Category: राज्य

  • UPITS-26: स्मार्ट तकनीक से जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण में यूपी की नई पहल

    UPITS-26: स्मार्ट तकनीक से जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण में यूपी की नई पहल

    यूपीआईटीएस-26 में दिखेगी यूपी की स्मार्ट सिंचाई व्यवस्था, तकनीक से जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण का बना यूपी मॉडल

    – सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के पवेलियन में लाइव इंजीनियरिंग मॉडल, स्काडा और एआई तकनीक का होगा प्रदर्शन

    – बाढ़ नियंत्रण, नदी जोड़ो परियोजनाओं, ड्रेजिंग और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई की मिलेगी जानकारी

    लखनऊ,
    योगी सरकार द्वारा प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक तकनीक, बेहतर जल प्रबंधन और टिकाऊ इंजीनियरिंग से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की झलक उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2026 में देखने को मिलेगी। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित होने वाले यूपीआईटीएस के चौथे संस्करण में उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की ओर से हॉल नंबर-6 में पवेलियन लगाया गया है। यहां तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरिंग एवं तकनीकी छात्रों, प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के संकाय सदस्यों, छात्रों और आमजन को विभाग की परियोजनाओं, तकनीकी नवाचारों और पिछले एक दशक की उपलब्धियों से रूबरू कराया जाएगा।

    पिछले साढ़े नौ वर्षों में 19.48 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का हुआ विस्तार
    प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग ने बताया कि पवेलियन में आधुनिक सिंचाई परियोजनाओं के साथ जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण में अपनाई जा रही तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। विजटर्स को लाइव इंजीनियरिंग मॉडल के माध्यम से प्रमुख परियोजनाओं की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिलेगा। इनमें बाणसागर नहर परियोजना, पहाड़ी बांध परियोजना, अर्जुन सहायक नहर परियोजना, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना सहित अन्य प्रमुख परियोजनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। विभागीय प्रदर्शनी में नहर नेटवर्क और लिफ्ट कैनाल के कार्यात्मक मॉडलों के साथ बांधों और बैराजों की कार्यप्रणाली को ऑडियो-विजुअल माध्यम से समझाया जाएगा। प्रदर्शनी में पिछले साढ़े नौ वर्षों में पूरी की गई प्रमुख, मध्यम और लघु सिंचाई परियोजनाओं की उपलब्धियों को प्रमुखता दी गई है। बाणसागर नहर परियोजना, पहाड़ी बांध परियोजना, अर्जुन सहायक नहर परियोजना, महुआगांव-चिल्ली स्प्रिंकलर सिंचाई परियोजना, लहचुरा बांध परियोजना, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, यूपी वाटर रिस्ट्रक्चरिंग प्रोजेक्ट फेज-2 और जरगो नहर प्रणाली के पुनर्गठन जैसी परियोजनाओं से सिंचाई क्षमता में विस्तार हुआ है। पिछले साढ़े नौ वर्षों में 17.29 लाख हेक्टेयर नया सिंचाई क्षेत्र विकसित हुआ जबकि 2.19 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र को पुनर्स्थापित किया गया। इस तरह कुल 19.48 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का विस्तार/पुनर्स्थापन हुआ और 44.81 लाख किसान परिवार इससे लाभान्वित हुए हैं।

    स्काडा और एआई से किया जा रहा स्मार्ट जल प्रबंधन
    मुख्य अभियंता यांत्रिक उपेंद्र सिंह ने बताया कि पवेलियन में प्रमुख आकर्षण स्मार्ट सिंचाई प्रणाली होगी। विभाग सिंचाई जल के वितरण, नहर संचालन और सरकारी नलकूपों के संचालन में स्काडा, एआई और आईओटी जैसी तकनीकों का उपयोग कर रहा है। 15 प्रमुख बांधों और बैराजों पर स्काडा सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जिसके माध्यम से कंट्रोल रूम से गेटों का इलेक्ट्रॉनिक संचालन और बांध-बैराज से संबंधित रियल-टाइम डेटा ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकता है। केंद्रीयकृत नियंत्रण प्रणाली के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित बैराजों, सरकारी नलकूपों और पंप नहरों की स्थिति की निगरानी और नियंत्रण भी किया जा रहा है। प्रदर्शनी में बाढ़ नियंत्रण के क्षेत्र में अपनाए जा रहे आधुनिक उपाय भी प्रदर्शित होंगे। विभाग के अनुसार तटबंधों के सुदृढ़ीकरण, संवेदनशील स्थलों की निगरानी और प्रभावी बाढ़ प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए कंक्रीट मैट्रेस टेक्नोलॉजी, सिल्ट वेन, बॉटम पैनल्स, शीट पाइल, परमेबल स्ट्रक्चर और टेट्रापॉड जैसी तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है। प्रदेश की गंगा, यमुना, सोलानी, रामगंगा, सुवाओन, खोकरी, मंदाकिनी, केन, बेतवा, बूढ़ी गंगा और टेढ़ी नदियों पर फल्ड प्लेन जोनिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है। इस कार्य में उत्तर प्रदेश को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही नदी के प्रवाह को सुचारु बनाने और तटबंधों पर बाढ़ के दबाव को कम करने के लिए प्रदेश में 58 स्थानों पर ड्रेजिंग का कार्य किया गया है। गंगा, घाघरा, शारदा और रामगंगा जैसी नदियों में ड्रेजिंग के माध्यम से नदी के प्रवाह को व्यवस्थित करने के प्रयास किए गए हैं। महाकुम्भ के दौरान गंगा की तीन धाराओं को ड्रेजिंग के जरिए एक धारा में चैनलाइज किया गया था। वहीं बिजनौर में सेक्टोरल ड्रेजिंग के जरिए गंगा को चैनलाइज कर रिवर ट्रेनिंग का कार्य किया गया।

    'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' पर जोर
    विभाग की ओर से कम पानी वाले क्षेत्रों में जल के अधिकतम उपयोग के लिए प्रेशर इरिगेशन और स्प्रिंकलर आधारित सिंचाई परियोजनाओं को बढ़ावा दिया गया है। हमीरपुर में महुआगांव चिल्ली, महोबा में कुलपहाड़ और ललितपुर में शहजाद बांध स्प्रिंकलर सिंचाई परियोजनाओं का उल्लेख प्रदर्शनी में किया गया है। सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और गोरखपुर में सात प्रेशर सिंचाई प्रणालियां विकसित की गई हैं, जिनसे करीब 4,000 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता और लगभग 15 हजार किसान परिवारों को लाभ मिला है। उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022 के तहत सिंचाई विभाग ने नलकूपों, लिफ्ट नहरों, स्प्रिंकलर और प्रेशर सिंचाई परियोजनाओं, मुख्य नहर प्रणालियों के उपकरणों एवं सेंसरों और कार्यालयों में सौर ऊर्जा के उपयोग की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नहरों के वाटरवेज पर सोलर पावर प्लांट लगाने की संभावनाओं को भी प्रदर्शनी में दिखाया जा रहा है। विभाग की प्रदर्शनी में नहरों की सिल्ट सफाई और अंतिम छोर के किसानों तक सिंचाई जल पहुंचाने की व्यवस्था भी प्रमुखता से प्रदर्शित की जाएगी। नहरों की सिल्ट सफाई का कार्य 27,551 किलोमीटर से बढ़ाकर 55,320 किलोमीटर किया गया है। खरीफ में पानी की पहुंच 9,517 टेल से बढ़कर 10,422 टेल और रबी में 9,376 से बढ़कर 10,932 टेल तक हुई है। इस अवधि में कुल सिंचित क्षेत्र 82.54 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 106.82 लाख हेक्टेयर हुआ है।

  • शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट से पूरे मेरठ तक पहुंचा मामला, अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर होगी कार्रवाई

    शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट से पूरे मेरठ तक पहुंचा मामला, अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर होगी कार्रवाई

     मेरठ
    शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण और आवासीय संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब कार्रवाई पूरे शहर की तरफ बढ़ रही है।

    हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद शासन ने मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के सचिव अर्पित गुप्ता को पद से हटाकर लखनऊ से संबद्ध कर दिया है।

    सचिव का कार्यकाल करीब तीन महीने ही रहा। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई में मेरठ में अवैध निर्माण के मामले में जिस तरह सख्त निर्देश दिए गए, उसी दिन शासन स्तर पर हुई इस कार्रवाई से एमडीए में भी खलबली मच गई है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जोन-ए में एमडीए द्वारा चिन्हित 16,726 ऐसी संपत्तियों को सील करने के आदेश दिए, जिनमें अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई है। कोर्ट ने जोन-बी, सी और डी में भी इसी तरह की संपत्तियों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई नौ दिसंबर को होगी।

    न्यायमूर्ति जेबी पाडीवाला और न्यायमूर्ति के. विश्वनाथन की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई में मेरठ में अवैध निर्माण और अवैध कालोनियों को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा गया। हालांकि, सोमवार की सुनवाई का विस्तृत आदेश अभी अपलोड नहीं हुआ है।

    सेंट्रल मार्केट से शुरू हुआ मामला अब हजारों संपत्तियों तक
    शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल और स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। अदालत के निर्देश पर पहले 44 संपत्तियों में कार्रवाई की गई थी।

    आवास एवं विकास परिषद की ओर से पेश अनुपालन रिपोर्ट में बताया गया कि 44 में से 20 संपत्तियों में पूरी तरह अवैध निर्माण हटाया जा चुका है। शेष 24 संपत्तियों में भी अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद सोमवार की सुनवाई में मामला और व्यापक हो गया। एमडीए के अंतर्गत आने वाले शहर का आधे से अधिक हिस्सा अब चपेट में आयेगा।

    जोन-ए में चिन्हित 16,726 संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में सीलिंग के निर्देश दिए गए। अदालत ने दूसरे जोन में भी ऐसी संपत्तियों की पहचान करने को कहा है। इससे एमडीए के सामने अब बड़े पैमाने पर सर्वे, चिन्हांकन और कार्रवाई की चुनौती खड़ी हो गई है। हजारों संपत्तियों से जुड़े इस मामले में कार्रवाई का असर भवन स्वामियों और व्यापारियों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।

  • निर्माणाधीन जेल परियोजनाओं को मिली रफ्तार, अमेठी और महोबा की जेलें अंतिम चरण में, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर व हापुड़ में तेजी से चल रहा निर्माण कार्य

    निर्माणाधीन जेल परियोजनाओं को मिली रफ्तार, अमेठी और महोबा की जेलें अंतिम चरण में, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर व हापुड़ में तेजी से चल रहा निर्माण कार्य

    लखनऊ
     योगी सरकार प्रदेश की जेल व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और मानवीय बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। बढ़ती बंदी संख्या और जेलों में ओवरक्राउडिंग की समस्या को दूर करने के लिए योगी सरकार ने एक ओर नई जेलों के निर्माण को गति दी है, जिससे जेलों में ओवरक्राउडिंग दर में कमी दर्ज की गई।

    पिछले साढ़े नौ वर्षों में जेलों में ओवरक्राउडिंग दर घटकर 1.03 हुई
    वर्तमान में प्रदेश में कुल 77 कारागार संचालित हैं, जिनमें 7 केंद्रीय कारागार, 2 महिला केंद्रीय कारागार, 64 जिला कारागार, 1 विशेष कारागार, 2 उप कारागार तथा 1 किशोर सदन शामिल है। योगी सरकार के पिछले साढ़े नौ वर्षों में जेल अवसंरचना के विस्तार का ही परिणाम है कि प्रदेश की जेल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2017 में प्रदेश की 70 जेलों की कुल बंदी क्षमता 58,400 थी, जबकि वर्ष 2026 तक यह बढ़कर 77,673 हो गई है। इस अवधि में जेलों में ओवरक्राउडिंग दर भी काफी कम हुई है। वर्ष 2017 में जहां ओवरक्राउडिंग दर 1.77 थी, वह वर्ष 2026 में घटकर 1.03 रह गई है। यह कमी योगी सरकार द्वारा जेलों के विस्तार, नई जेलों के निर्माण और अतिरिक्त क्षमता सृजन के लिए किए गए प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम है। योगी सरकार ने वर्ष 2017 के बाद से अब तक सात नई जेलों का संचालन शुरू किया है। इनमें चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा केंद्रीय कारागार, प्रयागराज, श्रावस्ती तथा पुरानी जिला कारागार बरेली शामिल हैं। इन नई जेलों से कुल 10,495 बंदियों की अतिरिक्त क्षमता विकसित हुई है, जिससे विभिन्न जनपदों की जेलों पर दबाव कम हुआ है।

    योगी सरकार बनाने जा रही 6 और नई जेल
    योगी सरकार छह नई जिला जेलों के निर्माण की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। इनमें कानपुर नगर (2030 क्षमता), औरैया (1056), शाहजहांपुर (1520), ज्ञानपुर-भदोही (574), मुरादाबाद (2000) तथा ललितपुर (552) शामिल हैं। इन छह नई जेलों के निर्माण से प्रदेश में 7,732 अतिरिक्त बंदियों की क्षमता उपलब्ध होगी। इन परियोजनाओं के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसके अलावा प्रदेश में नई निर्माणाधीन जेल परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य चल रहा है। अमेठी और महोबा में बन रही नई जिला जेलों का निर्माण लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अमेठी जेल का कार्य 98 प्रतिशत से अधिक तथा महोबा जेल का कार्य 93 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। इनके अतिरिक्त हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में भी नई जेलों का निर्माण तेजी से जारी है। इन छह निर्माणाधीन जेलों की कुल क्षमता 6,156 बंदियों की होगी। योगी सरकार का लक्ष्य है कि अधिकांश परियोजनाएं वर्ष 2026 तक पूर्ण कर ली जाएं।

    संभल, बलिया और शामली में जेल के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज
    जेल अवसंरचना के विस्तार के साथ-साथ सरकार उन जिलों में भी नई जेलों की स्थापना की तैयारी कर रही है, जहां भूमि क्रय एवं पंजीकरण की प्रक्रिया चल रही है। संभल, शामली, बलिया, सहारनपुर, अमरोहा और चंदौली में प्रस्तावित जेलों के लिए भूमि अधिग्रहण और पंजीकरण की कार्रवाई प्रगति पर है। इनमें से कई परियोजनाओं के लिए शासन स्तर पर करोड़ों रुपये की धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है। मालूम हो कि जेलों में अत्यधिक भीड़ सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और पुनर्वास संबंधी गतिविधियों को प्रभावित करती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने जेलों की क्षमता बढ़ाने को प्राथमिकता दी है। नई जेलों के निर्माण से न केवल बंदियों को बेहतर आवासीय सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि जेल प्रशासन को भी सुरक्षा व्यवस्था और सुधारात्मक कार्यक्रमों के संचालन में सुविधा होगी। योगी सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक बंदी को निर्धारित मानकों के अनुरूप रहने की सुविधा मिले तथा जेलों में भीड़भाड़ के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं को न्यूनतम किया जा सके। इसके लिए नई जेलों का निर्माण, पुराने कारागारों का उन्नयन, अतिरिक्त बैरकों का निर्माण और आधुनिक सुरक्षा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

  • राजस्थान पंचायत चुनाव: आज सरपंच-वार्ड पंच पदों की आरक्षण लॉटरी, गांवों में बढ़ी हलचल

    राजस्थान पंचायत चुनाव: आज सरपंच-वार्ड पंच पदों की आरक्षण लॉटरी, गांवों में बढ़ी हलचल

    जयपुर
    नगरीय निकाय चुनाव के बाद अब पंचायतों में भी आरक्षण की लॉटरी निकलते ही गांवों में सियासी पारा चढ़ गया है। जिला प्रमुख के 41 पदों के बाद बुधवार को जिला मुख्यालयों पर 1403 जिला परिषद सदस्य, 457 प्रधान व 8245 पंचायत समिति सदस्यों के पदों के संबंध में आरक्षण लॉटरी निकाली गई। इसके साथ ही स्पष्ट हो गया कि राजस्थान में 221 महिलाएं प्रधान बनेंगी। इनमें जयपुर-जोधपुर जिलों में संख्या सबसे ज्यादा रही है। 4 जिलों में केवल एसटी कैटेगरी में प्रधान होगा।

    जिला मुख्यालयों पर बुधवार को निकाली गई लॉटरी के आधार पर पंचायत समिति प्रधानों में एससी के 79, एसटी के 93 और ओबीसी के लिए करीब 56 पद आरक्षित किए गए है। जिलेवार जानकारी के अनुसार जयपुर की 22 पंचायत समितियों में 1 महिला प्रधान बन सकेंगी। उदयपुर में 20 पंचायत समितियों में से एक में भी ओबीसी वर्ग का प्रधान नहीं होगा इनके अलावा डूंगरपुर, बांसवाड़ा सलूंबर और प्रतापगढ़ जिलों में केवल एसटी वर्ग से ही प्रधान बनेंगे।

    14 हजार 403 सरंपच चुने जाएंगे
    पंचायती राज संस्थाओं के जिला परिषद, पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत स्तर पर कुल 1.51 लाख से अधिक वार्ड हैं और 14 हजार 403 ग्राम पंचायतों के लिए सरपंचों का चुनाव होगा। पंचायती राज संस्थाओं मैं महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण होने के कारण इन संस्थाओं में 75 हजार से अधिक महिलाओं का चुनाव भी किया जाएग। इनके अलावा 1403 जिला परिषद सदस्य 41 जिलों के लिए जिला प्रमुख और 8245 पंचायत समिति सदस्य 457 प्रधानों का चुनाव करेंगे, जिनमें भी महिला आरक्षण लागू होगा। अनुमान है कि पंचायत चुनाव में 7 लाख से अधिक लोग के लिए सामने आ सकते हैं। जिला प्रमुख पदों का आरक्षण पहले ही तय हो चुका है।

    सरपंच और वार्ड पंचों के पदों की लॉटरी आज
    अब गुरुवार को उपखंड स्तर पर सरपंच और वार्ड पंचों के पदों की लॉटरी निकाली जाएगी। प्रदेश में 41 जिला परिषद और 457 पंचायत समिति और ग्राम पंचायतें 14 हजार से अधिक हैं, जिनके वार्डों की संख्या डेढ़ लाख से ज्यादा है। 41 जिला परिषदों में जिला प्रमुख पदों के लिए ओबीसी के 5, अनुसूचित जाति (एससी) के 8, अनुसूचित जनजाति (एसटी) के 7 प्रतिनिधि चुने जाएंगे, वहीं चूरू, अजमेर, झुंझुनू, चित्तौड़गढ़, हनुमानगढ़, डीग, श्रीगंगानगर, झालावाड़, फलोदी, बीकानेर एवं कोटा में जिला प्रमुख सामान्य महिला श्रेणी से होगा। बारां, बाड़मेर, भीलवाड़ा, जयपुर, जोधपुर, करौली, कोटपूतली-बहरोड़, राजसमंद, सिरोही एवं उदयपुर में भी जिला प्रमुख सामान्य श्रेणी में होंगे। सामान्य श्रेणी के पदों पर आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधि भी चुने जा सकेंगे।

     

  • कचहरी चौराहे पर बुलडोजर एक्शन, नोटिस के बाद VDA ने हटाया जायका रेस्टोरेंट का निर्माण

    कचहरी चौराहे पर बुलडोजर एक्शन, नोटिस के बाद VDA ने हटाया जायका रेस्टोरेंट का निर्माण

    वाराणसी
    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में अवैध निर्माण के खिलाफ VDA ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू की है. कैंट थाना क्षेत्र के कचहरी चौराहे पर स्थित जायका रेस्टोरेंट में यह कार्रवाई की जा रही है. VDA ने रेस्टोरेंट के निर्माण को अवैध बताते हुए पहले ही नोटिस जारी किया था.

    जायका रेस्टोरेंट का आरोप है कि नोटिस के बावजूद निर्माण खुद से नहीं हटाया गया. इसके बाद VDA की टीम मौके पर पहुंची और बुलडोजर से कार्रवाई शुरू की.

    कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. VDA की टीम अवैध बताए जा रहे निर्माण को हटाने में जुटी है. पुलिस की मौजूदगी में कार्रवाई की जा रही है. इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है.

    दरअसल, जायका रेस्टोरेंट एक मुस्लिम व्यापारी का बताया जा रहा है. VDA की ओर से पहले ही निर्माण को लेकर नोटिस दिया गया था. नोटिस में निर्माण हटाने के लिए कहा गया था. निर्माण नहीं हटाए जाने के बाद अब प्राधिकरण ने बुलडोजर चलाया है.

    कचहरी से संदहा चौराहे तक होना है चौड़ीकरण
    यह कार्रवाई कचहरी चौराहे के आसपास सड़क चौड़ीकरण की योजना से भी जुड़ी है. कचहरी से संदहा चौराहे तक सड़क का चौड़ीकरण होना है. इसी के तहत रास्ते में आने वाले निर्माण को लेकर कार्रवाई की जा रही है.

    VDA की टीम मौके पर मौजूद है. बुलडोजर की मदद से निर्माण हटाया जा रहा है. कार्रवाई के दौरान किसी तरह की स्थिति न बिगड़े, इसके लिए पुलिस बल तैनात किया गया है.

    फिलहाल मौके पर VDA की कार्रवाई जारी है. प्राधिकरण की ओर से पहले जारी किए गए नोटिस और उसके बाद की कार्रवाई को लेकर टीम निर्माण से जुड़े दस्तावेज भी देख रही है. प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद इलाके में हलचल बढ़ गई है.
     

  • बिहार में चौर विकास योजना के तहत मिलेंगे लाखों रुपये, मत्स्य पालन से आय बढ़ाने का मौका

    बिहार में चौर विकास योजना के तहत मिलेंगे लाखों रुपये, मत्स्य पालन से आय बढ़ाने का मौका

     पटना
     सरकार बेकार पड़ी चौर भूमि को उपयोगी बनाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने की पहल कर रही है। इसी क्रम में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।

    योजना के माध्यम से राज्य में बड़े पैमाने पर उपलब्ध निजी चौर भूमि को मत्स्य आधारित समेकित जलकृषि के लिए विकसित किया जाएगा। चौर संसाधनों में मछली पालन के साथ-साथ कृषि, बागवानी एवं कृषि वानिकी को बढ़ावा दिया जाएगा।

    इसका उद्देश्य चौर भूमि में उपलब्ध जल एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है।

    योजना के तहत एक हेक्टेयर क्षेत्र में दो तालाबों के निर्माण के लिए प्रति हेक्टेयर 8.88 लाख रुपये, चार तालाबों के निर्माण के लिए 7.32 लाख रुपये तथा एक तालाब के निर्माण एवं भूमि विकास के लिए 9.69 लाख रुपये की इकाई लागत निर्धारित की गई है।

    50 प्रतिशत मिलेगा अनुदान
    सभी वर्ग के लाभुकों को इकाई लागत का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। वहीं, उद्यमी आधारित चौर विकास के लिए 40 प्रतिशत अनुदान का प्रविधान किया गया है।

    व्यक्तिगत या समूह लाभुकों को स्व-अभिप्रमाणित दो पासपोर्ट आकार के फोटो, आधार कार्ड, जाति प्रमाण-पत्र तथा समूह में कार्य करने की सहमति से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

    वहीं, उद्यमी लाभुकों को स्व-अभिप्रमाणित निबंधन प्रमाण-पत्र, पिछले तीन वर्षों का अंकेक्षण एवं आयकर रिटर्न, पैन कार्ड, जीएसटी, भू-स्वामित्व प्रमाण-पत्र और लीज एकरारनामा प्रस्तुत करना होगा।

    कहां करे आवेदन?
    मत्स्य प्रशिक्षण प्राप्त लाभुकों तथा मत्स्य आधारित उद्यम का अनुभव रखने वाले आवेदकों को चयन में प्राथमिकता दी जाएगी। योजना के लिए आवेदन मत्स्य निदेशालय की वेबसाइट fisheries.bihar.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

     

  • मोहाली में ED कार्रवाई के खिलाफ AAP का प्रदर्शन, GAMADA ऑफिस पहुंचे कार्यकर्ता

    मोहाली में ED कार्रवाई के खिलाफ AAP का प्रदर्शन, GAMADA ऑफिस पहुंचे कार्यकर्ता

    मोहाली.

    ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) मुख्यालय पर 48 घंटे से चल रही ईडी की रेड के खिलाफ आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने वीरवार को मोर्चा खोल दिया है। आम आदमी पार्टी के समर्थकों और प्रतिनिधियों ने गमाडा मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए कार्यालय का घेराव किया।

    कार्यालय के बाहर खड़ी ईडी की टीम की गाड़ियों के शीशे तोड़े। प्रदर्शनकारियों की पुलिस से धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय का गेट तोड़ा और बड़ी संख्या में अंदर दाखिल हुए।
    प्रदर्शनकारियों ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और गमाडा कार्यालय में चल रही ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी वरुण शर्मा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

    ईडी की कार्रवाई चल रही होने के कारण कार्यालय परिसर में सुरक्षा को लेकर पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। आप समर्थकों ने कहा कि गमाडा कार्यालय में लगातार तीसरे दिन ईडी की कार्रवाई चल रही है। इसे लेकर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। प्रदर्शन के कारण गमाडा कार्यालय के बाहर काफी देर तक माहौल गरमाया रहा। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराने और व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया। पुलिस ने गमाडा ऑफिस के बाहर बैरिकेडिंग बढ़ा दी है। बता दें कि मंगलवार सुबह से ईडी की टीम ने गमाडा मुख्यालय और दो आईएएस अधिकारियों के घरों सहित दिल्ली, मोहाली और लुधियाना में कई ठिकानों पर छापेमारी शुरू की थी। ईडी की टीम ने गमाडा की तीन मंजिलों को सील कर रखा है।

    कैबिनेट मंत्री के घर पर भी रेड
    इसी बीच बुधवार को ईडी ने कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां के रिश्तेदार गुरप्रीत सिंह सैनी के लुधियाना स्थित घर पर भी रेड की थी। आप कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर पंजाब में डर का माहौल बना रही है। 

  • गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन, CM योगी ने दिया भरोसा- सबकी समस्या का होगा समाधान

    गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन, CM योगी ने दिया भरोसा- सबकी समस्या का होगा समाधान

    कब्जामुक्त कराएं जमीन, दबंगों को सिखाएं कानूनी सबक: मुख्यमंत्री

    बारिश के बावजूद सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया जनता दर्शन

    गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री ने करीब 200 लोगों से मुलाकात कर सुनीं समस्याएं

    जनता से बोले सीएम – घबराइए मत, सबकी समस्या का होगा समाधान

    गोरखपुर
     जनता की सेवा को सर्वोपरि रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह बारिश होने के बावजूद ‘जनता दर्शन’ किया। दूरदराज से आए लोगों से उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। समस्या लेकर आए लोगों को मुख्यमंत्री ने समाधान का भरोसा दिया। इस अवसर पर अवैध कब्जे की शिकायतों पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जमीन कब्जामुक्त कराने के साथ जबरन कब्जा करने वालों को कड़ा कानूनी सबक सिखाया जाए। 

    बारिश की वजह से मुख्यमंत्री के निर्देश पर लोगों की सुविधा के लिए जनता दर्शन का आयोजन गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में किया गया। इस दौरान सीएम योगी ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने का निर्देश दिया। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक पहुंचकर मुख्यमंत्री ने उनकी पीड़ा जानी और आश्वस्त किया कि सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और तत्परता से उसका समयबद्ध व पारदर्शी निस्तारण कराएं। 

    इस दौरान कुछ महिलाओं ने उनकी जमीन जबरन कब्जा कर लिए जाने की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी दबंग ने किसी गरीब की जमीन हड़पी है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। जमीन अवैध या जबरन कब्जे से मुक्त होनी चाहिए। 

    हर बार की तरह जनता दर्शन में कुछ लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। ऐसे मामलों में सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के एस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी।

  • पितृ पक्ष में संगम पर ऑनलाइन पिंडदान, पुरोहित ने बताया पीले कपड़ों का महत्व

    पितृ पक्ष में संगम पर ऑनलाइन पिंडदान, पुरोहित ने बताया पीले कपड़ों का महत्व

     प्रयागराज

    पितृ पक्ष के दिन पास आने के साथ ही संगम नगरी प्रयागराज में पितरों के तर्पण और पिंडदान को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग प्रयागराज पहुंचते हैं. इस बार भी पितृ पक्ष के दौरान संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है. खास बात यह है कि जो लोग किसी कारणवश प्रयागराज नहीं पहुंच पा रहे हैं, उनके लिए ऑनलाइन पिंडदान की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। 

    इस बार पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक रहेगा. इस दौरान अपने पितरों के निमित्त लोग प्रयागराज पहुंचकर भी तर्पण और पिंडदान करते हैं. श्रद्धालुओं के लिए यह समय अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और धार्मिक आस्था व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है. तीर्थ पुरोहितों के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान देश-विदेश से लोग अपने पितरों को मोक्ष दिलाने और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रयागराज पहुंचते हैं. संगम पर पिंडदान और तर्पण करने के बाद श्रद्धालु आगे की धार्मिक यात्रा भी पूरी करते हैं। 

    प्रदीप पांडे तीर्थ पुरोहित, प्रयागराज बताते हैं कि धार्मिक मान्यता के अनुसार पिंडदान की परंपरा में प्रयागराज, काशी और गया का विशेष महत्व बताया जाता है. लोग प्रयागराज से इसकी शुरुआत करते हैं, इसके बाद काशी होते हुए गया पहुंचकर पिंडदान की प्रक्रिया को पूरा करते हैं. इसी वजह से पितृ पक्ष के दौरान प्रयागराज में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है. संगम क्षेत्र में पितृ पक्ष के दौरान सुबह से ही श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करते नजर आते हैं. जैसे-जैसे पितृ पक्ष आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे संगम क्षेत्र में लोगों की संख्या भी बढ़ने लगेगी। 

    अमेरिका से 28 सितंबर को होगा पिंडदान
    प्रदीप पांडे बताते हैं कि इस बार पितृ पक्ष के दौरान विदेश में बैठे लोग भी प्रयागराज की धार्मिक परंपरा से जुड़ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक अमेरिका से एक श्रद्धालु 28 सितंबर को प्रयागराज में पिंडदान करेगा. इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था का सहारा लिया जाएगा. पिछले दो-तीन वर्षों से ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था भी शुरू हुई है. इसका लाभ ऐसे लोग उठा रहे हैं जो किसी कारणवश प्रयागराज नहीं आ पाते. किसी को यात्रा में परेशानी है तो किसी के पास समय या दूसरी तरह की समस्या है. ऐसे में वे ऑनलाइन माध्यम से अपने पितरों के लिए पिंडदान की प्रक्रिया पूरी करा रहे हैं. इस व्यवस्था के जरिए विदेशों में रहने वाले लोगों को भी अपने पितरों के प्रति धार्मिक जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिल रहा है. अमेरिका से 28 सितंबर को होने वाला पिंडदान इसी व्यवस्था का एक उदाहरण है. प्रदीप पांडेय बताते हैं कि ऑनलाइन पिंडदान की सुविधा का इस्तेमाल केवल विदेश में रहने वाले लोग ही नहीं कर रहे हैं. गांव और देहात में रहने वाले ऐसे लोग भी इस व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं, जो किसी कारण से प्रयागराज आने में असमर्थ हैं. कई परिवारों के सामने यात्रा से जुड़ी परेशानी होती है. कुछ लोगों के लिए लंबी दूरी तय करना मुश्किल होता है. ऐसे में ऑनलाइन व्यवस्था उनके लिए अपने पितरों के निमित्त पिंडदान कराने का माध्यम बन रही है। 

    तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि लोगों की आस्था और अपने पितरों के प्रति श्रद्धा आज भी उतनी ही मजबूत है. परिस्थितियां भले बदल गई हों, लेकिन लोग किसी न किसी तरीके से अपने पितरों के लिए धार्मिक कर्मकांड पूरा करना चाहते हैं। 

    युवा पीढ़ी भी निभा रही परंपरा
    प्रदीप पांडे तीर्थ पुरोहित, प्रयागराज बताते हैं कि पितृ पक्ष के दौरान एक और खास बात देखने को मिल रही है. आज की युवा पीढ़ी भी सनातन धर्म की परंपराओं और पितरों से जुड़े कर्मकांडों को लेकर रुचि दिखा रही है. लोग अपने पितरों को मोक्ष दिलाने के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं का सहारा ले रहे हैं. जो संगम तक पहुंच सकते हैं, वे स्वयं आकर पिंडदान और तर्पण करते हैं और जो नहीं आ सकते, वे ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए इससे जुड़ रहे हैं. तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक यह बात महत्वपूर्ण है कि आधुनिक दौर में भी युवा अपने परिवार और पूर्वजों से जुड़ी परंपराओं को निभाने के लिए आगे आ रहे हैं। 

    पीले वस्त्रों में नजर आएंगे श्रद्धालु
    प्रदीप पांडे के मुताबिक पितृ पक्ष के दौरान संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की वेशभूषा भी अलग दिखाई देती है. पितरों के निमित्त पिंडदान और तर्पण करने के लिए आने वाले कई श्रद्धालु पीले वस्त्र पहनकर आते हैं. जिस तरह भगवा रंग की अपनी अलग धार्मिक पहचान है, उसी तरह पितृ पक्ष के दौरान पीले वस्त्र पहनकर आने की परंपरा भी श्रद्धालुओं के बीच देखने को मिलती है. संगम क्षेत्र में पितृ पक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोग पीले वस्त्रों में दिखाई देंगे. तीर्थ पुरोहितों के अनुसार जो श्रद्धालु इस परंपरा का पालन करते हैं, वे पिंडदान के दौरान निर्धारित वेशभूषा का भी ध्यान रखते हैं. यही वजह है कि पितृ पक्ष में संगम क्षेत्र का दृश्य सामान्य दिनों से काफी अलग नजर आता है। 

    26 सितंबर के बाद बढ़ेगी श्रद्धालुओं की संख्या
    पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ ही प्रयागराज में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला तेज हो रहा है. अभी से लोग धीरे-धीरे पहुंचने लगे हैं. माना जा रहा है कि 26 सितंबर के बाद संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाएगी. पितरों के प्रति श्रद्धा रखने वाले परिवार देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रयागराज पहुंचेंगे. कोई अपने माता-पिता के लिए पिंडदान करेगा तो कोई अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करेगा. संगम की धरती पर पितरों के निमित्त होने वाले इन धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहित भी श्रद्धालुओं को विधि-विधान से कर्मकांड कराने में जुटेंगे। 

  • NEET-UG 2026 काउंसलिंग में शामिल होंगे 3 अभ्यर्थी, हाईकोर्ट ने PwBD अयोग्यता का फैसला रद्द किया

    NEET-UG 2026 काउंसलिंग में शामिल होंगे 3 अभ्यर्थी, हाईकोर्ट ने PwBD अयोग्यता का फैसला रद्द किया

    लखनऊ
    इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दिव्यांग अभ्यर्थियों के एमबीबीएस प्रवेश से संबंधित एक मामले में दिशा स्पष्ट की है। कहा कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र में दर्ज दिव्यांगता के प्रतिशत को एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) के मेडिकल असेसमेंट बोर्ड द्वारा दोबारा निर्धारित नहीं किया जा सकता। बोर्ड को सिर्फ इतना जांचने का अधिकार है कि अभ्यर्थी उचित सुविधा और सहायक तकनीक के साथ एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने में सक्षम है अथवा नहीं।

    न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने शुभम मिश्रा, सौरभ राणा और गुलफाम अहमद की ओर से दाखिल तीन अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवायी करते हुए, यह निर्णय दिया है। न्यायालय ने मेडिकल असेसमेंट बोर्ड और अपीलीय मेडिकल असेसमेंट बोर्ड द्वारा जारी उन निष्कर्षों को रद्द कर दिया, जिनमें अभ्यर्थियों को पीडब्ल्यूबीडी (पर्सन विद बेंचमार्क डिसबिल्टीज) आरक्षण के लिए अयोग्य बताया गया था। न्यायालय ने याचियों को नीट-यूजी 2026 की शेष काउंसलिंग में पीडब्ल्यूबीडी आरक्षित श्रेणी के योग्य अभ्यर्थी के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया है।

    याची शुभम मिश्रा को मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सुलतानपुर ने 45 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता का प्रमाण पत्र जारी किया था। हालांकि, मेडिकल असेसमेंट बोर्ड ने 11 अगस्त 2026 के प्रमाण पत्र में उनकी दिव्यांगता को 45 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया और उन्हें पीडब्ल्यूबीडी आरक्षण के लिए अयोग्य बताया। अपीलीय मेडिकल बोर्ड ने भी असेसमेंट बोर्ड के फैसले को बरकरार रखा।

    दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत सभी के लिए बाध्यकारी
    इसी प्रकार अन्य याचियों सौरभ राणा व गुलफाम अहमद के दिव्यांगता प्रतिशत को घटा दिया गया। अपने निर्णय में कोर्ट कहा कि आरपीडब्ल्यूडी एक्ट की धारा 57 के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी और वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र, जब तक सक्षम न्यायिक या वैधानिक मंच द्वारा निरस्त नहीं किया जाता, उसमें दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत सभी के लिए बाध्यकारी है। कहा कि मेडिकल बोर्ड को यह देखना है कि अभ्यर्थी अपनी प्रमाणित दिव्यांगता के बावजूद उचित सुविधा और सहायक तकनीक के साथ एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने में सक्षम है या नहीं लेकिन यह प्रक्रिया दिव्यांगता के प्रतिशत को दोबारा तय करने के लिए नहीं है।