Category: राज्य

  • UP Transfer: IAS-PCS अफसरों के तबादले, काशी विश्वनाथ मंदिर के CEO समेत कई अधिकारियों का स्थानांतरण

    UP Transfer: IAS-PCS अफसरों के तबादले, काशी विश्वनाथ मंदिर के CEO समेत कई अधिकारियों का स्थानांतरण

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश शासन ने रविवार को देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 14 आईएएस और 34 पीसीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए। इसमें तीन जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) समेत कई मंडलों के अपर आयुक्तों को नई तैनाती दी गई है। सहारनपुर के मुख्य विकास अधिकारी सुमित राजेश महाजन को मुख्य कार्यपालक अधिकारी, उत्तर प्रदेश स्टार्ट-अप मिशन बनाया गया है। उनकी जगह राज्य कर विभाग में तैनात अपर आयुक्त डॉ. सुनील कुमार वर्मा को सीडीओ सहारनपुर की जिम्मेदारी दी गई है।

    लखीमपुर खीरी के सीडीओ अभिषेक कुमार को विशेष सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग बनाया गया है, जबकि अयोध्या में अपर जिलाधिकारी (नगर) के पद पर तैनात योगानन्द पाण्डेय को लखीमपुर खीरी का नया सीडीओ बनाया गया है। इसी तरह अम्बेडकर नगर के सीडीओ आनन्द कुमार शुक्ला को विशेष सचिव रेशम विभाग एवं निदेशक रेशम बनाया गया है और कुशीनगर के अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) वैभव मिश्रा को अम्बेडकर नगर का सीडीओ बनाया गया है।

    राजस्व परिषद प्रयागराज में बड़ा फेरबदल
    राजस्व परिषद प्रयागराज में भी बड़ा फेरबदल हुआ है। सदस्य (न्यायिक) साहब सिंह को सचिवालय प्रशासन विभाग में सचिव बनाया गया है। उनकी जगह पर डॉ. विश्राम, अपर आयुक्त विन्ध्याचल मंडल और देवेन्द्र कुमार सिंह कुशवाहा, विशेष सचिव रेशम विभाग को सदस्य (न्यायिक), राजस्व परिषद प्रयागराज बनाया गया है। आईटी विभाग के विशेष सचिव राहुल सिंह को विशेष सचिव, लोक निर्माण विभाग, संयुक्त निदेशक युवा कल्याण अशोक कुमार कनौजिया को विशेष सचिव, माध्यमिक शिक्षा विभाग और अपर आयुक्त अलीगढ़ मंडल अरुण कुमार को विशेष सचिव, ग्राम्य विकास विभाग बनाया गया है।

    अपर नगर आयुक्त सहारनपुर प्रदीप कुमार यादव को अपर आयुक्त अलीगढ़ मंडल की जिम्मेदारी दी गई है। महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं सचिव चिकित्सा शिक्षा नेहा शर्मा* को सचिव चिकित्सा शिक्षा के पद से अवमुक्त किया गया है। दूसरी ओर यूपी में 34 पीसीएस अफसरों के तबादले, कई एसडीएम, नगर आयुक्त और एसडीएम बदल दिए गए हैं। अपर नगर आयुक्त गाजियाबाद जंग बहादुर यादव को संयुक्त आयुक्त (प्रशासन), आयुक्त ग्राम्य विकास के कार्यालय में भेजा गया है। वहीं प्रधान प्रबंधक, सहकारी चीनी मिल संघ सुश्री बरखा सिंह को अपर नगर आयुक्त, वाराणसी नगर निगम बनाया गया है।

    काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ हटे
    श्री काशी विश्वनाथ मंदिर एवं विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा को उपसचिव, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग बनाया गया है।
    गौतमबुद्धनगर और प्रयागराज की अदला-बदली

    अपर जिलाधिकारी (नजूल) प्रयागराज और उपसंचालक चकबंदी प्रयागराज संजय कुमार पाण्डेय को अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), गौतमबुद्धनगर और वहां तैनात एडीएम (प्रशासन) मंगलेश दुबे को उपसंचालक चकबंदी, प्रयागराज भेजा गया है।

    इसके अलावा एडीएम (वि/रा) बहराइच अमित कुमार-2 और एडीएम (वि/रा) बागपत विनीत उपाध्याय को प्रधान प्रबंधक, उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ। एडीएम वि/रा) देवरिया राम शंकर को उपायुक्त (प्रशासन), आयुक्त खाद्य एवं रसद। एडीएम वि/रा) कासगंज दिग्विजय प्रताप सिंह को उपनिदेशक, राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद। एडीएम (प्रशासन) एटा संगम लाल को एडीएम (नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति), मिर्जापुर के पद पर भेजा गया है।

    एडीएम न्यायिक) जालौन योगेंद्र सिंह को उपनिदेशक (प्रशासन), रेशम निदेशालय। नगर मजिस्ट्रेट मुजफ्फरनगर पंकज प्रकाश राठौड़ को (एडीएम वि/रा), देवरिया और उपजिलाधिकारी बुलंदशहर दीपक कुमार पाल को नगर मजिस्ट्रेट, मुजफ्फरनगर।उपजिलाधिकारी हापुड़ श्रीमती रेणु को अपर नगर आयुक्त, गाजियाबाद। उपजिलाधिकारी औरैया अजय आनंद वर्मा को उपजिलाधिकारी, आजमगढ़ और आजमगढ़ की एसडीएम श्रीमती दिव्या सिकरवार को एसडीएम औरैया भेजा गया है।

    एसडीएम सिद्धार्थनगर श्रीमती रेणु मिश्रा को एसडीएम फर्रुखाबाद, एसडीएम गोंडा प्रदीप कुमार सिंह को एसडीएम गौतमबुद्धनगर, एसडीएम कानपुर देहात प्रद्युम्न कुमार को एसडीएम बस्ती। उपसचिव अधीनस्थ सेवा चयन आयोग श्रीमती वंदना त्रिवेदी को उपनिदेशक, डॉ. राम मनोहर लोहिया प्रशासन अकादमी में तैनाती दी गई है।

    एडीएम (प्रशासन) बदायूं अरुण कुमार को एडीएम (वि/रा) बहराइच और एसडीएम सहारनपुर मानवेंद्र सिंह (2019) को एडीएम (प्रशासन) बदायूं। उपनिदेशक मंडी परिषद राजीव कुमार राय को एडीएम (वि/रा) बागपत, एडीएम (नागरिक आपूर्ति) आगरा अजय नारायण सिंह को एडीएम (प्रशासन) एटा, एसडीएम आजमगढ़ प्रशांत कुमार को एडीएम (नागरिक आपूर्ति) आगरा और एसडीएम आजमगढ़ श्रीमती प्रियंका सिंह को अपर नगर आयुक्त, मथुरा भेजा गया है।

    सचिव कानपुर विकास प्राधिकरण अभय कुमार पाण्डेय को एडीएम (वि/रा) कासगंज, एसडीएम कौशांबी सुखलाल प्रसाद वर्मा कोएडीएम (नजूल) प्रयागराज, एसडीएम बस्ती शत्रुहन पाठक को एडीएम (न्यायिक) जालौन। मुख्य राजस्व अधिकारी मिर्जापुर देवेंद्र प्रताप सिंह-2 को सचिव, मुरादाबाद विकास प्राधिकरण और एडीएम (नमामि गंगे) मिर्जापुर श्रीमती विजेता को मुख्य राजस्व अधिकारी, मिर्जापुर में तैनात किया गया है।

    एसडीएम संभल सुश्री शुभी गुप्ता को सहायक निदेशक, लोहिया अकादमी, एसडीएम मैनपुरी अशोक कुमार को एसडीएम हापुड़ और एसडीएम झांसी शुभेन्दु शेखर सिंह को विशेष कार्याधिकारी, यूपीडा बनाया गया है।

  • मानसून की विदाई से पहले हरियाणा में फिर सक्रिय होगा मौसम, कई जिलों में येलो अलर्ट

    मानसून की विदाई से पहले हरियाणा में फिर सक्रिय होगा मौसम, कई जिलों में येलो अलर्ट

     हिसार
     हरियाणा में मानसून का अंतिम दौर चल रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार सितंबर में अब तक प्रदेश में सामान्य से 51 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। रविवार को सिरसा, फतेहाबाद, हिसार में उकलाना व बरवाला क्षेत्र, अंबाला और यमुनानगर क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा की गतिविधियां देखने को मिली। हिसार व रोहतक जिलों का अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस रहा।

    वहीं कई जिलों में तापमान 28 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा। एक जून से 13 सितंबर तक हरियाणा में 303.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 403.2 मिलीमीटर होती है। 19 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज हुई है, जबकि भिवानी, गुरुग्राम और कुरुक्षेत्र में वर्षा सामान्य के आसपास रही है।

    कई जिलों में सामान्य से कम वर्षा
    सितंबर में रविवार से पहले सिरसा में सामान्य 20 मिलीमीटर के मुकाबले शून्य वर्षा दर्ज हुई है। वहीं हिसार में 96 प्रतिशत, करनाल में 93 प्रतिशत और भिवानी में 93 प्रतिशत वर्षा की कमी रही। जींद में 80 और कुरुक्षेत्र में 82 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। दूसरी ओर पंचकूला में सामान्य से 57, पलवल में 48 और गुरुग्राम में 16 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है।

    मानसून पर अल नीनो का असर : डा. चंद्रमोहन
    मौसम विशेषज्ञ डा. चंद्रमोहन ने बताया कि इस साल अल-नीनो का असर मानसून पर साफ तौर पर देखने को मिला। अब मानसून की विदाई से पहले अगले सप्ताह वर्षा की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। 15 सितंबर को उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है।

    इसके प्रभाव से मानसून टर्फ हरियाणा-एनसीआर-दिल्ली की ओर आने व पश्चिमी विक्षोभ व मानसून गतिविधियों के बीच संपर्क बनने की संभावना है

    15 से 19 सितंबर के बीच प्रदेश के करीब 60 से 70 प्रतिशत हिस्से में वर्षा की गतिविधियां हो सकती हैं। पश्चिमी हरियाणा के सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी और महेंद्रगढ़ तथा उत्तरी जिलों पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल और जींद में हल्की से मध्यम वर्षा व कुछ स्थानों पर तेज वर्षा की संभावना है। वर्षा की गतिविधियों को देखते हुए हरियाणा-एनसीआर-दिल्ली में एक बार फिर येलो अलर्ट की स्थिति बनी है।

    मानसून की विदाई की प्रक्रिया तेज होने की संभावना
    वर्षा व बूंदाबांदी से दिन व रात के तापमान में गिरावट आएगी। प्रदेश के मौसमी वर्षा के आंकड़े में भी कुछ सुधार हो सकता है। इसके बाद मानसून की विदाई की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।

    राजस्थान में प्रति चक्रवातीय परिसंचरण बनने के बाद पश्चिमी हवाएं सक्रिय होने पर मानसून की विदाई लगभग तय मानी जा रही है। मौसम विशेषज्ञ ने किसानों को सलाह दी है कि लावणी की फसलों की कटाई और अन्य कृषि कार्य मौसम की गतिविधियों को ध्यान में रखकर करें।

    वर्षा की संभावना को देखते हुए कटी फसल को सुरक्षित स्थान पर रखें और तिरपाल आदि की व्यवस्था पहले से कर लें।

    तापमान का ब्योरा (डिग्री सेल्सियस में)
    जिला – अधिकतम – न्यूनतम
    हिसार – 35.4 – 26.3
    रोहतक -35.4 – 26.6
    अंबाला – 34.5 – 27.5
    सिरसा – 34.4 – 26.9
    महेंद्रगढ़ – 35.3 – 25.4
    करनाल – 29.3 – 27.4

     

  • निकाय चुनाव में राजस्थान में भाजपा का परचम, 1502 सीटों पर जीत; कांग्रेस से सीधा मुकाबला

    निकाय चुनाव में राजस्थान में भाजपा का परचम, 1502 सीटों पर जीत; कांग्रेस से सीधा मुकाबला

    जयपुर 

    राजस्थान में नगर निकाय चुनावों के नतीजे सामने आने लगे हैं. राज्य निर्वाचन आयोग ने 309 नगरीय निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका) के लिए दो चरणों में निकाय चुनाव कराए थे. अब इनके नतीजों का ऐलान होने लगा है जिसमें बीजेपी बढ़त बनाती दिख रही है। 

    9 सितंबर 2026 को पहले चरण के चुनाव कराए गए थे. इस दौरान 162 निकायों के लिए मतदान हुआ था. इसके बाद 11 सितंबर 2026 को दूसरे चरण में 147 निकायों के लिए मतदान कराए गए. इस चरण में जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर और बीकानेर जैसे राज्य के प्रमुख नगर निगम शामिल थे। 

    दोनों चरणों को मिलाकर कुल 10,167 वार्डों के लिए वोट डाले गए. अब सोमवार को सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हो गई है. चुनावी नतीजे घोषित होने के बाद 21 सितंबर 2026 को महापौर (मेयर), नगर परिषद सभापति और नगरपालिका चेयरमैन पदों के लिए चुनाव प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। 

    नगर परिषद और नगर पालिका में बीजेपी ही आगे
    राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के ताजा रुझानों में नगर परिषद और नगर पालिका दोनों ही स्तरों पर बीजेपी बढ़त बनाए हुए है. नगर परिषद की 47 सीटों में से बीजेपी 15 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 14 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. इसके अलावा 6 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी आगे हैं. नगर पालिका की 252 सीटों के रुझानों में बीजेपी 79 सीटों पर बढ़त के साथ सबसे आगे है. वहीं कांग्रेस 51 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि 9 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बढ़त बनाई हुई है। 

     'आने वाला बोर्ड कांग्रेस पार्टी का ही बनेगा'
    अजमेर में कांग्रेस उम्मीदवार नोरत गुर्जर ने अपनी जीत के बाद जनता का आभार जताया. उन्होंने कहा, 'उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं. जनता ने इस बार बदलाव चुना है. आने वाला बोर्ड कांग्रेस पार्टी का ही बनेगा. लोग सालों से परेशान थे, लेकिन अब बदलाव पक्का है. मैं अपने इलाके के लोगों का भी शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने लगातार चौथी बार मुझ पर अपना अपार आशीर्वाद दिया। 

     1502 सीटों पर BJP का जलवा
    राजस्थान नगर निकाय के 3657 सीटों के नतीजे घोषित हो गए हैं. इनमें से 1502 सीटों पर BJP, 1397 सीटों पर कांग्रेस और 725 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। 

     10 नगर निगमों के नतीजे जारी
    राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के ताजा नतीजों के रुझानों में राज्य के 10 नगर निगमों में दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है. अब तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक 5 नगर निगमों में बीजेपी आगे चल रही है, जबकि 4 नगर निगमों में कांग्रेस ने बढ़त बनाई हुई है। 

    10 नगर निगमों का हाल
    जयपुर: बीजेपी 65 और कांग्रेस 43 सीटों पर आगे चल रही है.
    अजमेर: कांग्रेस को 23 और बीजेपी को 20 सीटें मिली हैं.
    जोधपुर: कांग्रेस 22 और बीजेपी 16 सीटों पर आगे है.
    पाली:
    कांग्रेस 22 और बीजेपी 18 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.
    बीकानेर: कांग्रेस 5 और बीजेपी 2 सीटों पर आगे है.
    उदयपुर: बीजेपी 14 और कांग्रेस 7 सीटों पर आगे है.
    कोटा: बीजेपी 14 और कांग्रेस 5 सीटों पर आगे है.
    अलवर: बीजेपी 11 और कांग्रेस 8 सीटों पर आगे है.
    भीलवाड़ा: बीजेपी 10 और कांग्रेस 3 सीटों पर आगे है.
    भरतपुर: बीजेपी 7 और कांग्रेस 3 सीटों पर आगे है, जबकि 18 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी आगे चल रहे हैं.

    राजस्थान नगर निकाय चुनाव में भाजपा की भारी जीत हुई है। शहरी स्थानीय निकाय की जिन 309 सीटों के नतीजे घोषित किए गए हैं उनमें से भाजपा ने 163 सीटें, कांग्रेस ने 103 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 43 सीटें जीती हैं।

    इस चुनाव में 38,889 उम्मीदवार मैदान में थे। 10 नगर निगमों, 47 नगर परिषदों और 252 नगर पालिकाओं में गवर्निंग बोर्ड बनाने का रास्ता साफ हो गया है। वोटों की गिनती सुबह 8 बजे शुरू हुई।
    स्थानीय निकायों के हिसाब से स्थिति

    नगर निगम (10): भाजपा 5 में, कांग्रेस 4 में और अन्य 1 में आगे हैं।

    नगर परिषद (47): भाजपा 15 में, कांग्रेस 15 में और अन्य 5 में आगे हैं, जबकि 2 में किसी को बहुमत नहीं मिला है। 10 के नतीजों का इंतजार है।

    नगर पालिकाएं (252): भाजपा 76 में, कांग्रेस 49 में और अन्य 11 में आगे हैं, जबकि 13 में किसी को बहुमत नहीं मिला है। 103 के नतीजों का इंतजार है।
    अजमेर नगर निगम: भाजपा ने 9 वार्ड जीते, कांग्रेस को 6 मिले

    राजस्थान के निकाय चुनावों में वोटों की गिनती जारी है। इस बीच अजमेर नगर निगम में भाजपा ने नौ वार्ड जीते हैं, जबकि कांग्रेस ने छह वार्डों में जीत हासिल की है।

    भीलवाड़ा नगर निगम: भाजपा ने 10 वार्ड जीते

    भाजपा ने भीलवाड़ा नगर निगम में 10 वार्ड जीते हैं, जबकि कांग्रेस ने दो वार्डों में जीत हासिल की है।
    जयपुर नगर निगम: भाजपा ने 17 वार्ड जीते

    जयपुर नगर निगम में भाजपा ने 17 वार्ड जीते हैं, जबकि कांग्रेस ने छह वार्डों में जीत हासिल की है।
    झालावाड़ नगर परिषद: कांग्रेस ने वसुंधरा राजे के गढ़ में बड़ी जीत हासिल की

    कांग्रेस ने राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गढ़, झालावाड़ नगर परिषद में स्पष्ट बहुमत हासिल किया है और 45 में से 29 वार्डों पर जीत दर्ज की है। बीजेपी ने 13 वार्ड जीते, जबकि दो निर्दलीय और एक आप उम्मीदवार भी विजयी रहे।

     

    दो चरणों में हुए थे चुनाव

    चुनाव 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में हुए और पूरे राज्य में वोटों की गिनती एक साथ की गई। दोनों चरणों में कुल 73.56 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के मतदान प्रतिशत से तीन प्रतिशत से भी ज्यादा है। इन चुनावों में प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के साथ-साथ बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल थे।
    किस पार्टी के कितने उम्मीदवार

    बीजेपी ने 9,290 उम्मीदवार उतारे, जबकि कांग्रेस ने 9,027 उम्मीदवार खड़े किए। निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या 18,732 थी। मैदान में मौजूद अन्य पार्टियों में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के 948, आम आदमी पार्टी (आप) के 311, बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के 298, सीपीआई (एम) के 185 और भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के 98 उम्मीदवार शामिल थे।
    बीजेपी और कांग्रेस के लिए नतीजे क्यों अहम हैं?

    यह मुकाबला मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के लिए खास तौर पर अहम है। 2023 के विधानसभा चुनाव में सत्ता में आने के बाद पार्टी शहरी राजस्थान में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है।

    कांग्रेस के लिए ये निकाय चुनाव यह दिखाने का मौका है कि विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद राज्य में उसका संगठनात्मक आधार मजबूत बना हुआ है। नतीजों से राजस्थान के शहरी इलाकों में वोटरों के मूड और वार्ड स्तर पर दोनों मुख्य पार्टियों की ताकत का भी शुरुआती संकेत देखने को मिला।

  • जोधपुर में कांग्रेस का जलवा, बीकानेर-अजमेर-उदयपुर में BJP की बढ़त से बदले सियासी समीकरण

    जोधपुर में कांग्रेस का जलवा, बीकानेर-अजमेर-उदयपुर में BJP की बढ़त से बदले सियासी समीकरण

    जयपुर
     राजस्थान के शहरों की सियासत में आज जनादेश का दिन है और अलग-अलग इलाकों से लगातार चौंकाने वाले नतीजे सामने आ रहे हैं. जोधपुर में कांग्रेस ने दम दिखाते हुए अब तक तीन वार्डों में जीत दर्ज की है, जबकि बीजेपी ने भी एक वार्ड अपने नाम किया है. बीकानेर नगर निगम के घोषित 21 वार्डों में बीजेपी ने 11 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस को 8 और निर्दलीयों को 2 सीटें मिली हैं. अजमेर नगर निगम के घोषित 27 वार्डों में बीजेपी 13, कांग्रेस 10 और निर्दलीय 4 सीटों पर विजयी रहे हैं. अजमेर के वार्ड 4 में दो बार के पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत की हार भी बड़ा सियासी उलटफेर है, जहां बीजेपी की मोनिका जैन ने जीत दर्ज की. दूसरी ओर, झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस ने 45 में से 29 वार्ड जीतकर बीजेपी का गढ़ ढहा दिया है. उदयपुर में घोषित 15 वार्डों में बीजेपी ने 10 और कांग्रेस ने 5 सीटें जीती हैं. वहीं नैनवां नगर पालिका के सभी 25 वार्डों में कांग्रेस 11 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि बीजेपी को 8 और निर्दलीयों को 6 सीटें मिलीं.

    राज्य के व्यापक रुझानों में भी बीजेपी फिलहाल बढ़त बनाए हुए है. 47 नगर परिषदों में से 28 में बीजेपी आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 12 में बढ़त पर है. 252 नगर पालिकाओं में बीजेपी 120 में आगे है, जबकि कांग्रेस 99 में बढ़त बनाए हुए है और 15 में निर्दलीय आगे चल रहे हैं. वहीं अंता नगर पालिका में 35 घोषित सीटों के नतीजों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों को 16-16 सीटें मिली हैं, जबकि 3 सीटों पर निर्दलीय विजयी रहे. सिरोही की मंडार नगरपालिका में बीजेपी और निर्दलीयों ने 7-7 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस को 6 सीटें मिलीं. बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी ने शुरुआती 11 वार्डों में 9 सीटें जीतकर भी बड़ा उलटफेर किया है. इन नतीजों से साफ है कि राजस्थान के शहरी इलाकों में मुकाबला सिर्फ बीजेपी बनाम कांग्रेस तक सीमित नहीं है, बल्कि कई जगह निर्दलीय और छोटे दल भी समीकरण बदल रहे हैं.

    राजस्थान में नगर निकाय चुनाव दो चरणों में कराए गए थे. पहले चरण में 9 सितंबर को 162 शहरी निकायों में मतदान हुआ था, जबकि दूसरे चरण में 11 सितंबर को 147 निकायों में वोट डाले गए. पहले चरण में 76.41 फीसदी और दूसरे चरण में 71.69 फीसदी मतदान हुआ. दोनों चरणों को मिलाकर कुल 74.05 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था. अब इसी वोटिंग का फैसला सामने आ रहा है. इन नतीजों को 2028 विधानसभा चुनाव से पहले अहम सियासी संकेत माना जा रहा है. जहां जोधपुर जैसे शहरों में कांग्रेस का प्रदर्शन उसके लिए राहत लेकर आया है, वहीं अजमेर, बीकानेर और उदयपुर जैसे शहरी केंद्रों में बीजेपी की बढ़त उसके लिए मजबूत संदेश है. अब नजर इस बात पर है कि मतगणना पूरी होने के बाद राजस्थान के शहरों की सियासी तस्वीर किस तरफ जाती है.

  • ऊर्जा क्षेत्र में यूपी की बड़ी उपलब्धि, 135 में 74 दिन सबसे बेहतर रही बिजली आपूर्ति

    ऊर्जा क्षेत्र में यूपी की बड़ी उपलब्धि, 135 में 74 दिन सबसे बेहतर रही बिजली आपूर्ति

    बिजली आपूर्ति में यूपी का दमदार प्रदर्शन, 135 में 74 दिन देश में रहा अव्वल

    कोयला संकट के बावजूद योगी सरकार ने संभाले रखी बिजली व्यवस्था, जिला मुख्यालयों पर 24 घंटे आपूर्ति

    24 मई से 22 दिनों तक सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को कटौती मुक्त बिजली आपूर्ति

    भारी बारिश से कोयला आपूर्ति प्रभावित, फिर भी प्रदेश में बिजली व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार सक्रिय

    सीआईएल समेत संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर कोयले और ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाने में जुटी योगी सरकार

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को लगातार मजबूत किए जाने का असर अब आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। एक मई से अब तक 135 दिनों में प्रदेश ने 74 दिन देश में सर्वाधिक विद्युत मांग की आपूर्ति की, जबकि 37 दिन दूसरे स्थान पर रहा। यानी 135 दिनों में 111 दिन उत्तर प्रदेश ने देश के शीर्ष दो राज्यों में रहते हुए बिजली की मांग पूरी की।

    प्रदेश में 24 मई से अब तक 22 दिनों में सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई। हालांकि देश के कई हिस्सों में भारी वर्षा और जलभराव के चलते कोयला खदानों में उत्पादन एवं आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके कारण पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों के तापीय विद्युत संयंत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ है।

    यूपीपीसीएल के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में भी कोयले की कमी और गीले कोयले के कारण तापीय उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है। विभिन्न विद्युत इकाइयों में तकनीकी एवं अन्य कारणों से ट्रिपिंग के चलते उपलब्धता में कमी आई है। इसके बावजूद योगी सरकार ने विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखे हैं।

    दिन के समय सामान्य आपूर्ति

    दिन के समय प्रदेश में विद्युत आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। हालांकि पीक समय में विद्युत उपलब्धता कम होने और पावर एक्सचेंज में महज 2-3 प्रतिशत तक सीमित क्लीयरेंस के कारण ग्रामीण क्षेत्रों, बुंदेलखंड, तहसील एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में रात्रिकालीन सीमित रोस्टरिंग की जा रही है। वहीं जिला मुख्यालयों में 24 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेश सरकार की ओर से निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड समेत संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। कोयले और ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। योगी सरकार का फोकस उपभोक्ताओं को अधिकतम राहत देने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल कर आपूर्ति व्यवस्था को स्थिर बनाए रखने पर है।

  • 50 साल पूरे होने पर लोकायुक्त संगठन का स्थापना दिवस समारोह, CM योगी होंगे शामिल

    50 साल पूरे होने पर लोकायुक्त संगठन का स्थापना दिवस समारोह, CM योगी होंगे शामिल

    लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह में  शामिल होंगे मुख्यमंत्री योगी

    सोमवार को गोमतीनगर स्थित लोक आयुक्त कार्यालय में होगा आयोजन

    सीएम योगी करेंगे स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन

    50 वर्षों की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर लगेगी प्रदर्शनी

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार (14 सितंबर) को उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होंगे। गोमतीनगर स्थित लोक आयुक्त कार्यालय में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा करेंगे।

    इस दौरान मुख्यमंत्री लोक आयुक्त प्रशासन की स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन करेंगे। समारोह में लोक आयुक्त संगठन की 50 वर्षों की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। प्रदर्शनी के माध्यम से संगठन की स्थापना से अब तक की कार्यप्रणाली, प्रमुख उपलब्धियों और पांच दशक की यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा।

  • डेढ़ महीने में नौकरी, सिर्फ 1180 रुपये खर्च; RML के 194 अभ्यर्थियों ने बताया भर्ती का अनुभव

    डेढ़ महीने में नौकरी, सिर्फ 1180 रुपये खर्च; RML के 194 अभ्यर्थियों ने बताया भर्ती का अनुभव

    मात्र 1180 रुपये खर्च किए, डेढ़ महीने में मिल गई नौकरी

    आरएमएल के 194 तकनीकी कार्मिकों को योगी के हाथों नियुक्ति पत्र, अभ्यर्थियों ने बताया पारदर्शी भर्ती का परिणाम

    बिना सिफारिश और रिश्वत के योग्यता के आधार पर चयन से युवाओं में बढ़ा भरोसा

    तकनीक को बढ़ावा देकर योगी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बनाया आधुनिक, उपचार सुविधाओं में हुआ सुधार: चयनित अभ्यर्थी

    एमएलटी, ओटी टेक्नीशियन और रेडियोलॉजी टेक्नीशियन समेत विभिन्न पदों पर मिली नियुक्ति

    लखनऊ,
     महज 1180 रुपये आवेदन शुल्क खर्च कर परीक्षा दी और करीब डेढ़ महीने के भीतर नौकरी मिल गई। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के षष्ठम स्थापना दिवस समारोह में रविवार को ऐसे ही कई युवाओं के लिए इंतजार का दौर खत्म हुआ। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरएमएल संस्थान के 194 तकनीकी संवर्ग के कार्मिकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। सीएम के हाथों नियुक्ति पत्र पाकर चयनित अभ्यर्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी के लिए प्रदेश सरकार की सराहना की।

    1180 रुपये में परीक्षा, डेढ़ महीने में नियुक्ति

    बिहार के रहने वाले और ओटी टेक्नीशियन पद पर चयनित प्रिंस कुमार ने भर्ती प्रक्रिया का अनुभव साझा करते हुए बताया कि परीक्षा के लिए उन्हें आवेदन में करीब 1180 रुपये खर्च करने पड़े। इसके बाद परीक्षा हुई, परिणाम आया, दस्तावेज सत्यापन हुआ और अब उन्हें नियुक्ति पत्र मिल गया। उन्होंने बताया कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में परीक्षा हुई थी और 13 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों नियुक्ति पत्र मिला। इतनी कम अवधि में परीक्षा से लेकर नियुक्ति तक की प्रक्रिया पूरी होना उनके लिए बेहद खुशी की बात है। भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हुए कहा कि बिना किसी अनावश्यक खर्च के उन्हें अपनी योग्यता के आधार पर नौकरी मिली।

    मेहनत का मिलेगा पूरा फायदा बढ़ा भरोसा

    एमएलटी पद पर चयनित आयुष शुक्ला ने भी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता की सराहना की। अब परीक्षा में जो अभ्यर्थी पात्रता पूरी कर रहे हैं और सफल हो रहे हैं, वही आगे चयनित हो रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता से युवाओं को यह भरोसा मिलता है कि मेहनत करने पर उसका परिणाम जरूर मिलेगा। राजस्थान निवासी रेडियोलॉजी टेक्नीशियन जितेंद्र सैनी ने भी कहा कि पारदर्शी चयन प्रक्रिया से हर विद्यार्थी को मोटिवेशन मिलता है। उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों नियुक्ति पत्र प्राप्त करना गर्व का क्षण लगा।

    स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से रोजगार के अवसर

    मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नीशियन के पद पर चयनित गौरव कुमार झा ने कहा कि आरएमएल और एसजीपीजीआई जैसे संस्थानों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार देखने को मिल रहा है। देशभर से मरीज यहां बेहतर उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ ही चिकित्सा क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। गौरव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तकनीक को तेजी से अपनाने के दृष्टिकोण की भी सराहना करते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से उपचार की सुविधाएं बेहतर हो रही हैं।

    एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज से ग्रामीणों को लाभ

    टेक्निकल ऑफिसर (परफ्यूजन) के पद पर चयनित अनुज कुमार शुक्ला ने मुख्यमंत्री द्वारा बताए गए ‘एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज’ के लक्ष्य को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को उपचार के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ेगा। एक ओर पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से युवाओं को रोजगार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सा संस्थानों की क्षमता बढ़ने से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था भी मजबूत हो रही है। सीएम के हाथों नियुक्ति पत्र मिलना उनके लिए नौकरी मिलने के साथ-साथ गौरव और प्रेरणा का भी अवसर रहा।

  • योगी बोले- पहले एक व्यक्ति और एक परिवार के फैसलों का दंश झेलता था पूरा उत्तर प्रदेश

    योगी बोले- पहले एक व्यक्ति और एक परिवार के फैसलों का दंश झेलता था पूरा उत्तर प्रदेश

    एक व्यक्ति और एक परिवार की गलती की कीमत चुकाता था पूरा उत्तर प्रदेश : मुख्यमंत्री योगी
     
    डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के छठे स्थापना दिवस समारोह को मुख्यमंत्री ने किया संबोधित
     
    बोले मुख्यमंत्री- साढ़े नौ वर्ष में 9.5 लाख युवाओं को दी सरकारी नौकरी, नियुक्ति प्रक्रिया पर कोई नहीं उठा सकता उंगली
     
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंग प्रत्यारोपण यूनिट समेत अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का किया लोकार्पण, जल्द शुरू होगा बोन मैरो ट्रांसप्लांट
     
    प्रदेश में 41 से बढ़कर 85 हुए मेडिकल कॉलेज, एमबीबीएस की सीटें 4,690 से बढ़कर 13,600 के पार
     
    संस्थान में 1,010 बेड का नया अस्पताल और 350 बेड का ट्रॉमा सेंटर बनाने की तैयारी

    टेलीमेडिसिन दूर-दराज के क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी पूरा कर सकती है, टेलीकंसल्टेशन को तेजी से बढ़ाने की जरूरत
     
    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गलती एक व्यक्ति करता है, लेकिन उसकी कीमत पूरे संस्थान को चुकानी पड़ती है। ठीक वैसे ही एक व्यक्ति और एक परिवार की गलती की कीमत उत्तर प्रदेश को पहचान के संकट, कानून व्यवस्था के भीषण संकट, अराजकता और भ्रष्टाचार के रूप में चुकानी पड़ती थी। कृत्य एक व्यक्ति गलत करता था और कीमत पूरा प्रदेश चुकाने को मजबूर होता था। आज पारदर्शिता और शुचिता के साथ आगे बढ़ रहे उत्तर प्रदेश के सामने पहचान का संकट नहीं है। प्रदेश के लोग कहीं भी सीना तानकर कह सकते हैं कि वे उत्तर प्रदेश के हैं। मुख्यमंत्री योगी रविवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के षष्ठम स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।
     
    साढ़े नौ वर्ष में 9.5 लाख सरकारी नौकरियां
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया जितनी पारदर्शी होगी, परिणाम उतने ही फलदायी होंगे। अच्छे लोगों का चयन नहीं होगा, चयन प्रक्रिया में विसंगति, भेदभाव और शुचिता का अभाव होगा तो उसकी कीमत पूरे संस्थान को चुकानी पड़ेगी। पिछले साढ़े नौ वर्ष में प्रदेश में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। कोई यह नहीं कह सकता कि नियुक्ति में उसके साथ भेदभाव हुआ या किसी प्रकार का लेनदेन हुआ। प्रदेश में लगभग 16 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जिनमें 9.5 लाख वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भर्ती हुए हैं। यह युवा कार्यबल प्रदेश की प्रगति को नई गति दे रहा है।

    अंग प्रत्यारोपण यूनिट समेत कई सुविधाओं का लोकार्पण

    मुख्यमंत्री योगी ने संस्थान में तैयार मुख्य चिकित्सा अंग प्रत्यारोपण यूनिट सहित कई अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लोकार्पण किया। इनमें 40 बेड का इमरजेंसी वार्ड, मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में 100 मरीजों की क्षमता वाला वेटिंग हाल आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी ने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट का भी विमोचन किया।
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अंग प्रत्यारोपण यूनिट से किडनी ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची कम करने में मदद मिलेगी। बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी जल्द शुरू होने जा रही है। संस्थान रोबोटिक सर्जरी, गामा नाइफ, एआइ आधारित डायग्नोस्टिक, एडवांस इमेजिंग, टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश के 10 जिलों में वर्चुअल आइसीयू का संचालन किया जा रहा है।

    अब चुनौती पैसे की नहीं, वेटिंग सूची कम करने की

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिला अस्पतालों में 10-10 बेड पर निशुल्क डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना, पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस चिकित्सा और मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से जरूरतमंदों के उपचार के लिए धन उपलब्ध कराया जा रहा है। आज समस्या पैसे की नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती किडनी ट्रांसप्लांट सहित गंभीर उपचार के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची को कम करने की है।
     
    20 बेड से 1,400 बेड का सुपर स्पेशियलिटी संस्थान

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 में यह प्रश्न था कि यहां अस्पताल रहेगा या इसे संस्थान बनाया जाएगा। सरकार ने इसे संस्थान के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। कभी 20 बेड के छोटे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में शुरू हुआ परिसर आज 1,400 बेड के सुपर स्पेशियलिटी संस्थान में बदल चुका है। पहले यहां की शिकायतों से समाचारपत्र रंगे रहते थे, अब शिकायतें कम आती हैं। जनता की संतुष्टि ही किसी संस्थान की सफलता की कसौटी है। संस्थान में 1,010 बेड का नया अस्पताल और 350 बेड का ट्रॉमा सेंटर भी प्रस्तावित है।

    41 से बढ़कर 85 हुए मेडिकल कॉलेज

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर 41 मेडिकल कॉलेज थे, आज 85 मेडिकल कॉलेज और दो एम्स संचालित हैं। एमबीबीएस की सीटें 4,690 से बढ़कर 13,600 से अधिक और पीजी की सीटें 3,564 से बढ़कर 5,067 हो गई हैं। पहले केवल दो नर्सिंग कॉलेज थे, अब 26 बन चुके हैं और 33 निर्माणाधीन हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की संख्या 1,227 से बढ़कर 3,438 हो गई है।
     
    पिछली सरकार ने मेडिकल कॉलेज बनाने से किया था इनकार

    पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले चरण में उत्तर प्रदेश के लिए 17 मेडिकल कॉलेज और गोरखपुर एम्स स्वीकृत किया था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने मेडिकल कॉलेज बनाने से इनकार कर दिया। गोरखपुर एम्स के लिए ऐसी भूमि उपलब्ध कराई गई जिस पर सुप्रीम कोर्ट का स्थगन था। वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद नई भूमि उपलब्ध कराई गई और आज गोरखपुर एम्स सफलतापूर्वक संचालित है। रायबरेली एम्स की समस्याओं का भी समाधान किया गया।
     
    अपने मेडिकल डाटा पर खुद करें शोध

    मुख्यमंत्री योगी ने चिकित्सा संस्थानों से उपचार के साथ शोध, नवाचार और तकनीक को जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारे ही डाटा पर पश्चिमी देश शोधपत्र प्रस्तुत करते हैं, जबकि हम अपने डाटा को संरक्षित नहीं कर पाते। अपने मेडिकल डाटा को संरक्षित कर भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करनी होंगी। आइआइटी कानपुर के साथ मेडटेक सेंटर आफ एक्सीलेंस, एसजीपीजीआइ में सेंटर आफ एक्सीलेंस, मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क इसी दिशा में किए जा रहे प्रयास हैं। एआई भी चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
     
    100 वर्ष बनाम नौ महीने का दिया उदाहरण

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जापान ने इंसेफेलाइटिस की वैक्सीन 1905 में विकसित कर ली थी, लेकिन उसे भारत आने में 100 वर्ष लग गए। वहीं कोविड महामारी के दौरान भारतीय वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केवल नौ महीने में दो वैक्सीन विकसित कर दीं। भारत ने अपने नागरिकों को नि:शुल्क टीका उपलब्ध कराने के साथ करीब 100 मित्र देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बीमारी का पैटर्न बदल रहा है, इसलिए चिकित्सा संस्थानों को समय से 10 कदम आगे सोचने की जरूरत है। हीलिंग, लर्निंग और डिस्कवरी एक साथ चलेंगी तभी कोई संस्थान वास्तविक सेंटर आफ एक्सीलेंस बन सकेगा।
     
    194 पदों पर भर्ती, मुख्यमंत्री योगी ने दिए नियुक्ति पत्र

    प्रदेश सरकार के सहयोग से संस्थान में 194 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई है। मुख्यमंत्री योगी ने नवनियुक्त कार्मिकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इनमें टेक्निकल आफिसर परफ्यूजन अनुज कुमार शुक्ला, डाइटीशियन ममता तिवारी और सावन कुमार समेत अन्य नवनियुक्त कार्मिक शामिल रहे। मुख्यमंत्री योगी ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले संकाय और नर्सिंग कर्मियों को भी सम्मानित किया। सीएमएस एवं जनरल मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रम सिंह को डायरेक्टर एक्सीलेंस अवार्ड दिया गया। डॉ. आलोक श्रीवास्तव, डॉ. अजय कुमार वर्मा समेत अन्य संकाय सदस्यों को डायरेक्टर्स अवार्ड आफ मेरिट प्रदान किया गया। नर्सिंग में उमा पांडेय को डायरेक्टर्स मेरिट अवार्ड और सीएनओ सुमन सिंह को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला।
     
    दो पुस्तकों और वार्षिक प्रगति रिपोर्ट का विमोचन
    मुख्यमंत्री योगी ने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट के साथ डॉ. अजय कुमार वर्मा की पुस्तक ‘सही जानकारी सही देखभाल’ और डॉ. एसएस नाथ की पुस्तक ‘क्रिटिकल केयर फाल्स’ का विमोचन किया।

    सपा सरकार ने प्रदेश को गुंडागर्दी, अराजकता, भ्रष्टाचार और दंगों की ओर धकेला: ब्रजेश पाठक

    उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सपा पर आरोप लगाया कि पिछली सरकार में प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को ही टेंडर मिलते थे। लोहिया इंस्टीट्यूट समेत संस्थानों में भवन निर्माण से लेकर कपड़े धोने, कैंटीन और साइकिल स्टैंड तक के काम ‘भैया के आदमी’ को मिलते थे। ऐसे में शुचिता और पारदर्शिता की बात कैसे की जा सकती है। उन्होंने कहा कि जनता ने निष्पक्ष हाथों में सत्ता सौंपी है। योगी सरकार में स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। पहले प्रदेश में करीब 5000 डॉक्टर तैयार होते थे, अब 12,500 से अधिक चिकित्सक तैयार किए जा रहे हैं। एमडी-एमएस की सीटें कई गुनी हो चुकी हैं और मेडिकल कॉलेजों की संख्या 88 से अधिक हो गई है। प्रदेश में वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज की दिशा में काम हो रहा है और मेडिकल टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सपा सरकार ने प्रदेश को गुंडागर्दी, अराजकता, भ्रष्टाचार और दंगों की ओर धकेला। 

    20 बेड से 1,400 बेड तक पहुंचा संस्थान : मयंकेश्वर

    चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि एक समय यह अस्पताल केवल 20 बेड से शुरू हुआ था। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र ने लंबी छलांग लगाई है। छह वर्ष पहले मुख्यमंत्री योगी ने इसे संस्थान के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया और उसके बाद जिस तेजी से इसकी प्रगति हुई है, वह सराहनीय है। आज संस्थान में 1,400 बेड हैं और यह प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में अपनी जगह बना चुका है।

    कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष आदि उपस्थित रहे। संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को रुद्राक्ष का पौधा भेंटकर स्वागत किया।

  • पशुपालकों का बड़ा फैसला, 1 अक्टूबर से दूध और घी के दामों में होगी बढ़ोतरी

    पशुपालकों का बड़ा फैसला, 1 अक्टूबर से दूध और घी के दामों में होगी बढ़ोतरी

    गुहला-चीका
     हरियाणा में दूध और घी के रेट बढ़ाने की मुहिम अब गुहला-चीका तक पहुंच गई है। हिसार, जींद, कैथल और कुरुक्षेत्र के बाद चीका में भी पशुपालकों ने पंचायत कर दूध के नए रेट तय कर दिए हैं।

    महंगाई के कारण पशुपालक व डेयरी संचालक दूध के रेट बढ़ाने की तैयारी में हैं। चीका में डेयरी संचालकों व पशुपालकों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि एक अक्टूबर से शहर व गांव में भैंस का दूध 100 रुपये प्रति लीटर तथा गाय का दूध 80 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचा जाएगा।

    रविवार को पटियाला रोड स्थित किसान भवन सर छोटूराम जनकल्याण ट्रस्ट चीका में डेयरी संचालकों व पशुपालकों की बैठक चौधरी महा सिंह डेयरी के संचालक हरवंस सीड़ा की अध्यक्षता में हुई।

    सर्वसम्मति से लिया गया फैसला
    बैठक में बढ़ती महंगाई और डेयरी कारोबार में बढ़ रही लागत को लेकर चर्चा की गई। डेयरी संचालकों व पशुपालकों ने सर्वसम्मति से दूध और घी के नए भाव निर्धारित करने का निर्णय लिया।

    हरवंस सीड़ा ने कहा कि पिछले कुछ समय से पशुओं के चारे और अन्य सामान के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। भैंसों को खिलाई जाने वाली खल का कट्टा पहले करीब 1800 रुपये में मिलता था।

    अब इसके भाव बढ़कर करीब 3000 रुपये प्रति कट्टा हो गए हैं। सरसों के तेल सहित पशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले अन्य आहार की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

    1 अक्टूबर से जारी होंगे नए रेट
    बढ़ती लागत के कारण डेयरी संचालकों व पशुपालकों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो रही है। बैठक में डेयरी संचालकों ने विचार-विमर्श के बाद एक अक्टूबर भैंस के दूध का भाव 100 रुपये प्रति लीटर और गांव के दूध का भाव 80 रुपये प्रति लीटर निर्धारित करने का निर्णय लिया।

    वहीं, भैंस के घी का भाव 1500 रुपये और गाय के घी का भाव 2200 रुपये प्रति लीटर करने पर सहमति बनी। पशुपालकों ने दूध और घी की गुणवत्ता को लेकर भी सामूहिक नियम बनाया।

    तय मानकों का उल्लंघन करने अथवा दूध या घी में मिलावट कर बेचने वाले व्यक्ति पर 5100 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। इस मौके पर किसान भवन के प्रधान रतिराम सीड़ा, बलकार बल्लू, देवी दयाल, अमर सिंह, हरभजन सिंह, स्वर्ण सिंह, हरभजन सिंह बिक्रम सिंह, जगमेल सिंह, मोहित कुमार, जगदीप, बलकार सिंह भी मौजूद रहे।

     

  • हरियाणा में ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान, स्थानीय कुम्हारों से खरीदे जाएंगे 79.52 लाख दीये

    हरियाणा में ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान, स्थानीय कुम्हारों से खरीदे जाएंगे 79.52 लाख दीये

    चंडीगढ़
     हरियाणा में इस बार 17 सितंबर को जलने वाला दीया सिर्फ घरों को रोशन नहीं करेगा, बल्कि प्रदेश के कुम्हारों के चाक को भी रफ्तार देगा।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान के तहत घर-घर मिट्टी के दीये जलाने की तैयारी है। अभियान से जुड़े प्रचार में इसे ‘आशीर्वाद का दीया’ कहा जा रहा है।

    हरियाणा सरकार ने इस आयोजन में एक दिलचस्प कड़ी जोड़ी है। दीयों की खरीद किसी बड़े सप्लायर या बाहर के बाजार से नहीं, बल्कि संबंधित जिले के स्थानीय कुम्हारों से ही की जाएगी।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशालय ने सभी जिलों को दीयों की खरीद और वितरण के लिए लक्ष्य निर्धारित कर दिए हैं। यानी सरकारी अभियान की रोशनी का सीधा लाभ उस पारंपरिक कारीगर तक पहुंचाने की कोशिश है, जिसका चाक बदलते बाजार में लगातार धीमा पड़ता जा रहा है।

    हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा मंजूरी देने के बाद जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों को निर्देश जारी किए गए हैं। परिपत्र में कहा गया है कि निर्धारित संख्या में दीयों की खरीद समय रहते पूरी की जाए, ताकि वितरण में किसी तरह की देरी न हो।

    दीयों की गुणवत्ता, आकार और उपयोग योग्य स्थिति का ध्यान रखने को कहा गया है। साथ ही यह भी सलाह दी गई है कि खरीद स्थानीय स्तर पर इस तरह की जाए कि अधिक से अधिक कुम्हार परिवारों को इसका लाभ मिल सके।

    खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को केवल खरीद तक सीमित नहीं रहने, बल्कि दीयों को संबंधित लाभार्थियों तक समय पर पहुंचाने और पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं

    खरीद और वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता रखने तथा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार काम पूरा करने पर भी जोर है। अधिकारियों को अभियान की गतिविधियों का समुचित रिकार्ड रखने और उच्च स्तर पर रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है।

    रोशनी के साथ स्थानीय हुनर को सहारा
    इस पहल का सबसे अहम पहलू यह है कि सरकारी आयोजन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ा गया है। सामान्यतः बड़े आयोजनों में सामान की खरीद केंद्रीकृत तरीके से होती है, लेकिन यहां जिले के कुम्हार को ही प्राथमिकता देने से सरकारी मांग सीधे उसके घर तक पहुंचेगी।

    एक तरफ हजारों घरों में परंपरागत मिट्टी के दीये जलेंगे, दूसरी तरफ कुम्हार परिवारों को दीवाली के सीजन से पहले ही बड़ा काम मिलेगा। परिपत्र में जिलों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि निर्धारित मात्रा की खरीद और वितरण अभियान की भावना के अनुरूप हो।

    इस लिहाज से 17 सितंबर की शाम जलने वाला दीया महज प्रतीकात्मक रोशनी नहीं होगा, बल्कि ‘स्थानीय से खरीदो और स्थानीय को मजबूत करो’ का संदेश भी देगा।

    प्रत्येक को मिलेंगे दो दीये मुफ्त, 79.52 लाख दीये बंटेंगे
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर को प्रदेश के हर अंत्योदय परिवार को दो-दो दीये निशुल्क उपलब्ध करवाए जाएंगे। विभाग ने प्रति दीया एक रुपये की दर निर्धारित की है।

    प्रदेश में कुल 39 लाख 76 हजार 273 राशन कार्ड हैं। इनके लिए कुल 79 लाख 52 हजार 546 दीये आवंटित किए जाने हैं, जो कि निशुल्क होंगे। हिसार में सबसे ज्यादा 5 लाख 76 हजार 608 दीये दिए जाएंगे।