Category: राज्य

  • Jalandhar में Tools कंपनी पर Police की Raid, कार्रवाई को लेकर मालिक से हुई तीखी नोकझोंक

    Jalandhar में Tools कंपनी पर Police की Raid, कार्रवाई को लेकर मालिक से हुई तीखी नोकझोंक

    जालंधर.

    जालंधर के कपूरथला चौक के नजदीक स्थित गोल्डन टूल्स की दुकान पर देर रात उस समय हंगामा हो गया, जब एक कंपनी के प्रतिनिधियों ने दुकान मालिक पर कंपनी के नाम से कॉपी सामान बेचने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की।

    कंपनी की ओर से मामले की सूचना संबंधित थाने की पुलिस को दी गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। कंपनी के प्रतिनिधियों और पुलिस की मौजूदगी में दुकान से कथित तौर पर कॉपी सामान को जब्त किया गया। इस दौरान दुकान मालिक और पुलिस के बीच बहस भी हुई। पूरी घटना का वीडियो कंपनी के प्रतिनिधियों ने बना लिया, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।

    वहीं, दुकान मालिक ने कंपनी के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि वह कोई कॉपी सामान नहीं बेच रहा था। उसके पास दुकान में मौजूद सामान के सभी बिल हैं और उस पर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस और कंपनी की ओर से की गई कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। मामले में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। 

  • यूपीकॉस के जरिए आउटसोर्स कर्मियों को नई उम्मीद, भरोसे और सुशासन की मजबूत नींव तैयार

    यूपीकॉस के जरिए आउटसोर्स कर्मियों को नई उम्मीद, भरोसे और सुशासन की मजबूत नींव तैयार

    यूपीकॉस: भरोसे की नींव पर खड़ी नई व्यवस्था

    लखनऊ  
    किसी भी सरकार की संवेदनशीलता परखने के लिए यह देखने की जरूरत नहीं कि वह अपने राज्य के ताकतवर तबके के लिए क्या करती है, यह देखना जरूरी है कि वह अपने सबसे कमजोर, सबसे अनदेखे और सबसे मौन नागरिक के लिए क्या सोचती है। आउटसोर्सिंग व्यवस्था में काम करने वाला कर्मचारी दफ्तर में सबसे पहले आता है और सबसे बाद में जाता है, लेकिन व्यवस्था में उसका स्थान हमेशा सबसे अंतिम पायदान पर रहा है। न उसे स्थायी कर्मचारी जैसा सम्मान मिलता, न सामाजिक सुरक्षा की गारंटी, न भविष्य निधि की निश्चितता। वह विभाग, एजेंसी और खुद अपने बीच बंटा हुआ एक ऐसा व्यक्ति था, जिसकी पीड़ा सुनने वाला कोई संस्थागत तंत्र नहीं था। यही वह शून्य था, जिसे भरने का प्रयास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकॉस) गठित करके किया है। 

    एक लंबे इंतज़ार का अंत
    आउटसोर्स कर्मचारी बरसों तक शासन-प्रशासन की भूल-भुलैया में अपनी पहचान तलाशता रहा। हर महीने वेतन कब आएगा, यह सवाल उसके लिए स्थायी बना रहा। उसे इस बात का भी यकीन नहीं था कि उसकी तकलीफ कभी किसी दहलीज़ तक पहुंचेगी भी या नहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बुधवार को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का उद्घाटन इसी लंबी प्रतीक्षा को विराम देने वाला क्षण है। यह केवल एक नए निगम की स्थापना भर नहीं, बल्कि उस अदृश्य कर्मचारी वर्ग को औपचारिक पहचान और संस्थागत सहारा देने की पहल है, जो अब तक व्यवस्था के हाशिए पर खड़ा रहकर काम करता आया।

    पुरानी व्यवस्था की टूटी कड़ियां
    2017 से पहले के दौर को देखें तो एक असहज तस्वीर उभरती है। तब आउटसोर्स कर्मचारी को संसाधन समझा ही नहीं जाता था। ठेके देने का काम अक्सर उन्हीं एजेंसियों को मिलता, जिनके तार सत्ता के गलियारों से जुड़े रिश्तेदारों और करीबियों तक जाते थे। भर्ती के नाम पर, वर्दी के नाम पर, और अन्य छोटी-छोटी सुविधाओं के नाम पर शोषण की कहानियां आम बात थीं। पूरा ढांचा तीन हिस्सों में टूटा हुआ था- कार्मिक, एजेंसी और विभाग। किसी समस्या के साथ कर्मचारी जब एक दरवाज़े पर पहुंचता, तो उसे दूसरे दरवाज़े की ओर मोड़ दिया जाता। न वेतन समय पर मिलने की गारंटी, न ईपीएफ-ईएसआई को लेकर कोई स्पष्टता, न सेवा अधिकारों की कोई ठोस रूपरेखा। इस प्रशासनिक ढिलाई ने लाखों परिवारों को स्थायी अनिश्चितता में जीने पर मजबूर कर दिया था।

    बोझ से संपत्ति तक का वैचारिक सफर
    समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्तियों तक शासन की नीतियों, योजनाओं व कार्यक्रमों का लाभ पहुंचाने को अपना विजन बनाने वाली योगी सरकार ने इस सोच को जड़ से बदलने का मानवीय दृष्टिकोण अपनाया। योगी सरकार में आउटसोर्स कर्मी अब बोझ नहीं, राज्य की मानव पूंजी के रूप में देखा जा रहा है। यही वैचारिक बदलाव यूपीकॉस की बुनियाद है। इसके दायरे और गहराई को आंकड़ों से इसे और गहराई से समझा जा सकता है। साढ़े तीन लाख से ज़्यादा आउटसोर्स कर्मचारी सीधे इसके दायरे में आएंगे, और जब उनके परिवारजनों को जोड़ें तो यह संख्या 17 से 20 लाख के बीच पहुंच जाती है। यह अकेले किसी वर्ग विशेष की बात नहीं, बल्कि प्रदेश की सामाजिक बुनावट के एक बड़े हिस्से की तक़दीर बदलने वाला निर्णय है। हर महीने की पांचवीं तारीख तक पारिश्रमिक सीधे बैंक खाते में स्थानांतरित होगा, जिससे पूरी व्यवस्था में किसी पड़ाव पर भी बिचौलियों के लिए कोई स्थान नहीं होगा और भुगतान संबंधित तमाम विसंगतियों पर लगाम लगेगी।

    सुरक्षा कवच जो जीवन बदल देगा
    इससे भी आगे बढ़कर बनाई गई व्यवस्था इस फैसले को असल मायनों में इंसानी बनाती है। किसी दुर्घटना, हादसे या आपदा की स्थिति में परिवार को 20 से 40 लाख रुपये तक का बीमा संरक्षण मिलेगा। यह प्रावधान उस डर को खत्म करता है, जो हर आउटसोर्स कर्मचारी के भीतर हमेशा से बना रहा कि किसी अनहोनी की सूरत में उसका परिवार बेसहारा हो जाएगा। ईपीएफ और ईएसआई का योगदान अब निश्चित रूप से जमा होगा। सरकार खुद एजेंसी को सर्विस चार्ज देगी, ताकि कर्मचारी की जेब पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े। यह व्यवस्था उस आर्थिक दबाव को सीधे कम करती है, जो अब तक कर्मचारी अकेले उठाता आया था। नौकरी को लेकर छाई असुरक्षा भी अब समाप्त होने जा रही है। कोई भी एजेंसी अब किसी कर्मी को अपनी मर्ज़ी से बर्खास्त नहीं कर सकेगी। ऐसा कोई भी कदम उठाने से पहले सरकार को जानकारी देनी होगी, और उचित जांच के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। 

    परिवार तक फैला भरोसे का दायरा
    असली सामाजिक सुरक्षा वही है, जिसमें कोई भी कर्मचारी अपने पूरे परिवार को संरक्षण के दायरे में पाता है। बेटे की पढ़ाई के लिए आठ लाख रुपये तक और बेटी की पढ़ाई के लिए दस लाख रुपये तक की मदद, दो बेटियों की शादी के लिए आठ से दस लाख रुपये तक का सहयोग, और कर्मचारी के आकस्मिक निधन जैसी अप्रिय स्थिति में अंतिम संस्कार के लिए पचास हजार रुपये तक की व्यवस्था- ये सभी प्रावधान मिलकर एक पारिवारिक सुरक्षा कवच का निर्माण करते हैं। मातृत्व अवकाश जैसे वैधानिक लाभ भी अब सुनिश्चित किए गए हैं। यूपीकॉस पोर्टल और वेबसाइट का शुभारंभ इस पूरी संरचना को डिजिटल पारदर्शिता से जोड़ता है, जहां हर कर्मचारी की समस्या को सुनने और सुलझाने के लिए एक स्थायी संस्थागत तंत्र मौजूद रहेगा।

    मुख्यमंत्री की सोच श्रम के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाती है। यूपीकॉस इसी सम्मान भावना का प्रतिबिंब है, ठीक वैसे ही जैसे योगी सरकार के वे तमाम फैसले हैं, जिन्होंने किसानों, नौजवानों, महिलाओं व कर्मचारियों के साथ ही समाज के हर तबके के वंचित लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है। 2017 में जो वृद्धावस्था, निराश्रित महिला और दिव्यांगजन पेंशन मात्र तीन सौ रुपये थी, वह आज बढ़कर पंद्रह सौ रुपये हो चुकी है। रसोइयों के मानदेय में भी इज़ाफा किया गया है। ये सभी निर्णय मिलकर उस नीति की तस्वीर पेश करते हैं, जिसमें समाज के सबसे उपेक्षित वर्गों तक सम्मान और सुरक्षा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

    भरोसे की जीत
    यूपीकॉस केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं है, यह एक सामाजिक वादा है। यह इस विश्वास की पुनर्स्थापना है कि सरकार और कर्मचारी का नाता केवल वेतन और काम तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसकी नींव भरोसे और उत्तरदायित्व पर टिकी होती है। जब कोई कर्मचारी यह महसूस करता है कि उसकी मेहनत सुरक्षित है, उसका परिवार सुरक्षित है और उसकी आवाज़ को सुना जाएगा, तभी वह सच्चे मायनों में गरिमा के साथ अपना जीवन जी पाता है। यूपीकॉस इसी गरिमा को स्थायी रूप देने को दिशा में उठाया गया एक निर्णायक कदम है।

    जगदीश त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार

     

  • Punjab Rain Alert: तीन दिनों तक झमाझम बारिश का अलर्ट, सामान्य के करीब रहेगा तापमान; मानसून की कमी होगी पूरी

    Punjab Rain Alert: तीन दिनों तक झमाझम बारिश का अलर्ट, सामान्य के करीब रहेगा तापमान; मानसून की कमी होगी पूरी

    अमृतसर
     पंजाब में एक बार फिर मानसून एक्टिव हो रहा है। मौसम विभाग ने 3 से 5 सितंबर तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान उत्तरी और पूर्वी पंजाब के जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं 6 सितंबर को पूरे राज्य में किसी तरह की विशेष चेतावनी नहीं है और मौसम सामान्य रहने का अनुमान है।

    हालांकि मौसम विभाग की तरफ से बुधवार भी बारिश का अलर्ट जारी किया गया था। लेकिन बारिश कुछ चुनिंदा जिलों तक ही सीमित रही। हिमाचल से सटे कुछ जिलों के अलावा लुधियाना और जालंधर में पॉकेट रेन रिकॉर्ड हुई। इससे तापमान जो कुछ दिनों से सामान्य से ऊपर बना हुआ था, सामान्य के करीब पहुंच गया है।

    आज 20 जिलों में बारिश की संभावना
    मौसम विभाग के मुताबिक पंजाब के 20 जिलों में बारिश का अनुमान है। पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर और मोहाली में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा गुरदासपुर, अमृतसर, नवांशहर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला और मोहाली में कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है। तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, मोगा, बठिंडा, बरनाला और मानसा में भी कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।

    रात को चंडीगढ़-मोहाली में बारिश
    मंगलवार को चंडीगढ़ में रात में एक एमएम बारिश हुई है। इसी तरह पंचकूला और मोहाली में भी रात को बारिश हुई। दिन में लुधियाना, पटियाला और चमकौर साहिब में बारिश रिकॉर्ड की गई थी। वहीं, आज सुबह से बादल छाए हुए हैं। मौसम ठंडा बना हुआ है।

    अब बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी
    मानसून की ट्रफ बठिंडा के ऊपर से गुजर रही है, जिससे पंजाब के मौसम पर इसका असर बना हुआ है। इस सिस्टम के कारण पंजाब के कुछ हिस्सों, खासकर बठिंडा और आसपास के इलाकों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं, उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर बंगाल तक बनी दूसरी ट्रफ भी मानसून को सक्रिय बनाए रखने में मदद कर रही है। चंडीगढ़ में भी इसके असर से बादल छाने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि इस जानकारी में चंडीगढ़ के लिए सीधे भारी बारिश का संकेत नहीं है।

    बिजली की मांग में आई कमी
    बारिश होने से बिजली की मांग में कमी आई है। गुरुवार सुबह बिजली की मांग 12,789 मेगावाट है। राज्य में 4,793 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। बाहर से करीब 7,997 मेगावाट बिजली ली जा रही है। तय शेड्यूल 7,961 मेगावाट था, यानी करीब 36 मेगावाट ज्यादा बिजली ली जा रही है। बिजली ग्रिड की फ्रीक्वेंसी 49.89 हर्ट्ज है। हालांकि पिछले चार दिनों में सुबह के समय यह 15 हजार मेगावाट तक पहुंच गई थी।

    आज भी 4 जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी
     3 सितंबर
    : वीरवार को पठानकोट, होशियारपुर, मोहाली और रूपनगर में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। हालांकि अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, फिरोजपुर, मोगा, फरीदकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फाजिल्का, बठिंडा, बरनाला, संगरूर, मानसा, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब और नवांशहर में कोई विशेष चेतावनी नहीं है।

    4 सितंबर: शुक्रवार को बारिश का दायरा थोड़ा बढ़ सकता है। पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर और मोहाली में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। राज्य के बाकी जिलों में कोई विशेष चेतावनी नहीं है।

    5 सितंबर: शनिवार को भी पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर और मोहाली में येलो अलर्ट रहेगा। इन जिलों में भारी बारिश की संभावना है, जबकि अन्य जिलों में मौसम सामान्य रहने का अनुमान है।

    6 सितंबर: रविवार को पंजाब के सभी जिलों में मौसम सामान्य रहने की संभावना है। किसी भी जिले के लिए कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है। ऐसे में लगातार बारिश की संभावना वाले जिलों को रविवार को राहत मिल सकती है।

    बुधवार को बठिंडा सबसे गर्म
    इससे पहले बुधवार को पंजाब में मौसम अधिकांश हिस्सों में शुष्क रहा। राज्य में सबसे अधिक तापमान बठिंडा में 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 24 घंटे की तुलना में 1.4 डिग्री अधिक रहा। फिरोजपुर में 35.7, पटियाला में 35.5, रूपनगर में 34.8, अमृतसर में 34.2 और लुधियाना में 34.0 डिग्री तापमान रहा।

    मोहाली में अधिकतम तापमान 33.7, नवांशहर के बललोवाल सौंखड़ी में 33.5, जालंधर में 33.3 और गुरदासपुर में 32.5 डिग्री दर्ज किया गया। चंडीगढ़ में तापमान 34.7 डिग्री रहा, जो सामान्य से 1.1 डिग्री अधिक था।

    बारिश की बात करें तो अधिकांश जिलों में वर्षा नहीं हुई। लुधियाना और पठानकोट के थीन बांध क्षेत्र में केवल 1.0 मिलीमीटर हल्की बारिश दर्ज की गई। राज्य का औसत अधिकतम तापमान पिछले दिन के मुकाबले 0.1 डिग्री बढ़ा, लेकिन यह सामान्य के आसपास रहा।

     

  • 2 लाख की लूट के आरोपी का कुरुक्षेत्र में एनकाउंटर, पुलिस की गोली से हुआ घायल

    2 लाख की लूट के आरोपी का कुरुक्षेत्र में एनकाउंटर, पुलिस की गोली से हुआ घायल

    कुरुक्षेत्र.

    पिहोवा में मंगलवार की सायं दो लाख रुपये की लूट करने के तीन आरोपितों को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस मुठभेड़ में एक आरोपित की टांग में गोली लगी है। तीनों आरोपितों को पुलिस की अपराध अन्वेषण शाखा दो की टीम ने उत्तराखंड में हरिद्वार से गिरफ्तार किया है।

    गिरफ्तारी के बाद वापसी में कुरुक्षेत्र आते हुए एक आरोपित अभिषेक ने लाडवा के पास पहुंचकर करने के बहाने पुलिस की गाड़ी रुकवाई। आरोपित ने भागने का प्रयास किया तो पुलिस ने गोली चला दी। गोली आरोपित की टांग में लगी है। घायल को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। आरोपितों की पहचान पिहोवा के अभिषेक, अमित उर्फ अंकित, आशीष के रूप में हुई है। तीनों आरोपितों पर पहले भी छीना झपटी के कई मामले दर्ज हैं। पिहोवा की शास्त्री कालोनी निवासी सतपाल सिंह रामगढ़िया ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह मकान निर्माण का ठेकेदार है।

    वह मंगलवार शाम अपने मिस्त्री को भुगतान करने के लिए घर से दो लाख रुपये लेकर मोटरसाइकिल पर निकला था। वह गुहला-चीका रोड पर हुडा ग्राउंड के पास पहुंचा ही था कि पीछे से मोटरसाइकिल पर सवार तीन युवक उसके पास आए। युवकों ने ठेकेदार को निशाना बनाते हुए उसकी मोटरसाइकिल को धक्का मार दिया। अचानक धक्का लगने से वह माेटरसाइकिल समेत सड़क पर गिर गया और उसे चोटें आईं। इसी दौरान बर्फ तोड़ने वाले सूए का डर दिखाकर आरोपितों ने उसकी जेब से दो लाख रुपये निकाल लिए। वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों युवक अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर ज्योतिसर जंगल की तरफ फरार हो गए। शिकायत मिलते ही पुलिस की अलग-अलग टीमों ने आराेपितों की तलाश शुरू कर दी थी।

    ठिकानों पर दी दबिश, हरिद्वार पहुंचे आरोपित
    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने सीसी टीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों की पहचान कर उनके घर और ठिकानों पर दबिश दी। पुलिस से बचने के लिए आरोपित हरिद्वार पहुंच गए। पुलिस भी आरोपितों की पीछे हरिद्वार पहुंची और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद वापसी में एक आरोपित अभिषेक से लाडवा से आगे गांव मथाना के पास पहुंचकर पेशाब करने के लिए पुलिस की गाडी रुकवाई। पेशाब करने के बहाने गाड़ी से नीचे उतरे अभिषेक से फरार होने का प्रयास किया तो पुलिस ने गोली चला दी। पुलिस की गोली आरोपित की टांग में लगने से वह घायल हो गया। पुलिस ने घायल आरोपित को लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती करवाया है।

    तीनों आरोपित गिरफ्तार
    पुलिस की अपराध अन्वेषण शाखा दो के प्रभारी निरीक्षक मनदीप सिंह ने बताया कि पिहोवा में बर्फ तोड़ने वाले सूए की नोक पर जान से मारने की धमकी देकर की गई दो लाख रुपये की लूट के मामले के तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। इसको लेकर थाना पिहोवा शहर में मामला दर्ज किया गया था। मामले की जांच में पिहोवा निवासी अभिषेक, आशीष और अंकित के नाम सामने आए थे। आरोपित वारदात को अंजाम देने के बाद हरिद्वार पहुंच गए थे। तीनों को हरिद्वार से गिरफ्तार किया गया है। आरोपितों के खिलाफ पहले भी छीना-झपटी और चोरी के 10 मामले दर्ज हैं।

  • UP में आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत, योगी सरकार ने उठाया अहम कदम; बदलेगी व्यवस्था

    UP में आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत, योगी सरकार ने उठाया अहम कदम; बदलेगी व्यवस्था

    आउटसोर्स कर्मियों के लिए गरिमा का नया अध्याय

    लखनऊ 

    समाज में पूरी गरिमा के साथ जीने का हर व्यक्ति को अधिकार है और नेतृत्व यदि संवेदनशील है तो इसे सुनिश्चित भी करता है। किसी कर्मचारी को गरिमा का अहसास तभी होता है जब उसे यह महसूस हो कि उसका परिश्रम सुरक्षित है, उसका परिवार सुरक्षित है और उसकी आवाज़ सुनी जाएगी। यह हर कर्मचारी का अधिकार है और यही वह मापदंड है, जिससे किसी भी सरकार की संवेदनशीलता का आकलन किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकॉस) का शुभारंभ कर आउटसोर्स कर्मियों की गरिमा लिखने का नया अध्याय शुरू किया है। आउटसोर्स कर्मी जो वर्षों से शासन-सत्ता के गलियारे में अपनी पहचान खोज रहा था, जो अब तक अनिश्चितता के वातावरण में अपना जीवन गुजार रहा था और जिसे यह विश्वास भी नहीं था कि कोई उसकी पीड़ा को सुनेगा। योगी सरकार में गठित हुआ उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम इसी पीड़ा को दूर करने का तंत्र और प्रयास है। 

    2017 से पहले की सरकारों पर नज़र डालें तो एक कड़वी सच्चाई सामने आती है। उस दौर में आउटसोर्स कर्मचारियों को बोझ के रूप में देखा जाता था, संपत्ति के रूप में नहीं। जिन एजेंसियों को ठेके दिए जाते थे, उनमें से अधिकतर सत्ताधारी नेताओं के करीबियों और रिश्तेदारों के स्वामित्व वाली होती थीं। भर्ती प्रक्रिया से लेकर वर्दी और अन्य सुविधाओं तक में शोषण की शिकायतें आम थीं। यह एक ऐसा तंत्र था, जिसमें लाभ कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रहता था और पीड़ा उन तक पहुंचती थी, जो सबसे कमजोर स्थिति में खड़े थे। यह व्यवस्था कितनी बिखरी हुई थी, इसे इसकी संरचना से ही समझा जा सकता है। एक तरफ कार्मिक होता था, दूसरी तरफ एजेंसी, और तीसरी तरफ सरकारी विभाग। कर्मचारी जब भी किसी समस्या के साथ इनमें से किसी दरवाज़े पर दस्तक देता, उसे दूसरे दरवाज़े की ओर भेज दिया जाता। वेतन में देरी, ईपीएफ और ईएसआई की अनिश्चितता, और सेवा से जुड़े बुनियादी अधिकारों को लेकर व्याप्त असमंजस उसकी नियति थी। यह ऐसी संरचनात्मक उपेक्षा थी, जिसने लाखों परिवारों को अनिश्चितता के अंधेरे में धकेल रखा था। 

    पंडित दीन दयाल उपाध्याय के अंत्योदय सिद्धातों को अपनी सोच में ढालने वाली योगी सरकार ने आउटसोर्स कर्मियों को बोझ नहीं, अपनी मानव संपत्ति के रूप में स्वीकार किया। यह वैचारिक परिवर्तन ही यूपीकॉस की आत्मा है। इसके तथ्यात्मक पक्ष को देखें तो इसकी गंभीरता और स्पष्ट होती है। साढ़े तीन लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा, लेकिन जब उनके परिवारों को भी जोड़ा जाए तो यह संख्या 17 से 20 लाख तक पहुंच जाती है। यह आंकड़ा उत्तर प्रदेश की सामाजिक संरचना के एक बड़े हिस्से के लिए जीवन बदलने वाला कदम है। हर महीने की पांच तारीख तक पारिश्रमिक सीधे बैंक खाते में पहुंचेगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और भुगतान में होने वाली देरी और गड़बड़ी पर भी अंकुश लगेगा।

    इससे एक कदम आगे जाकर की गई व्यवस्था इस निर्णय को और मानवीय बनाती है। किसी घटना, दुर्घटना या आपदा की स्थिति में परिवार को 20 से 40 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलेगा। यह सुविधा उस असुरक्षा को दूर करती है, जो अब तक हर आउटसोर्स कर्मचारी के मन में एक स्थायी भय की तरह बसी रहती थी कि किसी अनहोनी की स्थिति में उसका परिवार असहाय हो जाएगा। ईपीएफ और ईएसआई का अंशदान भी अब सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार आउटसोर्स एजेंसी को सर्विस चार्ज देगी, जिससे कर्मचारी के वेतन से कटौती नहीं होगी। यह प्रावधान सीधे तौर पर उस आर्थिक बोझ को कम करता है, जो पहले कर्मचारी अकेले वहन करता था।

    नौकरी की सुरक्षा को लेकर भी इस व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब कोई एजेंसी किसी आउटसोर्स कर्मी को मनमाने ढंग से नौकरी से नहीं निकाल सकेगी। ऐसा करने से पहले सरकार को सूचित करना अनिवार्य होगा, और जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। इससे किसी भी समय नौकरी जाने की आशंका समाप्त होती है। इसके साथ ही पारिश्रमिक अब किसी अधिकारी या एजेंसी की मर्ज़ी पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि कर्मचारी की श्रेणी और शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप तय होगा। यह पारदर्शिता कर्मचारी के आत्मसम्मान को पुनर्स्थापित करने वाला कदम है।

    सामाजिक सुरक्षा का दायरा केवल कर्मचारी तक सीमित नहीं होना चाहिए। उसके परिवार को भी उसका लाभ मिलना चाहिए। पुत्र की शिक्षा के लिए आठ लाख रुपये तक और पुत्री की शिक्षा के लिए दस लाख रुपये तक की सहायता, दो पुत्रियों के विवाह के लिए आठ से दस लाख रुपये तक की सहायता और अमसय मृत्यु की स्थिति में कर्मचारी के अंतिम संस्कार के लिए पचास हजार रुपये तक की व्यवस्था तथा मातृत्व अवकाश सहित अन्य वैधानिक सेवा लाभ पारिवारिक सुरक्षा कवच हैं। यूपीकॉस पोर्टल और वेबसाइट की लॉन्चिंग इस पूरी व्यवस्था को डिजिटल पारदर्शिता से जोड़ती है जहां हर कार्मिक की समस्या सुनने और सुलझाने की संस्थागत व्यवस्था मौजूद है। 

    मुख्यमंत्री स्वयं यह मानते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और नई अर्थव्यवस्था के दौर में काम की प्रकृति भले बदल रही हो, लेकिन मानव श्रम की गरिमा कभी नहीं बदलेगी। यह मानव श्रम के प्रति सम्मान का परिचायक है। इसी सम्मान भाव का प्रतीक यूपीकॉस और योगी सरकार के वे सभी फैसले हैं जिसमें किसान, नौजवान, महिलाओं, कारीगर, रेहड़ी-पटरी वाले, छोटे उद्यमी और सरकारी कर्मचारी, सभी को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया गया। वृद्धावस्था, निराश्रित महिला और दिव्यांगजन पेंशन जो 2017 में मात्र तीन सौ रुपये थी, आज बढ़कर पंद्रह सौ रुपये हो चुकी है। रसोइयों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है। ये सभी कदम एक ऐसी नीति को दर्शाते हैं, जिसमें समाज के हर वंचित और उपेक्षित वर्ग को सम्मान और सुरक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है।

    लाभार्थियों की प्रतिक्रियाएं इस निर्णय की सार्थकता को और पुख्ता करती हैं। संविदाकर्मियों का कहना है कि इस निर्णय से अब घर चलाना आसान होगा और उनके जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। पोर्टल और वेबसाइट की पारदर्शिता उन्हें यह भरोसा देती है कि अब उनकी बात सुनी जाएगी। यह भरोसा ही किसी भी कल्याणकारी नीति की सबसे बड़ी सफलता होता है। वस्तुतः यूपीकॉस सिर्फ एक प्रशासनिक निगम नहीं,  बल्कि एक सामाजिक वादा है। यह उस विश्वास की पुनर्स्थापना है कि सरकार और कर्मचारी का रिश्ता केवल वेतन और काम का नहीं, बल्कि भरोसे और जिम्मेदारी का होता है।

    सनी सिंह (लेखक, दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में शोधार्थी हैं और नई दिल्ली स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन (SPMRF) में रिसर्च एसोसिएट के रूप में कार्यरत हैं।

  • Punjab Voter List: राघव चड्ढा का नाम कटा तो मचा सियासी बवाल, AAP पर लगाया ‘राजनीतिक बदले’ का आरोप

    Punjab Voter List: राघव चड्ढा का नाम कटा तो मचा सियासी बवाल, AAP पर लगाया ‘राजनीतिक बदले’ का आरोप

    चंडीगढ़ 

    पंजाब में एसआईआर की लिस्ट से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम हटने के बाद राजनीति शुरू हो गई है। राघव ने कहा कि उन्हें वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट से 'शिफ्टेड' मार्क करके हटाया गया है, जो बदले की राजनीति का स्पष्ट संकेत है। चड्ढा ने ईसीआई की गाइडलाइंस के उल्लंघन का भी दावा किया है। 

    राघव चड्ढा ने लगाए पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप
    भाजपा के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से काम किया है। चड्ढा के अनुसार, मतदाता सूची के मसौदे में उनका नाम गलत तरीके से 'दूसरी जगह चले जाने वाला' (शिफ्टेड) दिखाया गया है। वह पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और उनका मतदाता पहचान पत्र मोहाली में पंजीकृत है। चड्ढा ने एक्स पर एक पोस्ट साझा कर यह जानकारी दी। 

    उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल मसौदा मतदाता सूची है, अंतिम सूची नहीं। 'दावे और आपत्तियां' की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें नामों में सुधार किया जा सकता है। अंतिम मतदाता सूची अक्तूबर 2026 में प्रकाशित होगी। सांसद चड्ढा ने बताया कि वह स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) दिशानिर्देशों के तहत उपलब्ध उपायों का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने इसे केवल एक लिपिकीय त्रुटि मानने से इन्कार किया। चड्ढा ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध का स्पष्ट मामला बताया। 

    चड्ढा ने कहा कि यह कोई सामान्य क्लेरिकल मिस्टेक नहीं है, बल्कि सोची-समझी साजिश है। गनीमत है कि यह केवल प्रारूप मतदाता सूची है, अंतिम सूची नहीं। उन्होंने कहा कि मैंने SIR दिशा-निर्देशों के तहत पहले ही अपने कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करते हुए ऑब्जेक्शन फाइल कर दिया है। अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित होगी।

    सांसद ने आरोप लगाया कि जब से उन्होंने AAP छोड़ी है और भाजपा में शामिल हुए हैं, तब से आप नेतृत्व बौखलाया हुआ है। प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर रहा है।

    उन्होंने सवाल उठाया कि उनका नाम "दूसरी जगह चले जाने वाला" किसने चिह्नित किया। इसका सत्यापन और उच्च स्तर पर प्रसंस्करण आप की पंजाब सरकार के अधिकारियों ने किया। जमीनी स्तर के बीएलओ से लेकर पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक, इस अभ्यास का हर परिचालन स्तर पंजाब सरकार के अधिकारियों द्वारा संचालित है। अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बीएलओ आमतौर पर पंजाब सरकार के कनिष्ठ कर्मचारी होते हैं। एईआरओ, ईआरओ और डीईओ भी पंजाब सरकार के अधिकारी होते हैं।

    आगे कहा कि शीर्ष पर पंजाब कैडर के एक आईएएस अधिकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। ये अधिकारी जानते हैं कि आप सरकार उनकी चुनावी ड्यूटी समाप्त होने के बाद उनके स्थानांतरण, नियुक्तियों और कॅरिअर को नियंत्रित करती है। उन्हें पता है कि कौन उनका स्थानांतरण कर सकता है और कौन उनका जीवन मुश्किल बना सकता है। इस तरह आप सरकार राजनीतिक प्रतिशोध को अंजाम देने के लिए राज्य के अधिकारियों के माध्यम से राजनीतिक दबाव डालती है।

    भाजपा सांसद ने पंजाब सरकार पर लगाए ये आरोप…

        वोट काटने के पीछे प्रशासनिक तंत्र पर दबाव: राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) तक की पूरी प्रक्रिया में पंजाब सरकार के प्रशासनिक अधिकारी तैनात हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मुझे ‘शिफ्टेड’ किसने मार्क किया? आप सरकार के अधिकारी ने। उस वर्गीकरण की पुष्टि किसने की? आप सरकार के ही अधिकारी ने। उच्च स्तर पर इसे किसने प्रोसेस किया? आप सरकार के ही वरिष्ठ अधिकारी ने। उन्होंने कहा कि चुनाव ड्यूटी खत्म होने के बाद इन अधिकारियों के ट्रांसफर, पोस्टिंग और करियर पर राज्य सरकार का ही नियंत्रण होता है, इसलिए अधिकारी दबाव में काम कर रहे हैं।

        राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई: सांसद ने कहा कि जब से मैंने भ्रष्ट आम आदमी पार्टी छोड़ी है, इसका शीर्ष नेतृत्व गुस्से से जल रहा है। जिन नेताओं और सांसदों ने आप छोड़कर भाजपा का दामन थामा है, उनके खिलाफ पंजाब पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी को तैनात कर दिया गया है। वोटर लिस्ट में गलत वर्गीकरण उसी राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।

        चुनाव आयोग (ECI) के नियमों का उल्लंघन: राघव चड्ढा ने भारत निर्वाचन आयोग के SIR के विस्तृत दिशानिर्देशों के पैराग्राफ 4(d) का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इस नियम के अनुसार न्यायाधीशों, जनप्रतिनिधियों (सांसद/विधायक) और प्रमुख हस्तियों के नाम यदि डेटाबेस में चिह्नित भी होते हैं, तो भी उन्हें ड्राफ्ट रोल में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि दावे-आपत्ति की अवधि के दौरान आवश्यक दस्तावेज जुटाए जा सकें। उन्होंने कहा कि इस नियम को अनदेखा नहीं किया गया, बल्कि उनके मामले में इसका जानबूझकर उल्लंघन किया गया है।

        वोटर लिस्ट किसी की निजी संपत्ति नहीं: सांसद ने सख्त लहजे में कहा कि भले ही पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार चल रही हो, लेकिन पंजाब की प्रारूप मतदाता सूची आप की कोई निजी संपत्ति नहीं है। मतदाता सूची में पारदर्शिता होना हर नागरिक और जनप्रतिनिधि का संवैधानिक अधिकार है।

     

  • Fatehpur Rain: बारिश बनी आफत, फतेहपुर में 67 मकान तहस-नहस; 3 की मौत

    Fatehpur Rain: बारिश बनी आफत, फतेहपुर में 67 मकान तहस-नहस; 3 की मौत

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में करीब 15 दिनों से हो रही लगातार बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. लगातार बारिश के चलते जिले में अब तक 67 मकान तबाह हो चुके हैं, जबकि बारिश से जुड़ी घटनाओं में तीन लोगों की जान गई है. सबसे ज्यादा नुकसान खागा तहसील में हुआ है, जहां 50 मकान तहस-नहस हो गए हैं। 

    ये परेशानी सिर्फ ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है. फतेहपुर शहर के कई हिस्सों में जलभराव से लोगों के जीवन की रफ्तार थम गई है. सड़कें और गलियां पानी से लबालब हैं और लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 

    प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, जहां खागा में 50 मकान बर्बाद हुए हैं, तो कहीं बिंदकी में 15 और सदर तहसील में 2 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं. इतना ही नहीं, बारिश के कारण जिले में अब तक तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है. इनमें से एक मृतक बिंदकी और 2 सदर के बताए जा रहे हैं। 

    दो मृतकों के परिजनों को नियम के तहत मुआवजा दिया जा चुका है. वहीं सदर तहसील में हाल में हुई जनहानि के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद मुआवजे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 

    30 लाभार्थियों की फाइल पहुंची, 11 को मिल चुका मुआवजा
    फिलहाल प्रशासन बारिश से हुए नुकसान का आकलन कर रही है. प्रभावित परिवारों को राहत देने के साथ क्षतिग्रस्त मकानों के लिए मुआवजे देने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है. बता दें कि प्रशासन को अब तक ऐसे 30 मामलों की फाइलें मिल चुकी हैं. वहीं 26 मामलों में लाभार्थियों से जुड़े दस्तावेज और फाइलें आना बाकी हैं. राहत की बात ये है कि अब तक 11 परिवारों को मुआवजा दिया जा चुका है। 

    शहर में जलभराव, पंप से निकाला जा रहा पानी
    लगातार बारिश से फतेहपुर शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है. सड़कें और गलियां पानी से भर गई हैं, जिससे लोगों को आवाजाही में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इसके साथ ही जलभराव से निजात दिलाने के लिए प्रशासन और नगर पालिका की टीमें लगातार काम कर रही हैं। 

    शहर के अलग-अलग हिस्सों में पंप लगाए गए हैं और पानी की निकासी का काम जारी है. फिलहाल प्रशासन की कोशिश यही है कि जलभराव वाले इलाकों से जल्द से जल्द पानी निकाला जाए और लोगों को राहत मिल सके। 

  • PSEB सप्लीमेंट्री एग्जाम में नकल पर शिकंजा, कैमरे और माइक से होगी पूरी निगरानी

    PSEB सप्लीमेंट्री एग्जाम में नकल पर शिकंजा, कैमरे और माइक से होगी पूरी निगरानी

    लुधियाना.

    पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा की सप्लीमेंट्री परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए इस बार कड़ी निगरानी व्यवस्था की गई है। पहली बार ऐसी व्यवस्था हुई है कि पूरे पंजाब में बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरों के जरिए PSEB नजर रख रहा है।

    खास बात यह है कि इन कैमरों में माइक और मोशन डिटेक्टर की सुविधा भी है, जिसके चलते परीक्षा केंद्रों की हर गतिविधि पर बोर्ड की नजर बनी हुई है और आवाज भी सुनी जा रही है। परीक्षा केंद्रों के एग्जामिनेशन कॉम्प्लेक्स में CCTV कैमरे लगाए गए हैं। इनके जरिए परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों और परीक्षा स्टाफ की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। ऐसे में नकल या किसी अन्य अनियमितता की कोशिश करने वालों पर बोर्ड की सीधी नजर रहेगी।

    कैमरों में लगे माइक के कारण परीक्षा केंद्रों में होने वाली गतिविधियों के साथ-साथ आवाज पर भी निगरानी रखी जा रही है, जबकि मोशन डिटेक्टर गतिविधियों को मॉनिटर करने में मदद कर रहे हैं। बोर्ड की इस व्यवस्था का उद्देश्य सप्लीमेंट्री परीक्षाओं को पारदर्शी तरीके से करवाना और नकल पर प्रभावी रोक लगाना है। सप्लीमेंट्री परीक्षाओं का लिखित चरण 18 सितंबर तक चलेगा, जबकि 19 से 22 सितंबर तक प्रैक्टिकल परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।

    पंजाब भर में विभिन्न स्कूलों और संस्थानों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें एसओआई सेक्टर 32, मल्टीपर्पज स्कूल और पीएयू स्कूल भी शामिल हैं। पूरे पंजाब में परीक्षा केंद्रों पर CCTV निगरानी व्यवस्था लागू होने से परीक्षा प्रक्रिया पर बोर्ड की लगातार नजर बनी रहेगी। नकल करने या परीक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों की हर गतिविधि कैमरे में रिकॉर्ड होगी और बोर्ड तक इसकी जानकारी पहुंच सकेगी।

  • बाढ़ पीड़ितों की मदद में जुटी योगी सरकार, राहत अभियानों के तहत बांटे 3.36 लाख लंच पैकेट

    बाढ़ पीड़ितों की मदद में जुटी योगी सरकार, राहत अभियानों के तहत बांटे 3.36 लाख लंच पैकेट

    बाढ़ प्रभावितों के साथ खड़ी योगी सरकार, राहत अभियानों के तहत 3.36 लाख लंच पैकेट वितरित

    16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, 23 जिलों में लगातार चला राहत-बचाव कार्य

    लगभग 1500 नावों/मोटरबोट्स से दिन-रात जारी है बचाव अभियान, भोजन से स्वास्थ्य तक राहत का पूरा इंतजाम

    5.02 लाख क्लोरीन टैबलेट और 1.77 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट वितरित किए गए

    इंसान से लेकर पशुधन तक मदद के सभी इंतजाम, क्षतिग्रस्त मकानों के लिए सहायता राशि जारी

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार ने राहत और बचाव अभियान को पूरी ताकत के साथ जारी रखा है। प्रभावित परिवारों तक भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने के साथ बड़े पैमाने पर रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 68,953 खाद्यान्न पैकेट और 3.36 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। 1,499 नाव एवं मोटरबोट राहत-बचाव में लगाई गई हैं और अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 5.02 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 1.77 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट भी वितरित किए जा चुके हैं।

    23 जिलों में प्रशासन पूरी तरह सक्रिय
    उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त के मुताबिक 35 जिले अब तक बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जबकि 23 जिलों में अब भी इसका असर है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अयोध्या, आजमगढ़, बलिया, बाराबंकी, बदायूं, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, रायबरेली, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, सीतापुर, सोनभद्र, उन्नाव और वाराणसी में युद्धस्तर पर राहत-बचाव कार्य चल रहा है। प्रशासन को संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी और तत्काल सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

    हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
    बचाव अभियान के तहत अब तक बाढ़ग्रस्त इलाकों में फंसे 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। बुधवार को ही 3,042 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। जलमग्न क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने के लिए नावों और मोटरबोट्स का लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है।

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन बाधित होने के बावजूद राहत टीमों की पहुंच सुनिश्चित की गई है। अब तक 1,499 नावों एवं मोटरबोट्स का प्रयोग किया जा चुका है। इससे बचाव दलों को प्रभावित गांवों और जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने तथा जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने में मदद मिल रही है।

    प्राथमिकता पर भोजन व्यवस्था कर रही सरकार
    बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए भोजन की व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। अब तक 68,953 खाद्यान्न पैकेट और 3.36 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। इससे प्रभावित परिवारों को आपदा के बीच तत्काल खाद्य सहायता मिल रही है। सभी क्षेत्रों में राहत सामग्री का वितरण जरूरत के मुताबिक लगातार जारी है।

    स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी विशेष जोर
    बाढ़ के बाद दूषित पानी से संक्रमण और जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए योगी सरकार ने स्वास्थ्य और स्वच्छता को भी राहत अभियान का अहम हिस्सा बनाया है। अब तक 5.02 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 1.77 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं। इसके अलावा 1,067 मेडिकल टीमें गठित की जा चुकी हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए अब तक 1,311 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 201 वर्तमान में संचालित हैं।

    पशुधन और मकानों की क्षति पर सहायता
    योगी सरकार का राहत अभियान केवल लोगों तक सीमित नहीं है। बाढ़ से अब तक 36,287 पशु प्रभावित हुए हैं और उनके लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। बाढ़ से मकान क्षतिग्रस्त होने के 442 मामलों में प्रभावित परिवारों को सहायता वितरित की जा चुकी है। राहत-बचाव के साथ क्षति का आकलन और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने का काम लगातार जारी है।

  • किसान आंदोलन में शामिल हुए गायक रेशम अनमोल, लंगर बांटा और महिलाओं की सेवा की; बॉर्डर पर डटे किसान

    किसान आंदोलन में शामिल हुए गायक रेशम अनमोल, लंगर बांटा और महिलाओं की सेवा की; बॉर्डर पर डटे किसान

    चंडीगढ़
    चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर सेक्टर-48 के पास संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से लगाया गया पक्का मोर्चा आज तीसरे दिन भी जारी है। पंजाब के अलग-अलग इलाकों से किसानों और मजदूर जत्थेबंदियों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। पंजाबी गायक रेशम सिंह अनमोल भी मोर्चे में पहुंचे। उन्होंने लंगर सेवा में हिस्सा लिया। गायक ने लंगर सेवा कर रही महिलाओं के पैर दबाए। मोर्चे में बुधवार को पंजाब के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। आज 11 बजे मंच से किसान नेता संबोधित करेंगे।

    सरकारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है
    इससे पहले किसान यूनियन (राजेवाल) के प्रमुख बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि देश का 70 से 80 प्रतिशत अनाज पैदा करने वाला अन्नदाता आज अपने हक और इंसाफ के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर है। यह सरकारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

    अमेरिका से एग्रीमेंट हुआ तो चक्का जाम की चेतावनी
    राजेवाल ने किसानों से अपने हक के लिए एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल किसान ही नहीं, बल्कि हर वर्ग मौजूदा सरकारों से परेशान है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार अमेरिका के साथ किसानों के हितों को प्रभावित करने वाला कोई एग्रीमेंट करती है तो किसान पूरे देश में चक्का जाम करेंगे और रेल यातायात भी रोकेंगे।

    उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने किसानों की मांगों पर गौर नहीं किया तो सेक्टर-48 के पास लगाया गया पक्का मोर्चा आगे भी बढ़ाया जा सकता है। राजेवाल ने कहा कि किसान यहां पहुंच चुके हैं और अब अपनी मांगें मनवाकर ही वापस जाएंगे।

    सड़क की दूसरी साइड भी खड़ी की ट्रैक्टर-ट्रॉलियां
    जगतपुरा से चंडीगढ़ के सेक्टर-48 तक जाने वाली सड़क के एक तरफ किसानों ने मोर्चा लगाया हुआ है, जबकि दूसरी तरफ से ट्रैफिक चल रहा है। कल बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पहुंचने के कारण किसानों ने इन्हें सड़क के किनारे और उपलब्ध जगहों पर खड़ा कर दिया। किसान नेताओं का कहना है कि आने वाले दिनों में यदि ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की संख्या और बढ़ी तो ट्रैफिक व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

    दूर-दराज से पहुंचे किसानों में उत्साह
    पंजाब के दूर-दराज के इलाकों से पहुंचे किसानों में आंदोलन को लेकर उत्साह नजर आ रहा है। मानसा से पहुंचे किसानों ने कहा कि जब दिल्ली में लंबे समय तक मोर्चा लगाकर मांगें मनवाई जा सकती हैं तो यहां भी वे अपनी मांगें मनवाकर ही वापस जाएंगे। किसानों ने सरकार के प्रति नाराजगी जताते हुए संघर्ष जारी रखने की बात कही है।

    बिजली-पानी और सुविधाएं नहीं देने पर नाराजगी
    मोर्चे के मंच से किसान नेताओं ने किसानों के लिए बिजली, पानी, मोबाइल टॉयलेट और रहने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं किए जाने का विरोध किया। वक्ताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि आंदोलन के दौरान किसानों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा।