Category: राज्य

  • सत्य निकेतन हादसे में सिस्टम पर गिरी गाज, डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारी सस्पेंड; मालिक

    सत्य निकेतन हादसे में सिस्टम पर गिरी गाज, डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारी सस्पेंड; मालिक

    नई दिल्ली
     दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को गिरी 5 मंजिला इमारत मामले में दिल्ली सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। सीएम रेखा गुप्ता के निर्देश पर एमसीडी ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। वहीं इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल अस्पताल में भर्ती हैं।

    जानकारी के मुताबिक, सीएम रेखा गुप्ता के सख्त निर्देश के बाद एमसीडी ने 5 अधिकारियों को सस्पेंड किया है। जिसमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, रणवीर सिंह, ललित कुमार गोयल, सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं।

    बिल्डिंग के मालिक की तलाश के लिए गठित की गई 10 टीमें
    वहीं बिल्डिंग के गिरने से हुए हादसे के संबंध में भवन मालिक हरिराम बंसल को गिरफ्तार करने के लिए 10 अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद उसे ढूंढने और गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

    इन टीमों में स्थानीय जिला पुलिस और विशेष स्टाफ के कर्मियों के साथ-साथ जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी भी शामिल हैं। सभी 10 टीमों का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (अतिरिक्त डीसीपी) रैंक के अधिकारी कर रहे हैं। साथ ही, वरिष्ठ अधिकारी अभियान की निगरानी कर रहे हैं और विभिन्न स्थानों पर तलाशी का समन्वय कर रहे हैं।

    सत्य निकेतन हादसे ने खोली सिस्टम की पोल
    पुलिस के अनुसार, हरिराम का पता लगाने और उसे हिरासत में लेने के प्रयासों के तहत दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है।

    पुलिस ने दर्ज की FIR
    पुलिस ने रविवार को हरिराम बंसल और अन्य लोगों के खिलाफ इमारत गिरने के संबंध में एफआईआर दर्ज की। पुलिस के अनुसार, इमारत का उपयोग पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास के रूप में किया जा रहा था और बेसमेंट में कथित तौर पर नवीनीकरण का काम चल रहा था, तभी अचानक इमारत गिर गई।

    इस घटना में सात लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 12 लोगों को बचा लिया गया है और हादसे वाली जगह पर मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी है।

  • बेटियों को नेतृत्व और सुरक्षा का मजबूत कवच, मीना मंचों के 450 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करेगी योगी सरकार

    बेटियों को नेतृत्व और सुरक्षा का मजबूत कवच, मीना मंचों के 450 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करेगी योगी सरकार

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बेटियों को शिक्षा के साथ नेतृत्व, आत्मविश्वास और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए विद्यालय स्तर पर चल रहे कार्यक्रमों को संस्थागत मजबूती दे रही है। इसी नीति के अंतर्गत विशेष परियोजना फॉर इक्विटी के अंतर्गत मीना मंचों को बालिकाओं के सशक्तीकरण और नेतृत्व क्षमता विकास का प्रभावी माध्यम बनाने के लिए राज्य स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

    महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के अनुसार एसआईईटी, प्रयागराज में 09 से 24 सितंबर तक नौ बैचों में कुल 450 प्रतिभागियों की ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी) एवं मास्टर ट्रेनर (एमटी) कार्यशाला होगी। कार्यशाला में मीना मंचों के सशक्तीकरण, नेतृत्व क्षमता प्रदान करने तथा यौन शोषण संबंधी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रतिभागियों की क्षमता संवर्धित की जाएगी।

    नौ बैचों में होगा प्रशिक्षण
    जारी दिशा निर्देश के अनुसार प्रथम एवं द्वितीय बैच की कार्यशाला 09 एवं 10 सितंबर, तृतीय एवं चतुर्थ बैच की 11 एवं 12 सितंबर, पंचम एवं षष्ठम बैच की 21 एवं 22 सितंबर, सप्तम एवं अष्टम बैच की 16 एवं 17 सितंबर तथा नवें बैच की कार्यशाला 23 एवं 24 सितंबर 2026 को होगी। प्रत्येक बैच में 50 प्रतिभागी शामिल होंगे और कुल 450 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    75 जनपदों से होगी सहभागिता
    कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से प्रतिभागी शामिल होंगे। प्रथम बैच में बदायूं, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, एटा, इटावा, फैजाबाद और फर्रुखाबाद से छह-छह प्रतिभागी शामिल होंगे। द्वितीय बैच में फतेहपुर, फिरोजाबाद, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर और हमीरपुर से प्रतिभागी होंगे। तृतीय बैच में हापुड़, हरदोई, हाथरस, जालौन, जौनपुर, झांसी, कन्नौज और कानपुर देहात तथा चतुर्थ बैच में कासगंज, कौशाम्बी, कुशी नगर, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, लखनऊ और महराजगंज से प्रतिभागी शामिल होंगे।

    इसी तरह पंचम बैच में महोबा, मैनपुरी, मथुरा, मऊ, मेरठ, मिर्जापुर, मुरादाबाद और मुजफ्फरनगर तथा षष्ठम बैच में पीलीभीत, प्रतापगढ़, रायबरेली, रामपुर, सहारनपुर, संभल, संत कबीर नगर और शाहजहांपुर से प्रतिभागी होंगे। सप्तम बैच में शामली, सिद्धार्थनगर, सीतापुर, सोनभद्र, श्रावस्ती, सुल्तानपुर, उन्नाव और वाराणसी तथा अष्टम बैच में आगरा, अलीगढ़, औरैया, प्रयागराज, अम्बेडकर नगर, अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़ और बागपत से सहभागिता होगी जबकि नवां बैच 23 एवं 24 सितंबर को आयोजित होगा, जिसमें बहराइच, बलरामपुर, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, भदोही और बिजनौर से प्रतिभागी शामिल होंगे।

    मीना मंचों को मिलेगा सशक्त नेतृत्व
    कार्यशाला का उद्देश्य मीना मंचों को बालिकाओं के सशक्तीकरण, नेतृत्व क्षमता और सुरक्षा संबंधी जागरूकता से जोड़ते हुए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है। टीओटी एवं एमटी के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभागी आगे संबंधित स्तरों पर इस क्षमता को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे विद्यालयों में बालिकाओं की सहभागिता को बढ़ाने और उन्हें नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

    कोट:
    योगी सरकार बालिकाओं को शिक्षा के साथ नेतृत्व, आत्मविश्वास और सुरक्षित वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है। मीना मंच बालिकाओं के सशक्तीकरण और नेतृत्व विकास का प्रभावी माध्यम है। 450 प्रतिभागियों का प्रशिक्षण इस व्यवस्था को और मजबूत करेगा।
    *संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश*

  • बिहार में सत्ता संतुलन का नया फॉर्मूला! विधान परिषद सभापति पद पर JDU की दावेदारी मजबूत

    बिहार में सत्ता संतुलन का नया फॉर्मूला! विधान परिषद सभापति पद पर JDU की दावेदारी मजबूत

     पटना
     बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद अब सत्ता के गलियारों में एक और बड़े राजनीतिक बदलाव की चर्चा तेज हो गई है।

    बिहार विधान परिषद के सभापति का पद एक बार फिर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के खाते में जा सकता है। चर्चा है कि इसको लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सहमति बन चुकी है।

    यदि यह बदलाव होता है तो इसे भाजपा और जदयू के बीच सत्ता-संतुलन साधने की दिशा में अहम कदम माना जाएगा।फिलहाल विधान परिषद के सभापति की जिम्मेदारी भाजपा के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह के पास है।

    नई सरकार बनने के बाद से ही राजनीतिक हलकों में चर्चा थी कि सरकार में महत्वपूर्ण पदों के बंटवारे के बाद अब विधान परिषद की शीर्ष कुर्सी जदयू को दी जा सकती है।

    भाजपा के पास कई अहम पद, जदयू की दावेदारी क्यों मजबूत?
    सरकार में मुख्यमंत्री पद समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भाजपा के पास हैं। विधानसभा अध्यक्ष का पद भी भाजपा के पास है। ऐसे में विधान परिषद के सभापति का पद जदयू को दिया जाना एनडीए के भीतर राजनीतिक संतुलन बनाने का संदेश माना जा रहा है।

    यानी सदन के दोनों शीर्ष संवैधानिक पदों में से एक पर जदयू की मौजूदगी गठबंधन के भीतर जिम्मेदारियों के संतुलित बंटवारे का संकेत दे सकती है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विधान परिषद में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन जदयू भी मजबूत स्थिति में है।

    आंकड़ों को देखें तो परिषद में भाजपा के 25 और जदयू के 20 सदस्य हैं। इसके अलावा राजद के 15, कांग्रेस के दो, निर्दलीय सात तथा सीपीआई, सीपीएम, हम, रालोमो और लोजपा (रामविलास) के एक-एक सदस्य हैं।

    विधानसभा में भी भाजपा और जदयू के बीच सीटों का अंतर बहुत बड़ा नहीं है। भाजपा के 88 जबकि जदयू के 85 विधायक हैं। ऐसे में दोनों दलों की राजनीतिक ताकत को देखते हुए संवैधानिक पदों का बंटवारा एनडीए के भीतर सत्ता-संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाता है।

    जदयू के लिए नई नहीं है सभापति की कुर्सी
    विधान परिषद के सभापति पद पर जदयू की दावेदारी पहले भी रही है। भाजपा के अवधेश नारायण सिंह से पहले जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर करीब दो वर्षों तक इस पद पर रहे थे।

    वहीं, महागठबंधन सरकार के दौरान उपसभापति हारुण रशीद ने कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी संभाली थी। इससे साफ है कि विधान परिषद की शीर्ष कुर्सी को लेकर जदयू की भूमिका पहले भी महत्वपूर्ण रही है।

    किसे मिलेगी जिम्मेदारी, इस पर नजर
    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सभापति का पद जदयू के खाते में जाता है तो पार्टी किस वरिष्ठ विधान पार्षद को यह जिम्मेदारी देगी।पार्टी के भीतर अनुभवी नामों पर मंथन की चर्चा है। हालांकि, संभावित नाम को लेकर अभी आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं हुई है।

    राजनीतिक तौर पर यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि नई सरकार के दौर में भाजपा और जदयू के बीच सत्ता-साझेदारी का नया प्रारूप सामने आ रहा है।

    ऐसे में विधान परिषद सभापति का पद किसके पास जाता है, इसे आने वाले दिनों में एनडीए के भीतर शक्ति-संतुलन के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जाएगा।

     

  • राजस्थान में बारिश पर लगेगा ब्रेक, जानें 7 से 17 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम का हाल

    राजस्थान में बारिश पर लगेगा ब्रेक, जानें 7 से 17 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम का हाल

    जयपुर
    राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से सक्रिय मानसून अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार 7 सितंबर से प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में कमी आने लगेगी। हालांकि पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद 8 से 10 सितंबर तक ज्यादातर इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने की संभावना है। राहत के इस दौर के बाद 12-13 सितंबर से फिर बारिश का नया दौर शुरू होने के संकेत हैं।

    7 सितंबर को भरतपुर, जयपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर संभाग में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। बीकानेर संभाग में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है।

    7 सितंबर को इन इलाकों में बारिश के आसार
    मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार 7 सितंबर को अजमेर संभाग के कुछ हिस्सों के अलावा टोंक, सवाई माधोपुर, कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, जयपुर, दौसा, अलवर और भरतपुर के कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है।

    भरतपुर, जयपुर और कोटा संभाग में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। उदयपुर संभाग में भी कुछ जगह बौछारें पड़ सकती हैं। इसके अलावा श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, सीकर, बीकानेर और नागौर में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना है।
    प्रदेश के बाकी हिस्सों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान है।

    उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश में बना सिस्टम कमजोर
    राजस्थान में पिछले दिनों हुई बारिश के पीछे उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्र में बना अच्छी तरह चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र (Well Marked Low Pressure Area) प्रमुख मौसम सिस्टम था। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश के साथ पूर्वी राजस्थान में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ी थीं। IMD ने 5 सितंबर को पूर्वी राजस्थान में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना भी जताई थी।
    अब यह सिस्टम कमजोर पड़ रहा है। इसके कमजोर होने के साथ राजस्थान में मानसून की सक्रियता भी कम होने की संभावना है। इसलिए 7 सितंबर के बाद प्रदेश में बारिश का दायरा और तीव्रता दोनों घट सकती हैं।

    8 से 10 सितंबर तक बारिश से राहत
    मौसम विभाग के अनुसार 8 से 10 सितंबर के बीच राजस्थान में मानसून कमजोर रहने की संभावना है। इस दौरान व्यापक बारिश की संभावना कम रहेगी। हालांकि स्थानीय स्तर पर बादल बनने और कहीं-कहीं हल्की बौछारें पड़ सकती हैं।
    यानी अगले तीन दिन प्रदेश में बारिश से कुछ राहत मिल सकती है। खासकर पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है, जबकि पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में छिटपुट बारिश जारी रह सकती है।

    12-13 सितंबर से फिर सक्रिय हो सकता है मानसून
    बारिश में यह कमी लंबे समय तक रहने वाली नहीं है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 12 और 13 सितंबर से पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में बारिश का नया दौर शुरू होने के संकेत हैं।
    12 से 15 सितंबर के बीच पूरबाई हवाओं के कारण वातावरण में नमी बढ़ सकती है। इससे पूर्वी, दक्षिण-पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में कई स्थानों पर खंड-खंड बारिश होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां प्रदेश के अन्य हिस्सों की तुलना में ज्यादा रह सकती हैं।

    हालांकि इस दौरान किसी एक सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र को लेकर अभी स्पष्ट स्थिति नहीं है। इसलिए इस दौर को फिलहाल नमी बढ़ने और पूरबाई हवाओं के असर से संभावित बारिश के चरण के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा।

    16-17 सितंबर से फिर कम हो सकती है बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार 16 और 17 सितंबर के आसपास प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में एक बार फिर कमी आ सकती है। हालांकि 10 से 15 दिन के विस्तारित पूर्वानुमान में बदलाव संभव है। आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में बनने वाले किसी नए मौसम सिस्टम, मानसून ट्रफ की स्थिति और हवाओं के रुख का राजस्थान की बारिश पर असर पड़ सकता है। इसलिए अगले चरण की बारिश को लेकर स्थिति साफ होने के साथ पूर्वानुमान में बदलाव भी संभव है।

     

  • सत्य निकेतन हादसे में किसकी गलती? HC ने MCD और बिल्डिंग मालिक दोनों पर उठाए सवाल

    सत्य निकेतन हादसे में किसकी गलती? HC ने MCD और बिल्डिंग मालिक दोनों पर उठाए सवाल

     नई दिल्ली
    दिल्ली हाई कोर्ट ने सत्य निकेतन में PG हॉस्टल के तौर पर चल रही दो इमारतों के गिरने के मामले में दाखिल PIL पर सुनवाई की. कोर्ट ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, MCD, दिल्ली पुलिस, दिल्ली यूनिवर्सिटी और NHRC को नोटिस जारी किया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह दिल्ली सरकार, केंद्र और MCD की ओर से पेश होंगे. कोर्ट ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. मामले में अगली सुनवाई 25 तारीख को होगी। 

    यह PIL सत्य निकेतन इलाके में कल हुई उस घटना के बाद दाखिल की गई, जिसमें लड़कों के लिए PG हॉस्टल के तौर पर चल रही दो इमारतें गिर गई थीं. इन इमारतों में करीब 50 छात्र रह रहे थे. हादसे में अब तक कम से कम 7 लोगों की मौत हो चुकी है. इमारतों में रहने वाले कई छात्रों को अस्पताल ले जाया गया है, जबकि कई अन्य के मलबे में दबे होने की बात कही गई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हर कुछ महीनों में ऐसी घटनाएं होती हैं, जिनमें निर्दोष छात्रों की जान चली जाती है. उन्होंने कहा कि MCD को इस दिशा में कुछ करना चाहिए। 

    हाई कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को अधिक गहरे और सार्थक तरीके से काम करने की जरूरत है. कोर्ट ने कहा कि जो इमारतें गिरीं, उनमें आसपास के DU से जुड़े कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र रहते थे. कोर्ट ने कहा कि यह आम जानकारी है कि DU बाहर से आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं नहीं देता, जिसके कारण छात्रों को PG का इस्तेमाल करना पड़ता है। 

    HC ने DU से बाहर से आने वाले कितने छात्र उसके कॉलेजों में पढ़ते हैं और यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की ओर से कितने हॉस्टल चलाए जा रहे हैं, इसका डेटा मांगा है. कोर्ट ने MCD से पूछा कि क्या PG चलाने के लिए कोई नियम मौजूद हैं. MCD को इस बारे में विस्तृत जवाब देने को कहा गया है। 

    इमारतों की अनुमति की जांच और PG हॉस्टल का ऑडिट
    हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि MCD के उच्चतम कार्यकारी स्तर पर यह जांच कराई जाए कि हादसे में गिरी इमारतें वैध अनुमति के साथ बनाई गई थीं या नहीं. अगर इमारत बिना अनुमति के बनाई गई थी तो इस चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने को कहा गया है. कोर्ट ने गलत काम करने वाले अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण भी मांगा है. इसके साथ ही MCD को PG हॉस्टलों का ऑडिट करने और यह जांचने का निर्देश दिया गया है कि उनका निर्माण संबंधित अनुमति और बिल्डिंग बायलॉज के तहत हुआ है या नहीं. सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि छात्र फ्लैट भी किराए पर लेते हैं. इस पर HC ने पूछा कि सरकार को कैसे पता चलता है कि कोई फ्लैट PG के तौर पर किराए पर दिया जा रहा है. कोर्ट ने PG हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की संख्या का डेटा देने को भी कहा.

    चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी सिर्फ PG हॉस्टल के मालिक की नहीं है. जिम्मेदारी MCD प्रशासन की भी है, जो यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि हर निर्माण नियमों के अनुसार किया जाए. HC ने कहा कि अगर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर सजग होते तो शायद ऐसी त्रासदी को टाला जा सकता था. कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार, MCD और NHRC से रिपोर्ट और ऑडिट की जानकारी मांगी है. कोर्ट ने MCD, केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल द्वारा दिए गए इस आश्वासन को दर्ज किया कि सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. कोर्ट ने उम्मीद जताई कि बचाव प्रयासों को दोगुना किया जाएगा, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। 

  • HC से राहत नहीं, कोर्ट से जेल! स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, 21 सितंबर को अगली सुनवाई

    HC से राहत नहीं, कोर्ट से जेल! स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, 21 सितंबर को अगली सुनवाई

    नई दिल्ली

    एससी-एसटी और पॉक्सो ऐक्ट में गिरफ्तार किए गए यूट्यूबर स्वतंत्र भारद्वाज को डबल झटका लगा है। एक तरफ उसे निचली अदालत ने उसे 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है तो दूसरी तरफ हाई कोर्ट ने याचिका दायर करके राहत की उसकी उम्मीदों को तोड़ दिया। स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध घोषित कराने के लिए उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। जस्टिस नवीन चावला और रविंद्र डुडेजा की बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया। इससे पहले सोमवार सुबह चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की बेंच ने तत्काल इस पर सुनवाई को सहमति दी थी।

    दूसरी तरफ, अडिशनल सेशंस जज सौरभ प्रताप सिंह की अदालत ने मारपीट मामले में हिंदुत्ववादी 'इन्फ्लुएंसर' स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललर ने अब भारद्वाज की न्यायिक हिरासत 21 सितंबर तक बढ़ा दी है। भारद्वाज को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जज के सामने पेश किया गया था।

    दलित यूट्यूबर के पिता के साथ मारपीट के आरोप में भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया गया था। रविवार को भारद्वाज को एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने ऑनलाइन पेश किया गया था और एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

    कैसे गिरफ्तार हुआ स्वतंत्र भारद्वाज
    भारद्वाज की ओर से अधिवक्ता उमेश शर्मा ने कहा, 'वह पिछले तीन दिन से हिरासत में है, मैं अनुरोध करता हूं कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका आज ही सूचीबद्ध की जाए।' दिल्ली पुलिस ने 5 जून को भारद्वाज को तब गिरफ्तार किया गया जब उसके एक वीडियो की वजह से करीब दो महीने पहले हुई मारपीट की घटना ने अचानक तूल पकड़ लिया। सीजेपी आंदोलन के दौरान भारद्वाज और एक दलित शख्स के बीच मारपीट हुई थी। भारद्वाज ने हाल ही में एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि उसने मारपीट करके सिर फोड़ दिया, लेकिन राजनीतिक पहुंच की वजह से बच गया। उसने कहा था, ‘मैंने सिर फोड़ दिया… क्या आप जानते हैं कि यह अपराध किस धारा के तहत आता है? धारा 307। उसे 7 टांके लगे थे।’ इसके बाद सीजेपी और विपक्षी दलों के नेताओं ने संसद मार्ग थाने पर धरना देकर पुलिस पर दबाव बनाया। पुलिस ने उसके खिलाफ एससी-एसटी ऐक्ट और पॉक्सो ऐक्ट में केस दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया था।

    पॉक्सो ऐक्ट में क्यों केस
    शुक्रवार को पुलिस ने नाबालिग छात्रा की शिकायत पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत एक नई शिकायत दर्ज की। शिकायत में ऑनलाइन धमकियों और उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(3), धारा 78 (पीछा करना) और धारा 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य) के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 भी प्राथमिकी में जोड़ी है। पीड़िता ने इससे पहले आरोप लगाया था कि अपने पिता पर हुए कथित हमले के खिलाफ आवाज उठाने और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद उसे दुष्कर्म की धमकियां दी गईं, अपशब्द कहे गए और छेड़छाड़ कर बनाई गईं तस्वीरें भेजी गईं।

  • सत्य निकेतन हादसे से जागी दिल्ली सरकार, पुराने भवनों में हॉस्टल-नर्सिंग होम को लेकर CM का बड़ा फैसला

    सत्य निकेतन हादसे से जागी दिल्ली सरकार, पुराने भवनों में हॉस्टल-नर्सिंग होम को लेकर CM का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली

    दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई है. इस हादसे में कई लोग घायल भी हो गए. यह हादसा दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास हुई. जो ब्लिडिंग गिरी, उसमें पीजी चलता था. जिसमें कई कॉलेज छात्र रहा करते थे. इस हादसे के बाद दिल्ली की पुरानी इमारतों में रह रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं. इधर आज सुबह घटनास्थल पर पहुंचीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'हम अधिकारियों के साथ मिलकर एक ऐसी पॉलिसी बना रहे हैं जिसके तहत 20, 30 या 40 साल पुरानी इमारतों को स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी और अपनी सुरक्षा को प्रमाणित करना होगा। 

    सीएम ने आगे कहा कि इसके बिना उन्हें उस जगह पर कोई भी सार्वजनिक सेवा या सुविधा—जैसे PG अकोमोडेशन, नर्सिंग होम, स्कूल या कोई अन्य गतिविधि—चलाने का अधिकार नहीं होगा. इस संबंध में कड़े नियम लागू किए जाएंगे। 

    जिम्मेदार अधिकारी किए जाएंगे सस्पेंड
    दिल्ली की मुख्यमंत्री ने सत्य निकेतन के हादसे पर यह भी कहा कि जिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा; उन्हें तुरंत सस्पेंड कर दिया जाएगा. सभी अधिकारियों और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को कड़े निर्देश दिए गए हैं; इसमें शामिल किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। 

    जिम्मेदार अधिकारियों का सस्पेंशन आज हीः सीएम
    सीएम ने यह भी कहा कि हादसे के जिम्मेदार अधिकारियों के सस्पेंशन के आदेश आज ही जारी कर दिए जाएंगे. हम इन छात्रों के साथ पूरी तरह खड़े हैं। हमने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी छात्र को कोई परेशानी न हो. सरकार की ओर से हम सभी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। 

    मंत्री बोले- स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट अनिवार्य की नीति बनेगी
    दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर कहा, "बचाए गए 12 लोगों में से 6 की मौत हो गई है. बाकी लोगों का इलाज चल रहा है और वे सुरक्षित हैं. आज मुख्यमंत्री ने मेयर और MCD कमिश्नर के साथ बैठक की और निर्देश दिया कि यहां चल रहे PG, हॉस्टल और सार्वजनिक सुविधाओं वाले संस्थानों के लिए स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य करने वाली नीति तुरंत बनाई जाए. स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट के बिना उन्हें काम करने की इजाज़त नहीं दी जाएगी। 

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    10 दिन की फ्री ट्रेनिंग, ₹500 रोज मानदेय और ₹10 लाख तक लोन, जानें विश्वकर्मा योजना 2.0 के फायदे

     लखनऊ
    योगी सरकार ने युवाओं और कारीगरों के लिए विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 का दायरा व्यापक कर दिया है। अब योजना में पहले से शामिल 11 ट्रेडों के साथ 14 नए ट्रेड जोड़े गए हैं। इस विस्तार के बाद योजना में कुल 25 ट्रेड शामिल हो गए हैं। नई व्यवस्था में मूर्तिकार, मालाकार, दूधवाला, भरभूजा और मछुआरा जैसे पांच नए पारंपरिक ट्रेड शामिल किए गए हैं। वहीं आधुनिक जरूरतों को देखते हुए मोबाइल रिपेयरिंग, ऑटोमोबाइल मरम्मत, इलेक्ट्रॉनिक सामान मरम्मत, विद्युत सामान, प्लम्बर, कंप्यूटर मरम्मत, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी तथा सौंदर्य एवं वेलनेस को भी योजना से जोड़ा गया है।

    नए ट्रेडों के जुड़ने से अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलग-अलग तरह के हुनर रखने वाले अधिक कारीगर योजना के दायरे में आ सकेंगे। सरकार का यह विस्तार युवाओं को बदलती तकनीक और बाजार की मांग के अनुरूप कौशल से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    हुनरमंदों को बाजार से जोड़ने की कोशिश
    उपायुक्त उद्योग अमरेश पांडे, सहायक आयुक्त दिनेश आर्य का कहना है कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 का विस्तार योगी सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें पारंपरिक कारीगरों के हुनर को संरक्षित करने के साथ युवाओं को रोजगार के बजाय स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

    कारोबार के लिए 10 लाख तक लोन
    प्रशिक्षण के साथ कारोबार के लिए मदद का प्रावधान है। 10 लाख रुपये तक ऋण मिल सकेगा। सामान्य श्रेणी के पुरुषों को लागत का 10 प्रतिशत, जबकि महिलाओं, ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांग और भूतपूर्व सैनिकों को 5 प्रतिशत मार्जिन मनी जमा करनी होगी। शेष राशि पर 15 प्रतिशत मार्जिन मनी सब्सिडी का प्रावधान है। सीजीटीएमएसई योजना के तहत ऋण 100 प्रतिशत बिना गारंटी सुरक्षित होगा। नियमित भुगतान करने पर पांच वर्षों तक ब्याज सब्सिडी भी दी जाएगी। छह माह की मोरेटोरियम अवधि के बाद ऋण का भुगतान 54 किस्तों में किया जा सकेगा।

    10 दिन की ट्रेनिंग और 500 रुपये मानदेय
    योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को 10 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण अवधि में प्रत्येक प्रशिक्षार्थी को 500 रुपये प्रतिदिन मानदेय डीबीटी के माध्यम से बैंक खाते में मिलेगा। प्रशिक्षण के दौरान भोजन और नाश्ते की व्यवस्था भी निःशुल्क रहेगी। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद लाभार्थियों को 15 हजार रुपये मूल्य तक की उन्नत टूलकिट फ्री दी जाएगी, साथ ही सरकारी मान्यता प्राप्त कौशल प्रमाण-पत्र भी मिलेगा।

  • पटना एयरपोर्ट जाने वालों के लिए बड़ी खबर, अब ऐप से मिलेगी पार्किंग की सुविधा और जाम से राहत

    पटना एयरपोर्ट जाने वालों के लिए बड़ी खबर, अब ऐप से मिलेगी पार्किंग की सुविधा और जाम से राहत

    पटना
     बिहार की राजधानी पटना में स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पटना में वाहनों की पार्किंग ऐप के माध्यम से हो सकेगी। निकास और प्रवेश द्वार पर सुगम यातायात व्यवस्था और पार्किंग मैनेजमेंट सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए एयरपोर्ट परिसर में काम शुरू हो गया है। हाल ही में नई एजेंसी को परिसर में वाहनों के प्रबंधन का जिम्मा मिला है। एजेंसी ने बताया कि एक पखवारे में पीएमएसस ऐप से पटना एयरपोर्ट पर वाहनों की पार्किंग का स्लॉट बुक करने की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। एयरपोर्ट प्रशासन ने तय अवधि में काम पूरा करने का निर्देश एजेंसी को दिया है।

    पार्किंग संचालन कर रही एजेंसी पार्कमॉन्ट प्राइवेट लिमिटेड के विपिन कुमार ने बताया कि पटना एयरपोर्ट पर पार्किंग की नई व्यवस्था पर काम शुरू हो गया है। परिसर में पार्किंग प्रबंधन के लिए कंट्रोल एंड कमांड रूम बनाया जा रहा है। इससे सुगम आवाजाही की व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा। ऐप से वैसे वाहन चालकों को ऑनलाइन पेंमेंट की सुविधा दी जाएगी जिनकी गाड़ियों में फास्टैग नहीं लगा है। मैनुअल व्यवस्था में निकास द्वार के पास वाहनों की कतार लग जाती है। नई व्यवस्था के तहत ऐसे वाहनों के नंबर को तकनीकी माध्यम से स्कैन कर उन्हें निकास द्वार पर पेमेंट से छूट मिल जाएगी। ऐप से निकास द्वार के पास लगे कैमरे जुड़े होंगे। नंबर स्कैन होते ही स्वचालित माध्यम से बूम बैरियर स्वत: खुल जाएगा। इस सुविधा से निकास द्वार के पास जाम की स्थिति नहीं बनेगी।

    मुंबई और अन्य एयरपोर्ट पर कंपनी दे रही सुविधा
    पार्किंग व्यवस्था संभाल रही एजेंसी के प्रबंधक ने बताया कि यह सुविधा कंपनी की ओर से मुंबई एयरपोर्ट पर दी जा रही है। पटना एयरपोर्ट पर भी यह सुविधा देने की तैयारी है। ऐप की एक और खासियत यह है कि इसमें उपयोगकर्ताओं को खुली पार्किंग और बहुमंजिली पार्किंग का रियल टाइम स्टेटस दिखेगा। ताकि सुविधानुसार वे जगह का चयन कर सकें। इससे वाहन चालकों और यात्रियों के समय की बचत होगी। साथ ही पार्किंग प्रबंधन बेहतर हो सकेगा।

  • सरकार के जॉब सिक्योरिटी प्रस्ताव के बावजूद नहीं माने सफाईकर्मी, 30 पर FIR और सेवा समाप्ति की तैयारी

    सरकार के जॉब सिक्योरिटी प्रस्ताव के बावजूद नहीं माने सफाईकर्मी, 30 पर FIR और सेवा समाप्ति की तैयारी

    चंडीगढ़/हिसार/पानीपत
     प्रदेश में सफाई एवं दमकल कर्मचारियों की हड़ताल सरकार के जाब सिक्योरिटी प्रस्ताव के बाद भी नहीं टूटी। पांच सितंबर की ड्यूटी पर लौटने की मियाद खत्म होने के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल नौ सितंबर तक बढ़ा दी है। इसी बीच सरकार कड़ा रुख अपनाते हुए 30 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने की तैयारी में है।

    सरकार ने पालिका रोल पर कार्यरत 13,093 सफाई कर्मियों को हरियाणा कान्ट्रैक्चुअल एम्प्लाइज (सर्विस की सुनिश्चितता) एक्ट, 2024 के दायरे में लाने का सैद्धांतिक निर्णय लेते हुए 60 वर्ष तक सेवा सुरक्षा और दो हजार रुपये मासिक जोखिम भत्ता देने की पेशकश की है।

    30 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
    10 वर्ष से अधिक सेवा वालों की मासिक देय राशि 25,560 रुपये करने का भी प्रस्ताव है। इसके बावजूद कर्मचारी नियमितीकरण, ठेका प्रथा खत्म करने और 13 मई के समझौते को लागू करने की मांग पर अड़े हैं। हड़ताल के दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों के कचरा उठान में बाधा डालने के आरोप में प्रदेश के विभिन्न जिलों अब तक 30 कर्मचारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई हैं।

    इनमें 11 नियमित और 10 अनुबंध कर्मचारी बताए गए हैं। स्थानीय निकाय विभाग के स्तर पर सोमवार को सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी किए जाने की संभावना है। कई निकायों में ड्यूटी पर लौटने के नोटिस भी जारी हुए हैं। चरखी दादरी में 152, फतेहाबाद में करीब 350 और पानीपत में 36 सफाई सुपरवाइजरों को नोटिस दिए गए हैं।

    सरकार का प्रस्ताव- सेवा सुरक्षा के साथ बढ़ेगा वेतन
    सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक, 2024 के सेवा सुनिश्चितता कानून के दायरे में आने पर पालिका रोल कर्मचारियों को 60 वर्ष तक सेवा सुरक्षा मिलेगी। इसके अलावा वार्षिक महंगाई भत्ता, डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी, मातृत्व अवकाश तथा एक्स-ग्रेशिया वित्तीय सहायता व नियुक्ति जैसे लाभ मिलेंगे।

    10 वर्ष से अधिक सेवा वालों की मासिक देय राशि 25,560 रुपये होगी। इसमें 21,970 रुपये वेतन, 2,000 रुपये जोखिम भत्ता और 1,590 रुपये अन्य भत्ते शामिल हैं।

    नौ सितंबर तक हड़ताल, फिर जन न्याय पंचायत
    कर्मचारी नेताओं ने प्रस्ताव ठुकराकर हड़ताल नौ सितंबर तक बढ़ा दी है। 10, 11 और 12 सितंबर को जिलों में जन न्याय पंचायतें होंगी।

    इनमें कर्मचारी, मजदूर, किसान, सामाजिक-धार्मिक और व्यापारिक संगठनों को शामिल करने की तैयारी है। 13 सितंबर को कुरुक्षेत्र में राज्य स्तरीय जन न्याय पंचायत होगी। इसमें आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति तय की जाएगी।

    सफाई कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने गंभीरता से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। पालिका रोल के कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा और उनके आर्थिक हितों को लेकर भी सरकार ने सकारात्मक पहल की है। हमारी कोशिश है कि कर्मचारियों की जायज चिंताओं का सम्मानजनक और व्यावहारिक समाधान निकले तथा शहरों की सफाई व्यवस्था भी प्रभावित न हो।
        – नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री, हरियाणा