Category: राज्य

  • अर्श डल्ला गैंग के खिलाफ पुलिस का एक्शन, पंजाब में 2 आरोपी गिरफ्तार; हथियारों का जखीरा बरामद

    अर्श डल्ला गैंग के खिलाफ पुलिस का एक्शन, पंजाब में 2 आरोपी गिरफ्तार; हथियारों का जखीरा बरामद

    मानसा.

    जिला पुलिस ने अर्श डल्ला गैंग के दो गुर्गो को पांच पिस्टल और कारतूस समेत गिरफ्तार किया है। पुलिस गिरफ्तार किए गए इन आरोपितों का अदालत से पुलिस रिमांड हासिल करके गहराई से जांच करेगी कि उनका आगे मकसद क्या था।

    एसएसपी वैभव चौधरी ने प्रेस काॅन्फ्रेंस दौरान बताया कि ऑपरेशन प्रहार मुहिम के तहत गश्त के दौरान पुलिस नेहरू काॅलेज की बैक साइड पहुंची तो दो आरोपित थैले से कुछ निकालकर अपने डब्ब और जेब में कुछ डालते दिखाई दिए। पुलिस पार्टी की ओर से काबू किए गए आरोपितों की पहचान शहर के वार्ड नंबर 9 वासी अमृत पाल सिंह उर्फ जैकी पुत्र गोरा सिंह और गांव मूसा वासी कुलदीप सिंह उर्फ घुग्गी पुत्र करनैल सिंह के रूप में हुई। पुलिस ने दोनों आरोपितों के कब्जे से 4 पिस्टल 32 बोर समेत 12  कारतूस और 315 बोर की देसी पिस्टल बरामद करके उनके खिलाफ थाना सिटी-2 में आर्म्स एक्ट तहत मामला दर्ज किया गया।

    एसएसपी ने बताया कि प्राथमिक पूछताछ के दौरान सामने आया कि वे अर्श डल्ला गैंग के लिए काम करते थे और अवैध तरीके से असले की सप्लाई वे मध्य प्रदेश से मंगवाते थे। अमृत पाल सिंह के खिलाफ 3 और कुलदीप सिंह के खिलाफ पहले 2 मामले एनडीपीएस,आर्म्ज और लूटपाट के दर्ज है। एसएसपी ने बताया कि पुलिस की मुस्तैदी से दोनों आरोपितों को गिरफ्तारी करने से बड़ी वारदात टल गई है। उन्होंने बताया कि पुलिस रिमांड के दौरान बरामद हथियारों का सोत्र और इससे जुड़े आरोपितों के बारे ओर जानकारी हासिल की जाएगी। पुलिस लोगों की सुरक्षा और शांति को यकीनी बनाने के लिए बचनबद्ध है और गैर कानूनी गतिविधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई जारी रखेगी। इस दौरान एसपी जसबिंदर सिंह, डीएसपी जसविंदर सिंह और पुशपिंदर सिंह भी मौजूद थे।

  • चंडीगढ़ में PU अंडरपास को मिली रफ्तार, 2019 से लंबित प्रस्ताव अब मंजूरी की ओर; खर्च होंगे ₹8.40 करोड़

    चंडीगढ़ में PU अंडरपास को मिली रफ्तार, 2019 से लंबित प्रस्ताव अब मंजूरी की ओर; खर्च होंगे ₹8.40 करोड़

    चंडीगढ़

    चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़े दो बड़े अंडरपास प्रोजेक्ट अब फाइलों से निकलकर अगले चरण में पहुंच गए हैं। पीयू और पीजीआई के बीच बनने वाले अंडरपास का टेंडर जल्द आवंटित किया जाएगा।

    पीयू-पीजीआई अंडरपास का प्रस्ताव वर्ष 2019 में तैयार हुआ था। इसके बाद डिजाइन और सुविधाओं में कई बदलाव किए गए। अब करीब सात साल बाद इसका निर्माण शुरू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी है। इस प्रोजेक्ट पर कुल 8.40 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

    25 हजार लोगों की रोजाना आवाजाही
    पंजाब यूनिवर्सिटी और PGI के बीच रोजाना करीब 25 हजार लोग पैदल आवाजाही करते हैं। इनमें PGI आने वाले मरीज, उनके परिजन, पीयू के छात्र और कर्मचारी शामिल हैं। पहले पीयू के गेट नंबर-1 के सामने सड़क पार करने के लिए एक रास्ता था, लेकिन वहां वाहनों की आवाजाही बढ़ने से जाम लगने लगा। इसके बाद यह रास्ता बंद कर दिया गया।

    अब लोगों को नेहरू अस्पताल के निकास द्वार के सामने से सड़क पार करनी पड़ती है। यहां दोनों तरफ भारी ट्रैफिक होने के कारण खासकर मरीजों और बुजुर्गों को परेशानी होती है। पीजीआई के मुख्य गेट से आने-जाने वालों को भी लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।

    मई में निकला टेंडर जल्द आवंटन पीयू और पीजीआई के बीच बनने वाले अंडरपास के लिए मई में टेंडर जारी किया गया था। टेंडर प्रक्रिया में शामिल कंपनियों के साथ शर्तों को लेकर बातचीत हुई। अब सहमति बनने के बाद टेंडर जल्द आवंटित करने की तैयारी है। अंडरपास प्रोजेक्ट की कुल लागत 8.40 करोड़ रुपए है। इसमें से 6.73 करोड़ रुपए निर्माण कार्य पर खर्च होंगे, जबकि 1.67 करोड़ रुपए भूमिगत सीवरेज और ड्रेनेज लाइनों को बदलने पर खर्च किए जाएंगे।

    अंडरपास निर्माण से पहले इलाके में मौजूद भूमिगत सीवरेज और ड्रेनेज व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। पीजीआई के एडवांस न्यूरो साइंस सेंटर की ओर जाने वाले गेट नंबर-3 के छोटे चौक से लेकर सेक्टर-14 और 15 के चौक तक लाइनों को बदला जाएगा। नई लाइनें बिछाने के बाद उन्हें मौजूदा सीवरेज और ड्रेनेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

    पहले सिर्फ सीढ़ियां, सुविधा के लिए बदला प्लान इन सात वर्षों में अंडरपास के डिजाइन में कई बदलाव हुए। शुरुआती योजना में अंडरपास के अंदर केवल सीढ़ियों का प्रावधान था। बाद में पीजीआई आने वाले मरीजों और अन्य लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन में बदलाव किया गया। अंडरपास के अंदर बनने वाली दुकानों की संख्या भी कम की गई। पहले यहां 12 दुकानें बनाने की योजना थी, जिसे घटाकर 9 दुकानें कर दिया गया, ताकि दुकानों और आवाजाही के लिए अधिक जगह मिल सके।

    नॉर्थ-साउथ कैंपस के बीच जाम से समाधान
    पीयू के सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस में पिछले डेढ़ दशक के दौरान काफी विस्तार हुआ है। वर्ष 2010 तक यहां मुख्य रूप से डेंटल कॉलेज और यूआईईटी थे, लेकिन बाद में पंजाब यूनिवर्सिटी के कई साइंस विभाग और तीन हॉस्टल भी यहां बनाए गए। इसके कारण नॉर्थ और साउथ कैंपस के बीच छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की आवाजाही बढ़ी है।

    इलाके में जाम की समस्या भी बढ़ गई है
    दूसरी ओर, मध्य मार्ग और दक्षिण मार्ग पर भारी ट्रैफिक के कारण इस इलाके में जाम की समस्या भी बढ़ गई है। इसी को देखते हुए पीयू के गेट नंबर-3 के पास नॉर्थ और साउथ कैंपस को जोड़ने के लिए दूसरा अंडरपास बनाने की योजना तैयार की गई।

    चीफ आर्किटेक्ट के पास पहुंचा डिजाइन
    प्रशासनिक मंजूरी के बाद इंजीनियरिंग विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया था। कंसल्टेंसी रिपोर्ट तैयार होने के बाद अब प्रस्तावित डिजाइन को चंडीगढ़ टाउन प्लानिंग विभाग और चीफ आर्किटेक्ट कार्यालय की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।

    सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस तक पहुंच बनाई जाए
    प्रस्तावित योजना के अनुसार, गेट नंबर-3 के पास टीचर फ्लैट्स के सामने से अंडरपास निकालकर सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस तक पहुंच बनाई जाएगी। पार्क की ओर या टीचर फ्लैट्स की दूसरी साइड से अंडरपास बनाने के विकल्प पर योजना तैयार की गई है।

  • पंजाब में पावर कट से बढ़ी चिंता, इंजीनियरों ने मान सरकार से की बिजली उत्पादन बढ़ाने की मांग

    पंजाब में पावर कट से बढ़ी चिंता, इंजीनियरों ने मान सरकार से की बिजली उत्पादन बढ़ाने की मांग

    पटियाला 

    पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखा है। एसोसिएशन ने राज्य में थर्मल और सोलर बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की मांग की है। महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल ने कहा कि पंजाब का बिजली क्षेत्र वित्तीय संकट और बिजली की कमी का सामना कर रहा है।

    बिजली की बढ़ती कमी से उद्योग, खेती और घरेलू खपतकर्ता प्रभावित हो रहे हैं। तत्काल कदम न उठाने पर आने वाले वर्षों में हालात गंभीर होंगे। पंजाब की अपनी बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ती मांग से बहुत कम है। इससे पावरकाॅम को ऊर्जा विनिमय से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। राजपुरा और तलवंडी साबो के निजी थर्मल प्लांट कोयला भंडार बनाए रखने में विफल रहे हैं। इन प्लांटों में कोयले की भारी कमी है। यह सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के नियमों का सीधा उल्लंघन है। निवेश में देरी से महंगी बिजली खरीद पर निर्भरता बढ़ेगी।

    इंजीनियरों के अनुसार पंजाब सरकार की ओर से सब्सिडी की राशि का भुगतान लंबित है। इसके अलावा कई सरकारी विभागों पर बिजली बिलों का भुगतान नहीं करने के कारण भी पावरकॉम पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है।

    एसोसिएशन ने दावा किया है कि एआरआर में खर्चों का अनुमान कम रखे जाने के कारण टैरिफ में अनुचित कटौती हुई है। इससे पावरकॉम के राजस्व पर असर पड़ रहा है। इंजीनियरों के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में पावरकॉम को करीब 7,800 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है।

    संकट के प्रमुख कारण
    एसोसिएशन के अनुसार, पंजाब को गैर-सौर और रात की उच्चतम मांग पूरी करने के लिए थर्मल उत्पादन क्षमता तुरंत बढ़ानी होगी। ऐसा न करने पर राज्य हर गर्मी में गंभीर बिजली की कमी के चक्र में फंसा रहेगा। पंजाब बिजली की मांग पूरी करने के लिए राज्य के बाहर से खरीदी गई बिजली और निजी उत्पादकों पर तेजी से निर्भर हो रहा है। इस आर्थिक बोझ के कारण तत्काल नीति समीक्षा की आवश्यकता है। क्षमता बढ़ाने में लगातार देरी से बिजली मांग और इन-स्टेट उत्पादन क्षमता का अंतर बढ़ रहा है।

    वित्तीय चुनौतियां और भविष्य की मांग
    पावरकाॅम की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। इसका मुख्य कारण पंजाब सरकार का बकाया सब्सिडी का भुगतान न करना है। मौजूदा वित्तीय साल में पावरकाॅम को करीब 7,800 करोड़ रुपये के राजस्व की कमी का सामना करना पड़ सकता है। एसोसिएशन के सुझावों पर ध्यान नहीं दिया गया जबकि औद्योगिक विस्तार, खेती, घरेलू खपत और डेटा सेंटर जैसे उच्च-भार वाले क्षेत्रों से भविष्य में बिजली की जरूरत काफी बढ़ेगी। राज्य-क्षेत्र बिजली उत्पादन परियोजनाओं में निवेश से पंजाब के युवाओं को रोजगार का बड़ा मौका मिलेगा।

    गर्मियों में बढ़ जाती है मांग
    पत्र के अनुसार गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही पीक डिमांड के समय पंजाब का अपना बिजली उत्पादन अपेक्षाकृत कम हो जाता है। ऐसे में मांग पूरी करने के लिए बिजली एक्सचेंज से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ती है। इससे पावरकॉम पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है।

    एसोसिएशन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे जलविद्युत उत्पादन वाले राज्य भी अब बिजली बैंकिंग के बजाय खुले बाजार में बिजली बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे पंजाब के लिए सस्ती बिजली की उपलब्धता और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    निजी बिजली संयंत्रों पर निर्भरता पर सवाल
    इंजीनियरों ने निजी थर्मल प्लांटों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इससे पंजाब का बड़ा पूंजी निवेश निजी क्षेत्र की ओर जा रहा है। एसोसिएशन ने सरकार से दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकारी क्षेत्र में नए बिजली उत्पादन प्रोजेक्ट शुरू करने और प्रदेश की अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए तत्काल नीति बनाने की मांग की है।

     

     

  • SIR के री-वेरिफिकेशन में चौंकाने वाले मामले, घर में रह रहे लोगों को दिखाया ‘शिफ्टेड’

    SIR के री-वेरिफिकेशन में चौंकाने वाले मामले, घर में रह रहे लोगों को दिखाया ‘शिफ्टेड’

    नई दिल्ली
    राजधानी दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कई गड़बड़ियां सामने आ रही है। कुछ निजी समूह की ओर से किए गए री-वेरिफिकेशन में चौकाने वाले मामले सामने आए है। मंगोलपुरी में रहने वाले कामता प्रसाद ने वोटर लिस्ट में नाम कांता प्रसाद होने के चलते उसे बदलने के लिए आवेदन किया था। लेकिन, उसका निपटारा नहीं हो सका। जब ड्राफ्ट रोल जारी हुआ तो उन्हें मृतक की सूची में डाल दिया गया। अब वह समझ नहीं पा रहे हैं कि आगे क्या करें।

    'जन सरोकार', 'एमकेएसएस' और 'वोटर अधिकार मंच' के बैनर तले वॉलंटियर्स ने वाई-ब्लॉक के 8 पोलिंग बूथों पर करीब 10 हजार वोटरों का घर-घर जाकर सर्वे किया। हाल में

    दिल्ली में चल रहे SIR में मिल रहीं गड़बड़ियां
    कुछ निजी समूह की ओर से किए गए री-वेरिफिकेशन में चौकाने वाले मामले सामने आए मंगोलपुरी में रहने वाले कामता प्रसाद के आवेदन को मृतक की सूची में डाल दिया गया।
    घर पर रह रहे लोगों को सरकारी कागज में शिफ्टेड दिखा दिया गया
    आयोजित एक सार्वजनिक सुनवाई के दौरान इस पीपुल्स ऑडिट की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें खुलासा हुआ कि सैकड़ों ऐसे लोग जो अपने घरों पर रह रहे हैं, उन्हें सरकारी कागजों में शिफ्टेड दिखा दिया गया। कुछ को डेथ की सूची में भी डाला गया है। ऑडिट आंकड़ों के मुताबिक वाई ब्लॉक के लगभग 9,600 रजिस्टर्ड वोटरों में से सिर्फ 5,800 लोगों के नाम ही ड्राफ्ट SIR रोल में मिल सका।

    वहीं करीब 2,800 लोगों को एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड या डुप्लीकेट (ASDD) की लिस्ट में डाल दिया गया, जबकि 1,800 से ज्यादा वोटर ऐसे निकले जिनका नाम न तो ड्राफ्ट रोल में था और न ही ASDD लिस्ट में, हालांकि उन्होंने 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में वोट डाला था।

    सुप्रीम कोर्ट में पीड़ितों ने अपनी आपबीती सुनाई
    जन सुनवाई के दौरान पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस मदन लोकुर, बेजवाड़ा विल्सन, एनी राजा और जनरल अनिल वर्मा समेत कई जानी-मानी हस्तियों की जूरी के सामने पीड़ितों ने अपनी आपबीती सुनाई। हाउस नंबर 2267 के निवासी कांता प्रसाद ने बताया कि वह पूरी तरह स्वस्थ है और पिछली बार वोट भी दिया था, लेकिन नाम सुधरवाने की अर्जी देने के बावजूद उन्हें वोटर लिस्ट में डेथ में दर्ज कर दिया गया।

    आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2025 में दिल्ली में 1.56 करोड़ वोटर थे, जो SIR शुरू होने तक घटकर 1.45 करोड़ रह गए, यानी सीधे 11 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम कट गए। बीएलओ ने दूसरे फॉर्म तक नहीं दिए वोटर अधिकार मंच की एक अधिकारी ने बताया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान बीएलओ पर सबकुछ निर्भर था। बीएलओ ने जिनके फॉर्म गुम हो गए, उन्हें दूसरे फॉर्म तक मुहैया नहीं कराए। अगर ड्राफ्ट रोल से पहले वॉर्ड कमेटियों या ग्राम सभाओं की मदद ली जाती, तो कई लोगों के बारे में सटीक जानकारी मिलती।

  • UP चुनाव की तैयारी तेज, नितिन नवीन पश्चिमी यूपी से करेंगे शुरुआत; अमित शाह का दौरा भी प्रस्तावित

    UP चुनाव की तैयारी तेज, नितिन नवीन पश्चिमी यूपी से करेंगे शुरुआत; अमित शाह का दौरा भी प्रस्तावित

    पटना
    भारतीय जनता पार्टी ने यूपी विधानसभा चुनाव के लिए प्रदेश का सियासी माहौल गर्माने की तैयारी कर ली है। पार्टी इसी हफ्ते इसकी शुरुआत करने जा रही है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष राजधानी लखनऊ आएंगे। बीएल संतोष के साथ यूपी प्रभारी तावड़े भी दोबारा आएंगे। नितिन पश्चिमी यूपी से अपने दौरों की शुरुआत करेंगे। वहीं बीएल संतोष राजधानी लखनऊ में संगठनात्मक तैयारियों को परखेंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसी माह केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का भी यूपी दौरा प्रस्तावित है।

    यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने सियासी बिसात बिछा दी है। पार्टी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर यह चुनाव लड़ने जा रही है। योगी भी बीते काफी समय से पूरी तरह चुनावी मोड में हैं। उन्होंने प्रदेश के मंडलों के साथ ही जिलों के भी ताबड़तोड़ दौरे किए हैं। उधर, संगठन की बात करें तो प्रदेश और क्षेत्रीय टीमों की घोषणा के बाद अब जल्द मोर्चों के गठन की तैयारी है। इसके साथ ही पार्टी बूथ और शक्ति केंद्र स्तर पर भी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की मुहिम चला रही है।

    बीएल संतोष तैयारियों का लेंगे जायजा
    प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े व सह प्रभारी जगदीश भाई पटेल का दो दिनी दौरा रविवार को ही खत्म हुआ। हालांकि यह दौरा परिचयात्मक होने तक ही सीमित रहा। इस दौरे में प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक भी नहीं हुई। अब 10 और 11 सितंबर को राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष का लखनऊ दौरा प्रस्तावित है। वे यहां संगठन के मोर्चे पर तैयारियों का जायजा लेंगे। खासतौर से मीडिया और सोशल मीडिया को लेकर बात करेंगे क्योंकि इधर, विपक्षी दलों की सक्रियता भी सोशल मीडिया पर काफी अधिक है। बीएल संतोष का दौरा पहले सात व आठ सितंबर को प्रस्तावित था किंतु अंतिम समय पर वह निरस्त हो गया था।

    नितिन पश्चिम क्षेत्र से करेंगे शुरुआत
    उधर, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन भी प्रदेश के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों का दौरा करेंगे। वे वहां सियासी आबोहवा का आकलन करने के साथ ही कार्यकर्ताओं में जोश भी भरेंगे। उनके इन दौरों की शुरुआत पश्चिम उत्तर प्रदेश से होने जा रही है। उनका दौरा इसी सप्ताह मेरठ से शुरू होने की चर्चा है। इसके अलावा गृहमंत्री अमित शाह भी अब यूपी का रुख करेंगे। उनका दौरा इसी माह प्रस्तावित है। अमित शाह वर्ष 2013 से लगातार यूपी में सक्रिय रहे हैं। यहां के प्रभारी भी रह चुके हैं। केंद्रीय नेतृत्व के दौरों को लेकर पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने तैयारी शुरू कर दी है।

  • मान्यता नहीं, MRI भी नहीं थी; हाई कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज को छात्र को ₹7 लाख मुआवजा देने को कहा

    मान्यता नहीं, MRI भी नहीं थी; हाई कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज को छात्र को ₹7 लाख मुआवजा देने को कहा

    रांची
    झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने कहा है कि कोई मेडिकल कॉलेज किसी छात्र से ऐसे पीजी कोर्स का बांड नहीं भरवा सकता, जिसकी मान्यता ही नहीं है।

    अदालत ने कहा कि जब दाखिला ही गलत और भ्रामक आधार पर दिया गया हो, तो उससे जुड़ा बांड भी कानूनन प्रभावी नहीं रह जाता। अदालत ने महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (एमजीएम), जमशेदपुर को चिकित्सक से बांड और स्टाइपेंड के रूप में जमा 39,94,645 रुपये लौटाने का आदेश दिया है।

    साथ ही मानसिक परेशानी और करियर के महत्वपूर्ण दो वर्ष खराब होने के एवज में प्रार्थी छात्र को सात लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। एमजीएम ने बिना मान्यता तथा आवश्यक उपकरण के नामांकन ले लिया था।

    मामला वर्ष 2019-21 सत्र में डिप्लोमा इन मेडिकल रेडियो डायग्नोसिस (डीएमआरडी-रेडियोलाजी) में दाखिले से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज , इलाहाबाद से एमबीबीएस किया था।

    उसने वर्ष 2019 में नीट-पीजी की परीक्षा पास की। काउंसिलिंग के बाद उसे एमजीएम मेडिकल कॉलेज , जमशेदपुर में डीएमआरडी-रेडियोलाजी की सीट मिली।

    उसने यह सीट स्वीकार कर ली और पहले से मिली सीट छोड़कर एमजीएम में दाखिला ले लिया। दाखिले के समय कॉलेज ने उससे एक बांड भरवाया था।

    इसके तहत पढ़ाई बीच में छोड़ने पर 30 लाख रुपये देने के साथ स्टाइपेंड की राशि लौटाने की शर्त थी। कॉलेज ने उसके मूल प्रमाणपत्र भी अपने पास रख लिया था।

    न कोर्स मान्य था, न रेडियोलाजी में पर्याप्त व्यवस्था
    याचिकाकर्ता के अनुसार, कॉलेज में दाखिला लेने के बाद उसे पता चला कि रेडियोलाजी विभाग में पर्याप्त शिक्षक और मार्गदर्शन की व्यवस्था नहीं है।

    बाद में उसे यह भी जानकारी मिली कि जिस डीएमआरडी-रेडियोलाजी पाठ्यक्रम में उसका दाखिला हुआ है, उसे तत्कालीन मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआइ) की मान्यता प्राप्त नहीं है।

    इसके बाद उसने आइएनआइ-सीईटी परीक्षा दी और चयन होने पर एमजीएम कॉलेज से अपने मूल प्रमाणपत्र वापस मांगे, लेकिन कॉलेज ने दस्तावेज नहीं लौटाए। इस कारण वह चयन के बाद भी वहां दाखिला नहीं ले सका।

    बाद में उसने नीट-पीजी 2021 में फिर परीक्षा दी और आल इंडिया रैंक 270 हासिल कर संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ में दाखिला लिया।

    MRI तक नहीं था, सीटी स्कैन भी खराब
    अदालत ने मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था पर भी कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि रेडियोलाजी में पीजी डिप्लोमा कोर्स चलाने वाले कॉलेज के पास MRI मशीन तक नहीं थी।

    वहीं, उपलब्ध सीटी स्कैन मशीन भी काम नहीं कर रही थी। कोर्ट ने कहा कि पीजी कोर्स के लिए जरूरी उपकरणों और सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाना दाखिला लेने वाले छात्रों के साथ धोखे के समान है।

    एमसीआइ की भूमिका पर भी उठाए सवाल
    हाई कोर्ट ने तत्कालीन मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में एमसीआइ ने कॉलेज के खिलाफ उचित कार्रवाई क्यों नहीं की।

    कोर्ट ने टिप्पणी की कि नियामक संस्था ने भविष्य के चिकित्सकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से आंखें मूंद लीं और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की।

    अदालत ने काउंसिलिंग कराने वाली संस्था को भी जिम्मेदार माना। कोर्ट ने सवाल किया कि जब पाठ्यक्रम मान्यता प्राप्त नहीं था तो काउंसिलिंग में उस कॉलेज और पाठ्यक्रम की अनुशंसा कैसे की गई?

  • चंडीगढ़ में सियासी हलचल तेज, पार्षद रामचंद्र यादव को AAP ने निष्कासित किया

    चंडीगढ़ में सियासी हलचल तेज, पार्षद रामचंद्र यादव को AAP ने निष्कासित किया

    चंडीगढ़.

    आम आदमी पार्टी को नगर निगम चुनाव से पहले एक और बड़ा झटका लगने जा रहा है। आप के पार्षद रामचंद्र यादव मंगलवार को कांग्रेस में शामिल होंगे। वह अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ सेक्टर-35 स्थित चंडीगढ़ कांग्रेस भवन पहुंचकर कांग्रेस का हाथ थामेंगे।

    रामचंद्र यादव के कांग्रेस में जाने की सूचना मिलते ही आम आदमी पार्टी ने भी उनके खिलाफ कार्रवाई कर दी। पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए आप प्रभारी जमैल सिंह और प्रदेश अध्यक्ष विजेपाल यादव ने उन्हें पार्टी से निष्कासित करने के आदेश जारी कर दिए। रामचंद्र यादव पिछले काफी समय से आप नेताओं से दूरी बनाए हुए थे। पार्टी के साथ उनकी खटपट भी चल रही थी। जनवरी में हुए मेयर चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के बजाय डिप्टी मेयर पद के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया था। उस समय भी काफी चर्चा में रहे थे।

    हालांकि रामचंद्र यादव ने कहा था कि वह पार्टी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें भी चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए, इसलिए उन्होंने नामांकन दाखिल किया है। चुनाव के दिन उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया था। उनके इस कदम ने उस समय भी आप के भीतर चल रही नाराजगी को सामने ला दिया था। अब नगर निगम चुनाव से कुछ महीने पहले उनका कांग्रेस में जाना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। रामचंद्र यादव वार्ड नंबर 15 से पार्षद हैं। आगामी नगर निगम चुनाव के लिए वार्डों के आरक्षण का ड्रॉ 11 सितंबर को होना है।

    ऐसे में वार्ड 15 के आरक्षित होने की संभावना को भी उनके कांग्रेस में जाने की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। यदि वार्ड आरक्षित हो जाता है तो रामचंद्र यादव के लिए वहां से दोबारा चुनाव लड़ना संभव नहीं होगा। दूसरी ओर आप में रहते हुए किसी दूसरे वार्ड से टिकट मिलने की संभावना भी उनके लिए आसान नहीं दिखाई दे रही थी। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल होने को उनकी सोची-समझी राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस उन्हें आगामी चुनाव में टिकट देगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

    मुनव्वर के बाद अब रामचंद्र
    आप के पार्षद मुनव्वर के कांग्रेस में शामिल होने के बाद ही रामचंद्र यादव के भी कांग्रेस में जाने की चर्चाएं तेज हो गई थीं। मुनव्वर ने जुलाई में कांग्रेस का हाथ थामा था। उनके शामिल होने के बाद कांग्रेस के पार्षदों की संख्या नौ हो गई थी। हालांकि कांग्रेस ने दोनों पार्षदों को एक साथ पार्टी में शामिल कराने के बजाय अलग-अलग समय पर आप को झटका देने की रणनीति अपनाई। अब रामचंद्र यादव के कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस के पार्षदों की संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी।

    2021 में सबसे बड़ी पार्टी थी आप
    2021 के नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी 14 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। भाजपा को 12 और कांग्रेस को आठ सीटें मिली थीं, जबकि शिरोमणि अकाली दल के हरदीप सिंह ने एक सीट जीती थी। हरदीप सिंह बाद में आप में शामिल हो गए थे, जिसके बाद निगम में अकाली दल का कोई पार्षद नहीं बचा। इसके बाद आप के पार्षदों के लगातार पाला बदलने से पार्टी की संख्या घटती गई। सुमन शर्मा और पूनम भाजपा में शामिल हुईं, जबकि कई पार्षद कांग्रेस का हाथ थाम चुके हैं।

    मुनव्वर के कांग्रेस में जाने के बाद आप की संख्या और कम हुई और अब रामचंद्र यादव के जाने के बाद आप के पास महज आठ पार्षद रह जाएंगे। वहीं भाजपा और कांग्रेस लगातार आप के पार्षदों में सेंध लगाने में सफल रही हैं। ऐसे में 2026 के नगर निगम चुनाव से पहले दलों के बीच पार्षदों को अपने पाले में लाने की सियासत और तेज होने की संभावना है। कभी 14 पार्षदों के साथ सदन की सबसे बड़ी पार्टी रही आप अब आठ पार्षदों तक सिमट गई है। नेता प्रतिपक्ष का पद भी मुनव्वर के कांग्रेस में जाने के बाद आप के हाथ से निकल चुका है। अब रामचंद्र यादव के जाने से पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है।

    पार्टी     पार्षदों की संख्या –
    भाजपा     17
    कांग्रेस     10
    आम आदमी पार्टी     8
    शिरोमणि अकाली दल     0

    हरदीप सिंह के आप में शामिल होने के बाद से निगम में अकाली दल का कोई पार्षद नहीं है। इसके अलावा चंडीगढ़ के सांसद का सदन में अलग से मतदान अधिकार है।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में बदलेगी तस्वीर, योगी सरकार देगी बेहतर पेयजल और आसान आवागमन की सौगात

    ग्रामीण क्षेत्रों में बदलेगी तस्वीर, योगी सरकार देगी बेहतर पेयजल और आसान आवागमन की सौगात

    योगी सरकार का ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर पेयजल आपूर्ति के साथ सुगम आवागमन की सुविधा पर भी जोर

    अक्टूबर से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में वृहद स्तर पर चलेगा सड़क मरम्मत से जुड़ा अभियान

    पेयजल आपूर्ति के दौरान पाइप बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों को बारिश के बाद किया जाएगा ठीक

    पेयजल योजनाओं को समय से पूरा किया जाए, लापरवाही सामने आने पर होगी कार्रवाई: जलशक्ति मंत्री

    लखनऊ
     योगी सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर पेयजल आपूर्ति के साथ लोगों को सुगम आवागमन की सुविधा देने पर जोर दे रही है। इसी क्रम में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने मानसून के बाद अक्टूबर से पूरे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े स्तर पर सड़क की मरम्मत का अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को अभियान से जुड़ी सभी तैयारियां समय से पूरी करने को कहा है, ताकि पेयजल योजनाओं के लिए खोदी गई सड़कों को जल्द दुरुस्त कर ग्रामीणों को राहत दी जा सके।

    जलशक्ति मंत्री ने सोमवार को राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न पेयजल योजनाओं की मंडलवार समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछाने के दौरान कई स्थानों पर सड़कें खोदी गई हैं। मानसून के दौरान बारिश के कारण इन मार्गों पर लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अक्टूबर से अभियान चलाकर इन सड़कों को दोबारा भरकर, समतल करते हुए दुरुस्त किया जाए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं का काम पूरा होने के साथ लोगों को बेहतर सड़क सुविधा भी मिल सकेगी।

    क्षेत्र भ्रमण और रात्रि प्रवास पर भी जोर
    जलशक्ति मंत्री ने विभिन्न जोन के अभियंताओं और अधीक्षण अभियंताओं से क्षेत्र भ्रमण व रात्रि प्रवास के संबंध में फीडबैक लिया। उन्होंने सहायक अभियंताओं (एई) और अवर अभियंताओं (जेई) को भी रात्रि प्रवास करने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं के काम की मौके पर नियमित निगरानी हो सके।

    पेयजल योजनाओं को समय से पूरा करने के निर्देश
    निर्माणाधीन पेयजल योजनाओं की समीक्षा करते हुए स्वतंत्र देव सिंह ने सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय में जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए जरूरत के अनुसार मैनपावर बढ़ाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान
    जलशक्ति मंत्री ने अधिकारियों को जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेयजल योजनाओं के संचालन और जलापूर्ति व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए अधिकारी नियमित निगरानी करें। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार की जा रही पेयजल योजनाओं का बेहतर संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा और लोगों को लगातार पेयजल की सुविधा मिल सकेगी।

    अधिकारियों के काम की होगी निगरानी
    बैठक में मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं और अधिशासी अभियंताओं (एक्सईएन) को अपने अधीनस्थ अभियंताओं और संबंधित एजेंसियों के कार्यों की गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर अपर मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश भी दिए गए। इससे योजनाओं की प्रगति और अधिकारियों व कार्यदायी एजेंसियों के कामकाज की निगरानी को और मजबूत किया जा सकेगा।

    इस बैठक में नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह, जेएमडी (प्रशासन) डॉ. राजेश प्रजापति, जेएमडी प्रभाष कुमार, स्टेट कोऑर्डिनेटर डीके सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • जल संरक्षण के लिए हरियाणा सरकार का बड़ा कदम, DSR मशीन पर ₹40 हजार तक सब्सिडी

    जल संरक्षण के लिए हरियाणा सरकार का बड़ा कदम, DSR मशीन पर ₹40 हजार तक सब्सिडी

     चंडीगढ़
     लगातार गिरते भू-जलस्तर से जूझ रहे हरियाणा में अब प्रदेश सरकार ने किसानों को धान की सीधी बिजाई या फिर कम पानी लेने वाली फसलों को लगाने के लिए प्रोत्साहित करने को 'मेरा पानी-मेरी विरासत' तथा 'फसल विविधीकरण और जल संरक्षण' योजना का विस्तार किया है। दोनों योजनाओं में पंजीकरण कराने वाले किसानों की प्रोत्साहन राशि पांच वर्षों तक हर साल बढ़ती जाएगी।

    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी को मंजूरी प्रदान की है, जिसके बाद कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार ने अधिसूचना जारी कर दी है।

    मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत धान की बजाय वैकल्पिक फसलें लगाने वाले किसानों को पहले साल 8000 रुपये, दूसरे वर्ष 8300 रुपये, तीसरे वर्ष 8800 रुपये, चौथे वर्ष 9400 रुपये और पांचवें साल 10,000 रुपये दिए जाएंगे। इतना ही नहीं, दालें, तिलहन और कपास लगाने पर दो हजार रुपये का बोनस अलग से मिलेगा।

    इसी तरह धान की सीधी बिजाई पर पहले साल 4500, दूसरे साल 4700, तीसरे साल 5000, चौथे साल 5400 और पांचवें साल 6000 रुपये मिलेंगे। बढ़ी प्रोत्साहन राशि का लाभ उठाने के लिए मेरी फसल-मेरा ब्याेरा पोर्टल पर किला नंबर वही दर्ज होना चाहिए।

    मेरा पानी-मेरी विरासत योजना में पहली बार धान की बजाय खेत में मक्का, कपास, खरीफ की दालें (अरहर, मूंग, मोठ, उड़द, ग्वार, सोयाबीन), खरीफ के तिलहन (तिल, अरंडी, मूंगफली), चारे की फसलें, कृषि-वानिकी (पापुलर और सफेदा) तथा खरीफ की प्याज सहित बागवानी फसलें व सब्जियां लगाने पर किसानों के बैंक खातों में आठ हजार रुपये डाले जाएंगे।

    इसके बाद किसान जैसे-जैस वैकल्पिक फसलें लगाते रहेंगे, उनकी प्रोत्साहन राशि बढ़ती जाएगी। वे किसान भी लाभान्वित होंगे, जिन्होंने धान लगाने की बजाय अपने खेतों को खाली छोड़ा है।

    फिलहाल योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिन्होंने पिछले साल धान उगाया था और इस साल उसी खेत में स्वीकृत वैकल्पिक फसलों में से कोई एक फसल लगाई है। वे किसान, जिन्होंने पिछले चार वर्षों में से किसी भी वर्ष उसी खेत में वैकल्पिक फसलें उगाई थीं, वे पात्र नहीं होंगे।

    जिस किसानों ने पिछले खरीफ सीजन में मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत फसल विविधीकरण अपनाया था, वह इस साल भी योजना का लाभ उठा सकेंगे, बशर्ते कि उसी खेत में मंजूर की गईं वैकल्पिक फसलें उगाएं।

    यदि कोई किसान किसी बाद के वर्ष में उस 'किला नंबर' पर वैकल्पिक फसलें लगाना बंद कर देता है, तो वह उस विशिष्ट वर्ष में प्रोत्साहन के लिए पात्र नहीं होगा। यदि किसान एक साल के अंतराल के बाद उसी किला नंबर पर वैकल्पिक फसल अपनाता है, तो इसे नया नामांकन माना जाएगा और उसे प्रति एकड़ 8000 रुपये का शुरुआती वर्ष का प्रोत्साहन मिलेगा।

    डीएसआर मशीन पर मिलेगी 40 हजार रुपये तक सब्सिडी
    धान की सीधी बिजाई के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डीएसआर मशीन पर सब्सिडी कीमत की 50 प्रतिशत या 40 हजार रुपये (जो भी कम हो) के हिसाब से दी जाएगी। सभी लाभार्थियों के बैंक खातों में यह राशि डीबीटी के माध्यम से डाली जाएगी।

    हरी खाद लगाने पर प्रति एकड़ मिलेंगे एक हजार रुपये
    किसानों को खेतों में हरी खाद तैयार करने के लिए एक हजार रुपये प्रति एकड़ दिए जाएंगे। ढैंचा, गर्मी की मूंग, उड़द, लोबिया, मोठ, अरहर और सोयाबीन तथा ग्वार लगाने पर यह प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

     

  • रांची में सबसे ज्यादा बारिश, 60.6 MM रिकॉर्ड; जानें 13 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम

    रांची में सबसे ज्यादा बारिश, 60.6 MM रिकॉर्ड; जानें 13 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम

     रांची
    झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार को मौसम का मिजाज अचानक बदला नजर आया। दिनभर आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच कई इलाकों में बारिश हुई।

    रांची मौसम केंद्र की ओर से जारी दैनिक मौसम बुलेटिन के अनुसार पिछले 24 घंटे में राजधानी में 60.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। राज्य के प्रमुख शहरों में रांची में सबसे अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई।

    बारिश के बावजूद राजधानी का तापमान सामान्य से ऊपर बना रहा। रांची में सोमवार को अधिकतम तापमान 31.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.3 डिग्री अधिक है।

    वहीं न्यूनतम तापमान 23.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.2 डिग्री अधिक है। पिछले 24 घंटे की तुलना में अधिकतम तापमान में 0.5 डिग्री की गिरावट हुई, जबकि न्यूनतम तापमान में 1.6 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    13 तक बारिश के आसार
    मौसम विभाग ने राज्य में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। Jharkhand Weather Forecast के अनुसार 13 सितंबर तक राज्य में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    इस दौरान कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ वर्षा हो सकती है। इससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम खराब होने पर खुले स्थानों, पेड़ के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचना सुरक्षित रहेगा।

    बारिश ने राजधानी के मौसम को किया सुहाना
    रांची में हुई अच्छी बारिश के बाद मौसम में ठंडक महसूस की गई। सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे और बीच-बीच में बारिश होती रही। कई इलाकों में बारिश का असर सामान्य जनजीवन पर भी देखने को मिला।

    हालांकि बारिश के बाद तापमान में बड़ी गिरावट नहीं हुई और अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर ही रहा। मौसम विभाग के आंकड़ों से स्पष्ट है कि पिछले 24 घंटे में रांची में हुई बारिश राज्य के अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में काफी अधिक रही। इससे राजधानी में मानसून की सक्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    जमशेदपुर में 33.4 डिग्री तापमान
    राज्य के अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो जमशेदपुर में अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.8 डिग्री अधिक रहा। न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री रहा। यहां पिछले 24 घंटे में 1.4 मिलीमीटर बारिश हुई।

    डालटनगंज में अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री, जबकि न्यूनतम 25.9 डिग्री सेल्सियस रहा। यहां 2.6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। बोकारो में अधिकतम तापमान 31.1 डिग्री और न्यूनतम 25.1 डिग्री रहा। बोकारो में 10.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई।

    चाईबासा का पोटो सबसे गर्म, तापमान 35.8 डिग्री
    राज्य में सबसे अधिक अधिकतम तापमान चाईबासा-पोटो में 35.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से 5.4 डिग्री अधिक रहा। यहां न्यूनतम तापमान 24.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि बारिश नहीं हुई। इससे स्पष्ट है कि एक ओर रांची में भारी बारिश हुई, वहीं पश्चिमी सिंहभूम के कुछ हिस्सों में गर्मी का असर बना रहा।

    कई जिलों में हुई हल्की बारिश
    स्वचालित मौसम केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, बहारागोड़ा में 7 मिलीमीटर और सिमडेगा के बानो में एक मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं बोकारो, देवघर, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, पाकुड़, सरायकेला, दुमका और पश्चिमी सिंहभूम के जगन्नाथपुर में बारिश दर्ज नहीं हुई।

    राजधानी पर मौसम विभाग की नजर
    रांची में 60.6 मिलीमीटर बारिश और तापमान सामान्य से ऊपर रहने से राजधानी के मौसम में बदलाव साफ दिखाई दिया। आने वाले दिनों में भी बादल और बारिश का दौर बना रहने की संभावना है।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए राजधानीवासियों को गरज-चमक के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत है। विशेषकर तेज बारिश और वज्रपात की स्थिति में खुले स्थानों पर जाने से बचना सुरक्षित रहेगा।