Category: राज्य

  • रांची की रौशनी, विनिमा और पार्वती ने बढ़ाया मान, भारत ने जीता जूनियर एशिया कप खिताब

    रांची की रौशनी, विनिमा और पार्वती ने बढ़ाया मान, भारत ने जीता जूनियर एशिया कप खिताब

    रांची
    भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने चीन के मोकी में आयोजित एएचएफ महिला जूनियर एशिया कप 2026 के फाइनल में मेजबान चीन को 1-0 से हराकर लगातार तीसरी बार खिताब अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ भारत ने आगामी जूनियर विश्व कप के लिए भी क्वालीफाई कर लिया।

    भारतीय टीम की इस उपलब्धि में रांची के सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस गर्ल्स, बरियातू रांची की तीन छात्राओं रौशनी आईंद, विनिमा धान और पार्वती टोपनो की अहम भूमिका रही।

    मिडफील्डर रौशनी आईंद ने पाकिस्तान के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो गोल दागे। भारत ने यह मुकाबला 19-0 से जीता था।

    वहीं मिडफील्डर विनिमा धान ने मलेशिया के खिलाफ 11-1 की जीत में एक गोल किया। पाकिस्तान के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में भी उन्होंने गोल कर टीम की जीत में योगदान दिया। डिफेंडर पार्वती टोपनो ने पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम की रक्षापंक्ति को मजबूती दी और कई मौकों पर विपक्षी टीम के हमलों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    तीनों खिलाड़ी बरियातू स्थित विद्यालय के एस्ट्रोटर्फ मैदान पर नियमित अभ्यास करती रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली इस सफलता से विद्यालय परिवार में खुशी का माहौल है। विद्यालय की हॉकी कोच करुणा पूर्ति ने तीनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता प्रतिभा, अनुशासन, निरंतर अभ्यास और कठिन परिश्रम का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बरियातू के एस्ट्रोटर्फ मैदान से एशिया चैंपियन बनने तक का सफर विद्यालय की अन्य छात्राओं के लिए भी प्रेरणादायी है।

    विद्यालय परिवार ने उम्मीद जताई कि तीनों खिलाड़ी आगे भी भारतीय हॉकी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने में योगदान देंगी।

  • कुल्लू घाटी के ‘अमरफल’ को मिला नया बाजार, लुधियाना से देशभर के लिए पहली खेप रवाना

    कुल्लू घाटी के ‘अमरफल’ को मिला नया बाजार, लुधियाना से देशभर के लिए पहली खेप रवाना

    जैतो/फिरोजपुर.

    उत्तर रेलवे के फिरोजपुर रेल के मंडल प्रबंधक संजीव कुमार के मार्गदर्शन में फिरोजपुर मंडल के बिजनेस डिवैल्पमैंट यूनिट के विशेष प्रयासों से पर्सिमोन फलों की रेल मार्ग से ढुलाई के लिए नया यातायात प्राप्त किया गया है।

    लुधियाना से 98 पैकेटों में 2,600 किलोग्राम पर्सिमोन हावड़ा के लिए लोड किए गए। हिमाचल के कुल्लू सहित ठंडे बागवानी क्षेत्रों में किसान पर्सिमोन की खेती अपना रहे हैं, क्योंकि इसमें कम लागत, बेहतर मूल्य और बढ़ती घरेलू मांग की संभावना हैं। पर्सिमोन जिसे ‘जापानी फल’ या ‘अमरफल’ के नाम से भी जाना जाता है, इसमें विटामिन-सी, फाइबर और एंटीऑक्सीडैंट से भरपूर, कम कैलोरी वाला पौष्टिक फल है और बदलती जलवायु में सेब की तुलना में अधिक अनुकूल माना जाता है। फिरोजपुर मंडल के बिजनेस डिवैल्पमैंट यूनिट द्वारा किए गए प्रयासों के फलस्वरूप हिमाचल प्रदेश से आने वाले पर्सिमोन फलों का यातायात लुधियाना से रेल के माध्यम से प्राप्त किया गया है।

    वर्तमान में हावड़ा, कोलकाता और सियालदह के लिए पर्सिमोन भेजे जा रहे हैं, जबकि आने वाले दिनों में पटना और गुवाहाटी जैसे अन्य प्रमुख गंतव्यों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक/फ्रेट परमदीप सिंह सैनी ने बताया कि फिरोजपुर मंडल की विश्वसनीय एवं समयबद्ध माल परिवहन व्यवस्था व्यापारियों को बेहतर सुविधा प्रदान कर रही है। मंडल माल यातायात बढ़ाने तथा पर्यावरण-अनुकूल परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। 

  • ‘मछुआरा समाज के वोटों की दलाली करने वालों से रहें सावधान’, संजय निषाद का विपक्ष पर निशाना

    ‘मछुआरा समाज के वोटों की दलाली करने वालों से रहें सावधान’, संजय निषाद का विपक्ष पर निशाना

    मछुआरा समाज के वोटों की दलाली करने वालों से रहें सावधान: संजय निषाद
     
    बोले, यूपी में पहली बार राजनीतिक ताकत बनकर खड़ा हुआ मछुआरा समाज, मौसमी नेताओं से सतर्क रहने की जरूरत
     
    लखनऊ

    कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने विधानसभा चुनाव की बढ़ती सरगर्मी के बीच मछुआरा समाज को मौसमी नेताओं से सावधान रहने की नसीहत दी है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आजादी के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में मछुआरा समुदाय एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर खड़ा हुआ है। ऐसे समय में समाज के वोटों की दलाली करने वालों को पहचानने की जरूरत है।
     
    डॉ. संजय निषाद ने बिना किसी का नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि कुछ मौसमी नेता अब तक यह तय नहीं कर पाए हैं कि उन्हें मुंबई में व्यापार करना है, यहां-वहां घूमकर दूसरों की दरी बिछानी है या मछुआरा समाज के वोटों की दलाली करनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में मछुआरा समुदाय के वोटों की खरीद-बिक्री के लिए बदनाम और वहां समाज के राजनीतिक उभार को नुकसान पहुंचाने वाले लोग अब उत्तर प्रदेश में निषाद समाज को गुमराह करने निकले हैं।
     
    उन्होंने कहा कि जो खुद एक विधानसभा चुनाव जीतने की हैसियत नहीं रखता, वह जेब में नोटों की गड्डी लेकर लाल टोपी और नीली वर्दी पहनकर यूपी के निषाद समाज को राजनीति सिखाने चला है। मछुआरा समुदाय पैसों पर बिकने वाली कौम नहीं है। उत्तर प्रदेश के मछुआरों को राजनीति सिखाने से पहले यह समझ लेना चाहिए कि राजनीति और संघर्ष उनके खून में है।
     
    डॉ. निषाद ने कहा कि मछुआरा समाज ने मुगलों और अंग्रेजों से संघर्ष किया और देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संविधान में समाज को अधिकार और आरक्षण मिला, लेकिन आपसी बिखराव के कारण उसका हक लुटता रहा। आज भी केवट, मल्लाह, बिंद और कश्यप के नाम पर भेद पैदा कर समाज को एकजुट होने से रोकने की कोशिश की जा रही है।
     
    उन्होंने कहा कि दूसरे दलों से पैसा लेकर समाज के बीच बांटने और उसके वोटों का सौदा करने वालों को समाज पहचान ले। मछुआरा गरीब जरूर है, लेकिन अपने स्वाभिमान और अधिकारों का सौदा करने वाला नहीं है। उन्होंने पोस्ट के अंत में ‘जय निषादराज’ लिखा।

  • ड्रग्स फ्री डेडलाइन के बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई, घोड़ों से पेट्रोलिंग-रात में छापेमारी; 82 पहुंचे जेल

    ड्रग्स फ्री डेडलाइन के बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई, घोड़ों से पेट्रोलिंग-रात में छापेमारी; 82 पहुंचे जेल

    चंडीगढ़ 

    चंडीगढ़ में नशे के खिलाफ पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है। शहर में घोड़ों से गश्त के साथ थाना प्रभारी और एरिया डीएसपी रात को भी फील्ड में उतर रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई के वीडियो बनाकर मीडिया तक पहुंचाए जा रहे हैं। जंगल एरिया, खंडहरों और श्मशान घाट के पास बनाए गए नशेड़ियों के अड्डों पर माउंटेड पुलिस की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया गया। जंगल क्षेत्र से लोगों को पकड़ा गया, जिनके पास से 10 रुपए के नोट, फॉइल पर लगा चिट्टा, लाइटर और गर्म करने वाले चम्मच बरामद हुए। पुलिस ने छापेमारी के दौरान सरकारी कैमरामैन और पुलिसकर्मियों के मोबाइल से हर गतिविधि की वीडियोग्राफी की, ताकि कोर्ट में केस साबित हो सके।

    82 लोगों के खिलाफ प्रिवेंटिव एक्शन चंडीगढ़ पुलिस ने 82 लोगों के खिलाफ प्रिवेंटिव एक्शन लेते हुए उन्हें जेल भेजा है। वहीं, NDPS एक्ट के तहत 16 FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें ड्रग्स की रिकवरी भी हुई है। पुलिस ने ग्राउंड लेवल पर आक्रामक अभियान शुरू कर दिया है। इस मुहिम में केवल थाना प्रभारी और एरिया DSP ही नहीं, बल्कि CRPF की टीम भी साथ है।

    ड्रग सप्लायरों और पैडलरों की सूची तैयार CID विंग को भी पूरी तरह एक्टिव किया गया है। CID की टीम कॉलोनियों में अपने मुखबिरों के जरिए ड्रग सप्लायरों और पैडलरों की सूची तैयार कर रही है। एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स के साथ-साथ अब स्थानीय पुलिस CRPF के हथियारबंद जवानों को साथ लेकर अलसुबह और देर रात सरप्राइज चेकिंग व रेड कर रही है। शहर में सप्लाई चेन को ध्वस्त करने के लिए दो या उससे अधिक NDPS केस वाले अपराधियों को PIT-NDPS के तहत एक साल के लिए डिटेन करने की रूपरेखा तैयार की गई है।

    प्रशासक बोले- पुलिस एक्शन ले तो नशा खत्म होगा चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया बीते वीरवार को नगर निगम के कार्यक्रम नशा मुक्त चंडीगढ़ में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा था कि पुलिस एक्शन ले तो नशा खत्म हो सकता है। उन्होंने एरिया पार्षदों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में नशे को रोकने के लिए आगे आने को कहा था।

    पार्षद ने पुलिस के सामने खोली नशे की पोल इसके बाद सिर्फ एक पार्षद जो नगर निगम की डिप्टी मेयर भी हैं, सुमन देवी ने पुलिस को पब्लिक मीटिंग में बताया था कि उनके एरिया में नशा बिक रहा है। उस दौरान डीएसपी और आईटी पार्क थाना प्रभारी मीनी भारद्वाज भी वहीं मौजूद थीं। सुमन देवी ने तीन अलग-अलग वीडियो भी दिखाए थे, जिनमें तीन युवक नशे की हालत में झूम रहे थे।

    समीर को 5 युवकों ने चाकू मारे दो दिन पहले ही न्यू इंदिरा कॉलोनी निवासी समीर को पार्क में पांच युवकों ने चाकू मारे थे। समीर के पिता ने आरोप लगाया कि सभी युवक नशा करते हैं। उन्होंने पुलिस को कई बार बताया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके भाई पवन, जिसकी थार से टक्कर मारकर हत्या कर दी गई थी, उसकी मौत भी नशे के मुद्दे से जुड़ी थी। उन्होंने नशे के खिलाफ आवाज उठाई थी, ताकि युवा पीढ़ी को बचाया जा सके।

    ऑटो ड्राइवर राजकुमार पर फायरिंग सेक्टर-49 में ऑटो ड्राइवर राजकुमार पर फायरिंग मामले में भी राजकुमार ने आरोप लगाया था कि उनके एरिया में नशा बिकता है। उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद उन पर फायरिंग कर दी गई।

  • बाढ़ में डूबी फसल की क्रॉप कटिंग संभव नहीं, उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को लगाई फटकार

    बाढ़ में डूबी फसल की क्रॉप कटिंग संभव नहीं, उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को लगाई फटकार

    पटना
    बाढ़ में पूरी फसल बर्बाद हो जाने के बाद क्राप कटिंग एक्सपेरिमेंट (सीसीई) नहीं होने का हवाला दे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का दावा रोकना बीमा कंपनी को महंगा पड़ा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इसे सेवा में कमी व अनुचित व्यापार व्यवहार माना है।

    आयोग ने एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड को किसान राजेंद्र शर्मा को 88,788 रुपये फसल क्षतिपूर्ति, आठ प्रतिशत के बजाय 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक प्रताड़ना के लिए 40 हजार और मुकदमे के खर्च के लिए 20 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।

    तीन माह में भुगतान नहीं करने पर पूरी राशि पर 15 प्रतिशत वार्षिक दंडात्मक ब्याज के साथ 10 हजार रुपये अतिरिक्त निष्पादन खर्च भी देना होगा। 8 सितंबर 2026 को अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्रा और सदस्य राजनिश कुमार की पीठ ने फैसला सुनाया।

    पुनपुन थाना क्षेत्र के पुनाढ़ी गांव निवासी वरिष्ठ नागरिक किसान राजेंद्र शर्मा ने खरीफ 2016 में धान की फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया था। किसान क्रेडिट कार्ड से 887.88 रुपये प्रीमियम जमा किया था। बाढ़ में पुनाढ़ी व सबलपुर पंचायत की पूरी फसल नष्ट हो गई।

    जिला कृषि पदाधिकारी समेत संबंधित विभागों की रिपोर्ट में भी बाढ़ से फसल बर्बाद होने की पुष्टि की गई थी। बावजूद इसके बीमा कंपनी ने यह कहते हुए भुगतान करने से मना कर दिया कि संबंधित क्षेत्र का वैध क्राप कटिंग डाटा उपलब्ध नहीं है।

    किसान ने 19 नवंबर 2018 को जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दाखिल की थी। उन्होंने 4.79 लाख रुपये फसल नुकसान का दावा किया था। सुनवाई में बीमा कंपनी ने सीसीई के आधार पर दावा निस्तारित करने की शर्त का हवाला दिया।

    इस पर आयोग ने स्पष्ट किया कि जब फसल पूरी तरह पानी में डूबकर नष्ट हो गई हो तो क्राप कटिंग करना व्यावहारिक ही नहीं है। ऐसी स्थिति में केवल सीसीई डाटा नहीं होने से किसान का दावा रोकना फसल बीमा योजना के उद्देश्य को ही निष्फल कर देगा।

    आयोग ने किसान द्वारा जमा 887.88 रुपये प्रीमियम के 100 गुना यानी 88,788 रुपये को फसल क्षतिपूर्ति के रूप में निर्धारित किया।

    डूबी फसल की क्राप कटिंग संभव नहीं
    आयोग ने कहा कि किसान की फसल बाढ़ में पूरी तरह नष्ट हो गई थी। सरकारी अधिकारियों की रिपोर्ट से भी इसकी पुष्टि हुई। ऐसे में खेत में फसल बची ही नहीं थी तो क्राप कटिंग कराकर नुकसान का आकलन करना संभव नहीं था।

     

  • SIR की अंतिम तारीख 15 सितंबर, पात्र युवा जल्द भरें Form-6; 4.54 लाख आवेदन मिले

    SIR की अंतिम तारीख 15 सितंबर, पात्र युवा जल्द भरें Form-6; 4.54 लाख आवेदन मिले

    रांची
     राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत 15 सितंबर को दावा-आपत्ति चरण पूरा हो जाएगा।

    इसके बाद मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 नहीं लिया जाएगा। पूरे राज्य में शनिवार तक मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए कुल 4,54,189 आवेदन (फॉर्म-6) प्राप्त हुए हैं।

    वहीं, मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के माध्यम से कुल 5,302 आवेदन प्राप्त हुए हैं। मतदाता सूची में नाम, पता आदि में संशोधन के लिए कुल 2,88,090 आवेदन फॉर्म-8 के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। 15 सितंबर के बाद इन आवेदनों का निष्पादन शुरू होगा

    राज्य के कुल 31,892 मतदान केंद्रों में से अभी भी 75 मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां पर एक भी फॉर्म-6 मतदाता पंजीकरण के लिए प्राप्त नहीं हुआ है।

    वहीं, 5,591 मतदान केंद्रों पर महज एक से पांच की संख्या में ही ऐसे आवेदन प्राप्त हुए हैं। कुल 8,618 मतदान केंद्रों पर छह से 10, 11,329 पर 11 से 20 की संख्या में ही फॉर्म-6 प्राप्त हुए हैं। इसी तरह, 4,076 मतदान केंद्रों पर 21 से 30 तथा 2,203 मतदान केंद्रों पर 30 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं।

    रांची में सर्वाधिक 62 मतदान केंद्र, जहां एक भी फॉर्म-6 नहीं मिला
    पूरे राज्य में जिन 75 मतदान केंद्रों पर एक भी फॉर्म-6 प्राप्त नहीं हुआ है, उनमें 62 केंद्र सिर्फ रांची के हैं। इसके अलावा देवघर, गोड्डा, हजारीबाग, धनबाद तथा गुमला में ऐसे महज एक-एक केंद्र ही है।

    साहिबगंज में ऐसे तीन तथा दुमका में चार केंद्र हैं, जहां एक भी आवेदन मतदाता पंजीकरण के लिए प्राप्त नहीं हुआ है। अन्य जिलों में ऐसा कोई मतदान केंद्र नहीं है, जहां एक भी फॉर्म-6 प्राप्त नहीं हुआ है।

    विधानसभावार स्थिति की बात करें तो कांके विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक 52 मतदान केंद्र हैं, जहां एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने की युवाओं से अपील
    राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने राज्य के सभी पात्र भारतीय नागरिकों विशेषकर युवाओं से अनुरोध किया है कि जो अभी भी मतदाता सूची के ड्राफ्ट सूची में सम्मिलित नहीं हैं, वे ईसीनेट अथवा बीएलओ से संपर्क कर फॉर्म 6 एवं घोषणा पत्र अवश्य भरें।

    वैसे सभी पात्र भारतीय नागरिक जो अर्हता तिथि एक अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष पूरे कर चुके हैं वे 15 सितंबर तक अवश्य फॉर्म 6 भरकर अपना नाम एसआईआर की मतदाता सूची में जुड़वाना सुनिश्चित करें।

    क्यों महत्वपूर्ण है एसआईआर से मतदाता सूची में पंजीकरण
    एसआईआर द्वारा बने मतदाता सूची को स्थायी दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रहता है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, वर्तमान में अर्हता तिथि को 18 वर्ष पूरे किए हुए मतदाताओं द्वारा यदि फॉर्म 6 भरकर नहीं दिया जाएगा तो वर्तमान एसआईआर की मतदाता सूची में उनका नाम सम्मिलित नहीं किया जा सकेगा।

    उन्होंने कहा जिस प्रकार वर्तमान एसआईआर में वर्ष 2003 के एसआईआर के दस्तावेज से मैपिंग कर मतदाताओं और उनके बेटा या बेटी को अन्य दस्तावेज में छूट प्राप्त हो रही है। उसी प्रकार आने वाले भविष्य में बच्चों को इसका लाभ प्राप्त होगा।

  • दिल्ली में बिल्डिंग हादसों पर सख्ती, सत्य निकेतन के बाद गांधी नगर में झुकी 4 मंजिला इमारत

    दिल्ली में बिल्डिंग हादसों पर सख्ती, सत्य निकेतन के बाद गांधी नगर में झुकी 4 मंजिला इमारत

    नई दिल्ली
     सत्य निकेतन पीजी हादसे को रविवार को एक हफ्ते पूरे हो गए। यहां अब अधिकतर दुकानें फिर से खुल गई हैं। सड़कों पर लोग भी नजर आ रहे हैं। पर लोगों के मन से हादसे का खौफ नहीं हट रहा। चिह्नित की गई इमारतों में अब भी तोड़फोड़ का काम चल रहा है। बाजार में दुकानदार दुकान खोलकर तो बैठे हैं, लेकिन चिंता उनके चेहरे पर साफ नजर आ रही है।

    'कोरोना से भी बुरा हाल'
    किताबों की दुकान चलाने वाले आकाश ने बताया कि दुकान खोलना मजबूरी है, लेकिन समझ नहीं आ रहा कि ग्राहक कहां से आएंगे? पहले दिनभर चहल-पहल रहती थी। अब कई स्टूडेंट्स घर लौट गए हैं। कुछ ने दूसरे इलाकों में पीजी ले लिया है। सीधे दुकानदारों की कमाई पर असर पड़ा है। कोरोना के समय भी कारोबार इतना खराब नहीं हुआ था, जितना अभी है।

    मजदूरों पर भी हो रहा असर
    मार्केट और आसपास के पीजी में सामान पहुंचाने, खान ले जाने, निर्माण और छोटे-मोटे काम करने वाले मजदूरों को यहां लगातार काम मिलता था, लेकिन अब काम अचानक कम हो गया है। मजदूर रमेश ने बताया कि पहले दिनभर कोई न कोई काम मिल जाता था, लेकिन अब पहले जैसी स्थिति नहीं है।

    'जख्म ताजा है, इसलिए सबको याद है…'
        मार्केट में खाना खाने आए मोतीलाल नेहरू कॉलेज के स्टूडेंट अमन के चेहरे पर गुस्सा और मायूसी दोनों दिख रही थी। उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह से पूरा इलाका छावनी जैसा बना है। अगर हादसे के बाद इतनी बड़ी पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी यहां लग सकती है तो पहले क्यों नहीं लगी? अगर समय रहते कार्रवाई हुई होती तो शायद आज हालात कुछ और होते।

        वहीं, सुभाष और शुभम त्यागी को पटियाला हाउस कोर्ट में संडे को पेश किया गया। कोर्ट ने दोनों को 12 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। स्थानीय लोगों की नजर जांच पर है कि सिर्फ पीजी संचालकों की भूमिका सामने आती है या इमारत की स्थिति, निर्माण में हुए बदलाव और विभागों की जिम्मेदारी की भी जांच होगी।

    11 प्रॉपर्टी तोड़ीं, 4 को किया सील
    सभी 12 ज़ोनों में अवैध और बिल्डिंग बायलॉज की धज्जियां उड़ाकर बनी प्रॉपर्टीज के खिलाफ संडे को भी एमसीडी की कार्रवाई जारी रही। रविवार को साउथ ज़ोन के तहत आने वाले गौतम नगर इलाके में दो प्रॉपर्टीज सहित 11 प्रॉपर्टी पर डिमोलिशन एक्शन लिया गया। इसके अलावा 4 प्रॉपर्टी को सील किया गया। पीतमपुरा इलाके में एक बिल्डिंग को खतरनाक घोषित करते हुए उसे खाली कराया गया। इस बिल्डिंग में 16 फ्लैट बने हुए हैं।

    एमसीडी के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि सत्य निकेतन में ध्वस्त हुई बिल्डिंग के बराबर वाली जिस बिल्डिंग को मैनुअली तोड़ा जा रहा है, उस बिल्डिंग की अभी तक डेढ़ मंजिल ही टूट पाई है।
        सोमवार को पूरी दो मंजिलों को तोड़ दिया जाएगा। इसके बाद एक ही दिन में पूरी बिल्डिंग को जमीन से मिला दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि इसी बिल्डिंग के आसपास बिल्डिंग नंबर 74 से लेकर बिल्डिंग नंबर 76 को भी खतरनाक घोषित कर दिया गया है।
        इसके बाद इन बिल्डिंग को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इन बिल्डिंग को तोड़ने से पहले एहतियात के तौर पर बिल्डिंग नंबर 73 और बिल्डिंग नंबर 77 को खाली कराया जाएगा।
        ध्यान रहे कि एनबीटी ने सबसे पहले इन खतरनाक बिल्डिंग को हाइलाइट किया था। अधिकारी ने बताया रविवार को सैदुल्लाजाब में जिस बिल्डिंग को तोड़ा जा रहा था, उसके ऊपर रविवार को भी कार्रवाई जारी रही।

    एक बिल्डिंग को खतरनाक घोषित किया
        4 मंजिला इमारत झुकी, दो परिवारों को निकाला
        मालिक को खुद ही बिल्डिंग गिराने को कहा गया है

    बाजार हुआ वीरान
    सत्य निकेतन में एमसीडी की ओर से चिह्नित की गई इमारतों में तोड़फोड़ का काम लगातार जारी है

    बिल्डिंग में नोटिस लगा दिया गया है
    गांधी नगर स्थित चांद मोहल्ले में रविवार को चार मंजिला इमारत अचानक झुक गई। सूचना के बाद पुलिस तुरंत टीम मौके पर पहुंची और इमारत में रहने वाले दो परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला। पूरी इमारत को खाली करा लिया गया है। साथ ही, दिल्ली नगर निगम ने इसके मालिक को इमारत खुद गिराने का निर्देश दिया है।

        एमसीडी के एक अधिकारी ने बताया कि मकान मालिक से रविवार को ही इमारत गिराने को कहा है। ऐसा न करने पर एमसीडी जरूरी नियमों के तहत कार्रवाई करेगी।
        पुलिस अधिकारी ने बताया कि रविवार दोपहर पुलिस को सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस वाले मौके पर पहुंचे और दो परिवारों को सुरक्षित निकाला गया।

  • पंजाब में रिश्वतखोरी का आरोप, 2 SHO ने मांगे 7 लाख; एक पुलिसकर्मी गिरफ्तार

    पंजाब में रिश्वतखोरी का आरोप, 2 SHO ने मांगे 7 लाख; एक पुलिसकर्मी गिरफ्तार

    तरनतारन.

    डी.जी.पी. गौरव यादव के आदेश पर तरनतारन पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत सख्त कार्रवाई करते हुए 2 एस.एच.ओ. और दो बिचौलियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत दर्ज मामलों में एक आरोपी के परिवार वालों से जांच के दौरान गैर-कानूनी फायदे पहुंचाने के लिए कुल 7 लाख रुपये रिश्वत लेने के मामले में की गई है।

    इस बारे में जानकारी देते हुए एस.एस.पी. सुरिंदर लांबा ने बताया कि थाना वल्टोहा के एस.एच.ओ. एस.आई. बलजिंदर सिंह द्वारा गुरमीत सिंह उर्फ गीतू को मामले की जांच के दौरान गैर-कानूनी फायदे पहुंचाने के बदले उसके परिवार वालों से रॉबिन सिंह के जरिए 3 लाख रुपये की रिश्वत ली। इसी तरह, थाना कच्चा-पक्का के एस.एच.ओ. एस.आई. किरपाल सिंह, जिन्होंने कुछ दिन पहले चार्ज संभाला था, पर पूरन सिंह के जरिए उक्त आरोपी के परिवार वालों से 4 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। रॉबिन सिंह और पूरन सिंह पर इन कथित लेन-देन में बिचौलिए की भूमिका निभाने का आरोप है।
    एस.एस.पी. ने बताया कि मामले में कार्रवाई करते हुए एस.आई. कृपाल सिंह, एस.एच.ओ. पुलिस स्टेशन कच्चा-पक्का को गिरफ्तार कर लिया गया है और बाकी तीन आरोपी एस.आई. बलजिंदर सिंह, रॉबिन सिंह और पूरन सिंह फरार हैं।

    एस.एस.पी. ने बताया कि गुरमीत सिंह उर्फ गीतू के खिलाफ एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत 2 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से तारीख 01.09.2026 का मामला पुलिस स्टेशन वल्टोहा से जुड़ा है, जिसमें 14 किलो 110 ग्राम अफीम बरामद की गई थी। इसी तरह 02.09.2026 को पुलिस स्टेशन कच्चा पक्का में एक मामला दर्ज किया गया है, जिसमें 2 किलो अफीम बरामद की गई थी। मामले की आगे की जांच डी.एस.पी. भिखीविंड अतुल सोनी कर रहे हैं। गिरफ्तार आरोपी को माननीय कोर्ट में पेश करके रिमांड पर लिया जा रहा है।

  • मानसून की बेरुखी से बांधों का जलस्तर घटा, पंजाब में बिजली की मांग बढ़ी; मंत्री ने कट को लेकर दिया बड़ा अपडेट

    मानसून की बेरुखी से बांधों का जलस्तर घटा, पंजाब में बिजली की मांग बढ़ी; मंत्री ने कट को लेकर दिया बड़ा अपडेट

    लुधियाना

    लुधियाना में बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि किसानों को 10 घंटे बिजली मिल रही।लुधियाना में बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने दावा किया कि पंजाब में अब बिजली के लंबे कट नहीं लगेंगे, कल यानी 15 सितंबर से कट लगने बंद हो जाएंगे। प्राइवेट बिजली प्लांट भी सरकार ने ठीक करवाए हैं। इसके लिए करीब 200 सरकारी मुलाजिम लगाए।

    मंत्री ने कहा कि किसानों को पहले की तुलना में ज्यादा बिजली दी जा रही है। अब 8 घंटे की बजाय किसानों को 10 घंटे बिजली मिल रही है। उन्होंने बताया कि इस साल पिछले साल की तुलना में बिजली की डिमांड 3,500 मेगावाट ज्यादा है।

    इधर, बिजली की डिमांड लगातार 16 हजार मेगावाट के पार बनी हुई है। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) इस समय अलग-अलग स्रोतों से अधिकतम स्तर पर बिजली पैदा करवा रहा है। कायले की कमी के चलते बिजली की कुल जनरेशन 5,743 मेगावाट तक ही पहुंची है।

    पिछले दिनों के मुकाबले पंजाब में बिजली की जनरेशन तो बढ़ी है, लेकिन डिमांड कम नहीं हो रही है। डिमांड पूरी करने के लिए PSPCL को सीधे केंद्रीय पूल पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे बिजली कट लग रहे हैं।

    अघोषित बिजली कटों से परेशान लुधियाना के डाइंग उद्यमियों ने आज चंडीगढ़ रोड के वर्धमान चौक पर धरना देने का ऐलान किया है। वहीं, दूसरी तरफ बिजली कटों को लेकर कांग्रेस पटियाला में PSPCL मुख्यालय के बाहर धरना देगी।

     

    बिजली उत्पादन कहां से कितना हो रहा, जानिए…

    सरकारी थर्मल प्लांट: पंजाब में तीन सरकारी थर्मल प्लांटों के 10 यूनिट हैं। पहला सरकारी प्लांट रोपड़ में है और यहां चार यूनिट हैं। इन चार यूनिटों की बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 840 मेगावाट है, जबकि इनमें 487 मेगावाट ही बिजली पैदा हो रही है।

    दूसरा प्लांट लहरा मोहब्बत में है। इस प्लांट में भी चार यूनिट हैं। इसकी कुल क्षमता 920 मेगावाट है, जबकि यहां 801 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है। तीसरा प्लांट गोइंदवाल में है और इसमें दो यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 540 मेगावाट है, जबकि इसमें 501 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। इस तरह सरकारी प्लांटों से कुल उत्पादन 1,786 मेगावाट है। सरकारी दो प्लांट लगभग पूरी क्षमता से चल रहे हैं, जबकि रोपड़ प्लांट में अभी भी उत्पादन क्षमता से काफी कम है।

    प्राइवेट थर्मल प्लांट: पंजाब में दो प्राइवेट थर्मल प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 3,380 मेगावाट बिजली पैदा करने की है। तलवंडी साबो में तीन यूनिट हैं, जिनकी कुल क्षमता 1,980 मेगावाट है। सोमवार को तीनों यूनिट ऑपरेशनल हैं और इनसे 1,701 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है।

    वहीं, दूसरा प्लांट राजपुरा में है और इसमें दो यूनिट हैं। दोनों की कुल क्षमता 1,400 मेगावाट है। इन दोनों यूनिटों में आज कुल 1,321 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। दोनों प्राइवेट प्लांटों को मिलाकर 3,022 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है।

    हाइड्रो प्रोजेक्ट्स: पंजाब के पास रणजीत सागर डैम इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के अलावा चार और हाइड्रो प्रोजेक्ट हैं। रणजीत सागर डैम की क्षमता 600 मेगावाट बिजली पैदा करने की है, जिसमें दिन के समय कम बिजली पैदा की जा रही है। सोमवार सुबह 9 बजे के करीब चार में से दो टरबाइन चलाई जा रही हैं, जिनसे 240 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है।

    शानन प्रोजेक्ट से 50 मेगावाट बिजली तैयार: यू.बी.डी.सी. हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर हाउस से 44 मेगावाट, मुकेरियन हाइडल प्रोजेक्ट के अलग-अलग यूनिटों से 193 मेगावाट, आनंदपुर साहिब हाइडल प्रोजेक्ट से 112 मेगावाट व शानन प्रोजेक्ट से 50 मेगावाट बिजली तैयार की जा रही है। इस तरह हाइड्रो प्रोजेक्टों से कुल 639 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। रात के समय हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से उत्पादन 830 मेगावाट तक किया जा रहा है।

    सोलर व अन्य प्लांट: पंजाब में बड़ी संख्या में सोलर प्लांट लगे हैं। इनसे बिजली का उत्पादन काफी मात्रा में हो रहा है। दिन के समय सोलर प्लांट व अन्य स्रोतों से 350 से 400 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। हालांकि, रात के समय इन प्लांटों से जनरेशन शून्य हो जाती है। सुबह 9 बजे के करीब सोलर प्लांट व अन्य स्रोतों से कुल 341 मेगावाट के करीब बिजली उत्पादन हो रहा है।

    केंद्रीय पूल: पंजाब में बिजली की डिमांड पूरी करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड सीधे तौर पर केंद्रीय पूल पर निर्भर है। पंजाब में जितनी जनरेशन होती है, उसके बाद डिमांड और सप्लाई में जो गैप रहता है, उसे पूरा करने के लिए केंद्रीय पूल से बिजली खरीदी जाती है। सोमवार को केंद्रीय पूल से करीब 11 हजार मेगावाट के करीब बिजली खरीदी जा रही है।

    पंजाब में बढ़ी बिजली की मांग

    पंजाब में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी और यूनिटों में तकनीकी खराबी से उत्पादन प्रभावित है। मानसून की बारिश कम होने से खेतों में ट्यूबवेल पर निर्भरता बढ़ी है। 

    उमस भरी गर्मी के कारण घरेलू बिजली की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर है। मांग और उपलब्धता में बड़े अंतर के कारण उद्योगों से लेकर खेतीबाड़ी क्षेत्र और शहरों व गांवों में लंबे कट लगाए जा रहे हैं। इससे उद्योगपतियों किसानों और आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

    सितंबर में लगातार 16 हजार मेगावाट से ज्यादा मांग
    छह सितंबर को छोड़कर सितंबर में बिजली की मांग लगातार 16 हजार मेगावाट से अधिक रही। एक सितंबर को 16116 मेगावाट, दो को 16530, तीन को 16485, चार को 16182, पांच को 16254, सात को 16219, आठ और नौ को 16505, 10 को 16432, 11 को 16619 और 12 सितंबर को 16519 मेगावाट मांग रही। शनिवार को 16519 मेगावाट की रिकॉर्ड मांग के मुकाबले पावरकाम को सभी स्रोतों से केवल 4503 मेगावाट बिजली उपलब्ध हुई। करीब 2173 मेगावाट उत्पादन प्रभावित रहा।

    तकनीकी खराबी से राजपुरा का 700 मेगावाट का एक नंबर और तलवंडी साबो का 660 मेगावाट का दो नंबर यूनिट बंद रहा। 840 मेगावाट क्षमता वाले रोपड़ थर्मल से केवल 488 मेगावाट बिजली मिली। 920 मेगावाट क्षमता वाले लहरा मुहब्बत प्लांट से 804 मेगावाट उत्पादन हुआ। पावरकाम अधिकारियों के अनुसार सर्दियों में रोपड़ और लहरा मुहब्बत थर्मलों का सालाना रखरखाव नहीं हुआ था। अब तकनीकी खराबी के कारण यूनिट पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहे। बांधों में पानी की कमी से रणजीत सागर के 300 मेगावाट के दो और यूबीडीसी के 45 मेगावाट के तीन यूनिट बंद हैं।

    चार थर्मलों में चार से 16 दिन का कोयला
    पंजाब के पांच थर्मल प्लांटों में से चार में केवल चार से 16 दिनों का कोयला बचा है। तलवंडी साबो में चार दिन राजपुरा में सात दिन लहरा मुहब्बत में 11 दिन और गोइंदवाल में 16 दिनों का स्टॉक है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के नियमों के अनुसार 1000 किलोमीटर से अधिक दूर स्थित कोयला खदानों वाले राज्यों के थर्मलों में 30 दिनों का स्टॉक होना चाहिए। पंजाब को कोयला देने वाली खदानें 1300 से 1900 किलोमीटर दूर हैं। मानसून से पहले ऐसे थर्मलों में 21 दिनों का स्टॉक जरूरी माना जाता है। ओडिशा झारखंड और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश से खनन और परिवहन प्रभावित होने की बात सामने आई है।

    मानसून की बारिश 40 फीसदी कम
    पंजाब में इस बार मानसून की बारिश सामान्य से 40 फीसदी कम रही है। 402.9 एमएम के मुकाबले 243.5 एमएम बारिश हुई। सितंबर में अब तक सामान्य 34.5 एमएम के मुकाबले केवल 12.9 एमएम बारिश हुई है जो 63 फीसदी कम है। अमृतसर में 92 फीसदी बरनाला में 89 बठिंडा में 81 फरीदकोट में 97 फतेहगढ़ साहिब में 74 फिरोजपुर में 96 जालंधर में 84 लुधियाना में 82 मुक्तसर में 83 पटियाला में 70 मोहाली में 72 एसबीएस नगर में 64 और संगरूर में 62 फीसदी बारिश कम हुई। सितंबर में मोगा फाजिल्का मानसा तरनतारन और कपूरथला पूरी तरह सूखे रहे। जुलाई में 26 और अगस्त में 35 फीसदी बारिश कम हुई थी।

    बांधों में घटा जलस्तर
    कम बारिश से प्रमुख बांधों में जलस्तर भी तेजी से घटा है। भाखड़ा में पिछले साल के मुकाबले 32.91 फुट कमी है। 2025 में इसी दिन जलस्तर 1676.89 फुट था जो अब 1643.98 फुट है। पानी की आवक 46708 से घटकर 30199 क्यूसिक रह गई। पौंग में जलस्तर 17.91 फुट कम होकर 1372.24 फुट रह गया है। आवक 34737 से घटकर 10751 क्यूसिक है। रणजीत सागर बांध में जलस्तर 13.05 मीटर घटकर 511.48 मीटर रह गया है। पानी की आवक 18411 से घटकर 5181 क्यूसिक है। इससे हाइडल बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

    उद्योगों में 10 घंटे तक कट
    आपूर्ति में कमी के कारण उद्योगों में 10 घंटे तक के कट लग रहे हैं। जिला मुख्यालयों में चार घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में एक घंटे के कट हैं। खेतीबाड़ी क्षेत्र को तीन से साढ़े चार घंटे बिजली मिल पा रही है। किसान संगठनों ने आंदोलन का एलान किया है। विपक्षी दल भी सरकार को घेर रहे हैं। राज्य सरकार का कहना है कि केंद्र से कोयले की सप्लाई कम हो रही है और पंजाब को केंद्रीय पूल से 1051 मेगावाट कम बिजली मिल रही है।

    पावरकाम पर आर्थिक दबाव
    पंजाब सरकार और उसके विभागों पर पावरकाम का करीब 9650 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें 7550 करोड़ सब्सिडी और 2100 करोड़ सरकारी विभागों के बिल हैं। सब्सिडी में 4000 करोड़ पिछले दो वित्तीय वर्षों का ब्याज समेत बकाया है जबकि 3550 करोड़ चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 का है। जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग पर करीब 1000 करोड़ स्थानीय निकाय विभाग पर 850 करोड़ ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग पर 380 करोड़ और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पर 125 करोड़ रुपये बकाया हैं। सरकारी विभागों और जरूरी सेवाओं के कनेक्शन काटना आसान नहीं होने से पावरकाम पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

    10 हजार करोड़ का कर्ज लेने की तैयारी
    बिजली और कोयला खरीद मरम्मत के स्पेयर पार्ट्स तथा वेतन और अन्य खर्चों के भुगतान में दिक्कत के बीच पावरकाम बाजार से करीब 10 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए गैर परिवर्तनीय डिबेंचर और बॉन्ड जारी करने की योजना है। मर्चेंट बैंकरों से ऑनलाइन बोलियां मांगी गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज और ब्याज का बोझ करदाताओं और बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। पावरकाम पर पहले से करीब 18000 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं।

    इंजीनियर्स एसोसिएशन ने बताया 7800 करोड़ के घाटे का खतरा
    पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल के अनुसार बिजली दरों में कटौती से सालाना सब्सिडी बिल 20500 करोड़ से घटकर करीब 15200 करोड़ रुपये रह गया है। इसके बावजूद सब्सिडी समय पर नहीं मिल रही। उनका कहना है कि हाल के एआरआर में खर्च का अनुमान कम आंका गया जिससे दरें कम तय हुईं। इससे चालू वित्तीय वर्ष में पावरकाम को वास्तविक जरूरत के मुकाबले करीब 7800 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है।

    उत्पादन बढ़ाने की मांग
    एसोसिएशन ने रोपड़ में 800-800 मेगावाट के तीन सुपर क्रिटिकल थर्मल यूनिट लगाने और बठिंडा में 250 मेगावाट का सोलर प्लांट स्थापित करने की मांग की है। एसोसिएशन के अनुसार 2020 में ही सरकार को वित्तीय वर्ष 2021-22 में बिजली कमी की आशंका बता दी गई थी। 2022 में मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने भी उत्पादन बढ़ाने की मांग रखी गई लेकिन अभी तक इस दिशा में कदम नहीं उठाया गया।

    पावरकाम बोला- जल्द दूर होगी कमी
    पावरकाम के डायरेक्टर जनरेशन पीएस बराड़ का कहना है कि कम बारिश के कारण खेतीबाड़ी से घरेलू क्षेत्र तक बिजली की मांग बढ़ी है। कोयले की सप्लाई तेज करने के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को पत्र लिखा गया है। कोयला उत्पादक राज्यों में भारी बारिश से खनन प्रभावित हुआ है। जरूरी मरम्मत के बाद बंद यूनिट जल्द चालू किए जाएंगे जिससे बिजली की कमी काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है। 

     

  • बिहार में नदियों का जलस्तर अब भी उफान पर, कई इलाकों में बाढ़ का खतरा नहीं टला

    बिहार में नदियों का जलस्तर अब भी उफान पर, कई इलाकों में बाढ़ का खतरा नहीं टला

    पटना
    बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर सोमवार सुबह तक खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है, हालांकि गंगा के अधिकांश घाटों और जलमापक केंद्रों पर पानी में कमी दर्ज की गयी है, जबकि पुनपुन और बागमती में बढ़त ने निचले इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। जाहिर है ऐसे में अभी बिहार में बाढ़ का खतरा टला नहीं है। जल संसाधन विभाग के आज सुबह छह बजे के जारी आंकड़ों के अनुसार गंगा पटना के दीघा में 50.81 मीटर, गांधी घाट पर 49.61 मीटर, हथिदह में 42.82 मीटर, मुंगेर में 39.38 मीटर, भागलपुर में 34.18 मीटर और कहलगांव में 32.49 मीटर पर बह रही है और इन सभी स्थानों पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है।

    एहतियात की बात है कि गंगा के जलस्तर में कमी का रुख इन प्रमुख केंद्रों पर बना हुआ है। पटना के दीघा में नदी खतरे के निशान 50.45 मीटर से 0.36 मीटर ऊपर है, जबकि गांधी घाट पर 48.60 मीटर के खतरे के निशान से 1.01 मीटर, हथिदह में 41.76 मीटर से 1.06 मीटर, मुंगेर में 39.33 मीटर से 0.05 मीटर, भागलपुर में 33.68 मीटर से 0.50 मीटर और कहलगांव में 31.09 मीटर से 1.40 मीटर ऊपर है। फरक्का में भी गंगा 23.80 मीटर पर खतरे के निशान 22.25 मीटर से 1.55 मीटर ऊपर है।

    पटना शहर और आसपास के घाटों की स्थिति भी अभी सामान्य नहीं हुई है। बाढ़ प्रबंधन सुधार सहायता केंद्र के छह बजे के आंकड़ों में गांधीघाट पर गंगा 49.61 मीटर, दीघाघाट पर 50.81 मीटर, बांकाघाट पर 48.59 मीटर और पंडारक में 43.08 मीटर दर्ज की गयी। इनमें गांधीघाट, दीघाघाट और बांकाघाट समेत कई केंद्रों पर पानी खतरे के निशान से ऊपर है। हथिदह में जलस्तर 42.82 मीटर, मुंगेर में 39.38 मीटर, सुल्तानगंज में 36.21 मीटर, भागलपुर में 34.18 मीटर, कहलगांव में 32.49 मीटर और साहेबगंज में 28.63 मीटर दर्ज किया गया।

    गंगा के बक्सर केंद्र पर जलस्तर 59.42 मीटर रहा, जो खतरे के निशान 60.32 मीटर से 0.90 मीटर नीचे है, हालांकि यह चेतावनी स्तर से ऊपर है। वाराणसी में जलस्तर 68.47 मीटर और प्रयागराज में 80.01 मीटर दर्ज किया गया, जहां जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है। विभागीय आंकड़ों में गंगा के इन दोनों ऊपरी केंद्रों पर पानी घटने का रुख है जो आने वाले दिनों के लिए बेहतर संकेत है।

    उधर, अन्य नदियों में स्थिति मिश्रित बनी हुई है। कोसी बलतारा में 35.01 मीटर और कुरसेला में 31.32 मीटर पर है तथा दोनों स्थानों पर नदी खतरे के निशान से क्रमश: 1.16 और 1.32 मीटर ऊपर है। बूढ़ी गंडक खगड़िया में 37.96 मीटर पर खतरे के निशान से 1.38 मीटर ऊपर है। घाघरा दरौली में 61.30 मीटर पर है, जो खतरे के निशान से 0.48 मीटर ऊपर है।

    पुनपुन और बागमती की स्थिति विशेष रूप से निगरानी वाली बनी हुई है। पुनपुन श्रीपालपुर में 51.94 मीटर पर बह रही है और खतरे के निशान 50.60 मीटर से 1.34 मीटर ऊपर है। यहां जलस्तर बढ़ने का रुख दर्ज किया गया है। बागमती बेनीबाद में 49.20 मीटर पर है, जो खतरे के निशान 48.68 मीटर से 0.52 मीटर ऊपर है और इसमें भी बढ़त दर्ज की गयी है। इसके विपरीत कोसी, बूढ़ी गंडक और गंगा के अधिकांश केंद्रों पर जलस्तर घट रहा है।

    बराजों से पानी छोड़े जाने की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। कोसी नदी के वीरपुर बराज से सोमवार सुबह आठ बजे 1,55,710 क्यूसेक पानी डाउनस्ट्रीम छोड़ा जा रहा था और इसमें बढ़ोतरी का रुख दर्ज किया गया। गंडक नदी के वाल्मीकिनगर बराज से 86,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था और प्रवाह स्थिर रहा। सोन नदी के इंद्रपुरी बराज से 52,097 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसमें कमी का रुख दर्ज किया गया।