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  • पटना में ट्रैफिक का होगा समाधान! ₹8,456 करोड़ से बनेगा 10 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर

    पटना में ट्रैफिक का होगा समाधान! ₹8,456 करोड़ से बनेगा 10 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर

    पटना.

    राजधानी पटना के न्यू बाईपास पर जाम की समस्या से स्थायी निजात दिलाने की दिशा में बड़ी पहल होने जा रही है। अनीसाबाद से दीदारगंज तक करीब 13.14 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड एट-ग्रेड कॉरिडोर बनाया जाएगा।

    यह बिहार का पहला ऐसा कॉरिडोर होगा, जिसमें मौजूदा सड़क के ऊपर छह लेन की एलिवेटेड सड़क होगी।रियोजना पर करीब 8,456 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस हिसाब से प्रति किलोमीटर निर्माण लागत करीब 643 करोड़ रुपये होगी। परियोजना पूरी होने के बाद दक्षिणी पटना के करीब 150 मोहल्लों की 10 लाख आबादी को न्यू बाईपास पर भारी वाहनों के कारण लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

    नीचे चार लेन, ऊपर छह लेन की सड़क
    अनीसाबाद से दीदारगंज के बीच वर्तमान चार लेन सड़क को यथावत रखते हुए उसके ऊपर छह लेन की एलिवेटेड सड़क बनाई जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारी वाहनों और स्थानीय यातायात को अलग-अलग कर दिया जाएगा। भारी वाहन एलिवेटेड सड़क से सीधे गुजरेंगे। स्थानीय वाहन नीचे की सड़क और सर्विस रोड का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे न्यू बाईपास पर बार-बार लगने वाले जाम की समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है।

    22 किमी सर्विस रोड, 10 रैंप और चार अंडरपास
    परियोजना सिर्फ एलिवेटेड सड़क तक सीमित नहीं होगी। इसके तहत सड़क के दोनों ओर कुल 22 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड बनाई जाएगी। इसके अलावा यातायात को सुगम बनाने के लिए 10 रैंप, दो फ्लाईओवर, तीन छोटे पुल और चार अंडरपास का निर्माण किया जाएगा। पटना-गया रेललाइन पर आठ लेन का रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) भी बनाया जाएगा। न्यू बाईपास और आसपास के इलाकों में जलजमाव की समस्या दूर करने के लिए पांच किलोमीटर से अधिक लंबी आधुनिक ड्रेनेज प्रणाली भी विकसित की जाएगी।

    इन प्रमुख जगहों पर खत्म होगा जाम
    कॉरिडोर बनने के बाद अनीसाबाद, सरिस्ताबाद, 90 फीट, पुराना बस अड्डा, अशोक नगर, कंकड़बाग-अशोक रोड, भूतनाथ, पहाड़ी, गुरु गोविंद सिंह लिंक पथ, कर्मलीचक और दीदारगंज जैसे प्रमुख इलाकों में यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। अभी इन क्षेत्रों में स्थानीय वाहनों के साथ बड़ी संख्या में ट्रक और दूसरे भारी वाहन भी गुजरते हैं। दोनों तरह के ट्रैफिक के एक ही मार्ग पर होने के कारण बाईपास पर अक्सर जाम की स्थिति बनती है।

    कच्ची दरगाह-बिदुपुर महासेतु से जुड़ेगा कॉरिडोर
    कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन महासेतु के चालू होने के बाद इस कॉरिडोर की उपयोगिता और बढ़ जाएगी। उत्तर बिहार से आने-जाने वाले भारी वाहनों को पटना शहर के भीतर प्रवेश किए बिना आगे बढ़ने का बेहतर मार्ग मिलेगा। कोइलवर-बिहटा क्षेत्र से आने वाले बालू और निर्माण सामग्री से लदे ट्रकों के लिए भी यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण होगा। इससे गांधी सेतु और आरा-छपरा सेतु पर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    उत्तर बिहार तक माल ढुलाई होगी आसान
    कॉरिडोर के बनने से वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय और दरभंगा समेत उत्तर बिहार के कई जिलों तक माल ढुलाई आसान और तेज हो सकती है। इससे पटना के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था को फायदा मिलने की उम्मीद है। परियोजना का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) पर प्रस्तावित है। इसमें परियोजना की लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार और 60 प्रतिशत राशि निर्माण एजेंसी की ओर से लगाए जाने का प्रावधान है। सरकार निर्धारित अवधि में एजेंसी को भुगतान करेगी।

    अब तैयार होगी डीपीआर
    परियोजना के लिए अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। इसके बाद निर्माण से जुड़े अगले चरणों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पथ निर्माण मंत्री ईं. कुमार शैलेन्द्र के अनुसार, यह परियोजना केवल एक एलिवेटेड सड़क का निर्माण नहीं है, बल्कि भविष्य के ग्रेटर पटना की बढ़ती यातायात जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही बड़ी योजना है। इसका उद्देश्य भारी और स्थानीय यातायात को अलग कर पटना के न्यू बाईपास पर जाम, दुर्घटना और जलजमाव जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान करना है।

    परियोजना से क्या बदलेगा?

    • भारी वाहनों का अलग कॉरिडोर: ट्रक और दूसरे भारी वाहन छह लेन की एलिवेटेड सड़क से गुजर सकेंगे।
    • स्थानीय यातायात को राहत: नीचे की सड़क और सर्विस रोड का इस्तेमाल स्थानीय वाहन कर सकेंगे।
    • जाम में कमी: अनीसाबाद से दीदारगंज के बीच प्रमुख जाम प्वाइंट पर यातायात सुगम होगा।
    • सुरक्षित आवागमन: मोहल्लों से मुख्य सड़क पर आने-जाने वाले लोगों के लिए यातायात व्यवस्था सुरक्षित होगी।
    • जलजमाव से राहत: पांच किलोमीटर से अधिक लंबी आधुनिक ड्रेनेज प्रणाली विकसित होगी।
    • पुलों पर दबाव कम: कच्ची दरगाह-बिदुपुर महासेतु के चालू होने के बाद गांधी सेतु समेत अन्य प्रमुख पुलों पर वाहनों का दबाव घट सकता है।
    • व्यापार को रफ्तार: उत्तर बिहार के प्रमुख शहरों तक माल की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।
  • निर्यातोन्मुखी उद्यमों को जर्मनी व यूरोपीय बाजार में प्रवेश के अनुरूप तैयार करना है लक्ष्य

    निर्यातोन्मुखी उद्यमों को जर्मनी व यूरोपीय बाजार में प्रवेश के अनुरूप तैयार करना है लक्ष्य

    लखनऊ

    योगी सरकार उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में बुधवार को इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में इंडो-जर्मन गेटवे कार्यक्रम के तहत एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग तथा जर्मन इंडियन बिजनेस अलायंस (जीआईबीए) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश के निर्यातोन्मुखी उद्यमों को जर्मनी व यूरोपीय बाजार में प्रवेश के लिए तैयार करना है। यह सहयोग गैर-वित्तीय, गैर-बाध्यकारी और गैर-अनन्य स्वरूप का है।

    प्रमुख सचिव एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन शशि भूषण लाल ने इस अवसर पर कहा कि वर्ष 2026 भारत-जर्मनी संबंधों के लिए ऐतिहासिक वर्ष है, क्योंकि इस वर्ष दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष और रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। जर्मनी यूरोपीय संघ में भारत का महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है और भारत में 2000 से अधिक जर्मन कंपनियां काम कर रही हैं। प्रदेश में विनिर्माण इकाइयों और निर्यात के लिए तैयार एमएसएमई का मजबूत आधार है, जिनमें यूरोपीय बाजार में विस्तार की बड़ी क्षमता है। उन्होंने इस कार्यक्रम को 12 महीने के संरचित रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा, जिसमें उद्यम मूल्यांकन, बाजार सत्यापन, स्थापना और प्रवेश के बाद सहायता जैसे चरण शामिल होंगे।

    जर्मनी के राउनहाइम शहर के मेयर डेविड रेंडेल ने कहा कि इस साझेदारी को कागजी कार्रवाई से मुक्त और व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। इसकी सफलता कार्यक्रमों की संख्या से नहीं, बल्कि नए व्यावसायिक समझौतों, भारतीय कंपनियों द्वारा जर्मनी में उपस्थिति और जर्मन कंपनियों द्वारा उत्तर प्रदेश में परियोजनाएं शुरू करने जैसे ठोस परिणामों से मापी जानी चाहिए। उन्होंने इनोवेशन हब राइन-मेन को जर्मनी में संस्थागत आधार और जीआईबीए को भारतीय पक्ष में समन्वयक के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

    एमओयू के तहत उत्तर प्रदेश के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान, पात्र उद्यमों को कार्यक्रम की जानकारी देना, राज्य सरकार की योजनाओं के साथ समन्वय और उद्यमों की तैयारी में सहायता जैसे कार्यों पर फोकस होगा। इसके साथ ही गाजियाबाद कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) के आधुनिकीकरण में जर्मन तकनीक, गुणवत्ता, परीक्षण एवं प्रमाणन संबंधी मार्गदर्शन और जर्मन प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ संपर्क बढ़ाने पर भी काम किया जाएगा। जर्मन आयात मानकों, यूरोपीय संघ के व्यापार नियमों, टैरिफ और निर्यात दस्तावेजीकरण जैसे विषयों पर संयुक्त कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। यह एमओयू तीन वर्ष तक प्रभावी रहेगा।

    कार्यक्रम में इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरण आनंद, उद्योग आयुक्त के.वी. पंडियन, सहायक महाप्रबंधक रितेश सक्सेना, यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन के एमडी हिमांशु कौशिक, इनोवेशन हब राइन-मेन के सीईओ स्टीफन विट्टेकिंड और जीआईबीए के चेयरमैन सेल्वकुमार पेरियासामी सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

  • Gorakhpur से Hyderabad का सफर होगा आसान, 2 अक्टूबर से चलेगी Amrit Bharat Express; जानें रूट और शेड्यूल

    Gorakhpur से Hyderabad का सफर होगा आसान, 2 अक्टूबर से चलेगी Amrit Bharat Express; जानें रूट और शेड्यूल

    गोरखपुर

    उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, गोंडा, बाराबंकी, गोमतीनगर, लखनऊ सिटी, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, उरई और झांसी स्टेशनों से हैदराबाद तक जाने और आने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। गोरखपुर से चर्लपल्ली (हैदराबाद) तक अमृतभारत एक्सप्रेस की मंजूरी के साथ ही इसके चलने की तारीख का भी ऐलान हो गया है। बोर्ड से मिले निर्देश के बाद पूर्वोत्तर रेलवे ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। सीपीआरओ सुमित कुमार ने बताया कि नई अमृतभारत ट्रेन चर्लपल्ली से गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर से हर शुक्रवार और गोरखपुर से 04 अक्टूबर से हर रविवार को 22075/22076 चर्लपल्ली-गोरखपुर-अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस के रूप में चलेगी। रेलवे बोर्ड ने प्रयोग के तौर पर अभी इसे सप्ताह में एक दिन चलाने की मंजूरी दी है। डिमांड बढ़ने पर फेरे बढ़ाए जा सकते हैं। हैदराबाद के लिए गोरखपुर से पहली रेगुलर ट्रेन होगी।

    यह ट्रेन गोरखपुर से हैदराबाद चर्लपल्ली के अलावा गोंडा, बाराबंकी, गोमतीनगर, लखनऊ सिटी, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, उरई, झांसी, बीना, भोपाल,इटारसी, बैतूल, नागपुर, चंदरपुर, बल्लारशाह, काजीपेट स्टेशनों पर भी रुकेगी। 22075 चर्लपल्ली-गोरखपुर अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस 02 अक्टूबर से प्रत्येक शुक्रवार को चर्लपल्ली से रात 9.45 बजे प्रस्थान कर तीसरे दिन सुबह 6.25 बजे गोरखपुर पहुंचेगी। वापसी यात्रा में, 22076 गोरखपुर-चर्लपल्ली अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस 04 अक्टूबर से प्रत्येक रविवार को गोरखपुर से सुबह 08.30 बजे प्रस्थान कर दूसरे दिन शाम 5 बजे चर्लपल्ली पहुंचेगी। इस ट्रेन में कुल 22 कोच लगाए जाएंगे।

    यात्रियों को ये सुविधाएं मिलेंगी
    बिना एसी वाली अमृत भारत एक्सप्रेस आम यात्रियों के लिए डिजाइन की गई है। नई ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे लगे रहेंगे। टॉक-बैक सिस्टम से यात्री आपात स्थिति में सीधे लोको पायलट व ट्रेन मैनेजर से संपर्क कर सकेंगे। वैक्यूम बायो टॉयलेट, आरामदायक सीटों की सुविधा मिलेगी। 130 किमी की रफ्तार से दौड़ने वाली 22 बोगियों वाली अमृत भारत एक्स में 1834 यात्री सफर कर सकेंगे।

    गोरखपुर के रास्ते अभी चल रहीं 4 अमृतभारत एक्सप्रेस
    दिल्ली और बांद्रा अमृतभारत के बाद अब गोरखपुर से हैदराबाद (चेरापल्ली) तक चलने वाली इस अमृतभारत की सौगात मिली है। बिहार से चलकर गोरखपुर के रास्ते अभी चार अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन हो रहा है। इसमें लखनऊ के रास्ते आनंदविहार से दरभंगा के लिए एक अमृत भारत एक्सप्रेस है। वहीं हाल ही में गोरखपुर दिल्ली और बांद्रा के लिए अमृतभारत ट्रेन की मंजूरी बोर्ड ने दी है। भविष्य में रेलवे बोर्ड 24 और अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें पटरी पर उतारने जा रहा है।

    जानें शेड्यूल

    हैदराबा से गोरखपुर अमृतभारत(22075)

    -प्रस्थान का दिन-शुक्रवार

    -प्रस्थान -रात 9.45 बजे

    -आगमन-तीसरे दिन सुबह 6.25 बजे

    गोरखपुर से हैदराबाद अमृतभारत(22076)

    -प्रस्थान का दिन-रविवार

    -प्रस्थान -सुबह 8 बजे

  • सीएम युवा योजना से मिली नई पहचान, साधना ने खड़ा किया सफल वाटर प्लांट व्यवसाय

    सीएम युवा योजना से मिली नई पहचान, साधना ने खड़ा किया सफल वाटर प्लांट व्यवसाय

    लखनऊ/इटावा

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न स्वरोजगार योजनाएं संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) ऐसी ही एक महत्वपूर्ण पहल है, जो लोगों को रोजगार तलाशने वाला नहीं बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाने का कार्य कर रही है। इटावा जनपद के महेवा क्षेत्र की रहने वाली साधना इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। योजना के तहत मिली वित्तीय सहायता से उन्होंने ‘जय भोले वाटर प्लांट’ की स्थापना की और आज सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय संचालित कर रही हैं।

    समाचार पत्र से मिली योजना की जानकारी

    साधना बताती हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) की जानकारी एक समाचार पत्र के माध्यम से मिली। उस समय उनके पास कोई स्वयं का व्यवसाय नहीं था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और आत्मनिर्भर बनने की इच्छा थी। योजना के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आवेदन किया और अपना उद्यम स्थापित करने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, सरकार की इस पहल ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर प्रदान किया।

    वित्तीय सहायता से शुरू हुआ कारोबार

    अप्रैल 2025 में साधना को योजना के तहत 3.20 लाख रुपये का ऋण तथा 87 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। इस वित्तीय सहायता से उन्होंने ‘जय भोले वाटर प्लांट’ की स्थापना की। साधना बताती हैं कि व्यवसाय शुरू करने में सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की व्यवस्था थी। पर्याप्त संसाधन न होने के कारण कारोबार शुरू करना आसान नहीं था, लेकिन योजना से मिली सहायता ने उनकी राह आसान कर दी। इसके बाद उन्होंने शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का कार्य शुरू किया और धीरे-धीरे ग्राहकों का विश्वास अर्जित किया।

    आज लाखों का कारोबार, कई परिवारों को मिला सहारा

    लगातार मेहनत और बेहतर सेवाओं के बल पर आज उनका वाटर प्लांट क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुका है। वर्तमान में उनके उद्यम का वार्षिक टर्नओवर लगभग 4.20 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। साधना का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण सेवा और ग्राहकों का भरोसा ही उनकी सफलता का आधार है। उनके इस उद्यम से 6 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला हुआ है, जिससे कई परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है।

    कारोबार को और आगे बढ़ाने का लक्ष्य

    साधना का कहना है कि वह भविष्य में अपने वाटर प्लांट के कारोबार को और आगे बढ़ाना चाहती हैं। उनका लक्ष्य अधिक लोगों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। उनका मानना है कि यदि मेहनत और सरकार की योजनाओं का सहयोग मिले तो आत्मनिर्भर बनने का सपना आसानी से साकार किया जा सकता है। साधना की सफलता इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प को मजबूती प्रदान कर रहा है।

  • महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर, 28 लाख से ज्यादा ‘लखपति दीदी’ बनीं परिवार की आर्थिक ताकत

    महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर, 28 लाख से ज्यादा ‘लखपति दीदी’ बनीं परिवार की आर्थिक ताकत

    ‘लखपति दीदी’ बन प्रदेश की 28 लाख से अधिक महिलाएं बनीं परिवार की आर्थिक धुरी

    योगी सरकार के आजीविका मिशन से बदल रही ग्रामीण समृद्धि की तस्वीर

    65 हजार से ज्यादा ग्राम संगठनों और 3,200 से अधिक संकुल स्तरीय संघों ने तैयार किया मजबूत आर्थिक तंत्र

    गरीब ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों के जरिए आत्मनिर्भर उद्यमों से जोड़ रही योगी सरकार

    लखनऊ,
     उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाएं आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिख रहीं हैं। कभी घर की चारदीवारी और खेती-किसानी में सहयोग तक सीमित मानी जाने वाली ग्रामीण महिलाएं अब बचतकर्ता से उद्यमी और परिवार की सहयोगी से उसकी आर्थिक ताकत बन रही हैं। योगी सरकार के ग्रामीण आजीविका मिशन ने इस बदलाव को व्यापक आधार दिया है। प्रदेश में साढ़े दस लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर करीब सवा करोड़ ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भर बने हैं और इनमें से 28 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनकर ग्रामीण समृद्धि का नया चेहरा बन गई हैं। यह बदलाव केवल महिलाओं की आय बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में पूंजी, उत्पादन, बाजार और रोजगार का नया चक्र भी खड़ा कर रहा है।

    आजीविका मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि उसका विशाल नेटवर्क ही नहीं, बल्कि गांवों में विकसित हो रहा सामुदायिक आर्थिक तंत्र है। छोटी-छोटी बचत से शुरू हुआ महिलाओं का सफर अब बैंकिंग, ऋण, उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और उद्यमिता तक पहुंच गया है। 
    योगी सरकार ने स्वयं सहायता समूहों को केवल वित्तीय सहयोग का माध्यम बनाने के बजाय उन्हें आर्थिक स्वावलंबन की पहली सीढ़ी बनाया है। समूहों से आगे 65,544 ग्राम संगठनों और 3,298 संकुल स्तरीय संघों का ढांचा खड़ा कर महिलाओं को ऐसा संस्थागत आधार दिया गया है, जो उनकी आजीविका को स्थायित्व और कारोबार को विस्तार दे रहा है।

    बचत की छोटी पूंजी बनी बड़े बदलाव का आधार

    ग्रामीण आजीविका मिशन की बुनियाद सामूहिकता की उस ताकत पर टिकी है, जिसमें महिलाएं संगठित होकर अपनी आर्थिक क्षमता बढ़ाती हैं। स्वयं सहायता समूह में नियमित छोटी बचत से शुरुआत होती है। यही बचत वित्तीय अनुशासन पैदा करती है और आगे बैंक ऋण तथा दूसरे संस्थागत वित्त तक पहुंच का रास्ता खोलती है।

    मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि इस व्यवस्था ने उस ग्रामीण महिला के लिए भी उद्यमिता के द्वार खोले हैं, जिसके पास न बड़ी पूंजी थी और न बाजार तक सीधी पहुंच। खेती से जुड़ी गतिविधियों से लेकर पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीय उत्पादों के निर्माण और सेवा क्षेत्र तक महिलाएं आय के नए स्रोत विकसित कर रही हैं। इससे उनकी भूमिका परिवार की अतिरिक्त कमाई करने वाली सदस्य से आगे बढ़कर आर्थिक फैसलों में भागीदार की बन रही है।

    28.16 लाख लखपति दीदियां बदलाव की सबसे बड़ी पहचान

    इस परिवर्तन की सबसे सशक्त तस्वीर प्रदेश की 28.16 लाख ‘लखपति दीदियां’ हैं। इन महिलाओं का लखपति बनना महज आय का एक आंकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आर्थिक संरचना में आ रहे बदलाव का संकेत है। नियमित और टिकाऊ आमदनी ने महिलाओं को परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के लिए पूंजी तैयार करने की क्षमता भी दी है। महिला की आय बढ़ने का प्रभाव परिवार और गांव दोनों पर पड़ता है। बच्चों की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों पर खर्च की क्षमता बढ़ने के साथ स्थानीय बाजार में मांग भी पैदा होती है। यही वजह है कि लखपति दीदी अभियान को केवल महिला सशक्तीकरण के दायरे में देखने के बजाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नीचे से ऊपर की ओर समृद्धि पैदा करने वाले मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

    गांव-गांव तक पहुंचा आर्थिक स्वावलंबन का नेटवर्क

    उत्तर प्रदेश में साढ़े दस लाख स्वयं सहायता समूहों से सवा करोड़ परिवारों का जुड़ना मिशन के विस्तार की व्यापकता का बड़ा उदाहरण है। इतने बड़े स्तर पर ग्रामीण परिवारों को संगठित करने से गांवों में महिलाओं की सामूहिक आर्थिक शक्ति तैयार हुई है। छोटे स्तर पर पूंजी, प्रशिक्षण और बाजार की जिन चुनौतियों का सामना अकेली महिला के लिए कठिन होता था, योगी सरकार के सहयोग और सामूहिक शक्ति ने उनका समाधान आसान किया है।

    इस मॉडल की विशेषता यह भी है कि गरीब परिवार की आजीविका को चरणबद्ध ढंग से मजबूत किया जाता है। पहले महिला को समूह से जोड़ना, फिर बचत और वित्तीय अनुशासन विकसित करना और उसके बाद ऋण, कौशल, उत्पादन तथा बाजार से जोड़ना, यही क्रम आत्मनिर्भरता की बुनियाद तैयार कर रहा है।

    65,544 ग्राम संगठन बने समूहों की ताकत

    स्वयं सहायता समूहों को दीर्घकालिक और संस्थागत मजबूती देने के लिए प्रदेश में 65,544 ग्राम संगठन और 3,298 संकुल स्तरीय संघों का नेटवर्क खड़ा किया गया है। इस व्यवस्था ने गांव की महिलाओं को सामुदायिक संस्थाओं के संचालन और आर्थिक गतिविधियों के प्रबंधन में भी भागीदार बनाया है।

    मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि ग्राम संगठन स्थानीय स्तर पर समूहों के बीच समन्वय, वित्तीय अनुशासन और आजीविका गतिविधियों को मजबूती देते हैं, जबकि संकुल स्तरीय संघ उन्हें बड़े बाजार, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग तक पहुंचाने का माध्यम बन रहे हैं। इसी मजबूत ढांचे के सहारे मिशन की ‘आत्मनिर्भर महिला, आदर्श परिवार और समृद्ध संस्था’ की अवधारणा गांवों में मूर्त रूप ले रही है।

  • झारखंड HC का अहम निर्देश, सहायक आचार्य नियुक्ति में B.Ed डिग्रीधारकों के मामले पर फिर होगा विचार

    झारखंड HC का अहम निर्देश, सहायक आचार्य नियुक्ति में B.Ed डिग्रीधारकों के मामले पर फिर होगा विचार

    रांची.

    हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सहायक आचार्य नियुक्ति बीएड की डिग्री को लेकर उम्मीदवारी खारिज किए गए अभ्यर्थियों को राहत मिली है। अदालत ने शिल्पा कुमारी एवं अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए जेएसएससी को उनकी उम्मीदवारी पर विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप दोबारा विचार करने और नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने पर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

    मामले में याचिकाकर्ताओं को जेएसएससी की ओर से नोटिस जारी किया गया था। इसमें कहा गया था कि उनके द्वारा प्राप्त बीएड की डिग्री विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता की शर्तों के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर उनकी उम्मीदवारी पर विचार नहीं किया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शुभम मिश्रा और अधिवक्ता ज्ञानदेव राज ने अदालत को बताया कि प्रार्थी ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के प्रविधानों के अनुरूप बीएड की डिग्री हासिल की है। उनके पास झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) का प्रमाणपत्र भी है। ऐसे में वे विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अन्य आवश्यक शर्तें पूरी करते हैं। अधिवक्ताओं ने दलील दी कि केवल बीएड की अवधि या उसकी प्रकृति के आधार पर अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी खारिज नहीं की जा सकती। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने विप्लव दत्ता एवं अन्य के मामले में पारित आदेश के आलोक में याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने जेएसएससी को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं की उम्मीदवारी पर विज्ञापन की शर्तों के अनुसार विचार करे और उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने के संबंध में उचित निर्णय ले।

    माध्यमिक आचार्य नियुक्ति से संबंधित जनहित याचिका निष्पादित
    झारखंड हाई कोर्ट में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति से संबंधित जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने जनहित याचिका निष्पादित कर दी। सुनवाई के दौरान जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि 877 अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार से अनुशंसा कर दी गई है। 204 पदों के लिए उपयुक्त अभ्यर्थी नहीं मिल सके हैं। वहीं, 292 अभ्यर्थियों के दस्तावेज के सत्यापन के दौरान कुछ त्रुटियां पाई गई हैं। इन अभ्यर्थियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। आयोग की ओर से अदालत को नियुक्ति प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया गया।

    सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अदालत से माध्यमिक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय-सीमा निर्धारित करने का आग्रह किया गया। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर पुनर्परीक्षा कराए जाने को गलत माना है। एकल पीठ ने मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का भी आदेश दिया है। जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि खंडपीठ और एकल पीठ के आदेश के बाद मामले की परिस्थितियां अलग हो गई हैं। इस पर खंडपीठ ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय-सीमा निर्धारित करना संभव नहीं है। जेएसएससी का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने जनहित याचिका निष्पादित कर दी।

  • दिव्यांग छात्राओं के सपनों को मिलेगी रफ्तार, 40 प्रतिशत दिव्यांगता पर भी ई-ट्राइसाइकिल

    दिव्यांग छात्राओं के सपनों को मिलेगी रफ्तार, 40 प्रतिशत दिव्यांगता पर भी ई-ट्राइसाइकिल

    लखनऊ

    योगी सरकार ने दिव्यांग छात्राओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने, उनकी गतिशीलता बढ़ाने और शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थानों तक आवागमन को सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल वितरण योजना का विस्तार करते हुए 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाली पात्र अध्ययनरत छात्राओं को भी योजना का लाभ देने का निर्णय लिया गया है।

    योजना के अंतर्गत पात्र छात्राओं को अधिकतम 65,000 रुपये तक की बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। इससे विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय एवं प्रशिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत दिव्यांग छात्राओं के लिए घर से शिक्षण संस्थान तक आने-जाने में सुविधा होगी और आवागमन की बाधा को कम किया जा सकेगा।

    प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचेगा योजना का लाभ

    योजना को प्रदेशव्यापी स्वरूप देते हुए सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों को इसके दायरे में रखा गया है। योजना के तहत प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा सीट से 20-20 पात्र दिव्यांग छात्राओं का चयन होगा। विभिन्न जनपदों में चिन्हांकन एवं सत्यापन के बाद उन्हें निशुल्क बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। इस तरह योजना के अंतर्गत प्रदेशभर में कुल 8,060 ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली पात्र दिव्यांग छात्राओं को भी आवागमन की बेहतर सुविधा मिल सके और वे अपनी शिक्षा एवं प्रशिक्षण को बिना किसी परिवहन संबंधी बाधा के जारी रख सकें।

    40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता पर पात्रता

    योजना के अंतर्गत 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाली पात्र अध्ययनरत छात्राएं लाभ प्राप्त कर सकेंगी। लाभार्थी छात्रा का किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय अथवा प्रशिक्षण संस्थान में अध्ययनरत या प्रशिक्षणरत होना आवश्यक होगा। पात्रता का निर्धारण शासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं शर्तों के अनुसार किया जाएगा। छात्रा के पास निर्धारित दिव्यांगता प्रमाण-पत्र/यूडीआईडी कार्ड तथा योजना के लिए आवश्यक अन्य अभिलेख होना आवश्यक होगा। पात्रता के संबंध में निर्धारित मानकों के अनुसार दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा।

    लाभार्थी की उम्र 16 वर्ष या उससे अधिक होना अनिवार्य 

    जनपद स्तर पर संबंधित अधिकारियों द्वारा पात्र छात्राओं का चिन्हांकन एवं सत्यापन कराया जाएगा। सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पात्र छात्राओं को अधिकतम 65,000 रुपये तक की बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी की उम्र 16 वर्ष या उससे अधिक होना अनिवार्य है। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। छात्राएं जनपद स्तर पर जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग अधिकारी या पोर्टल https://hwd.uphq.in/ पर आवेदन कर सकती हैं।

    शिक्षा जारी रखने में मिलेगी मजबूती

    योजना का उद्देश्य केवल आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि दिव्यांग छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उनकी शिक्षा और प्रशिक्षण को निर्बाध बनाए रखना भी है। परिवहन की समस्या के कारण अनेक दिव्यांग छात्राओं को विद्यालय, महाविद्यालय अथवा प्रशिक्षण संस्थान तक नियमित रूप से पहुंचने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। कई बार आवागमन की समस्या उनकी शिक्षा में बाधा बन जाती है। ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध होने से ऐसी छात्राओं को नियमित रूप से शिक्षण संस्थान तक पहुंचने में सुविधा होगी और उनकी पढ़ाई जारी रखने के अवसर मजबूत होंगे।

    समान अवसर और सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम

    योगी सरकार की यह पहल दिव्यांग छात्राओं को शिक्षा, कौशल विकास और भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसरों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल से उनकी गतिशीलता, आत्मनिर्भरता, शिक्षा तक पहुंच और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों तक योजना को पहुंचाने का प्रयास दिव्यांग छात्राओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विभाग का प्रयास है कि दिव्यांगजन के लिए संचालित योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों तक पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए। यह पहल समावेशी शिक्षा, समान अवसर और दिव्यांग छात्राओं के सशक्तीकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।

    पढ़ाई के लिए आसान होगा आवागमन

    दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उपनिदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने बताया कि दिव्यांग छात्राओं को शिक्षा एवं प्रशिक्षण के दौरान आवागमन में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए शासन द्वारा बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल वितरण योजना का विस्तार किया गया है। अब 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाली पात्र अध्ययनरत छात्राओं को भी योजना का लाभ मिलेगा। जनपद स्तर पर आवश्यक अभिलेखों एवं पात्रता का सत्यापन करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत पात्र छात्राओं को ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी।

  • वन विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, CG में 60 से अधिक सहायक वन संरक्षकों को नई जिम्मेदारी

    वन विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, CG में 60 से अधिक सहायक वन संरक्षकों को नई जिम्मेदारी

    रायपुर.

    राज्य सरकार ने वन विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला सूची जारी की गई है. प्रशासनिक दृष्टिकोण से 60 से अधिक सहायक वन सरंक्षक की नई पदास्थापना जारी हुई है. इस संबंध में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से आदेश जारी किया गया है.

    आदेश के तहत राम कुमार सिदार को मंडल प्रबंधक, कर्वधा परियोजना मंडल, राज्य वन विकास निगम, कवर्धा पदस्थ किया गया है. विजेन्द्र सिंह ठाकुर को उप वनमंडलाधिकारी बस्तर, वनमंडल बस्तर भेजा गया है. अमिता गुप्ता को उप प्रबंधक, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ मुख्यालय, नया रायपुर पदस्थ किया गया है. इसी तरह  मनोज कुमार विश्वकर्मा को उप वनमंडलाधिकारी बिरगुड़ी, वनमंडल धमतरी पदस्थ किया गया है. मोना महेश्वरी को संलाग्नाधिकारी, वृत्त कार्यालय दुर्ग भेजा गया है. जसवीर सिंह मरावी को उप वनमंडलाधिकारी कांकेर, वनमंडल कांकेर पदस्थ किया गया है. कुमार सिंह कंवर को उप वनमंडलाधिकारी बैकुंठपुर, वनमंडल कोरिया भेजा गया है.

    वहीं, एम. एल. सिदार कोउप प्रबंध संचालक, जिला यूनियन रायगढ़ पदस्थ किया गया है. शिवशंकर नाविक को उप मंडलाधिकारी धमतरी, वनमंडल धमतरी पदस्थ किया गया है. जबकि अवधेश सिंह को उप प्रबंध संचालक, जिला यूनियन, सूरजपुर पदस्थ किया गया है.

  • पंजाब में BC प्रमाणपत्र पर नया नियम, सिर्फ आय नहीं माता-पिता का पद भी तय करेगा पात्रता

    पंजाब में BC प्रमाणपत्र पर नया नियम, सिर्फ आय नहीं माता-पिता का पद भी तय करेगा पात्रता

    चंडीगढ़.

    पंजाब भवन में बुधवार को सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र, छात्रवृत्ति और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र बनवाने में आ रही दिक्कतों का जल्द समाधान किया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों के अधिकारियों और संबंधित विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

    डॉ. बलजीत कौर ने स्पष्ट किया कि अब प्रमाणपत्र केवल परिवार की आय के आधार पर नहीं बनेगा। प्रमाणपत्र जारी करते समय माता-पिता की सरकारी नौकरी, पद, सामाजिक स्थिति, पिछले तीन वर्षों की आय और परिवार की संपत्ति सहित विभिन्न पहलुओं को देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सेवा केंद्रों और पटवारियों को भी पात्रता संबंधी पूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई है। जल्द ही सभी सेवा केंद्रों के बाहर सूचना पट लगाए जाएंगे, ताकि लोगों को स्पष्ट जानकारी मिल सके कि किन परिस्थितियों में पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र बनाया जा सकता है।

    अधिक वार्षिक आय वाले परिवार क्रीमी लेयर श्रेणी में 
    मंत्री ने बताया कि संवैधानिक पदों पर रह चुके लोगों, उच्च पदों पर कार्यरत अधिकारियों तथा निश्चित आय से अधिक वाले परिवारों के बच्चों को प्रमाणपत्र का लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि बड़े सरकारी अधिकारियों के बच्चों के साथ-साथ चिकित्सक, अभियंता और अन्य बड़े पेशेवर पदों पर कार्यरत माता-पिता के बच्चों की पात्रता भी निर्धारित नियमों के अनुसार तय होगी। आठ लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों को क्रीमी लेयर  में माना जाएगा। प्रमाणपत्र के लिए परिवार की शहरी और ग्रामीण संपत्ति की स्थिति भी देखी जाएगी।

    शादी के बाद भी बदल जाएगा सर्टिफिकेट
    उन्होंने एक महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि किसी लड़की की शादी हो जाती है तो उसका पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र उसके विवाह के बाद के परिवार की स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि उसके माता-पिता की सामाजिक स्थिति को देखते हुए बनाया जाएगा। इसी तरह माता-पिता का प्रमाणपत्र पहले से नहीं बना होने का अर्थ यह नहीं है कि बच्चे का प्रमाणपत्र नहीं बन सकता। रिश्तेदार के प्रमाणपत्र के आधार पर भी बच्चे की पात्रता तय नहीं होगी।

    391 करोड़ की राशि जारी
    डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि वर्ष 2022 के बाद आशीर्वाद योजना के तहत करीब 76 हजार लाभार्थियों को लाभ दिया गया है और सरकार करीब 391 करोड़ रुपये की राशि जारी कर चुकी है। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति का लाभ भी दिया जा रहा है। वर्तमान में बी श्रेणी के तहत प्रत्येक पात्र बच्चे को 20 हजार रुपये का लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को पत्र लिखकर उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की मांग की गई है। प्रमाणपत्र बनने के बाद राज्य के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ मिल रहा है।

    12 यूनिवर्सिटीज में 210 सीटों पर दाखिला
    पंजाबी विश्वविद्यालय में पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के लिए जल्द दो छात्रावास शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य के 12 प्रमुख व्यावसायिक महाविद्यालयों में प्रमाणपत्र के आधार पर 210 सीटों पर दाखिला दिया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि पंजाब के करीब छह हजार विद्यालयों में भी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाएगी। नवमीं-दसवीं के विद्यार्थियों को सालाना 75 हजार रुपये और ग्यारहवीं-बारहवीं के विद्यार्थियों को 1.25 लाख रुपये तक छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र धारकों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत और दाखिले में 12 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है।

  • लोगों को भ्रमित कर रही एआई जनित खबरें एनएमसी से जुड़ी फेक न्यूज़ सोशल मीडिया पर वायरल

    लोगों को भ्रमित कर रही एआई जनित खबरें एनएमसी से जुड़ी फेक न्यूज़ सोशल मीडिया पर वायरल

    लखनऊ

    सोशल मीडिया लोगों की दिनचर्या का एक हिस्सा बन गया है। जहां दिन भर तरह-तरह की खबरें प्रसारित और प्रचारित होती रहती हैं। देखने और पढऩे में सामान्य सी लगने वाले कई समाचार सच से कोसों दूर होते हैं। यह खबरें केवल न्यूज पेपर कटिंग तक सीमित नहीं है घटना-दुर्घटना के वीडियो भी एआई से बनाकर व्यूज बटोरने के लिए सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे हैं। खबरों से प्रभावित होने वाले जब उसकी पड़ताल करते हैं तो पता चलता है कि वह समाचार एआई यानि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बना है। 

    तकनीक के हमेशा से ही दो पहलू रहे हैं। एक वह जो मानव सभ्यता के लिए लाभदायक होता है तो दूसरा आम आदमी का जीवन खतरे में डाल सकता है। इसी तकनीक का ताजा उदाहरण है एआई। आज के समय में हर कोई एआई का मास्टर बनना चाहता है। एआई आपकी तस्वीर को सुन्दर बनाने से लेकर कपड़े और लोकेशन तक बदल सकता है। इतना ही नहीं आप एआई की मदद से कोई भी वीडियो बना सकते हैं। आज इसी तकनीक का सहारा लेकर कई लोग फेक न्यूज़ और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर व्यूज बढ़ा रहे हैं। यही लोग समाचार पत्र की कटिंग सी लगने वाली खबर भी एआई से बनाकर सोशल मीडिया में पोस्ट कर रहे हैं। कई समाचार पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली खबरों के फैक्ट जांचे बगैर ही उन्हें अखबार में जगह दे देते हैं। जो लोगों की परेशानी का सबब बन जाता ह है। फर्जी खबरों की कड़ी में एक न्यूज सोशल मीडिया पर वायरल हुई जो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से जुड़ी थी । जिसमें NMC द्वारा डमी फैकल्टी की लिस्ट तैयार किये जाने की जानकारी दी गयी थी। लिस्ट उन डॉक्टरों की जो तैनात तो हैं पर कॉलेज नहीं जाते। अब प्रभावित लोगों ने इसकी पड़ताल की हकीकत सामने आई कि समाचार फर्जी और एआई जनित है। लोगों का कहना है कि इससे होने वाली परेशानी से मानसिक दबाव बनाता है।
    कभी किसी दुर्घटना की फर्जी खबर आ जाती है तो कभी किसी प्रतियोगी परीक्षा का रिजल्ट आ जाता है। यहां तक की एआई से लोग अफसरों के नियुक्ति और आदेश पत्र बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं। और ऐसे लोगों की भी संख्या कम नहीं है जो बगैर सच को जाने समझे उस पत्र को शेयर करते चले जाते हैं। आए दिन ऐसी दर्जनों पोस्ट वायरल होती हैं जिनका सच से कोई लेना देना नहीं। किसी कोई भी जागरूक नागरिक इसकी पड़ताल करता है तब यह पता चला है कि समाचार पत्र या वीडियो एआई से जेनरेट किया गया है।