Category: राज्य

  • मोहाली में ED कार्रवाई के खिलाफ AAP का प्रदर्शन, GAMADA ऑफिस पहुंचे कार्यकर्ता

    मोहाली में ED कार्रवाई के खिलाफ AAP का प्रदर्शन, GAMADA ऑफिस पहुंचे कार्यकर्ता

    मोहाली.

    ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) मुख्यालय पर 48 घंटे से चल रही ईडी की रेड के खिलाफ आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने वीरवार को मोर्चा खोल दिया है। आम आदमी पार्टी के समर्थकों और प्रतिनिधियों ने गमाडा मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए कार्यालय का घेराव किया।

    कार्यालय के बाहर खड़ी ईडी की टीम की गाड़ियों के शीशे तोड़े। प्रदर्शनकारियों की पुलिस से धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय का गेट तोड़ा और बड़ी संख्या में अंदर दाखिल हुए।
    प्रदर्शनकारियों ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और गमाडा कार्यालय में चल रही ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी वरुण शर्मा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

    ईडी की कार्रवाई चल रही होने के कारण कार्यालय परिसर में सुरक्षा को लेकर पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। आप समर्थकों ने कहा कि गमाडा कार्यालय में लगातार तीसरे दिन ईडी की कार्रवाई चल रही है। इसे लेकर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। प्रदर्शन के कारण गमाडा कार्यालय के बाहर काफी देर तक माहौल गरमाया रहा। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराने और व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया। पुलिस ने गमाडा ऑफिस के बाहर बैरिकेडिंग बढ़ा दी है। बता दें कि मंगलवार सुबह से ईडी की टीम ने गमाडा मुख्यालय और दो आईएएस अधिकारियों के घरों सहित दिल्ली, मोहाली और लुधियाना में कई ठिकानों पर छापेमारी शुरू की थी। ईडी की टीम ने गमाडा की तीन मंजिलों को सील कर रखा है।

    कैबिनेट मंत्री के घर पर भी रेड
    इसी बीच बुधवार को ईडी ने कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां के रिश्तेदार गुरप्रीत सिंह सैनी के लुधियाना स्थित घर पर भी रेड की थी। आप कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर पंजाब में डर का माहौल बना रही है। 

  • गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन, CM योगी ने दिया भरोसा- सबकी समस्या का होगा समाधान

    गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन, CM योगी ने दिया भरोसा- सबकी समस्या का होगा समाधान

    कब्जामुक्त कराएं जमीन, दबंगों को सिखाएं कानूनी सबक: मुख्यमंत्री

    बारिश के बावजूद सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया जनता दर्शन

    गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री ने करीब 200 लोगों से मुलाकात कर सुनीं समस्याएं

    जनता से बोले सीएम – घबराइए मत, सबकी समस्या का होगा समाधान

    गोरखपुर
     जनता की सेवा को सर्वोपरि रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह बारिश होने के बावजूद ‘जनता दर्शन’ किया। दूरदराज से आए लोगों से उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। समस्या लेकर आए लोगों को मुख्यमंत्री ने समाधान का भरोसा दिया। इस अवसर पर अवैध कब्जे की शिकायतों पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जमीन कब्जामुक्त कराने के साथ जबरन कब्जा करने वालों को कड़ा कानूनी सबक सिखाया जाए। 

    बारिश की वजह से मुख्यमंत्री के निर्देश पर लोगों की सुविधा के लिए जनता दर्शन का आयोजन गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में किया गया। इस दौरान सीएम योगी ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने का निर्देश दिया। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक पहुंचकर मुख्यमंत्री ने उनकी पीड़ा जानी और आश्वस्त किया कि सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और तत्परता से उसका समयबद्ध व पारदर्शी निस्तारण कराएं। 

    इस दौरान कुछ महिलाओं ने उनकी जमीन जबरन कब्जा कर लिए जाने की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी दबंग ने किसी गरीब की जमीन हड़पी है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। जमीन अवैध या जबरन कब्जे से मुक्त होनी चाहिए। 

    हर बार की तरह जनता दर्शन में कुछ लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। ऐसे मामलों में सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के एस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी।

  • पितृ पक्ष में संगम पर ऑनलाइन पिंडदान, पुरोहित ने बताया पीले कपड़ों का महत्व

    पितृ पक्ष में संगम पर ऑनलाइन पिंडदान, पुरोहित ने बताया पीले कपड़ों का महत्व

     प्रयागराज

    पितृ पक्ष के दिन पास आने के साथ ही संगम नगरी प्रयागराज में पितरों के तर्पण और पिंडदान को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग प्रयागराज पहुंचते हैं. इस बार भी पितृ पक्ष के दौरान संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है. खास बात यह है कि जो लोग किसी कारणवश प्रयागराज नहीं पहुंच पा रहे हैं, उनके लिए ऑनलाइन पिंडदान की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। 

    इस बार पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक रहेगा. इस दौरान अपने पितरों के निमित्त लोग प्रयागराज पहुंचकर भी तर्पण और पिंडदान करते हैं. श्रद्धालुओं के लिए यह समय अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और धार्मिक आस्था व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है. तीर्थ पुरोहितों के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान देश-विदेश से लोग अपने पितरों को मोक्ष दिलाने और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रयागराज पहुंचते हैं. संगम पर पिंडदान और तर्पण करने के बाद श्रद्धालु आगे की धार्मिक यात्रा भी पूरी करते हैं। 

    प्रदीप पांडे तीर्थ पुरोहित, प्रयागराज बताते हैं कि धार्मिक मान्यता के अनुसार पिंडदान की परंपरा में प्रयागराज, काशी और गया का विशेष महत्व बताया जाता है. लोग प्रयागराज से इसकी शुरुआत करते हैं, इसके बाद काशी होते हुए गया पहुंचकर पिंडदान की प्रक्रिया को पूरा करते हैं. इसी वजह से पितृ पक्ष के दौरान प्रयागराज में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है. संगम क्षेत्र में पितृ पक्ष के दौरान सुबह से ही श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करते नजर आते हैं. जैसे-जैसे पितृ पक्ष आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे संगम क्षेत्र में लोगों की संख्या भी बढ़ने लगेगी। 

    अमेरिका से 28 सितंबर को होगा पिंडदान
    प्रदीप पांडे बताते हैं कि इस बार पितृ पक्ष के दौरान विदेश में बैठे लोग भी प्रयागराज की धार्मिक परंपरा से जुड़ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक अमेरिका से एक श्रद्धालु 28 सितंबर को प्रयागराज में पिंडदान करेगा. इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था का सहारा लिया जाएगा. पिछले दो-तीन वर्षों से ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था भी शुरू हुई है. इसका लाभ ऐसे लोग उठा रहे हैं जो किसी कारणवश प्रयागराज नहीं आ पाते. किसी को यात्रा में परेशानी है तो किसी के पास समय या दूसरी तरह की समस्या है. ऐसे में वे ऑनलाइन माध्यम से अपने पितरों के लिए पिंडदान की प्रक्रिया पूरी करा रहे हैं. इस व्यवस्था के जरिए विदेशों में रहने वाले लोगों को भी अपने पितरों के प्रति धार्मिक जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिल रहा है. अमेरिका से 28 सितंबर को होने वाला पिंडदान इसी व्यवस्था का एक उदाहरण है. प्रदीप पांडेय बताते हैं कि ऑनलाइन पिंडदान की सुविधा का इस्तेमाल केवल विदेश में रहने वाले लोग ही नहीं कर रहे हैं. गांव और देहात में रहने वाले ऐसे लोग भी इस व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं, जो किसी कारण से प्रयागराज आने में असमर्थ हैं. कई परिवारों के सामने यात्रा से जुड़ी परेशानी होती है. कुछ लोगों के लिए लंबी दूरी तय करना मुश्किल होता है. ऐसे में ऑनलाइन व्यवस्था उनके लिए अपने पितरों के निमित्त पिंडदान कराने का माध्यम बन रही है। 

    तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि लोगों की आस्था और अपने पितरों के प्रति श्रद्धा आज भी उतनी ही मजबूत है. परिस्थितियां भले बदल गई हों, लेकिन लोग किसी न किसी तरीके से अपने पितरों के लिए धार्मिक कर्मकांड पूरा करना चाहते हैं। 

    युवा पीढ़ी भी निभा रही परंपरा
    प्रदीप पांडे तीर्थ पुरोहित, प्रयागराज बताते हैं कि पितृ पक्ष के दौरान एक और खास बात देखने को मिल रही है. आज की युवा पीढ़ी भी सनातन धर्म की परंपराओं और पितरों से जुड़े कर्मकांडों को लेकर रुचि दिखा रही है. लोग अपने पितरों को मोक्ष दिलाने के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं का सहारा ले रहे हैं. जो संगम तक पहुंच सकते हैं, वे स्वयं आकर पिंडदान और तर्पण करते हैं और जो नहीं आ सकते, वे ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए इससे जुड़ रहे हैं. तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक यह बात महत्वपूर्ण है कि आधुनिक दौर में भी युवा अपने परिवार और पूर्वजों से जुड़ी परंपराओं को निभाने के लिए आगे आ रहे हैं। 

    पीले वस्त्रों में नजर आएंगे श्रद्धालु
    प्रदीप पांडे के मुताबिक पितृ पक्ष के दौरान संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की वेशभूषा भी अलग दिखाई देती है. पितरों के निमित्त पिंडदान और तर्पण करने के लिए आने वाले कई श्रद्धालु पीले वस्त्र पहनकर आते हैं. जिस तरह भगवा रंग की अपनी अलग धार्मिक पहचान है, उसी तरह पितृ पक्ष के दौरान पीले वस्त्र पहनकर आने की परंपरा भी श्रद्धालुओं के बीच देखने को मिलती है. संगम क्षेत्र में पितृ पक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोग पीले वस्त्रों में दिखाई देंगे. तीर्थ पुरोहितों के अनुसार जो श्रद्धालु इस परंपरा का पालन करते हैं, वे पिंडदान के दौरान निर्धारित वेशभूषा का भी ध्यान रखते हैं. यही वजह है कि पितृ पक्ष में संगम क्षेत्र का दृश्य सामान्य दिनों से काफी अलग नजर आता है। 

    26 सितंबर के बाद बढ़ेगी श्रद्धालुओं की संख्या
    पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ ही प्रयागराज में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला तेज हो रहा है. अभी से लोग धीरे-धीरे पहुंचने लगे हैं. माना जा रहा है कि 26 सितंबर के बाद संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाएगी. पितरों के प्रति श्रद्धा रखने वाले परिवार देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रयागराज पहुंचेंगे. कोई अपने माता-पिता के लिए पिंडदान करेगा तो कोई अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करेगा. संगम की धरती पर पितरों के निमित्त होने वाले इन धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहित भी श्रद्धालुओं को विधि-विधान से कर्मकांड कराने में जुटेंगे। 

  • NEET-UG 2026 काउंसलिंग में शामिल होंगे 3 अभ्यर्थी, हाईकोर्ट ने PwBD अयोग्यता का फैसला रद्द किया

    NEET-UG 2026 काउंसलिंग में शामिल होंगे 3 अभ्यर्थी, हाईकोर्ट ने PwBD अयोग्यता का फैसला रद्द किया

    लखनऊ
    इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दिव्यांग अभ्यर्थियों के एमबीबीएस प्रवेश से संबंधित एक मामले में दिशा स्पष्ट की है। कहा कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र में दर्ज दिव्यांगता के प्रतिशत को एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) के मेडिकल असेसमेंट बोर्ड द्वारा दोबारा निर्धारित नहीं किया जा सकता। बोर्ड को सिर्फ इतना जांचने का अधिकार है कि अभ्यर्थी उचित सुविधा और सहायक तकनीक के साथ एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने में सक्षम है अथवा नहीं।

    न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने शुभम मिश्रा, सौरभ राणा और गुलफाम अहमद की ओर से दाखिल तीन अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवायी करते हुए, यह निर्णय दिया है। न्यायालय ने मेडिकल असेसमेंट बोर्ड और अपीलीय मेडिकल असेसमेंट बोर्ड द्वारा जारी उन निष्कर्षों को रद्द कर दिया, जिनमें अभ्यर्थियों को पीडब्ल्यूबीडी (पर्सन विद बेंचमार्क डिसबिल्टीज) आरक्षण के लिए अयोग्य बताया गया था। न्यायालय ने याचियों को नीट-यूजी 2026 की शेष काउंसलिंग में पीडब्ल्यूबीडी आरक्षित श्रेणी के योग्य अभ्यर्थी के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया है।

    याची शुभम मिश्रा को मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सुलतानपुर ने 45 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता का प्रमाण पत्र जारी किया था। हालांकि, मेडिकल असेसमेंट बोर्ड ने 11 अगस्त 2026 के प्रमाण पत्र में उनकी दिव्यांगता को 45 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया और उन्हें पीडब्ल्यूबीडी आरक्षण के लिए अयोग्य बताया। अपीलीय मेडिकल बोर्ड ने भी असेसमेंट बोर्ड के फैसले को बरकरार रखा।

    दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत सभी के लिए बाध्यकारी
    इसी प्रकार अन्य याचियों सौरभ राणा व गुलफाम अहमद के दिव्यांगता प्रतिशत को घटा दिया गया। अपने निर्णय में कोर्ट कहा कि आरपीडब्ल्यूडी एक्ट की धारा 57 के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी और वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र, जब तक सक्षम न्यायिक या वैधानिक मंच द्वारा निरस्त नहीं किया जाता, उसमें दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत सभी के लिए बाध्यकारी है। कहा कि मेडिकल बोर्ड को यह देखना है कि अभ्यर्थी अपनी प्रमाणित दिव्यांगता के बावजूद उचित सुविधा और सहायक तकनीक के साथ एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने में सक्षम है या नहीं लेकिन यह प्रक्रिया दिव्यांगता के प्रतिशत को दोबारा तय करने के लिए नहीं है।

  • बिहार में महिला सुरक्षा पर फिर सवाल, समस्तीपुर घटना का वीडियो वायरल; दो युवकों की पहचान

    बिहार में महिला सुरक्षा पर फिर सवाल, समस्तीपुर घटना का वीडियो वायरल; दो युवकों की पहचान

    सम्सतीपुर
    जमुई के बाद अब बिहार के सम्सतीपुर में लड़की के साथ दिनदहाड़े बेशर्मी और हैवानियत की सारी सीमाएं लांघ दी गई हैं। इस शर्मनाक कांड का वीडियो भी काफी सन्न कर देने वाला है। जमुई कांड को लेकर पहले से ही पूरा देश उबल रहा था और अब समस्तीपुर से सामने आए वीडियो ने महिलाओं की सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह लगा दिए हैं। इस वीडियो में हैवान एक तरफ लड़की पर जुल्म की इंतहा पार कर रहे हैं तो वहीं वो राक्षसी हंसी हंसकर महिला सुरक्षा के दावों की खिल्ली भी उड़ा रहे हैं। लेकिन यह लड़की इस वीडियो में हैवानों का सामना करती भी नजर आ रही है। गुस्से में लड़की इन हैवानों से बचने के लिए यहां तक कहती है कि 'भाई को बुलाती हूं..'

    हालांकि, लड़की की इस बात का इन हवसियों पर कोई असर नहीं होता है और वो लड़की से कहते हैं कि वो अपने भाई को बुलाए। दरिंदगी के इस वायरल वीडियो में नजर आ रहा है कि यह लड़की अकेले ही हवसी भीड़ से भिड़ गई है। जमुई जैसे कांड की तरह ही यह हवसी यहां लड़की को गलत तरीके से छू रहे हैं और बदसलूकी कर रहे हैं लेकिन लड़की भी लगातार उनका विरोध कर रही है। लड़के इस लड़की के पीछे-पीछे चल रहे हैं और लड़की लगातार उनका विरोध कर रही है। वीडियो में नजर आ रहा है कि भीड़ में कई सारे लोग हैं। कुछ मोबाइल तो कुछ हंस रहे हैं। अकेली लड़की इन सब से के बीच घिरी हुई है।

    वायरल वीडियो से मचा हड़कंप
    बता दें कि समस्तीपुर में कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के जगतसिंहपुर गांव स्थित बांध बाईपास रोड पर बुधवार को बेखौफ शोहदों ने जमुई जैसी घटना को अंजाम दिया। सड़क पर फोटो लेने के लिए रुकी लड़की को तीन युवकों ने घेरकर अभद्रता की। उसके साथ गाली-गलौज की। बीच सड़क पर खींचते हुए उसके साथ बैड टच किया। इस दौरान शोहदे उसका नाम-पता पूछते रहे। देर शाम घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एसपी ने मामले की तत्काल जांच और कार्रवाई का आदेश दिया। पुलिस ने वीडियो के आधार पर दो युवकों की पहचान की है।

    घटना में शामिल अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। हालांकि, लाइव हिन्दुस्तान वायरल वीडियो की पु्ष्टि नहीं करता है। बताया जाता है कि लड़की एक लड़के के साथ बांध बाईपास रोड से गुजर रही थी। दोनों सड़क किनारे रुककर फोटो ले रहे थे। इसी दौरान तीन युवकों ने लड़की को घेर लिया। आरोप है कि युवकों ने उसके साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया। वीडियो में दिख रहा है कि लड़के लड़की को बीच सड़क पर खींच रहे हैं। उसका नाम-पता पूछ रहे हैं और बैड टच कर रहे हैं। इसी दौरान वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने घटना का वीडियो बना लिया। बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

  • दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश को घेरा, बोले- पीडीए मतलब ‘परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस’

    दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश को घेरा, बोले- पीडीए मतलब ‘परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस’

    'जाति का जहर घोलने निकले हैं अखिलेश, 100 यात्राएं भी नहीं बचा पाएंगी सपा को': अनिल राजभर

    पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी, दलित और मजदूर वर्ग सपा के असली चेहरे से परिचिति: अनिल राजभर

    दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश को घेरा, बोले- पीडीए मतलब 'परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस'

    लखनऊ
     समाजवादी पार्टी की पीडीए रथ यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हर मोर्चे पर विफल होने के बाद अब जाति का जहर घोलने की राजनीति कर रही है, लेकिन उसे इसमें कोई सफलता मिलने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि सपा चाहे एक यात्रा निकाले या 100 यात्राएं, जनता अब उसके बहकावे में आने वाली नहीं है।

    पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी

    अनिल राजभर ने कहा कि पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी यात्रा है। उत्तर प्रदेश का पिछड़ा, दलित, कमजोर और मजदूर वर्ग समाजवादी पार्टी के असली चेहरे से भलीभांति परिचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सपा सत्ता में रहती है तो उसे गरीबों की याद नहीं आती और पूरा सैफई परिवार प्रदेश की गाढ़ी कमाई को लूटने में लगा रहता है। आज वही लोग चोला बदलकर पिछड़ों और दलितों को ठगने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जनता सब समझती है।

    पीडीए की परिभाषा तय करे सपा

    उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पहले पीडीए की परिभाषा ही तय कर ले। पार्टी के नेता खुद ही पीडीए को लेकर भ्रमित हैं और रोज इसकी नई परिभाषा बताते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीतिक तिकड़मों से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। चुनाव आने पर समाजवादी पार्टी का कहीं नामोनिशान नहीं दिखाई देगा।

    इस दौरान नए वोटर फॉर्म में सर्विलांस से जुड़ी जानकारी जोड़े जाने और दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के सवाल पर अनिल राजभर ने कहा कि हाल में सामने आए घटनाक्रम से स्पष्ट है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हुई है। चुनाव आयोग किसी भी विषय पर नियमों और परंपराओं के अनुसार आपसी राय-मशविरा और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही निर्णय लेता है। अलग-अलग राय लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होती है।

    स्वर्गीय कल्याण सिंह के परिवार से कब मिलेंगे अखिलेश?

    वहीं, भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने भी अखिलेश यादव और उनकी पीडीए राजनीति पर निशाना साधा। रायबरेली में सपा विधायक राहुल लोधी के आवास पर अखिलेश यादव के प्रस्तावित दौरे को लेकर उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को अपने नेताओं के घर जरूर जाना चाहिए, लेकिन उन्हें यह भी बताना चाहिए कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय कल्याण सिंह के परिवार के पास वे आज तक क्यों नहीं गए।

    दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि एक मुख्यमंत्री को दूसरे मुख्यमंत्री के परिवार के प्रति शिष्टाचार और संवेदना दिखानी चाहिए थी। यदि अखिलेश यादव कल्याण सिंह के परिवार के पास जाकर श्रद्धांजलि और संवेदना व्यक्त करते, तो यह राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय और संवैधानिक मर्यादा का परिचय होता। उन्होंने कहा कि अब जब वे लोध समाज के बीच जा रहे हैं तो उन्हें अपने पुराने व्यवहार का भी जवाब देना चाहिए।

    पीडीए मतलब परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस

    पीडीए रथ यात्रा पर हमला बोलते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पीडीए का वास्तविक अर्थ 'परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस' है। उन्होंने दावा किया कि आज न पिछड़ा समाज, न दलित समाज और न ही अल्पसंख्यक समाज समाजवादी पार्टी के साथ है। उन्होंने कहा कि पिछड़ा समाज पूरी मजबूती के साथ एनडीए के साथ खड़ा है।

    दिनेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेशभर में ऐसे पोस्टर और बैनर लगाए जा रहे हैं जिनमें अखिलेश यादव से पूछा जा रहा है कि दलितों पर अत्याचार कब रुकेंगे। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी चाहे जितना नया चोला पहन ले, उत्तर प्रदेश की जनता उसके असली चरित्र को पहचान चुकी है। जनता अब भ्रमित होने वाली नहीं है और समय आने पर अपना जवाब देगी।

  • 13 साल बाद जमीन मालिकों के हक में फैसला, पहली बार सेक्टर फ्लोट होने पर मिलेगा विकसित प्लॉट

    13 साल बाद जमीन मालिकों के हक में फैसला, पहली बार सेक्टर फ्लोट होने पर मिलेगा विकसित प्लॉट

     चंडीगढ़
     पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा की वर्ष 2012 की लैंड पूलिंग योजना के तहत जमीन मालिकों के अधिकार को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया है कि अधिग्रहित जमीन के मालिकों को राज्य के आश्वासन के बाद योजना का लाभ देने से इन्कार नहीं किया जा सकता।

    कोर्ट ने झज्जर के सेक्टर-6 पार्ट के लिए अनिवार्य रूप से अधिग्रहित जमीन के मालिकों को योजना के तहत पात्र मानते हुए निर्देश दिया कि सेक्टर के पहली बार विकसित होने पर उन्हें उनकी पात्रता के अनुसार विकसित प्लॉट आवंटित किए जाएं या योजना के प्रविधानों के अनुसार राशि दी जाए।

    जस्टिस विकास बहल और जस्टिस दिव्या शर्मा की खंडपीठ ने आठ याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि भूमि पूलिंग योजना का उद्देश्य अधिग्रहण के कारण अपनी जमीन खोने वाले भू-स्वामियों को विकास प्रक्रिया में भागीदार बनाना था।

    मामले में कोर्ट ने पाया कि अधिकारियों ने पात्र जमीन मालिकों को विकसित जमीन देने का स्पष्ट आश्वासन दिया था। इसी भरोसे पर याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मिलने वाला मुआवजा और अन्य वैधानिक लाभ नहीं लिए। कुछ याचिकाकर्ताओं को 23 अगस्त 2013 के अवार्ड के बाद योजना के तहत 42 लाख रुपये प्रत्येक अग्रिम राशि के रूप में भी दिए गए थे।

    कोर्ट ने कहा कि जब जमीन मालिकों ने राज्य के स्पष्ट आश्वासन पर अपनी स्थिति बदल ली और दूसरे लाभ नहीं लिए तो बाद में सरकार अपने वादे से पीछे नहीं हट सकती। अधिकारियों की ओर से यह तर्क दिया गया कि कुछ याचिकाकर्ताओं ने निर्धारित समय सीमा में आवेदन नहीं किया था। हाई कोर्ट ने मूल रिकार्ड देखने के बाद इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

    पांच याचिकाओं के मामले में रिकार्ड से स्पष्ट हुआ कि आवेदन निर्धारित 60 दिन की अवधि के भीतर जमा किए गए थे और अधिकारियों ने उन्हें सत्यापित कर स्वीकार भी किया था।

    इसलिए आवेदन में देरी के आधार पर योजना का लाभ न देना गलत बताया गया।अन्य याचिकाओं में भी कोर्ट ने पाया कि जमीन मालिकों ने राज्य के आश्वासन पर अपनी स्थिति बदली थी। उन्होंने न तो अनिवार्य अधिग्रहण का मुआवजा लिया और न 33 वर्ष की वार्षिकी अथवा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना के लाभ प्राप्त किए। ऐसे में राज्य उन्हें भूमि पूलिंग योजना से बाहर नहीं कर सकता।

    पहली बार सेक्टर फ्लोट होने पर मिलेगा लाभ
    हाई कोर्ट ने याचिकाएं स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को 10 सितंबर 2012 की भूमि पूलिंग योजना के अनुसार विकसित सेक्टर में पहली बार फ्लोटेशन के समय उनकी पात्रता के अनुरूप प्लॉट आवंटित किए जाएं अथवा योजना के प्रावधानों के अनुसार राशि का भुगतान किया जाए।

    जिन याचिकाकर्ताओं ने पहले मिली अग्रिम राशि लौटानी है, वे 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ राशि लौटाने के लिए आवेदन कर सकेंगे। सक्षम अधिकारी को ऐसा आवेदन मिलने के चार सप्ताह के भीतर उसका निपटारा करना होगा। राशि लौटाने के बाद भी उनके विकसित प्लॉट पाने के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

    13 साल बाद जल्द फ्लोटेशन के निर्देश
    खंडपीठ ने कहा कि अवार्ड की घोषणा को 13 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। इसलिए अधिकारियों को सेक्टर की फ्लोटेशन प्रक्रिया जल्द पूरी करने का प्रयास करना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि अग्रिम राशि लौटाने से जमीन मालिकों का पहली बार सेक्टर फ्लोट होने पर विकसित प्लॉट पाने का अधिकार किसी तरह प्रभावित नहीं होगा।

     

  • बारिश में 23% की कमी, हरियाणा में कमजोर मानसून का फसलों पर असर!

    बारिश में 23% की कमी, हरियाणा में कमजोर मानसून का फसलों पर असर!

    हिसार.

    औसत से 23 प्रतिशत कम वर्षा के साथ हरियाणा से मानसून की बुधवार को विदाई हो गई। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के नजदीक जिला यमुनानगर को छोड़कर लगभग पूरे प्रदेश से मानसून लौट चुका है। यमुनानगर में सुबह के समय कोहरा भी छाया रहा।

    इस मानसून में हरियाणा में 317.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई। प्रदेश में सामान्य वर्षा का आंकड़ा 413 मिलीमीटर है। यानि प्रदेश में सामान्य से 23 प्रतिशत कम वर्षा हुई। पलवल को छोड़कर प्रदेश के सभी जिलों में वर्षा सामान्य से कम रही। कमजोर मानसून का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। दूसरी तरफ तापमान में कमी न आने से बिजली की खपत भी बढ़ी हुई है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि राजस्थान में बने प्रति चक्रवातीय परिसंचरण के कारण हरियाणा-एनसीआर में पश्चिमी गर्म और शुष्क हवाएं चल रही हैं। इससे वातावरण में नमी कम हुई है और दिन के तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। बुधवार को तकरीबन सभी जिलों में तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

    गुरुग्राम में 38 डिग्री तापमान
    सबसे अधिकतम तापमान गुरुग्राम का 38.2 डिग्री रहा। 37.4 डिग्री सेल्सियस के साथ फरीदाबाद दूसरे नंबर पर रहा। सभी जिलों का न्यूनतम तापमान 20 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। 25 सितंबर को एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से हरियाणा के उत्तरी जिलों में कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। 28 से 30 सितंबर के दौरान भी पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी की मौसम प्रणाली के प्रभाव से उत्तरी व पूर्वी जिलों में मौसम में बदलाव और हल्की वर्षा की संभावना है। मानसून की वापसी के लिए लगातार वर्षा का न होना, निचले वायुमंडल में प्रतिचक्रवात का बनना और हवा में नमी की कमी प्रमुख संकेत माने जाते हैं।

    दस साल बाद ऐसा मानसून
    दस साल पहले भी मानसून कुछ ऐसा बीता था। 2016 में सामान्य से 58 प्रतिशत कम वर्षा हुई थी। हालांकि 2015 का मानसून उससे भी कमजोर रहा था। उस वक्त सामान्य से 126 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी। तब महज 287.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी।

  • पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव में सस्पेंस बढ़ा, काउंटिंग रुकी; कल आएगा रिजल्ट

    पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव में सस्पेंस बढ़ा, काउंटिंग रुकी; कल आएगा रिजल्ट

    चंडीगढ़.

    पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव की रजिस्टर्ड ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना लगातार 36 घंटे चलने के बाद वीरवार दोपहर एक बजे रोक दी गई। मतगणना में तैनात स्टाफ को लगातार काम के बाद आराम नहीं मिल पाने के कारण यह फैसला लिया गया।

    पीयू रजिस्ट्रार वाइपी वर्मा ने बताया कि अब शुक्रवार सुबह 9:30 बजे से दोबारा मतगणना शुरू होगी। 15 सीटों के लिए 51 प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में मतगणना पर प्रत्याशियों और समर्थकों की लगातार नजर बनी हुई है। अब तक बूथवार रिकाॅर्ड के अनुसार 60,044 बैलेट पेपर की गिनती दर्ज की गई है। पंजाब के 212 बूथों से सबसे अधिक 49,422 वोट की गिनती हुई है। चंडीगढ़ के 33 बूथों से 5,446 और हरियाणा के 19 बूथों से 4,269 वोट दर्ज हुए।

    वहीं दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू से कुल 907 बैलेट पेपर की गिनती हुई है। मतगणना दोबारा शुरू होने के बाद रुझान और स्पष्ट होने की उम्मीद है। इसके साथ ही 15 सीटों पर कौन प्रत्याशी जीत की ओर बढ़ रहा है, इसकी तस्वीर भी साफ होगी। सीनेट चुनाव के अंतिम परिणाम के लिए अब शुक्रवार की मतगणना पर सभी की नजर है।

  • झारखंड में ट्रांसफर होकर आए कर्मचारियों की सीनियरिटी होगी तय, नई उप कंडिका जोड़ी गई

    झारखंड में ट्रांसफर होकर आए कर्मचारियों की सीनियरिटी होगी तय, नई उप कंडिका जोड़ी गई

     रांची
    झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत अंतिम संवर्ग विभाजन के बाद पारस्परिक आधार पर स्थानांतरित कर्मियों की वरीयता निर्धारण को लेकर एक महत्वपूर्ण संशोधन जारी किया है।

    सरकार के सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र में बताया गया है कि यह निर्णय झारखंड में पारस्परिक स्थानांतरण के आधार पर आए कर्मियों की वरीयता को लेकर चल रहे विवादों को स्पष्ट दिशा देगा। दरअसल, विभागीय परिपत्र संख्या-6160 दिनांक 23.09.2024 के द्वारा पूर्व में जारी कुछ निर्णयों को संकलित किया गया था।

    इसमें कार्मिक विभाग के पत्र संख्या-5626 को विलोपित करते हुए और गृह (विशेष) विभाग, बिहार के पत्रों का हवाला देते हुए कार्मिक विभाग, झारखंड के पत्रांक-4450 दिनांक 19.07.2008 के द्वारा परिचारित राज्य सरकार के पूर्व के निर्णय को 19.07.2008 के भूतलक्षी प्रभाव से वापस प्रभावी किया गया था।

    इसके अनुसार, अंतिम संवर्ग विभाजन के बाद पारस्परिक स्थानांतरण के आधार पर झारखंड आने वाले कर्मियों को मूल वरीयता का लाभ नहीं मिलता है और वे अपने कोटि में अपने बैच के कर्मियों की तुलना में सबसे कनीय माने जाते हैं।

    अब सरकार ने विभागीय परिपत्र संख्या-6160 की कंडिका-7 में 7(ii) के पश्चात एक नई उप कंडिका-7(iii) जोड़ने का निर्णय लिया है। इस नई उप कंडिका के अनुसार“उपयुक्त कंडिका-7(ii) में उल्लेखित परिपत्र की शर्तें केवल उन्हीं कर्मियों पर लागू होंगी।

    जिनके पारस्परिक स्थानान्तरण आदेश में ‘वरीयता का दावा मान्य नहीं होगा’ अथवा ‘कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड के पत्र के आलोक में वरीयता निर्धारित होगा’, का उल्लेख रहेगा।

    इस आदेश की प्रतिलिपि नोडल पदाधिकारी पीएमयू कोषांग को वेबसाइट पर अपलोड करने हेतु, विभागीय वरीय प्रभारी प्रशाखा पदाधिकारी को भेजा गया है। यह निर्णय झारखंड में पारस्परिक स्थानांतरण के आधार पर आए कर्मियों की वरीयता को लेकर चल रहे विवादों को स्पष्ट दिशा देने वाला माना जा रहा है।