Category: राज्य

  • गन्ने की खेती में आएगी नई क्रांति, वैज्ञानिकों ने तैयार कीं 6 उन्नत किस्में; किसानों की बढ़ेगी कमाई

    गन्ने की खेती में आएगी नई क्रांति, वैज्ञानिकों ने तैयार कीं 6 उन्नत किस्में; किसानों की बढ़ेगी कमाई

    करनाल
    देश में चीनी उद्योग और गन्ना किसान इस समय दोहरी चुनौती से जूझ रहे हैं। वर्षों तक उत्तर भारत के खेतों में राज करने वाली गन्ने की वंडर किस्म सीओ-0238 में रेड रॉट (लाल सड़न) बीमारी के तेजी से फैलने से पैदावार और चीनी उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है।

    दूसरी ओर, गन्ने का रकबा घटने से चीनी मिलों के पेराई सत्र प्रभावित हो रहे हैं। इस बढ़ते संकट के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के करनाल, लखनऊ संस्थान और महाराष्ट्र के वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने ऐसी 6 उन्नत प्रजातियां तैयार की हैं, जो देश के चीनी उद्योग को नई संजीवनी देने जा रही हैं।

    शोध और विकास के किस मुहाने पर खड़ी हैं नई प्रजातियां?
    1.गन्ना प्रजनन अनुसंधान संस्थान करनाल l सीओ-16030: यह किस्म अंतिम रिलीज प्रक्रिया में है। चीनी मिलों में इसके शुद्ध बीज बढ़ाने का काम चल रहा है ताकि किसानों को जल्द व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कराया जा सके। l

    सीओ-17018: यह अगेती किस्म वर्तमान में अखिल भारतीय समन्वित गन्ना अनुसंधान परियोजना (एआइसीआरपी) के तहत एडवांस्ड वैराइटल ट्रायल के चरण में है। विज्ञानी इसके शर्करा प्रतिशत और रोग प्रतिरोधकता की गहन निगरानी कर रहे हैं।

    2. भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आइआइएसआर) लखनऊ
    सीओ-एलके14201: यह किस्म शोध का चरण सफलतापूर्वक पार कर भारत सरकार की केंद्रीय प्रजाति विमोचन समिति (सीवीआरसी) द्वारा नोटिफाइड हो चुकी है। वर्तमान में यह उत्तर प्रदेश व मध्य भारत में किसानों के खेतों तक पहुंच चुकी है।

    सीओ-एलके 15201 : इस अगेती किस्म ने राष्ट्रीय परीक्षण पूरे कर लिए हैं। आइआइएसआर लखनऊ के फार्मों पर इसके शुद्ध बीजों का संवर्धन कर इसे राज्य स्तरीय मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया गया है।

    3. वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (वीएसआइ), पुणे महाराष्ट्र
    वीएसआइ 434: महाराष्ट्र और प्रायद्वीपीय भारत के लिए यह उच्च-शर्करा किस्म आधिकारिक रूप से रिलीज हो चुकी है और चीनी मिलों के कमान क्षेत्रों में व्यापक रूप से बुआई शुरू कर दी गई है।

    सीओ-एम12085: वीएसआइ के प्रयास से विकसित यह किस्म नोटिफाइड होकर महाराष्ट्र के किसानों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। यह विशेषकर पेड़ी फसल और जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगी।

    देश में गिरते चीनी उत्पादन में संकटमोचन बनेंगी गन्ने की छह नई प्रजातियां
    एसबीआइ करनाल से डॉ. रविंद्र ने बताया कि छह नई किस्मों को 14 प्रतिशत या इससे भी ऊपर रिकवरी रेट के साथ धरातल पर उतारने का प्रयास विज्ञानियों द्वारा किया जा रहा है। सीओ-16030, सीओएलके 14201 और वीएसआइ 434 जैसी अगेती किस्में 9 से 10 महीने में पककर तैयार हो जाती हैं। इनसे पेराई सत्र की शुरुआत में ही 14 प्रतिशत तक चीनी रिकवरी मिलेगी, कई क्षेत्रों में आंकड़ा इससे भी पार जा सकता है। खास बात ये भी है कि यह रेड राट से पूर्ण सुरक्षित है।

    l आइसीएआर के एसबीआइ क्षेत्रीय केंद्र करनाल, आइआइएसआर लखनऊ और महाराष्ट्र के वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट में तैयार की जा रही हैं यह अत्याधुनिक किस्में l सर्वाधिक 13 से 14 प्रतिशत रिकवरी देने वाली किस्म सीओ-15023 एकल किस्म पर निर्भरता जोखिम भरी, इसलिए छह नई प्रजातियां इस संकट का करेंगी स्थायी समाधान

     

  • गंगा के बढ़ते जलस्तर से बिहार में खतरा बढ़ा, डाउनस्ट्रीम जिलों में अलर्ट; 11 जिलों में बाढ़ का असर

    गंगा के बढ़ते जलस्तर से बिहार में खतरा बढ़ा, डाउनस्ट्रीम जिलों में अलर्ट; 11 जिलों में बाढ़ का असर

    पटना
    पटना में गंगा नदी विकराल रूप धारण कर चुकी है। गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि औरहा गांधी घाट पर जलस्तर के उच्चतम बाढ़ स्तर (Highest Flood Level) को पार करने के बाद अब पानी का दबाव डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहेगा। इसका प्रभाव अगले 1 से 3 दिनों तक हाथीदह एवं उसके बाद के डाउनस्ट्रीम गेज स्टेशनों पर देखने को मिल सकता है तथा यह हाथीदाह में पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर सकता है। इसके मद्देनजर बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, कटिहार जिले के गंगा के किनारे वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।

    गांधी घाट पर बढ़े हुए जलस्तर की लहर के डाउनस्ट्रीम की ओर बढ़ने को देखते हुए संबंधित पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय अधिकारियों को सतर्क रहने तथा जलस्तर की लगातार निगरानी करने को कहा गया है। साथ ही, नदी के जलस्तर, तटबंधों, संवेदनशील स्थलों एवं निचले इलाकों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें।

    बिहार में 11 जिलों के 66 प्रखंडों की 330 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का पानी फैल गया है। आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि इससे 19.57 लाख आबादी प्रभावित हुई है। बाढ पीड़ितों के बीच राहत-बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। 110 सामुदायिक रसोई केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। 326 बाढ़ शरणार्थी शिविरों में भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।

    छपरा में मही नदी का बांध टूटा
    छपरा में दरियापुर के सेमरहिया-मोहन कोठियां के पास रविवार की सुबह मही नदी का बांध टूट गया। बांध टूटने की वजह से छह से अधिक पंचायत बाढ़ की चपेट में आ गए। बांध की मरम्मत का प्रयास किया जा रहा है। बांध टूटने के बाद स्थिति को देखते हुए अब सीओ कैंप कर रहे हैं। सारण डीएम भी दरियापुर के लिए रवाना हो चुके हैं। बता दें कि इससे पहले शुक्रवार की देर रात दिघवारा में भी मही नदी का बांध टूटा था। इधर, एनएच-19 पर भी बाढ़ के पानी का तेज बहाव हो रहा है।

    मुंगेर: महाने नदी पर बना डायवर्सन चार दिन में दूसरी बार बहा
    मुंगेर जिले में टेटिया बंबर प्रखंड के बरसंडा के समीप महाने नदी पर पुल निर्माण के लिए बनाया गया अस्थायी डायवर्सन चार दिनों के अंदर दूसरी बार तेज धारा में बह गया। इससे प्रखंड की आधी से अधिक आबादी का थाना, अस्पताल और बंबर बाजार से एक बार फिर सीधा संपर्क टूट गया है। जानकारी हो कि लगातार बारिश से महाने नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण गुरुवार सुबह डायवर्सन बह गया था। विभाग के निर्देश पर संवेदक द्वारा मिट्टी डालकर उसे पैदल और दोपहिया वाहनों के चलने लायक बनाया गया था, लेकिन शनिवार रात हुई तेज बारिश के बाद नदी में आई बाढ़ में एक बार फिर डायवर्सन बह गया है।

    इससे प्रखंड की आधी से अधिक आबादी का थाना, अस्पताल, बंबर बाजार से सीधा संपर्क भंग हो गया। संपर्क भंग होने से आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत मरीजों और स्कूली बच्चों को हो रही है। लोगों को लंबी दूरी तय कर आवागमन करना पड़ रहा है।

  • झारखंड के खजाने पर GST की मार, अगस्त में कुल कलेक्शन 10.92% घटा; वार्षिक लक्ष्य भी चुनौती

    झारखंड के खजाने पर GST की मार, अगस्त में कुल कलेक्शन 10.92% घटा; वार्षिक लक्ष्य भी चुनौती

     रांची
    वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वाणिज्यिक कर विभाग के ताजा आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में विभाग के अधिकारियों के प्रयास का असर ताे दिख रहा है, लेकिन इसके बावजूद जीएसटी कलेक्शन लक्ष्य से काफी कम है।

    रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2026 में राजस्व संग्रह में पिछले साल की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है। विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में कुल सब-टोटल कलेक्शन 1,709.50 करोड़ रुपये रहा, जो अगस्त 2025 के 1,919.11 करोड़ रुपये से 10.92 प्रतिशत कम है।

    रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स संग्रह में सबसे बड़ी गिरावट जीएसटी कैटेगरी में देखी गई। प्रदेश के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इसकी संभावना पहले ही व्यक्त की थी कि राज्य सरकार के राजस्व संग्रह पर असर पड़ सकता है।

    अगस्त 2026 में कुल जीएसटी कलेक्शन 937.11 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल इसी महीने के 1,200.77 करोड़ रुपये के मुकाबले 21.96 प्रतिशत कम है।

    इसमें इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स सेटलमेंट में सबसे ज्यादा 58.19 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो 449.10 करोड़ रुपये से घटकर सिर्फ 187.77 करोड़ रुपये रह गई।

    वैट संग्रह से मिली राहत
    आंकड़ों को देखें तो राहत की बात यह रही कि वैट में अच्छी बढ़त देखने को मिल रही है। अगस्त 2026 में वैट कलेक्शन 695.90 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 602.76 करोड़ रुपये से 15.45 प्रतिशत अधिक है।

    इसी तरह, कुल नान-जीएसटी कलेक्शन में भी 7.52 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो 772.39 करोड़ रुपये रही। हालांकि प्रोफेशनल टैक्स संग्रह में भारी गिरावट 46.63 प्रतिशत दर्ज की गई।

    विभाग के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण
    वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल वार्षिक लक्ष्य 24 हजार करोड़ रुपये रखा गया है। अगस्त 2026 तक (अप्रैल से अगस्त तक) विभाग ने 8,172.70 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जो लक्ष्य का सिर्फ 34.05 प्रतिशत है।

    अगर इसी रफ्तार से गिरावट जारी रही, तो विभाग के लिए वार्षिक लक्ष्य को पूरा करना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। कुल कलेक्शन में भी पिछले वर्ष की तुलना में 15.14 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।

    वरीय अधिकारियों को मानना है कि आइजीएसटी सेटलमेंट में आई भारी कमी चिंता का विषय है, जबकि वैट कलेक्शन में बढ़त से राज्य के घरेलू कर राजस्व में कुछ सुधार का संकेत मिलता है। विभाग अब बाकी बचे महीनों में लक्ष्य हासिल करने के लिए रणनीति बनाने में जुट गया है।

    अप्रैल से अगस्त तक राजस्व संकलन में झारखंड पांच प्रतिशत पीछे है, नवंबर आते-आते हम इसकी भरपाई के लिए पूरा प्रयास करेंगे और अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि इसकी भरपाई करते हुए आगे बढ़ जाएंगे। जिन अधिकारियों का प्रयास बेहतर होगा उन्हें विभाग पुरस्कृत करेगी और जिनका नहीं होगा उन्हें दंडित भी किया जा सकता है।
    -राधाकृष्ण किशोर, वित्त मंत्री, झारखंड सरकार।

  • चित्रकूट में सीएम योगी ने बाढ़ पीड़ितों के घावों पर लगाया मरहम, बांटी राहत सामग्री, ढहे मकानों के लिए दिए चेक

    चित्रकूट में सीएम योगी ने बाढ़ पीड़ितों के घावों पर लगाया मरहम, बांटी राहत सामग्री, ढहे मकानों के लिए दिए चेक

    चित्रकूट
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को अपने एक दिवसीय दौरे पर धर्मनगरी चित्रकूट पहुंचे। यहां पर मुख्यमंत्री ने भीषण बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का हवाई और जमीनी निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने मंदाकिनी नदी की बाढ़ से प्रभावित हुए सैकड़ों परिवारों से मुलाकात कर उनका दुख-दर्द जाना और उन्हें राशन किट व राहत सामग्री वितरित की। आपदा की इस घड़ी में त्वरित सहायता पहुंचाते हुए मुख्यमंत्री ने उन तीन बाढ़ पीड़ितों में से प्रत्येक को 1 लाख 20 हजार रुपये के चेक सौंपे, जिनके आशियाने बाढ़ की भेंट चढ़ गए थे वहीं कुछ लाभार्थियों को भूमि आवंटन प्रमाण पत्र भी दिये। प्रशासन अभी सर्वे करा रहा है, शीघ्र ही अन्य प्रभावितों को भी ऐसी ही मदद दी जाएगी।

    हर वर्ग को मदद का दिया भरोसा
    राहत सामग्री वितरण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार पूरी मजबूती के साथ बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि किसी भी पीड़ित को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। सरकार द्वारा हर वर्ग के सभी प्रभावित लोगों को बिना किसी भेदभाव के हर संभव मदद दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि राहत कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    सीएम योगी ने दिया चेक व भूमि आवंटन प्रमाणपत्र
    बाढ़ प्रभावित लोगों का दर्द व राहत कार्य की ताजा स्थिति जानने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट के रामायण मेला में आयोजित राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में मंच से जहां पूर्ण रूप से मकान छतिग्रस्त हो जाने पर मुकेश, लल्लू और चुन्नीलाल में प्रत्येक को 1 लाख 20 हजार रुपए के चेक प्रदान किए तो वही राम सूरज और सूरज कली को भूमि आवंटन प्रमाणपत्र प्रदान किया।

    सिर्फ योगी जी ही इतनी जल्दी राहत पहुंचाने आ सकते हैं, कह कर पीड़ितों ने जताया आभार

    मुख्यमंत्री के हाथों तुरंत मदद पाकर बाढ़ पीड़ित खुश नजर आए। राहत सामग्री और पक्के मकान का आश्वासन पाकर लोगों ने मुख्यमंत्री का दिल से आभार जताया। सीतापुर मलकाना इलाके की रहने वाली रानी व मंजू ने बताया कि बाढ़ में हमारा पूरा घर डूब गया था और गृहस्थी का सारा सामान बर्बाद हो गया था। आज सुख्यमंत्री जी ने खुद आकर हमें राशन किट दी है जिससे हमें बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री जी ने हमें नया घर बनवाने का भरोसा भी दिया है।

    कटरा गूजर गांव की रहने वाली आशा ने बताया कि बाढ़ में हमारा मकान डूब गया था। लेकिन प्रशासन और योगी सरकार की सजगता के कारण बाढ़ के पहले दिन से ही हमें लगातार खाने-पीने का सामान मिल रहा था। आपदा के बीच भी हमें भूखा नहीं सोने दिया गया। वहीं एक अन्य बाढ़ पीड़ित ज्ञान सिंह ने कहा कि मेरा कच्चा मकान बाढ़ में ढह गया था। आज राशन किट भी मिली और घर बनवाने का भी आश्वासन मिला है। मैंने अपने जीवन में ऐसे मुख्यमंत्री कभी नहीं देखा जो इतनी जल्दी खुद पीड़ितों के बीच आकर उनका दुख-दर्द बांटें। जो योगी जी ने किया, वह आज तक किसी मुख्यमंत्री ने नहीं किया।

    चित्रकूट की जनता और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के इस त्वरित दौरे और संवेदनशीलता की जमकर सराहना की है। बाढ़ क्षेत्रों का दौरा करने के बाद मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन के साथ समीक्षा बैठक कर स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य करने और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

  • सोशल मीडिया दोस्ती का खौफनाक अंजाम, मोहाली की ब्लॉगर ने गन पॉइंट पर दुष्कर्म का लगाया आरोप

    सोशल मीडिया दोस्ती का खौफनाक अंजाम, मोहाली की ब्लॉगर ने गन पॉइंट पर दुष्कर्म का लगाया आरोप

    मोहाली 

    मोहाली की सोशल मीडिया ब्लॉगर एवं बिजनेस वुमन के रेप केस की शिकायत कॉपी सामने आई है।‌ शिकायत के मुताबिक आरोपी सोशल मीडिया के जरिए उसके संपर्क में आया और धीरे-धीरे विश्वास जीतकर नजदीकियां बढ़ाईं। इसके बाद उसके फ्लैट पर आया और गन पॉइंट पर रेप किया।

    ब्लॉगर के बताया कि आरोपी ने अश्लील वीडियो-फोटो वायरल करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल किया। इसके बाद उसने पुलिस को शिकायत दी। शनिवार (5 सितंबर) को ब्लॉगर मोहाली कोर्ट में पेश हुई। उसने पुलिस जांच पर नाराजगी जताई है।

    उसका आरोप है कि अदालत के निर्देशों के बावजूद जांच के दौरान उससे संपर्क नहीं किया गया। ब्लॉगर का कहना है कि उसे कानून और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। ब्लॉगर के वकील एचएस धनोआ ने कहा कि हमने केस की अनट्रेस कॉपी लेने के लिए अप्लाई किया है। अब इस मामले में कानूनी जंग लड़ेंगे।

    शिकायत में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की 5 अहम बातें…

        सोशल मीडिया पर हुई दोस्ती: पुलिस को दी शिकायत में पीड़िता ने बताया कि मैं बिजनेस वुमन और सोशल मीडिया ब्लॉगर हूं। आरोपी गुरविंदर सिंह उर्फ गुरी चहल मुझसे सोशल मीडिया पर संपर्क में आया था। मेरे ब्लॉग में धीरे-धीरे दिलचस्पी बढ़ाकर मेरे से नजदीकियां बढ़ाईं और विश्वास जीता।

        ऑर्डर देने के बहाने आकर रेप किया: 27 नवंबर 2025 को आरोपी सामान ऑर्डर करने के बहाने मेरे फ्लैट पर आया। इसके बाद मेरे इनकार करने के बाद आरोपी ने गन पॉइंट मेरे से जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। विरोध करने पर उसने मुझे व मेरे परिवार को जान से मारने की धमकियां दीं। इसके बाद मैं डर गई। मैंने इस संबंधी शिकायत दर्ज नहीं करवाई। मैंने उससे अपने आप को बहुत दूर कर लिया।

        अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी: 2 महीने बाद जनवरी 2026 में आरोपी ने मुझे दोबारा फोन व स्नैपचैट पर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। साथ ही धमकी दी कि उसके पास मेरे अश्लील वीडियो व फोटो हैं। अगर मैंने उसकी बातें नहीं मानीं तो उसे वायरल कर देगा।

        वर्क प्लेस पर पहुंचा, गालियां दीं: इसके बाद आरोपी अपने अज्ञात साथियों, ड्राइवरों व बॉडीगार्ड व सरकारी सिक्योरिटी मुलाजिमों सहित मेरे वर्क प्लेस पर आया। आरोपी ने मुझे गालियां निकालीं, डराया और जान से मारने की धमकियां दीं।

        दोबारा फिर तंग किया तो पहुंची पुलिस तक: 25 अप्रैल को आरोपी ने स्नैपचैट पर कॉल कर मुझे अपने फ्लैट पर जाने व शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। साथ ही उसने अपने पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, गैंगस्टरों से संबंधी धमकी दी। इसके बाद उसी दिन शाम को आरोपी ने मेरी ईमेल आईडी पर धमकी भरे अश्लील मैसेज भेजे। इसके बाद मैंने हिम्मत कर अपनी सारी बात वकील को बताई। इसलिए उसके खिलाफ बनती कार्रवाई की जाए।

    जांच की सर्टिफाइड कॉपी की मांग की पुलिस ने 24 जुलाई को अदालत में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल की थी। पुलिस के अनुसार, पीड़िता अदालत में बयान दर्ज करवाने के लिए पेश नहीं हो रही थी। अब पीड़िता ने अदालत पहुंचकर अपने बयान दर्ज करवाए हैं। उसके वकील धनौआ के अनुसार, पुलिस जांच की सर्टिफाइड कॉपी मांगी गई है। कॉपी मिलने के बाद अनट्रेस रिपोर्ट पर जवाब दाखिल किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी।

    कोर्ट ने जून में गाड़ी रिलीज करने के दिए थे आदेश मामले में अदालत ने 16 जून को उस गाड़ी को रिलीज करने के आदेश जारी किए थे, जिसे पुलिस ने केस प्रॉपर्टी बनाया था। मोहाली पुलिस की ओर से अदालत में दलील दी गई थी कि जांच के दौरान अब इस गाड़ी की जरूरत नहीं है। अदालत ने शर्तों के साथ गाड़ी रिलीज करने के आदेश दिए थे।

    इसमें कहा गया था कि जांच अधिकारी या अदालत जब भी गाड़ी पेश करने को कहे, उसे तत्काल पेश करना होगा। इसके अलावा गाड़ी की ऑनरशिप, रंग या किसी अन्य तरह का बदलाव नहीं किया जा सकेगा।

  • चंडीगढ़ में सुखना चो पर बनेगा हाईलेवल ब्रिज, निर्माण के दौरान एक साल तक ट्रैफिक डायवर्ट

    चंडीगढ़ में सुखना चो पर बनेगा हाईलेवल ब्रिज, निर्माण के दौरान एक साल तक ट्रैफिक डायवर्ट

    पंचकूला
     चंडीगढ़ के सेक्टर 26 स्थित बापूधाम कॉलोनी-शास्त्री नगर के सुखना चो पर बने कॉज-वे को हाई लेवल ब्रिज बनाने के पहले चरण की बिड प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. हालांकि, चंडीगढ़ प्रशासन के इंजीनियरिंग विंग को फिलहाल प्राप्त हुई बिड के मूल्यांकन का कार्य पूरा करना है. इसके बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी. जबकि सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भी इस हाई लेवल ब्रिज के लिए लोगों को और एक साल का इंतजार करना होगा. वहीं, लोगों ने ईटीवी भारत से बातचीत में चंडीगढ़ प्रशासन के खिलाफ रोष प्रकट करते हुए कहा कि वे बीते कई वर्षों से ऐसे आश्वासन सुनते आ रहे हैं। 

    नाजुक पुल से गुजरते हैं हजारों वाहन: दरअसल, रोजाना हजारों गाड़ियां इस नाजुक पुल से आवाजाही करती हैं. क्योंकि इस रास्ते से होकर चंडीगढ़ के कई नामचीन कॉन्वेंट स्कूल, गोल्फ क्लब, मुख्य पर्यटन स्थल सूखना झील, हाईकोर्ट, हरियाणा व पंजाब विधानसभा, कैपिटल कॉम्प्लेक्स, चंडीगढ़ पुलिस मुख्यालय, पंजाब पुलिस मुख्यालय, पीजीआई, रोज गार्डन समेत अन्य कई महत्वपूर्ण कार्यालय, पर्यटन स्थल व मुख्य मार्केट हैं. यही कारण है कि इस मार्ग पर बापूधाम-शास्त्री नगर के नाजुक कॉज-वे से रोजाना हजारों वाहनों में लाखों लोग आवाजाही करते हैं. पंचकूला से लोग चंडीगढ़ में प्रवेश के लिए इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं, मनीमाजरा से भी सुबह से रात तक आवाजाही बनी रहती है. इसी तरह चंडीगढ़ से मनीमाजरा और पंचकूला जाने वाले वाहन चालक भी इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। 

    जानिए लोगों ने क्या कहा:

        इस पुल से रोजाना आवाजाही करने वाले मनीमाजरा निवासी जय धीमान ने बताया कि, "सबसे अधिक परेशानी बरसात के दिनों में होती है. जल भराव की समस्या होने से इस मार्ग पर पुल को पार करना एक चुनौती बना रहता है. कुछ समय पहले यह पुल टूट भी गया था. पुल पर जलभराव होने से लोगों को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने को मजबूर होना पड़ता है, जिस कारण उनका सफर काफी लंबा हो जाता है. रोड छोटा होने से हादसे होते रहते हैं। 
        वहीं, इस मार्ग से रोजाना आवाजाही करने वाले अमित ने कहा कि, "सबसे अधिक परेशानी सूखना झील से पानी छोड़े जाने के दौरान होती है. क्योंकि पानी का तेज बहाव पुल से ओवरफ्लो होता है. इस कारण एक-एक किलोमीटर का ट्रैफिक जाम लग जाता है. लेकिन जब पानी का बहाव काफी तेज हो तो पुलिस-प्रशासन मार्ग बंद कर देता है, जिससे लोगों को काफी घूमकर जाना पड़ता है. ऐसे में कुछ मिनटों का सफर ही करीब एक घंटे का हो जाता है. क्योंकि वैकल्पिक मार्गों पर पहले ही रोजाना आवाजाही करने वाला काफी ट्रैफिक रहता है. कई बार इस मार्ग पर एम्बुलेंस और आपात स्थिति के दौरान अन्य कई वाहन फंसते हैं. बापूधाम-शास्त्री नगर कॉज-वे के पास रात के समय स्ट्रीट लाइट काम नहीं करती. ऐसे में अंधेरा होने के चलते जानलेवा हादसे होने का खतरा बना रहता है, क्योंकि इस पुल से कई बार गाड़ियां नीचे गिर चुकी हैं. इस मार्ग से आवाजाही करने वाले वाहन चालकों/यात्रियों को अपनी सुरक्षा का ध्यान खुद ही रखना पड़ता है. नतीजतन, हर कोई सँभल संभल कर पुल से निकलता है, क्योंकि मोड़ काफी घुमावदार होने लेकिन सड़क संकीर्ण होने से हादसे होने का खतरा बना रहता है। 

    निर्माण शुरू होने से पहले ट्रैफिक प्लान जरूरी
    पुल का निर्माण शुरू होने में करीब एक महीने का समय लग सकता है। निर्माण के दौरान सड़क बंद रहने से पंचकूला, मनीमाजरा और आईटी पार्क की ओर से आने-जाने वाले वाहनों पर असर पड़ेगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, हरियाणा सिविल सचिवालय, सुखना झील और चंडीगढ़ के उत्तरी सैक्टरों की ओर जाने वाले लोगों को भी वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ेगा।

    यूटी के मुख्य अभियंता सीबी ओझा ने बताया कि ट्रैफिक पुलिस समेत संबंधित विभागों के साथ चर्चा कर वैकल्पिक ट्रैफिक प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि मनीमाजरा-सैक्टर 26 लिंक बंद होने के बाद मध्य मार्ग पर ट्रैफिक का बड़ा दबाव आ सकता है।

    किशनगढ़ रोड को भी विकल्प के तौर पर देखा जा रहा
    विभाग के अनुसार किशनगढ़ से सुखना चो के किनारे जाने वाली सड़क का इस्तेमाल वैकल्पिक मार्ग के रूप में किया जा सकता है। इसके अलावा सैक्टर 26 से भी ट्रैफिक डायवर्ट करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि गांव से गुजरने वाली संकरी सड़क पर अतिरिक्त ट्रैफिक संभालने की क्षमता सीमित है।

    फिलहाल निर्माण के दौरान लागू होने वाली अंतिम ट्रैफिक प्रबंधन योजना तैयार नहीं हुई है। ऐसे में रोजाना पंचकूला और चंडीगढ़ के बीच सफर करने वाले लोगों को अगले एक साल तक ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

        वहीं, स्थानीय निवासी अमन त्रिपाठी ने कॉज-वे के हाई लेवल ब्रिज में बदलने की बात पर मायूसी प्रकट करते कहा कि, "मैं सालों से ऐसा कुछ सुनते आ रहा हूं, लेकिन कभी कुछ नहीं हुआ. कॉज-वे पर लाइटिंग की कोई व्यवस्था नहीं है, जबकि हर साल आम लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है. स्थानीय या आसपास के लोग रोजाना कई तरह की मुश्किल झेलते हैं लेकिन हरियाणा से लोगों के आने के कारण ट्रैफिक अधिक होने से परेशानी कई गुणा बढ़ जाती है. ऐसे में लोगों को दूसरे मार्गों से होकर निकलना पड़ता है, जिससे दूरी अधिक बढ़ जाती है और समय भी काफी खराब होता है. हम सालों से इस पुल को देख रहे हैं, जो तीन-चार बार टूट चुका है. लेकिन हर बार काम चलाऊ मरम्मत कर दी जाती है.यहां कई हादसे हुए और कई होते होते रह गए, अब पुल के किनारे ग्रिल लगाई गई हैं. लेकिन जब कभी सूखना झील से पानी छोड़ा जाता है तो तेज बहाव सबकुछ साथ बहाकर ले जाता है। 

    17 करोड़ रुपये का टेंडर जारी : प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने बापूधाम-शास्त्री नगर कॉज-वे को हाई लेवल ब्रिज में बदलने के लिए करीब 17 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया. इसके अंतर्गत प्रशासन को अलग अलग बिड प्राप्त हुई हैं, जिनके मूल्यांकन का की प्रक्रिया पूरी किया जाना शेष है. चंडीगढ़ प्रशासन के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद कॉज-वे पर हाई लेवल ब्रिज के निर्माण में करीब नौ महीने से एक वर्ष का समय लगेगा। 

    500 मीटर लंबा और 27 मीटर चौड़ा: बापूधाम-शास्त्री नगर कॉज-वे पर बनने वाला प्रस्तावित पुल करीब 500 मीटर लंबा और 27 मीटर चौड़ा रहेगा. यह फोर लेन होगा और दोनों ओर साइकिल ट्रैक व पैदल पथ भी बनाए जाएंगे. यह पुल सेक्टर 26 टी-पॉइंट को मनीमाजरा के शास्त्री नगर से जोड़ेगा. इस जंक्शन को करीब दो मीटर ऊंचा रखे जाने का प्रस्ताव है. साथ ही स्टॉर्म वाटर लाइन और पानी की पाइपलाइन शिफ्ट होगी. यहां ईडब्ल्यूएस लाइट पॉइंट के समीप ट्रांसपोर्ट चौक के लिए बाईं ओर का मार्ग वर्तमान की तरह ही रहेगा. वहीं, सड़क चौड़ीकरण और परियोजना के निर्माण के लिए 27 पेड़ भी काटे जा सकते हैं। 

    इन तीन कॉज-वे को लेकर तैयारी नहीं: चंडीगढ़ के गांव किशनगढ़ के कॉज-वे, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 के कॉज-वे और मक्खनमाजरा कॉज-वे के लिए फिलहाल चंडीगढ़ प्रशासन की कोई मजबूत तैयारी नहीं है. इन कॉज-वे को हाई लेवल ब्रिज में बदलने का प्रशासन का फिलहाल कोई इरादा नहीं है. नतीजतन इन तीनों कॉज-वे पर तेज बारिश के दौरान सुखना लेक के फ्लड गेट खुलने पर इन मार्गों को बंद किए जाने की स्थिति बनती रहेगी. हालांकि, बापूधाम-शास्त्री नगर कॉज-वे पर भी फिलहाल और एक वर्ष यह स्थिति बनी रह सकती है, जब तक हाई लेवल ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाता। 

     

  • स्वाइन फ्लू की बढ़ती रफ्तार से लखनऊ में चिंता, 63 एक्टिव केस; जानें गंभीर लक्षण

    स्वाइन फ्लू की बढ़ती रफ्तार से लखनऊ में चिंता, 63 एक्टिव केस; जानें गंभीर लक्षण

    लखनऊ
    राजधानी में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। पिछले दो दिनों में ही 24 मरीजों की स्वाइन फ्लू रिपोर्ट पाजिटिव आई है। शुक्रवार को 13 और शनिवार को 11 नए मरीज सामने आए हैं। इसके साथ ही लखनऊ में सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर 63 हो गई है। तेजी से बढ़ रहे मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और उपचार की व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

    सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि 20 रोगी अस्पतालों में भर्ती थे, जिनमें 17 स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। एक पहले से भर्ती था, जबकि दो मरीज शनिवार को भर्ती कराए गए। हालांकि, तीन रोगियों की तबीयत स्थिर है। कोई गंभीर लक्षण नहीं हैं। लगातार नए मरीज सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के संदिग्ध और संक्रमित मरीजों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

    गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज न करें
    मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने लोगों को स्वाइन फ्लू के लक्षणों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। तेज बुखार के साथ सांस फूलना, सीने में दर्द, रक्तचाप कम होना, बेहोशी, नाखून अथवा होंठ नीले पड़ना और बलगम में खून आना गंभीर लक्षण माने जाते हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल जांच और इलाज की जरूरत है। बच्चों में लगातार तेज बुखार, अत्यधिक सुस्ती, खाना-पीना बंद कर देना, झटके आना अथवा सांस लेने में परेशानी भी गंभीर संकेत हो सकते हैं।

    उन्होंने स्पष्ट किया है कि सामान्य जुकाम, गले में खराश, खांसी और बुखार होने पर हर मरीज को एच1एन1 की जांच कराने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे मरीज चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार लें, पर्याप्त आराम करें, मास्क का प्रयोग करें और ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन करें। बिना डाक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं लेने से बचें। शनिवार को मिले 11 मरीजों में एक लोकबंधु अस्पताल और एक एसजीपीजीआइ में भर्ती है।

  • हजारों सफाई कर्मचारियों को मिलेगा नौकरी का सुरक्षा कवच, हरियाणा सरकार ने लिया सैद्धांतिक फैसला

    हजारों सफाई कर्मचारियों को मिलेगा नौकरी का सुरक्षा कवच, हरियाणा सरकार ने लिया सैद्धांतिक फैसला

    चंडीगढ़
     हरियाणा में पालिका रोल पर काम कर रहे सफाई कर्मचारियों के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। नायब सिंह सैनी सरकार ने इन कर्मचारियों को हरियाणा कॉन्ट्रैक्चुअल एम्प्लॉइज (सर्विस की सुनिश्चितता) एक्ट, 2024 के दायरे में लाने का सैद्धांतिक निर्णय लिया है। सरकार के इस कदम से प्रदेश के हजारों सफाई कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।

    सरकार के इस निर्णय के लागू होने के बाद पालिका रोल पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों की सेवा 60 वर्ष की आयु तक सुरक्षित हो सकेगी। यानी कर्मचारियों को बार-बार नौकरी खत्म होने या सेवा जारी रहने को लेकर अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ेगा। 60 वर्ष की उम्र को उनकी सेवानिवृत्ति की आयु के तौर पर माना जाएगा।

    नियमित कर्मचारियों जैसी मिलेंगी कई सुविधाएं
    इस व्यवस्था के तहत पालिका रोल के सफाई कर्मचारियों को 2024 के संबंधित अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कई वित्तीय और सेवा संबंधी लाभ मिलने का रास्ता खुलेगा। ये लाभ काफी हद तक नियमित कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं के समान होंगे। इससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति और सेवा शर्तों में सुधार आने की उम्मीद है।

    हजारों कर्मचारियों को मिलेगा फायदा
    हरियाणा सरकार के इस फैसले का सीधा लाभ पालिका रोल पर काम करने वाले हजारों सफाई कर्मचारियों को मिल सकता है। लंबे समय से सेवा कर रहे कर्मचारियों के लिए नौकरी की स्थिरता एक अहम मुद्दा रही है। अब उन्हें 60 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा मिलने से भविष्य को लेकर चिंता कम होने की उम्मीद है।

    सफाई कर्मचारी संगठनों के लिए अहम फैसला
    सरकार के इस कदम को सफाई कर्मचारी संघ और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सेवा सुरक्षा के साथ वित्तीय और अन्य सेवा लाभ मिलने से कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, फैसले को पूरी तरह लागू करने के लिए संबंधित प्रक्रिया और औपचारिकताओं को पूरा किया जाना बाकी रहेगा।

    सरकार का यह निर्णय पालिका रोल के सफाई कर्मचारियों को संविदा कर्मचारियों से जुड़े सेवा सुरक्षा प्रावधानों के दायरे में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके लागू होने के बाद कर्मचारियों को नौकरी की स्थिरता के साथ कई अन्य सेवा लाभ भी मिल सकेंगे।

  • सहारनपुर में मस्जिद के नीचे मिला कुआं, पोकलेन से नहीं टूटा स्लैब; ASI जांच से खुलेगा राज

    सहारनपुर में मस्जिद के नीचे मिला कुआं, पोकलेन से नहीं टूटा स्लैब; ASI जांच से खुलेगा राज

    सहारनपुर 

    यूपी में सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बीते शनिवार को जिस मस्जिद को बुलडोजर से ढहाया गया था, मलबा हटाने के बाद उसके नीचे से कुआं निकला है। मलबा अब पूरी तरह साफ कर दिया गया है। दूसरी तरफ, 70 साल पुरानी अवैध मस्जिद गिराए जाने पर सियासत भी जारी है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से लेकर AIMIM ने बुलडोजर एक्शन के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है।

    मलबा हटाने के बाद स्ट्रक्चर के नीचे मिला कुआं

    मस्जिद के स्ट्रक्चर के नीचे कुआं मिलने के बाद, सहारनपुर कलेक्ट्रेट में बनी अवैध मस्जिद को गिराने के एक्शन पर SDM सदर सुबोध कुमार ने कहा, 'हमने यह एक्शन अदालत के आदेश का पालन करते हुए किया है। इसी दौरान, यहां एक कुआं मिला है। संबंधित एजेंसियां इसकी ​​जांच करेंगी और बताएंगी कि यह कुआं कितना बड़ा है।'

    ईंटों से बना हुआ है कुएं का स्ट्रक्चर
    SDM सदर सुबोध कुमार आगे बोले कि टेक्निकल टीमों की पड़ताल के बाद ही सब कुछ स्पष्ट हो पाएगा। यह ईंटों से बना कुआं है और इसका स्ट्रक्चर भी ईंटों से ही बना है। पहली नजर में तो यह कुआं ही लग रहा है।

    7 सितंबर को सहारनपुर जाएगा सपा का डेलिगेशन
    दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी ने बुलडोजर एक्शन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 7 सितंबर को समाजवादी पार्टी का एक डेलिगेशन सहारनपुर जाएगा। डेलिगेशन कलेक्ट्रेट का भी दौरा करेगा, जहां मस्जिद को गिराया गया है। डेलिगेशन ने शामिल सभी नेता पहले पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान के घर पर जमा होंगे। इसके बाद यहां से कलेक्ट्रेट जाएंगे।

    ईंटों से बनी है कुएं की संरचना प्रशासन के मुताबिक, प्रारंभिक तौर पर सामने आई संरचना ईंटों से बनी हुई है और देखने में यह कुआं ही प्रतीत होता है। हालांकि, अधिकारियों ने इसकी अंतिम पुष्टि के लिए तकनीकी जांच को जरूरी बताया है। एएसआई की टीम भी मौके की जांच करेगी, जिसके बाद कुएं की संरचना और संभावित ऐतिहासिक महत्व से जुड़े पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मस्जिद को गिराए जाने के बाद प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर से मलबे की एक-एक ईंट हटाने की कार्रवाई की। बताया गया कि मलबे को सहारनपुर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर निर्धारित स्थान पर ले जाकर डाला गया है। प्रशासन का कहना है कि परिसर को पूरी तरह साफ कर समतल किया जा चुका है।

    पोकलेन भी नहीं हटा पाई भारी स्लैब
    इस पूरी कहानी का एक दिलचस्प हिस्सा वह स्लैब भी है, जिसके नीचे कुआं मिला. मलबा हटाने के दौरान कर्मचारियों को एक मजबूत और भारी स्लैब मिला. उसे हटाने के लिए पोकलेन मशीन की मदद ली गई. लेकिन मशीन से भी स्लैब नहीं टूट पाया. इसके बाद कटर मंगवाया गया. स्लैब को काटने के बाद उसे हटाया गया. और फिर नीचे कुआं दिखाई दिया। 

    कलेक्ट्रेट परिसर में कुआं मिलने की खबर फैली तो मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी. लोग एक-एक करके कुएं को देखने पहुंचने लगे. कुएं की गहराई कितनी है? यह कब बनाया गया होगा? इसका इस्तेमाल किस लिए होता होगा?ऐसे कई सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए. हालांकि इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। 

    कुएं के सामने आने के बाद सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल भी तैनात किया गया. कुएं के आसपास लोगों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है. प्रशासन की निगरानी में मलबा हटाने का काम भी जारी है. अब सिर्फ मलबा हटाने की कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीन के नीचे मिले इस ढांचे की जांच भी अहम हो गई है। 

    SDM बोले- प्रथम दृष्टया यह कुआं ही लग रहा है
    एसडीएम सदर सुबोध कुमार ने बताया कि न्यायालय के आदेश के बाद की गई कार्रवाई में यह ढांचा सामने आया है. उनके मुताबिक, प्रथम दृष्टया यह कुआं ही दिखाई दे रहा है और इसकी गहराई करीब 20 फीट के आसपास है. लेकिन कुएं की असली कहानी अभी सामने आनी बाकी है. यह कितना पुराना है? इसे कब बनाया गया था? इसका इस्तेमाल किस लिए होता था? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिल सकेंगे। 

    अब ASI की जांच पर टिकी नजर
    प्रशासन के मुताबिक, मामले की जांच के लिए ASI की टीम मौके पर आएगी. जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि जमीन के नीचे मिला यह कुआं कितना पुराना है और इसका कोई ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व है या नहीं. फिलहाल, सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद हटाए जाने के बाद मलबे के नीचे मिला यह कुआं अब चर्चा का विषय बन गया है. भारी स्लैब के नीचे करीब 20 फीट गहरा दिखाई देने वाला कुआं आखिर कब बना और इसकी कहानी क्या है? इसका जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएगा। 

    मस्जिद के नीचे कुआं मिलने से बढ़ी सतर्कता
    मस्जिद के बीच में कुआं मिलने के बाद प्रशासन मामले में अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। कुएं को फिलहाल ढक दिया गया है, ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो और जांच के दौरान संरचना को सुरक्षित रखा जा सके।

    सपा का प्रतिनिधिमंडल करेगा सहारनपुर का दौरा
    इस बीच समाजवादी पार्टी ने भी पूरे मामले की जांच के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर भेजने का फैसला किया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रतिनिधिमंडल रविवार को सहारनपुर पहुंचकर घटनाक्रम की जानकारी जुटाएगा।

    सपा के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त से मुलाकात कर मस्जिद ध्वस्तीकरण से जुड़े तथ्यों की जानकारी लेगा। पार्टी का दावा है कि 4 सितंबर की शाम प्रशासन की ओर से मस्जिद को सील किए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। प्रतिनिधिमंडल मौके की स्थिति देखने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय को सौंपेगा।

    सहारनपुर जाने वाले सपा डेलिगेशन की लिस्ट

        लाल बिहारी यादव, नेता प्रतिपक्ष, विधान परिषद 
        चौधरी अब्दुल वाहिद, जिलाध्यक्ष
        हाजी नवाब अंसारी, महानगर अध्यक्ष
        हरेंद्र मलिक, सांसद 
        इकरा हसन, कैराना सांसद 
        चौधरी रूद्रसेन, राष्ट्रीय महासचिव 
        हाजी फजलुर्रहमान, पूर्व सांसद 
        अतुल प्रधान, सरधना विधायक 
        आशु मलिक, विधायक 
        उमर अली, विधायक 
        रामऔतार सैनी, विधायक 
        किरन पाल कश्यप, MLC
        माविया अली, पूर्व विधायक 
        राहुल भारती, अध्यक्ष, सपा SC मोर्चा
        मांगेराम कश्यप, पूर्व राज्यमंत्री 
        जिया चौधरी, जिलाध्यक्ष, मुजफ्फरनगर

    ओवैसी और कांग्रेस ने भी उठाया मस्जिद का मुद्दा
    गौरतलब है कि असदुद्दीन ओवैसी भी सहारनपुर मस्जिद मामले को लेकर योगी सरकार पर हमलावर हैं। असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि मस्जिद कलेक्ट्रेट दफ्तर बनने से पहले बनी थी। लेकिन योगी सरकार मस्जिदों को तोड़ रही है। वहीं,  कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने एक बार फिर दावा किया कि प्रशासन ने जल्दबाजी में मस्जिद को गिरा दिया। इसके लिए वो सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।

  • रांचीवासियों को निगम कार्यालय के चक्कर से राहत, 5 सामुदायिक भवनों की ऑनलाइन बुकिंग शुरू

    रांचीवासियों को निगम कार्यालय के चक्कर से राहत, 5 सामुदायिक भवनों की ऑनलाइन बुकिंग शुरू

    रांची
    अब शहरवासियों को शादी, पारिवारिक समारोह या सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन के लिए सामुदायिक भवन बुक कराने के लिए नगर निगम कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

    निगम ने सामुदायिक भवनों की बुकिंग को ऑनलाइन करने की पहल शुरू की है। पहले चरण में पांच सामुदायिक भवनों को ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है। इनकी बुकिंग छह सितंबर से शुरू हो जाएगी।

    ऑनलाइन सुविधा के तहत लोग घर बैठे भवन की उपलब्धता देख सकेंगे और अपनी सुविधा के अनुसार तारीख का चयन कर बुकिंग करा सकेंगे।

    नगर निगम के अनुसार कुल 16 सामुदायिक भवनों को ऑनलाइन व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। चरणबद्ध तरीके से शेष भवनों को भी इस प्रणाली में शामिल किया जाएगा

    पहले चरण में वार्ड 14 स्थित इंदिरा गांधी चौक, वार्ड 18 स्थित ईस्ट जेल रोड, वार्ड 36 स्थित न्यू पुंदाग, वार्ड 44 स्थित इलासिया कम्युनिटी हाल, पारस टोली और वार्ड 45 स्थित ग्वाला टोली, मजार रोड, डोरंडा के सामुदायिक भवन शामिल हैं।

    इन भवनों का इस्तेमाल विवाह समारोह, सामाजिक व पारिवारिक आयोजन, धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य आयोजनों के लिए किया जा सकेगा।

    दो श्रेणियों में बांटे गए सामुदायिक भवन
    निगम ने सामुदायिक भवनों को उपलब्ध सुविधाओं और क्षमता के आधार पर दो श्रेणियों में बांटा है। स्वर्णरेखा श्रेणी के भवन की बुकिंग के लिए 25 हजार रुपये और वस्तु एवं सेवा कर देना होगा।

    वहीं, पलाश श्रेणी के भवन के लिए 15 हजार रुपये और वस्तु एवं सेवा कर निर्धारित किया गया है। इसके अलावा बुकिंग के समय पांच हजार रुपये की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। निर्धारित शर्तों के अनुसार यह राशि वापस की जाएगी।

    ऐसे कराएं ऑनलाइन बुकिंग
    नागरिक https://apnaranchi.rsccl.in/ पर जाकर सामुदायिक भवनों की उपलब्धता देख सकेंगे। उपलब्ध तारीख में से अपनी पसंद की तिथि चुनकर ऑनलाइन बुकिंग की जा सकेगी।