Category: राज्य

  • मथुरा में योगी आदित्यनाथ का तीखा वार, ‘हम राम-कृष्ण को मानने वाले, बाबर-औरंगजेब के विरोधी’

    मथुरा में योगी आदित्यनाथ का तीखा वार, ‘हम राम-कृष्ण को मानने वाले, बाबर-औरंगजेब के विरोधी’

    मथुरा
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद आयोजित कार्यक्रम में कहा कि उनकी सरकार प्रभु श्री राम, कृष्ण कन्हैया, बाबा विश्वनाथ और मां विंध्यवासिनी पर विश्वास करती है. उन्होंने कहा कि 1528 में विदेशी आक्रांताओं ने अयोध्या में आस्था को समाप्त करने का प्रयास किया था, लेकिन जो खुद को अविजित मानते थे वे आज समाप्त हो चुके हैं. सीएम योगी ने चेतावनी दी कि बाबर और औरंगजेब के अनुयायी अपनी आदतों से मजबूर होकर फिर से समाज में विष वमन करने और राष्ट्रविरोधी तत्वों के हौसले बढ़ाने में जुटे हैं। 

    विरासत और जन आस्था पर योगी का बयान
    संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि योग माया के प्रति अटूट आस्था की वजह से ही विंध्यवासिनी धाम को एक भव्य परिसर मिल सका है. उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों की आस्था बाबर और औरंगजेब में होगी, वे जनता की आस्था को कभी सम्मान नहीं दे पाएंगे. सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि जिनकी आस्था आक्रांताओं में है, वे धार्मिक भावनाओं का आदर नहीं कर सकते। 

    सुरक्षा और खुशहाली पर खतरे का जिक्र
    मुख्यमंत्री ने विरोधियों पर हमला बोलते हुए कहा
    कि ये तत्व समाज में जहर घोलकर आम जनता की सुरक्षा में सेंध लगाना चाहते हैं. वे युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने, बहनों-बेटियों की सुरक्षा को खतरे में डालने, किसानों की खुशहाली पर डकैती डालने और उभरते हुए कारीगरों व हस्तशिल्पियों को फिर से लाचार बनाने का प्रयास कर रहे हैं। 

    डबल इंजन सरकार का कड़ा संदेश
    सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि समाज विरोधी और राष्ट्र विरोधी तत्वों की इन साजिशों को सफल नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार इन सभी गलत मंसूबों पर पूरी तरह पानी फेरेगी. सरकार जनता की सुरक्षा, समृद्धि और विकास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इन मंसूबों को कभी पूरा नहीं होने देगी। 

    मुख्यमंत्री ने कहा- 5200 वर्ष पूर्व धर्म, सत्य और न्याय की स्थापना के लिए श्री हरि विष्णु के पूर्ण अवतार के रूप में श्री कृष्ण कन्हैया इसी पवित्र स्थल पर प्रकट हुए थे. अनेक आक्रमणों और आस्था थोपने के प्रयासों के बावजूद सनातन धर्म को कोई मिटा नहीं सका. जिन लोगों ने इसे मिटाने का दुस्साहस किया, वे खुद मिट्टी में मिल गए. आज भी ब्रजभूमि में श्री कृष्ण और राधा रानी की स्मृतियां भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। 

  • मेसरा स्टेशन को रांची मंडल में शामिल करने की मांग तेज, बदले सीमांकन से बढ़ी 400 मीटर जिम्मेदारी

    मेसरा स्टेशन को रांची मंडल में शामिल करने की मांग तेज, बदले सीमांकन से बढ़ी 400 मीटर जिम्मेदारी

     रांची
     मेसरा स्टेशन को अपने अधीन लेने की रांची रेल मंडल की वर्षों पुरानी मांग अभी पूरी नहीं हुई है। स्टेशन तो धनबाद रेल मंडल के पास ही रहा, लेकिन मंडल के सीमांकन में बदलाव के बाद रांची रेल मंडल को करीब 400 मीटर का अतिरिक्त रेल क्षेत्र जरूर मिल गया। यानी स्टेशन नहीं मिला, मगर उसकी ओर जाने वाले रास्ते में रेल मंडल का अधिकार क्षेत्र थोड़ा बढ़ गया।

    मेसरा स्टेशन वर्तमान में धनबाद रेल मंडल के अधीन है। इसे रांची रेल मंडल में शामिल करने की मांग पिछले कई वर्षों से उठती रही है। रांची रेल मंडल ने भी इस दिशा में पहल करते हुए मुख्यालय को पत्र भेजा है। स्थानीय यात्री संघों और सांसदों की ओर से भी रेलवे तथा रेल मंत्रालय के स्तर पर स्टेशन को रांची मंडल में शामिल करने की मांग रखी गई है।

    मेसरा स्टेशन रांची मंडल मुख्यालय से मात्र 19 किलोमीटर की दूरी है पर
    रांची रेल मंडल का तर्क है कि मेसरा स्टेशन मंडल मुख्यालय से करीब 19 किलोमीटर की दूरी पर है। ऐसे में स्टेशन को रांची मंडल के अधीन किए जाने से इसका बेहतर प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और यात्री सुविधाओं का विस्तार किया जा सकेगा।

    भविष्य में यहां ट्रेनों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए भी मंडल स्तर पर बेहतर समन्वय हो सकेगा। मेसरा स्टेशन को और विकसित किया जाता और रांची रेलवे स्टेशन और हटिया स्टेशन की तरह ही भविष्य में इस स्टेशन का विकास होता।

    मेसरा की ओर से आने वाले यात्रियों को रांची स्टेशन तक आने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इसी तरह पिस्का स्टेशन को विकसित किया जा रहा है। ताकि रांची स्टेशन और हटिया स्टेशन से यात्रियों का दबाव कम हो सकेगा।

    स्टेशन नहीं बदला, सीमांकन जरूर बदल गया
    इधर, रेलवे बोर्ड ने रांची और धनबाद रेल मंडल के बीच बरकाकाना की ओर सीमांकन में बदलाव किया है। रांची-बरकाकाना रेलखंड पर मंडलीय सीमा पहले 198.918 किलोमीटर पर थी, जिसे अब 198.515 किलोमीटर पर निर्धारित किया गया है। इस बदलाव के बाद करीब 400 मीटर का रेल क्षेत्र रांची रेल मंडल की परिसीमा में आया है।

    इसका एक दिलचस्प पहलू यह है कि मेसरा स्टेशन को रांची मंडल में लेने की मांग के बीच स्टेशन तो अब भी धनबाद मंडल के अधीन है, लेकिन बदली हुई सीमा के कारण रांची मंडल को संबंधित क्षेत्र में एक प्वाइंट के रखरखाव की जिम्मेदारी निभानी होगी। यानी अधिकार का विस्तार हुआ, लेकिन जिस स्टेशन के लिए मांग चल रही थी, उसका नियंत्रण अभी भी नहीं बदला।

    पांच ट्रेनों का हो रहा परिचालन
    मेसरा स्टेशन से वर्तमान में करीब पांच ट्रेनों का परिचालन हो रहा है। इनमें हटिया-सांकी पैसेंजर की दोनों सेवाएं, रांची-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस, हटिया-आसनसोल एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेनें शामिल हैं। यात्रियों की संख्या और भविष्य में रेल सेवाओं के विस्तार को देखते हुए स्टेशन को रांची मंडल में शामिल करने की मांग लगातार उठती रही है।

    फैसला रेलवे बोर्ड के स्तर पर
    मेसरा को रांची मंडल में शामिल करना रेलवे बोर्ड का नीतिगत मामला है। मंडलीय क्षेत्राधिकार में बदलाव के लिए संबंधित दोनों जोन और मंत्रालय स्तर पर सहमति आवश्यक होती है। ऐसे में रांची मंडल की ओर से भेजे गए पत्र और जनप्रतिनिधियों की मांग के बाद अब रेलवे बोर्ड के स्तर पर निर्णय का इंतजार है।

    फिलहाल मेसरा स्टेशन धनबाद मंडल के अधीन ही है, जबकि बदले सीमांकन के कारण रांची मंडल की जिम्मेदारी करीब 400 मीटर क्षेत्र तक जरूर बढ़ गई है।

  • लोकसभा के झटके के बाद BJP ने कसी कमर, यूपी में संगठन से लेकर चुनावी रणनीति तक होगी समीक्षा

    लोकसभा के झटके के बाद BJP ने कसी कमर, यूपी में संगठन से लेकर चुनावी रणनीति तक होगी समीक्षा

    लखनऊ
     यूपी विधान सभा चुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बना चुकी भाजपा संगठन बनाने के बाद अब पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को चुनावी होमवर्क देगी। सात सितंबर को जहां यूपी के नए प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े लखनऊ में डेरा डालेंगे, वहीं राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का भी दौरा होगा।

    राष्ट्रीय नेतृत्व प्रदेश एवं क्षेत्रीय टीमों से मिलकर चुनावी धड़कन की जानकारी लेगा। मोर्चों के साथ भी अलग बैठक होगी। वहीं, माह के अंत में गृहमंत्री अमित शाह के दौरे की रचना बनाई जा रही है।

    यूपी विधान सभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं है। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को भारी झटका लगा। अगर चुनावी परिणाम के आधार पर आकलन करें तो ढाई सौ से ज्यादा विधान सभाओं में सपा और सहयोग दल आगे रहे। यह भाजपा के लिए खतरे की घंटी है।

    इसके बाद से भगवा खेमा संगठन एवं जातीय समीकरण कसने में जुटा है। हालांकि संगठन एवं जनप्रतिनिधियों में मतभेद एवं कार्यकर्ताओं के थकने की वजह से ज्यादातर अभियानों का रंग फीका रहा है। जिलाध्यक्षों को बनाने एवं जिलों की टीमों के गठन में भारी विलंब हुआ, वहीं कई क्षेत्रों में पदाधिकारियों को लेकर अंदरुनी लड़ाई खुलकर सामने आई। पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए।

    इस बीच प्रदेश की टीम में भारी बदलाव किया गया, लेकिन यहां भी कई ऐसे नाम शामिल किए गए, जिनका संगठन में कोई अनुभव नहीं रहा। अब क्षेत्रीय टीमों की घोषणा कर दी गई है, जिसके बाद विनोद तावड़े के दौरे की उपयोगिता बढ़ गई है। तावड़े ने प्रदेश की टीम में बड़े बदलाव की पटकथा लिखी, जिसका असर 2027 विधान सभा चुनाव में टिकटों में बदलाव में भी दिखेगा।

    वह सालभर से यूपी के दौरों पर निकल रहे हैं। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री प्रदेशभर के संगठनों के साथ संवाद करेंगे। नितिन नवीन चार एवं पांच जुलाई को लखनऊ में थे, जहां उन्होंने प्रदेश की टीम के साथ मुलाकात करने के साथ ही सहयोगी दलों से भी मिले।

    बुजुर्ग एवं अनुभवी कार्यकर्ताओं को साधा, वहीं दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य एवं ब्रजेश पाठक के यहां पहुंचकर बड़ा संदेश दिया। सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मिले थे। अब नई तैयारियों के साथ लखनऊ पहुंचेंगे, जहां से वह काशी एवं अयोध्या जा सकते हैं।

    इस बीच गृहमंत्री अमित शाह का यूपी दौरा प्रस्तावित है। इससे पहले वह 23 जनवरी को लखनऊ आए थे, जहां उन्होंने प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर पदाधिकारियों से भी मुलाकात की थी।

  • नेपाल से आने-जाने वाले रेल यात्रियों की होगी जांच, जयनगर-इनरवा में बनेगी आव्रजन चौकी

    नेपाल से आने-जाने वाले रेल यात्रियों की होगी जांच, जयनगर-इनरवा में बनेगी आव्रजन चौकी

     पटना
    भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय रेल नेटवर्क पर यात्रियों की निगरानी और जांच के लिए बिहार से लगने वाली सीमा पर इमिग्रेशन पोस्ट बनाया जाएगा। जयनगर-इनरवा रेलखंड पर बनने वाली इस आव्रजन चौकी का निर्माण आइबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) के नेतृत्व में होगा। नेपाल सीमा की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्र सरकार के निर्देश पर इसके निर्माण की स्वीकृति दी गई है।

    रेल यात्रियों के दस्तावेज और सामान की होगी जांच
    इमिग्रेशन पोस्ट के साथ जयनगर-इनरवा समेत सीमावर्ती जिलों से जुड़े रेलखंड की सुरक्षा ऑडिट भी कराई जाएगी। डीजीपी विनय कुमार की अध्यक्षता में हुई रेलवे की राज्यस्तरीय सुरक्षा समिति की बैठक में इमिग्रेशन पोस्ट समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय लिए गए। बैठक में पुलिस और रेलवे सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

    बंगाल मॉडल पर चलेगा बिहार का इमिग्रेशन पोस्ट
    रेलवे इमिग्रेशन पोस्ट की सुविधा उन चुनिंदा स्टेशनों पर होती है, जहां से दूसरे देशों के लिए ट्रेनें चलती हैं। पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश जाने वाली ट्रेनों के लिए ऐसी व्यवस्था पहले से है।

    बिहार में भी इसी मॉडल पर इमिग्रेशन पोस्ट का संचालन किया जाएगा। इसमें आरपीएफ, राजकीय रेल पुलिस और जिला पुलिस की टीमें तैनात रहेंगी।

    अवैध घुसपैठ और तस्करी पर भी रहेगी नजर
    इमिग्रेशन पोस्ट पर अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने वाले यात्रियों के नागरिकता संबंधी दस्तावेज और सामान की जांच होगी। देश में प्रवेश करने और बाहर जाने वाले यात्रियों का कंप्यूटरीकृत डाटाबेस भी तैयार किया जाएगा।

    इससे नेपाल से ट्रेन के जरिए अवैध घुसपैठ, हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

    जनकपुर से अयोध्या तक चल सकती है ट्रेन
    भारत-नेपाल मैत्री परियोजना के तहत जयनगर से जनकपुर, कुर्था होते हुए बर्दीवास तक 67 किलोमीटर रेलखंड पर फिलहाल ट्रेन सेवा चल रही है।

    परियोजना के दो फेज का काम पूरा हो चुका है, जबकि तीसरे फेज का काम बाकी है। इसी रूट के जरिए जनकपुर से अयोध्या तक ट्रेन चलाने की भी योजना है। अगले वर्ष अप्रैल तक सेवा शुरू होने की संभावना जताई गई है।

    बिहार में आधा दर्जन नए रेलखंड होंगे अधिसूचित
    गृह विभाग की आरक्षी शाखा ने जयनगर से नेपाल सीमा इनरवा तक के रेलखंड को रेल जिला मुजफ्फरपुर के रेल थाना जयनगर के अंतर्गत अधिसूचित किया है।

    इसके अलावा आधा दर्जन से अधिक नए रेलखंड भी जल्द अधिसूचित किए जाएंगे। इनमें सरायगढ़-निर्मली, आरा-सासाराम, हाजीपुर-वैशाली, दनियावां-बिहारशरीफ, राजगीर-तिलैया और दरौंधा-महाराजगंज रेलखंड शामिल हैं।
    रेल सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी

    राज्यस्तरीय सुरक्षा समिति की बैठक में अंतरराष्ट्रीय रेल नेटवर्क के साथ बिहार के अन्य रेलखंडों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

    नए रेलखंडों के अधिसूचित होने से संबंधित क्षेत्रों में रेल पुलिस की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।

     

  • 97.86 लाख टन धान उत्पादन का अनुमान, मंडियों पर दबाव की आशंका; हरियाणा ने बढ़ाया खरीद

    97.86 लाख टन धान उत्पादन का अनुमान, मंडियों पर दबाव की आशंका; हरियाणा ने बढ़ाया खरीद

    चंडीगढ़
     हरियाणा में इस बार धान की संभावित रिकार्ड पैदावार के बीच खरीद को लेकर राज्य सरकार ने केंद्र के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री प्रहलाद जोशी से मुलाकात कर हरियाणा के लिए धान खरीद का कोटा बढ़ाने की मांग की।

    उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में उत्पादन अधिक होने की स्थिति में किसानों की पूरी फसल खरीदने की व्यवस्था जरूरी है। बैठक में विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी जे गणेशन समेत वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

    राजेश नागर ने केंद्र से हरियाणा को कम से कम 65 लाख टन धान खरीद की मंजूरी देने का अनुरोध किया। प्रदेश सरकार ने पहले करीब 60 लाख टन धान खरीद की मंजूरी मांगी थी, जबकि केंद्र ने फिलहाल 58 लाख टन की ही मंजूरी दे रखी है।

    ऐसे में राज्य सरकार को आशंका है कि यदि उत्पादन अनुमान के मुताबिक अधिक रहा तो खरीद के समय मंडियों में दबाव बढ़ सकता है और किसानों को अपनी फसल बेचने में परेशानी आ सकती है।

    चावल का कोटा घटने से भी बढ़ी चिंता
    बैठक में हरियाणा ने धान के साथ-साथ चावल के खरीद कोटे में कमी का मुद्दा भी उठाया। केंद्र की ओर से चावल लेने का कोटा करीब 8 लाख टन घटाया गया है। केंद्र की ओर से हर साल लगभग 40 टन चावल खरीदा जाता है।

    राज्य सरकार का कहना है कि धान की अधिक उपलब्धता के बीच चावल का कोटा कम होने से खरीद और उठान की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

    इस बार सबसे अधिक धान उत्पादन की संभावना
    इस बार प्रदेश में करीब 17.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई हुई है। पिछले वर्षों में भी धान उत्पादन लगातार बढ़ा है। वर्ष 2021-22 में करीब 82.29 लाख टन, 2022-23 में 88.20 लाख टन, 2023-24 में 94.20 लाख टन और 2024-25 में 92.99 लाख टन उत्पादन दर्ज हुआ। इस बार उत्पादन करीब 97.86 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है।

    राजेश नागर को खरीद कोटा बढ़ने की उम्मीद
    केंद्रीय मंत्री के साथ हुई बैठक के बाद राजेश नागर ने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने हरियाणा की मांग पर सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भरोसा दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि किसानों के हित को देखते हुए धान खरीद का कोटा बढ़ाया जाएगा।

     

  • पटना समेत 8 जिलों में बाढ़ की चेतावनी, कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द; राहत-बचाव तेज

    पटना समेत 8 जिलों में बाढ़ की चेतावनी, कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द; राहत-बचाव तेज

    पटना
    बिहार सरकार ने गुरुवार को 8 जिलों में बाढ़ का अलर्ट जारी कर दिया। आपदा प्रबंधन विभाग ने गंगा, पुनपुन और दरधा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी को देखते हुए यह चेतावनी जारी की है। इन जिलों में पटना, नालंदा, भोजपुर, वैशाली, सारण, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद शामिल हैं। बाढ़ से इन जिलों के कई इलाके जलमग्न हो चुके हैं। पटना के ग्रामीण दियारा इलाकों के बाद शहरी क्षेत्र में भी बाढ़ का पानी घुसने लगा है। जिले में पीएचईडी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शुक्रवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। उन्होंने राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक भी बुलाई है।

    दक्षिण बिहार की नदियों के जलस्तर में तेजी सो बढ़ोतरी हो रही है। आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव संतोष मल्ल ने बाढ़ प्रभावित जिलों के डीएम को विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। उन्हें नदियों के जलस्तर पर नजर रखने और पानी फैलने पर राहत बचाव कार्य में जुट जाने के निर्देश दिए गए हैं।

    सम्राट ने किया निरीक्षण
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को भी बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने बेंगलुरु रवाना होने से पहले पटना में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि आमजन को किसी भी प्रकार की परेशानी ना हो और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। शुक्रवार को वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर आला अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।

    कमांड कंट्रोल रूम से नजर
    डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने गुरुवार को जल संसाधन विभाग के कमान एंड कंट्रोल सेंटर में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि जिन जगहों पर तटबंध में टूटने की खबर है, वीडियो कांफ्रेसिंग से वहां के हालत का जायजा लिया गया है।

    दक्षिण बिहार में पुनपुन और दरधा नदी का निरीक्षण किया गया है। गंगा नदी में बढ़े हुए जलस्तर के कारण भागलपुर में तटबंध टूटा है वहां का भी जायजा लिया गया।

    उन्होंने बताया कि स्टीमर से मेगा जिओ बैग लगाकर स्थिति नियंत्रण में करने की कोशिश की जा रही है। जल संसाधन विभाग के सभी अधिकारी और इंजीनियर तटबंधों पर मौजूद हैं। कमांड कंट्रोल रूम से पूरे बिहार पर नजर रखी जा रही है।

    नीतीश ने भी लिया जायजा
    पूर्व मुख्यमंत्री एवं जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार भी गुरुवार को बाढ़ की आशंका को देखते हुए निरीक्षण पर निकले। उन्होंने महात्मा गांधी सेतु से गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर का जायजा लिया। इस दौरान जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा भी मौजूद रहे।

    कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द
    गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर से पटना जिले के कई निचले और दियारा इलाकों में बाढ़ की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। प्रभावित परिवारों को संक्रामक बीमारियों से बचाने और बुनियादी सुविधाएं देने के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) ने बड़े पैमाने पर राहत अभियान शुरू किया है। संकट को देखते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर विभाग के सभी पर्यवेक्षकों और जिला कार्यालय के पदाधिकारियों की छुट्टियां बाढ़ की स्थिति सामान्य होने तक तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं।

  • जन्माष्टमी पर पंचरत्नी पोशाक में सजेगा ठाकुरजी का स्वरूप, रात 12 बजे होगा जन्माभिषेक

    जन्माष्टमी पर पंचरत्नी पोशाक में सजेगा ठाकुरजी का स्वरूप, रात 12 बजे होगा जन्माभिषेक

    मथुरा
    अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र तथा श्रीकृष्ण कृष्ण जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर मथुरा सहित देशवासियों के प्रति शुभकामना व्यक्त करते हुए संदेश पत्र जारी किया। इस पत्र में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के कारणों इस साल श्रीकृष्ण जन्मभूमि व्यक्तिगत रूप से नहीं पहुंच पा रहा हूं। इसका मुझे खेद है। उन्होंने पत्र में अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा कि अखाड़ा परिषद की ओर से कार सेवा का निर्णय लिया जाता है तो मैं भी कार सेवा में सहभागी रहूंगा।

    उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मंदिर निर्माण का मार्ग अवश्य प्रशस्त होगा। उनके मीडिया सलाहकार शरद शर्मा ने इस पत्र को सोशल मीडिया में जारी करते हुए बताया कि महंत नृत्य गोपाल दास महाराज लगातार जन्माष्टमी पर मथुरा कृष्ण जन्मभूमि पर स्वयं उपस्थित हो कर कृष्ण लला का अभिषेक पूजन करते रहे हैं। उन्हें इस जन्माष्टमी में मथुरा नहीं पहुंच पाने का दुख है। वह पूर्ण स्वस्थ होने पर अगले साल अवश्य सम्मिलित होंगे।श्

    जन्मोत्सव में शरीक होने के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचे मथुरा
    आपको बता दें कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान समेत समूचे ब्रज में पालनहार का जन्मोत्सव शुक्रवार की रात होगा। अपने आराध्य के जन्मोत्सव में शरीक होने के लिए लाखों श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं। हर ओर उल्लास और उमंग के बीच भक्तों के टोल नाचते-थिरकते नजर आ रहे हैं। समूचा शहर विद्युतीय प्रकाश और चुनरियों से दुल्हन की तरह सजा नजर आ रहा है। जन्मोत्सव पर उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए मथुरा-वृंदावन को सात जोन और 35 सैक्टर में विभक्त किया है। साढ़े पांच हजार से छह हजार पुलिस, पीएसी और आरएएफ की तैनाती की गयी है। ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है। योगीराज श्रीकृष्ण का 5253वें जन्म दिवस की धूम ब्रजभूमि में गुरुवार से ही शुरु हो गयी। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के मुख्यद्वार पर सुबह से श्रद्धालुओं की कतारें लग गयीं, जो निरंतर बड़ी होती जा रही थी।

    जन्माष्टमी पर ठाकुरजी को पंचरत्नी पोशाक धारण कराई जाएगी
    गोविंद नगर स्थित मुख्य द्वार से श्रद्धालुओं के प्रवेश की व्यवस्था रखी गयी है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर विराजमान केशवदेव जी, मां योगमाया, श्रीगर्भगृह, श्रीराधाकृष्ण युगल सरकार मंदिर में विशिष्ट पूजन, सहस्त्रार्चन, जन्माभिषेक एवं आरती के दिव्य आयोजन होंगे। जन्माष्टमी पर ठाकुरजी को पंचरत्नी पोशाक धारण करायी जाएगी। इस विशिष्ट पोशाक पर समुद्र मंथन से प्राप्त रत्नों से पंचरत्न कामधेनु गाय, पांचजन्य शंख, अमृत कलश, ऐरावत हाथी एवं कल्प वृक्ष को विशेष रूप से उकेरा गया है। इसके साथ ही भागवत भवन में ठाकुरजी कलहंस के पुष्प बंगले में विराजमान होंगे। ठाकुरजी का जन्माभिषेक मध्य रात्रि 12 बजे होगा।

  • ग्रीन पैच की सौगात के बीच 10 लेन सड़क पर बढ़ा विवाद, आंदोलन का ऐलान

    ग्रीन पैच की सौगात के बीच 10 लेन सड़क पर बढ़ा विवाद, आंदोलन का ऐलान

    रांची
     राजधानी की सड़कों को हरा-भरा और खूबसूरत बनाने की कवायद शुरू हो गई है। वहीं प्रस्तावित दूसरी ओर दस लेन सड़क का विरोध शुरू हो गया है। रांची नगर निगम ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में ग्रीन पैच विकसित करने के लिए करीब 2.86 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए हैं।

    इनमें चुटिया, रांची रेलवे स्टेशन, कोकर, कांटाटोली, डोरंडा, हटिया, हरमू, अरगोड़ा, बिरसा चौक, कडरू, पंडरा समेत कई प्रमुख इलाके शामिल हैं। खास बात यह है कि इन ग्रीन पैच का निर्माण करने के साथ एक साल तक इनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसी की होगी। ग्रीन पैच पर कुल अनुमानित लागत 2,85,81,660 रुपये है।

    इन मार्गों पर बनेगा ग्रीन पैच

    • चुटिया, रांची रेलवे स्टेशन और कोकर के विभिन्न स्थानों पर ग्रीन पैच विकसित किए जाएंगे। इसकी अनुमानित लागत 84.37 लाख रुपये है।
    • कांटाटोली, डोरंडा और हटिया इलाके में हरियाली विकसित करने की योजना है। इस काम पर करीब 57.71 लाख रुपये खर्च होंगे।
    • सहजानंद चौक, हरमू, अरगोड़ा चौक, बिरसा चौक और कडरू सहित विभिन्न स्थानों को शामिल किया गया है। इसकी अनुमानित लागत 60.49 लाख रुपये है।
    • दीनदयाल चौक से जज कालोनी तक, एलपीएन साहदेव चौक और पंडरा समेत अन्य स्थानों पर ग्रीन पैच विकसित किए जाएंगे। इसके लिए निगम ने 83.25 लाख रुपये की अनुमानित लागत तय की है।

    10 लेन सड़क के विरोध में उतरे लोग, 7 सितंबर को शहीद मैदान में धरना
    प्रस्तावित 10 लेन सड़क निर्माण के खिलाफ बस्ती बचाओ संघर्ष समिति ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। बुधवार को समिति की ओर से जगन्नाथपुर चौक पर नुक्कड़ सभा की गई। इसमें स्थानीय लोगों ने सड़क निर्माण से बस्ती, स्कूल और ऐतिहासिक स्थलों पर पड़ने वाले असर को लेकर विरोध जताया। सभा की अध्यक्षता समिति के वरिष्ठ सदस्य दिलीप कुमार ने की।

    समिति के संयोजक मिंटू पासवान ने कहा कि 10 लेन सड़क बनने से जगन्नाथपुर की ऐतिहासिक रथ यात्रा और मेला प्रभावित होगा। इलाके में 1691 ईस्वी से स्थापित प्राचीन देवी मंदिर और करीब 50 साल पुराने दुर्गा मंदिर के भी प्रभावित होने की आशंका है।

    समिति ने सरकार से 10 लेन सड़क की योजना रद करने की मांग की। कहा कि अगर यातायात व्यवस्था के लिए सड़क जरूरी है तो फ्लाईओवर का विकल्प अपनाया जा सकता है। सभा में वार्ड 37 के पार्षद परमेश्वर सिंह समेत राधा पूर्ति, हरेंद्र सिंह, विमला देवी, सुषमा देवी, रूदन देवी, जीतन मुंडा, मोहन बरला, श्याम थापा और धीरज राम सहित कई लोग मौजूद थे। समिति ने 7 सितंबर को शहीद मैदान में धरना देने का निर्णय लिया है।

  • लुधियाना में अनोखी अंतिम विदाई, बहुओं ने सास की अर्थी उठाई; आंखें आई सेंटर और शरीर मेडिकल कॉलेज को दान

    लुधियाना में अनोखी अंतिम विदाई, बहुओं ने सास की अर्थी उठाई; आंखें आई सेंटर और शरीर मेडिकल कॉलेज को दान

    लुधियाना 

    लुधियाना में महिला की मौत के बाद जब घर से उनकी अर्थी निकाली गई तो बहुओं ने एक नई मिसाल कायम की। दोनों बहुओं ने अपनी सास की अर्थी को आगे से अपने कंधों पर उठाया, जबकि दोनों बेटों ने पीछे से कंधा लगाकर मां को अंतिम विदाई दी।

    घर से कुछ दूर तक बहुओं ने सास की अर्थी को कंधा दिया और उसके बाद शव हारमनी आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल फिरोजपुर की मैनेजमेंट के हवाले कर दिया। शव लेकर अस्पताल की मैनेजमेंट फिरोजपुर के लिए रवाना हुई। मेडिकल कॉलेज में अब उनके शव पर स्टूडेंट्स प्रैक्टिकल करेंगे।

    अंतिम यात्रा से पहले महिला सुखदेव कौर की आंखें भी दान की गई। आंखें डॉ रमेश सुपरस्पेशिलिटी आईएंड लेजर सेंटर को दी गई। उनकी आंखें भी किसी दृष्टिहीन को लगाई जाएंगी और वो भी दुनियां देख सकेंगे।

    महिला अपने दो बेटों व बहुओं के साथ लुधियाना के प्रताप सिंह वाला में रहती थी। उन्होंने 10 साल पहले मरणोपरांत शरीर दान करने का फैसला किया था। उन्होंने बाकायदा इसके लिए फॉर्म भर दिया था। परिवार ने भी एफिडेविट दिया था कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

    परिवार व रिश्तेदारों ने ऐसे दी सुखदेव कौर को अंतिम विदाई…

        मौत होते ही आई हॉस्पिटल को किया फोन: सुखदेव कौर ने 10 साल पहले शरीर व आंखें दान करने का संकल्प लिया था। बुधवार शाम को जैसे ही सुखदेव कौर की हार्ट अटैक से मौत हुई तो बेटों यादविंदर सिंह व गुरविंदर सिंह ने डॉ रमेश सुपरस्पेशलिटी आई एंड लेजर सेंटर को फोन किया और मां की आंखों को ले जाने के लिए कहा। आई अस्पताल की टीम आई और उनकी आंखें लेकर चली गई।

        शरीर के लिए डेरे की टीम से किया संपर्क: सुखदेव कौर ने एक सत्संग के दौरान डेरे में शरीर दान का संकल्प लिया था। जब उनकी मौत हुई तो बेटों ने डेरे की टीम से संपर्क किया। हारमनी आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल फिरोजपुर को शव लेने के लिए कहा। गुरुवार को अस्पताल की टीम शव लेने लुधियाना पहुंची।

        बहुओं ने दिया अर्थी को कांधा: धार्मिक रीति रिवाज निभाने के बाद अंतिम यात्रा की शुरुआत में समाज की पुरानी मान्यताओं को दरकिनार करते हुए सुखदेव कौर की दोनों बहुओं मनप्रीत कौर और राजवीर कौर ने अपनी सास की अर्थी को आगे से अपने कंधों पर उठाया, जबकि बेटे यादविंदर सिंह और गुरविंदर सिंह पीछे से सहारा बने।

        फूलों से सजी एंबुलेंस को दी हरी झंडी: पार्थिव शरीर को एंबुलेंस में सम्मानपूर्वक रखा गया और पूरे वाहन को फूलों से सजाया गया। गांव प्रताप सिंह वाला के सरपंच गुरमेज सिंह ने हरी झंडी दिखाकर एम्बुलेंस को फिरोजपुर के मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना किया। अंतिम विदाई के दौरान उपस्थित परिजनों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने उनकी इस अंतिम सेवा और त्याग को नमन किया।

    मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और शोध में आएगा काम गांव प्रताप सिंह वाला के सरपंच गुरमेज सिंह कामरेड ने कहा कि इंसानी शरीर मृत्यु के बाद मिट्टी में मिल जाता है, लेकिन सुखदेव कौर का यह शरीर अब अमर हो गया है। वे बेहद सहृदय और मीठे स्वभाव की महिला थीं, जो हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहती थीं। उनके जाने से गांव को अपूरणीय क्षति हुई है, लेकिन उनके परिवार ने शरीरदान करके पूरे समाज को एक मिसाल दी है।

    उन्होंने आगे कहा कि शरीरदान की मुहिम बेहद सराहनीय है। इस पार्थिव देह पर हारमनी आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल फिरोजपुर के छात्र प्रैक्टिकल करेंगे और बीमारियों पर शोध करेंगे, जो भविष्य में मानव जाति के इलाज के काम आएगा।

    शरीर दान की प्रक्रिया जानिए…
        जीवनकाल में संकल्प व पंजीकरण:
    जब कोई व्यक्ति जीवित रहते हुए शरीरदान का फैसला करता है, तो उसे किसी नजदीकी मेडिकल कॉलेज या अधिकृत संस्थान में जाकर बॉडी डोनेशन फॉर्म भरना होता है, जिसमें उसकी स्पष्ट सहमति दर्ज होती है। इस आवेदन पत्र में परिवार के सदस्यों या नॉमिनी का विवरण भी लिया जाता है, जिसके बाद संस्थान आवेदक को एक औपचारिक पंजीकरण या शपथ पत्र जारी कर देता है।

        परिवार को सूचित करना: शरीरदान की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए यह बेहद जरूरी है कि व्यक्ति अपने फैसले की जानकारी अपने निकटतम परिजनों को पहले से दे दे। व्यक्ति की मृत्यु के तुरंत बाद परिवार के सदस्यों को ही संबंधित मेडिकल कॉलेज या संस्थान से संपर्क करके दान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होता है।

        मृत्यु के बाद संस्थान को सूचना: डॉक्टर द्वारा मृत्यु की पुष्टि किए जाने के बाद परिजनों को बिना किसी देरी के मेडिकल कॉलेज को तुरंत सूचित करना चाहिए। इसके बाद संस्थान के विशेषज्ञ यह जांचते हैं कि क्या शरीर उनके निर्धारित मानकों और स्वीकार्यता की शर्तों के अनुसार सही स्थिति में है।

        जरूरी दस्तावेजों की पूर्ति: प्रक्रिया को कानूनी रूप से पूरा करने के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र, पहले से भरा हुआ संकल्प-पत्र, मृतक व उनके निकट संबंधी के पहचान पत्र और संस्थान का निर्धारित सहमति फॉर्म तैयार रखना होता है।

        मेडिकल कॉलेज को शव सौंपना: सभी कागजी प्रक्रियाएं और प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद पार्थिव देह को सम्मानपूर्वक मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी डिपार्टमेंट को सौंप दिया जाता है, जहां इसका उपयोग मेडिकल छात्रों के प्रैक्टिकल, अध्ययन और जटिल बीमारियों पर शोध के लिए किया जाता है।

        अंतिम संस्कार की प्रक्रिया: शोध व अध्ययन का कार्य पूरा हो जाने के बाद संबंधित संस्थान अपनी नीतियों के तहत शव का अंतिम संस्कार करता है। कई मामलों में परिजनों की इच्छा अनुसार उन्हें भी इस प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दिया जाता है।

  • दिल्लीवासियों के लिए बड़ा अपडेट: पानी-सीवर की हर जानकारी मोबाइल पर, 123 होटलों के बोरवेल भी होंगे सील

    दिल्लीवासियों के लिए बड़ा अपडेट: पानी-सीवर की हर जानकारी मोबाइल पर, 123 होटलों के बोरवेल भी होंगे सील

    नई दिल्ली
     जिस तरह बिजली वितरण कंपनियां पावर कट या विलिंग संबंधित तमाम अपडेट्स उपभोक्ताओं को देती रहती है, उसी तरह जल बोर्ड ने भी उपभोक्ताओं को SMS के जरिए पानी संबंधित तमाम जानकारियां उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। पहले फेज में 20 लाख उपभोक्ताओं से बोर्ड SMS ब्रॉडकास्ट सर्विस शुरू करेगा। इस योजना के लिए जल्द ही एक प्राइवेट एजेंसी भी नियुक्त की जाएगी। SMS ब्रॉडकास्ट सर्विस नहीं होने के चलते शिकायतों की संख्या अधिक है। इससे जल बोर्ड के हेल्पलाइन नंबर पर भी बोझ अधिक बढ़ता जा रहा है।

    बिजली कंपनी की तरह पानी का एसएमएस आएगा
    जल बोर्ड अफसरों के अनुसार दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली वितरण कंपनियां अपने उपभोक्ताओं को बिजली संबंधित हर तरह की जानकारी SMS और वट्सऐप पर जारी करती है। बिजली बिल घर पर डिलीवर करने से कुछ दिन पहले बिजली कंपनियां सभी उपभोक्ताओं को बिजली बिलों के बारे में जानकारी भी देती है।

    इसी तरह जल बोर्ड भी अब अपने उपभोक्ताओं को SMS सर्विसेज उपलब्ध कराएगा। इसमें पानी व सीवर संबंधित नियोजित या अनियोजित मेटिनेस वर्क, पानी सप्लाई ठप होने, लाइनों में किसी तरह की खराबी आने और मेंटेनेंस के बाद पानी सप्लाई शुरू करने संबंधित तमाम जानकारियां उपभोक्ताओं के मोबाइल पर SMS के जरिए दी जाएगी।

    जल बोर्ड अफसरों का कहना है कि दिल्ली के नागरिकों के साथ तुरंत और बड़े पैमाने पर संवाद करने की नियमित आवश्यकता होती है। ऐसी सूचनाओं के प्रसार में देरी से नागरिकों को असुविधा होती है, जिससे हेल्पलाइन नंबर 1916 पर शिकायतों का बोझ बढ़ता है।

    अफसरों का कहना है कि ब्रॉडकास्ट SMS सर्विसेज के लिए किसी प्राइवेट कंपनी को हायर किया जाएगा। शुरुआत में 20 लाख उपभोक्ताओं से सर्विसेज की शुरुआत की जाएगी। ई-केवाईसी होने के बाद उपभोक्ताओं की संख्या करीब 60-62 लाख होने की उम्मीद है। इसके बाद SMS सर्विसेज का दायरा बाकी उपभोक्ताओं तक बढ़ाया जाएगा। सर्विस की शुरुआत अगले एक या डेढ़ महीने में किया जाएगा।

    123 होटलों के बोरवेल होंगे सील
    नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त रुख के बाद दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने पहाड़गंज और आसपास के इलाको में भूजल के अवैध दोहन पर कार्रवाई तेज कर दी है। डीजेबी ने रिपोर्ट जमा करके बताया है कि इलाके में चिह्नित 555 होटल और गेस्ट हाउस में से 432 ने अपने बोरवेल पर डिजिटल वॉटर मीटर/पीजोमीटर लगा लिए है। वही, नियमों का पालन नहीं करने वाले 123 होटलों के बोरवेल सील करने की तैयारी है।

    DJB की रिपोर्ट के अनुसार, पिछली सुनवाई तक सिर्फ 162 होटल और गेस्ट हाउस मे मीटर लगाए गए थे। एनजीटी के सख्त रुख के बाद डीजेबी ने होटल असोसिएशनों के साथ बैठके की और लगातार फॉलो-अप किया। डीजेबी ने एनजीटी को बताया है कि भूजल निकासी की निगरानी आगे भी जारी रहेगी।