Category: राज्य

  • रोडवेज कर्मचारियों को बड़ी सौगात, 2072 कंडक्टरों की होगी भर्ती; ओवरटाइम-वर्दी-जूता भत्ता बढ़ा

    रोडवेज कर्मचारियों को बड़ी सौगात, 2072 कंडक्टरों की होगी भर्ती; ओवरटाइम-वर्दी-जूता भत्ता बढ़ा

    चंडीगढ़.

    हरियाणा रोडवेज के चालकों और परिचालकों को अब आठ घंटे की ड्यूटी के बाद ओवरटाइम का लाभ मिलेगा। गर्मी की वर्दी के लिए भत्ता 1350 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये और सर्दी की वर्दी के लिए 1450 रुपये से बढ़ाकर 1780 रुपये करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री ने स्वीकृत किया है।

    जूता भत्ता भी 1000 रुपये से बढ़ाकर 1600 रुपये किया जाएगा। परिवहन मंत्री अनिल विज के साथ मंगलवार को हुई बैठक में रोडवेज कर्मचारी साझा मोर्चा की 80 से 90 प्रतिशत मांगों पर सहमति बनी।
    जल्द ही 700 परिचालकों के पद भरे जाएंगे और 2072 नियमित परिचालकों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा गया है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि ड्यूटी के दौरान चालक-परिचालकों के साथ होने वाली झगड़ों और मारपीट की घटनाओं के मद्देनजर प्रत्येक जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।

    परिचालकों के ग्रेड पे में बढ़ोतरी के लिए पड़ोसी राज्यों की व्यवस्था का अध्ययन किया जाएगा। इसके अलावा, चालकों को हैवी पे ग्रेड देने और स्टैंड इंचार्ज के पद सृजन पर पुनः विचार किया जाएगा। कर्मचारियों को अर्जित अवकाश देने, ग्रुप-डी कर्मचारियों की तकनीकी पदों पर पदोन्नति, और कैलेंडर अवकाश देने के मामलों पर भी चर्चा हुई। विज ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि हरियाणा रोडवेज की बसों की समय-सारिणी में जल्द बदलाव किया जाए। एक माह के वेतन के बराबर बोनस देने का मामला मुख्यमंत्री के समक्ष भेजा जाएगा।

  • पंजाब में नियमित DGP नहीं होने पर हाईकोर्ट का रुख, ‘कार्यवाहक पद का प्रावधान नहीं’

    पंजाब में नियमित DGP नहीं होने पर हाईकोर्ट का रुख, ‘कार्यवाहक पद का प्रावधान नहीं’

    चंडीगढ़.

    पंजाब पुलिस के मुखिया के पद पर पिछले चार साल से नियमित नियुक्ति नहीं होने का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंच गया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने को कहा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए एक अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है।

    अतिरिक्त प्रभार पर डीजीपी की नियुक्ति को लेकर उठे सवाल
    अधिवक्ता निखिल थम्मन की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि पंजाब में पुलिस महानिदेशक (पुलिस बल के प्रमुख) का सर्वोच्च पद लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार के आधार पर चल रहा है। याचिका में इसे संस्थागत दृष्टि से गंभीर विषय बताते हुए नियमित डीजीपी की नियुक्ति की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी अधिकारी को लंबे समय तक केवल अतिरिक्त प्रभार देकर पुलिस बल का मुखिया बनाए रखना उसकी स्वतंत्रता और संस्थागत सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े करता है। नियमित नियुक्ति के साथ मिलने वाला निश्चित कार्यकाल और संस्थागत स्थिरता पुलिस नेतृत्व के लिए आवश्यक है। इससे कानून व्यवस्था के प्रति जनता का भरोसा भी मजबूत होता है।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का दिया हवाला
    याचिका में सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2006 के महत्वपूर्ण प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले के फैसले और 13 मार्च 2019 के बाद के आदेश का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग के पैनल के आधार पर चयन की प्रक्रिया निर्धारित की थी। याचिका में विशेष रूप से दावा किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि पुलिस महानिदेशक के पद पर ‘कार्यवाहक’ या ‘अस्थायी’ डीजीपी की कोई व्यवस्था नहीं हो सकती। ऐसे में पंजाब में लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार के आधार पर चल रही व्यवस्था को लेकर कानूनी सवाल उठाया गया है।

    सरकार को पहले ही भेजा गया था कानूनी नोटिस
    याचिका के मुताबिक, संघ लोक सेवा आयोग की ओर से तैयार पैनल कथित तौर पर पंजाब सरकार को पहले ही प्राप्त हो चुका है। इसके बावजूद नियमित डीजीपी की नियुक्ति नहीं होने पर याचिकाकर्ता ने 24 अगस्त 2026 को संबंधित अधिकारियों को विस्तृत कानूनी नोटिस भेजकर नियमित नियुक्ति करने की मांग की थी।

    एक अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
    मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने की। खंडपीठ ने पंजाब सरकार को मामले में अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब अदालत इस मामले की अगली सुनवाई एक अक्टूबर को करेगी।

  • सपा की कथनी और करनी में कितना फर्क? तुष्टिकरण की राजनीति को लेकर गरमाई सियासत

    सपा की कथनी और करनी में कितना फर्क? तुष्टिकरण की राजनीति को लेकर गरमाई सियासत

    सपा का तुष्टिकरण और कथनी-करनी का सच

    लखनऊ 

    चुनाव नजदीक देख समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लगभग रोज ही जनता से नए-नए वादे करने में जुट गए हैं और इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा है कि जब वह सत्ता में आएंगे तो बौद्ध तीर्थस्थलों का विकास करेंगे। लेकिन उनके इस वादे को लेकर उत्तर प्रदेश की जनता और विशेषकर दलित-शोषित समाज को यह विचार अवश्य करना चाहिए कि सपा का अतीत क्या रहा है और बौद्ध तीर्थस्थलों के प्रति उनका रवैया पूर्व में क्या रहा है? सच्चाई यह है कि बौद्ध धर्मस्थलों व स्मारकों का विकास या संरक्षण कभी समाजवादी पार्टी के एजेंडे में नहीं रहा। उलटे उनके शासनकाल में बौद्ध अनुयायी किस तरह अपमानित किए गए, इसे एक घटना से समझा जा सकता है। 
    अखिलेश यादव मार्च 2012 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। 17 अगस्त 2012 को लखनऊ के टीले वाली मस्जिद में अलविदा की नमाज़ पढ़ी जाती है। नमाज़ के बाद सुनियोजित ढंग से मुसलमानों की भीड़ मस्जिद से रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए बुद्धा पार्क की तरफ़ बढ़ती है। मौके पर मौजूद पुलिस बल उन्हें नहीं रोकता, क्योंकि वह सपा की मुस्लिम तुष्टिकरण नीति से भलीभांति परिचित था। पूरी तरह अराजकता पर उतारू भीड़ ने बुद्धा पार्क पर हमला कर दिया और भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर चढ़ कर उसे तोड़ डाला। अन्य बौद्ध-प्रतीकों और दुकानों को भी तहस-नहस कर दिया।
     
    उग्र भीड़ यहीं नहीं रुकती,  उसने भंते श्रीअशोकानंद जी एवं उनके शिष्यों पर प्राणघातक हमला बोल दिया और उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा, उनके कपड़े फाड़ दिए, क्योंकि उन्हें बौद्ध भिक्षुओं के भगवा वस्त्रों से भी नफ़रत थी। उनकी तीन गाड़ियां तोड़ दी गईं। प्रश्न उठता है कि ऐसा क्यों किया गया?  क्योंकि, अलविदा की नमाज़ के बाद मुसलमानों के बीच म्यांमार (बर्मा) के बौद्धों के विरुद्ध ज़हर उगला गया था। उस समय म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों और म्यांमार के बौद्ध नागरिकों के बीच झगड़े चल रहे थे। रोहिंग्या मुसलमानों ने बौद्धों पर हमले किए, उनके मकान जलाए और कई नरसंहार किए। वे म्यांमार के ‘अराकान’ क्षेत्र को बौद्धों से मुक्त करके ‘मुस्लिम’ देश बनाना चाहते थे। इस पर बौद्धों ने अपना बचाव किया और अंततः वहां हुए सांप्रदायिक दंगों में रोहिंग्या मुसलमानों को भागना पड़ा।
     
    इसके बाद रोहिंग्या मुसलमान भारी संख्या में बांग्लादेश होते हुए भारत में भी घुस आये और यहां भी उत्पात मचाने लगे, आतंकी घटनाएं भी कीं। यह बड़ा सवाल है कि भागे हुए रोहिंग्या ने आख़िर दुनिया के 56 मुस्लिम देशों में क्यों नहीं शरण ली, भारत ही क्यों? अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र के तहत, दुनिया भर के मुस्लिम आतंकी और उनका समाज भारत को ‘दारूल इस्लाम’ यानी ‘गजवा-ए-हिन्द’ बनाना चाहता है। झगड़ा म्यांमार में और बुद्ध प्रतिमा तोड़ी जाती है लखनऊ में,  बौद्ध संत और उनके शिष्यों पर हमला लखनऊ में। थाना हज़रतगंज में भंते अशोकानंद जी ने मुकदमा कायम कराया, किंतु तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली अखिलेश सरकार ने दंगाइयों व आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की… क्योंकि दंगाई मुसलमान थे।

    यह घटना सत्ता के संरक्षण में अराजकता का बड़ा उदाहरण है। दंगाई हज़रतगंज में तोड़फोड़ करते हुए विधानसभा मार्ग तक आ गए, लेकिन पुलिस ने आंसू-गैस और लाठीचार्ज तक नहीं किया। यह पहली बार हुआ कि दंगाइयों की भीड़ चौक से तोड़फोड़ करती हुई संवेदनशील हज़रतगंज होते हुए विधानसभा के सामने पहुंच गई। पुलिस अधिकारी भीड़ के आगे-आगे हज़रतगंज की दुकानें बंद करवाते हुए आगे बढ़ रहे थे। दंगाइयों पर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम’ (एनएसए) का मामला बनता था, किंतु अखिलेश जी ने आईपीसी की धाराओं में भी कोई कार्रवाई नहीं कराई।

    मैं अखिलेश यादव जी को बताना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार सभी धर्मों का सम्मान करती है। इसीलिए “विरासत से विकास” की योजना बनाई गई, अयोध्या में भव्य राममंदिर, काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर, मां विंधवासिनी कॉरिडोर, कुशीनगर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट और प्रदेश में ‘बुद्धिस्ट सर्किट’ योजना के तहत बौद्धस्थलों का विकास हो रहा है। मेरे गृह जनपद सिद्धार्थनगर में भगवान बुद्ध की जन्मस्थली ‘कपिलवस्तु’ से 1898 में अंग्रेज़ ज़मींदार विलियम स्तूप से भगवान बुद्ध की रेलिक्स (अवशेष) निकाल कर लंदन ले गया था। उन अवशेषों की 7 मई 2025 को हांगकांग में नीलामी होनी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में न केवल नीलामी रोकी गई अपितु उन पवित्र अवशेषों को भारत लाकर दिल्ली के राय पिथौरा फोर्ट में एक नवनिर्मित स्मारक में स्थापित कराया गया। मैंने भी प्रधानमंत्री जी को नीलामी रोकने के लिए 5 मई 2025 को पत्र लिखा था। अखिलेश जी को वहां जाना चाहिए, लेकिन वह नहीं जाएंगे, वह अयोध्या भी नहीं जाएंगे, क्योंकि वोट-बैंक का सवाल है।

    अखिलेश राज में बौद्धों का अपमान हुआ और भाजपा राज में उनका सम्मान। बाबा साहेब ने नागपुर में बौद्ध धर्म की दीक्षा ग्रहण की थी। प्रधानमंत्री जी ने नागपुर दीक्षास्थल सहित बाबा साहेब के सम्मान में ‘पंच तीर्थ’ बनवाए। अखिलेश राज में उत्तर प्रदेश में बाबा साहेब को अपमानित किया गया। उनके नाम पर बने कन्नौज मेडिकल कॉलेज से उनका नाम हटा दिया गया। बाबा साहेब आंबेडकर ग्रीन गार्डेन का नाम बदल कर ‘जनेश्वर मिश्रा पार्क’ कर दिया गया। 5 सितंबर 2016 को गाजियाबाद हज हाउस के लोकार्पण पर अखिलेश यादव के प्रिय मंत्री आज़म ख़ान ने बाबा साहेब को भू-माफिया कहा था, अखिलेश जी ने उन्हें रोका तक नहीं और तालियां बजाते रहे। यह बाबा साहेब से उनकी नफ़रत का खुला उदाहरण था। 

    मुझे यह कहने में संकोच नहीं कि अखिलेश यादव जी का एजेंडा ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ है। वह स्वयं भी बौद्ध विरोधी, दलित विरोधी, दलित महापुरुष विरोधी व संत विरोधी हैं। 2013 में एक लाख से अधिक दलित अधिकारियों/ कर्मियों को पदावनत करने वाले, लोकसभा में समाजवादी पार्टी के दलित सांसद यशवीर (नगीना बिजनौर) से दलितों के प्रमोशन में आरक्षण का बिल फड़वाने वाले अखिलेश जी के मुंह से बौद्ध तीर्थस्थलों के विकास की बात शोभा नहीं देती। सपा को दलित कभी माफ नहीं करेंगे। जब तक अतीत के इन ऐतिहासिक अपराधों और तुष्टिकरण की नीति का उत्तर नहीं दिया जाता, तब तक बौद्ध स्थलों के संरक्षण के दावे केवल एक राजनीतिक भ्रमजाल से अधिक कुछ नहीं हैं। वंदे मातरम् नमो बुद्धाय !

    –    बृजलाल, पूर्व पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश एवं सदस्य, राज्यसभा

  • ‘एसी में बैठकर पीसी करते हैं, अपने लोगों को अपराध न करने की कसम खिलाइए’… राजभर का अखिलेश पर हमला

    ‘एसी में बैठकर पीसी करते हैं, अपने लोगों को अपराध न करने की कसम खिलाइए’… राजभर का अखिलेश पर हमला

    'अहीर-जहीर आपको 2027 में 27 सीट भी नहीं जीतने देंगे'… राजभर का अखिलेश पर सीधा हमला

    झांसी के अपहरण से हापुड़ की गोकशी तक… राजभर का अखिलेश पर वार, बोले- ‘अपने अहीर-जहीर को कंट्रोल करो’

    ‘एसी में बैठकर पीसी करते हैं, अपने लोगों को अपराध न करने की कसम खिलाइए’… राजभर का अखिलेश पर हमला

    ‘नीली ड्रेस पहनाई तो सुहेलदेव सेना जैसा अनुशासन भी सिखाइए’… राजभर का अखिलेश पर वार

    झांसी

    सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने बुधवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्हें अपने ‘अहीर’ और ‘जहीर’ को कंट्रोल करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग न सिर्फ समाज का अहित कर रहे हैं, बल्कि अखिलेश यादव का भी राजनीतिक नुकसान कर देंगे।

    राजभर ने लिखा, 'अखिलेश भाई! अपने 'अहीर’ और ‘जहीर' को कंट्रोल कीजिए महाराज। ये बहुत अति मचाये हुए हैं। समाज का तो अहित कर ही रहे हैं, आपको भी ये निपटा देंगे।'

    झांसी की घटना का जिक्र कर सपा पर निशाना

    राजभर ने अपने पोस्ट में झांसी की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि 'अभी कल की ही घटना देख लीजिए। झांसी में आपका 'अहीर', जो कि सरकारी मास्टर है, उसने एक व्यापारी, जो कि बनिया समाज से आते हैं, उनका अपहरण कर लिया। हालांकि बाबा की पुलिस ने उसको पकड़ लिया है।'

    हापुड़ में गोकशी के आरोपी का भी जिक्र

    ओम प्रकाश राजभर ने हापुड़ की घटना को लेकर भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'हापुड़ में आपका 'जहीर' गोकशी के मामले में एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार हुआ।'

    ‘नीली ड्रेस पहनाने वालों को अनुशासन भी सिखाइए’

    राजभर ने अपने पोस्ट में सपा से जुड़े अपराधियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना की यूनिफॉर्म की कॉपी करके नीली ड्रेस पहनाई गई है, उन्हें उसी संगठन की तरह अनुशासन भी सिखाया जाना चाहिए। उन्होंने लिखा, 'जिन अपराधियों को आपने राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना की यूनिफार्म की कॉपी करके नीली ड्रेस पहनाई है, उन्हें उसी सुहेलदेव सेना की तरह का अनुशासन भी सिखाइए।'

    राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अगर अखिलेश यादव ऐसा नहीं कर सकते तो कम से कम एसी में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बजाय अपने लोगों को अपराध न करने की कसम तो खिला सकते हैं।

    ‘2027 में 27 सीट भी नहीं जीतने देंगे’

    राजभर ने अपने पोस्ट के आखिर में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी अखिलेश यादव पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि अगर ‘अहीर और जहीर’ पर नियंत्रण नहीं किया गया तो ये लोग अखिलेश यादव को 2027 में 27 सीट भी नहीं जीतने देंगे।

    दरअसल, जिन घटनाओं को लेकर राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा है उसमें एक घटना झांसी की है। जहां सरकारी शिक्षक रवि यादव और उसके साथी ने एक व्यापारी विकास गुप्ता का अपहरण कर लिया था और बंधक बनाकर उसके साथ मारपीट की थी। लेकिन पुलिस ने करीब सात घंटे में व्यापारी को बचा लिया था।

    वहीं, दूसरी घटना हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र की है जहां पुलिस ने गौ तस्करी कर रहे बिलाल और जहीर को मुठभेड़ के बाद पकड़ा था। दोनों पर गौकशी, चोरी, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट समेत कई मुकदमे दर्ज हैं।

  • संसद रत्न सम्मान लेने दिल्ली आए चन्नी, वेणुगोपाल से पंजाब कांग्रेस के सियासी हालात पर बातचीत!

    संसद रत्न सम्मान लेने दिल्ली आए चन्नी, वेणुगोपाल से पंजाब कांग्रेस के सियासी हालात पर बातचीत!

    चंडीगढ़.

    पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी बुधवार को नई दिल्ली पहुंचेंगे। चन्नी को आज संसद रत्न अवार्ड से सम्मानित किया जाना है। वह कृषि संबंधी संसदीय समिति के चेयरमैन भी हैं।

    दिल्ली प्रवास के दौरान कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से उनकी मुलाकात होने की संभावना है। माना जा रहा है कि मुलाकात होती है तो पंजाब कांग्रेस के मौजूदा राजनीतिक हालात और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रहे मतभेदों पर चर्चा हो सकती है। चन्नी की वेणुगोपाल से संभावित मुलाकात ऐसे समय में हो रही है, जब पंजाब कांग्रेस में संगठन को लेकर अंदरूनी खींचतान लगातार सामने आ रही है। एक जुलाई को विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस हाईकमान की ओर से चुनाव समितियों के गठन के बाद चन्नी और उनके समर्थक नेताओं की ओर से असहमति जताई गई थी। इसके बाद से चन्नी की हाईकमान के साथ सक्रिय स्तर पर मुलाकात नहीं हो सकी है। चन्नी समेत कई नेताओं ने राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा था, लेकिन संसद सत्र के दौरान भी उनकी राहुल गांधी से मुलाकात नहीं हो पाई।

    अगले सप्ताह पायलट आ सकते हैं पंजाब
    इधर, कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब में संगठन के भीतर समन्वय बढ़ाने की कवायद तेज कर दी है। पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट अगले सप्ताह पंजाब दौरे पर आएंगे। उनके दौरे की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रहे मतभेदों को दूर कर सभी नेताओं को एक मंच पर लाने की होगी। सूत्रों के मुताबिक पायलट पंजाब दौरे के दौरान पार्टी के प्रमुख नेताओं से मुलाकात करेंगे। वह नेताओं के साथ संगठन की स्थिति, आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और आपसी मतभेदों को लेकर चर्चा कर सकते हैं।

    संगठन में समन्वय बढ़ाने की कोशिश
    माना जा रहा है कि सभी प्रमुख नेताओं को एक साथ बैठाकर संगठन में समन्वय बढ़ाने की कोशिश भी की जाएगी। मंगलवार को चंडीगढ़ में हुए पंजाब कांग्रेस के रोष प्रदर्शन में भी पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों की सक्रियता दिखाई दी थी। ऐसे में पायलट का पहला पंजाब दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चन्नी और उनके समर्थक नेताओं ने पायलट की नियुक्ति का स्वागत किया है। अब हाईकमान की कोशिश यह है कि नए प्रभारी की अगुवाई में सभी नेताओं को साथ लेकर 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां आगे बढ़ाई जाएं।

  • अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए यूपी सरकार की नई पहल, रेंटल हाउसिंग नीति जल्द; बनी समिति

    अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए यूपी सरकार की नई पहल, रेंटल हाउसिंग नीति जल्द; बनी समिति

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश सरकार बुजुर्गों के लिए एक नई और विशेष रेंटल हाउसिंग नीति लाने की तैयारी कर रही है. इस नीति का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित, सम्मानजनक और किफायती आवास उपलब्ध कराना है. आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने इसके लिए नौ सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो नीति का प्रारूप तैयार कर सरकार को अपनी सिफारिशें देगी. प्रस्तावित योजना के तहत जरूरतमंद बुजुर्गों को कम किराये पर मकान उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी. सरकार का मानना है कि वृद्धावस्था में किसी भी वरिष्ठ नागरिक को आवास के लिए भटकना न पड़े और उसे सुरक्षित रहने का विकल्प मिल सके। 

    नीति तैयार करने के लिए बनी 9 सदस्यीय समिति
    आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने नई रेंटल हाउसिंग नीति के लिए नौ सदस्यीय समिति का गठन किया है. समिति की अध्यक्षता आवास विभाग के सचिव करेंगे. समिति में लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, वाराणसी और मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्षों को सदस्य बनाया गया है. वहीं, आवास बंधु के निदेशक को सदस्य-संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यह समिति वरिष्ठ नागरिकों की आवश्यकताओं का अध्ययन कर नीति का मसौदा तैयार करेगी और सरकार को अपनी संस्तुतियां सौंपेगी। 

    सभी शहरों में विकसित होगा आवास मॉडल
    सरकार की योजना प्रदेश के विभिन्न शहरों में बुजुर्गों के लिए विशेष आवासीय परियोजनाएं विकसित करने की है. इन मकानों को जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को किफायती किराये पर उपलब्ध कराया जाएगा. नीति में सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं तक आसान पहुंच, सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता और वरिष्ठ नागरिकों के अनुकूल बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। 

    बुजुर्गों के लिए पहले से चल रही हैं कई योजनाएं

    उत्तर प्रदेश सरकार पहले से ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है. वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत पात्र बुजुर्गों को प्रति माह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. इसके अलावा लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी जा रही है। 

    संपत्ति संरक्षण के अधिकार
    राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में 'उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली-2014' में संशोधन को मंजूरी दी है. नए प्रावधानों के तहत यदि संतान या आश्रित रिश्तेदार वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण नहीं करते या उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं तो बुजुर्ग उन्हें अपनी संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे. साथ ही शिकायतों के निस्तारण के लिए 30 दिन की समयसीमा भी तय की गई है। 

  • पंजाब में कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत, 13 दिन चली हड़ताल के बाद सरकार से सहमति

    पंजाब में कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत, 13 दिन चली हड़ताल के बाद सरकार से सहमति

    चंडीगढ़.

    पंजाब सरकार के कर्मचारियों और सरकार के बीच पिछले कई दिनों से चल रहा टकराव बुधवार को खत्म हो गया। मुख्य सचिव के साथ कर्मचारी संगठनों की बैठक के बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल वापस लेने का औपचारिक एलान कर दिया।

    बैठक में कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर भी लगभग सहमति बन गई है। सरकार की ओर से कर्मचारियों के खिलाफ जारी किए गए दोनों पत्र वापस लेने पर भी सहमति बनी है। कर्मचारी संगठनों ने लंबित मांगों को लेकर मंगलवार से सामूहिक अवकाश लेकर आंदोलन शुरू किया था और बाद में हड़ताल को 11 सितंबर तक बढ़ाने की घोषणा की थी। इससे पंजाब सिविल सचिवालय समेत विभिन्न सरकारी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हुआ था। सरकार की ओर से भी सख्त रुख अपनाते हुए ड्यूटी से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों पर ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ का नियम लागू करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।

    मुख्य सचिव के साथ हुई बातचीत
    बुधवार को मुख्य सचिव के साथ हुई बैठक में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। बैठक के बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी। कर्मचारियों की मांगों पर भी सरकार के साथ लगभग सहमति बनने की बात कही गई है। इसके साथ ही सरकार की ओर से जारी दोनों पत्रों को वापस लेने का फैसला हुआ है। इस घटनाक्रम से सरकार और कर्मचारियों के बीच बढ़ा तनाव फिलहाल खत्म हो गया है। कर्मचारियों के हड़ताल वापस लेने के बाद अब सरकारी कार्यालयों में सामान्य कामकाज बहाल होने की उम्मीद है। कर्मचारियों की मांगों को लेकर सरकार की ओर से आगे की प्रक्रिया जल्द स्पष्ट की जाएगी।

    क्या थी मांगें?
    कर्मचारी लंबित महंगाई भत्ता और एरियर जारी करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, अस्थायी कर्मियों को नियमित और वेतन से जुड़ी विसंगतियां दूर करने समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

  • मंजीत कौर मर्डर केस में पुलिस के हाथ बड़ी कामयाबी, ‘पिंदा’ गिरफ्तार; मुख्य आरोपित फरार

    मंजीत कौर मर्डर केस में पुलिस के हाथ बड़ी कामयाबी, ‘पिंदा’ गिरफ्तार; मुख्य आरोपित फरार

    चंडीगढ़.

    पंजाबी इंफ्लुएंसर मंजीत कौर की किडनैपिंग के बाद हत्या के मामले में सेक्टर-34 थाना पुलिस ने मुख्य आरोपित रिंकू के साथी परमिंदर सिंह उर्फ पिंदा (25) को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपित को वारदात में इस्तेमाल रिंकू की फॉर्च्यूनर कार के साथ सेक्टर-48 की मोटर मार्केट से गिरफ्तार किया।

    परमिंदर सिंह पंजाब के कपूरथला जिले के खानोवाल का रहने वाला है। उसका खरड़ में इमिग्रेशन का काम था, लेकिन वारदात से कुछ दिन पहले से वह रिंकू के लिए ड्राइवर के तौर पर काम कर रहा था। दोनों के बीच दोस्ती भी है। मंजीत कौर को सेक्टर-34 से बुलाने और अगवा करने के दौरान परमिंदर भी रिंकू के साथ था। पुलिस आरोपित को बुधवार को अदालत में पेश करेगी। पुलिस की ओर से उससे पूछताछ के लिए रिमांड मांगा जाएगा। वहीं, मामले के मुख्य आरोपित रिंकू की तलाश में पुलिस की टीमें जुटी हुई हैं।

    फोन कर सेक्टर-34 बुलाने का आरोप
    मंजीत कौर की मां कांता देवी ने सेक्टर-34 थाना पुलिस को बयान दिया था कि उनकी बेटी को उसके दो जानकार रिंकू और पिंदा ने फोन कर सेक्टर-34 बुलाया था। 3 और 4 जुलाई की रात दोनों आरोपितों ने मंजीत कौर के साथ कथित तौर पर मारपीट की और उसे कार में अगवा कर मोरिंडा के जंगल क्षेत्र में ले गए। आरोपित मंजीत कौर को मोरिंडा के जंगल क्षेत्र में ले गए और वहां एक पेड़ से बांधकर आग लगा दी। इसके बाद दोनों आरोपित मौके से फरार हो गए। इसी दौरान मंजीत कौर का एक जानकार वहां पहुंचा और कंबल डालकर आग बुझाई।

    गंभीर रूप से झुलसे मंजीत कौर को उपचार के लिए मोरिंडा अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे पीजीआई रेफर किया गया। मंजीत कौर को बाद में मोहाली स्थित मैक्स अस्पताल ले जाया गया। वहां कुछ दिनों तक उसका इलाज चला। इसके बाद उसे दोबारा पीजीआई रेफर किया गया। उपचार के दौरान मंजीत कौर की मौत हो गई। मामले में पुलिस ने अब परमिंदर सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस उससे पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि वारदात में उसकी क्या भूमिका थी और मुख्य आरोपित रिंकू की घटना के बाद कहां-कहां मौजूदगी रही। पुलिस रिंकू की गिरफ्तारी के लिए भी लगातार दबिश दे रही है।

  • सरकार-कर्मचारियों में बढ़ा टकराव, पंजाब में हड़ताल जारी; लुधियाना में सड़कें जाम, ‘नो वर्क नो पे’ का आदेश

    सरकार-कर्मचारियों में बढ़ा टकराव, पंजाब में हड़ताल जारी; लुधियाना में सड़कें जाम, ‘नो वर्क नो पे’ का आदेश

    चंडीगढ़
     लंबित मांगों को लेकर पंजाब सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को सामूहिक अवकाश के बाद कर्मचारी संगठनों ने अब 11 सितंबर तक हड़ताल जारी रखने का एलान किया है।

    पंजाब सिविल सचिवालय, निदेशालयों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के इस फैसले से आने वाले दिनों में सरकारी कामकाज प्रभावित होने की आशंका है। दूसरी ओर, सरकार ने भी सख्त रुख अपनाते हुए नो वर्क नो पे (काम नहीं तो वेतन नहीं) का आदेश जारी कर दिया।

    कार्यालयों में होगी जनता को परेशानी
    साथ ही, ड्यूटी से अनधिकृत अनुपस्थिति पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं। इसमें कहा गया है कि कई कर्मचारी कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने के बाद काम के दौरान कार्यालयों से अनुपस्थित हो जाते हैं। इससे आम जनता को परेशानी होती है।

    बसों के चक्का जाम की चेतावनी 
    पंजाब रोडवेज, पनबस और पी. आर. टी. से. काट्रैक्ट वर्क
    र्स यूनियन ने मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। यूनियन के राज्य अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर परिवहन मंत्री के साथ 8 सितम्बर को बैठक तय की गई थी, लेकिन मंत्री ने निजी कारणों का हवाला देते हुए बैठक को 9 सितम्बर तक टाल दिया है।

    रेशम सिंह गिल ने स्पष्ट किया कि यूनियन सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन कर्मचारियों की मांगों को लगातार लंबित रखने को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 9 सितम्बर को दोपहर 12 बजे तक परिवहन मंत्री के साथ बैठक का समय तय नहीं किया गया तो यूनियन पंजाब में बसों का चक्का जाम कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर देगी।

    क्यों हो रहा आंदोलन?
    इसे "अनधिकृत अनुपस्थिति" मान उन्हें वेतन नहीं दिया जाएगा। कर्मचारी आंदोलन के पिछले चरण में सरकार ने 2,500 कर्मचारियों को नोटिस जारी किए थे।

    कर्मचारी लंबित महंगाई भत्ता और एरियर जारी करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, अस्थायी कर्मियों को नियमित और वेतन से जुड़ी विसंगतियां दूर करने समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

  • अंबेडकर प्रतिमा से कथित छेड़छाड़ पर आक्रोश, जालंधर बाईपास चौक पर धरना; 22 सड़कों पर असर

    अंबेडकर प्रतिमा से कथित छेड़छाड़ पर आक्रोश, जालंधर बाईपास चौक पर धरना; 22 सड़कों पर असर

     लुधियाना
    जालंधर बाईपास चौक पर बाबा साहिब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के साथ हुई बेअदबी के विरोध में बुधवार को वाल्मीकि समाज, रविदास समाज समेत विभिन्न जत्थेबंदियां सड़क पर उतरेंगी।

    संगठनों की ओर से सुबह 10 बजे जालंधर बाईपास चौक में धरना दिया जाएगा। इसके चलते जालंधर-पानीपत हाईवे समेत आसपास की करीब 22 सड़कों पर ट्रैफिक प्रभावित होने की संभावना है।

    धरने को लेकर पुलिस प्रशासन ने ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। पुलिस की ओर से फिलहाल जगराओं पुल से समराला चौक फ्लाईओवर की तरफ जाने वाले ट्रैफिक तथा सदर्न बाईपास की ओर जाने वाले ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है।

    हालांकि पुलिस ने इसे फिलहाल अस्थायी व्यवस्था बताया है। धरने के दौरान ट्रैफिक का दबाव बढ़ने पर जरूरत के मुताबिक अन्य रास्तों पर भी यातायात को मोड़ा जा सकता है।

    22 सड़कों पर पड़ सकता है असर
    जालंधर बाईपास चौक पर धरना होने के कारण चौक से जुड़ी करीब 22 सड़कों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है। जालंधर-पानीपत हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों के अलावा आसपास के इलाकों से आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

    पुलिस की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे बुधवार को इस रूट पर जाने से पहले वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें।

    जरूरी सेवाओं को रहेगी छूट
    पुलिस प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि धरने के दौरान एम्बुलेंस, डॉक्टरों, स्कूलों और मेडिकल सेवाओं से जुड़े वाहनों को जरूरी छूट दी जाएगी। आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित न होने देने के लिए पुलिस कर्मियों को विशेष तौर पर व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    पुलिस का प्रयास है कि प्रदर्शनकारियों के धरने के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे और आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। वहीं, विभिन्न संगठनों के धरने को देखते हुए जालंधर बाईपास चौक और इसके आसपास पुलिस बल की तैनाती भी की जाएगी।