Category: राज्य

  • कनाडा में एमी विर्क पर हमले की कोशिश? रोल्स रॉयस पर हुई फायरिंग, गाड़ी में 4 लोग थे सवार

    कनाडा में एमी विर्क पर हमले की कोशिश? रोल्स रॉयस पर हुई फायरिंग, गाड़ी में 4 लोग थे सवार

    चंडीगढ़ 
    कनाडा के एबट्सफोर्ड में पंजाबी गायक एमी विर्क के कार्यक्रम के बाद उनके काफिले पर कथित तौर पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाए जाने का मामला सामने आया है। एबट्सफोर्ड पुलिस ने मैक्कलम रोड के 2500-ब्लॉक में हुई गोलीबारी की पुष्टि की है। हालांकि पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि गोलीबारी में निशाना कौन था और एमी विर्क उस वाहन में सवार थे या नहीं।

    पुलिस के मुताबिक बीती रात करीब 11 बजे के बाद एक गहरे रंग की एसयूवी में सवार लोगों ने दूसरी गाड़ी पर कई गोलियां चलाईं। घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। गोलीबारी के कुछ ही देर बाद सनीसाइड प्लेस के 2400-ब्लॉक में एक एसयूवी को आग के हवाले किए जाने की सूचना मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने वाहन को पूरी तरह जला हुआ पाया। जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि जले हुए वाहन का गोलीबारी की घटना से कोई संबंध है या नहीं।

    पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर इतना जरूर कहा है कि जिस वाहन को निशाना बनाया गया, उस पर गोलीबारी जानबूझकर की गई थी।

    स्थानीय सूत्रों के मुताबिक 5 सितंबर की रात एबट्सफोर्ड के रोजर्स फोरम हॉल में एमी विर्क का कार्यक्रम था। दावा है कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद रात करीब 11 बजे एमी विर्क वाहनों के काफिले के साथ शहर की ओर रवाना हुए। इसी दौरान काफिले में शामिल एक रॉल्स रॉयस पर दूसरे वाहन में सवार लोगों ने गोलियां चला दीं।

    सूत्रों का दावा है कि संबंधित रॉल्स रॉयस बुलेटप्रूफ थी, जिसके कारण वाहन में सवार किसी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचा। हालांकि पुलिस ने अभी इस बात की पुष्टि नहीं की है कि एमी विर्क उसी वाहन में सवार थे। यह भी स्पष्ट नहीं है कि गोलीबारी के समय गायक के साथ कौन-कौन लोग मौजूद थे।

    इस बीच सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े बताए जा रहे चर्ण दत्त चार्ली नाम के व्यक्ति की एक पोस्ट सामने आई है, जिसमें उसने गोलीबारी की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। पोस्ट में कहा गया कि हमला एमी विर्क के कार्यक्रम के प्रमोटर को निशाना बनाकर किया गया था।

    सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने भी अब तक गोलीबारी को किसी गिरोह से जोड़कर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। 

    एबट्सफोर्ड पुलिस के प्रवक्ता सार्जेंट पॉल वॉकर ने लोगों से जांच में सहयोग करने की अपील की है। पुलिस के मुताबिक घटना की रात 10:45 से 11:30 बजे के बीच मैक्कलम रोड के 2500-ब्लॉक या रात करीब 11 बजे सनीसाइड प्लेस के 2400-ब्लॉक के आसपास मौजूद लोगों के पास यदि किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी या डैशकैम फुटेज है, तो वे पुलिस से संपर्क करें। 
    फिलहाल पुलिस गोलीबारी, जले हुए वाहन और दोनों घटनाओं के बीच संभावित संबंध की जांच कर रही है। 

  • सरकारी डॉक्टरों को योगी सरकार की बड़ी सौगात, अब 70 साल तक सेवा का मिलेगा मौका

    सरकारी डॉक्टरों को योगी सरकार की बड़ी सौगात, अब 70 साल तक सेवा का मिलेगा मौका

    लखनऊ

     यूपी के सरकारी डॉक्टरों के लिए खुशखबरी है। अब उनकी रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 70 साल कर दी है। सेवानिवृत्ति के बाद 70 वर्ष की आयु तक रिअप्वॉइंटमेंट के माध्यम से सेवाएं दे सकेंगे। वर्तमान व्यवस्था के तहत सरकारी डॉक्टर 65 वर्ष की आयु तक सेवाएं दे रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव स्तर से इस संबंध में आदेश जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग स्वास्थ्य विभाग का प्रमुख चिकित्सकीय संवर्ग है। इसमें चिकित्सा अधिकारी एवं विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हैं, जो प्रदेश के सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद योग्य एवं अनुभवी चिकित्सकों को 70 साल की आयु तक सेवाएं देने का अवसर मिलने से उनके लंबे अनुभव का सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा।

    डिप्टी सीएम ने बताया कि विशेष रूप रूप से स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी वाले विभागों में यह व्यवस्था प्रभावी साबित होगी। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को डॉक्टरों की रिटायर्मेंट के बाद 70 वर्ष की आयु तक पुनर्नियुक्ति संबंधी आदेश जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

    अधिक सक्षम बनेंगी स्वास्थ्य सेवाएं
    विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों में तृतीय श्रेणी कर्मियों के 2500 पदों पर भर्ती होगी। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को जल्द पदों का विस्तृत अधियाचन भेजा जाएगा। उच्च शिक्षा, कृषि शिक्षा और प्राविधिक शिक्षा के विश्वविद्यालयों के साथ ही डिग्री कॉलेजों में भी तृतीय श्रेणी के रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। उच्च शिक्षा के ही शिक्षण संस्थानों में 500 से ज्यादा पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसे ही दूसरे विभागों के उच्च शिक्षण संस्थानों में भी पद रिक्त चल रहे हैं। पहले उच्च शिक्षण संस्थान कर्मियों के पदों पर भी खुद भर्ती करते थे। अब आयोग के जरिए भर्ती होगी।

    लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे 7 डॉक्टरों को नोटिस
    उधर, गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तैनात सात नॉन पीजी रेजिडेंट (एनपीजेआर) डॉक्टरों ने वेतन असमानता दूर करने की मांग को लेकर लखनऊ में प्रदर्शन किया है। आंदोलन का संज्ञान लेते हुए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा कार्यालय ने कॉलेज प्रशासन को सातों डॉक्टरों के नाम सौंपते हुए नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।

    नॉन पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों का आरोप है कि एमबीबीएस करने के बाद एक ही काउंसलिंग से तैनात होने के बावजूद मेडिकल कॉलेज और ग्रामीण अस्पतालों में तैनात एनपीजेआर को अलग-अलग मानदेय मिलता है। मेडिकल कॉलेज की तुलना में सीएचसी पर तैनात होते ही एनपीजेआर को करीब डेढ़ गुना ज्यादा मानदेय मिलता है, जिसे वेतन असमानता बताते हुए डॉक्टर समान वेतन की मांग कर रहे हैं।

  • अब 12वीं के बाद रोजगार से जुड़ेंगे छात्र, बिहार के सरकारी स्कूलों में शुरू होगी प्लेसमेंट सुविधा

    अब 12वीं के बाद रोजगार से जुड़ेंगे छात्र, बिहार के सरकारी स्कूलों में शुरू होगी प्लेसमेंट सुविधा

     पटना

    बिहार के सरकारी स्कूलों में भी प्लेसमेंट की सुविधा मिलेगी। राज्य सरकार 12वीं कक्षा में ऐसे इच्छुक बच्चों को प्लेसमेंट की सुविधा देगी जो आगे पढ़ाई नहीं करना चाहते या फिर जो 12वीं के बाद ही करियर बनाना चाहते हैं। इसके लिए बड़े व्यावसायिक कंपनियों की मदद ली जाएगी। इसमें बड़ी कंपिनयों और बड़े औद्योगिक घरानों से भी सहयोग लिया जाएगा।

    बिहार सरकार अब सरकारी स्कूलों के 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाई के बाद सीधे रोजगार से जोड़ने की तैयारी में है। इस व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य उन विद्यार्थियों को अवसर देना है, जो इंटरमीडिएट के बाद परिवार की आर्थिक स्थित या अन्य कारणों से कामकाजी दुनिया में प्रवेश करना चाहते हैं। ऐसे बच्चों को विद्यालय से ही प्लेसमेंट की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी।

    अवसर विकसित होंगे
    प्रस्तावित नई पहल के तहत विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की रुचि, योग्यता और कौशल का आकलन कर उन्हें निजी कंपनियों तथा विभिन्न रोजगार क्षेत्रों से जोड़ा जाएगा। सरकार इसके लिए बड़े व्यावसायिक समूहों और उद्योग जगत का सहयोग लेने की योजना बना रही है। देश की नामी-गिरामी कंपनी और बड़े औद्योगिक घरानों सहित अन्य कंपनियों की भागीदारी से प्लेसमेंट, प्रशिक्षण और अप्रेंटिसशिप के अवसर विकसित किए जाएंगे।

    कौशल के अभाव में बेहतर प्सेलमेंट नहीं मिलता
    बिहार में 13 लाख बच्चे सरकारी विद्यालयों में इंटर की पढ़ाई करते हैं। इंटर स्तर पर मेडिकल, इंजीनियरिंग, एनडीए के सात-साथ रेलवे, बैंक में बड़ी संख्या में लड़के जाते हैं। निजी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में बच्चे जाते हैं। लेकिन जानकारी और कौशल के अभाव में उन्हें बेहतर प्सेलमेंट नहीं मिल पाता। इसीलिए सरकार ने यह व्यवस्था शुरू की है। सरकार की बड़े औद्योगिक घरानों और कंपनियों से अपेक्षा होगी कि वे विद्यार्थियों के लिए एंट्री-लेवल रोजगार, प्रशिक्षु पद, ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग और अप्रेंटिसशिप के अवसर उपलब्ध कराएं।

    विद्यार्थियों के पास दो विकल्प होंगे
    राज्य में पहले से कौशल विकास और उद्योग-संबद्ध प्रशिक्षण के जरिए युवाओं को रोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जाते रहे हैं। नई व्यवस्था से 12वीं पास विद्यार्थियों के सामने दो स्पष्ट रास्ते होंगे। पहला तो उच्च शिक्षा में दाखिला। दूसरा कौशल प्रशिक्षण के बाद नौकरी या अप्रेंटिसशिप चुनना। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए यह पहल आय का साधन बनाने में उपयोगी हो सकती है।

    विशेष विद्यालयों का चयन किया जाएगा
    इस योजना में केवल नौकरी दिलाने पर ही नहीं
    , बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार योग्य बनाने पर भी जोर रहेगा। 12वीं के बाद चयनित युवाओं को संचार कौशल, डिजिटल दक्षता, कार्यस्थल व्यवहार, तकनीकी प्रशिक्षण तथा क्षेत्र-विशेष की जरूरतों के अनुरूप तैयारी कराई जा सकती है। इसके लिए कुछ विशेष सरकारी विद्यालयों का चयन किया जाएगा, जहां 12 वीं के बाद बच्चों को रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा। इन विद्यालयों में बड़ी कंपनियों को भी स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।

    शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि हम 12 वीं के बाद इच्छुक बच्चों को उनके बेहतर करियर और रोजगार दोनों में मदद करेंगे। जो बच्चे रोजगार चाहते हैं, उनके लिए प्लेसमेंट की योजना बनायी जा रही है। हम विद्यालय के बाद ही उनके लिए रोजगार का प्रबंध करेंगे।

  • मालवाहक और यात्री वाहनों की राह होगी अलग, ग्रेटर नोएडा से जेवर एयरपोर्ट तक बनेगी 6 लेन एलिवेटेड रोड

    मालवाहक और यात्री वाहनों की राह होगी अलग, ग्रेटर नोएडा से जेवर एयरपोर्ट तक बनेगी 6 लेन एलिवेटेड रोड

    ग्रेटर नोएडा 
    ग्रेटर नोएडा में बढ़ते औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के बीच यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारी है. ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही को अलग करने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने और मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छह लेन की एलिवेटेड रोड बनाने की योजना पर चर्चा हुई है। 

    ग्रेटर नोएडा की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए GNIDA ने हापुड़ बाईपास तक करीब 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने का प्रस्ताव दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, इस सड़क के निर्माण से नोएडा-ग्रेटर नोएडा और गंगा एक्सप्रेसवे के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और दोनों के बीच सफर का समय घटकर करीब 30 से 45 मिनट रह सकता है। 

    प्रस्ताव के तहत मौजूदा कनेक्टिविटी को करीब 15 किलोमीटर तक आगे बढ़ाकर ग्रेटर नोएडा को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों और आवागमन को गति मिलने की उम्मीद है। 

    लॉजिस्टिक्स हब से एयरपोर्ट तक एलिवेटेड रोड
    GNIDA ने मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब (MMLH)
    से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छह लेन की एलिवेटेड रोड बनाने का भी प्रस्ताव रखा है. यह सड़क वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के समानांतर बनाई जाएगी। 

    इस कॉरिडोर को मुख्य रूप से मालवाहक वाहनों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल करने की योजना है. इससे लॉजिस्टिक्स हब से निकलने वाले सामान को सीधे एयरपोर्ट के एयर कार्गो टर्मिनल तक पहुंचाया जा सकेगा. इससे माल परिवहन में समय की बचत होने के साथ शहर की सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव भी कम होने की उम्मीद है। 

    मास्टर प्लान 2041 में बदलाव की तैयारी
    ये सभी प्रस्ताव ग्रेटर नोएडा मास्टर प्लान 2041 में संशोधन की योजना का हिस्सा हैं. इसका मुख्य उद्देश्य शहर में मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग करना है. सोमवार को लखनऊ में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा की गई. बैठक में औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार भी मौजूद रहे। 

    GNIDA के मुताबिक, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब ग्रेटर नोएडा की आने वाली प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं, इनके विकसित होने के बाद क्षेत्र में माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने और लॉजिस्टिक्स हब से एयरपोर्ट के बीच यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होने की उम्मीद है। 

    कुल मिलाकर, प्रस्तावित सड़क और एलिवेटेड कॉरिडोर ग्रेटर नोएडा में फ्रेट ट्रैफिक को यात्री यातायात से अलग करने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। इससे औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक्स हब, गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी को नया बूस्ट मिल सकता है। 
     

  • पंजाब में चुनावी मिशन पर BJP, PM मोदी से अमित शाह तक एक्टिव; नितिन नवीन भी मैदान में

    पंजाब में चुनावी मिशन पर BJP, PM मोदी से अमित शाह तक एक्टिव; नितिन नवीन भी मैदान में

     चंडीगढ़
     पंजाब विधानसभा चुनाव में अब करीब छह महीने का समय शेष है और भाजपा ने प्रदेश में अपनी चुनावी गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने सितंबर और अक्टूबर में अपने शीर्ष नेतृत्व के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है।राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संभावित कार्यक्रमों को लेकर पार्टी स्तर पर तैयारियां चल रही हैं।

    सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी अक्टूबर में तीन दिन पंजाब में रह सकते हैं। हालांकि, अभी दौरे की तारीख तय नहीं हुई है। पार्टी का प्रयास है कि उनके कार्यक्रम को अमृतसर, जालंधर, लुधियाना और पटियाला के आसपास केंद्रित किया जाए।

    प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री पहले दिन माझा क्षेत्र के कई विधानसभा क्षेत्रों से रोड शो के माध्यम से गुजर सकते हैं। उनके रात्रि विश्राम के लिए राधा स्वामी सत्संग ब्यास के मुख्यालय पर विचार किया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री की जनसभा को लेकर भी पार्टी में मंथन चल रहा है। भाजपा के कुछ नेता बठिंडा अथवा पटियाला में जनसभा कराने के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व से संपर्क में हैं। बठिंडा से पटियाला तक रोड शो की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री कार्यालय और भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व मिलकर दौरे की अंतिम रूपरेखा तैयार करेगा।

    केंद्र की घोषणाओं पर भी मंथन
    प्रधानमंत्री के दौरे को चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी स्तर पर यह आकलन किया जा रहा है कि केंद्र सरकार पंजाब के लिए किन योजनाओं, परियोजनाओं या घोषणाओं की घोषणा कर सकती है।

    इसके साथ ही जनता के समक्ष रखे जाने वाले संभावित वादों पर भी मंथन शुरू हो गया है।
    18 सितंबर से नशे और कानून-व्यवस्था के खिलाफ यात्रा

    इसी कड़ी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 18 सितंबर को पठानकोट से पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर यात्रा की शुरुआत करेंगे। भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में नशे और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को प्रमुख मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

    19 से 21 सितंबर के बीच प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी यात्राएं निकाली जाएंगी। इन यात्राओं की संभावित शुरुआत श्री केसगढ़ साहिब, तलवंडी साबो और फाजिल्का से किए जाने पर विचार चल रहा है।

    यात्रा के दौरान बाइक रैली भी निकाली जाएगी। पार्टी की योजना इन यात्राओं को प्रदेश के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक ले जाने की है।

    यात्राओं का समापन जालंधर में प्रस्तावित है। यहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बड़ी रैली को संबोधित कर सकते हैं। उनकी रैली 29 या 30 सितंबर को होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि तारीख अभी अंतिम नहीं है।

    यात्राओं के नेतृत्व के लिए एक दर्जन से अधिक केंद्रीय मंत्रियों, राष्ट्रीय पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी है। मंगलवार को नई दिल्ली में होने वाली बैठक में यात्रा के कार्यक्रम, तीन अन्य शहरों से निकलने वाली यात्राओं और अमित शाह की रैली की तारीख पर अंतिम निर्णय होने की संभावना है।

    बैठक में प्रदेश प्रभारी डा सतीश पूनिया, प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और प्रदेश संगठन मंत्री मंथरी श्रीनिवासुलु के शामिल होने की संभावना है। अमित शाह के भी बैठक में शामिल होने की उम्मीद है।

  • बाढ़ प्रभावितों के लिए योगी सरकार का राहत अभियान जारी, 21,226 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

    बाढ़ प्रभावितों के लिए योगी सरकार का राहत अभियान जारी, 21,226 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती से प्रभावितों को राहत दिलाने के लिए योगी सरकार तेजी से काम कर रही है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य सुविधाओं और जरूरी राहत सामग्री की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक अब तक 21,226 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है और 16.73 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। इसके अलावा 1.29 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट, 6.94 लाख क्लोरीन टैबलेट और 2.73 लाख ओआरएस पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। राहत एवं बचाव अभियान में अब तक 2,259 नाव एवं मोटरबोट का इस्तेमाल किया गया है।

    वर्तमान में 26 जिलों में बाढ़ का असर बना हुआ है। संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन लगातार निगरानी करते हुए राहत और बचाव कार्यों को संचालित कर रहा है। बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 21,226 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। अकेले 8 सितंबर को 8,576 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। जलभराव और दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों को नाव-मोटरबोट के जरिए निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।

    2,259 नाव-मोटरबोट से लगातार रेस्क्यू अभियान

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत दलों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर नाव और मोटरबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब तक 2,259 नाव एवं मोटरबोट राहत-बचाव कार्य में प्रयुक्त हो चुकी हैं।

    16.73 लाख से अधिक लंच पैकेट बांटे

    बाढ़ के बीच प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने व्यापक अभियान चलाया है। अब तक 16.73 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। वहीं 1.29 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाए गए हैं। मंगलवार को भी 83,216 लंच पैकेट और 17,097 खाद्यान्न पैकेट वितरित किए गए। इससे प्रभावित परिवारों को संकट की स्थिति में तत्काल खाद्य सहायता मिल रही है।

    स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 1,106 मेडिकल टीमें सक्रिय

    बाढ़ के बाद संक्रमण और जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में अब तक 1,106 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 6.94,432 क्लोरीन टैबलेट और 2.73 लाख ओआरएस पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में अब तक 1,341 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं। इनमें 7,434 लोग शरणालयों में रह रहे हैं।

    पशुओं की सुरक्षा पर भी फोकस, जनहानि शून्य

    योगी सरकार के राहत अभियान में मानव जीवन के साथ पशुओं की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। पशुओं के लिए अब तक 6,620 क्विंटल भूसा वितरित किया गया है। राहत अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि है कि बाढ़ से अब तक पशु या जनहानि दर्ज नहीं हुई है।

    प्रभावित मकानों के लिए भी सहायता जारी

    बाढ़ से अब तक 1,493 मकान क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। इनमें से 1,273 मामलों में प्रभावित परिवारों को सहायता वितरित की जा चुकी है। राहत एवं बचाव कार्यों के साथ क्षति का आकलन कर प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने का काम भी जारी है।

    प्रभावित जिले

    अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कन्नौज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, संत कबीर नगर, रामपुर, सीतापुर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी।

  • वाराणसी में बुधवार को सजेगा पोषण का मंच, सीएम योगी करेंगे राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ

    वाराणसी में बुधवार को सजेगा पोषण का मंच, सीएम योगी करेंगे राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ

    लखनऊ

    राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ बुधवार (9 सितंबर) को वाराणसी से होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार्यक्रम में शामिल होकर हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी अभियान का शुभारंभ करेंगे। इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री महिला एवं बाल विकास अन्नपूर्णा देवी भी मौजूद रहेंगी। इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह की थीम ‘सही पोषण, देश रोशन’ रखी गई है। अभियान के तहत गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, बच्चों, किशोरियों और उनके परिवारों के बीच पोषण, स्वास्थ्य एवं देखभाल को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

    रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में होने वाले कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, प्रदेश की मंत्री बेबी रानी मौर्य और श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल, डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला, राज्य मंत्री हंस राज विश्वकर्मा, वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी, जिला पंचायत वाराणसी की प्रशासक पूनम मौर्या, विधान परिषद सदस्य राय धर्मेंद्र सिंह तथा विधायक सौरभ श्रीवास्तव, डॉ. नीलकंठ तिवारी, डॉ. अवधेश सिंह, त्रिभुवन राम और डॉ. सुनील पटेल मौजूद रहेंगे।

  • योगी सरकार का सुरक्षित पेयजल अभियान: बिहार की टीम ने यूपी जल निगम ग्रामीण की प्रयोगशाला का किया अध्ययन

    योगी सरकार का सुरक्षित पेयजल अभियान: बिहार की टीम ने यूपी जल निगम ग्रामीण की प्रयोगशाला का किया अध्ययन

    लखनऊ

     योगी सरकार प्रदेश के हर नागरिक को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के साथ पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच और निगरानी व्यवस्था को भी लगातार मजबूत कर रही है। इसी दिशा में उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) की लखनऊ स्थित राज्य स्तरीय जल विश्लेषण प्रयोगशाला का बिहार सरकार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) की तीन सदस्यीय टीम ने एक्सपोजर विजिट किया। यूनिसेफ उत्तर प्रदेश की टीम ने भी इसमें सहभागिता की। बिहार की टीम ने यूपी में जल गुणवत्ता की जांच, निगरानी और प्रयोगशाला प्रबंधन की आधुनिक व्यवस्था का प्रत्यक्ष अध्ययन किया।

    गांव स्तर तक जल गुणवत्ता की निगरानी

    एक्सपोजर विजिट के दौरान राज्य प्रयोगशाला प्रभारी एवं सहायक शोध अधिकारी अनिल कुमार ने उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत चल रही जल गुणवत्ता निगरानी एवं अनुश्रवण व्यवस्था की जानकारी दी। टीम को प्रदेश के प्रयोगशाला नेटवर्क, ग्राम स्तर पर फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) से पानी की जांच और पोर्टल के माध्यम से इसकी निगरानी की प्रक्रिया समझाई गई।

    पानी में किसी तरह का संदूषण मिलने पर सुधारात्मक कार्रवाई, दोबारा जांच और समस्या के अंतिम समाधान तक अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की भी जानकारी दी गई। एनएबीएल एक्रीडेशन और प्रयोगशाला की गुणवत्ता व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

    आधुनिक तकनीकों से पानी की जांच

    बिहार की टीम ने प्रयोगशाला में ई-कोलाई और टोटल कोलीफॉर्म जैसे जीवाणुजनित मापदंडों की जांच प्रक्रिया को देखा। इसके अलावा भारी धातुओं की बेहद कम मात्रा की जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली आईसीपी-एमएस और कीटनाशक अवशेषों की जांच के लिए जीसी-एमएस/एमएस जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। टीम को भविष्य में पीएफएएस और माइक्रोप्लास्टिक जैसे नए प्रकार के प्रदूषकों की जांच के लिए विकसित की जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया गया।

    यूपी-बिहार ने साझा किए बेहतर अनुभव

    उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के संयुक्त निदेशक सीपी यूनिट इंजीनियर संजय गुप्ता की अध्यक्षता में यूपी, बिहार और यूनिसेफ के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक भी हुई। इसमें जल गुणवत्ता निगरानी, प्रयोगशाला प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण और एनएबीएल एक्रीडेशन से जुड़ी बेहतर कार्यप्रणालियों और अनुभवों का आदान-प्रदान किया गया। अधीक्षण अभियंता (ग्रामीण) एवं प्रयोगशाला प्रमुख इंजीनियर ज्ञानेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि यह एक्सपोजर विजिट जल गुणवत्ता प्रबंधन और आधुनिक परीक्षण तकनीकों के क्षेत्र में दोनों राज्यों के बीच तकनीकी सहयोग को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहल है।

    वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रयोगशालाओं को मजबूत करने पर जोर

    उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने कहा कि सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका है। अंतरराज्यीय सहयोग और तकनीकी अनुभवों के आदान-प्रदान से प्रयोगशालाओं को वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और अधिक सक्षम बनाने के साथ-साथ नई एवं उभरती जल गुणवत्ता चुनौतियों के लिए भी तैयार किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी निगरानी एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए प्रत्येक नागरिक तक स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता के संकल्प को और मजबूत किया जाए।

  • सहायक आचार्य के 1,936 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी, आवेदन शुरू

    सहायक आचार्य के 1,936 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी, आवेदन शुरू

    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को गति देने की दिशा में योगी सरकार की पहल लगातार जारी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने प्रदेश के अशासकीय अनुदानित सह-शिक्षा महाविद्यालयों एवं महिला महाविद्यालयों में सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) के 1,936 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 8 सितंबर 2026 से शुरू हो गई है।

    आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए आवेदन प्रक्रिया में वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) व्यवस्था लागू की गई है। सहायक आचार्य पद के लिए आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को ओटीआर प्रक्रिया पूरी करनी होगी। निर्धारित अर्हता एवं पात्रता रखने वाले अभ्यर्थी ही आवेदन करेंगे। उन्होंने बताया कि विज्ञापित पदों की अर्हता एवं पात्रता के संबंध में अलग से व्यक्तिगत परामर्श उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।

    आयोग की वेबसाइट पर विस्तृत विज्ञापन एवं निर्देश पुस्तिका उपलब्ध है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि आवेदन करने से पहले विज्ञापन का सावधानीपूर्वक अध्ययन कर सभी निर्धारित अर्हताएं पूरी करने के बाद ही आवेदन करें।

    आयोग के उप सचिव संजय कुमार सिंह ने बताया कि ऑनलाइन पंजीकरण एवं आवेदन प्रक्रिया 8 सितंबर से प्रारंभ हो गई है। ऑनलाइन आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 7 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है, जबकि ऑनलाइन आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 11 अक्टूबर 2026 रहेगी। सहायक आचार्य पदों के लिए लिखित परीक्षा 19 एवं 20 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी।

    परीक्षा से संबंधित विस्तृत कार्यक्रम, परीक्षा केंद्र एवं अन्य आवश्यक दिशा-निर्देश आयोग की वेबसाइट पर समय-समय पर जारी किए जाएंगे। आयोग के अध्यक्ष ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे आवेदन से पहले विज्ञापन में दी गई शैक्षिक योग्यता, विषयवार पदों, आयु सीमा, आरक्षण, आवेदन प्रक्रिया एवं अन्य शर्तों को अच्छी तरह पढ़ लें और निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।

    योगी सरकार की रोजगारपरक नीतियों के तहत प्रदेश में विभिन्न विभागों एवं संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। सहायक आचार्य के 1,936 पदों पर भर्ती से उच्च शिक्षा क्षेत्र में योग्य युवाओं को अवसर मिलने के साथ ही महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

  • यूपी का मतलब अनलिमिटेड पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    यूपी का मतलब अनलिमिटेड पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी का मतलब अप यानी ‘अनलिमिटेड पोटेंशियल’ है। उत्तर प्रदेश के पास विरासत, हुनर, मानव संसाधन, उद्योग, उद्यमिता और देश का सबसे बड़ा बाजार है। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स भी हमारे पास है। अब इसी ताकत के सहारे उत्तर प्रदेश को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाना है। हमारा लक्ष्य फाइबर से यार्न, यार्न से फैब्रिक, फैब्रिक से गारमेंट और गारमेंट से ब्रांड होते हुए ग्लोबल मार्केट तक पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित करने का है।
     
    मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यूपी टेक मित्र पोर्टल लॉन्च करने के साथ हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू किए गए। साथ ही 163 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ कम्फर्ट और 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण किया गया। मुख्यमंत्री ने देशभर से आए टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिष्ठित उद्यमियों, निवेशकों, निर्यातकों, प्रदेश के परंपरागत बुनकरों, हथकरघा संचालकों और इस क्षेत्र में भविष्य तलाश रहे युवाओं का स्वागत और अभिनंदन किया।

    फैब्रिक सेक्टर में यूपी चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल पहचान हजारों वर्षों पुरानी है। वैदिक साहित्य से लेकर रामायण और महाभारत तक में काशी के रेशमी वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही का कारपेट, लखनऊ की चिकनकारी, बरेली की जरी, कानपुर का टेक्सटाइल इकोसिस्टम और मेरठ में टेक्निकल टेक्सटाइल की संभावनाएं प्रदेश की विरासत और औद्योगिक क्षमता का प्रमाण हैं। प्रदेश में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर इस सेक्टर की असली ताकत हैं। कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार का सृजन वस्त्र उद्योग करता है। उत्तर प्रदेश फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग में देश में तीसरे स्थान पर है और कुल फैब्रिक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 13 से 14 प्रतिशत है। पिछले छह वर्षों में प्रदेश के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में करीब 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यूपी इस सेक्टर में देश का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है। वर्ष 2025-26 में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निर्यात के साथ गौतमबुद्ध नगर देश के प्रमुख निर्यातक जिलों में दूसरे स्थान पर पहुंचा है।
     
    यूपी के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2030 तक 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर की टेक्सटाइल एवं अपैरल इकोनॉमी और 100 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प में उत्तर प्रदेश अपनी पूरी क्षमता से भागीदारी करेगा। ओडीओपी के माध्यम से प्रदेश के 35 से अधिक जिलों के वस्त्र और हैंडलूम उत्पादों को नई पहचान मिली है। प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं भी इस सेक्टर से जुड़कर आत्मनिर्भर हो रही हैं। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स प्रदेश में उपलब्ध है, जो टेक्सटाइल सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    2017 से पहले वसूली की पर्ची लेकर लौट जाते थे निवेशक

    मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ की बन गई थी। हर जनपद में माफिया की समानांतर सरकार चलती थी। कानून व्यवस्था चौपट थी। माफिया जहां हाथ रख देता, वह जमीन उसकी हो जाती और तत्कालीन सरकार मौन बनी रहती थी। निवेशक व्यापार का सपना लेकर आता था और वसूली की पर्ची लेकर लौट जाता था। दंगे, कर्फ्यू, गुंडा टैक्स और माफिया के कारण उद्योग लगाना मुश्किल था। बिजली और विकास एक परिवार तक सीमित था। आज यूपी कर्फ्यू, दंगा, माफिया और उपद्रव से मुक्त है। अब किसी ने बेटी, व्यापारी या निवेशक की सुरक्षा में सेंध लगाने का दुस्साहस किया तो उसके लिए दो ही जगह होंगी- जेल या जहन्नुम। अब कोई यूपी में खुलेआम पिस्टल लहरा कर नहीं चल सकता।

    यूपी का नाम सुनकर दूरी बना लेते थे लोग

    सीएम ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के नागरिकों के सामने पहचान का संकट पैदा हो गया था। यूपी का नाम सुनकर प्रदेश के बाहर लोग यहां के नागरिकों को किराये पर मकान देने और होटल में कमरा देने तक से कतराते थे। किसी समाज और नागरिक के लिए इससे बड़ी त्रासदी क्या हो सकती है। यूपी का परिचय देने पर व्यक्ति को कई बार सामाजिक रूप से दूरी का सामना करना पड़ता था। यहां कोई पर्व और त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से नहीं गुजरता था। उत्सव से पहले ही उपद्रव शुरू हो जाता था। पूरे प्रदेश में लोग दंगों की आग में झुलसते थे। बरेली, मथुरा के कोसीकलां, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे स्थानों पर बड़े दंगे हुए। व्यापक पैमाने पर पलायन हुआ और महीनों तक कर्फ्यू लगा रहा।

    अराजकता का शिकार बनीं कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें भी इसी अराजक व्यवस्था की शिकार बनीं। मगहर की कताई मिल 1977 में बनी और 1997 में बंद हो गई। बुनकरों और छोटे टेक्सटाइल उद्यमियों को बैंक से ऋण मिलने में भी कठिनाई होती थी। डीबीटी की व्यवस्था के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ न तो नागरिकों तक पहुंचता था और न ही उद्यमियों तक। 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव आया है। अब यहां कानून का राज है।

    यूपी के पास हैं 36 सेक्टोरल पॉलिसी

    सीएम ने कहा कि कानून व्यवस्था में बदलाव और निवेश अनुकूल नीतियों का परिणाम है कि आज प्रदेश के पास 36 सेक्टोरल पॉलिसी हैं। देश के 55 प्रतिशत मोबाइल और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का उत्पादन यूपी में हो रहा है। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के 6 स्ट्रेटेजिक नोड में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। प्रदेश में एमएसएमई के 12 प्लेज पार्क भी तैयार हो रहे हैं। पिछले 9 वर्ष में यूपी पर कैपिटा इनकम तीन गुना करने और वूमेन वर्कफोर्स की भागीदारी भी तीन गुना बढ़ाने में सफल रहा है। यूपी पिछले 6 वर्षों से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट है। यह निवेशकों का भरोसा है कि हमें पिछले 9 वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिसमें 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। 65 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार दिलाने में सफलता मिली है। हमने हर एमएसएमई को 5 लाख रुपये की सोशल सिक्योरिटी गारंटी दी है। आज यूपी में सर्वाधिक 96 लाख एमएसएमई यूनिट हैं।

    नोएडा बन रहा है अपैरल सिटी

    उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री अब केवल धागे, कपड़े और फैशन तक सीमित नहीं है। डिफेंस, हेल्थकेयर, कृषि और स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में टेक्निकल टेक्सटाइल तेजी से उभर रहा है। इसलिए उत्तर प्रदेश को ट्रेडिशनल टेक्सटाइल से आगे बढ़कर टेक्निकल टेक्सटाइल में भी अपनी ताकत बढ़ानी होगी। पीएम मित्र पार्क और संत कबीर टेक्सटाइल पार्क जैसी पहल इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं। वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संतकबीरनगर और बिजनौर में परियोजनाओं के लिए भूमि आरक्षित की गई है। सीतापुर, मऊ, कानपुर, झांसी और रायबरेली में टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। नोएडा को अपैरल सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    ग्लोबल वैल्यू चेन पार्टनर बनें एमएसएमई

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि एमएसएमई केवल सब-कॉन्ट्रैक्टर नहीं, ग्लोबल वैल्यू चेन के पार्टनर बनें। युवा केवल जॉब सीकर नहीं, टेक्सटाइल एंटरप्रेन्योर और इनोवेटर बनें तथा कारीगर केवल सप्लायर नहीं, अपने ब्रांड के मालिक बनें। ‘डिजाइन इन यूपी, मेड इन यूपी और एक्सपोर्टेड फ्रॉम यूपी’ के मंत्र से प्रदेश के हुनर को वैश्विक पहचान मिले। निफ्ट रायबरेली और उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट कानपुर युवाओं को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रहे हैं। यूपी आज पॉलिसी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट और मार्केट हर स्तर पर तैयार है। अब प्रदेश की सांस्कृतिक पूंजी को आर्थिक पूंजी में बदलना है। बुनकर का हुनर, उद्यमी का कारोबार, युवाओं का रोजगार, महिलाओं की भागीदारी, निवेश और निर्यात बढ़ाकर उत्तर प्रदेश को दुनिया के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में स्थापित किया जाएगा।

    कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान, उत्तर प्रदेश ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव वस्त्र उद्योग अनिल कुमार सागर सहित देशभर के प्रमुख उद्यमी, निवेशक, निर्यातक और टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिनिधि मौजूद रहे।