Category: राज्य

  • मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन के बाद सियासी हलचल, सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट

    मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन के बाद सियासी हलचल, सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट

     सहारनपुर/शामली

    सहारनपुर के कलेक्ट्रट परिसर में मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन को लेकर सपा सांसद इकरा हसन का हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। बता दें कि शनिवार सुबह कलेक्ट्रट परिसर में मौजूद मस्जिद को प्रशासन ने ढहा दिया है।

    इकरा हसन ने लगाया हाउस अरेस्ट का आरोप
    मस्जिद प्रकरण को लेकर कैराना सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उनके आवास पर रात में भारी पुलिस बल तैनात कर उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया गया। इकरा हसन ने इसे हाउस अरेस्ट बताते हुए सवाल उठाया कि क्या जनता के मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना अब अपराध हो गया है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि को रोककर जनता की आवाज दबाई नहीं जा सकती।

    यूपी के सहारनपुर में शनिवार सुबह डीएम परिसर में बनी मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया. प्रशासन के मुताबिक, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध पाया था. मस्जिद कमेटी की पहली अपील भी खारिज हो चुकी थी. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और आरआरएफ की तैनाती रही. वहीं, इस मामले को लेकर सहारनपुर जाने की कोशिश कर रहीं कैराना से सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया। 

    सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था. शनिवार सुबह प्रशासन ने इस निर्माण को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी. मौके पर बुलडोजर लगाया गया और पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा। 

    प्रशासन का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में सुनवाई के दौरान मस्जिद के निर्माण को अवैध पाया गया था. अधिकारियों के मुताबिक, यह निर्माण सरकारी जमीन पर था. इस आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने पहली अपील की थी, लेकिन वहां भी अपील खारिज कर दी गई और सिटी मजिस्ट्रेट के मूल आदेश को बरकरार रखा गया। 

    कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की अपील की थी खारिज
    डिस्ट्रिक्ट जज की कोर्ट ने 4 सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की अपील खारिज कर दी थी। जिला जज की कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पेश किए गए सबूतों की जांच करने के बाद मस्जिद को अवैध घोषित करने वाले सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा।

    सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मस्जिद गिराने का दिया था आदेश
    सिटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने 17 जुलाई को मस्जिद को गिराने का आदेश दिया था और सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे और उसके गलत इस्तेमाल के लिए वहां मौजूद लोगों पर लगभग 6.41 करोड़ रुपये का मुआवजा लगाया था।

    रात से ही पुलिस की तैनाती, अफवाहों पर नजर
    कार्रवाई से पहले ही सहारनपुर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी. प्रशासन ने बताया कि त्योहारों को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल के साथ पांच कंपनी पीएसी, आरआरएफ की तैनाती की गई है. मिश्रित आबादी वाले इलाकों में लगातार फुट पेट्रोलिंग और फ्लैग मार्च किया जा रहा है। 

    सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा कि प्रशासन ने कार्रवाई से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की हैं. उनके मुताबिक नोटिस और अपील समेत निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। 

    डीआईजी ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को भी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति इस मामले को लेकर अफवाह फैलाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. ध्वस्तीकरण के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास सुरक्षा का खास इंतजाम किया गया. बुलडोजर से मस्जिद के निर्माण को गिराने की कार्रवाई जारी रही और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर तैनात रहे। 

    सहारनपुर जाने से पहले इकरा हसन हाउस अरेस्ट
    उधर, इस कार्रवाई के बीच कैराना से सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया. वह सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं. इसी दौरान उनके आवास पर बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंचा और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया गया। 

    हाउस अरेस्ट के बाद इकरा हसन ने कहा कि वह सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद मामले को लेकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं और इलाके की जनता की आवाज प्रशासन के सामने रखना चाहती थीं. उनका आरोप है कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए घर पर ही नजरबंद कर दिया गया। 

    सांसद ने सवाल उठाया कि क्या किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि का अपनी जनता से जुड़े मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना भी अब अपराध हो गया है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता की आवाज उठाने के लिए चुने जाते हैं और उन्हें रोककर उस आवाज को दबाया नहीं जा सकता. फिलहाल सहारनपुर में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी है. कलेक्ट्रेट परिसर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के साथ-साथ इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ाई गई है। 

     

  • UP आउटसोर्स सेवा निगम की नई व्यवस्था: पारदर्शी भर्ती, पूरा वेतन और सेवा सुरक्षा के लिए 4-स्तरीय निगरानी

    UP आउटसोर्स सेवा निगम की नई व्यवस्था: पारदर्शी भर्ती, पूरा वेतन और सेवा सुरक्षा के लिए 4-स्तरीय निगरानी

    लखनऊ
    आउटसोर्स कार्मिकों के लिए लागू की गई नई व्यवस्था में मौजूदा पारिश्रमिक को सुरक्षित रखने के साथ ही एजेंसियों की मनमानी पर भी अंकुश लगाया गया है। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीसीओएस) ने चार श्रेणियों में कार्मिकों को बांटकर न्यूनतम पारिश्रमिक तय किया है। यदि किसी विभाग में किसी कार्मिक को इससे अधिक पारिश्रमिक मिल रहा है तो उसे नई व्यवस्था लागू होने के बाद घटाया नहीं जाएगा, बल्कि मौजूदा पारिश्रमिक ही मिलता रहेगा।

    निगम आउटसोर्सिंग व्यवस्था को महज एजेंसी के जरिए कर्मचारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया के बजाय नियामक व्यवस्था के रूप में काम करेगा। यह एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण रखेगा और कार्मिकों को बिना किसी कटौती के पूरा पारिश्रमिक दिलाने की व्यवस्था करेगा। साथ ही सभी विभागों, संस्थाओं और स्थानीय निकायों को आवश्यकता के अनुसार मानव संसाधन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी निगम की ही होगी।

    निगम ने आउटसोर्स कार्मिकों के लिए जो चार श्रेणियां तय की हैं उनमें श्रेणी-1 (हाईली स्किल्ड) के लिए न्यूनतम 40 हजार रुपये, श्रेणी-2 (स्किल्ड/टेक्निकल) के लिए 25 हजार, श्रेणी-3 (सेमी-स्किल्ड) के लिए 22 हजार और श्रेणी-4 (सपोर्ट स्टाफ) के लिए 20 हजार रुपये का न्यूनतम पारिश्रमिक प्रस्तावित है। मसलन, चिकित्सक, अभियंता और वास्तुविद श्रेणी-1 में, जबकि नर्स, फार्मासिस्ट, डाटा प्रोसेसिंग और ड्राइविंग से जुड़े पद श्रेणी-2 में रखे गए हैं।

    आउटसोर्स कार्मिकों की भर्ती में भी पारदर्शिता लाने का प्रविधान है। विभाग पहले अपनी मांग और आरक्षण नियमों के साथ निगम को भेजेगा। इसके बाद सेवायोजन पोर्टल से छंटनी की जाएगी, फिर 100 अंकों की चयन प्रणाली के आधार पर चयन होगा। अंत में कार्मिक को यूनिक कोड व आइडी कार्ड दिया जाएगा। 50 अंक लिखित परीक्षा, 25 अंक अधिमानी अर्हता, 15 अंक स्थानीय निवासी और 10 अंक विशेष महिला आरक्षण के लिए रखे गए हैं।

    आउटसोर्स कर्मियों की सेवा सुरक्षा को लेकर भी स्पष्ट प्रविधान हैं। व्यवस्था की निगरानी के लिए राज्य/निदेशालय, मंडल, जिला और स्थानीय निकाय स्तर पर चार-स्तरीय समितियां बनाई जाएंगी। ये समितियां कार्मिकों की अर्हता का सत्यापन कर पात्र सूची आउटसोर्स एजेंसी को भेजेंगी। इससे भर्ती, तैनाती और एजेंसी के स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों पर निगरानी का तंत्र मजबूत होगा।

    नियमित सरकारी नौकरी का विकल्प नहीं
    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है आउटसोर्स व्यवस्था नियमित सरकारी सेवाओं का विकल्प नहीं है। आउटसोर्स कर्मियों की सेवाएं सृजित/नियमित पदों के विरुद्ध नहीं ली जाएंगी और इसे नियमित रोजगार का दावा नहीं माना जाएगा।

    विभागों को आउटसोर्स मद में पर्याप्त बजट का प्रविधान भी करना होगा। निगम की स्थापित व्यवस्था में किसी भी प्रकार का बदलाव या संशोधन मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद ही किया जा सकेगा।

  • CM भजनलाल बनाम लोकल कनेक्ट: राजस्थान निकाय चुनाव में BJP की स्टार पावर और कांग्रेस की रणनीति आमने-सामने

    CM भजनलाल बनाम लोकल कनेक्ट: राजस्थान निकाय चुनाव में BJP की स्टार पावर और कांग्रेस की रणनीति आमने-सामने

    जयपुर
    राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव 2026 की तारीखें नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। इन्हीं हलचलों के बीच अब बड़ी खबर ये है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने सबसे बड़े चेहरे के तौर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को चुनावी फ्रंटलाइन पर उतार रही है। 'पार्षद चुनाव' में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में वोट अपील के लिए मुख्यमंत्री के उतरने से प्रचार अभियान का पूरी तरह से हाई-वोल्टेज मोड पर आना तय है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस बार स्टेट या सेंट्रल लेवल के बड़े नेताओं के बजाय पूरी तरह से स्थानीय नेतृत्व और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं पर दांव लगाने की साइलेंट स्ट्रेटजी अपनाई है।

    BJP जहां मुख्यमंत्री के 10 मेगा रोड शो और केंद्रीय मंत्रियों के सघन डोर-टू-डोर कैम्पेन के जरिए हर एक बूथ पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस स्थानीय मुद्दों, मोहल्ला-लेवल कनेक्ट और वार्ड प्रत्याशियों की व्यक्तिगत साख के दम पर चुनाव जीतने का दावा कर रही है। राजस्थान के इस सियासी परिदृश्य में यह मुकाबला इस बात का बड़ा टेस्ट है कि क्या भाजपा की मुख्यमंत्री सहित केंद्रीय नेतृत्व की हाई-प्रोफ़ाइल ब्रैंडिंग, कांग्रेस की ग्राउंड-लेवल पर स्थानीय  नेटवर्क पर भारी पड़ पाएगी या नहीं?
    BJP ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कैम्पेन को इस तरह डिजाइन किया है कि राज्य के सबसे महत्वपूर्ण शहरों को कवर किया जा सके। फाइनल फेज के प्रचार में CM भजनलाल शर्मा सीधे voters से कनेक्ट करेंगे और पार्टी प्रत्याशियों के लिए समर्थन मांगेंगे।

    शनिवार (उदयपुर एवं भीलवाड़ा): कैम्पेन की शुरुआत मेवाड़ अंचल से हो रही है। CM भजनलाल शर्मा उदयपुर और भीलवाड़ा में भव्य रोड शो करेंगे, जहां मेवाड़ के शहरी वोटों को एकजुट करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा

    6 सितंबर (बीकानेर, अजमेर एवं जोधपुर): एक ही दिन में तीन बड़े जिलों को कवर करने का टारगेट रखा गया है। मारवाड़ और पश्चिमी राजस्थान के इन प्रमुख शहरों में रोड शो के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा जाएगा।

    7 सितंबर (भरतपुर एवं अलवर): पूर्वी राजस्थान और मत्स्य क्षेत्र के सबसे अहम केंद्रों भरतपुर और अलवर में CM के रोड शो प्रस्तावित हैं। राजनीतिक दृष्टिकोण से यह क्षेत्र काफी संवेदनशील माना जाता है।

    8 सितंबर (पाली एवं कोटा): हाड़ौती क्षेत्र के कोचिंग हब कोटा और औद्योगिक शहर पाली में कैम्पेन को बनाए रखने के लिए रोड शो आयोजित किए जाएंगे।

    9 सितंबर (जयपुर): Election campaign के आखिरी दिन राजधानी जयपुर में मेगा रोड शो होगा। जयपुर नगर निगम के अलग-अलग वार्डों में CM का यह शो पूरे प्रचार अभियान का भव्य समापन होगा।

    रोड शोके साथ सांगठनिक बैठकें
    BJP की इस आक्रामक रणनीति में सिर्फ रोड शो और जनसभाएं ही शामिल नहीं हैं, बल्कि संगठन को पूरी तरह एक्टिव करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। रोड शो के साथ-साथ मुख्यमंत्री और वरिष्ठ प्रदेश नेता हर जिले में अहम सांगठनिक बैठकें भी लेंगे।

    इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य बूथ कार्यकर्ताओं के साथ डायरेक्ट संवाद कायम करना और स्थानीय स्तर पर यदि कोई अंदरूनी गुटबाजी या कमजोरी है, तो उसे मौके पर ही दूर करना है। पार्टी के Central Election In-charge, Co-incharge और राष्ट्रीय पदाधिकारी भी इन क्षेत्रों में लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। केंद्रीय और राज्य सरकार के मंत्रियों को उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों और स्थानीय मुद्दों के हिसाब से विशिष्ट वार्डों और नगर निगमों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    कांग्रेस का 'लोकल फॉर्मूला': बड़ा चेहरा नहीं, लोकल कैंडिडेट ही हीरो
    जहां BJP स्टार प्रचारकों की फौज के साथ मैदान में है, वहीं कांग्रेस ने इस बार अपना पूरा फोकस स्थानीय नेतृत्व और क्षेत्रीय नेताओं पर शिफ्ट कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Chief) गोविंद सिंह डोटासरा के अनुसार, नगरीय निकाय चुनाव सफाई, स्ट्रीट लाइट्स, स्थानीय सड़कों और वार्ड विकास जैसे local issues पर लड़े जाते हैं, इसलिए इसमें स्थानीय नेतृत्व का ही एक्टिव होना सबसे ज्यादा जरूरी है।

    कांग्रेस की इस रणनीति के पीछे मुख्य बिंदु:
    रीजनल ओनरशिप: स्थानीय विधायकों, पूर्व विधायकों और वार्ड स्तर के नेताओं को पूरी छूट दी गई है कि वे अपने हिसाब से campaign डिजाइन करें।

    डोर-टू-डोर माइक्रो कनेक्ट: बड़े तामझाम के बजाय कांग्रेस प्रत्याशी वार्डों में घर-घर जाकर स्थानीय समस्याओं को उठा रहे हैं।

    नो सेंट्रल इंटरवेंशन: जब तक स्थानीय unit विशेष मांग न करे, तब तक जयपुर या दिल्ली से किसी बड़े नेता को प्रचार में नहीं उतारा जाएगा।

    स्टार पावर vs वार्ड-लेवल कनेक्ट
    राजस्थान का शहरी वोटर हमेशा से राष्ट्रीय मुद्दों और स्थानीय विकास के बीच संतुलन बनाकर मतदान करता आया है। निकाय चुनाव 2026 में दो अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराएं आमने-सामने हैं:

    BJP की ताकत: Chief Minister का सीधा जुड़ाव, केंद्रीय मंत्रियों का प्रभाव और मजबूत संगठन जो हर बूथ तक वोटर को रीच करती है।

    कांग्रेस की ताकत: वार्ड स्तर की नाराजगी को भुनाना, local issues को हाइलाइट करना और प्रत्याशी की चौबीसों घंटे उपलब्धता पर जोर देना।

    सितंबर 2026 में होने वाले इन चुनावों के नतीजे यह तय करेंगे कि राजस्थान के शहरी मतदाताओं पर CM भजनलाल शर्मा के रोड शो का कितना असर हुआ है और क्या कांग्रेस का 'शांत एवं स्थानीय' फॉर्मूला राजस्थान के नगर निगमों पर अपना कब्जा जमाने में कामयाब होता है या नहीं।

     

  • बिहार में CBI का दायरा हुआ सीमित! सरकारी संस्थानों की जांच से पहले लेनी होगी अनुमति

    बिहार में CBI का दायरा हुआ सीमित! सरकारी संस्थानों की जांच से पहले लेनी होगी अनुमति

    पटना
    बिहार सरकार के लोकसेवकों या राज्य सरकार के स्वामित्व वाले किसी संस्थान की सीबीआई जांच को लेकर सम्राट चौधरी सरकार ने नया गाइडलाइन जारी किया है। इनमें आपराधिक जांच से पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को बिहार सरकार से अनुमति लेनी होगी। सरकार के नये नियम के मुताबिक सीबीआई से मिले प्रस्ताव के आधार पर राज्य सरकार हर मामले पर अलग-अलग विचार कर जांच की शक्ति देने पर निर्णय लेगी।

    बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने प्रधान सचिव कुंदन कुमार के हस्ताक्षर से इससे संबंधित निर्णय की अधिसूचना जारी कर दी गई है। हालांकि, राज्य की सीमा में संचालित भारत सरकार या भारत सरकार के अधीनस्थ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मियों और निजी व्यक्तियों के संबंध में अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।

    नई अधिसूचना के मुताबिक, इस विषय पर पूर्व की सभी अधिसूचनाओं को हटा दिया गया है। केंद्र सरकार या उसके अधीनस्थ कर्मियों और निजी व्यक्तियों द्वारा किये जाने अपराध के मामले में जांच को लेकर सीबीआई को दी गयी शक्तियां व उनके अधिकार क्षेत्र में विस्तार पर सहमति दी गयी है। सीबीआई भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), भारतीय साक्ष्य अधिनियम और आईटी एक्ट से जुड़े अपराध के साथ ही साइबर अपराध एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े कांडों में जांच कर सकेगी।

    लेकिन, जब यह अपराध बिहार सरकार के कार्य से संबंधित नियुक्त लोकसेवकों, बिहार सरकार द्वारा नियंत्रित कोई निगम, कंपनी या बैंक, बिहार सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त कर चुके संस्थान द्वारा किया जाता है तो ऐसे मामलों में सीबीआई को जांच से पहले बिहार सरकार से अनुमति लेनी होगी। इसके लिए सीबीआई को प्रस्ताव भेजना होगा। समीक्षा के बाद सरकार से अनुमति मिलने पर ही सीबीआई कोई ऐक्शन ले पाएगी। सरकार ऐसे मामलों में केस टू केस अलग-अलग फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है।

    सीबीआई भारत सरकार की सर्वोच्च और सर्वाधिक विश्वसनीय मानी जाने वाली जांच एजेंसी है। इसकी स्थापना 1 अप्रैल 1963 में गृह मंत्रालय के प्रस्ताव पर की गयी थी। सीबीआई का संचालन गृह मंत्रालय द्वारा ही किया जाता है। सीबीआई का मुख्यालय दिल्ली में है। राज्यों के मुख्यालय में इसकी इकाई होती है। यह एजेंसी भ्रष्टाचार या अपराध के गंभीर व सनसनीखेज मामलों में कार्रवाई करती है। कई बार सुप्रीम कोर्ट या राज्यों के हाईकोर्ट के आदेश पर भी मामलों की सीबीआई जांच होती है।

  • पंजाब के कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, DA में 18% बढ़ोतरी; 85 हजार कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

    पंजाब के कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, DA में 18% बढ़ोतरी; 85 हजार कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

    चंडीगढ़

    पंजाब सरकार ने राज्य के कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ते (डीए) को लेकर एक अहम घोषणा की है। पंजाब सरकार के मंत्री अमन अरोड़ा द्वारा किए गए इस एलान से राज्य के हजारों कर्मचारियों के वेतन में सीधा इजाफा होगा।

    डीए में भारी बढ़ोतरी
    17 जुलाई 2020 के बाद ड्यूटी जॉइन करने वाले सभी कर्मचारियों को अब 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) दिया जाएगा। वर्तमान में इन कर्मचारियों को केवल 42 प्रतिशत डीए मिल रहा था, जिसमें अब सीधे 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।

    किन 85 हजार कर्मियों को मिलेगा 60%  DA/ महंगाई भत्ता 
    पंजाब कैबिनेट सब-कमेटी ने साल 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर DA देने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे मान सरकार मंजूरी देने वाली है. कैबिनेट मंत्री ने बताया कि 17 जुलाई 2020 के बाद जितने कर्मी बहाल हुए हैं उन्‍हें केंद्र के पे-स्‍केल पर बहाल किया गया था, लेकिन उन्‍हें राज्‍य के मुताबिक, 42% महंगाई भत्ता ही दिया जा रहा था. इनकी संख्‍या राज्‍य में करीब 85 हजार है. अब इन्‍हें मान सरकार, केंद्र के बराबर यानी 60 फीसदी महंगाई भत्ता देने जा रही है। 

    केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर सैलरी मिलेगी 
    कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने बताया कि पंजाब सरकार ने 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए करीब 85,000 नए कर्मचारियों को राहत देते हुए उनके महंगाई भत्ते (DA) को 42% से बढ़ाकर 60% करने की सिफारिश की गई है. इस संबंध में कैबिनेट सब-कमेट्री की मीटिंग में फैसला लिया गया है ताकि इन कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर सैलरी दी जा सके। 

    अमन अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि पिछली सरकार ने 17 जुलाई 2020 को फैसला लिया था कि उसके बाद भर्ती होने वाले कर्मचारियों को पंजाब के वेतनमान की बजाय केंद्रीय वेतनमान पर रखा जाएगा. मौजूदा आम आदमी पार्टी की सरकार का रुख बिल्कुल साफ है कि नए कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में कम सैलरी नहीं मिलनी चाहिए। 

    मंजूरी के लिए मुख्‍यमंत्री के पास भेजी गई फाइल 
    उन्‍होंने बताया कि कैबिनेट सब-कमेट्री के इस अहम फैसले को अब मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान के पास भेज दिया गया है और उम्मीद है कि इस पर जल्द ही अंतिम मुहर लग जाएगी. मंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि अन्य राज्यों की सरकारों को भी अपने कर्मचारियों को पंजाब की तर्ज पर बेहतर वेतन देना चाहिए। 

    85,000 कर्मचारियों को सीधा लाभ
    सरकार के इस कदम से पंजाब के करीब 85,000 कर्मचारियों को फायदा होगा और उनके वेतन में अच्छी-खासी वृद्धि देखने को मिलेगी।

    केंद्रीय कर्मियों के बराबर मिलेगा हक
    मंत्री अमन अरोड़ा ने यह भी स्पष्ट किया है कि पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर वेतन और महंगाई भत्ता (डीए) देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। यह कदम कर्मचारियों के लिए एक बड़ी सौगात माना जा रहा है, जिससे आगामी त्योहारों से पहले उन्हें बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। 
     

     

  • CM योगी को देखते ही घिर गए बच्चे, चॉकलेट-खिलौने लेकर खुशी से झूम उठी ‘बच्चा पार्टी’

    CM योगी को देखते ही घिर गए बच्चे, चॉकलेट-खिलौने लेकर खुशी से झूम उठी ‘बच्चा पार्टी’

    गोरखपुर
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की अगली सुबह शनिवार को गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर परिसर में सुबह-सुबह सीएम योगी से अचानक हुई मुलाकात में बच्चा पार्टी की मौज हो गई। परिसर का राउंड लगाने निकले सीएम योगी को अचानक कुछ बच्चे दिखे तो वे वहीं रुक गए। सीएम ने बच्चों को बुलाया और उनसे बातचीत शुरू कर दी। बच्चे भी उन्हें घेरकर खडे़ हो गए। इसके बाद कुछ देर तक हंसी-ठिठोली और बातें होती रहीं। इसी दौरान सीएम योगी ने चॉकलेट मंगाई और एक-एक कर बच्चों को देनी शुरू कर दी। उन्होंने पूछ-पूछ कर सुनिश्चित किया कि सभी बच्चों को चॉकलेट मिल जाए। इस दौरान बहुत छोटे बच्चों को सीएम योगी ने खिलौने भी दिए। ऐसे ही एक छोटे से बच्चे को उन्होंने झुनझुना बजाकर दिखाया तो बच्चा खिलाखिला उठा। सीएम, मासूम को पास से झुनझुना दिखाया तो उसने खट से उनके हाथ से झुनझुना ले लिया।

    सीएम योगी जब कभी गोरखपुर में होते हैं तो सुबह-सुबह गोरखनाथ मंदिर का राउंड लगाने निकलते हैं। इस दौरान वह कुछ वक्त गोशाला में भी बिताते हैं। शनिवार की सुबह भी सीएम योगी अपनी परंपरागत दिनचर्या के अनुसार गोरखनाथ मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले थे। इसी दौरान बच्चों से उनकी भेंट हो गई। सुबह-सुबह सीएम योगी से बातें कर और उनसे चॉकलेट और खिलौने ले बच्चे खुशी और उत्साह से भर गए।

    सीएम योगी के पास हमेशा रहती हैं चॉकलेट और टॉफियां
    बच्चों को पता है कि सीएम योगी के पास हमेशा कुछ चॉकलेट और टॉफियां होती ही हैं। मुख्यमंत्री बनने के पहले से सीएम योगी जहां कहीं जाते हैं उनकी गाड़ी में चॉकलेट और टॉफियों का डिब्बा जरूर होता है। जहां कहीं बच्चे मिल गए वहां सीएम उनसे बातें, हंसी-ठिठोली करते और फिर चॉकलेट-टॉफियां बांटते दिखते हैं। सीएम योगी के इस अंदाज के चलते छोटे-छोटे बच्चों के बीच वे खासे लोकप्रिय हैं।

    गोरखनाथ मंदिर में धूमधाम से मनी जन्माष्टमी
    इसके पहले शुक्रवार की आधी रात को गोरखनाथ मंदिर में जन्माष्टमी धूमधाम से मनी। श्रीकृष्ण के प्राकट्य के बाद 'नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की' और ‘श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव’ की मंगल धुन, सोहर गीत और घंट-घड़ियाल की ध्वनि के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर उन्हें गोद में लेकर गर्भगृह से बाहर आए। सीएम योगी ने, प्रभु श्रीहरि के बाल स्वरूप ‘लड्डू गोपाल’ को फूलों से सजे पालने में बैठाकर श्रद्धाभाव से उन्हें झुलाया और आरती उतारी। प्रभु श्रीकृष्ण का प्राकट्य अनुष्ठान पूरा होने के बाद मंदिर की तरफ से श्रद्धालुओं के बीच फलाहार और प्रसाद बांटा गया।

    आज शिक्षकों को सम्मानित करेंगे सीएम
    सीएम योगी शिक्षक दिवस पर शनिवार को गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में 81 शिक्षकों को सम्मानित करेंगे। इनमें बेसिक के 61 और माध्यमिक के 15 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025 और माध्यमिक के पांच शिक्षकों को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जाएगा। समारोह को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह भी संबोधित करेंगे।

  • गंगा-कोसी समेत नदियां खतरे के निशान से ऊपर, पटना से भागलपुर तक बाढ़ का गंभीर संकट

    गंगा-कोसी समेत नदियां खतरे के निशान से ऊपर, पटना से भागलपुर तक बाढ़ का गंभीर संकट

    पटना  
    बिहार के 13 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार 52 प्रखंडों की 270 पंचायतों की करीब 28 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित है। हालांकि, आपदा प्रबंधन विभाग ने लगभग 8 लाख आबादी को ही बाढ़ से प्रभावित माना है। गंगा, गंडक, सोन, कोसी समेत अन्य नदियां उफान पर हैं। पटना, भोजपुर, सारण, बेगूसराय और वैशाली जिले में कई इलाके बाढ़ की चपेट में हैं। बक्सर, जहानाबाद, अरवल, रोहतास, नालंदा और कैमूर में भी गांवों और खेतों में पानी फैल गया है। उत्तर बिहार के दरभंगा, समस्तीपुर और पश्चिम चंपारण में बाढ़ का प्रकोप जारी है। 200 सड़कों पर आवागमन बाधित है। कई जगह नाव ही आवाजाही का सहारा बनी हुई है। हजारों एकड़ में धान समेत अन्य फसलें डूब गई हैं। भोजपुर और बेगूसराय में 120 स्कूलों को बंद कर दिया गया है। भागलपुर शहर में बाढ़ का पानी घुस गया है। सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ मंदिर में भी पानी फैल गया है।

    पटना सहित जिले के अन्य 14 स्थानों पर नदियों का पानी खतरे के निशान को पार कर गया है। इसमें केवल गंगा नदी ही 7 स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बाढ़ की भयावहता को देखते हुए 693 नावें चलाई जा रही हैं। साथ ही सामुदायिक किचन को भी शुरू कर दिया गया है। 7107 पॉलीथीन शीट का वितरण किया गया है।

    पटना, पश्चिमी चम्पारण एवं वैशाली जिले में 1764 ड्राई राशन पैकेट का वितरण किया गया है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने से पटना के 9 प्रखंडों में दो लाख 32 हजार से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।

    भोजपुर में 25 रोड और 60 स्कूल बंद
    भोजपुर जिले के 6 प्रखंडों की 45 पंचायतें बाढ़ से जलमग्न हैं। करीब दो लाख आबादी प्रभावित है। दो हजार एकड़ से अधिक में धान और करीब 500 एकड़ में भदई फसल एवं सब्जियां डूब गई हैं। 25 मुख्य एवं ग्रामीण सड़कों पर पानी के तेज बहाव के कारण आवागमन बंद है। 60 से अधिक स्कूल बंद किए गए हैं। 20 सामुदायिक रसोई में छह हजार से अधिक लोगों को भोजन दिया जा रहा है।

    छपरा में डेढ़ लाख आबादी प्रभावित
    सारण जिले के छपरा सदर, दिघवारा, रिविलगंज और सोनपुर की करीब 25 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। लगभग डेढ़ लाख आबादी पर बाढ़ का असर है। कई लोगों ने ऊंचे बांध और रिश्तेदारों के यहां शरण ली है। ग्रामीण सड़कों पर पानी आने से यातायात प्रभावित है। अकिलपुर-दिघवारा संपर्क भी बाधित है और कई जगह नाव से आवागमन हो रहा है। दो दर्जन से अधिक स्कूलों को दूसरे विद्यालयों से टैग किया गया है।

    बेगूसराय में भी 60 स्कूल बंद
    गंगा के बढ़ते जलस्तर से बेगूसराय के मटिहानी, साहेबपुर कमाल, बखरी और बलिया की 20 पंचायतों की करीब दो लाख आबादी प्रभावित है। प्रशासन 87 नावें चला रहा है। फिलहाल बड़े पैमाने पर विस्थापन नहीं हुआ है। जलभराव और आवागमन की परेशानी के कारण 60 से अधिक स्कूलों में पढ़ाई बंद है।

    वैशाली में हालात गंभीर
    वैशाली के छह प्रखंडों की 26 पंचायतें और हाजीपुर नगर परिषद के छह वार्ड प्रभावित हैं। राघोपुर की 12, सहदेई-देसरी की छह और बिदुपुर की चार सड़कों पर पानी चढ़ा है। यानी कम से कम 22 सड़कों पर आवागमन प्रभावित है। राघोपुर की कई सड़कों पर नाव चल रही है। गनियारी जाने वाली दो सड़कें डूब गई हैं। प्रभावित लोग गांधी सेतु के पुराने टोल प्लाजा सहित ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।

    बक्सर में फसलें बर्बाद
    इसी तरह बक्सर में गंगा खतरे के निशान से 19 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। चार अंचलों के कई गांवों में करीब दस हजार आबादी प्रभावित है। 1761 हेक्टेयर फसल बाढ़ की चपेट में है। दो प्राथमिक स्कूलों में पानी घुस गया है। प्रशासन ने 33 नाव और राहत सामग्री उपलब्ध कराई है।

    जहानाबाद शहर में आफत
    जहानाबाद में मोरहर, दरधा और बलदइया नदियों का पानी निचले इलाकों में फैल गया है। तीन प्रखंडों की 15 पंचायतें प्रभावित हैं। शहर की तीन सड़कों—हवाई अड्डा-एसएस कॉलेज रोड, सट्टी मोड़-जाफरगंज रोड और जहानाबाद-शकूराबाद मुख्य मार्ग पर पानी है। दो पुलों पर भी पानी चढ़ा है

    अरवल में पुनपुन की बाढ़
    अरवल में पुनपुन नदी के उफान से तीन प्रखंडों की 12 पंचायतों के बधार प्रभावित हैं और करीब दो हजार एकड़ फसल को नुकसान की आशंका है।

    रोहतास में दो दर्जन घर टूटे
    रोहतास जिले में लगातार बारिश से संझौली, रोहतास, नौहट्टा और चेनारी प्रभावित हैं। कृषि विभाग ने करीब एक से डेढ़ हजार हेक्टेयर भूमि प्रभावित होने का अनुमान जताया है। नौहट्टा की 9 पंचायतों में करीब 10 हजार एकड़ धान डूबने की सूचना है। चेनारी में करीब 50 एकड़ फसल बर्बाद हुई है और दो दर्जन मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।

    नालंदा में कटाव से दहशत
    नालंदा जिले के अस्थावां में जिरायन नदी के तटबंध का 25 फीट कटाव बढ़कर करीब 70 फीट हो गया है। पांच गांवों में पानी फैलने से ढाई हजार बीघे में धान, मक्का और सब्जियों की फसल डूब गई है। बिहारशरीफ के सोहसराय अड्डापर में छिलका के ऊपर से करीब डेढ़ फीट पानी बह रहा है।

    कैमूर में सड़कें और स्कूल डूबे
    कैमूर में दुर्गावती, कर्मनाशा और कुदरा नदियों के उफान से दुर्गावती, रामपुर, नुआंव और रामगढ़ प्रभावित हैं। 10 से 12 हजार आबादी परेशान है। कई सड़कें और स्कूल परिसर जलमग्न हैं। कुछ इलाकों में पानी कम होने से जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा है।

    गंगा, कोसी, सोन उफान पर
    केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा नदी दीघा, गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जबकि गंडक नदी डुमरियाघाट, हाजीपुर, कोसी नदी बलतारा और कुरसेला, बूढ़ी गंडक खगड़िया, पुनपुन नदी श्रीपालपुर तो घाघरा नदी दरौली में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

    मुंगेर में बाढ़ में डूबा मंदिर
    सोन नदी का डिस्चार्ज पांच लाख 23 हजार क्यूसेक रहा। सोन के जलस्तर में आने वाले दिनों में कमी आने की संभावना है। गंगा नदी के जलस्तर में भी कमी का रुझान रहने का अनुमान है। प्रयागराज में गंगा के जलस्तर में कमी शुरू हो गई है, जिसका असर आगे बिहार में भी देखने को मिल सकता है।
    भागलपुर शहर में घुसा बाढ़ का पानी

    भागलपुर जिले में शुक्रवार को गंगा नदी की बाढ़ का पानी शहरी क्षेत्र में प्रवेश कर गया। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के प्रशासनिक भवन के पोर्टिको और कैंपस में पानी फैलने लगा है। छात्राएं पीजी गर्ल्स हॉस्टल खाली कर घर वापस हो गई हैं। भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (बीसीई) कैंपस में भी पानी घुस गया है। यहां सारे हॉस्टलों को बंद कर दिया गया है।

    अजगैवीनाथ मंदिर जलमग्न
    सुल्तानगंज में अजगैवीनाथ मंदिर परिसर में गंगा का पानी घुस गया है, जिससे श्रद्धालुओं को दिक्कत होने लगी है। जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय के अनुसार खरीक प्रखंड की राघोपुर पंचायत के 1005 घरों की लगभग पांच हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित है।

    कई स्टेट हाईवे पर चढ़ा बाढ़ का पानी
    नदियों में बढ़े जलस्तर की वजह से आई बाढ़ से डेढ़ दर्जन से अधिक जिलों में ग्रामीण सड़कें प्रभावित हुई हैं। ग्रामीण कार्य विभाग के अनुसार 200 से अधिक सड़कों पर पानी आ गया है। वहीं, 60 से अधिक सड़कें क्षतिग्रस्त भी हुई हैं। विभाग ने जिलों को निर्देश दिया है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीण सड़कों की निरंतर निगरानी रखें। जहां, कहीं भी सड़क क्षतिग्रस्त हुई है, वहां पानी उतरने के तुरंत बाद उसकी मरम्मत करें ताकि आवागमन को फिर से सुगम बनाया जा सके।

    इन इलाकों में आवागमन प्रभावित
    जिन जिलों की सड़कें प्रभावित हुई हैं, उनमें बक्सर, भोजपुर, पटना, भागलपुर, वैशाली, बेगूसराय, किशनरंज, अररिया, कटिहार, खगड़िया और पश्चिम चंपारण आदी शामिल हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्टेट हाईवे समेत कई अन्य सड़कों पर भी पानी चढ़ गया है। पथ निर्माण विभाग क्षतिग्रस्त सड़कों की तत्काल मरम्मत का निर्देश दिया है। औरंगाबाद, पटना, वैशाली भागलपुर आदि जिलों की सड़कें अधिक प्रभावित हुई हैं।

    निर्माण कार्य रुके
    विभाग के अनुसार बाढ़ की आशंका को देखते हुए कई जगहों पर निर्माण कार्य को भी रोक दिया गया है। बाढ़ग्रस्त इलाके में काम नहीं मिलने के कारण पलायन कर चुके लोगों को अस्थायी तौर पर जॉब कार्ड बनाने का निर्देश ग्रामीण विकास विभाग ने दिया है। बाढ़ के कारण दो दर्जन से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार 70 हजार पशु भी प्रभावित है। छपरा, पूर्णिया और भागलपुर में पशु चारा का वितरण किया गया है।

     

  • मानसून की बेरुखी के बीच आज बारिश के आसार, पंजाब-चंडीगढ़ के 6 जिलों में यलो अलर्ट; अब तक 34% कम बारिश

    मानसून की बेरुखी के बीच आज बारिश के आसार, पंजाब-चंडीगढ़ के 6 जिलों में यलो अलर्ट; अब तक 34% कम बारिश

    अमृतसर
    पंजाब में शनिवार पांच जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद बारिश का दायरा लगातार कम होने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार कल, 6 सितंबर को केवल पठानकोट में भारी बारिश का अलर्ट रहेगा, जबकि सात और आठ सितंबर को पूरे राज्य में कोई चेतावनी नहीं है।

    इसके अलावा शुक्रवार को राज्य के औसत अधिकतम तापमान में 1.6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज हुई। इसके बावजूद तापमान सामान्य के आसपास रहा। सबसे अधिक तापमान बठिंडा हवाई अड्डे पर 36.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    मानसून सीजन में अब तक 34 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, आज पंजाब के 22 जिलों में बारिश की संभावना है। पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर, नवांशहर और मोहाली में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

    अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, फिरोजपुर, फरीदकोट, मोगा, लुधियाना, संगरूर और फतेहगढ़ साहिब में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। वहीं, फाजिल्का, मुक्तसर, बठिंडा, बरनाला और मानसा में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

    हिमाचल से सटे जिलों में बारिश के बने आसार
    5 सितंबर:
    पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली और रूपनगर में भारी बारिश की संभावना है। इन जिलों के अलावा मोहाली, फतेहगढ़ साहिब और पटियाला में भी कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, संगरूर, बरनाला और बठिंडा में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। फाजिल्का, मुक्तसर और फरीदकोट में छिटपुट बारिश हो सकती है।

    6 सितंबर: केवल पठानकोट में भारी बारिश का यलो अलर्ट है। पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर, मोहाली और पटियाला में कई स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। मध्य और पश्चिमी पंजाब के कुछ जिलों में छिटपुट बारिश हो सकती है।

    7 सितंबर: किसी भी जिले के लिए मौसम चेतावनी नहीं है। पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर और रूपनगर में कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। वहीं फाजिल्का, मुक्तसर, बठिंडा, फरीदकोट, मोगा, फिरोजपुर, बरनाला और मानसा में मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा।

    8 सितंबर: पूरे पंजाब में कोई चेतावनी नहीं है। उत्तरी जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश संभव है, जबकि दक्षिण-पश्चिमी पंजाब के अधिकांश हिस्से शुष्क रहेंगे। मध्य पंजाब में भी बारिश की संभावना बहुत कम है।

    डैम खतरे के निशान से नीचे
    भाखड़ा डैम में पानी का स्तर 1,641.2 फीट है, जबकि इसकी एफआरएल सीमा 1,680 फीट है। पोंग डैम का जलस्तर 1,371.16 फीट है और इसकी एफआरएल सीमा 1,390 फीट है। दोनों डैम में जलस्तर अभी निर्धारित सीमा से नीचे है।

    बिजली की डिमांड हुई कम
    बारिश होने से बिजली की मांग में कमी आई है। शुक्रवार रात पंजाब में बिजली की मांग 12,296 मेगावाट रही। इस दौरान राज्य ने 8,004 मेगावाट बिजली बाहर से ली, जबकि राज्य ने खुद 3,799 मेगावाट बिजली पैदा की।

    शुक्रवार को तापमान में गिरावट दर्ज
    राज्य के औसत अधिकतम तापमान में 1.6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज हुई। इसके बावजूद तापमान सामान्य के आसपास रहा। सबसे अधिक तापमान बठिंडा हवाई अड्डे पर 36.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    शुक्रवार को पटियाला में 24.6 मिलीमीटर, जालंधर में 15.5 मिलीमीटर, फतेहगढ़ साहिब में 12.5 मिलीमीटर, रूपनगर के श्री आनंदपुर साहिब में 9 मिलीमीटर और अमृतसर में 8 मिलीमीटर बारिश हुई। होशियारपुर में 7 मिलीमीटर और संगरूर में 4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।

     

  • किसी ने बनाया 3D थिएटर, तो किसी ने 100 मॉडल और वर्चुअल फिजिक्स लैब, 2 शिक्षकों को राष्ट्रीय सम्मान

    किसी ने बनाया 3D थिएटर, तो किसी ने 100 मॉडल और वर्चुअल फिजिक्स लैब, 2 शिक्षकों को राष्ट्रीय सम्मान

    चंडीगढ़
    शिक्षक दिवस के मौके पर देशभर के 48 चुनिंदा शिक्षकों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दिल्ली में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करेंगी। इनमें पंजाब और चंडीगढ़ के दो शिक्षक भी शामिल हैं, जिन्होंने सरकारी स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई को किताबों से आगे निकला। 

    चंडीगढ़ के रवि जयसवाल ने स्कूल में 3D गुंबद थिएटर और मौसम केंद्र बनाकर बच्चों को अंतरिक्ष और विज्ञान का सीधा अनुभव दिया।

    वहीं, पटियाला के डॉ. दिनेश कुमार ने वर्चुअल फिजिक्स लैब और 100 से ज्यादा जीरो-कॉस्ट मॉडल तैयार कर छात्रों के मन से फिजिक्स का डर दूर किया। दोनों शिक्षकों की ये पहल अब पूरे देश के लिए मिसाल बन गई है।

    अब दोनों टीचरों के बारे में विस्तार से पढ़िए…
    स्कूल में एक 3D गुंबद थिएटर बनाया रवि जयसवाल चंडीगढ़ के मलोया कॉलोनी के गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल में साइंस टीचर हैं। उन्होंने विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों को बच्चों के लिए आसान और रोचक बनाने के लिए स्कूल में एक 3D गुंबद थिएटर बनाया है। इसके लिए उन्होंने स्कूल के हॉल में टिन और थर्मोकोल जैसी बेकार चीजों का इस्तेमाल किया। इस गुंबद पर छात्रों को अंतरिक्ष और विज्ञान से जुड़े वीडियो और तस्वीरें दिखाई जाती हैं। इससे बच्चे विषयों को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय देखकर और समझकर सीखते हैं।

    कपूरथला की साइंस सिटी से आया आइडिया जायसवाल ने बताया कि स्कूल के स्टूडेंट्स अकसर उनसे कपूरथला की साइंस सिटी घूमने की इच्छा जताते थे। इसी से उन्हें स्कूल में ही बच्चों को ऐसा अनुभव देने का विचार आया। उन्होंने सबसे पहले अपने स्कूल में गुंबद थिएटर तैयार कराया। बाद में उनके इस प्रयोग को चंडीगढ़ के छह अलग-अलग सरकारी स्कूलों में भी शुरू किया गया।

    स्कूल के हॉल में टिन और थर्मोकोल की मदद से गुंबदनुमा ढांचा बनाया गया। इस पर अंतरिक्ष और दूसरे वैज्ञानिक विषयों से जुड़े वीडियो और तस्वीरें दिखाई जाती हैं। इससे स्टूडेंट्स विज्ञान के कठिन विषयों को भी आसानी से समझ पाते हैं।

    20 छात्रों ने राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनियों में लिया हिस्सा जायसवाल ने मालोया स्कूल में स्टूडेंट्स के लिए एक मौसम केंद्र भी बनाया है। यहां बच्चे मौसम से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं। इसके अलावा वे वर्षामापी यंत्र की मदद से बारिश की मात्रा भी मापते हैं। इस तरह स्टूडेंट विज्ञान को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय उसे अपने आसपास की चीजों से जोड़कर समझते हैं। जायसवाल के स्टूडेंट्स ने राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान प्रदर्शनियों में भी हिस्सा लिया है। उनके अनुसार करीब 20 स्टूडेंट्स ने राष्ट्रीय स्तर पर स्कूल का नाम रोशन किया है।

    जरूरतमंद विद्यार्थियों की आर्थिक मदद भी करते हैं जायसवाल खुद चंडीगढ़ में पढ़ाई कर चुके हैं। जरूरत पड़ने पर उन्होंने अपने स्टूडेंट्स को आर्थिक मदद भी दी है, ताकि पैसे की कमी के कारण उनकी पढ़ाई न रुके। उन्होंने बताया कि उनके दो पूर्व स्टूडेंट्स इस समय पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में पीएचडी कर रहे हैं।

    खुद की अधूरी पढ़ाई को छात्रों के सपनों से जोड़ते हैं जायसवाल ने बताया कि उनके पढ़ाने का तरीका उनके खुद के छात्र जीवन से भी जुड़ा है। उनका मानना है कि पढ़ाई के दौरान जो अवसर उन्हें नहीं मिल सके, वे अवसर आज के स्टूडेंट्स को उपलब्ध होने चाहिए।

    सहकर्मी से मिली पुरस्कार की जानकारी जायसवाल ने बताया कि उन्हें अपने चयन की जानकारी एक सहकर्मी से मिली। उनके सहकर्मी ने शुक्रवार को पुरस्कार के लिए चुने गए शिक्षकों की सूची देखी थी। इसके बाद जायसवाल को ईमेल मिला, जिसमें उनके चयन की पुष्टि की गई। आधिकारिक सूची में उनका नाम चंडीगढ़ के मालोया कॉलोनी स्थित गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल के शिक्षक के रूप में शामिल है।

    पंजाब से अकेले शिक्षक, राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित पटियाला के सरकारी विक्टोरिया गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल के फिजिक्स लेक्चरर डॉ. दिनेश कुमार को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चुना गया है। वे पूरे पंजाब से इस सम्मान के लिए चयनित होने वाले एकमात्र शिक्षक हैं। करीब 25 वर्षों से शिक्षण क्षेत्र में सक्रिय डॉ. कुमार पिछले 10 से अधिक वर्षों से इसी स्कूल में सेवाएं दे रहे हैं।

    वर्चुअल फिजिक्स लैब और 100 से ज्यादा मॉडल डॉ. दिनेश कुमार ने कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की मदद से वर्चुअल फिजिक्स लैब तैयार की है। इसके जरिए छात्र बिना महंगे लैब उपकरणों के डिजिटल माध्यम से फिजिक्स के प्रयोगों को समझ सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने रोजमर्रा की बेकार और कम लागत वाली वस्तुओं से 100 से ज्यादा जीरो-कॉस्ट मॉडल तैयार किए हैं। इनका इस्तेमाल कठिन वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाने के लिए किया जाता है।

    सरकारी स्कूलों की छात्राओं को सीधा फायदा वर्चुअल लैब का सबसे बड़ा फायदा उन सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को होता है, जहां पर्याप्त प्रयोगशाला उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। इंटरैक्टिव विजुअल्स और डिजिटल प्रयोगों के जरिए छात्र फिजिक्स की अवधारणाओं को आसानी से समझ पाते हैं। डॉ. कुमार का प्रयास है कि स्टूडेंट्स के मन से फिजिक्स का डर दूर हो और वे इसे प्रयोग करके सीखें।

    पीएचडी की, 2020 में मिला स्टेट अवॉर्ड 52 वर्षीय डॉ. दिनेश कुमार ने फिजिक्स में पीएचडी की है। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पटियाला के सरकारी मोहिंद्रा कॉलेज और एमएससी पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से की। शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें 2020 में पंजाब सरकार के स्टेट टीचर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. कुमार स्कूल समय के बाद और छुट्टियों में जरूरतमंद छात्राओं को मुफ्त अतिरिक्त कक्षाएं और मार्गदर्शन देते हैं।

  • समर्पण और शानदार कार्य का सम्मान, मुख्यमंत्री योगी 81 शिक्षकों को करेंगे सम्मानित

    समर्पण और शानदार कार्य का सम्मान, मुख्यमंत्री योगी 81 शिक्षकों को करेंगे सम्मानित

    उत्कृष्ट योगदान करने वाले, कार्य के प्रति समर्पित 81 शिक्षकों को मुख्यमंत्री योगी करेंगे पुरस्कृत

    शिक्षक दिवस समारोह में 76 शिक्षकों को मिलेगा राज्य अध्यापक पुरस्कार, 5 को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार

    शनिवार को गोरखपुर के योगिराज गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में होगा भव्य समारोह का आयोजन
        
    गोरखपुर

     भावी पीढ़ी को गढ़ने व शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और अन्य उत्कृष्ट प्रयासों से शिक्षण कार्य को नई दिशा देने वाले प्रदेश के 81 शिक्षकों को शिक्षक दिवस पर पुरस्कृत किया जाएगा। 5 सितंबर को गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, चयनित शिक्षकों को 'राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025' एवं 'मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार 2025' प्रदान करेंगे।

    पुरस्कार के लिए चयनित कुल 81 शिक्षकों में बेसिक शिक्षा विभाग के 61 तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षक शामिल हैं। इनमें 33 महिला शिक्षक (31 बेसिक और 2 माध्यमिक) शामिल हैं। शिक्षक दिवस पर होने वाले समारोह में बेसिक और माध्यमिक के 76 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। जबकि स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों के 5 शिक्षकों को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि स्ववित्तपोषित विद्यालयों के शिक्षकों के लिए मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2018 में सीएम योगी ने ही की थी।  

    राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रत्येक शिक्षक को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और 25 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में दो वर्ष की वृद्धि होगी। इन शिक्षकों को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में आजीवन निशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी।

    पुरस्कार प्राप्त करने के लिए प्रदेशभर से गोरखपुर आए चयनित सभी शिक्षकों को शासन की ओर से विशिष्ट अतिथि के रूप में होटलों में ठहराने की व्यवस्था की गई है। शनिवार को होने वाले शिक्षक दिवस एवं पुरस्कार वितरण समारोह को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह भी संबोधित करेंगे। समारोह में मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, गोरखपुर के सांसद रविकिशन के अलावा अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।