Category: राज्य

  • झारखंड में पंचायत चुनाव से पहले OBC आरक्षण की तैयारी, अक्टूबर तक सरकार ले सकती है फैसला

    झारखंड में पंचायत चुनाव से पहले OBC आरक्षण की तैयारी, अक्टूबर तक सरकार ले सकती है फैसला

     रांची
    झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले वर्ष अप्रैल-मई माह में होना है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर इसे लेकर जिलों में तैयारियां चल रही हैं। इसके तहत मतदान केंद्रों का निर्धारण किया जा रहा है। हालांकि पंचायत चुनाव ट्रिपल टेस्ट के बाद ही होना है।

    ट्रिपल टेस्ट के माध्यम से ओबीसी श्रेणी को चुनाव में आरक्षण प्रदान किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को दी जाएगी।
    वर्ष 2022 में पंचायत चुनाव ओबीसी को आरक्षण दिए बिना ही संपन्न हुआ था। इसपर काफी विवाद हुआ था।

    इसके बाद राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर ट्रिपल टेस्ट कराकर ओबीसी को आरक्षण देते हुए पिछले वर्ष नगर निकाय चुनाव संपन्न कराया था। ऐसे में पूरी संभावना है कि अगले वर्ष होनेवाले पंचायत चुनाव में भी ओबीसी को आरक्षण दिया जाएगा।

    इसके लिए पंचायती राज विभाग को कैबिनेट से स्वीकृति लेनी होगी।ट्रिपल टेस्ट कराने में दो-तीन माह का समय लग सकता है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि अक्टूबर माह तक सरकार इसपर निर्णय ले लेगी।

    19 अक्टूबर 2026 की अर्हता तिथि से हो सकता चुनाव
    चूंकि राज्य में पंचायत चुनाव अगले वर्ष होना है, इसलिए पूरी संभावना है कि यह चुनाव 19 अक्टूबर 2026 की अर्हता तिथि से हो। इस तिथि तक मतदाता बननेवाले नागरिक पंचायत चुनाव में मतदान कर सकेंगे।

    दरअसल, एसआइआर के तहत 19 अक्टूबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होना है। इसके बाद तय हो जाएगा कि राज्य में मतदाताओं की संख्या कितनी है।

    मतदाता सूची के प्रकाशन होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग भारत निर्वाचन आयोग से मतदाता सूची का आंकड़ा देने का अनुरोध कर सकता है। यह आंकड़ा मिलने के बाद पंचायत स्तर पर मतदाता सूची का विखंडन किया जाएगा।

    फैक्ट फाइल
        झारखंड में पंचायतों की संख्या : 4,345
        ग्राम पंचायतों के सदस्यों की संख्या : 53,479
        मुखिया के पद : 4,345
        पंचायत समिति सदस्य के पद : 5,341
        जिला परिषद सदस्य के पद : 536

     

  • एक व्यक्ति और एक परिवार की कीमत चुकाता था पूरा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    एक व्यक्ति और एक परिवार की कीमत चुकाता था पूरा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

     लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गलती एक व्यक्ति करता है, लेकिन उसकी कीमत पूरे संस्थान को चुकानी पड़ती है। ठीक वैसे ही एक व्यक्ति और एक परिवार की कीमत उत्तर प्रदेश को पहचान के संकट, कानून व्यवस्था के भीषण संकट, अराजकता और भ्रष्टाचार के रूप में चुकानी पड़ती थी। कृत्य एक व्यक्ति गलत करता था और कीमत पूरा प्रदेश चुकाने को मजबूर होता था। आज पारदर्शिता और शुचिता के साथ आगे बढ़ रहे उत्तर प्रदेश के सामने पहचान का संकट नहीं है। प्रदेश के लोग कहीं भी सीना तानकर कह सकते हैं कि वे उत्तर प्रदेश के हैं।
     
    मुख्यमंत्री योगी रविवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के षष्ठम स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।
     
    साढ़े नौ वर्ष में 9.5 लाख सरकारी नौकरियां

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया जितनी पारदर्शी होगी, परिणाम उतने ही फलदायी होंगे। अच्छे लोगों का चयन नहीं होगा, चयन प्रक्रिया में विसंगति, भेदभाव और शुचिता का अभाव होगा तो उसकी कीमत पूरे संस्थान को चुकानी पड़ेगी। पिछले साढ़े नौ वर्ष में प्रदेश में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। कोई यह नहीं कह सकता कि नियुक्ति में उसके साथ भेदभाव हुआ या किसी प्रकार का लेनदेन हुआ। प्रदेश में लगभग 16 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जिनमें 9.5 लाख वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भर्ती हुए हैं। यह युवा कार्यबल प्रदेश की प्रगति को नई गति दे रहा है।
     
    अंग प्रत्यारोपण यूनिट समेत कई सुविधाओं का लोकार्पण

    मुख्यमंत्री योगी ने संस्थान में तैयार मुख्य चिकित्सा अंग प्रत्यारोपण यूनिट सहित कई अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लोकार्पण किया। इनमें 40 बेड का इमरजेंसी वार्ड, मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में 100 मरीजों की क्षमता वाला वेटिंग हाल, रेडिएशन आंकोलाजी विभाग में 4डी-सीटी सिम्युलेटर, पेट-सीटी मशीन, स्पेक्ट-सीटी मशीन, 1.5 टेस्ला एमआरआइ तथा पीएमआर विभाग में नेविगेटेड आरटीएमएस मशीन शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी ने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट का भी विमोचन किया।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अंग प्रत्यारोपण यूनिट से किडनी ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची कम करने में मदद मिलेगी। बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी जल्द शुरू होने जा रही है। संस्थान रोबोटिक सर्जरी, गामा नाइफ, एआइ आधारित डायग्नोस्टिक, एडवांस इमेजिंग, टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश के 10 जिलों में वर्चुअल आइसीयू का संचालन किया जा रहा है।
     
    अब चुनौती पैसे की नहीं, वेटिंग सूची कम करने की
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिला अस्पतालों में 10-10 बेड पर निश्शुल्क डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना, पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस चिकित्सा और मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से जरूरतमंदों के उपचार के लिए धन उपलब्ध कराया जा रहा है। आज समस्या पैसे की नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती किडनी ट्रांसप्लांट सहित गंभीर उपचार के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची को कम करने की है।
     
    20 बेड से 1,400 बेड का सुपर स्पेशियलिटी संस्थान

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 में यह प्रश्न था कि यहां अस्पताल रहेगा या इसे संस्थान बनाया जाएगा। सरकार ने इसे संस्थान के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। कभी 20 बेड के छोटे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में शुरू हुआ परिसर आज 1,400 बेड के सुपर स्पेशियलिटी संस्थान में बदल चुका है। पहले यहां की शिकायतों से समाचार पत्र रंगे रहते थे, अब शिकायतें कम आती हैं। जनता की संतुष्टि ही किसी संस्थान की सफलता की कसौटी है। संस्थान में 1,010 बेड का नया अस्पताल और 350 बेड का ट्रॉमा सेंटर भी प्रस्तावित है।
     
    41 से बढ़कर 85 हुए मेडिकल कॉलेज

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर 41 मेडिकल कॉलेज थे, आज 85 मेडिकल कॉलेज और दो एम्स संचालित हैं। एमबीबीएस की सीटें 4,690 से बढ़कर 13,600 से अधिक और पीजी की सीटें 3,564 से बढ़कर 5,067 हो गई हैं। पहले केवल दो नर्सिंग कॉलेज थे, अब 26 बन चुके हैं और 33 निर्माणाधीन हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की संख्या 1,227 से बढ़कर 3,438 हो गई है।
     
    पिछली सरकार ने मेडिकल कॉलेज बनाने से किया था इनकार
    पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले चरण में उत्तर प्रदेश के लिए 17 मेडिकल कॉलेज और गोरखपुर एम्स स्वीकृत किया था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने मेडिकल कॉलेज बनाने से इनकार कर दिया। गोरखपुर एम्स के लिए ऐसी भूमि उपलब्ध कराई गई जिस पर सुप्रीम कोर्ट का स्थगन था। वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद नई भूमि उपलब्ध कराई गई और आज गोरखपुर एम्स सफलतापूर्वक संचालित है। रायबरेली एम्स की समस्याओं का भी समाधान किया गया।
     
    अपने मेडिकल डाटा पर खुद करें शोध
    मुख्यमंत्री योगी ने चिकित्सा संस्थानों से उपचार के साथ शोध, नवाचार और तकनीक को जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारे ही डाटा पर पश्चिमी देश शोधपत्र प्रस्तुत करते हैं, जबकि हम अपने डाटा को संरक्षित नहीं कर पाते। अपने मेडिकल डाटा को संरक्षित कर भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करनी होंगी। आइआइटी कानपुर के साथ मेडटेक सेंटर आफ एक्सीलेंस, एसजीपीजीआइ में सेंटर आफ एक्सीलेंस, मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क इसी दिशा में किए जा रहे प्रयास हैं। एआइ भी चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
     
    100 वर्ष बनाम नौ महीने का दिया उदाहरण
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जापान ने इंसेफेलाइटिस की वैक्सीन 1905 में विकसित कर ली थी, लेकिन उसे भारत आने में 100 वर्ष लग गए। वहीं कोविड महामारी के दौरान भारतीय वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केवल नौ महीने में दो वैक्सीन विकसित कर दीं। भारत ने अपने नागरिकों को नि:शुल्क टीका उपलब्ध कराने के साथ करीब 100 मित्र देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बीमारी का पैटर्न बदल रहा है, इसलिए चिकित्सा संस्थानों को समय से 10 कदम आगे सोचने की जरूरत है। हीलिंग, लर्निंग और डिस्कवरी एक साथ चलेंगी तभी कोई संस्थान वास्तविक सेंटर आफ एक्सीलेंस बन सकेगा।
     
    लोहिया संस्थान से चिकित्सा क्षेत्र का नोबेल आने की उम्मीद : ब्रजेश पाठक

    उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि छह वर्ष में लोहिया संस्थान ने तेजी से प्रगति की है। यहां हो रहे शोध को देखकर विश्वास है कि भविष्य में संस्थान से चिकित्सा क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार भी आ सकता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि नंबर के साथ कौशल भी जरूरी है और चिकित्सक संकल्प लें कि कोई मरीज निराश होकर न लौटे। पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 2017 से पहले व्यवस्था में पारदर्शिता का अभाव था। आज मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में बिना भेदभाव स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं और प्रदेश में पहले करीब पांच हजार की तुलना में अब साढ़े 12 हजार से अधिक डॉक्टर तैयार हो रहे हैं।
     
    20 बेड से 1,400 बेड तक पहुंचा संस्थान : मयंकेश्वर

    चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि एक समय यह अस्पताल केवल 20 बेड से शुरू हुआ था। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र ने लंबी छलांग लगाई है। छह वर्ष पहले मुख्यमंत्री योगी ने इसे संस्थान के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया और उसके बाद जिस तेजी से इसकी प्रगति हुई है, वह सराहनीय है। आज संस्थान में 1,400 बेड संचालित हो रहे हैं और यह प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में अपनी जगह बना चुका है।
     
    194 पदों पर भर्ती, मुख्यमंत्री योगी ने दिए नियुक्ति पत्र

    प्रदेश सरकार के सहयोग से संस्थान में 194 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई है। मुख्यमंत्री योगी ने नवनियुक्त कार्मिकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इनमें टेक्निकल आफिसर परफ्यूजन अनुज कुमार शुक्ला, डाइटीशियन ममता तिवारी और सावन कुमार समेत अन्य नवनियुक्त कार्मिक शामिल रहे। मुख्यमंत्री योगी ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले संकाय और नर्सिंग कर्मियों को भी सम्मानित किया। सीएमएस एवं जनरल मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रम सिंह को डायरेक्टर एक्सीलेंस अवार्ड दिया गया। डॉ. आलोक श्रीवास्तव, डॉ. अजय कुमार वर्मा समेत अन्य संकाय सदस्यों को डायरेक्टर्स अवार्ड आफ मेरिट प्रदान किया गया। नर्सिंग में उमा पांडेय को डायरेक्टर्स मेरिट अवार्ड और सीएनओ सुमन सिंह को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला।
     
    दो पुस्तकों और वार्षिक प्रगति रिपोर्ट का विमोचन

    मुख्यमंत्री योगी ने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट के साथ डॉ. अजय कुमार वर्मा की पुस्तक ‘सही जानकारी सही देखभाल’ और डॉ. एसएस नाथ की पुस्तक ‘क्रिटिकल केयर फाल्स’ का विमोचन किया।

    कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष सहित वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, संकाय सदस्य और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री योगी और मंचासीन अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। इससे पहले संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने मुख्यमंत्री योगी का रुद्राक्ष का पौधा भेंटकर स्वागत किया। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह और अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष का भी रुद्राक्ष का पौधा देकर स्वागत किया गया।

  • यूपी डायलॉग – चैप्टर 2’ में जुटे 200 से अधिक युवा, उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा पर प्रयागराज में हुआ मंथन

    यूपी डायलॉग – चैप्टर 2’ में जुटे 200 से अधिक युवा, उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा पर प्रयागराज में हुआ मंथन

    प्रयागराज

    उत्तर प्रदेश में पिछले एक दशक के दौरान हुए बदलाव, विकास कार्यों और युवाओं के लिए तैयार हुए नए अवसरों को लेकर रविवार को प्रयागराज में ‘यूपी डायलॉग – चैप्टर 2’ का आयोजन किया गया। ‘फ्रेंड्स ऑफ यूपी’ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में 200 से अधिक युवा स्वयंसेवकों और प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में कानून-व्यवस्था से लेकर अर्थव्यवस्था, शिक्षा, रोजगार के अवसर और धार्मिक पर्यटन तक विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों और युवाओं के बीच विस्तार से संवाद हुआ।

    ‘यूपी डायलॉग’ के दूसरे चैप्टर में ‘यूपी डिकेड’ को केंद्र में रखते हुए उत्तर प्रदेश की पिछले एक दशक की विकास यात्रा पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने राज्य में हुए बदलावों के साथ ही बदलते सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य युवाओं को प्रदेश में हो रहे बदलावों से जोड़ने के साथ उन्हें ऐसा मंच उपलब्ध कराना रहा, जहां वे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से सीधे सवाल कर सकें और अपनी बात भी रख सकें।

    कानून-व्यवस्था और युवाओं की भूमिका पर हुई चर्चा

    कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता अर्चना सिंह ने कानून एवं न्याय व्यवस्था से जुड़े विषयों पर युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुरक्षित और सशक्त भविष्य के निर्माण के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकार की विभिन्न नीतियों और योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका बड़ा लाभ युवा वर्ग को मिल रहा है। अपने संबोधन के दौरान अर्चना सिंह ने युवाओं से सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने तथा अपने भविष्य को लेकर जागरूक भूमिका निभाने का आह्वान किया।

    अर्थव्यवस्था, वित्त और शिक्षा के अवसरों पर भी मंथन

    कार्यक्रम में अरुणेश सिंह ने अर्थशास्त्र, वित्त और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं के लिए मौजूद संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बदलती अर्थव्यवस्था के बीच युवाओं के सामने खुल रहे अवसरों और भविष्य की संभावनाओं को लेकर अपनी बात रखी। प्रो. राजेश कुमार गर्ग ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदेश की विकास प्रक्रिया में युवाओं की भूमिका केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार के रूप में भी महत्वपूर्ण है।

    धार्मिक पर्यटन और बदलते उत्तर प्रदेश पर हुई बात

    ‘UP Decade’ संवाद के दौरान उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के बढ़ते दायरे पर भी विशेष चर्चा की गई। प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत तथा उससे जुड़े पर्यटन के विकास को स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों से जोड़कर देखा गया। इसके साथ ही राज्य के सामाजिक-आर्थिक बदलाव और भविष्य में युवाओं के लिए बनने वाली संभावनाओं पर भी वक्ताओं ने विचार रखे।

    दो सत्रों में हुआ संवाद, युवाओं ने खुलकर पूछे सवाल

    पूरे कार्यक्रम को दो प्रमुख संवाद सत्रों में बांटा गया। पहले सत्र में आमंत्रित विशेषज्ञों और वक्ताओं ने अलग-अलग विषयों पर अपने विचार रखे। इसके बाद दूसरे सत्र को युवाओं के साथ प्रश्नोत्तर और खुले संवाद के लिए रखा गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने कानून-व्यवस्था, शिक्षा, रोजगार, अर्थव्यवस्था और प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सवाल पूछे। युवाओं ने अपने विचार और सुझाव भी विशेषज्ञों के सामने रखे। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसे केवल वक्ताओं के संबोधन तक सीमित रखने के बजाय युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर केंद्रित किया गया।

    युवाओं और विशेषज्ञों के बीच संवाद बढ़ाना उद्देश्य

    ‘फ्रेंड्स ऑफ यूपी’ के अनुसार ‘यूपी डायलॉग’ का उद्देश्य युवाओं को उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा से जोड़ने के साथ नीति, विकास और समाज से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक संवाद को आगे बढ़ाना है। इसके माध्यम से युवाओं, विशेषज्ञों और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

    आयोजकों का कहना है कि ‘यूपी डायलॉग’ को एक निरंतर संवाद श्रृंखला के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रयागराज में आयोजित ‘चैप्टर 2’ इसी कड़ी का हिस्सा रहा, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी के साथ उत्तर प्रदेश के बीते दशक, वर्तमान बदलावों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

  • बिहार में शिक्षा को वर्ल्ड क्लास बनाने की तैयारी, 100 शिक्षक जाएंगे विदेश, सरकार उठाएगी पूरा खर्च

    बिहार में शिक्षा को वर्ल्ड क्लास बनाने की तैयारी, 100 शिक्षक जाएंगे विदेश, सरकार उठाएगी पूरा खर्च

    पटना
    बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा ऐलान किया है। सीएम सम्राट चौधऱी ने कहा है कि राज्य के सहायक प्रोफेसर ऑक्सफोर्ड समेत विदेशों के अन्य मशहूर विश्विद्यालयों में ट्रेनिंग लेंगे। मुख्यमंत्री रविवार को बापू सभागार में 211 नये डिग्री कॉलेजों में नवनियुक्त शिक्षकों के उन्मुखीकरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि जबतक कॉलेज में आकर बच्चे पढ़ेंगे नहीं, तबतक इस संस्थान का महत्व नहीं होगा। कॉलेज में पढ़ने विद्यार्थी जरूर आयें, इसे सुनिश्चित करायें। 75 प्रतिशत न्यूनतम हाजिरी हो1ानी ही चाहिए। नहीं तो सरकार की बड़ी तैयारी सफल नहीं होगी। इसको लेकर हमारी टीम भी काम करेगी। उन्होंने कहा कि लाइव क्लासेज की भी व्यवस्था शुरू करें। यह भी कहा कि राज्य के डिग्री कॉलेजों में भी खुला विश्वविद्यालय की मान्यता सरकार देगी।

    इस मौके पर बिहार की शिक्षा व्यवस्था को वर्ल्ड क्लास बनाने को लेकर सीएम सम्राट चौधऱी ने बड़ा ऐलान किया। सीएम ने कहा कि 100 प्रोफेसरोों को ऑक्सफोर्ड समेत दुनिया के बड़े विश्वविद्यालयों में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। सबका खर्ज राज्य सराकर वहन करेगी। यह ट्रेनिंग एक महीने की होगी। सीएम सम्राट चौधऱी ने कहा कि बेहतर शिक्षा का सपना तब ही पूरा होगा जब हम अपनी तमाम चीजों को स्थापित करने का काम करेंगे। उसमें यह भी एक व्यवस्था है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की चीजों को हम कैसे इसमें जोड़ें। मैं जरूर कहूंगा कि 100 लोगों को चिन्हित करें जिनको ऑक्सफोर्ड में भेजकर वहां से भी कोर्स कराने का काम करें। तब तो हम दुनिया के मानक पर आ पाएंगे।

    सीएम ने आगे कहा कि दुनिया में जहां कहीं भी अच्छे संस्थान हैं वहां से जोड़ना हमारे बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन देगा। एक जमाना था जब हमने क्वालिटी के साथ क्वांटिटी को लेकर समझौता किया। बड़ी संख्या में लोग पढ़ने लगे। अब क्वालिटी औऱ क्वांटिटी दोनों ही साथ चलाना होगा। इसलिए दुनिया में जहां भी अच्छे यूनिवर्सिटी हैं। मैं शिक्षकों से आग्रह करूंगा कि अगर आप लोगों को लगता है कि दुनिया में कहीं कोई अच्छा संस्थान है तो उसका सुझाव विभाग को दें। वैसे 10 संस्थानों को हम चिन्हित करेंगे जिनसे सीधा संवाद कराने का काम बिहार सरकार अपने खर्च पर करेगी।

  • ऑटो-ई रिक्शा के मनमाने स्टॉपेज पर लगेगी रोक, पटना में शुरू होगी स्मार्ट ट्रैकिंग

    ऑटो-ई रिक्शा के मनमाने स्टॉपेज पर लगेगी रोक, पटना में शुरू होगी स्मार्ट ट्रैकिंग

    पटना
    अवैध पार्किंग की वजह से राजधानी में लगने वाले ट्रैफिक जाम पर नियंत्रण को ले अब तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इस तकनीक के मूल में यह है कि वाहन अगर सड़क पर वैसी जगह लगी दिखी, जहां पार्किंग निषिद्ध है, तो तुरंत एक स्वचालित अलर्ट संबंधित इलाके के नियंत्रण कक्ष को चला जाएगा। उक्त इलाके में ट्रैफिक नियंत्रण को तैनात पुलिसकर्मी को तुरंत नियंत्रण कक्ष संपर्क कर इस बारे में जवाब तलब करेगा।

    पार्किंग व स्टॉपेज आरंभ से ही बेमानी
    पटना में पार्किंग व स्टॉपेज आरंभ से ही बेमानी रही है। सिटी सर्विस की बसों के लिए मोटी राशि खर्च दो बार आधुनिक बस स्टॉपेज का निर्माण कराया गया, लेकिन इन स्टॉपेज पर बसें कभी नहीं रूकी। यात्रियों की सुविधा के नाम पर बसें जहां पैसेंजर दिखा वहां रुक जाती हैं। ट्रैफिक के दबाव से उनका कोई मतलब नहीं।

    ऑटो व ई रिक्शा चालकों ने अपनी इच्छा से बना लिए हैं स्टॉपेज
    पथ निर्माण विभाग ने जब केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के साथ राजधानी के जाम को नियंत्रित किए जाने की योजना पर काम आरंभ किया तो यह बात सामने आयी कि ऑटो व ई रिक्शा चालकों की वजह से समस्या अधिक है। इन लोगों ने अपनी इच्छा से शहर के कई जगहों पर स्टॉपेज बना लिया है।

    उन जगहों पर ट्रैफिक पुलिस और यहां तक कि अधिकारियों तक की तैनाती पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा। अब तकनीक का इस्तेमाल कर इस बड़ी समस्या को नियंत्रित करने की योजना पर काम होना है।

    यहां तक कि यह भी देखा जाना है कि जिस ट्रैफिक जवान की तैनाती संबंधित इलाके में है वह अपने जगह पर मौजूद है कि नहीं। इसे देखने के लिए भी तकनीक का इस्तेमाल किया जाना है।

    हर इलाके की ट्रैकिंग के लिए खास तरह की तकनीक
    हर इलाके में ट्रैफिक जाम की ट्रैकिंग के लिए खास तरह की तकनीक की व्यवस्था की जा रही है। संबंधित इलाके में ट्रैफिक जाम को नियंत्रित किए जाने काे ले पहले ही मैजिस्ट्रेट व डीएसपी स्तर के अधिकारी की तैनाती है। ट्रैकिंग की रिपोर्ट तुरंत उन्हें दी जाएगी। उन्होंने सूचना पर क्या किया इस पर भी तुरंत रिपोर्ट उपलब्ध होगी।

     

  • मुख्यमंत्री योगी ऊंचाहार में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कथा श्रवण करने पहुंचे

    मुख्यमंत्री योगी ऊंचाहार में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कथा श्रवण करने पहुंचे

     

     रायबरेली/ऊंचाहार
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब तक भारत की धरती पर पावन कथाओं की परंपरा चलती रहेगी, सनातन की ध्वजा-पताका कभी झुकने नहीं पाएगी। सनातन की पताका ऊंची रहेगी तो भारत का कोई बाल बांका नहीं कर पाएगा। शिव भक्ति भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का आधार है। हिमालय से लेकर रामेश्वरम तक भगवान शिव के पवित्र ज्योतिर्लिंग भारत की सांस्कृतिक एकता और एकात्मकता का दर्शन कराते हैं।
     
    मुख्यमंत्री रविवार को ऊंचाहार में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कथा श्रवण करने पहुंचे। कथा स्थल पर पहुंचते ही वेदपाठी बटुकों ने शंखनाद और डमरू की मंगल ध्वनि के बीच उनका स्वागत किया। प्रदेश सरकार के खाद्य, रसद एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री एवं ऊंचाहार विधायक मनोज पांडेय ने मुख्यमंत्री को शॉल, श्रीफल और कलश में गंगाजल भेंटकर उनका अभिनंदन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने व्यासपीठ को नमन किया और कथा व्यास पंडित प्रदीप मिश्रा का स्वागत एवं अभिनंदन किया। शिव महापुराण कथा का आयोजन कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय की ओर से किया गया है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सनातन परंपरा में जिसे ईश्वर की भक्ति प्राप्त हो गई, मानो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो गईं। अवध की धरती इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। रामायण में प्रभु की भक्ति हनुमान को मिली तो वे लोकपूज्य हो गए। आज भी प्रत्येक सनातन धर्मावलंबी हनुमान की पूजा और अनुष्ठान से जुड़कर स्वयं को धन्य महसूस करता है। शिव भक्ति भी मनुष्य को इसी प्रकार लोकमंगल और कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ाती है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में वेशभूषा, खान-पान और रहन-सहन अलग हो सकता है, लेकिन शिव के प्रति भक्ति का भाव एक है। तमिलनाडु के नागरिकों में शिव के प्रति जो भक्ति है, वही उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के श्रद्धालुओं में दिखाई देती है। पूर्वोत्तर से लेकर महाराष्ट्र और गुजरात तक यही भाव है। शिव के ज्योतिर्लिंग उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक भारत की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हैं।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भगवान शिव लोकमंगल के देवता हैं। लोक कल्याण के लिए वे विष को भी धारण कर लेते हैं। वे नकारात्मक शक्तियों को दूर करते हैं और समाज के विकारों को किनारे कर लोकमंगल का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यही सनातन धर्म की सबसे बड़ी पूंजी है। पावन कथाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए और समाज को ऐसे आयोजनों से जुड़ना चाहिए। इनसे मिलने वाली सकारात्मक ऊर्जा समाज और राष्ट्र दोनों को शक्ति प्रदान करती है।
     
    उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ने धर्म को केवल पूजा पद्धति तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे समाज की जीवन शक्ति, व्यक्ति के कर्तव्य और राष्ट्र की प्रेरक शक्ति के रूप में स्वीकार किया है। मध्यकाल में राजनीतिक कमजोरियों के कारण देश को विदेशी आक्रांताओं का सामना करना पड़ा। भारत के धर्मस्थलों और आस्था पर प्रहार हुए, लेकिन व्यासपीठों से निकली आध्यात्मिक धारा ने सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को कमजोर नहीं होने दिया।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने गोस्वामी तुलसीदास का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मध्यकाल में रामकथा के माध्यम से समाज को जोड़ने और उसकी चेतना जगाने का कार्य किया। उन्हें अकबर के दरबार में नवरत्न बनने का प्रस्ताव मिला, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि उनका राजा केवल राम हैं। उस कठिन कालखंड में रामलीलाओं और रामकथा के माध्यम से 'राजा रामचंद्र की जय' का उद्घोष समाज की चेतना जगाने वाला शंखनाद था। व्यासपीठों ने हर कालखंड में समाज को नई प्रेरणा देने के साथ राष्ट्र के उन्नयन की नींव मजबूत की है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में मर्यादा की बात होती है तो हम अयोध्या की ओर देखते हैं। चेतना की चर्चा होती है तो काशी, भक्ति की बात आती है तो मथुरा-वृंदावन और समरसता की चर्चा होती है तो प्रयागराज की ओर देखते हैं। नैमिषारण्य और शुकतीर्थ की धरती ने हजारों वर्ष पहले ज्ञान की उस परंपरा को आगे बढ़ाया, जिसे ऋषियों ने पुराणों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित किया।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कथा के आयोजन के लिए कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय और उनके परिवार को धन्यवाद दिया। कहा कि ऊंचाहार के लोग सौभाग्यशाली हैं कि उन्होंने ऐसे जनप्रतिनिधि को चुना है, जो क्षेत्र की विरासत को सुरक्षित रखने के साथ विकास को भी आगे बढ़ा रहे हैं। यहां विरासत और विकास दोनों की यात्रा एक साथ चल रही है और यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रहेगी।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कथा व्यास पंडित प्रदीप मिश्रा और उपस्थित श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी शिव महापुराण कथा के रस को अंगीकार कर अपने जीवन और जन्म को धन्य करें। उन्होंने 'नमः पार्वती पतये, हर-हर महादेव' के उद्घोष के साथ अपना संबोधन पूरा किया।

  • योगी सरकार की नीतियों से यूपी बना इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर हब, 43 हजार करोड़ का निवेश, 3 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर

    योगी सरकार की नीतियों से यूपी बना इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर हब, 43 हजार करोड़ का निवेश, 3 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर

    लखनऊ,

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पारंपरिक औद्योगिक विकास से आगे बढ़कर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डीप-टेक जैसे भविष्य के क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों, बेहतर कनेक्टिविटी और विशाल तकनीकी मानव संसाधन के दम पर प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत आधार तैयार हुआ है। राज्य में 200 से अधिक कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में काम कर रही हैं, जबकि इस सेक्टर में 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश और 3 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।

    प्रदेश की इस बढ़ती ताकत का सबसे बड़ा प्रमाण मोबाइल फोन निर्माण है। देश में निर्मित होने वाले 55 प्रतिशत से अधिक मोबाइल फोन का उत्पादन उत्तर प्रदेश में हो रहा है। इसके साथ ही गौतमबुद्ध नगर क्षेत्र में दो इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित हो चुके हैं। मोबाइल फोन के अलावा टैबलेट, लैपटॉप, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरण, सोलर सेल, डिफेंस एवं लॉजिस्टिक्स ड्रोन और रोबोटिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भी प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। 

    इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में यूपी की मजबूत पकड़
    योगी सरकार की नीतियों का असर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के बढ़ते दायरे में साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेश में 200 से अधिक कंपनियों की मौजूदगी ने एक व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम तैयार किया है। एलजी, हैयर, डिक्सन, रैपे, एडवर्ब, सैमसंग और भगवती जैसी प्रमुख कंपनियां इस इकोसिस्टम का हिस्सा हैं। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2025 भी निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। फैक्टशीट के अनुसार इस नीति के तहत अब तक 3800 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश आकर्षित हुए हैं। 

    सेमीकंडक्टर क्षेत्र में यूपी की बड़ी एंट्री

    इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की मजबूत नींव के बाद अब उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। केंद्र सरकार के सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम 2.0 में 1.27 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ भारत में मजबूत और लचीला सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने का लक्ष्य है। इस दिशा में उत्तर प्रदेश को भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला राज्य बताया जा चुका है। प्रदेश में केंद्र सरकार से स्वीकृत एक सेमीकंडक्टर एटीएमपी सुविधा मौजूद है। इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड की यह सुविधा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र के सेक्टर-28 में है और इसमें 3700 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो चुका है। 

    1 हजार एकड़ के सेमीकंडक्टर पार्क से नया औद्योगिक केंद्र

    यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में 1 हजार एकड़ का सेमीकंडक्टर पार्क प्रदेश की भविष्य की टेक्नोलॉजी आधारित औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहा है। इसके साथ ही एनएक्सपी, रेनेसास, क्वालकॉम, कैडेंस जैसी वैश्विक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम कंपनियों की मौजूदगी यूपी की बढ़ती क्षमता को दर्शा रहीं हैं। इससे प्रदेश में सेमीकंडक्टर निर्माण के साथ डिजाइन, पैकेजिंग, टेस्टिंग और इससे जुड़े अन्य उद्योगों के लिए भी संभावनाएं मजबूत हो रही हैं। 

    जेवर एयरपोर्ट और फ्रेट कॉरिडोर देंगे उद्योगों को रफ्तार
    टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों के विकास के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। उत्तर प्रदेश में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे नेटवर्क जैसे कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हैं। ग्रेटर नोएडा में 75 एकड़ का रोबोटिक्स एवं एआई कंप्यूटिंग पार्क भी इस तकनीकी इकोसिस्टम को नई दिशा दे रहा है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई और रोबोटिक्स आधारित उद्योगों को एक साथ विकसित करने का आधार मजबूत हो रहा है।

    आईटी और डेटा सेंटर में भी हजारों करोड़ का निवेश
    उत्तर प्रदेश का टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम केवल इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर तक सीमित नहीं है। आईटी पॉलिसी के तहत 7 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश दर्ज किया गया है। लखनऊ में 100 एकड़ की एचसीएल आईटी सिटी और प्रदेश में सात एसटीपीआई आईटी पार्क इस क्षेत्र के विस्तार को गति दे रहे हैं। डेटा सेंटर क्षेत्र में भी 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का उल्लेख फैक्टशीट में किया गया है। इससे प्रदेश में डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे का विस्तार हो रहा है। 

    24 हजार से अधिक स्टार्टअप, डीप-टेक पर भी जोर

    योगी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी तेजी से विस्तारित हुआ है। उत्तर प्रदेश में 24 हजार से अधिक डीपीआईआईटी पंजीकृत स्टार्टअप हैं। उत्तर प्रदेश स्टार्टअप पॉलिसी-2026 के साथ नोएडा और लखनऊ में यू-हब के माध्यम से डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। वहीं यूपी को डीपीआईआईटी स्टेट स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क-2024 में ‘टॉप परफॉर्मर’ का दर्जा भी मिला है। 

    युवा तकनीकी प्रतिभा बनेगी सबसे बड़ी ताकत

    सेमीकंडक्टर और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों के लिए केवल निवेश और जमीन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में प्रशिक्षित इंजीनियर, तकनीशियन, शोधकर्ता और इनोवेटर भी जरूरी हैं। इस मामले में उत्तर प्रदेश के पास देश के सबसे बड़े तकनीकी मानव संसाधन आधारों में से एक है। प्रदेश में 760 से अधिक कॉलेज हैं, जिनमें हर साल चार लाख से अधिक विद्यार्थी नामांकित होते हैं। आईआई कानपुर, आईआईटी बीएचयू और एनसीआर में स्थापित संस्थानों समेत तकनीकी संस्थानों का नेटवर्क प्रदेश को सेमीकंडक्टर और अन्य उभरती तकनीकों के लिए प्रतिभा उपलब्ध कराने में सक्षम बना रहा है। 

    वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की दिशा में टेक्नोलॉजी बनेगी आधार

    उत्तर प्रदेश की मौजूदा रणनीति इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, एआई, रोबोटिक्स और डीप-टेक को एक साथ जोड़कर तकनीक आधारित विकास का मॉडल तैयार करने पर केंद्रित है। राज्य की विशाल आबादी, युवा कार्यबल, इंजीनियरिंग एवं तकनीकी प्रतिभा, मजबूत औद्योगिक आधार और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर इसे बड़े निवेश के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बना रहे हैं।

  • ‘सपा सरकार में निषादों को गोली मारी गई, फर्जी मुकदमे हुए’, संजय निषाद का अखिलेश पर तीखा हमला

    ‘सपा सरकार में निषादों को गोली मारी गई, फर्जी मुकदमे हुए’, संजय निषाद का अखिलेश पर तीखा हमला

    लखनऊ

     गोंडा में बर्तन व्यवसायी विनोद साहनी हत्याकांड पर कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। संजय निषाद ने विपक्ष पर होनहार युवाओं को भड़काकर उनकी मौतों पर राजनीति करने का आरोप लगाया।

    दोषी सलाखों के पीछे, लेकिन असली गुनाहगार कोई और

    संजय निषाद ने घटना पर त्वरित कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार के जताते हुए कहा कि मामले के आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं और जांच के दायरे में आने वाले अन्य लोगों पर भी सख्त कार्रवाई होगी। इसके बाद सपा पर निशाना साधते हुए संजय निषाद ने कहा की एक होता है दोषी और दूसरा होता है गुनाहगार। दोषी तो वे हैं जिन्होंने अपराध किया और वे सलाखों के पीछे हैं। लेकिन असली गुनाहगार वे नेता हैं जो एक होनहार युवक को अपने पाले में लाते हैं, उससे भड़काऊ बातें लिखवाते हैं, और फिर उसकी मौत का इंतजार कर राजनीति चमकाते हैं। ऐसे नेताओं को शर्म आनी चाहिए। 

    इलाज कराने के बजाय मौत का इंतजार क्यों किया?
     
    संजय निषाद ने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पीड़ित गंभीर रूप से घायल था और विपक्षी नेता लखनऊ में बैठकें कर रहे थे तब उन्होंने उसका इलाज क्यों नहीं कराया। संजय निषाद ने बड़ा सवाल उठाते हुए कहा की जो महोदय उसे तोड़कर अपने साथ ले गए थे और उससे प्रचार करवा रहे थे, वे दूसरे दिन लखनऊ की मीटिंग में मौजूद थे। फिर वे घायल को अस्पताल ले जाने के बजाय किसका इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब मुझे पता चला तो मैं दिल्ली से आया लेकिन वो लोग इंतज़ार में थे।  

    अखिलेश यादव द्वारा मंत्री पद पर रहते हुए अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने के तंज पर संजय निषाद ने दोटूक जवाब दिया। संजय निषाद ने कहा की हमेशा अपने समाज के साथ खड़ा रहूंगा। आज मेरा समाज जहां है, मैं वहां रहूंगा वो धरने पर है तो मै भी रहूंगा, वो दुखी तो हमें भी दुख होगा। 

    सपा सरकार में निषाद समाज पर गोलियां चलवाई गई थी

    सपा सरकार के पुराने कार्यकाल की याद दिलाते हुए संजय निषाद ने कहा कि सपा के समय निषाद समाज के आंदोलनों को कुचलने के लिए गोलियां चलवाई गईं, बेकसूरों पर धारा 302 के मुकदमे दर्ज किए गए और सिर्फ निषाद होने के कारण 37 से अधिक लोगों को बेरहमी से पीटा गया था, क्या अखिलेश यादव भूल गए। 

    युवाओं के दिमाग में जहर घोल रहा है विपक्ष
     
    संजय निषाद ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि देश में अपनी बात रखने का तरीका लोकतांत्रिक और संवैधानिक है। असली ताकत वोट की चोट में है। मंत्री ने बड़ा आरोप लगाया कि विपक्ष के लोग जानबूझकर समाज के होनहार बच्चों के दिमाग में जहर घोल रहे हैं और उन्हें आंदोलन की आग में झोंक रहे हैं केवल अपने फायदे के लिए।  

    योगी सरकार में अपराध पर जीरो टॉलरेंस

    अखिलेश यादव द्वारा सरकार पर लगाए गए कमीशनखोरी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने साफतौर पर कहा कि योगी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करती है। उन्होंने कहा कि सपा-बसपा और कांग्रेस के राज में अपराधियों को सरकारी संरक्षण मिलता था, जबकि आज पुख्ता सबूतों के आधार पर दोषियों को जेल भेजा जाता है। अगर विपक्षी दलों की व्यवस्था इतनी ही साफ-सुथरी थी, तो जनता ने उन्हें सत्ता से उखाड़ क्यों फेंका।

  • खनन क्षेत्र में बिहार का बड़ा प्लान, आधुनिक तकनीक और पारदर्शी नीलामी से बढ़ेगा निवेश व राजस्व

    खनन क्षेत्र में बिहार का बड़ा प्लान, आधुनिक तकनीक और पारदर्शी नीलामी से बढ़ेगा निवेश व राजस्व

     पटना
     बिहार में खनिज संसाधनों की खोज और उनके व्यवस्थित दोहन की दिशा में खान एवं भूतत्व विभाग ने पहल तेज कर दी है।

    केंद्र सरकार के सहयोग से खनन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, बेहतर खनिज अन्वेषण और पारदर्शी नीलामी व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी है।

    इसके जरिए राज्य में मौजूद खनिज संसाधनों की संभावनाओं को चिह्नित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

    विशेष बैठक का एजेंडा तैयार
    सरकार ने खनिज खोज को गति देने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) के पदाधिकारियों के साथ विशेष बैठक का मसौदा तैयार किया है।

    खान एवं भू-तत्व विभाग के अनुसार राज्य में उपलब्ध खनिज संसाधनों की संभावनाओं का वैज्ञानिक तरीके से आकलन करने और नए क्षेत्रों में अन्वेषण गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए जीआइएस अधिकारियों से बैठक की तिथि जल्द घोषित होगी।

    प्रस्तावित बैठक में खनिजों की उपलब्धता, गुणवत्ता और भंडार की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी। उद्देश्य ऐसे संभावित क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां अभी तक खनिज संसाधनों का पर्याप्त अन्वेषण नहीं हो सका है।

    अन्वेषण के बाद उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर खनिज ब्लाकों को विकसित करने और नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की योजना है।
    बड़े खनिज ब्लाकों की ई-नीलामी पर जोर

    बिहार में वृहद खनिजों के खनिज ब्लाकों की ई-नीलामी को और पारदर्शी बनाने के लिए यूनिफाइड माइनिंग पोर्टल के इस्तेमाल पर भी विस्तार से विचार किया जा रहा है।

    पोर्टल के माध्यम से नीलामी प्रक्रिया को एकीकृत और तकनीक आधारित बनाने का प्रयास है। इससे नीलामी में अधिक प्रतिस्पर्धा आने के साथ प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता बेहतर होने की उम्मीद है।

    खान एवं भू-तत्वि विभाग के मंत्री डाॅ. प्रमोद कुमार के अनुसार वैज्ञानिक अन्वेषण, तकनीक के इस्तेमाल और पारदर्शी ई-नीलामी को साथ लेकर चलने से खनन क्षेत्र में निवेश और राजस्व बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

  • प्रदेश की 90 प्रतिशत आपराधिक घटनाओं में सामने आता है सपा कनेक्शन : अनिल राजभर

    प्रदेश की 90 प्रतिशत आपराधिक घटनाओं में सामने आता है सपा कनेक्शन : अनिल राजभर

     लखनऊ
    जौनपुर में विशाल यादव की हत्या को लेकर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कहीं भी अपराध की घटना होती है तो 90 प्रतिशत मामलों में कहीं न कहीं समाजवादी पार्टी का कनेक्शन सामने आता है। विशाल यादव हत्याकांड में भी पीड़ित परिवार ने स्थानीय सपा विधायक के खिलाफ गंभीर शिकायत की है। सरकार पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
     
    कैबिनेट मंत्री ने कहा कि अपराध और अपराधियों को संरक्षण देने वालों के खिलाफ सरकार की नीति स्पष्ट है। ऐसे मामलों में कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जो भविष्य के लिए नजीर बने। विशाल यादव के परिजनों ने जो आरोप लगाए हैं, उनकी भी गंभीरता से जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार जब तक कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाता, तब तक सरकार की कार्रवाई नहीं रुकेगी।
     
    उल्लेखनीय है कि 11 सितंबर को जौनपुर के तिवारीपुर निवासी विशाल यादव उर्फ बिच्छी सैलून से बाल कटवाकर घर लौट रहा था। इसी दौरान अराजक तत्वों ने उस पर लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण विशाल की मौत हो गई। घटना से आक्रोशित परिजनों ने शव जौनपुर-मिर्जापुर हाईवे पर रखकर प्रदर्शन किया था।
     
    विशाल की मां मालती देवी और अन्य परिजनों ने स्थानीय सपा विधायक लकी यादव पर आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। मामले में 28 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। विशाल गुजरात में ट्रेलर चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था।