Category: राज्य

  • शिक्षा में AI की नई शुरुआत: बिहार के शिक्षकों को प्रशिक्षित करेगा गूगल इंडिया

    शिक्षा में AI की नई शुरुआत: बिहार के शिक्षकों को प्रशिक्षित करेगा गूगल इंडिया

    पटना
    बिहार के शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के क्षेत्र में गूगल इंडिया दक्ष बनाएगा। शिक्षा दिवस समारोह के मौके पर इस बाबत शिक्षा विभाग और गूगल इंडिया के साथ करार हुआ।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की मौजूदगी में एससीईआरटी के निदेशक यतेंद्र कुमार पाल और गूगल इंडिया के कंट्री हेड संजय जैन ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने राज्य के शिक्षकों से पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षक ही बिहार के स्वर्णिम भविष्य के निर्माता हैं। उनके भीतर देश का सर्वोच्च पद हासिल करने का माद्दा है।

    शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के साथ उनके व्यक्तित्व और चरित्र का भी निर्माण करते हैं। शिक्षकों का सबसे महत्वपूर्ण कर्मक्षेत्र उनका विद्यालय है। अब उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पटना आकर धरना-प्रदर्शन करने की नौबत नहीं आएगी। इस अवसर पर कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी विनय कुमार, शिक्षा सचिव राजीव रौशन, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, शिक्षा विभाग के विशेष सचिव धर्मेन्द्र कुमार, प्राथमिक शिक्षा निदेशक निशांत कुमार विवेक, माध्यमिक शिक्षा निदेशक नितिन कुमार सिंह, एससीईआरटी के निदेशक यतेंद्र कुमार पाल, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एसए, जिलाधिकारी कुंदन कुमार, वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा उपस्थित थे।

    लाइव प्रसारण से जुड़े स्कूलों के विद्यार्थी और शिक्षक
    कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय समेत राज्य के उन माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में, जहां स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब की सुविधा उपलब्ध है, वहां समारोह का सीधा प्रसारण किया गया। इससे हजारों विद्यालयों में मौजूद शिक्षक और विद्यार्थी सीधे जुड़े रहे।

    दूसरे सत्र में बच्चों की प्रस्तुतियों ने मन मोहा : समारोह के दूसरे सत्र में स्कूली बच्चों ने लगभग दो घंटे तक नृत्य और संगीत की प्रस्तुति देकर लोगों का मन मोह लिया। इसके लिए राजधानी के 11 स्कूलों के तकरीबन 400 बच्चों और शिक्षकों को बुलाया गया था।

  • गुमशुदा बच्चों की घर वापसी में यूपी पुलिस की बड़ी कामयाबी, 18 हजार से अधिक मामलों का हुआ समाधान

    गुमशुदा बच्चों की घर वापसी में यूपी पुलिस की बड़ी कामयाबी, 18 हजार से अधिक मामलों का हुआ समाधान

    योगी सरकार में गुमशुदा बच्चों की तलाश को मिली और रफ्तार, 18 हजार से ज्यादा मामलों का निस्तारण

    बाल हेल्पलाइन पर 7 महीने में सामने आए करीब 20,500 मामले

    9,146 बच्चों से जुड़े मामलों में 92.05% का निस्तारण, परिवारों तक सुरक्षित पहुंचाने पर जोर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बाल सुरक्षा के व्यापक तंत्र को मिल रही मजबूती

    महिला कल्याण विभाग की सक्रियता से बड़ी संख्या में परिवारों को मिली राहत

    लखनऊ,
    बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और सुरक्षित भविष्य को लेकर योगी सरकार की संवेदनशीलता का असर बाल हेल्पलाइन के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से सामने आया है। 7 महीने में बाल हेल्पलाइन (1098) पर बच्चों के गुम होने से संबंधित करीब 20,500 मामले सामने आए, जिनमें 18,123 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। गुमशुदा बच्चों की तलाश, उनकी सुरक्षित बरामदगी और परिवार से पुनर्मिलन के लिए प्रदेश का बाल संरक्षण तंत्र लगातार सक्रियता से काम कर रहा है। संकट में फंसे बच्चों तक समय पर सहायता पहुंचाने और उन्हें सुरक्षित उनके परिवार तक वापस पहुंचाने के लिए सरकार ने एक संवेदनशील और जवाबदेह व्यवस्था विकसित की है।

    हर सूचना पर सक्रियता, बड़ी संख्या में परिवारों को मिली राहत

    बाल हेल्पलाइन के आंकड़ों के अनुसार,1 जनवरी से 1 अगस्त 2026 तक बच्चों से संबंधित कुल 58,293 मामले प्राप्त हुए, जिनमें 50,589 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या गुमशुदा बच्चों से संबंधित मामलों की रही। वहीं 9,146 बच्चों के मिलने से जुड़े मामले भी हेल्पलाइन तक पहुंचे, जिनमें 8,419 मामलों का समाधान किया गया। योगी सरकार की प्राथमिकताओं में बच्चों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्रमुख रूप से शामिल है। इसी सोच के तहत हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं को संबंधित स्तर तक पहुंचाने के साथ मामलों की प्रगति पर भी नजर रखी जा रही है। 

    गुमशुदा बच्चों की सुरक्षित वापसी पर विशेष फोकस

    गुमशुदगी के मामलों में बड़ी संख्या में निस्तारण होना उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है, जिनके बच्चे किसी कारण से उनसे बिछड़ गए। बाल संरक्षण तंत्र बच्चों की तलाश के साथ उनकी सुरक्षा और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दे रहा है। बच्चों के मिलने के बाद उन्हें परिवार तक सुरक्षित पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाती है।

    काउंसलिंग और पुनर्वास पर दिया जा रहा ध्यान

    महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने बताया कि प्रदेश सरकार बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। गुमशुदा बच्चों से संबंधित प्रत्येक सूचना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जाती है। बच्चों की तलाश के साथ उनकी सुरक्षित वापसी, परिवार से पुनर्मिलन तथा जरूरत के अनुसार काउंसलिंग और पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बाल हेल्पलाइन पर केवल गुमशुदगी ही नहीं, बल्कि अन्य समस्याओं से जुड़े मामले भी सामने आते हैं। इन पर भी संबंधित विभागों और संस्थाओं के समन्वय से कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में हेल्पलाइन बच्चों की समस्याओं को सुनने और उन्हें समाधान तक पहुंचाने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में काम कर रही है।

  • आधुनिक सुविधाओं से संवरेंगे यूपी के गांव, योगी सरकार का डिजिटल लाइब्रेरी से पंचायत भवन तक जोर

    आधुनिक सुविधाओं से संवरेंगे यूपी के गांव, योगी सरकार का डिजिटल लाइब्रेरी से पंचायत भवन तक जोर

    गांवों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ रही योगी सरकार, डिजिटल लाइब्रेरी से लेकर पंचायत उत्सव भवन तक पर जोर

    ग्रामीण युवाओं के लिए पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का नया केंद्र

    पंचायत भवन बनेंगे गांव के सामाजिक केंद्र, जवाबदेही और गुणवत्ता पर भी निगरानी

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के साथ-साथ पंचायतों को शिक्षा, डिजिटल संसाधन और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में ग्राम पंचायत स्तर पर डिजिटल लाइब्रेरी, पंचायत उत्सव भवन और बहुउद्देशीय पंचायत भवनों के निर्माण एवं संचालन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
       वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में प्रदेश की ग्राम पंचायत एवं वार्ड स्तर पर डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना के लिए 454 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही 1000 बहुउद्देशीय पंचायत भवनों के निर्माण के लिए करीब 57 करोड़ रुपये तथा प्रत्येक विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत उत्सव भवन/बारात घर के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। 

        ग्राम पंचायतों में स्थापित की जा रही डिजिटल लाइब्रेरियों का उद्देश्य केवल किताबें उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गांव के बच्चों और युवाओं को ई-बुक्स, डिजिटल अध्ययन सामग्री और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सामग्री पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराना है। सरकार की योजना के तहत डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने और ग्रामीण युवाओं में पढ़ने की आदत विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। डिजिटल लाइब्रेरी परियोजना के तहत कई जिलों में फर्नीचर और पुस्तकों की आपूर्ति का काम पूरा हो चुका है, जबकि कुछ स्थानों पर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जानी बाकी है। इसके साथ ही डिजिटल लाइब्रेरियों के लिए आईटी उपकरण, फर्नीचर, पुस्तकों और ई-कंटेंट की व्यवस्था तथा उनके रखरखाव के लिए मानक कार्यप्रणाली (SOP) पर भी जोर दिया गया है।

      योगी सरकार की ग्रामीण विकास की सोच में पंचायत भवनों को केवल सरकारी कामकाज तक सीमित रखने के बजाय उन्हें गांव के सामाजिक, शैक्षिक और सामुदायिक केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर है। पंचायत उत्सव भवनों का उपयोग विवाह, सामाजिक और मांगलिक कार्यक्रमों के लिए किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने भी ग्राम पंचायतों में उत्सव भवन विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है और राज्य सरकार की ओर से इसके लिए वित्तीय सहयोग की व्यवस्था की गई है। 

        डिजिटल लाइब्रेरी के संचालन को लेकर उत्तरदायित्व एवं संचालन, भवन-सुरक्षा एवं स्वच्छता, पुस्तक एवं फर्नीचर प्रबंधन, आईटी उपकरण, निरीक्षण-रिपोर्टिंग एवं नागरिक फीडबैक तथा जवाबदेही एवं अनुपालन को प्रमुख बिंदु बनाया गया है। यानी सरकार केवल संसाधन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उनके नियमित संचालन और उपयोगिता की निगरानी पर भी जोर दिया जा रहा है। इस पूरी पहल को योगी सरकार के उस विजन से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें गांवों को बेहतर शिक्षा, डिजिटल सुविधाओं, आधुनिक पंचायत व्यवस्था और सामुदायिक आधारभूत ढांचे से लैस कर ग्रामीण जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
         डिजिटल लाइब्रेरी से गांव के युवा डिजिटल दुनिया से जुड़ेंगे, जबकि पंचायत उत्सव भवन ग्रामीण समाज को सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराएंगे। इस तरह पंचायतें केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि गांव के विकास और सामाजिक परिवर्तन के केंद्र के रूप में विकसित हो रही हैं।

  • शिक्षक प्रशिक्षण को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम, 17 डायटों में वरिष्ठ प्रवक्ता बने प्रभारी प्रधानाचार्य

    शिक्षक प्रशिक्षण को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम, 17 डायटों में वरिष्ठ प्रवक्ता बने प्रभारी प्रधानाचार्य

    योगी सरकार के प्रयासों से मजबूत हो रही शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था, 17 डायटों में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य का प्रभार

    – वरिष्ठता क्रम के आधार पर वरिष्ठ प्रवक्ताओं को सौंपी गई जिम्मेदारी

    – विशेष सचिव बेसिक शिक्षा, यतीन्द्र कुमार ने निदेशक एससीईआरटी को दिए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश

    – डायटों के प्रभावी संचालन से शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों को मिलेगा संस्थागत संबल

    – एटा, इटावा और मऊ में भी अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता के साथ शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था को भी लगातार सुदृढ़ कर रही है। इसी क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव यतीन्द्र कुमार ने निदेशक, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तर प्रदेश को पत्र जारी कर 17 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को वरिष्ठता क्रम के आधार पर प्रधानाचार्य पद का प्रभार दिए जाने के संबंध में आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एटा, इटावा और मऊ के डायट में तीन वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

    योगी सरकार के विशेष सचिव की ओर से जारी पत्र में शासन द्वारा सम्यक विचारोपरांत डायटों के सुचारु संचालन के लिए संबंधित वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य पद का प्रभार दिए जाने का निर्णय बताया गया है। निदेशक एससीईआरटी को संबंधित अधिकारियों को प्रभार दिलाने और आवश्यक अग्रेतर कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    डायट, प्रदेश की शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। शिक्षकों के प्रशिक्षण, क्षमता संवर्धन, शैक्षणिक सहयोग और विद्यालयी शिक्षा में नवाचारों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में इन संस्थानों की अहम भूमिका है। ऐसे में डायटों को प्रभावी नेतृत्व उपलब्ध कराना शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था को संस्थागत रूप से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

    17 डायटों में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को जिम्मेदारी
    शासन के निर्देश के अनुसार इनमें राजेश कुमार सिंह (बहराइच), राम प्रताप सिंह (श्रावस्ती), विनोद कुमार (हमीरपुर), मुक्तेश कुमार (फिरोजाबाद), संजय कुमार (फर्रुखाबाद), नवाब वर्मा (हाथरस), दीपक श्रीवास्तव (ललितपुर), अश्वनी प्रताप सिंह (जालौन), विश्वदीपक त्रिपाठी (चंदौली), विमलेश कुमार त्रिपाठी (मिर्जापुर), सुरिद्धि पाण्डेय (सोनभद्र), सुनील कुमार (बलिया), कुलदीप नारायण सिंह (देवरिया), दीनानाथ (कुशीनगर), नरेन्द्र सिंह (संतकबीर नगर), आशीष चौहान (शाहजहांपुर) और नन्दित कुमार (झांसी) शामिल हैं।

    इन्हें मिला अतिरिक्त प्रभार
    जिन तीन वरिष्ठ प्रवक्ताओं/अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, उनमें पत्र में आराध्य उपाध्याय, वरिष्ठ प्रवक्ता, डायट अलीगढ़ को डायट एटा, अतुल कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक, इटावा को डायट इटावा तथा अतुल कुमार तिवारी, वरिष्ठ प्रवक्ता, डायट मऊ को डायट मऊ के प्रधानाचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के लिए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।

  • मुख्यमंत्री ने कालभैरव और बाबा विश्वनाथ की चौखट पर मत्था टेका

    मुख्यमंत्री ने कालभैरव और बाबा विश्वनाथ की चौखट पर मत्था टेका

    मुख्यमंत्री ने कालभैरव और बाबा विश्वनाथ की चौखट पर मत्था टेका

    प्रदेश की सुख-शांति, समृद्धि और लोक कल्याण के लिए मुख्यमंत्री ने की पूजा-अर्चना

    वाराणसी
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी कोतवाल बाबा कालभैरव और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन कर देश और प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और लोक कल्याण की कामना की। 

    मुख्यमंत्री शनिवार को 'काशी कोतवाल' बाबा कालभैरव मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं आरती कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। बाबा कालभैरव के चरणों में शीश नवाकर उन्होंने लोक कल्याण और उत्तर प्रदेश की समृद्धि के लिए मंगल कामना की। इसके बाद मुख्यमंत्री श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे। यहां उन्होंने बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया तथा प्रदेश और देशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं लोक कल्याण की प्रार्थना की।

  • जालंधर में आज ड्रोन शो से सजेगा आसमान, गुरु रविदास प्रकाश पर्व पर दिखेगा शानदार नजारा

    जालंधर में आज ड्रोन शो से सजेगा आसमान, गुरु रविदास प्रकाश पर्व पर दिखेगा शानदार नजारा

    जालंधर

    जालंधर में श्री गुरु रविदास महाराज जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित ड्रोन शो आज 6 सितंबर को शाम 6 बजे स्थानीय लायलपुर खालसा कॉलेज में होगा। इसे लेकर प्रशासन ने तैयारियों का जायजा लिया और जरूरी निर्देश दिए।

    इस संबंध में उप मंडल मैजिस्ट्रेट शुभी आंगरा ने कार्यक्रम स्थल पर व्यवस्थाओं का जायजा लेने और विभिन्न विभागों को ड्यूटियां सौंपने के लिए बैठक की। एसडीएम ने बताया कि ड्रोन लाइट शो के माध्यम से श्री गुरु रविदास महाराज जी के महान जीवन, दर्शन और शाश्वत शिक्षाओं को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया जाएगा।

    बैठक के दौरान श्रद्धालुओं के लिए बेहतर अनुभव सुनिश्चित करने के लिए यातायात प्रबंधन, उचित पार्किंग, कार्यक्रम स्थल की सफाई, बैठने की व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सहायता सहित व्यापक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया।

    ड्रोन शो के अलावा प्रसिद्ध रागी जत्थे भी शामिल होंगे
    ड्रोन शो के अलावा प्रसिद्ध रागी जत्थे भी शामिल होंगे, जो संगत को श्री गुरु रविदास महाराज जी की पवित्र बाणी से जोड़ने के लिए कीर्तन करेंगे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संगत के पहुंचने की उम्मीद है। कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व भी श्रद्धा भेंट करने के लिए साधारण श्रद्धालुओं के रूप में शामिल होंगे।

    पंजाब सरकार मना रही है गुरु रविदास प्रकाश पर्व
    पंजाब सरकार की ओर से श्री गुरु रविदास महाराज जी का प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है। इस कड़ी में पूरे सूबे में ड्रोन शो के अलावा गुरु के जीवन को दर्शाने के लिए अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित 6.50 लाख पौधे लगाने का अनूठा अभियान भी शुरू किया गया है।

    गुरु रविदास जी वाणी अध्ययन केंद्र की स्थापना की जा रही
    श्री गुरु रविदास महाराज जी की शिक्षाओं के प्रसार और अकादमिक शोध को प्रोत्साहित करने के लिए डेरा सचखंड बल्लां के पास करीब 11 एकड़ क्षेत्र में श्री गुरु रविदास जी वाणी अध्ययन केंद्र की स्थापना की जा रही है।

  • श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूरे प्रदेश में आयोजन हुए, लेकिन कहीं दंगा या कर्फ्यू का नाम नहीं सुना होगा: सीएम योगी

    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूरे प्रदेश में आयोजन हुए, लेकिन कहीं दंगा या कर्फ्यू का नाम नहीं सुना होगा: सीएम योगी

    गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कि शिक्षा में राजनीति का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। राजनीति के चश्मे से देखने वालों को 2017 के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आया आमूलचूल परिवर्तन दिखाई नहीं देगा। उन्होंने प्रदेशभर के शिक्षकों का आह्वान किया कि वे शिक्षा व्यवस्था में उत्कृष्टता और नवाचार को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आगे बढ़ाएं। यही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा प्रदेश और देश का भविष्य बनाएगी। 

    सीएम योगी शनिवार को शिक्षक दिवस पर बेसिक व माध्यमिक शिक्षा के राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। गोरखपुर में योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित इस समारोह में बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षकों (कुल 81) को पुरस्कृत किया गया। सभी शिक्षकों को मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से पुरस्कृत किया। शिक्षकों को पुरस्कार देते समय सीएम योगी ने उनसे आत्मीय संवाद कर बधाई दी और उन्हें प्रोत्साहित भी किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विगत साढ़े नौ साल में शिक्षा व्यवस्था में आए सकारात्मक परिवर्तन की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में सुदृढ़ता लाने का काम वर्ष 2017 से पहले भी हो सकता था। पर, तत्कालीन सरकारों ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने तंज कसा, ‘जितना पैसा आप सैफई महोत्सव में खर्च करते थे, उसी में थोड़ा सा पैसा शिक्षा की तरफ डाइवर्ट करते तो लाखों बच्चों का भविष्य बन चुका होता। जितने पैसे में बकिंघम की बग्गी मंगा कर अपना जन्मदिन मनाते थे, उतना पैसा शिक्षा पर खर्च करते, तो बच्चों का भविष्य बनता, पहचान का संकट नहीं आता।’

    टिप्पणी करना आसान है, कर के दिखाना मुश्किल
    मुख्यमंत्री ने शिक्षा पर राजनीति करने वालों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि चुनावी घोषणा अलग बात है, लेकिन स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी बनाना कठिन होता है, यह आज प्रदेश में दिखाई दे रहा है। बयान देना आसान है, लेकिन 1.60 करोड़ बच्चों के अकाउंट में डीबीटी से पैसा पहुंचाना कठिन है और यह हुआ है। संस्कृत की छठी क्लास से लेकर आचार्य तक, बच्चों को स्कॉलरशिप के साथ जोड़ना कठिन था, लेकिन सरकार ने वह भी किया। प्रोजेक्ट अलंकार, ऑपरेशन कायाकल्प से बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में परिवर्तन कठिन था, पर इसे भी किया गया। टिप्पणी करना बहुत आसान है, लेकिन करके दिखाना मुश्किल।

    यूपी को बदनाम करने के लिए दुष्प्रचार
    सीएम योगी ने यूपी को बदनाम करने के लिए दुष्प्रचार की तरफ भी ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्य के जर्जर विद्यालय भवन का वीडियो झांसी का बताकर चलाया गया। यूपी के शिक्षा जगत को अपमानित करने का प्रयास करने वालों को स्मार्ट क्लास, ऑपरेशन कायाकल्प जैसे व्यापक परिवर्तन दिखाई नहीं देते। लेकिन, हमारी प्रतिस्पर्धा चुनावी घोषणाबाजों से नहीं, समय से है। जिस बच्चे को आप पढ़ा रहे हैं, अगर उसमें चूक हो गई तो उसका बचपन दोबारा नहीं आने वाला। इसलिए सही समय पर सही दिशा में सही निर्णय लेने की आदत होनी चाहिए। शिक्षा के प्रति विश्वास को बनाए रखना सरकार और शिक्षकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। बदलती टेक्नोलॉजी पर हम मौन नहीं रह सकते। हमें एआई, रोबोटिक्स व ड्रोन टेक्नोलॉजी के अनुरूप खुद को तैयार करने की जरूरत है।

    2017 से पहले दंगा-कर्फ्यू व अराजकता का दौर
    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों को प्रदेश में चार बार शासन करने का अवसर मिला और जिस कांग्रेस को लगभग छह दशक तक यूपी में शासन करने का अवसर प्राप्त हुआ था, वे दोनों प्रदेश की बदलती व्यवस्था पर प्रश्न खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। पुराने जर्जर भवन दरअसल उन्हीं के स्मारक थे, जिन्हें हम रिप्लेस कर चुके हैं, वे शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्न खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। डबल इंजन की सरकार शिक्षा व्यवस्था को एक्सक्लूसिव, अधिक संसाधनपूर्ण तथा पारदर्शी बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। कोई ऐसा शिक्षक नहीं होगा, जिसने नौ वर्ष पहले और आज के उत्तर प्रदेश का परिवर्तन नहीं देखा हो। 2017 से पहले उपद्रव, कर्फ्यू, दंगे व अराजकता के माहौल में स्कूल-कॉलेजों के चलने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। अब कहीं कोई संकट नहीं। कोई उत्सव से पहले उपद्रव नहीं कर सकता। कल जन्माष्टमी थी। सभी 1586 थानों में, देव मंदिरों में, 75 जनपदों की पुलिस लाइन में, सभी जेलों में, हर मोहल्ले-गांव में इसके आयोजन हुए, लेकिन कहीं कर्फ्यू या दंगे का नाम भी नहीं सुना होगा।

    यूपी के शिक्षकों पर अब कोई प्रश्न नहीं
    सीएम योगी ने कहा कि आज के उत्तर प्रदेश में कोई शिक्षकों पर प्रश्न नहीं खड़ा करता। जबकि 2017 के पहले ठेके पर नकल होती थी। स्कूल-कॉलेज नकल के अड्डे बन गए थे। युवाओं के सामने पहचान का संकट था और भारत की सबसे बड़ी आबादी का राज्य कठघरे में खड़ा दिखाई देता था। लोग उत्तर प्रदेश में आना नहीं चाहते थे। हमारे युवाओं व शिक्षकों को बाहरी राज्यों में शक की निगाहों से देखा जाता था। लेकिन, अब सभी जगह हमारे युवाओं व शिक्षकों का सम्मान किया जाता है। यूपी के प्रति धारणा बदली है। इस परिवर्तन के महत्वपूर्ण वाहक शिक्षक हैं और शिष्य का योग्य व संस्कारी बनना ही सबसे बड़ी गुरु दक्षिणा है।

    टीचर, टैलेंट और ट्रांसफॉर्मेशन को जोड़ा गया
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए टीचर, टैलेंट और ट्रांसफॉर्मेशन जोड़ा गया। इस ट्रिपल-टी में शिक्षक का सम्मान, विद्यार्थी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संसाधनों की उपलब्धता पर जोर है। सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर 18 हजार और अनुदेशकों का 17 हजार रुपये कर दिया है। 5 लाख रुपये कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा और सामाजिक सुरक्षा की भी गारंटी दी गई। बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा से जुड़े हुए सभी शिक्षकों, शिक्षणोत्तर कर्मचारियों व उनके परिवार को 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का काम किया गया। पहली बार सोशल सिक्योरिटी की गारंटी दी गई। हमारा मानना है कि बच्चों का भविष्य गढ़ने वालों का सम्मान पहले होना चाहिए। राज्य अध्यापक पुरस्कार की राशि को 10000 से बढ़ाकर 25000 रुपये किया गया। सेवा मामलों में पारदर्शिता के लिए ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट पोर्टल विकसित किया गया। इसी तरह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अनेक कार्य किए गए। निपुण भारत अभियान के अच्छे परिणाम मिल रहे हैं, यह अब पांचवी क्लास तक चलेगा। 

    पूरा देश देख रहा यूपी का शिक्षा मॉडल
    मुख्यमंत्री ने बताया कि अकेले माध्यमिक शिक्षा में 1500 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि पुराने व जर्जर विद्यालय भवनों की जगह नए भवन बनाने के लिए उपलब्ध कराई गई। इससे 2100 से अधिक अच्छे भवन बने हैं। पहले चरण में हर जनपद में दो-दो सीएम कंपोजिट विद्यालय बनवाए जा रहे हैं। इसे  तहसील स्तर पर लागू करने का प्रयास है। इसका मॉडल अटल आवासीय विद्यालय की तर्ज पर डे-स्कूल जैसा होगा, जहां पहली से लेकर 12वीं तक के बच्चे इंटीग्रेटेड कैंपस में पढ़ पाएंगे। यूपी के स्कूलों में आज स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, बालक-बालिकाओं के लिए सेपरेट टॉयलेट, शुद्ध पेयजल व्यवस्था व भरपूर बिजली है। 32000 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 15000 से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब, 1129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी और 261000 से अधिक शिक्षकों को टैबलेट उपलब्ध कराए जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश का शिक्षा मॉडल पूरा देश देख रहा है। क्लीन एंड ग्रीन स्कूल बनाने की दिशा में हुए प्रयासों से वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश के 12 विद्यालयों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

    भेदभाव समाप्त करने का सरल माध्यम है टेक्नोलॉजी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों में 21वीं सदी के स्किल्स, डिजिटल लिट्रेसी और इनोवेशन की एप्रोच विकसित करने की दिशा में रोबोटिक्स, थ्री-डी प्रिंटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग के लिए हमारे विद्यालय तैयार हो रहे हैं। जहां स्मार्ट क्लास पहुंची, वहां शहर और गांव का भेद समाप्त हुआ। जहां डिजिटल लाइब्रेरी पहुंची, वहां गरीब और अमीर का भेद समाप्त हुआ। भेदभाव समाप्त करने के लिए टेक्नोलॉजी सबसे सरल माध्यम है। माध्यमिक शिक्षा में 56 लाख बच्चे दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में बैठते हैं। 2017 के पहले 3 महीने परीक्षा चलती थी और 3 महीने लगते थे परिणाम आने में। इस देरी से यूपी के बच्चे यूपी के बाहर कहीं प्रवेश नहीं ले पाते थे। आज समय पर परीक्षा होती है और समय पर परिणाम भी आता है। 

    शिक्षक का स्थान नहीं ले सकती कोई मशीन
    सीएम ने कहा कि टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रयोग के बाद भी शिक्षक का स्थान कोई नहीं ले सकता। मशीन उत्तर दे सकती है, लेकिन मशीन प्रश्न करना नहीं सिखाती। प्रश्न पूछना तो केवल एक शिक्षक सिखाता है। एआई संस्कार नहीं दे सकता, वह तो शिक्षक देगा। शिक्षकों के हाथ में यूपी का, देश का भविष्य है। जिस बच्चे को आज पढ़ा रहे हैं, यही कल शिक्षक, चिकित्सक, अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी, वैज्ञानिक, इंजीनियर और देश का नेतृत्वकर्ता भी बनेगा। बच्चे को जैसा संस्कार और अनुशासन देंगे, उसी रूप में वह आपको स्मरण करेगा।

    डॉ. राधाकृष्णन को याद कर दी शिक्षक दिवस की बधाई
    मुख्यमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन को यादकर प्रदेशवासियों को शिक्षक दिवस की बधाई दी। भारत रत्न से सम्मानित डॉ. राधाकृष्णन को उच्चकोटि का विद्वान और महान दार्शनिक बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी जयंती शिक्षक दिवस के रूप में मनाई जाती है। मुख्यमंत्री ने शिक्षक/गुरु की भूमिका के उल्लेख में वेदव्यास, चाणक्य, सुश्रुत, चरक, आर्यभट्ट आदि के योगदान को भी याद किया। 

    शिक्षा एवं शिक्षक सीएम योगी की प्राथमिकता: गुलाब देवी
    समारोह में माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि शिक्षा एवं शिक्षक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विशेष प्राथमिकता में शामिल हैं। वह शिक्षकों के कल्याण व भलाई के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। इसी के तहत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों को कैशलेस इलाज सहित अनेक सुविधाएं दी हैं। सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी बोर्ड ने परीक्षाओं में शुचिता व पारदर्शिता का श्रेष्ठतम उदाहरण प्रस्तुत किया है। विगत वर्षों में बोर्ड परीक्षा में पेपर लीक जैसी कोई घटना नहीं हुई एवं नकलविहीन परीक्षा संपन्न होकर रिकार्ड समय में परिणाम घोषित हुआ। 
      
    सीएम योगी के मार्गदर्शन में बेसिक शिक्षा में उल्लेखनीय प्रगति: संदीप सिंह
    समारोह में सीएम योगी का स्वागत करते हुए बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि विगत नौ वर्षों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में सरकार शिक्षकों के सम्मान व कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। शिक्षा को डिजिटल टेक्नोलॉजी से जोड़कर उसे वर्तमान और भविष्य के अनुकूल बनाया गया है। हमारी सरकार के लिए शिक्षा राजनीति नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण का माध्यम है। नए बदलाव के क्रम में प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक गुणवत्तापरक शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रदेश में 150 (प्रति जनपद 2) मुख्यमंत्री मॉडल विद्यालयों का निर्माण 4500 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है। योगी सरकार शिक्षकों, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों की समस्याओं के प्रति सदैव संवेदनशील रही है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्त्व में शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा योजना, सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि के ऐतिहासिक निर्णय लिए गए और व्यापक स्तर पर समारोह आयोजित करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया। हाल में रसोइयों के मानदेय एवं ड्रेस धनराशि में वृद्धि की गयी, कैशलेस चिकित्सा योजना कार्ड का वितरण कराया गया। आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा के रूप में दुर्घटना बीमा का लाभ दिलाने हेतु बैंक से एमओयू किया गया।

    इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, एमएलसी ध्रुव त्रिपाठी, विधायक श्रीराम चौहान, फतेह बहादुर सिंह, राजेश त्रिपाठी, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा, भाजपा के जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

    शिक्षा विभाग के स्टालों का अवलोकन किया सीएम ने
    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा विभाग और बाल विकास एवं पुष्टाहार की तरफ से लगाए गए स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने बेसिक शिक्षा के स्टाल पर लर्न बाई डूइंग, समावेशी शिक्षा, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्टाल पर अटल टिकरिंग लैब के बारे में विस्तार से जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने स्टालों पर उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन भी किया।

  • ग्रामीण वोट बैंक पर किसान आंदोलन की नजर, पंजाब में BJP-AAP की बढ़ी चिंता; विपक्ष को फायदा

    ग्रामीण वोट बैंक पर किसान आंदोलन की नजर, पंजाब में BJP-AAP की बढ़ी चिंता; विपक्ष को फायदा

     पटियाला

    विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में एक बार फिर किसान आंदोलन गर्मा गया है। एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, अमेरिका के साथ व्यापार समझौता रद्द करने और ग्रामीण मजदूरों के लिए पेंशन समेत कई मांगों को लेकर किसान मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर धरना दे रहे हैं। आंदोलन का सीधा असर भाजपा पर पड़ सकता है लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी भी इससे अछूती नहीं है। कांग्रेस और अकाली दल के लिए यह किसानों के बीच खोई जमीन वापस पाने का मौका बन सकता है।

    भाजपा के लिए ग्रामीण पंजाब में स्वीकार्यता की परीक्षा
    2020-21 के किसान आंदोलन की राजनीतिक छाया पंजाब में भाजपा पर लंबे समय तक रही। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में किसान संगठनों ने भाजपा के विरोध में अभियान चलाया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा ने भी भाजपा के खिलाफ वोट की अपील की थी। अब भाजपा पंजाब में अपना आधार बढ़ाने में जुटी है। पार्टी 2027 में सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कह रही है। ऐसे में ग्रामीण पंजाब में स्वीकार्यता बढ़ाना उसके लिए बड़ी चुनौती है।

    अगर आंदोलन के कारण केंद्र और भाजपा के खिलाफ माहौल फिर मजबूत हुआ तो मालवा और दोआबा की ग्रामीण सीटों पर असर पड़ सकता है। किसान संगठनों की सक्रियता वाले इलाकों में भाजपा उम्मीदवारों को विरोध और सवालों का सामना करना पड़ सकता है। चुनौती सिर्फ किसान वोट की नहीं बल्कि पूरे ग्रामीण माहौल की है। 

    आप को नाराजगी दूर करने और कांग्रेस-अकाली दल को जमीन मजबूत करने का मौका
    2020-21 में आप ने किसान आंदोलन का समर्थन किया था। 2022 में पार्टी ने 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई। अब किसान शंभू और खनौरी मोर्चों पर मार्च 2025 में हुई पुलिस कार्रवाई और मांगें पूरी न होने को लेकर मान सरकार से नाराज हैं।

    किसान नेता सरवन सिंह पंधेर का आरोप है कि मोर्चों से गायब ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य सामान का मुआवजा पंजाब सरकार ने नहीं दिया। एमएसपी कर्ज मुआवजा फसल विविधीकरण और कृषि लागत से जुड़ी मांगों का संबंध राज्य की नीतियों से भी है। ऐसे में आप विधायकों को गांवों में सवालों का सामना करना पड़ सकता है।

    कांग्रेस के लिए आंदोलन केंद्र की भाजपा सरकार और पंजाब की आप सरकार दोनों को घेरने का अवसर है। हालांकि केवल समर्थन का बयान पर्याप्त नहीं होगा। किसानों के बीच प्रभाव बढ़ाने के लिए उसे मांगों को मजबूती से उठाना होगा।

    कृषि कानूनों के मुद्दे पर भाजपा से गठबंधन तोड़ने वाला अकाली दल भी किसानों के बीच अपनी पुरानी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकता है। आंदोलन लंबा खिंचा तो उसे ग्रामीण पंजाब में वापसी का अवसर मिल सकता है।

    राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर बलविंदर सिंह टिवाणा के अनुसार किसान आंदोलन का असर भाजपा और आप पर पड़ सकता है क्योंकि किसानों की मांगें केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से जुड़ी हैं। मांगें पूरी न होने से दोनों के खिलाफ नाराजगी है। कांग्रेस और अकाली दल सक्रियता से किसानों के समर्थन में आते हैं और उनकी मांगों को उठाते हैं तो दोनों पार्टियां किसानों के बीच अपनी पैठ दोबारा मजबूत कर सकती हैं। 

    किसान आंदोलन कैसे बिगाड़ सकते हैं भाजपा-AAP का गणित, एक्सपर्ट से जानिए…

    1. केंद्र और राज्य के खिलाफ एक साथ मोर्चा: पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप सिंह का कहना है कि किसान संगठनों ने केंद्र और पंजाब सरकार दोनों के खिलाफ एक साथ मोर्चा खोला है। शंभू और खनौरी बॉर्डरों पर पिछले समय में हुए घटनाक्रमों, पुलिस कार्रवाई और किसान मोर्चों से गायब हुई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों व अन्य सामान के मुआवजे का मुद्दा अब तूल पकड़ चुका है। किसान नेताओं का आरोप है कि राज्य सरकार ने न केवल आंदोलनकारियों की सुरक्षा व सहायता में ढिलाई बरती, बल्कि वादे के मुताबिक नुकसान की भरपाई भी नहीं की।

    उन्होंने कहा कि गांवों में अब आम आदमी पार्टी के विधायकों और नेताओं के खिलाफ पोस्टर-होर्डिंग्स लगाकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। कृषि लागत, फसल विविधीकरण और राज्य-स्तरीय मुआवजे से जुड़े मुद्दों के कारण सत्तारूढ़ दल को ग्रामीण क्षेत्रों में भारी जन-असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार से एमएसपी की कानूनी गारंटी और ट्रेड डील रद्द करने की मांग को लेकर किसान अड़े हुए हैं।

    2. आप के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती: पवनदीप शर्मा का कहना है कि 2020-21 के आंदोलन में आम आदमी पार्टी ने किसानों का खुलकर समर्थन किया था, जिसका सीधा फायदा उसे 2022 के चुनाव में 92 सीटें जीतकर मिला था। लेकिन सरकार बनने के बाद अब समीकरण बदल चुके हैं। शंभू और खनौरी मोर्चों पर हुई पुलिस कार्रवाई, किसान आंदोलनों के प्रति ढुलमुल रवैये का आरोप और स्थानीय कृषि समस्याओं के हल न होने से ग्रामीण क्षेत्रों में भगवंत मान सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी है।

    किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के अनुसार, मोर्चों के दौरान हुए नुकसान और गायब हुई गाड़ियों के मुआवजे पर राज्य सरकार का वादा अधूरा रहा। ग्रामीण पंजाब, जो आप का सबसे मजबूत चुनावी स्तंभ माना जाता था, वहां से वोट बैंक छिटकने का सीधा खतरा पैदा हो गया है। यदि मान सरकार जल्द ही किसान संगठनों को संतुष्ट करने में विफल रहती है, तो आगामी चुनावों में उसके विधायकों को गांवों में प्रवेश करते समय भारी जन-आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है।

    3. ग्रामीण वोट होगा बैंक प्रभावित: पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि 2020-21 के कृषि कानून विरोधी आंदोलन का असर भाजपा अब तक झेल रही है। किसान आंदोलन के कारण 2022 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा की अपीलों के चलते भाजपा को ग्रामीण इलाकों में भारी राजनीतिक विरोध सहना पड़ा। स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी को अपने चुनावी बूथ तक लगाने की अनुमति नहीं मिली थी।

    उन्होंने कहा कि भाजपा ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में राज्य की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। ऐसे में मालवा और दोआबा जैसे विशाल ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

    4. किसानों के प्रति भाजपा ने बदली रणनीति: पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि किसानों के लगातार विरोध के बीच पंजाब में अपनी जड़ें जमाने का प्रयास कर रही भाजपा को यह भली-भांति अहसास हो गया है कि किसानों को साधे बिना राज्य की सत्ता तक पहुंचना संभव नहीं है। इसी रणनीति के तहत केंद्र और पड़ोसी राज्य हरियाणा की भाजपा सरकारों ने अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। टकराव की स्थिति को टालने और किसानों के बीच सकारात्मक संदेश देने के लिए भाजपा नेतृत्व अब तुरंत संवाद की नीति पर काम कर रहा है।

    उन्होंने कहा कि हाल ही में जब किसानों ने दिल्ली कूच का आह्वान किया और हरियाणा पुलिस ने उन्हें शंभू बॉर्डर पर रोका, तो गतिरोध बढ़ाने के बजाय हरियाणा सरकार के मंत्री तुरंत वार्ता के लिए मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों की सीधी बातचीत केंद्र सरकार के उच्च अधिकारियों से करवाई, जिससे सीमा पर पक्का मोर्चा लगाने की नौबत टल गई। इसी संवाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दिल्ली में किसान प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की और उनकी मांगों का न्यायसंगत समाधान निकालने का ठोस आश्वासन दिया। भाजपा का स्पष्ट लक्ष्य कम्युनिकेशन गैप को खत्म करना है ताकि 2020 जैसी टकराव वाली स्थितियां दोबारा पैदा न हों और ग्रामीण क्षेत्रों में उसका बढ़ता जनाधार प्रभावित न हो।

    5. 2017 से 2024 तक पंजाब का बदलता सियासी गणित: पॉलिटिकल एक्सपर्ट वैवस्वत वेंकट का कहना है कि पंजाब का राजनीतिक परिदृश्य पिछले आठ वर्षों में भारी बदलावों से गुजरा है। वोट प्रतिशत के आंकड़े यह साफ दर्शाते हैं कि कैसे आंदोलनों और जन-असंतोष ने स्थापित राजनीतिक ताकतों के आधार को हिलाया है।

    उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों का विश्लेषण करें तो साफ होता है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में आप ने 42.01% वोट हासिल करके प्रचंड बहुमत प्राप्त किया था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में उसका वोट शेयर घटकर 26.02% पर आ गया। दूसरी तरफ, भाजपा का वोट प्रतिशत 2022 के 6.60% से बढ़कर 2024 में 18.56% जरूर हुआ, लेकिन यह बढ़त मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों तक सीमित रही। ग्रामीण विरोध के चलते पार्टी लोकसभा में एक भी सीट जीतने में नाकाम रही।

  • 84 शहरों में 500 से ज्यादा कर्मचारियों का मुंडन, नियमितीकरण को लेकर हरियाणा में बढ़ा विवाद

    84 शहरों में 500 से ज्यादा कर्मचारियों का मुंडन, नियमितीकरण को लेकर हरियाणा में बढ़ा विवाद

    चंडीगढ़
    हरियाणा में सफाई, सीवर, पालिका, परिषद, नगर निगम और अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल फिलहाल नियमितीकरण की मांग पर अटकी हुई है। हरियाणा सरकार कर्मचारियों की 13 में से 12 मांगें मानने को तैयार है, लेकिन दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कच्चे कर्मचारियों को नीति बनाकर नियमित करने की मुख्य मांग पर सहमति नहीं बन रही। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब तक नियमितीकरण की नीति नहीं बनती, आंदोलन जारी रहेगा।

    नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान नरेश कुमार शास्त्री और हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के राज्य प्रधान राजेंद्र सिंद ने कहा कि सरकार द्वारा टर्मिनेशन, निलंबन और मुकदमे दर्ज करने जैसी कार्रवाई के बावजूद कर्मचारी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने दावा किया कि शुक्रवार को प्रदेश के 84 शहरों में 500 से अधिक कर्मचारियों ने सामूहिक मुंडन करवाकर विरोध दर्ज कराया।

    वेतन में 15 प्रतिशत वृद्धि करने को तैयार
    कर्मचारी नेताओं ने कहा कि दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने के लिए सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। उनका आरोप है कि वर्षों से ठेका व्यवस्था में काम कर रहे सफाई और सीवर कर्मचारियों को रोजगार की स्थायी सुरक्षा नहीं मिल रही।

    वहीं, सरकार का तर्क है कि पूरे देश में दो वर्ष की सेवा के आधार पर कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने जैसी कोई नीति नहीं है। सरकार नियमितीकरण की बजाय कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा के दायरे में लाने और उनके वेतन में 15 प्रतिशत वृद्धि करने को तैयार है।

    आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए संघ ने पांच और छह सितंबर को प्रदेश सरकार के मंत्रियों के आवासों और कैंप कार्यालयों पर झाड़ू प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार ने वर्ष 2014 में सफाई कर्मचारियों को पक्का करने का वादा किया था, जिसे अब तक पूरा नहीं किया गया।

    उनका कहना है कि नियमितीकरण और अन्य मांगों पर ठोस लिखित आदेश जारी होने तथा दमनात्मक कार्रवाई वापस लिए जाने तक हड़ताल जारी रहेगी।

  • त्योहारी सीजन में रेलवे का बड़ा तोहफा, इन फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों के बढ़े फेरे

    त्योहारी सीजन में रेलवे का बड़ा तोहफा, इन फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों के बढ़े फेरे

    पटना
     त्योहारों के इस मौसम में घर जाने की सोच रहे यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय रेलवे के पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) जोन ने यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ और लंबी वेटिंग लिस्ट की समस्या से निपटने के लिए दो जोड़ी फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की सेवाओं का विस्तार कर दिया है। रेलवे के इस महत्वपूर्ण फैसले से बिहार, उत्तर प्रदेश, असम और मुंबई के बीच सफर करने वाले हजारों यात्रियों को आवागमन के लिए बेहतर और सुविधाजनक विकल्प मिल सकेंगे, साथ ही प्रमुख व्यस्त रूटों पर अत्यधिक भीड़भाड़ का दबाव भी कम होगा।
    ​
    मुंबई-कटिहार और कानपुर-गुवाहाटी रूट पर राहत
    ​एनएफआर द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जिन दो प्रमुख गाड़ियों के फेरे बढ़ाए गए हैं, उनमें ट्रेन संख्या 09189/09190 मुंबई सेंट्रल कटिहार मुंबई सेंट्रल फेस्टिवल स्पेशल और ट्रेन संख्या 04127/04128 कानपुर सेंट्रल गुवाहाटी कानपुर सेंट्रल फेस्टिवल स्पेशल शामिल हैं। ये सभी स्पेशल ट्रेनें अपने पुराने निर्धारित समय, ठहराव (स्टॉपेज), कोच कंपोजिशन और तयशुदा शेड्यूल के अनुसार ही पटरियों पर दौड़ेंगी, जिससे यात्रियों को किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    ​ट्रेन संख्या 09189/09190 (मुंबई सेंट्रल कटिहार) की नई तिथियां
    ​मुंबई सेंट्रल से कटिहार के बीच चलने वाली ट्रेन संख्या 09189 फेस्टिवल स्पेशल इस त्योहारी सीजन में कुल सात अतिरिक्त फेरे लगाएगी। यह गाड़ी 5 और 12 सितंबर, 17, 24 और 31 अक्टूबर, तथा 7 और 14 नवंबर 2026 को अपनी यात्रा शुरू करेगी।

    ​वहीं, वापसी की दिशा में कटिहार से मुंबई सेंट्रल जाने वाली ट्रेन संख्या 09190 फेस्टिवल स्पेशल भी सात अतिरिक्त फेरों के साथ संचालित होगी। यह वापसी सेवा 8 और 15 सितंबर, 20 और 27 अक्टूबर, और साथ ही 3, 10 और 17 नवंबर 2026 को यात्रियों के लिए उपलब्ध रहेगी।
    ​
    ट्रेन संख्या 04127/04128 (कानपुर सेंट्रल गुवाहाटी) का विस्तारित शेड्यूल
    ​कानपुर सेंट्रल और गुवाहाटी के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को इस बार लंबी अवधि की राहत दी गई है। कानपुर सेंट्रल से गुवाहाटी के लिए चलने वाली ट्रेन संख्या 04127 स्पेशल को 10 सितंबर से 10 दिसंबर 2026 तक कुल 14 अतिरिक्त फेरों के लिए बढ़ाया गया है।
    ​इसके विपरीत दिशा में, गुवाहाटी से कानपुर सेंट्रल लौटने वाली ट्रेन संख्या 04128 स्पेशल 11 सितंबर से 11 दिसंबर 2026 तक 14 अतिरिक्त फेरों के साथ अपनी सेवाएं प्रदान करेगी, जिससे उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर के बीच संपर्क और मजबूत होगा।
    ​
    यात्रियों की सुविधा और भीड़ नियंत्रण पर जोर
    ​पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) कपिंजल किशोर शर्मा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि त्योहारी सीजन के दौरान ट्रेनों में अचानक बढ़ने वाली भारी भीड़ को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इन अतिरिक्त फेरों के संचालन से यात्रियों को यात्रा करने के लिए अधिक विकल्प प्राप्त होंगे और व्यस्त मार्गों पर यात्रियों का दबाव घटेगा। रेलवे का मुख्य उद्देश्य हर यात्री को इस व्यस्त समय में एक आसान, सुरक्षित, सुविधाजनक और आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करना है।