Category: राज्य

  • मान सरकार की आपत्ति के बीच जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने संभाली चीफ जस्टिस की कमान, गवर्नर हाउस में शपथ

    मान सरकार की आपत्ति के बीच जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने संभाली चीफ जस्टिस की कमान, गवर्नर हाउस में शपथ

    चंडीगढ़ 

    पंजाब सरकार के विरोध के बीच जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने आज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के ताैर पर शपथ ली। शपथ समारोह पंजाब गवर्नर हाउस में हुआ। पंजाब के गवर्नर गुलाबचंद कटारिया ने मिश्रा को शपथ दिलाई। कार्यक्रम में सीएस केपी सिन्हा, हरियाणा के राज्यपाल असीम घोष और हरियाणा के सीएम नायब सैनी माैजूद रहे। 

    मिश्रा को नियुक्त करने के खिलाफ पंजाब सरकार ने रविवार को कैबिनेट में प्रस्ताव पास किया था। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई बैठक में मांग की गई कि राज्य सरकार की सहमति लिए जाने तक जस्टिस मिश्रा का शपथग्रहण न करवाया जाए।मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार कैबिनेट ने आरोप लगाया कि नियुक्ति में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। राज्य सरकार से राय मांगे जाने के बावजूद उसका जवाब आने से पहले ही नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी गई। सरकार ने इसे पंजाब की अनदेखी बताया। 

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार ने केंद्र पर संवैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी का आरोप लगाया है। रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस संबंध में केंद्र सरकार के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया।

    पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति का विरोध किया था। CM भगवंत मान का तर्क था कि जस्टिस मिश्रा की इस नियुक्ति को लेकर उनसे सहमति नहीं ली गई। उन्होंने शपथग्रहण समारोह रोकने की भी मांग की थी।

    इसी वजह से CM भगवंत मान या पंजाब सरकार का कोई मंत्री शपथग्रहण समारोह में नहीं पहुंचा। हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी और राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष समारोह में मौजूद रहे। एक दिन पहले, रविवार (6 सितंबर) को पंजाब CM भगवंत मान ने इमरजेंसी कैबिनेट मीटिंग बुलाकर जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति के खिलाफ प्रस्ताव पास किया था।

    इस प्रस्ताव में कहा गया था कि पंजाब सरकार की सहमति मिलने तक चीफ जस्टिस को शपथ न दिलाई जाए। पंजाब सरकार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से भी इस मामले में अपील की थी।

    सीएम मान के मुताबिक, केंद्र सरकार ने राज्य सरकार की सहमति लिए बिना पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति कर दी है।

    संवैधानिक नियमों की उल्लंघना
    मान सरकार का कहना है कि यह नियुक्ति तय प्रक्रिया ( मेमोरेंडम आफ प्रोसीजर) और संवैधानिक नियमों की सीधी उल्लंघना है। तय प्रक्रिया के तहत हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति में संबंधित राज्य सरकार से राय लेना अनिवार्य होता है। लेकिन पंजाब व हरियाणा के ताजा नियुक्त किए गए चीफ जस्टिस के मामले में ऐसा नहीं किया गया है।

    सीएम मान ने केंद्र और पंजाब के बीच टकराव का कारण रहे पुराने लंबित मामलों 9000 करोड़ के पेंडिग ग्रामीण विकास फंड और बाढ़ राहत की राशि का भी जिक्र किया। साथ ही मान सरकार ने केंद्र पर बीबीएमबी के नियमों में एकतरफा बदलाव की ही तरह अब न्यायपालिका की नियुक्तियों में सीधा दखल देने का आरोप लगाया है।

    केंद्र की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं
    सीएम मान ने कहा कि केंद्र की यह दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमारी मांग है कि इस नियुक्ति को तुरंत रोका जाए और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए सूबे की राय को बनता सम्मान दिया जाए।

    ध्यान रहे कि आज दोपहर के वक्त वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा था कि राज्य सरकार पंजाब के राज्यपाल को भी पत्र लिखकर आग्रह करेगी कि नव नियुक्त चीफ जस्टिस को पद की शपथ न दिलाई जाए क्योंकि यह नियुक्ति पंजाब को अनदेखा करके की गई है।

    राज्य सरकार की राय बाध्यकारी नहीं
    उधर, भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति अश्वनी शर्मा की नियुक्ति पर पंजाब सरकार के विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण और अनावश्यक बताया। उन्होंने कहा कि नियुक्ति राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 217(1) के तहत की है और न्यायाधीशों की नियुक्ति की तय प्रक्रिया का पूरी तरह पालन हुआ है।

    उनके अनुसार, छह अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने नियुक्ति की सिफारिश की थी और 10 अगस्त को पंजाब व हरियाणा सरकारों से राय मांगी गई। हरियाणा ने समय पर राय दे दी, जबकि पंजाब ने अब तक अपनी राय नहीं भेजी। उन्होंने कहा कि राज्य की राय जरूरी है, लेकिन बाध्यकारी नहीं और सरकार के पास वीटो अधिकार नहीं है।

    न्यायपालिका में हस्तक्षेप पर बार नाराज
    परमप्रीत सिंह बाजवा (हैरी) ऑनरेरी सेक्रेटरी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति का पंजाब सरकार द्वारा विरोध किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। बार एसोसिएशन ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है और कार्यपालिका को न्यायिक नियुक्तियों पर राजनीतिक दबाव नहीं बनाना चाहिए।

    एसोसिएशन के अनुसार, संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नियुक्ति होने के बाद राजनीतिक मतभेदों के आधार पर इसे विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है। आपात बैठक में कार्यकारिणी ने पंजाब सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया का सम्मान करने और हाईकोर्ट की गरिमा बनाए रखने की अपील की। एसोसिएशन ने न्यायपालिका के साथ मजबूती से खड़े रहने का संकल्प लिया।

    पंजाब सरकार ने क्या एतराज जताए, 4 पॉइंट में पढ़िए…

        चीफ जस्टिस की नियुक्ति में स्टैंडर्ड प्रोसीजर फॉलो नहीं: पंजाब के वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति का मामला संवेदनशील है। इस नियुक्ति में स्टैंडर्ड प्रोसीजर (मानक प्रक्रिया) को फॉलो नहीं किया गया। इससे बड़ा सवाल भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार के खिलाफ खड़ा होता है। पंजाब को इग्नोर किया गया।

        जस्टिस संधावालिया की नियुक्ति को सहमति नहीं दी थी: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के सीनियर मोस्ट जस्टिस जीएस संधावालिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश 11 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट के CJI और पूरे कॉलेजियम ने की थी। इसके बावजूद BJP की केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार ने उनकी नियुक्ति को 2 महीने से ज्यादा समय तक मंजूरी नहीं दी। 11 जुलाई को सिफारिश के बाद 17 सितंबर तक उनकी नियुक्ति पर सहमति नहीं दी गई।

        नियुक्ति में राज्य सरकार का व्यू और सहमति जरूरी: चीमा ने कहा- नियुक्ति की प्रक्रिया के मेमोरेंडम के पैरा नंबर 6 में स्पष्ट लिखा है कि जब किसी की सिफारिश होनी है, तो संबंधित राज्य सरकार का व्यू और सहमति लेना बहुत जरूरी है। मध्य प्रदेश ने दो महीने से अधिक समय तक इसे रोक कर रखा। इसके बाद 17 सितंबर 2024 को उनकी नियुक्ति हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में की। उनकी नियुक्ति क्यों रोकी, इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।

        प्रक्रिया इग्नोर कर जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति हुई: दूसरी तरफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति का मामला है। 12 अगस्त 2026 को पंजाब के गवर्नर ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को भेजे पत्र और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के पत्र में भी मेमोरेंडम के पैरा 6 का जिक्र है। इसमें संबंधित राज्य सरकार की राय और सहमति लेना जरूरी बताया गया है। इसके बावजूद केंद्र की BJP सरकार ने इस प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त कर दिया।

     

  • 8 करोड़ ग्रामीणों को राहत! बिहार में पक्के मकानों पर होल्डिंग टैक्स नहीं लगेगा

    8 करोड़ ग्रामीणों को राहत! बिहार में पक्के मकानों पर होल्डिंग टैक्स नहीं लगेगा

    पटना
    बिहार के लोगों को सम्राट चौधरी सरकार बड़ी राहत देने जा रही है। बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में अब सिर्फ व्यावसायिक कर ही लगेगा। गांवों और कस्बों में कच्चा मकान को छोड़ पक्का और अर्धपक्का मकान से होल्डिंग टैक्स (मकान कर) वसूलने के फैसले को सरकार वापस लेने जा रही है। इससे ग्रामीण इलाकों के लगभग 8 करोड़ से अधिक लोगों को राहत मिलेगी। पंचायती राज विभाग ग्रामीणों से शुल्क वसूली के प्रावधानों में संशोधन कर रहा है। संशोधन के बाद यह नया प्रावधान लागू होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक तरह के टैक्स लेने के प्रस्ताव पर 15 जुलाई को राज्य कैबिनेट की मुहर लगी थी। लेकिन अभी तक गजट प्रकाशित नहीं किया गया है। पंचायती राज विभाग ने इसकी अधिसूचना भी जारी नहीं की है।

    आवासीय मकानों से शुल्क वसूली संबंधी संशोधन से गांवों के किसान, मजदूर और गरीबों को राहत मिलेगी। सरकार के फैसले से लोगों में चौतरफा नाराजगी थी। विपक्ष भी इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रहा था। इसलिए राज्य सरकार त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थानों से जुड़े ग्रामीण इलाकों में नया कर वसूली के प्रावधानों को संशोधन के बाद ही लागू करने की तैयारी कर रही है। पीएम आवास योजना के तहत बने गरीबों के घरों के लिए सालाना होल्डिंग टैक्स सबंधित विभाग (ग्रामीण विकास विभाग) से लेना था, पर इस प्रावधान को भी हटाने की तैयारी है। पंचायत क्षेत्रों में व्यावसायिक मकान निर्माण कार्य के लिए आवश्यकतानुसार पंचायतों को कर वसूलने का हक होगा।

    पंचायतों का राजस्व बढ़ेगा
    व्यावसायिक, औद्योगिक व संस्थागत उपयोग वाले भवन पर 100 रुपये से 5 हजार रुपये तक सालाना कर लगना है। पेशा शुल्क भी लगेगा। व्यावसायी द्वारा स्थापित चावल मिल जिसकी क्षमता 2 टन प्रति घंटा से अधिक है, उस पर कर का प्रावधान है। सिनेमा हॉल, विवाह भवन, होटल, पेट्रोल पंप और रसोई गैस एजेंसी पर सालाना 5 हजार रुपये शुल्क वसूलने का प्रावधान किया गया था। हालांकि संशोधन के बाद इस शुल्क में भी कमी की जा सकती है। मेले में बिक्री होने पर पशु के लिए भी शुल्क लगेगा।

    सरकार ने क्यों लिया था फैसला
    पंचायतों की आय बढ़ा कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों से कर वसूलने का निर्णय लिया गया था। 16 वीं केंद्रीय वित्त आयोग ने देश भर की पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कर लगाने की अनुशंसा की है। वित्त आयोग की अनुशंसा है कि ग्रामीण इलाकों में प्रत्येक घरों से सालाना औसतन 1200 रुपये वसूल कर पंचायत अपनी आय बढ़ाने का प्रयास करे।
    पहले यह कर की दर तय थी

    आवास के प्रकार कर की दर(प्रतिवर्ष)
    पक्का मकान 100 रुपए

    अर्द्ध पक्का मकान 50 रुपये

    कच्चा मकान कर नहीं

    पीएम आवास के मकान 25 रुपये (ग्रमाीण विभाग देगा)

    सफाई शुल्क 30 रुपये (प्रति घर मासिक)

    पेट्रोल पंप 5 हजार रुपये

    रसोई गैस एजेंसी 5 हजार रुपये

    ईंट चिमनी 5 हजार रुपये

    सिनेमा हॉल 5 हजार रुपये

    जलापूर्ति शुल्क 30 रुपये (प्रतिमाह)

  • मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार संजीव अरोड़ा से आज मिलेंगे CM मान, केजरीवाल भी कर चुके हैं मुलाकात

    मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार संजीव अरोड़ा से आज मिलेंगे CM मान, केजरीवाल भी कर चुके हैं मुलाकात

    चंडीगढ़ 
    मुख्यमंत्री भगवंत मान 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा से मिलने सोमवार को गुरुग्राम की भोंडसी जेल जाएंगे। भगवंत मान दूसरी बार मंत्री अरोड़ा से जेल में मिलने जा रहे हैं। 

    संजीव अरोड़ा को ईडी ने 9 मई को गिरफ्तार किया था। उसके बाद से वह जेल में हैं। निचली अदालत उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी है, जबकि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका पर अभी सुनवाई चल रही है। संजीव अरोड़ा के जेल जाने के बाद भी पंजाब सरकार उनके साथ खड़ी है।

    अरोड़ा चार महीने से जेल में हैं, इसके बावजूद पंजाब सरकार ने उन्हें अभी तक मंत्री पद से नहीं हटाया है। आम आदमी पार्टी और खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे हैं।

    चंडीगढ़ स्थित सरकारी कोठी से हुई थी गिरफ्तारी
    प्रवर्तन निदेशालय ने फर्जी बिलिंग और लेनदेन से जुड़े मामले में छापेमारी के बाद संजीव अरोड़ा को 9 मई को चंडीगढ़ स्थित उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार किया था। इस दौरान ईडी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए थे। गिरफ्तारी और शुरुआती पूछताछ में कोर्ट के आदेशानुसार संजीव अरोड़ा को हरियाणा की भोंडसी जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वह वहीं बंद हैं और उनकी कानूनी टीम जमानत के लिए प्रयासरत है।

    भाजपा पर राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप
    आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार ने इस पूरी कार्रवाई को भाजपा की साजिश करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर गैर-भाजपा शासित राज्यों के नेताओं और मंत्रियों को निशाना बना रही है।

    मंत्रियों के विभागों में हुआ फेरबदल
    संजीव अरोड़ा के जेल जाने के बाद उनके अधीन आने वाले सभी प्रशासनिक विभाग पंजाब सरकार ने अन्य कैबिनेट मंत्रियों में बांट दिए, ताकि राज्य के विकास कार्य और विभागीय कामकाज प्रभावित न हों। कानूनी और राजनीतिक विवादों के बावजूद पंजाब सरकार ने संजीव अरोड़ा का इस्तीफा नहीं लिया है। वह अभी भी भगवंत मान कैबिनेट में मंत्री हैं।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान व आप का समर्थन
    मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले भी संजीव अरोड़ा से जेल में जाकर मुलाकात कर चुके हैं। आज की मुलाकात भी इसी सिलसिले की एक कड़ी है। इसके जरिए मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी यह संदेश देना चाहते हैं कि संकट की इस घड़ी में वे अपने नेता के साथ खड़े हैं।

    संजीव अरोड़ा पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला क्या है?
    ED का आरोप है कि 2023-24 में संजीव अरोड़ा की कंपनी ने करीब 157.12 करोड़ रुपए के मोबाइल फोन की बिक्री दिखाई। इनमें 102.50 करोड़ रुपए के मोबाइल फोन UAE की दो कंपनियों को निर्यात किए जाने का दावा किया गया। इन लेन-देन में वास्तविक माल की आपूर्ति के बजाय फर्जी बिल, शेल/डमी कंपनियों और कागजी निर्यात का इस्तेमाल किया गया।

    ED का दावा है कि संजीव अरोड़ा ने फर्जी खरीद के बिल तैयार किए और कागजों में मोबाइल फोन का निर्यात दिखाकर सरकार से GST समेत अन्य फायदे लिए। जांच एजेंसी के अनुसार, करीब 102.50 करोड़ रुपए की रकम अवैध तरीके से कलेक्ट की गई। ED की चार्जशीट में अरोड़ा को इस मामले का ‘किंगपिन’ बताया गया है।

  • पंजाब चुनाव में नशे से लेकर बकाया DA तक पर घमासान, सरकारी कर्मचारियों का मुद्दा रहेगा अहम

    पंजाब चुनाव में नशे से लेकर बकाया DA तक पर घमासान, सरकारी कर्मचारियों का मुद्दा रहेगा अहम

    चंडीगढ़ 

    पंजाब के विधानसभा चुनाव में इस बार नशे, अपराध और भ्रष्टाचार के साथ-साथ सरकारी कर्मचारियों के बकाया डीए का मुद्दा भी खूब उछलेगा। इस मुद्दे पर सियासत खासी तेज है। विरोधी सियासी दल जहां इसे भुनाते हुए खुद को कर्मचारियों की सबसे हितैषी पार्टी बताने की होड़ में हैं। वहीं, मान सरकार इस विवाद को संभालते हुए चुनाव से पहले इसे हर हाल में खत्म कर कर्मचारियों को साधना चाहती है।

    पंजाब में करीब सवा तीन लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जबकि चार लाख पेंशनर हैं। सरकारी कर्मचारियों व पेंशनरों का डीए विवाद वर्ष 2016 से लंबित बकाये से जुड़ा है। छठे वेतन आयोग के तहत करीब 14191 करोड़ रुपये की देनदारी थी। सरकार ने फरवरी 2025 में पांच वित्त वर्षों में भुगतान के लिए लिक्विडेशन प्लान बनाया। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का दावा है कि इसके तहत सरकार करीब 4500 करोड़ रुपये कर्मचारियों का बकाया चुका चुकी है। अब करीब 9691 करोड़ रुपये बाकी हैं।

    दूसरी ओर, 1 जुलाई 2021 के बाद की डीए/डीआर (महंगाई भत्ता व महंगाई राहत) की किस्तों पर भी विवाद है। हाईकोर्ट ने इसी साल तीन अगस्त को लिक्विडेशन प्लान खारिज कर पूरा बकाया 15 दिन में चुकाने, देरी पर छह प्रतिशत ब्याज और गैर-जरूरी खर्च रोकने का आदेश दिया था। सरकार ने इसे वित्तीय रूप से और वैधानिक तौर पर असंभव बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की है।

    मुद्दा रहेगा असरदार
    यह मुद्दा चुनाव में खासा असरदार रहेगा। राजनीतिक मामलों के जानकार हरबंस सिंह बताते हैं कि यह मामला सीधे पंजाब के करीब सवा सात लाख सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके परिवारों से जुड़ा है। यह बड़ा और निर्णायक मतदाता वर्ग है। अभी विरोधी दल कर्मचारियों के आंदोलन में उनके साथ खड़े हैं। यदि मान सरकार ने इसे जल्द नहीं निपटाया तो विरोधी पार्टियां निश्चित तौर पर इसे अपने-अपने घोषणा पत्रों में शामिल करेंगी।

     

  • रनवे के पास मंडराए संदिग्ध ड्रोन, अमृतसर आने वाली 7 फ्लाइट्स दिल्ली-चंडीगढ़ भेजी गईं

    रनवे के पास मंडराए संदिग्ध ड्रोन, अमृतसर आने वाली 7 फ्लाइट्स दिल्ली-चंडीगढ़ भेजी गईं

    अमृतसर 
    अमृतसर के श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे के आसपास रविवार रात संदिग्ध ड्रोन देखे गए। इसके बाद एहतियात के तौर पर अमृतसर आने वाली सात उड़ानों को डायवर्ट किया गया। ड्रोन की गतिविधि सामने आने के बाद सीआईएसएफ, पंजाब पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं।

    रात करीब 10 बजे एयरपोर्ट के आसपास संदिग्ध ड्रोन उड़ते दिखाई दिए। जानकारी के मुताबिक, ये ड्रोन गांव रुढ़ाला की तरफ से एयरपोर्ट की ओर आते नजर आए और कुछ समय तक रनवे व आसपास के संवेदनशील क्षेत्र में मंडराते रहे। सूचना मिलते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने अलर्ट जारी कर दिया।

    पहले जानिए, क्या था पूरा मामला रविवार रात करीब 10 बजे अमृतसर एयरपोर्ट के ऑपरेशनल एरिया में संदिग्ध ड्रोन जैसे उड़ते ऑब्जेक्ट्स दिखाई दिए। कुछ देर तक ऑब्जेक्ट्स रनवे और आसपास के संवेदनशील इलाके में मंडराते रहे। रनवे के आसपास संदिग्ध गतिविधि नजर आते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने तुरंत अलर्ट जारी किया। एहतियात के तौर पर अमृतसर आने वाली सात उड़ानों की लैंडिंग रोक दी गई।

    अमृतसर भारत-पाक इंटरनेशनल बॉर्डर से बेहद करीब स्थित होने के कारण इस घटना को सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना गया। अलर्ट मिलते ही सीआईएसएफ, पंजाब पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं। एयरपोर्ट परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया। वहीं, यात्रियों और विमानों की सुरक्षा को देखते हुए एटीसी ने तत्काल कई उड़ानों के रूट बदल दिए।

    अब जानिए, पुलिस की जांच में क्या निकला अमृतसर के थाना राजासांसी पुलिस की जांच में पता चला है कि एयरपोर्ट के पास दिखाई दिया ड्रोन किसी संदिग्ध गतिविधि का हिस्सा नहीं थे। एयरपोर्ट से कुछ दूरी पर स्थित एक गांव में खेल टूर्नामेंट आयोजित किया जा रहा था। टूर्नामेंट की वीडियोग्राफी करने के लिए एक व्यक्ति द्वारा ड्रोन उड़ाया गया था।

    SHO बोले- पाबंदी के बावजूद कैसे उड़ाए, जांच कर रहे इस बारे में थाना राजासांसी के एसएचओ गुरप्रीत सिंह ने बताया कि ड्यूटी अधिकारी एएसआई निरंजन सिंह ने एयरपोर्ट के बाहरी क्षेत्र में पहुंचकर मामले की जांच की। जांच के दौरान इसकी पुष्टि हुई। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट की सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा एयरपोर्ट के करीब 8 किलोमीटर के दायरे में ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद ड्रोन उड़ाए जाने के मामले में पुलिस द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

    दिल्ली और चंडीगढ़ डायवर्ट की गईं उड़ानें 
    कुआलालंपुर से अमृतसर आ रही मलेशिया एयरलाइंस की उड़ान एमएच-118 को दिल्ली डायवर्ट किया गया। शारजाह से आ रही इंडिगो की उड़ान 6ई-1428 और एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान आईएक्स-138 को भी दिल्ली भेजा गया।

    मुंबई से अमृतसर आ रही इंडिगो की उड़ान 6ई-5028 और दिल्ली से आने वाली इंडिगो की उड़ान 6ई-2045 को चंडीगढ़ भेजा गया। वहीं दिल्ली से अमृतसर आ रही एयर इंडिया की उड़ान एआई-479 और एआई-855 को वापस दिल्ली भेज दिया गया। 

    ड्रोन की तलाश में सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय
    ड्रोन दिखाई देने की सूचना के बाद एयरपोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई। सुरक्षा एजेंसियों ने ड्रोन की गतिविधि का पता लगाने के लिए निगरानी शुरू कर दी। सीमा क्षेत्र के नजदीक एयरपोर्ट की संवेदनशीलता को देखते हुए मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ड्रोन कहां से आए और उनका उद्देश्य क्या था। 

  • मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर कई जिलों में पोस्टरबाजी, यूपी में फिर गरमाया माहौल

    मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर कई जिलों में पोस्टरबाजी, यूपी में फिर गरमाया माहौल

    मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर यूपी के कई जिलों में लगे पोस्टर
     
    पोस्टरों पर लिखा- ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’, फिर चर्चा में आया 2013 का दंगा
     
    लखनऊ, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, सहारनपुर और शामली समेत कई शहरों में लगे पोस्टर
     
    दंगों में 60 से अधिक लोगों की गई थी जान, 50 हजार से ज्यादा लोगों को छोड़ना पड़ा था घर
     
    दंगों के बीच सैफई महोत्सव को लेकर भी घिरी थी अखिलेश सरकार, विपक्ष ने उठाए थे सवाल
     
    कुछ जिलों में पोस्टर लगाने को लेकर सपा कार्यकर्ताओं से झड़प, गरमाई सियासत
     मुजफ्फरनगर 

    मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर रविवार को प्रदेश के कई जिलों में लगाए गए पोस्टरों ने एक बार फिर 2013 की हिंसा और तत्कालीन सपा सरकार की भूमिका को राजनीतिक चर्चा में ला दिया है। लखनऊ, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, सहारनपुर और शामली समेत कई शहरों में लगे पोस्टरों पर बड़े अक्षरों में लिखा गया है, ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे।’
     
    पोस्टर लगाए जाने के दौरान कुछ जिलों में विवाद की स्थिति भी बनी। पोस्टरों का विरोध करने पहुंचे सपा कार्यकर्ताओं और इन्हें लगाने वाले लोगों के बीच कहासुनी और झड़प की बात सामने आई है। इसके बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। पोस्टरों और उनके विरोध ने दंगों की बरसी पर प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।
     
    सात सितंबर 2013 को मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में 60 से अधिक लोगों की जान गई थी, जबकि 50 हजार से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। हालात इतने बिगड़ गए थे कि हिंसा पर नियंत्रण के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी थी।
     
    उस समय प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार थी। कानून-व्यवस्था संभालने और समय रहते हिंसा रोकने में नाकामी को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठे थे। सपा सरकार पर दंगाइयों को राजनीतिक संरक्षण देने के आरोप भी लगे थे, जिन्हें पार्टी खारिज करती रही है।
     
    दंगों के बाद राहत शिविरों और विस्थापित परिवारों की स्थिति को लेकर भी तत्कालीन सरकार विपक्ष के निशाने पर रही थी। वहीं, उस दौर में सैफई महोत्सव को लेकर भी अखिलेश सरकार की आलोचना हुई थी। विपक्ष ने इसे दंगा पीड़ितों के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता से जोड़कर सवाल उठाए थे।
     
    अब 13 साल बाद दंगों की बरसी पर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में लगे पोस्टरों और उन्हें लेकर हुई झड़पों ने मुजफ्फरनगर दंगों को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

  • पंजाब में बदला पंथक वोट का मिजाज, अकाली दल कमजोर; BJP से भी नहीं बन रही बात

    पंजाब में बदला पंथक वोट का मिजाज, अकाली दल कमजोर; BJP से भी नहीं बन रही बात

     जालंधर 

    पंजाब में अकाली दल के सामने पंथक वोट बैंक को एकजुट करने की बड़ी चुनौती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का मत प्रतिशत घटकर महज 13.42 फीसदी रह गया, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में उसे केवल तीन सीटें मिली थीं। यह गिरावट 2017 के बाद से लगातार जारी है, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में उसकी पकड़ कमजोर हुई है। पार्टी को अब अपने बिखरे हुए राजनीतिक आधार को फिर से संगठित करना होगा।

    अकाली दल को 2014 में 26.30 फीसदी और 2019 में 27.45 फीसदी वोट मिले थे लेकिन 2024 में यह आंकड़ा 13.42 फीसदी पर आ गया जिससे पार्टी सिर्फ बठिंडा लोकसभा सीट जीत सकी। इस बीच, सिमरनजीत सिंह मान के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) को 2024 में करीब 3.82 फीसदी वोट मिले। 

    निर्दलीय उम्मीदवार अमृतपाल सिंह और सरबजीत सिंह खालसा की जीत ने भी पंथक वोटों के बिखराव को दर्शाया। इन नतीजों से स्पष्ट है कि अकाली दल से दूर हुआ पंथक वोट कांग्रेस, आम आदमी पार्टी या भाजपा के पास पूरी तरह नहीं गया बल्कि इसका एक हिस्सा नई पंथक राजनीति की ओर मुड़ गया है। सुखबीर बादल के नेतृत्व वाला अकाली दल अपने पुराने संगठन को बचाने का प्रयास कर रहा है। वहीं पुनर्सुरजीत धड़ा और वारिस पंजाब दे जैसे समूह भी अपनी पहचान बना रहे हैं। यह स्थिति अकाली राजनीति के सामने विरोधी दलों से भी बड़ी चुनौती पेश करती है।

    ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान संकट
    1966 में नए पंजाब के गठन के बाद अकाली दल ने क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत जगह बनाई। पार्टी ने 1977, 1985, 1997, 2007 और 2012 में सत्ता हासिल की। हालांकि, 2017 के बाद से इसके चुनावी प्रदर्शन में लगातार गिरावट आई है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी तीन सीटों तक सिमट गई। 2024 के लोकसभा चुनाव में मत प्रतिशत में भारी कमी ने इस संकट को और गहरा किया है।

    नई पंथक राजनीति की ओर गया वोट
    अकाली दल का वोट बैंक पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसका एक बड़ा हिस्सा अब अलग-अलग पंथिक राजनीतिक धाराओं में बंट गया है। सिमरनजीत सिंह मान के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) को 2024 में 3.82 फीसदी वोट मिले। निर्दलीय उम्मीदवार अमृतपाल सिंह और सरबजीत सिंह खालसा की जीत भी इसी बदलाव का संकेत है। यह दर्शाता है कि पंथिक वोट राष्ट्रीय दलों के बजाय नई पंथक राजनीति की ओर भी गया है।

    पुराने गठबंधन की चर्चाएं
    भाजपा और अकाली दल के पु
    राने गठबंधन को लेकर पंजाब की राजनीति में चर्चाएं जारी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 18.56 फीसदी और अकाली दल को 13.42 फीसदी वोट मिले थे। दोनों के मत प्रतिशत को जोड़ने पर यह आंकड़ा करीब 31.98 फीसदी होता है। हालांकि, वोटों का शत-प्रतिशत हस्तांतरण हमेशा संभव नहीं होता है। सितंबर 2026 तक भाजपा ने सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कही है। 2027 के चुनाव से पहले अकाली दल को अपने बिखरे आधार को एकजुट करना होगा।

  • नवाब मोड़ पर बन रहा नया मधुपुर स्टेशन, 281 करोड़ की परियोजना से बढ़ेगी सीधी रेल कनेक्टिविटी

    नवाब मोड़ पर बन रहा नया मधुपुर स्टेशन, 281 करोड़ की परियोजना से बढ़ेगी सीधी रेल कनेक्टिविटी

    मधुपुर (देवघर)
     मधुपुर-गिरिडीह रेल मार्ग पर नवाब मोड के पास बन रहा नया रेलवे स्टेशन (नया मधुपुर स्टेशन) और बाईपास रेल परियोजना का निर्माण कार्य 2027 तक पूरा होने की संभावना है।

    इस पूरे लिंकिंग और बाईपास प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत लगभग 140 करोड़ से 281 करोड़ के बीच आंकी गई है। इस नई रेल परियोजना में वर्तमान परिस्थिति में काम जोर शोर से चल रहा है।

    अनुमान है कि इस साल के अंत में या फिर नए साल में इलाके के लोगो एक नया स्टेशन मिलेगा। इस स्टेशन का नाम क्या होगा तय नहीं है।

    क्योंकि अभी नामकरण नहीं किया गया है। लेकिन इलाके में चर्चा है नई मधुपुर स्टेशन के नाम से यह जाना जाएगा। फिर कोई महापुरुष के नाम से यह स्टेशन का नाम हो सकता है

    रेलवे ने भी नहीं फिलहाल इस पर कोई अधिसूचना जारी नहीं किया है। बताया जाता है कि मधुपुर गिरिडीह नेशनल हाईवे-114 के किनारे नवाबमोड़ गांव के निकट इस आदर्श स्टेशन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और रेल पटरियां बिछाने का काम तेजी से चल रहा है।

    रेलवे के अनुसार इसे 2027 के मध्य तक पूरी तरह से तैयार कर लिया जाएगा। बताया जाता है कि मधुपुर बाईपास रेल लाइन खंड की लागत 140.01 करोड़ है, जबकि पूरे लिंकिंग प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 281 करोड़ है।

    नई रेल परियोजना के बन से होने वाले होगा काफी लाभ
    इस नए रेल परियोजना के बन जाने इलाके के लिए को काफी लाभ होगा। यहां के पटवाबाद, नवाब मोड़ के पास नया स्टेशन और बाईपास लाइन बनने से क्षेत्र के लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।

    बताया जाता है कि इससे लोको रिवर्सल (इंजन बदलने) के झंझट से मुक्ति मिलेगी और समय की बचत होगी। वर्तमान में ट्रेनों के इंजन का रिवर्सल मधुपुर स्टेशन पर हो रहा है। जिसके कारण 20 मिनट ट्रेनों का ठहराव मधुपुर में हो हो जाता है ।

    इससे निजात मिलेगा क्योंकि गिरिडीह-कोडरमा जाने के लिए मधुपुर में इंजन बदलना (लोको रिवर्सल) पड़ता है। इस बाईपास लाइन और नए स्टेशन के चालू होने से ट्रेनें सीधे निकल जाएंगी, जिससे यात्रियों का करीब 30 मिनट से अधिक का समय बचेगा।

    सीधी ट्रेन कनेक्टिविटी इस रूट के पूरी तरह चालू होने से मधुपुर, न्यू गिरिडीह और कोडरमा के बीच सीधी और लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन बेहद आसान हो जाएगा।

    आधुनिक यात्री सुविधाएं (एक आदर्श स्टेशन) नवाब मोड़ स्टेशन पर अप और डाउन दोनों तरफ आधुनिक प्लेटफार्म, यात्रियों के लिए फुटओवर ब्रिज, हाई-टेक टिकट काउंटर भवन, यात्री शेड और पेयजल आपूर्ति के लिए नए वाटर कनेक्शन की व्यवस्था की जा रही है।

    आर्थिक और व्यापारिक विकास
    नया स्टेशन बनने से नवाब मोड और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लोगों की आवाजाही बढ़ेगी। इससे इलाके में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर पैदा होंगे।

    लोगों को छोटा मोटा रोजगार मिल जाएगा। स्टेशन के आसपास लोग छोटा-मोटा दुकान लगाकर कमाई कर सकेंगे। इससे आसपास के क्षेत्र का आर्थिक विकास तेजी से होगा।

    ये काम हो चुका है पूरा
    यहां पर अप व डाउन प्लेटफार्म बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। दो प्लेटफार्म पर यात्री शेड अप व डाउन पर यात्री शेड पूरा हो चुका है। पैदल उपरी पुल बन चुका है। प्लेटफार्म पर लाइट की व्यवस्था के पोल लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका हे।

    प्लेटफार्म पर अप व डाउन लाइन पर लाइट बिछाने का काम चल रहा है। स्टेशन परिसर पर प्रशासनिक भवन बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है।

    बुकिंग काउंटर बनकर तैयार हो चुका है। शौचालय का भवन बन चुका है। स्टेशन में टाइल्स मार्बल लगाने का काम पूरा हो चुका है। नए स्टेशन का लगभग 75 प्रतिशत काम हाे चुका है।

    ये काम है बाकी
    स्टेशन पर कंबाइंड भवन बनकर तैयार है । एक ही भवन के अंदर बुकिंग काउंटर, केबिन,यात्री प्रतीक्षालय, स्टेशन मास्टर कार्यालय आदि संचालित किया जाएगा।

    इसी भवन में पैनल, रिले सिस्टम सिग्नल आदि इलेक्ट्रिक विछाने का काम चल रहा है। ओवरहेड बिजली का हाई टेंशन तार लगाने का काम चल रहा है।

    पोल गाड़ने का काम चल रहा है। इसके बाद तार लगाने का काम किया जाएगा। शौचालय में पानी की व्यवस्था के लिए जलमीनार बनाया जा रहा है।

    वहीं, शौचालय के अंदर की व्यवस्था अभी किया जाना है। स्टेशन से पहले ग्रामीणों की आवाजाही के अंडरपास रास्ते का काम चल रहा है। इस लाइन पर पुल पुलिया का निर्माण कार्य चल रहा है।

    काम में अड़चन
    नए स्टेशन के पूरा होने में कुछ अड़चन भी है। अप प्लेटफार्म के सिग्नल स्टाटर के पास पूर्वी छोर पर करीब एक दर्जन घरों का अधिग्रहण का काम पूरा नहीं हो पाया है।

    इस कारण इस परियोजना में विलंब हो रहा है। अधिग्रहण का काम पूरा होने के बाद ही यहां पटरी बिछाने का काम किया जाएगा। इस कारण से वर्तमान में काम डिले हो रहा है।

  • आंतरिक शिकायत समिति कर रही है जेएनयू प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की जांच

    आंतरिक शिकायत समिति कर रही है जेएनयू प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की जांच

    नई दिल्ली
    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के एक प्रोफेसर पर 10 से अधिक छात्राओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। यूनिवर्सिटी की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) इन शिकायतों की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, ये शिकायतें करीब एक महीने पहले दर्ज कराई गई थीं।

    टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के कैंपस में ही रहने वाले प्रोफेसर पर आरोप है कि उसने कुछ छात्रों को अपने घर पर ही आयोजित बैठकों में बुलाया और वहां कथित तौर पर यौन दुर्व्यवहार किया या प्रस्ताव किए। कुछ शिकायतों में क्लास के दौरान भी आपत्तिजनक और अश्लील टिप्पणियां किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

    सीनियर छात्राओं ने भी लगाए आरोप
    अधिकारियों के अनुसार, प्रोफेसर के खिलाफ हाल में एक शिकायत सामने आने के बाद कुछ सीनियर छात्राएं भी सामने आईं और उन्होंने भी इस तरह के आरोप लगाए हैं।

    जानकारी के मुताबिक, ICC फिलहाल इन शिकायतों की जांच कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कमेटी जैसे-जैसे अपनी जांच का दायरा बढ़ाएगी अभी और शिकायतें सामने आ सकती हैं।

    ICC ने टिप्पणी से किया इनकार
    इस मामले की जांच कर रही JNU की आंतरिक शिकायत समिति ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। समिति का कहना है कि यह आंतरिक मामला है और फिलहाल इसकी जांच चल रही है। JNU की कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने कहा कि यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों पर ICC कार्रवाई करती है और कुलपति इस समिति की सदस्य नहीं होती हैं।

    प्रोफेसर ने आरोपों को बताया झूठा
    वहीं, आरोपों से घिरे प्रोफेसर ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी शिकायत की जानकारी नहीं है। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को गलत बताया। यह भी पूछे जाने पर कि क्या वह ICC के सामने पेश हुए हैं या उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया है, प्रोफेसर ने कहा कि उन्हें किसी शिकायत की जानकारी नहीं है।

  • उत्तर प्रदेश में बारिश का अलर्ट, आंधी-वज्रपात के साथ कई जिलों में भारी बारिश की संभावना

    उत्तर प्रदेश में बारिश का अलर्ट, आंधी-वज्रपात के साथ कई जिलों में भारी बारिश की संभावना

    लखनऊ
    दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और इसके आसपास के इलाकों में बने लो प्रेशर एरिया के सक्रिय होने से उत्तर प्रदेश में मौसम ने करवट ले ली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान पूर्वी और पश्चिमी यूपी के विभिन्न हिस्सों में बारिश और वज्रपात की गतिविधियां जारी रहेंगी।

    पिछले 24 घंटों में कैसा रहा मौसम का हाल
    मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। बिजनौर जिले में सर्वाधिक 12 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर में भी तेज बारिश का असर देखा गया है।

    पश्चिमी यूपी में कैसा रहेगा मौसम
    मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है कि 6 और 7 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश हो सकती है।

    पूर्वी यूपी में ऐसा रहेगा मौसम
    पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 6 से 8 सितंबर तक बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की संभावना व्यक्त की गई है। वहीं 6 से 9 सितंबर के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

    किसानों के लिए जरूरी सलाह
    मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें और गीली स्थिति में सिंचाई, खाद व कीटनाशकों का छिड़काव टाल दें। छोटे पौधों, सब्जियों और बागवानी फसलों को सहारा देने की हिदायत दी गई है।