Category: राज्य

  • सेना से 7 साल में निकाले गए जवान की विधवा को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने 42 साल बाद पेंशन का हक माना

    सेना से 7 साल में निकाले गए जवान की विधवा को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने 42 साल बाद पेंशन का हक माना

    चंडीगढ़ 

    पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सेना से महज सात साल की सेवा के बाद अमान्य होकर बाहर किए गए जवान की विधवा की पेंशन का रास्ता चार दशक से अधिक समय बाद साफ कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि सैनिक ने दस साल की न्यूनतम अर्हकारी सेवा पूरी नहीं की थी, उसे अमान्य पेंशन के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

    मामले में सैनिक की होशियारपुर निवासी विधवा ने करीब 42 साल बाद अपने पति के पेंशन संबंधी अधिकार के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की थी। मामला ऐसे सैनिक का है, जो 18 अगस्त 1971 को भारतीय सेना में भर्ती हुआ था। वर्ष 1978 में उसे सेना से अमान्य घोषित कर सेवा से बाहर कर दिया गया था। उसे उस समय अमान्य ग्रेच्युटी और मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी का भुगतान किया गया था। 

    बाद में उसकी विधवा ने अपने पति को मिलने वाले पेंशन लाभ का दावा किया। केंद्र सरकार ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा कि सैनिक ने दस साल की अर्हकारी सेवा पूरी नहीं की थी। इसके अलावा सरकार ने यह भी आपत्ति उठाई कि विधवा ने पेंशन के लिए करीब 42 साल की देरी से दावा किया।

    हाईकोर्ट ने मामले पर विचार करते हुए कहा कि कानून की स्थापित स्थिति के अनुसार अमान्य पेंशन के लिए दस साल की सेवा पूरी होना अनिवार्य बाधा नहीं है। अदालत ने मामले में पेंशन अधिकार को केवल देरी के आधार पर खत्म करने के बजाय लागू पेंशन नियमों और पहले से स्थापित न्यायिक सिद्धांतों को महत्व दिया। 

     

     

     

  • निवेश, निर्यात और उद्योगों का संगम, यूपी के औद्योगिक सामर्थ्य का होगा बड़ा प्रदर्शन

    निवेश, निर्यात और उद्योगों का संगम, यूपी के औद्योगिक सामर्थ्य का होगा बड़ा प्रदर्शन

    निवेश से निर्यात तक, एक मंच पर दिखेगा उत्तर प्रदेश का औद्योगिक सामर्थ्य

    निवेश प्रोत्साहन से लेकर एमएसएमई, ओडीओपी, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा तक की ताकत का होगा प्रदर्शन

    योगी सरकार के औद्योगिक विजन को वैश्विक मंच देगा चौथा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026

    25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में होगा भव्य आयोजन

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी औद्योगिक एवं निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों को वैश्विक मंच देने की तैयारी तेज हो गई है। निवेश से निर्यात तक प्रदेश के औद्योगिक सामर्थ्य को एक मंच पर प्रदर्शित करने के लिए चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 का आयोजन 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में किया जाएगा। ट्रेड शो में प्रदेश के विभिन्न विभागों, विकास प्राधिकरणों, औद्योगिक क्षेत्रों, एमएसएमई, ओडीओपी उद्यमियों, निर्यातकों और सेवा क्षेत्र से जुड़े संस्थानों की भागीदारी प्रस्तावित है।

    योगी सरकार के औद्योगिक विजन के अनुरूप आयोजित होने वाला यह ट्रेड शो उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, निवेश संभावनाओं, स्थानीय उत्पादों की विविधता और निर्यात क्षमता को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा। आयोजन में निवेश प्रोत्साहन, आधारभूत ढांचे, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और सेवा क्षेत्रों को अलग-अलग हॉल में प्रदर्शित किया जाएगा। इससे निवेशकों, खरीदारों और उद्यमियों के बीच संवाद तथा कारोबारी साझेदारी के अवसर उपलब्ध होंगे।

    निवेश प्रोत्साहन से औद्योगिक विस्तार तक, एक मंच पर आएंगे प्रमुख संस्थान

    चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन संस्थानों की भागीदारी प्रस्तावित है। हॉल 1 में इन्वेस्ट यूपी और उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) को स्थान दिया गया है। हॉल 3 में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा), नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की भागीदारी रहेगी।

    हॉल 4 में ‘यूपी एट अ ग्लांस’ के माध्यम से प्रदेश की समग्र औद्योगिक एवं विकास क्षमता को प्रदर्शित किया जाएगा। हॉल 5 में सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार की गतिविधियां प्रस्तुत की जाएंगी। हॉल 6 में सिंचाई, समाज कल्याण, नगर विकास, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, ऊर्जा तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग शामिल होंगे।

    हॉल 7 में नोएडा विकास प्राधिकरण, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन, आईटी एवं आईटीईएस तथा ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की भागीदारी प्रस्तावित है। हॉल 8 में श्रम विभाग, स्वास्थ्य एवं अस्पताल, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा तथा बैंकिंग एवं वित्त से जुड़े क्षेत्र प्रदर्शित होंगे। इन संस्थानों की भागीदारी से उत्तर प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों, औद्योगिक आधारभूत ढांचे, कनेक्टिविटी, मानव संसाधन और कारोबारी सुविधाओं की जानकारी निवेशकों एवं उद्यमियों तक पहुंचाने का मंच मिलेगा।

    ओडीओपी और एमएसएमई की ताकत से वैश्विक बाजार तक पहुंच

    उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों तथा स्थानीय उत्पादों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए ट्रेड शो में एमएसएमई और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) को विशेष स्थान दिया गया है। हॉल 9 में ओडीओपी के उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा, जबकि हॉल 10 में नए उद्यमियों एवं एमएसएमई को स्थान दिया गया है। हॉल 11 में पशुपालन, मत्स्य, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जीआई उत्पाद, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन तथा आयुष से जुड़े क्षेत्र शामिल होंगे। हॉल 12 में कृषि विभाग, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार, खाद्य प्रसंस्करण, उद्यान, डेयरी विकास और चीनी उद्योग की भागीदारी प्रस्तावित है।

    यह व्यवस्था प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों, ग्रामीण उद्यमिता और आधुनिक औद्योगिक गतिविधियों को एक साझा मंच पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। ओडीओपी एवं एमएसएमई उत्पादों की प्रदर्शनी से उद्यमियों को अपने उत्पादों की ब्रांडिंग, संभावित खरीदारों से संपर्क और नए बाजारों तक पहुंच बनाने के अवसर मिलेंगे।

    निर्यातकों, लॉजिस्टिक्स और आधुनिक उद्योगों को मिलेगा मंच

    ट्रेड शो में निर्यात विस्तार से जुड़े क्षेत्रों को भी प्रमुखता दी गई है। हॉल 14, 15 और 16 में टाउन ऑफ एक्सीलेंस, निर्यातकों, वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स, वस्त्र एवं हथकरघा, खेल तथा मुख्यमंत्री युवा से जुड़े क्षेत्रों की भागीदारी प्रस्तावित है। हॉल 17 में ओडीओपी ओपन स्पेस, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के हितधारक, क्रेडाई और परिवहन क्षेत्र को शामिल किया गया है। निर्यातकों एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की भागीदारी से प्रदेश के उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने से जुड़े कारोबारी अवसरों को प्रदर्शित करने का मंच मिलेगा। वहीं वस्त्र, हथकरघा, खेल, कृषि आधारित उद्योगों और अन्य क्षेत्रों के उद्यमी अपने उत्पादों तथा कारोबारी क्षमताओं को संभावित खरीदारों के सामने प्रस्तुत कर सकेंगे।

    विकास प्राधिकरणों की भागीदारी से दिखेगा क्षेत्रीय औद्योगिक सामर्थ्य

    ट्रेड शो के फोयर एरिया में प्रदेश के विभिन्न विकास प्राधिकरणों की भागीदारी भी प्रस्तावित है। इनमें कानपुर विकास प्राधिकरण, वाराणसी विकास प्राधिकरण, आगरा विकास प्राधिकरण, लखनऊ विकास प्राधिकरण, मेरठ विकास प्राधिकरण, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण समेत अन्य प्राधिकरण शामिल हैं। विकास प्राधिकरणों की भागीदारी से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विकास, औद्योगिक विस्तार और निवेश से जुड़े अवसरों को प्रदर्शित किया जा सकेगा। इससे उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की कारोबारी संभावनाओं तथा विकास परियोजनाओं की जानकारी निवेशकों और उद्यमियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

    उद्योग जगत, संस्थानों और विश्वविद्यालयों को भेजे जा रहे आमंत्रण

    ट्रेड शो में अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकारी विभागों, उद्योग संगठनों, चैंबरों, संस्थानों और विश्वविद्यालयों को आमंत्रित किया जा रहा है। सरकारी कार्यालयों एवं विभागों को पत्र तथा आमंत्रण कार्ड भेजे जा चुके हैं। उद्योग संगठनों एवं चैंबरों को डिजिटल माध्यम से आमंत्रण भेजे गए हैं तथा डाक से आमंत्रण की प्रक्रिया जारी है। संस्थानों और विश्वविद्यालयों को भी डिजिटल आमंत्रण भेजे जा चुके हैं। बी2बी एवं बी2सी खरीदार पंजीकरण के लिए क्यूआर कोड तैयार कर प्रसारित किया जा रहा है।

  • भूजल की जांच में उत्तर प्रदेश ने बनाया रिकॉर्ड, देश में पहला स्थान; शुद्ध पेयजल पर जोर

    भूजल की जांच में उत्तर प्रदेश ने बनाया रिकॉर्ड, देश में पहला स्थान; शुद्ध पेयजल पर जोर

    भूजल स्रोतों की जांच में यूपी ने देश में पहला स्थान हासिल किया, पंजाब-आंध्र प्रदेश को भी पीछे छोड़ा

    योगी सरकार प्रदेशवासियों को भूजल की स्वच्छता सुनिश्चित कर उपलब्ध करा रही शुद्ध पेयजल

    भूजल स्रोतों की जांच में उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय औसत से करीब 44 प्रतिशत आगे

    45 हजार से ज्यादा स्रोतों की जांच पूरी, यूपी जल निगम ग्रामीण ने जांच में चार राज्यों को पीछे छोड़ा

    लखनऊ
     योगी सरकार प्रदेशवासियों के लिए जल संरक्षण, भूजल स्तर में सुधार और हर घर तक स्वच्छ व सुरक्षित जल पहुंचाने में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में भूजल स्रोतों की गुणवत्ता और स्थिति की निगरानी को लेकर किए जा रहे परीक्षण कार्य में प्रदेश ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। जांच के अंतर्गत राज्य व जिले स्तर की प्रयोगशालाओं से प्रदेशभर में भूजल स्रोत, भूमिगत व ओवरहेड टंकी समेत पानी के अन्य स्रोतों की पड़ताल की गई है।

    पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जलशक्ति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में 48,055 भूजल स्रोतों के परीक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके मुकाबले 45,361 स्रोतों की जांच पूरी कर ली गई है। यह कुल लक्ष्य का 94.39 प्रतिशत है। 15 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के आधार पर उत्तर प्रदेश, देश के राज्यों की सूची में पहले स्थान पर है।

    यूपी जल निगम ग्रामीण प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने कहा कि भूजल स्रोतों का नियमित परीक्षण पेयजल की गुणवत्ता और जल स्रोतों की स्थिति की निगरानी के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार के स्तर पर भी जल स्रोतों की गुणवत्ता, सोर्स सस्टेनेबिलिटी और गहन निगरानी पर जोर दिया जा रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश ने सबसे बेहतर परिणाम हासिल किए हैं और भविष्य में भी प्रदेश में सभी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास जारी रहेगा।

    पंजाब और आंध्र प्रदेश को पीछे छोड़ शीर्ष पर यूपी
    भूजल स्रोतों के परीक्षण की राज्यवार रैंकिंग में उत्तर प्रदेश के बाद पंजाब दूसरे और आंध्र प्रदेश तीसरे स्थान पर है। पंजाब ने निर्धारित लक्ष्य का 83.46 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश ने भी 83.46 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया है। वहीं उत्तराखंड 82.30 प्रतिशत उपलब्धि के साथ चौथे और केरल 81.13 प्रतिशत के साथ पांचवें स्थान पर है।

    राष्ट्रीय औसत से करीब 44 प्रतिशत अधिक उपलब्धि
    यूपी जल निगम ग्रामीण अधीक्षण अभियंता एवं राज्य प्रयोगशाला प्रमुख ज्ञानेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि भूजल स्रोतों के परीक्षण में उत्तर प्रदेश की 94.39 प्रतिशत उपलब्धि राष्ट्रीय औसत 50.46 प्रतिशत से काफी अधिक है। यानि यूपी ने राष्ट्रीय औसत की तुलना में करीब 44 प्रतिशत अधिक उपलब्धि दर्ज की है।

    48 हजार से अधिक स्रोतों का निर्धारित लक्ष्य
    वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश में कुल 48,055 भूजल स्रोतों के परीक्षण का लक्ष्य रखा गया था। इसके सापेक्ष 45,361 स्रोतों का परीक्षण पूरा हो चुका है। अब निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए 2,694 स्रोतों का परीक्षण शेष है। इस तरह प्रदेश ने पहली छमाही में ही निर्धारित लक्ष्य का बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया है।

  • बाढ़ से 50 लाख लोग प्रभावित, नितिन नवीन ने दान किया तीन महीने का राज्यसभा सांसद वेतन

    बाढ़ से 50 लाख लोग प्रभावित, नितिन नवीन ने दान किया तीन महीने का राज्यसभा सांसद वेतन

    पटना
    भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बिहार में बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। उन्होंने राज्यसभा सांसद के रूप में मिलने वाली अपनी तीन महीने की सैलरी को बाढ़ पीड़ितों के लिए दान करने का ऐलान किया है। नितिन ने लगभग 6.35 लाख रुपये सीएम रिलीफ फंड में भेजे हैं। उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह जानकारी दी। बता दें कि बिहार में बाढ़ से 50 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं।

    नितिन नवीन मूलरूप से पटना के रहने वाले हैं और वह अभी बिहार से राज्यसभा सांसद हैं और राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार में बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। बाढ़ पीड़ितों तक समय पर राहत और आवश्यक सहायता पहुंचाने के लिए सरकार पूरी तत्परता से काम कर रही है।

    सोशल मीडिया पोस्ट में नितिन नवीन ने कहा कि राज्यसभा सांसद के रूप में वह अपने तीन महीने के वेतन की राशि 635000 रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में अंशदान कर रहे हैं।

    भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा बाढ़ से प्रभावित हर परिवार को 7-7 हजार रुपये दे रही है। अब तक कुल 550 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता बाढ़ पीड़ितों को दी जा चुकी है। इसके अलावा राहत शिविर, कम्युनिटी किचन, चिकित्सा सुविधाओं और पशु चारे की व्यवस्था बाढ़ प्रभावित इलाकों में की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। किसानों की फसल क्षति का आकलन कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी जारी है।

    शिवराज ने किया सर्वे, केंद्र से मिलेगी मदद
    दो दिन पहले ही केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह के नेतृत्व में दिल्ली से एक टीम ने बिहार आकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया था। शिवराज ने कहा था कि केंद्र सरकार बिहार की भरपूर मदद करेगी। बाढ़ का पानी उतरने के बाद नुकसान का सही से आकलन किया जाएगा। केंद्र से एक और टीम भी बिहार आएगी।

    50 लाख लोग बाढ़ की चपेट में
    बता दें कि बिहार में गंगा, गंडक, कोसी, सोन समेत अन्य प्रमुख नदियों के उफान से बिहार के तटीय इलाकों में बाढ़ ने जमकर कहर बरपाया। अब तक 15 से अधिक जिलों की लगभग 50 लाख की आबादी बाढ़ की चपेट में आ चुकी है। कई लोगों को अपने घरों को छोड़ दूसरी जगह पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। किसी ने अपने खेत-खलिहान तो किसी ने अपने घर-दुकान बाढ़ में खो दिए।

  • मथुरा में यूपी राइज 2026: युवाओं को जॉब क्रिएटर बनाने की सार्थक पहल

    मथुरा में यूपी राइज 2026: युवाओं को जॉब क्रिएटर बनाने की सार्थक पहल

    मथुरा

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'आत्मनिर्भर यूपी' विजन को धरातल पर उतारने के लिए शुक्रवार को नेशनल हाइवे स्थित जीएलए विश्वविद्यालय में 'यूपी राइज 2026' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस वृहद आयोजन में 800 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भारी उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं की मानसिकता में बदलाव लाकर उन्हें केवल नौकरी तलाशने वाला न बनाकर, स्वयं का उद्यम स्थापित कर दूसरों को रोजगार देने वाला 'जॉब क्रिएटर' बनाना है।
    कार्यक्रम का शुभारंभ कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल, कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता, चीफ फाइनेंस ऑफिसर डॉ. विवेक अग्रवाल, कुलसचिव अशोक कुमार सिंह और मुख्य अतिथि सीए पलक राठी व शांतनु गुप्ता ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। 

    सरकारी योजनाओं और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर मंथन

    राज्य सरकार प्रदेश में नवाचार (इनोवेशन) और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए निरंतर धरातलीय कार्य कर रही है। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने युवाओं को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, यूपी स्टार्टअप फंड, मुख्यमंत्री अभ्युदय निशुल्क कोचिंग योजना और यूपी स्किल मिशन जैसी महत्वाकांक्षी नीतियों की विस्तृत जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, कन्या सुमंगला योजना, फ्री टैबलेट/स्मार्टफोन योजना और महिला सामर्थ्य योजना के माध्यम से मिलने वाली वित्तीय सहायता व सब्सिडी पर भी प्रकाश डाला गया, ताकि युवा आर्थिक बाधाओं को पार कर अपने बिजनेस मॉडल को सफल बना सकें।

    युवाओं के 8 बेहतरीन इनोवेशन ने किया प्रभावित

    यूपी राइज की थीम के अनुरूप आयोजन में कुल 25 स्टार्टअप आइडिया प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 8 बेहतरीन आइडिया शॉर्टलिस्ट हुए। इनमें लॉजिस्टिक्स के लिए 'बुक माई सारथी', छात्रों के लिए कैंपस-फर्स्ट मार्केटप्लेस 'कैम्पोरा', एआई आधारित ट्रैवल सुपर-प्लेटफॉर्म 'नमस्ते एआई' और स्वदेशी ड्रोन एवियोनिक्स बनाने वाली 'क्वांटावर्स टेक्नोलॉजीज' ने खूब तालियां बटोरीं। वहीं, खदानों और सुरंगों जैसे खतरनाक माहौल में इंसानी जान बचाने के लिए 'दक्ष डायनामिक्स' द्वारा बनाया गया स्वदेशी 'रोबोडॉग' भी आकर्षण का केंद्र रहा, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।

    'लिटिललिंगोस' ने जीता प्रथम पुरस्कार, 'फिटेड' व 'धृतम' बने उपविजेता

    प्रतियोगिता में हर टीम को अपना आइडिया प्रस्तुत करने के लिए 7 मिनट का समय दिया गया। जूरी के समक्ष अपनी शानदार प्रस्तुति देकर बच्चों के लिए एआई-पावर्ड इंग्लिश लर्निंग प्लेटफॉर्म 'लिटिललिंगोस' (LittleLingos) ने प्रथम स्थान हासिल कर 25,000 रुपये का मुख्य पुरस्कार जीता। वहीं, एआई पर्सनल स्टाइलिंग ऐप बनाने वाली टीम 'फिटेड'(Fitted) और तनाव व हार्ट रेट मापने वाला स्मार्ट अंडरगारमेंट (कवच एक्स) बनाने वाली टीम 'धृतम' (Dhritam) संयुक्त रूप से उपविजेता रहीं। इस दौरान कॉर्पोरेट विशेषज्ञ हर्षित देसाई, डॉ. मधुरिता गुप्ता और राधिका बजोरिया ने बतौर मेंटर छात्रों का मार्गदर्शन किया।

    विचारों तक सीमित न रहें, उन्हें धरातल पर उतारें: कुलाधिपति

    इस अवसर पर जीएलए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार, कौशल विकास और स्टार्टअप के क्षेत्र में अनेक अवसर उपलब्ध करा रही है। आज का युवा केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि अपने विचार और प्रतिभा के बल पर रोजगार देने वाला उद्यमी भी बन सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि यदि उनके पास कोई नया इनोवेटिव आइडिया है, तो उसे केवल सोच विचार तक सीमित न रखें। जानकारी जुटाएं, विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लें और उसे व्यावहारिक रूप देने का प्रयास करें।

    25 शहरों और 30 प्रमुख कॉलेजों तक पहुंचेगा 'यूपी राइज' का कारवां

    छात्रों को स्वरोजगार और नवाचार की संभावनाओं से रूबरू कराने वाला यह 'यूपी राइज' कार्यक्रम प्रदेश के 25 शहरों के 30 प्रमुख कॉलेजों में आयोजित किया जाएगा। जीएलए विश्वविद्यालय में इस सफल आयोजन के बाद, स्टार्टअप और उद्यमिता की अलख जगाने वाले इस अभियान का अगला पड़ाव 21 सितम्बर 2026 को बरेली स्थित इनवर्टिस विश्वविद्यालय में होगा।

  • ₹2,000 से ऊपर UPI पेमेंट पर MDR का प्रस्ताव, बिहार में कैश बढ़ने की आशंका

    ₹2,000 से ऊपर UPI पेमेंट पर MDR का प्रस्ताव, बिहार में कैश बढ़ने की आशंका

     पटना
     बिहार(Bihar News) के बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक डिजिटल लेनदेन( Bihar UPI Transaction) का चलन तेजी से बढ़ा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 के दौरान राज्य में यूपीआई (UPI) के माध्यम से लगभग ₹70,130.89 करोड़ का डिजिटल भुगतान दर्ज किया गया।

    आंकड़ों की जुबानी बिहार का डिजिटल सफर
    जून 2026 में बिहार में करीब 50.28 करोड़ डिजिटल भुगतान हुए। इस दौरान यूपीआई के जरिए कुल ₹70,130.89 करोड़ का हस्तांतरण हुआ।

    प्रति ट्रांजैक्शन औसतन ₹1,395 का भुगतान हुआ, जो यह साबित करता है कि आम लोग किराना दुकान, सब्जी और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए डिजिटल पेमेंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। देश के कुल यूपीआई वॉल्यूम में बिहार की हिस्सेदारी 2.21% और कुल वैल्यू में 2.42% रही।

    MDR चार्ज का प्रस्ताव और बढ़ता विवाद
    डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब एक नई चुनौती सामने खड़ी हो रही है। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इस फीस के लागू होने की खबर से छोटे व्यापारियों और फुटकर विक्रेताओं के बीच चिंता बढ़ गई है।

    क्या दोबारा बढ़ेगा कैश का चलन?
    छोटे दुकानदारों का मानना है कि पहले से ही कम मार्जिन पर काम करने के बाद अतिरिक्त 0.4% का शुल्क उनकी कमाई को प्रभावित करेगा। यदि यह चार्ज व्यापारियों पर डाला गया, तो वे ग्राहकों से डिजिटल के बजाय नकद भुगतान की मांग कर सकते हैं। वहीं ग्राहकों को भी यह डर है कि व्यापारी इस शुल्क की भरपाई के लिए सामान के दाम बढ़ा सकते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर MDR शुल्क अनिवार्य किया गया, तो बिहार के ग्रामीण और छोटे शहरी इलाकों में लोग एक बार फिर कैश की तरफ रुख कर सकते हैं, जिससे डिजिटल ट्रांजैक्शन की रफ्तार धीमी हो सकती है।

  • रेलवे कर्मचारियों की बैठक में बोनस से लेकर भत्तों तक मुद्दे गूंजे, 5600 पदों पर भर्ती की मांग

    रेलवे कर्मचारियों की बैठक में बोनस से लेकर भत्तों तक मुद्दे गूंजे, 5600 पदों पर भर्ती की मांग

     धनबाद
    रेल कर्मचारियों के दुर्गापूजा बोनस का भुगतान पुराने सीलिंग हटा कर नये सीलिंग के आधार पर करने की मांग रेलवे बोर्ड चेयरमैन तक पहुंच गई है। आल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन-एआइआरएफ और रेलवे बोर्ड चेयरमैन समेत बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों के साथ हुई स्थाई वार्ता तंत्र की बैठक में फेडरेशन ने नये सीलिंग के साथ बोनस की मांग की है।

    पर्यवेक्षकों के नये 5600 पद सृजित किये गये हैं। बैठक में सृजित पदों पर शीघ्र बहाली की भी सिफारिश की है। फेडरेशन के जोनल सचिव ओपी शर्मा और ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन धनबाद मंडल के मीडिया प्रभारी एनके खवास ने बैठक की जानकारी दी

    दोनों ने बताया कि एआइआरएफ के राष्ट्रीय महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा की मौजूदगी में हुई बैठक में रेलवे को सबसे ज्यादा राजस्व अर्जित कर देने वाले पूर्व मध्य रेलवे में खाली पदों को जल्द भरने, सुरक्षा कैटेगरी के रिक्त पदों पर जल्द बहाली, ट्रैकमैन के पेट्रोलिंग बीट को 12 किमी करने सहित वेतन आयोग से संबंधित मुद्दों को उठाया गया।

    लंबित यात्रा भत्ता का मुद्दा बैठक में गूंजाजिसमें बताया गया कि यात्रा भत्ता बंद होने से रेलकर्मियों मे काफी रोष है। कई विभागों में रेलवे बोर्ड से 2022 में जारी आदेश को अब तक लागू नहीं किया जा सका है।

    बढ़े हुए और नये कार्यों के लिए नये पद सृजित करने, ओवरटाइम भत्ता, सीटीए आदि के लिए क्षेत्रीय रेलों को पर्याप्त धनराशि आवंटित करने, लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलट को किलोमीटर भत्ते के बकाये राशि का भुगतान करने की मांगों पर बैठक में वकालत की गई।

    सीबीटी परीक्षा की उत्तर-पत्रक तत्काल प्रकाशित करने, रेलवे क्वार्टर की मरम्मत एवं रखरखाव के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित करने, जर्जर रेलवे क्वार्टर में रहने वालों को नये क्वार्टर आवंटित करने, क्षेत्रीय रेल एवं मंडलों की आवश्यकता के अनुसार रिक्त पद भरे जाने, कैडर पुनर्गठन समिति की रिपोर्ट शीघ्र प्रकाशित करने जैसी मांगों से अवगत कराया गया।

    कर्मचारियों की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए रेलवे से अनुबंधित रेफरल अस्पतालों को भुगतान न होने के कारण कर्मचारियों को कैशलेश उपचार में आ रही समस्याओं का समाधान तथा हर स्वास्थ्य केंद्र पर अनुबंधित प्राइवेट अस्पतालों की सूची लगाने का भी सुझाव दिया गया।

  • ऑस्कर 2026 में भारत की दावेदारी पेश करेगी ‘गोंधल’, 14 सदस्यीय समिति ने चुनी फिल्म

    ऑस्कर 2026 में भारत की दावेदारी पेश करेगी ‘गोंधल’, 14 सदस्यीय समिति ने चुनी फिल्म

    पटना
    ऑस्कर 2026 में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के तौर पर मराठी फिल्म ‘गोंधल’ का चयन किया गया है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) की चयन समिति ने फिल्म को अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना है। इसकी जानकारी फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया और इम्पा के अध्यक्ष अभय सिन्हा ने दी।

    मराठी सिनेमा के लिए बड़ा पल
    ‘गोंधल’ के चयन के बाद मराठी फिल्म उद्योग में उत्साह का माहौल है। अभय सिन्हा ने फिल्म की पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए इसे मराठी सिनेमा के साथ-साथ भारतीय
    फिल्म उद्योग के लिए गौरव का क्षण बताया।

    उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘गोंधल’ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय सिनेमा की प्रतिभा और रचनात्मकता को मजबूती से प्रस्तुत करेगी। फिल्म के ऑस्कर सफर को लेकर अब दर्शकों की नजर आगे की प्रक्रिया पर है।

    14 सदस्यीय समिति ने किया चयन
    ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि चुनने के लिए फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने 14 सदस्यीय चयन समिति गठित की थी। प्रसिद्ध फिल्मकार पी. शेषाद्री इस समिति के अध्यक्ष थे।

    समिति में फिल्म उद्योग के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े निर्देशक, अभिनेता, निर्माता, सिनेमैटोग्राफर, संपादक और अन्य अनुभवी सदस्य शामिल थे। इसी समिति ने ऑस्कर के लिए भेजी गई फिल्मों में से ‘गोंधल’ का चयन किया।
    33 फिल्मों में से चुनी गई ‘गोंधल’

    इस वर्ष ऑस्कर की आधिकारिक प्रविष्टि के लिए फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया को कुल 33 फिल्मों की प्रविष्टियां मिली थीं। इनमें 14 हिंदी फिल्मों के अलावा अलग-अलग भारतीय भाषाओं की फिल्में भी शामिल थीं।

    करीब दो घंटे की अवधि वाली मराठी फिल्म ‘गोंधल’ को इन्हीं प्रविष्टियों में से चयनित किया गया। हालांकि घोषणा के दौरान फिल्म की कहानी से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई।

    गांव की पृष्ठभूमि में बुनी संगीतमय कहानी
    FFI के उपाध्यक्ष निशांत उज्ज्वल ने बताया कि ‘गोंधल’ महाराष्ट्र के एक सुंदर गांव की पृष्ठभूमि पर आधारित आकर्षक संगीतमय कहानी है। उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी और उसकी प्रस्तुति प्रभावशाली है।

    उन्होंने उम्मीद जताई कि चयन समिति द्वारा भारत की आधिकारिक ऑस्कर प्रविष्टि के रूप में चुनी गई ‘गोंधल’ देश के लिए ऑस्कर का गौरव लेकर आएगी।

    ऑस्कर चयन में बिहार का भी कनेक्शन
    ‘गोंधल’ के ऑस्कर चयन से जुड़े इस महत्वपूर्ण मौके पर बिहार के दो लोगों की भी अहम भूमिका है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अभय सिन्हा हैं, जबकि पटना के निशांत उज्ज्वल संस्था के उपाध्यक्ष हैं।

    निशांत उज्ज्वल ने फिल्म के चयन पर खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ‘गोंधल’ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के लिए गौरव हासिल करेगी।

    FFI की टीम में ये पदाधिकारी भी शामिल
    फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की टीम में धर्मेंद्र मेहरा सचिव, रवि कोटरकर सदस्य, संग्राम शिर्के कोषाध्यक्ष, टी. पी. अग्रवाल संरक्षक और हिराचंद उपाध्यक्ष के पद पर हैं।

    ऑस्कर चयन समिति की अध्यक्षता पी. शेषाद्री ने की। समिति के सामने आई 33 फिल्मों में से ‘गोंधल’ का चयन अब मराठी सिनेमा के लिए एक अहम उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

    अब आगे क्या होगा?
    भारत की आधिकारिक प्रविष्टि चुने जाने के बाद ‘गोंधल’ का अगला पड़ाव ऑस्कर की आगे की प्रक्रिया होगी। फिल्म के चयन ने भारतीय दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है।

    मराठी सिनेमा की यह फिल्म अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय सिनेमा की कहानी और रचनात्मकता को सामने रखने की कोशिश करेगी। नजर इस बात पर रहेगी कि ऑस्कर की आगे की प्रक्रिया में ‘गोंधल’ कितना आगे जाती है।

     

  • बिहार में ईंट-भट्ठों के पुराने बकाये का होगा निपटारा, ब्याज में मिलेगी ₹85 करोड़ तक छूट

    बिहार में ईंट-भट्ठों के पुराने बकाये का होगा निपटारा, ब्याज में मिलेगी ₹85 करोड़ तक छूट

    पटना
     ईंट-भट्ठा संचालकों के लिए खान एवं भूतत्व विभाग ने बड़ी राहत दी है। वर्ष 2024-25 तक की बकाया राशि के एकमुश्त समाधान के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू की गई है।

    इसके तहत बकाया राशि जमा करने वाले ईंट-भट्ठा संचालकों को ब्याज में 85 करोड़ रुपये तक की छूट दी जाएगी। योजना की अवधि 21 सितंबर से 20 दिसंबर 2026 तक रहेगी।

    खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने शुक्रवार को अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी।

    पेंडिंग था 316.66 करोड़ का राजस्व
    मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पुराने बकाये का समाधान कर राजस्व वसूली को आसान बनाना है। विभाग के अनुसार, ईंट-भट्ठों से कुल 316.66 करोड़ रुपये की राशि राजस्व संग्रह के लिए लंबित थी।

    इसमें से 27.28 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। अभी 289.38 करोड़ रुपये की राशि जमा होनी बाकी है। निर्धारित समय सीमा में एकमुश्त समाधान राशि जमा करने पर बकाया में शामिल ब्याज की राशि माफ कर दी जाएगी।

    विभाग के अनुसार, जिन ईंट-भट्ठों के खिलाफ 31 अगस्त 2026 तक बकाया स्वामित्व राशि नहीं जमा करने के कारण नीलाम पत्र वाद दर्ज हो चुका है, वे भी योजना के दायरे में आएंगे।

    एकमुश्त राशि जमा करने के साथ जिला खनिज फाउंडेशन, आयकर और अन्य करों का भुगतान करना जरूरी होगा। इसके बाद संबंधित खनन पदाधिकारी नीलाम पत्र पदाधिकारी को रिपोर्ट देंगे।

    इसके आधार पर नीलाम पत्र वाद का निस्तारण किया जा सकेगा। योजना के लिए सभी खनिज विकास पदाधिकारियों को आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया गया है

  • योगी सरकार शनिवार को 818 अभ्यर्थियों को देगी नौकरी की सौगात, मुख्यमंत्री देंगे नियुक्ति पत्र

    योगी सरकार शनिवार को 818 अभ्यर्थियों को देगी नौकरी की सौगात, मुख्यमंत्री देंगे नियुक्ति पत्र

    लखनऊ

    योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को रोजगार और सरकारी सेवाओं से जोड़ने की दिशा में शनिवार को एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शानिवार को लोकभवन सभागार में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों में चयनित 21 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान करेंगे जबकि शेष 797 अभ्यर्थियों को विभाग द्वारा नियुक्ति पत्र दिया जाएगा, कुल 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। 19 सितंबर को आयोजित होने वाले नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग, उत्तर प्रदेश उद्योग निदेशालय, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं एवं आयुष विभाग से जुड़े विभागों के अभ्यर्थी शामिल होंगे। 

    व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के 48 नव चयनित अभ्यर्थियों को दिया जाएगा नियुक्ति पत्र
    नियुक्ति पत्र पाने वाले अभ्यर्थियों में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के तहत विभिन्न ट्रेडों के अनुदेशक भी शामिल हैं। इस श्रेणी में कुल 48 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। इनमें मैकेनिक (ट्रैक्टर), पेंटर (सामान्य), सर्वेयर, मैकेनिकल मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, लेदर गुड्स मेकर, वायरमैन और प्लंबर जैसे पद शामिल हैं। प्लंबर के पद पर चयनित अभ्यर्थियों की संख्या 31 है, जबकि मैकेनिक (ट्रैक्टर) के छह, वायरमैन के चार और पेंटर (सामान्य) के चार अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। इसके अलावा सर्वेयर, मैकेनिकल मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, लेदर गुड्स मेकर के एक-एक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। इन नियुक्तियों से विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों में तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। वहीं अलग-अलग ट्रेडों में अनुदेशकों की नियुक्ति से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को संबंधित क्षेत्रों में बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा। 

    स्वास्थ्य विभाग में 357 एक्सरे-टेक्नीशियन को मिलेगा नियुक्ति पत्र
    कार्यक्रम में उद्योग विभाग के भी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश उद्योग निदेशालय, कानपुर के तहत सहायक सांख्यिकीय अधिकारी के नौ पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। इन सहायक सांख्यिकीय अधिकारियों की नियुक्ति से विभागीय स्तर पर आंकड़ों के संकलन, विश्लेषण और विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों से संबंधित सांख्यिकीय कार्यों को गति मिलेगी। इसके साथ ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं विभाग के 357 एक्सरे-टेक्नीशियन के पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। इसके अलावा आयुष विभाग में होम्योपैथिक फार्मासिस्ट के 361, होम्योपैथिक प्रोफेसर के चार, आयुर्वेद प्रोफेसर के पांच, आयुर्वेद रीडर के 22, यूनानी प्रोफेसर के एक, यूनानी रीडर के एक और यूनानी लेक्चरर के 10 पदों पर चयनित कुल 404 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।

    एक नजर में नियुक्तियां

    –  व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के विभिन्न ट्रेडों में अनुदेशक : 48
    – उद्योग विभाग में सहायक सांख्यिकीय अधिकारी : 9
    – चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में एक्सरे-टेक्नीशियन : 357
    – होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी समेत विभिन्न पद : 404