Category: राज्य

  • नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे मजदूर ने उठाया खौफनाक कदम, सरपंच समेत 5 पर FIR

    नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे मजदूर ने उठाया खौफनाक कदम, सरपंच समेत 5 पर FIR

    संगरूर.

    दिड़बा विधानसभा क्षेत्र के गांव तूरबंजारा में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता के कार्यक्रम के दौरान नशे का मुद्दा उठाने वाले एक मजदूर द्वारा जहरीली वस्तु निगलकर आत्महत्या कर ली। मजदूर गुलजार सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने के रूप में गांव की सरपंच उसके पति समेत पांच व्यक्तियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत थाना दिड़बा में मामला दर्ज किया गया।

    मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल हॉस्पिटल संगरूर लाया गया है। जहां मोहनजीत इंसाफ संघर्ष कमेटी के कार्यकर्ता भी पहुंचे हुए हैं जिनके द्वारा वित्त मंत्री के खिलाफ भी मामला दर्ज करने की मांग की जा रही है। मृतक मजदूर के भाइयों बिक्कर सिंह और जसवीर सिंह, निवासी तूरबंजारा, ने बताया कि गत दिवस गांव में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का कार्यक्रम था। इस दौरान उनके भाई गुलजार सिंह ने नशे का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि उनका बेटा चिट्टे का नशा करता है और घर का सारा सामान बेच चुका है।

    उन्होंने आरोप लगाया था कि गांव में खुलेआम चिट्टा बिक रहा है, जिससे वह बेहद परेशान हैं। गुलजार सिंह की एक वीडियो भी वायरल हुई है, जिसमें वह पूरी घटना का जिक्र करते हुए सवाल उठा रहा है। परिजनों के अनुसार, सोमवार सुबह गुलजार सिंह ने उन्हें बताया कि गांव की महिला सरपंच के पति बलजीत सिंह सहित तीन अन्य व्यक्ति उस पर पंचायत में जाकर माफी मांगने के लिए दबाव बना रहे थे और कथित तौर पर धमका रहे थे। इससे परेशान होकर उसने सल्फास/जहरीली वस्तु निगल ली। जिसके कारण दत्त रात्रि डीएमसी लुधियाना में मजदूर की मौत हो गई।

  • डेढ़ किमी रोड शो में दिखा भाजपा का दम, भजनलाल शर्मा ने मांगा निकाय चुनाव में आशीर्वाद

    डेढ़ किमी रोड शो में दिखा भाजपा का दम, भजनलाल शर्मा ने मांगा निकाय चुनाव में आशीर्वाद

    पाली
     राजस्थान में नगर निकाय चुनाव 2026 को लेकर भाजपा ने चुनावी अभियान तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को पाली में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में रोड शो किया। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे रोड शो के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने सिंधी कॉलोनी पहुंचकर जनसभा को संबोधित किया और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का रोड शो सूरजपोल से शुरू हुआ। इसके बाद काफिला सर्राफा बाजार, फतेहपुरिया बाजार और पानी दरवाजा होते हुए सिंधी कॉलोनी पहुंचा। रोड शो में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, मंत्री जोराराम कुमावत, सांसद पीपी चौधरी, पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख, जिला अध्यक्ष सुनील भंडारी समेत पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।

    बीजेपी कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह
    रोड शो के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यकर्ता ढोल बजाते हुए आगे चल रहे थे। वहीं, एक बुजुर्ग महिला हाथ में भाजपा का झंडा लेकर डांस करती नजर आईं। रोड शो के दौरान लोगों ने मुख्यमंत्री के सामने शहर की फैक्ट्रियां दोबारा शुरू कराने और स्थानीय स्तर पर विकास से जुड़े मुद्दे भी उठाए।

    'पाली लंबे समय से कांग्रेस मुक्त'- भजनलाल शर्मा
    सिंधी कॉलोनी में लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पाली में उत्साह और उमंग दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि यहां की जनता का भाजपा के प्रति प्यार और विश्वास साफ नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री ने पाली को भाजपा का गढ़ बताते हुए कहा कि यह शहर लंबे समय से कांग्रेस मुक्त है और यहां का एक-एक कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम कर रहा है।

    JJM और पेपर लीक को लेकर कांग्रेस पर निशाना
    मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन (JJM) को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा जो कहती है, वह करके दिखाती है। पिछले ढाई साल में सरकार ने जो काम किए हैं, वे सभी के सामने हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि गहलोत जी पेपर लीक और जल जीवन मिशन के मुद्दे पर क्यों नहीं बोलते। उन्होंने 'दो साल बनाम पांच साल' के कामकाज पर भी कांग्रेस से सवाल किया।

    सीएम ने कहा कि राजस्थान की जनता प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत बनाना चाहती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आगामी निकाय चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को जिताने और नगर निकायों में कमल खिलाने की अपील की।

    आधुनिक शहर बनाने का दावा
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार का लक्ष्य नगर निकायों को केवल प्रशासनिक इकाई तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक और आत्मनिर्भर शहर बनाना है। उन्होंने सुदृढ़ आधारभूत ढांचे, आधुनिक सीवरेज व्यवस्था, एलईडी लाइट, स्वच्छ पेयजल और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही।

    मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में भी पाली की जनता के उत्साह का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सरकार शहरी क्षेत्रों में विकास की अंतिम कड़ी तक सुविधाएं पहुंचाने के लिए संकल्पित है। उन्होंने विश्वास जताया कि कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के आशीर्वाद से आगामी निकाय चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक जनादेश मिलेगा।

  • सत्य निकेतन हादसे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, बोले- ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति गंभीर चिंता का विषय

    सत्य निकेतन हादसे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, बोले- ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति गंभीर चिंता का विषय

    नई दिल्ली

    दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इस मामले पर एमकिस क्यूरी अजित सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर अदालत को हादसे की जानकारी दी. उन्होंने सत्य निकेतन में अप्रैल 2022 में भी बिल्डिंग गिरने का हवाला देते हुए राजधानी के सभी PG हॉस्टलों, निजी हॉस्टलों की सुरक्षा जांच और ऑडिट- निरीक्षण करने की सिफारिश की। 

    एमिक्स क्यूरी की रिपोर्ट में कहा गया है?
    सत्‍य निकेतन में बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं चिंता का विषय हैं.
    सत्य नितेकन दिल्ली यूनिविर्सिटी साउथ कैंपस के पास स्थित है, यह छात्रों के रहने के लिए एक बड़ा केंद्र बन चुका है। 
    यहां बड़ी संख्या में पीजी, प्राइवेट होस्टल, मेस खाने-पीने की दुकानें और दूसरे व्यवसायिक संस्थान चल रहे हैं। 
    अप्रैल 2022 में यहां एक बिल्डिंग गिरने से 2 लोगों की मौत हो गई थी और 4 लोग घायल हुए थे। 

     अब दोबारा ऐसी घटना होने से यह गंभीर सवाल उठता है कि इमारतों की नियमित जांच, खतरनाक इमारतों की पहचान और भवन नियमों को लागू करने की व्यवस्था सही तरीके से काम कर रही है या नहीं। 
    रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में कॉलेज और यूनिवर्सिटी के आसपास मौजूद सभी PG, निजी हॉस्टल और छात्रों के रहने की ऐसी जगहों की समय सीमा के अंदर सुरक्षा जांच की जानी चाहिए। 

    – बिल्डिंग का नक्शा, निर्माण, बेसमेंट, जमीन का उपयोग, मजबूती, आग से सुरक्षा और आने-जाने के रास्ते जैसे सुरक्षा मानकों की जांच होनी चाहिए। 

    रिपोर्ट में दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास चल रहे सभी PG और निजी हॉस्टलों का समयबद्ध सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण कराने की जरूरत बताई गई है। 

    रिपोर्ट के मुताबिक, 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन के P-14 में बहुमंजिला इमारत ढह गई थी.  करीब 55 वर्ग गज क्षेत्र में बनी इस इमारत में बेसमेंट के अलावा चार मंजिलें थीं. इसे छात्रों के लिए ‘Hostel Daze' नाम से बॉयज PG के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था. हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत और कम से कम 12 लोगों के बचाए जाने की जानकारी दी गई है। 

    रिपोर्ट में कहा गया है कि हादसे की सटीक वजह की जांच जारी है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बेसमेंट में निर्माण संबंधी काम चल रहा था और हादसे से ठीक पहले वहां पानी भरने की भी सूचना थी.  दिल्ली पुलिस ने साउथ कैंपस थाने में मालिक और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 105, 290 और 125 के तहत FIR दर्ज की है. रिपोर्ट के मुताबिक, संपत्ति के मालिक हरि ओम बंसल को 7 सितंबर को राजस्थान में गिरफ्तार कर लिया गया। 

    हादसे के सिलसिले में MCD ने साउथ जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया है. इनमें डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (बिल्डिंग) ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं। 

    अमीकस क्यूरी ने बताया है कि सत्य निकेतन से सटी एक अन्य इमारत P-213 को भी खतरनाक पाया गया है और MCD ने उसके ध्वस्तीकरण के निर्देश दिए हैं। 

    दिल्ली के सभी PG हॉस्टलों की जांच की सिफारिश
    रिपोर्ट में कहा गया है कि सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में PG, निजी हॉस्टल और अन्य छात्र आवास चल रहे हैं. कई बार रिहायशी संपत्तियों में अतिरिक्त निर्माण, बदलाव या उपयोग में परिवर्तन कर इन्हें संचालित किया जाता है.
    इसलिए इनकी जांच में स्वीकृत बिल्डिंग प्लान, वास्तविक निर्माण और मंजिलों की संख्या, बेसमेंट में किए गए बदलाव, भूमि उपयोग, स्ट्रक्चरल सेफ्टी, फायर सेफ्टी और आपातकालीन प्रवेश-निकास की जांच होनी चाहिए। 

    रिपोर्ट में बताया गया है कि सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर 7 सितंबर को सुनवाई हुई.  हाईकोर्ट ने MCD को दिल्ली में उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी PG हॉस्टलों का एक सप्ताह के भीतर निरीक्षण कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. रिपोर्ट में यह बताना होगा कि PG हॉस्टल वाली इमारतें जरूरी अनुमति के तहत बनी हैं या नहीं और कहीं बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन तो नहीं हुआ। 

    हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी केवल PG मालिक की नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन और MCD की भी जिम्मेदारी बनती है, क्योंकि निर्माण और मरम्मत का काम बिल्डिंग बायलॉज के अनुरूप कराना संबंधित प्राधिकरण का दायित्व है। 

    कोर्ट ने MCD को यह भी जांचने को कहा है कि ढही इमारतें वैध अनुमति के तहत बनी थीं या नहीं. अगर निर्माण बिना अनुमति या बिल्डिंग बायलॉज के खिलाफ पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानकारी देने को कहा गया है.  मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी। 

    दरअसल सुप्रीम कोर्ट दिल्ली समेत देश के अन्य हिस्सों में हुए अवैध निर्माण को लेकर सुनवाई कर रहा है. इससे पहले अदालत दिल्ली, जयपुर और पटना समेत कई इलाकों में अवैध निर्माणों को लेकर कड़े आदेश जारी कर चुका है। 

  • टेक्सटाइल सेक्टर में यूपी लिखेगा विकास की नई कहानी, ‘अल्टीमेट पोटेंशियल’ को लेकर बोले CM योगी

    टेक्सटाइल सेक्टर में यूपी लिखेगा विकास की नई कहानी, ‘अल्टीमेट पोटेंशियल’ को लेकर बोले CM योगी

    यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026

    यूपी का मतलब अल्टीमेट पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 का उद्घाटन, यूपी टेक मित्र पोर्टल तथा हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का भी किया शुभारंभ

    टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू, 163 करोड़ के लेटर ऑफ कम्फर्ट, 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण

    सीएम बोले- कारीगर सिर्फ सप्लायर नहीं, ब्रांड ओनर और युवा जॉब सीकर नहीं, एंटरप्रेन्योर बनें

     कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार देने वाला सेक्टर है वस्त्र उद्योग, यूपी में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी का मतलब अप यानी ‘अल्टीमेट पोटेंशियल’ है। उत्तर प्रदेश के पास विरासत, हुनर, मानव संसाधन, उद्योग, उद्यमिता और देश का सबसे बड़ा बाजार है। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स भी हमारे पास है। अब इसी ताकत के सहारे उत्तर प्रदेश को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाना है। हमारा लक्ष्य फाइबर से यार्न, यार्न से फैब्रिक, फैब्रिक से गारमेंट और गारमेंट से ब्रांड होते हुए ग्लोबल मार्केट तक पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित करने का है।
     
    मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यूपी टेक मित्र पोर्टल लॉन्च करने के साथ हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू किए गए। साथ ही 163 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ कम्फर्ट और 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण किया गया। मुख्यमंत्री ने देशभर से आए टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिष्ठित उद्यमियों, निवेशकों, निर्यातकों, प्रदेश के परंपरागत बुनकरों, हथकरघा संचालकों और इस क्षेत्र में भविष्य तलाश रहे युवाओं का स्वागत और अभिनंदन किया।

    फैब्रिक सेक्टर में यूपी चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल पहचान हजारों वर्षों पुरानी है। वैदिक साहित्य से लेकर रामायण और महाभारत तक में काशी के रेशमी वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही का कारपेट, लखनऊ की चिकनकारी, बरेली की जरी, कानपुर का टेक्सटाइल इकोसिस्टम और मेरठ में टेक्निकल टेक्सटाइल की संभावनाएं प्रदेश की विरासत और औद्योगिक क्षमता का प्रमाण हैं। प्रदेश में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर इस सेक्टर की असली ताकत हैं। कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार का सृजन वस्त्र उद्योग करता है। उत्तर प्रदेश फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग में देश में तीसरे स्थान पर है और कुल फैब्रिक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 13 से 14 प्रतिशत है। पिछले छह वर्षों में प्रदेश के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में करीब 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यूपी इस सेक्टर में देश का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है। वर्ष 2025-26 में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निर्यात के साथ गौतमबुद्ध नगर देश के प्रमुख निर्यातक जिलों में दूसरे स्थान पर पहुंचा है।
     
    यूपी के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2030 तक 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर की टेक्सटाइल एवं अपैरल इकोनॉमी और 100 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प में उत्तर प्रदेश अपनी पूरी क्षमता से भागीदारी करेगा। ओडीओपी के माध्यम से प्रदेश के 35 से अधिक जिलों के वस्त्र और हैंडलूम उत्पादों को नई पहचान मिली है। प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं भी इस सेक्टर से जुड़कर आत्मनिर्भर हो रही हैं। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स प्रदेश में उपलब्ध है, जो टेक्सटाइल सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    2017 से पहले वसूली की पर्ची लेकर लौट जाते थे निवेशक
    मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ की बन गई थी। हर जनपद में माफिया की समानांतर सरकार चलती थी। कानून व्यवस्था चौपट थी। माफिया जहां हाथ रख देता, वह जमीन उसकी हो जाती और तत्कालीन सरकार मौन बनी रहती थी। निवेशक व्यापार का सपना लेकर आता था और वसूली की पर्ची लेकर लौट जाता था। दंगे, कर्फ्यू, गुंडा टैक्स और माफिया के कारण उद्योग लगाना मुश्किल था। बिजली और विकास एक परिवार तक सीमित था। आज यूपी कर्फ्यू, दंगा, माफिया और उपद्रव से मुक्त है। अब किसी ने बेटी, व्यापारी या निवेशक की सुरक्षा में सेंध लगाने का दुस्साहस किया तो उसके लिए दो ही जगह होंगी- जेल या जहन्नुम। अब कोई यूपी में खुलेआम पिस्टल लहरा कर नहीं चल सकता।

    यूपी का नाम सुनकर दूरी बना लेते थे लोग
    सीएम ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के नागरिकों के सामने पहचान का संकट पैदा हो गया था। यूपी का नाम सुनकर प्रदेश के बाहर लोग यहां के नागरिकों को किराये पर मकान देने और होटल में कमरा देने तक से कतराते थे। किसी समाज और नागरिक के लिए इससे बड़ी त्रासदी क्या हो सकती है। यूपी का परिचय देने पर व्यक्ति को कई बार सामाजिक रूप से दूरी का सामना करना पड़ता था। यहां कोई पर्व और त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से नहीं गुजरता था। उत्सव से पहले ही उपद्रव शुरू हो जाता था। पूरे प्रदेश में लोग दंगों की आग में झुलसते थे। बरेली, मथुरा के कोसीकलां, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे स्थानों पर बड़े दंगे हुए। व्यापक पैमाने पर पलायन हुआ और महीनों तक कर्फ्यू लगा रहा।

    अराजकता का शिकार बनीं कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें
    मुख्यमंत्री ने कहा कि कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें भी इसी अराजक व्यवस्था की शिकार बनीं। मगहर की कताई मिल 1977 में बनी और 1997 में बंद हो गई। बुनकरों और छोटे टेक्सटाइल उद्यमियों को बैंक से ऋण मिलने में भी कठिनाई होती थी। डीबीटी की व्यवस्था के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ न तो नागरिकों तक पहुंचता था और न ही उद्यमियों तक। 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव आया है। अब यहां कानून का राज है।

    यूपी के पास हैं 36 सेक्टोरल पॉलिसी
    सीएम ने कहा कि कानून व्यवस्था में बदलाव और निवेश अनुकूल नीतियों का परिणाम है कि आज प्रदेश के पास 36 सेक्टोरल पॉलिसी हैं। देश के 55 प्रतिशत मोबाइल और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का उत्पादन यूपी में हो रहा है। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के 6 स्ट्रेटेजिक नोड में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। प्रदेश में एमएसएमई के 12 प्लेज पार्क भी तैयार हो रहे हैं। पिछले 9 वर्ष में यूपी पर कैपिटा इनकम तीन गुना करने और वूमेन वर्कफोर्स की भागीदारी भी तीन गुना बढ़ाने में सफल रहा है। यूपी पिछले 6 वर्षों से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट है। यह निवेशकों का भरोसा है कि हमें पिछले 9 वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिसमें 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। 65 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार दिलाने में सफलता मिली है। हमने हर एमएसएमई को 5 लाख रुपये की सोशल सिक्योरिटी गारंटी दी है। आज यूपी में सर्वाधिक 96 लाख एमएसएमई यूनिट हैं।

    नोएडा बन रहा है अपैरल सिटी
    उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री अब केवल धागे, कपड़े और फैशन तक सीमित नहीं है। डिफेंस, हेल्थकेयर, कृषि और स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में टेक्निकल टेक्सटाइल तेजी से उभर रहा है। इसलिए उत्तर प्रदेश को ट्रेडिशनल टेक्सटाइल से आगे बढ़कर टेक्निकल टेक्सटाइल में भी अपनी ताकत बढ़ानी होगी। पीएम मित्र पार्क और संत कबीर टेक्सटाइल पार्क जैसी पहल इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं। वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संतकबीरनगर और बिजनौर में परियोजनाओं के लिए भूमि आरक्षित की गई है। सीतापुर, मऊ, कानपुर, झांसी और रायबरेली में टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। नोएडा को अपैरल सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    ग्लोबल वैल्यू चेन पार्टनर बनें एमएसएमई
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि एमएसएमई केवल सब-कॉन्ट्रैक्टर नहीं, ग्लोबल वैल्यू चेन के पार्टनर बनें। युवा केवल जॉब सीकर नहीं, टेक्सटाइल एंटरप्रेन्योर और इनोवेटर बनें तथा कारीगर केवल सप्लायर नहीं, अपने ब्रांड के मालिक बनें। ‘डिजाइन इन यूपी, मेड इन यूपी और एक्सपोर्टेड फ्रॉम यूपी’ के मंत्र से प्रदेश के हुनर को वैश्विक पहचान मिले। निफ्ट रायबरेली और उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट कानपुर युवाओं को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रहे हैं। यूपी आज पॉलिसी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट और मार्केट हर स्तर पर तैयार है। अब प्रदेश की सांस्कृतिक पूंजी को आर्थिक पूंजी में बदलना है। बुनकर का हुनर, उद्यमी का कारोबार, युवाओं का रोजगार, महिलाओं की भागीदारी, निवेश और निर्यात बढ़ाकर उत्तर प्रदेश को दुनिया के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में स्थापित किया जाएगा।

    कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान, उत्तर प्रदेश ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव वस्त्र उद्योग अनिल कुमार सागर सहित देशभर के प्रमुख उद्यमी, निवेशक, निर्यातक और टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

  • अंबाला समेत देशभर की जर्जर रेलवे कॉलोनियों का होगा कायाकल्प, लिफ्ट-पार्किंग से सोलर प्लांट तक मिलेंगी सुविधाएं

    अंबाला समेत देशभर की जर्जर रेलवे कॉलोनियों का होगा कायाकल्प, लिफ्ट-पार्किंग से सोलर प्लांट तक मिलेंगी सुविधाएं

    अंबाला
    रेलवे की पुरानी और जर्जर कालोनियों में रहने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। रेलवे बोर्ड ने 50 साल से अधिक पुराने और असुरक्षित घोषित किए जा चुके रेलवे क्वार्टरों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह आधुनिक बहुमंजिला आवास बनाने की योजना तैयार की है।

    अब एकल मंजिल या कम ऊंचाई वाली कालोनियों के बजाय जमीन का बेहतर उपयोग करते हुए जी-4 या उससे अधिक मंजिल के भवन बनाए जा सकेंगे। इसके लिए रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों और केंद्रीय संगठनों को असुरक्षित रेलवे कालोनियों की प्राथमिकता सूची तैयार कर कार्ययोजना भेजने के निर्देश दिए हैं।

    नई आवास नीति के तहत रेलवे का जोर कम जमीन में अधिक कर्मचारियों के लिए आवास उपलब्ध कराने पर है। स्थानीय भवन नियमों के अनुसार बहुमंजिला भवनों का निर्माण किया जाएगा। इससे दशकों पुराने छोटे और जर्जर क्वार्टरों की जगह कर्मचारियों को सुरक्षित और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने का रास्ता साफ होगा।

    अमृत भारत स्टेशन योजना से भी जोड़े जा सकेंगे प्रोजेक्ट
    रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुसार इन आवासीय पुनर्निर्माण परियोजनाओं के लिए राशि वर्क्स प्रोग्राम के प्लान हेड-51 यानी कर्मचारी सुविधाओं के तहत उपलब्ध कराई जाएगी। जहां संभव होगा, इन परियोजनाओं को स्टेशन पुनर्विकास और अमृत भारत स्टेशन योजना से भी जोड़ा जा सकेगा।

    नए रेलवे क्वार्टर कर्मचारियों को सौंपने से पहले उन्हें एचआरएमएस के एस्टेट माड्यूल पर दर्ज करना भी अनिवार्य होगा। इससे आवासों के आवंटन और रेलवे की संपत्तियों के प्रबंधन को डिजिटल तरीके से संचालित किया जा सकेगा। नाम न छापने की शर्त पर मंडल के एक अधिकारी ने बताया कि बोर्ड द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार कंडम आवासों का सर्वे शुरू कर दिया गया है।

    अंबाला मंडल की पुरानी कालोनियों को भी मिल सकता है लाभ
    रेलवे बोर्ड के फैसले से अंबाला मंडल की पुरानी रेलवे कालोनियों के पुनर्निर्माण की उम्मीद भी बढ़ी है। मंडल स्तर पर पुराने और असुरक्षित आवासीय भवनों की स्थिति का आकलन कर प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव तैयार किए जा सकते हैं।

    हालांकि, अंबाला मंडल की कौन-कौन सी कालोनियां पहले चरण में शामिल होंगी, यह संबंधित जोनल रेलवे की प्राथमिकता सूची और स्वीकृत कार्ययोजना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। रेलवे बोर्ड ने जोनल रेलवे को आगामी पिंक बुक और वर्क्स प्रोग्राम में ऐसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल करने के निर्देश दिए हैं।

    ये होंगे फायदे
    – नई व्यवस्था में टाइप-2 और टाइप-3 रेलवे क्वार्टरों का कवर्ड एरिया बढ़ाया जाएगा।
    – इन्हें आधुनिक दो और तीन कमरों वाले आवास के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।
    – कर्मचारियों को पुराने छोटे कमरों की बजाय पहले से अधिक जगह वाले और सुविधाजनक आवास मिल सकेगी।
    – तीन से अधिक मंजिल वाले भवनों में लिफ्ट की व्यवस्था अनिवार्य होगी।
    – छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र, आधुनिक रसोई की फिटिंग और वाहनों के लिए अलग पार्किंग की व्यवस्था

    प्रमुख चुनौतियां
    – पुराने क्वार्टरों को तोड़ने से पहले वहां रह रहे कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करनी होगी।
    – बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए पर्याप्त बजट, निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित समय में काम पूरा करना चुनौती होगी।
    – कालोनियों को चरणबद्ध तरीके से खाली कराने के दौरान कर्मचारियों को अस्थायी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।

     

  • हरियाणा में पुराने रेलवे क्वार्टरों पर संकट, 50 साल से ज्यादा पुराने मकान होंगे ध्वस्त

    हरियाणा में पुराने रेलवे क्वार्टरों पर संकट, 50 साल से ज्यादा पुराने मकान होंगे ध्वस्त

    अंबाला.

    रेलवे की पुरानी और जर्जर कालोनियों में रहने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। रेलवे बोर्ड ने 50 साल से अधिक पुराने और असुरक्षित घोषित किए जा चुके रेलवे क्वार्टरों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह आधुनिक बहुमंजिला आवास बनाने की योजना तैयार की है।

    अब एकल मंजिल या कम ऊंचाई वाली कालोनियों के बजाय जमीन का बेहतर उपयोग करते हुए जी-4 या उससे अधिक मंजिल के भवन बनाए जा सकेंगे। इसके लिए रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों और केंद्रीय संगठनों को असुरक्षित रेलवे कालोनियों की प्राथमिकता सूची तैयार कर कार्ययोजना भेजने के निर्देश दिए हैं। नई आवास नीति के तहत रेलवे का जोर कम जमीन में अधिक कर्मचारियों के लिए आवास उपलब्ध कराने पर है। स्थानीय भवन नियमों के अनुसार बहुमंजिला भवनों का निर्माण किया जाएगा। इससे दशकों पुराने छोटे और जर्जर क्वार्टरों की जगह कर्मचारियों को सुरक्षित और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने का रास्ता साफ होगा।

    अमृत भारत स्टेशन योजना से भी जोड़े जा सकेंगे प्रोजेक्ट
    रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुसार इन आवासीय पुनर्निर्माण परियोजनाओं के लिए राशि वर्क्स प्रोग्राम के प्लान हेड-51 यानी कर्मचारी सुविधाओं के तहत उपलब्ध कराई जाएगी। जहां संभव होगा, इन परियोजनाओं को स्टेशन पुनर्विकास और अमृत भारत स्टेशन योजना से भी जोड़ा जा सकेगा। नए रेलवे क्वार्टर कर्मचारियों को सौंपने से पहले उन्हें एचआरएमएस के एस्टेट माड्यूल पर दर्ज करना भी अनिवार्य होगा। इससे आवासों के आवंटन और रेलवे की संपत्तियों के प्रबंधन को डिजिटल तरीके से संचालित किया जा सकेगा। नाम न छापने की शर्त पर मंडल के एक अधिकारी ने बताया कि बोर्ड द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार कंडम आवासों का सर्वे शुरू कर दिया गया है।

    अंबाला मंडल की पुरानी कालोनियों को भी मिल सकता है लाभ
    रेलवे बोर्ड के फैसले से अंबाला मंडल की पुरानी रेलवे कालोनियों के पुनर्निर्माण की उम्मीद भी बढ़ी है। मंडल स्तर पर पुराने और असुरक्षित आवासीय भवनों की स्थिति का आकलन कर प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव तैयार किए जा सकते हैं। हालांकि, अंबाला मंडल की कौन-कौन सी कालोनियां पहले चरण में शामिल होंगी, यह संबंधित जोनल रेलवे की प्राथमिकता सूची और स्वीकृत कार्ययोजना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। रेलवे बोर्ड ने जोनल रेलवे को आगामी पिंक बुक और वर्क्स प्रोग्राम में ऐसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल करने के निर्देश दिए हैं।

    ये होंगे फायदे –

    • – नई व्यवस्था में टाइप-2 और टाइप-3 रेलवे क्वार्टरों का कवर्ड एरिया बढ़ाया जाएगा।
    • – इन्हें आधुनिक दो और तीन कमरों वाले आवास के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।
    • – कर्मचारियों को पुराने छोटे कमरों की बजाय पहले से अधिक जगह वाले और सुविधाजनक आवास मिल सकेगी।
    • – तीन से अधिक मंजिल वाले भवनों में लिफ्ट की व्यवस्था अनिवार्य होगी।
    • – छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र, आधुनिक रसोई की फिटिंग और वाहनों के लिए अलग पार्किंग की व्यवस्था

    प्रमुख चुनौतियां –

    • – पुराने क्वार्टरों को तोड़ने से पहले वहां रह रहे कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करनी होगी।
    • – बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए पर्याप्त बजट, निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित समय में काम पूरा करना चुनौती होगी।
    • – कालोनियों को चरणबद्ध तरीके से खाली कराने के दौरान कर्मचारियों को अस्थायी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।
  • LPG पर केंद्र का बड़ा फैसला, गांवों में भी 25 दिन बाद करा सकेंगे रिफिल बुकिंग

    LPG पर केंद्र का बड़ा फैसला, गांवों में भी 25 दिन बाद करा सकेंगे रिफिल बुकिंग

    जयपुर
     केंद्र सरकार ने राजस्थान समेत देश भर के रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा फैसला लिया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों के घरेलू एलपीजी उपभोक्ता भी शहरवासियों की तरह 25 दिनों के अंतराल पर अपना गैस सिलेंडर बुक करा सकेंगे। पहले ग्रामीण इलाकों के लिए यह सीमा 45 दिनों की तय की गई थी।

    राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने दी जानकारी
    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा पर्यटन राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया, सरकार ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) जैसी प्रमुख तेल विपणन कंपनियों को इस नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

    दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी जंग और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण होर्मुज से होने वाली तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई थी। इससे देश में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ गया था। ऐसे में सरकार ने घरेलू गैस की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और जमाखोरी व कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए रिफिल बुकिंग के बीच अंतर बढ़ा दिया था। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन बाद अगली LPG बुकिंग की अनुमति थी।

    सरकार ने कई सख्त कदम उठाए
    एलपीजी गैस की कमी से निपटने और आपूर्ति नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने मार्च में 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत कई सख्त कदम उठाए थे। इसी अस्थायी मांग प्रबंधन रणनीति के तहत शहरी क्षेत्रों में एलपीजी रिफिल का अंतराल 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तय कर दिया गया था।

    इसके अतिरिक्त सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया था कि प्रोपेन (C3) और ब्यूटेन (C4) जैसी गैसों का उपयोग प्राथमिकता से घरेलू LPG के उत्पादन में किया जाए, ताकि आम जनता को रसोई गैस की किल्लत का सामना न करना पड़े।

    मंत्रालय ने की समीक्षा
    सोमवार यानी 7 सितंबर को पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा ओएमसी के अध्यक्षों और प्रबंध निदेशकों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया कि अब स्थिति में काफी सुधार हुआ है। सुरेश गोपी ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से मंत्रालय द्वारा जारी पत्र की प्रति साझा करते हुए लिखा, वर्तमान में एलपीजी आपूर्ति की बेहतर होती स्थिति और रिफिल बैकलॉग (बकाया ऑर्डर) में आई भारी कमी को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने मौजूदा रिफिल बुकिंग अंतराल की समीक्षा की है। अब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के सभी घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए 25 दिनों का एक समान रिफिल बुकिंग अंतराल लागू करने का निर्णय लिया गया है।

    व्यावसायिक एलपीजी पर पहले ही हट चुकी हैं पाबंदियां
    घरेलू LPG की बुकिंग के नियमों में ढील देने से पहले जून में सरकार ने कमर्शियल LPG की सप्लाई पर लगी पाबंदियां भी हटा दी थीं। तेल कंपनियों को युद्ध से पहले जितनी मात्रा में गैर-घरेलू LPG की सप्लाई होती थी, उसे फिर से सामान्य स्तर पर शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही, उद्योगों का काम प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें संकट से पहले होने वाली खपत की 50% तक LPG सप्लाई की अनुमति दे दी गई थी।

    वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते भारत में एलपीजी की कीमतों में भी वृद्धि देखी गई थी। मार्च में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद जून में 29 रुपए की और वृद्धि हुई। आपूर्ति की स्थिति सुधरने और बुकिंग अंतराल घटने से देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अब अगला सिलेंडर बुक करने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

  • शिक्षकों को समावेशी शिक्षा के लिए किया जा रहा जागरूक, प्रशस्त 2.0 से 2.04 लाख शिक्षक हुए ऑनबोर्ड

    शिक्षकों को समावेशी शिक्षा के लिए किया जा रहा जागरूक, प्रशस्त 2.0 से 2.04 लाख शिक्षक हुए ऑनबोर्ड

    प्रशस्त 2.0 से समावेशी शिक्षा को नई ताकत, 2.04 लाख शिक्षक सेन्सिटाइजेशन वीडियो देखकर हुए ऑनबोर्ड

    – 2,03,823 शिक्षक प्रशस्त 2.0 से जुड़े, रामपुर में 44.38%, झांसी में 39.27% और पीलीभीत में 31.95% शिक्षक हुए ऑनबोर्ड

    – लगभग 40 मिनट के 10 वीडियो से स्क्रीनिंग से पहले होगा शिक्षकों का सेन्सिटाइजेशन

    – सभी बोर्डों के सरकारी, परिषदीय, प्राइवेट एडेड और प्राइवेट अनएडेड विद्यालयों के शिक्षक होंगे शामिल

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार समावेशी शिक्षा को मजबूत करने के लिए शिक्षकों को बच्चों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने पर विशेष जोर दे रही है। इसी दिशा में प्रशस्त (PRASHAST) 2.0 के माध्यम से बच्चों की स्क्रीनिंग से पहले शिक्षकों को सेन्सिटाइजेशन वीडियो से जोड़ने का अभियान गति पकड़ रहा है। 

    आंकड़ों के अनुसार अब तक 2,03,823 शिक्षक प्रशस्त 2.0 पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं तथा वीडियो देख रहे हैं, इनमें रामपुर में 44.38 प्रतिशत, झांसी में 39.27 प्रतिशत, पीलीभीत में 31.95 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 28.42 प्रतिशत और बलिया में 24.74 प्रतिशत शिक्षकों की सहभागिता दर्ज हुई है। इसके अलावा फतेहपुर, मथुरा, गोंडा, सीतापुर, बरेली और बस्ती की भी अच्छी सहभागिता रही।

    यह डिजिटल पहल शिक्षक को संवेदनशील, सजग और सक्षम बनाकर विद्यालयों में अधिक सहयोगी वातावरण तैयार करने तथा दिव्यांग बच्चों की समावेशी शिक्षा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  

    40 मिनट में 10 वीडियो से संवेदनशीलता
    प्रशस्त एप एवं पोर्टल पर लगभग 40 मिनट के कुल 10 सेन्सिटाइजेशन वीडियो उपलब्ध हैं। राज्य के सभी बोर्डों के सरकारी/परिषदीय, प्राइवेट एडेड और प्राइवेट अनएडेड विद्यालयों के शिक्षकों को ये वीडियो देखना अनिवार्य किया गया है। बच्चों की स्क्रीनिंग से पहले शिक्षकों में आवश्यक संवेदनशीलता और समझ विकसित करना इस प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य है।

    सभी शिक्षकों को जोड़ने के निर्देश
    राज्य स्तर से सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को संबंधित शिक्षकों को सेन्सिटाइजेशन वीडियो देखने के लिए निर्देशित करते हुए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशस्त 2.0 के माध्यम से सरकारी और परिषदीय विद्यालयों के साथ प्राइवेट एडेड एवं प्राइवेट अनएडेड विद्यालयों को भी एक समान प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। इससे बच्चों की स्क्रीनिंग से पहले शिक्षक स्तर पर संवेदनशीलता और समझ को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

    शिक्षक की समझ से बेहतर होगा बच्चों का सहयोग
    योगी सरकार की शिक्षा नीति में प्रत्येक बच्चे की आवश्यकता को समझकर उसके अनुरूप शैक्षिक सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर है। प्रशस्त 2.0 इसी दृष्टिकोण को शिक्षक की क्षमता और संवेदनशीलता से जोड़ता है। सेन्सिटाइजेशन वीडियो के माध्यम से शिक्षक बच्चों को बेहतर समझने और स्क्रीनिंग प्रक्रिया को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए तैयार होंगे।

    कोट:
    प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों को बच्चों की विविध आवश्यकताओं को समझने और उनके प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर मिल रहा है। सेन्सिटाइजेशन वीडियो के माध्यम से शिक्षक बच्चों की विशिष्ट आवश्यकताओं की स्क्रीनिंग प्रक्रिया को अधिक समझदारी और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ा सकेंगे। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक विद्यालय में समावेशी और सहयोगी वातावरण मजबूत हो।
    श्रीमती मोनिका रानी, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश

  • पंजाब चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस, राहुल-प्रियंका से मिले सचिन पायलट; रणनीति पर बनी बात

    पंजाब चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस, राहुल-प्रियंका से मिले सचिन पायलट; रणनीति पर बनी बात

    चंडीगढ़.

    पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की। पंजाब का प्रभारी बनाने के बाद राहुल और प्रियंका के साथ पायलट की पहली मुलाकात है। इसे पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    माना जा रहा है कि बैठक में पंजाब कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, चुनावी रणनीति और पार्टी नेताओं के बीच चल रही गुटबाजी पर भी चर्चा हुई। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के इसी महीने पंजाब दौरे पर आने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी के दौरे से पहले सचिन पायलट अगले सप्ताह पंजाब और चंडीगढ़ पहुंचेंगे। अपने पहले दौरे के दौरान वह प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और प्रमुख पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। पायलट की इस बैठक के बाद ही राहुल गांधी के पंजाब दौरे का कार्यक्रम अंतिम रूप लेने की संभावना है। राहुल गांधी के सितंबर के अंत में पंजाब आने की संभावना जताई जा रही है। पायलट के पंजाब दौरे का कार्यक्रम अगले दो-तीन दिनों में अंतिम हो सकता है। पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भी सोमवार को नई दिल्ली में पायलट से मुलाकात कर चुके हैं। वड़िंग ने भी कहा था कि पायलट का पंजाब दौरा करीब एक सप्ताह के भीतर प्रस्तावित है।

    गुटबाजी खत्म करना पायलट के सामने बड़ी चुनौती
    पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से गुटबाजी पार्टी के लिए चुनौती बनी हुई है। प्रदेश कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच राजनीतिक मतभेद लगातार चर्चा में रहे हैं। करीब दो महीने पहले कांग्रेस हाईकमान की ओर से विधानसभा चुनाव से जुड़ी समितियों के गठन के बाद चन्नी और उनके समर्थक विधायकों-सांसदों ने वड़िंग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। वड़िंग को प्रदेश प्रधान पद से हटाने की मांग भी उठी थी।

    इसके बाद कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी सौंपते हुए सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी नियुक्त किया। अब पायलट के सामने विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के साथ ही प्रदेश कांग्रेस के विभिन्न धड़ों के बीच समन्वय कायम करने की चुनौती है। ऐसे में राहुल गांधी के पंजाब दौरे से पहले पायलट का प्रदेश में पहुंचकर नेताओं के साथ बैठक करना संगठनात्मक रूप से अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि राहुल गांधी के दौरे से पहले पंजाब कांग्रेस में आपसी तालमेल और चुनावी तैयारियों को लेकर स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए।

  • CM योगी के नेतृत्व में यूपी में निवेश का माहौल मजबूत, सुरक्षा-इन्फ्रास्ट्रक्चर से बढ़ा उद्योग जगत का भरोसा: रामी रेड्डी

    CM योगी के नेतृत्व में यूपी में निवेश का माहौल मजबूत, सुरक्षा-इन्फ्रास्ट्रक्चर से बढ़ा उद्योग जगत का भरोसा: रामी रेड्डी

    यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026

    यूपी में बड़े निवेश के लिए उद्योग जगत उत्साहित: रामी रेड्डी

    रामकी समूह के चेयरमैन ने कहा- सीएम योगी के नेतृत्व में अनुशासन, सुरक्षा और बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर से उत्तर प्रदेश बनेगा वस्त्रोद्योग का प्रमुख केंद्र

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश को वस्त्रोद्योग क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए उद्योग जगत बड़े निवेश को लेकर उत्साहित है। 'यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026' के उद्घाटन समारोह में पूर्व राज्यसभा सदस्य, उद्योगपति, समाजसेवी तथा रामकी समूह के फाउंडर एवं चेयरमैन अल्ला अयोध्या रामी रेड्डी ने उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए उपलब्ध अनुकूल वातावरण की जमकर सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हो रहे तेज विकास और बेहतर औद्योगिक वातावरण की प्रशंसा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब उद्योगों के लिए निवेश और विकास की संभावनाओं वाला महत्वपूर्ण गंतव्य बनकर उभरा है।

    रामी रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस गति से देश आगे बढ़ रहा है, उसी दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उत्तर प्रदेश को नई सोच, अनुशासन और नियंत्रण के साथ आगे ले जा रहे हैं। प्रदेश में अनुशासन, नियंत्रण और सुरक्षा का वातावरण उद्योगपतियों में निवेश का भरोसा पैदा करता है। उद्योगपति अपना पैसा वहीं लगाना चाहते हैं, जहां उन्हें सुरक्षा के साथ स्थिर और भरोसेमंद वातावरण मिले। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य होने के साथ ही संसाधनों से समृद्ध है। प्रदेश में मजबूत राजनीतिक नेतृत्व और सक्षम प्रशासनिक नेतृत्व उद्योग जगत को यह विश्वास दे रहा है कि यहां आकर निवेश किया जा सकता है और कारोबार को आगे बढ़ाया जा सकता है। इससे प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

    रेड्डी ने कहा कि वस्त्रोद्योग देश के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण उद्योगों में से एक है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस क्षेत्र का विकास हो रहा है, लेकिन तमिलनाडु ने वस्त्रोद्योग के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में देश का नंबर एक राज्य बनाने के लिए तमिलनाडु जैसे राज्यों के सफल अनुभवों से सीख लेते हुए अपनी परिस्थितियों के अनुरूप ठोस दृष्टि और कार्ययोजना तैयार करनी होगी। इसके लिए प्रदेश सरकार और उद्योग जगत को मिलकर आगे बढ़ना होगा।

    उन्होंने कहा कि लखनऊ के आसपास तथा पूरे प्रदेश में चार-पांच स्थानों पर बनाए जा रहे वस्त्रोद्योग केंद्र और पार्क इस दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि योगी सरकार वस्त्रोद्योग को लेकर गंभीरता से काम कर रही है और इस क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक विकास की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार की ओर से स्थिर वातावरण, बेहतर आधारभूत ढांचा और सस्ती उपयोगी सेवाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन उद्योग जगत के लिए महत्वपूर्ण है। 'वॉक टु वर्क' कॉसेप्ट के साथ निजी क्षेत्र की श्रेष्ठ औद्योगिक इकाइयों को इन केंद्रों में लाए जाने स उद्योग व श्रमिक, दोनों को लाभ होगा तथा वस्त्रोद्योग का समग्र विकास तेजी से हो सकेगा।

    रामी रेड्डी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के वस्त्रोद्योग क्षेत्र में बड़े निवेश की आवश्यकता है और उद्योग जगत इसके लिए प्रतिबद्ध है। देशभर का उद्योग जगत उत्तर प्रदेश के वस्त्रोद्योग क्षेत्र में होने वाले विकास को लेकर आशान्वित है और इस विकास यात्रा का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश न केवल देश बल्कि वस्त्रोद्योग के वैश्विक मानचित्र पर भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

    भारतीय वस्त्र एवं परिधान उद्योग का बाजार 350 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य: अश्विन चंद्रन
    इस अवसर पर प्रीकॉट लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सीआईटीआई) के उपाध्यक्ष अश्विन चंद्रन ने कहा कि भारतीय वस्त्र एवं परिधान उद्योग एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर में प्रवेश कर रहा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव के बीच खरीदार अब लागत के साथ गुणवत्ता, प्रौद्योगिकी, स्थिरता, उत्पादकता और समय पर आपूर्ति को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत के पास कच्चे माल से तैयार उत्पाद तक, पूरी वस्त्र मूल्य श्रृंखला और विशाल घरेलू बाजार मौजूद है। अगले पांच वर्षों में भारतीय वस्त्र एवं परिधान बाजार को मौजूदा करीब 180 अरब डॉलर से बढ़ाकर लगभग 350 अरब डॉलर और निर्यात को करीब 37 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके लिए बड़े पैमाने पर विस्तार, एकीकृत औद्योगिक तंत्र, तकनीकी उन्नयन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स का उपयोग बढ़ाना होगा।

    चंद्रन ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास युवा कार्यबल, मजबूत एमएसएमई आधार, वस्त्र एवं परिधान समूह, हथकरघा-हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा और विशाल घरेलू बाजार है। प्रदेश तकनीकी वस्त्र, टिकाऊ एवं रीसाइकिल्ड उत्पाद तथा उच्च मूल्य वाले घरेलू वस्त्रों के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है। उद्योग के विस्तार के लिए स्थिर नीतियां, तैयार आधारभूत ढांचा, प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली-पानी, बेहतर परिवहन, कुशल मानव संसाधन और त्वरित स्वीकृतियां आवश्यक हैं। वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए गुणवत्ता, उत्पादकता, स्थिरता, आपूर्ति की निगरानी और अनुपालन पर भी विशेष ध्यान देना होगा।

    उन्होंने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सीआईटीआई भारत सरकार के साथ समर्थ योजना के तहत वस्त्र क्षेत्र में कौशल विकास पर काम कर रहा है। इसी अनुभव के आधार पर संगठन उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर मौजूदा औद्योगिक समूहों और नई निवेश परियोजनाओं के लिए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करने में सहयोग करने को तैयार है।