Category: राज्य

  • UP Teacher Recruitment: 15 हजार से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती की तैयारी, चयन आयोग ने दी जानकारी

    UP Teacher Recruitment: 15 हजार से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती की तैयारी, चयन आयोग ने दी जानकारी

    प्रयागराज

     नौकरी के इंतजार में बैठे अभ्यर्थियों को लिए राहत भरी खबर है। यूपी में जल्द ही शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 15,000 से अधिक शिक्षक पदों पर भर्ती की घोषणा की है। आयोग ने मंगलवार शाम भर्ती से जुड़े दो विज्ञापन जारी किए। इसके साथ ही सहायक अध्यापक और प्रवक्ता (पीजीटी) के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सहायक अध्यापक भर्ती के तहत कुल 12,405 पदों पर ऑनलाइन भर्ती की जाएगी।

    इसमें माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक अध्यापक (अशासकीय सहायता प्राप्त) के 897 पद और जहां बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक अध्यापक (शहरी) के 11,508 पद शामिल हैं। वहीं, प्रवक्ता संवर्ग भर्ती के तहत प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 2,607 रिक्त पदों पर विज्ञापन जारी किया गया है।

    तीन और चार दिसंबर को होगी परीक्षा
    सहायक अध्यापक भर्ती भी ऑनलाइन पंजीकरण और आवेदन बुधवार से शुरू हो जायेंगे। वहीं शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर रहेगी और आवेदन में संशोधन करने की अंतिम तिथि 19 अक्टूबर तक रहेगी और परीक्षा तिथि तीन और चार दिसंबर होंगी और पीजीटी की ऑनलाइन पंजीकरण 18 सितंबर से शुरू होगा और शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर रहेगी। आवेदन में संशोधन 21 अक्टूबर तक किया जाएगा और परीक्षा तिथि: 15 और 16 दिसंबर रहेगी।

    अभ्यर्थियों के लिए आरटीआर व्यवस्था लागू
    आयोग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन करने वाले सभी अभ्यर्थियों के लिए वन टाइम रजिस्ट्रेशन (आटीआर) व्यवस्था लागू की गई है। यह प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। विस्तृत विज्ञापन और निर्देश पुस्तिका के लिए अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा की इस भर्ती में प्रदेश के शिक्षामित्रों को कोई वेटेज या वरीयता का जिक्र नहीं है। जबकि, 25 जुलाई 2017 को उच्चतम न्यायालय के निर्णय में शिक्षामित्रों को समान्य शिक्षक भर्तियों में वरीयता देने के निर्देश हैं। राज्य सरकार को विचार करते हुए 26 सालों से सेवा दे रहे शिक्षामित्रों को इस भर्ती में वेटेज देना चाहिए।

  • भूमि रिकॉर्ड सुधारने के लिए बिहार में अभियान शुरू, मृत जमाबंदीदारों के उत्तराधिकारियों का होगा नामांतरण

    भूमि रिकॉर्ड सुधारने के लिए बिहार में अभियान शुरू, मृत जमाबंदीदारों के उत्तराधिकारियों का होगा नामांतरण

    पटना
    भू-अभिलेखों को अधिक शुद्ध, पारदर्शी और अद्यतन बनाने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का जमाबंदी अद्यतीकरण एवं नामांतरण उत्तराधिकार विशेष अभियान मंगलवार को शुरू हो गया। अभियान 31 अक्तूबर तक मिशन मोड में चलेगा। अभियान के तहत लगभग 90 लाख जमाबंदियों में सुधार होगा। राज्य में कुल साढ़े चार करोड़ जमाबंदी हैं। यानी हर पांचवें जमाबंदी में किसी न किसी तरह की त्रुटि है।

    मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, समाहर्ताओं और बंदोबस्त पदाधिकारियों को पत्र जारी कर अभियान को समय से पूरा करने का निर्देश दिया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जमाबंदी में रैयत का नाम, पिता का नाम, खाता-खेसरा, रकबा, लगान अथवा अन्य विवरण मूल अभिलेख से अलग पाए जाने पर उसे दुरुस्त किया जाए। शून्य रकबा, शून्य लगान तथा मिसिंग सूचनाओं को भी अभियान के दौरान ठीक किया जाएगा।

    डिजिटाइज्ड जमाबंदी को मूल जमाबंदी पंजी की स्कैन प्रति से मिलाकर त्रुटियों का सुधार करने के साथ-साथ मृत जमाबंदीदारों के वैध उत्तराधिकारियों के नाम से उत्तराधिकार नामांतरण की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने कहा है कि जमीन से जुड़े अभिलेखों में एक भी त्रुटि आम आदमी के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

    विधिसम्मत समाधान जरूरी: दिलीप जायसवाल
    राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि मृत जमाबंदीदारों के नाम पर वर्षों से चली आ रही जमाबंदियों का भी समाधान जरूरी है। वैध उत्तराधिकारियों की पहचान कर नियमानुसार नामांतरण होगा। बता दें कि मृत जमाबंदीदारों की पहचान के बाद राजस्व कर्मचारी वंशावली तैयार करेंगे। डीएम और कमिश्नर स्तर पर अभियान की निगरानी होगी। सीओ रोज रिपोर्ट भूमि सुधार उप-समाहर्ता और अपर समाहर्ता को देंगे। विभाग भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा करेगा।

    यह होता है नुकसान
    ● जमीन की खरीद-बिक्री और निबंधन में परेशानी

    ● नाम और जमाबंदी में अंतर होने पर रजिस्ट्री पर रोक

    ● किसान क्रेडिट कार्ड या जमीन पर लोन लेने में परेशानी

    ● नाम मेल नहीं खाने से हजारों किसान योजना से वंचित

    यह होगा लाभ
    ● आम जनता को दाखिल-खारिज, रजिस्ट्री और लोन में राहत

    ● भूमि विवादों में कमी आने से न्यायालयों पर बोझ कम होगा

    ● जमाबंदी साफ होगी तो सर्वे की गति तेज होगी और खतियान सही बनेगा

  • पंजाब चुनाव से पहले पगड़ी पर सियासत तेज, मान और सैनी के बीच बयानबाजी हुई तेज

    पंजाब चुनाव से पहले पगड़ी पर सियासत तेज, मान और सैनी के बीच बयानबाजी हुई तेज

    चंडीगढ़
     पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भाजपा के लिए अहम राजनीतिक चेहरा बनते जा रहे हैं। पंजाब में उनका लगातार दौरा, सिर पर सजी दस्तार और पंजाबी भाषा में मतदाताओं से संवाद अब मात्र सियासी सक्रियता नहीं रह गया, बल्कि राजनीति में पहचान और प्रतीक की बहस का हिस्सा बन गया है।

    पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नायब सिंह सैनी की पगड़ी को ‘नकली’ बताकर एक अलग ही मुद्दे को हवा दे दी है, जिस पर अब दोनों दल आमने-सामने हो गए। नायब ने भी अपनी दस्तार को गुरुओं के सम्मान से जोड़ते हुए भगवंत मान पर पलटवार किए हैं।

    नायब सैनी जब पंजाब पहुंचते हैं तो उनका अंदाज स्थानीय रंग में नजर आता है। सिर पर पगड़ी और जुबान पर पंजाबी के जरिए वे पंजाबियों के बीच राजनीतिक संवाद कायम करने की कोशिश करते हैं। भाजपा के लिए यह पड़ोसी राज्य में नायब सैनी की स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।

    भगवंत मान ने इसी रणनीति पर निशाना साधा है। इस पूरे विवाद ने फिलहाल पंजाब की चुनावी सियासत में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है- क्या पंजाब की राजनीति में पगड़ी सिर्फ पहचान का प्रतीक रहेगी या आने वाले चुनाव में यह राजनीतिक दावे और जवाबी दावों का हथियार भी बनेगी।

    भगवंत मान ने आरोप लगाया था कि नायब सैनी अपनी गाड़ी में पगड़ी रखते हैं और चंडीगढ़ व पंचकूला से उसे सिर पर रखकर पंजाब पहुंचते हैं। उन्होंने तंज कसा कि शायद सैनी को लगता है कि ‘नकली पगड़ी’ पहनकर वे पंजाबियों का दिल जीत लेंगे या कोई राजनीतिक फायदा हासिल कर लेंगे। मान का यह हमला दरअसल सैनी के पंजाब दौरे और स्थानीय पहचान के साथ उनके जुड़ाव की कोशिश पर सीधा राजनीतिक सवाल है।

    भगवंत मान के बयान पर नायब सैनी ने बेहद तीखा पलटवार किया है। उन्होंने पगड़ी को राजनीतिक पहनावा मानने की बजाय इसे सिख गुरुओं की परंपरा, सम्मान और लोगों के स्वाभिमान से जोड़ दिया। सैनी ने कहा कि पगड़ी गुरु रूप है।

    भगवंत मान ने दस्तार को नकली पगड़ी कहकर जनता का अपमान किया है। नायब सैनी ने दो कदम आगे बढ़ते हुए भगवंत मान से माफी मांगने की मांग कर डाली। उन्होंने कहा कि अगर मान ने दस्तार को ‘नकली पगड़ी’ कहा है तो उन्हें उस पवित्र स्थान पर जाकर माफी मांगनी चाहिए, जहां गुरुओं ने इस दस्तार को सजाया था। मान को पंजाब के लोगों से भी माफी मांगनी चाहिए। सैनी ने गुरुओं के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कुर्बानियों की वजह से ही समाज और देश आज इस मुकाम पर है।

    पगड़ी की राजनीति पर इस तरह बदला माहौल
    यह पलटवार सैनी के लिए सिर्फ अपने ऊपर लगे आरोप का जवाब नहीं है। उन्होंने विवाद को धार्मिक और भावनात्मक प्रतीक से जोड़कर इसकी राजनीतिक जमीन ही बदल दी है। जहां मान का निशाना सैनी के ‘पंजाबी अंदाज’ पर था, वहीं सैनी ने जवाब में दस्तार के सम्मान को केंद्र में ला दिया है।

    मान का हमला भाजपा के दावे को चुनौती देने की कोशिश
    पंजाब में भाजपा लंबे समय से अपने राजनीतिक आधार का विस्तार करने की कोशिश कर रही है। हरियाणा भाजपा के प्रभारी डॉ. सतीश पुनिया को पंजाब भाजपा का नया प्रभारी बना दिया गया है। वे भी पगड़ी पहनकर पंजाब में निकल पड़े हैं। ऐसे में नायब सिंह सैनी का लगातार पंजाब दौरा पार्टी की रणनीति में खास महत्व रखता है। भाजपा इस कनेक्ट को राजनीतिक पूंजी में बदलना चाहती है।

    यही वजह है कि सैनी की पगड़ी अब उनके व्यक्तिगत पहनावे से आगे निकलकर राजनीतिक संदेश बन चुकी है। दूसरी ओर, भगवंत मान के लिए चुनौती यह है कि भाजपा पंजाब में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए ऐसे चेहरों और मुद्दों को सामने ला रही है, जो प्रदेश की भाषा और संस्कृति से जुड़ाव का दावा करते हैं। मान का हमला भाजपा के इसी राजनीतिक दावे को चुनौती देने की कोशिश है।

  • कक्षा 6 से 12 तक के स्कूलों में जेंडर समानता को बढ़ावा देने की पहल, कार्यशाला में व्यवहारिक उपायों पर चर्चा

    कक्षा 6 से 12 तक के स्कूलों में जेंडर समानता को बढ़ावा देने की पहल, कार्यशाला में व्यवहारिक उपायों पर चर्चा

     हजारीबाग

    हजारीबाग के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में विद्यालय स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम के तहत जेंडर विषय पर दो दिवसीय जिला स्तरीय गैर-आवासीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का उद्देश्य विद्यालयों में जेंडर से जुड़े विषयों की समझ को मजबूत करना, संवेदनशीलता बढ़ाना और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, समान एवं समावेशी शैक्षणिक वातावरण तैयार करना रहा. इसमें जिले के चयनित 50 विद्यालयों के हेल्थ दूत, प्रधानाध्यापक और जिला स्तरीय साधनसेवियों (डीआरजी) ने भाग लिया.

    दो चरणों में आयोजित हुई कार्यशाला

    कार्यशाला का पहला चरण 15 सितंबर 2026 को आयोजित हुआ, जिसमें 50 विद्यालयों के स्वास्थ्य एवं आरोग्य दूत और जिला स्तरीय साधनसेवियों ने सहभागिता की. दूसरे चरण में 16 सितंबर को इन्हीं विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापकों के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया. दोनों चरणों में प्रतिभागियों को विद्यालयों में जेंडर से जुड़े मुद्दों को समझने, विद्यार्थियों के बीच संवेदनशीलता विकसित करने और उनके साथ सकारात्मक एवं प्रभावी संवाद स्थापित करने के व्यावहारिक तरीके बताए गए.
    समावेशी विद्यालयी माहौल बनाने पर जोर

    कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का भी महत्वपूर्ण स्थान है. ऐसे में सभी बच्चों के लिए समान अवसर, सम्मानजनक व्यवहार और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना जरूरी है. प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि जेंडर संबंधी जागरूकता बढ़ाने से विद्यालयों में भेदभाव कम होगा और विद्यार्थी खुलकर अपनी बात रख सकेंगे. प्रशिक्षण में विद्यालय स्तर पर अपनाए जाने वाले व्यवहारिक उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई.

    कक्षा 6 से 12 तक के स्कूलों में चल रहा कार्यक्रम

    यह कार्यक्रम जिले के कक्षा 6 से 12 तक के सभी विद्यालयों में शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और सेंटर फॉर कैटलाइजिंग चेंज (सी3) के संयुक्त प्रयास से संचालित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य विद्यालयों में स्वास्थ्य, कल्याण और जेंडर समानता को बढ़ावा देना है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक और सामाजिक वातावरण मिल सके.

    ये अधिकारी और विशेषज्ञ रहे मौजूद

    कार्यशाला में जिला शिक्षा परियोजना कार्यालय से संजय तिवारी, डायट से रंजीत वर्मा, सी3 संस्था से मोहम्मद जियाउद्दीन, शिखा भसीन, ओम प्रकाश सिंह और अभिनव कुमार ने प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया. इसके अलावा जिले के डीआरजी, शिक्षक और अन्य शिक्षा कर्मियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई. कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने विद्यालयों में सीखे गए अनुभवों को लागू करने और विद्यार्थियों के लिए अधिक सुरक्षित, संवेदनशील तथा समावेशी शैक्षणिक माहौल तैयार करने का संकल्प लिया.

     

  • झारखंड में एंबुलेंस कर्मचारियों का चरणबद्ध आंदोलन तेज, EPF-ESI और न्यूनतम वेतन समेत कई मांगें

    झारखंड में एंबुलेंस कर्मचारियों का चरणबद्ध आंदोलन तेज, EPF-ESI और न्यूनतम वेतन समेत कई मांगें

     रांची
     108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के कर्मचारियों का चरणबद्ध आंदोलन मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ के आह्वान पर राज्यभर में कर्मचारियों ने काला बिल्ला लगाकर ड्यूटी करते हुए विरोध दर्ज कराया।

    संघ का कहना है कि कर्मचारी आपातकालीन सेवा को प्रभावित किए बिना अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार और संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। संघ ने आरोप लगाया कि 108 एंबुलेंस कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर लगातार सरकार और विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया जा रहा है।

    इसके बावजूद समाधान की दिशा में पहल नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। संघ ने कहा कि कर्मचारी मरीजों तक समय पर आपातकालीन सेवा पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं पर सरकार की चुप्पी चिंता का विषय है।

    जिला स्तर से सरकारी माध्यम से संचालन की मांग
    संघ की प्रमुख मांगों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक के द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन करते हुए जिला स्तर पर सरकारी माध्यम से 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन शुरू करना शामिल है।

    इसके अलावा सम्मान फाउंडेशन एजेंसी द्वारा सेवा से हटाए गए कर्मचारियों को संबंधित जिलों में पुन सेवा में बहाल करने की मांग की गई है। कर्मचारियों ने ईपीएफ, ईएसआई, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी और न्यूनतम वेतन समेत सभी श्रमिक एवं वैधानिक अधिकार सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई है।

    25 को पूर्ण हड़ताल, 28 से अनिश्चितकालीन आंदोलन
    संघ ने आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम भी जारी किया है। इसके तहत 14 से 19 सितंबर तक काला बिल्ला लगाकर काम करते हुए विरोध जारी रहेगा। इसके बाद 19 सितंबर को कैंडल मार्च, 21 सितंबर को भिक्षाटन, 23 सितंबर को धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

    संघ के अनुसार, 25 सितंबर को राज्यभर में एक दिवसीय पूर्ण हड़ताल की जाएगी। इस दौरान नामकुम स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन भी प्रस्तावित है। मांगों पर समाधान नहीं होने की स्थिति में 28 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

    संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी ने कहा कि एंबुलेंस कर्मचारियों ने हमेशा आपातकालीन सेवा को प्राथमिकता दी है और अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया है।

    इसके बावजूद उनकी जायज और लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों के साथ तत्काल वार्ता कर समस्याओं के समाधान की दिशा में कदम उठाने की मांग की।

     

  • UCC को लेकर सियासी घमासान तेज, ओवैसी-अखिलेश के विरोध पर बरसे पूर्व BJP विधायक संगीत सोम

    UCC को लेकर सियासी घमासान तेज, ओवैसी-अखिलेश के विरोध पर बरसे पूर्व BJP विधायक संगीत सोम

    ‘कितनी भी ताकत लगा लो, UCC आकर रहेगा’- UCC पर ओवैसी-अखिलेश को संगीत सोम की दो टूक

    'ये लोग देश के गद्दार, समानता नहीं चाहते'- ओवैसी ने किया UCC का विरोध तो भड़के संगीत सोम

    UCC को लेकर सियासी घमासान तेज, ओवैसी-अखिलेश के विरोध पर बरसे पूर्व BJP विधायक संगीत सोम

    लखनऊ
     केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के NDA शासित राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के ऐलान के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने UCC को भारत की विविधता खत्म करने की साजिश बताया है। जिसपर भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम ने तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि देश में रहना है तो देश के कानून को मानना पड़ेगा। उन्होंने UCC को महिलाओं को न्याय और समानता देने वाला कानून बताया।

    ओवैसी पर संगीत सोम का तीखा हमला
    संगीत सोम ने कहा कि ओवैसी जैसे लोग देश में कट्टरपंथी राजनीति करते हैं। उन्हें समझना होगा कि देश में रहना है तो देश के कानून को मानना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि UCC ऐसा कानून है, जो भारत में महिलाओं को न्याय देता है और समानता की बात करता है।

    संगीत सोम ने आरोप लगाया कि ओवैसी जैसे लोगों को समानता पसंद नहीं है। उन्होंने कहा, ''ये लोग देश के गद्दार हैं। ये देश में समानता नहीं चाहते।''
    उन्होंने दावा किया कि भारत के लोग UCC चाहते हैं। संगीत सोम ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने अगर कहा है कि UCC लागू होगा तो विरोध करने वाले लोग कितनी भी ताकत लगा लें, UCC लागू होकर रहेगा।

    अखिलेश यादव पर भी साधा निशाना
    UCC को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव की टिप्पणी पर भी संगीत सोम ने हमला बोला। दरअसल अखिलेश यादव ने UCC का मतलब ''अंडरग्राउंड कम्युनल कांस्पिरेसी'' बताया है। इसपर संगीत सोम ने कहा कि अखिलेश यादव के पास कोई काम नहीं है। वह ट्विटर-ट्विटर खेलते हैं।

    संगीत सोम ने कहा कि अखिलेश यादव के पास टीवी पर गेम खेलने और ट्विटर पर खेलने के अलावा कोई काम नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मुलायम सिंह यादव की कृपा से अखिलेश यादव एक बार मुख्यमंत्री बन गए, लेकिन अब वह मुख्यमंत्री नहीं बन सकते। सोम ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश की राजनीति में कभी नहीं आ सकते।

    40 साल से UCC की मांग का दावा
    संगीत सोम ने कहा कि UCC की मांग पिछले 40 साल से होती रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा बाबा साहब के संविधान के रास्ते पर चलकर उनके बताए कार्यों को पूरा करने का काम कर रही है और आगे भी करती रहेगी।

    UCC को मुस्लिमों के खिलाफ बताए जाने पर सोम ने कहा कि अगर पूरे देश में UCC नहीं आई तो असमानता होगी। उनके मुताबिक समानता के लिए यह कानून जरूरी है। उन्होंने कहा कि UCC नहीं आने से देश में हिंदू-मुस्लिम का बैलेंस खराब होगा और राहुल गांधी तथा अखिलेश यादव यही चाहते हैं।

    अमित शाह ने कहा है तो UCC आकर रहेगा- सोम
    पूर्व भाजपा विधायक ने कहा कि विरोध की राजनीति के चलते ओवैसी जैसे लोग पहले अपमानित होंगे और फिर UCC की वकालत करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग संविधान लेकर घूमते हैं, लेकिन संविधान का एक पन्ना भी नहीं खोलते।

    संगीत सोम ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह साफ कर चुके हैं कि जिन राज्यों में NDA की सरकार है, वहां UCC लाया जाएगा। उन्होंने कहा, ''अब अगर कोई नहीं लाना चाहता है तो ना लाएं। हम 29 से पहले लाएंगे। अखिलेश, ओवैसी, राहुल कितनी भी ताकत लगा लें, UCC आकर रहेगा।'' उन्होंने यह भी कहा कि ये लोग बेनकाब हो चुके हैं और देश की भलाई के लिए कोई काम नहीं करते।

    गौरतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले देश के सभी NDA शासित 21 राज्यों में UCC लागू कर दिया जाएगा। उनके इस बयान के बाद UCC को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

  • कनाडा स्टडी वीजा का नया नियम लागू, 31 अगस्त तक आवेदन करने वालों को राहत

    कनाडा स्टडी वीजा का नया नियम लागू, 31 अगस्त तक आवेदन करने वालों को राहत

    चंडीगढ़ 
    स्टडी वीजा पर कनाडा जाने वाले पंजाबियों को अब ज्यादा पैसे खर्चने पड़ेंगे। अब पढ़ने जाने वाले स्टूडेंट्स को अपने रहने-खाने सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए बैंक बैलेंस 17 लाख रखना होगा। इमीग्रेशन रिफ्यूजी सिटिजनशिप कनाडा डिपार्टमेंट (IRCC) ने नए नियम लागू होगा। कनाडा सरकार का कहना है कि देश में बढ़ रही महंगाई के चलते ये निर्णय लिया गया है। पहले कनाडा स्टडी के लिए जाने वाले स्टूडेंट्स को 15 लाख के करीब सालाना बैंक बैलेंस मेंटेन रखना जरूरी था।

    IRCC के अनुसार 31 अगस्त तक अप्लाई कर चुके स्टूडेंट्स पर नए नियम लागू नहीं होंगे। 1 सितंबर 2026 से अप्लाई कर रहे स्टूडेंट्स पर नए नियमों के तहत अब कनाडाई यूनिवर्सिटी या कॉलेज में दाखिला लेने से पहले अपनी वित्तीय मजबूती साबित करने करने के लिए पहले से लगभग 2 लाख रुपए ज्यादा बैंक बैलेंस दिखाना होगा।

    कॉलेज फीस और ट्रेवल खर्च के अतिरिक्त दिखाना हो बैलेंस
    कनाडा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट (canada.ca) पर जारी ताजा नोटिफिकेशन के अनुसार, अब सिंगल एप्लीकेंट (अकेले जाने वाले छात्र) को लिविंग एक्सपेंस यानी रहने-खाने के खर्च के तौर पर कम से कम 23,448 कनाडाई डॉलर (CAD) का फंड दिखाना अनिवार्य होगा। भारतीय रुपए में यह रकम करीब 17 लाख रुपए बैठती है। इस रकम में कॉलेज की ट्यूशन फीस और भारत से कनाडा आने-जाने का ट्रैवल खर्च शामिल नहीं है। ट्यूशन फीस और यात्रा खर्च का हिसाब इस निर्धारित राशि से अलग रहेगा।

    परिवार के 4 मेंबर के साथ दिखाने होंगे 30 लाख
    इमिग्रेशन विभाग (IRCC) के आधिकारिक डेटा चार्ट के मुताबिक, यदि छात्र के साथ उनके परिवार के सदस्य भी कनाडा जाते हैं, तो उसी हिसाब से फंड की सीमा बढ़ जाएगी। दो लोगों के परिवार के लिए यह सीमा 29,185 CAD (20.10 लाख), तीन सदस्यों के लिए 35,880 CAD (24.74 लाख) और चार सदस्यों के परिवार के लिए 43,562 CAD (30.04 लाख) तय की गई है।

    इसके बाद परिवार के प्रत्येक अतिरिक्त सदस्य के जुड़ने पर 6,315 कनाडाई डॉलर (4.35 लाख) का अतिरिक्त फंड बैंक खाते में दिखाना अनिवार्य होगा। हालांकि, ये नियम क्यूबेक प्रांत को छोड़कर पूरे कनाडा में लागू होंगे, क्योंकि क्यूबेक अपने लिविंग एक्सपेंस के नियम अलग से तय करता है।

    महंगाई के चलते कनाडा सरकार ने बढ़ाया बजट
    IRCC की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, इस फैसले का मुख्य मकसद कनाडा में रह रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों को वित्तीय संकट और महंगाई से बचाना है। बीते कुछ वर्षों में कनाडा के प्रमुख शहरों में रेंट (मकान का किराया), ग्रोसरी और बेसिक यूटिलिटीज के दाम काफी तेजी से बढ़े हैं। पुराना फंड पैरामीटर मौजूदा महंगाई दरों के हिसाब से काफी कम पड़ रहा था, जिसके चलते कई विदेशी छात्रों को वहां जाकर पार्ट-टाइम जॉब्स पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ता था या रहने-खाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

    वीजा अप्लाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान
    अब 1 सितंबर 2026 के बाद वीजा फाइल जमा करने वाले सभी छात्रों को तीन अलग-अलग मदों में अपना फंड प्रूफ देना होगा। पहला, पहले साल की पूरी ट्यूशन फीस; दूसरा तय लिविंग एक्सपेंस दिखाना होगा जो सिंगल छात्र के लिए 23,448 डालर है। तीसरा, भारत से कनाडा आने-जाने का टिकट खर्च। विशेषज्ञों की सलाह है कि कनाडाई वीजा के रिजेक्शन से बचने के लिए छात्र अपने स्पॉन्सर या बैंक स्टेटमेंट में आधिकारिक वेबसाइट द्वारा तय राशि से थोड़ा अधिक ही बैलेंस मेंटेन रखें, ताकि एप्लीकेशन में कोई अड़चन न आए।

    कनाडा में 10 लाख पंजाबी रह रहे
    कनाडा में पंजाबी मूल के लोगों की कुल संख्या लगभग 9.4 लाख से 10 लाख के बीच है, जो वहां की कुल आबादी का करीब 2.6% है।

  • 19 सितंबर के आसपास बनेगा नया सिस्टम, झारखंड में गरज-चमक और तेज हवा की चेतावनी

    19 सितंबर के आसपास बनेगा नया सिस्टम, झारखंड में गरज-चमक और तेज हवा की चेतावनी

    रांची

    झारखंड में 1 से 15 सितंबर के बीच बारिश सामान्य से करीब 5% कम है. रांची स्थित भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 1 से 15 सितंबर तक झारखंड में मानसून सामान्य के करीब रहा, लेकिन राज्य में अब भी वर्षा की कमी बनी हुई है. इस अवधि में राज्य में 871.9 मिमी बारिश दर्ज की गयी, जबकि सामान्य वर्षा 920.8 मिमी होनी चाहिए थी. इसका मतलब यह कि पूरे राज्य में सितंबर के पहले पखवाड़े तक करीब 5% कम बारिश हुई है. मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि कुछ जिलों में अच्छी बारिश हुई, जबकि कई जिले अब भी सामान्य से काफी पीछे हैं.

    पाकुड़ में सिर्फ 48% हुई बारिश
    आईएमडी के जिलावार आंकड़ों के अनुसार, झारखंड के नौ जिलों में वर्षा की कमी 20% से अधिक रही है. सबसे अधिक कमी पाकुड़ में 48% दर्ज की गई. इसके अलावा चतरा में 36%, देवघर में 31%, गुमला में 29%, साहिबगंज में 26%, कोडरमा में 25%, गिरिडीह और हजारीबाग में 24-24% तथा गढ़वा में 22% कम बारिश रिकॉर्ड हुई है.
    पश्चिमी सिंहभूम बना सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला

    राज्य में सबसे बेहतर स्थिति पश्चिमी सिंहभूम की रही, जहां सामान्य से 42% अधिक वर्षा दर्ज की गयी. इसके अलावा रांची में 13%, सरायकेला-खरसावां में 12%, लातेहार में 11%, पूर्वी सिंहभूम में 4% और लोहरदगा में 2% अधिक बारिश हुई है. धनबाद, दुमका, खूंटी और रामगढ़ में बारिश सामान्य के आसपास बनी रही.

    16 सितंबर को जामा में हुई सबसे ज्यादा बारिश
    दैनिक मौसम बुलेटिन के अनुसार, पिछले 24 घंटों में राज्य में एक स्थान पर भारी बारिश दर्ज की गयी. दुमका जिले के जामा में सबसे अधिक 65 मिमी वर्षा हुई. इसके अलावा मसानजोर में 63.2 मिमी, जारमुंडी में 52 मिमी और महारो में 49.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गयी.

    बहरागोड़ा सबसे गर्म, लातेहार सबसे ठंडा
    पिछले 24 घंटों में राज्य का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस बहरागोड़ा एडब्ल्यूएस में दर्ज किया गया. सबसे कम न्यूनतम तापमान 20.1 डिग्री सेल्सियस लातेहार एडब्ल्यूएस में रिकॉर्ड हुआ. रांची में अधिकतम तापमान 31.1 डिग्री और न्यूनतम 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
    अगले पांच दिनों तक कैसा रहेगा मौसम

    आईएमडी के अनुसार 16 से 20 सितंबर तक पूरे झारखंड में सामान्यतः बादल छाये रहेंगे. अधिकांश जिलों में एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. अगले तीन दिनों तक अधिकतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है. रांची में अगले पांच दिनों तक अधिकतम तापमान 30 से 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22 से 23 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है.

    19 सितंबर के आसपास बनेगा नया सिस्टम
    मौसम विभाग के अनुसार उत्तर थाईलैंड के ऊपर सक्रिय ऊपरी चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर तक उत्तर अंडमान सागर की ओर बढ़ेगा. इसके प्रभाव से 19 सितंबर के आसपास निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है, जो बाद में दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ सकता है.

    कई जिलों में तेज हवा और वज्रपात का अलर्ट
    16 से 20 सितंबर तक अलग-अलग दिनों में राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक, वज्रपात और 30 से 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी जारी की गयी है.

     

  • अमृतसर ड्रग्स केस में बड़ा खुलासा, 8 गिरफ्तार; पाकिस्तान कनेक्शन की जांच

    अमृतसर ड्रग्स केस में बड़ा खुलासा, 8 गिरफ्तार; पाकिस्तान कनेक्शन की जांच

    अमृतसर

    कमिश्नरेट पुलिस अमृतसर ने एंबुलेंस की आड़ में नशा तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए ड्राइवर समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 9 किलो 549 ग्राम हेरोइन, 5 किलो 459 ग्राम अफीम और 30 बोर की एक पिस्तौल बरामद की है। पुलिस के अनुसार गिरोह के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं और आरोपी ड्रोन के माध्यम से सीमा पार से नशे की खेप मंगवाकर पंजाब के अलग-अलग इलाकों में सप्लाई करते थे। 

    पुलिस कमिश्नर हरमनबीर सिंह गिल ने बताया कि कार्रवाई के दौरान कैंटोनमेंट, राजासांसी, ए डिवीजन और छेहरटा थाना क्षेत्रों में मामले दर्ज कर गिरफ्तारियां की गई हैं। सबसे पहले राजिंदर सिंह को 30 बोर पिस्तौल के साथ काबू किया गया। उसकी पूछताछ के आधार पर विनय को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से चार किलो से अधिक अफीम बरामद हुई। इसके बाद प्रदीप सिंह को पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक प्रदीप निजी एंबुलेंस का चालक है और वह एंबुलेंस के जरिए नशे की सप्लाई करता था। उसके कब्जे से करीब 1 किलो 224 ग्राम हेरोइन बरामद हुई।

    एक अन्य मामले में नवनीत सिंह उर्फ कीड़ा को गिरफ्तार कर करीब सवा सात किलो हेरोइन बरामद की गई। तीसरे मामले में बलजिंदर सिंह और अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत को गिरफ्तार कर 2 किलो 535 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। 

    पुलिस कमिश्नर ने बताया कि आरोपी एंबुलेंस का इस्तेमाल इसलिए करते थे क्योंकि आम तौर पर ऐसी गाड़ियों पर कम संदेह होता है और यातायात में उन्हें रास्ता भी आसानी से मिल जाता है। पुलिस अब खाली एंबुलेंस, विशेषकर बिना मरीज चल रही एंबुलेंस की नाकों पर जांच करेगी। साथ ही एंबुलेंस चालकों की पृष्ठभूमि और रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी। आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस को आगे और बरामदगी व गिरफ्तारियों की उम्मीद है। 

  • बूचड़खाना बंद होने के बाद 400 मजदूर बाहर आए, हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

    बूचड़खाना बंद होने के बाद 400 मजदूर बाहर आए, हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

    पठानकोट 

    पठानकोट के गांव अखवाना के औद्योगिक क्षेत्र में अवैध रूप से चल रहे बूचड़खाने को लेकर लोगों में रोष व्याप्त है। बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर बूचड़खाने को पूरी तरह खाली करवाया। 

    निरीक्षण के दौरान जब टीम और प्रतिनिधि अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। बूचड़खाने के भीतर 400 से अधिक बांग्लादेशी और कुछ स्थानीय मजदूर मौजूद थे, जिन्हें तुरंत 3-4 ट्रकों में भरकर बाहर निकाला गया।

    हिंदू संगठनों, सिख भाईचारे, रामलीला कमेटियों और विभिन्न गांवों के पंच-सरपंचों के विरोध तथा नेशनल हाईवे जाम किए जाने के बाद पुलिस व नागरिक प्रशासन हरकत में आया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव शांत है। हालांकि हिंदू संगठनों ने दो टूक चेतावनी दी है कि इस बूचड़खाने को किसी भी कीमत पर चलने नहीं दिया जाएगा।

    DC दफ्तर का घेराव और हाईवे जाम से हिला प्रशासन अखवाना के औद्योगिक क्षेत्र में एक बूचड़खाना खोले जाने की खबर से पिछले करीब डेढ़ महीने से इलाके के लोगों में रोष व्याप्त था। स्थानीय निवासियों को अंदेशा था कि इस बूचड़खाने में गौवंश और अन्य पशुओं को काटा जा रहा है। मंगलवार को विभिन्न हिंदू व सिख संगठनों के प्रतिनिधि, संत समाज, पूर्व सरपंच और सुजानपुर हलके के सैकड़ों नागरिक डिप्टी कमिश्नर पठानकोट को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे।

    आरोप है कि जिला प्रशासन और डीसी ऑफिस द्वारा करीब 2 घंटे तक उन्हें इंतजार करवाया गया और संतोषजनक बातचीत नहीं हुई। प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये से आक्रोशित होकर जनसैलाब सड़कों पर उतर आया और नेशनल हाईवे पर चक्का जाम कर दिया।

    अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे संगठन हाईवे जाम की सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी तुरंत हरकत में आए। बुधवार को जिला प्रशासन के निर्देश पर विभिन्न विभागों- औद्योगिक विभाग, बीडीपीओ कार्यालय सुजानपुर और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की टीम पुलिस बल और नाराज संगठनों के साथ अखवाना स्थित बूचड़खाने के अंदर दाखिल हुई।

    हिंदू-सिख संगठनों का कड़ा रुख…

        एडवोकेट भानु प्रताप और रमन ठाकुर: उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई सनातन धर्म और हिंदू-सिख भाईचारे की एकजुटता की जीत है। उन्होंने पुलिस प्रशासन का धन्यवाद किया कि समय रहते स्थिति को संभाला गया, लेकिन साथ ही सवाल उठाया कि आखिर एक विशुद्ध हिंदू बहुल इलाके में बूचड़खाना खोलने की मंजूरी किन अधिकारियों और विभागों ने दी? उन्होंने सरकार से मांग की कि उन दोषी अफसरों की जांच की जाए।

        विशाल चौहान और एडवोकेट अमन ठाकुर (विहिप): उन्होंने आरोप लगाया कि रोजाना यहां नई मशीनरी पहुंचाई जा रही थी, जो बिना प्रशासनिक और राजनीतिक शह के संभव नहीं है। अगर इसे दोबारा खोलने की कोशिश की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

        संत समाज व स्थानीय प्रतिनिधियों की चेतावनी: नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में यहां से एक भी व्यक्ति अंदर-बाहर होता दिखा या दोबारा काम शुरू करने की कोशिश हुई तो कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। उन्होंने स्थानीय गुर्जर समुदाय से भी अपील की कि वे चंद पैसों के लालच में गौहत्या या बूचड़खाने का समर्थन न करें, ताकि आपसी भाईचारा न बिगड़े।

    विभिन्न संगठनों के लोग रहे शामिल इस विरोध प्रदर्शन और निरीक्षण के दौरान राजपूत सभा से शिवा काटल, आरएसएस से अमित सिंह, अंतरराष्ट्रीय हिंदू सेवा संघ पंजाब के अध्यक्ष संजीव ठाकुर, शिवसेना हिंद पंजाब के महामंत्री बब्बू ठाकुर, विहिप जिला विधि प्रमुख एडवोकेट अमन ठाकुर, गौशाला मामून से राकेश महाजन, पूर्व सरपंच राजिंदर सिंह, पंडित राजिंदर सिंह, स्वामी नित्यानंद, अमन बढ़ोई, साबा तड़वाल सहित बड़ी संख्या में सुजानपुर और पठानकोट के हिंदू-सिख नागरिक मौजूद रहे।

     

        अंदर से निकले 400 मजदूर, बांग्लादेशी भी शामिल: निरीक्षण के दौरान जब टीम और प्रतिनिधि अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। बूचड़खाने के भीतर 400 से अधिक बांग्लादेशी और कुछ स्थानीय मजदूर मौजूद थे, जिन्हें तुरंत 3-4 ट्रकों में भरकर बाहर निकाला गया। 

    स्थानीय नेताओं ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन लगातार यह कह रहा था कि यह यूनिट "नॉट रनिंग" यानी बंद है, तो इतनी भारी तादाद में बाहरी लोग अंदर क्या कर रहे थे?

        18 सितंबर को होना था उद्घाटन: मौके पर मौजूद बूचड़खाने के संचालक कुरैशी नामक व्यक्ति ने दावा किया कि उनके पास स्लाटर हाउस से संबंधित सभी जरूरी अनुमतियां मौजूद हैं। उसने बताया कि अंदर नई मशीनरी फिट की जा रही है और इसका 18 सितंबर को औपचारिक उद्घाटन होना तय था।

        अधिकारियों ने मौके पर जड़वाया ताला, दस्तावेज तलब: स्थिति की संवेदनशीलता और बिगड़ते माहौल को देखते हुए मौके पर तैनात एसपीडी विशालजीत सिंह, डीएसपी धारकलां राजेश कक्कड़, डीएसपी देहाती सुखजिंदर सिंह, थाना प्रभारी शाहपुरकंडी मोहित टाक, थाना प्रभारी सुजानपुर सब-इंस्पेक्टर अरुण कुमार और ट्रैफिक प्रभारी एएसआई ब्रह्म दत्त ने भारी पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाला।

        मजदूरों को तुरंत गेट से बाहर निकाला: डीएसपी राजेश कक्कड़ और डीएसपी सुखजिंदर सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए बूचड़खाने के अंदर मौजूद सभी कर्मचारियों और मजदूरों को तुरंत गेट से बाहर निकाला और स्लाटर हाउस के मुख्य द्वार पर सरकारी ताला लगवा दिया।

        एडवोकेट भानु प्रताप ने भी अहम भूमिका निभाई: पुलिस अधिकारियों ने संचालकों से बूचड़खाने के सभी कागजात व क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जब्त कर उन्हें डिप्टी कमिश्नर के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई में मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन एडवोकेट भानु प्रताप ने भी अहम भूमिका निभाई और ताला लगवाने में सहयोग किया।