Category: राज्य

  • काशी में अपराधियों पर तीसरी नजर का शिकंजा, कैमरों ने सुलझाईं हत्या और ढाई करोड़ की चोरी की गुत्थी

    काशी में अपराधियों पर तीसरी नजर का शिकंजा, कैमरों ने सुलझाईं हत्या और ढाई करोड़ की चोरी की गुत्थी

     वाराणसी
     स्मार्ट सिटी वाराणसी में अपराधियों के लिए कहर बन रही तीसरी नजर।अनजाने में भी अपराधी ने शहर की दहलीज लांघी तो वाहनों के नंबर प्लेट व चेहरे पहचाने वाले कैमरे अपना काम कर गुजरेंगे। पुलिस के लिए चेहरे व वाहनों के नंबर प्लेट ही अपराधियों के बाहें मरोड़ने के लिए पर्याप्त साबित होते हैं।

    आंकड़ों के आइने में दो वर्षों में 671 पर्यटकों के विभिन्न गाड़ियों में छूटे उनके सामान ढूढ़ने और 99 गुमशुदा को अपनों से मिलाने स्पष्ट है कि काशी में तीसरी नजर (त्रिनेत्र कमांड सेंटर) की निगाहें सबके ऊपर हैं, जो शरीफों को संतुष्ट दे रहीं तो अपराधियों पर कहर बरपा रहीं हैं।

    1
    गाजीपुर के होटल मालिक की हत्या, काशी के एएनपीआर कैमरों ने दिए सुराग
    गाजीपुर में बिंदु होटल मालिक के बेटे को कटरा गैंग के बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। बदमाश वारदात के बाद वाराणसी की ओर भागे। वाराणसी में बदमाशों ही एंट्री के साथ ही उनका डिजीटल पीछा शुरू हो गया। विशेषज्ञों ने कैमरों के फुटेजे का विश्लेषण किया तो एएनपीआर (आटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे की सहायता से वाहन का नंबर प्लेट भी ट्रेस कर लिया गया।वाहन नंबर का सुराग मिलते ही पुलिस के लिए मर्डर मिस्ट्री का सुलझाना आसान हो गया।

    अपाचे बाइक की पहचान से खुली ढाई करोड़ चोरी
    बीते तीन जून को शिवपुर (वाराणसी) में लगभग ढाई करोड़ की चोरी हुई। पुलिस जांच में जुटी तो शिवपुर, रामेश्वरम मोड़, अकथा, पहाड़िया सहित विभिन्न स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का गहन विश्लेषण करने पर अपाचे बाइक सवार तीन संदिग्ध युवक दिख गए। अलग-अलग कैमरों की फुटेज को जोड़कर संदिग्धों की गतिविधि ट्रैक की गई, उनकी पहचान और लोकेशन मिल गई।इसका असर हुआ कि चोरी गए एक-एक जेवरात मिल गए।

    आधुनिक कैमरे और क्राइम कंट्रोल में उनके कार्य
        एएनपीआरए कैमरा : वाहन की नंबर प्लेट की पहचान करने तथा नियम उल्लंघन करने वाले वाहनों की जानकारी प्राप्त करने में सक्षम।
        आरएलवीडी कैमरा : रेड लाइट उल्लंघन पर नजर रखने में सक्षम।
        फिक्स सीसीटीवी कैमरा : सामान्य निगरानी में सक्षम।
        पीटीजेड कैमरा : भीड़ नियंत्रण को दूर तक चारो तरफ निगरानी तथा ज़ूम करके एक-एक गतिविधि दिखाने में सक्षम।
        एफआरएस कैमरा : चेहरे को पहचानने में सक्षम।

    2
    पूरे ज‍िले में
    2422 कैमरों की निगाहों से पूरे शहर को देखता त्रिनेत्र भवन।
    इनके जिम्मे है, त्रिनेत्र भवन की जिम्मेदारी
        सब इंस्पेक्टर राजेश सिंह (प्रभारी)
        हेड कांस्टेबल करन कुमार
        कांस्टेबल उपेंद्र पासवान
        ओमप्रकाश शाह
        कांस्टेबल सतीश यादव

    संसाधन के साथ-साथ हमारी पुलिस टीम की सक्रियता और रुचि के कारण हम बेहतर कर पा रहे हैं। पर्यटकों के खोए लाखों के सामान जब हम ढूढ़कर कुछ घंटे में लौटाते हैं, तो काशी की कमिश्नरेट पुलिस की साख पूरे देख में बढ़ती है। इसी तरह वाराणसी में क्राइम कंट्रोल करने संग हम आस-पड़ोस में हो रही अपराधिक घटनाओं के राजफाश में भी मददगार बन रहे हैं।
    वैभव बांगर, एडीसीपी काशी जोन।

  • ई-चालान पर लगेगा ब्रेक! 12 सितंबर की लोक अदालत में मिलेगा एकमुश्त समाधान और जुर्माने में छूट

    ई-चालान पर लगेगा ब्रेक! 12 सितंबर की लोक अदालत में मिलेगा एकमुश्त समाधान और जुर्माने में छूट

     मुजफ्फरपुर
    वाहन चालकों के लंबित ई-चालानों के निपटारे के लिए 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat 2026) का आयोजन होगा। 'एकमुश्त समाधान योजना 2026' के तहत जुर्माने की राशि में छूट का लाभ मिलेगा।

    इसको लेकर राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन ने पत्र जारी किया है। टोल प्लाजा से कटे ई-चालानों के लिए कहा गया है कि जिस जिले में टोल प्लाजा है, उसी जिले में उससे जुड़े लंबित चालानों का निपटारा होगा। लोक अदालत से पहले प्री-रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है।

    जिला विधिक सेवा प्राधिकार में पांच सितंबर से परिवहन व यातायात पुलिस के दो-दो काउंटर बनाए जाएंगे। यहां चालान की छाया प्रति व अन्य कागजात जमा करना होगा। वाहन मालिकों को टोकन दिया जाएगा। परिवहन-यातायात पुलिस जुर्माने के चालान का वेरिफिकेशन लोक अदालत से पहले ही करेगी।

    इससे लोक अदालत में वाहन मालिकों को जुर्माने की राशि जमा करने में अधिक समय नहीं लगेगा। साथ ही तेजी से मामले का निपटारा होगा। लोक अदालत में 31 मई 2026 से पूर्व कटे ई-चालान का ही समझौते के तहत निपटारा होगा।

    जिला परिवहन पदाधिकारी प्रियंका सिन्हा ने कहा कि आदेशानुसार मामले का निपटारा होगा। वाहन मालिकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। प्राधिकार व विभाग के निर्देशों का शत प्रतिशत पालन होगा। लोक अदालत में जुर्माने से राहत के लिए टोकन के साथ चालान की छाया प्रति, आधार कार्ड, आरसी आदि देना होगा।

    परिवहन विभाग करेगा 19 हजार 691 चालान का निपटारा:
    राष्ट्रीय लोक अदालत में परिवहन विभाग 19 हजार 691 चालान का समझौते के तहत निपटारा करेगा। इससे करीब 28.46 करोड़ रुपये की वसूली होगी। परिवहन विभाग द्वारा 2019 से मई 2026 तक 37,515 चालान किए गए। 56.15 करोड़ जुर्माना किया गया।

    इसमें से अब तक 17,824 वाहन मालिकों ने चालानों की राशि जमा की। इससे विभाग को 27.69 करोड़ रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई। जबकि अब भी 19,691 चालान लंबित हैं।

     

  • योगमाया और केशवदेव मंदिर में भी किया दर्शन-पूजन, परिसर में विधि- विधान से किया गोपूजन

    योगमाया और केशवदेव मंदिर में भी किया दर्शन-पूजन, परिसर में विधि- विधान से किया गोपूजन

    मथुरा

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने ब्रज प्रवास के दूसरे दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर शुक्रवार सुबह श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने पूरे विधि-विधान व आस्था के साथ मुख्य गर्भगृह में विराजमान 'लाला' (बाल कृष्ण) के दर्शन और विशेष पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री के रूप में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का यह उनका 20वां दर्शन रहा। मंदिर परिसर में आगमन पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया।

    चांदी से सजे गर्भगृह की अद्भुत छटा निहारते रहे सीएम

    जन्माष्टमी के इस विशेष और दिव्य पर्व पर जन्मभूमि के मुख्य गर्भगृह की दीवारों को चांदी की परत लगाकर बेहद अलौकिक रूप से सजाया गया था। मुख्यमंत्री योगी काफी देर तक चांदी से सजे गर्भगृह की इस अद्भुत छटा और लाला के मनमोहक स्वरूप को भक्तिभाव से निहारते रहे। मुख्य गर्भगृह में दर्शन-पूजन के बाद सीएम ने परिसर में ही स्थित योगमाया मंदिर, केशवदेव मंदिर और भागवत भवन में भी जाकर दर्शन-पूजन किया और देश-प्रदेश की सुख-शांति व समृद्धि की मंगल कामना की।

    गोपूजन कर श्रद्धालुओं पर की पुष्प वर्षा

    मंदिर में पूजन-अर्चन से पहले मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में गोमाता का विधिवत पूजन किया। इस पावन पर्व पर जन्मभूमि परिसर में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार करते हुए सीएम योगी ने उन पर देर तक पुष्प वर्षा की और सभी देशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने जन्मभूमि परिसर में अपनी मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति दे रहे उज्जैन से आए कलाकारों के मध्य पहुंचकर उनका उत्साहवर्धन किया और साथ में फोटो भी खिंचवाईं। सीएम योगी करीब 30 मिनट तक जन्मभूमि परिसर में रहे।

  • बैंक खाते में पड़ा पैसा हो सकता है लावारिस, पंजाब में 82.68 लाख खातों में ₹3,111 करोड़ जमा

    बैंक खाते में पड़ा पैसा हो सकता है लावारिस, पंजाब में 82.68 लाख खातों में ₹3,111 करोड़ जमा

    चंडीगढ़ 

    पंजाब के 82.68 लाख बैंक खातों में 3111 करोड़ रुपये ऐसी रकम है, जिसके असली हकदार या तो खातों से दूर हो चुके हैं या फिर उन्हें अपनी जमा राशि की याद ही नहीं रही। लंबे समय तक लेन-देन नहीं होने के कारण इनमें से बड़ी संख्या में खाते निष्क्रिय हो गए और नियमों के तहत बैंकों ने जमा रकम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के डिपॉजिटर एंड अवेयरनेस फंड (डीईए) में ट्रांसफर कर दी गई। 

    हैरानी की बात यह है कि बैंकों की तमाम कोशिशों के बावजूद महज 0.48 फीसदी खाताधारकों तक ही पहुंच बनाई जा सकी और उनकी रकम लौटाई गई। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की हालिया बैठक में पेश रिपोर्ट ने बैंक खातों में जमा इस लावारिस धन की तस्वीर सामने रखी है।

    रिपोर्ट के अनुसार बैंकों की तरफ से विशेष अभियान के तहत 39,918 बैंक खातों में 130 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। पंजाब सरकार ने ओडिशा की तर्ज पर सिंगल नोडल अकाउंट तैयार किया है ताकि खातों में जमा राशि के भुगतान में किसी भी तरह की देरी न हो लेकिन बावजूद इसके अधिकतर बैंक इस खाते में राशि जमा नहीं करवा रहे हैं। जानकारी के अनुसार अधिकतर खाते ऐसी परिस्थितियों में निष्क्रिय हुए जब खाताधारक स्थानांतरित हो गए या फिर उनका बैंक बदल गया। समिति के अनुसार बैंक खाताधारकों को ढूंढ रहे हैं जिसके लिए लगातार बैंकों को उचित दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

    इस तरह निष्क्रिय हो जाता है खाता
    जब किसी खाते में दो साल से ज्यादा कोई लेनदेन या गतिविधि नहीं होती है तो उसे निष्क्रिय कर दिया जाता है। वहीं अगर खाता 10 साल से ज्यादा समय तक निष्क्रिय रहता है तो बैंक उस खाते की राशि को आरबीआई के विशेष फंड में जमा करवा देता है।

    2.49 लाख खाते निष्क्रिय 
    रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न बैंकों में इस समय 2.49 लाख बचत खाते निष्क्रिय हैं जिनमें करोड़ों रुपये जमा हैं। इसी तरह प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खुले 33.50 लाख खाते निष्क्रिय हो गए हैं और इनमें 435 करोड़ रुपये जमा हैं। इनमें ज्यादातर ऐसे खाते शामिल हैं जिन्हें लोगों ने न तो अपडेट करवाया और न ही पिछले काफी समय से लेन-देन किया है जिस कारण यह निष्क्रिय हो रहे हैं।

    निष्क्रिय होने से बचाने के लिए यह सावधानी जरूरी 

        अपने खाते में कुछ महीनों में एक बार लेन-देन जरूर करें।
        नियमित रूप से अपने सभी बैंक खातों की समीक्षा करें, उपयोग में नहीं आने वाले खाते बंद कर दें
        बैंकों में संपर्क के लिए अपनी नवीनतम जानकारी अपडेट करवाएं।
        पासबुक, नेट बैंकिंग से समय-समय पर खाता जांचें
        बैंक के किसी भी अलर्ट और नोटिस को अनदेखा न करें।

     

  • श्रीगंगानगर-अलवर में आदेश जारी, विशेष शिक्षा शिक्षक अब बच्चों की पढ़ाई पर देंगे पूरा ध्यान

    श्रीगंगानगर-अलवर में आदेश जारी, विशेष शिक्षा शिक्षक अब बच्चों की पढ़ाई पर देंगे पूरा ध्यान

    जयपुर
     विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए श्रीगंगानगर और अलवर से राहत की खबर सामने आई है। दोनों जिलों के शिक्षा विभागों ने निर्देश जारी कर विशेष शिक्षा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां नहीं देने को कहा है। यानी अब इन शिक्षकों को कार्यक्रमों और परीक्षाओं के प्रबंधन जैसे ऐसे कामों में नहीं लगाया जाएगा, जो उनकी मुख्य जिम्मेदारी का हिस्सा नहीं हैं।

    75 हजार से ज्यादा बच्चों की जिम्मेदारी
    यह निर्देश ऐसे समय आया है जब प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 75 हजार से ज्यादा विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इन बच्चों की शिक्षा और उन्हें जरूरी सहायता उपलब्ध कराने में विशेष शिक्षा शिक्षकों की महत्लपूर्ण भूमिका है। ऐसे में विभाग का मानना है कि शिक्षकों का समय गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने के बजाय उन्हें CWSN बच्चों से जुड़े कामों पर ध्यान देना चाहिए।

    शिक्षकों को किन कामों पर देना होगा ध्यान?
    आदेश में बताया गया है कि सरकार ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए जिला स्तर पर विशेष शिक्षा शिक्षक और रिसोर्स पर्सन नियुक्त किए हैं। इन शिक्षकों को CWSN बच्चों को पढ़ाने और उन्हें उनकी जरूरत के हिसाब से विशेष दक्षताएं देने की ट्रेनिंग मिली हुई है।

    इन शिक्षकों का काम सिर्फ अपने स्कूल के CWSN बच्चों को पढ़ाना नहीं है। उन्हें अपने स्कूल के अलावा आसपास के प्राथमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों और शहरी क्लस्टर प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों के क्षेत्र में आने वाले CWSN बच्चों को भी पढ़ाई में मदद देनी होती है।

    इसके साथ ही इन शिक्षकों को समावेशी शिक्षा से जुड़ी कई गतिविधियां भी संभालनी होती हैं। इनमें CWSN बच्चों के लिए परिवहन, एस्कॉर्ट, रीडर और छात्रवृत्ति भत्ते से जुड़ी सुविधाओं का काम शामिल है। इसके अलावा ऐसे बच्चों की पहचान करना भी इन शिक्षकों की जिम्मेदारी है, जिन्हें विशेष शिक्षा और सहायता की जरूरत है।

    संस्थान प्रधानों को दिए निर्देश
    विभाग ने सभी संस्थान प्रधानों को निर्देश दिए हैं कि विशेष शिक्षा शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार न दिया जाए। उनसे गैर-शैक्षणिक काम कराने के बजाय उन्हें विशेष जरूरत वाले बच्चों की पढ़ाई, मदद और ऐसे बच्चों की पहचान से जुड़े कामों पर ध्यान देने के लिए कहा गया है।

    राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने भी कहा कि विशेष शिक्षा शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इन शिक्षकों का काम सिर्फ बच्चों को पढ़ाना ही नहीं है। वे स्कूल में विशेष जरूरत वाले बच्चों के व्यवहार को संभालने और उन्हें सहज महसूस कराने में भी मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल के बाद ब्लॉक स्तर पर तैनात विशेष शिक्षक ऐसे दूसरे बच्चों की पहचान करने और उन्हें सही स्कूलिंग से जोड़ने का काम भी करते हैं। इसलिए इन शिक्षकों पर अतिरिक्त काम का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।

    पहले भी हो चुकी है भर्ती और पदोन्नति
    पिछले साल नवंबर में राज्य सरकार ने 242 विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती और पदोन्नति के लिए वित्तीय मंजूरी दी थी। इसके बाद कक्षा 11वीं और 12वीं के विशेष जरूरत वाले बच्चों को पढ़ाई के लिए विशेष शिक्षक मिलने का रास्ता साफ हुआ।

    राज्य में पहली बार विशेष शिक्षा शिक्षकों को व्याख्याता के पद पर भर्ती और पदोन्नत किया गया। इससे पहले साल 2007 में ग्रेड-III शिक्षक के पद पर विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती हुई थी। इसके बाद 2015 में कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती की गई थी।

     

     

  • बाढ़ प्रभावितों की मदद में योगी सरकार का राहत तंत्र मुस्तैद, 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

    बाढ़ प्रभावितों की मदद में योगी सरकार का राहत तंत्र मुस्तैद, 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राहत एवं बचाव अभियान लगातार युद्धस्तर पर जारी है। उत्तर प्रदेश बाढ़ राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक गुरुवार को प्रदेश के 26 जिलों में बाढ़ का असर रहा। करीब 3.53 लाख आबादी प्रभावित होने के बावजूद राहत एवं बचाव तंत्र की सक्रियता से अब तक कोई जन या पशु हानि नहीं दर्ज की गई है।प्रभावितों को 72,897 बाढ़ राहत किट और 3.67 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। 

    प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब तक 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। अभी 4,847 लोग बाढ़ शरणालयों में रह रहे हैं। प्रदेश में कुल 1,312 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं।

    1 हजार से ज्यादा मेडिकल टीमें सक्रिय
    राहत और बचाव अभियान को प्रभावी बनाने के लिए 1,634 बाढ़ चौकियां, 1,697 नाव-मोटरबोट और 1,068 मेडिकल टीमें सक्रिय हैं। इससे प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी के साथ जरूरतमंद लोगों तक तत्काल मदद पहुंचाई जा रही है।

    राहत सामग्री वितरण में भी तेजी
    योगी सरकार के राहत अभियान में प्रभावित परिवारों तक भोजन और जरूरी सामग्री पहुंचाने पर विशेष जोर है। अब तक 72,897 बाढ़ राहत खाद्यान्न पैकेट और 3,67,551 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा पशुओं के लिए 5 हजार क्विंटल से अधिक भूसा वितरित किया जा चुका है। स्वास्थ्य सुरक्षा के तहत 5.52 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 1.87 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट भी वितरित किए जा चुके हैं। बाढ़ से 45 हजार से अधिक पशु प्रभावित हैं, लेकिन अभी तक किसी पशु की मृत्यु नहीं हुई है। इसी तरह जनहानि की भी कोई सूचना नहीं मिली है।
     

    प्रदेश के बाढ़ प्रभावित जिले
    अमरोहा, अयोध्या, आजमगढ़, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी।

  • दिल्ली में वोटर लिस्ट संशोधन की रफ्तार तेज, 2.21 लाख ने नाम जोड़ने तो 51 हजार ने हटाने के लिए किया आवेदन

    दिल्ली में वोटर लिस्ट संशोधन की रफ्तार तेज, 2.21 लाख ने नाम जोड़ने तो 51 हजार ने हटाने के लिए किया आवेदन

    नई दिल्ली
    दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद महज तीन दिनों में 5.40 लाख क्लेम और आब्जेक्शन और आवेदन प्राप्त हुए हैं। 31 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद 2 सितंबर तक नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 के 2,21,806 आवेदन मिले हैं।

    वहीं वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के तहत 51,556 आवेदन आए हैं। वोटर लिस्ट में संशोधन के लिए फॉर्म -S के 2,65,396 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा विदेश में रहने वाले इंडियन वोटर्स के लिए फॉर्म-6ए के 1,372 आवेदन मिले हैं।

    नाम जोड़ने के सबसे ज्यादा आवेदन आए साउथ वेस्ट जिले से
    मुख्य निर्वाचन अधिकारी दिल्ली के अनुसार, सबसे ज्यादा फॉर्म-6 आवेदन साउथ वेस्ट जिले में 25,3 25,332 प्राप्त हुए हैं। इसके बाद साउथ-ईस्ट में 25,795 और साउथ जिले में 22,522 आवेदन आए है। नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के सबसे ज्यादा 11,626 आवेदन साउथ ईस्ट जिले में मिले हैं।
    3,275 आवेदन ईस्ट जिले से हुए प्राप्त
    वहीं, फॉर्म-S के जरिए वोटर लिस्ट में सुधार के सबसे अधिक 33,275 आवेदन ईस्ट जिले से प्राप्त हुए हैं। SIR के तहत 31 अगस्त से 30 सितंबर तक क्लेम और ऑब्जेक्शन दाखिल किए जा सकते हैं।

    तुगलकाबाद विधानसभा सीट में सबसे ज्यादा नाम हटे
    बता दें कि दिल्ली की तुगलकाबाद विधानसभा सीट में सर्वाधिक नाम हटे हैं। यहां 1,92,419 वोटर्स हैं। इनमें 1,00,345 वोटर्स के नाम ड्राफ्ट रोल में हैं, जबकि 92,074 वोटर्स के नाम लिस्ट में नहीं हैं। अगर 2025 विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो 2,04,802 वोटर्स में से 1,14,402 ने मतदान किया था। यहां पिछले साल वोट डालने वालों की संख्या के बराबर लोगों के नाम तक नहीं जुड़े हैं। इसी तरह ओखला में 3,62,813 वोटर्स में से 1,96,362 के नाम लिस्ट में हैं, जबकि 1,64,451 के नाम कट गए हैं।

     

  • चित्रकूट में घटा मंदाकिनी का जलस्तर, 688 लोगों का रेस्क्यू, सीएम योगी के निर्देश पर राहत-बचाव अभियान जारी

    चित्रकूट में घटा मंदाकिनी का जलस्तर, 688 लोगों का रेस्क्यू, सीएम योगी के निर्देश पर राहत-बचाव अभियान जारी

    लखनऊ

    चित्रकूट में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन राहत और बचाव कार्यों को लेकर पूरी तरह सतर्क है। मंदाकिनी नदी का जलस्तर 29 अगस्त को 135.20 मीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद अब घटकर 128.00 मीटर पर आ गया है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक जलस्तर में गिरावट के बावजूद प्रशासन ने निगरानी और राहत कार्यों में कोई ढिलाई नहीं की है। अब तक 688 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है। वहीं जिले में बाढ़ से कोई भी जनहानि या पशुहानि नहीं हुई है।

    बाढ़ की स्थिति के दौरान प्रशासन ने अब तक करीब 688 लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत एवं सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। बचाव अभियान के लिए एनडीआरएफ की टीम के 30 सदस्य और एसडीआरएफ की दो टीमों के 27 सदस्य तैनात किए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन की टीमें भी लगातार सक्रिय हैं।

    36 गांवों के 13,906 लोगों तक पहुंची मदद

    मंदाकिनी नदी में बढ़े जलस्तर से कर्वी के रामघाट सहित 19 गांव, राजापुर के 7 गांव और मानिकपुर के 10 गांव, यानी कुल 36 गांव प्रभावित हुए। इन क्षेत्रों में  13,906 लोगों तक मदद पहुंचाई गई। प्रशासन प्रभावित आबादी तक भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के काम में जुटा हुआ है।

    28,803 लंच पैकेट बांटे गए

    बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर व्यवस्था की गई है। तहसील कर्वी में 24,530, राजापुर में 4,043 और मानिकपुर में 230 यानी कुल 28,803 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इससे प्रभावित परिवारों को संकट के समय भोजन की तत्काल सुविधा मिली है।

    2,065 राहत किट का वितरण

    प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों तक जरूरी सामग्री पहुंचाने के लिए राहत किट का वितरण किया जा रहा है। अब तक कर्वी में 1,073, राजापुर में 796 और मानिकपुर में 196 यानी कुल 2,065 राहत किट वितरित की जा चुकी हैं। साथ ही अन्य प्रभावितों तक भी तेजी से राहत किट पहुंचाई जा रही है। वहीं प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए जिले में 18 बाढ़ शरणालय क्रियाशील हैं।

    मकान क्षति पर तत्काल आर्थिक सहायता

    जिले में बाढ़ से 653 मकानों के आंशिक क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें से 188 मामलों में 7.52 लाख रुपये की सहायता राशि लाभार्थियों के खातों में भेजी जा चुकी है। वहीं पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त एक मामले में 1.20 लाख रुपये की सहायता दी गई है। शेष मामलों में भी भुगतान की प्रक्रिया जारी है।

    स्वास्थ्य और फसल क्षति पर भी नजर

    बाढ़ प्रभावित और संभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत रखने के लिए 28 मेडिकल टीमें एंबुलेंस और आवश्यक दवाओं के साथ स्वास्थ्य परीक्षण व दवा वितरण कर रही हैं। वहीं किसानों को राहत देने के लिए फसल क्षति का सर्वेक्षण भी कराया जा रहा है।
    12 चरवाहों और 2 हजार से अधिक भेड़ों को बचाया

    गाजीपुर में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से डूहिया सरैया के पास नदी के टापू पर फंसे 12 चरवाहों और 2 हजार से अधिक भेड़ों को पुलिस और प्रशासन ने बचाया। करीब छह घंटे चले जोखिमपूर्ण अभियान के बाद यह सफलता मिली। 

    देर रात में सूचना मिलते ही पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीम ददरी घाट पहुंची। नाइट विजन ड्रोन से फंसे लोगों और भेड़ों की लोकेशन चिन्हित की गई। इसके बाद फ्लड कंपनी पीएसी, पुलिस, प्रशासनिक टीम और स्थानीय नाविकों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान चलाया। अभियान में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। स्थानीय ग्रामीणों और चरवाहों ने त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस-प्रशासन की सराहना की।

  • झारखंड के छात्रों के लिए बड़ी खबर, प्लस टू में AI-कंप्यूटर साइंस समेत नए विषय होंगे शामिल

    झारखंड के छात्रों के लिए बड़ी खबर, प्लस टू में AI-कंप्यूटर साइंस समेत नए विषय होंगे शामिल

     रांची
     राज्य के प्लस टू उच्च विद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड कोडिंग, साइबर सिक्योरिटी एंड डेटा साइंस, कंप्यूटर साइंस, अप्लाइड इंग्लिश जैसे विषयों में पढ़ाई शुरू करने के लिए सिलेबस तैयार करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इसकी जिम्मेदारी झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) को सौंपी है। प्रयास है कि शैक्षणिक सत्र 2027-28 से इन विषयों का सिलेबस तैयार हो ताकि इन विषयों की पढ़ाई शुरू की जा सके। जेसीईआरटी को नौवीं से 12वीं कक्षा के लिए इन विषयों का सिलेबस तैयार करना है।

    स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इन विषयों के लिए माध्यमिक आचार्य के पद पहले ही स्वीकृत कर लिए हैं। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग से इन विषयों में माध्यमिक आचार्य के पदों पर नियुक्ति की अनुशंसा भी विभाग को मिल चुकी है। अनुशंसित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

    उम्मीद की जा रही है कि शीघ्र ही शिक्षकों की नियुक्ति प्लस टू विद्यालयों में हो जाएगी। इधर, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जेसीईआरटी को कमेटी गठित कर सिलेबस का प्रारुप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें विशेषज्ञ शिक्षकों का भी सहयोग लेने का निर्देश दिया गया है।

    एनसीईआरटी के दिशा-निर्देशों तथा सीबीएसई स्कूलों में लागू पाठ्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए राज्य के लिए सिलेबस तैयार किया जाएगा। सिलेबस तैयार करने के लिए कई कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। उल्लेखनीय है कि राज्य के प्लस टू विद्यालयों के लिए पहली बार माध्यमिक आचार्य के पद सृजित किए गए हैं।

  • ‘हनुमान अंश’ की कामयाबी से खुश ओपुलेंट स्कूल, पूर्व छात्र एवं फैकल्टी शौभिनव सत्या को दी शुभकामनाएं

    ‘हनुमान अंश’ की कामयाबी से खुश ओपुलेंट स्कूल, पूर्व छात्र एवं फैकल्टी शौभिनव सत्या को दी शुभकामनाएं

    ‘हनुमान अंश’ की सफलता पर ओपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स ने जताया गर्व, पूर्व छात्र एवं फैकल्टी शौभिनव सत्या को दी शुभकामनाएं

    लखनऊ
    ओपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स ने अपने पूर्व छात्र, फैकल्टी एवं टीम सदस्य शौभिनव सत्या को फिल्म ‘हनुमान अंश’ की उल्लेखनीय सफलता के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। संस्थान के संस्थापक मनीष नंदन ने कहा कि शौभिनव सत्या की सफलता पूरे ओपुलेंट परिवार के लिए गर्व का विषय है। छोटे शहरों और सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले प्रतिभाशाली युवाओं के लिए शौभिनव की यात्रा एक प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि मेहनत, ईमानदारी, अनुशासन और प्रतिभा के बल पर शौभिनव ने अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।

    उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में नए कलाकारों के लिए अपनी पहचान बनाना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में शौभिनव की उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि निरंतर मेहनत और प्रतिभा के दम पर स्थापित धारणाओं और पारंपरिक सीमाओं को चुनौती दी जा सकती है।

    ओपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स के सह-संस्थापक एवं फिल्म निर्देशक नितिश नंदन ने कहा कि ओपुलेंट की स्थापना 15 मई 2011 को हुई थी और यह लखनऊ के शुरुआती प्रमुख फिल्म एवं एक्टिंग ट्रेनिंग संस्थानों में से एक है। उन्होंने बताया कि संस्थान के संस्थापक सदस्यों में NSD से प्रशिक्षित स्वर्गीय अलोपी वर्मा जी के नाट्य समूह से जुड़े कलाकारों के साथ-साथ NSD स्नातक एवं फिल्म अभिनेता आलोक नाथ जी, अभिनेत्री सीमा बिस्वास जी, टीवी के लोकप्रिय कलाकार योगेश त्रिपाठी, जो ‘दरोगा हप्पू सिंह’ के किरदार के लिए जाने जाते हैं, तथा आशीष श्रीवास्तव सहित कई प्रतिष्ठित कलाकार एवं रंगकर्मी शामिल रहे हैं।
    नितिश नंदन ने बताया कि अपनी स्थापना से अब तक 1,500 से अधिक कलाकार ओपुलेंट से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें अनेक कलाकारों ने थिएटर, टेलीविजन और फिल्म के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।

    उन्होंने कहा कि शौभिनव सत्या के साथ विद्यार्थी और फैकल्टी के रूप में ओपुलेंट ने कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। शौभिनव संस्थान से अपने जुड़ाव के दौरान न केवल कलाकार के रूप में सक्रिय रहे, बल्कि नई प्रतिभाओं के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए एक फैकल्टी सदस्य के रूप में भी योगदान दिया है।
    नितिश नंदन ने आगे कहा, “शौभिनव आज अपने व्यस्त पूर्व-निर्धारित शूटिंग शेड्यूल के कारण लगातार व्यस्त हैं। हमें उम्मीद है कि वे अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर भविष्य में ओपुलेंट मीडिया एंड एंटरटेनमेंट के साथ भी फिल्म एवं अन्य रचनात्मक प्रोजेक्ट्स में काम करेंगे। ओपुलेंट परिवार के साथ उनका यह जुड़ाव हमारे लिए हमेशा विशेष रहेगा।”
    मनीष नंदन ने कहा कि शौभिनव सत्या की सफलता ओपुलेंट के विद्यार्थियों और देशभर के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो छोटे शहरों से निकलकर सिनेमा की दुनिया में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।
    उन्होंने कहा, “शौभिनव आज एक उभरते हुए सितारे हैं और हमें विश्वास है कि आने वाले समय में वे एक बड़े कलाकार और सुपरस्टार के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेंगे। उनकी यात्रा अभी शुरू हुई है और हमें उनकी आने वाली उपलब्धियों का इंतजार है।”
    ओपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स परिवार ने शौभिनव सत्या को उनके आगामी प्रोजेक्ट्स एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।