Category: राज्य

  • डॉलर-दिरहम से लेकर दिनार तक, सांवरिया सेठ को भक्तों ने चढ़ाई 60 देशों की करेंसी

    डॉलर-दिरहम से लेकर दिनार तक, सांवरिया सेठ को भक्तों ने चढ़ाई 60 देशों की करेंसी

    भीलवाड़ा
     श्रीसांवरिया सेठ मंदिर में देश के साथ विदेशों से भी विदेशी मुद्रा पहुंच रही है। आठ महीनों में मंदिर के भंडार में 60 देशों की मुद्राएं मिली हैं। इनमें अमरीका, यूएई, कुवैत, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित एशिया, यूरोप और अफ्रीका के देशों की करेंसी शामिल है। विदेशी मुद्रा में इस वर्ष अब तक सबसे ज्यादा 45,351 अमरीकी डॉलर मिले हैं। इसके बाद 21,485 यूएई दिरहम, 1,310.25 कुवैती दिनार, 1,367 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और 1,630 कनाडाई डॉलर प्राप्त हुए हैं। मंदिर के भंडार में प्राप्त विभिन्न देशों की मुद्राओं को अमरीकी डॉलर में परिवर्तित करने पर इनका कुल मूल्य 62,800 अमरीकी डॉलर आंका गया है। प्रचलित विनिमय दर के आधार पर यह राशि भारतीय मुद्रा में करीब 59 लाख रुपए है।

    प्रमुख विदेशी मुद्रा
    देश                    मुद्रा
    अमरीका       45,351 डॉलर
    यूएई            21,485 दिरहम
    कुवैत           1,310.25 दिनार
    ऑस्ट्रेलिया    1,367 डॉलर
    कनाडा          1,630 डॉलर

    अप्रेल में डॉलर, अगस्त में दिरहम
    16 अप्रेल की गणना में एक बार में 21,127 अमरीकी डॉलर मिले। वहीं 11 अगस्त की गणना में 8,955 यूएई दिरहम प्राप्त हुए। फरवरी-मार्च में ईरान के 4,63,500 रियाल, वियतनाम के 2,29,000 डोंग भी मिले।

    मुस्लिम बहुल देशों से भी चढ़ावा
    सेठ के भंडार में मुस्लिम बहुल देशों की मुद्राएं भी पहुंच रही हैं। पिछले आठ महीने के आंकड़ों में यूएई से 21,485 दिरहम मिले हैं। इसके अलावा ईरान से 4,68,500 रियाल और इंडोनेशिया से 1,63,000 रुपया प्राप्त हुए। वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और खाड़ी देशों कुवैत, सऊदी अरब, ओमान, बहरीन व कतर की मुद्राएं भी भंडार में मिली हैं।

    अधिकृत बैंकों से रुपए में बदली जाती है मुद्रा
    मुख्य कार्यपालक अधिकारी दिनेश चंद्र धाकड़ ने बताया कि मंदिर मंडल विदेशी नोटों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से अधिकृत बैंकों के जरिए भारतीय रुपए में परिवर्तित करवाता है। प्राप्त राशि का उपयोग मंदिर के भंडारे और सामाजिक-धार्मिक सेवा कार्यों में किया जाता है।

    व्यापारी सांवरिया सेठ को मानते हैं बिजनेस पार्टनर
    चित्तौड़गढ़ के मंडफिया गांव में स्थित श्री सांवरिया सेठ मंदिर अपनी अलग मान्यताओं और भक्तों की गहरी आस्था के लिए जाना जाता है। यहां खास तौर पर व्यापारी भगवान सांवरिया सेठ को अपने बिजनेस पार्टनर के रूप में मानते हैं। मान्यता के अनुसार, लोग अपने व्यापार के मुनाफे का कुछ हिस्सा भगवान के नाम पर निकालकर मंदिर में चढ़ाते हैं। इसी वजह से मंदिर में हर महीने बड़ी मात्रा में चढ़ावा आने की जानाकारी सामने आती है।

  • जन्माष्टमी पर कृष्ण भक्ति में डूबे योगी आदित्यनाथ, गो पूजन कर श्रद्धालुओं को किया संबोधित

    जन्माष्टमी पर कृष्ण भक्ति में डूबे योगी आदित्यनाथ, गो पूजन कर श्रद्धालुओं को किया संबोधित

    मथुरा
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर यूपी के मथुरा में श्री कृष्ण जन्मस्थान पहुंचकर भगवान के दर्शन किये और पूजन-अर्चन किया। मुख्यमंत्री गुरुवार को यहां आये थे और विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था। रात्रि विश्राम उन्होंने वेटरनेरी विश्वविद्यालय के गेस्टहाउस में किया था। शुक्रवार सुबह करीब 9:35 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्री कृष्ण जन्मस्थान के गेट नंबर दो से पहुंचे। श्री कृष्ण जन्मस्थान पर उनका ढोल मजीरे बजाकर स्वागत किया गया। श्री कृष्ण जन्मस्थान पर उन्होंने गो पूजन किया।

    उन्होंने केशव देव के दर्शन कर गर्भगृह में पूजन अर्चन किया। इसके बाद वे भागवत भवन पहुंचे, जहां दर्शन किये। भागवत भवन में उन्होंने भगवान की आरती की। भागवत भवन में बैठकर वह भगवान को काफी देर तक भाव विभोर होकर निहारते रहे। श्री कृष्ण जन्मस्थान पर दर्शन को पहुंचे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जय श्री राम और कृष्ण कन्हैया के जयकारे लगाये। योगी ने उनका अभिवादन किया और श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की। श्री कृष्ण जन्मस्थान पर भागवत भवन की सीढ़ियों से उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित किया।

    इस मौके पर जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने 5,200 वर्ष पहले सत्य और न्याय के लिए इसी स्थल पर प्रकट होकर जो उद्घोष किए थे, वे आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। अनेक आक्रमण हुए, अन्य लोगों ने अपनी आस्था को भारत पर थोपने का प्रयास किया। लेकिन सनातन की आस्था को कोई मिटा नहीं पाया। जिसने इसका प्रयास किया वो खुद मिट्टी में मिल गए। सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में हम भारत की विरासत और विकास का अद्भुत समन्वय देख रहे हैं।

    सीएम योगी ने कहा कि श्री अयोध्या धाम में दुनिया का विशालतम मंदिर बन गया है। जिनको ये अच्छा नहीं लगता वो अयोध्या को बदनाम कर रहे हैं। जिन्हें अच्छा लगता है उन्हें लगता है हमारे रामलला अयोध्या में विराजमान हो गए हैं। हमारा प्रयास है कि मथुरा-वृंदावन में भी वैसे ही भव्य परिसर तैयार हों, जैसे श्री अयोध्या धाम और काशी में हुए हैं। किसी श्रद्धालु को दिक्कत न हो। किसी को कोई संकट न हो और दर्शन करने में कोई चुनौती न हो। आप सभी को आश्वस्त करता हूं कि डबल इंजन सरकार आपके साथ मिलकर आपकी भावनाओं के अनुरूप इस ब्रज भूमि को बनाने में कोर-कसर नहीं छोड़ेगी। यह सरकार तो कृष्ण कन्हैया, प्रभु श्री राम, बाबा विश्वनाथ और माँ विंध्यवासिनी पर विश्वास करती है।

  • RTI के तहत CCTV फुटेज पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए कब मिल सकती है रिकॉर्डिंग

    RTI के तहत CCTV फुटेज पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए कब मिल सकती है रिकॉर्डिंग

    प्रयागराज
    इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक अहम फैसले में कहा है कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सीसीटीवी फुटेज सीधे आवेदक को उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। हाईकोर्ट ने इसका कारण स्पष्ट करते हुए कहा कि सीसीटीवी फुटेज में संवेदनशील जानकारी हो सकती है लिहाजा यह आरटीआई एक्ट में दिए गए अपवाद के अंतर्गत आती है। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आवेदक सक्षम हाईकोर्ट या आयोग के समक्ष यदि आवेदन करता है तो वे संबंधित सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और आवश्यक होने पर उसे अपने पास मंगाने का आदेश दे सकते हैं

    न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश शोभित कश्यप की ओर से याचिका को निस्तारित करते हुए पारित किया है। मामले में याची ने 20 मार्च 2025 को दाखिल सूचना के अधिकार आवेदन के आधार पर पूरी सूचना उपलब्ध कराने तथा सीसीटीवी फुटेज देने की मांग की थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयोग की ओर से बताया गया कि मांगी गई सीसीटीवी फुटेज में संवेदनशील जानकारी है। लिहाजा इसे सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(छ) के तहत सीधे आवेदक को नहीं दिया जा सकता।

    सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखवाना नागरिक का अधिकार
    वहीं याची की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखवाना नागरिक का अधिकार है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि शीर्ष अदालत के फैसले के अनुसार सक्षम कोर्ट अथवा आयोग के पास सीसीटीवी फुटेज मंगाने और उसे सुरक्षित रखने का निर्देश देने की शक्ति है। वर्तमान मामले में याची ने अभी तक किसी सक्षम न्यायालय अथवा आयोग के समक्ष कोई शिकायत दाखिल नहीं की है बल्कि उसने सिर्फ सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की मांग की है। ऐसी स्थिति में फुटेज सीधे उसे नहीं दी जा सकती। अपने आदेश में खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याची सक्षम न्यायालय या सक्षम फोरम के समक्ष आवेदन करता है तो वे सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने तथा शिकायत की जांच के लिए वास्तविक फुटेज मंगाने का निर्देश दे सकते हैं।

    एक दूसरे मामले में हाईकोर्ट ने नए सिरे से जांच का दिया आदेश
    हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मोदी रबर लिमिटेड को दी गई 117 एकड़ जमीन में से लगभग 59 एकड़ जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण के मामले में नए सिरे से जांच का आदेश दिया है। न्यायालय ने राजस्व परिषद के अधिकारियों की एक समिति को छह सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट भी सौंपने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट मिलने के तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है। न्यायालय ने पूर्व के आदेशों के अनुपालन में हुई देरी पर राज्य सरकार पर 25 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है।

     

  • मरीजों की अनदेखी पर बड़ा एक्शन, 26 डॉक्टर बर्खास्त

    मरीजों की अनदेखी पर बड़ा एक्शन, 26 डॉक्टर बर्खास्त

    लखनऊ
    सरकारी अस्पतालों में मरीजों की अनदेखी और ड्यूटी में लापरवाही भारी पड़ी। लगातार ड्यूटी से गैरहाजिर रहने और चिकित्सीय दायित्वों का पालन नहीं करने वाले 26 डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। वहीं, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और चिकित्सीय कार्यों में लापरवाही के मामले में नौ अन्य डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

    डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने लंबे समय से अनुपस्थित और लापरवाही के आरोपों से जुड़े मामलों की समीक्षा की। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों की प्राथमिक जिम्मेदारी मरीजों को समय पर, बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। ड्यूटी से गायब रहने या चिकित्सीय दायित्वों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
    उन्होंने अधिकारियों को अस्पतालों में चिकित्सकों की उपस्थिति, ओपीडी-आईपीडी सेवाओं और मरीजों को मिल रहे उपचार की नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    इन डॉक्टरों पर हुई कार्रवाई
    बर्खास्त किए गए 26 डॉक्टर प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात थे। इनमें फर्रुखाबाद, अलीगढ़, गाजीपुर, हरदोई, महोबा, बुलंदशहर, लखनऊ, बलरामपुर, मथुरा, मीरजापुर, झांसी, बरेली, गोरखपुर, सहारनपुर, मुरादाबाद, चंदौली, मैनपुरी, मऊ, सुलतानपुर और मुजफ्फरनगर समेत कई जिले शामिल हैं। वहीं इटावा, रामपुर, मेरठ, बदायूं, भदोही, बलरामपुर और गौतमबुद्ध नगर में तैनात नौ डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। फर्रुखाबाद के कायमगंज सीएचीस के डॉ. स्वदेश कुमार, अलीगढ़ डॉ. वीरेंद्र सिंह, गाजीपुर में स्त्री रोग विभाग डॉ. स्वाती विश्वकर्मा, हरदोई में रेडियोलॉजिस्ट डॉ. बृजेश यादव, महोबा में ईएनटी सर्जन डॉ. ईशान दीक्षित, बुलंदशहर की डॉ. स्वाती आनंद, लखनऊ सिविल हॉस्पिटल डॉ. मनोज कुमार चौरसिया, हरदोई बावन पीएचसी के डॉ. मो. उताउर रहमान, भटपुर पीएचसी डॉ. मनीष खन्ना, बलरामपुर डॉ. अक्षय लेले, मथुरा गोवर्धन सीएचसी जनरल सर्जन डॉ. राकेश फौजदार, मीरजापुर  जरनल सर्जन डॉ. नरेंद्र कुमार जायसवाल, झांसी बबीना सीएचसी की डॉ. निशा बुंदेला, गाजीपुर डॉ. अचल सिंह, बरेली के डॉ.शशांक वर्मा, गोरखपुर ब्रहम्हपुर पीएचसी डॉ. विशाल कुमार सिंह, सहारनपुर गंगोह सीएचसी डॉ. इन्द्रजीत सिंह, मुरादाबाद डॉ. मोहम्मद शबाब खान, चन्दौली से डॉ. राजेश कुमार सिंह, मुरादाबाद के डॉ. मुजफर अली, मैनपुरी डॉ. कृष्ण मुरारी द्विवेदी, मुरादाबाद डॉ. फरयाद हुसैन, मऊ डॉ. तनवीर फरीदी, सुलतानपुर लोकनाथपुर पीएचसी के डॉ. आशुतोष शुक्ला, अमनाईकपुर पीएचसी डॉ. सुशील कुमार खरवार, मुजफ्फरनगर डॉ. कुंवर विक्रांत को बर्खास्त किया गया है।

    विभागीय कार्रवाई के निर्देश
    उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना, चिकित्सीय कार्यों में लापरवाही नौ डॉक्टरों पर भारी पड़ी। डिप्टी सीएम ने अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य को विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इनमें इटावा के उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीनिवास यादव, रामपुर के डॉ. केक चहल,  मेरठ की डॉ. संगीता चोपड़ा, बदायूं के कादरचौक सीएचसी के डॉ. अवधेश राठौर, भदोही के डॉ. संतोष चक, बलरामपुर के डॉ. सुमित कुमार, भदोही के डॉ.धीरज प्रकाश, गौतमबुद्ध नगर के अरविन्द मलिक और डॉ. असद शामिल हैं।

  • लखनऊ में बारिश का कहर, पुलिया डूबी और खेत जलमग्न; गोमती बैराज के दो गेट खोले गए

    लखनऊ में बारिश का कहर, पुलिया डूबी और खेत जलमग्न; गोमती बैराज के दो गेट खोले गए

    लखनऊ
    यूपी में बीते कुछ दिनों से लगातार जारी बारिश से नादियां-नाले उफान पर हैं। लखनऊ शहर में गोमती का जलस्तर बढ़ने के साथ ही रहीमाबाद में बेहता और बंथरा व निगोहा इलाके से बहने वाली सई नदी का जलस्तर भी बढ़ गया है। रहीमाबाद में झाऊ बेरिया गांव में बेहता का पानी पुलिया के ऊपर से बह रहा है। निगोहां इलाके में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। जबकि बंथरा में सई नदी का जलस्तर बढ़ने से सैकड़ों बीघे फसले पानी में डूब गई है। नदी का पानी गांवों की ओर बढ़ने से ग्रामीणों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है। वहीं, बीकेटी में चन्द्रिका देवी मंदिर के पास गोमती का जलस्तर बढ़ गया है।

    बेहता का जलस्तर बढ़ा, झाऊ बेरिया गांव की पुलिया डूबी
    बेहता नदी पर झाऊ बेरिया गांव जाने के लिए बनी पुलिया इधर नाले के जलस्तर बढ़ने के कारण डूब गई है। ग्रामीणों का रहीमाबाद या शहर जाने का यह एक मात्र रास्ता है। ग्राम प्रधान रुसेना सुरसती देवी ने बताया कि झाऊ बेरिया गांव में प्राथमिक विद्यालय बना है। जिसमें अन्य गावों के बच्चे भी पढ़ने आते हैं। पुलिया डूबने से परिजनों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। ग्रामीणों को पानी से गुजरकर रहीमाबाद आना पड़ रहा है। शाहीखेड़ा निवासी ध्रुव कुमार ने बताया कि बारिश जारी है और बेहता नाले के जलस्तर में इजाफा हुआ तो गांव के लोग घरों में ही कैद हो जाएंगे। एडीएम मलिहाबाद मनोज कुमार सिंह ने बताया कि जलस्तर बढ़ने की जानकारी है। तहसीलदार कुमकुम मिश्रा को राजस्व टीम के साथ मौके पर भेजा गया था। जलस्तर और बढ़ता है तो ग्रामीणों के लिए नाव व अन्य इंतजाम किए जाएंगे।

    सई नदी का जलस्तर बढ़ने से निगोहा इलाके में बाढ़ जैसे हालात
    सई नदी का जलस्तर बढ़ने से निगोहा इलाके में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। जवाहरखेड़ा के पास बंधा पानी में डूब गया। जवाहरखेड़ा, राती, रंजीतखेड़ा, तारापुर और अघईया समेत दर्जनभर गांव नदी के किनारे बसे हैं। नदी का पानी तालाबों के रास्ते खेतों और खलिहानों तक पहुंच गया। इससे कई बीघे धान, उड़द और तिल्ली की फसल जलमग्न हो गई। नदी किनारे बसे गांवों के ग्रामीणों में दहशत है। नदी से जुड़ा बांक नाला भी उफान पर है, जिससे निचले इलाकों के खेतों में पानी भर गया।

    किसान मुन्नीलाल, रामभरोसे, शिवबालक, राजाराम, रामसुमिरन, रामकुमार ने बताया कि बंधा टूटने के बाद पानी तेजी से तालाबों और फिर कल्यानी तक पहुंच गया। किसानों ने बताया कि जलस्तर जल्द नहीं घटा तो धान समेत अन्य फसलें पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से टूटे बंधे की तत्काल मरम्मत कराने, प्रभावित गांवों का निरीक्षण करने और फसल नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।

    बंथरा में सई नदी का जलस्तर बढ़ने से फसलों को नुकसान
    बंथरा क्षेत्र से होकर गुजरने वाली सई नदी में जलस्तर अचानक बढ़ने से इलाके में हड़कंप मच गया है। नदी का जलस्तर 12 फीट तक पहुंच जाने के कारण आसपास के सैकड़ों किसानों की धान, उड़द और तिल्ली की फसलें पूरी तरह से डूबकर नष्ट हो गई हैं। पानी लगातार नए रिहायशी और ग्रामीण इलाकों की ओर रुख कर रहा है।

    अस्पताल की इमारत और गांवों तक पहुंचा पानी
    नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी लटऊवा, दाराब नगर बरकोता, तेरवा, गोड़वा, कल्लन खेड़ा, बेंती और बनी गांव की ओर तेजी से फैल रहा है। स्थिति यह है कि नदी किनारे स्थित बनी गांव के पास प्रसाद अस्पताल की इमारत तक भी बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। वर्तमान में नदी का जलस्तर करीब 12 फीट है। यदि इसमें 4 से 5 फीट की और बढ़ोतरी होती है, तो नदी का पानी कई अन्य रिहायशी गांवों में भी घुस जाएगा। बनी गांव निवासी वरिष्ठ नागरिक और समाजसेवियों के अनुसार, वर्ष 1962 में सई नदी का जलस्तर करीब 15 फीट तक चला गया था, जिससे बनी, कल्लन खेड़ा, बेंती, सैदपुर और गोदौली सहित कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए थे।

    गोमती बैराज से दो गेट पूरे खुले, जलस्तर नियंत्रित
    गोमती नदी के जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए सिंचाई विभाग ने गोमती बैराज के दो गेट पूरी तरह से खोल दिये हैं। शारदा नहर खंड-दो के अधिशासी अभियंता मुकेश वैश्य ने बताया कि जल निकासी के लिए गुरुवार को गोमती बैराज के दो गेट को पूरा खोल दिया गया। वहीं तीन अन्य गेट करीब दो फुट तक खोला गया है। फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है। गुरुवार को भी गऊघाट पर गोमती का जलस्तर 349.5 फुट बना रहा। जोकि सामान्य से करीब ढ़ाई फुट अधिक है।

  • UP Election 2027: डिंपल यादव बनाम चारू चौधरी, अखिलेश-जयंत की सियासी जंग में बहुरानियों की एंट्री

    UP Election 2027: डिंपल यादव बनाम चारू चौधरी, अखिलेश-जयंत की सियासी जंग में बहुरानियों की एंट्री

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में महिलाओं पर सभी दलों का फोकस है. सभी राजनीतिक दल भली भांति समझते हैं कि अगर महिलाएं उनके साथ आ गईं तो चुनाव में जीत दर्ज करना बिलकुल आसान हो जाएगा. क्योंकि महिलाएं जाति और धर्म से ऊपर उठकर वोट करती हैं. खास बात यह है कि वह जिस पार्टी का समर्थन करती हैं तो दिल खोलकर. इसी वजह से बीजेपी, सपा, कांग्रेस, आरएलडी समेत तमाम राजनीतिक दल महिलाओं पर डोरे डालने में जुटी हैं। 

    समाजवादी पार्टी पर हमेशा से गुंडागर्दी फैलाने के आरोप लगते रहे हैं. इस कहा जाता है कि महिलाएं सपा से दूरी बनाती हैं. इस नैरेटिव को बदलने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव इस बार पत्नी डिंपल यादव को प्रमुखता से आगे करते दिख रहे हैं. डिंपल की सक्रियता को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बातें हो रही है, लेकिन इसी बीच जयंत चौधरी ने अपनी पत्नी चारू चौधरी को चुनावी मंच पर लेकर आ गए हैं. अब चारू सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. लोग डिंपल और चारू की तुलना भी करने लगे हैं। 

    मंच पर पहुंचते ही चारू ने अखिलेश यादव को निशाने पर लिया
    गुरुवार को सहारनपुर में राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) की रैली में जयंत चौधरी की पत्नी चारू चौधरी भी भाषण देने पहुंचीं. चारू ने लिखा हुआ भाषण पढ़ने के बजाय खुद से पूरे कॉन्फिडेंस के साथ भाषण दीं. उनका भाषण भले ही दो मिनट का रहा, लेकिन उसमें ही उन्होंने ऐसी बातें कहीं जो चर्चा का विषय बन गया है. चारू चौधरी ने बिना नाम लिए अखिलेश यादव को निशाने पर लिया और कहा- ‘किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि वो आपका अपमान करें या आपको सिखाएं और समझाएं. इस तरीके की बयानबाजी सिर्फ उनकी मानसिकता दर्शाता है. उनका अहंकार दर्शाता है. सच तो यह है कि यह लोकतंत्र है. सरकार किसकी बन रही है, कौन आ रहा है, जा रहा है, यह फैसला सिर्फ आप करते हैं। 

    चारू चौधरी का यह बयान अखिलेश यादव के उस तंज का जवाब था जिसमें, उन्होंने जयंत चौधरी का नाम लिए बगैर कहा था कि जिसको ‘चवन्नी से रुपया बनाया’ वो भी उधर भाग गए. जयंत चौधरी की पत्नी पूरे आत्मविश्वास के साथ मंच संभालती दिखीं. उन्होंने अपने छोटे भाषण में ही एनडीए के ज्यादा से ज्यादा प्रत्याशियों को जीत दिलाकर लखनऊ भेजने की अपील की. चारू चौधरी भले ही 2009 से पति जयंत के लिए चुनावी रैलियां और रोडशो करती रही हैं, लेकिन वह एंटरप्रेन्योर भी हैं. वह साउथ दिल्ली में ज्वेलरी और कपड़ों का फैशन ब्रांड शोरूम चलाती हैं. उन्होंने अभी तक कोई चुनाव नहीं लड़ा है और ना ही विधानमंडल या संसद की सदस्य बनी हैं। 

    डिंपल यादव को आगे कर रहे हैं अखिलेश यादव
    वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव 2012 उपचुनाव में पहली बार निर्विरोध कन्नौज से सांसद चुनी गई थीं. 2014 के लोकसभा चुनाव में वह दोबारा कन्नौज से चुनाव जीतीं. 2022 में तीसरी बार मुलायम सिंह यादव के निधन से खाली हुई मैनपुरी सीट पर हुए उपचुनाव में डिंपल यादव सांसद चुनी गईं. 2024 के लोकसभा चुनाव में मैनपुरी से जीत दर्ज कर वह अभी सांसद हैं। 

    पिछले दिनों जंतर मंतर पर GEN-Z के आंदोलन में अखिलेश यादव की गैरमौजूदरगी में डिंपल यादव छात्रों की अगुवाई करती दिखीं. इसके बाद छात्रों पर हुए लाठीचार्च के बाद डिंपल जिस तरह से घायल छात्रों के साथ खड़ी दिखीं उसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी इस छवि की काफी तारीफ हुई। 

    पिछले दिनों सपा प्रमुख आगामी यूपी चुनाव को लेकर महिलाओं के लिए बड़ी घोषणाएं करने के लिए मीडिया के सामने आए थे. इस दौरान महिलाओं के लिए घोषणाएं करने की जिम्मेदारी डिंपल यादव को ही दी गई. पत्रकारों के सामने डिंपल यादव ने घोषणा की कि अगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो राज्य की महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये दिए जाएंगे. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने डिंपल को पत्रकारों के सवालों का भी जवाब देने के लिए भी प्रोत्साहित करते दिखे. डिंपल ने भी बेहद मजबूती के साथ पत्रकारों के सवालों का मंजे हुए राजनेता की तरह जवाब दिया। 

    जहां तक डिंपल की एजुकेशन का सवाल है तो वह लखनऊ यूनिर्सिटी से बी कॉम हैं. वहीं चारू दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं. इसके अलावा चारू लंदन से ज्वेलरी डिजाइनिंग का कोर्स भी कर चुकी हैं. जहां चारू भी पंजाबी फैमिली से होने के बावजूद जाट परिवार की बहू बनी हैं, वहीं डिंपल यादव राजपूत परिवार से होते हुए भी यादव परिवार की दुल्हन हैं. दोनों ने ही नारी सशक्तिकरण का परिचय देते हुए अपनी मर्जी से शादियां की हैं. 2027 के विधानसभा चुनाव में देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देवियां किस रूप में अपने-अपने दल और गठबंधन के लिए वोट जुटा पाती हैं। 

  • राजस्थान में मानसून का बदला मिजाज, 21% कम बारिश के बीच इन इलाकों में बरसेंगे बादल

    राजस्थान में मानसून का बदला मिजाज, 21% कम बारिश के बीच इन इलाकों में बरसेंगे बादल

    जयपुर
     राजस्थान में मानसून के दौरान अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 3 सितंबर तक प्रदेश में 295.30 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 374.55 मिमी रहती है। इस तरह प्रदेश में अब तक सामान्य के मुकाबले 21.16 % कम बारिश हुई है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान के 21 जिलों में बारिश कम दर्ज की गई है, जबकि 18 जिलों में बारिश सामान्य रही। वहीं सिर्फ दो जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। प्रदेश में कोई भी जिला असामान्य या बहुत कम बारिश वाली श्रेणी में नहीं है

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    आंकड़ों के मुताबिक अगर सबसे ज्यादा बारिश की बात करें तो, डीग में सबसे ज्यादा अतिरिक्त बारिश दर्ज की गई है। यहां सामान्य से 31.04 फीसदी अधिक बारिश हुई। इसके बाद फलोदी में 21.57 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई। वहीं सलूंबर सामान्य बारिश वाली श्रेणी में रहा। यानी प्रदेश में कुछ इलाकों में अच्छी बारिश हुई, लेकिन कई जिलों में बारिश सामान्य आंकड़े से पीछे रही। बता दें राजस्थान में इस बार मानसून सम से पहले आ गया था, उसके बाद भी ऐसे हालात हैं।

    गहलोत ने दी यह सलाह
    पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को राज्य सरकार से संभावित सूखे जैसे हालात के लिए अभी से आकस्मिक योजना तैयार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार को हालात बिगड़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए। सूखे से निपटने के पिछले अनुभवों को देखते हुए सरकार को पहले से ही तैयारियां शुरू कर देनी चाहिए।

    पूर्वी राजस्थान में दो दिन भारी बारिश का अलर्ट
    मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान में अगले कुछ दिनों में मानसून फिर सक्रिय हो सकता है। 4 और 5 सितंबर को पूर्वी राजस्थान में कुछ जगहों पर भारी बारिश होने की संभावना है। इस दौरान भरतपुर, कोटा, जयपुर, अजमेर और उदयपुर संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं पश्चिमी राजस्थान में मानसून फिलहाल कमजोर रहने के आसार हैं। जोधपुर संभाग के अधिकांश हिस्सों में गतिविधियां कमजोर रहेंगी, जबकि 4 से 6 सितंबर के बीच बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू और नागौर में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

     

  • ड्रोन से लेकर AI तक, हरियाणा में बनेगा नया इनोवेशन इकोसिस्टम; युवाओं को मिलेंगे स्टार्टअप के अवसर

    ड्रोन से लेकर AI तक, हरियाणा में बनेगा नया इनोवेशन इकोसिस्टम; युवाओं को मिलेंगे स्टार्टअप के अवसर

     चंडीगढ़
    हरियाणा को ड्रोन इनोवेशन, स्वदेशी तकनीक, उन्नत विनिर्माण और युवा उद्यमिता का केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने ‘ड्रोनोथान-हरियाणा ड्रोन इनोवेशन चैलेंज’ शुरू किया है। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, स्टार्टअप हरियाणा और ड्रोन टेक मल्टी-स्टेट कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड की इस संयुक्त पहल के तहत उद्योगों की वास्तविक तकनीकी जरूरतों को विश्वविद्यालयों और युवा इनोवेटर्स से जोड़ा जाएगा।

    हरियाणा निवास में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय ड्रोन उद्योग परामर्श बैठक में ड्रोन निर्माता कंपनियों, टेक्नोलाजी कंपनियों, प्रशिक्षण संस्थानों, इनक्यूबेटरों और ड्रोन इकोसिस्टम से जुड़े प्रतिनिधियों ने भागीदारी की।

    हरियाणा सरकार की मंशा इस पहल के जरिए हरियाणा में आरएंडडी, प्रोटोटाइप निर्माण, बौद्धिक संपदा, स्टार्टअप, निवेश, कौशल विकास और रोजगार का ऐसा इकोसिस्टम तैयार करने की है, जिसमें प्रदेश के विश्वविद्यालयों और युवाओं की प्रतिभा सीधे ड्रोन उद्योग की जरूरतों से जुड़े।

    ड्रोनोथान को राज्यव्यापी यूनिवर्सिटी इनोवेशन प्रोग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। स्टार्टअप हरियाणा से जुड़े इनक्यूबेटरों के माध्यम से विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों तक यह पहल पहुंचाई जाएगी। इनक्यूबेटर छात्र टीमों की पहचान, कैंपस आउटरीच, मेंटरशिप, चैलेंज, मूल्यांकन और आगे इन्क्यूबेशन में सहयोग करेंगे।

    उद्योगों और ड्रोन कंपनियों को अपनी वास्तविक तकनीकी समस्याओं के ‘प्राब्लम स्टेटमेंट’ देने होंगे। विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी, फैकल्टी, शोधकर्ता और युवा इनोवेटर्स इन चुनौतियों के व्यावहारिक, स्केलेबल और व्यावसायिक समाधान विकसित करेंगे। इससे छात्रों को अकादमिक परियोजनाओं से आगे बढ़कर वास्तविक औद्योगिक और सरकारी जरूरतों पर काम करने का अवसर मिलेगा।

    समाधान से प्रोटोटाइप और बाजार तक पहुंचेगी प्रतिभा
    ड्रोनोथान में उद्योग केवल समस्या बताएगा ही नहीं, बल्कि चयनित टीमों को तकनीकी मार्गदर्शन, डोमेन विशेषज्ञता और व्यावहारिक इनपुट भी देगा। बेहतर समाधानों को प्रूफ आफ कांसेप्ट, फील्ड ट्रायल, इन्क्यूबेशन, उद्योग मेंटरशिप, निवेश सुविधा और व्यावसायीकरण के अवसरों से जोड़ा जा सकेगा। इसका लक्ष्य प्रतियोगिता से आगे बढ़कर नवाचार से उद्यमिता और विनिर्माण तक पूरी श्रृंखला तैयार करना है।

    चुनौतियों के समाधान के लिए 20 से ज्यादा क्षेत्र
    चैलेंज में प्रिसिजन एग्रीकल्चर, ड्रोन मैपिंग-सर्वेक्षण, सड़क-पुल निरीक्षण, इन्फ्रास्ट्रक्चर मानिटरिंग, लाजिस्टिक्स व लास्ट-माइल डिलीवरी, औद्योगिक निरीक्षण, आपदा प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा, एआई आधारित स्वायत्त ड्रोन, स्वदेशी कंपोनेंट, बैटरी व प्रोपल्शन, संचार प्रणाली, जीआइएस, डेटा एनालिटिक्स, रक्षा एवं रणनीतिक उपयोग, काउंटर-ड्रोन तकनीक, स्वास्थ्य सेवाएं, स्मार्ट सिटी, खनन और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्र शामिल होंगे।

     

  • बिहार में खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी, 380 कोच समेत 1006 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज

    बिहार में खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी, 380 कोच समेत 1006 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज

     पटना
     राज्य में खेल प्रतिभाओं को तराशने और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के लिए खेल विभाग राज्य में विभिन्न स्तरों पर 1006 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है।

    इनमें 33 जिला खेल पदाधिकारी, स्टेडियमों के लिए 380 प्रशिक्षक, राजगीर राज्य खेल अकादमी के लिए 48 कोच, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के 301 और बिहार खेल विश्वविद्यालय के 244 पद शामिल हैं।

    खेल प्राधिकरण व राजगीर खेल विश्वविद्यालय में भी 545 पदों पर नियुक्ति की तैयारी
    जिला खेल पदाधिकारियों की नियुक्ति अंतिम चरण में है। प्रशिक्षकों की नियुक्ति के लिए परीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। खेल व्यवस्था को सुचारु करने के लिए संविदा पर लिपिकीय कर्मियों की नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति के माध्यम से आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने की तैयारी है।

    नियुक्तियां पूरी होने के बाद जिला स्तर से लेकर राज्य स्तरीय खेल संस्थानों तक प्रशासनिक व्यवस्था और प्रशिक्षण तंत्र को मजबूती मिलेगी।

    खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि जिलों में खेल पदाधिकारियों, स्टेडियमों में प्रशिक्षकों, राजगीर राज्य खेल अकादमी के प्रशिक्षकों के साथ-साथ खेल प्राधिकरण और खेल विश्वविद्यालय में नियुक्तियों से खेल व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

    जिलों में 33 पदाधिकारी संभालेंगे खेल की कमान
    जिला स्तर पर खेल गतिविधियों को गति देने के लिए 33 जिला खेल पदाधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है। इसके लिए बीपीएससी परीक्षा ले चुका है और अब साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी की जानी है।

    नियुक्ति के बाद जिलों में खिलाड़ियों की पहचान, खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी को बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा।

    स्टेडियमों में 380 प्रशिक्षक बढ़ाएंगे खेल प्रतिभाओं की धार
    राज्य में तैयार हो रहे इंडोर और आउटडोर स्टेडियमों को केवल खेल आयोजन स्थल नहीं, बल्कि नियमित प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

    इसके लिए विभिन्न खेल विधाओं में 380 प्रशिक्षकों की बहाली होगी। इन पदों के लिए बिहार कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से परीक्षा आयोजित की जाएगी।

    राजगीर अकादमी में 48 प्रशिक्षक देंगे हाई परफार्मेंस ट्रेनिंग
    राजगीर में विकसित हो रही आधुनिक खेल सुविधाओं को मजबूत प्रशिक्षण व्यवस्था से जोड़ने के लिए राज्य खेल अकादमी में 48 प्रशिक्षकों की नियुक्ति होगी।

    अकादमी में उपलब्ध खेल सुविधाओं के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन मिलने से खिलाड़ियों को नियमित और वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण देने में मदद मिलेगी।

    खेल प्राधिकरण में 301 पद, विश्वविद्यालय में 244
    बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के प्रशासनिक और खेल संबंधी कार्यों को मजबूत करने के लिए 301 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। खेल शिक्षा, प्रशिक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था को संस्थागत मजबूती देने के लिए बिहार खेल विश्वविद्यालय में 244 पदों पर नियुक्ति की कार्रवाई चल रही है।

    संविदा और प्रतिनियुक्ति से भी मजबूत होगा सिस्टम
    खेल विभाग की विभिन्न इकाइयों में कामकाज को सुचारु रखने के लिए संविदा पर लिपिकीय कर्मियों की नियुक्ति के साथ जरूरत के अनुसार प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भी मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा।

     

  • कुत्तों की नसबंदी के दावे पर घिरा गाजियाबाद नगर निगम, ‘वैक्सीन खरीदी तो नसबंदी कितनी हुई?

    कुत्तों की नसबंदी के दावे पर घिरा गाजियाबाद नगर निगम, ‘वैक्सीन खरीदी तो नसबंदी कितनी हुई?

    गाजियाबाद
    राज्य सूचना आयोग ने गाजियाबाद नगर निगम को आवारा कुत्तों (स्ट्रीट डॉग्स) के नसबंदी और टीकाकरण अभियान को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं।सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम की पीठ ने निगम के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें एनजीओ को किए गए भुगतान की जानकारी को 'थर्ड पार्टी की आर्थिक हित से जुड़ी सूचना' बताकर देने से इनकार किया गया था।

    सूचना आयोग ने नगर निगम से स्पष्ट कहा, 'अगर स्ट्रीट डॉग्स को वैक्सीन दी जा रही है तो वे कहीं से खरीदी भी जा रही होंगी, दिखाइए उसके कागज।'

    क्या है पूरा मामला?
    एक आरटीआई आवेदन के जवाब में गाजियाबाद नगर निगम ने बताया था कि नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का काम एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के माध्यम से कराया जा रहा है। इसमें निगम ने दावा किया था कि 1 अक्टूबर 2023 से 15 अप्रैल 2026 के बीच गाजियाबाद नगर निगम सीमा क्षेत्र में 22,494 स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी व टीकाकरण किया गया है।

    GDA के दावों पर क्यों खड़े हुए सवाल?
    हालांकि, इस दावे के बाद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण को लेकर सवाल उठने लगे क्योंकि 2020 में हुए पशु सर्वे में शहर में करीब 48 हजार कुत्ते होने का अनुमान लगाया गया था। इसके मुकाबले नगर निगम अब तक 53,447 से अधिक कुत्तों का स्टरलाइजेशन कराने का दावा सवाल खड़े कर रहा था। इसके बाद ही आरटीआई के जरिये मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया था।

    भुगतान की जानकारी छिपाने का आरोप
    आरटीआई कार्यकर्ता की ओर से जब इस कार्य के बदले एनजीओ को दिए गए भुगतान का ब्योरा मांगा गया, तो नगर निगम ने यह कहते हुए जानकारी देने से मना कर दिया कि यह तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) के वित्तीय हितों से जुड़ी निजी जानकारी है।

    सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम के मुख्य आदेश
    निगम के इसी जवाब से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने नगर निगम के रवैये पर सवाल खड़े किए और निम्नलिखित निर्देश दिए…

        सरकारी कोष के इस्तेमाल का हिसाब दें: यह थर्ड पार्टी का मामला नहीं है, क्योंकि आवेदक ने एनजीओ की बैलेंस शीट या बैंक स्टेटमेंट नहीं मांगा है। सरकारी खजाने से जो पैसा एनजीओ को दिया गया है, उसका ब्योरा जनता के सामने आना चाहिए।

        सत्यापन की प्रणाली की जानकारी दें: एनजीओ ने 22,494 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का दावा किया है, लेकिन इस दावे को सत्यापित (Verify) करने के लिए नगर निगम के पास क्या सिस्टम है, इसका ब्योरा उपलब्ध कराना होगा।

        वैक्सीन खरीद का हिसाब दें: एनजीओ ने इतनी बड़ी संख्या में टीके (वैक्सीन) कहां से खरीदे, इसके बिल और दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।