Category: राज्य

  • UP की राजनीति का यक्ष प्रश्न, हर समीकरण की सीमा लांघता दिख रहा बड़ा सवाल

    UP की राजनीति का यक्ष प्रश्न, हर समीकरण की सीमा लांघता दिख रहा बड़ा सवाल

    हर समीकरण की सीमा लांघने वाला उत्तर प्रदेश का यक्ष प्रश्न

    लखनऊ 
    राजनीति में प्रायः चुनावी अंकगणित, जातिगत गोलबंदी, क्षेत्रीय समीकरण और घोषणापत्रों के बड़े-बड़े दावे ही जीत-हार का मुख्य आधार माने जाते हैं। चुनावी मंचों से गूंजने वाले नारों, रैलियों में उमड़ती भीड़ और मीडिया के विश्लेषकों की बहसों का अपना एक निश्चित गणितीय हिसाब होता है। परंतु इतिहास साक्षी है कि जब किसी राज्य के राजनीतिक क्षितिज पर कुछ ऐसी अभूतपूर्व संरचनाएं और सांस्कृतिक प्रतीक उभर आते हैं, तो उन्हें केवल आंकड़ों के पारंपरिक तराजू पर नहीं तौला जा सकता। उत्तर प्रदेश का आगामी चुनावी संग्राम जब-जब आकार लेगा, तब-तब एक मौलिक और यक्ष प्रश्न सतह पर आएगा—आखिर वह क्या है, जो इस विशाल प्रदेश में केवल योगी आदित्यनाथ कर सकते हैं, कोई अन्य राजनेता नहीं?

    पारंपरिक राजनीति के व्याकरण को चुनौती देती छवि
    उत्तर प्रदेश का राजनीतिक इतिहास गवाह रहा है कि यहां का जनादेश अधिकांशतः जातियों के जोड़-तोड़, कुनबे के हिसाब-किताब और सामाजिक ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द ही सिमटता रहा है। दशकों तक दलों ने केवल जातिगत जनगणना और क्षेत्रीय क्षत्रपों के गठजोड़ के आधार पर सरकारें बनाई और चलाई हैं। परंतु जब भगवा वस्त्रधारी गोरक्षपीठाधीश्वर सत्ता संभालते हैं तो राजनीति का यह पारंपरिक व्याकरण पूरी तरह बदलने लगता है। जिस व्यक्ति ने अपना व्यक्तिगत जीवन, कुनबा और पारिवारिक मोह से पूरी तरह ऊपर उठकर संन्यास का मार्ग चुना हो, उसकी सामाजिक और राजनीतिक छवि स्वतः ही जाति के संकीर्ण दायरों को लांघ जाती है। जब विपक्षी दल अलग-अलग जातियों और उप-जातियों का गणित साधने में व्यस्त होते हैं, तब योगी आदित्यनाथ एक सर्वव्यापी और व्यापक सांस्कृतिक पहचान खड़ी कर देते हैं। यह एक ऐसा मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक प्रभाव है, जिसे कोई भी पारंपरिक राजनेता अपनी अंतर्निहित जातिगत सीमाओं और पारिवारिक दायित्वों के कारण आसानी से नहीं दोहरा सकता। संन्यास और समर्पण की यह छवि उन्हें राजनीतिक जोड़-तोड़ से परे एक अलग ही आधार प्रदान करती है।

    शासन की "कठोर मुद्रा" और सुरक्षा का मनोवैज्ञानिक भाव
    उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक शब्दावली में अपराध के प्रति “जीरो टॉलरेंस” और “बुलडोजर कार्रवाई” केवल एक प्रशासनिक नीति का हिस्सा मात्र नहीं रही, बल्कि वह एक मजबूत राजनीतिक ब्रांड का रूप धारण कर चुकी है। अतीत के उस उत्तर प्रदेश को याद कीजिए, जहां कानून-व्यवस्था पर निरंतर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते थे, व्यापारी पलायन के लिए विवश थे और माफिया का अपना समानांतर शासन चलता था। उस पृष्ठभूमि के विपरीत, एक कठोर प्रशासक की भांति खड़े होकर अपराधियों और माफिया तंत्र के मन में कानून का भय पैदा करना, यह वह अभेद्य राजनीतिक पत्ता है, जिसे केवल योगी आदित्यनाथ ही पूर्ण नैतिक अधिकार के साथ खेल सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि जब विपक्षी दल इस आक्रामक नीति की प्रक्रियागत और संवैधानिक आलोचना करते हैं, तो वे अनजाने में योगी की इसी “दृढ़ संकल्प और सख्त प्रशासक” वाली छवि को जनता के बीच और अधिक सशक्त बना देते हैं। जनता सुरक्षा के इस अहसास को किसी भी राजनीतिक तर्क से ऊपर रखती है।

    'विकास' और 'विरासत' का अभूतपूर्व समन्वय
    भारतीय राजनीति में लंबे समय से दो स्पष्ट और परस्पर विरोधी धाराएं विद्यमान रही हैं। एक तरफ वे नेता रहे हैं जो केवल आधुनिकता, अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और आर्थिक विकास की बात करते थे, तो दूसरी तरफ वे जो केवल परंपरा, धर्म और सांस्कृतिक अस्मिता के पक्षधर थे। योगी आदित्यनाथ ने इन दो विपरीत धाराओं को एक ही धरातल पर लाकर खड़ा कर दिया है। उनके एक हाथ में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, गंगा एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और डिफेंस कॉरिडोर का आधुनिक खाका है, तो दूसरे हाथ में भव्य अयोध्या का राम मंदिर, काशी का दिव्य विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन का कायाकल्प और महाकुंभ का अभूतपूर्व सांस्कृतिक वैभव है। वे “विरासत” को बिना किसी हिचकिचाहट के सार्वजनिक रूप से स्वीकारते हैं और उसे 'विकास' के आधुनिक पहियों पर आरूढ़ कर देते हैं। यह समन्वय किसी ऐसे राजनेता के लिए अत्यंत कठिन है, जिसे सांस्कृतिक प्रतीकों को छूने में राजनीतिक संकोच होता हो, धर्मनिरपेक्षता का आवरण या वोटबैंक खिसकने का भय सताता हो।

    सशक्तीकरण का नया मानक: आधी आबादी का अटूट विश्वास
    चुनावी बहसों में अक्सर मुफ़्त योजनाओं, वित्तीय रेवड़ियों और कैश ट्रांसफर के मुद्दे छाये रहते हैं। विभिन्न दल महिलाओं को आकर्षित करने के लिए कई तरह के आर्थिक वादे करते हैं। परंतु राज्य की “आधी आबादी”, यानी महिला मतदाताओं के लिए, वास्तविक और धरातलीय सशक्तीकरण का अर्थ क्या है? उत्तर प्रदेश के छोटे कस्बों, गांवों और सुदूर ग्रामीण अंचलों में शाम ढलने के बाद महिलाओं का निडर होकर बाहर निकलना, बेटियों का बिना किसी भय के स्कूल और कॉलेज जाना—यह वह प्रत्यक्ष अनुभूति है, जिसे योगी सरकार अपने सुशासन की सबसे बड़ी पूंजी मानती है। चुनावी मैदान में आर्थिक वादे तो कई दल कर सकते हैं, परंतु सार्वजनिक जीवन में निर्भयता और गरिमा का जो वातावरण महिलाओं के बीच स्थापित हुआ है, उस अटूट विश्वास को चुनौती देना किसी भी प्रतिद्वंद्वी के लिए सहज नहीं होगा। सुरक्षा का यह अहसास महिलाओं को एक स्वतंत्र और निर्णायक वोटबैंक में बदल चुका है।

    निर्णायक नेतृत्व की विश्वसनीयता और भावी चुनौतियां
    अंततः, यह प्रश्न एकाधिकारी, स्वतंत्र और निर्णायक नेतृत्व की विश्वसनीयता का भी है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविध राज्य में जनता प्रायः एक ऐसे “मजबूत और सख्त” चेहरे को चुनना पसंद करती है, जिसकी कमान किसी गठबंधन के जोड़-तोड़, आंतरिक अंतर्विरोधों या किसी रिमोट कंट्रोल के हाथ में न दिखे। लगातार दो कार्यकाल के बाद भी, योगी आदित्यनाथ की पहचान एक ऐसे बेबाक प्रशासक की बनी हुई है, जो राज्य के हित में कड़े और अप्रिय फैसले लेने से भी पीछे नहीं हटता। फिर भी, राजनीति का एक अटल नियम यह भी है कि जीत का रथ कई पहियों पर चलता है। सरकार की सफल योजनाओं और उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना सरकार व संगठन का युद्धस्तर पर सक्रिय होना। अतीत की प्रतिष्ठा सफलता का दरवाजा अवश्य खोलती है, लेकिन भविष्य का भरोसा संस्थागत निरंतरता, व्यापक जन-संपर्क और जमीनी समाधानों पर टिकता है। 2027 के चुनाव का अंतिम फैसला कई वास्तविक और व्यावहारिक मानदंडों पर निर्भर करेगा।

    लेकिन, इतना तय है कि योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा मानक स्थापित कर दिया है, जो पारंपरिक जातिगत समीकरणों को ध्वस्त करता है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विपक्षी दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल भाजपा संगठन से लड़ने की नहीं, बल्कि योगी की इस विशिष्ट छवि और उनके बनाए इस 'सुशासन एवं सुरक्षा' के मॉडल का विकल्प प्रस्तुत करने की होगी।

    •    नितिन श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार
    •    संपर्क – +91-9415552949

     

  • Janmashtami पर पंजाब के कर्मचारियों को बड़ी सौगात, 85 हजार कर्मियों को मिलेगा केंद्र के बराबर DA

    Janmashtami पर पंजाब के कर्मचारियों को बड़ी सौगात, 85 हजार कर्मियों को मिलेगा केंद्र के बराबर DA

    चंडीगढ़ 
    पंजाब के सरकारी
    कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. पंजाब सरकार ने राज्‍य के 85 हजार कर्मचारियों को जन्‍माष्‍टमी का बड़ा तोहफा दिया है. कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने बताया कि पंजाब के 85 हजार कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर महंगाई भत्ता मिलेगा. अभी इन कर्मचारियों को बेसिक पे यानी मूल वेतन का 42% महंगाई भत्ता दिया जाता है. भगवंत मान सरकार के नए फैसले के मुताबिक, अब 85,000 सरकारी कर्मियों को केंद्र के बराबर यानी मूल वेतन का 60 फीसदी महंगाई भत्ता मिलेगा। 
     
    किन 85 हजार कर्मियों को मिलेगा 60%  DA/ महंगाई भत्ता 
    पंजाब कैबिनेट सब-कमेटी ने साल 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर DA देने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे मान सरकार मंजूरी देने वाली है. कैबिनेट मंत्री ने बताया कि 17 जुलाई 2020 के बाद जितने कर्मी बहाल हुए हैं उन्‍हें केंद्र के पे-स्‍केल पर बहाल किया गया था, लेकिन उन्‍हें राज्‍य के मुताबिक, 42% महंगाई भत्ता ही दिया जा रहा था. इनकी संख्‍या राज्‍य में करीब 85 हजार है. अब इन्‍हें मान सरकार, केंद्र के बराबर यानी 60 फीसदी महंगाई भत्ता देने जा रही है। 

     

     चीमा ने यह भी दावा किया कि राज्य अपने कर्मचारियों को देश में सबसे अधिक वेतन देता है। उन्होंने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते को लेकर विपक्षी दलों पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा और सामाजिक सुरक्षा बलजीत कौर के साथ मौजूद चीमा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पंजाब के कई प्रमुख श्रेणियों के कर्मचारी पहले से ही अधिक वेतन प्राप्त कर रहे हैं।कैबिनेट मंत्री अरोड़ा ने कर्मचारी संगठनों से अपील की कि वे टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय सरकार के साथ बातचीत के माध्यम से अपनी बात रखें।

    उन्होंने कहा, ‘‘कर्मचारी सुशासन की रीढ़ हैं। हम कर्मचारी संगठनों से अपील करते हैं कि वे विपक्षी दलों के राजनीतिक अवसरवाद को समझें, जिन्होंने चुनाव से पहले बिना आवश्यक वित्तीय प्रावधान किए वादे किए थे।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘हम मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के साथ बातचीत की मेज पर सभी लंबित मुद्दों का समाधान करने के लिए तैयार हैं, ताकि कर्मचारियों के हितों की रक्षा हो सके और पंजाब की जनता पर असहनीय वित्तीय बोझ भी न पड़े।’’

    मंत्रियों का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय के उस आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है, जिसमें राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का लंबित महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) का बकाया पैसा दो हफ़्ते के अंदर देने को कहा गया था। सरकार की दलील है कि इतने कम समय में कुल 14,191 करोड़ रुपये का बकाया चुकाने का आदेश संवैधानिक रूप से असंभव है।

    चीमा ने करीब 14,000 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान नहीं किए जाने के लिए पिछली सरकारों को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने अब तक 4,500 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान कर दिया है।सरकारी कर्मचारी, जिन्होंने 27 अगस्त को राज्यव्यापी हड़ताल की थी, लंबित डीए जारी करने समेत अपनी विभिन्न मांगों को स्वीकार करने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बना रहे हैं।

    चीमा ने कहा कि पंजाब के कर्मचारियों का मूल वेतन और डीए मिलाकर मिलने वाली राशि हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे अन्य राज्यों के कर्मचारियों से अधिक है। उन्होंने दावा किया कि गुजरात में सरकारी कर्मचारियों का वेतन पंजाब सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन से 28 प्रतिशत कम है।चीमा ने यह भी दावा किया कि राज्य के कुल राजस्व में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर 51 प्रतिशत राशि खर्च होती है, जबकि अन्य राज्यों में यह औसतन 38 प्रतिशत है।उन्होंने पंजाब में क्लर्क, ड्राइवर, शिक्षक और स्टेनोग्राफर के वेतन की तुलना केंद्र सरकार में इन्हीं पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन से भी की।उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों को केंद्र सरकार की तुलना में अधिक मूल वेतन दे रही है।

    वित्त मंत्री ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद उसने अपने कर्मचारियों का डीए 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया।उन्होंने कहा, ‘‘जब आम आदमी पार्टी की सरकार बनी थी, तब कर्मचारियों को 28 प्रतिशत डीए मिल रहा था। हमने इसे अक्टूबर 2022 में बढ़ाकर 34 प्रतिशत, दिसंबर 2023 में 38 प्रतिशत और 2024 में 42 प्रतिशत कर दिया।’’

    उन्होंने विपक्षी दलों पर यह दुष्प्रचार फैलाने का आरोप लगाया कि आप सरकार ने अपने कर्मचारियों का बकाया भुगतान नहीं किया है।

  • राजधानी दिल्ली में भारी बारिश का रेड अलर्ट, NCR में भी गरज-चमक और तेज बारिश की चेतावनी

    राजधानी दिल्ली में भारी बारिश का रेड अलर्ट, NCR में भी गरज-चमक और तेज बारिश की चेतावनी

    नई दिल्ली
    दिल्ली-NCR में मौसम ने शुक्रवार को अचानक करवट ली है. कई इलाकों में तेज गरज के साथ झमाझम बारिश से लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत मिली है. मौसम विभाग ने राजधानी और आसपास के इलाकों में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट को बढ़ाकर रेड अलर्ट कर दिया है. मौसम विभाग के इस अलर्ट के बाद दिल्ली और एनसीआर के लोगों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी गई है। 

    जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों के साथ-साथ नोएडा-ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी बारिश हुई है. मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में मध्यम से तेज बारिश के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. लगातार बारिश की स्थिति में निचले इलाकों में पानी भरने और सड़कों पर यातायात की रफ्तार धीमी पड़ने की संभावना है. हालांकि राहत की बात यह है कि जन्माष्टमी के चलते स्कूल-कॉलेज और तमाम दफ्तरों में छुट्टी होने के चलते सड़कों पर ट्रैफिक का कम दबाव रहेगा। 

    मौसम विभाग के ताजा अपडेट के मुताबिक, राजधानी के ज्यादातर हिस्सों में मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश (50 से 100 मिमी) होने की आशंका है. बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है. इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनके झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।

    मौसम विभाग ने लोगों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने और बेहद जरूरी होने पर ही बारिश के दौरान बाहर निकलने की सलाह दी है। 

    राजस्थान से उत्तर प्रदेश तक भी मौसम विभाग का अलर्ट
    मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक अच्छी तरह से चिह्नित निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. वहीं मानसून की अक्षीय रेखा भी सक्रिय है और यह श्रीगंगानगर से होकर निम्न दबाव वाले क्षेत्र तक गुजर रही है. इसका असर उत्तर भारत के कई हिस्सों में देखने को मिल रहा है। 

    राजस्थान के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में भी भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया गया है. पिछले 24 घंटे में पूर्वी राजस्थान के कई इलाकों में तेज बारिश दर्ज की गई. सवाई माधोपुर के खंडार में सबसे ज्यादा 130 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई. राजस्थान के अलवर, भरतपुर, डीग, दौसा, धौलपुर, जयपुर, सीकर, भीलवाड़ा, अजमेर, करौली, टोंक, बारां, कोटा और झालावाड़ में भी हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। 

     

  • सड़क सुरक्षा को लेकर NHAI सख्त, करनाल में हाईवे किनारे अतिक्रमण पर कार्रवाई

    सड़क सुरक्षा को लेकर NHAI सख्त, करनाल में हाईवे किनारे अतिक्रमण पर कार्रवाई

     करनाल
     सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और निर्बाध राजमार्ग संचालन सुनिश्चित करने के एक निर्णायक कदम के तहत, एनएचएआई क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ के अधीन परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू)-अंबाला ने ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (ओएंडएम) व्यवस्था के तहत रखरखाव किए जाने वाले पानीपत-खन्ना कॉरिडोर पर करनाल में एनएच-44 के किनारे एक व्यापक अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया।

    इस अभियान का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग को सुरक्षित, सुलभ और बाधाओं से मुक्त रखना था, जिसके तहत राजमार्ग के राइट-ऑफ-वे (मार्ग के अधिकार क्षेत्र) के भीतर अनधिकृत संरचनाओं, सड़क किनारे के अवरोधों और अतिक्रमणों को निशाना बनाया गया।

    यह कार्रवाई राजमार्ग की भूमि की सुरक्षा करने, यातायात की आवाजाही में सुधार लाने और यह सुनिश्चित करने के एनएचएआई के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है कि नियमित रखरखाव, आपातकालीन प्रतिक्रिया और अन्य राजमार्ग संचालन बिना किसी रुकावट के किए जा सकें।

    एनएच-44 एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परिवहन गलियारा है, जिस पर भारी यात्री और वाणिज्यिक यातायात होता है। अतिक्रमण न केवल राजमार्ग की भूमि के प्रभावी उपयोग को सीमित करते हैं, बल्कि गंभीर सुरक्षा खतरे भी पैदा कर सकते हैं, दृश्यता में बाधा डाल सकते हैं और आपातकालीन व रखरखाव कार्यों में रुकावट बन सकते हैं।

    संबंधित टीमों ने दोहराया है कि दोबारा अतिक्रमण को रोकने के लिए साफ किए गए हिस्सों की नियमित रूप से निगरानी की जाएगी। राजमार्ग के किनारे स्थित हितधारकों को भी राजमार्ग की भूमि पर अनधिकृत कब्जे से परहेज करने की सलाह दी गई है।

    यह पहल सड़क उपयोगकर्ताओं और व्यापक जनता के हित में एनएच-44 के पानीपत-खन्ना खंड को सुरक्षित, कुशल, बाधा रहित और पूरी तरह से चालू रखने की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है।

  • जिनकी बाबर-औरंगजेब में आस्था होगी, क्या वे आपकी आस्था का सम्मान कर पाएंगे- सीएम योगी

    जिनकी बाबर-औरंगजेब में आस्था होगी, क्या वे आपकी आस्था का सम्मान कर पाएंगे- सीएम योगी

    मथुरा

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या काशी के भव्य विकास के बाद अब ब्रजभूमि को भी जन-भावनाओं के अनुरूप विकसित किया जाएगा। डबल इंजन सरकार इसमें कोई कसर नहीं छोड़ेगी। ब्रजभूमि के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए यहां ऐसा भव्य परिसर तैयार किया जाएगा, जैसा अयोध्या और काशी में हुआ है। पिछली सरकारें श्रीकृष्ण जन्मभूमि आने से डरती थीं, क्योंकि उन्हें अपने वोट बैंक की चिंता होती थी। यह सरकार कृष्ण कन्हैया, प्रभु श्रीराम, बाबा विश्वनाथ और मां विंध्यवासिनी पर विश्वास करती है। लेकिन, जिनकी आस्था बाबर और औरंगजेब में होगी, क्या वे आपकी आस्था का सम्मान कर पाएंगे? 

    समाज विरोधी मंसूबे पूरे नहीं होने देगी सरकार

    मुख्यमंत्री शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन करने के उपरांत मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बाबर और औरंगजेब के अनुयायी फिर से समाज में जहर घोलने का काम करने जा रहे हैं। उनकी आदत समाज में विष वमन करने की है, जिससे समाज व राष्ट्र विरोधी तत्वों के हौसले बढ़ सकें, वे आपकी सुरक्षा में सेंध लगा सकें, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर सकें, बहन-बेटियों की सुरक्षा में सेंध लगा सकें, अन्नदाता किसानों की खुशहाली पर डकैती डाल सकें और उद्यमी बनने की ओर अग्रसर कारीगरों व हस्तशिल्पियों को फिर से लाचार बना सकें। लेकिन डबल इंजन की सरकार इन मंसूबों पर पानी फेरेगी और इन्हें कभी पूरा नहीं होने देगी। 

    कल्पना से परे था अयोध्या का कायापलट

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्यावासियों को कल्पना भी नहीं थी कि कभी अयोध्या का इतना भव्य विकास होगा। वहां न सड़क थी, न बिजली और न ही पानी की समुचित व्यवस्था। गंदगी का अंबार लगा रहता था। अयोध्या रेलवे की सिंगल लाइन से जुड़ी थी। जो श्रद्धालु वहां जाता था,  अव्यवस्था और अराजकता देखकर रोता हुआ लौटता था। आज प्रतिदिन करीब एक लाख श्रद्धालु अयोध्या धाम आते हैं। रामनवमी, कार्तिक माह, सावन का झूला मेला, दीपोत्सव आदि पर्वों पर यह संख्या बढ़कर पांच से 50 लाख तक पहुंच जाती है। कहीं कोई असुविधा नहीं होती। सामाजिक समता का अद्भुत उदाहरण भी देखने को मिलता है। प्रभु श्रीराम के नाम को जन-जन तक पहुंचाने वाले महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अयोध्या में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बन गया है। कनेक्टिविटी के लिए चारों ओर से फोरलेन सड़कें बन चुकी हैं। रेलवे की डबल लाइन हो चुकी है। अयोध्या में जहां भी जाएंगे, आपको भक्तिपथ, रामपथ जैसे नामों की फोरलेन सड़कें मिलेंगी।

    अपराजित रही हमारी आस्था

    सीएम ने कहा कि 500 वर्ष पहले 1528 में विदेशी आक्रांता ने हमारी आस्था को समाप्त करने का प्रयास किया था। लेकिन, अयोध्या में प्रभु श्रीराम के प्रति हमारी सनातन आस्था निरंतर बढ़ रही है। वहां उमड़ रहे जनसैलाब से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। जो आक्रांता खुद को अविजित मानते थे, आज उनका कहीं अता-पता नहीं। सब समाप्त हो गए। लेकिन, हमारी आस्था कभी पराजित नहीं हुई। अयोध्या में प्रभु श्रीराम का दुनिया का विशालतम भव्य मंदिर बन गया। जिन लोगों को ये सब अच्छा नहीं लगता, वे अयोध्या को बदनाम कर रहे हैं।

    मां विंध्यवासिनी धाम का भव्य परिसर

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं अभी यहां योगमाया का दर्शन कर रहा था। इसी धरा पर योगमाया ने अवतरित होकर कंस के अहंकार को चुनौती दी थी और वही योगमाया विंध्यवासिनी धाम में प्रकट हुई थीं। मैं जब भी यहां आता था, मुझे तत्काल मां विंध्यवासिनी का स्मरण आता था। आज मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि योगमाया के प्रति हमारी आस्था ने विंध्यवासिनी धाम को एक भव्य परिसर उपलब्ध कराया है।

    ब्रज क्षेत्र में श्रद्धालुओं को मिलेंगी सभी सुविधाएं

    सीएम ने कहा कि मथुरा-वृंदावन समेत बरसाना, नंदगांव व गोवर्धन आने वाले श्रद्धालुओं को सभी सुविधाएं मिलेंगी। किसी श्रद्धालु को कोई दिक्कत न हो, उसकी आस्था को ठेस न लगे, वह सहज भाव से आए, दर्शन करे और आशीर्वाद लेकर जाए। इसके लिए डबल इंजन की सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। ये पर्व व त्योहार केवल आस्था ही नहीं,  हमारी आर्थिकी के आधार भी हैं। समाज का हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में व्यवस्था के साथ जुड़कर पीएम मोदी जी के विकसित भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे रहा है।

    हम सिर्फ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से एक ही बात कही कि अर्जुन, तुम निमित्त मात्र हो, तुम अपना कर्तव्य करो। तुम अगर निष्काम कर्म करोगे तो परिणाम पाओगे। इसी तरह हम सब भी देश, समाज व परिवार के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करेंगे तो भारत को विकसित भारत और उत्तर प्रदेश को विकसित उत्तर प्रदेश बनने में कोई देर नहीं लगेगी। ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’, श्रीकृष्ण कहते हैं कि कर्म करो, अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ो। बाकी चिंता हमारे कृष्ण कन्हैया करेंगे।

    उन्होंने कहा कि हमारा देश स्वतंत्र है, तभी हम इतने स्वतंत्र माहौल में अपने पर्व और त्योहार मना पा रहे हैं। कल से लाखों की संख्या में श्रद्धालु मथुरा-वृंदावन आकर आस्था के साथ विभिन्न समारोहों और आयोजनों में भागीदार बन रहे हैं। आज हम शासन की सुविधाओं से जुड़े हैं और विकास की नई-नई परियोजनाओं का लाभ ले रहे हैं। नौजवान अपने जीवन और भविष्य के प्रति आश्वस्त है। हर बेटी बहन अपनी सुरक्षा के प्रति आश्वस्त है। हर कारीगर और हर हस्तशिल्पी के मन में उद्यमी बनने का विश्वास है। इसी विश्वास को जगाने और हमें जोड़ने के लिए ये पर्व व त्योहार आते हैं। मुझे भी इसीलिए ब्रजभूमि में ‘लाला’ (बालकृष्ण) के दर्शन करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

    अब जवाहर बाग जैसी घटना नहीं, बल्कि उत्सव होता है

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लिए हमारी आस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। विरासत के सम्मान के लिए ही मैं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर यहां आता हूं। पिछली सरकारें यहां आने से डरती थीं, क्योंकि उन्हें वोट बैंक की चिंता होती थी। उन्हें डर रहता था कि कहीं लोग सवाल न पूछ लें और इसीलिए उनके कृत्यों से यहां जवाहर बाग जैसी घटना हुई। लेकिन, अब हमारी यह ब्रजभूमि जन्मोत्सव, रंगोत्सव, ब्रजरज उत्सव और वैष्णव कुंभ जैसे आयोजनों के साथ नए उत्साह, नई उमंग और नए विश्वास से जुड़ रही है। यही नया विश्वास हम सबको आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को जन्माष्टमी की बधाई व शुभकामनाएं भी दीं।

  • शिक्षकों को यूपीजीबी का तोहफा, 1.10 करोड़ रुपये तक का मुफ्त दुर्घटना बीमा

    शिक्षकों को यूपीजीबी का तोहफा, 1.10 करोड़ रुपये तक का मुफ्त दुर्घटना बीमा

    लखनऊ

     शिक्षक दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक (यूपीजीबी) ने शिक्षकों के लिए विशेष वेतन पैकेज की घोषणा की है। बैंक की ओर से शुरू किए गए ‘शिक्षक विशेष यूपीजीबी वेतन पैकेज’ में शिक्षकों को 1.10 करोड़ रुपये तक का दुर्घटना एवं विकलांगता बीमा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही 10 लाख रुपये का जीवन बीमा भी मुफ्त दिया जाएगा।

    लखनऊ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बैंक प्रबंधन ने इस विशेष पैकेज का अनावरण किया। प्रबंधन के अनुसार, पैकेज को तैयार करने में पिछले एक महीने से चल रहे ‘शिक्षक संवाद’ के दौरान शिक्षकों से मिले सुझावों को शामिल किया गया है।

    क्षेत्रीय प्रबंधक कौशल किशोर ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता बताते हुए कहा कि बैंक का उद्देश्य केवल शिक्षकों के वेतन खाते खोलना नहीं, बल्कि उनके साथ दीर्घकालिक वित्तीय संबंध स्थापित करना है। शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुधांशु मोहन ने पैकेज को शिक्षकों के लिए अन्य बैंकों की योजनाओं की तुलना में अधिक लाभकारी बताया।

    ऋण से लेकर बैंकिंग सेवाओं तक कई सुविधाएं

    यूपीजीबी के इस विशेष वेतन पैकेज में शिक्षकों को होम लोन, कार लोन और व्यक्तिगत ऋण पर प्रसंस्करण शुल्क नहीं देना होगा। लॉकर शुल्क में भी छूट दी गई है। शिक्षा ऋण पर 0.25 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज छूट का प्रावधान किया गया है।

    इसके अलावा एनईएफटी, आरटीजीएस, एसएमएस अलर्ट, चेकबुक और डिमांड ड्राफ्ट जैसी बैंकिंग सेवाएं भी निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। दुर्घटना एवं विकलांगता बीमा तथा जीवन बीमा की सुविधा शिक्षकों और उनके परिवारों को अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगी।

    कार्यक्रम में शिक्षकों को अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उप क्षेत्रीय प्रबंधक अखिलेश उपाध्याय, मुख्य प्रबंधक अभय कुमार सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक शशि सिंह, मोहम्मद रऊफ, शिक्षक अजय सिंह और शाखा प्रबंधक निराजन आनंद सहित बैंक अधिकारी एवं शिक्षक मौजूद रहे।

    बैंक प्रबंधन के अनुसार, 4,300 से अधिक शाखाओं वाला उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक आठ करोड़ से अधिक ग्राहकों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।

  • मनरेगा श्रमिकों के लिए बड़ा बदलाव, महिलाओं के लिए अलग तय हुई कार्य-दर

    मनरेगा श्रमिकों के लिए बड़ा बदलाव, महिलाओं के लिए अलग तय हुई कार्य-दर

     रांची
    राज्य में वीबी जीरामजी योजना के तहत कार्यरत अकुशल श्रमिकों के लिए कार्य की मात्रा पूर्व की तुलना में कम कर दी गई है। इस योजना के अंतर्गत कार्यरत श्रमिकों को अब मिट्टी कटाई के कार्य में पूर्व निर्धारित 73 सीएफटी के स्थान पर औसतन 50.43 सीएफटी कार्य करने पर एक दिन की मजदूरी दिए जाने का प्रविधान किया गया है।

    इसके तहत महिलाओं के लिए इसकी सीमा 46.97 सीएफटी ही रखी गई है। राज्य सरकार यह व्यवस्था कर रही है कि निर्धारित सॉफ्टवेयर सेक्योर साफ्ट में नई दरों को शीघ्र ही अपलोड किया जाए। इससे कार्य की मात्रा एवं मजदूरी भुगतान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।

    मजदूरी भुगतान व्यवस्था को अधिक वैज्ञानिक, न्यायसंगत एवं श्रमिक हितैषी बनाने की दिशा में यह पहल की गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों की कार्यक्षमता, कार्य की प्रकृति, श्रम एवं निर्धारित कार्यदिवस में किए जा सकने वाले कार्य की मात्रा का आकलन किया गया है।

    झारखंड में वर्तमान व्यवस्था के तहत एक दिन की मजदूरी के भुगतान के लिए 73 सीएफटी मिट्टी कटाई का कार्य निर्धारित था। टाइम एंड मोशन के आधार पर अब विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों के लिए कार्य-मात्रा को युक्तिसंगत बनाया गया है।

    इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि निर्धारित कार्य-मात्रा एक सामान्य श्रमिक द्वारा सामान्य कार्यदिवस में वास्तविक रूप से पूरी की जा सके। ग्रामीण विकास मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में महिलाओं, बुजुर्गों तथा दिव्यांग श्रमिकों के लिए अलग दर निर्धारित करने का भी प्रविधान है। निर्धारित दरों को लेकर मंत्रालय से अनुमोदन प्राप्त हो चुका है।

  • शिक्षक दिवस पर बड़ा ऐलान, बिहार के शिक्षकों को Google देगा AI ट्रेनिंग; जल्द होगा MOU

    शिक्षक दिवस पर बड़ा ऐलान, बिहार के शिक्षकों को Google देगा AI ट्रेनिंग; जल्द होगा MOU

    पटना
     गूगल फाॅर एजुकेशन इंडिया बिहार के शिक्षकों को समूह में एआई का प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगा। गूगल के रिसाेर्स पर्सन क्षेत्रवार प्रशिक्षण देंगे।

    सभी शिक्षकों को इस प्रशिक्षण में शामिल में होने को ले शिक्षा मंत्री के स्तर से पत्र भी लिख जा रहा। शिक्षकों के इस प्रशिक्षण के मूल मे है कि AI के उपयोग की ट्रेनिंग लेकर विद्यार्थियों को एआई में दक्ष कर सकें।

    गूगल एजुकेशन फाॅर इंडिया के कंट्री हेड ने अपनी टीम के साथ हाल ही में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के साथ इस संबंध में बैठक की थी। शनिवार को शिक्षक दिवस के मौके पर इस संबंध में गूगल एजुकेशन फाॅर इंडिया का शिक्षा विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर होना है।

    रिसोर्स पर्सन को बिहार में तैनात करेगा गूगल
    इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार सहमति पत्र हस्ताक्षर होने के बाद गूगल अपने रिसोर्स पर्सन को प्रशिक्षण के लिए बिहार में तैनात करेगा।

    यह पहली बार हो रहा जब शिक्षकों के तकनीकी प्रशिक्षण खासकर एआई के लिए शिक्षा विभाग गूगल एजुकेश फार इंडिया के साथ किसी तरह का एमओयू कर रहा।

    शिक्षा विभाग पहले जिला स्तर पर शिक्षकों का चयन कर उन्हें मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार करेगा। गूगल अपने एआई प्लेटफाॅर्म पर इन शिक्षकों को यह ट्रेनिंग देगा कि एआई का उपयोग कितनी सहजता से किया जा सकता है।

    छात्रों को एआई में दक्ष बनाने की पहल
    किसी विषय पर सूचना के लिए किस तरह से प्रांप्ट लिखना है यह ट्रेनिंग का खास हिस्सा है। विद्यार्थियों की जरूरत के हिसाब से शिक्षकों को यह ट्रेनिंग दी जाएगी कि वे तय पाठ्यक्रम को और कैसे बेहतर कर सकते हैं।

    इस पूरी कवायद के मूल में शिक्षा विभाग की यह योजना है कि विद्यार्थियों को एआई के उपयोग में दक्ष बनाया जाए। माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी इसके केंद्र में हैं।

    शिक्षक एआई की मदद से सभी विषयों पर खास तरीके से विद्यार्थियों को उपलब्ध कराएंगे। मास्टर ट्रेनर के माध्यम से अलग-अलग विद्यालय के शिक्षकों को एआई में प्रशिक्षित किया जाएगा।

     

  • ‘एसी में बैठकर तिलचट्टों के भरोसे सरकार बनाएंगे?’… राजभर ने अखिलेश को घेरा

    ‘एसी में बैठकर तिलचट्टों के भरोसे सरकार बनाएंगे?’… राजभर ने अखिलेश को घेरा

    ‘लाल वाले खुद तिलचट्टों से मदद मांग रहे हैं’… ओपी राजभर का अखिलेश पर तीखा तंज

    ‘पिता-चच्चू ने साइकिल चलाई, बेटवा तिलचट्टों के भरोसे सरकार बनाएगा’… अखिलेश पर राजभर का वार

    ‘एसी में बैठकर तिलचट्टों के भरोसे सरकार बनाएंगे?’… राजभर ने अखिलेश को घेरा

    ‘लाल’ का स्प्रे तिलचट्टे भगाता है, यहां ‘लाल’ वाले ही मदद मांग रहे… अखिलेश पर राजभर का तंज

    ‘सैफई सिंडिकेट के बच्चे विदेश में, गांव के युवा किसके भरोसे?’… अखिलेश पर राजभर का तीखा वार

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बेहद तीखा और व्यंग्यात्मक हमला बोला है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में शुक्रवार को राजभर ने अखिलेश यादव को सीधे संबोधित करते हुए उनकी राजनीति, समाजवादी पार्टी की मौजूदा रणनीति और उनके राजनीतिक सहारों पर सवाल उठाए। पोस्ट में राजभर ने ‘अभिजीत नक्षत्र’, ‘तिलचट्टे’, ‘लाल वाला स्प्रे’, ‘कंसवादी लोडर’, ‘रील बाज’ और ‘चांदी के चम्मच’ जैसे शब्दों के जरिए अखिलेश पर जमकर निशाना साधा।

    ‘अभिजीत नक्षत्र में दीपक जलाने चले, घर में तिलचट्टे आने लगे’

    राजभर ने अपने पोस्ट की शुरुआत ही अखिलेश यादव पर तंज से की। उन्होंने लिखा, “का हो अखिलेश यादव जी, सुने हैं कि आप अभिजीत नक्षत्र में दीपक जलाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच आपके घर में ‘तिलचट्टे’ आने लगे, वो भी मुंह बांध के।”

    इसके बाद राजभर ने ‘लाल’ और ‘तिलचट्टों’ को लेकर व्यंग्य को और धार दी। उन्होंने लिखा कि टीवी में तो दिखाया जाता है कि ‘लाल’ वाला स्प्रे तिलचट्टों को खत्म करने के लिए होता है, लेकिन यहां तो ‘लाल’ वाले खुद ही तिलचट्टों से मदद मांग रहे हैं। राजभर ने तंज कसते हुए कहा, 'बताइए भला, अपने कंसवादी लोडरों पर इतना भी भरोसा नहीं है कि जो अब ‘तिलचट्टों’ का साथ ले रहे हैं?' दरअसल, राजभर का ये हमला ऐसे समय में आया है जब काकॉकरोच जनता पार्टी के आशुतोष रांका ने गुरुवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से बंद कमरे में करीब डेढ़ मुलाकात की थी।

    ‘आपके पिता और चच्चू ने इतनी मेहनत यही दिन देखने के लिए की?’

    राजभर ने इसके बाद अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव और उनके चच्चू शिवपाल यादव का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों ने गांव-गांव साइकिल का पैडल मार-मारकर समाजवादी पार्टी खड़ी की। उन्होंने सवालिया और व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा, “आपके पिता और चच्चू एतना मेहनत किये! गांव-गांव साइकिल क पैडल मार-मार के समाजवादी पार्टी चलाए, यही दिन देखने के लिए?”

    राजभर ने आगे तंज कसते हुए कहा कि क्या मुलायम और शिवपाल ने इतनी मेहनत इसलिए की थी कि अब उनका बेटा एसी में बैठकर ‘तिलचट्टन’ के भरोसे सरकार बनाएगा। राजभर ने अखिलेश यादव की मौजूदा राजनीतिक शैली को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा, 'अब पता चल गया कि आप भी रील बाज तिलचट्टन के बल पर राजनीति करने वाले हैं।'

    ‘चांदी के चम्मच वाले हैं, सत्ता का खेल पुरानी आदत है’

    ओपी राजभर ने अपने पोस्ट में अखिलेश यादव की पृष्ठभूमि को लेकर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा, 'आप चांदी के चम्मच वाले हैं, विदेशी ताकत और अकूत पैसे के बल पर सत्ता का खेल आपकी पुरानी आदत है।' इसके साथ ही उन्होंने ‘सैफई सिंडिकेट’ का जिक्र करते हुए कहा कि उसके बच्चे विदेश में पढ़ते हैं और लंदन-पेरिस घूमते हैं। लेकिन इसके बाद राजभर ने अपने पोस्ट को गांव-देहात के युवाओं की चिंता से जोड़ दिया।

    राजभर ने अखिलेश यादव से अपील करते हुए लिखा कि गांव-देहात के यादव और गरीब जोलहा-पसमांदा मुस्लिम युवाओं को ऐसी आग में न झोंका जाए, जिससे उनका और उनके परिवार का भविष्य तबाह हो जाए। उन्होंने कहा कि सत्ता की राजनीति करने वालों और गांव-देहात के उन युवाओं के बीच फर्क को समझना जरूरी है, जिनके भविष्य और परिवार सीधे किसी भी राजनीतिक संघर्ष का असर झेल सकते हैं।

  • हरियाणा में 1.67 लाख एकड़ जमीन खरीदने की तैयारी, 39 शहरों में ट्रांसपोर्ट नगर और KMP पर नमो सिटी

    हरियाणा में 1.67 लाख एकड़ जमीन खरीदने की तैयारी, 39 शहरों में ट्रांसपोर्ट नगर और KMP पर नमो सिटी

    चंडीगढ़
     हरियाणा के 39 शहरों में यातायात व्यवस्था को सुधारने और ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए ट्रांसपोर्ट नगर बनाए जाएंगे। इसके अलावा कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस-वे के किनारे नमो सिटी बसाई जाएगी। इसके लिए जगह तय होनी बाकी है।

    ट्रांसपोर्ट नगर के लिए आठ हजार एकड़ और नमो सिटी के लिए नौ हजार एकड़ जमीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसी तरह आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए 27 शहरों में 47 हजार एकड़ जमीन खरीदी जाएगी।

    प्रदेश सरकार ने विभिन्न परियोजनाओं के लिए 71 शहरों में एक लाख 67 हजार एकड़ जमीन खरीदने की योजना बनाई है, जिसके चौथे चरण में किसानों से 64 हजार एकड़ जमीन मांगी गई है। सरकार को जमीन बेचने के इच्छुक किसान ई-भूमि पोर्टल पर 31 अक्टूबर तक आवेदन कर सकते हैं। इनमें सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना नमो सिटी की है

    एनसीआर रीजनल प्लान-2041 के तहत इस मेगा स्मार्ट सिटी परियोजना का उद्देश्य भविष्य की जरूरतों के मुताबिक एक आधुनिक, प्रदूषण-मुक्त और तकनीक आधारित शहर बसाना है। यह शहर पूरी तरह ‘ग्रीन और स्मार्ट’ होगा। इसके बड़े हिस्से में हरियाली (ग्रीन बेल्ट) विकसित की जाएगी।

    प्रदूषण रोकने के लिए केवल इलेक्ट्रिक वाहन और साइकिलों को अनुमति दी जाएगी। शहर को ‘ग्लोबल मिनीफाइड स्मार्ट सिटी’ की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यहां 24 घंटे बिजली-पानी, भूमिगत यूटिलिटी लाइन, स्मार्ट कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाएं होंगी।

    घरों के पास ही दफ्तर और व्यावसायिक केंद्र होंगे, जिससे ट्रैफिक और प्रदूषण कम होगा। 24 घंटे बिजली-पानी और स्मार्ट नागरिक सुविधाओं के साथ भूमिगत यूटिलिटी नेटवर्क और आधुनिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था होगी। घर, दफ्तर और व्यावसायिक केंद्र पास-पास होंगे, जिससे ट्रैफिक और प्रदूषण कम होगा।

    जमीन का मोल-भाव कर सकेंगे किसान
    प्रदेश सरकार की योजना है कि हरियाणा को उत्तर भारत के औद्योगिक विनिर्माण आधार, लाजिस्टिक्स हब और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए सेटेलाइट शहरीकरण क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए, जिसके लिए काफी जमीन की जरूरत है।

    भूमि अधिग्रहण के विवाद खत्म करने के लिए सरकार नई पॉलिसी लागू कर चुकी है, जिसके तहत जबरन जमीन नहीं लेकर किसानों की मर्जी से उनकी मुंहमांगी कीमत पर खरीदी जाएगी। अगर प्रदेश सरकार को जमीन और भू-स्वामी द्वारा पेशकश किए गए रेट पसंद आएंगे तो इसे खरीद लिया जाएगा। विभिन्न मामलों में जमीन का मोलभाव करना भी संभव हो सकेगा।

    हरियाणा भूमि खरीद विवरण
    फरीदाबाद और झज्जर में खरीदी जाएगी सबसे ज्यादा जमीन

    शहर     कुल गांव             जमीन  (एकड़ में)

    रेवाड़ी     18               1946.45
    धारुहेड़ा     5                 286.61
    नारनौल     9              2621.80
    बावल     12                     1981.00
    पंचकूला (एक्सटेंशन-2)     7     800.23
    असंध     1     391.67
    इंद्री     6     261.89
    नीलोखेड़ी-तरावड़ी     9     830.43
    शाहाबाद     8     1473.10
    यमुनानगर-जगाधरी     57     4712.02
    तावड़ू     2     238.38
    फरीदाबाद     51     11895.728
    फिरोजपुर झिरका     2     213.57
    हथीन     4     892.51
    अग्रोहा     2     226.30
    नारनौंद     3     266.83
    उकलाना     7     802.30
    भूना     1     299.05
    रतिया     5     1750.00
    तलवंडी राणा एवं बहबलपुर     2     295.82
    उचाना     2     1412.58
    सफीदों     2     614.80
    रोहतक     21     6122.71
    सांपला     9     6767.17
    कलानौर     2     394.87
    इसराना     1     60.00
    झज्जर     16     10982.30
    खरखौदा     6     2395.18
    गुरुग्राम     8     1314.99
    पिंजौर-कालका     4     73.18
    कोट-बेहला     1     74.68
    रायपुर रानी     1     7.40
    अंबाला     3     111.28
    साहा     1     44.00
    घरौंडा     1     16.80
    पिहोवा     1     120.00
    सोनीपत     9     772.51
    गन्नौर     4     184.07
    गोहाना     1     26.00
    समालखा     2     16.00
    मतलौडा     1     32.00
    बेरी     2     24.41
    बहादुरगढ़     4     376.183
    बादसा     2     51.89
    बरवाला     1     23.46
    फतेहाबाद     4     281.36
    नरवाना     2     33.06
    जुलाना     4     22.01

    रेवाड़ी     18     1946.45
    धारुहेड़ा     5     286.61
    नारनौल     9     2621.80
    बावल     12     1981.00
    पंचकूला (एक्सटेंशन-2)     7     800.23
    असंध     1     391.67
    इंद्री     6     261.89
    नीलोखेड़ी-तरावड़ी     9     830.43
    शाहाबाद     8     1473.10
    यमुनानगर-जगाधरी     57     4712.02
    तावड़ू     2     238.38
    फरीदाबाद     51     11895.728
    फिरोजपुर झिरका     2     213.57
    हथीन     4     892.51
    अग्रोहा     2     226.30
    नारनौंद     3     266.83
    उकलाना     7     802.30
    भूना     1     299.05
    रतिया     5     1750.00
    तलवंडी राणा एवं बहबलपुर     2     295.82
    उचाना     2     1412.58
    सफीदों     2     614.80
    रोहतक     21     6122.71
    सांपला     9     6767.17
    कलानौर     2     394.87
    इसराना     1     60.00
    झज्जर     16     10982.30
    खरखौदा     6     2395.18
    गुरुग्राम     8     1314.99
    पिंजौर-कालका     4     73.18
    कोट-बेहला     1     74.68
    रायपुर रानी     1     7.40
    अंबाला     3     111.28
    साहा     1     44.00
    घरौंडा     1     16.80
    पिहोवा     1     120.00
    सोनीपत     9     772.51
    गन्नौर     4     184.07
    गोहाना     1     26.00
    समालखा     2     16.00
    मतलौडा     1     32.00
    बेरी     2     24.41
    बहादुरगढ़     4     376.183
    बादसा     2     51.89
    बरवाला     1     23.46
    फतेहाबाद     4     281.36
    नरवाना     2     33.06
    जुलाना     4     22.01