Category: राज्य

  • कन्हैया फार्मा के नाम पर चल रहा था नशीली दवाओं का खेल, 71 लाख की खेप के साथ 6 गिरफ्तार

    कन्हैया फार्मा के नाम पर चल रहा था नशीली दवाओं का खेल, 71 लाख की खेप के साथ 6 गिरफ्तार

     लखनऊ
     एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की लखनऊ टीम ने नशीली दवाओं की तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए छह तस्करों को गिरफ्तार किया है। टीम ने इनके कब्जे से करीब 71.44 लाख रुपये कीमत की नशीली दवाएं, सात मोबाइल फोन और 11,140 रुपये नकद बरामद किए हैं। कार्रवाई शुक्रवार को ट्रांसपोर्टनगर स्थित कन्हैया फार्मा के पास की गई।

    एएनटीएफ के मुताबिक गिरफ्तार आरोपितों में लखनऊ निवासी किशन वासवानी, शाद इरशाद, उमेश कुमार, विशाल चौरसिया, कानपुर देहात के राजपुर निवासी समीर अहमद, आजमगढ़ के अहरौली निवासी सतेन्द्र सिंह शामिल हैं। तस्करों के पास से कोडीनयुक्त कफ सीरप की 720 बोतल, ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड युक्त स्पास्मोनाम प्लस के 1.20 लाख कैप्सूल और अल्प्राजोलम की 9.60 लाख गोलियां बरामद हुई हैं।

    पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे नशीली दवाएं खरीदते थे। इसके बाद किसी पार्टी को खेप पहुंचाकर मोटा मुनाफा कमाते थे। सरोजनीनगर थाने में आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

    कन्हैया फार्मा के नाम से लगा रखा था बोर्ड
    एएनटीएफ एसपी के मुताबिक तस्करों ने गोदाम के बाहर कन्हैया फार्मा के नाम से बोर्ड लगा रखा था। तस्करों की कंपनी रजिस्टर्ड है या नहीं इस बिंदु पर औषधि विभाग की टीम जांच कर रही है। इसी नाम से संचालित गोदाम में तस्कर दिल्ली से माल लाकर रखते थे। भारी मात्रा में माल यहां डंप था।

    इसकी हुई बरामदगी
    कोडीन युक्त वनरेक्स 100 एमएल कफ सिरप (कुल 720 बोतल), स्पैस्मोनाम प्लस (ट्रामाडोल एचसीएल) कैप्सूल (कुल 1,20,000), अल्जोमैक-0.5 अल्प्राजोलम टैबलेट्स (कुल 9,60,000) अनुमानित कीमत लगभग 71 लाख 44 हजार 180 रुपये) के अलावा सात मोबाइल फोन, 11,140 रुपये नकद।

  • श्रीकृष्ण महोत्सव में CM सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान, मरीन ड्राइव के पास बनेगा रामलीला मैदान

    श्रीकृष्ण महोत्सव में CM सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान, मरीन ड्राइव के पास बनेगा रामलीला मैदान

    पटना
    सीएम सम्राट चौधरी ने कल शनिवार (5, सितंबर) को पटना के गांधी मैदान में आयोजित श्रीकृष्ण महोत्सव 4.0-2026 ‘कान्हा के रंग, उत्सव के संग’ कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार एवं सात्विका ग्रुप के सौजन्य से दशहरा कमिटी ट्रस्ट, पटना द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए अपने संबोधन में कहा कि, अगले वर्ष मार्च तक मरीन ड्राइव के समीप तीन बड़े मैदान तैयार हो जाएंगे। इनमें से एक मैदान का नाम रामलीला मैदान रखा जाएगा।

    सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि रामलीला एवं रावण वध के कार्यक्रम को गांधी मैदान से वहां स्थानांतरित कर पूरी व्यवस्था के साथ आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दशहरा कमेटी ट्रस्ट वर्ष 1955 से गांधी मैदान में रामलीला महोत्सव एवं रावण वध का आयोजन कर रहा है। समिति की ओर से लंबे समय से रामलीला और रावण वध के लिए अलग स्थान उपलब्ध कराने का आग्रह किया जा रहा था। इसको लेकर पटना के जिलाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। मार्च के बाद जैसे ही नए मैदान का हैंडओवर होगा, समिति को वह मैदान उपलब्ध करा दिया जाएगा।

    इस मौके पर श्रीकृष्ण महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि, भगवान श्रीकृष्ण ने अन्याय के खिलाफ खड़े होने और सत्य की विजय का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि महाभारत के समय भगवान श्रीकृष्ण ने शांति के लिए हर संभव प्रयास किया और कौरवों से केवल पांच गांव देने की बात कही, लेकिन अन्याय के कारण युद्ध टल नहीं सका। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का स्पष्ट संदेश था कि जो अन्याय करेगा, उसका विनाश निश्चित है। गीता के माध्यम से उन्होंने अर्जुन को कर्तव्य और धर्म का बोध कराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी भगवान श्रीकृष्ण का संदेश समाज को सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

    इस दौरान सीएम सम्राट चौधरी ने बिहार में जारी बाढ़ की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में इस समय गंगा में पानी का स्तर काफी अधिक है। गंगा बेसिन वाले जिलों में अधिकारियों और मंत्रियों को लगाया गया है तथा सरकार पूरी स्थिति पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि सोन और गंडक नदियों से भी बड़ी मात्रा में पानी आ रहा है। नेपाल की तराई से आने वाले पानी के कारण बिहार के लोगों को हर वर्ष परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार ने कोसी, गंडक और गंगा बेसिन को व्यवस्थित करने के लिए व्यापक योजना तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय जल आयोग के साथ मिलकर दोनों बेसिनों के किनारे सड़क निर्माण और वाटर ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था विकसित करने पर भी काम किया जाएगा, ताकि बरसात के दौरान लोगों को होने वाली परेशानी को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप बिहार को भी समृद्ध और विकसित बनाने के लिए सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की परिकल्पना के अनुरूप बिहार को समृद्ध बनाने की पूरी रूपरेखा तैयार की जा रही है।

    सीएम सम्राट ने श्रीकृष्ण महोत्सव और दही हांडी प्रतियोगिता के आयोजन के लिए दशहरा कमेटी ट्रस्ट को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से बिहार की सनातन संस्कृति और भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में मदद मिलती है। वहीं, दशहरा कमिटी ट्रस्ट के सदस्यों ने अंगवस्त्र और मोमेंटो देकर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। इस मौके पर दही-हांडी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था जहां मुख्यमंत्री ने स्वयं जाकर प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान सीएम के अलावा , स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार समेत कई मंत्री और विधायक समेत अधिकारी मौजूद रहे।

  • योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का असर, यूपी में नशे के कारोबार पर प्रहार

    योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का असर, यूपी में नशे के कारोबार पर प्रहार

    लखनऊ/वाराणसी
     योगी सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 2.10 करोड़ रुपये कीमत की हेरोइन बरामद की है। एएनटीएफ यूनिट वाराणसी की टीम ने अवैध मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले सक्रिय तस्कर अभिषेक सोनकर को गिरफ्तार किया है।

    डीजीपी कार्यालय के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र के झोरिया जगदीशपुर बाबतपुर का निवासी है। एएनटीएफ टीम ने उसके कब्जे से 1 किलो 20 ग्राम अवैध मादक पदार्थ हेरोइन समेत अन्य सामान भी बरामद किया है। आरोपी की गिरफ्तारी चंदौली जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र में गोदना मोड़ सर्विस रोड से की गई।

    चंदौली में करनी थी सप्लाई
    पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने पार्टनर के साथ मिलकर अवैध मादक पदार्थों की सप्लाई करता है। बरामद हेरोइन भी वह अपने पार्टनर के कहने पर किसी व्यक्ति को सप्लाई करने के लिए चंदौली की ओर ले जा रहा था। इसी दौरान पुलिस ने उसे पकड़ लिया। पुलिस मामले और गिरोह से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी जांच कर रही है।

  • योगी सरकार ट्रामा एंड इमरजेंसी नेटवर्क से हर साल बचाएगी 12 हजार लोगों की जान

    योगी सरकार ट्रामा एंड इमरजेंसी नेटवर्क से हर साल बचाएगी 12 हजार लोगों की जान

    लखनऊ
    खयमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और अन्य गंभीर आपात स्थितियों में मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। इसके तहत यूपीटीईएन (उत्तर प्रदेश ट्रामा एंड इमरजेंसी नेटवर्क) को एक ऐसे एकीकृत आपात चिकित्सा नेटवर्क के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य दुर्घटना या मेडिकल इमरजेंसी के बाद शुरुआती 60 मिनट यानी ‘गोल्डन ऑवर’ में मरीज को सही उपचार तक पहुंचाना है।
      यूपीटीईएन के जरिए प्रदेश की बिखरी ट्रॉमा, बर्न, कार्डियक, स्ट्रोक और अन्य इमरजेंसी सेवाओं को एक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। योजना के तहत 173 एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन यूनिट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें 11 लेवल-1 एपेक्स हब, 36 लेवल-2 रीजनल सेंटर और 126 लेवल-3 जिला स्तर की इकाइयां शामिल होंगी। इसका मकसद मरीज को जरूरत के अनुसार नजदीकी और सक्षम चिकित्सा केंद्र तक तेजी से पहुंचाना है।

    हर साल 12 हजार जानें बचाने का लक्ष्य
    अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित घोष ने बताया कि व्यवस्था के जरिए हर साल 10 हजार से 12 हजार लोगों की जान बचाने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों की मानें तो समय पर इलाज मिलने से गंभीर दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और स्थायी विकलांगता के मामलों में कमी लाई जा सकती है। इसके लिए केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के बजाय अस्पताल, एंबुलेंस, ट्रॉमा सेंटर, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और कमांड सेंटर को एक ही आपात नेटवर्क में जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यूपीटीईएन का उद्देश्य मरीज के अस्पताल पहुंचने का इंतजार करने के बजाय आपातकाल की सूचना मिलते ही इलाज की प्रक्रिया शुरू करना है। योजना के तहत 1,200 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस को नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इन एंबुलेंस को केवल परिवहन का साधन न मानकर चलते-फिरते आपात उपचार केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश के 18 मंडलीय स्तर के कमांड सेंटर नेटवर्क के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन केंद्रों के जरिए इमरजेंसी कॉल, एंबुलेंस, अस्पतालों में बेड और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के बीच समन्वय स्थापित करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

    30 से 50 प्रतिशत तक रिस्पांस टाइम किया जाएगा कम
    अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य ने बताया कि योजना के तहत आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में 30 से 50 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं अस्पताल पहुंचने से पहले महत्वपूर्ण चिकित्सकीय निर्णय लेने के लिए करीब 10 मिनट का अतिरिक्त समय हासिल करने की योजना है। इसके लिए रियल-टाइम नेटवर्किंग, डिजिटल अलर्ट सिस्टम और एआई आधारित ट्रायेज जैसी तकनीकों के इस्तेमाल का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य है कि किस मरीज को किस अस्पताल या किस विशेषज्ञ विभाग में भेजा जाना चाहिए। यानी ‘राइट मरीज, राइट डिपार्टमेंट और राइट टाइम’ के सिद्धांत पर इमरजेंसी सिस्टम को संचालित किया जाएगा। योजना में आम लोगों को भी आपातकालीन व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए तीन स्तरों पर फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क तैयार करने की योजना बनायी जा रही है। इसमें पहले स्तर पर पुलिस, एंबुलेंस चालक, फायर सर्विस और हाईवे पेट्रोल जैसे तत्काल मदद पहुंचाने वाले लोग होंगे। वहीं दूसरे स्तर पर पुलिस, होमगार्ड और अन्य संस्थागत रिस्पॉन्डर होंगे जबकि तीसरे स्तर पर आम नागरिकों को बेसिक इमरजेंसी रिस्पांस का प्रशिक्षण देकर उन्हें जरूरत के समय शुरुआती मदद के लिए तैयार किया जाएगा।

    48 घंटे तक मुफ्त इमरजेंसी इलाज*
    योजना के तहत सभी नागरिकों के लिए 48 घंटे तक मुफ्त आपातकालीन उपचार की व्यवस्था होगी। इसका उद्देश्य दुर्घटना या गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज और उसके परिवार पर तत्काल इलाज के खर्च का दबाव कम करना है, ताकि आर्थिक कारणों से उपचार में देरी न हो। इसके साथ ही यूपीटीईएन के लिए अलग बजट, मानव संसाधन नीति और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। इसके अलावा इमरजेंसी मेडिसिन ऑफिसर (ईएमओ) कैडर बनाने, एम्स के अनुरूप वेतनमान तथा विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए प्रोत्साहन की व्यवस्था जैसे कदम शामिल हैं।

  • कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई, फिर बखेड़ा क्यों?’ सहारनपुर पर संगीत सोम का विपक्ष से सवाल

    कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई, फिर बखेड़ा क्यों?’ सहारनपुर पर संगीत सोम का विपक्ष से सवाल

    ‘मस्जिद नहीं, अवैध इमारत गिरी’, सहारनपुर विवाद पर संगीत सोम ने अखिलेश-राहुल-ओवैसी को घेरा

    ‘मुस्लिमों की बर्बादी के पीछे अखिलेश-राहुल और ओवैसी’, संगीत सोम का तीखा हमला

    कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई, फिर बखेड़ा क्यों?’ सहारनपुर पर संगीत सोम का विपक्ष से सवाल

    अखिलेश-राहुल-ओवैसी पर संगीत सोम का हमला- ‘संविधान की किताब लेकर घूमते हैं, कोर्ट के आदेश पर सवाल उठाते हैं’

    '2013 की तरह फिर पश्चिमी यूपी में दंगा कराना चाहते हैं अखिलेश, संगीत सोम ने सपा को घेरा

    लखनऊ
     सहारनपुर में सरकारी जमीन पर बनी अवैध मस्जिद पर हुई कार्रवाई को लेकर बीजेपी नेता संगीत सोम ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर तीखा हमला बोला है। संगीत सोम ने साफ कहा कि मीडिया और विपक्ष को यह समझना होगा कि सहारनपुर में किसी मस्जिद को नहीं गिराया गया, बल्कि अवैध जमीन पर बनी एक अवैध इमारत को कानूनी प्रक्रिया के तहत हटाया गया है।

    संगीत सोम ने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान इमारत के नीचे करीब 400 साल पुराना कुआं भी मिला है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जो भी निर्माण अवैध जमीन पर या अतिक्रमण करके किया गया है, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। किसी धर्म को निशाना बनाने का सवाल ही नहीं है।

    ‘मुस्लिमों का आका बनने की होड़ में हैं विपक्षी नेता’

    बीजेपी नेता ने अखिलेश यादव, राहुल गांधी और असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दिनों उत्तर प्रदेश में यह होड़ लगी है कि मुस्लिमों का सबसे बड़ा आका कौन बनेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी राजनीति के चलते सहारनपुर की कार्रवाई को धार्मिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।

    संगीत सोम ने ओवैसी पर भी हमला बोलते हुए पुराने दस्तावेजों और बिजली बिल से जुड़े दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब 1911 में सहारनपुर में बिजली की व्यवस्था ही नहीं थी, तो उस दौर का बिजली बिल कहां से आया? सोम ने इसे फर्जीवाड़े का उदाहरण बताते हुए कहा कि ओवैसी जैसे नेता ऐसे ही दावों के सहारे लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

    ‘कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई, फिर बखेड़ा क्यों?’

    संगीत सोम ने कहा कि जिस इमारत पर कार्रवाई हुई, वह कोर्ट के आदेश के बाद की गई। ऐसे में विपक्ष का इस मुद्दे को लेकर हंगामा खड़ा करना उनकी मंशा पर सवाल पैदा करता है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव, राहुल गांधी और ओवैसी तीनों संविधान की किताब लेकर घूमते हैं, लेकिन जब अदालत के आदेश पर कार्रवाई होती है तो उसी कार्रवाई को धार्मिक रंग देने की कोशिश शुरू हो जाती है।

    उन्होंने तीनों नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि यह राजनीति संविधान और कानून की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि वोट बैंक की राजनीति के लिए की जा रही है।

    ‘पश्चिमी यूपी में फिर दंगा कराना चाहते हैं अखिलेश’

    संगीत सोम ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता सहारनपुर के मुद्दे के बहाने पश्चिमी उत्तर प्रदेश का माहौल खराब करना चाहते हैं। उन्होंने अखिलेश यादव पर हमला करते हुए 2013 के दंगों का भी जिक्र किया और कहा कि अब एक बार फिर पश्चिमी यूपी में तनाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रहते उत्तर प्रदेश में किसी को दंगा कराने या कानून व्यवस्था को चुनौती देने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अगर अखिलेश यादव अपने समर्थकों के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    ‘मुस्लिमों की बर्बादी के पीछे अखिलेश, ओवैसी और राहुल’

    संगीत सोम ने कहा कि मुस्लिमों की तीन बर्बादी- अखिलेश, ओवैसी और राहुल गांधी। उन्होंने कहा कि विपक्ष जानबूझकर यह नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहा है कि मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि कार्रवाई का निशाना धर्म नहीं बल्कि अवैध कब्जा और भूमाफिया हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक कुछ लोगों ने मुस्लिमों का इस्तेमाल किया, उनसे कब्जे करवाए और अपनी जेबें भरीं।

    संगीत सोम ने आखिर में फिर विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि अखिलेश यादव, राहुल गांधी और ओवैसी ने मुस्लिम समाज को सबसे ज्यादा छला है और अब भी वे उत्तर प्रदेश की शांति और कानून व्यवस्था को राजनीतिक फायदे के लिए दांव पर लगाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब “उत्तम प्रदेश” बनने की राह पर है और किसी को भी अराजकता फैलाकर इस रास्ते को रोकने नहीं दिया जाएगा।

  • विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में पूरी होगी जातिगत जनगणना, 40 सवालों के जरिए जुटेगा डेटा

    विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में पूरी होगी जातिगत जनगणना, 40 सवालों के जरिए जुटेगा डेटा

    चंडीगढ़
     पंजाब में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जनगणना का काम पूरा होगा। केंद्र सरकार की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार Punjab Census News का मुख्य चरण एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक चलेगा। इससे पहले लोगों को अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए 16 से 30 नवंबर 2026 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

    मुख्य चरण के बाद पांच से नौ जनवरी 2027 तक दोबारा जांच का काम किया जाएगा। इस बार की जनगणना कई मायनों में महत्वपूर्ण होगी। लोगों से कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें परिवार और आवास से जुड़ी जानकारी के साथ जाति, धर्म, शिक्षा, रोजगार, भाषा, प्रवास और कोविड-19 टीकाकरण सहित कई जानकारियां दर्ज की जाएंगी।

    इस दौरान 40 सवाल पूछे जाएंगे, जिसमें जाति धर्म, कोविड वैक्सीन लगाने से लेकर सारी जानकारी शामिल रहेगी। केंद्र सरकार की राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCPA) के फैसले के तहत इस बार जनगणना में जातिगत जनगणना को भी शामिल किया गया है। पंजाब में होने वाली जनगणना में भी जाति संबंधी जानकारी दर्ज की जाएगी।

    पंजाब सरकार के समन्वय से पूरा होगा काम

    पूरी जनगणना को डिजिटल बनाने के लिए मोबाइल एप तैयार किए गए हैं। केंद्र सरकार ने इस महाअभियान के लिए 11,718.24 करोड़ का बजट मंजूर किया है। जनगणना का काम पंजाब सरकार के समन्वय से पूरा किया जाएगा।

    केंद्र सरकार की राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के फैसले के बाद इस बार जातिगत आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। ऐसे में पंजाब में भी लोगों से उनकी जाति से संबंधित जानकारी ली जाएगी।

    2011 की जनगणना 2.77 करोड़ आबादी थी

    2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब की कुल आबादी 2.77 करोड़ थी, जिसमें 1.46 करोड़ पुरुष और 1.31 करोड़ महिलाएं थीं। राज्य की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 13.89% रही, जबकि जनसंख्या घनत्व 551 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर और लिंगानुपात 895 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष था।

    पंजाब की कुल साक्षरता दर 75.84% थी, जिसमें पुरुष साक्षरता 80.44% और महिला साक्षरता 70.73% रही। राज्य की 62.52% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में, जबकि 37.48% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती थी।

    पहचान और परिवार से जुड़े 12 सवाल
    जनगणना में पहचान और परिवार से जुड़े 12 सवाल होंगे। इनमें व्यक्ति का नाम, लिंग, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, धर्म, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति तथा जाति, माता-पिता का नाम आदि की जानकारी ली जाएगी। इसके अलावा परिवार के सदस्यों से संबंधित आवश्यक विवरण भी दर्ज किए जाएंगे।

    शिक्षा और भाषा से जुड़े सवालों में व्यक्ति की साक्षरता के साथ डिजिटल साक्षरता की जानकारी भी ली जाएगी। इसके अलावा उच्चतम शैक्षणिक योग्यता और अध्ययन की शाखा से संबंधित जानकारी दर्ज होगी। रोजगार की स्थिति जानने के लिए पिछले एक वर्ष में काम किया या नहीं, आर्थिक गतिविधि की श्रेणी, व्यवसाय, उद्योग या व्यापार का प्रकार तथा काम की जगह तक पहुंचने के लिए की जाने वाली यात्रा से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे।

    बच्चों और प्रवास का भी बनेगा आंकड़ा
    जन्म और प्रवास से संबंधित जानकारी में वर्तमान में जीवित बच्चों की संख्या, अब तक जन्मे कुल बच्चों की संख्या और पिछले एक वर्ष में जन्मे बच्चों की संख्या दर्ज की जाएगी। इससे राज्य में जन्म दर और आबादी में हो रहे बदलाव की तस्वीर सामने आएगी।

    जनगणना के दौरान आधार संख्या, मतदाता पहचान पत्र संख्या, पासपोर्ट संख्या और वाहन चलाने के लाइसेंस की उपलब्धता से संबंधित जानकारी भी मांगी जाएगी। इसके साथ कुल बैंक खातों, मोबाइल नंबर और कोविड-19 टीकाकरण की जगह की जानकारी भी दर्ज की जाएगी।

    पंजाब सरकार से होगा तालमेल
    पूरे अभियान को डिजिटल तरीके से संचालित करने की तैयारी है। इसके लिए मोबाइल आधारित अनुप्रयोग तैयार किए गए हैं। केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। पंजाब में जनगणना का काम राज्य सरकार के समन्वय से पूरा किया जाएगा।

    यूपी समेत इन राज्यों में शुरू होने वाली है जनगणना

    लद्दाख के बाद अब चार अन्य राज्यों में 1 दिसंबर से जनगणना 2027 की शुरुआत होने जा रही है। गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में जनसंख्या की गणना एक दिसंबर, 2026 से चार जनवरी, 2027 तक की जाएगी। अगले साल की शुरुआत में जिन राज्यों में चुनाव होने की संभावना है, वहां जनगणना की यह प्रक्रिया पहले शुरू की जा रही है।
    16 नवंबर से खुल जाएगी स्व-गणना

    भारत के महापंजीयक (RGI) एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने राजपत्र अधिसूचना में कहा कि इन क्षेत्रों के नागरिक 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक स्व-गणना का विकल्प अपना सकते हैं। अधिसूचना में कहा गया है, ''गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड राज्य के बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर बाकी इलाकों में जनसंख्या की जनगणना एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक की जाएगी। इसके बाद पांच जनवरी 2027 से नौ जनवरी 2027 तक पुनरीक्षण चरण आयोजित किया जायेगा।'
    लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में बर्फ वाले इलाकों में चल रही जनगणना

    इसमें कहा गया कि गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर राज्य के अन्य हिस्सों के लिए जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि पांच जनवरी 2027 की रात 12 बजे होगी। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि एक अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे होगी।'' पिछले महीने जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनसंख्या की गणना एक सितंबर से 30 सितंबर तक की जाएगी।
    मई में खत्म हो रहा इन विधानसभाओं का कार्यकाल

    जून 2025 को जारी एक सरकारी बयान में कहा गया था कि लद्दाख, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों को छोड़कर देश के बाकी हिस्सों के लिए संदर्भ तिथि एक मार्च 2027 होगी। गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 तक समाप्त हो जायेगा।

    एक अधिकारी ने कहा कि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी, मुख्य रूप से शिक्षक, जनगणना और चुनावी कार्यों में लगे हुए हैं। ऐसे में इन दोनों प्रक्रियाओं को एक साथ संचालित करना मुश्किल हो जाता है। शनिवार को आरजीआई द्वारा जारी एक अन्य अधिसूचना में कहा गया कि केंद्र सरकार ने मणिपुर में जनगणना 2027 के लिए मकान-सूचीकरण का कार्य भी स्थगित कर दिया है। स्वतंत्रता के बाद होने वाली आठवीं जनगणना दो चरणों में कराई जा रही है-पहले चरण को मकान-सूचीकरण और आवास जनगणना कहा जाता है, जबकि दूसरे चरण को जनसंख्या की गणना कहा जाता है।

    2011 में साक्षरता 75.84% थी
    पंजाब में पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। उस समय राज्य की आबादी करीब 2.77 करोड़ थी। इसमें 1.46 करोड़ पुरुष और 1.31 करोड़ महिलाएं थीं। दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 13.89 प्रतिशत रही थी। जनसंख्या घनत्व 551 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर और लिंगानुपात 895 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष था।

    वर्ष 2011 में पंजाब की साक्षरता दर 75.84 प्रतिशत थी। पुरुष साक्षरता 80.44 प्रतिशत और महिला साक्षरता 70.73 प्रतिशत रही। राज्य की 62.52 प्रतिशत आबादी ग्रामीण और 37.48 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती थी। नई जनगणना से पंजाब की वर्तमान आबादी, सामाजिक संरचना, जातिगत स्थिति, शिक्षा, रोजगार और अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ों की नई तस्वीर सामने आएगी। 

  • चित्रकूट में बाढ़ प्रभावित 800 परिवारों को राहत सामग्री वितरण, बेघर परिवारों को आवास हेतु भूमि आवंटन प्रमाणपत्र एवं राहत राशि

    चित्रकूट में बाढ़ प्रभावित 800 परिवारों को राहत सामग्री वितरण, बेघर परिवारों को आवास हेतु भूमि आवंटन प्रमाणपत्र एवं राहत राशि

    लखनऊ/चित्रकूट
     मंदाकिनी नदी में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित चित्रकूट के 800 परिवारों को रविवार को राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले की सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले बाढ़ आने पर तत्कालीन सरकार इसका संज्ञान तक नहीं लेती थी। राहत के नाम पर बहुत अधिक हो-हल्ला होने पर प्रभावितों को केवल सूखे ब्रेड दे दिए जाते थे, जबकि राहत के लिए आने वाला पूरा पैसा सपाई गुंडे खाकर हजम कर जाते थे और गरीब, कमजोर एवं वंचित लोगों को कुछ नहीं मिलता था। उन्होंने कहा कि पहले जहां बाढ़ प्रभावितों को एक किलो राहत सामग्री भी नहीं मिलती थी, वहीं अब करीब 50 किलो राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद 800 बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की गई। बाढ़ में आश्रयहीन हुए परिवारों को आवास के लिए भूमि आवंटन प्रमाण पत्र तथा आपदा मोचक निधि से राहत राशि भी वितरित की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रभावित लोगों से उनका हाल-चाल जाना और बच्चों को चॉकलेट देकर उनसे बातचीत की।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु राम को जब वनवास हुआ था तो चित्रकूट ने उन्हें आश्रय दिया। अब चित्रकूटवासी संकट में हैं तो प्रभु का भक्त होने के नाते वे साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हर स्थिति में गरीब और प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। बाढ़ से प्रभावित गरीबों, किसानों, नौजवानों, महिलाओं, व्यापारियों और साधु-संतों को आश्वस्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिसका भी नुकसान हुआ है, सरकार उसे हर संभव मदद उपलब्ध कराएगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट की पावन धरा को नमन करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम ने लगभग 12 वर्ष जिस धरा पर रहकर ऋषि-मुनियों के सानिध्य में राम राज्य की परिकल्पना को साकार किया था, वह भूमि आज भी आस्था और साधना का प्रमुख केंद्र है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रभावित परिवार खुद को अकेला न समझें। डबल इंजन की सरकार भारतीय जनता पार्टी के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं के साथ उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने मंदाकिनी नदी में पिछले दिनों आई भीषण आपदा से हुई त्रासदी का पहले हवाई सर्वेक्षण किया और बाद में रामघाट सहित आसपास के प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस दिन चित्रकूट में अचानक बाढ़ आई, उस समय वह बलिया के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर थे। सूचना मिलते ही उन्होंने लखनऊ से डीजी पीएसी को निर्देश देकर एसडीआरएफ और पीएसी की अतिरिक्त फ्लड कंट्रोल कंपनियों को तत्काल चित्रकूट रवाना कराया। उस समय जिले में एसडीआरएफ की केवल एक कंपनी तैनात थी, लेकिन अगले दो से तीन घंटे के भीतर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पीएसी की फ्लड यूनिट की कुल आठ कंपनियां राहत एवं बचाव कार्य में जुट गईं और युद्ध स्तर पर अभियान चलाया गया।
    उसी दिन शाम को जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर राहत कार्यों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि घरों में फंसे सभी लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार मंदाकिनी नदी में इतने बड़े पैमाने पर जलस्तर बढ़ा है। गत वर्ष क्षेत्र में लगभग 360 मिलीमीटर वर्षा हुई थी, जबकि इस बार इसका स्तर लगभग दोगुना पहुंच गया। मध्य प्रदेश की ओर जाने वाला भारी वाहनों का पक्का पुल भी बह गया है। उन्होंने कहा कि जब एक मजबूत पुल तक बह सकता है तो सामान्य घरों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। आपदा की इसी विकरालता को देखते हुए प्रशासन के साथ विस्तृत बैठक कर कार्ययोजना तय करेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी के कैचमेंट क्षेत्र में अनियोजित निर्माण ऐसी आपदाओं का बड़ा कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि नदी जब अपने स्वाभाविक स्वरूप में बहती है तो उसके दायरे में आने वाले अतिक्रमण और निर्माण बह जाते हैं। इसलिए कैचमेंट क्षेत्र में ऐसे निर्माण से बचना होगा और नदी के स्वाभाविक प्रवाह के लिए पर्याप्त मार्ग सुनिश्चित करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी भीषण बाढ़ के बावजूद प्रभु श्रीराम, कामदनाथ, हनुमान और चित्रकूट के ऋषि-मुनियों की तपस्थली की कृपा से कोई जनहानि नहीं हुई।

    बाढ़ से प्रभावित परिवारों, व्यापारियों, मठ-मंदिरों और घाटों को सरकार देगी सहयोग
    मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावितों को आश्वस्त करते हुए कहा कि आपदा की इस घड़ी में वे अकेले नहीं हैं। सामान्य परिवारों, व्यापारियों, मठ-मंदिरों और घाटों को बाढ़ से जो भी नुकसान हुआ है, उसमें सरकार की ओर से सहयोग की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले ही निर्देश दे रखा है कि बाढ़ या अग्निकांड में किसी गरीब अथवा किसी अन्य व्यक्ति का पूरा घर नष्ट हो जाता है तो पात्रता के अनुसार उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नया आवास उपलब्ध कराया जाए। यदि वह प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पात्र नहीं है तो मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत नया आवास और जमीन का पट्टा तत्काल उपलब्ध कराया जाए।

    उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की भी समुचित व्यवस्था की गई है। जहां जलजमाव हो गया है या अत्यधिक पानी आने के कारण लोग घिर गए हैं, उन्हें सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाया जाए। राहत शिविरों में प्रभावित लोगों के लिए भोजन, सुरक्षा, चिकित्सा सहित हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    आप नहीं रह सकते तो हमारी जनता सूखा ब्रेड खाकर क्यों रहेगी
    सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 में बाढ़ राहत कार्यों के निरीक्षण का प्रसंग साझा करते हुए कहा कि उस समय उन्होंने अधिकारियों से पूछा था कि पीड़ित परिवारों को क्या सहायता दी जा रही है। जवाब में सूखा ब्रेड बताया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा था कि यदि आपको 10 दिन तक केवल सूखा ब्रेड दिया जाए तो क्या आप रह पाएंगे। यदि आप नहीं रह सकते तो हमारी जनता क्यों रहेगी। इसके बाद उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए पूरी राहत सामग्री की किट तैयार करने के निर्देश दिए।

    राहत सामग्री में 26 सामान हैं, इसका वजन लगभग 50 किलो
     सीएम योगी ने कहा कि हर जरूरतमंद परिवार को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें 10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, 2 किलो अरहर की दाल, 1 लीटर रिफाइंड या सरसों का तेल, चना, लाई, मिर्च, मसाला, धनिया और हल्दी सहित अन्य आवश्यक सामग्री शामिल है। उन्होंने कहा कि खाद्य सामग्री के साथ प्रभावित परिवारों को डिग्निटी किट भी उपलब्ध कराई जाती है। बाल्टी, मग, ढक्कनयुक्त बाल्टी और बरसाती सहित आवश्यक वस्तुएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस तरह राहत सामग्री के माध्यम से 26 सामान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका वजन लगभग 50 किलो है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आपदा राहत के लिए मिलने वाली धनराशि प्रत्येक पीड़ित परिवार तक बिना किसी भेदभाव के पहुंचती है।
    उन्होंने कहा कि इस मौसम में सांप के बिलों और अन्य स्थानों पर पानी भरने के कारण सांप, बिच्छू और जंगली जानवर बाहर निकल आते हैं। ऐसे में सभी स्वास्थ्य केंद्रों, चाहे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हों या जिला चिकित्सालय में आवश्यक दवाओं और वैक्सीन की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। सांप के काटने पर एंटी-स्नेक वेनम और कुत्ते या किसी जंगली जानवर के काटने पर एंटी-रेबीज वैक्सीन तत्काल और नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाए।

  • गन्ने की खेती में आएगी नई क्रांति, वैज्ञानिकों ने तैयार कीं 6 उन्नत किस्में; किसानों की बढ़ेगी कमाई

    गन्ने की खेती में आएगी नई क्रांति, वैज्ञानिकों ने तैयार कीं 6 उन्नत किस्में; किसानों की बढ़ेगी कमाई

    करनाल
    देश में चीनी उद्योग और गन्ना किसान इस समय दोहरी चुनौती से जूझ रहे हैं। वर्षों तक उत्तर भारत के खेतों में राज करने वाली गन्ने की वंडर किस्म सीओ-0238 में रेड रॉट (लाल सड़न) बीमारी के तेजी से फैलने से पैदावार और चीनी उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है।

    दूसरी ओर, गन्ने का रकबा घटने से चीनी मिलों के पेराई सत्र प्रभावित हो रहे हैं। इस बढ़ते संकट के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के करनाल, लखनऊ संस्थान और महाराष्ट्र के वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने ऐसी 6 उन्नत प्रजातियां तैयार की हैं, जो देश के चीनी उद्योग को नई संजीवनी देने जा रही हैं।

    शोध और विकास के किस मुहाने पर खड़ी हैं नई प्रजातियां?
    1.गन्ना प्रजनन अनुसंधान संस्थान करनाल l सीओ-16030: यह किस्म अंतिम रिलीज प्रक्रिया में है। चीनी मिलों में इसके शुद्ध बीज बढ़ाने का काम चल रहा है ताकि किसानों को जल्द व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कराया जा सके। l

    सीओ-17018: यह अगेती किस्म वर्तमान में अखिल भारतीय समन्वित गन्ना अनुसंधान परियोजना (एआइसीआरपी) के तहत एडवांस्ड वैराइटल ट्रायल के चरण में है। विज्ञानी इसके शर्करा प्रतिशत और रोग प्रतिरोधकता की गहन निगरानी कर रहे हैं।

    2. भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आइआइएसआर) लखनऊ
    सीओ-एलके14201: यह किस्म शोध का चरण सफलतापूर्वक पार कर भारत सरकार की केंद्रीय प्रजाति विमोचन समिति (सीवीआरसी) द्वारा नोटिफाइड हो चुकी है। वर्तमान में यह उत्तर प्रदेश व मध्य भारत में किसानों के खेतों तक पहुंच चुकी है।

    सीओ-एलके 15201 : इस अगेती किस्म ने राष्ट्रीय परीक्षण पूरे कर लिए हैं। आइआइएसआर लखनऊ के फार्मों पर इसके शुद्ध बीजों का संवर्धन कर इसे राज्य स्तरीय मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया गया है।

    3. वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (वीएसआइ), पुणे महाराष्ट्र
    वीएसआइ 434: महाराष्ट्र और प्रायद्वीपीय भारत के लिए यह उच्च-शर्करा किस्म आधिकारिक रूप से रिलीज हो चुकी है और चीनी मिलों के कमान क्षेत्रों में व्यापक रूप से बुआई शुरू कर दी गई है।

    सीओ-एम12085: वीएसआइ के प्रयास से विकसित यह किस्म नोटिफाइड होकर महाराष्ट्र के किसानों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। यह विशेषकर पेड़ी फसल और जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगी।

    देश में गिरते चीनी उत्पादन में संकटमोचन बनेंगी गन्ने की छह नई प्रजातियां
    एसबीआइ करनाल से डॉ. रविंद्र ने बताया कि छह नई किस्मों को 14 प्रतिशत या इससे भी ऊपर रिकवरी रेट के साथ धरातल पर उतारने का प्रयास विज्ञानियों द्वारा किया जा रहा है। सीओ-16030, सीओएलके 14201 और वीएसआइ 434 जैसी अगेती किस्में 9 से 10 महीने में पककर तैयार हो जाती हैं। इनसे पेराई सत्र की शुरुआत में ही 14 प्रतिशत तक चीनी रिकवरी मिलेगी, कई क्षेत्रों में आंकड़ा इससे भी पार जा सकता है। खास बात ये भी है कि यह रेड राट से पूर्ण सुरक्षित है।

    l आइसीएआर के एसबीआइ क्षेत्रीय केंद्र करनाल, आइआइएसआर लखनऊ और महाराष्ट्र के वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट में तैयार की जा रही हैं यह अत्याधुनिक किस्में l सर्वाधिक 13 से 14 प्रतिशत रिकवरी देने वाली किस्म सीओ-15023 एकल किस्म पर निर्भरता जोखिम भरी, इसलिए छह नई प्रजातियां इस संकट का करेंगी स्थायी समाधान

     

  • गंगा के बढ़ते जलस्तर से बिहार में खतरा बढ़ा, डाउनस्ट्रीम जिलों में अलर्ट; 11 जिलों में बाढ़ का असर

    गंगा के बढ़ते जलस्तर से बिहार में खतरा बढ़ा, डाउनस्ट्रीम जिलों में अलर्ट; 11 जिलों में बाढ़ का असर

    पटना
    पटना में गंगा नदी विकराल रूप धारण कर चुकी है। गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि औरहा गांधी घाट पर जलस्तर के उच्चतम बाढ़ स्तर (Highest Flood Level) को पार करने के बाद अब पानी का दबाव डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहेगा। इसका प्रभाव अगले 1 से 3 दिनों तक हाथीदह एवं उसके बाद के डाउनस्ट्रीम गेज स्टेशनों पर देखने को मिल सकता है तथा यह हाथीदाह में पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर सकता है। इसके मद्देनजर बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, कटिहार जिले के गंगा के किनारे वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।

    गांधी घाट पर बढ़े हुए जलस्तर की लहर के डाउनस्ट्रीम की ओर बढ़ने को देखते हुए संबंधित पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय अधिकारियों को सतर्क रहने तथा जलस्तर की लगातार निगरानी करने को कहा गया है। साथ ही, नदी के जलस्तर, तटबंधों, संवेदनशील स्थलों एवं निचले इलाकों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें।

    बिहार में 11 जिलों के 66 प्रखंडों की 330 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का पानी फैल गया है। आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि इससे 19.57 लाख आबादी प्रभावित हुई है। बाढ पीड़ितों के बीच राहत-बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। 110 सामुदायिक रसोई केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। 326 बाढ़ शरणार्थी शिविरों में भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।

    छपरा में मही नदी का बांध टूटा
    छपरा में दरियापुर के सेमरहिया-मोहन कोठियां के पास रविवार की सुबह मही नदी का बांध टूट गया। बांध टूटने की वजह से छह से अधिक पंचायत बाढ़ की चपेट में आ गए। बांध की मरम्मत का प्रयास किया जा रहा है। बांध टूटने के बाद स्थिति को देखते हुए अब सीओ कैंप कर रहे हैं। सारण डीएम भी दरियापुर के लिए रवाना हो चुके हैं। बता दें कि इससे पहले शुक्रवार की देर रात दिघवारा में भी मही नदी का बांध टूटा था। इधर, एनएच-19 पर भी बाढ़ के पानी का तेज बहाव हो रहा है।

    मुंगेर: महाने नदी पर बना डायवर्सन चार दिन में दूसरी बार बहा
    मुंगेर जिले में टेटिया बंबर प्रखंड के बरसंडा के समीप महाने नदी पर पुल निर्माण के लिए बनाया गया अस्थायी डायवर्सन चार दिनों के अंदर दूसरी बार तेज धारा में बह गया। इससे प्रखंड की आधी से अधिक आबादी का थाना, अस्पताल और बंबर बाजार से एक बार फिर सीधा संपर्क टूट गया है। जानकारी हो कि लगातार बारिश से महाने नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण गुरुवार सुबह डायवर्सन बह गया था। विभाग के निर्देश पर संवेदक द्वारा मिट्टी डालकर उसे पैदल और दोपहिया वाहनों के चलने लायक बनाया गया था, लेकिन शनिवार रात हुई तेज बारिश के बाद नदी में आई बाढ़ में एक बार फिर डायवर्सन बह गया है।

    इससे प्रखंड की आधी से अधिक आबादी का थाना, अस्पताल, बंबर बाजार से सीधा संपर्क भंग हो गया। संपर्क भंग होने से आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत मरीजों और स्कूली बच्चों को हो रही है। लोगों को लंबी दूरी तय कर आवागमन करना पड़ रहा है।

  • झारखंड के खजाने पर GST की मार, अगस्त में कुल कलेक्शन 10.92% घटा; वार्षिक लक्ष्य भी चुनौती

    झारखंड के खजाने पर GST की मार, अगस्त में कुल कलेक्शन 10.92% घटा; वार्षिक लक्ष्य भी चुनौती

     रांची
    वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वाणिज्यिक कर विभाग के ताजा आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में विभाग के अधिकारियों के प्रयास का असर ताे दिख रहा है, लेकिन इसके बावजूद जीएसटी कलेक्शन लक्ष्य से काफी कम है।

    रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2026 में राजस्व संग्रह में पिछले साल की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है। विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में कुल सब-टोटल कलेक्शन 1,709.50 करोड़ रुपये रहा, जो अगस्त 2025 के 1,919.11 करोड़ रुपये से 10.92 प्रतिशत कम है।

    रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स संग्रह में सबसे बड़ी गिरावट जीएसटी कैटेगरी में देखी गई। प्रदेश के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इसकी संभावना पहले ही व्यक्त की थी कि राज्य सरकार के राजस्व संग्रह पर असर पड़ सकता है।

    अगस्त 2026 में कुल जीएसटी कलेक्शन 937.11 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल इसी महीने के 1,200.77 करोड़ रुपये के मुकाबले 21.96 प्रतिशत कम है।

    इसमें इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स सेटलमेंट में सबसे ज्यादा 58.19 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो 449.10 करोड़ रुपये से घटकर सिर्फ 187.77 करोड़ रुपये रह गई।

    वैट संग्रह से मिली राहत
    आंकड़ों को देखें तो राहत की बात यह रही कि वैट में अच्छी बढ़त देखने को मिल रही है। अगस्त 2026 में वैट कलेक्शन 695.90 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 602.76 करोड़ रुपये से 15.45 प्रतिशत अधिक है।

    इसी तरह, कुल नान-जीएसटी कलेक्शन में भी 7.52 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो 772.39 करोड़ रुपये रही। हालांकि प्रोफेशनल टैक्स संग्रह में भारी गिरावट 46.63 प्रतिशत दर्ज की गई।

    विभाग के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण
    वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल वार्षिक लक्ष्य 24 हजार करोड़ रुपये रखा गया है। अगस्त 2026 तक (अप्रैल से अगस्त तक) विभाग ने 8,172.70 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जो लक्ष्य का सिर्फ 34.05 प्रतिशत है।

    अगर इसी रफ्तार से गिरावट जारी रही, तो विभाग के लिए वार्षिक लक्ष्य को पूरा करना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। कुल कलेक्शन में भी पिछले वर्ष की तुलना में 15.14 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।

    वरीय अधिकारियों को मानना है कि आइजीएसटी सेटलमेंट में आई भारी कमी चिंता का विषय है, जबकि वैट कलेक्शन में बढ़त से राज्य के घरेलू कर राजस्व में कुछ सुधार का संकेत मिलता है। विभाग अब बाकी बचे महीनों में लक्ष्य हासिल करने के लिए रणनीति बनाने में जुट गया है।

    अप्रैल से अगस्त तक राजस्व संकलन में झारखंड पांच प्रतिशत पीछे है, नवंबर आते-आते हम इसकी भरपाई के लिए पूरा प्रयास करेंगे और अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि इसकी भरपाई करते हुए आगे बढ़ जाएंगे। जिन अधिकारियों का प्रयास बेहतर होगा उन्हें विभाग पुरस्कृत करेगी और जिनका नहीं होगा उन्हें दंडित भी किया जा सकता है।
    -राधाकृष्ण किशोर, वित्त मंत्री, झारखंड सरकार।