Category: राज्य

  • ‘सपा गुंडे-माफियाओं को पालने-पोषने वाली पार्टी, स्वार्थ के लिए चाहिए सत्ता’: ब्रजेश पाठक

    ‘सपा गुंडे-माफियाओं को पालने-पोषने वाली पार्टी, स्वार्थ के लिए चाहिए सत्ता’: ब्रजेश पाठक

    अखिलेश यादव कुछ भी कर लें, सफल नहीं होंगे- ब्रजेश पाठक

    ‘सपा पूरी तरह डिरेल हो चुकी है, अब दाल गलने वाली नहीं’: अखिलेश पर बरसे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक

    ‘सपा गुंडे-माफियाओं को पालने-पोषने वाली पार्टी, स्वार्थ के लिए चाहिए सत्ता’: ब्रजेश पाठक

    लखनऊ, 
     उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव कितनी भी कोशिश कर लें, वह सफल नहीं होंगे। पाठक ने सपा को लेकर कहा कि पार्टी पूरी तरह डिरेल हो चुकी है और उत्तर प्रदेश की जनता उसके राजनीतिक तौर-तरीकों को समझती है।
     
    ‘अखिलेश यादव कितनी भी कोशिश कर लें, सफल नहीं होंगे’

    ब्रजेश पाठक ने कहा कि यूपी की जनता जानती है कि ये लोग गुंडे, बदमाश और माफियाओं को पालने-पोषने वाले लोग हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा को सत्ता केवल अपने स्वार्थ के लिए चाहिए।

    ‘अब सपा की दाल गलने वाली नहीं है’
    डिप्टी सीएम ने प्रदेश में भाजपा सरकार के कामकाज का जिक्र करते हुए कहा, “आज यूपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकास की राह पर चल रहा है। उत्तर प्रदेश विकसित प्रदेश की तरफ बढ़ रहा है। अब सपा की दाल गलने वाली नहीं है।”

    सपा पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप
    ब्रजेश पाठक ने सपा पर जाति और धर्म के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सपा के लोग जाति-धर्म के नाम पर मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करते रहे हैं, जबकि भाजपा सर्वसमाज की बात करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा “सबका साथ, सबका विकास, सबके विश्वास” के आधार पर जन-जन को जोड़ती है।

  • चंडीगढ़ की वोटर लिस्ट में बड़ी कमी, 1,99,596 मतदाता घटने पर उठे सवाल

    चंडीगढ़ की वोटर लिस्ट में बड़ी कमी, 1,99,596 मतदाता घटने पर उठे सवाल

    चंडीगढ़.

    विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद 1,99,596 मतदाताओं की संख्या कम होना अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) प्रेरणा पुरी को पत्र लिखकर एसआईआर पर सवाल उठाए हैं।

    साथ हीवार्डवार और मतदातावार पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। तिवारी ने अपने पत्र में कहा है कि एक जून 2024 से 22 सितंबर 2026 तक चंडीगढ़ की मतदाता सूची में 1,99,596 मतदाताओं की कमी आई है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम कम होने के बावजूद अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन मतदाताओं के नाम किस कारण से हटाए गए हैं।

    तीन स्तर पर मांगी जानकारी
    सांसद ने सीईओ से एक जून 2024 से अब तक हटाए गए अथवा अंतिम सूची में शामिल नहीं किए गए सभी मतदाताओं की वार्डवार पूरी जानकारी मांगी है। इसमें मतदाता का नाम, वार्ड और बूथ नंबर, ईपीआइसी नंबर, नाम हटाए जाने की तारीख और दर्ज कारण शामिल करने को कहा गया है।

    एसआईआर के बाद 1.99 लाख मतदाता घटे
    विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मंगलवार को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के साथ ही इसे लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर मतदाता संख्या में आई कमी पर सवाल उठाए हैं। तिवारी के अनुसार, 1 जून 2024 से 22 सितंबर 2026 के बीच चंडीगढ़ में मतदाताओं की संख्या 1,99,596 घट गई, जो कुल मतदाताओं का 30.26 प्रतिशत है। उन्होंने इतनी बड़ी कमी के कारण सार्वजनिक करने की मांग की है।

    डुप्लीकेट और स्थानांतरित मतदाताओं का ब्योरा मांगा
    तिवारी ने कहा कि हटाए गए नामों में कितने डुप्लीकेट, कितने स्थानांतरित और कितने अन्य कारणों से सूची से बाहर हुए, यह स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने निर्वाचन आयोग से श्रेणीवार जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि यदि हटाए गए मतदाता डुप्लीकेट थे तो अब किस स्थान पर पंजीकृत हैं। वहीं, यदि कोई फर्जी या घोस्ट वोटर था तो उसके नाम भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

    दस्तावेज नहीं होने पर नाम हटने का सवाल
    तिवारी ने यह भी पूछा कि कहीं निर्धारित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण गरीब या अन्य मतदाताओं के नाम तो नहीं हटे। उन्होंने कहा कि हटाए गए मतदाताओं के नाम, पते और नाम हटाने के कारण सार्वजनिक होने से स्थिति स्पष्ट होगी। एसआईआर का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान कर मतदाता सूची को अद्यतन करना है। 

  • समाजवादी पार्टी के मंच से धकिया दिए जाते हैं पिछड़ा समाज के नेता: अखिलेश पर बरसे संजय निषाद

    समाजवादी पार्टी के मंच से धकिया दिए जाते हैं पिछड़ा समाज के नेता: अखिलेश पर बरसे संजय निषाद

    अखिलेश मल्लाह समाज के बेटे को विधान परिषद का नेता बनाते तो वह निषाद समाज की आवाज उठाता: मंत्री संजय निषाद

    अखिलेश यादव को M से केवल एक वर्ग दिखता है, मल्लाह नहीं दिखता: संजय निषाद

    समाजवादी पार्टी के मंच से धकिया दिए जाते हैं पिछड़ा समाज के नेता: अखिलेश पर बरसे संजय निषाद

    सपा को सहयोगी के रूप में केवल दल दिखते हैं, लेकिन उनके दिल में जगह नहीं: संजय निषाद

     लखनऊ
     उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने सपा प्रमख अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर तीखा निशाना साधा है। संजय निषाद ने कहा है कि सपा का पीडीए फॉर्मूला एक ढकोसला है। सपा अपने परंपरागत मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण में से केवल M को फायदा पहुंचा रही है। दरअसल एक दिन पहले ही समाजवादी पार्टी ने विधान परिषद में अपना नेता मोहम्मद जासमीर अंसारी को बनाया है।

    निषाद ने सपा पर पिछड़ा समाज के अपमान का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सपा के मंच से निषाद समाज और राजभर समाज के नेता धकिया दिए जाते हैं। किसी अन्य जाति के नेताओं का फोटो, पोस्टर और विजन नहीं दिखता है। महाभारत में अर्जुन के रथ में सभी घोड़ों को बराबर जगह दी गई थी, तब ही जाकर अर्जुन को जीत मिल पाई थी। अखिलेश यादव को तो केवल M दिखाई देते हैं, मल्लाह नहीं दिखाई देते हैं। अगर मल्लाह के बेटे को विधान परिषद का नेता बनाया होता तो वह निषाद समाज के लोगों की आवाज उठाता। 

    ‘जो पीड़ित है, वही पीडीए है’ फॉर्मूले पर भड़के संजय  
    अखिलेश यादव ने नारा दिया है कि जो पीड़ित है, वही पीडीए है। इस पर संजय निषाद ने कहा कि पीड़ित, दुखी, अपमानित सभी लोग एनडीए के साथ हैं। समाजवादी पार्टी केवल पीडीए समाज को ठगना चाहती है। निषाद ने कहा कि 07 जून 2015 को रेल आंदोलन हुआ था उसमें निषादों पर गोली सपा सरकार ने चलवाई थी। रेलवे की भूमि केंद्र सरकार से संबंधित थी, उसमें राज्य सरकार को गोली चलवानी ही नहीं चाहिए थी। लेकिन निषादों पर गोली चली, मेरा भाई मारा गया। निषादों पर बहुत अत्याचार हुआ। 

    निषाद-कश्यप एकता मंच का किया जिक्र
    संजय निषाद ने कहा कि मनोहर लाल निषाद और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने निषाद-कश्यप एकता मंच बनाया था। मनोहर जी के बेटे राम कुमार जी हैं। कहां हैं, कोई पता ही नहीं चलता है। कहीं नेपथ्य में चले गए। सपा को केवल दल दिखते हैं लेकिन उनके दिल में जगह नहीं है। समाजवादी पार्टी में पिछड़ा समाज केवल दरी बिछाने के लिए है।

  • गर्मी के चलते स्कूल टाइमिंग बढ़ाने की मांग, 2022-24 में भी 16 अक्टूबर से बदला था समय

    गर्मी के चलते स्कूल टाइमिंग बढ़ाने की मांग, 2022-24 में भी 16 अक्टूबर से बदला था समय

    जयपुर
    राजस्थान के सरकारी स्कूलों में एक अक्टूबर 2026 से शीतकालीन समय लागू होना प्रस्तावित है। इसके तहत एक पारी में संचालित विद्यालयों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक किया जाना है। वहीं, वर्तमान में एक पारी वाले स्कूलों का संचालन सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक किया जा रहा है। हालांकि, समय परिवर्तन की तारीख नजदीक आने से पहले ही शिक्षक संगठनों ने इसे आगे बढ़ाने की मांग उठानी शुरू कर दी है।

    अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा), राजस्थान ने शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर मांग की है कि एक अक्टूबर के बजाय 16 अक्टूबर 2026 से विद्यालयों का समय बदला जाए। महासंघ का कहना है कि अक्टूबर के पहले पखवाड़े में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गर्मी का असर बना रहता है। ऐसे में सुबह के समय स्कूल शुरू करने की बजाय दोपहर तक चलने वाला वर्तमान समय विद्यार्थियों के लिए अधिक सुविधाजनक हो सकता है।

    छोटे बच्चों और ग्रामीण विद्यार्थियों का हवाला
    महासंघ ने अपनी मांग के पीछे विद्यार्थियों की सुविधा, सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्रमुख आधार बनाया है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि एक अक्टूबर से स्कूल सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होते हैं तो प्राथमिक कक्षाओं के छोटे बच्चों को दोपहर बाद घर लौटना पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए भी गर्म मौसम में यह व्यवस्था परेशानी पैदा कर सकती है।

    पहले भी बदली जा चुकी है समय परिवर्तन की तारीख
    राजस्थान में एक अक्टूबर से शीतकालीन समय लागू करने की व्यवस्था शिविरा पंचांग में निर्धारित रही है। सामान्य तौर पर एक पारी वाले स्कूलों का समय इस अवधि में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक रहता है। हालांकि, पिछले वर्षों में अक्टूबर की शुरुआत में तापमान अधिक रहने के कारण समय परिवर्तन की तारीख आगे बढ़ाई गई थी। वर्ष 2024 में भी गर्मी को देखते हुए ग्रीष्मकालीन समय 15 अक्टूबर तक बढ़ाया गया और 16 अक्टूबर से सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक शीतकालीन समय लागू किया गया था।

    अब शिक्षा विभाग के फैसले पर नजर
    इस बार भी मौसम को देखते हुए शिक्षक संगठनों ने समय परिवर्तन की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है। फिलहाल 2026-27 के शैक्षणिक कैलेंडर में एक अक्टूबर से समय परिवर्तन का प्रावधान बताया गया है।
    ऐसे में अब निगाहें शिक्षा विभाग के अगले आदेश पर हैं। यदि विभाग शिक्षक संगठनों की मांग पर विचार करता है तो स्कूलों का वर्तमान प्रातःकालीन समय अक्टूबर के मध्य तक जारी रह सकता है। वहीं, यदि कोई संशोधित आदेश जारी नहीं होता है तो निर्धारित व्यवस्था के अनुसार एक अक्टूबर से स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक हो जाएगा।

    पिछले चार वर्षों में से तीन बार 16 अक्टूबर से बदला था स्कूल टाइमिंग
    पिछले चार वर्षों यानी 2022 से 2025 तक राजस्थान में स्कूलों के समय में अक्टूबर के दौरान बदलाव की स्थिति देखें तो एक पैटर्न साफ दिखाई देता है। सामान्य व्यवस्था के अनुसार 1 अक्टूबर से शीतकालीन समय लागू होता है और एक पारी के स्कूल सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होते हैं। लेकिन 2022, 2023 और 2024 में गर्मी के कारण समय परिवर्तन को आगे बढ़ाया गया था। 2025 के शिविरा पंचांग में 1 अक्टूबर से ही स्कूलों का समय बदला गया।

    2022 में 1 अक्टूबर का बदलाव टला, 16 अक्टूबर से लागू
    शिविरा पंचांग के अनुसार 1 अक्टूबर 2022 से स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे किया जाना था। लेकिन मौसम की असामान्य परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने समय परिवर्तन को 15 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया। इस दौरान स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलते रहे। 16 अक्टूबर को रविवार होने के कारण वास्तविक रूप से स्कूलों में नया समय 17 अक्टूबर 2022 से लागू हुआ।

    2023 में भी 1 अक्टूबर की जगह 16 अक्टूबर से बदलाव
    2023 में भी गर्मी के कारण स्कूलों का समय 1 अक्टूबर से नहीं बदला गया। शिक्षा विभाग ने शीतकालीन समय 16 अक्टूबर 2023 से लागू किया। इसके बाद एक पारी वाले स्कूल सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होने लगे। दो पारी वाले स्कूलों में पहली पारी सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे और दूसरी पारी दोपहर 12:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक रखी गई।

    2024 में भी 1 अक्टूबर से बदलाव नहीं हुआ
    2024 में भी यही स्थिति बनी। शिविरा कैलेंडर के अनुसार 1 अक्टूबर से शीतकालीन समय लागू होना था, लेकिन गर्मी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने इसे 15 अक्टूबर तक टाल दिया। इस दौरान स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलते रहे। शीतकालीन समय 16 अक्टूबर 2024 से लागू किया गया और एक पारी के स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे कर दिया गया।

    लेकिन 2025 में एक अक्टूबर से ही हुआ था स्कूलों का समय परिवर्तन
    2025-26 के शिविरा पंचांग में स्पष्ट रूप से 1 अक्टूबर 2025 को विद्यालय समय परिवर्तन की तारीख निर्धारित की गई थी। इसके अनुसार एक पारी के स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे और दो पारी वाले स्कूलों का समय सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक निर्धारित था। उपलब्ध पंचांग में 1 अक्टूबर को ही समय परिवर्तन दर्ज है।

  • डेंगू को लेकर पटना में अलर्ट, PMCH-IGIMS में मरीज भर्ती; इन इलाकों में ज्यादा केस

    डेंगू को लेकर पटना में अलर्ट, PMCH-IGIMS में मरीज भर्ती; इन इलाकों में ज्यादा केस

    पटना
    बिहार की राजधानी पटना में डेंगू तेजी से बढ़ने लगा है। सितंबर के 23 दिनों में डेंगू के 140 नए मरीज मिल चुके हैं। डेंगू के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफे से हड़कंप मचा हुआ है। बुधवार को नौ नए मरीज सामने आए। हर दिन नौ से 12 मरीज डेंगू से संक्रमित पाए जा रहे हैं। इस साल अब तक पटना में डेंगू संक्रमित मरीजों की संख्या 307 हो गई है। इस बार डेंगू में सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कुछ मरीजों में बीमारी गंभीर होने पर प्लेटलेट्स तेजी से गिर रहे हैं। ऐसे मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है।

    पीएमसीएच के अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि इस सीजन में अब तक 55 डेंगू मरीजों को भर्ती किया गया है। डेंगू मरीजों के लिए 20 बेड का अलग वार्ड बनाया गया है। वहीं, आईजीआईएमएस में डेंगू के 79 मरीजों को भर्ती कराने की जरूरत पड़ी है। आईजीआईएमएस में डेंगू मरीजों के लिए पांच समर्पित बेड रखे गए हैं।

    पटना के सिविल सर्जन डॉ.योगेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा कि यदि लगातार तेज बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी या उल्टी जैसे लक्षण हों तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर डेंगू की जांच कराएं। घर और आसपास हीं भी पानी जमा नहीं होने दें।

    यहां बढ़ रहे डेंगू के मरीज
    कंकड़बाग, हनुमान नगर, भागवत नगर, पोस्टल पार्क, योगीपुर, जक्कनपुर, भूतनाथ रोड, बाजार समिति, मुसल्लहपुर हाट, सुलतानगंज, संदलपुर, कदमकुआं, महेंद्रू, भिखनापहाड़ी, पाटलिपुत्र, बोरिंग रोड, राजाबाजार, इंद्रपुरी, आशियाना, दीघा, एजी कॉलोनी, एसकेपुरी, तारामंडल, सिपारा, मीठापुर, अगमकुआं, बजरंगपुरी, गुलजारबाग, आलमगंज, खाजेकलां, मालसलामी, गर्दनीबाग, राजीवनगर, शास्त्रीनगर, फुलवारीशरीफ, मैनपुरा, महेंद्रू और ट्रांसपोर्ट नगर

  • जयपुर में अस्थाई पटाखा बिक्री की अनुमति शुरू, जानें आवेदन की तारीख और जरूरी दस्तावेज

    जयपुर में अस्थाई पटाखा बिक्री की अनुमति शुरू, जानें आवेदन की तारीख और जरूरी दस्तावेज

    जयपुर
     दीपावली पर आतिशबाजी की अस्थाई दुकान लगाने की तैयारी कर रहे कारोबारियों के लिए जरूरी खबर है। जिला प्रशासन ने पटाखों की अस्थाई बिक्री के लिए अनुज्ञापत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लाइसेंस लेने के इच्छुक लोगों को 25 सितंबर 2026 तक आवेदन करना होगा। तय तारीख के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों पर प्रशासन की ओर से कोई विचार नहीं किया जाएगा। ऐसे में पटाखा कारोबार से जुड़े लोगों के लिए आवेदन की समय सीमा बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

    जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट संदेश नायक के अनुसार, दीपावली के अवसर पर विस्फोटक नियम, 2008 के तहत आतिशबाजी की अस्थाई बिक्री के लिए अनुज्ञापत्र जारी किए जाएंगे। अस्थाई अनुज्ञापत्र की अवधि 12 अक्टूबर से 11 नवंबर 2026 तक रहेगी। इस अवधि के दौरान निर्धारित नियमों और स्वीकृत स्थानों पर ही आतिशबाजी की बिक्री की जा सकेगी।

    संबंधित एसडीएम कार्यालय में करना होगा आवेदन
    अस्थाई पटाखा बिक्री का लाइसेंस लेने के लिए आवेदकों को निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना होगा। आवेदन संबंधित थाना क्षेत्र के उपखण्ड मजिस्ट्रेट कार्यालय में जमा कराया जाएगा। प्रशासन ने आवेदन के साथ प्रस्तावित बिक्री स्थल से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करना भी अनिवार्य किया है।

    आवेदक को प्रस्तावित आतिशबाजी बिक्री स्थल का ब्ल्यू प्रिंट मानचित्र पांच प्रतियों में देना होगा। इस मानचित्र में आसपास मौजूद व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्पष्ट रूप से दर्शाना जरूरी होगा। इसके अलावा शपथ पत्र, स्थल के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज अथवा किरायानामा की प्रमाणित फोटो कॉपी और आवेदक की दो पासपोर्ट साइज फोटो भी आवेदन के साथ जमा करनी होंगी।

    इन थाना क्षेत्रों के लिए शुरू हुई प्रक्रिया
    अस्थाई आतिशबाजी अनुज्ञापत्र के लिए जयपुर जिले के कई थाना क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें शाहपुरा, मनोहरपुर, अमरसर, जमवारामगढ़, आंधी, चन्दवाजी, रायसर, नरैना, मांजी रेनवाल, माधोराजपुरा, सांभर, फुलेरा, जोबनेर, किशनगढ़-रेनवाल, गोविन्दगढ़, सामोद, कालाडेरा, दूदू, मौजमाबाद और फागी शामिल हैं।

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आवेदन निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित कार्यालय में पहुंचना जरूरी है। अंतिम तारीख के बाद प्राप्त होने वाले आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और न ही उन पर विचार किया जाएगा।

    कारोबारियों के पास अब सीमित समय
    दीपावली से पहले पटाखों की अस्थाई दुकान लगाने के इच्छुक कारोबारियों को अब आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए सीमित समय मिला है। उन्हें जरूरी दस्तावेज तैयार कर 25 सितंबर तक संबंधित एसडीएम कार्यालय में आवेदन जमा करना होगा। आवेदन की अंतिम तारीख निकलने के बाद लाइसेंस के लिए नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा

    एक नजर में
    आवेदन की अंतिम तारीख: 25 सितंबर 2026

    अस्थाई अनुज्ञापत्र की अवधि: 12 अक्टूबर से 11 नवंबर 2026

    आवेदन कहां करें: संबंधित थाना क्षेत्र के उपखण्ड मजिस्ट्रेट कार्यालय

    जरूरी दस्तावेज: ब्ल्यू प्रिंट मानचित्र की 5 प्रतियां, शपथ पत्र, स्वामित्व दस्तावेज या किरायानामा, 2 पासपोर्ट साइज फोटो

    लाइसेंस की प्रक्रिया: विस्फोटक नियम, 2008 के तहत

    महत्वपूर्ण: 25 सितंबर के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

  • 12 घंटे की पैरोल में शादी, 3 बच्चों संग कंबोडिया से पहुंची मैनपाल की दुल्हन

    12 घंटे की पैरोल में शादी, 3 बच्चों संग कंबोडिया से पहुंची मैनपाल की दुल्हन

    झज्जर.

    करीब आठ साल पहले पैरोल के दौरान जेल से फरार होकर कंबोडिया पहुंचने और वहां से प्रत्यर्पित किए गए आजीवन कारावास के दोषी मैनपाल ढिल्ला बुधवार, 24 सितंबर को अपनी कंबोडियाई पत्नी मेटा चान के साथ हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह बंधन में बंधेंगे।

    हत्या सहित कई गंभीर आपराधिक मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे मैनपाल को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश जसजीत सिंह बेदी की अदालत से 12 घंटे की कस्टडी पैरोल मिली है।

    कड़ी सुरक्षा के बीच सुबह आठ से रात आठ बजे तक रहेंगे बाहर
    जेल अधीक्षक सेवा सिंह के अनुसार मैनपाल को सामान्य पैरोल की तरह स्वतंत्र रूप से नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि वह पूरे समय पुलिस और जेल कर्मियों की कड़ी कस्टडी व सुरक्षा घेरे में रहेगा। तयशुदा कार्यक्रम के तहत उसे सुबह आठ बजे जेल से बाहर लाया जाएगा और रात आठ बजे तक वापस जेल पहुंचाना होगा।

  • बिहार की बौद्ध धरोहर से थाईलैंड को जोड़ने की तैयारी, नए ट्रैवल पैकेज और कनेक्टिविटी पर जोर

    बिहार की बौद्ध धरोहर से थाईलैंड को जोड़ने की तैयारी, नए ट्रैवल पैकेज और कनेक्टिविटी पर जोर

    पटना
     बिहार की समृद्ध बौद्ध विरासत अब थाईलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया के पर्यटकों तक नए अंदाज में पहुंचाने की तैयारी है। बिहार पर्यटन विभाग के तत्वावधान में ‘फैम टूर ऑफ लोटस ट्रायंगल-ट्रैवल टू लैंड ऑफ एनलाइटनमेंट’ के तहत थाईलैंड से आए 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली का भ्रमण किया।

    बिहार यात्रा के अंतिम चरण में पटना पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल ने बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय पर्यटन हित धारकों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।

    बिहार बौद्ध पर्यटकों के स्वागत के लिए हमेशा तैयार
    पर्यटन निदेशालय के संयुक्त निदेशक राजेश रौशन ने कहा कि बिहार बौद्ध पर्यटकों के स्वागत के लिए हमेशा तैयार है। बिहार सरकार सीमा-पार पर्यटन को बढ़ावा देना, बेहतरीन ट्रैवल पैकेज बनाना, सीधी कनेक्टिविटी बेहतर करना और बिहार को थाईलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन के तौर पर स्थापित करने की दिशा में कार्यरत है।

    थाई प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त रूप से कहा कि बिहार पर्यटन द्वारा किया गया यह प्रयास भारत और विशेषकर बिहार की वैश्विक पर्यटन पहुंच को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। थाईलैंड-बिहार टूरिज्म के इस पहल का हिस्सा बनना खुशी की बात है।

    बैठक में कारोबार और पर्यटन पर चर्चा
    बैठक में बिहार के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न संगठनों ने थाई प्रतिनिधिमंडल ने अन्य व्यवसायी संस्था से वार्ता की। इस दौरान पर्यटन उत्पादों, ट्रैवल पैकेज, व्यावसायिक अवसर और डेस्टिनेशन प्रमोशन को लेकर दोनों पक्षों ने विचार साझा किए।

    हित धारकों ने कहा कि इस पहल से बिहार-थाईलैंड के बीच पर्यटन सहयोग, कारोबारी साझेदारी और प्रचार-प्रसार के नए रास्ते खुलेंगे। थाई प्रतिनिधिमंडल ने बिहार पर्यटन की पहल को भारत और विशेषकर बिहार की वैश्विक पर्यटन पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। यात्रा पूरी करने के बाद 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बिहार से रवाना हो गया।

  • जालंधर में नया नियम लागू, छेड़छाड़ वाली नंबर प्लेट पर पेट्रोल-डीजल बंद

    जालंधर में नया नियम लागू, छेड़छाड़ वाली नंबर प्लेट पर पेट्रोल-डीजल बंद

    जालंधर.

    वाहन पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) नहीं है या नंबर प्लेट के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ की गई है तो अब जालंधर में ऐसे वाहन को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं मिलेगा।

    कमिश्नरेट पुलिस ने बिना नंबर प्लेट, जरूरी एचएसआरपी के बिना चल रहे वाहनों के साथ-साथ टूटी, मुड़ी, क्षतिग्रस्त, बदली या जानबूझकर संशोधित नंबर प्लेट वाले वाहनों को ईंधन देने पर रोक लगा दी है। पुलिस का यह आदेश 21 सितंबर 2026 से लागू हो चुका है और 20 नवंबर तक प्रभावी रहेगा। पुलिस कमिश्नर सतिंदर सिंह ने धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। इस व्यवस्था की निगरानी डीसीपी जसरूप कौर बाठ करेंगी। पुलिस का कहना है कि नंबर प्लेट वाहन की पहचान का प्रमुख माध्यम है। इसे छिपाकर या बदलकर वाहन चलाने से यातायात नियमों के उल्लंघन के साथ अपराध की जांच में भी परेशानी होती है। ऐसे में ईंधन बिक्री को वैध नंबर प्लेट से जोड़ने का उद्देश्य वाहन की पहचान सुनिश्चित करना है।

    नंबर प्लेट नहीं तो पंप पर ही रुक जाएगी गाड़ी
    नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पंप, डीजल डिस्पेंसिंग स्टेशन और सीएनजी स्टेशन पर वाहन में ईंधन भरने से पहले नंबर प्लेट की स्थिति देखी जाएगी। यदि वाहन पर नंबर प्लेट नहीं है या जिस वाहन पर एचएसआरपी लगना जरूरी है, उस पर एचएसआरपी नहीं लगी है तो उसे ईंधन नहीं दिया जाएगा। इसी तरह प्लेट टूटी हुई, मुड़ी हुई, क्षतिग्रस्त या ऐसी स्थिति में है जिससे वाहन का पंजीकरण नंबर स्पष्ट नहीं हो रहा, तो भी ईंधन देने पर रोक रहेगी। यदि नंबर प्लेट में बदलाव या छेड़छाड़ के संकेत मिलते हैं तो पंप संचालक को पुलिस को इसकी सूचना देनी होगी।

    छेड़छाड़ वाली प्लेट पर खास नजर
    पुलिस के आदेश में नंबर प्लेट से छेड़छाड़ को विशेष रूप से शामिल किया गया है। कई बार वाहन की पहचान छिपाने के लिए नंबर प्लेट को मोड़ दिया जाता है, उस पर कोई सामग्री लगा दी जाती है या प्लेट को इस तरह बदला जाता है कि नंबर स्पष्ट दिखाई न दे। ऐसे वाहनों को भी ईंधन नहीं मिलेगा। पंप कर्मचारी संदिग्ध वाहन के मेक, माडल, रंग और आने-जाने की दिशा जैसी जानकारी संभव होने पर नोट कर सकते हैं। पुलिस को सूचना मिलने पर सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से वाहन की गतिविधि की जांच की जा सकेगी।

    पेट्रोल पंपों पर सीसीटीवी अनिवार्य
    आदेश के तहत सभी ईंधन स्टेशनों के सीसीटीवी कैमरे चालू रखना जरूरी होगा। प्रवेश और निकास स्थान, ईंधन भरने का क्षेत्र, आने-जाने वाले वाहनों, भुगतान क्षेत्र और जहां संभव हो वहां वाहन की नंबर प्लेट की रिकार्डिंग होनी चाहिए। कानूनी और तकनीकी रूप से संभव होने पर पंप के सामने और उससे जुड़ी सड़क की भी निगरानी करनी होगी। सीसीटीवी फुटेज को कम से कम दो महीने तक सुरक्षित रखना होगा। इससे पुलिस को घटना के बाद संदिग्ध वाहन की तलाश करने में मदद मिल सकती है।

    वारदात के बाद भागने वाले वाहन की पहचान में मदद
    पुलिस की इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू अपराध की जांच से जुड़ा है। यदि किसी वारदात में इस्तेमाल वाहन पर नंबर प्लेट नहीं है या उसके साथ छेड़छाड़ की गई है, तो उसके पेट्रोल पंप तक पहुंचने पर पुलिस को सूचना मिल सकती है। पंप की सीसीटीवी फुटेज से वाहन का रंग, माडल और आवाजाही का समय सामने आ सकता है। जांच के दौरान पुलिस इन फुटेज को शहर के अन्य सीसीटीवी कैमरों की रिकार्डिंग से जोड़कर वाहन के संभावित रूट का पता लगा सकती है। इस तरह पेट्रोल पंप की फुटेज किसी आपराधिक मामले में एक अतिरिक्त जांच कड़ी बन सकती है।

    नए और आपातकालीन वाहनों को छूट
    इस आदेश में कुछ वाहनों को छूट दी गई है। एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, फायर सर्विस और आपातकालीन सेवा वाले वाहनों पर यह रोक लागू नहीं होगी। नए खरीदे गए ऐसे वाहन, जिनके लिए सक्षम प्राधिकारी की ओर से वैध पंजीकरण नंबर जारी किया गया है, उन्हें भी ईंधन दिया जा सकेगा। वैध अस्थायी पंजीकरण नंबर वाले वाहनों को भी दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण प्रस्तुत करने पर ईंधन दिया जाएगा।

    पंप संचालकों की जिम्मेदारी बढ़ी
    पेट्रोल पंप संचालकों को पंजाबी और अंग्रेजी में प्रमुख स्थान पर नोटिस लगाकर ग्राहकों को इस नियम की जानकारी देनी होगी। संदिग्ध नंबर प्लेट वाला वाहन मिलने पर नजदीकी पुलिस स्टेशन या पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देनी होगी। पुलिस के आदेश का पालन नहीं करने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

    फायदा क्या होगा?
    इस व्यवस्था से वाहन मालिकों पर वैध नंबर प्लेट लगाने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही बिना नंबर या छेड़छाड़ वाली प्लेट वाले वाहनों की पहचान आसान हो सकती है। अपराध की जांच में पेट्रोल पंपों की सीसीटीवी फुटेज पुलिस को अतिरिक्त सुराग दे सकती है। ध्यान रखने वाली बात: वाहन मालिक पेट्रोल पंप पर परेशानी से बचने के लिए अपने वाहन की नंबर प्लेट सही स्थिति में रखें और जहां लागू हो वहां एचएसआरपी लगवाएं। पंप संचालकों के लिए कैमरों की गुणवत्ता और दो महीने तक फुटेज सुरक्षित रखना भी अहम जिम्मेदारी होगी।

  • मुख्यमंत्री ने कहा- भारत अपनी ज्ञान परंपरा के कारण था विश्वगुरु, तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय इसके प्रमाण

    मुख्यमंत्री ने कहा- भारत अपनी ज्ञान परंपरा के कारण था विश्वगुरु, तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय इसके प्रमाण

    विदेशी आक्रांताओं ने भारत का वैभव ही नहीं लूटा, ज्ञान परंपरा को भी नष्ट करने का किया प्रयास: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
     
    ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर सप्त दिवसीय समारोह के व्याख्यान-सत्र का शुभारंभ
     
    मुख्यमंत्री बोले- अंग्रेजों ने भ्रम पैदा कर भारतीयों को अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से काटने का किया काम
     
    मुख्यमंत्री ने कहा- भारत अपनी ज्ञान परंपरा के कारण था विश्वगुरु, तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय इसके प्रमाण
     
    मुख्यमंत्री बोले- सत्य को प्रमाण के साथ रखना होगा, विरोधी असत्य बताएंगे और दुष्प्रचार करने वाले पैदा करेंगे संशय
     
    मुख्यमंत्री ने कहा- भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का किया आह्वान
     
    गोरखपुर

     मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं का उद्देश्य केवल भारत का वैभव लूटना नहीं था, बल्कि उसकी ज्ञान परंपरा और बुद्धि को नष्ट करना भी था। मंदिरों पर हमले इसी सोच का हिस्सा थे। ब्रिटिश काल में तरीका बदला और भ्रम पैदा कर भारतीयों को अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से काटने का प्रयास किया गया। अब अपनी ज्ञान परंपरा को पहचानने, उसे प्रमाणों के साथ दुनिया के सामने रखने और आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का समय है।
     
    मुख्यमंत्री गुरुवार को गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह के व्याख्यान-सत्र को संबोधित कर रहे थे।
     
    मंदिरों पर हमले के पीछे सनातन परंपरा पर प्रहार की सोच

    मुख्यमंत्री ने रामायण काल में दंडकारण्य में ऋषियों के आश्रमों पर हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि राक्षसी और दानवी शक्तियां हों या विदेशी आक्रांता, भारत पर हमले का उद्देश्य वैभव लूटने के साथ उसकी ज्ञान धरोहर को नष्ट करना भी रहा। उन्होंने सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी के आक्रमण का जिक्र करते हुए कहा कि मंदिर को तोड़ने का उद्देश्य केवल लूटपाट नहीं, बल्कि सनातन परंपरा को नष्ट करना भी था।
     
    अंग्रेजों ने भ्रम पैदा कर जड़ों से काटा
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि ब्रिटिश काल में तरीका बदल गया। भारतीयों को अपनी भाषा, चिकित्सा पद्धति और ज्ञान परंपरा को लेकर भ्रमित किया गया। संस्कृत के स्थान पर अंग्रेजी और परंपरागत चिकित्सा पद्धति के स्थान पर आधुनिक चिकित्सा को महत्व दिया गया। परिणाम यह हुआ कि हम धीरे-धीरे अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से कटते गए।
     
    ज्ञान परंपरा के कारण विश्वगुरु था भारत

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत अपनी ज्ञान परंपरा के कारण विश्वगुरु कहलाता था। आज के कई विकसित देशों का इतिहास 400 से 500 वर्षों का है, जबकि भारत में 2600 वर्ष पहले तक्षशिला और करीब 1700 से 1800 वर्ष पहले नालंदा जैसे विश्वविद्यालय थे। काशी, उज्जैन, कांची और नवद्वीप भी ज्ञान के प्रमुख केंद्र रहे।
     
    उन्होंने कहा कि कुंभ केवल स्नान का आयोजन नहीं था। प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक-त्र्यंबकेश्वर में संत और विद्वान अपने शोध और नवाचार पर चर्चा करते थे। भारतीय समाज ने अपने पर्व, त्योहार और मांगलिक कार्यों को आज भी भारतीय पंचांग से जोड़ रखा है।
     
    एक लाख से अधिक पांडुलिपियों का हो रहा संरक्षण
    मुख्यमंत्री ने बताया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय काशी में एक लाख से अधिक प्राचीन पांडुलिपियां एकत्र की गई हैं और उनके संरक्षण तथा डिजिटाइजेशन का कार्य चल रहा है। परिवारों, विद्वानों के घरों, प्राचीन मठों और मंदिरों में भी ऐसी ज्ञान धरोहर मौजूद है। अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन और लखनऊ समेत विभिन्न स्थानों पर पांडुलिपियां, ताम्रपत्र और शिलालेख मिले हैं।
     
    सत्य के साथ प्रमाण भी रखना होगा
    योगी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में तीन पक्ष सामने होंगे। पहला सत्य का है, इसलिए जो भी कहें, प्रमाणित करके कहें। दूसरा विरोधियों का है, जो उसे असत्य ठहराने का प्रयास करेंगे और तीसरा दुष्प्रचार करने वालों का है, जो संशय पैदा करेंगे। तकनीक ऐसे संशय को दूर करने में बड़ी मदद कर सकती है। इसे समयानुकूल बनाकर ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाना होगा।
     
    पाणिनि से चाणक्य तक की विरासत को जानें
    मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा, व्याकरण, अर्थशास्त्र, विज्ञान, खगोल, ज्योतिष, आयुर्वेद, शिल्प और तकनीक समेत हर क्षेत्र में भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा रही है। नई पीढ़ी को पाणिनि, पतंजलि, आयुर्वेद के आचार्यों और चाणक्य के अर्थशास्त्र जैसी विरासत से परिचित कराना होगा। करीब तीन हजार वर्ष पहले नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषि श्रवण परंपरा से प्राप्त ज्ञान को लिपिबद्ध करने के लिए एकत्र हुए थे।
     
    जड़ों से कटकर विकास संभव नहीं: विश्वकर्मा
    उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना में भारतीय ज्ञान परंपरा के सूत्र मौजूद हैं। अपनी जमीन और मूल से कटकर विकास संभव नहीं है। भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़कर ही भारत विश्वगुरु के पथ पर आगे बढ़ सकता है।
     
    नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ें: रामनाथन
    आईआईटी बीएचयू के प्रो. वी. रामनाथन ने कहा कि भारतीय सभ्यता ने ज्ञान को हमेशा प्राथमिकता दी है। नई पीढ़ी को आधुनिक माध्यमों से अपनी विरासत की जानकारी देनी होगी। अपनी धरोहर को भूलना समाज में अलगाव का कारण बनता है।
     
    संस्कारयुक्त शिक्षा लोककल्याण का माध्यम: श्रीधराचार्य
    जगद्गुरु स्वामी श्रीधराचार्य ने कहा कि संस्कार के अभाव वाली शिक्षा अमंगलकारी है। भारतीयता से जुड़ी शिक्षा लोककल्याण का माध्यम बनती है। ज्ञान वही है, जो मनुष्य को आत्मबोध की ओर ले जाए।
     
    योग केवल आसन नहीं: विश्वेश प्रपन्नाचार्य
    जगद्गुरु विश्वेश प्रपन्नाचार्य ने यम, नियम, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, आसन, ध्यान और समाधि का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय योग परंपरा व्यापक है। इसे केवल आसन तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।
     
    कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
    व्याख्यान-सत्र की शुरुआत संतों ने ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की। कार्यक्रम में जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा, महंत नारायण गिरि, महंत राजू दास, महंत शेरनाथ, स्वामी नरसिंह दास, महंत राम बालक दास व अन्य संतजन के साथ महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़े संस्थानों के प्रधानाचार्य, शिक्षक, अभिभावक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।