Category: राज्य

  • सूरज से रोशन होगा अलवर, 250 मेगावाट सौर बिजली उत्पादन का लक्ष्य; छतों पर भी सोलर

    सूरज से रोशन होगा अलवर, 250 मेगावाट सौर बिजली उत्पादन का लक्ष्य; छतों पर भी सोलर

    अलवर
     बिजली के लिए अब अलवर की नजर आसमान पर है। सूरज की किरणें आने वाले समय में जिले की बिजली व्यवस्था की नई ताकत बनने जा रही हैं। सौर ऊर्जा का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और निर्माणाधीन परियोजनाएं पूरी होने के बाद अलवर में 250 मेगावाट तक सौर बिजली उत्पादन होने की उम्मीद है। यह उत्पादन क्षमता सूरतगढ़ थर्मल पावर की एक इकाई के बराबर होगी।

    बता दें कि अभी जिले में सोलर प्लांटों से करीब 67 मेगावाट और रूफटॉप सोलर से करीब 29 मेगावाट बिजली मिल रही है। कुल 36 सोलर प्लांट चालू हैं, जबकि करीब 80 प्लांटों में काम जारी है। इनके पूरा होने के साथ सौर ऊर्जा का दायरा तेजी से बढ़ेगा और अलवर की बिजली व्यवस्था में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी मजबूत होगी।

    जमीन से छत तक बन रहे बिजली घर
    अलवर में सौर ऊर्जा का विस्तार अब सिर्फ बड़े प्लांटों तक सीमित नहीं है। खेतों और खाली जमीनों पर सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ घरों और संस्थानों की छतें भी छोटे बिजलीघरों में बदल रही हैं। जिले में अब तक करीब 6 हजार रूफटॉप सोलर लगाए जा चुके हैं। दिसंबर तक इनकी संख्या बढ़ाकर 13 हजार करने का लक्ष्य है। इससे उपभोक्ता दिन में अपनी जरूरत की बिजली का एक हिस्सा खुद पैदा कर सकेंगे। रूफटॉप सोलर का बढ़ता नेटवर्क बिजली व्यवस्था को विकेंद्रीकृत करने में भी मदद करेगा।

    दिन में सूरज संभालेगा बिजली का भार
    सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ने के साथ बिजली आपूर्ति का तरीका भी बदलने की तैयारी है। दिन में सूरज की रोशनी के साथ सौर बिजली का उत्पादन बढ़ेगा और इसी दौरान इसका अधिकतम उपयोग किया जाएगा। इससे दिन के समय बिजली की मांग का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा करने में मदद मिलेगी। सूरज ढलने के बाद सौर उत्पादन घटेगा, तो बिजली की जरूरत दूसरे स्रोतों से पूरी करनी होगी। इस तरह आने वाले समय में अलवर की बिजली व्यवस्था में दिन का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा के भरोसे हो सकता है।

    सोलर प्लांटों के प्रमुख फायदे
        बिजली उत्पादन की लागत कम करने में मदद मिलती है।
        ईंधन की जरूरत नहीं होती, इसलिए कोयला, डीजल या गैस पर निर्भरता घटती है।
        प्रदूषण कम होता है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।
        नवीकरणीय ऊर्जा होने से लंबे समय तक बिजली उत्पादन किया जा सकता है।
        दिन के समय बिजली की मांग का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकता है।
        बिजली व्यवस्था पर दबाव कम होता है और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दी जा सकती है।
        बिजली आयात/खरीद पर निर्भरता घटाने में मदद मिलती है।
        बड़े प्लांटों के साथ रूफटॉप सोलर से स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन बढ़ता है।
        बिजली बिल में बचत की संभावना रहती है, खासकर रूफटॉप सोलर में।
        सौर परियोजनाओं से निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
        खाली या कम उपयोग वाली जमीन पर बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन किया जा सकता है।
        ऊर्जा के स्रोतों में विविधता आने से बिजली व्यवस्था अधिक मजबूत होती है।

    सोलर प्लांटों के प्रमुख नुकसान
        शुरुआती निवेश अधिक होता है। जमीन, सोलर पैनल, इन्वर्टर और अन्य उपकरणों पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है।
        बड़े क्षेत्रफल की जरूरत होती है। बड़े सोलर प्लांट के लिए काफी जमीन चाहिए, जिससे कृषि या अन्य उपयोग वाली जमीन पर दबाव पड़ सकता है।
        मौसम पर निर्भरता रहती है। बादल, बारिश और धूल के कारण बिजली उत्पादन घट जाता है।
        रात में उत्पादन नहीं होता, इसलिए रात की बिजली के लिए अन्य स्रोतों या ऊर्जा भंडारण की जरूरत रहती है।
        बैटरी भंडारण महंगा है। सौर बिजली को बड़े स्तर पर संगृहीत करने के लिए बैटरी की लागत बढ़ जाती है।
        पैनलों की सफाई जरूरी है। धूल और मिट्टी जमने से पैनलों की क्षमता कम हो सकती है, खासकर राजस्थान जैसे धूल वाले क्षेत्रों में।
        रखरखाव की लागत रहती है। पैनल, इन्वर्टर, तार और अन्य उपकरणों की समय-समय पर देखरेख करनी पड़ती है।
        पुराने सोलर पैनलों का निस्तारण चुनौती बन सकता है। बड़ी संख्या में पैनल खराब या पुराने होने पर इनके पुनर्चक्रण की व्यवस्था जरूरी होती है।
        प्राकृतिक आवास पर असर पड़ सकता है, यदि बड़े प्लांट संवेदनशील या जैव विविधता वाले क्षेत्रों में लगाए जाएं।
        बिजली ग्रिड पर दबाव पड़ सकता है। उत्पादन अचानक बढ़ने-घटने पर ग्रिड को संतुलित रखने के लिए बेहतर व्यवस्था जरूरी होती है।

    अलवर में सोलर प्लांटों से सभी लोगों को फायदा होगा। किसानों को दिन में बिजली मिलेगी। दिसंबर तक अधिकतर सोलर चालू हो जाएंगे।
    -जेपी बैरवा, एसई, बिजली निगम, अलवर

     

  • UPPSC-2025 में मुफ्त कोचिंग का शानदार नतीजा, योगी सरकार की योजना से 74 अभ्यर्थी सफल

    UPPSC-2025 में मुफ्त कोचिंग का शानदार नतीजा, योगी सरकार की योजना से 74 अभ्यर्थी सफल

    योगी सरकार की मुफ्त कोचिंग ने गढ़ी सफलता की नई कहानी, यूपीपीएससी-2025 में 74 अभ्यर्थी सफल

    तीन विभागीय कोचिंग केंद्रों के अभ्यर्थियों ने मुख्य परीक्षा में लहराया परचम

    भागीदारी भवन के 35, अलीगंज के 18 और हापुड़ के 21 अभ्यर्थी हुए सफल

    6 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले पात्र छात्रों को आवासीय कोचिंग के साथ कई सुविधाएं

    मुख्य परीक्षा के बाद इंटरव्यू की तैयारी के लिए भी समाज कल्याण विभाग कराएगा मॉक इंटरव्यू

    मंत्री असीम अरुण ने सफल अभ्यर्थियों को दीं शुभकामनाएं

    लखनऊ
     आर्थिक संसाधनों की कमी प्रतिभाशाली युवाओं की राह में बाधा न बने, इसके लिए योगी सरकार की ओर से संचालित निःशुल्क प्रशिक्षण व्यवस्था प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ा सहारा बन रही है। समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्रों और भागीदारी भवन स्थित कोचिंग से निःशुल्क प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्राप्त करने वाले 74 अभ्यर्थियों ने यूपीपीएससी-2025 की मुख्य परीक्षा में सफलता हासिल की है। मुख्य परीक्षा में सफल सभी अभ्यर्थी अब चयन प्रक्रिया के अगले चरण साक्षात्कार में शामिल होंगे।

    मॉक इंटरव्यू की सुविधा भी की जाती है संचालित

    प्रदेश में समाज कल्याण विभाग की ओर से 8 आवासीय कोचिंग केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। अधिकतम 6 लाख रुपये वार्षिक आय सीमा वाले पात्र छात्रों को यहां आवासीय कोचिंग के साथ मेस, पुस्तकालय, इंटरनेट, टेस्ट सीरीज, नोट्स, मनोरंजन, खेलकूद और जिम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के लिए आगे मॉक इंटरव्यू की सुविधा भी संचालित की जाती है, ताकि वे साक्षात्कार के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।

    मंत्री ने सफल अभ्यर्थियों को दीं शुभकामनाएं

    समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सफल अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रतिभावान युवाओं को उनकी आर्थिक परिस्थितियों की परवाह किए बिना गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क प्रशिक्षण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। विभागीय केंद्रों से 74 अभ्यर्थियों की सफलता इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है।

    राजकीय आईएएस/पीसीएस कोचिंग केंद्र के अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में सफल

    समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि भागीदारी भवन स्थित कोचिंग के 35, अलीगंज स्थित आदर्श परीक्षा केंद्र के 18 और हापुड़ स्थित राजकीय आईएएस/पीसीएस कोचिंग केंद्र के 21 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में सफल हुए हैं। तीनों केंद्रों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की सफलता को विभागीय निःशुल्क प्रशिक्षण व्यवस्था के प्रभावी परिणाम के तौर पर देखा जा रहा है।

  • यूपी के नौनिहालों के लिए अच्छी खबर, पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 8.2% कम

    यूपी के नौनिहालों के लिए अच्छी खबर, पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 8.2% कम

    राष्ट्रीय पोषण माह पर विशेष

    योगी सरकार के प्रयासों से यूपी के नौनिहालों की बढ़ रही कद-काठी

    प्रदेश के पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 8.2 प्रतिशत घटा
     
    एनएफएचएस- 5 में ऐसे बच्चों का प्रतिशत 39.7 था, जो घटकर 31.5 प्रतिशत हो गया

    लखनऊ
     योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश के नौनिहालों की सेहत और पोषण की तस्वीर में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा है। प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन यानी उम्र के अनुपात में कम लंबाई की समस्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) में जहां प्रदेश में ऐसे बच्चों का प्रतिशत 39.7 था, वहीं एनएफएचस-6 में यह घटकर 31.5 प्रतिशत रह गया है। यानी करीब चार वर्षों में नाटेपन के मामलों में 8.2 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई है।

    बच्चे की लंबाई में होने वाला सुधार एक दिन में नहीं आता : डॉ. पिंकी जोवल
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविध आबादी वाले राज्य में नाटेपन में कमी का उल्लेखनीय है क्योंकि बच्चे की लंबाई में होने वाला सुधार एक दिन में नहीं आता। यह लंबे समय तक बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवार की देखभाल का परिणाम होता है। एनएफएचएस-5 से एनएफएचएस-6 के बीच नाटेपन के आंकड़ों में आई गिरावट इसलिए प्रदेश के बच्चों के स्वास्थ्य की बदलती तस्वीर का महत्वपूर्ण संकेत है। अब चुनौती इस सुधार को और गति देने तथा यह सुनिश्चित करने की है कि हर बच्चे को जीवन के शुरुआती वर्षों में पर्याप्त पोषण और स्वस्थ विकास का अवसर मिले। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अभियान चलाकर गर्भवती महिलाओं को जागरुक करने के साथ उन्हे पोषण पोटली वितरित की जा रही है। सर्वेक्षण रिपोर्ट में 31.5 प्रतिशत का आंकड़ा यह भी बताता है कि अभी बड़ी संख्या में बच्चे इस समस्या से प्रभावित हैं इसलिए शुरुआती वर्षों में पोषण की निगरानी, गर्भवती महिलाओं के पोषण, छह माह तक केवल स्तनपान, समय पर पूरक आहार, संक्रमण की रोकथाम तथा बच्चों की नियमित वृद्धि निगरानी पर लगातार जोर देने की जरूरत है और इस पर फोकस काम किया जा रहा है। 

    बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन शारीरिक – मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण
    किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शालिनी त्रिपाठी के अनुसार बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दो वर्ष की उम्र तक पर्याप्त पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर टीकाकरण, स्तनपान और उचित पूरक आहार पर ध्यान देने से कुपोषण की स्थिति को कम किया जा सकता है। इसी दिशा में आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय के स्तर पर चलाए जा रहे पोषण एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों की भूमिका महत्वपूर्ण है। सीएम योगी के निर्देश पर सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण-2.0 की गाइडलाइन के तहत संचालित हॉट कुक्ड मील योजना के जरिए 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को नियमित रूप से ताजा, गर्म और पौष्टिक पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यूपी में करीब 1.45 लाख को-लोकेटेड और 0.44 लाख नॉन को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले लगभग 32.88 लाख बच्चे नियमित लाभान्वित हो रहे हैं।

    शुरुआती वर्षों में मिलने वाले पोषण की अहम भूमिका
    प्रोफेसर ने बताया कि नाटेपन को बच्चों में लंबे समय तक रहने वाले कुपोषण का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। यह केवल बच्चे की लंबाई तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे गर्भावस्था के दौरान मां का पोषण, जन्म के समय बच्चे की स्थिति, स्तनपान, छह माह बाद पूरक आहार, बार-बार होने वाले संक्रमण और शुरुआती वर्षों में मिलने वाले पोषण की अहम भूमिका होती है। ऐसे में आंकड़ों में आई गिरावट को बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में देखा जा सकता है। एनएफएचएस-5 में उत्तर प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 39.7 प्रतिशत दर्ज किया गया था। इसी सर्वे में 17.3 प्रतिशत बच्चे दुबलापन (वेस्टिंग) और 32.1 प्रतिशत बच्चे कम वजन की श्रेणी में थे। एनएफएचएस-6 के आंकड़े बताते हैं कि बच्चों के पोषण से जुड़े संकेतकों में देशभर में भी सुधार हुआ है। राष्ट्रीय स्तर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत हुआ है जबकि उत्तर प्रदेश में नाटापन 39.7 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत हुआ है।

     

    प्रोफेसर शालिनी त्रिपाठी, केजीएमयू

  • मेरठ के आसमान में दिखेगा तिरंगे का रंग, सूर्य किरण टीम करेगी एरोबैटिक प्रदर्शन 19 सितंबर

    मेरठ के आसमान में दिखेगा तिरंगे का रंग, सूर्य किरण टीम करेगी एरोबैटिक प्रदर्शन 19 सितंबर

    मेरठ
    क्रांतिधरा के इतिहास में पहली बार अपने मेरठ शहर का आसमान भारतीय वायुसेना के शौर्य और पराक्रम का गवाह बनने जा रहा है। 19 और 20 सितंबर को परतापुर क्षेत्र के मोहिउद्दीनपुर स्थित न्यू इंटीग्रेटेड टाउनशिप में भारतीय वायुसेना की विश्व प्रसिद्ध ‘सूर्य किरण एरोबैटिक टीम’ (एसकेएटी)) अपने साहसिक करतब दिखाएगी।

    राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने विकास भवन में मीडिया से बातचीत में जानकारी दी कि उन्होंने 13 मई को मेरठ में इस एयर शो के आयोजन का प्रस्ताव भेजा था, जिसे आठ सितंबर को आधिकारिक मंजूरी मिली। मेरठ में इस तरह एयर शो का यह पहला आयोजन है। उन्होंने बताया कि 19 और 20 सितंबर दोनों दिन एयर शो का आयोजन होगा, जिसमें 20 सितंबर को मुख्य आयोजन होगा।

    रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ मुख्य अतिथि होंगे। डीएम डॉ.वीके सिंह ने बताया कि न्यू इंटीग्रेटेड टाउनशिप में होने वाले एयर शो के लिए दर्शकों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए व्यापक तैयारियां की गई हैं। सीडीओ नूपुर गोयल ने जानकारी दी।

    लोकेशन
    ये एयर शो परतापुर क्षेत्र के मोहिउद्दीनपुर स्थित न्यू इंटीग्रेटेड टाउनशिप में होगा। गूगल मैप्स पर VJR7+WH2 कोड से लोकेशन मिलेगा।

    समय
    एयर शो 19 और 20 सितंबर को सुबह 9.45 से 11.30 बजे तक होगा।
    रजिस्ट्रेशन

    ये एयर शो सभी के लिए है। इसके लिए टिकट या रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होगी।

    21 तक 18.5 किमी क्षेत्र नो फ्लाइंग जोन
    सूर्यकिरण के एयर शो को लेकर डीएम ने 18 से 21 सितंबर तक मोहिउद्दीनपुर के 10 नॉटिकल मील अर्थात साढ़े 18 किमी क्षेत्र को रेड जोन और नो फ्लाइंग जोन घोषित कर दिया है। इस अधिसूचित अस्थाई रेड जोन के भीतर किसी भी निजी या अनधिकृत व्यक्ति/संस्था द्वारा ड्रोन, रिमोट संचालित विमान, हॉट एयर बैलून या किसी अन्य प्रकार के मानवरहित हवाई जहाज (यूएवी) को उड़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

    बैरल रोल और डीएनए मैनूवर से रोमांच
    एयर शो में हॉक एमके-132 विमान लूप, बैरल रोल, उल्टी उड़ान और डीएनए मैनूवर समेत कई एरोबैटिक फॉर्मेशन का प्रदर्शन करेंगे। बेहद कम अंतर पर विमानों की सटीक टाइमिंग और एक-दूसरे के साथ सामंजस्यपूर्ण उड़ान दर्शकों के लिए खास आकर्षण होगी। आसमान में केसरिया, सफेद और हरे रंग की धुएं की लकीरें भी नजर आएंगी। हॉक विमानों में नासिक स्थित वायुसेना के बेस रिपेयर डिपो में विकसित स्वदेशी स्मोक पॉड्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इनके जरिए विमानों के पीछे तिरंगे के रंगों की छटा दिखाई देगी।

    मेरठ से है सीधा जुड़ाव
    एयर शो में स्क्वाड्रन लीडर अमन गोयल, राहुल सिंह और शरद गोयल की मौजूदगी मेरठ के लिए खास होगी। तीनों सूर्य किरण एरोबैटिक टीम का हिस्सा हैं। इससे मेरठ में होने वाले प्रदर्शन का स्थानीय जुड़ाव भी खास हो गया है।

  • सिर्फ अधिसूचना से नहीं छिन सकती नौकरी, JPSC-JSSC CGL मामले में हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

    सिर्फ अधिसूचना से नहीं छिन सकती नौकरी, JPSC-JSSC CGL मामले में हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

    रांची
    झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल परीक्षाओं के विज्ञापन को रद्द करने के राज्य सरकार की अधिष्टा को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में प्रार्थियों व राज्य सरकार का पक्ष सुना पक्ष सुनने के बाद अदालत ने अधिसूचना पर रोक को अगले आदेश तक बरकरार रखा.

    सिर्फ अधिसूचना से नौकरी नहीं छिन सकती: हाईकोर्ट
    अदालत ने कहा कि सिर्फ एक अधिसूचना से सरकार विभिन्न विभागों में नियुक्त हो चुके अभ्यार्थियों को बिना नेचुरल जस्टिस का पालन किये सेवा से नहीं हटा सकती. अदालत ने एसआईटी जांच के मामले में नोडल अधिकारी बनाया है. वहीं नियुक्त अभ्यर्थियों की किसी तरह की परेशानियों के समाधान की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी रिटायर जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को दी गई है. अदालत ने कहा है कि अगर एसआईटी किसी अभ्यर्थी को अनावश्यक परेशान करती है, तो वे जस्टिस गौतम चौधरी के पास अपनी शिकायत कर सकते हैं. मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को 11:30 बजे से होगी.

    अगली सुनवाई 7 अक्टूबर
    अदालत ने सभी पक्षों की सहमति से मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की. राज्य सरकार की ओर से मामले में शपथ पत्र दायर किया गया जिस पर प्रति उत्तर दायर करने के लिए प्रार्थियों की ओर से समय देने का आग्रह किया गया, जिसे अदालत में स्वीकार कर लिया.

    दोनों पक्षों ने अदालत में रखा अपना पक्ष
    राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा व महाधिवक्ता रोहित राय ने पक्ष रखा, जबकि प्रार्थियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री पटवालिया, पूर्व महाधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स एवं अन्य ने पैरवी की. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी आकाश गौरव एवं अन्य, निरोज खेस एवं अन्य की ओर से अलग-अलग याचिका दायर कर राज्य सरकार की योजना को चुनौती दी गई है.

  • बिजनौर तक पहुंचेगा किशाऊ बांध का पानी, शारदा-यमुना लिंक नहर से भी बढ़ेंगी सिंचाई सुविधाएं

    बिजनौर तक पहुंचेगा किशाऊ बांध का पानी, शारदा-यमुना लिंक नहर से भी बढ़ेंगी सिंचाई सुविधाएं

    बिजनौर
     केंद्र सरकार की पहल के बाद छह राज्यों में किशाऊ बांध परियोजना में सहमति बनी है। इस परियोजना के अंतर्गत जिले को भी पानी मिलने की बात कही जा रही है। इससे पहले शारदा-यमुना-साबरमती लिंक नहर के लिए भी जिले में सर्वे हो चुका है।

    अभी तक जिले में किसानों की फसलों की सिंचाई पूर्वी मध्य गंगा नहर, पीली बांध जलाशय और रामगंगा बांध कालागढ़ से की जाती है। किशाऊ बांध परियोजना से पानी मिलने से किसानों को और अधिक लाभ होगा।

    फसलों की सिंचाई के लिए किसान नलकूपों के अलावा नहरों के पानी का भी प्रयोग करते हैं। गंगा पर बने बैराज से मध्य गंगा नहर फेज वन व टू निकलती हैं, लेकिन इनका पानी जिले के किसानों को नहीं मिलता है।

    यहां पूर्वी मध्य गंगा नगर सिंचाई प्रणाली से फसलों को पानी दिया जाता है। पीली बांध जलाशय व रामगंगा बांध कालागढ़ से भी फसलों को पानी दिया जाता है। केंद्र सरकार की योजना यमुना से भी क्षेत्र को जोड़ने की है।

    पांच जिलों को फायदा
    380 किलोमीटर लंबी बहुप्रतीक्षित शारदा-यमुना-साबरमती लिंक नहर परियोजना के लिए भी जिले में सर्वे किया गया है। उत्तराखंड के टनकपुर से बिजनौर, हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, शामली में इस नहर परियोजना का निर्माण कराया जा सकता है।

    इस परियोजना में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित टोंस नदी पर बांध बनाया जाएगा। बिजली बनाने के साथ ही इसका प्रयोग किसानों को सिंचाई के लिए पानी देने में किया जाएगा। जिले को भी इस बांध परियोजना में पानी मिलने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है तो जिले में भूमि भी अधिग्रहित की जाएगी।

    यहां होगा लाभ
    जिले में वर्षों से कोई नई नहर परियोजना नहीं आई है। यहां नूरपुर व जलीलपुर क्षेत्र में भूगर्भ जल का स्तर बाकी ब्लाक से नीचे है। हालांकि जलीलपुर क्षेत्र में बरसात में बाढ़ के हालात होते हैं, लेकिन ये बड़े हिस्से में नहीं होता है। इस क्षेत्र के किसानों के लिए किशाऊ बांध परियोजना का पानी बहुत काम आएगा।

     

  • रांची में तंजानिया प्रतिनिधिमंडल का कृषि एक्सपोजर विजिट, ड्रोन और IoT तकनीक से हुए रूबरू

    रांची में तंजानिया प्रतिनिधिमंडल का कृषि एक्सपोजर विजिट, ड्रोन और IoT तकनीक से हुए रूबरू

    रांची
    तंजानिया के खनिज मंत्रालय के 27 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कोल मैनेजमेंट (IICM) में चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत ‘उन्नत कृषि’ परियोजना का एक्सपोजर विजिट किया. इस दौरान प्रतिनिधिमंडल को परियोजना के उद्देश्य, प्रमुख गतिविधियों और किसानों को मिल रहे लाभों की जानकारी दी गई.
    ऑटोमेटेड इरिगेशन सिस्टम और कृषि ड्रोन तकनीक का लाइव डेमो

    प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि ICT और IoT आधारित आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से डेटा आधारित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस दौरान ऑटोमेटेड इरिगेशन सिस्टम और कृषि ड्रोन तकनीक का लाइव डेमो भी दिखाया गया. प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से खेती में होने वाले बदलावों और इसके व्यावहारिक उपयोग को करीब से समझा.

    किसानों से किया संवाद
    विजिट के दौरान तंजानिया के प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना से जुड़े किसानों और टीम के सदस्यों से संवाद किया. प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने तकनीक आधारित खेती, कृषि उत्पादकता और किसानों को होने वाले लाभों से जुड़े कई सवाल पूछे. उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों को लेकर अपनी रुचि भी व्यक्त की.

    तंजानिया में भी इस तरह की आधुनिक कृषि
    प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप सेड्रोन तकनीक, मोबाइल ऐप और डेटा आधारित कृषि व्यवस्था के बारे में जानकारी ली. सदस्यों ने तंजानिया में भी इस तरह की आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने में रुचि दिखाई. इस अवसर पर सीसीएल की ओर से जॉन बोदरा, निधि समृद्धि फाउंडेशन की ओर से रवि शंकर कुमार, सूरज सिन्हा, चंचल कच्छप, स्मार्ट फार्मर सुखदेव उरांव, घुमेश्वर उरांव, राजेश उरांव, सोमरा उरांव, सीमा देवी, उषा देवी और मुन्नी गाड़ी सहित अन्य किसान एवं परियोजना टीम के सदस्य मौजूद रहे.

    ग्रामीण विकास में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर
    सीसीएल की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत संचालित ‘उन्नत कृषि’ परियोजना के माध्यम से आधुनिक कृषि तकनीकों को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. परियोजना से जुड़े आदिवासी युवा और किसान ड्रोन तकनीक और मोबाइल ऐप जैसे आधुनिक साधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

    आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से कृषि क्षेत्र में बेहतर परिणाम
    विजिट को तकनीकी ज्ञान, अनुभव और कृषि क्षेत्र में संभावित सहयोग के आदान-प्रदान की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया. परियोजना से जुड़े लोगों ने कहा कि उचित अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर किसान आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर कृषि क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं.

  • बिहार में बच्चों के लिए थानों में अलग सुरक्षित जगह, 2 अक्टूबर से शुरू होगी हेल्प डेस्क व्यवस्था

    बिहार में बच्चों के लिए थानों में अलग सुरक्षित जगह, 2 अक्टूबर से शुरू होगी हेल्प डेस्क व्यवस्था

    पटना
     बिहार में बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुलिस व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य के सभी पुलिस थानों में अब चाइल्ड हेल्प डेस्क स्थापित किया जाएगा। इसकी शुरुआत गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर से होगी। गृह विभाग ने नाबालिग बच्चों की सुरक्षा और उनकी शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए यह पहल की है। पुलिस मुख्यालय ने गुरुवार को जारी बयान में इसकी जानकारी दी।

    थाने में बच्चों के लिए अलग और सुरक्षित जगह
    निर्देश के मुताबिक चाइल्ड हेल्प डेस्क को थाने के ऐसे स्थान पर बनाया जाएगा, जहां बच्चों और उनके अभिभावकों की आसानी से पहुंच हो।

    इसे पुलिस थाने के लॉकअप से पूरी तरह अलग रखा जाएगा। डेस्क पर चाइल्ड वेलफेयर पुलिस ऑफिसर और जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी के नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएंगे।

    बच्चियों के मामलों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती
    बच्चियों से जुड़े मामलों के लिए चाइल्ड हेल्प डेस्क पर महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। डेस्क पर प्रदर्शित संपर्क नंबर 24 घंटे सक्रिय रहेंगे।

    बच्चों और उनके अभिभावकों की ओर से मिलने वाली ई-शिकायतों और सहायता के अनुरोधों पर निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई की जाएगी। शिकायत और उस पर की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रूप से रखा जाएगा।

    पुलिस अधिकारियों की होगी नियमित निगरानी
    गृह विभाग ने यह व्यवस्था बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू करने का फैसला लिया है।

    चाइल्ड हेल्प डेस्क की नियमित निगरानी डीएसपी, विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रभारी और जिला स्तर के अन्य वरीय अधिकारी करेंगे।

    2 अक्टूबर तक व्यवस्था, 5 अक्टूबर तक रिपोर्ट
    सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि 2 अक्टूबर तक सभी थानों में चाइल्ड हेल्प डेस्क की व्यवस्था लागू कर दी जाए। इसके बाद 5 अक्टूबर तक अनुपालन रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजनी होगी।

    नई व्यवस्था के जरिए बच्चों और उनके अभिभावकों को थाने में शिकायत दर्ज कराने और सहायता पाने के लिए अलग, सुलभ और सुरक्षित माध्यम उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

  • श्रीनगर, गुलमर्ग और पहलगाम घूमें, IRCTC लाया लखनऊ से कश्मीर का शानदार टूर पैकेज

    श्रीनगर, गुलमर्ग और पहलगाम घूमें, IRCTC लाया लखनऊ से कश्मीर का शानदार टूर पैकेज

    लखनऊ
     लखनऊ से शुरू होने वाला IRCTC का ‘जन्नत-ए-कश्मीर’ हवाई टूर पैकेज कश्मीरी वादियों की सैर करने के लिए एक शानदार विकल्प है। 3 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस 5 रात और 6 दिन के टूर के दौरान पर्यटकों को श्रीनगर, सोनमर्ग, पहलगाम और गुलमर्ग की सैर का आनंद मिलेगा।

    इस पैकेज के तहत लखनऊ से श्रीनगर आने-जाने की यात्रा फ्लाइट के जरिए तय होगी, जबकि ठहरने के लिए 3 सितारा होटल और पारंपरिक हाउस बोट का इंतज़ाम रहेगा। यात्रा के दौरान डल झील, सोनमर्ग, गुलमर्ग, पहलगाम, खिलनमर्ग, बेताब घाटी, चंदनवारी और अरु घाटी जैसे खूबसूरत स्थानों का भ्रमण कराया जाएगा।

    यात्रियों को अलग से करना होगा भुगतान
    इसके साथ ही यात्री शंकराचार्य मंदिर, मुगल गार्डन, निशात बाग, चश्मेशाही, शालीमार गार्डन और हजरतबल दरगाह के दर्शन भी कर सकेंगे। गुलमर्ग में मशहूर गोंडोला केबल कार की सुविधा उपलब्ध रहेगी, लेकिन इसके लिए यात्रियों को अलग से भुगतान करना पड़ेगा।

    किराए की बात करें तो अकेले यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति शुल्क 49,100 रुपये तय किया गया है। दो लोगों के एक साथ ठहरने पर प्रति व्यक्ति 43,000 रुपये और तीन लोगों के शेयरिंग पर 41,500 रुपये प्रति व्यक्ति किराया लगेगा। बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों के लिए बेड सहित पैकेज का शुल्क 33,100 रुपये और बिना बेड के 30,500 रुपये रखा गया है।

    IRCTC उत्तरी क्षेत्र के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक अजीत कुमार सिन्हा के अनुसार इस टूर पैकेज में बुकिंग 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर होगी। यात्रा के इच्छुक लोग पर्यटन भवन, गोमती नगर, लखनऊ स्थित IRCTC कार्यालय जाकर बुकिंग करा सकते हैं या फिर IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट irctctourism.com के जरिए सीधे ऑनलाइन टिकट बुक कर सकते हैं।

     

  • महल रोड पर बदलेगा ट्रैफिक सिस्टम, 3 चौराहे होंगे सिग्नल फ्री; जानें नई व्यवस्था

    महल रोड पर बदलेगा ट्रैफिक सिस्टम, 3 चौराहे होंगे सिग्नल फ्री; जानें नई व्यवस्था

    जयपुर
    जयपुर के जगतपुरा स्थित हरे कृष्णा मार्ग पर ट्रैफिक सिग्नल पर रुकने के बजाय यू-टर्न के जरिए यातायात को आगे बढ़ाने की नई व्यवस्था शुरू करने की तैयारी जेडीए ने कर ली है। जेडीए का लक्ष्य 21 सितंबर से महल रोड के तीन प्रमुख चौराहों को ट्रैफिक सिग्नल फ्री करना है। इसके लिए प्रस्तावित सात यू-टर्न स्ट्रक्चर में से तीन का निर्माण पूरा हो चुका है। इनके जरिए जीवन रेखा हॉस्पिटल चौराहा, मुंबई हॉस्पिटल चौराहा और अक्षय पात्र चौराहा सिग्नल फ्री किए जाएंगे।

    नई व्यवस्था लागू करने से पहले स्थानीय लोगों से संवाद की तैयारी की गई है। इसको लेकर जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने गुरुवार को अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक निर्देश दिए।

    सिग्नल हटेंगे, पर खतरे बढ़े तो?

    • सिग्नल हटाकर ट्रैफिक चलाने की कोशिश यू-टर्न पर वाहनों की लंबी कतार में बदल सकती है, क्योंकि मुख्य कॉरिडोर को संकरा कर दिया गया है।
    • मार्ग पर अस्पताल हैं। यू-टर्न पर जाम लगने या वाहन फंसने की स्थिति में एंबुलेंस के लिए सबसे जरूरी समय गंवाने का खतरा रहेगा।
    • लंबा चक्कर बचाने की कोशिश में चालक गलत कट, गलत लेन या गलत दिशा अपना सकते हैं। यही लापरवाही हादसे की वजह बन सकती है।
    • यू-टर्न पर कई दिशाओं से वाहनों का मूवमेंट होगा। सुरक्षित पैदल क्रॉसिंग की व्यवस्था नहीं हुई तो सड़क पार करना बड़ी चुनौती बन सकता है।
    • बस या बड़े वाहन के यू-टर्न लेते ही पीछे वाहनों की लंबी कतार लग सकती है। डिजाइन में कमी पूरे ट्रैफिक फ्लो पर भारी पड़ सकती है।

    आज मौके पर होगा ट्रैफिक मूवमेंट का परीक्षण
    जेडीए और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी 18 सितंबर को महल रोड पर संयुक्त निरीक्षण करेंगे। यू-टर्न स्ट्रक्चर पर वाहनों के सुगम संचालन में कहां परेशानी आ सकती है, इसका मौके पर परीक्षण किया जाएगा। महाजन ने अधिकारियों को ट्रैफिक पुलिस के साथ लगातार समन्वय रखने और यू-टर्न स्ट्रक्चर पर यातायात संचालन को सुगम बनाने के निर्देश दिए हैं। जेडीए ने शुक्रवार को दोपहर 2:30 बजे मंथन सभागार में मार्ग से जुड़े स्थानीय लोगों और संस्थानों के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई है।