काटी गर्दन, लड़की के 10 इंच तक लगा गहरा जख्म

    लुधियाना.

    प्रशासनिक पाबंदी और तमाम दावों के बावजूद इंसानी जिंदगियों के लिए काल बनी 'चाइना डोर' की अवैध बिक्री और उपयोग थमने का नाम नहीं ले रहा है। शिमलापुरी इलाके में स्थित व्यस्त क्वालिटी चौक के नजदीक एक और दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है, जहां काम खत्म कर घर लौट रही 22 वर्षीय कंप्यूटर ऑपरेटर युवती के गले में अचानक चाइना डोर उलझ गई।

    तेज धार वाली इस खूनी डोर से युवती की गर्दन पर करीब 10 इंच लंबा और आधा इंच गहरा कट लग गया, जिससे वह बुरी तरह लहूलुहान हो गई। राहगीरों की तत्परता से युवती को तुरंत सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने समय रहते इलाज कर उसकी जान बचा ली। जानकारी देते हुए मुस्कान (22) ने सिविल अस्पताल में खौफनाक मंजर बयां करते हुए बताया कि वह एक निजी दफ्तर में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत है। बुधवार शाम को वह अपना रोजाना का काम खत्म कर घर लौट रही थी। जैसे ही वह शिमलापुरी के क्वालिटी चौक के पास पहुंची, रास्ते में हवा में लटकती हुई चाइना डोर अचानक उसके गले में आ फंसी।मुस्कान ने बताया कि इससे पहले कि वह कुछ समझ पाती या हाथ से डोर को हटाने का प्रयास करती, धारदार डोर ने उसकी गर्दन को चीर दिया। गर्दन कटते ही खून का फव्वारा फूट पड़ा और वह दर्द से चीख उठी।

    सड़क पर युवती को लहूलुहान हालत में तड़पता देख आसपास मौजूद राहगीरों और दुकानदारों ने तुरंत इंसानियत दिखाते हुए उसे संभाला और बिना देर किए सिविल अस्पताल पहुंचाया। आपातकालीन वार्ड में तैनात डॉक्टरों ने तुरंत खून का बहाव रोकते हुए जख्म पर टांके लगाए और मरहम-पट्टी की। डॉक्टरों के मुताबिक, गनीमत यह रही कि डोर सांस की नली या मुख्य नस (कैरोटिड आर्टरी) तक नहीं पहुंची, जिससे एक बड़ा जानी नुकसान टल गया।

    प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने युवती को घर भेजते हुए मुकम्मल आराम की सलाह दी है। इस दिल दहला देने वाले हादसे ने एक बार फिर शहर में पुलिस व प्रशासन की मुस्तैदी पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। प्रशासन कागजों में भले ही चाइना डोर की बिक्री और भंडारण पर पूर्ण प्रतिबंध के दावे करता रहे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि महानगर के कई अंदरूनी इलाकों में यह जानलेवा डोर बेखौफ होकर बेची और उड़ाई जा रही है।

    'राहगीरों के लिए मौत का फंदा बनी डोर, तुरंत लगे पूर्ण रोक'
    हादसे के बाद गहरा सदमा झेल रही मुस्कान ने कड़ा रोष जाहिर करते हुए कहा कि सड़कों पर चलने वाले बेकसूर राहगीरों के लिए यह डोर साक्षात मौत का फंदा बन चुकी है। उसने जिला प्रशासन और पुलिस कमिश्नर से हाथ जोड़कर अपील की है कि चाइना डोर बेचने और इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ सिर्फ औपचारिकता न की जाए, बल्कि कड़े गैर-जमानती मुकदमों के तहत ठोस कार्रवाई कर खूनी कारोबार को जड़ से खत्म किया जाए, ताकि अन्य बेकसूर की जिंदगी इस तरह दांव पर न लगे। 

  • UP में OBC युवाओं को मिल रही डिजिटल उड़ान, 31 हजार से अधिक युवाओं ने हासिल की कंप्यूटर ट्रेनिंग

    UP में OBC युवाओं को मिल रही डिजिटल उड़ान, 31 हजार से अधिक युवाओं ने हासिल की कंप्यूटर ट्रेनिंग

    योगी सरकार की डिजिटल पहल, 31 हजार से ज्यादा ओबीसी युवा बन रहे तकनीकी दक्ष

    निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण से युवाओं को मिल रहा रोजगारपरक कौशल बढ़ाने का अवसर

    ओ-लेवल में 24,240 और सीसीसी में 7,362 प्रशिक्षणार्थी ले रहे प्रशिक्षण

    नाइलिट से मान्यता प्राप्त संस्थानों के जरिए युवाओं को दी जा रही निःशुल्क तकनीकी शिक्षा

    लखनऊ, 
    उत्तर प्रदेश की योगी सरकार युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और रोजगार के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दे रही है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की निशुल्क ओ-लेवल एवं सीसीसी कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी युवक-युवतियों के लिए तकनीकी शिक्षा का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना के तहत इस वर्ष 31 हजार से ज्यादा प्रशिक्षणार्थी कंप्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सरकार की इस पहल से युवाओं को आधुनिक तकनीकी ज्ञान और रोजगारपरक कौशल हासिल करने का अवसर मिल रहा है। 

    70 हजार से ज्यादा आये थे आवेदन

    वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस वर्ष 31,602 प्रशिक्षणार्थी प्रतिभाग कर रहे हैं। जिसमें सबसे ज्यादा ओ-लेवल में 24,240 और सीसीसी में 7,362 प्रशिक्षणार्थी शामिल हैं। 11 अगस्त से प्रशिक्षण शुरू हो चुका है। वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 70 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें सबसे अधिक आवेदन ओ-लेवल प्रशिक्षण के लिए आये थे। 

    योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी युवाओं को बिना किसी शुल्क के आधुनिक कंप्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उनकी तकनीकी दक्षता बढ़ाने के साथ रोजगार के अवसरों को भी मजबूती मिल रही है। योजना का लाभ उन ओबीसी अभ्यर्थियों को दिया जा रहा है, जिन्होंने इंटरमीडिएट या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त की है। इसके साथ ही इनके अभिभावकों की वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे कम है।

    338 प्रशिक्षण संस्थानों का मजबूत नेटवर्क

    प्रशिक्षण भारत सरकार के राष्ट्रीय इलेक्ट्रानिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नाइलिट) से मान्यता प्राप्त संस्थानों के माध्यम से कराया जा रहा है। प्रदेश में वर्तमान में 338 प्रशिक्षण संस्थान योजना से जुड़े हैं। इनमें 63 संस्थान केवल ओ-लेवल, 39 सीसीसी और 236 संस्थान दोनों पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं। इससे प्रदेश के अधिकांश जिलों में युवाओं को अपने नजदीक ही कंप्यूटर प्रशिक्षण हासिल करने की सुविधा मिल रही है। सरकार की ओर से ओ-लेवल प्रशिक्षण के लिए प्रति छात्र 15 हजार रुपये और सीसीसी के लिए 3,500 रुपये तक का भुगतान किया जाता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं पर प्रशिक्षण का आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।

    डिजिटल शिक्षा से रोजगार की ओर बढ़ रहे युवा

    योगी सरकार की यह पहल तकनीकी शिक्षा को गांव और कस्बों तक पहुंचाने के साथ युवाओं को बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। निःशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण, व्यापक संस्थागत नेटवर्क और बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी इस योजना को रोजगारोन्मुखी शिक्षा की दिशा में सरकार की एक सराहनीय पहल बना रही है।

    युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना सरकार की प्राथमिकता

    पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि इस वर्ष 31 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थी योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य युवाओं को डिजिटल ज्ञान और रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के लिए 338 संस्थानों का नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे अधिक से अधिक युवाओं को उनके नजदीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण की सुविधा मिल सके।

  • पटियाला में नशे में लड़की का वीडियो सामने आने से हड़कंप, जांच में जुटी पुलिस

    पटियाला में नशे में लड़की का वीडियो सामने आने से हड़कंप, जांच में जुटी पुलिस

    पटियाला.

    पटियाला के लकड़ मंडी इलाके की एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वायरल वीडियो में कथित तौर पर एक लड़की बेसुध या बेहोशी की हालत में दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद दावा किया जा रहा है कि लड़की नशे की हालत में थी।

    इस वायरल वीडियो को लेकर पटियाला पुलिस की ओर से भी स्पष्टीकरण जारी किया गया है। पुलिस के मुताबिक, जिस स्थान की यह वीडियो बताई जा रही है, वहां पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की, लेकिन उस समय वहां कोई भी लड़की मौजूद नहीं मिली। पुलिस अब वायरल वीडियो में दिखाई दे रही लड़की की तलाश कर रही है। पुलिस का कहना है कि यदि लड़की की पहचान कर उसे ढूंढ लिया जाता है तो उसका मेडिकल टेस्ट करवाया जाएगा। अगर जांच के दौरान उसके नशे की हालत में होने की पुष्टि होती है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस ने यह भी कहा है कि जांच के दौरान यदि कोई अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर भी उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल वायरल वीडियो में दिखाई दे रही लड़की के नशे की हालत में होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि वायरल वीडियो के पीछे वास्तविक मामला क्या है।

  • Homebuyers के हक में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख, ब्रोशर के वादे सिर्फ मार्केटिंग नहीं; डेवलपर को देना होगा पूरा प्रोजेक्ट

    Homebuyers के हक में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख, ब्रोशर के वादे सिर्फ मार्केटिंग नहीं; डेवलपर को देना होगा पूरा प्रोजेक्ट

    नई दिल्ली

    अक्सर ऐसा देखा जाता है कि बिल्डर कोई भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट शुरू करते वक्त ब्रोशर, पंपलेट या वेबसाइट में बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन बाद में इसे मार्केटिंग बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं. ऐसे ही एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर के एक नामी बिल्डर को कड़ी फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ब्रोशर में किए वादे सिर्फ मार्केटिंग नहीं हैं, उसी के मुताबिक प्रोजेक्ट देना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट कंपनियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रोजेक्ट के ब्रोशर में संभावित होमबायर्स से किए गए वादों को महज मार्केटिंग मैटेरियल बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 

    रियल एस्टेट डेवलपर की जिम्मेदारी है कि वह आवासीय परियोजना का निर्माण और डिलीवरी वैसे ही करे, जिनका वादा खरीदारों से किया गया था. गुरुग्राम के DLF होम डेवलपर्स ‘द प्राइमस' के प्रोजेक्ट पर सुनवाई के दौरान अदालत ने ये टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट ने मूल योजना में प्रस्तावित 24 मीटर चौड़ी रोड में लगातार बदलावों पर कड़ी नाराजगी जताई. अदालत ने दो टूक कहा कि किसी आवासीय परियोजना के ब्रोशर में सुविधा, लेआउट या अन्य वादे केवल ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नहीं माने जा सकते. डेवलपर को परियोजना को उसी तौर पर विकसित करना होगा जैसा खरीदारों के सामने पेश किया गया था। 

    सड़क में बदलाव को मामूली नहीं माना जा सकता
    जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा कि सड़क से संबंधित बदलाव मामूली नहीं कहे जा सकते. ये काफी मायने रखता है. सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर अगली सुनवाई तक प्रोजेक्ट को ब्रोशर के वादे तहत कदम नहीं उठाता तो वह उचित आदेश पारित करेगा. दस्तावेजों के मुताबिक, प्रोजेक्ट में 24 मीटर चौड़ी रोड के लिए 147 मीटर लंबे हिस्से में से करीब 52 मीटर को ग्रीन एरिया बना दिया गया है. वहीं सड़क का एक बड़ा हिस्सा सोसायटी के लोगों और मेहमानों की पार्किंग के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है.अदालत ने कहा कि लगभग 100 मीटर की सड़क के करीब 66 फीसदी हिस्से का इस्तेमाल तो ग्रीन एरिया या पार्किंग के तौर पर इस्तेमाल हो रहा था। 

    24 मीटर चौड़ी सड़क का अधूरा वादा
    पीठ ने नाराजगी जताई कि कई मौके दिए जाने के बाद भी बिल्डर ने खामी को सुधारा. जजों ने कहा कि ये समझ से परे है कि प्रोजेक्ट को ब्रोशर में किए वादों के तहत पूरा करने के लिए कई मौके दिए गए, लेकिन अभी तक हालात नहीं बदले. सुप्रीम कोर्ट का ये ऑर्डर सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट के बाद आया. कोर्ट ने 24 मीटर चौड़ी सड़क और प्रोजेक्ट का अन्य मामलों में अनुपालन न होने कथित अनियमितताओं से जुड़ी अन्य शिकायतों पर प्रारंभिक तथ्य-जांच करने का निर्देश CBI को दिया था। 

    सीबीआई ने दाखिल की थी स्टेटस रिपोर्ट
    CBI ने स्टेटस रिपोर्ट के पहले प्रोजेक्ट के नक्शों, तस्वीरों और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निस्संदेह मूल परियोजना और ब्रोशर में जैसी सड़क दिखाई गई थी, वैसी रोड प्रोजेक्ट में मौजूद नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने रोड के लिए जरूरी जमीन न देने और लापरवाही को लेकर हरियाणा सरकार और उसके अफसरों पर भी नाराजगी जताई. कोर्ट ने सोसायटी के निवासियों की RWA वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव की दिक्कतों पर एक्शन न लेने पर भी सरकारी अफसरों के प्रति असंतोष दिखाया। 

  • Bihar Holding Tax: 1 अक्टूबर से नया नियम, बकाये पर लगेगा 1.5% चक्रवृद्धि ब्याज

    Bihar Holding Tax: 1 अक्टूबर से नया नियम, बकाये पर लगेगा 1.5% चक्रवृद्धि ब्याज

    भागलपुर.

    भागलपुर नगर निगम ने होल्डिंग टैक्स समेत विभिन्न शुल्कों की वसूली में तेजी लाने के उद्देश्य से सितंबर को 'राजस्व वसूली माह' घोषित किया है। निगम प्रशासन शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर माइकिंग करवाकर नागरिकों को जागरूक कर रहा है।

    चेतावनी भी दी गई है कि सितंबर बीतते ही बकायेदारों की जेब पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। 1 अक्टूबर से बकाया होल्डिंग टैक्स पर 1.5 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से चक्रवृद्धि ब्याज वसूला जाएगा। निगम की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यदि करदाता चालू माह यानी सितंबर में अपने बकाये होल्डिंग टैक्स का भुगतान कर देते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त ब्याज नहीं देना होगा। नियमों के तहत अप्रैल से जून तक एकमुश्त टैक्स जमा करने पर 5 प्रतिशत की छूट का प्रविधान था। अब यदि सितंबर की समय सीमा चूक गई, तो अगले महीने की पहली तारीख से 1.5 फीसदी चक्रवृद्धि ब्याज का मीटर चालू हो जाएगा। इसी वित्तीय दंड से बचने के लिए निगम ने शहरवासियों से तत्काल टैक्स जमा करने का आग्रह किया है।

    सरकारी संस्थानों और बड़े बकायेदारों पर शिकंजा
    राजस्व घाटे की भरपाई के लिए निगम ने इस बार सरकारी महकमों और निजी बड़े बकायेदारों पर विशेष रूप से फोकस किया है। बकाया रखने वाले तमाम सरकारी कार्यालयों और संस्थानों की विस्तृत सूची तैयार कर ली गई है। शाखा प्रभारियों को वार्डवार रोस्टर सौंपते हुए वसूली का जिम्मा दिया गया है। पिछले दो दिनों से शाखा प्रभारी विभिन्न सरकारी दफ्तरों का दौरा कर टैक्स बिल (विपत्र) थमा रहे हैं। साथ ही, टैक्स संग्राहकों को बड़े बकायेदारों के घर-घर जाकर विपत्र हस्तगत कराने और मौके पर ही राशि जमा कराने का निर्देश जारी किया गया है। नगर निगम सितंबर को मना रहा राजस्व वसूली माह; प्रमुख चौक-चौराहों पर माइकिंग कराकर लोगों से टैक्स जमा करने की अपील की जा रही है-

    • सितंबर में होल्डिंग टैक्स चुकाने पर मिलेगी ब्याज से छूट, 1 अक्टूबर से बकाया राशि पर लगेगा प्रतिमाह 1.5 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज
    • सरकारी संस्थानों और बड़े बकायेदारों पर विशेष शिकंजा; वार्डवार रोस्टर बनाकर घर-घर व दफ्तरों में बांटे जा रहे बिल
    • अब तक 15 करोड़ रुपये की हो चुकी है वसूली; 25 सितंबर तक शत-प्रतिशत टैक्स संग्रह का रखा गया लक्ष्य

    25 सितंबर तक शत-प्रतिशत का लक्ष्य
    नगर निगम को चालू वित्तीय वर्ष में अब तक होल्डिंग टैक्स मद में लगभग 15 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है। निगम प्रशासन ने आगामी 25 सितंबर तक शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित करने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए सभी राजस्व कर्मियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी गई है। निगम का पूरा प्रयास है कि शहरवासी 30 सितंबर से पहले अपने करों का निपटारा कर लें, जिससे वे 1 अक्टूबर से प्रभावी होने वाले चक्रवृद्धि ब्याज के दायरे से बच सकें।

  • पंजाब के छात्रों के लिए बड़ी सुविधा, अब घर बैठे ऑर्डर कर सकेंगे PSEB की किताबें

    पंजाब के छात्रों के लिए बड़ी सुविधा, अब घर बैठे ऑर्डर कर सकेंगे PSEB की किताबें

    चंडीगढ़.

    पंजाब के विद्यार्थियों और माता-पिता की सुविधा के लिए पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड, मोहाली और डाक विभाग, पंजाब रीजन, चंडीगढ़ के बीच एक अहम समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत क्लास 1 से 12 तक की पाठ्यपुस्तकें भारतीय डाक के जरिए सीधे विद्यार्थियों के घर पहुंचाई जाएंगी।

    1 सितंबर को हुए इस एग्रीमेंट के तहत बोर्ड द्वारा 'पुस्तक पोर्टल' नामक एक ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है। इस पोर्टल के जरिए विद्यार्थी, माता-पिता और स्कूल प्रबंधक आसानी से किताबें खरीद सकते हैं और ऑर्डर मिलने के बाद, डाक विभाग अपने बड़े नेटवर्क के जरिए इन किताबों को घर-घर पहुंचाएगा। इससे पहले ऑनलाइन ऑर्डर की गई किताबों के खरीदारों को बोर्ड के निर्धारित जिला दफ्तरों में खुद जाकर प्राप्त करनी पड़ती थी। अब नई व्यवस्था से न सिर्फ घर बैठे किताबें मिलेंगी बल्कि पोर्टल के जरिए ऑर्डर करने पर 15 परसेंट का डिस्काउंट भी मिलेगा।

    इस कदम से खासकर गांव और दूर-दराज के इलाकों के स्टूडेंट्स को बहुत फायदा होगा। अब किताबें लेने के लिए ऑफिस के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, जिससे लोगों का कीमती समय और आने-जाने का खर्च बचेगा। इस अहम समझौते के मौके पर पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन अमरपाल सिंह (रिटायर्ड IAS), बोर्ड सेक्रेटरी सेक्रेटरी सिंह बल, चंडीगढ़ डिवीजन के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पोस्ट ऑफिस कुमार संजीव (IPOS) और BPC चंडीगढ़ इंचार्ज किशोरी लाल समेत दोनों डिपार्टमेंट के कई सीनियर अधिकारी मौजूद थे।

  • हरियाणा में बदला मौसम का मिजाज, 6 जिलों में आज वर्षा का अलर्ट; मानसून हुआ एक्टिव

    हरियाणा में बदला मौसम का मिजाज, 6 जिलों में आज वर्षा का अलर्ट; मानसून हुआ एक्टिव

    हिसार.

    हरियाणा में मानसून आज से एक्टिव होने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी तीन दिनों तक प्रदेश में अच्छी बारिश होने के आसार हैं। हालांकि मध्यप्रदेश में एक नया चक्रवातीय सर्कुलेशन बना है, जो मानसूनी हवाओं को अपनी तरफ खींच रहा है।

    इससे हरियाणा में पश्चिमी और उत्तरी हवाएं मिल रही हैं। इससे हरियाणा में मानसूनी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग ने आज पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा 11 जिलों में सिरसा, हिसार फतेहाबाद, जींद, भिवानी, रोहतक, झज्जर, चरखीदादरी, कैथल, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। बाकि हिस्सों में छिटपुट बूंदाबांदी हो सकती है। मौसम विभाग ने आगामी 6 सितंबर तक मानसून सक्रिय रहने और अधिकांश इलाकों में बारिश की संभावना जताई है।

    हरियाणा में अगले 5 दिनों के लिए यलो अलर्ट
    मौसम केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार, उत्तरी और पूर्वी हरियाणा पंचकुला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने इन इलाकों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। दक्षिण व पश्चिम हरियाणा हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी में छिटपुट या हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। 5 और 6 सितंबर को दक्षिण-पूर्वी हरियाणा के जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

    हिसार सबसे गर्म, पलवल में रातें सबसे ठंडी
    हरियाणा में पिछले कई दिनों से मानसून कमजोर पड़ने के कारण तापमान में बढ़ोतरी देखी जा रही है। हिसार लगातार पूरे प्रदेश में सबसे गर्म बना हुआ है। यहां अधिकतम तापमान 37.1°C दर्ज किया गया। वहीं पलवल में रात का पारा 24.5°C दर्ज हुआ, जो राज्य में सबसे कम है। अंबाला में तापमान 34.1°C, करनाल में 34.2°C, रोहतक में 31.9°C, गुरुग्राम में 32.0°C और भिवानी में 35.5°C दर्ज किया गया। मौसम विभाग का कहना है मानसून सक्रिय रहने से दिन के तापमान में गिरावट आ सकती है।

  • लुधियाना में पासपोर्ट फर्जीवाड़ा, दूसरे के दस्तावेजों से दो-दो पासपोर्ट बनवाकर विदेश गए

    लुधियाना में पासपोर्ट फर्जीवाड़ा, दूसरे के दस्तावेजों से दो-दो पासपोर्ट बनवाकर विदेश गए

    लुधियाना.

    किसी अन्य व्यक्ति के निजी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी पहचान के आधार पर पासपोर्ट जारी करवाने और उन पर धड़ल्ले से विदेश यात्राएं करने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है।

    शातिर आरोपी ने शिकायतकर्ता के पहचान पत्रों, उसके माता-पिता और यहां तक कि उसकी पत्नी के नाम का भी दुरुपयोग कर अपने लिए 2-2 पासपोर्ट बनवा लिए और विदेश की उड़ानें भरता रहा। 

    पहले 1998 में जारी करवाया पासपोर्ट 
    शिकायतकर्ता बलविंदर सिंह द्वारा दी गई दरखास्त की गहन पुलिस पड़ताल के बाद आरोपी मक्खन सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता बलविंदर सिंह ने पुलिस को दिए बयानों में खुलासा किया कि आरोपी मक्खन सिंह ने उसके मूल पहचान दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया। आरोपी ने इन दस्तावेजों के आधार पर 11 नवंबर 1998 को अपने नाम पर एक पासपोर्ट (नंबर: A 6577757) जारी करवा लिया, जिसकी वैधता अवधि 10 नवंबर 2008 तक थी। आरोपी की जालसाजी यहीं नहीं रुकी। पहले पासपोर्ट की म्याद खत्म होने के बाद उसने उसी पुराने पासपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर एक और नया पासपोर्ट बनवा लिया।

    दस्तावेजों पर खुद की पगड़ी वाली फोटो लगाकर की जालसाजी,
    इस नए पासपोर्ट में आरोपी ने न केवल शिकायतकर्ता के नाम का दुरुपयोग किया, बल्कि शिकायतकर्ता के माता-पिता और उसकी पत्नी के नाम को भी अपने दस्तावेजों में गैर-कानूनी ढंग से इस्तेमाल किया। हैरानी की बात यह है कि सारे कागजात और पारिवारिक विवरण शिकायतकर्ता बलविंदर सिंह के थे, लेकिन पासपोर्ट पर आरोपी मक्खन सिंह ने अपनी खुद की पगड़ी वाली फोटो लगाई, जो पासपोर्ट पर साफ दिखाई दे रही है। इस जाली पहचान और फर्जी पासपोर्ट के दम पर आरोपी कई बार विदेश यात्राएं भी कर चुका है।

    शिकायतकर्ता को जब इस गंभीर जालसाजी की भनक लगी, तो उसने तुरंत पुलिस के समक्ष गुहार लगाई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दर्ज मुकदमे के आधार पर आरोपी मक्खन सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस दोनों पासपोर्टों का आधिकारिक रिकॉर्ड और इमिग्रेशन हिस्ट्री जुटाने के लिए संबंधित पासपोर्ट कार्यालय से संपर्क साध रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द ही काबू कर आगे की गहन पूछताछ की जाएगी।

  • चंडीगढ़ का बदलेगा प्लान! मास्टर प्लान-2031 में संशोधन पर आज शाह की अहम बैठक, जानें क्या-क्या बदल सकता है

    चंडीगढ़ का बदलेगा प्लान! मास्टर प्लान-2031 में संशोधन पर आज शाह की अहम बैठक, जानें क्या-क्या बदल सकता है

    चंडीगढ़
     शहर के भविष्य से जुड़े कई अहम फैसलों पर आज दिल्ली में मंथन होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में चंडीगढ़ के मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित बदलावों के साथ पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटियों को स्थायी मालिकाना हक देने, व्यावसायिक व औद्योगिक संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड करने और मेयर का कार्यकाल एक वर्ष से बढ़ाकर ढाई वर्ष करने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इन फैसलों का सीधा असर शहर के विकास, संपत्ति व्यवस्था और नगर निगम के कामकाज पर पड़ सकता है।

    यूटी प्रशासन की ओर से गृह सचिव रामनदीप बराड़, मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद, वित्त सचिव दीपर्वा लाकरा और उपायुक्त निशांत कुमार यादव के बैठक में शामिल होने की संभावना है। अधिकारी प्रस्तावों पर प्रस्तुति देंगे। सूत्रों के मुताबिक बैठक में प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के साथ इनमें बदलाव या नए सुझाव भी दिए जा सकते हैं।

    मास्टर प्लान में ऊंची इमारतों का रास्ता होगा साफ
    मास्टर प्लान-2031 में संशोधन को लेकर प्रशासन ने ड्राफ्ट अधिसूचित कर लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित बदलावों में चिन्हित परिधीय और फेज-3 क्षेत्रों में एफएआर बढ़ाकर 3.0 करने का प्रावधान है। वहीं चयनित बाहरी सेक्टरों, फेज-3 और औद्योगिक क्षेत्रों में 30 मीटर तक ऊंची इमारतों को मंजूरी देने का प्रस्ताव है।

    औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 और फेज-2 में बड़े प्लाटों को विभाजित करने, फेज-1 से बाहर स्कूल-कालेज और सांस्कृतिक संस्थानों के लिए एफएआर व ऊंचाई सीमा में राहत देने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा चिन्हित इलाकों में हाईराइज और मिश्रित भू-उपयोग के जरिए बढ़ती आवासीय जरूरतों को पूरा करने की योजना है।

    प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, गृह मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद प्रस्तावित संशोधनों को हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद तय प्रक्रिया के तहत मास्टर प्लान में बदलाव की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

    फ्रीहोल्ड से करोड़ों की संपत्तियां होंगी अन-लॉक

    लीजहोल्ड व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने का प्रस्ताव भी बैठक में महत्वपूर्ण रहेगा। प्रशासन का मानना है कि इससे शहर में करोड़ों रुपये की संपत्तियां अनलाक होंगी। संपत्ति मालिकों को राहत मिलने के साथ प्रशासन का राजस्व भी बढ़ेगा और कारोबार करना आसान होगा। यूटी प्रशासन ने मई में इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर गृह मंत्रालय को भेजा था।

    पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटियों को मालिकाना हक की उम्मीद
    पुनर्वास कालोनियों के अलॉटियों को स्थायी मालिकाना हक देने का प्रस्ताव भी लंबे समय से लंबित है। प्रशासन ने इस संबंध में भी गृह मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा है। इस पर फैसला होने से हजारों परिवारों की संपत्तियों से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

    मेयर का कार्यकाल ढाई साल करने पर भी नजर
    मेयर का कार्यकाल एक वर्ष से बढ़ाकर ढाई वर्ष करने का प्रस्ताव भी बैठक में अहम रहेगा। नगर निगम के मौजूदा सदन का कार्यकाल समाप्त होने की ओर है और आने वाले महीनों में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। ऐसे में मेयर का कार्यकाल बढ़ाने का फैसला निगम के कामकाज के साथ-साथ आगामी राजनीतिक बदलाव पर भी असर डाल सकता है।

    मंजूरी मिली तो आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
    प्रशासन की नजर अब दिल्ली में होने वाली बैठक के फैसले पर है। अधिकारियों का कहना है कि सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद संबंधित प्रस्तावों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। बैठक में चंडीगढ़ के विकास और प्रशासन से जुड़े अन्य प्रस्तावों पर भी सुझाव आने की संभावना है।

     

  • हरियाणा में जमीन रजिस्ट्रियों की जांच में बड़ा खुलासा, ₹999 करोड़ की टैक्स अनियमितता

    हरियाणा में जमीन रजिस्ट्रियों की जांच में बड़ा खुलासा, ₹999 करोड़ की टैक्स अनियमितता

    चंडीगढ़.

    हरियाणा में वर्ष 2023-24 में करों में हेराफेरी से सरकारी खजाने को 999 करोड़ रुपये का ‘फटका’ लग गया। बिक्री कर, मूल्य वर्धित कर (वैट), जमीन की रजिस्ट्री के दौरान स्टांप शुल्क एवं पंजीकरण फीस, उत्पाद शुल्क व परिवहन कर की वसूली के 7144 मामलों में अनियमितताएं साामने आई हैं।

    कृषि भूमि के नाम पर 266 आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक प्लाटों की रजिस्ट्री कर दी गईं, जिससे सरकारी खजाने को 34 करोड़ रुपये के स्टांप शुल्क का नुकसान हुआ। इन रजिस्ट्रियों में सरकार को 49.60 करोड़ का शुल्क मिल पाया, जबकि मिलने चाहिए थे 83.68 करोड़ रुपये। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) द्वारा विधानसभा में रखी गई रिपोर्ट में यह खामियां सामने आई हैं। संबंधित विभागों ने 5769 मामलों में 814 करोड़ रुपये की कम वसूली को स्वीकार भी किया है। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण पंचकूला में नियंत्रक अधिकारी द्वारा नियमों का पालन न करने से 5.43 करोड़ के सरकारी धन का संदिग्ध दुर्विनियोग हुआ।

    वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत कार्य अनुबंध/निर्माण सेवाओं पर लेखापरीक्षा में छूट और रियायती दरों का गलत लाभ उठाने, अग्रिमों एवं अचल परिसंपत्तियों पर कर का भुगतान न करने तथा ब्याज के कम भुगतान से 389 करोड़ की चपत लगी। इनपुट टैक्स क्रेडिट में 37.69 करोड़ की अनियमितताएं मिली। कर के कम भुगतान, टर्नओवर को छिपाने, इनपुट टैक्स क्रेडिट का मिलान न होने और ब्याज के कम उद्ग्रहण से 4.83 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जीएसटी मामलों में कर निर्धारण को अंतिम रूप देते समय अंतिम स्टाक के संदर्भ में सत्यापन नहीं किया, इस कारण पांच डीलरों से 6.67 करोड़ का कर नहीं लिया जा सका। कर निर्धारण प्राधिकारी ने वस्तुओं की बिक्री पर लागू कर की दर से कम टैक्स लगाया, जिसके परिणामस्वरूप 3.31 करोड़ के कर और 2.47 करोड़ के ब्याज की वसूली नहीं हो पाई।

    जमीन की रजिस्ट्रियों में स्टांप शुल्क को लेकर ऐसे चला ‘खेल’
    स्टांप शुल्क वसूली के 59 मामलों में सहयोग करारों के गलत वर्गीकरण/अवमूल्यांकन के परिणामस्वरूप 30.65 करोड़ का कम स्टांप शुल्क मिला। 53 दस्तावेजों में बंधक विलेख पंजीकृत किए गए थे, जिनमें पंजीकरण फीस या तो कम ली गई, या बिल्कुल भी नहीं ली गई। इसके परिणामस्वरूप 9.43 करोड़ का स्टांप शुल्क एवं पंजीकरण फीस नहीं ली जा सकी। दस मामलों में साधारण बंधक दस्तावेजों के गलत वर्गीकरण के परिणामस्वरूप 50.27 लाख का नुकसान हुआ। इस प्रकार 9.93 करोड़ के स्टांप शुल्क एवं पंजीकरण फीस का उद्ग्रहण नहीं हुआ हो सका। 24 समझौता डिक्रियां, जो वास्तविक नहीं थी, नाममात्र स्टांप शुल्क लेकर पंजीकृत की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप 4.90 करोड़ का नुकसान हुआ। पंजीकरण प्राधिकारियों ने भूमि विनिमय के 32 विलेखों को पंजीकृत करते समय 16.10 लाख का स्टांप शुल्क एवं पंजीकरण फीस उद्ग्रहित की, जबकि इन पर 1.92 करोड़ का स्टांप शुल्क बनता था। कारण यह कि इन भूमि का विनिमय अलग-अलग राजस्व संपदाओं या आवासीय भूमि के अंतर्गत आता था। इसके परिणामस्वरूप 1.76 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

    कैग की ओर से दिया गया निगरानी तंत्र बनाने का सुझाव
    कैग ने सरकार को सुझाव दिया है कि लेखापरीक्षा के लिए करदाताओं के विस्तृत अभिलेख प्राप्त करने और उपलब्ध कराने के लिए एक तंत्र स्थापित किया जाए। इससे कर अधिकारियों द्वारा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। विभाग रिटर्न और लिए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट की सत्यता की जांच करे तथा रिटर्न में पाई गई विसंगतियों या अनियमितताओं पर कड़ी कार्रवाई करे।