Category: राज्य

  • RTI के दोहराव पर आयोग का बड़ा निर्देश, हर शिकायत-अपील के साथ शपथपत्र अनिवार्य

    RTI के दोहराव पर आयोग का बड़ा निर्देश, हर शिकायत-अपील के साथ शपथपत्र अनिवार्य

     चंडीगढ
    सूचना का अधिकार पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन एक ही आरटीआइ आवेदन और विषय को लेकर बार-बार शिकायत या अपील दायर करने को वैधानिक अधिकार की आड़ में स्वीकार नहीं किया जा सकता। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान की।

    आयोग ने आदेश में स्पष्ट किया है कि सूचना मांगने का अधिकार किसी व्यक्ति को एक ही कारण और विषय पर बार-बार कार्यवाही शुरू करने का असीमित अधिकार नहीं देता।

    आयोग ने कहा कि आरटीआइ कानून को इस तरह लागू किया जाना चाहिए, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़े तथा सरकारी विभागों और आयोग के सीमित संसाधनों का अनावश्यक दोहन न हो।

    मामला पलवल निवासी श्रवण कुमार की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी एवं राज्य लोक सूचना अधिकारी पलवल के खिलाफ दायर शिकायत से जुड़ा है। संबंधित आरटीआइ आवेदन 24 अगस्त 2025 को दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से आयोग को बताया गया कि इसी आरटीआइ आवेदन के आधार पर पहले भी दो अलग मामलों में शिकायतें दायर की जा चुकी हैं।

    इतना ही नहीं, वर्तमान शिकायत में शामिल आरटीआइ आवेदन पहले दाखिल किए गए आवेदन के बिल्कुल समान था। आयोग को यह भी बताया गया कि श्रवण कुमार से संबंधित शिक्षा विभाग के अधिकारियों के खिलाफ करीब 36 मामले आयोग के समक्ष लंबित हैं।

    इसके अलावा जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक के कार्यालयों में करीब 130 से 150 आरटीआइ आवेदन भी दाखिल किए गए हैं।

    राज्य सूचना आयुक्त डा. अजय सूरा ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि आयोग के समक्ष पहले से दाखिल प्रत्येक आरटीआइ मामले तथा भविष्य में दायर की जाने वाली शिकायत या अपील के साथ श्रवण कुमार को शपथपत्र देना होगा।

    इसमें उन्हें स्पष्ट करना होगा कि संबंधित आरटीआइ आवेदन और विषय को लेकर उन्होंने पहले कोई अन्य शिकायत या अपील दाखिल नहीं की है।

    आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक के समक्ष लंबित आरटीआई आवेदनों के लिए भी इसी तरह का शपथपत्र देने का निर्देश दिया है। भविष्य में इन अधिकारियों के समक्ष दाखिल होने वाले प्रत्येक आरटीआइ आवेदन के साथ भी ऐसा शपथपत्र लगाना अनिवार्य होगा।

    संसाधनों के दोहराव पर आयोग की चिंता
    आयोग ने कहा कि एक ही आरटीआइ आवेदन से बार-बार शिकायतें दायर होने पर कार्यवाही दोहराई जाती है। इससे आयोग और संबंधित लोक प्राधिकरण के समय और संसाधनों की अनावश्यक खपत होती है।

    सुनवाई के दौरान जब शिकायतकर्ता से बार-बार शिकायत दाखिल करने का कारण पूछा गया तो उन्होंने संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया। उन्होंने केवल इतना कहा कि यदि एक शिकायत का फैसला हो चुका है तो अन्य शिकायतों का भी उसी आधार पर निपटारा किया जा सकता है।

    आयोग ने पूर्व न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि आरटीआइ के कानूनी अधिकार का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। लोक प्राधिकरणों पर इतनी अधिक शिकायतों और आवेदनों का बोझ भी नहीं डाला जा सकता कि सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में उनका अधिकांश समय और संसाधन ही खर्च होने लगे।

  • जमुई कांड के बाद खुली मदन रोड की हकीकत, महिलाओं ने बताई छेड़छाड़ और अवैध कारोबार की कहानी

    जमुई कांड के बाद खुली मदन रोड की हकीकत, महिलाओं ने बताई छेड़छाड़ और अवैध कारोबार की कहानी

    पटना
    बिहार के जमुई जिले में जिस जगह पर लड़की से हैवानियत हुई थी वो जगह महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि जमुई-लखीसराय मार्ग से सटे मदन रोड पर आए दिन महिलाओं और लड़कियों से छेड़छाड़ की घटना होती थी। एक सप्ताह पहले भी एक महिला का कुछ मनचलों ने रास्ता रोका था और अश्लील फब्तियां कसी थी। गनीमत थी कि उस होकर गुजर रहे कुछ राहगीरों के कारण महिला की आबरू बच गई थी। इस इलाके की रहने वाली एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व उनकी बहू उसी रास्ते से होकर जा रही थी। तभी कई युवकों ने उनकी बहू का रास्ता रोक लिया और अश्लील टिप्पणियां की। वे उसे आगे नहीं बढ़ने दे रहे थे। इस दौरान कुछ लोग उस होकर गुजर रहे थे, जिस कारण उनकी बहू की इज्जत बच गई।

    बुजुर्ग महिला ने यह भी कहा कि इस रास्ते से होकर स्कूल जाने वाली लड़कियों के साथ हर दिन छेड़छाड़ होती है। बदमाश उनकी साइकिल के आगे बाइक खड़ी कर गंदी-गंदी बातें करते हैं। इस कारण से कई लड़कियों ने उस रास्ते से होकर स्कूल जाना तक छोड़ दिया है। इतना सब होने के बावजूद पुलिस को इन सब बातों की भनक नहीं लगी। और फिर बड़ी घटना घटने के बाद जमुई ही नहीं पूरा बिहार शर्मसार हो गया।

    मदन रोड होकर बालू और देसी शराब की तस्करी की चर्चा
    स्थानीय लोगों में इस बात की चर्चा है कि मदन रोड मनचले युवकों का अड्डा बन गया था। हर दिन छेड़खानी की घटनाएं आम होती थी। स्थानीय लोग बताते हैं कि लखीसराय के चानन से वह इलाका सटा हुआ है। लोगों में इस बात की चर्चा है कि जंगली इलाके में देसी शराब बनाई जाती है और कुंदर बराज होकर इसी रोड से जमुई के कई गांव में सप्लाई होती है। इतना ही नहीं बगैर घाट नीलामी के सुबह से लेकर शाम तक बालू का अवैध उत्खनन और परिवहन भी उसी रास्ते से होता है। जब पुलिस कप्तान विश्वजीत दयाल ने स्वयं रेकी की तो पता चला कि इस इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार चल रहा है। एक सप्ताह पहले सिविल ड्रेस में बाइक पर सवार होकर एसपी उस इलाके में पहुंचे थे और अवैध बालू लदे नौ ट्रैक्टर को जब्त करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार भी किया था।

    घटनास्थल पर खड़ी कार में बैठे युवक ने बचाई थी छात्रा की आबरू
    मदन रोड पर बदमाशों ने जिस समय छात्रा के साथ दरिंदगी हो रही थी, उस समय मौके पर मौजूद एक कार सवार ने छात्रा को वहां से निकलने में काफी मदद की। पुलिस सूत्रों के अनुसार वह जमुई का रहने वाला है। घटना के दौरान वह उस होकर कहीं जा रहा था। बीच सड़क पर छात्रा के साथ हैवानियत होता देख उसने अपनी कार वहां रोक दी और आरोपियों के साथ उलझ गया। इस दौरान उसके साथ भी मारपीट की गई। हालांकि उसने तबतक आरोपियों का विरोध किया जबतक छात्र और छात्रा वहां से निकल नहीं गए। उक्त युवक सामने नहीं आना चाहता लेकिन छात्रा की आबरू बचाने में उसने अहम भूमिका निभाई।

  • मीरी-पीरी खालसा मार्च की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश, प्रशासन को किया गया अलर्ट

    मीरी-पीरी खालसा मार्च की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश, प्रशासन को किया गया अलर्ट

    अमृतसर

    एसजीपीसी की ओर से निकाले जा रहे मीरी-पीरी खालसा मार्च के अंतिम चरण के दौरान संभावित खलल को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय ने प्रशासन को सतर्क किया है। सचिवालय के इंचार्ज बगीचा सिंह ने कहा कि विश्वसनीय जानकारी मिली है कि कुछ शरारती तत्व अंतिम दो दिनों में मार्च में व्यवधान पैदा करने का प्रयास कर सकते हैं।

    उन्होंने कहा कि मीरी-पीरी खालसा मार्च का तीसरा चरण 25 सितंबर को श्री अकाल तख्त साहिब में संपन्न होगा। पहले, दूसरे और तीसरे चरण के दौरान पंजाब के सैकड़ों गांवों, शहरों और कस्बों में सिखी के प्रचार-प्रसार का अभियान चलाया गया। इस दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह समेत प्रमुख धार्मिक हस्तियों और प्रचारक जत्थों ने संगत को संबोधित किया।

    सचिवालय के मुताबिक, मार्च के दौरान बड़ी संख्या में सिख युवाओं ने सिख स्वरूप बनाए रखने और नशे से दूर रहने का संकल्प लिया है। बगीचा सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सरकारी शह पर मार्च में खलल डालकर संगत में इसके प्रति नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने भी चेतावनी दी है कि यदि अंतिम दो दिनों में किसी व्यक्ति की ओर से मार्च में व्यवधान पैदा किया जाता है और संगत उसका विरोध करती है तो ऐसी स्थिति के लिए पंजाब सरकार और संबंधित प्रशासन जिम्मेदार होगा। 

    श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय ने अमृतसर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से अपील की है कि मार्च के निर्धारित पड़ावों और रूट पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जाए। साथ ही संभावित शरारती तत्वों की पहचान कर किसी भी अप्रिय घटना को पहले ही रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

  • निवेश बढ़ाने के लिए हरियाणा का बड़ा कदम, औद्योगिक प्लॉट बांटने से लेकर लाइसेंस तक नियम सरल

    निवेश बढ़ाने के लिए हरियाणा का बड़ा कदम, औद्योगिक प्लॉट बांटने से लेकर लाइसेंस तक नियम सरल

    चंडीगढ़
     हरियाणा में कारोबार और निवेश बढ़ाने के लिए नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा अनुपालन का बोझ कम करने का सिलसिला जारी है। आठ प्राथमिक क्षेत्रों में सुधार लागू किए जा चुके हैं, जबकि 14 अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में इस प्रक्रिया को अगले माह तक लागू कर दिया जाएगा।

    इन सुधारों का उद्देश्य अनावश्यक प्रक्रियाओं, दोहराव वाले अनुमोदनों और अतिरिक्त अनुपालनों को समाप्त कर नागरिकों, उद्यमियों तथा निवेशकों के लिए सेवाओं को अधिक सरल और त्वरित बनाना है।

    मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने केंद्रीय कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में अनुपालन न्यूनीकरण एवं डीरेगुलेशन अभियान की प्रगति की समीक्षा के बाद हरियाणा की स्थिति की जानकारी दी। राज्य के सुधार एजेंडा में भूमि विनियमन, निर्माण, उपयोगिताओं, औद्योगिक विकास, बिजली, पर्यावरण, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा ईज आफ डूइंग बिजनेस से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए चिकित्सा व्यवसायियों के पंजीकरण और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) संबंधी आवश्यकताओं को सरल करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित लाइसेंस के लिए एकल नोडल व्यवस्था विकसित की जा रही है। स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों से संबंधित सेवाओं को इनवेस्ट हरियाणा पोर्टल के साथ एकीकृत करने का भी प्रस्ताव है। इससे विभिन्न विभागों के स्तर पर होने वाली प्रक्रियाओं को एक सुव्यवस्थित तौर पर संचालित करने में सहायता मिलेगी।

    उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग ने बताया कि व्यवसायों के लिए दोहरी लाइसेंस व्यवस्था समाप्त करने के हरियाणा के प्रस्ताव को डीरेगुलेशन सेल ने स्वीकृति दे दी है।

    ओवरलैपिंग लाइसेंस, अनुमोदन, एनओसी और परमिट को समाप्त करने से व्यवसायों पर अनावश्यक अनुपालन का बोझ कम होगा।

    एकमुश्त पंजीकरण शुरू किया जा चुका है।
    सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए स्व-घोषणा, स्थापना-पूर्व अनुमोदन तथा निरीक्षण से संरक्षण की व्यवस्था लागू करने की दिशा में कार्य चल रहा है। औद्योगिक क्लस्टरों में अनुमोदन प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए एचएसआइआइडीसी तथा हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केंद्र की भूमिका को और मजबूत किया जा रहा है।

    तीन हिस्सों में बांटे जा सकेंगे औद्योगिक प्लॉट
    एचएसआइआइडीसी के निदेशक मंडल ने औद्योगिक प्लाटों को अधिकतम तीन प्लाटों में विभाजित करने की अनुमति दी है। हालांकि प्रत्येक परिणामी प्लाट का क्षेत्रफल 450 वर्ग मीटर से कम नहीं होना चाहिए।

    आइएमटी मानेसर के सेक्टर-8 में 4.6 एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक श्रमिक आवास का निर्माण किया गया है। इसी प्रकार इंडस्ट्रियल एस्टेट कुंडली में छह एकड़ क्षेत्र में ऐसी ही सुविधा विकसित की जा रही है।

    पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 500 करोड़ रुपये के प्रस्तावित ‘सक्षम’ फंड के माध्यम से बुनियादी ढांचे के उन्नयन की योजना है। एचएसआइआइडीसी ने साझा अग्निशमन बुनियादी ढांचे के लिए भी नई नीति जारी की है।

     

  • पुलिस लोगो वाली कार, फर्जी ID और मंत्रालय के पास; रांची में नकली अंडर सेक्रेटरी गिरफ्तार

    पुलिस लोगो वाली कार, फर्जी ID और मंत्रालय के पास; रांची में नकली अंडर सेक्रेटरी गिरफ्तार

    रांची
     एक ठग को खुद को झारखंड सरकार के गृह विभाग का अंडर सेक्रेटरी बताकर पुलिस अधिकारियों पर धौंस जमाने के मामले में पिठौरिया थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपित की पहचान अरुण कुमार अग्रवाल (52), पिता वशीधर अग्रवाल, निवासी अमरावती अपार्टमेंट, बीआईटी एक्सटेंशन के सामने, लालपुर के रूप में हुई है।

    पुलिस के अनुसार, आरोपित पिछले कई वर्षों से अजय कुमार, अंडर सेक्रेटरी होम के नाम से अपनी पहचान देता था। उसके पास से दो मोबाइल फोन, एक ब्रेजा कार, गृह विभाग और झारखंड पुलिस के नाम से बने फर्जी पहचान पत्र, राजभवन व मंत्रालय के कार पास तथा कई सरकारी दस्तावेजों की छायाप्रतियां बरामद की गई हैं।

    पिठौरिया थाना प्रभारी सतीश कुमार के बयान पर इस संबंध में पिठौरिया थाना कांड संख्या 97/2026, मंगलवार को प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 204, 205, 338, 336(3), 340(2), 319(2), 318(4) तथा ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 की धारा 3, 5 और 6 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    एक साल से थाना प्रभारी को कर रहा था फोन
    थाना प्रभारी सतीश कुमार ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि करीब एक वर्ष से एक व्यक्ति एक नंबर से उन्हें फोन कर अपना परिचय अजय कुमार, अंडर सेक्रेटरी होम के रूप में देता था। वह कहता था कि उसने वरीय पुलिस अधिकारियों से बात कर उनकी पोस्टिंग कराई है। आरोपित कई छोटे-मोटे मामलों में गैरकानूनी काम करने के लिए दबाव बनाता था।

    वह
    पिठौरिया क्षेत्र में अपना घर होने की बात कहते हुए वहां उपहार भेजने के लिए भी कहता था। 21 सितंबर को आरोपित ने थाना प्रभारी को चंदवे स्थित अपने घर आने के लिए फोन किया। उसने बताया कि कुछ लोग घर के बाहर हंगामा कर रहे हैं।

    सूचना पर थाना प्रभारी पुलिस दल के साथ वहां पहुंचे। पुलिस के अनुसार, मौके पर आरोपित ने थाना प्रभारी से कहा कि क्या उन्हें नौकरी नहीं करनी है, उसकी बात विभाग के वरीय अधिकारियों से होती रहती है और उसकी बातों को हल्के में न लें।
    कार पर लगा था पुलिस का लोगो

    मौके पर पुलिस ने आरोपित की कार की जांच की। कार के डैशबोर्ड पर लाल-नीले रंग का पुलिस लोगो वाला बोर्ड लगा था। सह चालक सीट के सामने शीशे पर हरे रंग की पट्टी लगी थी, जिस पर झारखंड सरकार मंत्रालय कार पास, गृह विभाग, वर्ष 2024 से संबंधित विवरण अंकित था। इसके नीचे झारखंड सरकार की मुहर वाला स्टीकर और पंचम झारखंड विधानसभा कार पास भी लगा हुआ था।

    इन तथ्यों पर संदेह होने के बाद थाना प्रभारी ने वरीय अधिकारियों से विचार-विमर्श किया और आरोपित को पिठौरिया थाना आने का निर्देश दिया। मंगलवार को करीब 1:20 बजे वह थाना पहुंचा। पूछताछ के दौरान पुलिस ने गृह विभाग या किसी अन्य सरकारी विभाग का परिचय पत्र मांगा, लेकिन वह कोई सरकारी पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका।

    गृह विभाग में नहीं मिला अजय कुमार नाम का अधिकारी
    पुलिस ने गृह विभाग में पदस्थापित कर्मियों से सत्यापन कराया। इसमें पता चला कि अजय कुमार नाम का कोई व्यक्ति गृह विभाग में अंडर सेक्रेटरी के पद पर पदस्थापित नहीं है। इसके बाद सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपित ने अपना वास्तविक नाम अरुण कुमार अग्रवाल बताया। पुलिस के अनुसार उसने कई वर्षों से अजय कुमार के नाम से पहचान देने की बात स्वीकार की है।

    जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि आरोपित ने वरीय पुलिस उपाधीक्षक अमर कुमार पांडेय के मोबाइल नंबर पर भी अंडर सेक्रेटरी बनकर व्हाट्सऐप और फोन के माध्यम से संपर्क किया था। पुलिस का आरोप है कि वह अपने कथित सरकारी प्रभाव का इस्तेमाल कर अवांछित लाभ लेने का प्रयास करता था।

    पार्किंग शुल्क से बचने और मंत्रालय में प्रवेश के लिए लगाता था लोगो
    पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपित ने बताया कि कार पर पुलिस का लोगो लगाने से ट्रैफिक पुलिस उसे नहीं रोकती थी और पार्किंग शुल्क भी नहीं लिया जाता था। मंत्रालय का लोगो और कार पास रहने से मंत्रालय में प्रवेश के दौरान रोक-टोक नहीं होती थी।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपित ने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से सूचनाएं जुटाने तथा विभागीय अधिकारियों को सूचना भेजकर पोस्टिंग कराने और लंबित कार्रवाई के नाम पर ठगी करने की बात भी बताई है।

    कार से बरामद हुए फर्जी डीएसपी और सचिव के पहचान पत्र
    पुलिस ने आरोपित के दो मोबाइल फोन और वाहन को विधिवत जब्त किया है। इनमें एप्पल आईफोन 16 प्रो और सैमसंग गैलेक्सी एस-25 शामिल हैं। कार की तलाशी के दौरान अजय कुमार, अवर सचिव गृह विभाग, झारखंड सरकार के नाम से फोटोयुक्त हस्ताक्षरित दो पहचान पत्र बरामद किए गए। इसके अलावा अजय कुमार, डीएसपी (एसबी), झारखंड पुलिस के नाम से झारखंड पुलिस और झारखंड सरकार के लोगो वाले दो फोटोयुक्त पहचान पत्र भी मिले हैं।

    राजभवन में प्रवेश के लिए इस्तेमाल होने वाले पांच हरे रंग के कार पास, गृह विभाग के मंत्रालय कार पास के पांच स्टीकर तथा कार पास तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले स्टीकरयुक्त ए-4 साइज के छह कागजात भी जब्त किए गए हैं।

    नक्सली पुरस्कार राशि और पुलिस पदोन्नति से जुड़े दस्तावेज मिले
    तलाशी में पुलिस को विभिन्न व्यक्तियों और संस्थानों के लेटर पैड भी मिले। इनमें मानव संसाधन विकास विभाग के सचिव, एक विधायक, पीजीआईएमईआर, एसजीपीजीआई और सेंट जेवियर कॉलेज रांची से संबंधित लेटर पैड शामिल हैं। इसके अलावा आरोपित के आधार कार्ड की छायाप्रति भी बरामद हुई है।

    पुलिस के अनुसार विशेष शाखा, झारखंड सरकार से संबंधित वर्ष 2022 के नक्सली संगठन के पुरस्कार राशि के नवीनीकरण और घोषणा से जुड़े गोपनीय पत्रों की छायाप्रतियां, पुलिस निरीक्षक से डीएसपी कोटि में पदोन्नति से संबंधित पुलिस महानिदेशक पर्षद की बैठक की कार्यवाही और आईपीएस में पदोन्नति से संबंधित गृह विभाग के दस्तावेज भी मिले हैं।

    पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कई दस्तावेज प्रथम दृष्टया जाली और कूटरचित पाए गए हैं। जब्त मोबाइल फोन, दस्तावेज और वाहन की विस्तृत जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपित ने किन-किन पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया था और उसके पास सरकारी विभागों से संबंधित गोपनीय दस्तावेज कैसे पहुंचे। मामले में आगे की जांच जारी है।

  • SIR नोटिस से घबराने की जरूरत नहीं! नाम में छोटी गलती 10 दिन में सुधरेगी, बाकी मामलों में दस्तावेज से होगा समाधान

    SIR नोटिस से घबराने की जरूरत नहीं! नाम में छोटी गलती 10 दिन में सुधरेगी, बाकी मामलों में दस्तावेज से होगा समाधान

    नई दिल्ली
    दिल्ली में SIR प्रक्रिया के तहत 33 लाख वोटरों को थमाए गए नोटिस के मामले में अब मतदाताओं को टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं है। अगर वह भारत का नागरिक है, 18 साल का है और जिंदा है, तो निश्चिंत रहिए। हर सूरत में उनका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ जाएगा। इसके लिए चुनाव आयोग ने 20 दिन का एक मास्टर प्लान बनाया है। जिसमें इस दौरान वोटरों को दिए गए सभी तरह के नोटिसों का समाधान कर दिया जाएगा।

    • चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि इस समस्या को जल्द से जल्द समाधान करने के लिए दो अलग-अलग सिस्टम बनाए गए हैं।
    • पहला, लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के नाम पर जिस भी किसी वोटर के नाम में थोड़ी-बहुत असमानता (गड़बड़ी) रह गई है।
    • उसे 10 दिनों के अंदर मामूली दस्तावेजी प्रक्रिया के तहत दूर कर दिया जाएगा। इसके लिए बीएलओ को कहा गया है कि वह इसमें बहुत अधिक गहराई में ना जाते हुए बस उसके लेटेस्ट नाम के बारे में जानकारी कन्फर्म कर लें।
    • उदाहरण के तौर पर अगर 2003 एसआईआर में उसका नाम केवल सुरेश था और अब इस नाम के पीछे सरनेम में अग्रवाल, शर्मा, कुमार, झा, चटर्जी या बनर्जी या अन्य कुछ जोड़ा गया है तो ऐसे मामलों को बहुत अधिक गंभीर ना माना जाए।
    • अगर वोटर की उम्र, डेट ऑफ बर्थ, फादर नेम और उसके भारतीय होने में कोई संदेह नहीं है तो उसे किसी भी मान्य दस्तावेज के आधार पर ओके कर दिया जाए।
    • ऐसा नहीं कि छोटी-छोटी क्लेरिकल मिस्टेक या फिर कमियों के रहते हुए वोटर को परेशान किया जाए।
    • इससे 33 लाख में से करीब 15 लाख वोटरों की समस्या का समाधान हो जाएगा। जिसमें बीएलओ और चुनाव आयोग को बहुत कुछ अलग से करने की जरूरत नहीं होगी।

    पुराने SIR से मैपिंग न होने पर भी दस्तावेज के आधार पर जुड़ सकेगा नाम
    बाकी बचे 18 लाख वोटरों में से जिस किसी के पुराने एसआईआर से मैपिंग नहीं हो रही है या फिर अन्य किसी तरह की बड़ी समस्या लग रही है। तो ऐसे मामलों में भी वोटर से डिक्लेरेशन कराते हुए कोई भी मान्य दस्तावेज के आधार पर इसे वोटर लिस्ट में ऐड कर लिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि ऐसे किसी भी मामले में अगर किसी वोटर का नाम पुराने एसआईआर में नहीं भी था तो भी अब चल रही एसआईआर प्रक्रिया में ऐसे किसी वोटर का नाम डिलीट नहीं किया जा सकता। सेंटरों पर भी जो हियरिंग चल रही हैं। उनमें भी वोटरों को बहुत अधिक उलझाने की कोई जरूरत नहीं है।

    जुड़वा बच्चों और कम उम्र के माता-पिता वाले मामलों में बीएलओ खुद करें पुष्टि
    ऐसे भी किसी मामले में जिनके दो बच्चे हैं और उनके डेट ऑफ बर्थ में सेम डेट आ रही है। ऐसे में अगर वोटर कहता है कि यह उनके जुड़वा बच्चे हैं तो उससे बीएलओ अपने स्तर पर कन्फर्म करके ऐसे मामलों को ओके कर दें। इसी तरह से किसी वोटर और उसके माता-पिता की उम्र में 15-16 साल का ही अंतर है तो भी बीएलओ और एईआरओ अपने स्तर पर कन्फर्म करके ऐसे मामलों का जल्द से जल्द निपटारा कर दें। सूत्रों का कहना है कि अब पुरानी वोटर लिस्ट और एसआईआर में दी गई फोटो के भी मिलान करने शुरू कर दिए गए हैं। इस मसले को 23 सितंबर को एनबीटी ने प्रमुखता से उठाया था।

    समस्या दूर होते ही वोटरों को मैसेज, ऑनलाइन भी अपडेट होगी जानकारी
    इसके अलावा इस अभियान में एक और काम करने की कोशिश की जा रही है। वह यह कि जिस-जिस भी वोटर की प्रॉब्लम दूर होती जाएगी। उसके पास मैसेज भेजने की भी योजना बनाई जा रही है। ताकि उस वोटर को पता लग जाए कि अब उसे सेंटर में जाने की कोई जरूरत नहीं है और उसको मिले नोटिस की समस्या दूर हो चुकी है। ऐसे वोटरों की ऑनलाइन जारी की गई लिस्ट के आगे भी समस्या समाधान लिखा जाएगा। ताकि सभी को ऑनलाइन भी यह जानकारी अपडेट हो सके।

  • चंडीगढ़ कोर्ट पहुंचेगा रिश्वत केस, पूर्व DIG भुल्लर की आज पेशी; पहली बार बयान

    चंडीगढ़ कोर्ट पहुंचेगा रिश्वत केस, पूर्व DIG भुल्लर की आज पेशी; पहली बार बयान

    चंडीगढ़ 

    पंजाब पुलिस के निलंबित DIG हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े रिश्वत मामले में आज चंडीगढ़ स्थित CBI की विशेष अदालत में अहम सुनवाई होगी। इस दिन मामले के शिकायतकर्ता मंडी गोबिंदगढ़ के कारोबारी आकाश बत्ता पहली बार अदालत में गवाही देंगे।

    कोर्ट ने उन्हें समन जारी किया है। रिश्वत मामले में आरोप तय होने के बाद शिकायतकर्ता की गवाही मुकदमे की अहम कड़ी मानी जा रही है। CBI के अनुसार, बत्ता ने शिकायत दी थी कि आपराधिक मामले में कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे 8 लाख रुपए रिश्वत मांगी जा रही थी।

    शिकायत के आधार पर CBI ने कार्रवाई करते हुए तत्कालीन DIG भुल्लर और बिचौलिए कृष्णु शारदा को गिरफ्तार किया था। अब अदालत में आकाश बत्ता के बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद उनके बयान और मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुकदमा आगे बढ़ेगा।

    सेक्टर-40 स्थित घर पर तलाशी ली थी भुल्लर की गिरफ्तारी के बाद CBI ने उनके सेक्टर-40 स्थित घर पर तलाशी ली थी। जांच एजेंसी की कार्रवाई में बड़ी मात्रा में नकदी, सोना और अन्य कीमती सामान बरामद होने की जानकारी सामने आई थी। अलग मामले में CBI ने आय से अधिक संपत्ति की जांच भी शुरू की थी।

    आरोपमुक्त करने की अर्जी हो चुकी खारिज इस मामले में भुल्लर और कृष्णु शारदा की ओर से CBI अदालत में आरोपमुक्त किए जाने की अर्जी दाखिल की गई थी। दोनों की ओर से CBI की कार्रवाई और अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिस्चार्ज एप्लीकेशन खारिज कर दी थी। इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ रही है।

    रिश्वत की रकम बिचौलिए के जरिए मांगी गई थी CBI के मामले के अनुसार, कारोबारी आकाश बत्ता की शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रिश्वत की रकम बिचौलिए के जरिए मांगी गई थी। मीडिया रिपोर्टों में भी बिचौलिए कृष्णु शारदा के खिलाफ भुल्लर की ओर से रिश्वत मांगने का आरोप सामने आया था।

     

  • झारखंड हादसे में 4 की मौत, कैबिनेट मंत्री दीपिका पांडे की बेटी भी शामिल,CM ने जताया शोक

    झारखंड हादसे में 4 की मौत, कैबिनेट मंत्री दीपिका पांडे की बेटी भी शामिल,CM ने जताया शोक

    जमशेदपुर
    झारखंड के जमशेदपुर में भीषण सड़क हादसा देखने को मिला है। जिले के सोनारी थाना क्षेत्र स्थित मरीन ड्राइव पर गुरुवार तड़के हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में कार सवार चार लोगों की मौत हो गई। तेज रफ्तार कार सड़क पर खड़े एक ब्रेकडाउन ट्रक के पीछे जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार ट्रक के पिछले हिस्से में बुरी तरह फंस गई और उसके परखच्चे उड़ गए। इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों में झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडे सिंह की बेटी तृषा सिंह भी शामिल हैं।

    काफी मशक्कत से बाहर निकले शव
    जमशेदपुर में मरीन ड्राइव पर हुई इस दर्दनाक घटना के बारे में सूचना मिलते ही डीएसपी सीसीआर मनोज ठाकुर, सोनारी थाना प्रभारी संजय सुमन तथा अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। दुर्घटना के बाद कार में फंसे लोगों को निकालने के लिए प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बचाव दल ने गैस कटर की मदद से कार को काटकर शवों को बाहर निकाला। हादसा इतना भयावह था कि मृतकों के शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसके साथ ही गाड़ी के भी परखच्चे उड़ गए हैं।

    ट्रक से टक्कर के बाद कार के उड़ गए परखच्चे
    बताया जाता है कि जमशेदपुर के सोनारी थानाक्षेत्र अंतर्गत दोमुहानी मरीन ड्राइव पर कार और ट्रक की टक्कर में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी समेत कुल 4 लोगों की मौत हुई। मृतकों में 2 युवक और 2 युवतियां शामिल हैं।

    मरने वालों के नाम हैं- सार्थक अग्रवाल, नमन गुप्ता, वंशिका खंडेलवाल और तृषा सिंह। बताया जाता है कि सफेद रंग की स्विफ्ट कार, दोमुहानी मरीन ड्राइव सड़क पर पहले से खड़े ट्रक से जा टकराई। हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए।

    कार को कटर से काटकर निकाले शव
    जानकारी के मुताबिक, ट्रक बुधवार रात करीब 10 बजे ब्रेकडाउन होने के बाद मरीन ड्राइव की सड़क पर खड़ा था. गुरुवार तड़के तेज गति से आ रही कार अनियंत्रित होकर सीधे ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई. हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार के परखच्चे उड़ गए. कार में सवार लोगों को बाहर निकालना भी बेहद मुश्किल हो गया.  सूचना मिलते ही पुलिस और राहत-बचाव टीम मौके पर पहुंची और गैस कटर की मदद से कार को काटकर शवों को बाहर निकाला गया। 

    XLRI की छात्रा थी तृषा
    कार इतनी बुरी हालत में थी कि इसको गैस कटर से काटकर मृतकों का शव निकालना पड़ा। शवों को MGM अस्पताल भेज दिया गया है। मंत्री की बेटी XLRI की छात्रा थी। घटना की सूचना मिलते ही मंत्री दीपिका पांडेय सिंह रांची से जमशेदपुर के लिए निकल गईं।

    मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी के निधन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दुख जताया है। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है। 

    गैस कटर से काटकर निकाले गए शव 
    ट्रक से टक्कर के बाद कार की हालत खराब हो गई। उसके अंदर मंत्री की बेटी समेत चारों फंस गए। कार की हालत इतनी खराब थी कि गैस कटर के काट कर शवों को बाहर निकाला गया। इसके बाद पोस्टमार्टम के लिए MGM अस्पताल भेजा गया।

    मृतकों की हुई पहचान
    पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान सार्थक अग्रवाल, नमन गुप्ता, वंशिका खंडेलवाल और तृषा सिंह के रूप में हुई है। सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है। अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अर्णव मिश्रा ने बताया कि संबंधित ट्रक बुधवार रात करीब 10 बजे से खराब होकर सड़क पर खड़ा था। गुरुवार सुबह लगभग 3 बजे तेज रफ्तार कार पीछे से ट्रेलर में जा घुसी, जिससे कार सवार चारों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

    हादसे से झारखंड में शोक की लहर
    हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान तृषा सिंह, सार्थक अग्रवाल, नमन गुप्ता और वंशिका खंडेलवाल के रूप में हुई है.  सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए एमजीएम अस्पताल भेजे जाने की जानकारी है.  इस दर्दनाक हादसे की खबर सामने आने के बाद पूरे झारखंड में शोक की लहर है.  मुख्यमंत्री सोरेन और स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफानन अंसारी ने शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना की है।  

    हादसे का कारण क्या था?
    जमशेदपुर में हुई इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और अंधेरे के कारण ट्रक का समय पर दिखाई नहीं देना हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है। वहीं, प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि सड़क पर खड़े ट्रक के पीछे आवश्यक सुरक्षा संकेतक और चेतावनी व्यवस्था मौजूद थी या नहीं। आपको बता दें कि इससे पहले झारखंड की राजधानी रांची में भी दर्दनाक हादसा हुआ था। यहां पानी की टंकी गिरने से मलबे में दबकर 2 मजदूरों की मौत हो गई थी।

    CM हेमंत सोरेन ने जताया दुख
    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जमशेदपुर में हुए इस हादसे पर शोक जताया है। उन्होंने लिखा- "जमशेदपुर में एनएच हाईवे पर हुए सड़क हादसे में राज्य सरकार में साथी मंत्री एवं बहन श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह जी की बेटी एवं अन्य लोगों के निधन की बेहद दुखद और हृदयविदारक खबर से मन अत्यंत व्यथित है। अपनी संतान को खोने का दुःख किसी भी माता-पिता और परिवार के लिए शब्दों से परे और असहनीय होता है। इस अत्यंत कठिन घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं बहन दीपिका जी एवं शोकाकुल परिवारों के साथ हैं। इस अपूरणीय क्षति के लिए शब्द नहीं हैं। मरांग बुरु दिवंगत लोगों की आत्मा को शांति प्रदान कर शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।"

  • पंजाब के पटवारियों की हड़ताल खत्म, 1000+ पदों पर भर्ती के CM मान ने दिए निर्देश

    पंजाब के पटवारियों की हड़ताल खत्म, 1000+ पदों पर भर्ती के CM मान ने दिए निर्देश

    चंडीगढ़
     मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के साथ बैठक के बाद राजस्व पटवार यूनियन ने अपनी हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है। सरकार ने पटवारियों की प्रमुख मांगों पर सहमति जताते हुए 1000 से अधिक राजस्व पटवारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई भर्ती से आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और राजस्व संबंधी रोजमर्रा के प्रशासनिक काम अधिक सुचारू होंगे। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा, “यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि यूनियन ने अपनी जायज मांगें माने जाने पर अपनी हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने पटवारियों के पटवारी कैडर को राज्य स्तरीय से वापस जिला स्तरीय कैडर करने की मांग को सैद्धांतिक रूप से मंजूर कर लिया है।”

    उन्होंने कहा, “इस फैसले से भर्ती प्रक्रिया सुचारू होगी और वरिष्ठता तथा पदोन्नतियों संबंधी आ रही प्रशासनिक अड़चनें दूर होंगी। यह फैसला प्रशासनिक सुधारों और विभाग के कामकाज में सुधार की जरूरत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।”

    उन्होंने कहा, “जिला स्तर पर पटवारी कैडर को बहाल करने के लिए मंत्रिमंडल द्वारा जल्द ही औपचारिक मंजूरी दी जाएगी।”

    कर्मचारियों के कल्याण के प्रति पंजाब सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकार अपने कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मैं पटवारियों से अपील करता हूं कि वे पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम करें और राज्य सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं के जमीनी स्तर पर सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करें।”

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि सभी पटवारी सरकार द्वारा उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी को पूरी लगन और ईमानदारी से निर्धारित समय में निभाते रहेंगे।”

    मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों पर पूरी सहानुभूति के साथ विचार करेगी। उन्होंने कहा कि मैं यूनियन से साथ ही यह अपील करता हूं कि भविष्य में भी सेवा से जुड़े सभी जायज मुद्दों के समाधान के लिए किसी भी तरह की हड़ताल के बजाय बातचीत और आपसी विचार-विमर्श के माध्यम से समाधान निकालना सुनिश्चित करें।” 

    कर्मचारियों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता

    कर्मचारियों और जनता के बीच संतुलन बनाते हुए मुख्यमंत्री ने पटवारियों से अपील की कि वे पूरी ईमानदारी और लगन के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों की हर जायज़ मांग पर पूरी सहानुभूति के साथ विचार करने को तैयार है, लेकिन इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि सरकारी योजनाएं बिना किसी रुकावट के सीधे जमीनी स्तर तक पहुंचें।

    मुख्यमंत्री ने यूनियन को यह भी नसीहत दी कि भविष्य में किसी भी तरह के विवाद या मांग को लेकर हड़ताल का रास्ता अपनाने के बजाय आपसी बातचीत और संवाद के जरिए ही समाधान निकाला जाना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

    AI मास्टरक्लास
    बैठक में पटवारी कैडर को राज्य स्तरीय से वापस जिला स्तरीय करने की मांग को भी सरकार ने सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पटवारियों की वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़ी प्रशासनिक अड़चनें दूर होंगी। जिला स्तरीय कैडर बहाल करने के प्रस्ताव को जल्द ही मंत्रिमंडल की औपचारिक मंजूरी दिलाई जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने यूनियन के हड़ताल वापस लेने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उन्होंने पटवारियों से सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचने की अपील भी की। मान ने भविष्य में सेवा संबंधी मांगों के समाधान के लिए हड़ताल के बजाय बातचीत और आपसी विचार-विमर्श का रास्ता अपनाने को कहा है।

     

  • रबी सीजन से पहले किसानों की बढ़ी चिंता, चंबल के बांध पूरी तरह नहीं भरे; MP-राजस्थान में होगी बैठक

    रबी सीजन से पहले किसानों की बढ़ी चिंता, चंबल के बांध पूरी तरह नहीं भरे; MP-राजस्थान में होगी बैठक

    कोटा
    मानसून की विदाई का वक्त आ गया है। इस बार राजस्थान और मध्यप्रदेश में मानसून की बेरुखी के कारण बांध पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। ऐसे में रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी की कमी रहने की आशंका है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के खेतों को सरसब्ज करने वाली चंबल सिंचाई परियोजना पर भी इसका असर पड़ने वाला है। चंबल के बांधों में भी अपेक्षाकृत कम पानी है। चंबल जल बंटवारे को लेकर मध्यप्रदेश-राजस्थान अंतरराज्यीय नियंत्रण मंडल की तकनीकी समिति की बैठक अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित है।

    बैठक के मद्देनजर दोनों राज्यों की संयुक्त समिति चंबल के चारों बांधों में उपलब्ध पानी का आकलन करेगी। इसी के आधार पर दोनों राज्यों के बीच पानी का बंटवारा तय होगा। जल बंटवारे में पेयजल और उद्योगों के लिए पानी आरक्षित रखा जाएगा। इसके बाद वाष्पीकरण ह्रास का आकलन कर सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी की मात्रा तय की जाएगी।

    सूत्रों ने बताया कि तकनीकी समिति की बैठक का शेड्यूल 25 सितम्बर तक तय किया गया था, लेकिन हाल में दोनों राज्यों में हुई बारिश से बांधों में पानी की आवक हुई है। इसलिए अब पानी का आकलन पांच अक्टूबर तक किया जाएगा। इसके बाद दोनों राज्यों की संयुक्त बैठक होगी। इस बार बैठक की अध्यक्षता राजस्थान के मुख्य अभियंता करेंगे।

    चंबल के बांध कितने भरे हैं
    बांध    जलभराव (%)
    गांधी सागर बांध    75.65
    राणाप्रताप सागर बांध    73.29
    जवाहर सागर बांध    75.64
    कोटा बैराज    98.08

    गांधी सागर बांध का जलस्तर 1302.14 फीट पहुंचा
    चंबल नदी के सबसे बड़े बांध गांधी सागर का जलस्तर हाल में हुई बारिश से करीब एक फीट बढ़ गया है। गांधी सागर बांध के कैचमेंट क्षेत्र में पिछले सप्ताह अच्छी बारिश हुई। इससे बांध का जलस्तर भराव क्षमता 1312 फीट के मुकाबले 1302.14 फीट तक पहुंच गया है। यह कुल जलभराव क्षमता का 75.65 प्रतिशत है।

    फैक्ट फाइल
        1960 में चम्बल का नहरी तंत्र विकसित
        63 दाईं और बाईं मुख्य नहर की शाखाओं, उपशाखाओं व वितरिकाओं की संख्या
        16 किमी आबादी क्षेत्र में दाईं मुख्य नहर व इसकी छोटी नहर
        5 किमी आबादी क्षेत्र में बाईं मुख्य नहर, माइनरें तथा वितरिकाएं
        1.27 लाख हैक्टेयर दाईं मुख्य नहर का सिंचित क्षेत्र
        1.2 लाख हैक्टेयर बाईं मुख्य नहर का सिंचित क्षेत्र
        6656 क्यूसेक दाईं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता
        1500 क्यूसेक पानी बाईं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता
        3 लाख कोटा, बूंदी व बारां के किसान लाभान्वित
        124 किमी दाईं मुख्य नहर राजस्थान में
        248 किमी मध्यप्रदेश की सीमाओं में जल प्रवाहित करती है
        24.6 प्रतिशत हिस्सेदारी एमपी की होती है दाईं मुख्य नहर के समस्त कार्यों में
        24.6 प्रतिशत राशि राजस्थान वहन करता है दाईं मुख्य नहर के कार्यों में

    इनका कहना है
    अक्टूबर के पहले सप्ताह में जल बंटवारे को लेकर बैठक प्रस्तावित है। इसमें पानी के साथ अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होगी। फिलहाल बैठक का एजेंड़ा नहीं आया है। बैठक में मुख्यतया जल प्रवाह के संबंध में ही चर्चा होगी।
    -संजय सिंह, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा