Category: राज्य

  • अंबाला जेल में सफल हुआ पायलट प्रोजेक्ट, अब पूरे हरियाणा की जेलों में पहुंचेगी मोबाइल ब्लॉकिंग तकनीक

    अंबाला जेल में सफल हुआ पायलट प्रोजेक्ट, अब पूरे हरियाणा की जेलों में पहुंचेगी मोबाइल ब्लॉकिंग तकनीक

    चंडीगढ़
     हरियाणा की जेलों में अवैध मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए तकनीक आधारित नई व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा रहा है। अंबाला जेल में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई टावर हार्मोनिक्स काल ब्लाकिंग प्रणाली के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब इसे प्रदेश की अन्य जेलों में लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    यह जानकारी कांग्रेस विधायक पूजा चौधरी द्वारा विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में कारागार मंत्री डा. अरविंद शर्मा ने दी।

    मंत्री ने बताया कि जेलों को सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल किया जा रहा है। जेल विभाग की प्राथमिकता केवल जेलों से अवैध मोबाइल फोन बरामद करना ही नहीं, बल्कि उनके इस्तेमाल की संभावना को ही खत्म करना है।

    इसी सोच के तहत अंबाला जेल में टावर आधारित प्रणाली का प्रयोग किया गया, जिसने अवैध मोबाइल के जरिए होने वाली काल और इंटरनेट के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाने में सफलता हासिल की।

    जेल परिसर में मोबाइल नेटवर्क बाधित
    इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत पारंपरिक मोबाइल जैमर का विकल्प होना है। जेल परिसर में विशेष टावर लगाए जाते हैं, जो वहां मौजूद मोबाइल फोन को लक्षित तरीके से नियंत्रित करते हैं।

    इससे पूरे जेल परिसर में मोबाइल नेटवर्क को पूरी तरह बाधित किए बिना अवैध फोन की काल और इंटरनेट सेवाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। यह व्यवस्था जेल प्रशासन को अनधिकृत बाहरी संपर्क रोकने में अधिक प्रभावी तरीके से मदद कर सकती है।

    अंबाला जेल को इस तकनीक के पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया था। यहां प्रणाली की कार्यप्रणाली, नेटवर्क कवरेज और अवैध मोबाइल के इस्तेमाल को रोकने की क्षमता का परीक्षण किया गया। संतोषजनक परिणाम मिलने के बाद अन्य जेलों में भी इसके विस्तार की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

     

  • 12 जिलों में 22.42 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित, NDRF-SDRF की 37 टीमें मोर्चे पर

    12 जिलों में 22.42 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित, NDRF-SDRF की 37 टीमें मोर्चे पर

    पटना
    राज्य में बाढ़ की वजह से 22 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित है। इस स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव कार्यों का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

    नदियों के जलस्तर में हुई वृद्धि और बाढ़ की चुनौती से निपटने की दिशा में आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तत्परता से जुटा हुआ है। व्यापक राहत अभियानों के तहत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 190 सामुदायिक रसोई केंद्रों का सफल संचालन किया जा रहा है।

    इनके माध्यम से अब तक लगभग 2.51 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि इस आपदा की घड़ी में राज्य का कोई भी प्रभावित नागरिक भूखा न रहे और हर पीड़ित तक त्वरित सहायता पहुंचे।

    12 जिलों में लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त
    12 जिलों पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय एवं अरवल के 70 प्रखंडों की 368 ग्राम पंचायतों में लगभग 22.42 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है।

    पांच सितंबर को संचालित 80 सामुदायिक रसोइयों की संख्या को बढ़ाकर रविवार को 190 कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त तीन राहत शिविरों का भी संचालन किया जा रहा है। यहां 1631 बाढ़ शरणार्थियों के लिए आवासन, भोजन एवं अन्य बुनियादी सुविधाएं दी गई हैं।

    विभाग की ओर से अब तक प्रभावित परिवारों के बीच लगभग 65,700 पालीथीन शीट तथा 12,712 ड्राई राशन पैकेट बांटे जा चुके हैं। इसी तरह ड्राई राशन पैकेट का वितरण भी 11,700 से बढ़कर 12,712 हो गया है।

    1429 नावों का हो रहा परिचालन  
    प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के सुरक्षित आवागमन के लिए 1,429 नावों का परिचालन कराया जा रहा है, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए चलाए जा रहे चिकित्सा शिविरों की संख्या 118 से बढ़ाकर 171 कर दी गई है।

    राहत अभियानों को मजबूती देने के लिए एनडीआरएफ की 10 टीमों और एसडीआरएफ की 27 टीमों को विभिन्न जिलों में तैनात किया गया है।

    नदियों के जलस्तर की बात करें तो केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा नदियां विभिन्न स्थलों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

    गंडक (वाल्मीकिनगर) और सोन (इंद्रपुरी) बराजों पर जलस्राव की प्रवृत्ति फिलहाल स्थिर बनी हुई है। बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार अगले दो दिनों में राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम तथा कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।

     

  • हजारों पोस्ट से CM सैनी तक पहुंचाई मांग, हरियाणा के अतिथि अध्यापकों ने अपनाया अनोखा तरीका

    हजारों पोस्ट से CM सैनी तक पहुंचाई मांग, हरियाणा के अतिथि अध्यापकों ने अपनाया अनोखा तरीका

    चंडीगढ़
     हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब दो दशक से सेवाएं दे रहे अतिथि अध्यापकों ने अपनी मांग को सरकार तक पहुंचाने के लिए गांधीगिरी का रास्ता अपनाया है। प्रदेशभर में अतिथि अध्यापकों ने एक साथ इंटरनेट मीडिया पर अभियान चलाकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा की सकारात्मक सोच को लेकर हजारों पोस्ट साझा कीं।

    अभियान का मकसद सरकार का ध्यान अपनी उस मांग की ओर आकर्षित करना है, जिसके तहत अतिथि अध्यापक खुद को नियमित करने की मांग कर रहे हैं। प्रदेश में करीब 12 हजार अतिथि अध्यापक लंबे समय से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं।

    नियमित करने की उठी मांग
    उनका तर्क है कि जब वे लगभग 20 वर्षों से शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं और लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, तो उन्हें भी हरियाणा के सरकारी कालेजों में कार्यरत अतिथि अध्यापकों की तर्ज पर नियमित किया जाना चाहिए। राज्य सरकार करीब चार हजार कालेज लेक्चरर्स को पक्का कर चुकी है। इसी निर्णय को आधार बनाकर स्कूलों के अतिथि अध्यापक भी अपने लिए समान नीति की उम्मीद लगाए हुए हैं।

    अतिथि अध्यापकों के प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ मुलाकात हो चुकी है। इसके अलावा शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा भी अतिथि अध्यापकों की मांग के प्रति सकारात्मक रुख जाहिर कर चुके हैं।

    पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने बैठक में इस विषय पर अधिकारियों के साथ चर्चा करने का भरोसा दिया था। ऐसे में अतिथि अध्यापकों को उम्मीद है कि सरकार उनकी करीब 20 साल पुरानी सेवा और अनुभव को देखते हुए कोई ठोस रास्ता निकालेगी।

    अतिथि शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा विषय
    वहीं, विधानसभा में भी विपक्ष की ओर से अतिथि अध्यापकों को नियमित करने का मुद्दा उठाया जा चुका है। इससे यह मामला अब केवल कर्मचारी संगठनों की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और लंबे समय से अस्थायी आधार पर काम कर रहे अतिथि शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा विषय बन गया है।

    अतिथि अध्यापकों का ताजा इंटरनेट मीडिया अभियान इसी उम्मीद के साथ चलाया गया है कि सरकार के समक्ष अपनी बात आक्रामक आंदोलन की बजाय सकारात्मक तरीके से रखी जाए। हजारों पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के सकारात्मक रुख को सामने रखते हुए उनसे जल्द निर्णय लेने की अपील की गई है। अब निगाहें सरकार और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर हैं।

  • ‘हम यहीं रह रहे हैं, फिर नाम क्यों हटाया’, रांची में वोटर लिस्ट को लेकर 34 लोगों ने उठाए सवाल

    ‘हम यहीं रह रहे हैं, फिर नाम क्यों हटाया’, रांची में वोटर लिस्ट को लेकर 34 लोगों ने उठाए सवाल

    रांची
     विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर रांची में विवाद खड़ा हो गया है। हिंदपीढ़ी क्षेत्र के मतदाताओं ने आरोप लगाया है कि उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश के तहत फार्म-7 के माध्यम से आवेदन दिया गया है।

    शिकायत के अनुसार, रांची विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 226 में रहने वाले 34 मतदाताओं को फार्म-7 में अनुपस्थित या अस्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है, जबकि संबंधित मतदाताओं का दावा है कि वे पिछले कई वर्षों से अपने स्थायी पते पर रह रहे हैं।

    मामले को लेकर मतदाताओं की ओर से रांची के एसडीएम को लिखित शिकायत दी गई है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच कर दोषी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। उन्हें जांच का आश्वासन दिया गया है।

    स्थायी पते पर रह रहे, फिर कैसे बताया अनुपस्थित
    शिकायतकर्ताओं का कहना है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फार्म-7 का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि बीएलए-2 मो. यासीन अली के माध्यम से 34 लोगों के नाम हटाने के लिए आवेदन दिया गया।

    फॉर्म-7 में इन मतदाताओं को अनुपस्थित अथवा अस्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है। मतदाताओं का कहना है कि संबंधित सभी लोग हिंदपीढ़ी में अपने स्थायी पते पर रह रहे हैं।

    ऐसे में उन्हें अनुपस्थित या स्थानांतरित बताकर नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि यदि वे उसी पते पर रह रहे हैं और नियमित रूप से क्षेत्र में मौजूद हैं, तो उनके नाम हटाने के लिए इस तरह का आवेदन किस आधार पर दिया गया, इसकी जांच होनी चाहिए।

    नियम के तहत कार्रवाई की मांग
    शिकायत में फार्म-7 से संबंधित प्रावधानों का हवाला देते हुए नियम 13(2) और 26 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम हटाना गंभीर मामला है। यदि गलत सूचना देकर या किसी साजिश के तहत नाम हटाने का प्रयास किया गया है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

    हम यहीं रह रहे हैं, फिर नाम क्यों हटाया…
    शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया से लोगों में चिंता है। उनका सवाल है कि जब वे जिंदा हैं और वर्षों से इसी पते पर रह रहे हैं, तो हमें अनुपस्थित या स्थानांतरित बताकर मतदाता सूची से नाम हटाने का प्रयास क्यों किया जा रहा है।

    प्रशासन की ओर से मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया गया है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि फार्म-7 में दी गई जानकारी किस आधार पर दर्ज की गई और इसके पीछे कोई गलती है या जानबूझकर नाम हटाने का प्रयास।

  • दिल्ली में दर्दनाक हादसा: PG वाली 5 मंजिला इमारत ढही, 6 की मौत; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

    दिल्ली में दर्दनाक हादसा: PG वाली 5 मंजिला इमारत ढही, 6 की मौत; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

    नई दिल्ली
     दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत के ढहने से छह लोगों की मौत हो गई है, जबकि राहत एवं बचाव के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अब इस घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसमें इमारत अचानक भरभराकर गिरती हुई दिखाई दे रही है।

    जानकारी के मुताबिक, दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित इस इमारत में लड़कों के लिए पीजी था। रविवार दोपहर करीब 1 बजकर 30 मिनट के आसपास इमारत अचानक ढह गई, इस दौरान वहां पर मरम्मत और निर्माण कार्य चल रहा है। सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि कुछ ही पलों में पूरी इमारत अचानक जमींदोज हो जाती है और मलबा सड़क पर फैल जाता है। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

    चारों ओर छाया धूल का गुबार
    वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि बिल्डिंग के गिरते ही चारों ओर धूल का गुबार छा गया था। साथ ही आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि हादसे के तुरंत बाद ही स्थानीय लोगों और रेस्क्यू टीमों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया और मलबे में फंसे लोगों की तलाश की।

    रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
    सोमवार सुबह भी दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), दिल्ली अग्निशमन सेवा और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीमें अभियान में जुटी हैं। मलबे उठाने का काम भी जारी है। अधिकारियों ने बताया कि मलबे में अभी भी कई लोगों, जिनमें अधिकतर छात्र हैं, के फंसे होने की आशंका है और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं।

    लगभग 40-50 साल पुरानी इस इमारत में एक तहखाना और पांच ऊपरी मंजिलें थीं। इसका इस्तेमाल छात्रों के लिए पीजी के तौर पर किया जा रहा था, जिनमें से कई छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस में पढ़ाई कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि परिसर में लगभग 40 लोगों के ठहरने के कमरे थे।

    सीएम रेखा गुप्ता ने दिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
    वहीं, रविवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बहुमंजिला इमारत के ढहने की घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए। घटनास्थल का मुआयना करने के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इमारत गिरने के कारणों की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया और इमारत के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    रेखा गुप्ता ने घटनास्थल पर स्थिति का जायजा लेने के बाद कहा, "इस गंभीर घटना के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों को पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाएगा और कानून के कड़े प्रावधानों के तहत उनसे निपटा जाएगा।"

    पुलिस के अनुसार, कथित मालिक हरिराम और अन्य के खिलाफ साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस उपायुक्त (दक्षिण-पश्चिम) अमित गोयल ने मामले के दर्ज होने की पुष्टि की।

  • राजस्थान में बनेगा नया 4-लेन एक्सप्रेस-वे, 210 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित

    राजस्थान में बनेगा नया 4-लेन एक्सप्रेस-वे, 210 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित

    जयपुर
     प्रदेश में पूर्व से पश्चिमी राजस्थान के बीच तेज और सुगम आवागमन के लिए भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 277 किलोमीटर लंबा 4 लेन एक्सप्रेस-वे जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जिलों से होकर गुजरेगा। इसके लिए 210 गांवों के 10,890 खसरों की करीब 2,600 हेक्टेयर जमीन अवाप्त की जाएगी। जयपुर जिले के दूदू के ग्राम झाग से शुरू होकर एक्सप्रेस-वे एनएच-21 पर भरतपुर के ऊंचा नगला तक पहुंचेगा।

    फागी से राजस्थान-उत्तर प्रदेश सीमा के बीच यात्रा समय भी 7 घंटे से घटकर करीब 2.5 से 3 घंटे रहने का अनुमान है। भरतपुर-ब्यावर एक्सप्रेस-वे एक्सेस कंट्रोल्ड होगा और वाहनों की अधिकतम गति 120 किमी प्रति घंटा रखी जाएगी। निर्माण पर 8,656 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसमें 5,231 करोड़ रुपए सिविल कार्य और 2,640 करोड़ रुपए भूमि अवाप्ति पर खर्च होंगे। प्रति किलोमीटर लागत करीब 31.55 करोड़ रुपए होगी।

    30 पुल, 4 आरओबी, 10 इंटरचेंज और 179 अंडरपास
    परियोजना में 30 छोटे-बड़े पुल, रेललाइन पर चार आरओबी, सात फ्लाईओवर, 10 इंटरचेंज तथा वाहनों के लिए 179 छोटे-बड़े अंडरपास बनाए जाएंगे। एक्सप्रेस-वे ब्यावर-किशनगढ़ क्षेत्र को भरतपुर से जोड़ते हुए अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे, एनएच-448 और एनएच-21 के बीच आर्थिक गलियारा मजबूत करेगा। बढ़ती औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच एनएच-48 और एनएच-21 पर यातायात का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।

    करौली में 58.8 किमी लंबाई, 7,122 पेड़ कटेंगे
    करौली जिले में एक्सप्रेस-वे की लंबाई 58.8 किलोमीटर होगी। करौली, नादौती, हिंडौन, श्रीमहावीरजी और सूरौठ तहसीलों के 49 गांवों में 2,256 खसरों की 637.64 हेक्टेयर निजी और 35.42 हेक्टेयर सरकारी भूमि ली जाएगी। इससे 26,539 परिवारों के 1,06,156 लोग प्रभावित होंगे। करीब 7,122 पेड़ों की कटाई भी प्रस्तावित है। परियोजना को लेकर अंतिम सामाजिक समाघात निर्धारण रिपोर्ट जारी हो चुकी है।

    90 मीटर चौड़ा होगा कॉरिडोर
    एक्सप्रेस-वे करीब 90 मीटर चौड़ा होगा और इसकी ऊंचाई 2.5 से 7 मीटर तक रहेगी। परियोजना से राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच माल एवं यात्री परिवहन को नया वैकल्पिक मार्ग मिलेगा।

    नया एक्सप्रेस-वे बनने से सफर होगा आसान
    भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनने से जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जैसे जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रा का समय और ईंधन खर्च कम होने की उम्मीद है। एक्सप्रेस-वे से मौजूदा सड़कों और हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव भी घटेगा। किसानों को कृषि उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। साथ ही लॉजिस्टिक्स, उद्योग, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलने से नए रोजगार और निवेश के अवसर पैदा होंगे। पूर्वी राजस्थान के शहरों और गांवों का आर्थिक विकास भी तेज हो सकता है।

  • सोलर प्लेट की देखरेख सीखकर कमा रहे 20-25 हजार रुपये, बिहार में युवाओं को मिल रहा रोजगार

    सोलर प्लेट की देखरेख सीखकर कमा रहे 20-25 हजार रुपये, बिहार में युवाओं को मिल रहा रोजगार

    पटना
    बिहार और केंद्र सरकार की ओर से गैर परम्परागत ऊर्जा को बढ़ावा दिए जाने की नीति को देखते हुए राज्य के बेरोजगारों को सोलर प्लेट के रखरखाव का विशेष प्रशिक्षण दिया जाने लगा है। युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग की ओर से अब तक 11 हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसमें से अधिकतर को काम मिल गया है और वे देश-प्रदेश के विभिन्न कंपनियों में 20-25 हजार तक मासिक की आमदनी कर रहे हैं।

    विभागीय अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत लोगों की छतों पर सोलर प्लेट लगाए जा रहे हैं। बिहार में एक-दो साल के भीतर लाखों लोगों के घरों की छतों पर सोलर प्लेट लगाने का लक्ष्य है। इन सोलर प्लेट के रखरखाव की जिम्मेवारी संबंधित एजेंसियों की पांच साल तक होगी। लेकिन एजेंसियों को इसके रखरखाव के लिए प्रशिक्षित मैनपावर की आवश्यकता होगी। इसी के मद्देनजर विभाग ने कुशल कार्यबल तैयार करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया।

    104 प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए
    युवाओं की ट्रेनिंग के लिए राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के 87 प्रशिक्षकों का चयन किया गया। कुल 104 प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों में सोलर प्लेट के रखरखाव का बुनियादी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहां से निकले युवाओं को आसानी से काम मिल रहा है।

    ऑन जॉब ट्रेनिंग के तहत ट्रेनिंग के साथ कमाई
    पिछले वर्ष यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया था। विभाग का लक्ष्य था कि कम से कम 10 हजार लोगों को प्रशिक्षित किया जाए। लेकिन लक्ष्य से कहीं अधिक 11 हजार से अधिक लोगों को सोलर प्लेट के रखरखाव का प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं जो पहले से जो इस क्षेत्र में काम कर रहे थे यानी ऑन जॉब ट्रेनिंग के तहत भी 10 हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा विभाग असंगठित क्षेत्र के कामगारों को प्रशिक्षण के बाद प्रमाण पत्र भी दे रहा है।

    प्रमाणीकरण के लिए ब्रिज कोर्स
    रिकोग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग (आरपीएल) के तहत असंगठित क्षेत्र में उपलब्ध कौशल के प्रमाणीकरण के लिए ब्रिज कोर्स चला रहा है। इसके तहत 12 घंटे का उन्मुखीकरण एवं तत्पश्चात अधिकतम 68 घंटे का प्रशिक्षण ब्रिज कोर्स के तहत दिया जा रहा है। 15 से 59 वर्ष के लोगों को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 46 हजार से अधिक लोगों ने नामांकन लिया जिसमें से 98 फीसदी लोगों को प्रशिक्षित कर दिया गया। जबकि 28 हजार से अधिक लोगों को प्रमाण पत्र भी दे दिया गया है।

  • सहारनपुर मस्जिद विवाद के बीच मुरादाबाद में भी कार्रवाई की तैयारी, MDA ने दी डेडलाइन

    सहारनपुर मस्जिद विवाद के बीच मुरादाबाद में भी कार्रवाई की तैयारी, MDA ने दी डेडलाइन

    सहारनपुर
    यूपी के सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर में बनी सौ साल पुरानी मस्जिद गिराने का मामला गरमाया हुआ है। सपा, कांग्रेस, आजाद समाज पार्टी समेत तमाम विपक्षी दलों ने इसे लेकर मोर्चा खोला हुआ है। इस बीच यूपी के ही मुरादाबाद में अब सरकारी जमीन पर मस्जिद का आरोप लगाते हुए बुलडोजर चलाने की तैयारी कई गई है। दिल्ली रोड स्थित पाकबड़ा थाना क्षेत्र में सरकारी जमीन पर बनी सालों पुरानी मस्जिद को लेकर खुद तोड़ने की नोटिस एमडीए ने दी है।

    एमडीए सचिव की ओर से मस्जिद के मुतवल्ली को नोटिस जारी कर अवैध निर्माण को खुद ही हटाने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में इसके लिए 15 दिन की समय सीमा दी गई है। निर्धारित अवधि में निर्माण नहीं हटाए जाने पर प्राधिकरण द्वारा बुलडोजर की कार्रवाई की जाएगी। एमडीए की नोटिस से मस्जिद कमेटी में हड़कंप मचा है।

    करीब 300 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया गया है। एमडीए की ओर से इसे अवैध निर्माण माना गया है। सड़क किनारे मस्जिद के निर्माण से यातायात व्यवस्था भी आए दिन बाधित होती रहती है। कमेटी के लोगों के द्वारा मस्जिद सालों पुरानी बताई जा रही है।

    पहले भी की जा चुकी है बुलडोजर कार्रवाई
    सरकारी जमीन पर बने अवैध धार्मिक निर्माणों को लेकर प्रशासन पहले भी कार्रवाई कर चुका है। कांठ रोड सिद्ध अस्पताल के पास सड़क किनारे बनाए गए मस्जिदनुमा निर्माण को प्रशासन ने पुलिस बल की मौजूदगी में हटाया था। विवाद से बचने के लिए प्रशासन की टीम ने सुबह तड़के बुलडोजर कार्रवाई शुरू की थी। लोगों की नींद खुलने तक अवैध निर्माण का नामोनिशान साफ हो गया था। इसी तरह एमडीए की सेक्टर-10 योजना में पार्क की जमीन पर बनी मीनार के निर्माण को बुलडोजर से हटाकर पार्क की जमीन खाली कराई गई थी। एमडीए उपाध्यक्ष अनुभव सिंह का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। नोटिस दिए जाने की कार्रवाई की गई है।

    सहारनपुर मामले पर आज हाईकोर्ट में दायर होगी याचिका
    सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण का मामला अब हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। मस्जिद प्रकरण में सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। मस्जिद के मुतवल्ली की ओर से यह अपील दाखिल की जाएगी। याचिका के जरिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को चुनौती दिए जाने के साथ प्रकरण में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।

    कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर प्रशासन की ओर से की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद अब मुतवल्ली की ओर से कानूनी रास्ता अपनाया जा रहा है। हाईकोर्ट में दाखिल होने वाली याचिका में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से जुड़े आदेश, प्रक्रिया और अन्य संबंधित बिंदुओं को आधार बनाया जाएगा। मुतवल्ली पक्ष का कहना है मस्जिद से संबंधित दस्तावेज और अभिलेख उनके पास मौजूद हैं। ऐसे में कार्रवाई को लेकर न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा जाएगा। याचिका दाखिल होने के बाद अदालत की ओर से सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। वहीं, पुलिस-प्रशासन की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की जा रही है।

  • सरकार संग बातचीत से निकली उम्मीद की किरण, किसान आंदोलन जारी रहेगा या खत्म होगा? आज तय करेंगे किसान

    सरकार संग बातचीत से निकली उम्मीद की किरण, किसान आंदोलन जारी रहेगा या खत्म होगा? आज तय करेंगे किसान

    मोहाली
     मोहाली-चंडीगढ़ बार्डर पर पिछली 1 सितंबर से चल रहा किसानों का धरना सोमवार को 7वें दिन में पहुंच गया है। इससे पहले रविवार को पंजाब सरकार के दो मंत्रियों व किसान नेताओं के बीच मीटिंग पंजाब भवन चंडीगढ़ में हुई।

    सूत्रों के अनुसार मीटिंग पाजिटिव रही और कई मांगों को जो पंजाब सरकार के तहत पूरी हो सकती है उनमें से कई को मान लिया गया। सरकार की ओर से कृषि मंत्री गुरमीत सिंह मुंडिया और सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह मीटिंग में हाजिर हुए जबकि किसानाें की कई जत्थेबंदियों के नेता पहुंचे।

    सरकार की ओर से किसानों को आश्वासन दिया गया कि एक महीने के अंदर विधान सभा का विशेष सत्र बुला कर पानी के मसले पर बात की जाएगी।बाकी केंद्र से पूरी होने वाली मांगों को लेकर केंद्र से बातचीत का आश्वासन मंत्रियों ने किसान नेताओं को दिया।

    सोमवार को किसान जथेबन्दीयों के नेता आपस में मीटिंग करेंगे। उसके बाद स्टेज से सरकार-किसानों के बीच हुई मीटिंग के बारे बताया जाएगा। इस दौरान पंजाब सरकार का कोई नुमाइंदा जो मांगों काे पंजाब सरकार ने माना है उसका लिखित मसौदा लेकर मोर्चे में पहुंच सकता है। कुल मिला कर आज बार्डर पर लगा किसानों का मोर्चा खत्म हो सकता है।

    राकेश टिकैत पहुंचे मोर्चे में
    किसान नेता राकेश टिकैत रविवार को किसान मोर्चे में पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को सरकारों को मान लेना चाहिए । उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलना चाहिए।

    किसानों की मुख्य मांगें
    किसानों की ओर से अमेरिका के साथ ट्रेड डील न करने, पानी के मुद्दे को लेकर सेक्शन 78,79,80 रद्द करने, किसानों का पूरा कर्ज़ माफ़ करने, फसलों का दाम स्वामीनाथन रिपोर्ट के हिसाब से तय करने, बिजली बिल 2025 और बीज बिल 25 वापस लेने, गन्ने का दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल करने, लैंड पुलिंग स्कीम रद्द करने सहित कई अन्य मांगों को लेकर मोहाली में पक्का मोर्चा लगाया गया है।

    किसान नेताओं और प्रशासन से बातचीत के बाद किसानों ने 1 से 7 सितंबर तक मोहाली से चंडीगढ़ जाने वाली मुख्य सड़क की एक तरफ मोहाली बार्डर पर लगाया है। मोर्चे में पंजाब भर से पहुंचे किसानों की ट्रैक्टर-ट्रालियां खड़ी करने में जगह न मिलने कारण किसानों ने सड़क की दूसरी तरफ भी ट्रालियां खड़ी कर दी है। फिलहाल सड़क की एक तरफ से चंडीगढ़ से मोहाली आने जाने वालों के लिए रास्ता खुला हुआ है।

  • SO की मौत के बाद बस्ती में सनसनी, बेटी को ब्लैकमेल करने के आरोप में पिता पर गंभीर सवाल

    SO की मौत के बाद बस्ती में सनसनी, बेटी को ब्लैकमेल करने के आरोप में पिता पर गंभीर सवाल

     बस्ती
    पहले मुलाकात, फिर दोस्ती और उसके बाद नजदीकियां… पुलिस का दावा है कि बस्ती में एक हनीट्रैप गिरोह इसी तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था. इसके बाद प्राइवेट बातचीत, तस्वीरों और वीडियो को ब्लैकमेलिंग का हथियार बनाया जाता था. पैसे की मांग होती थी और इनकार करने पर बदनाम करने की धमकी दिए जाने का आरोप है. इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ, जब बस्ती में वाल्टरगंज थाने के प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह ने 29 अगस्त को अपने सरकारी आवास पर आत्महत्या कर ली. उनकी मौत की जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे सुराग मिले, जिनसे एक महिला, उसके पिता और एक वकील की भूमिका सामने आई. पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 32 वर्षीय प्रियंका चौधरी, उसके पिता राम नयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव के रूप में हुई है। 

    बस्ती के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) संजीव त्यागी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले की जानकारी दी. 29 अगस्त का दिन था. वाल्टरगंज थाने के प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह अपने सरकारी आवास पर थे. कुछ समय बाद उनकी मौत की खबर सामने आई. पुलिस के मुताबिक, सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी. एक पुलिस अधिकारी की इस तरह हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए. सूर्य प्रकाश सिंह के बेटे संदीप सिंह ने 5 सितंबर को बस्ती कोतवाली थाने में FIR दर्ज कराई. शिकायत में कई लोगों पर आपसी मिलीभगत से ऐसे कृत्य करने का आरोप लगाया गया, जिनके कारण उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया. इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. पुलिस ने सूर्य प्रकाश सिंह के मोबाइल फोन, कॉलिंग पैटर्न की पड़ताल शुरू की. इसी दौरान जांच की कड़ियां एक महिला और उसके संपर्क में रहे कुछ लोगों तक पहुंचीं। 

    पहले नजदीकी, फिर प्राइवेट तस्वीरें और वीडियो

    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों का कथित तरीका बेहद योजनाबद्ध था. जांच में सामने आया कि प्रियंका चौधरी कथित तौर पर लोगों से संपर्क करती थी. बातचीत आगे बढ़ने के बाद दोस्ती और फिर प्रेम या अंतरंग संबंध जैसे हालात बनाए जाते थे. पुलिस का दावा है कि इसी दौरान बातचीत, तस्वीरें या वीडियो रिकॉर्ड कर लिए जाते थे. इसके बाद शुरू होता था ब्लैकमेलिंग का खेल. आरोप है कि निजी तस्वीरों और वीडियो को सार्वजनिक करने या परिवार और समाज में बदनाम करने का डर दिखाकर लोगों से पैसे मांगे जाते थे. पुलिस का कहना है कि इस तरीके से कई लोगों को कथित तौर पर निशाना बनाया गया। 

    अकेली नहीं थी प्रियंका, पिता और वकील भी भूमिका में
    पुलिस की जांच में प्रियंका के साथ उसके पिता राम नयन चौधरी और वकील विजय प्रकाश यादव की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया है. पुलिस के मुताबिक, प्रियंका कथित तौर पर लोगों से संपर्क बनाती थी और उन्हें अपने जाल में फंसाती थी. इसके बाद उसके पिता और विजय प्रकाश यादव कथित ब्लैकमेलिंग और वसूली में भूमिका निभाते थे.  पुलिस ने दावा किया है कि गिरोह ने कई लोगों से पैसे की कथित वसूली की. अब जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि इन आरोपियों ने कितने लोगों को निशाना बनाया और इस नेटवर्क में इनके अलावा कोई और व्यक्ति भी शामिल था या नहीं। 

    गंधार गांव में पिता के साथ रहती थी प्रियंका
    पुलिस के मुताबिक, प्रियंका चौधरी वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के गंधार गांव में अपने पिता के साथ रहती थी. पुलिस ने बताया कि प्रियंका करीब 10 साल से अपने पति से अलग रह रही थी. वह मुंबई में ब्यूटी पार्लर और स्पा सेंटरों में भी काम कर चुकी थी. पुलिस अब उसकी पुरानी गतिविधियों और संपर्कों की भी जानकारी जुटा रही है. जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि कथित तौर पर जिन लोगों को निशाना बनाया गया, उनसे संपर्क कैसे हुआ और बाद में ब्लैकमेलिंग की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ी. सूर्य प्रकाश सिंह की मौत की जांच में कॉल डिटेल ने भी पुलिस का ध्यान खींचा। 

    DIG संजीव त्यागी के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण से सिंह का प्रियंका चौधरी और विजय प्रकाश यादव से संपर्क सामने आया है. पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन की कॉलिंग भी जांच में अहम रही. 29 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 41 मिनट पर विजय प्रकाश यादव ने सूर्य प्रकाश सिंह को आखिरी कॉल की थी.  अब पुलिस इस कॉल को लेकर भी जांच कर रही है. अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस बातचीत में क्या हुआ था और क्या इसका संबंध सिंह की मौत से पहले की परिस्थितियों से था. पुलिस का कहना है कि कॉलिंग पैटर्न और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को एक साथ देखने पर आरोपियों और सिंह के बीच संपर्क की कड़ी मजबूत हुई। 

    क्या ब्लैकमेलिंग के दबाव में दी जान
     पुलिस को संदेह है कि सूर्य प्रकाश सिंह को आरोपियों की ओर से कथित तौर पर परेशान और प्रताड़ित किया जा रहा था. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इसी दबाव के कारण उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया. पुलिस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, कॉल डिटेल, आरोपियों से पूछताछ और अन्य संभावित पीड़ितों से मिली जानकारी को जोड़कर पूरे घटनाक्रम की तस्वीर तैयार कर रही है. पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि कथित गिरोह ने सिर्फ एक व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया था. कई अन्य लोगों से भी कथित तौर पर पैसे की वसूली किए जाने की बात सामने आई है. अब पुलिस इन संभावित पीड़ितों की पहचान करने की कोशिश कर रही है. उनसे पूछताछ के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि उनके साथ किस तरह संपर्क किया गया, क्या रिकॉर्ड किया गया और बाद में किस तरह पैसे की मांग की गई. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों के पास लोगों की निजी तस्वीरें और वीडियो किस तरह पहुंचते थे और क्या इनका इस्तेमाल दूसरे लोगों को भी डराने के लिए किया गया। 

    हॉस्पिटल चौराहे से तीनों गिरफ्तार
    DIG संजीव त्यागी के मुताबिक, तीनों आरोपियों को हॉस्पिटल चौराहे से गिरफ्तार किया गया. अब आरोपियों से पूछताछ के जरिए पुलिस कथित नेटवर्क की दूसरी कड़ियां तलाश रही है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस मामले में कोई और व्यक्ति शामिल है और क्या आरोपियों ने बस्ती के अलावा दूसरे शहरों में भी इसी तरह लोगों को अपना निशाना बनाया था।