Category: राज्य

  • गुरुग्राम-फरीदाबाद समेत 4 जिलों में 775 ANPR कैमरे लगेंगे, पुराने वाहनों पर कसेगा शिकंजा

    गुरुग्राम-फरीदाबाद समेत 4 जिलों में 775 ANPR कैमरे लगेंगे, पुराने वाहनों पर कसेगा शिकंजा

    चंडीगढ़
    हरियाणा के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल सभी शहरों में पेट्रोल पंपों पर परिवहन विभाग आटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाने जा रहा है। यह कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पढ़कर बता देंगे कि वह कितना पुराना है।

    इसके बाद मौके पर ही 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों और दस साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों को जब्त कर लिया जाएगा। पहली अक्टूबर से ऐसे वाहनों को डीजल-पेट्रोल नहीं दिया जाएगा।

    परिवहन मंत्री अनिल विज ने बताया कि प्रस्ताव को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। प्रथम चरण में गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में कुल 775 एएनपीआर कैमरे स्थापित किए जाएंगे, जिन पर लगभग 41 करोड़ 74 लाख रुपये खर्च होंगे।

    30 सितंबर तक गुरुग्राम में 249, सोनीपत में 215, झज्जर में 195 तथा फरीदाबाद में 116 एएनपीआर कैमरे लगाने का लक्ष्य है। जीवन-अवधि पूर्ण कर चुके वाहनों की पहचान तथा पर्यावरणीय मानकों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए एएनपीआर कैमरे लगाने की प्रक्रिया में तेजी लाई गई है।

    विज ने बताया कि यह कार्य वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है। प्रदेश में कुल 2780 एएनपीआर कैमरे लगाए जाने की आवश्यकता है। एक अक्टूबर से हरियाणा में पंजीकृत जीवन-अवधि पूर्ण कर चुके वाहनों को ईंधन की आपूर्ति नहीं की जाएगी।

    सरकार का उद्देश्य केवल एएनपीआर कैमरे स्थापित करना नहीं है, बल्कि इस तकनीक के माध्यम से पुराने एवं जीवन-अवधि पूर्ण कर चुके वाहनों की प्रभावी पहचान करना तथा पर्यावरण संरक्षण से संबंधित निर्धारित प्रावधानों को लागू करना है।

    एएनपीआर तकनीक के माध्यम से वाहनों की पहचान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा तथा एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।

     

  • तीन साल की भूजल पुनर्भरण परियोजना शुरू, एनजीआरआई की तकनीक से चिन्हित होंगे अन्य उपयुक्त स्थान

    तीन साल की भूजल पुनर्भरण परियोजना शुरू, एनजीआरआई की तकनीक से चिन्हित होंगे अन्य उपयुक्त स्थान

    लखनऊ
     योगी सरकार ने प्रदेश में भूजल संरक्षण और लंबे समय की जल सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक तरीके से काम तेज कर दिया है। इसी कड़ी में गंगा-यमुना दोआब में 1.65 करोड़ रुपये की ‘प्रबंधित जलभृत पुनर्भरण (एमएआर) परियोजना’ शुरू की गई है। तीन साल की इस परियोजना के तहत बारिश के पानी को जमीन के अंदर मौजूद जलभृतों (भूमिगत जल भंडार) तक पहुंचाकर भूजल का पुनर्भरण किया जाएगा। परियोजना की सबसे अहम कड़ी कानपुर से प्रयागराज के बीच करीब 200 किलोमीटर लंबी भूमिगत प्राचीन नदी/पैलियोचैनल प्रणाली की पहचान हुई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक ये पुराने नदी मार्ग आज भी जमीन के अंदर पानी के आने-जाने में मददगार हो सकते हैं।

    200 किमी लंबी प्राचीन नदी का मिला रास्ता
    नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक, भूगर्भ जल विभाग डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनसीआरआई) हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक के जरिए गंगा-यमुना दोआब के नीचे मौजूद जलभृतों और प्राचीन नदी प्रणालियों का अध्ययन किया है। इसके लिए हवाई भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और बोरहोल लॉगिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।

    इस अध्ययन में प्रयागराज से कानपुर के बीच करीब 200 किलोमीटर लंबी भूमिगत प्राचीन नदी यानि पैलियोचैनल प्रणाली की पहचान हुई है। आसान भाषा में कहें तो जमीन के नीचे पुराने नदी मार्गों के निशान मिले हैं, जो आज भी भूजल के प्रवाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    जलभृतों तक पहुंचेगा बारिश का पानी
    परियोजना का सीधा उद्देश्य बारिश के पानी को बेकार बहने से रोककर उसे जमीन के अंदर मौजूद जलभृतों तक पहुंचाना है। जलभृत जमीन के नीचे पानी जमा रखने वाली प्राकृतिक परतें होती हैं। इन्हीं से कुओं और नलकूपों के जरिए भूजल मिलता है। वैज्ञानिक अध्ययन से यह समझने में मदद मिलेगी कि बारिश का पानी जमीन के अंदर कहां और किस रास्ते आसानी से पहुंच सकता है। इसी आधार पर पुनर्भरण के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन किया जाएगा।

    छह स्थानों से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
    राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के वित्तीय सहयोग से भूगर्भ जल विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा इस परियोजना को लागू किया जा रहा है। इसकी कुल लागत 1.65 करोड़ रुपये और अवधि तीन वर्ष है। पहले चरण में छह स्थानों का चयन किया गया है। यहां पायलट अध्ययन के साथ भूजल पुनर्भरण की संरचनाएं बनाई जाएंगी। इन संरचनाओं के जरिए पानी को जमीन के अंदर पहुंचाया जाएगा और इसके परिणामों की लगातार निगरानी की जाएगी।

    पहले परिणाम देखे जाएंगे, फिर बढ़ेगा दायरा
    छह पायलट स्थानों पर यह देखा जाएगा कि पुनर्भरण संरचनाओं से भूजल स्तर पर कितना असर पड़ता है और स्थानीय जलभृत बारिश के पानी को किस तरह ग्रहण करता है। इससे यह भी पता चलेगा कि अलग-अलग स्थानों पर कौन-सी पुनर्भरण व्यवस्था ज्यादा प्रभावी रहती है। पायलट चरण से मिलने वाले परिणामों के आधार पर परियोजना को गंगा-यमुना दोआब के दूसरे उपयुक्त स्थानों तक बढ़ाया जाएगा। इससे भविष्य में बड़े क्षेत्र में भूजल पुनर्भरण की योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी।

    नदी और भूजल के संबंध की भी होगी निगरानी
    एनजीआरआई के अध्ययन में गंगा और यमुना नदियों तथा जमीन के अंदर मौजूद प्रमुख जलभृतों के बीच हाइड्रोजियोलॉजिकल संबंध के संकेत मिले हैं। प्राचीन नदी मार्ग भी जलभृतों के भीतर भूजल के प्रवाह के महत्वपूर्ण रास्ते हो सकते हैं। इस परियोजना से नदी, बारिश के पानी, भूजल और प्राचीन नदी मार्गों के बीच संबंध को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी। यही जानकारी आगे भूजल संरक्षण की योजनाओं के लिए उपयोगी होगी।

    वैज्ञानिक निगरानी से मजबूत होगी जल सुरक्षा
    नमामि गंगे, अतिरिक्त परियोजना निदेशक प्रभाष कुमार ने कहा कि परियोजना में एनजीआरआई के तकनीकी सहयोग से भूजल की निगरानी, शोध एवं विकास और पुनर्भरण संरचनाओं के प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। इसके साथ लोगों को भूजल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी।

  • खनन बंद होने के बाद भी मिलेगा रोजगार का सहारा, बिहार सरकार ने DMF नियमावली में किए बदलाव

    खनन बंद होने के बाद भी मिलेगा रोजगार का सहारा, बिहार सरकार ने DMF नियमावली में किए बदलाव

    पटना
     खनन प्रभावित जिलों में अब विकास योजनाओं के साथ स्थानीय लोगों की स्थायी आजीविका और खनन के दुष्प्रभाव कम करने पर जोर रहेगा। राज्य सरकार ने मंगलवार को जिला खनिज फाउंडेशन (संशोधन) नियमावली, 2026 को स्वीकृति दे दी। नई संशोधित नियमावली में जिला खनिज फाउंडेशन के माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।

    खान एवं भू-तत्व विभाग के अनुसार राज्य में जो खनन प्रभावित जिले हैं जैसे रोहतास, गया, जमुई, औरंगाबाद, नवादा, बांका, भोजपुर, सारण, वैशाली और भागलपुर, यहां अब स्थानीय जरूरत के अनुसार विकास एवं कल्याणकारी परियोजनाएं संचालित की जा सकेंगी।

    इन योजनाओं में खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, बच्चों के लिए स्कूल, युवाओं के लिए कम लागत वाले जिम, पुस्तकालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ आम लोगों के हित से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। यहीं नहीं नई नियमावली में खनन के दौरान और उसके बाद होने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए सरकार के स्तर पर क्या कदम उठाए जाएंगे।

    स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने के लिए योजना
    विभाग का दावा है कि सरकार का फोकस इस बात पर है कि खनन बंद होने के बाद भी प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास और लोगों की जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया जाए। खनन से प्रभावित परिवारों की दीर्घकालिक स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने के लिए भी योजनाएं बनाई जाएंगी।

    इससे खनन पर निर्भर लोगों के लिए वैकल्पिक आय के साधन विकसित करने में मदद मिलेगी। संशोधित नियमावली का उद्देश्य जिला खनिज फाउंडेशन की राशि का उपयोग प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना है।

  • कक्षा 3 से 8 तक बदला प्रश्नपत्र, बोर्ड पर सवाल लिखने से बच्चों पर बढ़ा समय का दबाव

    कक्षा 3 से 8 तक बदला प्रश्नपत्र, बोर्ड पर सवाल लिखने से बच्चों पर बढ़ा समय का दबाव

    पटना
    जिले के प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में मंगलवार से कक्षा एक से आठवीं तक की अर्द्धवार्षिक सह-मूल्यांकन परीक्षा शुरू हो गई। इस बार परीक्षा के प्रश्नपत्र के पैटर्न में बदलाव किया गया है। खासकर कक्षा तीन से आठवीं तक के बच्चों को नए पैटर्न में पहले की तुलना में अधिक लिखना पड़ रहा है।

    शिक्षकों के अनुसार बदले हुए प्रश्नपत्र और सीमित समय के कारण बच्चों पर परीक्षा के दौरान समय का दबाव बढ़ गया है।

    50 अंकों की परीक्षा में बदला सवालों का पैटर्न
    कक्षा तीन से आठवीं तक की परीक्षा कुल 50 अंकों की हो रही है। प्रधान शिक्षकों के अनुसार पहले 10 अंकों के 10 प्रश्न पूछे जाते थे।

    इस बार प्रश्नपत्र में पांच-पांच अंकों के तीन प्रश्नों के साथ 15 अंकों के अति लघु उत्तरीय प्रश्न शामिल किए गए हैं। इससे बच्चों को उत्तर लिखने में पहले की अपेक्षा ज्यादा समय लग रहा है।

    बोर्ड पर सवाल लिखने में भी लग रहा समय
    विभिन्न स्कूलों के प्रधान शिक्षकों ने बताया कि प्रश्नपत्र की छपाई के बजाय बोर्ड पर प्रश्न लिखकर परीक्षा ली जा रही है। शिक्षक को परीक्षा के दौरान लगातार सवाल लिखने और फिर उन्हें मिटाने पड़ते हैं।

    दूसरी ओर बच्चों को बोर्ड पर लिखे सवाल देखकर उन्हें अपनी उत्तर पुस्तिका में हल करना होता है। इससे परीक्षा का समय प्रभावित होने की बात शिक्षक बता रहे हैं।

    दो घंटे की परीक्षा, समय को लेकर दबाव
    परीक्षा के लिए बच्चों को कुल दो घंटे का समय दिया जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि बोर्ड पर प्रश्न लिखने में लगने वाला समय भी इसी अवधि में शामिल हो जाता है।

    ऐसे में बच्चों को प्रश्न पढ़ने, समझने और उत्तर लिखने के लिए अपेक्षाकृत कम समय मिल रहा है। शास्त्री नगर के प्रधानाचार्य मधुरेंद्र कुमार मधुप ने बताया कि इस बार बच्चों के लिए परीक्षा लंबी हो गई है और परीक्षा के दौरान समय का दबाव बना रहता है।

    कक्षा एक-दो की मौखिक, तीन से आठवीं की लिखित परीक्षा
    कन्या मध्य विद्यालय लोहिया नगर के प्रधान शिक्षक सुबोध कुमार ओझा के अनुसार पहले दिन कक्षा एक से आठवीं तक हिंदी, उर्दू और बंगला की परीक्षा हुई।

    वहीं कक्षा पांचवीं से आठवीं तक विज्ञान की परीक्षा भी ली गई। कक्षा एक और दो के बच्चों की मौखिक परीक्षा हुई, जबकि कक्षा तीन से आठवीं तक के बच्चों ने लिखित परीक्षा दी।

    19 सितंबर तक चलेगी अर्द्धवार्षिक परीक्षा
    अर्द्धवार्षिक सह-मूल्यांकन परीक्षा 19 सितंबर तक चलेगी। 16 सितंबर को कक्षा एक से आठवीं तक अंग्रेजी तथा कक्षा तीन से आठवीं तक पर्यावरण अध्ययन एवं सामाजिक विज्ञान की परीक्षा निर्धारित है। परीक्षा शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देश के अनुसार कराई जा रही है।

    15 अंकों के अति लघु उत्तरीय प्रश्न भी शामिल
    इस बार प्रश्नपत्र के बदले पैटर्न में 15 अंकों के अति लघु उत्तरीय प्रश्न शामिल किए गए हैं। शिक्षकों के अनुसार प्रश्नों का पैटर्न बदलने और बोर्ड पर प्रश्न लिखकर परीक्षा कराने के कारण दो घंटे की अवधि में बच्चों को पूरा प्रश्नपत्र हल करने में परेशानी हो रही है।

     

  • पंचायत सहायकों के लिए खुशखबरी! यूपी सरकार ने मानदेय में की 50% बढ़ोतरी

    पंचायत सहायकों के लिए खुशखबरी! यूपी सरकार ने मानदेय में की 50% बढ़ोतरी

    लखनऊ
    Panchayat Sahayak Salary Hike: यूपी के पंचायत सहायकों के लिए बड़ी खबर है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों के मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है. अभी तक पंचायत सहायकों को हर महीने 6 हजार रुपये मानदेय मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 9 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाएगा. यानी हर महीने 3 हजार रुपये की बढ़ोतरी होगी. सिर्फ मानदेय ही नहीं, पंचायत सहायकों के लिए सेवा सुरक्षा, कैशलेस उपचार और महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश जैसी सुविधाओं का भी ऐलान किया गया है. आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने और कार्रवाई के चलते हटाए गए पंचायत सहायकों को दोबारा बहाल करने की बात भी कही गई है। 

    पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से बातचीत की. इसके बाद प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पंचायत सहायकों के हित में लिए गए फैसलों की जानकारी दी गई। 

    6 हजार की जगह अब मिलेंगे 9 हजार रुपये
    पंचायत सहायकों को अभी तक 6 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है. सरकार के नए फैसले के बाद यह राशि बढ़कर 9 हजार रुपये प्रति माह हो जाएगी. इस तरह पंचायत सहायकों के मानदेय में सीधे 3 हजार रुपये महीने की बढ़ोतरी होगी. प्रतिशत के हिसाब से देखें तो यह 50 फीसदी की वृद्धि है. इस फैसले का लाभ उत्तर प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को मिलेगा. पंचायत स्तर पर काम करने वाले इन सहायकों के लिए लंबे समय से मानदेय और दूसरी सुविधाओं को लेकर मांगें सामने आती रही हैं. अब सरकार की ओर से मानदेय बढ़ाने के साथ दूसरी मांगों पर भी फैसले किए गए हैं। 

    सीधे बैंक खाते में पहुंचेगा बढ़ा हुआ मानदेय
    अभी पंचायत सहायकों का मानदेय राज्य वित्त आयोग की धनराशि से दिया जाता है. अब इसमें बदलाव किया जाएगा. सरकार की ओर से बताया गया है कि कैबिनेट से स्वीकृति लेकर डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की व्यवस्था लागू की जाएगी. इसके बाद पंचायत सहायकों को मिलने वाला 9 हजार रुपये का मानदेय सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा. इससे मानदेय भुगतान की व्यवस्था सीधे बैंक खाते से जोड़ दी जाएगी. प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को इसका लाभ मिलेगा। 

    प्रधान और पंचायत सचिव मनमाने तरीके से नहीं हटा सकेंगे
    पंचायत सहायकों के लिए सिर्फ मानदेय बढ़ाने का फैसला नहीं हुआ है. सेवा सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है. अब ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अपने स्तर से किसी पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेंगे. पंचायत सहायक को सेवा से हटाने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी. इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाएगी. किसी पंचायत सहायक को हटाने का फैसला यही कमेटी कर सकेगी. यानी पंचायत सहायक की सेवा समाप्त करने का फैसला अब ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव के स्तर पर अकेले नहीं लिया जा सकेगा. इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी की भूमिका होगी। 

    आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे भी होंगे वापस
    पंचायत सहायकों के आंदोलन से जुड़ा एक और बड़ा फैसला किया गया है. सरकार ने बताया है कि आंदोलन के दौरान जिन पंचायत सहायकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा. इसके साथ ही आंदोलन के दौरान कार्रवाई करते हुए जिन पंचायत सहायकों को हटा दिया गया था, उन्हें भी दोबारा बहाल किया जाएगा. इस फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े पंचायत सहायकों को राहत मिलने की उम्मीद है. सरकार ने मानदेय के साथ उनकी सेवा से जुड़े मुद्दे पर भी फैसला लिया है. महिला पंचायत सहायकों के लिए भी सरकार ने अहम सुविधा का ऐलान किया है. अब महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा मिलेगी. इससे महिला कर्मचारियों को मातृत्व के दौरान काम से संबंधित परिस्थितियों में राहत मिलेगी. पंचायत स्तर पर काम करने वाली महिला सहायकों के लिए यह सुविधा उनके सेवा लाभों से जुड़ा महत्वपूर्ण बदलाव है। 

    पंचायत सहायकों को कैशलेस उपचार की सुविधा
    पंचायत सहायकों के लिए कैशलेस उपचार की सुविधा भी देने का फैसला किया गया है. इस व्यवस्था के तहत पंचायत सहायकों को उपचार के लिए कैशलेस सुविधा का लाभ मिलेगा. यानी मानदेय बढ़ाने के साथ सरकार ने उनके स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधा को भी फैसलों में शामिल किया है. इससे पंचायत सहायकों को इलाज के दौरान आर्थिक सहायता और सुविधा मिलने की व्यवस्था तैयार होगी। 

    बातचीत के बाद हुआ फैसलों का ऐलान
    पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बातचीत के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद उनके हित में लिए गए फैसलों की जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दी गई. इसमें मानदेय बढ़ाने से लेकर सेवा सुरक्षा, मुकदमे वापस लेने, दोबारा बहाली, महिला पंचायत सहायकों के लिए मातृत्व अवकाश और कैशलेस उपचार जैसी सुविधाओं की जानकारी दी गई। 

    पंचायत सहायकों के लिए क्या-क्या बदला?

    – मानदेय 6,000 से बढ़कर 9,000 रुपये प्रतिमाह

    – मानदेय में 50 फीसदी बढ़ोतरी

    – 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को लाभ

    – डीबीटी के जरिए बैंक खाते में भुगतान की तैयारी

    – ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अकेले सेवा से नहीं हटा सकेंगे

    – जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी हटाने का फैसला करेगी

    – आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस होंगे

    – कार्रवाई में हटाए गए पंचायत सहायक बहाल होंगे

    – महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश

    – पंचायत सहायकों को कैशलेस उपचार की सुविधा

    कई दिनों से दे रहे थे धरना : 
    राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में पंचायत सहायक कई दिनों से मानदेय बढ़ोतरी और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकरधरने पर डटे हुए थे. सोमवार को ही प्रदेश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में पहुंचे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का साफ आरोप था कि वे ग्राम पंचायतों में डिजिटल पोर्टल के संचालन से लेकर हर जरूरी प्रशासनिक काम अकेले संभालते हैं, लेकिन इसके एवज में उन्हें महीने का महज 6 हजार रुपये दिया जा रहा है. कर्मचारियों ने इसे सीधी तौर पर 'मजदूरी से भी बदतर शोषण' करार दिया था. पंचायत सहायकों की दो-टूक मांग थी कि उनका मानदेय बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए या नियमानुसार न्यूनतम वेतनमान लागू हो. वहीं सोमवार को सिराथू विधायक पल्लवी पटेल भी धरना स्थल पर पहुंचीं और पंचायत सहायकों की मांगों को पूरी तरह जायज ठहराते हुए उनके समर्थन का खुला ऐलान कर दिया था। 

  • साढ़े नौ वर्ष पूर्व इंसेफेलाइटिस से दम तोड़ते बचपन को देख चिंतित रहते थे अभिभावक: मुख्यमंत्री

    साढ़े नौ वर्ष पूर्व इंसेफेलाइटिस से दम तोड़ते बचपन को देख चिंतित रहते थे अभिभावक: मुख्यमंत्री

    माफिया की तरह समाप्त हो गया इंसेफेलाइटिस : मुख्यमंत्री

    आईएमए गोरखपुर के चैरिटेबल ब्लड बैंक का सीएम योगी ने किया उद्घाटन

    साढ़े नौ वर्ष पूर्व इंसेफेलाइटिस से दम तोड़ते बचपन को देख चिंतित रहते थे अभिभावक: मुख्यमंत्री
     
    प्रदेश में 75 जिले, मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हुई : सीएम योगी

    प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में डायलिसिस यूनिट शुरू कर रही सरकार : सीएम योगी

    गोरखपुर
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहता था। पर, अब यह चिंता खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है। अब हम नए युग में नए गोरखपुर और नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में दस-दस बेड की डायलिसिस यूनिट की सुविधा शुरू कर रही है।

    सीएम योगी बुधवार पूर्वाह्न इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर की तरफ से संचालित चैरिटेबल ब्लड बैंक के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने फीता काटकर चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन किया और सेंटर का भ्रमण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं, उपकरणों और व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

    उद्घाटन समारोह के मंच से पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में आए सकारात्मक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र था। स्थिति यह थी कि एक ही बेड पर चार-चार मरीज तक भर्ती रहते थे। तीसरी मंजिल पर इंसेफेलाइटिस वार्ड था और वहां पंखे, शौचालय एवं अन्य जरूरी सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने कहा कि पहले जो बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्वयं अस्वस्थ था, आज वही सुपर स्पेशियलिटी सेंटर और इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन गया है।
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर में एम्स भी स्थापित हो चुका है। महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हो गई है। दो एम्स भी संचालित हैं। एमबीबीएस की सीटें 4600 से बढ़कर 13500 से अधिक हो चुकी हैं और पीजी की सीटें दोगुनी हुई हैं। नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा का भी विस्तार किया जा रहा है।
     
    कभी दुर्दांत माफिया थे जिलों की पहचान, डॉक्टर होते थे उनके शिकार
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक समय प्रदेश के प्रत्येक जिले की पहचान किसी न किसी दुर्दांत माफिया से जुड़ गई थी। डॉक्टर उनके शिकार बनते थे। गोरखपुर में डॉक्टरों का अपहरण होता था, उनसे रंगदारी मांगी जाती थी, धमकी भरे फोन आते थे और उनके चेंबर में घुसकर मारपीट की जाती थी। इन घटनाओं के खिलाफ उन्हें चिकित्सकों के साथ सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आज गोरखपुर के साथ पूरे प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी और नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब प्रदेश की पहचान माफिया से नहीं बल्कि 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' के लक्ष्य से बन रही है।

    बनाया नहीं जा सकता खून, रक्तदान संवेदना का प्रतीक
    रक्तदान के महत्व को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, दवाएं और संसाधन तो उपलब्ध कराए जा सकते हैं लेकिन खून बनाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि रक्तदान उस संवेदना का प्रतीक है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति किसी जरूरतमंद को नया जीवन देता है। उन्होंने इस बात पर चिंता भी जाहिर की कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाती है। सीएम ने कहा कि इसके लिए चिकित्सकों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को प्रेरित करना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर समय-समय पर रक्तदान की अपील और जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।

    पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश जरूरी
    सीएम योगी ने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी आगाह किया। कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो संक्रमण का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। ऐसी गतिविधियों को शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाने के साथ चिकित्सकों को जागरूकता कार्यक्रमों से भी जुड़ना चाहिए।

    आईएमए के सामाजिक सरोकारों की सराहना की सीएम ने
    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने आईएमए के सामाजिक सरोकारों की मुक्तकंठ से सराहना की। कहा कि आईएमए केवल प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की संस्था मात्र ही नहीं है। इसने गोरखपुर में निशुल्क ओपीडी के बाद चैरिटेबल ब्लड सेंटर शुरू करके उसने सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी संस्था की वास्तविक पहचान इससे होती है कि वह अपनी विशेषज्ञता का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने में कितना योगदान देती है। उन्होंने कहा कि 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में आईएमए ने निशुल्क ओपीडी शुरू की थी। इसके बाद आईएमए ने अपने कार्यालय के लिए भूमि मांगी तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूखंड उपलब्ध कराने में मदद की गई। आईएमए ने इस भूखंड का बेहतर उपयोग करते हुए चैरिटेबल ब्लड सेंटर स्थापित किया है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में योगदान देगा।

    गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का उल्लेख कर चैरिटी का मॉडल बताया
    मुख्यमंत्री ने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के सानिध्य में गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय की शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि पहले 10 बेड से अस्पताल शुरू करने की चर्चा हुई थी, लेकिन गोरखपुर के चिकित्सकों के सहयोग से शुरुआत में ही इसे 100 बेड का अस्पताल बनाया गया। इस चिकित्सालय ने दिखाया कि चैरिटी में भी अस्पताल, ब्लड बैंक और आईसीयू सफलतापूर्वक संचालित हो सकते हैं। यहां ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित हुईं। उन्होंने कहा कि जिस डायलिसिस के लिए कभी लोगों को लखनऊ या बीएचयू जाना पड़ता था, आज गोरखपुर में गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध है। सीएम ने बताया कि सरकार ने प्रदेश के जिला अस्पतालों में भी निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था करने का कार्य प्रारंभ कर दिया है।

    स्वास्थ्य सेवाओं की उत्कृष्टता के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। बताया कि आईआईटी कानपुर के सहयोग से मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा एसजीपीजीआई लखनऊ में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम हो रहा है।

    स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाया सीएम योगी ने : डॉ. शुक्ला
    चैरिटेबल ब्लड सेंटर के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री एवं अन्य अभ्यागतों का स्वागत करते हुए आईएमए गोरखपुर के अध्यक्ष डॉ. आरपी शुक्ला ने कहा कि सीएम योगी ने अपने विजन से गोरखपुर और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में गोरखपुर मेडिकल हब और मेडिकल टूरिज्म का नया केंद्र बन रहा है। उन्होंने बताया कि आईएमए के 400 यूनिट की क्षमता वाले इस चैरिटेबल ब्लड सेंटर का संकल्प है कि रक्त के अभाव में किसी की मृत्यु न होने दी जाए। समारोह को महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह ने भी संबोधित किया। आभार ज्ञापन आईएमए गोरखपुर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. डीके सिंह और संचालन आईएमए गोरखपुर के सचिव डॉ. वाई सिंह ने किया।

    इस अवसर पर एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, भाजपा के जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, आईएमए गोरखपुर के संयुक्त सचिव डॉ. दिनेश चंद्रा, गुरु गोरखनाथ ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. अवधेश अग्रवाल, डॉ. महेंद्र अग्रवाल, डॉ. अमरेश सिंह, डॉ. सीएम सिन्हा, डॉ. शिवशंकर शाही, डॉ. बबिता शुक्ला सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक उपस्थित रहे।

    नन्ही बच्ची को दुलारा, दिया आशीर्वाद
    निरीक्षण के दौरान परिसर में मौजूद एक नन्ही बच्ची पर मुख्यमंत्री योगी की नजर पड़ी। उन्होंने बच्ची से आत्मीयता से बातचीत की, उसका हालचाल पूछा और स्नेह व आशीर्वाद दिया।

     

  • 8-10 साल पहले नीलाम हुई 5 खदानों का आवंटन रद्द, सरकार फिर कराएगी खनन ब्लॉकों की नीलामी

    8-10 साल पहले नीलाम हुई 5 खदानों का आवंटन रद्द, सरकार फिर कराएगी खनन ब्लॉकों की नीलामी

    रांची
    आठ से 10 वर्ष पूर्व नीलाम हुई सोना खदान समेत पांच खदानों का लीज आवंटन राज्य सरकार ने रद्द कर दिया है. इनमें दो सोना खदान, एक लौह अयस्क खदान व दो ग्रेफाइट की खदान शामिल हैं. इन खदानों में फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं होने से उत्पादन ही शुरू नहीं हो पाया. अब सीएम हेमंत सोरेन ने इन खदानों की दोबारा नीलामी करने का निर्देश दिया है. इनकी नीलामी इस्पात मंत्रालय के अधीन संचालित एमएसटीसी के प्लेटफॉर्म से हुई थी. अब एमएसटीसी प्लेटफॉर्म पर ही खदानों का लीज आवंटन रद्द करने संबंधी अधिसूचना भी जारी की गयी है. यह अधिसूचना खान विभाग के संयुक्त सचिव जियाउल अंसारी ने जारी की है. कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि सरकार के इस फैसले को वह माइनिंग ट्रिब्यूनल में चुनौती देंगे. क्योंकि उनकी वजह से देर नहीं हुई, बल्कि सरकारी प्रक्रिया, एनओसी व फॉरेस्ट क्लीयरेंस बड़ी वजह बनी है.

    फॉरेस्ट क्लीयरेंस के कारण अटका मामला
    बताया गया कि 69.240 हेक्टेयर की परासी सोना खदान की नीलामी 1.11.2017 को करायी गयी थी. जिसे रुंगटा माइंस लिमिटेड ने हासिल किया था. कंपनी को 2.1.2021 तक खदान से उत्पादन आरंभ करना था. लेकिन अवधि समाप्त होने पर भी इससे उत्पादन शुरू नहीं हो सका. इसकी वजह फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिलना बतायी गयी. लंबी अवधि बीतने पर राज्य सरकार ने आवंटन रद्द कर दिया.

    इसी तरह 272.651 हेक्टेयर के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित एक बड़ा पहाड़डीहा गोल्ड ब्लॉक की नीलामी 26.10.2016 को हुई थी. जिसे मैथन इस्पात लिमिटेड ने हासिल किया था. लेकिन तय अवधि में खदान का संचालन नहीं हो सका. यहां भी फॉरेस्ट क्लीयरेंस की वजह बनी.

    सारंडा संरक्षित जोन में आता है भनगांव आयरन ओर ब्लॉक
     भनगांव आयरन ओर ब्लॉक झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी ब्लॉक (सारंडा वन प्रभाग) में स्थित लौह अयस्क खदान क्षेत्र है. 2018 में झारखंड सरकार द्वारा आयोजित ई-नीलामी के माध्यम से यह ब्लॉक साउथ-वेस्ट माइनिंग लिमिटेड को आवंटित हुआ था. साउथ-वेस्ट माइनिंग लिमिटेड, जेएसडब्ल्यू ग्रुप के स्वामित्व वाली खनन कंपनी है. इसे फॉरेस्ट क्लीयरेंस व अन्य एनओसी नहीं मिल सकी है.

    इन खदानों का रद्द हुआ एलओआइ
    कोल ब्लॉक                                                कंपनी                                                                      नीलामी का वर्ष
    पहाड़ीडीह गोल्ड ब्लॉक,                             पश्चिम सिंहभूम    मैथन इस्पात लिमिटेड                    26.10.2016
    परासी गोल्ड एंड एसोसिएटेड मिनरल्स,      तमाड़  रांची-रुंगटा माइंस लिमिटेड                               01.11.2017
    भननगांव आयरन ओर ब्लॉक                    पश्चिम सिंहभूम-साउथ वेस्ट माइंडिंग लिमिटेड               28.06.2018
    डुलसुलमा ग्रेफाइट ब्लॉक                           पलामू टीम जियो रिसोर्सेज प्रा. लि.                               1. 03.2019
    लेसलीगंज ग्रेफाइट ब्लॉक                         पलामू टीम जियो रिसोर्सेज प्रा. लि.                                  01.08.2018

  • UP में डेयरी किसानों के लिए खुशखबरी, मिनी नंदिनी योजना में 20 नए लाभार्थी शामिल

    UP में डेयरी किसानों के लिए खुशखबरी, मिनी नंदिनी योजना में 20 नए लाभार्थी शामिल

    गोरखपुर
     पशुपालन विभाग के नंद बाबा दुग्ध विकास मिशन योजना (Nand Baba Mission) के अंतर्गत संचालित मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना (Mini Nandini Scheme) में पिछले सत्र के 20 और लोगों को शामिल कर लिया गया है। ऐसे में अब लाभार्थियों की संख्या 26 हो गई है। इसमें से छह लोगों ने अपने खर्च पर योजना संचालित करने की सहमति प्रदान की है।

    सत्र 2025-26 में मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना में शामिल होने के लिए 42 लोगों ने आवेदन किया था। ई लाटरी के माध्यम से छह लोगों का चयन किया गया। शेष लोगों को प्रतिक्षा सूची में रखा गया था। इसी जुलाई में शासन की ओर से प्रतीक्षारत लोगों को योजना में शामिल करते हुए लाभ देने के आदेश दिए गए।

    अंतिम तिथि 12 सितंबर तक 20 लोगों ने बैंक के सहमति पत्र व निजी व्यवस्था से योजना में शामिल होने की औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। छह लोग अपनी निजी व्यवस्था से डेयरी के संचालन की सहमति दिए हैं। इस सत्र में अब योजना के कुल 26 लाभार्थी हो गए हैं।

    यह है योजना
    मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना में देसी नस्ल की 10 गाय का पालन करना है। इसे प्रदेश के बाहर से लाना होता है। 23.60 लाख रुपये की योजना में सरकार की ओर से 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। शेष रकम लाभार्थी को स्वयं खर्च करना है। इतने रुपये की उसे बैंक गारंटी देनी होती है या अपने खाते में बैलेंस रखना पड़ता है। अनुदान की राशि दो किस्तों में दी जाती है।

    प्रदेश सरकार दुग्ध विकास को बढ़ावा देने में जुटी है। कृषि के साथ पशुपालन को जोड़ा जा रहा है। पिछले सत्र के प्रतीक्षा सूची के अधिक से अधिक लोगों को योजना का लाभ देने का आदेश दिया गया था। निर्धारित तिथि तक 20 लोगों ने औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। उन्हें योजना में शामिल कर लिया गया है।

    – डा. धर्मेंद्र पांडेय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी

  • 12 प्रमुख कार्यक्रमों से गांव से शहर तक पहुंचेगा सेवा का संदेश, 25 लाख लाभार्थियों की सफलता की कहानियां होंगी डिजिटल

    12 प्रमुख कार्यक्रमों से गांव से शहर तक पहुंचेगा सेवा का संदेश, 25 लाख लाभार्थियों की सफलता की कहानियां होंगी डिजिटल

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सेवा, सुशासन, जनकल्याण और विकास की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलेगा। एक माह के अभियान के जरिए योगी सरकार की योजनाओं से लाभान्वित नागरिकों की सफलता की कहानियां सामने लाने के साथ प्रदेशवासियों को ‘विकसित भारत-2047’ के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ा जाएगा। अभियान के प्रभारी एवं उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के मार्गदर्शन में शासन से जनपद स्तर तक त्रिस्तरीय समन्वय व्यवस्था बनाई गई है।

    अभियान में केंद्र सरकार के 12 वर्षों और राज्य सरकार के 10 वर्षों के विकास कार्यों से आए बदलावों को प्रस्तुत करने पर जोर रहेगा। केंद्र एवं राज्य की योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों का त्रिस्तरीय डेटा बैंक तैयार होगा। कुल 4.19 करोड़ परिवारों और 15.74 करोड़ लाभार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के 3.51 करोड़ परिवार व 13.01 करोड़ लाभार्थी तथा शहरी क्षेत्र के 0.68 करोड़ परिवार व 2.73 करोड़ लाभार्थी शामिल हैं।

    12 कार्यक्रमों से पहुंचेगा सेवा का संदेश
    अभियान में ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘मेरे सपनों का भारत: चित्र सेवा’, ‘नमो सेवा-अनकही कहानियां’, ‘आंगन मिलन सेवा’, ‘सेवा की कहानी’, ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’, ‘वडनगर से वाराणसी यात्रा’, ‘सेवा मेरा योगदान’, ‘सेवा सेतु अभियान’, ‘सेवा के रंग, राष्ट्र के संग’, ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ और ‘सुशासन सेवा संवाद’ आयोजित होंगे।

    17 सितंबर को ‘सेवा दिवस-आशीर्वाद का दीया’ से शुरुआत होगी। शाम सात बजे घरों और प्रतिष्ठानों पर दीप प्रज्वलन कर सेवा एवं विकसित भारत के संकल्प से जुड़ने का आह्वान किया जाएगा। अस्पतालों में फल वितरण, रक्तदान शिविर, विश्वकर्मा जयंती पर टूल किट वितरण तथा चयनित विकास एवं अवस्थापना परियोजना स्थलों पर दीप प्रज्वलन होगा।

    ‘मेरे सपनों का भारत: चित्र सेवा’ के तहत 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक विद्यालयों में कक्षा 5 से 8 के लिए चित्रकला तथा कक्षा 9 से 12 के लिए चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। उच्च शिक्षण संस्थानों में चित्रकला, भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। जिला स्तरीय प्रदर्शनी के बाद 7 अक्टूबर को राज्य स्तरीय प्रदर्शनी होगी। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को मुख्यमंत्री के डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार दिए जाएंगे।

    नुक्कड़ नाटक और डिजिटल कहानियों से जनजागरण
    ‘नमो सेवा-अनकही कहानियां’ के तहत प्रत्येक जनपद में 18 से 20 कलाकारों की सांस्कृतिक टोलियां गठित होंगी। प्रत्येक विधानसभा में सात कार्यक्रम होंगे। ग्राम पंचायतों, सामुदायिक केंद्रों, विद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर 25 से 30 मिनट की प्रस्तुति के जरिए जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास की कहानी पहुंचाई जाएगी।

    ‘सेवा की कहानी’ डिजिटल एवं रील अभियान में 25 लाख लाभार्थियों के जीवन में आए बदलाव पर 60 सेकंड की रील्स तैयार होंगी। आवास, विद्यालय, पंचायत भवन, पुस्तकालय, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, इनलैंड पोर्ट, मेट्रो, आरआरटीएस और विश्वविद्यालयों से जुड़ी विकास कहानियां प्रदर्शित की जाएंगी। 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक ‘आंगन मिलन सेवा’ में प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर तीन दिवसीय उत्सव एवं संवाद होगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, आशा दीदियों और उत्कृष्ट लाभार्थी माताओं का सम्मान किया जाएगा। पोषण, स्वास्थ्य एवं महिला योजनाओं की जानकारी के साथ हेल्दी बेबी शो, बच्चों को कॉमिक बुक्स, खिलौने, फल-मिठाई, अतिरिक्त पोषाहार एवं सामग्री वितरण होगा।

    सेवा ज्योति कलश यात्रा से विकसित भारत का संकल्प
    7 अक्टूबर को ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा-विकसित भारत का संकल्प’ आयोजित होगी। प्रमुख चौराहों पर सेवा कलश स्थापित किए जाएंगे। पैदल, साइकिल और बाइक रैलियों से नागरिक मुख्य आयोजन स्थल पहुंचेंगे। ‘वडनगर से वाराणसी यात्रा’ में 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक उत्तर प्रदेश की 10 नदियों का जल लेकर 10 टोलियां काशी से वडनगर, गुजरात जाएंगी। मार्ग के जनपदों में चौपाल, जनसंवाद और विकास यात्रा पर आधारित फिल्म प्रदर्शन होंगे।

    ‘सेवा मेरा योगदान’ में नागरिक 25 सेवा गतिविधियों में से किसी एक से जुड़ेंगे। रक्तदान, वृक्षारोपण, स्वच्छता, स्वास्थ्य जांच, गांव गोद लेना, योग-ध्यान, महिला स्वास्थ्य, शिक्षा सहयोग, करियर काउंसलिंग, वरिष्ठ नागरिकों की डिजिटल साक्षरता, अंगदान, पोषण, सड़क सुरक्षा, जल संरक्षण, साइबर सुरक्षा, फिट इंडिया, दिव्यांगजन सहयोग, मतदाता जागरूकता, वोकल फॉर लोकल और सरकारी योजनाओं की जागरूकता इसमें शामिल हैं। प्रत्येक विधानसभा में न्यूनतम दो स्थलों के कायाकल्प का लक्ष्य है।

    सेवा सेतु शिविरों में मौके पर मिलेंगी योजनाओं की सुविधाएं

    ‘सेवा सेतु अभियान’ के तहत विकासखंड एवं नगरीय निकाय स्तर पर पांच से सात दिवसीय बहुउद्देशीय शिविर होंगे। एक ही स्थान पर योजनाओं की जानकारी, पात्र नागरिकों के आवेदन, पात्रता सत्यापन और स्वीकृति की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। स्वास्थ्य मेले, प्रत्येक विधानसभा में दिव्यांग कल्याण शिविर और मतदाता पंजीकरण पर भी जोर रहेगा। ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ में युवाओं की राष्ट्रीय स्तर के इनोवेशन चैलेंज में भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों, आईटीआई और पॉलीटेक्निक में ओरिएंटेशन एवं मोटिवेशन कार्यक्रम होंगे।

    1.25 लाख जनप्रतिनिधि लेंगे विकसित भारत का संकल्प
    17 अक्टूबर को ‘सुशासन सेवा संवाद’ के साथ अभियान का समापन होगा। ग्राम प्रधान, सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधि सेवा एवं सुशासन के 25 वर्षों के अवसर पर प्रधानमंत्री का सम्मान करेंगे तथा विकसित भारत-2047 का संकल्प लेंगे। लगभग 1.25 लाख जनप्रतिनिधियों द्वारा संकल्प एवं वंदे मातरम् गायन की योजना है। ऐतिहासिक स्मारकों और पर्यटन स्थलों पर विकास यात्रा दर्शाने वाले लेजर शो होंगे। प्रमुख तीर्थस्थलों एवं शक्तिपीठों में महायज्ञ एवं विशेष अनुष्ठान प्रस्तावित हैं।
    17 अक्टूबर को ‘सुशासन सेवा संवाद’ के साथ अभियान का समापन होगा। ग्राम प्रधान, सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधि सेवा एवं सुशासन के 25 वर्षों के अवसर पर प्रधानमंत्री का सम्मान करेंगे तथा विकसित भारत-2047 का संकल्प लेंगे। लगभग 1.25 लाख जनप्रतिनिधियों द्वारा संकल्प एवं वंदे मातरम् गायन की योजना है। ऐतिहासिक स्मारकों और पर्यटन स्थलों पर विकास यात्रा दर्शाने वाले लेजर शो होंगे। प्रमुख तीर्थस्थलों एवं शक्तिपीठों में महायज्ञ एवं विशेष अनुष्ठान प्रस्तावित हैं।

  • राजस्थान निकाय चुनाव में सियासी घमासान, बीकानेर से पाली तक कांग्रेस में बगावत

    राजस्थान निकाय चुनाव में सियासी घमासान, बीकानेर से पाली तक कांग्रेस में बगावत

    जयपुर
    राजस्थान के शहरों की सरकार का चेहरा तय करने की कवायद तेज हो गई है। प्रदेश की 305 निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए नामांकन का आज दूसरा और आखिरी दिन है। ऐसे में सुबह से ही बीजेपी और कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशीयों की ओर से नामांकन दाखिल करने का सिलसिला जारी है। बुधवार दोपहर 3 बजे तक प्रत्याशी अपना पर्चा दाखिल कर सकेंगे। बता दें कि पहले दिन 19 निकायों में 29 नामांकन भरे गए। नामांकन पत्रों की संवीक्षा 17 सितंबर को सुबह 11 बजे होगी। वहीं, 18 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक उम्मीदवारी वापस ली जा सकेगी। इसके बाद मेयर चुनाव की तस्वीर और स्पष्ट होगी। अध्यक्ष के लिए मतदान 21 सितंबर और उपाध्यक्ष के चुनाव 22 सितंबर को होगा।

    बीकानेर में मेयर पद को लेकर कांग्रेस में बगावत
    बीकानेर नगर निगम में मेयर पद को लेकर कांग्रेस के भीतर सियासी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस की ओर से अनिल कल्ला को मेयर पद का प्रत्याशी बनाए जाने के बाद अब पार्टी के ही विजयी पार्षद नवरतन डागा ने नामांकन दाखिल कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। अनिल कल्ला के नामांकन से पहले नवरतन डागा नामांकन दाखिल करने पहुंचे। इस दौरान डागा ने साफ कहा कि वह कांग्रेस की तरफ से ही मेयर पद का चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने इसे परिवारवाद के खिलाफ जंग बताते हुए पार्टी नेतृत्व पर सवाल भी उठाए। डागा ने कहा कि “यह जंग परिवारवाद के खिलाफ है। आखिर कब तक कांग्रेस का कार्यकर्ता इसे सहन करेगा?” उनके इस बयान के बाद बीकानेर कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस ने मेयर पद के लिए अनिल कल्ला को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। वहीं, अब नवरतन डागा के नामांकन दाखिल करने से चुनाव में कांग्रेस के दो चेहरे आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।

    चूरू नगर परिषद: भाजपा के विनय कुमार गोयनका ने भरा पर्चा
    चूरू नगर परिषद सभापति पद के लिए भाजपा के विनय कुमार गोयनका ने नामांकन दाखिल किया है। इस दौरान विधायक हरलाल सहारण, वार्ड 19 के पार्षद नरेंद्र सैनी सहित कई पार्षद मौजूद रहे।

    फतेहपुर नगरपालिका: घनश्याम तिवाड़ी की बहन अंजू भिंडा ने भरा पर्चा
    सीकर जिले की फतेहपुर नगरपालिका से राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी की बहन अंजू भिंडा ने अध्यक्ष पद के लिए नामां​कन दाखिल किया। बता दें कि अंजू भिंडा निर्दलीय चुनाव जीता था। अब उन्होंने भाजपा की ओर से नामांकन दाखिल किया है।

    पोकरण नगरपालिका: कांग्रेस की कल्पना रंगा व भाजपा की शोभा व्यास ने भरा नामांकन
    पोकरण नगरपालिका अध्यक्ष के लिए नामांकन का आज अंतिम दिन, कांग्रेस से कल्पना रंगा व भाजपा से शोभा व्यास ने नामांकन करवाया जमा

    जैसलमेर: भाजपा के विजय डांगरा ने भरा नामांकन
    जैसलमेर में सभापति की कुर्सी पर भाजपा का दावा मजबूत माना जा रहा है, पार्षदों के साथ विजय डांगरा ने भरा नामांकन, नवनिर्वाचित पार्षदों के साथ पहुंचे डांगरा, वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में दाखिल किया नामांकन

    भीलवाड़ा: महापौर और पालिकाध्यक्षों के नामों पर लगी मुहर, अब जीत का इंतजार
    भीलवाड़ा नगर निगम के साथ ही दस नगर पालिकाओं में महापौर व अध्यक्षों के नाम के पत्ते खुल गए है। भाजपा व कांग्रेस ने जयपुर में आलाकमान से मिली हरी झंडी के बाद प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। सभी प्रत्याशी दोपहर एक बजे तक नामांकन पत्र पेश कर देंगे। भीलवाड़ा नगर निगम में भाजपा ने महिला वर्ग में बड़ी जीत के साथ आई जसवंत कंवर को प्रत्याशी बनाया है।

    भरतपुर से निर्दलीय विचित्रा सिंह ने मेयर पद के लिए किया नामांकन
    भरतपुर नगर निगम में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मेयर पद के लिए विचित्रा सिंह ने नामांकन भरा। इस दौरान उनके साथ पति पूर्व सभापति एवं मेयर शिव सिंह भोट, शहर कांग्रेस शहर अध्यक्ष दयाचंद पचौरी, योगेंद्र सिंह ठाकुर, संजय शुक्ला सहित अन्य कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे। वहीं, भारतीय जनता पार्टी की ओर से अनुराधा सिंह एवं प्रेमपाल ने नामांकन भरा। भाजपा की ओर से अनुराधा सिंह मेयर की रेस में सबसे आगे बताई जा रही है।

    अजमेर: भाजपा से अनामिका शर्मा मेयर प्रत्याशी
    अजमेर मेयर पद को लेकर भाजपा तैयारी में जुट गई है। वार्ड 3 की प्रत्याशी अनामिका शर्मा प्रत्याशी घोषित किया हैं। इसको लेकर लगभग सहमति बन चुकी है। जिलाध्यक्ष रमेश सोनी के साथ नामांकन के लिए पहुंची।

    पाली: कांग्रेस की दो पार्षदों ने महापौर के लिए भरा पर्चा
    पाली निगम में कांग्रेस से विजेता राजबाला हिंगड़ महापौर पद का नामांकन भरने के लिए पहुंची। वहीं, कांग्रेस की ही प्रत्याशी सुमित्रा जैन भी कांग्रेस से जीते पार्षद भंवर राव और निर्दलीय जीते नजमा शहजाद शेख के साथ नामांकन भरने के लिए पहुंची। खास बात ये रही कि कांग्रेस की दोनों ही पार्षदों ने महापौर के लिए पर्चा दाखिल किया है।