Category: राज्य

  • प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ का असर, 16 हजार से अधिक लंच पैकेट वितरित किए

    प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ का असर, 16 हजार से अधिक लंच पैकेट वितरित किए

    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राहत एवं बचाव कार्य लगातार पूरी तत्परता के साथ संचालित किए जा रहे हैं। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में अचानक आई बाढ़ के बीच योगी सरकार का मजबूत राहत तंत्र एक बार फिर लोगों के लिए सहारा बना। प्रशासन और पीएसी के जवानों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बाढ़ के पानी में फंसे करीब 150 लोगों को सुरक्षित निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।

    चित्रकूट के थाना पहाड़ी क्षेत्र के ग्राम चौरा में मंगलवार को मंदाकिनी नदी में अचानक बाढ़ आने से कई लोग बाढ़ के पानी में फंस गए थे। सूचना मिलते ही बाढ़ राहत दल ने बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान शुरू किया। 42वीं वाहिनी पीएसी नैनी प्रयागराज के बी दल की बाढ़ राहत ड्यूटी में तैनात प्लाटून ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से मोटरबोट के जरिए प्रभावित लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। साथ ही उपजिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी, संबंधित लेखपाल और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से बाढ़ प्रभावित लोगों को आवश्यक राहत सामग्री और भोजन उपलब्ध कराया गया। जरूरतमंद लोगों का मेडिकल परीक्षण कराने के साथ उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय सहायता भी उपलब्ध कराई गई।

    1528 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

    राहत आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को प्रदेश के 32 जिले अब तक बाढ़ से प्रभावित हुए, जबकि 22 जिलों में फिलहाल बाढ़ का प्रभाव दर्ज किया गया है। राहत एवं बचाव अभियान के तहत 1,528 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। वहीं सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक राहत नेटवर्क तैयार किया है। प्रदेश में मंलगवार को 742 बाढ़ चौकियां, 452 नाव एवं मोटरबोट व 225 मेडिकल टीमें सक्रिय रहीं। वहीं 105 शरणालय में 2,460 लोगों ने शरण ली है।

    16 हजार से अधिक लंच पैकेट बांटे

    प्रभावित परिवारों तक भोजन और आवश्यक सामग्री पहुंचाने का अभियान भी लगातार जारी है। मंगलवार को 1,640 बाढ़ राहत खाद्यान्न पैकेट वितरित किए गए। साथ ही 16,190 लंच पैकेट भी बांटे गए। 18 हजार से अधिक क्लोरिन पैकेट, 7 हजार से अधिक ओआरएस पैकेट का भी वितरण किया गया। इसके अलावा 310 क्विंटल भूसा वितरित किया गया।

    बाढ़ प्रभावित जिले

    अयोध्या, आजमगढ़, बलिया, बाराबंकी, बदायूं, चंदौली, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोरखपुर, हापुड़, हरदोई, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, सीतापुर, उन्नाव और वाराणसी।

  • गोरक्षपीठ में परंपरा, भव्यता और उल्लास से मनाया जाएगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

    गोरक्षपीठ में परंपरा, भव्यता और उल्लास से मनाया जाएगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

    गोरखपुर

     गोरक्षपीठ में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी) 4 सितंबर, शुक्रवार को परंपरा, भव्यता और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव समारोह में गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सम्मिलित होंगे। गोरखनाथ मंदिर में भजनों के बीच भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के बाद, गोरक्षपीठाधीश्वर उनके बालरूप को पालने में झुलाएंगे। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में गोरखनाथ मंदिर में भजन संध्या के साथ बच्चों के लिए श्रीकृष्ण बालरूप सज्जा प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा।

    गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजय नाथ स्मृति भवन में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव समारोह के कार्यक्रम शाम 5 बजे से ही प्रारंभ हो जाएंगे। बच्चों के लिए श्रीकृष्ण बालरूप सज्जा प्रतियोगिता के बाद भजन संध्या का आयोजन होगा। गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने बताया कि स्मृति भवन में भजनों की प्रस्तुति रात 11:30 बजे तक अनवरत जारी रहेगी। भजन संध्या के दौरान ही गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव समारोह में सम्मिलित होंगे। यहां भजन सुनने के साथ ही वह वह बच्चों को खिलौना और चॉकलेट भी देंगे। 

    रात 11.30 बजे गोरक्षपीठाधीश्वर गोरखनाथ मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना करने पहुंचेंगे। रात 12 बजते ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वह मंदिर के गर्भगृह में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे। इसके बाद वह श्रीकृष्ण के बालरूप को पालने में झुलाएंगे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जुटने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा।

    दो वर्गों में होगी श्रीकृष्ण बालरूप सज्जा प्रतियोगिता

    शुक्रवार (4 सितंबर) को गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन में सायंकाल 5 बजे से 7 बजे तक श्रीकृष्ण बालरूप सज्जा प्रतियोगिता दो वर्गों में होगी। कान्हा वर्ग में 1 से 5 वर्ष तक तथा गोपाल वर्ग में 6 से 8 वर्ष तक के बच्चे प्रतिभाग कर सकेंगे। प्रतिभागियों का पंजीकरण कार्यक्रम स्थल पर ही किया जाएगा। प्रतियोगिता में न सिर्फ विजेताओं बल्कि इसमें शामिल सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा। इस प्रतियोगिता के बाद रात्रि 8 बजे से भजन संध्या का आयोजन होगा। स्मृति भवन में सुपरिचित लोक गायक राकेश श्रीवास्तव की टीम भजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देगी। जबकि मुख्य मंदिर में हनुमंत सांस्कृतिक संस्थान द्वारा भजनों की प्रस्तुति की जाएगी।

  • दशकों बाद पंजाब के भूजल स्तर पर अच्छी खबर! केंद्र की रिपोर्ट से जगी नई उम्मीद

    दशकों बाद पंजाब के भूजल स्तर पर अच्छी खबर! केंद्र की रिपोर्ट से जगी नई उम्मीद

    चंडीगढ़.

    पंजाब में दशकों से लगातार गिर रहे भूजल लेवल को लेकर राज्य के लोगों को राहत मिली है। सेंट्रल भूजल बोर्ड के साल 2026 के ताजा आंकड़ों/मूल्यांकन के मुताबिक, दशकों में पहली बार पंजाब में भूजल लेवल में सुधार दर्ज किया गया है।

    इस बारे में जानकारी पंजाब के जल संसाधन मंत्री ने शेयर की है। केंद्र की इस रिपोर्ट ने भूजल संकट से उभरने की नई उम्मीद जगाई है। उन्होंने कहा कि भूजल के इस्तेमाल की दर साल 2022 में 164 फीसदी से घटकर साल 2026 में 152.22 फीसदी हो गई है, जबकि ज्यादा इस्तेमाल वाले ब्लॉक की संख्या 117 से घटकर 110 हो गई है और सुरक्षित ब्लॉक की संख्या 17 से बढ़कर 20 हो गई है।
    कुल 153 मूल्यांकन किए गए ब्लॉक में से 109 में सुधार दर्ज किया गया है। पंजाब भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जल संसाधन मंत्री ने कहा कि ये सुधार सरकार की नहर का पानी खेतों तक पहुंचाने और भूजल बचाने की कोशिशों का नतीजा हैं।

    उन्होंने कहा कि भूजल का सालाना इस्तेमाल साल 2022 में 28.02 बिलियन क्यूबिक मीटर से घटकर 2026 में 26.32 बिलियन क्यूबिक मीटर हो गया है। साल 2025 के मुकाबले 14 ब्लॉक बेहतर कैटेगरी में आए हैं, जिनमें से 4 ब्लॉक सेफ कैटेगरी में पहुंच गए हैं। फाजिल्का का अरनीवाला शेख सुभानपुर, फिरोजपुर का मक्खू, होशियारपुर का हाजीपुर और पठानकोट का नरोट जैमल सिंह सेफ कैटेगरी में आ गए हैं। 

  • यूपी राइज: ‘आत्मनिर्भर यूपी’ की दिशा में युवाओं ने पेश किए शानदार स्टार्टअप आइडिया

    यूपी राइज: ‘आत्मनिर्भर यूपी’ की दिशा में युवाओं ने पेश किए शानदार स्टार्टअप आइडिया

    आगरा

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर यूपी विजन को धरातल पर उतारने के लिए एमजी रोड स्थित सेंट जॉन्स कॉलेज में 'यूपी राइज' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शहर और आसपास के क्षेत्रों से आए करीब 1000 से अधिक छात्र- छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला न बनाकर, उन्हें स्वयं का उद्यम स्थापित कर दूसरों को रोजगार देने वाला 'जॉब क्रिएटर' बनाना है।

    सरकारी योजनाओं की जानकारी और मेंटर्स का मार्गदर्शन

    कार्यक्रम के दौरान युवाओं को राज्य सरकार की विभिन्न रोजगारपरक नीतियों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं पर विशेष जोर दिया और बताया कि आसान शर्तों पर वित्तीय सहायता व सब्सिडी कैसे प्राप्त की जा सकती है। छात्रों का मार्गदर्शन करने के लिए हर्षित देसाई, राहुल सारंगी और साईराज धोंड मेंटर के रूप में शामिल हुए। मेंटर हर्षित देसाई, जो वर्तमान में स्ट्रैटिविटी (एशिया और मिडिल ईस्ट) में मैनेजिंग पार्टनर हैं और पूर्व में आदित्य बिड़ला फाइनेंस व केपीएमजी में शीर्ष पदों पर रह चुके हैं, ने अपने 23 वर्षों के अनुभव से छात्रों को इनोवेशन और स्केलेबल कंज्यूमर इंटरनेट प्रोडक्ट्स बनाने के गुर सिखाए।

    टॉप-10 इनोवेटिव आइडियाज ने खींचा ध्यान

    इस आयोजन में कुल 35 स्टार्टअप आइडिया आए, जिनमें से 10 बेहतरीन आइडिया को शॉर्टलिस्ट किया गया। इनमें साइकिल सॉइल (ऑर्गेनिक कॉटन, बांस और खेती के कचरे से बने बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड), द मंडला स्टूडियो (हाथ से बने मंडला आर्ट प्रोडक्ट), बायो फ्रेश (क्यूआर कोड ट्रैकिंग वाला स्मार्ट डेयरी पैकेजिंग सिस्टम), आर्टेरा (कस्टमाइजेबल टैटू और फेस पेंटिंग सर्विस), बायोकोट (बीजों को बचाने वाली बायोडिग्रेडेबल स्लीव), वेस्ट टू वेल्थ (पेठा-इंडस्ट्री के वेस्ट वाटर और चावल के भूसे से बायोएथेनॉल निर्माण), पीयर पॉड्स (एआई-पावर्ड स्टडी पार्टनर प्लेटफॉर्म), प्रोटियोस्कोप (बायोटेक के लिए प्रोटीन सीक्वेंस एनालिसिस व 3D स्ट्रक्चर प्रेडिक्शन) और प्रोजेक्ट अन्विता (एनईपी आधारित इंटर्नशिप प्लेटफॉर्म) जैसे शानदार आइडिया शामिल रहे।

    विजेताओं को मिली प्रोत्साहन राशि

    जूरी और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के सामने अपनी प्रेजेंटेशन देने के बाद महिलाओं के नेतृत्व वाले 'क्रोशे एंटरप्राइज' ने प्रथम स्थान हासिल कर 25,000 रुपये का मुख्य पुरस्कार जीता। यह स्टार्टअप पारंपरिक क्रोशिया कौशल को आधुनिक उत्पादों जैसे बैग, फोन कवर, की-चेन, क्रॉप टॉप और हेयर एक्सेसरीज में बदल रहा है। वहीं 'साइकिल सॉइल' और 'आर्टेरा' की टीमों को संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ, जिन्हें 15,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया।

    15 सितंबर को आंबेडकर विश्वविद्यालय में होगा आयोजन

    यूपी राइज कार्यक्रम प्रदेश के 25 शहरों के 30 प्रमुख कॉलेजों में आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से राज्य के प्रतिभाशाली छात्रों को सीधे बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप तथा रोजगार के अवसर मिलेंगे। आगरा में इस पहल का अगला पड़ाव 15 सितम्बर 2026 को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में होगा। इन इनोवेटिव आइडियाज ने यह साबित कर दिया है कि यूपी का युवा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • सिर्फ फैक्ट्रियां ही नहीं, स्किल, रिसर्च और एमएसएमई का भी बनेगा मजबूत नेटवर्क

    सिर्फ फैक्ट्रियां ही नहीं, स्किल, रिसर्च और एमएसएमई का भी बनेगा मजबूत नेटवर्क

    कानपुर

    उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन का ग्लोबल हब बनाने के लिए योगी सरकार मिशन मोड में काम कर रही है। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) के अगले चरण को लेकर कानपुर में आगे की तैयारी पर गहराई से चर्चा की गई। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) और प्रदेश सरकार की साझेदारी में आयोजित ‘कानपुर रीजनल डिफेंस वर्कशॉप’ में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि आने वाले दिनों में कानपुर रक्षा उत्पादन का बड़ा केंद्र बनेगा। आईआईटी कानपुर और बीएचयू नई तकनीक में मदद करेंगे। 

    कार्यक्रम में ज़िलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि 'पूर्व का मैनचेस्टर' कहा जाने वाला कानपुर अब देश का बड़ा रक्षा निर्माण केंद्र बनने की पूरी क्षमता रखता है। वहीं, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के उपाध्यक्ष प्रोफेसर हर्ष पंत ने कहा कि भारत सरकार अब रक्षा सामान बाहर से मंगाने के बजाय खुद अपने देश में बनाने पर ध्यान दे रही है  और इसमें यूपी के इस रक्षा कॉरिडोर की बहुत बड़ी भूमिका है। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था द्वारा शुरू की गई 'स्ट्रैटेजिक उत्तर प्रदेश' पहल का मकसद रक्षा क्षेत्र के सभी साथियों को एक मंच पर लाना, यूपीडीआईसी में निवेश बढ़ाना और अलग-अलग शहरों में जाकर रक्षा क्षेत्र की संभावनाओं को मजबूत करना है, और कानपुर की यह कार्यशाला इसी मुहिम का हिस्सा है।  

    सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश को हथियार और रक्षा उपकरण बनाने का एक बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार ने आईआईटी कानपुर और बीएचयू जैसे बड़े संस्थानों के साथ हाथ मिलाया है ताकि इस पूरे कॉरिडोर में विज्ञान, रिसर्च और नई तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा सके। कानपुर की इस नई पहचान को बनाने के लिए सरकार, उद्योग जगत, रक्षा उत्पादन, शोध संस्थानों, नीति निर्माताओं, आईआईटी कानपुर जैसे बड़े संस्थानों और एमएसएमई के प्रमुख लोगों ने एक साथ बैठकर पूरा खाका तैयार किया है। यूपी की बड़ी यूथ पावर को सीधे डिफेंस सेक्टर की खास जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जाएगा। 

    डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स के तन्मय तिवारी ने भी इस बात पर जोर दिया कि कानपुर में बुनियादी ढांचे को बहुत तेजी से खड़ा करने की जरूरत है और युवाओं को ट्रेनिंग व हुनर देने पर ध्यान देना होगा। आईआईटी कानपुर और बीएचयू जैसी जगहों की रिसर्च का फायदा अब आईटीआई और स्थानीय संस्थानों तक पहुंचेगा। उद्योगों की मदद से मिलने वाली ट्रेनिंग और इंटर्नशिप से न सिर्फ युवाओं को नौकरियां मिलेंगी, बल्कि यूपी के पास रक्षा क्षेत्र के लिए अपनी एक पक्की स्किल्ड वर्कफोर्स भी खड़ी हो जाएगी।  

    इसके साथ ही, कार्यशाला में स्थानीय छोटे कारोबारियों और एमएसएमई के रास्ते की सबसे बड़ी रुकावटों, यानी टेस्टिंग, क्वालिटी चेक, ट्रायल और सर्टिफिकेशन की कठिन प्रक्रियाओं को बेहद आसान बनाने की योजना पर बात हुई। भारतीय रक्षा निर्माता समाज के मेजर जनरल पी. के. सैनी ने बताया कि रक्षा खरीद प्रक्रियाओं में कई नए और आसान बदलाव किए गए हैं, जिससे कानपुर के स्थानीय उद्योगों के लिए रक्षा सामान बनाने में हिस्सा लेना अब काफी आसान हो जाएगा। 'मेक इन इंडिया' का दायरा बढ़ाते हुए वर्कशॉप में इस बात पर जोर दिया गया कि अब सिर्फ बाहर से कलपुर्जे लाकर जोड़ने के बजाय अपने देश के भीतर ही डिजाइन, बौद्धिक संपदा (आईपी), सॉफ्टवेयर और अपग्रेड तकनीक विकसित की जाए। कानपुर में पहले से ही मजबूत इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग का आधार मौजूद है।

    यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल की उदया अरुण ने बताया कि उद्योग जगत और निवेशक कानपुर को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित हैं क्योंकि यह रक्षा कॉरिडोर के सबसे मजबूत केंद्रों में से एक बनकर उभरा है। टीकेएमएस इंडिया के कमोडोर अनिल जय सिंह ने भी कहा कि भारत में काम कर रही विदेशी रक्षा कंपनियों को यहां के बड़े बाजार का अंदाजा हो चुका है और वे भी इसका हिस्सा बनना चाहती हैं। 

    नीतियों में बदलाव और नागरिक उद्योगों को फायदा

    योगी सरकार की इस नई पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि रक्षा क्षेत्र में होने वाले ये नए बदलाव सिर्फ सेना या सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे। वर्कशॉप में यह बात सामने आई कि आईआईटी कानपुर जैसे संस्थानों के सहयोग से ऐसी ड्यूल-यूज और डीप-टेक तकनीकें बनाई जाएंगी, जिनका इस्तेमाल आम नागरिक उद्योगों और आम सामान बनाने में भी हो सकेगा। इससे पूरे कानपुर का व्यापारिक और औद्योगिक माहौल चमकेगा। वर्कशॉप में यह भी तय हुआ कि कानपुर में बेहतर तालमेल के लिए एक अलग से काम करने वाली संस्थागत व्यवस्था बनाई जाएगी। कानपुर की इस कार्यशाला के बाद अब अगला पड़ाव झांसी की वर्कशॉप और इस साल के अंत में लखनऊ में होने वाला बड़ा डिफेंस कॉन्क्लेव होगा, जहां इन सिफारिशों के आधार पर यूपी को वैश्विक रक्षा पटल पर स्थापित करने की अंतिम नीतियां सामने आएंगी।

  • अधिकारी जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करें- नगर विकास मंत्री

    अधिकारी जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करें- नगर विकास मंत्री

    लखनऊ

    योगी सरकार ने बारिश के दौरान नगरीय क्षेत्रों में नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्थाओं की निगरानी तेज कर दी है। इसी क्रम में नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर जल निकासी, नाला- नालियों की सफाई और पेयजल आपूर्ति समेत विभिन्न व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बरसात के दौरान नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और जलभराव की समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।

    नगर विकास मंत्री ने नाला-नालियों की सफाई व्यवस्था पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बरसात के दौरान जलभराव की प्रमुख वजहों में नाला-नालियों का अवरुद्ध होना भी शामिल है। इसलिए सभी नगर निकायों में नाला-नालियों की सफाई का कार्य पूरी गंभीरता के साथ कराया जाए। सफाई के बाद निकली सिल्ट और कचरे का तत्काल निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि वह दोबारा नालियों में न पहुंचे। उन्होंने सभी नगरीय निकायों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सफाई व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष जलभराव की समस्या सामने आती है, उन्हें चिन्हित कर वहां प्रभावी जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। एके शर्मा ने पेयजल आपूर्ति की भी समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि बरसात के मौसम में पेयजल की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो। नागरिकों को पर्याप्त एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए। जहां कहीं पेयजल आपूर्ति से संबंधित शिकायतें प्राप्त हों, उनका प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए।

    मंत्री ने आगामी त्योहारों के मद्देनजर नगरीय व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान शहरों में लोगों की आवाजाही और भीड़ बढ़ती है। ऐसे में साफ-सफाई, जल निकासी, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य नागरिक सुविधाओं को पहले से ही दुरुस्त रखा जाए। धार्मिक एवं सार्वजनिक स्थलों के आसपास विशेष साफ-सफाई कराई जाए और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था की जाए।

    उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नगर निगमों और नगर निकायों की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की जाए तथा अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि मौके पर जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के शहरों को स्वच्छ, सुंदर, सुरक्षित और बेहतर नागरिक सुविधाओं से युक्त बनाने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है। इस दिशा में नगर निकायों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण है।

  • हरियाणा HC का अहम निर्णय, तीन कैटेगरी के कर्मचारियों को अब मिलेगी पुरानी पेंशन

    हरियाणा HC का अहम निर्णय, तीन कैटेगरी के कर्मचारियों को अब मिलेगी पुरानी पेंशन

    चंडीगढ़.

    हरियाणा के कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना को लेकर चल रहे लंबे विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। 46 याचिकाओं का निपटारा करते हुए कोर्ट ने मामलों को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर निर्णय दिया। इनमें एक श्रेणी के कर्मचारियों को राहत नहीं मिली, जबकि तीन अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना का रास्ता साफ कर दिया गया है।

    खास तौर पर नियमित होने से पहले की लंबी सेवा और पुरानी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। पहली श्रेणी में वे कर्मचारी शामिल थे, जिनकी नियुक्ति एक जनवरी 2006 के बाद और 18 अगस्त 2008 से पहले हुई थी। इन कर्मचारियों ने 28 अक्टूबर 2005 की कटआफ तारीख को बदलकर 18 अगस्त 2008 करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि हरियाणा की नई पेंशन योजना 18 अगस्त 2008 को अधिसूचित हुई थी, इसलिए इसी तारीख को आधार बनाया जाना चाहिए।

    हाई कोर्ट ने यह मांग खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपनी कर्मचारियों से संबंधित पेंशन नीति बनाते समय केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित कटआफ तारीख को अपनाने के लिए बाध्य नहीं है। इसलिए 28 अक्टूबर 2005 की कटआफ तारीख में बदलाव नहीं किया जा सकता। दूसरी श्रेणी के कर्मचारियों को महत्वपूर्ण राहत मिली है। इसमें वे कर्मचारी शामिल हैं, जिन्होंने एक जनवरी 2006 से पहले पार्ट टाइम, एडहाक, अस्थायी या अनुबंध के आधार पर काम शुरू किया था और बाद में नियमित हुए। कोर्ट ने कहा कि राज्य एक आदर्श नियोक्ता है। लंबे समय तक कर्मचारी से सेवा लेने के बाद उसकी पूर्व सेवा को पूरी तरह नजरअंदाज कर उसे पेंशन जैसे लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। लगातार की गई ऐसी सेवा को केवल पार्ट टाइम या अस्थायी सेवा बताकर बाहर नहीं किया जा सकता। लिहाजा नियमितीकरण से पहले की पात्र निरंतर सेवा को पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा में शामिल किया जाएगा।

    पुराने विज्ञापन पर हुई भर्ती में भी ओपीएस का लाभ
    तीसरी श्रेणी में वे कर्मचारी हैं, जिनके लिए भर्ती का विज्ञापन 28 अक्टूबर 2005 से पहले जारी हो चुका था, लेकिन नियुक्ति एक जनवरी 2006 के बाद हुई। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की तारीख को अहम माना। यदि बाद में भर्ती प्रक्रिया में कोई बदलाव हुआ या नया विज्ञापन जारी किया गया, लेकिन वह वास्तव में पहले शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया की निरंतरता था, तो उसे नई भर्ती नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों में केवल नियुक्ति बाद में होने के आधार पर पुरानी पेंशन का लाभ नहीं रोका जा सकता।

    अनुकंपा नियुक्तियों में भी रास्ता साफ
    चौथी श्रेणी में अनुकंपा और एक्स-ग्रेशिया आधार पर नियुक्त कर्मचारी शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि कर्मचारी की मृत्यु और अनुकंपा नियुक्ति के लिए दावा या आवेदन 28 अक्टूबर 2005 से पहले शुरू हो चुका था, तो बाद में हुई औपचारिक नियुक्ति के कारण उसे पुरानी पेंशन योजना से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसे पात्र कर्मचारियों को आठ मई 2023 के कार्यालय ज्ञापन के तहत ओपीएस का लाभ देने का रास्ता साफ किया गया है।

  • जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने यूपी के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और कारोबारी माहौल की सराहना की

    जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने यूपी के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और कारोबारी माहौल की सराहना की

    लखनऊ

    इंडो-जर्मन गेटवे प्रोग्राम के तहत उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने एमएसएमई को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस संबंध में जर्मनी से आए प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तर प्रदेश और जर्मनी के बीच व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और एमएसएमई के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

    मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है। प्रदेश में निवेशकों के लिए भरोसेमंद और पारदर्शी कारोबारी वातावरण तैयार किया गया है। देश के कुल एमएसएमई का लगभग 14 प्रतिशत हिस्सा यूपी में है और लगभग एक करोड़ एमएसएमई इकाइयां यहां कार्यरत हैं। कृषि के बाद रोजगार का सबसे बड़ा क्षेत्र एमएसएमई है।

    उन्होंने बताया कि भारत व जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 31.01 बिलियन डॉलर का है। यूरोपीय संघ को होने वाले यूपी के कुल निर्यात में जर्मनी की हिस्सेदारी लगभग 19.8 प्रतिशत है। यूपी से जर्मनी को प्रतिवर्ष 404.20 मिलियन डॉलर से अधिक का निर्यात होता है, जिसमें रेडीमेड वस्त्र, चर्म उत्पाद, फुटवियर, कालीन, ऑटो कंपोनेंट्स प्रमुख हैं। प्रदेश का कुल निर्यात लगभग 18.2 बिलियन यूरो यानी करीब दो लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है और यूपी देश का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है।

    बैठक में बताया गया कि इंडो-जर्मन गेटवे प्रोग्राम 12 माह का संरचित कार्यक्रम है, जिसे जर्मनी के इनोवेशन हब राइन-मेन तथा जीआईबीए के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इसके तहत चयनित एमएसएमई एवं स्टार्टअप्स को जर्मनी में कानूनी कंपनी स्थापित करने, वहां के बाजार को समझने और विदेशी खरीदारों से सीधे संपर्क के लिए सहायता दी जाएगी। प्रिसीजन इंजीनियरिंग, ऑटोमेशन, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा और रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई।

    जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने यूपी के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और कारोबारी वातावरण की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रोग्राम में केवल बड़ी कंपनियों पर ही नहीं, बल्कि स्पष्ट विजन वाली संभावनाशील एमएसएमई और स्टार्टअप्स का चयन किया जाएगा। उन्होंने यूपी के विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के माध्यम से व्यापारिक संबंध बढ़ाने में रुचि दिखाई।

    मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने जर्मन उद्यमियों को 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में आयोजित होने वाले चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी व्यापार, तकनीक, निवेश और कौशल के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग का मजबूत आधार बनेगी। प्रथम चरण में वैश्विक विस्तार की क्षमता वाली इकाइयों की पहचान की जाएगी।

    जर्मन प्रतिनिधिमंडल में राउनहाइम के मेयर डेविड रेंडेल, इनोवेशन हब राइन-मेन के सीईओ स्टीफन विट्टेकाइंड, जर्मन इंडियन बिजनेस अलायंस (जीआईबीए) के सीईओ निर्मल रमण कन्नाइयन तथा चेयरमैन सेल्वकुमार पेरियासामी शामिल रहे। इस अवसर पर प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल, विशेष सचिव शिशिर सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

  • पंजाब में कल थमेगी स्कूल वैन सेवा, नए नियमों के खिलाफ ड्राइवरों का विरोध प्रदर्शन

    पंजाब में कल थमेगी स्कूल वैन सेवा, नए नियमों के खिलाफ ड्राइवरों का विरोध प्रदर्शन

    श्री मुक्तसर साहिब.

    पंजाब सरकार की ओर से स्कूल वैन चालकों के लिए लागू नई ड्राइविंग लाइसेंस गाइडलाइन और अन्य नियमों के विरोध में वीरवार को पूरे पंजाब में स्कूल वैन चालक एक दिन की हड़ताल करेंगे। चालक बठिंडा में राज्य स्तरीय रोष रैली भी करेंगे।

    हड़ताल का पंजाब के सभी जिलों में व्यापक असर पड़ने की संभावना है। राज्य भर में हजारों स्कूल वैनों के पहिए थमेंगे। कई निजी स्कूलों ने विद्यार्थियों के लिए पहले ही छुट्टी घोषित कर दी है, जबकि कुछ स्कूलों ने अभिभावकों से बच्चों को स्वयं स्कूल छोड़ने और वापस लाने की व्यवस्था करने को कहा है।

    45 दिन की ट्रेनिंग से बढ़ा खर्च
    स्कूल वैन चालक जगदेव सिंह, हरमेल सिंह, कुलदीप सिंह और बाबा मेजर सिंह ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत भारी वाहन लाइसेंस बनवाने या उसके नवीनीकरण के लिए 45 दिन की अनिवार्य ट्रेनिंग करनी होगी। इसके लिए करीब 14 हजार रुपये खर्च होंगे। चालकों का कहना है कि पहले गांव माऊआणा स्थित प्रशिक्षण केंद्र में दो दिन की ट्रेनिंग होती थी, जिस पर करीब 800 रुपये खर्च आता था। उनका कहना है कि 45 दिन तक प्रशिक्षण लेने से रोजाना काम और आय प्रभावित होगी।

    नियमों और जुर्माने को लेकर नाराजगी
    चालकों के अनुसार स्कूल वैनों पर पहले से करीब 120 नियम लागू हैं। अब नए नियमों के कारण छोटे संचालकों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ रहा है। उनका दावा है कि पहले नियम उल्लंघन पर 500 से 800 रुपये तक का चालान होता था, जबकि अब 15 हजार से 30 हजार रुपये जुर्माना लगाया जा रहा है। चालकों ने मांग की है कि स्कूल वैनों की पासिंग केवल वाहन की उम्र के आधार पर न की जाए, बल्कि उसकी वास्तविक फिटनेस को आधार बनाया जाए। उनका कहना है कि 15 साल पुरानी वैनों पर रोक की शर्त व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि स्कूल वैन रोजाना करीब 40 से 50 किलोमीटर ही चलती हैं।

    टैक्स में राहत और ई-रिक्शा पर कार्रवाई की मांग
    वैन संचालकों ने हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर पंजाब में भी टैक्स में राहत देने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ई-रिक्शा नियमों के विपरीत स्कूली बच्चों को ढो रहे हैं, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही। चालकों का कहना है कि वे प्रति बच्चे 700 से 1000 रुपये शुल्क लेते हैं। इसी राशि से ईंधन, वाहन रखरखाव, टैक्स और महिला परिचारिका का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है। चालकों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। संगठन ने हड़ताल के दौरान बच्चों को स्कूल लेकर जाने वाले चालक पर एक हजार रुपये जुर्माना लगाने की बात भी कही है।

  • सबका साथ, सबका विकास’ सिर्फ नारा नहीं, अपने सार्थक सरोकारों के साथ बलिया में धरातल पर आया सामने

    सबका साथ, सबका विकास’ सिर्फ नारा नहीं, अपने सार्थक सरोकारों के साथ बलिया में धरातल पर आया सामने

    बलिया

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना रहा है कि सुशासन की असली परीक्षा तब होती है जब वह समाज के सबसे कमजोर और वंचित वर्ग तक बिना किसी बाधा के पहुंचे। बलिया जिले में सामने आई एक घटना इस सोच को हकीकत में बदलने का प्रमाण है। जिले मनियर ब्लॉक की दिघेड़ा ग्रामसभा के रानीपुर गांव में रहने वाली सात वर्ष की रागिनी एक पैर से दिव्यांग है लेकिन उसकी पढ़ाई की जिद और परेशानी की खबर मिलते ही जिलाधिकारी खुद उसके घर जा पहुंचे और ट्राइसिकिल देकर इलाज की व्यवस्था कराई। 
    प्राथमिक विद्यालय दिघेड़ा में कक्षा एक की छात्रा रागिनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद हर दिन स्कूल जाती थी। परिवार की आर्थिक तंगी और गांव की टूटी-फूटी सड़कों के बीच उसका यह सफर आसान नहीं था, लेकिन पढ़ाई को लेकर इसके हौसले में कमी नहीं आई। जब यह मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आया तो बिना देर किए जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह विभागीय अधिकारियों की टीम के साथ सीधे रागिनी के घर पहुंचे और उसकी मां बबीता देवी व दादा से आत्मीयता से बातचीत की। बच्ची से खुद संवाद करते हुए उन्होंने उसकी पढ़ाई, स्कूल आने-जाने की दिक्कतों और रोजमर्रा की जरूरतों के बारे में बारीकी से जानकारी ली।

    मौके पर ही मिली किताबें, ट्राईसाइकिल और इलाज का भरोसा

    संवेदनशीलता की यह पहल केवल मुलाकात तक सीमित नहीं रही। जिलाधिकारी ने अपने हाथों से रागिनी को स्कूली किताबें और पढ़ाई की सामग्री भेंट कीं, ताकि उसकी शिक्षा में कोई कमी न रह जाए। बच्ची को आवागमन में होने वाली दिक्कत को समझते हुए तत्काल दो ट्राईसाइकिल भी उपलब्ध कराई गईं। इसके साथ ही उसके पैर के इलाज के लिए बिना देर किए डॉक्टरी जांच और समुचित चिकित्सा व्यवस्था कराने के सख्त निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिए गए। परिवार को यह भी भरोसा दिलाया गया कि उनके घर में शौचालय निर्माण की राशि पहले से स्वीकृत है और उसे जल्द उपलब्ध कराया जाएगा। गांव में मौजूद जर्जर सड़क को देखकर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई और संबंधित विभाग को तत्काल मरम्मत का निर्देश दिया, जिससे रागिनी समेत पूरे गांव के लोगों को आवागमन में राहत मिल सके।

    दिव्यांगजनों के लिए विशेष कैंप का निर्देश

    योगी सरकार की मंशा के तहत जिलाधिकारी ने दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी को निर्देश दिया कि पूरे गांव में विशेष कैंप लगाकर सभी पात्र दिव्यांगजनों को आर्थिक और भौतिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभय कुमार राय, बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह और जिला पंचायत राज अधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। 
    जिलाधिकारी की इस त्वरित कार्रवाई से रागिनी और उसके परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। यह घटना बताती है कि योगी सरकार का सुशासन मॉडल सिर्फ फाइलों और योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के दरवाजे तक पहुंचकर उन्हें राहत देने का माध्यम बन चुका है। बलिया की इस मिसाल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब इच्छाशक्ति हो, तो प्रशासनिक मशीनरी सबसे दूरदराज के गांव तक भी संवेदनशीलता के साथ पहुंच सकती है।