Category: राज्य

  • 591 करोड़ अलर्ट मैसेज से बाढ़ के दौरान यूपी में बचाई गई लाखों की जान, एक भी जनहानि नहीं

    591 करोड़ अलर्ट मैसेज से बाढ़ के दौरान यूपी में बचाई गई लाखों की जान, एक भी जनहानि नहीं

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में भारी बारिश, आंधी-तूफान, वज्रपात और बाढ़ के बीच योगी सरकार का मजबूत चेतावनी एवं राहत-बचाव तंत्र लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हुआ है। राहत आयुक्त कार्यालय की ओर से बड़े पैमाने पर भेजे गए 591 करोड़ से अधिक अलर्ट मैसेज ने लाखों लोगों को समय रहते मौसम और बाढ़ के संभावित खतरे से सतर्क किया। समय पर मिली चेतावनी, स्थानीय प्रशासन की तत्परता और आमजन की सजगता का नतीजा रहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अब तक एक भी जनहानि नहीं हुई है।

    करोड़ों संदेशों से समय रहते मिली चेतावनी

    प्रदेश में लोगों को भारी बारिश, आंधी-तूफान, वज्रपात और बाढ़ से बचाव के लिए मोबाइल संदेशों के माध्यम से लगातार अलर्ट भेजे गए। जुलाई में 306 करोड़ और अगस्त में 285 करोड़ यानी कुल 591 करोड़ अलर्ट मैसेज प्रसारित किए गए। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक करोड़ से अधिक लोगों तक मौसम संबंधी सूचनाएं और चेतावनियां पहुंचाई गईं। इस व्यापक सूचना तंत्र ने लोगों को समय रहते सावधान होने, सुरक्षित स्थानों पर जाने और जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाने में मदद की।

    चेतावनी मिलते ही खुद सुरक्षित हुए लोग

    अलर्ट सिस्टम की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि मौसम और नदियों के जलस्तर से जुड़ी सूचनाएं लोगों तक समय पर पहुंचीं। इससे प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग संभावित खतरे को समझकर स्वयं भी सुरक्षित स्थानों की ओर जाने में सक्षम हुए। स्थानीय प्रशासन ने भी इन चेतावनियों के आधार पर लगातार लोगों को जागरूक किया। इस तरह तकनीक, प्रशासनिक सतर्कता और आमजन की सजगता ने मिलकर जनसुरक्षा को मजबूत किया।

    3.52 लाख से अधिक लोगों तक पहुंची मदद

    अलर्ट और राहत-बचाव व्यवस्था के जरिए बाढ़ की स्थिति में अब तक 3.52 लाख से अधिक लोगों तक मदद पहुंचाई गई। वहीं राहत एवं बचाव अभियानों के दौरान समय रहते 17.54 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

    1070 हेल्पलाइन से तत्काल राहत

    राहत आयुक्त कार्यालय की 1070 हेल्पलाइन भी संकट के समय लोगों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी। सूचना मिलते ही संबंधित जिला प्रशासन को जानकारी उपलब्ध कराई गई और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव दलों को मौके पर भेजा गया। चित्रकूट, प्रयागराज और मिर्जापुर समेत अन्य प्रभावित जिलों में बाढ़ में फंसे लोगों की लोकेशन प्राप्त कर बचाव दलों तक पहुंचाई गई, जिसके बाद नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने की कार्रवाई की गई। यही प्रयास बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अब तक शून्य जनहानि सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

  • नशामुक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को बड़ी कामयाबी, योगी सरकार ने ड्रग नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    नशामुक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को बड़ी कामयाबी, योगी सरकार ने ड्रग नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश को नशे के कारोबार से मुक्त कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत प्रदेश में ड्रग माफिया और नशीली दवाओं की अवैध सप्लाई चेन के खिलाफ कार्रवाई तेज है। सरकार के इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए एएनटीएफ लखनऊ यूनिट और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की संयुक्त टीम ने राजधानी लखनऊ में नशीली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।

    ट्रांसपोर्ट नगर में की गई कार्रवाई में करीब 228 किलोग्राम नशीली दवाएं बरामद हुई हैं। इनमें 9.60 लाख एल्जोमैक-0.5 (एल्प्राजोलाम) टैबलेट, 1.20 लाख स्पैसमोनाम प्लस (ट्रामाडोल एचसीएल) कैप्सूल और कोडीनयुक्त ओनेरेक्स 100 एमएल कफ सिरप की 720 बोतलें शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान सात मोबाइल फोन और 11,140 रुपये नकद भी मिले। मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

    एक खेप से खुलने लगी पूरे नेटवर्क की कड़ी

    एएनटीएफ को ट्रांसपोर्ट नगर में नशीली दवाओं की बड़ी खेप पहुंचने की सूचना मिली थी। 3 सितंबर को टीम ने मकान संख्या एस-363/364 के आसपास निगरानी शुरू की। इसी दौरान तीन लोग कार्टूनों को बोरियों में छिपाते दिखाई दिए। संदेह के आधार पर तलाशी लेने पर किशन वासवानी, समीर अहमद और शाद इरशाद के कब्जे से बड़ी मात्रा में नशीली दवाएं बरामद हुईं। कार्रवाई में एफएसडीए की टीम भी शामिल रही। औषधि निरीक्षकों ने बरामद दवाओं के नमूने जांच के लिए सुरक्षित किए।

    पूछताछ आगे बढ़ी तो सप्लाई नेटवर्क की अगली कड़ी सामने आई। किशन वासवानी और समीर अहमद ने दवाओं की आपूर्ति कन्हैया फार्मा के संचालक उमेश कुमार से होने की जानकारी दी। इसके आधार पर उमेश कुमार और सतेन्द्र सिंह को भी गिरफ्तार किया गया।

    फर्म के दस्तावेजों की आड़ में हो रही थी बिलिंग

    जांच में सामने आया कि उमेश कुमार कथित तौर पर सतेन्द्र सिंह की फर्म के दस्तावेजों का इस्तेमाल नशीली दवाओं की बिलिंग के लिए करता था। इसके एवज में सतेन्द्र सिंह को कमीशन दिए जाने की बात सामने आई है। एफएसडीए की जांच के दौरान कन्हैया फार्मा में प्रॉक्सीमेक-एसपीएएस कैप्सूल के 1,116 डिब्बों सहित सात प्रकार की दवाएं मिलीं। फर्म संचालक दवाओं के खरीद और बिक्री से संबंधित पूर्ण अभिलेख उपलब्ध नहीं करा सका। इसके बाद एफएसडीए ने कन्हैया फार्मा को सील कर दिया।

    पूछताछ में सामने आया एक और सप्लायर

    जांच का दायरा बढ़ाते हुए टीम ने शाद इरशाद से पूछताछ की। इसमें विशाल चौरसिया का नाम सामने आया। इसके बाद उसे भी गिरफ्तार किया गया।पूछताछ में विशाल ने शाद को नशीली दवाओं की आपूर्ति करने की बात बताई। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कोडीन से जुड़े एक मामले में अमीनाबाद थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद उसका दवा लाइसेंस निरस्त हो चुका था। इसके बाद वह कथित तौर पर दूसरी फर्मों के माध्यम से नशीली दवाओं का कारोबार कर रहा था। बरामद कोडीनयुक्त कफ सिरप के संबंध में विशाल ने इसे बृजेश वर्मा से खरीदने की बात भी बताई है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां अब नेटवर्क की अन्य कड़ियों की भी जांच कर रही हैं।

    नशे के कारोबार पर सरकार का सख्त संदेश

    एएनटीएफ के मुताबिक किशन वासवानी, समीर अहमद, शाद इरशाद, उमेश कुमार, सतेन्द्र सिंह और विशाल चौरसिया इस अवैध नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं। सभी छह आरोपियों को धारा 8/21/22/29 एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है। बरामद दवाओं का नियमानुसार न्यायालय के समक्ष नमूनाकरण कराया जाएगा। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी ई-साक्ष्य एप के माध्यम से की गई। योगी सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि प्रदेश में नशीली दवाओं के कारोबार को केवल सड़क स्तर पर नहीं, बल्कि सप्लाई, बिलिंग और वितरण से जुड़े पूरे नेटवर्क के स्तर पर निशाना बनाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाते हुए उत्तर प्रदेश को नशामुक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्रवाई करना है।

  • शिक्षकों के सम्मान में सभी वन प्रभाग लगाएंगे ‘एक पेड़ गुरु के नाम’

    शिक्षकों के सम्मान में सभी वन प्रभाग लगाएंगे ‘एक पेड़ गुरु के नाम’

    लखनऊ

    योगी सरकार ने एक तरफ पौधरोपण महायज्ञ-2026 के अंतर्गत एक दिन में 35.27 करोड़ से अधिक पौधे रोप कर रिकॉर्ड बनाया तो दूसरी तरफ इस वर्ष भी विशिष्ट वनों की स्थापना की गई। विशिष्ट वनों की श्रृंखला में 'एक पेड़ गुरु के नाम' के तहत भी विशिष्ट आयोजन होगा। गुरु के सम्मान में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर सभी वन प्रभागों में यह आयोजन किया जाएगा। 

    योगी सरकार ने रचा इतिहास, 2026 में बनाया सर्वाधिक पौधरोपण का कीर्तिमान

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने नया इतिहास रच दिया। 'एक पेड़ मां के नाम' के अंतर्गत पौधरोपण महायज्ञ-2026 में पूरे प्रदेश में एक दिन (12 जुलाई, रविवारवार) में 35,27,89,926 पौधरोपण हुए। यह सरकार द्वारा तय किए गए लक्ष्य 35 करोड़ से 27,89,926 अधिक रहा। सीएम योगी ने 12 जुलाई को गोरखपुर में दो स्थानों पर पौधरोपण कर अभियान का शुभारंभ किया था।

    लखनऊ में चंद्रिका देवी मंदिर के समीप लगेगा 'एक पेड़ गुरु के नाम' 

    लखनऊ के प्रभागीय वनाधिकारी सितांशु पांडेय ने बताया कि विशिष्ट वनों की श्रृंखला में शिक्षक दिवस पर लखनऊ में भी पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा। यहां चंद्रिका देवी मंदिर के समीप 'एक पेड़ गुरु के नाम' कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यहां आगन्तुकों को स्मृति चिह्न के रूप में पौधे भी भेंट किए जाएंगे। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में शिक्षक दिवस के मुख्य कार्यक्रम में 'एक पेड़ गुरु के नाम' पौधरोपण कर सकते हैं। 

    पौधरोपण महाभियान-2026 में लगाए गए विशिष्ट वन 

    पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत गुरु के सम्मान में 5 सितंबर को प्रदेश के सभी वन प्रभागों में 'एक पेड़ गुरु के नाम' लगाया जाएगा। इसे लेकर सभी वन प्रभागों में तैयारी पूरी हो गई है। मुख्य वन संरक्षक (प्रचार-प्रसार) अदिति शर्मा ने बताया कि इस वर्ष भी अनेक विशिष्ट वन स्थापित किए गए। 

    2026 में स्थापित किए गए विशिष्ट वन व अन्य कार्यक्रम
    👉वन योगा कार्यक्रम
    👉श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर पौधरोपण
    👉वन महोत्सव
    👉 पर्यावरण दिवस पर वृहद पौधरोपण
    👉 महर्षि चरक औषधि वन                
    👉 समृद्धि वन                 
    👉 कपि वन                  
    👉 ऊर्जा वन                  
    👉 समरस वन                  
    👉 सहजन भंडारा             
    👉 आम भंडारा
    👉 वंदे मातरम वाटिका                               
    👉 अविरल धारा पौधरोपण    
    👉 मिशन छाया   
    👉 एक्सप्रेस वे पौधरोपण 
    👉 भाई-बहन पौधरोपण (रक्षाबंधन वाटिका)
    👉 एक पेड़ गुरु के नाम आदि

  • झारखंड के खनन-उद्योग को मिल सकता है नया मॉडल, विंजिंहम पोर्ट की डिजिटल तकनीक और ऑटोमेशन पर जोर

    झारखंड के खनन-उद्योग को मिल सकता है नया मॉडल, विंजिंहम पोर्ट की डिजिटल तकनीक और ऑटोमेशन पर जोर

    रांची
     झारखंड की ही तरह केरल भी हरे भरे जंगलों से भरा है। अरब सागर के किनारे केरलम के शहर त्रिवेंद्रम से 40 किलोमीटर की दूरी पर अडानी विंजिंहम समुद्र परिवहन परियोजना एक रोल मॉडल है।

    झारखंड में खनन और उद्योग दोनों में पर्यावरण और विस्थापन का सवाल उभर कर सामने आता है। लेकिन विंजिंहम सी पोर्ट यानि बंदरगाह के निर्माण में कम से कम विस्थापन हुआ और समुद्र के आसपास की पारिस्थितिकी को बग़ैर कोई नुकसान पहुंचाए तीन किलोमीटर लंबी दीवार खड़ी कर दी गई।

    इसका परिणाम यह है कि भारत आने वाले बड़े जहाजों को अब सामान उतारने के लिए दुबई, कोलंबो, सिंगापुर या एमस्टडर्म नहीं जाना पडता है। देश को हजारों करोड़ का राजस्व मिलता है और 20 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। झारखंड में नए लगने वाले उद्योगों को इस मॉडल के जरिए पर्यावरण ऑडिट के जरिए अर्थव्यवस्था में योगदान करने वाला बनाया जा सकता है।

    कोयला परिवहन में परिवहन का माडल है उपयोगी
    झारखंड में कोयला, लौह और बाक्साइट खनन के बाद उनका परिवहन वन क्षेत्र से ही होता है। विंजिंहम सी पोर्ट ऐसे तो समुद्र में संचालित होता है लेकिन 18 मीटर की गहराई होने की वजह से जल के अंदर एक पूरा वनस्पति और जीव तंत्र रहता है।

    इसकी डिजिटल मैपिंग कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी वनस्पति और जीव जंतु को नुकसान नहीं पहुंचे। इसी तरह खनिजों के परिवहन में भी डिजिटल सेंसिंग उपकरणों का प्रयोग हो सकता है।

    2028 तक समुद्री व्यापार को तीन गुणा बढ़ाएगा विंजिंहम
    1विंजिंहम सी पोर्ट अभी पहले ही चरण में है। तीन किलोमीटर के बैक वाटर में अभी 40 मीटर तक के जहाज पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा ये इस बंदरगाह की दूरी मात्र 10 नाटिकल मील है। लेकिन बंदरगाह बन जाने के बाद यहां अंतरराष्ट्रीय और भारतीय जहाज आधे घंटे में पहुंच सकते हैं।
    2028 तक बैक वाटर की लंबाई चार किलोमीटर तक हो जाएगी। इससे यहां एक समय में एक लाख तक कंटेनर रखे जा सकेंगे। अभी यहां 35 हजार कंटेनर रखे जा रहे हैं।

    पूरी तरह ऑटोमैटिक है कंटेनर का उतार-चढ़ाव
    विंजिंहम सी पोर्ट पर तीस से अधिक उच्च क्षमता के क्रेन लगे हैं। इनका संचालन पूरी तरह से ऑटोमैटिक है जो कंट्रोल रूम में एक सॉफ्टवेयर सिस्टम के जरिए होता है। कोयला और लौह अयस्क परिवहन में कन्वेयर बेल्ट को इस तकनीक से संचालित करने पर प्रदूषण की संभावना कम होगी।

    पहले भारत का 75 प्रतिशत कंटेनर देश गये बाहर उतरता था
    विंजिंहम सी पोर्ट के संचालित होने से पहले भारत का 75 प्रतिशत समुद्री कंटेनर परिवहन दूसरे देशों से होता था। देश में 17 मीटर से अधिक गहराई को कोई बड़ा पोर्ट नहीं था। अब देश में भी इतनी गहराई की क्षमता का पोर्ट बन जाने से कंटेनर यहीं उतर रहे हैं।

     

  • मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में पीएम सूर्य घर योजना में यूपी ने और तेज की रफ्तार

    मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में पीएम सूर्य घर योजना में यूपी ने और तेज की रफ्तार

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत घरेलू रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश तेजी से देश में प्रथम स्थान की ओर बढ़ रहा है। अगस्त 2026 के प्रदर्शन ने प्रदेश की इस बढ़त को और मजबूत किया है। वर्तमान गति बनी रही तो शीघ्र ही उत्तर प्रदेश घरेलू रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में भारत में प्रथम स्थान हासिल कर सकता है। अगस्त 2026 तक उत्तर प्रदेश में 7,92,959 संचयी सोलर इंस्टॉलेशन हो चुके हैं। अगस्त माह में ही प्रदेश में 73,716 इंस्टॉलेशन किए गए। इस दौरान उत्तर प्रदेश की औसत दैनिक इंस्टॉलेशन गति 2,378 प्रतिदिन रही, जो देश के प्रमुख राज्यों में सबसे तेज गति में शामिल है।

    नंबर वन की रेस में यूपी

    संचयी इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश 7,92,959 इंस्टॉलेशन में दूसरे स्थान पर है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगस्त में उत्तर प्रदेश की औसत दैनिक गति 2,378 इंस्टॉलेशन रही। यानी उत्तर प्रदेश प्रतिदिन औसतन 780 इंस्टॉलेशन अधिक कर रहा है। यदि यही रफ्तार बनी रहती है, तो अक्टूबर 2026 के दूसरे सप्ताह के आसपास उत्तर प्रदेश घरेलू रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में देश का नंबर-1 राज्य बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करेगा।

    आंकड़े भी बता रहे उत्तर प्रदेश की रफ्तार

    संचयी इंस्टॉलेशन    7,92,959
    अगस्त 2026 इंस्टॉलेशन    73,716
    अगस्त औसत दैनिक गति    2,378/दिन
    अनुमानित ओवरटेक समय लगभग 41 दिन  ।

  • गुरुग्राम में मेट्रो यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत, सेक्टर 45 समेत 3 स्टेशन होंगे मल्टी मॉडल

    गुरुग्राम में मेट्रो यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत, सेक्टर 45 समेत 3 स्टेशन होंगे मल्टी मॉडल

    चंडीगढ़
     गुरुग्राम में मेट्रो का विस्तार किया जा रहा है। नए रूट के तीन स्टेशन को मल्टी मॉडल बनाने की तैयारी कर ली गई है। सेक्टर 45, यूनीटेक साइबर पार्क तथा सेक्टर 72-ए मेट्रो स्टेशनों को मल्टी मॉडल बनाने के लिए चयन किया गया है।

    इन स्टेशनों के आसपास बहुमंजिला इमारतें हैं, जिनमें खेल, कारपोरेट कार्यालय तथा अन्य संस्थानों में हजारों की संख्या में लोग काम करते हैं। यहां पर स्काईवाक बनाए जाने से लोग सीधे कार्यालय से स्टेशन आ जा सकेंगे।

    इन स्टेशनों पर बस बे, आटो पिक एंड ड्राप पाइंट, फुटपाथ की भी सुविधा होगी। जिससे सड़क पर जाम की स्थिति नहीं होगी। इस सिलसिले में दो दिन पहले जीएमडीए के अतिरिक्त सीईओ विश्वजीत चौधरी की अध्यक्षता में बैठक हुई थी, जिसमें गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) की ओर से बनाई गई योजना पर चर्चा हुई थी। जीएमडीए नगर निगम तथा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से आपत्ति तथा सुझाव लेकर योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    बैठक में गुरुग्राम नगर निगम के योजनाकार की ओर से सुझाव दिया गया था कि सेक्टर 45, यूनीटेक साइबर पार्क को मेट्रो स्टेशन से स्काईवाक से जोड़ा जा सकता है। साइबर पार्क में हजारों की संख्या में कर्मचारी काम करते हैं।

    स्काईवाक बनने से लोगों को सड़क पर नहीं आना पड़ेगा और वह साइबर पार्क से सीधे स्टेशन पहुंच आ सकेंगे, जिससे पीक आवर्स में सड़क पर ट्रैफिक भी कम होगा और सुविधा मिलने से लोग निजी वाहन का उपयोग भी कम करेंगे।

    इसी तरह सेक्टर 72-ए मेट्रो स्टेशन के पास सेक्टर 33 और 34 में गुड़गांव टेक्नालॉजी पार्क लिमिटेड है। इसके साथ की इंडस्ट्री कारीडोर है। सेक्टर 34 में नगर निगम और जीएमडीए के कार्यालय तथा अन्य संस्थान हैं। स्काईवाक बनने से यहां पर काम करने वाले हजारों लोगों को लाभ मिलेगा।

  • काशी में अपराधियों पर तीसरी नजर का शिकंजा, कैमरों ने सुलझाईं हत्या और ढाई करोड़ की चोरी की गुत्थी

    काशी में अपराधियों पर तीसरी नजर का शिकंजा, कैमरों ने सुलझाईं हत्या और ढाई करोड़ की चोरी की गुत्थी

     वाराणसी
     स्मार्ट सिटी वाराणसी में अपराधियों के लिए कहर बन रही तीसरी नजर।अनजाने में भी अपराधी ने शहर की दहलीज लांघी तो वाहनों के नंबर प्लेट व चेहरे पहचाने वाले कैमरे अपना काम कर गुजरेंगे। पुलिस के लिए चेहरे व वाहनों के नंबर प्लेट ही अपराधियों के बाहें मरोड़ने के लिए पर्याप्त साबित होते हैं।

    आंकड़ों के आइने में दो वर्षों में 671 पर्यटकों के विभिन्न गाड़ियों में छूटे उनके सामान ढूढ़ने और 99 गुमशुदा को अपनों से मिलाने स्पष्ट है कि काशी में तीसरी नजर (त्रिनेत्र कमांड सेंटर) की निगाहें सबके ऊपर हैं, जो शरीफों को संतुष्ट दे रहीं तो अपराधियों पर कहर बरपा रहीं हैं।

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    गाजीपुर के होटल मालिक की हत्या, काशी के एएनपीआर कैमरों ने दिए सुराग
    गाजीपुर में बिंदु होटल मालिक के बेटे को कटरा गैंग के बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। बदमाश वारदात के बाद वाराणसी की ओर भागे। वाराणसी में बदमाशों ही एंट्री के साथ ही उनका डिजीटल पीछा शुरू हो गया। विशेषज्ञों ने कैमरों के फुटेजे का विश्लेषण किया तो एएनपीआर (आटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे की सहायता से वाहन का नंबर प्लेट भी ट्रेस कर लिया गया।वाहन नंबर का सुराग मिलते ही पुलिस के लिए मर्डर मिस्ट्री का सुलझाना आसान हो गया।

    अपाचे बाइक की पहचान से खुली ढाई करोड़ चोरी
    बीते तीन जून को शिवपुर (वाराणसी) में लगभग ढाई करोड़ की चोरी हुई। पुलिस जांच में जुटी तो शिवपुर, रामेश्वरम मोड़, अकथा, पहाड़िया सहित विभिन्न स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का गहन विश्लेषण करने पर अपाचे बाइक सवार तीन संदिग्ध युवक दिख गए। अलग-अलग कैमरों की फुटेज को जोड़कर संदिग्धों की गतिविधि ट्रैक की गई, उनकी पहचान और लोकेशन मिल गई।इसका असर हुआ कि चोरी गए एक-एक जेवरात मिल गए।

    आधुनिक कैमरे और क्राइम कंट्रोल में उनके कार्य
        एएनपीआरए कैमरा : वाहन की नंबर प्लेट की पहचान करने तथा नियम उल्लंघन करने वाले वाहनों की जानकारी प्राप्त करने में सक्षम।
        आरएलवीडी कैमरा : रेड लाइट उल्लंघन पर नजर रखने में सक्षम।
        फिक्स सीसीटीवी कैमरा : सामान्य निगरानी में सक्षम।
        पीटीजेड कैमरा : भीड़ नियंत्रण को दूर तक चारो तरफ निगरानी तथा ज़ूम करके एक-एक गतिविधि दिखाने में सक्षम।
        एफआरएस कैमरा : चेहरे को पहचानने में सक्षम।

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    पूरे ज‍िले में
    2422 कैमरों की निगाहों से पूरे शहर को देखता त्रिनेत्र भवन।
    इनके जिम्मे है, त्रिनेत्र भवन की जिम्मेदारी
        सब इंस्पेक्टर राजेश सिंह (प्रभारी)
        हेड कांस्टेबल करन कुमार
        कांस्टेबल उपेंद्र पासवान
        ओमप्रकाश शाह
        कांस्टेबल सतीश यादव

    संसाधन के साथ-साथ हमारी पुलिस टीम की सक्रियता और रुचि के कारण हम बेहतर कर पा रहे हैं। पर्यटकों के खोए लाखों के सामान जब हम ढूढ़कर कुछ घंटे में लौटाते हैं, तो काशी की कमिश्नरेट पुलिस की साख पूरे देख में बढ़ती है। इसी तरह वाराणसी में क्राइम कंट्रोल करने संग हम आस-पड़ोस में हो रही अपराधिक घटनाओं के राजफाश में भी मददगार बन रहे हैं।
    वैभव बांगर, एडीसीपी काशी जोन।

  • ई-चालान पर लगेगा ब्रेक! 12 सितंबर की लोक अदालत में मिलेगा एकमुश्त समाधान और जुर्माने में छूट

    ई-चालान पर लगेगा ब्रेक! 12 सितंबर की लोक अदालत में मिलेगा एकमुश्त समाधान और जुर्माने में छूट

     मुजफ्फरपुर
    वाहन चालकों के लंबित ई-चालानों के निपटारे के लिए 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat 2026) का आयोजन होगा। 'एकमुश्त समाधान योजना 2026' के तहत जुर्माने की राशि में छूट का लाभ मिलेगा।

    इसको लेकर राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन ने पत्र जारी किया है। टोल प्लाजा से कटे ई-चालानों के लिए कहा गया है कि जिस जिले में टोल प्लाजा है, उसी जिले में उससे जुड़े लंबित चालानों का निपटारा होगा। लोक अदालत से पहले प्री-रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है।

    जिला विधिक सेवा प्राधिकार में पांच सितंबर से परिवहन व यातायात पुलिस के दो-दो काउंटर बनाए जाएंगे। यहां चालान की छाया प्रति व अन्य कागजात जमा करना होगा। वाहन मालिकों को टोकन दिया जाएगा। परिवहन-यातायात पुलिस जुर्माने के चालान का वेरिफिकेशन लोक अदालत से पहले ही करेगी।

    इससे लोक अदालत में वाहन मालिकों को जुर्माने की राशि जमा करने में अधिक समय नहीं लगेगा। साथ ही तेजी से मामले का निपटारा होगा। लोक अदालत में 31 मई 2026 से पूर्व कटे ई-चालान का ही समझौते के तहत निपटारा होगा।

    जिला परिवहन पदाधिकारी प्रियंका सिन्हा ने कहा कि आदेशानुसार मामले का निपटारा होगा। वाहन मालिकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। प्राधिकार व विभाग के निर्देशों का शत प्रतिशत पालन होगा। लोक अदालत में जुर्माने से राहत के लिए टोकन के साथ चालान की छाया प्रति, आधार कार्ड, आरसी आदि देना होगा।

    परिवहन विभाग करेगा 19 हजार 691 चालान का निपटारा:
    राष्ट्रीय लोक अदालत में परिवहन विभाग 19 हजार 691 चालान का समझौते के तहत निपटारा करेगा। इससे करीब 28.46 करोड़ रुपये की वसूली होगी। परिवहन विभाग द्वारा 2019 से मई 2026 तक 37,515 चालान किए गए। 56.15 करोड़ जुर्माना किया गया।

    इसमें से अब तक 17,824 वाहन मालिकों ने चालानों की राशि जमा की। इससे विभाग को 27.69 करोड़ रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई। जबकि अब भी 19,691 चालान लंबित हैं।

     

  • योगमाया और केशवदेव मंदिर में भी किया दर्शन-पूजन, परिसर में विधि- विधान से किया गोपूजन

    योगमाया और केशवदेव मंदिर में भी किया दर्शन-पूजन, परिसर में विधि- विधान से किया गोपूजन

    मथुरा

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने ब्रज प्रवास के दूसरे दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर शुक्रवार सुबह श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने पूरे विधि-विधान व आस्था के साथ मुख्य गर्भगृह में विराजमान 'लाला' (बाल कृष्ण) के दर्शन और विशेष पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री के रूप में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का यह उनका 20वां दर्शन रहा। मंदिर परिसर में आगमन पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया।

    चांदी से सजे गर्भगृह की अद्भुत छटा निहारते रहे सीएम

    जन्माष्टमी के इस विशेष और दिव्य पर्व पर जन्मभूमि के मुख्य गर्भगृह की दीवारों को चांदी की परत लगाकर बेहद अलौकिक रूप से सजाया गया था। मुख्यमंत्री योगी काफी देर तक चांदी से सजे गर्भगृह की इस अद्भुत छटा और लाला के मनमोहक स्वरूप को भक्तिभाव से निहारते रहे। मुख्य गर्भगृह में दर्शन-पूजन के बाद सीएम ने परिसर में ही स्थित योगमाया मंदिर, केशवदेव मंदिर और भागवत भवन में भी जाकर दर्शन-पूजन किया और देश-प्रदेश की सुख-शांति व समृद्धि की मंगल कामना की।

    गोपूजन कर श्रद्धालुओं पर की पुष्प वर्षा

    मंदिर में पूजन-अर्चन से पहले मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में गोमाता का विधिवत पूजन किया। इस पावन पर्व पर जन्मभूमि परिसर में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार करते हुए सीएम योगी ने उन पर देर तक पुष्प वर्षा की और सभी देशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने जन्मभूमि परिसर में अपनी मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति दे रहे उज्जैन से आए कलाकारों के मध्य पहुंचकर उनका उत्साहवर्धन किया और साथ में फोटो भी खिंचवाईं। सीएम योगी करीब 30 मिनट तक जन्मभूमि परिसर में रहे।

  • बैंक खाते में पड़ा पैसा हो सकता है लावारिस, पंजाब में 82.68 लाख खातों में ₹3,111 करोड़ जमा

    बैंक खाते में पड़ा पैसा हो सकता है लावारिस, पंजाब में 82.68 लाख खातों में ₹3,111 करोड़ जमा

    चंडीगढ़ 

    पंजाब के 82.68 लाख बैंक खातों में 3111 करोड़ रुपये ऐसी रकम है, जिसके असली हकदार या तो खातों से दूर हो चुके हैं या फिर उन्हें अपनी जमा राशि की याद ही नहीं रही। लंबे समय तक लेन-देन नहीं होने के कारण इनमें से बड़ी संख्या में खाते निष्क्रिय हो गए और नियमों के तहत बैंकों ने जमा रकम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के डिपॉजिटर एंड अवेयरनेस फंड (डीईए) में ट्रांसफर कर दी गई। 

    हैरानी की बात यह है कि बैंकों की तमाम कोशिशों के बावजूद महज 0.48 फीसदी खाताधारकों तक ही पहुंच बनाई जा सकी और उनकी रकम लौटाई गई। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की हालिया बैठक में पेश रिपोर्ट ने बैंक खातों में जमा इस लावारिस धन की तस्वीर सामने रखी है।

    रिपोर्ट के अनुसार बैंकों की तरफ से विशेष अभियान के तहत 39,918 बैंक खातों में 130 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। पंजाब सरकार ने ओडिशा की तर्ज पर सिंगल नोडल अकाउंट तैयार किया है ताकि खातों में जमा राशि के भुगतान में किसी भी तरह की देरी न हो लेकिन बावजूद इसके अधिकतर बैंक इस खाते में राशि जमा नहीं करवा रहे हैं। जानकारी के अनुसार अधिकतर खाते ऐसी परिस्थितियों में निष्क्रिय हुए जब खाताधारक स्थानांतरित हो गए या फिर उनका बैंक बदल गया। समिति के अनुसार बैंक खाताधारकों को ढूंढ रहे हैं जिसके लिए लगातार बैंकों को उचित दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

    इस तरह निष्क्रिय हो जाता है खाता
    जब किसी खाते में दो साल से ज्यादा कोई लेनदेन या गतिविधि नहीं होती है तो उसे निष्क्रिय कर दिया जाता है। वहीं अगर खाता 10 साल से ज्यादा समय तक निष्क्रिय रहता है तो बैंक उस खाते की राशि को आरबीआई के विशेष फंड में जमा करवा देता है।

    2.49 लाख खाते निष्क्रिय 
    रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न बैंकों में इस समय 2.49 लाख बचत खाते निष्क्रिय हैं जिनमें करोड़ों रुपये जमा हैं। इसी तरह प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खुले 33.50 लाख खाते निष्क्रिय हो गए हैं और इनमें 435 करोड़ रुपये जमा हैं। इनमें ज्यादातर ऐसे खाते शामिल हैं जिन्हें लोगों ने न तो अपडेट करवाया और न ही पिछले काफी समय से लेन-देन किया है जिस कारण यह निष्क्रिय हो रहे हैं।

    निष्क्रिय होने से बचाने के लिए यह सावधानी जरूरी 

        अपने खाते में कुछ महीनों में एक बार लेन-देन जरूर करें।
        नियमित रूप से अपने सभी बैंक खातों की समीक्षा करें, उपयोग में नहीं आने वाले खाते बंद कर दें
        बैंकों में संपर्क के लिए अपनी नवीनतम जानकारी अपडेट करवाएं।
        पासबुक, नेट बैंकिंग से समय-समय पर खाता जांचें
        बैंक के किसी भी अलर्ट और नोटिस को अनदेखा न करें।