Category: राज्य

  • पंजाब में बदला पंथक वोट का मिजाज, अकाली दल कमजोर; BJP से भी नहीं बन रही बात

    पंजाब में बदला पंथक वोट का मिजाज, अकाली दल कमजोर; BJP से भी नहीं बन रही बात

     जालंधर 

    पंजाब में अकाली दल के सामने पंथक वोट बैंक को एकजुट करने की बड़ी चुनौती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का मत प्रतिशत घटकर महज 13.42 फीसदी रह गया, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में उसे केवल तीन सीटें मिली थीं। यह गिरावट 2017 के बाद से लगातार जारी है, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में उसकी पकड़ कमजोर हुई है। पार्टी को अब अपने बिखरे हुए राजनीतिक आधार को फिर से संगठित करना होगा।

    अकाली दल को 2014 में 26.30 फीसदी और 2019 में 27.45 फीसदी वोट मिले थे लेकिन 2024 में यह आंकड़ा 13.42 फीसदी पर आ गया जिससे पार्टी सिर्फ बठिंडा लोकसभा सीट जीत सकी। इस बीच, सिमरनजीत सिंह मान के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) को 2024 में करीब 3.82 फीसदी वोट मिले। 

    निर्दलीय उम्मीदवार अमृतपाल सिंह और सरबजीत सिंह खालसा की जीत ने भी पंथक वोटों के बिखराव को दर्शाया। इन नतीजों से स्पष्ट है कि अकाली दल से दूर हुआ पंथक वोट कांग्रेस, आम आदमी पार्टी या भाजपा के पास पूरी तरह नहीं गया बल्कि इसका एक हिस्सा नई पंथक राजनीति की ओर मुड़ गया है। सुखबीर बादल के नेतृत्व वाला अकाली दल अपने पुराने संगठन को बचाने का प्रयास कर रहा है। वहीं पुनर्सुरजीत धड़ा और वारिस पंजाब दे जैसे समूह भी अपनी पहचान बना रहे हैं। यह स्थिति अकाली राजनीति के सामने विरोधी दलों से भी बड़ी चुनौती पेश करती है।

    ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान संकट
    1966 में नए पंजाब के गठन के बाद अकाली दल ने क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत जगह बनाई। पार्टी ने 1977, 1985, 1997, 2007 और 2012 में सत्ता हासिल की। हालांकि, 2017 के बाद से इसके चुनावी प्रदर्शन में लगातार गिरावट आई है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी तीन सीटों तक सिमट गई। 2024 के लोकसभा चुनाव में मत प्रतिशत में भारी कमी ने इस संकट को और गहरा किया है।

    नई पंथक राजनीति की ओर गया वोट
    अकाली दल का वोट बैंक पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसका एक बड़ा हिस्सा अब अलग-अलग पंथिक राजनीतिक धाराओं में बंट गया है। सिमरनजीत सिंह मान के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) को 2024 में 3.82 फीसदी वोट मिले। निर्दलीय उम्मीदवार अमृतपाल सिंह और सरबजीत सिंह खालसा की जीत भी इसी बदलाव का संकेत है। यह दर्शाता है कि पंथिक वोट राष्ट्रीय दलों के बजाय नई पंथक राजनीति की ओर भी गया है।

    पुराने गठबंधन की चर्चाएं
    भाजपा और अकाली दल के पु
    राने गठबंधन को लेकर पंजाब की राजनीति में चर्चाएं जारी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 18.56 फीसदी और अकाली दल को 13.42 फीसदी वोट मिले थे। दोनों के मत प्रतिशत को जोड़ने पर यह आंकड़ा करीब 31.98 फीसदी होता है। हालांकि, वोटों का शत-प्रतिशत हस्तांतरण हमेशा संभव नहीं होता है। सितंबर 2026 तक भाजपा ने सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कही है। 2027 के चुनाव से पहले अकाली दल को अपने बिखरे आधार को एकजुट करना होगा।

  • नवाब मोड़ पर बन रहा नया मधुपुर स्टेशन, 281 करोड़ की परियोजना से बढ़ेगी सीधी रेल कनेक्टिविटी

    नवाब मोड़ पर बन रहा नया मधुपुर स्टेशन, 281 करोड़ की परियोजना से बढ़ेगी सीधी रेल कनेक्टिविटी

    मधुपुर (देवघर)
     मधुपुर-गिरिडीह रेल मार्ग पर नवाब मोड के पास बन रहा नया रेलवे स्टेशन (नया मधुपुर स्टेशन) और बाईपास रेल परियोजना का निर्माण कार्य 2027 तक पूरा होने की संभावना है।

    इस पूरे लिंकिंग और बाईपास प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत लगभग 140 करोड़ से 281 करोड़ के बीच आंकी गई है। इस नई रेल परियोजना में वर्तमान परिस्थिति में काम जोर शोर से चल रहा है।

    अनुमान है कि इस साल के अंत में या फिर नए साल में इलाके के लोगो एक नया स्टेशन मिलेगा। इस स्टेशन का नाम क्या होगा तय नहीं है।

    क्योंकि अभी नामकरण नहीं किया गया है। लेकिन इलाके में चर्चा है नई मधुपुर स्टेशन के नाम से यह जाना जाएगा। फिर कोई महापुरुष के नाम से यह स्टेशन का नाम हो सकता है

    रेलवे ने भी नहीं फिलहाल इस पर कोई अधिसूचना जारी नहीं किया है। बताया जाता है कि मधुपुर गिरिडीह नेशनल हाईवे-114 के किनारे नवाबमोड़ गांव के निकट इस आदर्श स्टेशन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और रेल पटरियां बिछाने का काम तेजी से चल रहा है।

    रेलवे के अनुसार इसे 2027 के मध्य तक पूरी तरह से तैयार कर लिया जाएगा। बताया जाता है कि मधुपुर बाईपास रेल लाइन खंड की लागत 140.01 करोड़ है, जबकि पूरे लिंकिंग प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 281 करोड़ है।

    नई रेल परियोजना के बन से होने वाले होगा काफी लाभ
    इस नए रेल परियोजना के बन जाने इलाके के लिए को काफी लाभ होगा। यहां के पटवाबाद, नवाब मोड़ के पास नया स्टेशन और बाईपास लाइन बनने से क्षेत्र के लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।

    बताया जाता है कि इससे लोको रिवर्सल (इंजन बदलने) के झंझट से मुक्ति मिलेगी और समय की बचत होगी। वर्तमान में ट्रेनों के इंजन का रिवर्सल मधुपुर स्टेशन पर हो रहा है। जिसके कारण 20 मिनट ट्रेनों का ठहराव मधुपुर में हो हो जाता है ।

    इससे निजात मिलेगा क्योंकि गिरिडीह-कोडरमा जाने के लिए मधुपुर में इंजन बदलना (लोको रिवर्सल) पड़ता है। इस बाईपास लाइन और नए स्टेशन के चालू होने से ट्रेनें सीधे निकल जाएंगी, जिससे यात्रियों का करीब 30 मिनट से अधिक का समय बचेगा।

    सीधी ट्रेन कनेक्टिविटी इस रूट के पूरी तरह चालू होने से मधुपुर, न्यू गिरिडीह और कोडरमा के बीच सीधी और लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन बेहद आसान हो जाएगा।

    आधुनिक यात्री सुविधाएं (एक आदर्श स्टेशन) नवाब मोड़ स्टेशन पर अप और डाउन दोनों तरफ आधुनिक प्लेटफार्म, यात्रियों के लिए फुटओवर ब्रिज, हाई-टेक टिकट काउंटर भवन, यात्री शेड और पेयजल आपूर्ति के लिए नए वाटर कनेक्शन की व्यवस्था की जा रही है।

    आर्थिक और व्यापारिक विकास
    नया स्टेशन बनने से नवाब मोड और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लोगों की आवाजाही बढ़ेगी। इससे इलाके में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर पैदा होंगे।

    लोगों को छोटा मोटा रोजगार मिल जाएगा। स्टेशन के आसपास लोग छोटा-मोटा दुकान लगाकर कमाई कर सकेंगे। इससे आसपास के क्षेत्र का आर्थिक विकास तेजी से होगा।

    ये काम हो चुका है पूरा
    यहां पर अप व डाउन प्लेटफार्म बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। दो प्लेटफार्म पर यात्री शेड अप व डाउन पर यात्री शेड पूरा हो चुका है। पैदल उपरी पुल बन चुका है। प्लेटफार्म पर लाइट की व्यवस्था के पोल लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका हे।

    प्लेटफार्म पर अप व डाउन लाइन पर लाइट बिछाने का काम चल रहा है। स्टेशन परिसर पर प्रशासनिक भवन बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है।

    बुकिंग काउंटर बनकर तैयार हो चुका है। शौचालय का भवन बन चुका है। स्टेशन में टाइल्स मार्बल लगाने का काम पूरा हो चुका है। नए स्टेशन का लगभग 75 प्रतिशत काम हाे चुका है।

    ये काम है बाकी
    स्टेशन पर कंबाइंड भवन बनकर तैयार है । एक ही भवन के अंदर बुकिंग काउंटर, केबिन,यात्री प्रतीक्षालय, स्टेशन मास्टर कार्यालय आदि संचालित किया जाएगा।

    इसी भवन में पैनल, रिले सिस्टम सिग्नल आदि इलेक्ट्रिक विछाने का काम चल रहा है। ओवरहेड बिजली का हाई टेंशन तार लगाने का काम चल रहा है।

    पोल गाड़ने का काम चल रहा है। इसके बाद तार लगाने का काम किया जाएगा। शौचालय में पानी की व्यवस्था के लिए जलमीनार बनाया जा रहा है।

    वहीं, शौचालय के अंदर की व्यवस्था अभी किया जाना है। स्टेशन से पहले ग्रामीणों की आवाजाही के अंडरपास रास्ते का काम चल रहा है। इस लाइन पर पुल पुलिया का निर्माण कार्य चल रहा है।

    काम में अड़चन
    नए स्टेशन के पूरा होने में कुछ अड़चन भी है। अप प्लेटफार्म के सिग्नल स्टाटर के पास पूर्वी छोर पर करीब एक दर्जन घरों का अधिग्रहण का काम पूरा नहीं हो पाया है।

    इस कारण इस परियोजना में विलंब हो रहा है। अधिग्रहण का काम पूरा होने के बाद ही यहां पटरी बिछाने का काम किया जाएगा। इस कारण से वर्तमान में काम डिले हो रहा है।

  • आंतरिक शिकायत समिति कर रही है जेएनयू प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की जांच

    आंतरिक शिकायत समिति कर रही है जेएनयू प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की जांच

    नई दिल्ली
    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के एक प्रोफेसर पर 10 से अधिक छात्राओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। यूनिवर्सिटी की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) इन शिकायतों की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, ये शिकायतें करीब एक महीने पहले दर्ज कराई गई थीं।

    टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के कैंपस में ही रहने वाले प्रोफेसर पर आरोप है कि उसने कुछ छात्रों को अपने घर पर ही आयोजित बैठकों में बुलाया और वहां कथित तौर पर यौन दुर्व्यवहार किया या प्रस्ताव किए। कुछ शिकायतों में क्लास के दौरान भी आपत्तिजनक और अश्लील टिप्पणियां किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

    सीनियर छात्राओं ने भी लगाए आरोप
    अधिकारियों के अनुसार, प्रोफेसर के खिलाफ हाल में एक शिकायत सामने आने के बाद कुछ सीनियर छात्राएं भी सामने आईं और उन्होंने भी इस तरह के आरोप लगाए हैं।

    जानकारी के मुताबिक, ICC फिलहाल इन शिकायतों की जांच कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कमेटी जैसे-जैसे अपनी जांच का दायरा बढ़ाएगी अभी और शिकायतें सामने आ सकती हैं।

    ICC ने टिप्पणी से किया इनकार
    इस मामले की जांच कर रही JNU की आंतरिक शिकायत समिति ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। समिति का कहना है कि यह आंतरिक मामला है और फिलहाल इसकी जांच चल रही है। JNU की कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने कहा कि यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों पर ICC कार्रवाई करती है और कुलपति इस समिति की सदस्य नहीं होती हैं।

    प्रोफेसर ने आरोपों को बताया झूठा
    वहीं, आरोपों से घिरे प्रोफेसर ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी शिकायत की जानकारी नहीं है। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को गलत बताया। यह भी पूछे जाने पर कि क्या वह ICC के सामने पेश हुए हैं या उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया है, प्रोफेसर ने कहा कि उन्हें किसी शिकायत की जानकारी नहीं है।

  • उत्तर प्रदेश में बारिश का अलर्ट, आंधी-वज्रपात के साथ कई जिलों में भारी बारिश की संभावना

    उत्तर प्रदेश में बारिश का अलर्ट, आंधी-वज्रपात के साथ कई जिलों में भारी बारिश की संभावना

    लखनऊ
    दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और इसके आसपास के इलाकों में बने लो प्रेशर एरिया के सक्रिय होने से उत्तर प्रदेश में मौसम ने करवट ले ली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान पूर्वी और पश्चिमी यूपी के विभिन्न हिस्सों में बारिश और वज्रपात की गतिविधियां जारी रहेंगी।

    पिछले 24 घंटों में कैसा रहा मौसम का हाल
    मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। बिजनौर जिले में सर्वाधिक 12 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर में भी तेज बारिश का असर देखा गया है।

    पश्चिमी यूपी में कैसा रहेगा मौसम
    मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है कि 6 और 7 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश हो सकती है।

    पूर्वी यूपी में ऐसा रहेगा मौसम
    पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 6 से 8 सितंबर तक बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की संभावना व्यक्त की गई है। वहीं 6 से 9 सितंबर के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

    किसानों के लिए जरूरी सलाह
    मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें और गीली स्थिति में सिंचाई, खाद व कीटनाशकों का छिड़काव टाल दें। छोटे पौधों, सब्जियों और बागवानी फसलों को सहारा देने की हिदायत दी गई है।

     

  • सहकारी बैंकों में 4,500 से ज्यादा पद रिक्त, IBPS से 886 पदों पर भर्ती की तैयारी

    सहकारी बैंकों में 4,500 से ज्यादा पद रिक्त, IBPS से 886 पदों पर भर्ती की तैयारी

    चंडीगढ़
     हरियाणा के सहकारी बैंकों में कर्मचारियों की भारी कमी सामने आई है। विधानसभा में मुलाना की कांग्रेस विधायक पूजा चौधरी द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने 23 अगस्त 2026 की स्थिति के आधार पर बैंकों में स्वीकृत पदों, कार्यरत नियमित कर्मचारियों और रिक्त पदों का ब्योरा दिया है।

    आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के सहकारी बैंकों में कुल 5,148 स्वीकृत पदों में से 582 पर ही नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 4,566 पद खाली हैं।

    सरकार के जवाब के अनुसार हरको बैंक में 591 स्वीकृत पद हैं। इनमें 207 कर्मचारी नियमित रूप से कार्यरत हैं, जबकि 108 पद रिक्त हैं।

    वहीं हरियाणा राज्य के जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों की स्थिति कहीं अधिक गंभीर है। यहां 4,557 स्वीकृत पदों में सिर्फ 375 कर्मचारी नियमित रूप से कार्यरत हैं और 4,182 पद खाली हैं।

    हरको बैंक में श्रेणी-ए के 45 स्वीकृत पदों में 33 कर्मचारी कार्यरत और 12 पद रिक्त हैं। श्रेणी-बी के 139 पदों में 80 कर्मचारी कार्यरत और 59 पद रिक्त हैं। श्रेणी-सी में 287 पदों में 69 कर्मचारी कार्यरत और 218 पद रिक्त हैं। श्रेणी-डी के 120 पदों में 25 कर्मचारी कार्यरत और 95 पद रिक्त हैं।

    जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में श्रेणी-सी के 3,087 स्वीकृत पदों में 333 कर्मचारी कार्यरत और 2,754 पद रिक्त हैं। इसी तरह श्रेणी-डी के 1,470 पदों में केवल 42 कर्मचारी कार्यरत हैं और 1,428 पद खाली हैं।

    886 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू
    बैंकों में कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए सरकार ने फिलहाल 886 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। मंत्री के जवाब के अनुसार यह भर्ती आइबीपीएस (इंस्टीट्यूट आफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन) के माध्यम से की जा रही है।

    इसमें हरको बैंक तथा प्रदेश के 17 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के 33 सीनियर अकाउंटेंट, 116 जूनियर अकाउंटेंट तथा 737 क्लर्क के पद शामिल हैं। इन पदों को शीघ्र भरने की बात सरकार ने कही है। आइबीपीएस बैंकिंग क्षेत्र में भर्ती और चयन प्रक्रिया संचालित करने वाली संस्था है।

    इस भर्ती से तत्काल स्तर पर बैंकों में मानव संसाधन की कमी को कुछ हद तक दूर करने की उम्मीद है। हालांकि आंकड़ों से स्पष्ट है कि 4,566 रिक्त पदों के मुकाबले फिलहाल 886 पद ही भर्ती प्रक्रिया में शामिल किए गए हैं। यानी बड़ी संख्या में पदों पर अभी भी नियुक्ति की जरूरत बनी हुई है।

    आंकड़ों की नजर में सहकारी बैंकों की स्थिति
        कुल स्वीकृत पद: 5,148
        नियमित कार्यरत कर्मचारी: 582
        कुल रिक्त पद: 4,566
        हरको बैंक में स्वीकृत पद: 591
        हरको बैंक में कार्यरत: 207
        हरको बैंक में रिक्त: 108
        जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में स्वीकृत पद: 4,557
        जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में कार्यरत: 375
        जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में रिक्त पद: 4,182
        तत्काल भर्ती प्रक्रिया: 886 पद
        इनमें सीनियर अकाउंटेंट: 33
        जूनियर अकाउंटेंट: 116
        क्लर्क: 737

     

  • सपा की वोट बैंक राजनीति पर भाजपा ने साधा निशाना, दिया करारा जवाब

    सपा की वोट बैंक राजनीति पर भाजपा ने साधा निशाना, दिया करारा जवाब

    लखनऊ

    भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर बासित अली के लखनऊ आगमन पर उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी के आवास पर आज हुआ भव्य स्वागत समारोह राजधानी की सियासत में चर्चा का विषय बन गया। हज़ारों की संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम ने जहां भाजपा के ताकत का एहसास कराया, वहीं समाजवादी पार्टी की वर्षों पुरानी ‘मुस्लिम वोट बैंक’ वाली राजनीति को सीधी राजनीतिक चुनौती भी दी।

    कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं का उत्साह और उमड़ा जनसमूह यह संदेश देता नजर आया कि मुस्लिम समाज को किसी एक राजनीतिक दल की स्थायी राजनीतिक संपत्ति समझने का दौर अब समाप्त हो रहा है। सपा के लिए यह दृश्य इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस समाज को वह लंबे समय से अपने राजनीतिक प्रभाव का आधार मानती रही है, उसी समाज का बड़ा हिस्सा अब भाजपा के साथ अपनी राजनीतिक भागीदारी को लेकर खुलकर सामने आ रहा है।

    राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बिना भेदभाव, सबके विकास के संकल्प के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज का युवा अब केवल राजनीतिक नारों के आधार पर नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, विकास, सुरक्षा और सम्मान के आधार पर अपना भविष्य तय करना चाहता है।

    उन्होंने समाजवादी पार्टी पर व्यंग्य करते हुए कहा कि “जो लोग वर्षों से मुस्लिम समाज को अपना स्थायी वोट बैंक समझकर राजनीति करते रहे, उन्हें अब यह समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र में वोट किसी की जागीर नहीं होता।”

    दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि लखनऊ में आज का यह स्वागत कार्यक्रम बदलते राजनीतिक माहौल का जीता-जागता संदेश है। भाजपा हर समाज के बीच लगातार संवाद और संपर्क बढ़ा रहा है तथा बड़ी संख्या में मुस्लिम युवा मोदी योगी के विकास के विजन से जुड़ रहे हैं।

    कुंवर बासित अली के स्वागत में दिखाई दिया उत्साह और शक्ति प्रदर्शन आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा की सक्रियता और राजनीतिक तैयारी का भी संकेत माना जा रहा है।

  • योगी सरकार की बड़ी पहल: सर्वोदय विद्यालयों के 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ मिलेगा हुनर

    योगी सरकार की बड़ी पहल: सर्वोदय विद्यालयों के 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ मिलेगा हुनर

    लखनऊ
    योगी सरकार प्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों के विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ व्यावसायिक कौशल का प्रशिक्षण देने की तैयारी पूरी कर ली गई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत प्रदेश के 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों को विभिन्न रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रशिक्षण का लक्ष्य 31 प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं को सौंपा गया है। सभी चयनित संस्थाओं को प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, उनका अनुमोदन कराने, विद्यार्थियों का पंजीकरण करने और बैच गठित करने की प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा में पूरी करनी होगी। 30 सितंबर 2026 तक सभी प्रशिक्षण केंद्रों पर प्रशिक्षण शुरू करना अनिवार्य किया गया है।

    शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल पर जोर
    प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ का उद्देश्य सर्वोदय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ ऐसे कौशल से जोड़ना है, जो उन्हें भविष्य में रोजगार, स्वरोजगार और बेहतर करियर के अवसरों के लिए तैयार कर सकें। विद्यार्थियों को उनकी रुचि और उपलब्ध प्रशिक्षण के अनुसार अपैरल, आईटी-आईटीईएस, मैनेजमेंट सहित अन्य रोजगारपरक सेक्टरों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। योगी सरकार की कौशल विकास नीति के तहत यह पहल युवाओं को शिक्षा से कौशल और कौशल से रोजगार की ओर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। स्कूल स्तर पर ही विद्यार्थियों को व्यावहारिक और व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ भविष्य के लिए आवश्यक दक्षताएं विकसित करने में मदद मिलेगी।

    एक बैच में अधिकतम 35 विद्यार्थी
    प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बैच का आकार भी निर्धारित किया गया है। एक बैच में अधिकतम 35 विद्यार्थी शामिल होंगे, जबकि प्रशिक्षण की कुल अवधि 300 घंटे तक होगी। इससे विद्यार्थियों को नियमित स्कूली शिक्षा प्रभावित किए बिना कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। मिशन का जोर केवल प्रशिक्षण शुरू कराने पर ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर भी है। प्रशिक्षण प्रदाता को मिशन मुख्यालय में अनुबंध जमा कर उसकी पुष्टि करानी होगी। इसके बाद ही संबंधित जिले की जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (DPMU) को बैच गठित करने की अनुमति दी जाएगी।

    मान्यता प्राप्त जॉब रोल में ही प्रशिक्षण
    कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए बैच को मंजूरी देने से पहले NCVET और NQR पोर्टल पर संबंधित जॉब रोल की जांच की जाएगी। इसके बाद केवल वैध और मान्यता प्राप्त जॉब रोल में ही विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। पोर्टल पर भी उन्हीं बैच और सेक्टर को मंजूरी दी जाएगी, जो संबंधित प्रशिक्षण संस्था को आवंटित किए गए हैं। इससे प्रशिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और विद्यार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    बैच शुरू होने के सात दिन के भीतर मिलेगी पाठ्य सामग्री
    विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के दौरान आवश्यक संसाधनों की कमी न हो, इसके लिए प्रशिक्षण प्रदाताओं को बैच शुरू होने के सात दिन के भीतर पाठ्य सामग्री उपलब्ध करानी होगी। विद्यार्थियों को सामग्री दिए जाने की हस्ताक्षरित रसीद और तस्वीरें भी मिशन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम और मूल्यांकन संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल (एसएससी) के निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए भुगतान भी निर्धारित कॉमन कॉस्ट नॉर्म्स के अनुसार किया जाएगा।

    समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण पर मिशन का जोर
    मिशन निदेशक पुलकित खरे ने प्रशिक्षण प्रदाताओं को सभी प्रक्रियाएं निर्धारित समयसीमा और नियमों के अनुरूप पूरी करने के निर्देश दिए हैं। मिशन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रशिक्षण केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों को वास्तव में उपयोगी और गुणवत्तापूर्ण कौशल हासिल हो। उन्होंने कहा कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के माध्यम से विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ हुनर में दक्ष बनाने का प्रयास किया जा रहा है। स्कूल में ही कौशल प्रशिक्षण से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे आगे रोजगार एवं बेहतर करियर के अवसरों के लिए अधिक सक्षम बनेंगे।

    कोट
    हमारा लक्ष्य है कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के माध्यम से विद्यार्थी स्कूली शिक्षा के साथ हुनर में कुशल हो सकें, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहें। स्कूल में ही कौशल से जुड़ने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और आगे रोजगार व बेहतर करियर के अवसरों के लिए वे अधिक सक्षम बन सकेंगे। प्रशिक्षण की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी को इस पहल का पूरा लाभ मिले।
    *- पुलकित खरे, मिशन निदेशक, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन*

  • बाढ़ प्रभावित बिहार में राहत अभियान तेज, 1.98 लाख लोगों को मिला भोजन; 55,500 पॉलीथीन शीट बांटी

    बाढ़ प्रभावित बिहार में राहत अभियान तेज, 1.98 लाख लोगों को मिला भोजन; 55,500 पॉलीथीन शीट बांटी

    पटना
     बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति के बीच राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी मुस्तैदी के साथ राहत कार्य में जुटा हुआ है। प्रभावित आबादी को तत्काल सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से राज्यभर में कई त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं।

    विभाग के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुल 110 सामुदायिक रसोई केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इसके माध्यम से अब तक लगभग 1.98 लाख लोगों को गर्म और पौष्टिक भोजन कराया जा चुका है।

    इसके साथ ही, विस्थापित लोगों के लिए 01 राहत शिविर भी शुरू किया गया है, जहां 326 बाढ़ शरणार्थियों के रहने, भोजन और चिकित्सा देखभाल की पुख्ता व्यवस्था की गई है।

    आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए जमीनी स्तर पर राहत सामग्री का वितरण तीव्र गति से किया जा रहा है।

    ऐसे परिवारों को तात्कालिक आश्रय और खान-पान की सुविधा देने के लिए अब तक लगभग 55,500 पॉलीथीन शीट और 10,400 ड्राई राशन पैकेट बांटे जा चुके हैं।

    जलभराव वाले इलाकों में आवागमन को सुगम बनाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राज्य भर में कुल 1,345 नावों को परिचालित किया गया है।

    मौजूदा समय में राज्य के 11 जिलों पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अरवल के 66 प्रखंडों की 330 ग्राम पंचायतों की लगभग 19.57 लाख आबादी जलभराव से प्रभावित है, जहां प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

    NDRF और SDRF की टीम तैयार
    साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने और त्वरित राहत-बचाव कार्य के लिए राज्य में एनडीआरएफ (एनडीआरएफ) की 10 टीमें और एसडीआरएफ (एसडीआरएफ) की 27 टीमें विभिन्न प्रभावित जिलों में तैनात की गई हैं।

    नदियों के जलस्तर पर भी लगातार पैनी नजर रखी जा रही है। 6 सितंबर 2026 की स्थिति के अनुसार, वाल्मीकिनगर बराझ पर गंडक नदी का जलस्राव 1,29,000 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसकी प्रवृत्ति स्थिर बनी हुई है।

    वहीं, वीरपुर बराझ पर कोसी नदी का जलस्राव 1,73,255 क्यूसेक है। सोन नदी के इन्द्रपुरी बराझ पर जलस्राव 2,27,717 क्यूसेक दर्ज हुआ है, जिसमें घटने की प्रवृत्ति देखी जा रही है।

    गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती जैसी नदियां कुछ स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा स्थिति पर लगातार सतर्कता बरती जा रही है।

    वर्षापात के आंकड़ों के अनुसार, 01 जून से 06 सितंबर के दौरान राज्य में औसतन 590.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। बिहार मौसम सेवा केन्द्र के अनुसार अगले दो दिनों में राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।

    इसके मद्देनजर आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी स्थिति पर सतत निगरानी बनाए हुए हैं और हर प्रभावित नागरिक तक त्वरित राहत पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।

  • प्रसादी को लेकर पंचायत का फरमान! परिवार पर 1.51 लाख जुर्माने और बहिष्कार का आरोप, FIR दर्ज

    प्रसादी को लेकर पंचायत का फरमान! परिवार पर 1.51 लाख जुर्माने और बहिष्कार का आरोप, FIR दर्ज

    उदयपुर
    उदयपुर के गोगुंदा क्षेत्र के भुताला गांव में मंदिर में प्रसादी करने पर एक परिवार का कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार करने के मामले में कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने 5 पंचों सहित छह व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि समाज के लोगों ने परिवार पर 1 लाख 51 हजार रुपए का जुर्माना लगाया और राशि नहीं देने पर परिवार को समाज से अलग कर दिया।

    पीड़ित गणेश सिंह ने बताया कि 24 मई 2026 को गांव के मंदिर में प्रसादी का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के बाद आरोपी किशोर सिंह, तेज सिंह, नवल सिंह, मोहन सिंह, भैरू सिंह, चंदन सिंह, राम सिंह, काल सिंह, लहर सिंह, कान सिंह और धर्मेंद्र सहित अन्य लोगों ने आपत्ति जताई। पीड़ित के अनुसार, अगले दिन पंचायत बुलाकर 1 लाख 51 हजार रुपए जुर्माना भरने को कहा गया। राशि देने में असमर्थता जताने पर परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया।

    विरोध करने पर मारपीट का आरोप
    पीड़ित ने आरोप लगाया कि परिवार को समाज के अन्य लोगों से मेल-जोल और संपर्क नहीं रखने की हिदायत दी गई। मंदिर सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आने-जाने से भी रोका गया। रिश्तेदार की मौत होने पर श्मशान में भी जाने नहीं दिया गया। आदेश का विरोध करने पर उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इस संबंध में एएसआइ विनेश कुमार ने बताया कि शनिवार को पंचायत के पांच प्रमुख पंचों सहित छह व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    वाकली पुलिया से नदी में गिरी श्रद्धालुओं की जीप
    एक अन्य खबर के अनुसार धरियावद-उदयपुर-बांसी मार्ग पर वाकली पुलिया के समीप शनिवार तड़के एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। श्री सांवलिया सेठ के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी जीप शनिवार तड़के अनियंत्रित होकर पुलिया से सीधे नीचे सुखली नदी में जा गिरी। गनीमत रही कि हादसे में सभी 10 यात्री समय रहते वाहन से बाहर निकल गए।

    पुलिस के अनुसार मूंगाणा के समीप कुंडी गांव निवासी श्रद्धालु श्री सांवलिया जी के दर्शन कर जीप से अपने गांव लौट रहे थे। इस दौरान शनिवार तड़के करीब 4 बजे वाकली पुलिया के पास घुमावदार मोड़ पर चालक नियंत्रण खो बैठा और जीप नदी में जा गिरी। हादसा होते ही जीप में सवार यात्रियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत एक दूसरे का हाथ पकड़कर तत्काल बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। जिस जगह ये हादसा हुआ वो जंगल का क्षेत्र होने एवं मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण हादसे की सूचना काफी देर से पुलिस को मिली।

  • केंद्रीय सुरक्षा बलों में बदलेगा नेतृत्व, CISF में पदमाकर रानीप्से समेत कई IPS अफसरों की नियुक्ति

    केंद्रीय सुरक्षा बलों में बदलेगा नेतृत्व, CISF में पदमाकर रानीप्से समेत कई IPS अफसरों की नियुक्ति

     रांची
     केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल हुए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय और कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में 1995 बैच के छह भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों को स्पेशल महानिदेशक और संबंधित पदों पर नियुक्त किया है।

    सीआईएसएफ मुख्यालय ने सेक्टर स्तर पर भी नए अधिकारी तैनात किए हैं। झारखंड कैडर से भी एक अधिकारी सीआईएसएफ में प्रतिनियुक्ति पर गए हैं। ओडिशा कैडर के 1995 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी पदमाकर एस. रानीप्से (पूर्व में सीआईएसएफ के अपर महानिदेशक) को सीआईएसएफ के स्पेशल महानिदेशक के पद पर इन-सिटू आधार पर नियुक्त किया गया है।

    उनका कार्यकाल 31 मई 2028 (सेवानिवृत्ति की तिथि) या अगले आदेश तक रहेगा। इस नियुक्ति के लिए उनके पद को अस्थायी रूप से अपग्रेड किया गया है।

    अन्य पांच अधिकारियों की नियुक्तियां-

    • संदीप खिरवार (हरियाणा कैडर, 1995) को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का स्पेशल महानिदेशक (31 मई 2033 तक)
    • पुनीत रस्तोगी (त्रिपुरा कैडर, 1995) को सीमा सुरक्षा बल का स्पेशल महानिदेशक (30 जून 2030 तक)
    • सतीश श्रीरामाजी खंडारे (एजीएमयूटी कैडर, 1995) को सीमा सुरक्षा बल का स्पेशल महानिदेशक (30 जून 2031 तक)
    • राजेश कुमार (एजीएमयूटी कैडर, 1995) को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का स्पेशल महानिदेशक (दो वर्ष के लिए इन-सिटू)
    • जग मोहन (बिहार कैडर, 1995) को खुफिया ब्यूरो में स्पेशल निदेशक (30 जून 2031 तक)

    ये अधिकारी अपने वर्तमान पदों से मुक्त होकर केंद्रीय सुरक्षा संगठनों में कार्यभार ग्रहण करेंगे। इस कदम का उद्देश्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाना है।

    इससे पहले 1 सितंबर 2026 से सीआईएसएफ में सेक्टर स्तर पर भी बदलाव हुए। हिमांशु पाण्डेय ने सेंट्रल सेक्टर भिलाई के महानिरीक्षक का कार्यभार संभाला। पूर्व महानिरीक्षक निलिमा रानी सिंह 31 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त हो गईं।

    दिल्ली मुख्यालय में एयरपोर्ट सेक्टर की अपर महानिदेशक विनिता ठाकुर (राजस्थान कैडर, 1996 बैच) को अगले आदेश तक अपर महानिदेशक नॉर्थ सेक्टर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। पूर्व अपर महानिदेशक सुधीर कुमार भी 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो गए थे।

    सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने सेवानिवृत्त अधिकारियों सुधीर कुमार और निलिमा रानी के सम्मान में विदाई समारोह आयोजित कर उन्हें स्मृति चिह्न प्रदान किए और उनके कार्य की सराहना की।

    झारखंड कैडर से भी सीआईएसएफ में प्रतिनियुक्ति हुई है। जून 2026 में झारखंड कैडर के 2011 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी चंदन कुमार झा को सीआईएसएफ में उप महानिरीक्षक के पद पर प्रतिनियुक्ति दी गई थी। वे पहले झारखंड पुलिस में अपराध अनुसंधान विभाग के उप महानिरीक्षक थे।

    झारखंड पुलिस की सिविल लिस्ट में भी उनका वर्तमान पद उप महानिरीक्षक, सीआईएसएफ दर्शाया गया है। ये बदलाव सीआईएसएफ और अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में नेतृत्व को मजबूत करने तथा सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।