Category: राज्य

  • योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, सुशांत गोल्फ सिटी अब LDA के हवाले; अधूरे काम होंगे पूरे

    योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, सुशांत गोल्फ सिटी अब LDA के हवाले; अधूरे काम होंगे पूरे

    लखनऊ
    राजधानी की पहली हाईटेक टाउनशिप सुशांत गोल्फ सिटी में घर व दुकान खरीदारों को बड़ी राहत देने वाली खबर है। यह अहम परियोजना अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के हाथ होगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में एलडीए को हाईटेक टाउनशिप टेकओवर करने पर मुहर लग गई है। इतना ही नहीं सरकार विकास कार्य व देनदारियों के लिए 2912 करोड़ रुपये की धनराशि भी देगी।

    मेसर्स अंसल प्रापर्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर (अंसल एपीआइ) की अधूरी आवासीय परियोजना को लेकर पिछले डेढ़ साल से उहापोह का माहौल रहा। राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस मामले की सुनवाई हुई। अब खरीदारों को राहत देने का रास्ता प्रदेश सरकार ने निकाला है।

    अधूरी परियोजना को पूरा कराने का विस्तृत प्रस्ताव एलडीए ने तैयार किया। उसी प्रस्ताव पर कैबिनेट में मंथन करने के बाद निर्णय लिया गया कि हाईटेक टाउनशिप के तहत अंसल एपीआइ को लाइसेंस दिया गया था, अब स्वीकृत परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण टेकओवर करते हुए उसे पूरा कराने का प्रस्ताव एनसीएलटी के समक्ष प्रस्तुत करे।

    यह भी चर्चा हुई कि प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस परियोजना की अधिकतम देनदारी करीब 2912 करोड़ रुपये है, लेकिन इसकी वास्तविक देयता सीआइआरपी यानि कारपोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया से ही तय होगी।

    देनदारियों के भुगतान के लिए आवश्यक धनराशि प्राधिकरण को सीड कैपिटल यानि शुरुआती धन दिया जाएगा। एलडीए के टेकओवर करने से होम बायर्स में विश्वास पैदा होगा। रियल एस्टेट क्षेत्र व निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार का सृजन तेजी से बढ़ेगा।

    यह होंगे तत्काल लाभ
    इस कदम से 5000 होम बायर्स यानि घर-दुकान खरीदारों की समस्या का समाधान हो सकेगा। साथ ही टाउनशिप की शेष अवस्थापना सुविधाओं व उपयोगिताओं का विकास संभव होगा।

    बंधक व ग्राम समाज की भूमि किसी तीसरे पक्ष को देने की जगह अब लखनऊ विकास प्राधिकरण को दी जाएगी, ताकि सरकार के भूमि की रक्षा होगी और भविष्य में शासकीय विभागों की देनदारियां पूरी की जा सकेंगी। परियोजना पूरी होने से शहर का सुनियोजित विकास होगा। अब फिर से परियोजना में विकास कार्य शुरू होंगे।

    यह है मामला
    अंसल एपीआइ ने आइएल एंड एफएस फाइनेंशियल सर्विसेज से मार्च 2016 में 50 करोड़ और नवंबर 2016 में 100 करोड़ रुपये ऋण लिया था, खाता एनपीए होने से ब्याज सहित बकाया बकाया 257 करोड़ रुपये पहुंचने पर फाइनेंस कंपनी ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) में याचिका दाखिल की थी।

    एनसीएलटी ने 25 फरवरी 2025 को अंसल ग्रुप को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए आइआरपी (रिसीवर) नवनीत कुमार गुप्ता को नियुक्त किया था। यह आदेश को राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में होम बायर्स ने चुनौती दी।

    एनसीएलएटी ने होम बायर्स का पक्ष स्वीकार करके एनसीएलटी में एलडीए का पक्ष सुनने का आदेश दिया। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई लेकिन, शीर्ष कोर्ट ने एनसीएलएटी के आदेश को सही माना। एनसीएलटी में अब 23 सितंबर को सुनवाई होनी है।

  • बिहार के 15 जिलों में बाढ़ का कहर, 55 हजार हेक्टेयर जमीन प्रभावित; शिवराज करेंगे हवाई सर्वेक्षण

    बिहार के 15 जिलों में बाढ़ का कहर, 55 हजार हेक्टेयर जमीन प्रभावित; शिवराज करेंगे हवाई सर्वेक्षण

     पटना
     केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह के नेतृत्व में एक केंद्रीय टीम बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर ब‍िहार पहुंचे।

    भोपाल से विशेष विमान से पटना हवाईअड्डा पहुंचने के बाद वे सीएम सम्राट चौधरी के साथ हाजीपुर पुलिस लाइन से सड़क मार्ग से राघोपुर प्रखंड के तेरसिया दियारा पहुंचे।

    यहां एसडीआरएफ के बोट और ट्रैक्टर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान कई अधिकारी मौजूद है।

    सारण जिला में दिघवारा और पटना जिला में मनेर के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। दोपहर में पटना में बैठक कर आपदा प्रबंधन और बाढ़ राहत कार्यों की जानकारी लेंगे।

    भागलपुर से पटना लौटने के बाद जाएंगे कोलकाता
    उसके बाद मुंगेर के लिए रवाना हो जाएंगे। वहां से बाढ़ का निरीक्षण करते हुए भागलपुर पहुंचेंगे। भागलपुर राजकीय अतिथिशाला में रात्रि विश्राम करेंगे।

    गुरुवार दोपहर तक पटना लौंटेंगे। और उसी दिन 12:40 बजे इंडिगो की फ्लाइट से कोलकाता के लिए प्रस्थान कर जाएंगे।

    बहरहाल 15 जिलों (पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, अरवल) के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतें बाढ़ प्रभावित हैं।

    इनके अंतर्गत लगभग 49.72 लाख लोग और 55 हजार हेक्टेयर भूमि बाढ़ प्रभावित हुई है। राज्य सरकार की ओर से राहत-बचाव का काम चल रहा है। वैसे सरकार बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    नदियों में उतार-चढ़ाव: केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, डुमरिया घाट पर गंडक, बलतारा एवं कुर्सेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, पटना के दीघा, गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर एवं कहलगांव में गंगा, श्रीपालपुर में पुनपुन, बेनीबाद में बागमती एवं दरौली में घाघरा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

    कुछ स्थानों पर नदियों का जलस्तर स्थिर रहने या फिर घटने की संभावना है। मुख्य रूप से वीरपुर बराज पर कोसी का जलस्तर स्थिर तो बाल्मीकिनगर बराज पर गंडक के जलस्तर में गिरावट पाई गई। हालांकि, इंद्रपुरी बराज पर सोन के जलस्तर में वृद्धि भी देखने को मिली है।

    वर्या और पूर्वानुमान : राज्य में सितंबर में अब तक 112.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से लगभग छह प्रतिशत अधिक है।

    हालांकि, एक जून से 14 सितंबर तक सामान्य से 27 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इसके बावजूद बाढ़ का कारण नेपाल से आने वाली नदियां और बिहार मेंं नदियों में गाद का भर जाना है।

    बिहार मौसम सेवा केंद्र का पूर्वानुमान है कि अगले दो दिनों में राज्य के अनेक स्थानों पर बहुत हल्की से मध्यम स्तर की वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

    आपदा प्रबंधन विभाग का दावा
        1089 कम्युनिटी किचन से लगभग 147.73 लाख लोगों को सुबह-शाम का भोजन कराया जा चुका है।
        13 राहत शिविरों में 11,508 बाढ़ शरणार्थियों के लिए आवासन, भोजन, चिकित्सा आदि की व्यवस्था है।
        1358 सरकारी नावें चलाई जा रहीं पूरे राज्य में, एसडीआरएफ की 27 व एनडीआरएफ 10 टीमें तैनात हैं।
        4.11 लाख पालीथीन शीट, 78,700 ड्राई राशन पैकेट, 1400 फूड पैकेट का अब तक वितरण हुआ है।
        14,251 क्विंटल पशुचारा का वितरण हो चुका है पशुपालकों के बीच। सूखा व हरा चारा की व्यवस्था है।

    बाढ़ सहायता राश‍ि के पांच पहलू
        बाढ़ से प्रभावित : 15 जिले, 88 प्रखंड, 575 ग्राम पंचायत, 2,642 गांव तथा 21 शहरों के 136 वार्ड। 50 लाख लोग तथा 55 हजार हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित है।
        सभी को सहायता : मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी प्रभावित परिवार राहत से वंचित न रहे। छूटे हुए परिवारों को एक सप्ताह के भीतर सूची में जोड़ने का निर्देश।
        राहत व बचाव : एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 21 टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। स्थिति सामान्य होने तक राहत-बचाव कार्य जारी रहेगा।
        पुनर्निर्माण हो बेहतर :'बिल्ड बैक बेटर दैन बिफोर'' (पहले से बेहतर बनाना) की थीम पर पुनर्निर्माण एवं पुन:-प्राप्ति कार्य किए जाएंगे। सभी पुन:-प्राप्ति कार्य एक माह के भीतर पूरे करने का निर्देश।
        क्षति का आकलन : बुधवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रस्तावित दौरे के मद्देनजर अधिकारियों को क्षति का समुचित आकलन कर रिपोर्ट तैयार रखने का निर्देश।

     

  • पंचायत चुनाव से पहले साइबर फ्रॉड का खुलासा, AI से तैयार फर्जी पत्र ने मचाया भ्रम

    पंचायत चुनाव से पहले साइबर फ्रॉड का खुलासा, AI से तैयार फर्जी पत्र ने मचाया भ्रम

    जयपुर
    राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनाव 2026 को लेकर चुनावी माहौल गर्माया हुआ है, लेकिन इस बीच एक गंभीर और सनसनीखेज साइबर जालसाजी का मामला भी सामने आया है। दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का एक ऐसा आधिकारिक दिखने वाला पत्र तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्यों, सरपंचों और वार्ड पंचों की आरक्षण लॉटरी अब 11 और 13 अक्टूबर 2026 को निकाली जाएगी। इस वायरल लेटर ने राज्य के लाखों ग्रामीण मतदाताओं, सरपंच पद के दावेदारों और प्रशासनिक हलकों में भारी भ्रम फैला दिया है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह (IAS) और पंचायती राज विभाग ने तुरंत स्थिति स्पष्ट करते हुए इस पत्र को पूरी तरह फर्जी और एआई तकनीक से तैयार किया गया साइबर फ्रॉड करार दिया है। विभाग ने साफ किया है कि अभी आरक्षण लॉटरी की कोई भी नई तारीख तय नहीं की गई है और आम जनता को ऐसे किसी भी असत्यापित पत्र पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

    मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने की पत्र के 'फ़र्ज़ी' होने की पुष्टि
    जानकारी में सामने आया है कि चुनावी मौसम का फायदा उठाकर किसी असामाजिक तत्व द्वारा एआई टूल्स का गलत इस्तेमाल करके तैयार किए गए इस फर्जी पत्र में बाकायदा शासन सचिव डॉ. जोगा राम के नाम और फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया है। पत्र में सरकारी पत्रांक संख्या 24 (30) परावि/विधि/आरक्षण/2026/79 और दिनांक 15/09/2026 अंकित करके इसे सभी जिला कलेक्टरों और उपखंड अधिकारियों को संबोधित दिखाया गया है।

    सोशल मीडिया पर व्हाट्सएप ग्रुपों, फेसबुक और एक्स (ट्विटर) पर जैसे ही यह आदेश वायरल हुआ, ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे स्थानीय नेताओं के बीच होड़ मच गई। लेकिन जब इस पत्राचार की सत्यता की जांच की गई, तो विभाग के रिकॉर्ड में ऐसा कोई आदेश जारी होने की बात पूरी तरह नकार दी गई।

    मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने अधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, "यह पत्र पूरी तरह फर्जी है। पंचायती राज विभाग द्वारा पंचायती राज संस्थाओं की लॉटरी की नई तिथियां अभी निर्धारित नहीं की गई हैं। जल्द ही आधिकारिक बैठक के बाद सही तिथियों का ऐलान किया जाएगा।"

    वायरल फर्जी पत्र : गुमराह करने वाले दावे
    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस फर्जी सरकारी लेटर में हाई कोर्ट के पुराने आदेशों और नगरीय निकाय चुनाव की आचार संहिता का हवाला देकर लोगों को चकमा देने की कोशिश की गई थी:

    11 अक्टूबर का फर्जी दावा: वायरल पत्र में लिखा गया था कि जिला स्तर पर (जिला परिषद सदस्य, प्रधान एवं पंचायत समिति सदस्य) की आरक्षण लॉटरी 11 अक्टूबर 2026 को निकाली जाएगी।

    13 अक्टूबर का भ्रामक दावा: उपखंड स्तर पर (सरपंच एवं वार्ड पंच) पदों के लिए आरक्षण लॉटरी 13 अक्टूबर 2026 को आयोजित करने की बात कही गई थी।

    15 नवंबर की डेडलाइन का हवाला: पत्र में यह भी दर्शाया गया था कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार राज्य सरकार 15 नवंबर 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने के लिए संकल्पबद्ध है।

    विभागीय प्रतिलिपि की नकल: पत्र के नीचे बाकायदा मुख्य सचिव, महाधिवक्ता और जिला परिषद सीईओ को प्रतिलिपि भेजने का नाटक रचा गया था, ताकि कोई भी इसे पहली नजर में फर्जी न समझ सके।

    AI से तैयार हो रहे फर्जी सरकारी दस्तावेज
    राजस्थान में पिछले कुछ समय से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके फर्जी सरकारी लेटरहेड, डिजिटल साइन और फर्जी लेटर तैयार करने के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

    गंभीर कानूनी अपराध: किसी सरकारी विभाग के नाम से फर्जी आदेश बनाना और उस पर आईएएस अधिकारी के हस्ताक्षर स्कैन करके लगाना भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत गैर-जमानती अपराध है।

    जांच शुरू: राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने वायरल लेटर के ओरिजिनल सोर्स और इसे सबसे पहले शेयर करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच शुरू कर दी है।

    सख्त कार्रवाई की चेतावनी: फर्जी पत्र तैयार करने और अफवाह फैलाने वाले उपद्रवियों के खिलाफ कड़ा मामला दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की तैयारी की जा रही है।

    ग्रामीण दावेदारों में बढ़ा असमंजस
    राजस्थान के ग्रामीण अंचल में सरपंच और पंचायत समिति सदस्य बनने का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए आरक्षण लॉटरी बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब तक आरक्षण की स्थिति साफ नहीं होती, प्रत्याशी अपनी रणनीति नहीं बना पाते।

    पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक राज्य निर्वाचन आयोग और विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, तब तक सोशल मीडिया पर तैर रही किसी भी तारीख पर विश्वास न करें।

    गांव-ढाणी के मतदाताओं और जनप्रतिनिधियों से अपील की गई है कि वे किसी भी असत्यापित पत्र को आगे व्हाट्सएप ग्रुपों में फॉरवर्ड न करें।

    कब घोषित होंगी पंचायती राज चुनाव की असली तारीखें?
    पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 17 और 18 सितंबर 2026 को आरक्षण लॉटरी निकाली जानी थी, जिसे नगरीय निकाय चुनावों की व्यस्तता के चलते फिलहाल स्थगित करने की तैयारी की जा रही है।

    राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग की उच्चस्तरीय बैठक के बाद बहुत जल्द आरक्षण लॉटरी की आधिकारिक और नई समय-सारिणी जारी की जाएगी। आयोग का लक्ष्य है कि पारदर्शी तरीके से आरक्षण लॉटरी निकालकर निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराए जाएं।

     

  • हरियाणा में गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण की फाइल आगे बढ़ी, हाईकोर्ट आदेशों की होगी समीक्षा

    हरियाणा में गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण की फाइल आगे बढ़ी, हाईकोर्ट आदेशों की होगी समीक्षा

     चंडीगढ़
    हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे करीब 12 हजार गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण की मांग पर प्रदेश सरकार के स्तर पर अब प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ 31 अगस्त को हुई बैठक के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले को आगे परीक्षण के लिए भेज दिया है। इससे लंबे समय से नियमितीकरण की राह देख रहे अतिथि अध्यापकों को उम्मीद बंधी है कि सरकार इस मुद्दे का व्यावहारिक समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

    मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता ने सीएम के उप प्रधान सचिव यशपाल यादव को गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण से जुड़े मामले को मार्क किया है। इसमें हाई कोर्ट के आदेश और नियमितीकरण की प्रक्रिया से संबंधित पूरी रिपोर्ट तैयार करने तथा मुख्यमंत्री को इससे अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित पत्र पर 15 सितंबर की तारीख अंकित है। ऐसे में अब अधिकारियों के स्तर पर मामले के कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा।

    दरअसल, 31 अगस्त को विधानसभा सत्र के बाद विधानसभा सचिवालय परिसर में मुख्यमंत्री के साथ गेस्ट टीचरों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई थी। इसमें शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण से जुड़े हाई कोर्ट के आदेश और उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग का मुद्दा प्रमुखता से रखा था।
    यह वीडियो भी देखें

    मुख्यमंत्री ने मामले में अंतिम स्तर की बैठक बुलाकर ठोस समाधान निकालने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की ओर से फाइल आगे बढ़ाया जाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    गेस्ट टीचर इससे पहले शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव और निदेशक के साथ भी अपनी मांग उठा चुके हैं। विधानसभा सत्र से पहले उन्होंने सरकार के मंत्रियों और विपक्षी विधायकों को भी ज्ञापन सौंपे थे। विपक्षी विधायकों ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था।

    करीब 20-21 वर्षों की सेवा का हवाला देते हुए गेस्ट टीचर नियमितीकरण को केवल नौकरी का विषय नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा के सम्मान और परिवार के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं।

    अब मुख्यमंत्री कार्यालय से मामला अधिकारियों को भेजे जाने के बाद उनकी नजर अगली बैठक और रिपोर्ट पर है। हालांकि, अभी नियमितीकरण का अंतिम निर्णय होना बाकी है, लेकिन हरियाणा सरकार की ओर से मामले का दोबारा सक्रियता से परीक्षण शुरू होना गेस्ट टीचरों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

     

  • रोपड़ का तीसरा यूनिट बंद, पंजाब में बिजली संकट पर आज शिअद का प्रदर्शन

    रोपड़ का तीसरा यूनिट बंद, पंजाब में बिजली संकट पर आज शिअद का प्रदर्शन

    पटियाला
     राज्य में भीषण गर्मी के बीच बिजली की खपत नित नए रिकॉर्ड बना रही है, लेकिन दूसरी ओर बिजली उत्पादन व्यवस्था चरमराती दिख रही है। पटियाला से मिली जानकारी के अनुसार, बिजली संकट से जूझ रहे पावरकॉम को एक और बड़ा झटका लगा है। बुधवार सुबह रोपड़ थर्मल प्लांट का एक और यूनिट तकनीकी खराबी के कारण अचानक बंद हो गया।

    इस नए संकट के बाद अब रोपड़ थर्मल प्लांट के कुल चार में से तीन यूनिट पूरी तरह से ठप पड़ चुके हैं। कुल 840 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाले इस महत्वपूर्ण प्लांट से इस समय पावरकॉम को महज 120 मेगावाट बिजली ही हासिल हो पा रही है। प्लांट के अधिकांश यूनिट बंद होने से राज्य में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर बेहद बुरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    बिजली जनरेशन कम होने से कई इलाकों में लोगों को अघोषित बिजली कटों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दूसरी तरफ बाजारों में सप्लाई लाइन ठीक न होने से रोजाना तारों में स्पार्किंग हो रही है। घंटों तक बिजली बंद रहती है।

    लुधियाना के चौड़ा बाजार स्थित हजूरी रोड पर मंगलवार देर रात तारों में भयानक स्पार्किंग हुई और इलाके की लाइट गुल हो गई। सुबह तक इलाके में बिजली गुल रही। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लग रहे बिजली कटों के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल आज डिप्टी कमिश्नर दफ्तर लुधियाना में प्रदर्शन करेगा।

    राहत: प्राइवेट सेक्टर के दोनों थर्मल प्लांट एक्टिव
    दूसरी तरफ, राहत की बात केवल इतनी है कि प्राइवेट सेक्टर के दोनों बड़े थर्मल प्लांट, यानी राजपुरा और तलवंडी साबो, अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि, सरकारी प्लांट के यूनिट बार-बार ठप होने से बिजली की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है।

    मांग तोड़ रही रिकॉर्ड
    गौरतलब है कि मौजूदा सीजन में राज्य के भीतर बिजली की मांग 17,300 मेगावाट से भी ऊपर पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा राज्य के पावर सेक्टर के इतिहास में अब तक किसी एक दिन की सबसे ज्यादा मांग का नया रिकॉर्ड है।

    इतनी भारी मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम को अब मुख्य रूप से सेंट्रल सेक्टर से बिजली की भारी खरीद पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अगर जल्द ही रोपड़ प्लांट के खराब यूनिट्स को ठीक नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आम जनता को लंबे पावर कट का सामना करना पड़ सकता है।

    पंजाब में बिजली की डिमांड-सप्लाई व जनरेशन के बारे में जानिए…

        प्राइवेट प्लांटों में पूरी कैपेसिटी से बन रही बिजली: पंजाब में प्राइवेट थर्मल प्लांटों से बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 3,380 मेगावाट है। इसमें से 1,980 मेगावाट बिजली का उत्पादन तलवंडी साबो थर्मल प्लांट के 3 यूनिटों में होता है। प्रत्येक यूनिट में 660 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।
        1,300 मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही
    : तलवंडी साबो में आजकल कुल 1,700 मेगावाट के आसपास बिजली पैदा हो रही है। वहीं, दूसरा प्राइवेट थर्मल प्लांट राजपुरा में है, जिसमें दो यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल क्षमता 1,400 मेगावाट है। इसमें आजकल 1,300 मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही है।

        तीन में से एक प्लांट की स्थिति चिंताजनक: पंजाब में 3 सरकारी थर्मल प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 2,300 मेगावाट बिजली उत्पादन की है। रोपड़ थर्मल प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 840 मेगावाट है। इसमें 4 यूनिट हैं। दो यूनिट कल से बंद हैं। जो दो यूनिट चालू हैं, वे भी पूरी क्षमता से नहीं चल रहे।

        लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में कुल 4 यूनिट: रोपड़ में कुल 200 मेगावाट के करीब बिजली का उत्पादन हो रहा है। वहीं, लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में कुल 4 यूनिट हैं। आज चारों यूनिट चल रहे हैं। इसकी कुल क्षमता 920 मेगावाट है और आज यहां 805 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। गोइंदवाल में तीसरा सरकारी थर्मल प्लांट है, जिसमें 2 यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल क्षमता 520 मेगावाट है। आज एक यूनिट में करीब 430 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

        हाइड्रो प्रोजेक्टों से मदद मिल रही: पंजाब में छोटे-बड़े हाइड्रो प्रोजेक्टों से रात में 830 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है और दिन में इसे घटाकर 500 मेगावाट के आसपास रखा जा रहा है। बिजली संकट को कम करने में हाइड्रो प्रोजेक्टों का इस समय अहम योगदान निभा रहा है।

        सोलर प्रोजेक्ट से रात में बिजली नहीं बन रही: पंजाब में सोलर प्रोजेक्ट्स के जरिए दोपहर के समय 450 मेगावाट के करीब बिजली का उत्पादन हो रहा है। रात के समय सोलर प्रोजेक्ट्स से बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा है, जिसकी वजह से रात के समय बिजली संकट ज्यादा गहरा रहा है।

        केंद्रीय पूल से बड़ी मात्रा में बिजली खरीद: पंजाब में इन दिनों बिजली की डिमांड 16,000 मेगावाट के पार चल रही है। एक तरफ बिजली की डिमांड बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ उत्पादन में कमी आ रही है। डिमांड और उत्पादन के गैप को कम करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) केंद्रीय पूल से बिजली ले रहा है।

        महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर: PSPCL केंद्रीय पूल से करीब 11,700 मेगावाट तक बिजली खरीद रहा है। PSPCL को केंद्रीय पूल से महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बिजली कट लग रहे हैं। आगे स्थिति और खराब हुई तो लोगों को गर्मी में बिजली के लंबे कटों का सामना करना पड़ेगा।

    बाजार में स्पार्किंग से आग लगने का खतरा हजूरी रोड के दुकानदार मोहित का कहना है कि पूरी मार्केट में तारों का जाल बिछा हुआ है। हल्की सी हवा या बरसात होती है तो स्पार्किंग शुरू हो जाती है। उनका कहना है कि कई बार अफसरों को इसकी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। यह पूरी मार्केट कपड़ों की है। इस तरह स्पार्किंग होने से कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने बताया कि देर रात से सुबह तक बिजली सप्लाई बंद रही। अफसरों को फोन कर रहे हैं, तो वे फोन नहीं उठा रहे।

  • दिल्ली में बदलने लगा मौसम का मिजाज, 18 सितंबर के बाद शुष्क होगा मौसम

    दिल्ली में बदलने लगा मौसम का मिजाज, 18 सितंबर के बाद शुष्क होगा मौसम

    नई दिल्ली
    राजधानी में मॉनसून की विदाई के लिए मौसम की परिस्थितियां अब बदलने लगी हैं। पिछले कुछ दिनों से तापमान बढ़ रहा है, नमी घट रही है और मौसम धीरे-धीरे शुष्क हो रहा है। स्काईमेट के अनुसार, अगले हफ्ते दिल्ली से मॉनसून की वापसी हो सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 18 सितंबर के बाद बारिश की गतिविधियां काफी कम हो जाएंगी।

    • मंगलवार को उमस की वजह से तेज गर्मी महसूस हुई। दिनभर धूप-छांव का दौर चलता रहा और कुछ इलाकों में बूंदाबांदी हुई।
    • अधिकतम तापमान 35.1 डिग्री रहा, जो सामान्य से 1.3 डिग्री अधिक है। न्यूनतम तापमान 27.2 डिग्री रहा, यह सामान्य से 2.1 डिग्री अधिक है।
    • रिज में बूंदाबांदी हुई, जबकि गुरुग्राम में 0.5 एमएम बारिश दर्ज की गई। अन्य इलाकों में मौसम शुष्क रहा। नमी का स्तर 61 से 87 प्रतिशत के बीच रहा।

    18 सितंबर के बाद बारिश कम होने की संभावना है
    बुधवार को बादल छाए रहने और कुछ जगहों पर बूंदाबांदी की संभावना है। अधिकतम तापमान 34 और न्यूनतम 24 डिग्री के आसपास रह सकता है। 17 सितंबर को भी हल्की बारिश हो सकती है। 18 सितंबर से मौसम के शुष्क होने की संभावना है। 18 से 21 सितंबर के बीच आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। इस दौरान अधिकतम तापमान 33 से 36 और न्यूनतम 23 से 26 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। आने वाले दिनों में तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है। बारिश की गतिविधियां कम होने के साथ दिन में गर्मी और उमस फिर बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून की विदाई के साथ दिल्ली में मौसम शुष्क होने लगेगा।

  • रांची की 5.13 एकड़ जमीन का म्यूटेशन बरकरार, हाईकोर्ट ने निजी पक्षों को दी छूट

    रांची की 5.13 एकड़ जमीन का म्यूटेशन बरकरार, हाईकोर्ट ने निजी पक्षों को दी छूट

     रांची
     झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने रांची के नामकुम अंचल स्थित 5.13 एकड़ जमीन के म्यूटेशन से जुड़े मामले में फैसला सुनाते हुए एकल पीठ के आदेश को रद कर दिया।

    खंडपीठ ने रॉबर्ट एंथनी बारला की ओर से दायर अपील को स्वीकार करते हुए 15 अक्टूबर 2025 के फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें एकल पीठ ने उपायुक्त, भूमि सुधार उप-समाहर्ता और अंचल अधिकारी के म्यूटेशन के आदेशों को रद कर दिया गया था। खंडपीठ ने निजी प्रतिवादियों को संबंधित जमीन को लेकर लंबित टाइटल सूट में अपना दावा रखने की छूट दी है।

    मामला रांची के मौजा-गुंडू, थाना-हटिया की खाता संख्या 16 की जमीन से संबंधित है। कुल 26.53 एकड़ जमीन वर्ष 1944 में विरोनिका तिर्की ने रजिस्टर्ड सेल डीड के माध्यम से खरीदी थी। इसमें से 8.80 एकड़ जमीन रोमन कैथोलिक मिशन को दान कर दी गई।

    विरोनिका तिर्की की वर्ष 1983 में मृत्यु के बाद उनके चार पुत्रों ने शेष 17.73 एकड़ जमीन का पारिवारिक बंटवारा कर लिया। इसमें 5.13 एकड़ जमीन जॉन फ्रांसिस कुजूर के हिस्से में आई। जॉन फ्रांसिस कुजूर की मृत्यु के बाद वर्ष 1992 में उक्त जमीन का सक्सेशन म्यूटेशन उनकी पत्नी डॉ. लुईसा बारला कुजूर के नाम हुआ। उनके नाम म्यूटेशन को रद कराने के लिए जान के भाइयों ने जमाबंदी केस दायर किया था, जिसे वर्ष 2007 में खारिज कर दिया गया।

    डॉ. लुईसा बारला कुजूर की मृत्यु के बाद उनके कथित दत्तक पुत्र राबर्ट एंथनी बारला ने जमीन के लिए सक्सेशन म्यूटेशन का आवेदन दिया। नामकुम के अंचल अधिकारी ने 16 जनवरी 2017 को म्यूटेशन उनके नाम कर दिया। इसके खिलाफ अपील और रिवीजन भी खारिज हो गई। निजी प्रतिवादियों की ओर से दायर रिट याचिका पर एकल पीठ ने राजस्व अधिकारियों के तीनों आदेशों को रद कर दिया था।

    अदालत ने रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि एकल पीठ ने इस तथ्य को गलत समझा कि राबर्ट बारला के पक्ष में म्यूटेशन ट्रांसफर के आधार पर किया गया था। जबकि म्यूटेशन आवेदन और संबंधित दस्तावेजों से स्पष्ट था कि आवेदन सक्सेशन म्यूटेशन के लिए किया गया था।

    अदालत ने कहा कि म्यूटेशन केस में 16 जनवरी 2017 के आदेश में जमीन को बेचने और सेल डीड का उल्लेख होना टाइपिंग या अनजाने में हुई त्रुटि प्रतीत होती है। राजस्व कर्मचारी की रिपोर्ट में भी राबर्ट बारला को लुईसा बारला कुजूर का एकमात्र कानूनी उत्तराधिकारी और जमीन पर कब्जे में बताया गया था। इसी रिपोर्ट के आधार पर अंचल अधिकारी ने म्यूटेशन किया था।

  • EV से सफर होगा आसान, राजस्थान में 250 चार्जिंग स्टेशन के मेगा प्रोजेक्ट की तै

    EV से सफर होगा आसान, राजस्थान में 250 चार्जिंग स्टेशन के मेगा प्रोजेक्ट की तै

    जयपुर
    राजस्थान में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चलाने वाले चालकों और लंबे सफर पर निकलने वाले यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RRECL) ने राज्य में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए एक मेगा प्रोजेक्ट तैयार किया है। इस योजना के पहले चरण के तहत राजस्थान के 6 बड़े शहरों और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर 250 नए ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य न केवल राजस्थान में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है, बल्कि चार्जिंग स्टेशन से होने वाली आय को राज्य सरकार के राजस्व मॉडल से जोड़ना भी है।

    निकाय चुनाव की आचार संहिता समाप्त होते ही इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने का काम तेजी से शुरू कर दिया जाएगा, जिससे आने वाले दिनों में वाहन चालकों को बैटरी खत्म होने की चिंता से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।

    गौरतलब है कि राजस्थान में तेजी से बढ़ रही इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर, 3-व्हीलर और 4-व्हीलर गाड़ियों की संख्या को देखते हुए चार्जिंग प्वाइंट्स की किल्लत एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। विशेषकर हाईवे पर सफर करते समय चालकों को हमेशा बैटरी डिस्चार्ज होने का डर सताता रहता था। इसे ध्यान में रखते हुए रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन ने निजी एजेंसियों के साथ मिलकर पीपीपी (PPP) मॉडल पर काम करने की रणनीति बनाई है।

    योजना के मुताबिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा रियायती दर पर सरकारी जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही, टेंडर प्रक्रिया में उन निजी कंपनियों या एजेंसियों को प्राथमिकता दी जाएगी जो चार्जिंग से होने वाले कुल राजस्व में राज्य सरकार को सबसे ज्यादा हिस्सेदारी की पेशकश करेंगी।

    रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन ने पहले चरण में उन मार्गों और शहरों को प्राथमिकता दी है जहां व्यावसायिक और निजी वाहनों की आवाजाही सबसे ज्यादा रहती है।

    जयपुर-आगरा हाईवे: पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण इस रूट पर प्रमुख जगहों पर चार्जिंग प्वाइंट्स बनाए जाएंगे।

    जयपुर-कोटा रूट: हाड़ौती अंचल को राजधानी से जोड़ने वाले इस व्यस्त मार्ग पर ईवी चालकों को हर कुछ किलोमीटर पर चार्जिंग की सुविधा मिलेगी।

    जयपुर-बीकानेर हाईवे: शेखावाटी और पश्चिमी राजस्थान को जोड़ने वाले इस लंबे रूट पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

    जयपुर-अजमेर-सिरोही रूट: धार्मिक पर्यटन और गुजरात सीमा की ओर जाने वाले इस सबसे बड़े हाईवे कॉरिडोर पर चार्जिंग स्टेशनों का मजबूत नेटवर्क तैयार होगा।

    धार्मिक और पर्यटन स्थल: प्रमुख हाईवे के अलावा खाटूश्यामजी, सालासर बालाजी, पुष्कर और नाथद्वारा जैसे भारी फुटफॉल वाले धार्मिक स्थलों पर भी ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

    80 प्रतिशत तक सब्सिडी, सरकार तय करेगी चार्जिंग रेट
    इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए राजस्थान सरकार ने इस योजना में भारी सब्सिडी का प्रावधान रखा है।

    भूमि और सब्सिडी मॉडल: चार्जिंग स्टेशन के निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 70 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इसमें राज्य सरकार और भूमि उपलब्ध कराने वाले संबंधित विभाग का शेयर शामिल होगा।

    सरकारी नियंत्रण में रहेंगे रेट: निजी कंपनियों को काम मिलने के बावजूद वाहन चालकों से मनमाना पैसा नहीं वसूला जा सकेगा। चार्जिंग की दरें (Rates) पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की जाएंगी और कोई भी कंपनी तय दर से अधिक राशि नहीं वसूल पाएगी।

    सरकारी जमीन का आवंटन: सभी चार्जिंग स्टेशनों के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन और चिह्नीकरण पूरा किया जा चुका है, जिससे काम शुरू करने में देरी न हो।

    2030 तक ईवी बिक्री में 30% हिस्सेदारी का लक्ष्य
    भारत और राजस्थान का ईवी बाजार आने वाले वर्षों में एक बड़ा आर्थिक बदलाव देखने वाला है। राष्ट्रीय स्तर पर तय किए गए लक्ष्यों के अनुरूप राजस्थान भी अपनी ईवी नीतियों को लागू कर रहा है।

    बाजार का तेजी से विस्तार: भारतीय ईवी बाजार जो वर्ष 2025 में लगभग 3.71 अरब अमेरिकी डॉलर का था, उसके वर्ष 2034 तक बढ़कर 191.04 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

    ईवी बैटरी मार्केट में उछाल: देश में ईवी बैटरी का बाजार वर्ष 2034 तक 15.90 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।

    30% बिक्री का नेशनल टारगेट: केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक कुल नए वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

    13.2 लाख चार्जिंग स्टेशन का लक्ष्य: देश भर में 2030 तक 13.2 लाख चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है, जिसमें राजस्थान एक अग्रणी राज्य के रूप में उभर रहा है।

    क्या पड़ेगा सकारात्मक असर?
    राजस्थान में 250 नए चार्जिंग स्टेशन लगने का सबसे बड़ा फायदा राज्य के उन आम नागरिकों को मिलेगा जो महंगे पेट्रोल और डीजल के विकल्प के रूप में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का मन बना रहे थे।

    चार्जिंग नेटवर्क की कमी के कारण अब तक लोग हाईवे पर ईवी ले जाने से कतराते थे। लेकिन जयपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर और आगरा रूट्स पर फास्ट चार्जिंग प्वाइंट्स उपलब्ध होने से अंतर-शहर यात्रा आसान और सस्ती हो जाएगी। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह कदम राजस्थान में हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के एक नए युग की शुरुआत साबित होगा।

  • यूपी के पीआरडी जवानों को डबल फायदा, ड्यूटी भत्ता बढ़ा; कैशलेस इलाज को मंजूरी

    यूपी के पीआरडी जवानों को डबल फायदा, ड्यूटी भत्ता बढ़ा; कैशलेस इलाज को मंजूरी

    पीआरडी जवानों को योगी सरकार का दोहरा तोहफा, ड्यूटी भत्ता बढ़ा और कैशलेस इलाज को मंजूरी

    500 से बढ़कर 600 रुपये हुआ दैनिक ड्यूटी भत्ता, 27,794 स्वयंसेवकों को मिलेगा लाभ

    हर महीने 3000 रुपये तक बढ़ेगा मानदेय, सरकार उठाएगी 101.44 करोड़ का अतिरिक्त भार

    31,130 पंजीकृत स्वयंसेवकों और आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा का लाभ

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के स्वयंसेवकों के हित में दो महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। सरकार ने पीआरडी स्वयंसेवकों का दैनिक ड्यूटी भत्ता 500 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये प्रतिदिन करने के साथ ही स्वयंसेवकों और उनके आश्रित परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मुख्यमंत्री पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना को भी स्वीकृति दी है। दोनों फैसलों से पीआरडी स्वयंसेवकों को आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा मिलेगी।

    हर महीने 3000 रुपये तक बढ़ेगा मानदेय, सरकार पर 101.44 करोड़ का अतिरिक्त भार
    योगी कैबिनेट के फैसले से 30 दिन की ड्यूटी करने वाले पीआरडी स्वयंसेवक के मानदेय में सीधे 3,000 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि होगी। इससे प्रदेश के 27,794 पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को लाभ मिलेगा। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि भत्ते में वृद्धि से राज्य सरकार पर प्रतिवर्ष 101.44 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। इसके बाद पीआरडी स्वयंसेवकों पर कुल अनुमानित वार्षिक व्यय 6 अरब 8 करोड़ 68 लाख 86 हजार रुपये हो जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के शेष महीनों के लिए अनुपूरक अनुदान से 45 करोड़ रुपये की तत्काल व्यवस्था की गई है।

    31,130 पंजीकृत स्वयंसेवकों और आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा का लाभ
    योगी कैबिनेट ने पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। वर्तमान में पंजीकृत 31,130 पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके आश्रितों को इस योजना का लाभ मिलेगा। प्रति स्वयंसेवक 3,000 रुपये वार्षिक प्रीमियम की दर से योजना पर करीब 9.34 करोड़ रुपये सालाना खर्च का अनुमान है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के शेष महीनों के लिए अनुपूरक अनुदान से 5 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

    साचीज के जरिए लागू होगी योजना, सेवा अवधि तक मिलेगा स्वास्थ्य कवच
    मुख्यमंत्री पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेन्सिव हेल्थ इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से प्रस्तावित है। योजना का लाभ स्वयंसेवक और उनके आश्रितों को सेवा अवधि के दौरान ही मिलेगा। ऐसे स्वयंसेवक अथवा आश्रित, जो पहले से आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना या मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान जैसी केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा पोषित किसी अन्य स्वास्थ्य योजना से आच्छादित हैं, इस योजना के दायरे में शामिल नहीं होंगे।

  • यूपी में महिला वोटबैंक अहम, योगी की महिला उद्यमी योजना से आर्थिक स्वावलंबन पर जोर

    यूपी में महिला वोटबैंक अहम, योगी की महिला उद्यमी योजना से आर्थिक स्वावलंबन पर जोर

    लखनऊ 
    उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नई हवा बह रही है. 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा और निर्णायक मोहरा बनकर उभरी हैं राज्य की महिला वोटर. योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी क्रेडिट योजना के जरिए सीधे 1 करोड़ महिलाओं को साधने की एक ऐसी रणनीति तैयार की है, जिसने सूबे के चुनावी माहौल में गर्मी बढ़ा दी है. जब सीधे महिलाओं के खाते में ब्याजमुक्त एक लाख रुपए पहुंचेंगे तो बीजेपी को उसी जादू के दोहराने की उम्मीद है, जो पिछले साल बिहार चुनाव में देखा गया। 

    उत्तर प्रदेश में पहले से ही कानून-व्यवस्था, एंटी-रोमियो स्क्वाड और सेफ सिटी प्रोजेक्ट्स की वजह से योगी आदित्यनाथ को महिला वोटरों का मजबूत समर्थन मिलता रहा है. लेकिन इस बार बात सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है. अब मुकाबला आर्थिक स्वावलंबन और आधी आबादी की जेब को सीधे राहत पहुंचाने का है. इस नए राजनीतिक दांव को उस समय के साथ जोड़कर देखा जा रहा है जब बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के जरिए एक बड़ा कार्ड खेला था. अब सवाल यह है कि क्या बिहार का वही फॉर्मूला यूपी की सरजमीं पर भी कमाल दिखाएगा?

    आधी आबादी को साधने की यह होड़ अचानक तेज नहीं हुई है. विपक्ष की तरफ से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव लगातार अपनी पत्नी और सांसद डिंपल यादव को आगे करके महिला वोटरों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में योगी आदित्यनाथ का यह मास्टरस्ट्रोक उनके सबसे मजबूत वोटबैंक की नींव को और ज्यादा पक्का करने की ठोस कोशिश माना जा रहा है. हालांकि, योगी आदित्यनाथ और बीजेपी को महिलाओं का एकतरफ समर्थन हासिल रहा है, जिसकी एक झलक 2022 के यूपी चुनाव नतीजों में देखी गई. जहां बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच पुरुषों के वोट प्रतिशत में तो महज 4 फीसदी का अंतर था, लेकिन महिला वोटरों ने योगी के पक्ष में बंपर मतदान किया. बीजेपी को 48 फीसदी महिला वोट मिले थे, जबकि सपा को महज 32 फीसदी। 

    बिहार का वो सबक, जिसने बदल दी सियासत की दिशा
    यूपी और बिहार की जातिगत पॉलिटिक्स कमोबेश एक जैसी ही है. और पेंचीदा भी. जिसमें गारंटी कम, रिस्क ज्यादा है. जातियों को अपने पक्ष में साधने की हर पार्टी कोशिश करती है. ऐसे में बीजेपी ने कई राज्यों में महिला वोटरों के रूप में एक स्थायी वोटबैंक कायम किया है। 

    बिहार के विधानसभा चुनाव 2025 में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना एक ऐसा पासा साबित हुई थी, जिसने पूरे चुनाव का रुख बदल दिया. चुनाव की आहट के साथ ही राज्य के हर परिवार की एक महिला को सीधे बैंक खाते में आर्थिक मदद और रोजगार शुरू करने का ऑफर दिया गया. इस योजना ने सीधे तौर पर गांव-गांव की महिलाओं को सरकार से जोड़ा और जब नतीजे आए तो यह साफ दिखा कि महिला वोट बैंक किस तरह किसी भी दल की किस्मत पलटने का माद्दा रखता है। 

    बिहार के इस सफल मॉडल ने यह साबित कर दिया कि जब महिलाओं को सीधे आर्थिक रूप से सशक्त किया जाता है, तो वे मतदान केंद्र तक जाकर अपनी पसंद जाहिर करने में जरा भी नहीं हिचकतीं. यही वजह है कि यूपी के चुनावी मौसम से ठीक पहले योगी सरकार ने भी इसी राह पर तेजी से कदम आगे बढ़ाए हैं। 

    यूपी की योजना: 1 करोड़ महिलाओं को 1 लाख रुपए का बड़ा आधार
    योगी सरकार की 'महिला उद्यमी क्रेडिट योजना' का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि इसका असर सीधा और व्यापक हो. योजना के तहत उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी करीब 1 करोड़ महिलाओं को 1 लाख रुपए तक का ब्याजमुक्त क्रेडिट उपलब्ध कराने की पूरी तैयारी है। 

    इस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसका आसान और पारदर्शी तरीका है. महिलाओं को बिना किसी ब्याज के तीन किस्तों में पैसे दिए जाएंगे. पहली किस्त 20,000 रुपए की होगी, जिसे दिसंबर से वितरित करने की तैयारी है. इसके बाद समय पर भुगतान करने वाली महिलाओं को 30,000 रुपए और फिर 50,000 रुपए की तीसरी किस्त मिलेगी. यानी कोई कागजी उलझन नहीं, कोई ब्याज का बोझ नहीं और सीधे बैंक खाते में मदद। 

    दोनों योजनाओं में क्या है समानता और क्या है नयापन?
    बिहार की तरह यूपी की योजना का नारा भी वही है- आधी आबादी को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना। 

    समानता की बात करें तो दोनों ही योजनाओं में सरकार की मंशा किसी बिचौलिए के बिना सीधे महिलाओं तक पैसा पहुंचाने की है. दोनों जगहों पर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) का सहारा लिया गया है ताकि एक-एक पाई सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचे. इसके साथ ही दोनों योजनाओं में दिए जाने वाले पैसे को ब्याजमुक्त रखा गया है ताकि महिलाओं पर कर्ज का भारी बोझ न पड़े। 

    हालांकि, यूपी की योजना का दायरा और तरीका थोड़ा अलग है. बिहार जहां एकमुश्त और चरणबद्ध वित्तीय सहायता देने पर केंद्रित था, वहीं यूपी सरकार ने इसे स्वयं सहायता समूहों (SHG) के एक मजबूत नेटवर्क से जोड़ दिया है. यूपी में सरकार का लक्ष्य केवल पैसे बांटना नहीं, बल्कि महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाकर गांव-गांव में छोटे-छोटे कुटीर उद्योग, सिलाई केंद्र, डेयरी उत्पादन और ई-रिक्शा संचालन जैसे कामों से जोड़ना है। 

    कानून-व्यवस्था के भरोसे से आगे आर्थिक आत्मनिर्भरता का सफर
    उत्तर प्रदेश की राजनीति को गहराई से समझने वाले जानते हैं कि 2017 के बाद से योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी ताकत राज्य की कानून-व्यवस्था रही है. सड़कों पर सुरक्षा का माहौल, अपराधियों पर कार्रवाई और सेफ सिटी जैसी योजनाओं ने महिलाओं के बीच योगी सरकार के प्रति एक गहरा विश्वास पैदा किया। 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अक्सर मंचों से इस बात को दोहराते रहे हैं कि महिलाओं की सुरक्षा और उनका स्वावलंबन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अपनी सोच को सामने रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था- 

    "अगर प्रदेश की आधी आबादी को घर के भीतर ही सीमित रखा जाएगा, तो राज्य का विकास अधूरा रहेगा. हमारी सरकार महिलाओं की सुरक्षा से लेकर उनके सम्मान और स्वावलंबन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. जब गांव की हमारी बहनें आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, तो पूरा उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भर बनेगा। 

    यूपी की महिला वोटरों में योगी की ओर से मिला सुरक्षा का भरोसा पहले से मजबूत था, अब उसमें एक लाख रुपए के ब्याजमुक्त क्रेडिट का आर्थिक संबल जोड़कर इस वोटबैंक के इर्द-गिर्द एक अभेद्य किला बनाने की तैयारी है। 

    विपक्ष की चुनौती और डिंपल यादव का फैक्टर
    इस सियासी बिसात पर समाजवादी पार्टी भी शांत नहीं बैठी है. अखिलेश यादव जानते हैं कि अगर 2027 में सत्ता की ओर बढ़ना है तो महिला वोटरों के बीच सेंध लगानी ही होगी. इसके लिए सपा ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है और मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव को महिला संवाद कार्यक्रमों के अग्रिम मोर्चे पर खड़ा कर दिया है। 

    डिंपल यादव लगातार महिलाओं के मुद्दों, महंगाई, रसोई के बजट और महिला सुरक्षा पर योगी सरकार को घेरने की कोशिश कर रही हैं. वे खुद को गांव-देहात की महिलाओं से जोड़कर सपा के पक्ष में एक सॉफ्ट कॉर्नर बनाने में जुटी हैं. अखिलेश यादव का यह दांव काम न कर जाए, इसी आशंका के काट के रूप में योगी सरकार की यह योजना बेहद अहम मानी जा रही है. सपा के भावुक अपीलों वाले दांव के जवाब में भाजपा का यह कदम सीधे आर्थिक राहत देने वाला एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक हमला है। 

    क्या यूपी में दोहराया जाएगा बिहार का करिश्मा?
    उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति हमेशा से जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है. लेकिन हाल के वर्षों में 'महिला वोटबैंक' एक ऐसी कैटेगरी बनकर उभरी है जो जाति और मजहब की दीवारों को तोड़कर वोट करती है। 

    दिसंबर से जब 1 करोड़ महिलाओं के खातों में 20,000 रुपए की पहली किस्त पहुंचनी शुरू होगी, तो इसका सीधा असर गांव-गांव के घरों पर पड़ेगा. एक लाख करोड़ रुपये के विशाल दायरे वाली यह योजना यदि धरातल पर समयबद्ध तरीके से लागू हो जाती है, तो यह चुनाव की पूरी पटकथा को बदलने की क्षमता रखती है। 

    योगी आदित्यनाथ ने अपने शासन के मजबूत पहलू यानी कानून-व्यवस्था के साथ जब इस आर्थिक स्वावलंबन को जोड़ा है, तो यह विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है. बिहार में जिस तरह महिला वोटरों ने सरकार की वापसी का रास्ता साफ किया था, ठीक उसी तर्ज पर यूपी में भी इस योजना को एक 'गेमचेंजर' माना जा रहा है. 2027 की चुनावी जंग में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष के वादे भारी पड़ते हैं या योगी सरकार का यह एक लाख रुपए का ‘आत्मनिर्भरता मॉडल।