Category: राज्य

  • रांची में सबसे ज्यादा बारिश, 60.6 MM रिकॉर्ड; जानें 13 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम

    रांची में सबसे ज्यादा बारिश, 60.6 MM रिकॉर्ड; जानें 13 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम

     रांची
    झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार को मौसम का मिजाज अचानक बदला नजर आया। दिनभर आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच कई इलाकों में बारिश हुई।

    रांची मौसम केंद्र की ओर से जारी दैनिक मौसम बुलेटिन के अनुसार पिछले 24 घंटे में राजधानी में 60.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। राज्य के प्रमुख शहरों में रांची में सबसे अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई।

    बारिश के बावजूद राजधानी का तापमान सामान्य से ऊपर बना रहा। रांची में सोमवार को अधिकतम तापमान 31.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.3 डिग्री अधिक है।

    वहीं न्यूनतम तापमान 23.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.2 डिग्री अधिक है। पिछले 24 घंटे की तुलना में अधिकतम तापमान में 0.5 डिग्री की गिरावट हुई, जबकि न्यूनतम तापमान में 1.6 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    13 तक बारिश के आसार
    मौसम विभाग ने राज्य में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। Jharkhand Weather Forecast के अनुसार 13 सितंबर तक राज्य में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    इस दौरान कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ वर्षा हो सकती है। इससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम खराब होने पर खुले स्थानों, पेड़ के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचना सुरक्षित रहेगा।

    बारिश ने राजधानी के मौसम को किया सुहाना
    रांची में हुई अच्छी बारिश के बाद मौसम में ठंडक महसूस की गई। सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे और बीच-बीच में बारिश होती रही। कई इलाकों में बारिश का असर सामान्य जनजीवन पर भी देखने को मिला।

    हालांकि बारिश के बाद तापमान में बड़ी गिरावट नहीं हुई और अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर ही रहा। मौसम विभाग के आंकड़ों से स्पष्ट है कि पिछले 24 घंटे में रांची में हुई बारिश राज्य के अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में काफी अधिक रही। इससे राजधानी में मानसून की सक्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    जमशेदपुर में 33.4 डिग्री तापमान
    राज्य के अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो जमशेदपुर में अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.8 डिग्री अधिक रहा। न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री रहा। यहां पिछले 24 घंटे में 1.4 मिलीमीटर बारिश हुई।

    डालटनगंज में अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री, जबकि न्यूनतम 25.9 डिग्री सेल्सियस रहा। यहां 2.6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। बोकारो में अधिकतम तापमान 31.1 डिग्री और न्यूनतम 25.1 डिग्री रहा। बोकारो में 10.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई।

    चाईबासा का पोटो सबसे गर्म, तापमान 35.8 डिग्री
    राज्य में सबसे अधिक अधिकतम तापमान चाईबासा-पोटो में 35.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से 5.4 डिग्री अधिक रहा। यहां न्यूनतम तापमान 24.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि बारिश नहीं हुई। इससे स्पष्ट है कि एक ओर रांची में भारी बारिश हुई, वहीं पश्चिमी सिंहभूम के कुछ हिस्सों में गर्मी का असर बना रहा।

    कई जिलों में हुई हल्की बारिश
    स्वचालित मौसम केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, बहारागोड़ा में 7 मिलीमीटर और सिमडेगा के बानो में एक मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं बोकारो, देवघर, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, पाकुड़, सरायकेला, दुमका और पश्चिमी सिंहभूम के जगन्नाथपुर में बारिश दर्ज नहीं हुई।

    राजधानी पर मौसम विभाग की नजर
    रांची में 60.6 मिलीमीटर बारिश और तापमान सामान्य से ऊपर रहने से राजधानी के मौसम में बदलाव साफ दिखाई दिया। आने वाले दिनों में भी बादल और बारिश का दौर बना रहने की संभावना है।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए राजधानीवासियों को गरज-चमक के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत है। विशेषकर तेज बारिश और वज्रपात की स्थिति में खुले स्थानों पर जाने से बचना सुरक्षित रहेगा।

  • गलत बिजली बिलों की शिकायतों पर प्रशासन सख्त, चंडीगढ़ में जल्द होगी बैठक; दर बढ़ाने से पहले जरूरी होगी मंजूरी

    गलत बिजली बिलों की शिकायतों पर प्रशासन सख्त, चंडीगढ़ में जल्द होगी बैठक; दर बढ़ाने से पहले जरूरी होगी मंजूरी

    चंडीगढ़ 

    चंडीगढ़ में बिजली बिल की शिकायतों को लेकर प्रशासक गुलाब चंद कटारिया एक्शन मोड में आ गए हैं। वह जल्द ही इस मामले में मीटिंग करने जा रहे हैं। यह बात उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मीडिया से कही।प्रशासक ने  बताया कि कंपनी के साथ बिजली वितरण को लेकर एमओयू हुआ है। हालांकि मैंने महसूस किया है कि बिजली बिल को लेकर शिकायतें आ रही हैं। हम इनके साथ बैठकर चर्चा करेंगे। जल्द ही मीटिंग कर शिकायतों का निपटारा करेंगे।

    उन्होंने कहा कि आज चाहे अस्पताल हो या पढ़ाई, हर चीज के लिए बिजली जरूरी है। आजकल व्यक्ति किसी और चीज के रुकने से रुक सकता है, लेकिन अगर बिजली की सप्लाई रुक जाती है तो काफी दिक्कत होती है। उम्मीद है कि बिजली व्यवस्था में और सुधार होगा।

    प्रोजेक्ट को लेकर डर हमारे मन में भी था
    प्रशासक ने कहा कि चंडीगढ़ देश का पहला शहर है, जहां बिजली वितरण का काम प्राइवेट सेक्टर को दिया गया था। जब हमने यह काम उन्हें सौंपा था तो हमारे मन में भी डर था। जनता के मन में भी अविश्वास था। मुलाजिम तो नाराज थे। उन्हें समझाया गया कि आपको किसी तरह की हानि नहीं होगी। इसके बाद फरवरी 2025 में हमने प्रोजेक्ट शुरू किया।

    हिंदुस्तान में पहला प्रयोग हम ही कर रहे
    अब तक बिजली वितरण को लेकर कोई बड़ी शिकायत नहीं आई। कभी-कभी कुछ शिकायतें जरूर आई हैं। देश के प्रधानमंत्री ने यह प्रोजेक्ट हमें दिया था। हमने इन्हें (कंपनी को) कहा था कि अगर आप असफल हो जाएंगे तो पावर जेनरेशन भी असफल हो जाएगा। हिंदुस्तान में यह पहला प्रयोग हम ही कर रहे हैं।

    पीयू जैसे हादसे अब नहीं होंगे
    उन्होंने कहा कि जब ऊपर तार चलते हैं तो कई तरह के फॉल्ट आ सकते हैं। बिजली जाने और उसे रिस्टोर करने में समय लगता है। अब लाइन को अंडरग्राउंड किया जा रहा है। चार लाइनों से अपने सेंटर को जोड़ दिया गया है। मान लीजिए किसी एक लाइन में फॉल्ट आ जाए तो कम से कम असर पड़ेगा। तारें बाहर रहने की वजह से नुकसान भी होते हैं।

    लाइन को 12 करोड़ रुपए खर्च कर बदलना है
    कुछ समय पहले पंजाब यूनिवर्सिटी में एक बच्ची की करंट लगने से मौत हो गई थी। कंपनी ने 18 किलोमीटर की लाइन को 12 करोड़ रुपए खर्च कर बदलना है। उम्मीद है कि इससे बिजली व्यवस्था में और सुधार होगा।

  • बिहार बाढ़ से बेहाल! 13 जिलों में 29 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, तस्वीरों में दिखा तबाही का मंजर

    बिहार बाढ़ से बेहाल! 13 जिलों में 29 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, तस्वीरों में दिखा तबाही का मंजर

     पटना
    बिहार में बाढ़ का दायरा लगातार फैलता जा रहा है. राज्य के 13 जिलों में करीब 29 लाख 13 हजार से ज्यादा आबादी सैलाब के बीच घिरी हुई है. पानी ने कहीं गांवों का संपर्क पूरी तरह काट दिया है, तो कहीं सड़कें डूबने से आवाजाही ठप हो चुकी है. कई इलाकों में लोगों के घरों और आंगनों तक दरिया बह रहा है. प्रशासन एक तरफ सुरक्षित ठिकानों तक राहत सामग्री पहुंचाने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ बीमार लोगों तक इलाज पहुंचाने की मशक्कत चल रही है। 

    यह विकराल संकट पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल तक फैला हुआ है. इन जिलों के 77 प्रखंडों (ब्लॉक) की 438 ग्राम पंचायतों में जिंदगी ठहर सी गई है. हालांकि प्रयागराज से वाराणसी तक गंगा के धीमे पड़ने से कुछ इलाकों में जलस्तर घटने की हल्की उम्मीद भी जगी है। 

    पटना में गंगा का पानी घटा, कई नदियां अब भी उफान पर

    पटना में गंगा का जलस्तर 50.58 मीटर के रिकॉर्ड स्तर से घटकर 50.40 मीटर पर आ गया है. इलाहाबाद से वाराणसी तक गंगा के जलस्तर में आई गिरावट से पटना में भी आगे राहत की उम्मीद है. हालांकि पुनपुन नदी अभी खतरे के निशान से 2.93 मीटर ऊपर बह रही है। 

    कटिहार में गंगा और कोसी के संगम पर बना दबाव 35 पंचायतों के करीब साढ़े तीन लाख लोगों को घेरे हुए है. खगड़िया के चौथम प्रखंड समेत दियारा इलाकों में बागमती का पानी नई मुसीबतें खड़ी कर रहा है. उधर गोपालगंज में गंडक बैराज से सवा लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में निगरानी कड़ी कर दी गई है। 

    भागलपुर में ढाई फीट पानी, मुंगेर में घरों तक पहुंचा बाढ़ का पानी
    भागलपुर में नेशनल हाईवे-80 पर करीब ढाई फीट पानी बह रहा है, जिसके चलते गाड़ियों के पहिए पूरी तरह थम गए हैं. अकेले इस जिले में सवा दो लाख से ज्यादा लोग सैलाब से घिरे हैं. यही हाल मुंगेर के बरियारपुर का भी है, जहां गंगा खतरे के निशान से सवा मीटर ऊपर बहने से सैकड़ों घरों में दरिया समा चुका है. वहीं, सीवान के दरौली में भी सरयू नदी लाल निशान से आधा मीटर ऊपर बहकर निचले इलाकों को डुबो रही है। 

    पानी का यह दबाव भोजपुर के आरा तक पहुंच चुका है. बड़हरा इलाके में गंगा का फैलाव बढ़ते ही हालात बेकाबू हो गए, जहां धमार गांव में डूबने से 32 साल के एक युवक की जान चली गई. इसके अलावा, सारण में माही नदी का जमींदारी बांध टूटने से आफत और बढ़ गई है. तेज बहाव के साथ पानी सीधा रिहायशी बस्तियों की ओर रुख कर रहा है। 

    दूसरी तरफ शेखपुरा में भी सैलाब का असर साफ दिखने लगा है. यहां हरोहर नदी का पानी पांच पंचायतों में फैलने से घरों के अलावा स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र डूब चुके हैं, जिससे आम लोगों की जिंदगी पूरी तरह बेपटरी हो गई है। 

    बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्कूल-पंचायत भवनों में इलाज
    पानी से घिरे लोगों को इलाज के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने भी व्यवस्था शुरू की है. प्रभावित इलाकों में स्कूलों और पंचायत भवनों में इलाज की सुविधा दी जा रही है. यहां डॉक्टरों और नर्सों की तैनाती के साथ जरूरी दवाइयों का इंतजाम किया गया है. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को मौके पर ही इलाज देने की कोशिश की जा रही है. इस दौरान प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है। 

    बिहार में गंगा, कोसी, गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. ऐसे में प्रशासन की नजर जलस्तर पर बनी हुई है. लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के साथ राहत सामग्री और जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने का काम जारी है। 

  • ‘आपके सामने ही आजम खान ने उड़ाया था बाबा साहब का मजाक, तब किस नशे में थे?’ अखिलेश पर ओपी राजभर का हमला

    ‘आपके सामने ही आजम खान ने उड़ाया था बाबा साहब का मजाक, तब किस नशे में थे?’ अखिलेश पर ओपी राजभर का हमला

    ‘सत्ता में तो कब्रिस्तान दिख रहा था, आज सम्राट अशोक की बात कर रहे हो’- अखिलेश पर बरसे ओपी राजभर

    ‘सिर्फ यादव जी और खान साहब ही चाहिए क्या PC में?’ अखिलेश से ओपी राजभर के तीखे सवाल

    'आपके सामने ही आजम खान ने उड़ाया था बाबा साहब का मजाक, तब किस नशे में थे?’ अखिलेश पर ओपी राजभर का हमला

    लखनऊ
    समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने जोरदार हमला बोला है। उन्होंने अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में अगर कोई पत्रकार तीखा सवाल कर दे तो तिलमिला जाते हैं।

    पीसी में भी सिर्फ यादव जी और ख़ान साहब ही चाहिए क्या?

    ओपी राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट पर एक पोस्ट के जरिए सवाल किया कि “क्या मित्र अखिलेश यादव जी, एसी में बैठकर अपने खासम-खास यूट्यूबर्स के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते है और गलती से कोई ढ़ंग का पत्रकार कड़ा सवाल पूछ दें तो 'मिसरा जी-मिसरा जी' करने लगते हैं। क्या पीसी में भी सिर्फ यादव जी और ख़ान साहब ही चाहिए क्या? 

    राजभर ने 8 सितंबर को हुई अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस को लेकर कहा, “आपकी प्रेस कॉन्फ्रेंस देखी। इसमें आप बहुत लंबा चौड़ा फेंक रहे थे कि सरकार आई तो सम्राट अशोक की जयंती पर अवकाश देंगे, बौद्ध स्थल वर्ल्ड क्लास बना देंगे।”

    सत्ता में थे तो क़ब्रिस्तान पर ख़र्च कर रहे थे- राजभर

    राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि अशोक-बुद्ध जी का नाम लेते हुए यह भी बता दिये होते कि जब आप सत्ता में थे तब आपको कब्रिस्तान दिख रहा था। तब तो जनता के सारे पैसे तो क़ब्रिस्तान में ख़र्च कर रहे थे। ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि जब सपा सरकार थी तब बहुजन महापुरुषों के नाम पर बने जिलों और संस्थानों का नाम मिटाए जा रहे थे।

    यूपी कैबिनेट मंत्री राजभर ने कहा कि आपकी सरकार में भीम नगर, फुले नगर, कांशीराम नगर, रमाबाई नगर, संत रविदास नगर का नाम बदला गया। आंबेडकर जी के नाम पर चलने वाली सब योजना हटा दी गई।

    राजभर ने आरोप लगाया, “आप मंच पर बैठे रहे और आपके आजम खान बाबा साहब की प्रतिमा का मजाक उड़ाते रहे, तब आप किस नशे में थे? उन्होंने कहा कि यूपी जनता आपसे सवाल पूछ रही है कि आपने सत्ता में रहते बहुजनों के लिए क्या, जवाब ज़रूर दीजिए।

    इससे पहले राजभर बोल चुके हैं अखिलेश पर हमला

    बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए हमला बोला है। इससे पहले उन्होंने अखिलेश यादव की राजनीति पर सवाल खड़े किए थे। राजभर ने कहा था कि आखिर अखिलेश यादव कबतक हवाबाजी करेंगे और एसी और पीसी से ही चुनाव लड़ेंगे? उन्होंने तंज कसते हुए सपा प्रमुख को जमीन पर आने की बात कही थी।

    इससे पहले राजभर ने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा था कि आइए जमीन पर उतरिए और दो-दो हाथ हो जाएं। एकतरफा चुनाव में मजा नहीं आता है।'

  • बिजली व्यवस्था में योगी सरकार का बड़ा सुधार, AT&C हानि में कमी से मजबूत हुआ विद्युत वितरण तंत्र

    बिजली व्यवस्था में योगी सरकार का बड़ा सुधार, AT&C हानि में कमी से मजबूत हुआ विद्युत वितरण तंत्र

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने और बिजली वितरण में होने वाले नुकसान को कम करने के प्रयासों का असर आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020-21 में 20.63 प्रतिशत रही वितरण हानि वर्ष 2025-26 में घटकर 13.04 प्रतिशत रह गई।

    इसी अवधि में एटीएंडसी हानि भी 31.19 प्रतिशत से घटकर 17.83 प्रतिशत पर आ गई। कृषि फीडरों को छोड़कर प्रदेश में फीडरों की संख्या 18,351 से बढ़कर 21,463 हो गई है। इनमें लाभकारी फीडरों की संख्या 5,772 से बढ़कर 8,104 पहुंच गई। इसमें 2,332 अतिरिक्त फीडर लाभकारी श्रेणी में आए हैं।

    लाभकारी फीडरों की हिस्सेदारी भी 31 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत हो गई है। डिस्कॉमवार प्रदर्शन में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम 53 प्रतिशत लाभकारी फीडरों के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा।

    केस्को 39 प्रतिशत, दक्षिणांचल और मध्यांचल 37-37 प्रतिशत तथा पूर्वांचल 22 प्रतिशत पर रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक कुशल, जवाबदेह और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में लगातार सुधार हुआ है।

    हाई लॉस क्लस्टर मॉडल से वसूली और नए कनेक्शन में तेजी
    योगी सरकार के नेतृत्व में बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए लागू हाई लॉस क्लस्टर मॉडल के तहत प्रदेश में 703 क्लस्टर, 1703 फीडर, 42.21 लाख उपभोक्ता और 76,839 वितरण ट्रांसफार्मरों को कवर किया गया।

    यह कुल उपभोक्ताओं का करीब 11 प्रतिशत है। अभियान के तहत 654 करोड़ 31 लाख रुपये की बकाया वसूली की गई है, जबकि 1,01,548 नए विद्युत संयोजन जारी किए गए हैं।

    दक्षिणांचल डिस्कॉम में भी सुधार उल्लेखनीय रहा। यहां वितरण हानि 25.64 प्रतिशत से घटकर 14.78 प्रतिशत और एटीएंडसी हानि 31.03 प्रतिशत से घटकर 19.57 प्रतिशत रह गई। थ्रू-रेट 3.65 रुपये प्रति यूनिट से बढ़कर 4.06 रुपये हो गया। दक्षिणांचल में वर्ष 2025-26 में 105 करोड़ रुपये तथा चालू वित्तीय वर्ष में जुलाई तक 155 करोड़ रुपये की वसूली की गई।

    हाई लॉस फीडरों पर कार्रवाई का असर
    तालबेहट टाउन-2 ललितपुर में एटीएंडसी हानि 63 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत, मणिकापुर सीरी कासगंज में 87 से 53 प्रतिशत और राल मथुरा में 83.62 से 47.82 प्रतिशत तक आ गई। आगरा, मथुरा, चित्रकूट, राठ और कोसी के टॉप-10 हाई लॉस फीडरों का घाटा 22.53 करोड़ से घटकर 17.89 करोड़ रुपये रह गया, जो करीब 21 प्रतिशत की कमी है।

    फीडर स्तर पर मॉनिटरिंग से बढ़ा वित्तीय अनुशासन
    अधिकारियों के अनुसार, यह सुधार योगी सरकार और यूपीपीसीएल अध्यक्ष के मार्गदर्शन और लगातार मॉनिटरिंग का परिणाम है। फीडर स्तर पर दैनिक समीक्षा, डेटा आधारित निगरानी और फील्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने से विद्युत विभाग में वित्तीय अनुशासन मजबूत हुआ है और राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

     

  • सत्य निकेतन हादसे में 5 अफसरों पर कार्रवाई, PMO की रिपोर्ट मांगने के बाद MCD ने लिया एक्शन

    सत्य निकेतन हादसे में 5 अफसरों पर कार्रवाई, PMO की रिपोर्ट मांगने के बाद MCD ने लिया एक्शन

    नई दिल्ली
     सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार और सुपरिटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह सहित पांच अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। MCD के इतिहास में पहली बार किसी डिप्टी कमिश्नर रैंक के अधिकारी को सस्पेंड किया गया है।

    सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में सस्पेंड किए गए साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। वह करीब तीन साल पहले डेपुटेशन पर MCD में आए थे। पहले उन्हें सिविल लाइन जोन का डिप्टी कमिश्नर बनाया गया था। उनके कार्यकाल में ही जनवरी 2025 को बुराड़ी इलाके में पांच मंजिला बिल्डिंग ध्वस्त हुई थी। इस हादसे में भी 7-8 लोगों की मौत हुई थी। उन्हें करीब आठ महीने पहले साउथ जोन का डिप्टी कमिश्नर बनाया गया था।

    बुराड़ी में भी इनके रहते गिरी थी 5 मंजिला इमारत
    सस्पेंड किए गए सुपरिटेंडेंट इंजीनियर रणवीर सिंह को साल 2019 में 56जे के तहत नौकरी से निकाल दिया गया था। वह लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद कुछ महीने पहले ही बहाल हुए थे, उन्हें साउथ जोन में तैनात किया गया था। एग्जिक्यूटिव इंजीनियर ललित कुमार गोयल अभी कुछ महीने पहले ही असिस्टेंट इंजीनियर से प्रमोट होकर एग्जिक्यूटिव इंजीनियर बने थे। अप्रैल 2026 से वह साउथ जोन के बिल्डिंग विभाग दो में तैनात थे। सस्पेंड होने वाले असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार लगभग तीन साल से बिल्डिंग विभाग दो में तैनात हैं।

    PMO ने तुरंत रिपोर्ट मांग ली थी
    MCD के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद PMO ने रिपोर्ट मांग ली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित स्टाफ को घर से बुलाकर बिल्डिंग हादसे की डिटेल रिपोर्ट तैयार कर रविवार रात में ही पीएमओ को भेजी गई। इसके बाद अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लिया गया। यह मामला सीनियर स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • मतदान से पहले BJP-कांग्रेस का वोट मैनेजमेंट तेज, कमजोर बूथों और निर्दलीयों पर नजर

    मतदान से पहले BJP-कांग्रेस का वोट मैनेजमेंट तेज, कमजोर बूथों और निर्दलीयों पर नजर

    जयपुर
    राजस्थान के 39 जिलों के 5 हजार 393 वार्डों में नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण के लिए बुधवार को सुबह 7 से शाम 6 बजे तक मतदान होगा। इन 168 नगरीय निकाय क्षेत्रों में सोमवार शाम रैलियों, सभाओं, रोड शो और जुलूस का चुनावी शोर थम गया, अब घर-घर जाकर प्रचार हो सकेगा। प्रशिक्षण के बाद मंगलवार को मतदान दल रवाना होंगे, जो शाम तक संबंधित मतदान केंद्र पहुंचकर अगले दिन होने वाले मतदान की तैयारियां शुरू कर देंगे।

    लोकसभा और विधानसभा चुनाव के समान मतदाताओं तक पर्ची नहीं पहुंचने व बुजुर्ग मतदाताओं को होम वोटिंग सुविधा न मिलने से मतदान प्रतिशत में कमी का अंदेशा है। वहीं, 35 वर्ष आयु तक के 40% से अधिक मतदाताओं का जोश मतदान बढ़ाने में मदद करेगा। उधर, पहले चरण में 40 वर्ष तक के युवा प्रत्याशी 49% से अधिक जिनका जोश भी चुनाव मैदान में दिखाई देगा।

    पहले चरण में 39 जिलों के 5 हजार 393 वार्डों में मतदाता अपने पार्षद चुनेंगे, जबकि प्रदेशभर के कुल वार्डों की संख्या 10 हजार 245 है। पहले चरण में प्रदेश के चार नगर निगमों सहित 168 नगरीय निकायों में मतदान होगा, जिनमें से पाली, भरतपुर, भीलवाड़ा और अलवर नगर निगम शामिल हैं। 10 में से जयपुर नगर निगम सहित 6 नगर निगमों में 11 सितंबर को मतदान होगा। दोनों चरणों की मतगणना 14 सितंबर को होगी।

    पहला चरण: 20 हजार 623 प्रत्याशी और 7 हजार 683 मतदान केंद्र
    मतदाताओं को निर्धारित पहचान दस्तावेज लाना होगा। पहले चरण के चुनाव में 57 लाख 52 हजार 278 मतदाता, 20 हजार 623 प्रत्याशियों के लिए 7 हजार 683 मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

    मतदाताओं का गणित
        1 करोड़ 44 लाख 3 हजार 853 कुल मतदाता
        कुल निकाय 309
        पुरुष मतदाता 73 लाख 98 हजार 415
        महिला मतदाता 70 लाख 04 हजार 927
        511 थर्ड जेंडर
        27.24% मतदाता बढ़े वर्ष 2019 की तुलना में

    वोट मैनेजमेंट पर जोर: भाजपा बूथ पर, कांग्रेस निर्दलीयों के साथ जोड़ रही समीकरण
    पहले चरण का प्रचार थमते ही भाजपा और कांग्रेस ने चुनावी रणनीति का फोकस वोट मैनेजमेंट पर कर दिया है। भाजपा ने कमजोर बूथों की पहचान कर कार्यकर्ताओं का नेटवर्क सक्रिय किया है। उधर, कांग्रेस 50 से 100 वोट काटने की क्षमता रखने वाले निर्दलीयों से संपर्क साध रही है।

    कंट्रोल रूम एक्टिव, बागियों और निर्दलीयों पर नजर
    प्रचार अभियान थमने के साथ ही भाजपा ने रणनीति का फोकस 'वोटिंग और प्रत्याशी मैनेजमेंट' पर कर दिया है। अब समर्थक मतदाताओं को घर से बूथ तक पहुंचाने पर जोर रहेगा। कमजोर बूथों की पहचान से लेकर मतदान के दिन कार्यकर्ताओं की सक्रियता तक की मॉनिटरिंग की जा रही है। निर्दलीय और बागियों की सूची भी तैयार की है, जिन्हें संगठन 'आगे' मान रहा है। जिला संगठनों ने यह सूची प्रदेश संगठन को भेज दी है। सोमवार से इनके साथ संपर्क का दौर भी तेज किया गया है। पार्टी इसे निकायों में बहुमत का आंकड़ा जुटाने की संभावित रणनीति के तौर पर देख रही है।

    कांग्रेसः बागियों को साध रहे, पोस्ट-पोल मैनेजमेंट की तैयारी
    राजस्थान में पहले चरण का मतदान समाप्त होते ही कांग्रेस ने अब चुनावी प्रबंधन का अगला चरण शुरू कर दिया है। पार्टी ने ऐसे निर्दलीय प्रत्याशियों की सूची पर काम शुरू किया है, जो खुद जीत की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी के वोट काटने की क्षमता रखते हैं। कांग्रेस की रणनीति अब ऐसे उम्मीदवारों को अपने पक्ष में लाने और दूसरे चरण में पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान का माहौल मजबूत करने की है।

    कांग्रेस का मानना है कि निकाय चुनाव में मुकाबला कई वार्डों में बेहद करीबी है। ऐसे में 50 से 100 या इससे अधिक वोट लेने वाला निर्दलीय भी नतीजे को प्रभावित कर सकता है। पार्टी अब प्रभावित खासतौर पर कांग्रेस विचारधारा से जुड़े ऐसे उम्मीदवारों से संपर्क कर रही है। जिला स्तर के नेताओं को इनसे बातचीत की जिम्मेदारी दी गई है। जिलाध्यक्ष, विधायक और वरिष्ठ नेताओं को इन लोगों से संपर्क साधने की जिम्मेदारी दी जा रही है।

     

  • अब अप्रूवल के बाद ही हथियारों की ट्रेनिंग, हरियाणा में वेपन ट्रेनिंग को लेकर नया नियम लागू

    अब अप्रूवल के बाद ही हथियारों की ट्रेनिंग, हरियाणा में वेपन ट्रेनिंग को लेकर नया नियम लागू

    हरियाणा.

    हरियाणा सरकार ने आर्म्स लाइसेंस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। गृह विभाग ने दो अलग-अलग आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि अब वेपन ट्रेनिंग सर्टिफिकेट (फॉर्म एस-1) के लिए ट्रेनिंग स्लॉट केवल उन्हीं आवेदकों को दिए जाएंगे, जिनके आर्म्स लाइसेंस आवेदन को पहले ‘इन-प्रिंसिपल अप्रूवल’ मिल चुका होगा।

    गृह विभाग द्वारा जारी पहले पत्र में कहा गया था कि वेपन ट्रेनिंग स्लॉट की भारी मांग को देखते हुए बिना सैद्धांतिक मंजूरी वाले आवेदकों को ट्रेनिंग स्लॉट आवंटित नहीं किए जाएं। इसके बाद 30 जुलाई 2026 को जारी दूसरे पत्र में एनआईसी हरियाणा को पोर्टल में आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए गए, ताकि यह व्यवस्था ऑनलाइन प्रणाली में भी लागू की जा सके। गृह विभाग ने माना है कि मौजूदा व्यवस्था में ऐसे लोगों को भी हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही थी, जिन्हें बाद में आर्म्स लाइसेंस नहीं मिल पाता था। साथ ही, वास्तविक आवेदकों को ट्रेनिंग स्लॉट मिलने में दिक्कतें आ रही थीं।

    पोर्टल में होंगे बदलाव
    गृह विभाग ने एनआईसी को निर्देश दिए हैं कि पोर्टल में संशोधन कर केवल उन्हीं आवेदकों को ट्रेनिंग स्लॉट उपलब्ध कराए जाएं, जिनके मामलों को लाइसेंस देने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी हो।

    तब तक जारी रहेगी मैनुअल प्रक्रिया
    विभाग ने पुलिस महानिदेशक को भी निर्देश दिए हैं कि पोर्टल में बदलाव लागू होने तक वेपन ट्रेनिंग के लिए मैनुअल प्रक्रिया जारी रखी जाए। सरकार के इस फैसले से आर्म्स लाइसेंस प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने और ट्रेनिंग संसाधनों का बेहतर उपयोग होने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • जापान में गूंजेगा मोहाली की बेटी का नाम, निहारिका ट्रिपल जंप में करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व

    जापान में गूंजेगा मोहाली की बेटी का नाम, निहारिका ट्रिपल जंप में करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व

    मोहाली.

    मोहाली की ट्रिपल जंप स्टार निहारिका वशिष्ठ अब एशियन गेम्स के बड़े मंच पर देश का नाम रोशन करेंगी। जापान के आइची प्रांत और नागोया शहर में होने वाले एशियन गेम्स-2026 के लिए उनका चयन भारतीय एथलेटिक्स टीम में हुआ है।

    पिछले दो वर्षों में निहारिका ने शानदार प्रदर्शन करते हुए छह पदक जीते हैं, जिनमें चार गोल्ड और दो सिल्वर शामिल हैं। उनका मुकाबला 24 सितंबर को होगा। इस महत्वपूर्ण प्रतियोगिता से पहले निहारिका भुवनेश्वर में नेशनल कैंप में तैयारी कर रही हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ प्रतियोगिता में भाग लेना नहीं, बल्कि देश के लिए पदक जीतकर लौटना है। निहारिका के पिता राम कुमार वशिष्ठ ने बताया कि निहारिका ने 2011 में एथलेटिक्स की शुरुआत की थी। उस समय वह लाॅन्ग जंप खेलती थीं।

    कोच स्वर्ण सिंह ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें ट्रिपल जंप में हाथ आजमाने की सलाह दी। इसके बाद निहारिका ने ट्रिपल जंप को अपना मुख्य इवेंट बना लिया और लगातार सफलता हासिल की। वह कई बार नेशनल स्तर पर पदक जीत चुकी हैं और दो बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं। इस साल उनका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। अप्रैल में दिल्ली की इंडियन एथलेटिक्स सीरीज-3 में 13.41 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड जीता। संगरूर में सीरीज-5 में 13.13 मीटर के साथ पहला स्थान हासिल किया। रांची में 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता में 13.64 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड जीता। पंजाब स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 13.03 मीटर के साथ गोल्ड और पुणे में सीरीज-8 में 13.21 मीटर के साथ सिल्वर जीता।

    अब नजर जापान में पदक पर
    निहारिका इस समय 8 सितंबर तक भुवनेश्वर में नेशनल कैंप में रहेंगी। इसके बाद 10 सितंबर को दिल्ली में इंडियन एथलेटिक्स सीरीज में हिस्सा लेंगी और 12 सितंबर को टीम के साथ जापान रवाना होंगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों की मेहनत और लगातार अच्छे प्रदर्शन से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। अब उनका पूरा ध्यान एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जीतने पर है।

    लाॅन्ग जंप से ट्रिपल जंप तक बदली किस्मत
    निहारिका की खेल यात्रा की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने अपना करियर लान्ग जंप से शुरू किया था। कोच स्वर्ण सिंह की सलाह ने उनके खेल का रास्ता बदल दिया। अब 15 साल की मेहनत उन्हें एशियन गेम्स के मंच तक ले आई है। 24 सितंबर को जापान में उनकी हर छलांग के साथ मोहाली और देश की उम्मीदें भी जुड़ी होंगी।

  • पंजाब में सरकारी कामकाज पर संकट! DA और नोटिस के विरोध में आज कर्मचारियों की मास लीव

    पंजाब में सरकारी कामकाज पर संकट! DA और नोटिस के विरोध में आज कर्मचारियों की मास लीव

     चंडीगढ़
    पंजाब में कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच गतिरोध अब आंदोलन के अगले दौर में पहुंच गया है। पंजाब साझा मुलाजिम मंच ने अपनी मांगों के समर्थन में मंगलवार को पंजाब और चंडीगढ़ के सरकारी कार्यालयों में सामूहिक अवकाश का एलान किया है।

    क्लेरिकल कर्मचारियों के इस कदम से विभिन्न विभागों में नियमित कामकाज प्रभावित होने की संभावना है। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं हुई तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और तेज किया जाएगा।

    कर्मचारियों के मुताबिक, सरकार बनने से पहले आम आदमी पार्टी की ओर से पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, लंबित महंगाई भत्ते का भुगतान करने और अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने जैसे मुद्दों पर आश्वासन दिया गया था। अब कर्मचारी इन वादों को लागू करने की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं।

    मोहनजीत पर हमले को लेकर भी प्रदर्शन
    आंदोलन के तहत चंडीगढ़-मोहाली में मोहनजीत पर हुए हमले के विरोध को भी शामिल किया गया है। कर्मचारी काले कपड़े पहनकर भूख हड़ताल करेंगे। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि कर्मचारियों की मांगों को लगातार टालने से उनमें रोष बढ़ रहा है। उनका सवाल है कि जिन कर्मचारियों ने सरकार के गठन में समर्थन दिया, वही आज अपनी मांगों के लिए आंदोलन करने को मजबूर क्यों हैं।

    मंच ने विधायकों की पेंशन में हुई वृद्धि को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा है। कर्मचारियों का तर्क है कि यदि सरकार वित्तीय स्थिति का हवाला देकर उनकी मांगों पर निर्णय नहीं ले रही है तो दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के वित्तीय लाभों को लेकर अलग नीति क्यों अपनाई जा रही है।

    हाई कोर्ट के फैसले पर भी सवाल
    कर्मचारी नेताओं ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के सरकार के कदम पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कर्मचारियों से जुड़े वित्तीय और सेवा लाभों के मामलों को अदालतों में ले जाने के बजाय सरकार को बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। वेतनमान, डीए और पेंशन से जुड़े मामलों को कर्मचारियों का अधिकार बताते हुए मंच ने सरकार से तत्काल निर्णय लेने की मांग की है।

    मंच ने सरकार को 72 हजार नौकरियों के दावे, क्लास-1 अधिकारियों को मिलने वाले डीए और पंजाब की आर्थिक स्थिति सहित कई मुद्दों पर जवाब मांगा है। कर्मचारियों का कहना है कि रोजगार देने के दावों के साथ भर्ती किए गए कर्मचारियों को मिलने वाले शुरुआती वेतन और उनकी सेवा शर्तों की भी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

    आंदोलन का अगला चरण

        12-13 सितंबर: मंत्रियों के आवास के बाहर प्रदर्शन और घेराव।
        19-20 सितंबर: अन्य मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ प्रदर्शन।
        30 सितंबर: चंडीगढ़ में प्रतीकात्मक कर्मचारी विधानसभा।
        10 अक्टूबर: बड़ी कर्मचारी रैली।
        21-22 अक्टूबर: दोबारा सामूहिक कैजुअल लीव।

    इससे पहले कर्मचारी संगठनों ने एक से सात सितंबर तक संयुक्त किसान मोर्चा के चंडीगढ़ आंदोलन में भी भाग लिया था।

    इन मांगों पर अड़े कर्मचारी
    लंबित डीए और एरियर जारी करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, कांट्रैक्ट व आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने, एसीपी योजना बहाल करने और वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग प्रमुख है। 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती कर्मचारियों को पुराने व संशोधित वेतनमान का पूरा लाभ देने के साथ मानदेय कर्मियों के लिए न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग भी की जा रही है। पेंशनरों के लंबित वित्तीय लाभों के निपटारे की मांग भी मंच ने उठाई है।

    उधर, मान भत्ता वर्कर्स साझा मोर्चा की ओर से आशा कार्यकर्ताओं, फैसिलिटेटरों, मिड-डे मील वर्करों और सफाई कर्मचारियों की मांगों को लेकर मोहाली में रैली की जा रही है। डेमोक्रेटिक मुलाजिम फेडरेशन ने रैली को समर्थन देने की घोषणा की है। संगठन इन कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन के दायरे में लाने की मांग करेगा।