Category: राज्य

  • पटना में बाढ़ का विकराल रूप, गंगा रिकॉर्ड स्तर के पार और पुनपुन भी खतरे के करीब

    पटना में बाढ़ का विकराल रूप, गंगा रिकॉर्ड स्तर के पार और पुनपुन भी खतरे के करीब

    पटना
     गंगा व पुनपुन ने शनिवार को बाढ़ की विभीषिका और विकराल कर दी। गांधी घाट पर गंगा ने 2016 के उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) का रिकार्ड तोड़ दिया। शाम पांच बजे तक यहां जलस्तर 50.57 मीटर हो गया, जो एचएफएल 50.52 मीटर से पांच सेंटीमीटर ऊपर है।

    केंद्रीय जल आयोग के पूर्वानुमान के अनुसार रविवार सुबह आठ बजे तक यह पांच सेंटीमीटर बढ़कर 50.62 मीटर तक पहुंच सकता है। पुनपुन-श्रीपालपुर में अपने उच्चतम बाढ़ स्तर 53.91 मीटर से 52 सेंटीमीटर नीचे 53.39 मीटर है।

    इसमें 24 घंटे में 11 सेमी की वृद्धि हुई और यह खतरे के निशान से 2.79 मीटर ऊपर बह रही है। शुक्रवार रात पुनपुन नदी पर बना रिंग बांध टूटने से फुलवारी प्रखंड के कुरा नवादा गांव में पानी घुस गया।

    रिसाव की सूचना पर मरम्मत नहीं करने से आक्रोशित ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे सिंचाई विभाग के जेई को बंधक बना जमकर हंगामा व नारेबाजी की।

    पांच दिन में 1.62 मीटर चढ़ी गंगा
    एक से पांच सितंबर शाम तक के आंकड़े देखें तो गंगा का उफान सामान्य वृद्धि नहीं है। इन पांच दिनों में बड़ा जलस्तर उछाल दर्ज किया गया। मनेर में 52.15 मीटर से 53.77 मीटर यानी 162 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई।

    दीघा घाट पर 50.44 से 51.92 मीटर यानी 148 सेंटीमीटर और हाथीदह में 42.24 से 43.42 मीटर यानी 118 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई।

    गांधीघाट पर 49.40 मीटर से बढ़कर 50.57 मीटर यानी 117 सेंटीमीटर पानी बढ़ा। चार प्रमुख केंद्रों में से तीन पर जलस्तर ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर के एक मीटर के भीतर पहुंच गया है। मनेर में पुराने उच्चतम स्तर से केवल दो सेंटीमीटर, हाथीदह में 10 सेंटीमीटर नीचे है। वहीं दीघा में 60 सेंटीमीटर नीचे हैं।

    गंगा-पुनपुन के दोहरे दबाव का खतरा
    गंगा और पुनपुन दोनों के उफनाने का दुष्प्रभाव अब ग्रामीणा आबादी, खेतों से होते हुए शहरी क्षेत्र व तटबंधों तक पहुंच गया है। 2019 में इन्हीं दोनों नदियों के कारण पाश कालोनियों ने नावें चली थीं। दोनों नदियों के ऊंचे जलस्तर का असर अब नदी के किनारे तक सीमित नहीं है।

     

    पुनपुन का पानी रिंग बांधों में रिसाव और टूटने के बाद गांवों, खेतों और सड़कों तक पहुंच रहा है, जबकि गंगा का पानी निचले इलाकों और संपर्क मार्गों पर दबाव बढ़ा रहा है।

    खतरा इसलिए ज्यादा गंभीर है कि दोनों तरफ से पानी का दबाव बना हुआ है। गंगा रिकार्ड स्तर पार कर चुकी है तो पुनपुन अपने उच्चतम बाढ़ स्तर के बेहद करीब है।

  • पंजाब में मौसम ने ली करवट, पठानकोट में बारिश का अलर्ट जारी; जानें आज कैसा रहेगा मौसम

    पंजाब में मौसम ने ली करवट, पठानकोट में बारिश का अलर्ट जारी; जानें आज कैसा रहेगा मौसम

    अमृतसर
     पंजाब में शनिवार को कई हिस्सों में बारिश के बाद अब मानसून के कमजोर पड़ने के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को केवल पठानकोट में यलो अलर्ट है। हालांकि पठानकोट और होशियारपुर में कई स्थानों पर बारिश हो सकती है।

    इसके बाद बारिश का दायरा लगातार घटेगा और ज्यादातर जिलों में मौसम सामान्य या शुष्क रहने की संभावना है। हालांकि शनिवार कुछ जिलों में बारिश के बाद भी औसत तापमान में हल्की बढ़ौतरी देखने को मिली, लेकिन तापमान सामान्य के करीब बना रहा है। आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ने के आसार बन रहे हैं।

    शनिवार को 0.7 डिग्री बढ़ा औसत तापमान
    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग चंडीगढ़ के अनुसार शनिवार को पंजाब के औसत अधिकतम तापमान में शुक्रवार के मुकाबले 0.7 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई। इसके बावजूद तापमान सामान्य के आसपास बना रहा।

    बठिंडा सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। फरीदकोट में 35.5, रूपनगर में 34.3, लुधियाना और चंडीगढ़ में 34, मोहाली में 33.9, अमृतसर में 32.9 और पटियाला में 32.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।

    आनंदपुर साहिब में सबसे ज्यादा बारिश
    शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक कई क्षेत्रों में बारिश हुई। श्री आनंदपुर साहिब में 24 मिलीमीटर बारिश हुई, जो राज्य में सबसे अधिक रही। चंडीगढ़ में 15.2, पटियाला में 9, रोपड़ में 7.5 और लुधियाना में 3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

    पठानकोट के थीन बांध और गुरदासपुर में 0.5 से 1 मिलीमीटर बारिश हुई। अमृतसर, जालंधर, फिरोजपुर, होशियारपुर और संगरूर में बारिश नहीं हुई।

    सिर्फ पठानकोट में यलो अलर्ट जारी
    6 सितंबर: पठानकोट में कई स्थानों पर अच्छी बारिश और यलो अलर्ट रहेगा। होशियारपुर में भी कई स्थानों पर बारिश होगी। गुरदासपुर, रूपनगर और मोहाली में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं।

    अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, संगरूर, मानसा, बठिंडा, फरीदकोट, मुक्तसर, फाजिल्का, फिरोजपुर और मोगा में छिटपुट बारिश हो सकती है।

    7 सितंबर: पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, रूपनगर और मोहाली में कुछ स्थानों पर बारिश होगी। अमृतसर, कपूरथला, जालंधर, नवांशहर, लुधियाना, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला और मानसा में छिटपुट बारिश संभव है। बाकी जिलों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा।

    8 सितंबर: गुरदासपुर और होशियारपुर में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होगी। पठानकोट, रूपनगर, मोहाली, फतेहगढ़ साहिब और पटियाला में छिटपुट बारिश हो सकती है। बाकी राज्य में मौसम शुष्क रहेगा।

    9 सितंबर: पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर और मोहाली में कहीं-कहीं बारिश की संभावना है। पंजाब के बाकी जिलों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है।

  • कैबिनेट बैठक में पंजाब को मिली बड़ी सौगात, नई फूड ग्रेन पॉलिसी मंजूर; स्वास्थ्य विभाग में 151 पद बढ़े

    कैबिनेट बैठक में पंजाब को मिली बड़ी सौगात, नई फूड ग्रेन पॉलिसी मंजूर; स्वास्थ्य विभाग में 151 पद बढ़े

    चंडीगढ़ 

    पंजाब कैबिनेट की बैठक  चंडीगढ़ में सीएम भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई। बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा ने बैठक के बाद फैसलों के बारे में जानकारी दी।  चीमा ने बताया कि बैठक में पीपीएससी ग्रुप-1 रेगुलेशन में संशोधन को मंजूरी दे दी गई। इसके अलावा बैठक में नई भर्तियां निकालने पर भी चर्चा हुई। बैठक में पंजाब फूड ग्रेन ट्रांसपोर्ट पालिसी को हरी झंडी दे दी गई। चमकौर साहिब अस्पताल में 33, मलेरकोटला व धूरी के अस्पतालों में 19 व डेंटल विभाग में 80 पदों को भरने की मंजूरी भी कैबिनेट की बैठक में दे दी गई। हरपाल चीमा ने बताया कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान अब तक युवाओं को 71 हजार सरकारी नौकरियां दी हैं। 

     मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में 251 नए पद सृजित करने को मंजूरी दी गई।

    इनमें चमकौर साहिब के उपमंडलीय अस्पताल के लिए 33, मालेरकोटला के स्वास्थ्य विभाग के लिए 19, चिकित्सा व दंत चिकित्सा अधिकारियों के 80 तथा उपमंडलीय अस्पतालों और नए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 119 पद शामिल हैं। इसके साथ ही पंजाब लोक सेवा आयोग में ग्रुप-ए के नियमों में संशोधन और नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई।

    वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने बताया कि नए पदों के सृजन का उद्देश्य सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों की कमी दूर करना और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। चमकौर साहिब के उपमंडलीय अस्पताल में 33 पद सृजित किए गए हैं। सरकार के अनुसार इससे अस्पताल में चिकित्सकीय स्टाफ की कमी दूर होगी और क्षेत्र के लोगों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।

    मालेरकोटला में स्वास्थ्य प्रशासन होगा मजबूत
    मालेरकोटला में स्वास्थ्य विभाग के लिए 19 नए पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सहायक सिविल सर्जन और जिला परिवार कल्याण अधिकारी सहित अन्य पद शामिल हैं। नया जिला बनने के बाद स्वास्थ्य प्रशासन को मजबूत करने के लिए इन पदों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    चिकित्सा व दंत चिकित्सा अधिकारियों के 80 पद
    प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए चिकित्सा अधिकारियों और दंत चिकित्सा अधिकारियों के 80 पदों को मंजूरी दी गई। वहीं, उपमंडलीय अस्पतालों और नए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 119 पद सृजित किए गए हैं। इससे स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक स्टाफ उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    कैबिनेट ने खाद्यान्न से जुड़ी नीतियों को भी मंजूरी दी। इनमें पंजाब कस्टम मिलिंग नीति, खरीद विपणन सीजन-2026, पंजाब खाद्यान्न ढुलाई नीति-2027 और पंजाब खाद्यान्न श्रम एवं कार्टेज नीति-2027 शामिल हैं। सरकार के अनुसार इन नीतियों से खरीद, ढुलाई और श्रम व्यवस्था को सुचारु बनाने में मदद मिलेगी।

    कैबिनेट के अहम फैसले

         पंजाब लोक सेवा आयोग में ग्रुप-ए के नियमों में संशोधन और नए पदों का सृजन।
         चमकौर साहिब उपमंडलीय अस्पताल में 33 नए पद।
         मालेरकोटला स्वास्थ्य विभाग में 19 नए पद।
         चिकित्सा व दंत चिकित्सा अधिकारियों के 80 पद।
         उपमंडलीय अस्पतालों और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 119 पद।
         पंजाब कस्टम मिलिंग नीति और खरीद विपणन सीजन-2026 को मंजूरी।
         पंजाब खाद्यान्न ढुलाई नीति-2027 तथा खाद्यान्न श्रम एवं कार्टेज नीति-2027 को स्वीकृति।

     

  • कोयले की कमी से पंजाब में बिजली उत्पादन पर असर, 4 दिन में सप्लाई नहीं मिली तो लगेंगे बिजली कट

    कोयले की कमी से पंजाब में बिजली उत्पादन पर असर, 4 दिन में सप्लाई नहीं मिली तो लगेंगे बिजली कट

    चंडीगढ़ 

    बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर कोयले की भारी कमी के कारण पंजाब भर में बिजली संकट और गंभीर हो गया है, जिससे राज्य में बिजली उत्पादन 1,500 मेगावाट तक घट गया है और बड़े थर्मल प्लांट कम क्षमता पर चलाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोयले की कमी के कारण देश भर में 63 GW बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है, जबकि केंद्र द्वारा कोयले की कम की गई आपूर्ति ने राजपुरा और तलवंडी साबो थर्मल प्लांटों को प्रभावित किया है, जिससे पंजाब के बिजली प्रबंधन पर और बुरा असर पड़ा है।

        केंद्र सरकार कोयले की कमी को दूर करने और लोगों तथा उद्योगों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित बनाने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाए।

    कोयले की कमी से 1,500 मेगावाट बिजली उत्पादन घटा
    एक वीडियो संदेश में बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने कहा, “देश में कोयले की भारी कमी के कारण पंजाब में बिजली उत्पादन में लगभग 1,500 मेगावाट की गिरावट आई है। पिछले दो-तीन दिनों से राज्य में बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिस कारण मजबूरीवश घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती की जा रही है।”

        मौजूदा बिजली संकट के पीछे सबसे बड़ा कारण देश भर में कोयले की भारी कमी है। उन्होंने आगे कहा, “यह समस्या सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि कोयले की कमी के कारण देश भर में लगभग 63 GW बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है।“

    देश भर में लगभग 63 गीगावाट (GW) क्षमता के थर्मल पावर प्लांट कोयले की किल्लत से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और अधिकांश निजी बिजली संयंत्रों के पास केवल 3 से 4 दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है, जिसके कारण वे अपनी आधी क्षमता (हाफ कैपेसिटी) पर चलने को मजबूर हैं।

    बिजली मंत्री ने पंजाब के प्रमुख प्राइवेट थर्मल पावर प्लांटों का ब्योरा देते हुए कहा कि नाभा पावर लिमिटेड (राजपुरा) और तलवंडी साबो पावर प्लांट (मानसा) पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा सप्लाई किए जाने वाले कोयले पर निर्भर हैं। केंद्र से पर्याप्त कोयला न मिलने के कारण ये दोनों बड़े प्लांट वर्तमान में आधी क्षमता पर ही बिजली उत्पादन कर पा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने राहत की बात बताते हुए स्पष्ट किया कि जिन थर्मल प्लांटों को पंजाब सरकार खुद कोयला मुहैया करा रही है, उनके पास अभी भी लगभग 10 दिन का स्टॉक है।

    मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने बताया कि देश भर के कई थर्मल पावर प्लांटों के पास सिर्फ तीन से चार दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है और नतीजतन वे अपनी आधी क्षमता पर चलने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा, “पंजाब के प्राइवेट थर्मल पावर प्लांट भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहे हैं, जहां कोयले की कमी के कारण आधी क्षमता पर बिजली उत्पादन हो रहा है।”

    सौंद ने कहा कि देश भर में कोयले की कमी से बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। केंद्र द्वारा कोयले की कम आपूर्ति ने राजपुरा और तलवंडी साबो थर्मल प्लांटों को प्रभावित किया है। कई बड़े थर्मल प्लांट कम क्षमता पर चलाने को मजबूर हो रहे हैं। बिजली मंत्री ने केंद्र सरकार से इस पर तुरंत चुप्पी तोड़ने की मांग की है। उन्होंने कोयले की कमी दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा।

    इसका उद्देश्य लोगों और उद्योगों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। दो-तीन दिन से राज्य में घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती हो रही है। यह बिजली की कमी के कारण मजबूरी में की जा रही है।

    बिजली संकट पर केंद्र सरकार को घेरा पंजाब में गहराते बिजली संकट को लेकर बिजली मंत्री तरनप्रीत सिंह सौंद ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए अपनी चुप्पी तोड़ने की अपील की है। मंत्री ने कहा कि केंद्र को देश और पंजाब के लोगों को स्पष्टीकरण देना चाहिए कि कोयले की यह नेशनल शॉर्टेज कब तक दूर होगी, ताकि राज्यों में आम जनता और उद्योगों को निर्बाध बिजली की आपूर्ति फिर से सुनिश्चित की जा सके।

    1500 मेगावाट घटना बिजली उत्पादन बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर कोयले की कमी के कारण पंजाब भर में बिजली संकट और गंभीर हो गया है, जिससे राज्य में बिजली उत्पादन 1,500 मेगावाट तक घट गया है। मंत्री ने कहा कि यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है जो पूरे देश को प्रभावित कर रहा है।

    केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए और देश के लोगों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि कोयले की इस कमी पर काबू पाने में कितना समय लगेगा, ताकि पंजाब की आम जनता और उद्योगों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति दी जा सके।

    बिजली मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और कोयले की कमी को दूर करने के लिए तुरंत ठोस और उचित कदम उठाने चाहिए। कोयले की समस्या का हल जल्द से जल्द निकाला जाना चाहिए ताकि बिना रुकावट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

    कोयले के भंडार की स्थिति :
    देश भर के कई थर्मल पावर प्लांटों के पास सिर्फ तीन से चार दिन का कोयला भंडार बचा है। पंजाब के निजी थर्मल पावर प्लांट भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहे हैं। यहां कोयले की कमी के कारण आधी क्षमता पर बिजली उत्पादन हो रहा है। जिन थर्मल प्लांटों को पंजाब सरकार कोयला देती है, वहां लगभग 10 दिनों का भंडार अभी भी उपलब्ध है। 

    केंद्र से स्पष्टीकरण की मांग :
    राजपुरा के नाभा पावर लिमिटेड थर्मल प्लांट और मानसा के तलवंडी साबो थर्मल प्लांट को केंद्र कोयला देता है। हालांकि केंद्र पूरी आपूर्ति सुनिश्चित करने में असमर्थ रहा है। सौंद ने कहा कि केंद्र को स्पष्ट करना चाहिए कि कोयले की इस कमी पर काबू पाने में कितना समय लगेगा। इससे पंजाब की आम जनता और उद्योगों को बिना रुकावट बिजली मिल सकेगी। 

    कोयले की कमी से बिजली संकट गहराया
    दूसरी ओर, उन्होंने कहा कि जिन थर्मल प्लांटों को पंजाब सरकार द्वारा कोयले की आपूर्ति की जाती है, वहां राज्य सरकार के प्रयासों से अभी भी लगभग 10 दिनों का कोयला स्टॉक उपलब्ध है।

        मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने खास तौर पर राजपुरा के नाभा पावर लिमिटेड थर्मल प्लांट और मानसा के तलवंडी साबो थर्मल प्लांट का जिक्र किया, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा कोयला आपूर्ति की जाती है। उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार कोयले की पूरी आपूर्ति सुनिश्चित बनाने में असमर्थ रही है, ये दोनों बड़े थर्मल प्लांट फिलहाल अपनी आधी क्षमता पर चलने के लिए मजबूर हैं, जिसने बिजली की कमी को और बढ़ा दिया है और पंजाब के बिजली प्रबंधन को प्रभावित किया है।”

    मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने कहा, “यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है जो पूरे देश को प्रभावित कर रहा है। केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए और देश के लोगों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि कोयले की इस कमी पर काबू पाने में कितना समय लगेगा, ताकि पंजाब की आम जनता और उद्योगों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति दी जा सके।”

    बिजली मंत्री ने कहा, “केंद्र सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और कोयले की कमी को दूर करने के लिए तुरंत ठोस और उचित कदम उठाने चाहिए। कोयले की समस्या का हल जल्द से जल्द निकाला जाना चाहिए ताकि बिना रुकावट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।”

     

  • दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर उठे सवाल, 47.7 लाख नाम हटने से मतदाताओं में बढ़ी चिंता

    दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर उठे सवाल, 47.7 लाख नाम हटने से मतदाताओं में बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली
     आपको कब पता चला कि आप मर चुके हैं? 'जन सरोकार' के एक प्रतिनिधि ने 51 साल के कामता प्रसाद से यह सवाल तब पूछा, जब शहर की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उनके नाम के आगे "मृत" लिखा हुआ मिला। यह एक अजीब नजारा था कि एक मरा हुआ आदमी उन लोगों के बीच घूम रहा था जिन्हें शिफ्टेड या एब्सेंट मार्क किया गया था।

    मंगोलपुरी के लोग 'जन सुनवाई' में यह जानने के लिए जमा हुए थे कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) ड्राइव के तहत ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद उनके नामों का क्या हुआ। कई लोगों ने, जिन्होंने बूथ-लेवल ऑफिसर्स (BLOs) को अपने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किए थे, बताया कि वे यह देखकर हैरान रह गए कि उनके नाम लिस्ट से गायब थे या उनका स्टेटस बदल दिया गया था।

    47.7 लाख वोटरों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए
    मौजूदा वोटर लिस्ट में शामिल लगभग 1.45 करोड़ वोटरों में से करीब 47.7 लाख वोटरों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटा दिए गए थे। इसके पांच दिन बाद, 4 सितंबर तक दिल्ली में 'फॉर्म 6' के तहत 2,28,764 आवेदन मिले हैं। इनमें से सबसे ज्यादा, यानी 23,268 आवेदन नॉर्थ-वेस्ट जिले से आए हैं, क्योंकि लोगों को दोबारा रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ा। दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ्तर ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे ड्राफ्ट लिस्ट में अपना नाम चेक करें। अगर नाम नहीं है, तो फाइनल लिस्ट में नाम शामिल करवाने के लिए तय घोषणा-पत्र और जरूरी दस्तावेजों के साथ 'फॉर्म 6' जमा करें।

    प्रसाद के लिए, नाम हटाए जाने की बात समझना बहुत मुश्किल था। उन्होंने कहा कि मैं 35 साल से इसी इलाके में रह रहा हूं और दर्जी का काम करता हूं। फिर भी, मेरे चार लोगों के परिवार में सिर्फ़ मेरा ही नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया है। ये चिंताएं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस और यूनाइटेड नेशंस इंटरनल जस्टिस काउंसिल के चेयरमैन मदन बी. लोकुर की बात से मेल खाती हैं। उन्होंने कहा था कि असली वोटरों के नाम हटाने से पहले BLOs आसानी से ऐसे मामलों की जांच कर सकते हैं।

    उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि आखिर कौन सा दस्तावेज किसी व्यक्ति की चुनावी पहचान तय करता है। "ये सभी दस्तावेज-चाहे आधार हो, PAN हो या EPIC कार्ड – सरकार और भारत के चुनाव आयोग द्वारा जारी किए जाते हैं, और इनके होने के बावजूद नाम हटाए जा रहे हैं।

    अपने आधार और EC-जारी EPIC कार्ड लिए खड़े थे
    कई परेशान निवासी अपने आधार और EC-जारी EPIC कार्ड लिए खड़े थे और सोच रहे थे कि इन दस्तावेजों का क्या फायदा, जब उन्हें यह साबित करने में ही मुश्किल हो रही थी कि वे दशकों से उसी इलाके में रह रहे हैं। "अनुपस्थित" (absent) मार्क की गईं 49 साल की लक्ष्मी देवी ने बताया कि BLO उनके घर सिर्फ एक बार आई थीं, जब न तो वह और न ही उनके फायरफाइटर पति घर पर थे। जब हमने BLO को फ़ोन किया, तो उन्होंने कहा कि कोई और रास्ता नहीं है और हमें नए वोटर के तौर पर रजिस्टर करना होगा। लेकिन मैं ऐसा क्यों करूं? मैंने पिछले 27 सालों से वोट दिया है।

    AV बालिगा मेमोरियल ट्रस्ट की वॉलंटियर राम जानकी, जो मंगलवार से घर-घर जा रही हैं, ने बताया कि नाम हटाने के कारणों में "शिफ़्टेड" (दूसरी जगह चले जाना) सबसे आम वजह थी। उन्होंने कहा कि प्रवासी मज़दूर और शादी के बाद दूसरी जगह चली गईं महिलाएँ ज़्यादा मुश्किल में थीं; कुछ को "डुप्लिकेट" बता दिया गया क्योंकि एक दूसरी एंट्री में उनके पिता का नाम और उनके मायके का पता दर्ज था।

    विधवा गुड्डी देवी के लिए फॉर्म भरना ही मुश्किल
    अकेले रहने वाली 71 साल की विधवा गुड्डी देवी के लिए, फॉर्म भरना ही एक मुश्किल काम साबित हुआ। उन्होंने कहा कि फॉर्म की भाषा समझना मुश्किल था, जबकि अधिकारी लोगों से इसे जल्दी भरने के लिए कह रहे थे। अब उन्हें उस घर से "हमेशा के लिए दूसरी जगह शिफ्ट" हुआ दिखाया गया है, जिसे उन्होंने पिछले 35 सालों से नहीं छोड़ा है।

    बीएलओ को ठीक से जानकारी नहीं दी गई थी
    'वोटर अधिकार मंच' की प्रतिनिधि कैरिना ने कहा कि कन्फ्यूजन इसलिए और बढ़ गया क्योंकि BLOs को ठीक से जानकारी नहीं दी गई थी और उन्हें बहुत कम समय में काम पूरा करना था। "जब भी कोई वोटर तय शर्तों पर खरा नहीं उतरता — जैसे उनका नाम 2002 की वोटर लिस्ट से मेल नहीं खाता, वे घर पर नहीं मिलते, या फ़ॉर्म में कोई गलती होती है — तो समय की कमी के कारण BLOs उनके नाम लिस्ट से काट देते हैं।"

    जब मंगोलपुरी नागरिकों के लिए अपना नाम लिस्ट से हटाए जाने पर सवाल उठाने का पहला सामूहिक मंच बना, तो 'मज़दूर' संगठन के निखिल डे ने चुनाव आयोग से बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने की मांग की। "यह पूरी प्रक्रिया इतनी ज़्यादा नागरिक-केंद्रित हो गई है कि इस बात का ध्यान ही नहीं रखा गया कि हर कोई इस प्रक्रिया को नहीं समझ सकता; इसलिए लोगों की मदद की जानी चाहिए ताकि कोई भी नागरिक अपने अधिकारों से वंचित न रहे।

  • दिल्ली में बिल्डिंग गिरने से हड़कंप, मलबे में कई छात्रों के फंसे होने की आशंका; NDRF संभाल रही मोर्चा

    दिल्ली में बिल्डिंग गिरने से हड़कंप, मलबे में कई छात्रों के फंसे होने की आशंका; NDRF संभाल रही मोर्चा

    नई दिल्ली

    दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में रव‍िवार को बड़ा हादसा हो गया. तीन मंज‍िला बिल्डिंग गिरने से बड़ी संख्या छात्र मलबे में दब गए. दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गई हैं. पुल‍िस और प्रशासन के अधि‍कारी भी मौके पर पहुंच रहे हैं. बताया जा रहा है कि हादसा करीब 1 बजकर 30 मिनट पर हुआ है. रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन जारी है। 

    सत्य निकेतन में बिल्डिंग का मलबा हटाने का काम जारी, मौके पर दमकल की 12 गाड़ियां मौजूद

    सत्य निकेतन इलाके में एक हॉस्टल की इमारत के गिरने के बाद अब मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से चलाया जा रहा है. मौके पर जेसीबी के साथ-साथ दमकल की भी 12 गाड़िया मौके पर मौजूद हैं. अंदर फंसे लोगों को जल्द से जल्द निकालने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। 

    सीएम रेखा गुप्‍ता ने घटना पर जताया दुख
    सीएम रेखा गुप्‍ता ने घटना पर दुख जताया है. उन्‍होंने एक्‍स पर जानकारी दी क‍ि, ''RK पुरम के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना से बहुत चिंता है. DDMA, NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की टीमें युद्ध स्तर पर बचाव कार्य कर रही हैं. एहतियात के तौर पर बगल की इमारत को खाली करा लिया गया है। फँसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों को तुरंत मदद पहुँचाने की हर संभव कोशिश की जा रही है. हालात पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है और सभी संबंधित एजेंसियाँ आपसी तालमेल के साथ काम कर रही हैं। हर नागरिक की सुरक्षा और भलाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। 

    सीएम बोलीं- हर संभव कोशिश जारी
    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी सत्य निकेतन में हुए हादसे पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि DDMA, NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की टीमें राहत-बचाव अभियान चला रही हैं। 

    उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर हादसे से सटी इमारत को खाली करा लिया गया है. रेखा गुप्ता ने कहा कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों को तत्काल मदद देने की हर संभव कोशिश की जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी एजेंसियां आपसी तालमेल से काम कर रही हैं. नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। 

    फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. मलबा पूरी तरह हटने के बाद ही पता चलेगा कि हादसे में कितने लोग फंसे थे और कितने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। 
     

    दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस हादसे पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि जल्द से जल्द लोगों को निकालने का प्रयास किया जा रहा है. राहत और बचाव कार्य जारी है। 

    दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा ने भी इस हादसे पर दुख जताया है. उनका कहना है कि NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, DDMA, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की बचाव टीमें मौके पर मौजूद हैं और जो लोग फंसे हैं उन्हें निकालने की हर संभव कोशिश की जा रही है। 

    ये हादसा मोती बाग के सत्य निकेतन स्थित शिव मंदिर के पास की है, जहां एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई. घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं। 

    दोपहर 1 बजकर 33 मिनट पर मिली हादसे की जानकारी
    फायर डिपार्टमेंट को 1 बजकर 33 मिनिट पर इस हादसे की जानकारी मिली. फायर डिपार्टमेंट की 12 गाड़ियां मौके पर मौजूद हैं. राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाया जा रहा है और टीमें लगातार मलबा हटाने में जुटी हैं. 3 से 4 लोगों को मलबे से निकाला भी जा चुका है और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। 

    जानकारी के मुताबिक, इस बिल्डिंग में एक पीजी चल रहा था जिसकी वजह से मलबे में कई छात्रों के दबे होने की आशंका है. रेस्क्यू टीमों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी मलबा हटाने और लोगों को निकालने में जुटे हैं। 

    विधायक ने लिया हालात का जायजा
    आरके पुरम के विधायक अनिल शर्मा ने दुर्घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'ये बहुत दुखद घटना है. इससे ज्यादा दिल दहला देने वाली कोई बात नहीं हो सकती. स्टूडेंट्स अलग-अलग जगहों से इस बिल्डिंग में PGs में पढ़ने और रहने आते हैं, बिल्डिंग गिर गई है. हालांकि ये बताना मुश्किल है कि कितने स्टूडेंट्स हैं. चाहे वो पांच हों, दस हों, या बीस. लेकिन हमें पक्का पता है कि स्टूडेंट्स अंदर फंसे हुए हैं। 

     चश्‍मदीद ने कहा- बच्चे चिल्ला रहे हैं, हमें बचाओ, हमें बचाओ
    चश्मदीद युवक ने कहा, "मेरी दुकान पास ही है. हम अंदर बैठे थे तभी अचानक हमें भूकंप जैसी गड़गड़ाहट की आवाज़ सुनाई दी. हम तुरंत बाहर भागे, वहां बहुत धुआं और धूल थी. पूरी इमारत गिर चुकी थी. कुछ शव निकाले गए और चार ऐसे बच्चों को भी बचाया गया जिनकी सांसें चल रही थीं. मलबे के अंदर से अभी भी आवाज़ें आ रही हैं. बच्चे चिल्ला रहे हैं, 'हमें बचाओ, हमें बचाओ!'… वहां कम से कम 25-30 बच्चे थे. पास ही लड़कों और लड़कियों का PG था. 4-5 लोगों को बचाया गया है; 2-3 शव निकाले गए हैं और और भी शव मिलने की आशंका है. वे बेसमेंट बना रहे थे। 

    'बिल्डिंग गिरते ही हम भागकर निकले'
    हादसे के वक्त मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि इमारत अचानक गिर गई. लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले चारों तरफ धूल का गुबार फैल गया. आसपास मौजूद लोग तुरंत वहां से भागे. चश्मदीद के मुताबिक, मलबे में 20 से 30 लोग दबे हो सकते हैं. एक अन्य चश्मदीद ने भी बताया कि मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि हादसे के वक्त इमारत के अंदर कितने लोग मौजूद थे। 

    मलबे के नीचे से फोन कर रहे लोग
    मौके पर पहुंचे आरके पुरम के विधायक अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि कुछ लोग मलबे के नीचे से फोन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कई लोग अभी अंदर फंसे हो सकते हैं. बचाव अभियान लगातार जारी है। 

    स्थानीय लोग भी रेस्क्यू टीमों के साथ मिलकर मलबा हटाने में मदद कर रहे हैं. फिलहाल सबसे बड़ी कोशिश मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की है। 

    जवाबदेही और एक्शन की मांग
    NSUI ने आगे लिखा, 'छात्रों और आम लोगों की सुरक्षा के साथ लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. DU प्रशासन और सरकार तुरंत युद्धस्तर पर राहत-बचाव कार्य चलाएं, हर छात्र और व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालें और इस घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करें. छात्रों की जान के साथ लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

    NSUI ने कहा कि पीएम मोदी छात्रों की बात करने के लिए तो बड़े-बड़े मंचों पर जाते हैं, लेकिन जब छात्रों की सुरक्षा और जिंदगी का सवाल आता है, तो सरकार उन्हें भूल जाती है. केंद्र में BJP की सरकार, दिल्ली में BJP की सरकार, MCD में BJP का मेयर- जब सब कुछ आपका है, तो छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? आखिर कब तक लापरवाही की कीमत छात्र अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे?

  • यूपी के बदलाव पर युवाओं का मंथन, ‘यूपी डायलॉग’ में 100 से ज्यादा युवाओं ने रखे विचार

    यूपी के बदलाव पर युवाओं का मंथन, ‘यूपी डायलॉग’ में 100 से ज्यादा युवाओं ने रखे विचार

    ‘यूपी डायलॉग’ में जुटे 100 से ज्यादा युवा, उत्तर प्रदेश के एक दशक के बदलाव पर हुई चर्चा

    प्रदेश की अर्थव्यवस्था और एक्सप्रेसवे नेटवर्क पर हुई चर्चा

    – विशेषज्ञों ने कहा, ‘2017 में ₹52 हजार थी प्रति व्यक्ति आय, अब ₹1.20 लाख’

    – जनजातीय समाज और युवाओं के लिए चल रही योजनाओं पर भी चर्चा

    लखनऊ,
    लखनऊ के हजरतगंज स्थित एसेंस बैंक्वेट में फ्रेंड्स ऑफ यूपी की ओर से यूपी डायलॉग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम 'उत्तर प्रदेश का एक दशक' रही। इसमें ‘फ्रेंड्स ऑफ योगी’ के 100 से ज्यादा युवा वॉलंटियर्स शामिल हुए। इस दौरान पिछले दस वर्षों में उत्तर प्रदेश में हुए बदलाव और आने वाले समय में प्रदेश के विकास को लेकर चर्चा हुई।

    कार्यक्रम में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर एम.के. अग्रवाल, प्रोफेसर अमित कुशवाह और पॉलिटिकल एनालिस्ट शशांक शेखर सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। इस दौरान युवाओं ने वक्ताओं से कई मुद्दों पर सवाल पूछे और उत्तर प्रदेश के भविष्य को लेकर अपने सुझाव भी दिए।

    आर्थिक बदलाव और एक्सप्रेसवे पर हुई चर्चा
    प्रोफेसर एम.के. अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश की आर्थिक स्थिति में आए बदलावों पर बात की। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में प्रदेश की जीडीपी में लगातार दो अंकों की बढ़ोतरी हुई है। उत्तर प्रदेश से होने वाले निर्यात में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने प्रदेश में लिंगानुपात बेहतर होने की बात भी कही। प्रोफेसर अग्रवाल ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में केवल एक एक्सप्रेसवे था, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर दस हो गई है। उन्होंने दावा किया कि देश के करीब 60 प्रतिशत एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में हैं।

    ‘₹52 हजार से बढ़कर ₹1.20 लाख हुई प्रति व्यक्ति आय’
    पॉलिटिकल एनालिस्ट शशांक शेखर सिंह ने कहा कि 2017 के मुकाबले उत्तर प्रदेश की आर्थिक और वित्तीय स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अब रेवेन्यू सरप्लस की स्थिति में है। उनके मुताबिक वर्ष 2017 में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय करीब 52 हजार रुपये थी, जो 2026 में बढ़कर करीब 1.20 लाख रुपये हो गई है।

    उन्होंने जनजातीय समाज के लिए किए जा रहे कामों का भी जिक्र किया। सिंह ने बताया कि 65 गांवों में लोगों को जमीन का मालिकाना हक दिया गया है। मुख्यमंत्री आवास योजना के जरिए जरूरतमंद परिवारों तक घर, बिजली और दूसरी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। वहीं, अभ्युदय योजना के जरिए युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग की सुविधा दी जा रही है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास में युवाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है। युवाओं से प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर जागरूक रहने और अपने सुझाव सामने रखने की अपील भी की गई।

  • ANM से लैब सहायक तक वेतन में बड़ा अंतर, UP के 98 हजार NHM कर्मियों ने उठाई आवाज

    ANM से लैब सहायक तक वेतन में बड़ा अंतर, UP के 98 हजार NHM कर्मियों ने उठाई आवाज

    लखनऊ
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में कार्यरत करीब 98 हजार कार्मिकों के वेतन में असमानता दूर कर एकरूप वेतन नीति लागू करने की मांग तेज हो रही है। संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ ने सेवा अवधि, वरिष्ठता, पद, योग्यता, कार्य की प्रकृति और जिम्मेदारियों के आधार पर वेतन पुनर्निर्धारण के साथ कर्मचारियों को आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल करने की मांग की है। मांगों की अनदेखी पर स्वास्थ्य सेवाएं ठप करने की चेतावनी दी गई है।

    एनएचएम कर्मियों को आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल करने की मांग
    संघ के प्रदेश महामंत्री योगेंद्र उपाध्याय के मुताबिक, एनएचएम में 13 हजार सेवा प्रदाता (आउटसोर्स) और 75 हजार स्वास्थ्य समिति से अनुबंधित कार्मिक हैं। अन्य श्रेणियों को मिलाकर संख्या करीब 98 हजार है। ये स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। बावजूद इसके एनएचएम कर्मियों के लिए समान वेतन नीति नहीं बनी है।

    स्थायी एएनएम को करीब 40 हजार रुपये मासिक जबकि एनएचएम कर्मी को 11 हजार रुपये मिलता है। स्थायी लैब सहायक को करीब 40 हजार रुपये, जबकि एनएचएम कर्मी को 13 हजार रुपये मिलते हैं।

    चतुर्थ श्रेणी के सामान्य संविदा कर्मी को करीब 18 हजार रुपये और एनएचएम कर्मी को 10 हजार रुपये वेतन मिलता है। सभी वर्गों में वेतन विसंगति बनी हुई है।

    मध्य प्रदेश, बिहार और हरियाणा के अनुरूप वेतन निर्धारण किया जाए
    योगेंद्र उपाध्याय ने दावा किया कि वर्ष 2016 से एनएचएम कर्मियों की वेतन विसंगतियां दूर करने के सुझाव दिए जाते रहे हैं। मध्य प्रदेश, बिहार और हरियाणा समेत कुछ राज्यों में कार्य और दायित्व के अनुरूप वेतन का निर्धारण कर भी लिया। संघ के अनुसार, वर्ष 2018 से केंद्र सरकार के अनुमोदित आरओपी (रिकॉर्ड ऑफ प्रोसीडिंग्स) में एनएचएम के वेतन और मानव संसाधन संबंधी जरूरतों के लिए बजट का प्रावधान किया जा रहा है।

    स्वाइन फ्लू के चलते जनहित में आंदोलन की तिथि घोषित नहीं की जा रही है। स्थिति सामान्य होते ही आंदोलन शुरू किया जाएगा।

  • ब्लैकलिस्ट कंपनियों को फिर मिला कार्यादेश और भुगतान, झारखंड में जांच के निर्देश

    ब्लैकलिस्ट कंपनियों को फिर मिला कार्यादेश और भुगतान, झारखंड में जांच के निर्देश

     रांची
    कृषि निदेशालय ने काली सूची में डाली गई 14 कंपनियों को फिर से कार्यादेश देने के मामले की जांच कराने का निर्णय लिया है। इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सभी जिलों के उपायुक्तों को सौंपी गई है। कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद राज्य के सभी जिला उपायुक्तों को इसकी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं

    जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के जिला सचिव सह राज्य कार्यकारिणी सदस्य अजय कुमार सिंह ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के उप आयुक्त  योगेश ए. रौंडल से पत्राचार कर काली सूची में डाली गई 14 कंपनियों को फिर से कार्यादेश मिलने की जानकारी दी है

    शिकायत में कहा गया है कि झारखंड कृषि निदेशालय ने वर्ष 2023 में जिन 14 कंपनियों को गंभीर अनियमितता के आरोप में काली सूची में डाला था, उन्हें 30 दिनों के भीतर तार्किक आदेश देकर मुक्त कर दिया गया था। जबकि इन कंपनियों ने शर्तों का अनुपालन नहीं किया था।

    इन कंपनियों में मोहित इंडिया, मेक नाउ इंडस्ट्रीज, ग्लोबल मैकेनिकल इक्विपमेंट, प्रीमियर इरिगेशन एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड, निंबस पाइप्स लिमिटेड, मोहित पालिटेक प्राइवेट लिमिटेड, वेदांता पालीमर्स प्राइवेट लिमिटेड, रूंगटा इरिगेशन लिमिटेड, श्री भंडारी प्लास्टिक प्राइवेट लिमिटेड, भारत ड्रिप इरिगेशन एंड एग्रो, आरएम ड्रिप एंड स्प्रिंकलर सिस्टम लिमिटेड, समय इरिगेशन प्राइवेट लिमिटेड, दिनेश इरिगेशन प्राइवेट लिमिटेड व इरिलिंक ड्रिप इरिगेशन इंडस्ट्रीज शामिल हैं।

    शिकायत में कहा गया कि इन कंपनियों को मुक्त करने संबंधित तार्किक आदेश की पहली शर्त यह थी कि सभी किसानों के यहां लगे कम गुणवत्ता वाले उपकरणों के बैच बदलकर पुन: सीपेट से जांच कराकर रिपोर्ट कृषि निदेशक रांची को समर्पित करेंगे, जो जांच अब तक नहीं हो सकी है।

    शर्तों का अनुपालन नहीं होने पर इन कंपनियों को काली सूची में ही माना जाना था, लेकिन उन्हें फिर से कार्यादेश मिल गया और भुगतान भी हो गया। इसकी सीआइटी से जांच कराने की मांग की गई। इधर, यह मामला संज्ञान में आने के बाद कृषि निदेशक ने सभी उपायुक्तों केा इसकी जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।

  • लंदन में पंजाबी सिख युवती ने मुस्लिम युवक से की शादी, धर्म परिवर्तन के दावे से मचा विवाद

    लंदन में पंजाबी सिख युवती ने मुस्लिम युवक से की शादी, धर्म परिवर्तन के दावे से मचा विवाद

    अमृतसर 
    अमृतसर की रहने वाली सिख युवती को ग्रूम कर मुस्लिम बना दिया गया। वह करीब 2 साल पहले पढ़ाई के लिए गई लंदन गई थी। अब वह पिछले 1 महीने से अपने माता-पिता को फोन नहीं कर रही थी। जब परिवार को शक हुआ तो सिख कम्युनिटी के लोगों से संपर्क किया।

    दोस्तों ने जब ढूंढ़ा तो युवती मुस्लिम के घर मिली। सिख समुदाय के लोगों ने दरवाजा खटखटाया तो पूछा कि कमलप्रीत कौर यहीं रहती है। इस पर मुस्लिम महिला ने उसे आइरा कहकर आवाज दी जिससे कंफर्म हो गया कि वह मुस्लिम बन चुकी है।

    युवती से जब पूछा गया कि तुम पिता का फोन क्यों नहीं उठा रही और बात क्यों नहीं कर रही तो उसका सीधा जवाब था कि आप फोन कर बता दो। मैं भी बता दूंगी मुझे कोई समस्या नहीं है।

    र्मिक प्रतीकों को त्यागने पर परिजनों को हुआ शक
    एक पंजाबी समाचार चैनल से बातचीत में पीड़ित परिवार ने अपना दर्द बयां करते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। युवती की मां के अनुसार, अमृतधारी होने के बावजूद उनकी बेटी ने अचानक गुरुद्वारे जाना और रोजाना का नितनेम (पाठ-पूजा) बंद कर दिया था। जब परिवार ने उसे समझाने का प्रयास किया, तो उसने धार्मिक परंपराओं पर सवाल उठाने शुरू कर दिए और उसका व्यवहार अचानक चिड़चिड़ा व आक्रामक होने लगा। बाद में परिजनों को पता चला कि वह एक पाकिस्तानी मूल के युवक के संपर्क में थी। परिवार की लाख कोशिशों और समझाइश के बावजूद युवती घर छोड़कर चली गई और कड़ा व सिरी साहिब जैसे पवित्र धार्मिक प्रतीकों को उतार दिया। अब लाचार माता-पिता ने समुदाय और प्रशासन से अपनी बेटी की सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई है।

    पश्चिमी देशों में सिर उठा रहा ग्रूमिंग गैंग का नेटवर्क
    ब्रिटेन समेत कई पश्चिमी देशों में सक्रिय ग्रूमिंग नेटवर्क को लेकर लंबे समय से गंभीर सवाल उठते रहे हैं। सामाजिक संगठनों और विश्लेषकों के अनुसार, ये गिरोह सोची-समझी रणनीति के तहत अन्य समुदायों की नाबालिग बच्चियों और कम उम्र की युवतियों को झूठे प्रेमजाल में फंसाते हैं। इसके बाद उनका भावनात्मक और शारीरिक शोषण कर उन्हें अपना मूल धर्म छोड़ने और इस्लाम कबूल करने के लिए विवश किया जाता है। स्थानीय स्तर पर ऐसी कई घटनाएं पहले भी दर्ज हो चुकी हैं, जिन पर ब्रिटिश संसद से लेकर मानवाधिकार मंचों तक बहस हो चुकी है।

    नाबालिगों को निशाना बनाए जाने से बढ़ा आक्रोश
    ब्रिटेन में इस तरह के गिरोहों की सक्रियता ने सिख समुदाय को गहरे संकट में डाल दिया है। इससे पहले लंदन के हाउसलो इलाके में भी 14 वर्षीय एक मासूम सिख बच्ची को बहला-फुसलाकर अगवा करने और एक फ्लैट में बंधक बनाकर प्रताड़ित करने का जघन्य मामला सामने आया था। उस घटना के बाद भी पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों की सुस्त कार्यप्रणाली को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे। अब ताजी घटना के बाद प्रवासी समुदाय ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस से इन संगठित गिरोहों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।

    लड़की के पिता ने बताया कैसे बेटी को फंसाया..

        मुस्लिम ट्रैक्सी ड्राइवर से ड्राइविंग सीखने लगी: अमृतसर के अमृतधारी सिख परिवार की लड़की कमलप्रीत कौर करीब 2 साल पहले पढ़ाई के लिए लंदन गई थी। वहां ड्राइविंग सीखने के दौरान 6 महीने पहले वह पाकिस्तानी मूल के एक मुस्लिम ड्राइविंग टीचर के संपर्क में आ गई। परिजनों का आरोप है कि उस व्यक्ति ने लड़की का ब्रेनवॉश करके उसे अपने जाल में फंसा लिया और उसका धर्म परिवर्तन करवा दिया।

        आरोपी पहले से कर चुका दो शादियां: पीड़ित परिवार के अनुसार, आरोपी पहले से ही दो शादियां कर चुका है। उसने लड़की को उसके परिवार से पूरी तरह से अलग कर दिया है और उसका नाम बदलकर आइरा रख दिया है। लड़की ने पिछले एक महीने से अपने माता-पिता के फोन उठाने बंद कर दिए हैं, जिससे चिंतित होकर परिजनों ने मीडिया और सिख समुदाय से मदद की गुहार लगाई।

        बेटी धार्मिक थी और नितनेम करती थी: लड़की के पिता ने बताया कि उनकी बेटी पहले बहुत धार्मिक थी और नियमित रूप से पाठ व सेवा करती थी। आरोपी ने उसका मानसिक रूप से धर्मांतरण कराकर उसकी धार्मिक पहचान को दूर कर दिया है। पिता को आशंका है कि उनकी बेटी का शोषण किया जा सकता है या उसे किसी गलत हाथों में बेचा जा सकता है, इसलिए वे बहुत टेंशन में हैं।

        बेटी को मुस्लिम के चंगुल से छुड़ाया जाए: पीड़ित परिवार ने केंद्र सरकार, ब्रिटेन की सिख संस्थाओं और स्थानीय गुरुद्वारा कमेटियों से अपील की है कि वे एकजुट होकर उनकी बेटी को सुरक्षित बाहर निकालें। उन्होंने मांग की है कि लड़की को आरोपी के चंगुल से आजाद कराकर जल्द से जल्द भारत वापस भेजा जाए ताकि उसको फिर से सिखी के साथ जोड़ा जा सके।