Category: राज्य

  • 15 सितंबर से बदली जिम्मेदारियां, बड़े अधिकारियों के अवकाश के बीच अतिरिक्त प्रभार तय

    15 सितंबर से बदली जिम्मेदारियां, बड़े अधिकारियों के अवकाश के बीच अतिरिक्त प्रभार तय

    पटना 
    बिहार के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में 15 सितंबर 2026 से कई अहम पदों की जिम्मेदारियों में अस्थायी बदलाव हुआ है. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई, बिहार के डीजीपी विनय कुमार और बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) के अध्यक्ष केएस द्विवेदी अलग-अलग अवधि के लिए अवकाश पर हैं. इन अधिकारियों की अनुपस्थिति में संबंधित पदों पर अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था की गयी है.

    BPSC अध्यक्ष रवि परमार 9 अक्टूबर तक छुट्टी पर

    BPSC अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई 15 सितंबर से 9 अक्टूबर 2026 तक अवकाश पर रहेंगे. उनकी अनुपस्थिति में राजस्व पर्षद की अध्यक्ष-सह-सदस्य हरजोत कौर बम्हरा को BPSC अध्यक्ष पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. हरजोत कौर 1992 बैच की IAS अधिकारी हैं और वर्तमान में राजस्व पर्षद की अध्यक्ष-सह-सदस्य के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं.

    BPSC की जिम्मेदारी संभालने के दौरान उनके सामने आयोग के नियमित प्रशासनिक कामकाज के साथ भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी.

    पहले क्या जिम्मेदारी संभाल रहे थे रवि परमार

    परमार रवि मनुभाई वर्तमान में बिहार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष हैं. BPSC अध्यक्ष के रूप में आयोग की भर्ती परीक्षाओं, परीक्षा प्रक्रिया और आयोग के प्रशासनिक कामकाज से जुड़े प्रमुख निर्णयों की जिम्मेदारी उनके पास रही है. उनके अवकाश के दौरान यह जिम्मेदारी हरजोत कौर बम्हरा संभालेंगी.

    DGP विनय कुमार भी अवकाश पर

    बिहार के DGP विनय कुमार भी 15 सितंबर से 21 दिनों के अवकाश पर गये हैं. उनकी अनुपस्थिति में प्रीता वर्मा को पुलिस महानिदेशक पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. प्रीता वर्मा वर्तमान में होमगार्ड एवं अग्निशमन सेवा से जुड़ी वरिष्ठ जिम्मेदारी संभाल रही हैं.

    अतिरिक्त प्रभार के दौरान प्रीता वर्मा पुलिस मुख्यालय से जुड़े नियमित प्रशासनिक और विभागीय कामकाज की निगरानी करेंगी. यह व्यवस्था विनय कुमार के अवकाश से लौटने तक रहेगी.

    BPSSC अध्यक्ष केएस द्विवेदी भी छुट्टी पर

    बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) के अध्यक्ष केएस द्विवेदी भी करीब एक महीने के अवकाश पर हैं. ताजा रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने पारिवारिक कारणों से छुट्टी ली है. उनकी अनुपस्थिति भी ऐसे समय हुई है, जब पुलिस भर्ती से जुड़ी प्रक्रियाएं आयोग के स्तर पर चल रही हैं.

    भर्ती परीक्षाओं के बीच बदली जिम्मेदारियां

    BPSC और BPSSC दोनों आयोग राज्य में विभिन्न सरकारी पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाओं का आयोजन करते हैं. ऐसे समय में शीर्ष पदों पर अस्थायी जिम्मेदारी में बदलाव हुआ है. BPSC अध्यक्ष के अवकाश के दौरान हरजोत कौर बम्हरा आयोग का कामकाज देखेंगी, जबकि DGP के अवकाश के दौरान प्रीता वर्मा पुलिस विभाग की कमान संभालेंगी.
    अधिकारियों का अवकाश निर्धारित अवधि के लिए है. उपलब्ध रिपोर्टों में इन छुट्टियों को नियमित अवकाश के तौर पर बताया गया है; इसलिए इसे अधिकारियों के पद से हटाये जाने या किसी प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा.

     

  • UP की मेधावी बेटियों को बड़ा तोहफा, 40 हजार छात्राओं को मुफ्त स्कूटी के साथ हेलमेट-पेट्रोल भी

    UP की मेधावी बेटियों को बड़ा तोहफा, 40 हजार छात्राओं को मुफ्त स्कूटी के साथ हेलमेट-पेट्रोल भी

    लखनऊ
    यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले 40 हजार मेधावी छात्राओं के हाथ में स्कूटी की चाबी सौंपी जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से स्कूटी की खरीद के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। जनवरी में स्नातक की मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी वितरित की जाएगी। मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी वितरण के लिए विश्वविद्यालयों के स्तर पर भी तैयारियां तेज कर दी गई है। शैक्षिक सत्र 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण करने वाली छात्राओं में से टॉप पांच प्रतिशत की मेरिट जारी कर उनसे डाक्युमेंट लिए जा रहे हैं।

    रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2025-26 में यूपी की मूल निवासी उन मेधावी छात्राओं को लाभ मिलेगा, जिन्होंने प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों तथा राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध राजकीय, एडेड व निजी डिग्री कॉलेजों से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। यही नहीं उनके परिवार की सालाना आय 12 लाख रुपये तक होगी।

    उच्च शिक्षा विभाग की ओर से योजना के तहत पात्र छात्राओं को स्कूटी उपलब्ध कराने की बिड प्रकाशित की गई है। जिसका मूल्य करीब 320 करोड़ रुपये है। उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से 21 सितंबर को ऑनलाइन प्री बिड बैठक भी होगी। फिर आगे की प्रक्रिया पूरी कर जनवरी तक स्कूटी वितरण करेगा।

    दूसरी ओर विश्वविद्यालयों में अपने व संबद्ध महाविद्यालयों के डाटा एकत्र कर मेरिट के आधार पर स्नातक उत्तीर्ण टॉप पांच प्रतिशत छात्राओं की सूची तैयार की गई है। इसके अनुसार छात्राओं का आधार, निवास व आय प्रमाण पत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज भी लेकर पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। उच्च शिक्षा निदेशालय, जिला प्रशासन के सहयोग से इनका सत्यापन कराएगा।

    इन छात्राओं को मिलेगी स्कूटी
    योजना के अंतर्गत सरकारी विश्वविद्यलयों, निजी विश्वविद्यालयों, इन विश्वविद्यलयों से जुड़े कॉलेज, एडेड कॉलेज, स्ववित्त पोषित कॉलेज सभी को रखा गया है। इन संस्थान से पिछले साल यानी 2025-26 में ग्रेजुएशन करने वाली टॉप पांच प्रतिशत छात्राओं को स्कूटी मिलेगी। छात्राओं को यूपी का निवासी होना भी जरूरी किया गया है। छात्राओं की पारिवारिक आय 12 लाख रुपए तक होनी चाहिए। केवल निराश्रित, दिव्यांग और शहीद परिवारों की बेटियों की मेरिट नहीं देखी जाएगी। उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्कूटी दी जाएगी।

    रजिस्ट्रेशन और बीमा भी सरकार कराकर देगी
    सरकार की तरफ से स्कूटी के साथ ही आईएसआई मार्का वाला हेलमेट, एसेसरीज, पांच लीटर पेट्रोल भी मिलेगा। आरटीओ में रजिस्ट्रेशन और बीमा भी सरकार ही कराकर देगी। यानी स्कूटी हासिल करने वाली किसी छात्रा को कोई खर्च नहीं करना होगा।

  • राजस्थान में नशे के कारोबार पर बड़ा एक्शन, 730 करोड़ की ड्रग्स जब्त; 93 ड्रग किंगपिन गिरफ्तार

    राजस्थान में नशे के कारोबार पर बड़ा एक्शन, 730 करोड़ की ड्रग्स जब्त; 93 ड्रग किंगपिन गिरफ्तार

    सीकर
    राजस्थान में नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए अब तीन साल की नई रणनीति तैयार होगी। अफीम, डोडा-पोस्त और एमडी की जब्ती में देश में पहले स्थान पर पहुंचे प्रदेश में सरकार नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29 तैयार कर रही है।

    नारकोटिक्स विभाग का पूरा ध्यान मादक पदार्थ पकड़ने और तस्करों को गिरफ्तार करने तक नहीं रहेगा, विभाग की ओर से सिंथेटिक ड्रग के निर्माण, उसकी सप्लाई चेन, ड्रग की मांग कम करने और नशे की चपेट में आए लोगों को इलाज व पुनर्वास से जोड़ने पर भी रहेगा।

    प्रदेश में एक साल में अब तक करीब 730 करोड़ रुपए के मादक पदार्थ जब्त हो चुके हैं। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 93 ड्रग किंगपिन ( अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी के बड़े नेटवर्क और संगठनों का मालिक या संचालक) गिरफ्तार किए हैं और एमडी ड्रग बनाने वाली 34 फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया है।

    5,626 केस दर्ज, अब दोहराने वाले अपराधियों पर भी नजर
    मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत अब तक 5,626 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। बार-बार अपराध करने वाले आरोपियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ पीआईटी एनडीपीएस एक्ट ( प्रिवेंशन ऑफ इललिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट 1988 ) के तहत कार्रवाई की जा रही है।

    प्रदेश में 73 करोड़ 64 लाख 64 हजार 948 रुपए की चल-अचल संपत्तियां कुर्क, फ्रीज और सीज की गई हैं। कार्रवाई में मकान, दुकान, कृषि भूमि, आवासीय भूखंड और कार, पिकअप, ट्रैक्टर व मोटरसाइकिल सहित विभिन्न संपत्तियां शामिल हैं। चित्तौड़गढ़ में 20.35 करोड़, बारां में 18.48 करोड़, झालावाड़ में 12.65 करोड़ और प्रतापगढ़ में 8.24 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर कार्रवाई हुई है। नागौर, जोधपुर ग्रामीण व हनुमानगढ़ में भी 3.05 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की गई हैं।

    चार मोर्चों पर चलेगा अभियान
    नए विजन में ड्रग के खिलाफ कार्रवाई को चार प्रमुख हिस्सों में रखा जाएगा। इसमें प्रवर्तन, आसूचना एवं अभियान, प्रिकर्सर व सिंथेटिक ड्रग नियंत्रण, मांग एवं हानि न्यूनीकरण,क्षमता निर्माण, समन्वय एवं निगरानी शामिल हैं। खासतौर पर एमडी (मेथिलीन डाइऑक्सी मेथैम्फेटामाइन) जैसी सिंथेटिक ड्रग के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रिकर्सर पदार्थों की निगरानी बढ़ाई जाएगी।

    इसके लिए प्रदेश के 12 सर्वाधिक संवेदनशील जिलों को विशेष निगरानी में रखा गया है। इन जिलों में नशामुक्ति शिविर लगाए जा रहे हैं और ड्रग हॉटस्पॉट पर निगरानी मजबूत की जा रही है। वहीं, शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर के दायरे को ड्रग-फ्री बनाने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है।

    ड्रग पकड़ने के बाद वैज्ञानिक जांच जरूरी
    मादक पदार्थों के मामलों में फॉरेंसिक जांच को भी मजबूत किया जाएगा। ड्रग की पहचान, उसके स्रोत और नेटवर्क तक पहुंचने में वैज्ञानिक जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य और जिला स्तर पर नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनकार्ड) की नियमित बैठकें कर पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग सहित संबंधित विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाया जाएगा।

    इनका कहना है
    पुलिस की कार्रवाई केवल एक मामले में गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, ड्रग के कारोबार में लगातार सक्रिय रहने वालों पर लंबी अवधि तक शिकंजा कसा जाएगा।नशे का कारोबार करने वाले मुख्य सप्लायर और तस्करी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अभियान चलाकर नशे का उपभोग करने वालों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरुक किया जाएगा।

  • बाढ़ नुकसान का आकलन करने बिहार पहुंची केंद्रीय टीम, हाजीपुर में ट्रैक्टर से लिया जायजा

    बाढ़ नुकसान का आकलन करने बिहार पहुंची केंद्रीय टीम, हाजीपुर में ट्रैक्टर से लिया जायजा

    हाजीपुर
    बिहार में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक टीम बिहार पहुंची. इस दौरान यह देखा गया कि हाजीपुर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्र की टीम के अन्य सदस्य ट्रैक्टर पर सवार होकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के लिए निकल पड़े.

    शिवराज सिंह चौहान ने क्या कहा?

    बिहार में बाढ़ को लेकर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, जो कुछ भी बाढ़ की वजह से नुकसान हुआ है, उसे लेकर केंद्र सरकार सहायता करेगी. साथ ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, बाढ़ प्रभावित इलाकों में रह रहे लोगों की मदद कैसे की जाए, इस पर लगातार चर्चा की जा रही है. फसल और सड़क की स्थिति को देखा गया है और लगातार मुआयना किया जा रहा है. दूसरे जिलों में भी जायजा लेने के लिए जायेंगे.

    निरीक्षण के बाद की जाएगी समीक्षा-बैठक

    इस दौरान मीडिया के सामने सीएम सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि, बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के बाद समीक्षा बैठक की जाएगी. राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता शुरू कर दिया गया है. साथ ही उन्होंने पीएम मोदी को केंद्र की विशेष टीम को बिहार भेजने के लिए धन्यवाद कहा. अन्य टीम भी बिहार में आयेंगे. बाढ़ का आकलन करेंगे और जो सहायता होगी, वह की जाएगी.

    बिहार के 15 जिलों के 49.74 लाख लोग प्रभावित

    बिहार में अलग-अलग नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार राज्य के 15 जिलों पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बक्सर, समस्तीपुर, खगड़िया, बेगूसराय, दरभंगा, अररिया, पूर्णिया,मधेपुरा और कटिहार के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतों में 49.74 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है. सरकार की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य लगातार चलाए जा रहे हैं.

    खतरे के निशान से ऊपर नदियां

    केंद्रीय जल आयोग से प्राप्त सूचना के मुताबिक गंडक नदी मुजफ्फरपुर के डुमरिया घाट, कोसी खगड़िया के बलतारा और कुरसेला, जबकि गंगा गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर और कहलगांव में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. पुनपुन नदी श्रीपालपुर में और बागमती नदी बेनीबाद और सोनाखान में खतरे के निशान से ऊपर है.

     

  • जमीन की रजिस्ट्री के बाद भी नहीं हो रहा इंतकाल, पोर्टल की खामियों से रिकॉर्ड में गड़बड़ी

    जमीन की रजिस्ट्री के बाद भी नहीं हो रहा इंतकाल, पोर्टल की खामियों से रिकॉर्ड में गड़बड़ी

    कैथल
    प्रदेश के रेवेन्यू पोर्टल में आ रही तकनीकी कमी के कारण पूरे जमीन के 2,38,688 इंतकाल (म्यूटेशन) लंबित हैं। सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री के बाद 11वें दिन अपने आप इंतकाल दर्ज होने वाली ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था शुरू की थी, ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

    इस व्यवस्था में सुधार लाने और साफ्टवेयर की कमियों को दूर करने के लिए प्रदेशभर के पटवारी और कानूनगो भी विरोध जता चुके हैं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। रजिस्ट्री होने के बाद भी इंतकाल सिस्टम में उलझे है।

    प्रदेश में 2,07,560 इंतकाल पटवारियों की ओर से लंबित है। इनके अलावा 10,537 कानूनगो की तरफ से लंबित है। पटवारियों का तर्क है कि मंजूर करने के बाद भी लंबित दिखाई दे रहे हैं।

    इंतकाल नहीं हो रहा दर्ज: महेंद्र
    पट्टी अफगान के महेंद्र ने बताया कि दो माह पहले उसकी रजिस्ट्री हो गई थी, लेकिन अब इंतकाल नहीं हो रहा है। रकबा गलत उठा रहा है। इसकी कारण उसका इंतकाल नहीं हो रहा है। सोमवार को पूरा दिन पोर्टल नहीं चला, मंगलवार को पोर्टल तो चला, लेकिन गलत रकबा उठाने के कारण उसका इंतकाल नहीं हो रहा है।

    इंतकाल पौने एकड़ का दिखाया: वीरभान चौधरी
    पट्टी के वीरभान ने बताया कि उसके मां के नाम जमीन ली थी। उन्होंने एक एकड़ जमीन की खरीद की थी, लेकिन इंतकाल में पौना एकड़ दिखा रहा है।

    पटवारी का कहना है कि पोर्टल की खामियों के कारण ऐसा हो रहा है। वह एक माह से पटवारखाने के चक्कर लगा रहा है। राजस्व विभाग को इसके लिए कोई व्यवस्था करनी चाहिए। दी रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के जिला प्रधान सुरेंद्र खटकड़ ने बताया कि साफ्टवेयर अब भी कुछ खामिया बची है, इसमें सुधार किया जा रहा है।सबसे ज्यादा दिक्कत पुराने इंतकाल वापस हो रहे हैं, रकबा गलत दिखा रहा है।

    जानिये, जिलों की स्थिति
    सोनीपत में 17,486 इंतकाल लंबित हैं। इसी तरह अंबाला में 14,486,भिवानी में 10,879, चरखी-दादरी में 5215, फरीदाबाद में 13,786, फतेहाबाद में 7663, गुरुग्राम में 12,603, हांसी में 5837, हिसार में 8484, झज्जर में 12,528, जींद में 13,856, कैथल में 10,255, करनाल में 9397, कुरुक्षेत्र में 10,461, महेंद्रगढ़ में 6826, नूंह में 9196, पलवल में 13,000, पंचकूला में 4225, पानीपत में 14,486, रेवाड़ी में 12,510, रोहतक में 7825 और सिरसा में 9574 इंतकाल लंबित हैं।

    असली मालिकों के नाम गायब
    कई इंतकालों में प्रिंट निकालने पर वे खाली आ रहा हैं या रजिस्ट्री में दर्ज जमीन की मात्रा कम दिखाई दे रही है। साफ्टवेयर के झोल के कारण कुछ जमीनों के रिकार्ड से असली मालिकों के नाम ही गायब हो गए हैं।

    पुराने इंतकाल वापस हो रहे हैं। पटवारी मंजूर करता है तो, एक खेवट में एक इंतकाल है। लोगों ने बताया कि सोमवार को पूरा दिन साइट नहीं चली। इस कारण इंतकाल में हिस्से गलत हो रहे हैं। नए साफ्टवेयर में दस पेज की कमांड देते है तो दो पेज का रिकार्ड मिलता है, रिकार्ड अधूरा मिल रहा है।

     

  • देश में पहली बार झारखंड में लागू होगा नया स्वास्थ्य मॉडल, 5 राष्ट्रीय कार्यक्रम होंगे एक साथ

    देश में पहली बार झारखंड में लागू होगा नया स्वास्थ्य मॉडल, 5 राष्ट्रीय कार्यक्रम होंगे एक साथ

    रांची
    झारखंड में कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी बीमारियों से निपटने के लिए अब अलग-अलग योजनाओं की जगह एकीकृत व्यवस्था के तहत उपचार और रोकथाम की पहल होगी. राज्य सरकार की ओर से तैयार एकीकृत मॉडल को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही झारखंड देश में इस मॉडल को लागू करने वाला पहला राज्य बनने जा रहा है.

    समय पर पहचान, जांच और रोकथाम पर रहेगा जोर
    नयी व्यवस्था में बीमारी होने के बाद इलाज के साथ उसकी समय पर पहचान, जांच और रोकथाम पर विशेष जोर रहेगा.

    नयी दिल्ली के कर्तव्य भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अपर सचिव सह मिशन निदेशक आराधना पटनायक ने मॉडल को मंजूरी देते हुए झारखंड में इसे लागू करने का निर्देश दिया.

    पहले चरण में होगी राज्य स्तरीय कार्यशाला
    पहले चरण में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित होगी. इसमें स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ, तकनीकी संस्थान और संबंधित प्रतिनिधि शामिल होंगे. सफल क्रियान्वयन के बाद मॉडल का मूल्यांकन कर इसे देशभर में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ाया जायेगा.

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एनसीडी प्रभाग के डीडीजी डॉ एल स्वास्तिचरण ने मॉडल की रूपरेखा और तकनीकी व्यवस्था के बारे में जानकारी दी.

    निजी संस्थाओं को भी जोड़ा जायेगा
    सरकारी व्यवस्था के साथ ही इसमें जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सार्वजनिक उपक्रमों को भी अभियान से जोड़ने की तैयारी है. इसका उद्देश्य खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता की पहुंच को बढ़ाना है.

    पांच योजनाएं होंगी एक साथ
    नयी व्यवस्था में पांच प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों को साथ लाने की योजना है. इनमें एनपी-एनसीडी, राष्ट्रीय मुख स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय उपशामक देखभाल कार्यक्रम और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम शामिल है.

    मरीजों को सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा
    मरीजों को नये मॉडल में अलग-अलग योजनाओं और सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. शुरुआती जांच, इलाज, रेफरल और निगरानी को एक व्यवस्था से जोड़ा जायेगा. मरीजों को अलग-अलग सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, तंबाकू सेवन और मानसिक स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ा जायेगा. कैंसर की शुरुआती पहचान पर विशेष जोर होगा.

  • बीआइटी सिंदरी के हैकाथॉन में 45 टीमें अगले चरण के लिए होंगी चयनित

    बीआइटी सिंदरी के हैकाथॉन में 45 टीमें अगले चरण के लिए होंगी चयनित

    धनबाद
    धनबाद हैकाथॉन एंड कोडिंग क्लब (एचएनसीसी), बीआइटी सिंदरी ने इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल (आइआइसी 9.0) के सहयोग से 15 सितंबर को स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन (एसआइएच) 2026 के लिए आंतरिक हैकाथॉन का आयोजन किया. इसमें 105 टीमों के कुल 648 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया. प्रतिभागियों में 184 छात्राएं और 464 छात्र शामिल रहे. आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं के तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए मंच उपलब्ध कराना था.

    आंतरिक हैकाथॉन में प्रथम वर्ष से लेकर अंतिम वर्ष तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया. प्रतिभागियों ने सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर से जुड़े विभिन्न समस्या विवरणों पर काम करते हुए अपने विचार और तकनीकी समाधान प्रस्तुत किये.

    ‘स्वदेशी फॉर आत्मनिर्भर भारत’ रही केंद्रीय थीम

    इस वर्ष के आयोजन की केंद्रीय थीम “स्वदेशी फॉर आत्मनिर्भर भारत” रही. इसके तहत विद्यार्थियों ने विभिन्न तकनीकी समस्याओं पर काम किया. टीमों ने रचनात्मकता, तकनीकी ज्ञान और समस्या-समाधान क्षमता का इस्तेमाल करते हुए अपने प्रोजेक्ट तैयार किये.

    आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को टीमवर्क के साथ वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान विकसित करने का अवसर मिला. संस्थान के अनुसार, इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों में नवाचार और तकनीकी प्रयोग की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है.

    अनुभवी मार्गदर्शकों ने किया सहयोग

    कार्यक्रम का आयोजन डॉ. ख़ुश्तर अंसारी, प्रोफेसर-इन-चार्ज, एचएनसीसी एवं एसपीओसी, एसआइएच 2026, बीआइटी सिंदरी के मार्गदर्शन में किया गया. आयोजन टीम और मार्गदर्शकों में डॉ. एससी दत्ता, डॉ. राहुल कुमार, विजय कुमार बेसरा, जितेंद्र कुमार, विकास कुमार सिंह, डॉ. मुकेश चंद्र, संजय पाल, डॉ. प्रवीण कुमार साहू, इज़हार हुसैन और डॉ. सुमित कुमार शर्मा शामिल रहे.

    मार्गदर्शकों ने प्रतिभागी टीमों को समस्या की पहचान, समाधान की रूपरेखा और तकनीकी प्रस्तुति से जुड़े पहलुओं पर सहयोग दिया.

    45 टीमों का अगले चरण के लिए चयन

    बीआइटी सिंदरी के निदेशक प्रो. पंकज राय कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे. वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी बीडी यादव भी उपस्थित रहे. उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और नवाचार आधारित गतिविधियों में विद्यार्थियों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया.

    आंतरिक हैकाथॉन के प्रदर्शन के आधार पर 45 टीमों का एसआइएच 2026 के अगले चरण के लिए चयन किया जायेगा, जबकि पांच टीमों को प्रतीक्षा सूची में रखा जायेगा. चयनित टीमों को एसआइएच पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसके बाद वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के अगले चरण में बीआइटी सिंदरी का प्रतिनिधित्व करेंगी.

    संस्थान के इस आयोजन में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी से परिसर में नवाचार, कोडिंग, तकनीकी प्रयोग और टीम आधारित समस्या-समाधान को लेकर सक्रियता देखने को मिली.

     

  • UP Teacher Recruitment: 15 हजार से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती की तैयारी, चयन आयोग ने दी जानकारी

    UP Teacher Recruitment: 15 हजार से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती की तैयारी, चयन आयोग ने दी जानकारी

    प्रयागराज

     नौकरी के इंतजार में बैठे अभ्यर्थियों को लिए राहत भरी खबर है। यूपी में जल्द ही शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 15,000 से अधिक शिक्षक पदों पर भर्ती की घोषणा की है। आयोग ने मंगलवार शाम भर्ती से जुड़े दो विज्ञापन जारी किए। इसके साथ ही सहायक अध्यापक और प्रवक्ता (पीजीटी) के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सहायक अध्यापक भर्ती के तहत कुल 12,405 पदों पर ऑनलाइन भर्ती की जाएगी।

    इसमें माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक अध्यापक (अशासकीय सहायता प्राप्त) के 897 पद और जहां बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक अध्यापक (शहरी) के 11,508 पद शामिल हैं। वहीं, प्रवक्ता संवर्ग भर्ती के तहत प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 2,607 रिक्त पदों पर विज्ञापन जारी किया गया है।

    तीन और चार दिसंबर को होगी परीक्षा
    सहायक अध्यापक भर्ती भी ऑनलाइन पंजीकरण और आवेदन बुधवार से शुरू हो जायेंगे। वहीं शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर रहेगी और आवेदन में संशोधन करने की अंतिम तिथि 19 अक्टूबर तक रहेगी और परीक्षा तिथि तीन और चार दिसंबर होंगी और पीजीटी की ऑनलाइन पंजीकरण 18 सितंबर से शुरू होगा और शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर रहेगी। आवेदन में संशोधन 21 अक्टूबर तक किया जाएगा और परीक्षा तिथि: 15 और 16 दिसंबर रहेगी।

    अभ्यर्थियों के लिए आरटीआर व्यवस्था लागू
    आयोग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन करने वाले सभी अभ्यर्थियों के लिए वन टाइम रजिस्ट्रेशन (आटीआर) व्यवस्था लागू की गई है। यह प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। विस्तृत विज्ञापन और निर्देश पुस्तिका के लिए अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा की इस भर्ती में प्रदेश के शिक्षामित्रों को कोई वेटेज या वरीयता का जिक्र नहीं है। जबकि, 25 जुलाई 2017 को उच्चतम न्यायालय के निर्णय में शिक्षामित्रों को समान्य शिक्षक भर्तियों में वरीयता देने के निर्देश हैं। राज्य सरकार को विचार करते हुए 26 सालों से सेवा दे रहे शिक्षामित्रों को इस भर्ती में वेटेज देना चाहिए।

  • भूमि रिकॉर्ड सुधारने के लिए बिहार में अभियान शुरू, मृत जमाबंदीदारों के उत्तराधिकारियों का होगा नामांतरण

    भूमि रिकॉर्ड सुधारने के लिए बिहार में अभियान शुरू, मृत जमाबंदीदारों के उत्तराधिकारियों का होगा नामांतरण

    पटना
    भू-अभिलेखों को अधिक शुद्ध, पारदर्शी और अद्यतन बनाने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का जमाबंदी अद्यतीकरण एवं नामांतरण उत्तराधिकार विशेष अभियान मंगलवार को शुरू हो गया। अभियान 31 अक्तूबर तक मिशन मोड में चलेगा। अभियान के तहत लगभग 90 लाख जमाबंदियों में सुधार होगा। राज्य में कुल साढ़े चार करोड़ जमाबंदी हैं। यानी हर पांचवें जमाबंदी में किसी न किसी तरह की त्रुटि है।

    मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, समाहर्ताओं और बंदोबस्त पदाधिकारियों को पत्र जारी कर अभियान को समय से पूरा करने का निर्देश दिया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जमाबंदी में रैयत का नाम, पिता का नाम, खाता-खेसरा, रकबा, लगान अथवा अन्य विवरण मूल अभिलेख से अलग पाए जाने पर उसे दुरुस्त किया जाए। शून्य रकबा, शून्य लगान तथा मिसिंग सूचनाओं को भी अभियान के दौरान ठीक किया जाएगा।

    डिजिटाइज्ड जमाबंदी को मूल जमाबंदी पंजी की स्कैन प्रति से मिलाकर त्रुटियों का सुधार करने के साथ-साथ मृत जमाबंदीदारों के वैध उत्तराधिकारियों के नाम से उत्तराधिकार नामांतरण की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने कहा है कि जमीन से जुड़े अभिलेखों में एक भी त्रुटि आम आदमी के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

    विधिसम्मत समाधान जरूरी: दिलीप जायसवाल
    राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि मृत जमाबंदीदारों के नाम पर वर्षों से चली आ रही जमाबंदियों का भी समाधान जरूरी है। वैध उत्तराधिकारियों की पहचान कर नियमानुसार नामांतरण होगा। बता दें कि मृत जमाबंदीदारों की पहचान के बाद राजस्व कर्मचारी वंशावली तैयार करेंगे। डीएम और कमिश्नर स्तर पर अभियान की निगरानी होगी। सीओ रोज रिपोर्ट भूमि सुधार उप-समाहर्ता और अपर समाहर्ता को देंगे। विभाग भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा करेगा।

    यह होता है नुकसान
    ● जमीन की खरीद-बिक्री और निबंधन में परेशानी

    ● नाम और जमाबंदी में अंतर होने पर रजिस्ट्री पर रोक

    ● किसान क्रेडिट कार्ड या जमीन पर लोन लेने में परेशानी

    ● नाम मेल नहीं खाने से हजारों किसान योजना से वंचित

    यह होगा लाभ
    ● आम जनता को दाखिल-खारिज, रजिस्ट्री और लोन में राहत

    ● भूमि विवादों में कमी आने से न्यायालयों पर बोझ कम होगा

    ● जमाबंदी साफ होगी तो सर्वे की गति तेज होगी और खतियान सही बनेगा

  • पंजाब चुनाव से पहले पगड़ी पर सियासत तेज, मान और सैनी के बीच बयानबाजी हुई तेज

    पंजाब चुनाव से पहले पगड़ी पर सियासत तेज, मान और सैनी के बीच बयानबाजी हुई तेज

    चंडीगढ़
     पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भाजपा के लिए अहम राजनीतिक चेहरा बनते जा रहे हैं। पंजाब में उनका लगातार दौरा, सिर पर सजी दस्तार और पंजाबी भाषा में मतदाताओं से संवाद अब मात्र सियासी सक्रियता नहीं रह गया, बल्कि राजनीति में पहचान और प्रतीक की बहस का हिस्सा बन गया है।

    पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नायब सिंह सैनी की पगड़ी को ‘नकली’ बताकर एक अलग ही मुद्दे को हवा दे दी है, जिस पर अब दोनों दल आमने-सामने हो गए। नायब ने भी अपनी दस्तार को गुरुओं के सम्मान से जोड़ते हुए भगवंत मान पर पलटवार किए हैं।

    नायब सैनी जब पंजाब पहुंचते हैं तो उनका अंदाज स्थानीय रंग में नजर आता है। सिर पर पगड़ी और जुबान पर पंजाबी के जरिए वे पंजाबियों के बीच राजनीतिक संवाद कायम करने की कोशिश करते हैं। भाजपा के लिए यह पड़ोसी राज्य में नायब सैनी की स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।

    भगवंत मान ने इसी रणनीति पर निशाना साधा है। इस पूरे विवाद ने फिलहाल पंजाब की चुनावी सियासत में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है- क्या पंजाब की राजनीति में पगड़ी सिर्फ पहचान का प्रतीक रहेगी या आने वाले चुनाव में यह राजनीतिक दावे और जवाबी दावों का हथियार भी बनेगी।

    भगवंत मान ने आरोप लगाया था कि नायब सैनी अपनी गाड़ी में पगड़ी रखते हैं और चंडीगढ़ व पंचकूला से उसे सिर पर रखकर पंजाब पहुंचते हैं। उन्होंने तंज कसा कि शायद सैनी को लगता है कि ‘नकली पगड़ी’ पहनकर वे पंजाबियों का दिल जीत लेंगे या कोई राजनीतिक फायदा हासिल कर लेंगे। मान का यह हमला दरअसल सैनी के पंजाब दौरे और स्थानीय पहचान के साथ उनके जुड़ाव की कोशिश पर सीधा राजनीतिक सवाल है।

    भगवंत मान के बयान पर नायब सैनी ने बेहद तीखा पलटवार किया है। उन्होंने पगड़ी को राजनीतिक पहनावा मानने की बजाय इसे सिख गुरुओं की परंपरा, सम्मान और लोगों के स्वाभिमान से जोड़ दिया। सैनी ने कहा कि पगड़ी गुरु रूप है।

    भगवंत मान ने दस्तार को नकली पगड़ी कहकर जनता का अपमान किया है। नायब सैनी ने दो कदम आगे बढ़ते हुए भगवंत मान से माफी मांगने की मांग कर डाली। उन्होंने कहा कि अगर मान ने दस्तार को ‘नकली पगड़ी’ कहा है तो उन्हें उस पवित्र स्थान पर जाकर माफी मांगनी चाहिए, जहां गुरुओं ने इस दस्तार को सजाया था। मान को पंजाब के लोगों से भी माफी मांगनी चाहिए। सैनी ने गुरुओं के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कुर्बानियों की वजह से ही समाज और देश आज इस मुकाम पर है।

    पगड़ी की राजनीति पर इस तरह बदला माहौल
    यह पलटवार सैनी के लिए सिर्फ अपने ऊपर लगे आरोप का जवाब नहीं है। उन्होंने विवाद को धार्मिक और भावनात्मक प्रतीक से जोड़कर इसकी राजनीतिक जमीन ही बदल दी है। जहां मान का निशाना सैनी के ‘पंजाबी अंदाज’ पर था, वहीं सैनी ने जवाब में दस्तार के सम्मान को केंद्र में ला दिया है।

    मान का हमला भाजपा के दावे को चुनौती देने की कोशिश
    पंजाब में भाजपा लंबे समय से अपने राजनीतिक आधार का विस्तार करने की कोशिश कर रही है। हरियाणा भाजपा के प्रभारी डॉ. सतीश पुनिया को पंजाब भाजपा का नया प्रभारी बना दिया गया है। वे भी पगड़ी पहनकर पंजाब में निकल पड़े हैं। ऐसे में नायब सिंह सैनी का लगातार पंजाब दौरा पार्टी की रणनीति में खास महत्व रखता है। भाजपा इस कनेक्ट को राजनीतिक पूंजी में बदलना चाहती है।

    यही वजह है कि सैनी की पगड़ी अब उनके व्यक्तिगत पहनावे से आगे निकलकर राजनीतिक संदेश बन चुकी है। दूसरी ओर, भगवंत मान के लिए चुनौती यह है कि भाजपा पंजाब में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए ऐसे चेहरों और मुद्दों को सामने ला रही है, जो प्रदेश की भाषा और संस्कृति से जुड़ाव का दावा करते हैं। मान का हमला भाजपा के इसी राजनीतिक दावे को चुनौती देने की कोशिश है।