Category: राज्य

  • राजभर का अखिलेश पर तंज- यही हाल रहा तो एक दिन अपनी बिरादरी ही पूछेगी, वाकई यदुवंशी हो?

    राजभर का अखिलेश पर तंज- यही हाल रहा तो एक दिन अपनी बिरादरी ही पूछेगी, वाकई यदुवंशी हो?

    'किसी के तो सगे बन जाइए… न राम के, न कृष्ण के, न यदुवंश के!' ओपी राजभर का अखिलेश पर तीखा हमला

    'भगवान कृष्ण का नाम लेने में डर और खुद को कहते हैं यदुवंशी!', राजभर ने अखिलेश पर बोला हमला

    राजभर का अखिलेश पर तंज- यही हाल रहा तो एक दिन अपनी बिरादरी ही पूछेगी, वाकई यदुवंशी हो?

    'न राम के न कृष्ण के, आपका मन केवल एक ही तरफ', अखिलेश पर राजभर का नया हमला

    कृष्ण का नाम लेने में झिझक, दूसरे मजहबी कार्यक्रम पर खुलकर शुभकामना… राजभर ने अखिलेश को घेरा

    लखनऊ
     सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। इस बार राजभर ने अखिलेश के एक इंटरव्यू का जिक्र करते हुए सपा प्रमुख के उनके कृष्णवंशी और यदुवंशी होने के दावे पर ही सवाल खड़े कर दिए। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव कम से कम भगवान कृष्ण के तो बनकर रहें।

    'जय श्री राम या जय श्री कृष्ण', सवाल आया तो बदल दी बात

    राजभर ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अखिलेश यादव के एक इंटरव्यू का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि पत्रकार ने अखिलेश से सीधा सवाल पूछा था- 'जय श्री राम बोलूं या जय श्री कृष्ण?' लेकिन सवाल का जवाब देने के बजाय अखिलेश ने तड़ाक से बात ही बदल दी।

    राजभर ने अखिलेश पर निशाना साधते हुए कहा कि वह माइक पर एक बार भी जय श्री राम या जय श्री कृष्ण बोलने की हिम्मत नहीं जुटा सके। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि आखिर खुद को यदुवंशी कहने वाले अखिलेश को अपने भगवान का नाम लेने में इतना डर क्यों लगता है।

    'इतना भी क्या 18 प्रतिशत वोट का डर?'

    ओपी राजभर ने आगे लिखा कि इतना भी क्या 18 प्रतिशत वोट का डर है कि अपने भगवान का नाम तक खुलकर न लिया जा सके। उन्होंने अखिलेश को घेरते हुए कहा कि वह न सिर्फ भगवान श्रीकृष्ण का नाम खुलकर नहीं ले पाते, बल्कि उनके दर्शन करने और उनकी जन्मस्थली तक जाने से भी दूरी बनाए रखते हैं।

    राजभर ने यहां तक कहा कि अगर यही हाल रहा तो एक दिन अखिलेश की अपनी बिरादरी भी पूछ सकती है कि क्या आप लोग वाकई यदुवंशी हैं?

    पैगम्बर-ए-इस्लाम के कार्यक्रम का जिक्र कर साधा निशाना

    राजभर ने अखिलेश यादव पर धार्मिक मुद्दों को लेकर दोहरे रवैये का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पैगम्बर-ए-इस्लाम के जन्मोत्सव पर लखनऊ में आयोजित होने वाले कार्यक्रम की सफलता की कामना अखिलेश खुलकर करते हैं और टोपी तक पहन लेते हैं।

    राजभर ने इसी को आधार बनाते हुए कहा कि सच तो यह है कि आपका मन केवल एक ही तरफ लगता है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि अखिलेश न राम के हुए, न कृष्ण के और न ही यदुवंश के।

    'अरे महाराज, किसी के तो सगे बन जाइए!'

    अपने चिर-परिचित तीखे अंदाज में राजभर ने अखिलेश यादव पर सीधा हमला करते हुए लिखा कि अरे महाराज, किसी के तो सगे बन जाइए! पोस्ट के आखिर में राजभर ने अखिलेश को कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं भी दीं। साथ ही तंज कसते हुए उम्मीद जताई कि किसी दिन उनका जमीर जागेगा और वह भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर की मांग का समर्थन करेंगे। राजभर ने लिखा कि यह तभी होगा, जब भगवान श्रीकृष्ण की उन पर कृपा होगी।

  • परीक्षा में कमीशन के आरोपों से घिरे एल खियांग्ते की जमानत खारिज

    परीक्षा में कमीशन के आरोपों से घिरे एल खियांग्ते की जमानत खारिज

    रांची
    जेपीएससी नियुक्ति घोटाला मामले में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को राहत नहीं मिली है। सीआईडी कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।

    इससे पूर्व, 3 सितंबर को दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत बहस सुनने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने तर्क प्रस्तुत किया कि उनके मुवक्किल के विरुद्ध कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है।
    दोषी ठहराए जाने का कोई साक्ष्य नहीं मिला

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी द्वारा की गई छापेमारी में भी ऐसा कोई आपत्तिजनक दस्तावेज या साक्ष्य नहीं मिला जो उन्हें दोषी ठहराए, इसलिए उन्हें जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।

    दूसरी ओर, सीआईडी की जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि एक ब्लैकलिस्टेड निजी कंपनी (टीडीपीएल) को परीक्षा आयोजित करने का काम दिलाने और इसके एवज में भारी कमीशन लेने में उनकी मुख्य भूमिका रही है। पूछताछ के दौरान साक्ष्य नष्ट करने की कोशिशों की बात सामने आने पर सीआईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वे न्यायिक हिरासत में जेल में हैं।

  • यूपी के 81 शिक्षकों का सम्मान, सीएम योगी बोले- सम्मान के साथ बढ़ी जिम्मेदारी

    यूपी के 81 शिक्षकों का सम्मान, सीएम योगी बोले- सम्मान के साथ बढ़ी जिम्मेदारी

     गोरखपुर
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजनीति हर क्षेत्र में हो सकती है, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में राजनीति नहीं होनी चाहिए। विद्यालय बच्चों के भविष्य निर्माण की जगह हैं। यहां शिक्षक का ध्यान किसी राजनीतिक विचार या स्वार्थ के बजाय बच्चों की शिक्षा, संस्कार और प्रतिभा निखारने पर होना चाहिए। शिक्षा जितनी मजबूत होगी, समाज और राष्ट्र की नींव उतनी ही मजबूत होगी।
    मुख्यमंत्री बोले- हर क्षेत्र में राजनीति हो सकती है, लेकिन शिक्षा को इससे दूर रखना जरूरी

    शिक्षक दिवस पर शनिवार को योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित राज्य शिक्षक पुरस्कार समारोह में मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित करते हुए शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक की भूमिका को रेखांकित किया।

    सीएम ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने वाला नहीं, बल्कि बच्चों को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक है। उसके आचरण और कार्यशैली का सीधा प्रभाव विद्यार्थियों पर पड़ता है।

    शिक्षक अपने आचरण, नवाचार और समर्पण से बदल सकते हैं विद्यालयों की तस्वीर
    सीएम योगी ने कहा कि विद्यालय में संसाधन महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उससे अधिक जरूरी शिक्षक की इच्छाशक्ति और कार्य के प्रति समर्पण है। सीमित संसाधनों में भी कई शिक्षक नवाचार के जरिए अपने विद्यालय की तस्वीर बदल रहे हैं। ऐसे प्रयोगों को दूसरे विद्यालयों तक पहुंचाने की जरूरत है, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को उनका लाभ मिल सके।

    केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं, संस्कार, अनुशासन भी जरूरी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं है। बच्चों में ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी शिक्षक की जिम्मेदारी है। हर बच्चे की क्षमता अलग होती है, इसलिए शिक्षक को उसकी प्रतिभा पहचानकर उसे आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए।

    शिक्षक खुद को करें अपडेट
    मुख्यमंत्री ने बदलती तकनीक और समय की जरूरतों के अनुरूप शिक्षकों से खुद को अपडेट करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक शिक्षा का विकल्प नहीं, बल्कि उसे बेहतर बनाने का माध्यम है। इसका प्रभावी इस्तेमाल कर शिक्षण को अधिक सरल, रोचक और उपयोगी बनाया जा सकता है।

    बेहतर काम करने की जिम्मेदारी
    योगी ने कहा कि शिक्षक दिवस पर दिया जाने वाला सम्मान केवल उपलब्धि की स्वीकृति नहीं, बल्कि आगे और बेहतर काम करने की जिम्मेदारी भी है। सम्मानित शिक्षक अपने अनुभव और प्रयोगों को दूसरे शिक्षकों के साथ साझा करें, ताकि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई गति मिल सके।

    यूपी के 81 शिक्षकों को किया सम्मानित
    समारोह में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 81 शिक्षकों को सम्मानित किया। इनमें बेसिक शिक्षा के 61 और माध्यमिक शिक्षा के 20 शिक्षक शामिल रहे। 76 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार तथा पांच शिक्षकों को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रत्येक शिक्षक को प्रमाणपत्र, स्मृति चिह्न और 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी गई।

     

  • मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का फोकस, सैटेलाइट अस्पतालों को मजबूत करने के निर्देश

    मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का फोकस, सैटेलाइट अस्पतालों को मजबूत करने के निर्देश

    जयपुर
     मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शनिवार को जोधपुर के डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज के सभागार में जिले की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक ली।

    श्रीनिवास ने सुरक्षित मातृत्व, गुणवत्तापूर्ण प्रसव सेवाओं एवं स्वस्थ शैशव के लिए संचालित कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करते हुए हाई रिस्क प्रेगनेंसी की प्रभावी मॉनिटरिंग, गुणवत्तापूर्ण एंटीनेटल केयर तथा नवजात शिशुओं के लिए कंगारू केयर जैसी व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।

    मुख्य सचिव ने प्रसव सखी सहित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े नवाचारों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा उपयोगी कार्यप्रणालियों को अन्य चिकित्सा संस्थानों में भी अपनाने की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को समयबद्ध परामर्श, आवश्यक जांच एवं समुचित फॉलोअप उपलब्ध कराने तथा हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान से लेकर उपचार तक निरंतर निगरानी की व्यवस्था प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए।

     उम्मेद चिकित्सालय में मानक प्रोटोकॉल एवं उपचार प्रक्रियाओं को और सुदृढ़ करने के निर्देश
    मुख्य सचिव ने उम्मेद चिकित्सालय में अत्यधिक मरीज भार के मद्देनजर उपलब्ध चिकित्सा संसाधनों एवं उपचार व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने ऑपरेशन थिएटरों में निर्धारित मानक चिकित्सा प्रोटोकॉल की प्रभावी पालना, उपचार प्रक्रियाओं की नियमित मॉनिटरिंग तथा मरीजों की सुरक्षा के दृष्टिगत व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।

    श्रीनिवास ने एनेस्थिसियोलॉजी, ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी विभागों के मध्य बेहतर समन्वय के साथ कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम समयबद्ध रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने गंभीर एवं जटिल मामलों में त्वरित चिकित्सकीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करने तथा उपचार प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित एवं परिणामोन्मुख बनाने के निर्देश दिए।

    सैटेलाइट अस्पतालों में सीजेरियन सेवाओं के विस्तार की दिशा में कार्यवाही के निर्देश
    मुख्य सचिव ने जिले के सैटेलाइट अस्पतालों की भूमिका को और प्रभावी बनाने के लिए बिलाड़ा, भोपालगढ़, धवा, पीपाड़ शहर, ओसियां एवं बालेसर स्थित चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक मानव संसाधन एवं सहायक चिकित्सकीय सेवाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ने से मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा तथा उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों पर पड़ने वाले भार को भी कम किया जा सकेगा।

    उन्होंने इन चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ सीजेरियन सेक्शन सेवाओं को चरणबद्ध रूप से ऑपरेशनलाइज करने की दिशा में कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस संबंध में आवश्यक संसाधनों एवं व्यवस्थाओं की उपलब्धता के लिए राज्य स्तर पर समुचित सहयोग एवं समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

    एंटीनेटल केयर एवं मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में प्रक्रिया-प्रवाह को और बेहतर बनाने के निर्देश
    मुख्य सचिव ने जिले में एंटीनेटल केयर की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए गर्भवती महिलाओं को निर्धारित अंतराल पर आवश्यक परामर्श एवं जांच सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने हाई रिस्क प्रेगनेंसी की शीघ्र पहचान, नियमित फॉलोअप एवं आवश्यकता के अनुरूप उपचार की समेकित व्यवस्था विकसित करने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

    उन्होंने उम्मेद चिकित्सालय में अपनाई जा रही प्रभावी कार्यप्रणालियों एवं नवाचारों को उपयोगी बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में चिन्हित कर अन्य चिकित्सा संस्थानों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

    राउंड-द-क्लॉक ऑपरेशन थिएटर, एचडीयू एवं आईसीयू सेवाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग के निर्देश
    मुख्य सचिव ने उम्मेद चिकित्सालय में अत्यधिक मरीज भार के बावजूद चिकित्सा सेवाओं के सुचारू संचालन की समीक्षा की। उन्होंने राउंड-द-क्लॉक ऑपरेशन थिएटर, हाई डिपेंडेंसी यूनिट एवं इंटेंसिव केयर यूनिट में गंभीर मरीजों एवं नवजात शिशुओं को उपलब्ध कराई जा रही जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाओं की सतत मॉनिटरिंग एवं प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    उन्होंने उम्मेद चिकित्सालय को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए उपलब्ध विशेषज्ञ सेवाओं एवं संसाधनों का अधिकतम प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने तथा गंभीर मामलों में समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सा सेवाओं में किए जा रहे सुधार एवं प्रक्रिया-प्रवाह को निरंतर आगे बढ़ाने तथा प्रभावी व्यवस्थाओं को संस्थागत रूप देने की आवश्यकता बताई।

    बैठक में डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एस. जोधा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जिले की चिकित्सा व्यवस्थाओं, उपचार पद्धति, चिकित्सकीय संसाधनों, स्वास्थ्य अवसंरचना तथा विभिन्न चिकित्सा सेवाओं की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी।

     

  • हरियाणा के 78 शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार, दो एडवांस इंक्रीमेंट का भी ऐलान

    हरियाणा के 78 शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार, दो एडवांस इंक्रीमेंट का भी ऐलान

    पंचकूला
    हरियाणा के पंचकूला जिले के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में शनिवार को राज्य शिक्षक पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले 78 शिक्षकों को स्टेट टीचर अवॉर्ड से सम्मानित किया। इनमें सबसे ज्यादा 13 शिक्षक शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के गृह जिले पानीपत से हैं। सरकार ने वर्ष 2024 के लिए 40 और वर्ष 2025 के लिए 38 शिक्षकों के नाम जारी किए थे।

    शिक्षकों को मिलेगा एक लाख रुपये का कैश अवॉर्ड
    शिक्षक दिवस यानी 5 सितंबर के मौके पर चयनित शिक्षकों को यह पुरस्कार दिया जाना है। शिक्षा विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी विजय सिंह दहिया की ओर से इस संबंध में लेटर जारी किया गया था।

    पुरस्कार के तहत शिक्षकों को एक लाख रुपये का कैश अवॉर्ड, सिल्वर मेडल और सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इसके अलावा चयनित शिक्षकों को दो एडवांस इंक्रीमेंट भी मिलेंगे।
    बिल्कुल, तस्वीर में दिए आंकड़ों को साफ-सुथरी टेबल में ऐसे रखा जा सकता है:

    जिला    सम्मानित शिक्षक
    पानीपत    7
    भिवानी    5
    सोनीपत    4
    गुरुग्राम    3
    रेवाड़ी    3
    हिसार    2
    कुरुक्षेत्र    2
    कैथल    2
    जींद    2
    सिरसा    1
    फतेहाबाद    1
    नूंह    1
    फरीदाबाद    1
    रोहतक    1
    करनाल    1
    यमुनानगर    1
    चरखी दादरी    1
    कुल    38
    यह सत्र 2025 के लिए सम्मानित होने वाले 38 शिक्षकों का जिलेवार आंकड़ा है।

    पानीपत से 13 शिक्षक सम्मानित
    राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए पानीपत से कुल 13 शिक्षकों का चयन हुआ है। इनमें वर्ष 2025 के लिए 7 और वर्ष 2024 के लिए 6 शिक्षक शामिल हैं। इस तरह दोनों वर्षों को मिलाकर पानीपत पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों की संख्या के मामले में सबसे आगे है।

    वर्ष 2024 के लिए हिसार, झज्जर, महेंद्रगढ़ और फरीदाबाद से एक-एक शिक्षक को सम्मानित किया जाएगा। इन जिलों से इस सत्र के लिए सबसे कम नाम चयनित हुए हैं।
    2025 में भिवानी से 5 शिक्षक

    वर्ष 2025 के राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए पानीपत के बाद भिवानी से सबसे ज्यादा 5 शिक्षकों का चयन हुआ है।

    वहीं सिरसा, फतेहाबाद, नूंह, फरीदाबाद, रोहतक, करनाल, यमुनानगर और चरखी दादरी से एक-एक शिक्षक को पुरस्कार के लिए चुना गया है। राज्य शिक्षक पुरस्कार समारोह में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंच पर चयनित शिक्षकों को सम्मानित किया।

    बिल्कुल, तस्वीर में दिए गए आंकड़ों को साफ टेबल में ऐसे रखा जा सकता है:

    जिला    सम्मानित शिक्षक
    पानीपत    6
    रेवाड़ी    6
    सोनीपत    4
    भिवानी    3
    गुरुग्राम    3
    जींद    3
    कैथल    3
    चरखी दादरी    3
    करनाल    3
    पंचकूला    2
    फरीदाबाद    1
    महेंद्रगढ़    1
    झज्जर    1
    हिसार    1
    कुल    40

  • बाढ़ से निपटने को सम्राट सरकार अलर्ट, 13 जिलों में मंत्री संभालेंगे राहत-बचाव की कमान

    बाढ़ से निपटने को सम्राट सरकार अलर्ट, 13 जिलों में मंत्री संभालेंगे राहत-बचाव की कमान

     पटना

    बिहार में भारी बारिश और प्रमुख नदियों में उफान के बाद बाढ़ से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 13 मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में बाढ़ की निगरानी का काम सौंपा है। उनके साथ प्रभारी सचिवों की भी ड्यूटी लगाई गई है। बक्सर से पटना, समस्तीपुर और भागलपुर तक कई इलाके जलमग्न हैं। पटना में बाढ़ के चलते अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया गया है। सीएम सम्राट लगातार दूसरे दिन बाढ़ प्रभावित इलाके के हवाई सर्वे पर निकले हैं। शनिवार को वह भागलपुर में बाढ़ से राहत एवं बचाव कार्य का जायजा ले रहे हैं।

    बिहार सरकार की ओर से गंगा किनारे स्थित जिलों में राहत और बचाव कार्यों की सघन निगरानी का काम प्रभारी मंत्रियों और सचिवों को सौंपा है। जिन 13 जिलों के लिए निर्देश जारी हुए हैं, उनमें बक्सर, भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, समस्तीपुर, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार शामिल हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिव संबंधित जिले में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे और जमीन पर राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी करेंगे।

    पटना में बाढ़ से हाई अलर्ट
    सीएम सम्राट ने पटना के शहरी क्षेत्र में गंगा के बढ़ते जलस्तर की विशेष निगरानी के आदेश दिए हैं। पटना में तटबंध और आसपास के क्षेत्र पर खास ध्यान दिया जाएगा। पटना नगर निगम, जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है।

    गंगा नदी का जलस्तर
    पटना में गांधी घाट के पास गंगा नदी खतरे के निशान ऊपर बह रही है। शनिवार सुबह 10 बजे गांधी घाट गेज साइट पर जलस्तर 50.53 मीटर दर्ज किया गया, जो 48.60 मीटर के खतरे के निशान से लगभग 1.93 मीटर ऊपर है। नदी अपने उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) 50.52 मीटर के करीब बह रही है। अधिकारियों ने जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की चेतावनी दी है।

    बिहार बाढ़ की स्थिति
    बिहार में बाढ़ की वर्तमान स्थिति की जानकारी डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने ली। वह शनिवार को फिर पटना में सिंचाई भवन स्थित जल संसाधन विभाग के कंट्रोल कमांड सेंटर पहुंचे। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूरे राज्य के विभिन्न संवेदनशील स्थलों का जायजा लिया। अधिकारियों को तटबंधों पर सतत निगरानी के निर्देश दिए।

    बिहार बाढ़ से 10 लाख आबादी प्रभावित- सरकार
    आपदा प्रबंधन विभाग ने शनिवार को कहा कि बिहार के 11 जिलों के 50 प्रखंडों की 201 पंचायतों में 10.28 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। यहां राहत एवं बचाव कार्य जारी है।

    इन जिलों में बाढ़ की निगरानी करेंगे प्रभारी मंत्री-

        बक्सर – नंद किशोर राम
        भोजपुर – अरुण शंकर प्रसाद
        पटना – विजय चौधरी
        सारण – बिजेंद्र प्रसाद यादव
        वैशाली – निशांत कुमार
        बेगूसराय – रामकृपाल यादव
        समस्तीपुर – दामोदर रावत
        लखीसराय – सुनील कुमार
        खगड़िया – मदन सहनी
        मुंगेर – संजय पासवान
        भागलपुर – नीतीश मिश्रा
        कटिहार – प्रमोद चंद्रवंशी

  • बाढ़ प्रभावित इलाकों में योगी सरकार का रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, 18,810 लोगों को कराया सुरक्षित

    बाढ़ प्रभावित इलाकों में योगी सरकार का रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, 18,810 लोगों को कराया सुरक्षित

    बाढ़ के बीच योगी सरकार का राहत अभियान तेज, 18,810 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया

    4.02 लाख लंच पैकेट और 79 हजार से अधिक बाढ़ राहत किट प्रभावितों को वितरित की गईं

    1072 मेडिकल टीमें रख रहीं स्वास्थ्य का ध्यान, 24 जिलों में राहत-बचाव अभियान जारी
     
    बाढ़ संकट में सरकार की तत्परता बनी सुरक्षा कवच, अब तक नहीं होने दी कोई जनहानि

    अयोध्या में जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया से सूचना मिलते ही परिवार को पहुंचाई मदद

    रायबरेली में उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने प्रभावित परिवारों को वितरित की राहत सामग्री

    लखनऊ,
     उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार का राहत और बचाव अभियान लगातार तेज गति से जारी है। सरकार की सक्रियता और प्रशासन की तत्परता से बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक अब तक 18,810 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, जबकि शुक्रवार को ही 4,799 लोगों का रेस्क्यू किया गया। राहत अभियान के तहत अब तक 4.02 लाख से अधिक लंच पैकेट और 79,666 बाढ़ राहत किट वितरित की जा चुकी हैं। 1,821 नाव एवं मोटरबोट रेस्क्यू कार्य में लगाई गई हैं। बाढ़ से अब तक कोई जनहानि की सूचना नहीं है।

    6 हजार से ज्यादा लोग शरणालय में रह रहे
    वर्तमान में 24 जिलों में बाढ़ का असर है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी और राहत कार्य किया जा रहा है। अब तक 18,810 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इसके साथ ही 1,313 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें 6 हजार से ज्यादा लोग रह रहे हैं।

    4 लाख से ज्यादा लंच पैकेट किए वितरित
    बाढ़ के बीच प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चल रहा है। बाढ़ की शुरूआत से अब तक 4.02 लाख से अधिक लंच पैकेट और 79 हजार से अधिक बाढ़ राहत किट वितरित की जा चुकी हैं। शुक्रवार को भी 38 हजार से ज्यादा लंच पैकेट और 6 हजार से ज्यादा बाढ़ राहत किट बांटी गईं। इससे प्रभावित लोगों को संकट की स्थिति में तत्काल भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

    स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी सरकार का विशेष फोकस
    बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को भी सक्रिय रखा गया है। प्रदेश में अब तक 1,072 मेडिकल टीमें गठित की जा चुकी हैं। स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 5.75 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 2 लाख से ज्यादा ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं।

    1,821 नाव-मोटरबोट से लगातार रेस्क्यू
    जलभराव और बाढ़ के कारण जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है, वहां नाव और मोटरबोट के जरिए राहत एवं बचाव दल पहुंच रहे हैं। अब तक 1,821 नाव एवं मोटरबोट का प्रयोग किया जा चुका है। इससे प्रभावित गांवों में फंसे लोगों को निकालने और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने में महत्वपूर्ण मदद मिल रही है। अब तक बाढ़ से कोई व्यक्ति या पशुहानि दर्ज नहीं हुई है, जो रेस्क्यू ऑपरेशंस और निगरानी व्यवस्था की अहम उपलब्धि है। बाढ़ से मकान क्षतिग्रस्त होने के 485 मामलों में प्रभावित परिवारों को सहायता वितरित की जा चुकी है।

    प्रभावित 24 जिले
    अयोध्या, आजमगढ़, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी।

    सोशल मीडिया से सूचना पर पहुंची मदद, आवास का दिया भरोसा
    अयोध्या में सोशल मीडिया के माध्यम से परिवार की परेशानी की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की। बीकापुर के खजुराहट गांव के बरगदीया मजरे में प्रभावित अर्पिता पाण्डेय के परिवार को खाद्य सामग्री, सब्जियां, तिरपाल, बर्तन, गैस सिलेंडर सहित जरूरी गृह उपयोगी सामान उपलब्ध कराया गया। विधायक डॉ. अमित चौहान भी राहत सामग्री लेकर पहुंचे। प्रशासन ने परिवार को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी प्राथमिकता से शुरू कर दी है।

    बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे राज्यमंत्री
    रायबरेली में उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर राहत सामग्री वितरित की। उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रदेश सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता से खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी तरह की शिथिलता न बरतने और प्रत्येक जरूरतमंद परिवार तक समयबद्ध तरीके से राहत व सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए।

  • तकनीक के साथ संस्कार भी जरूरी, शिक्षक दिवस पर हेमंत सोरेन ने AI आधारित शिक्षा पर दिया जोर

    तकनीक के साथ संस्कार भी जरूरी, शिक्षक दिवस पर हेमंत सोरेन ने AI आधारित शिक्षा पर दिया जोर

    रांची
    शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ शिक्षा के तरीके में भी बदलाव जरूरी है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समेत नई तकनीक विद्यार्थियों को उनकी जरूरत के मुताबिक बेहतर शिक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    डॉ. राधाकृष्णन को किया नमन
    मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस के अवसर पर देश के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने प्रदेश के सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं और जोहार दिया।

    शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर सरकार का फोकस
    हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हर स्तर पर मौजूद कमियों को दूर करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि शिक्षा व्यवस्था में प्रभावी सुधार लाकर विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

    AI से बदलेगा पढ़ाने का तरीका
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दौर में AI और आधुनिक तकनीक शिक्षण प्रक्रिया को ज्यादा सहज और प्रभावी बना सकती है। तकनीक के इस्तेमाल से विद्यार्थियों की जरूरत और क्षमता के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

    आधुनिक शिक्षा के साथ मूल्यों से जुड़ाव जरूरी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं है। नई पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ उसे अपने मूल्यों, संस्कृति और जड़ों से जोड़े रखना भी जरूरी है।

    उन्होंने शिक्षक दिवस पर शिक्षकों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि समाज और नई पीढ़ी के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

  • राजस्थान में भारी बारिश का दौर जारी, मानसरोवर बांध पर चली चादर; कई जिलों में अलर्ट

    राजस्थान में भारी बारिश का दौर जारी, मानसरोवर बांध पर चली चादर; कई जिलों में अलर्ट

    सवाई माधोपुर
     राजस्थान में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। सवाई माधोपुर सहित कई जिलों में लगातार दूसरे दिन भारी बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने भी 2 दिन कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर वेल मार्क लो प्रेशर एरिया (WML) बना हुआ है। मानसून ट्रफ लाइन भी श्रीगंगानगर और WML से होकर गुजर रही है। इसके प्रभाव से 5 और 6 सितंबर को पूर्वी व पूर्वी-उत्तरी राजस्थान के कई हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है। पिछले 24 घंटों में बारां, दौसा, धौलपुर, झालावाड़, करौली और सवाई माधोपुर जिलों में कहीं-कहीं मध्यम से भारी और अतिभारी बारिश दर्ज की गई। इस दौरान सवाई माधोपुर के तलवाड़ा में सर्वाधिक 131 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई।

    सवाई माधोपुर जिले में लगातार दूसरे दिन भारी बारिश का दौर जारी है। जिले सहित अधिकतर ग्रामीणों इलाकों में सुबह से ही बारिश हो रही है। खंडार क्षेत्र में स्थित मानसरोवर बांध भारी बारिश के कारण ओवरफ्लो हो चुका है। इस सीजन में यह पहली बार है, जब मानसरोवर बांध पर चादर चली है। वहीं, भारी बारिश के चलते स्कूलों में शनिवार को छुट्टी घोषित की गई। बारिश के कारण कई जगहों पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। बता दें कि सवाईमाधोपुर जिले में कृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार को मानसून ने जोरदार दस्तक दी। सुबह से शुरू हुआ बारिश का दौर शनिवार को भी जारी है। कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश से शहर की सड़कों और ग्रामीण क्षेत्रों के रास्तों पर पानी भर गया। लगातार बारिश से मौसम में ठंडक घुल गई और उमस से परेशान लोगों को राहत मिली। वहीं खरीफ फसलों के लिए भी बारिश को लाभदायक माना जा रहा है।

    लगातार दूसरे साल मानसरोवर बांध ओवरफ्लो
    जिले के खंडार क्षेत्र में स्थित मानसरोवर बांध लगातार दूसरे साल ओवरफ्लो हुआ है। इससे पहले पिछले साल 30 जुलाई और 23 अगस्त को भारी बारिश के कारण बांध ओवरफ्लो हुआ था। दो बार बांध के ओवरफ्लो होने से सवाई माधोपुर और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाली बोधल पुलिया भी दो बार टूटी थी। हालांकि, इस बार बांध के ओवरफ्लो होने से किसानों के चेहरे पर खुशी छलक पड़ी। क्योंकि 16 गांवों को सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा।

    स्कूलों में छुट्टी घोषित
    सवाई माधोपुर जिले में लगातार बारिश एवं मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए जिला कलक्टर काना राम के निर्देशानुसार 5 सितम्बर को कक्षा 1 से 12 तक के सभी विद्यार्थियों का अवकाश घोषित किया गया है। यह आदेश जिले के समस्त राजकीय एवं गैर-राजकीय विद्यालयों पर लागू रहेगा। यह अवकाश केवल विद्यार्थियों के लिए रहेगा। विद्यालयों का समस्त शिक्षक एवं अन्य स्टाफ नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करेगा। इसी क्रम में जिले के समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए भी 5 सितम्बर को अवकाश रहेगा।

    आंगनबाड़ी केंद्रों के मानदेयकर्मी विभागीय निर्देशानुसार नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी देवी लाल मीणा को मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के सहयोग से आदेशों की पालना सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिए गए हैं। आदेशों की अवहेलना की स्थिति में संबंधित राजकीय अथवा गैर-राजकीय विद्यालय के विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों को नदी-नालों, रपटों, झरनों तथा तेज जल बहाव एवं जलभराव वाले स्थानों पर जाने से रोकें और बारिश के दौरान उनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।

    खण्डार में 24 घंटे में 181 मिमी बारिश
    पिछले 24 घंटे की बात करें तो जिले में कुल 474.30 मिमी बारिश दर्ज की गई। जिले के खण्डार क्षेत्र में सबसे ज्यादा 181 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा मानसरोवर में 55, देवपुरा में 40, पांचोलास में 50, मोरा सागर में 16, भाड़ौती में 35, सवाईमाधोपुर मानटाउन में 55, सवाईमाधोपुर तहसील में 54, चौथ का बरवाड़ा में 30, बामनवास में 35, मलारना डूंगर में 33, बौली में 23, मित्रपुरा में 25, गंगापुर सिटी में 19, वजीरपुर में 7, तलावड़ा में 45, बरनाला में 42 और भांवरा में 10 मिमी बारिश दर्ज की गई।

    जानिए आगे कैसा रहेगा मौसम
    मौसम विभाग के अनुसार 5 सितंबर को भरतपुर, जयपुर और कोटा संभाग के जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। वहीं, एक-दो स्थानों पर अतिभारी बारिश की भी संभावना है। अजमेर, उदयपुर और बीकानेर संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। 6 सितंबर को भरतपुर और जयपुर संभाग के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। वहीं कोटा, अजमेर और बीकानेर संभाग के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार 7 सितंबर से भारी बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है। हालांकि भरतपुर, जयपुर और कोटा संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है।

  • झारखंड के राष्ट्रीय राजमार्गों पर केंद्र की नजर, NHAI को सौंपी जाएगी सड़कों की जिम्मेदारी

    झारखंड के राष्ट्रीय राजमार्गों पर केंद्र की नजर, NHAI को सौंपी जाएगी सड़कों की जिम्मेदारी

     रांची
     झारखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों को लेकर अब व्यवस्था बदलने वाली है। राज्य के जिन हाईवे पर ज्यादा ट्रैफिक रहता है, उनके रखरखाव और निर्माण कार्य राज्य सरकार से हटाकर केंद्र की एजेंसी एनएचएआई को दी जाएगी।

    इन सड़कों का निर्माण, रखरखाव और विस्तार एनएचएआई की निगरानी में होगा। केंद्र के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने झारखंड के राष्ट्रीय राजमार्गों की ट्रैफिक के आधार पर समीक्षा की। 10 हजार से ज्यादा वाहन गुजरने वाले एनएच को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया।

    इसी समीक्षा के बाद मंत्रालय ने 21 अगस्त को राज्य के मुख्य सचिव और एनएचएआई चेयरमैन को पत्र भेजकर नई व्यवस्था की जानकारी दी। पहले चरण में चार एनएच को एनएचएआई के को देने का फैसला हुआ है। इनमें एनएच-139, एनएच-522 और एनएच-114A को तुरंत एनएचएआइ को सौंपा जाएगा, क्योंकि इन मार्गों पर फिलहाल कोई निर्माण कार्य नहीं चल रहा है।

    एनएच-20 का एक हिस्सा राज्य के पास रहेगा। इसके 116 से 176 किलोमीटर के बीच चल रहे काम को पूरा कराया जाएगा और उसके बाद इस हिस्से की जिम्मेदारी भी एनएचएआई को दे दी जाएगी। हालांकि, सभी सड़कों की जिम्मेदारी अभी नहीं बदली है।

    एनएच-220 को फिलहाल झारखंड के पथ निर्माण विभाग के पास ही रखा गया है। वहीं, एनएच-419 के 49 से 65 किलोमीटर और एनएच-133 के 93 से 131 किलोमीटर वाले हिस्सों पर काम धनबाद स्थित सड़क परिवहन मंत्रालय के परियोजना कार्यान्वयन इकाई के जरिए जारी रहेगा।

    सबसे बड़ी बात यह है कि केंद्र की नजर अब पूरे झारखंड के एनएच नेटवर्क पर है। मंत्रालय इस विकल्प पर भी विचार कर रहा है कि राज्य के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को राज्य सरकार की व्यवस्था से हटाकर सड़क परिवहन मंत्रालय के परियोजना कार्यान्वयन इकाई के जरिए संचालित किया जाए।