Category: हरियाणा

  • क्लर्क बनने के लिए कंप्यूटर परीक्षा जरूरी, फेल होने पर रुकेगी वेतन वृद्धि और पदोन्नति

    क्लर्क बनने के लिए कंप्यूटर परीक्षा जरूरी, फेल होने पर रुकेगी वेतन वृद्धि और पदोन्नति

     चंडीगढ़

    हरियाणा में लिपिक के 30 प्रतिशत पदों पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पदोन्नत होंगे। 65 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। पांच प्रतिशत पद अनुकंपा नियुक्ति के लिए रखे गए हैं। जरूरत पड़ने पर ट्रांसफर या डेपुटेशन का भी विकल्प रखा गया है। प्रदेश सरकार ने बदले नियम लागू कर दिये हैं।

    जो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लिपिक बनना चाहते हैं, उन्हें कम से कम 10+2 पास होना जरूरी रहेगा। ग्रुप-डी में न्यूनतम पांच साल सेवा जरूरी है। 70 प्रतिशत या उससे अधिक वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट अच्छी या बहुत अच्छी होनी चाहिए। कोई विभागीय या न्यायिक मामला लंबित न हो। न ही कोई प्रतिकूल टिप्पणी हो।

    लिपिकों की भर्ती, प्रमोशन, सेवा शर्तें, वरिष्ठता, प्रोबेशन और कंप्यूटर योग्यता एक समान नियमों के तहत तय होंगी। विभागों में नियुक्त होने वाले सभी लिपिक कामन काडर का हिस्सा होंगे। इसमें केवल नई नियमित नियुक्तियां शामिल होंगी। पहले से कार्यरत लिपिकों पर यह कानून लागू

    विभागों में नियुक्त होने वाले सभी लिपिक कॉमन काडर का हिस्सा होंगे, पहले से कार्यरत लिपिकों पर नया कानून लागू नहीं होगा। संवैधानिक संस्थाएं, राजभवन और कानून लागू होने से पहले नियुक्त कर्मचारी भी इससे बाहर रहेंगे।

    अब क्लर्क-कम-टाइपिस्ट, टाइपिस्ट, डाटा एंट्री आपरेटर, कंप्यूटर आपरेटर, डिस्पेचर, रिकार्ड कीपर, कैशियर, केयर टेकर, स्टोर कीपर और पीबीएक्स क्लर्क जैसे पद भी लिपिक की श्रेणी में शामिल होंगे। कंप्यूटर ज्ञान एवं अनुप्रयोग की राज्य पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य है।

    परीक्षा दो हिस्सों में होगी। पहले पार्ट में बेसिक कंप्यूटर नॉलेज टेस्ट और दूसरे पार्ट में कंप्यूटर आधारित टाइपिंग टेस्ट होगा। दोनों टेस्ट पास नहीं किए तो वार्षिक वेतन वृद्धि और पदोन्नति नहीं मिलेगी। सीधी भर्ती के लिए न्यूनतम उम्र 18 और अधिकतम उम्र 42 वर्ष तय की गई है।

  • धरती को हरा-भरा रखने में पक्षियों का कमाल, जलवायु परिवर्तन की चुनौती से ऐसे कर रहे मुकाबला

    धरती को हरा-भरा रखने में पक्षियों का कमाल, जलवायु परिवर्तन की चुनौती से ऐसे कर रहे मुकाबला

    झज्जर/चंडीगढ़.

    भोर की पहली किरण के साथ चहकने वाले पक्षी केवल आकाश की सुदंरता नहीं हैं, बल्कि ये धरती के वे मूक और सच्चे ''इकोसिस्टम इंजीनियर्स'' हैं, जो बिना किसी वेतन या स्वार्थ के ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर जंग लड़ रहे हैं।
    जब ये पंख वाले संरक्षक उड़ते हैं, तो अपने साथ जीवन का बीजारोपण करते हैं, बंजर हो चुकी जमीनों को घने वनों में तब्दील कर देते हैं, कीटों से जंगलों की रक्षा करते हैं और वनस्पतियों को नया जीवनदान देते हैं।

    पर्यावरणविद एवं डीएफओ सुंदर सांभरिया बताते है जब तक हम इन मूक बागवानों के आशियानों, शाखाओं और उनकी आर्द्रभूमियों को महफूज नहीं करते, तब तक ''क्लाइमेट एक्शन'' का हमारा हर संकल्प अधूरा रहेगा। दिवस विशेष की पावन वेला में इन बेजुबान संरक्षकों को बचाने का विचार ही हमारे सुरक्षित और हरे-भरे कल की असली नींव है। क्योंकि, वे सीधे तौर पर 'प्रकृति से प्रेरित' समाधानों को धरातल पर उतारते हैं।

    प्राकृतिक बीजारोपण और वनों का पुनर्जीवन
    जलवायु परिवर्तन से लड़ने का सबसे प्रभावी तरीका कार्बन को सोखना है, और इसमें पक्षी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसे विज्ञान में ''एंडोजूकोरी'' कहा जाता है। कार्बन सोखने वाले विशाल पेड़ों का रोपण: बड़े आकार के पक्षी (जैसे हार्नबिल या टूकेन) घने और भारी कार्बन सोखने वाले पेड़ों के फल खाते हैं। जब ये पक्षी उड़ते हैं, तो दूर-दराज के बंजर क्षेत्रों या कटे हुए जंगलों में बीजों को मल के रूप में छोड़ देते हैं। प्राकृतिक खाद और त्वरित अंकुरण: जब कोई बीज पक्षी के पाचन तंत्र से गुजरता है, तो उसके पेट के एंजाइम बीज की कठोर बाहरी परत को हल्का कर देते हैं। इससे वह बीज सामान्य से अधिक तेजी से अंकुरित होता है। साथ ही, पक्षियों की बीट प्राकृतिक नाइट्रोजन युक्त खाद का काम करती है, जिससे पौधों को शुरुआती पोषण मिलता है। वनस्पतियों का जीवन चक्र: पक्षियों द्वारा होने वाले परागण को विज्ञान की भाषा में ''आर्निथोफिली'' कहा जाता है।

    जैव विविधता का संरक्षण:
    हमिंगबर्ड, सनबर्ड और हनीईटर जैसे पक्षी जब फूलों का रस चूसते हैं, तो परागकण उनकी चोंच और पंखों पर चिपक जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार विश्व की लगभग 15% से 25% जंगली पौधों की प्रजातियां पूरी तरह से पक्षियों द्वारा होने वाले परागण पर निर्भर हैं। यदि ये पक्षी न हों, तो जलवायु परिवर्तन के इस दौर में कई दुर्लभ औषधीय और जंगली वनस्पतियां हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएंगी। जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान बढ़ने से हानिकारक कीड़ों और महामारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। पक्षी इस संतुलन को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक रक्षक का कार्य करते हैं।

    लाखों टन कीड़ों का खात्मा:

    दुनिया भर के कीटभक्षी पक्षी (जैसे स्वैलो, ब्लू बर्ड और गौरैया) मिलकर हर साल 40 से 50 करोड़ टन कीड़े खाते हैं। वनों और फसलों की सुरक्षा: पक्षी पेड़ों की पत्तियों को चट करने वाले कैटरपिलर और टिड्डियों को खाकर वनों को नष्ट होने से बचाते हैं। यदि पक्षी इन कीड़ों को न खाएं, तो घने जंगल समय से पहले ही सूख जाएंगे, जिससे पृथ्वी की कार्बन सोखने की क्षमता आधी रह जाएगी।

    संक्रमण और ग्रीनहाउस गैसों पर लगाम:

    मृत जीवों के अवशेषों को खाकर ये पक्षी पर्यावरण में रैबीज, एन्थ्रेक्स जैसी जानलेवा बीमारियों को फैलने से रोकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मृत जानवर खुले में सड़ते हैं, तो उनसे बड़ी मात्रा में मीथेन और अन्य हानिकारक गैसें निकलती हैं, लेकिन ये पक्षी उन्हें खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं।

    जलवायु परिवर्तन के जैविक संकेतक:

    पक्षी पर्यावरण में आ रहे बदलावों को सबसे पहले भांपने की क्षमता रखते हैं। तापमान में मामूली वृद्धि होने पर भी पक्षियों के प्रवास और उनके व्यवहार में तुरंत बदलाव देखा जाता है। वैज्ञानिक पक्षियों की घटती-बढ़ती आबादी को देखकर यह सटीक अनुमान लगाते हैं कि कौन सा पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में है, जिससे समय रहते ''क्लाइमेट एक्शन'' लिया जा सके।

  • पंचकूला में सुरक्षा अलर्ट, निगम कार्यालय और धार्मिक स्थलों को बम धमाके की धमकी मिली

    पंचकूला में सुरक्षा अलर्ट, निगम कार्यालय और धार्मिक स्थलों को बम धमाके की धमकी मिली

    चंडीगढ़.

    सेशन जज की आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक ईमेल प्राप्त हुआ जिसमें अदालत परिसर को उड़ाने की धमकी दी गई थी। हरियाणा पुलिस ने बताया कि सोमवार को सत्र न्यायाधीश की आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक ईमेल प्राप्त होने के बाद पंचकुला जिला अदालत में दहशत फैल गई, जिसमें अदालत परिसर को उड़ाने की धमकी दी गई थी। इसके चलते अदालत को खाली कराया गया और तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला।

    पुलिस ने बताया कि अलर्ट मिलने के बाद पंचकुला पुलिस और जिला प्रशासन हरकत में आए और संभावित खतरे को खत्म करने के लिए तुरंत मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए और अदालत परिसर को अस्थायी रूप से खाली करा दिया। पुलिस ने बताया कि बम निरोधक दस्ते, खोजी कुत्तों और विशेष पुलिस टीमों को घटनास्थल पर भेजा गया और उन्होंने मिलकर अदालत परिसर में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। पंचकुला के सहायक पुलिस आयुक्त दिनेश कुमार ने कहा, “अदालत परिसर और आसपास के इलाके की गहन तलाशी में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। यह एक अफवाह थी।” सुरक्षा जांच के बाद स्थिति को पूरी तरह से सुरक्षित और नियंत्रण में घोषित कर दिया गया, लेकिन पुलिस ने अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया।

    प्रवेश और निकास बिंदुओं पर अतिरिक्त कर्मियों को तैनात किया और सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुसार निगरानी बढ़ा दी, पुलिस सूत्रों ने बताया। पंचकुला की डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने कहा, “धमकी मिलते ही स्थापित सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार तत्काल कार्रवाई की गई। पूरे कोर्ट परिसर की गहन जांच की गई है और स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है। साइबर सेल ईमेल का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। हम जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने का आग्रह करते हैं।” साइबर सेल ने ईमेल के स्रोत का पता लगाने और उसके तकनीकी पहलुओं की जांच करने के लिए जांच शुरू कर दी है। पुलिस और जिला अधिकारी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं, वहीं अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जिले में कानून व्यवस्था सामान्य बनी हुई है।

    हेडक्वार्टर में सुरक्षा जांच
    इस बीच, पंचकुला जिला अदालत को मिली बम की धमकी के मद्देनजर, सोमवार दोपहर को चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय परिसर में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और चंडीगढ़ पुलिस की टीमों द्वारा गहन सुरक्षा जांच की गई। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह कार्रवाई "एहतियाती उपाय" के रूप में की गई थी, खासकर हाल ही में हुई कई घटनाओं को देखते हुए जिनमें चंडीगढ़ और आसपास के इलाकों में स्कूलों और अदालत परिसरों को धमकी भरे ईमेल भेजे गए थे। उच्च न्यायालय परिसर की गहन और व्यवस्थित तलाशी के लिए खोजी दल और बम निरोधक दल सहित विशेष टीमों को तैनात किया गया था। अभियान के दौरान सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं पर कड़ी निगरानी रखी गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली।

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    शुक्रवार को अंबाला कोर्ट परिसर में बम की धमकी वाला ईमेल मिलने के बाद तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। हाल के हफ्तों में, चंडीगढ़ के कई स्कूलों के अलावा पंजाब के अमृतसर, जालंधर और पटियाला और हरियाणा के अंबाला में भी इसी तरह की बम की धमकियां मिली हैं, जो बाद में झूठी साबित हुईं।

  • हरियाणा भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन, डॉ. अर्चना गुप्ता बनीं नई प्रदेश अध्यक्ष

    हरियाणा भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन, डॉ. अर्चना गुप्ता बनीं नई प्रदेश अध्यक्ष

    पंचकूला.

    भारतीय जनता पार्टी हरियाणा की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता आज पंचकूला स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय पंचकमल पहुंचीं, जहां उन्होंने भव्य समारोह के बीच अपने पद का औपचारिक कार्यभार ग्रहण किया। कार्यक्रम में प्रदेशभर से भाजपा कार्यकर्ता, पदाधिकारी और वरिष्ठ नेता बड़ी संख्या में पहुंचे।

    समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं भाजपा हरियाणा के प्रदेश प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया, प्रदेश सह प्रभारी सुरेन्द्र नागर, प्रदेश संगठन महामंत्री फणीन्द्रनाथ शर्मा, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी भी समारोह में मौजूद रहे। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा और रेखा शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। भाजपा हरियाणा के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली भी मंच पर उपस्थित रहे।

    भाजपा नेतृत्व के अनुसार, डॉ. अर्चना गुप्ता के नेतृत्व में संगठन की नई पारी की शुरुआत हो रही है, जिसे आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी का मानना है कि उनके कार्यभार ग्रहण करने के साथ संगठन को नई दिशा और गति मिलेगी। पंचकमल परिसर में सुबह से ही कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने को मिला और पूरे कार्यक्रम को भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक आयोजन के रूप में देखा जा रहा है।

  • NCR में अवैध बस्ती पर बड़ी कार्रवाई, 10 हजार मकानों वाले इलाके में पहुंचा बुलडोजर दस्ता

    NCR में अवैध बस्ती पर बड़ी कार्रवाई, 10 हजार मकानों वाले इलाके में पहुंचा बुलडोजर दस्ता

    फरीदाबाद

    फरीदाबाद की सघन बस्ती नेहरू कॉलोनी में बड़ा बुलडोजर ऐक्शन बुधवार सुबह शुरू हो गया। नगर निगम ने दल-बल के साथ अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। 6 जेसीबी और एक बड़ी मशीन की मदद से मकानों को हटाया जा रहा है। उधर, प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास की मांग उठाते हुए कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों की ओर से अभी यह जानकारी नहीं दी गई है कि कुल कितने मकानों को तोड़ा जाएगा।

    चारों ओर से रास्ते बंद, लोगों की आवाजाही प्रभावित
    बुधवार सुबह करीब सात बजे शुरू हुई कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने नेहरू कॉलोनी की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों को बंद कर दिया। मेट्रो रोड, सैनिक कॉलोनी, बिजली दफ्तर मार्ग, मुल्ला होटल क्षेत्र और तारण नंबर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। रास्ते बंद होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ दफ्तर जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों को लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा।

    छह जेसीबी और बड़ी मशीन से हटाए जा रहे निर्माण
    नगर निगम की टीम ने भारी मशीनरी के साथ अभियान चलाया। मौके पर छह जेसीबी और एक बड़ी तोड़फोड़ मशीन लगाई गई है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माणों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। कार्रवाई के दौरान निगम अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी रही। किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की है।

    वर्षों से बसी कॉलोनी, हजारों परिवारों पर असर
    नेहरू कॉलोनी पुनर्वास विभाग की भूमि पर विकसित हुई बस्ती मानी जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां करीब दस हजार मकान बने हुए हैं और लगभग पांच लाख लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र से जुड़े हैं। कॉलोनी में वर्षों से परिवार रह रहे हैं। पिछले वर्ष पुनर्वास विभाग की ओर से निवासियों को नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि नोटिस के बाद आगे कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी। एक वर्ष बाद अब नगर निगम ने दोबारा अभियान शुरू किया है, जिससे बड़ी संख्या में परिवारों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश और निगम की दलील
    नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। अदालत ने सड़कों, सार्वजनिक भूमि और ग्रीन बेल्ट पर बने अवैध निर्माणों को हटाने के निर्देश दिए हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। निगम का यह भी कहना है कि क्षेत्र में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए भूमि को खाली कराना आवश्यक है। इसी आधार पर अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार की जा रही है।

    पुनर्वास की मांग पर उठे सवाल
    प्रभावित लोगों का कहना है कि इससे पहले इलाके में बने धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई हो चुकी है और संबंधित भूमि को भी खाली कराया जा चुका है। उनका सवाल है कि अब आवासीय मकानों को तोड़ने से पहले पुनर्वास की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। लोगों का कहना है कि वे वैकल्पिक व्यवस्था मिलने पर मकान खाली करने को तैयार हैं। मंगलवार को प्रभावित परिवारों का प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से भी मिला था और पुनर्वास की मांग रखी थी। निवासियों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की भावना के अनुरूप विस्थापित परिवारों के पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

  • पंचकूला में चल रहा था इंटरनेशनल फ्रॉड रैकेट, फर्जी कॉल सेंटर से 21 गिरफ्तार

    पंचकूला में चल रहा था इंटरनेशनल फ्रॉड रैकेट, फर्जी कॉल सेंटर से 21 गिरफ्तार

    पंचकूला.

    पंचकूला साइबर थाना पुलिस ने सेक्टर-2 मार्केट स्थित एक कार्यालय में छापेमारी कर अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान 21 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

    पुलिस के अनुसार गुप्त सूचना मिली थी कि सेक्टर-2 मार्केट में स्थित एक कार्यालय से विदेशी नागरिकों, विशेषकर अमेरिका के लोगों को निशाना बनाकर साइबर ठगी की जा रही है। सूचना के आधार पर सोमवार देर रात साइबर थाना टीम ने छापा मारा। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने नवदीप, अक्षय टिक्कू, रजा और अंकुर कपूर को मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया। मौके से 19 कंप्यूटर, 3 लैपटॉप, 11.30 लाख रुपये नकद, 3 वॉकी-टॉकी, 16 हेडसेट, 2 वाई-फाई राउटर, एक नोट गिनने की मशीन, 3 पीओएस मशीनें और सोने के आभूषण बरामद किए गए हैं।

    प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया?
    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को अमेजन कस्टमर केयर अधिकारी बताकर अमेरिकी नागरिकों को फोन करते थे। बातचीत के दौरान वे लोगों को विभिन्न बहानों में उलझाकर उनके क्रेडिट कार्ड और बैंक खातों से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करते थे और बाद में खातों से रकम निकाल लेते थे। पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि कॉल सेंटर का संचालन अमेरिकी समय के अनुसार किया जाता था। कार्यालय शाम करीब 7 बजे खुलता था और रात 3 बजे तक गतिविधियां चलती थीं।

    पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क ने अब तक कितने विदेशी नागरिकों को ठगी का शिकार बनाया और धोखाधड़ी की कुल रकम कितनी है। मामले में अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

  • सोनीपत: फैक्ट्रियों को लगाना होगा मॉनिटरिंग सिस्टम, पानी के ट्रीटमेंट पर रहेगी 24×7 नजर

    सोनीपत: फैक्ट्रियों को लगाना होगा मॉनिटरिंग सिस्टम, पानी के ट्रीटमेंट पर रहेगी 24×7 नजर

    सोनीपत.

    ड्रेन के जरिए यमुना नदी में जा रहे दूषित पानी को रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने उन फैक्ट्रियों की पहचान की हैं, जो अपने शोधित न किए गए (अनट्रीटेड) दूषित पानी को सीधे ड्रेन में बहा रही हैं। इस क्रम में जिले की ऐसी 422 फैक्ट्रियों को चिह्नित है, जिनमें अब चौबीसों घंटे निगरानी रखने के लिए निगरानी यंत्र (माॅनिटरिंग डिवाइस) अनिवार्य कर दिए गए हैं।

    प्रदूषित पानी ड्रेन में न गिरे
    यमुना में लगातार गिर रहे दूषित पानी के कारण नदी का जल स्तर और उसकी शुद्धता प्रभावित हो रही है। यमुना में जा रहे दूषित पानी को रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कमर कस ली है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सूरत में फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी बिना शोधित (ट्रीट) किए ड्रेन में नहीं गिरना चाहिए। इस व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने संयंत्रों पर ऑनलाइन रियल टाइम माॅनिटरिंग सिस्टम लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं।

    निगरानी यंत्र लगाएंगी फैक्ट्रियां
    बोर्ड की इस कार्रवाई से उन उद्योगपतियों में हड़कंप है जो अब तक नियमों को ताक पर रखकर दूषित पानी को बिना शोधित किए पास कर रहे थे। यह दूषित पानी ड्रेन छह के माध्यम से ड्रेन आठ में मिलकर सीधे यमुना में गिर रहा था। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये फैक्ट्रियां समय सीमा के भीतर यंत्र लगाती हैं या नहीं। बोर्ड के अधिकारियों ने कहा है कि जो फैक्ट्रियां निगरानी यंत्र नहीं लगाएंगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    क्या होगा माॅनिटरिंग सिस्टम का काम?
    इन निगरानी यंत्रों के जरिए फैक्ट्री से निकलने वाले पानी के मानकों की जानकारी सीधे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर पर उपलब्ध रहेंगी। यदि कोई फैक्ट्री मानक से अधिक प्रदूषित पानी छोड़ती हैं तो इसका तत्काल पता चल जाएगा। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीक मानवीय हस्तक्षेप को खत्म करेगी और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।

    गठित की जाएंगी विशेष निगरानी टीम
    सिर्फ मशीनों के भरोसे न रहकर, बोर्ड अब धरातल पर भी अपनी पकड़ मजबूत करेगा। इसके लिए अलग से विशेष टीमों का गठन किया जा रहा है। ये टीमें औचक निरीक्षण करेंगी और यह जांचेंगी कि क्या फैक्ट्री संचालक वास्तव में मानकों का पालन कर रहे हैं या फिर मानिटरिंग सिस्टम के साथ कोई छेड़छाड़ की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन नहीं बनाया गया, तो इसके परिणाम घातक होंगे।

    दूषित पानी बर्दाश्त नहीं
    "दूषित पानी को बिना शोधित किए बाईपास करना अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिले में 422 फैक्ट्रियां चिह्नित की गई हैं, जिनमें निगरानी यंत्र लगवाने के निर्देश दिए हैं। जो फैक्ट्री संचालक नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।"
    – अजय मलिक, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सोनीपत।

  • हरियाणा में जागरूकता का असर, बाल विवाह में कमी और महिलाओं की डिजिटल भागीदारी में बढ़ोतरी

    हरियाणा में जागरूकता का असर, बाल विवाह में कमी और महिलाओं की डिजिटल भागीदारी में बढ़ोतरी

    रोहतक.

    राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6, 2023-24) की ताजा रिपोर्ट ने प्रदेश की सामाजिक तस्वीर में कई बड़े बदलावों को उजागर किया है। जहां एक ओर महिलाओं की शिक्षा, इंटरनेट उपयोग और आर्थिक भागीदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, वहीं परिवार नियोजन के तरीकों में तेजी से बदलाव देखने को मिला है।

    आंकड़े बताते हैं कि अब हर चार में से लगभग तीन महिलाएं इंटरनेट का इस्तेमाल कर चुकी हैं। यह आंकड़ा 2019-21 में केवल 48.4 प्रतिशत था। यानी तीन साल में महिलाओं की डिजिटल पहुंच में करीब 26 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी हुई है।
    आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि हरियाणा बदलाव के दौर से गुजर रहा है और आने वाले वर्षों में इन संकेतकों पर सरकार की नीतियों का असर और अधिक स्पष्ट दिखाई देगा। रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश अब केवल कृषि और उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के मामले में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिलाओं ने पिछले तीन वर्षों में ऐसी डिजिटल छलांग लगाई है, जिसने राज्य की सामाजिक तस्वीर बदल दी है। 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 74 प्रतिशत महिलाएं अब इंटरनेट उपयोग कर रही हैं। मोबाइल फोन का स्वयं इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। विशेष तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं की डिजिटल पहुंच तेजी से बढ़ी है। एनएफएचएस-5 में जहां यह आंकड़ा 50.4 प्रतिशत था, वहीं अब बढ़कर 64.9 प्रतिशत हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन, आनलाइन सेवाओं और डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग ने महिलाओं को अधिक आत्मनिर्भर बनाया है।

    शिक्षा में भी दिखा बड़ा सुधार
    शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य ने प्रगति दर्ज की है। 10 या उससे अधिक वर्ष की स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाओं का प्रतिशत 49.5 से बढ़कर 55.2 हो गया है। पुरुषों में यह आंकड़ा 62.2 प्रतिशत से बढ़कर 64.4 प्रतिशत तक पहुंचा है। महिलाओं के स्कूल जाने की दर में भी सुधार देखने को मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और डिजिटल पहुंच में बढ़ोतरी आने वाले वर्षों में रोजगार और सामाजिक भागीदारी को और मजबूत करेगी।

    आर्थिक रूप से मजबूत हुई महिलाएं
    आर्थिक सशक्तिकरण के मोर्चे पर भी महिलाओं की स्थिति बेहतर हुई है। पिछले 12 महीनों में नकद भुगतान के साथ कार्य करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 18.8 से बढ़कर 25.1 हो गया है। वहीं स्वयं उपयोग करने वाले बैंक खातों वाली महिलाओं की संख्या 73.6 प्रतिशत से बढ़कर 85.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है। घर या जमीन में महिलाओं की हिस्सेदारी भी 11.8 प्रतिशत से बढ़कर 14.7 प्रतिशत दर्ज की गई है।

    कम हो रही बाल विवाह की समस्या
    हरियाणा में बाल विवाह के मामलों में भी गिरावट दर्ज हुई है। रिपोर्ट में परिवार और समाज से जुड़े संकेतकों में भी बदलाव दिखाई देता है। 18 वर्ष से पहले विवाह करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 12.5 से घटकर 11.9 प्रतिशत रह गया है। वहीं 21 वर्ष से पहले विवाह करने वाले पुरुषों का प्रतिशत 16 से घटकर 13.3 प्रतिशत हो गया है। इससे स्पष्ट है कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों पर धीरे-धीरे नियंत्रण हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं की घरेलू निर्णयों में भागीदारी 87.5 प्रतिशत से बढ़कर 91.1 प्रतिशत हो गई है। घर की खरीदारी, स्वास्थ्य और पारिवारिक निर्णयों में महिलाओं की भूमिका पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में हरियाणा की उपलब्धियां उल्लेखनीय रही हैं। गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार प्रसवपूर्व जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 60.9 से बढ़कर 79 प्रतिशत हो गया है। परिवार नियोजन के क्षेत्र में भी नया रुझान देखने को मिला है। महिला नसबंदी का प्रतिशत घटकर 28.5 रह गया है, जबकि पारंपरिक गर्भनिरोधक तरीकों का उपयोग बढ़कर 21.4 प्रतिशत हो गया है। इससे संकेत मिलता है कि परिवार नियोजन के प्रति लोगों की पसंद और व्यवहार में बदलाव आ रहा है।

    बदलते हरियाणा की नई तस्वीर
    एनएफएचएस-6 के आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा में बदलाव सिर्फ सड़कों, भवनों या उद्योगों तक सीमित नहीं है। डिजिटल तकनीक, शिक्षा और आर्थिक अवसरों ने महिलाओं के जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया है। राज्य की नई पहचान अब डिजिटल महिला शक्ति के रूप में उभरती दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि रिपोर्ट हरियाणा में सामाजिक और तकनीकी बदलाव की मजबूत तस्वीर पेश करती है। महिलाओं की शिक्षा, डिजिटल पहुंच और आर्थिक भागीदारी में सुधार राज्य के लिए सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन पोषण और परिवार नियोजन से जुड़े क्षेत्रों में अभी भी गंभीर प्रयासों की जरूरत बनी है।

  • पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, कार्यवाहक चीफ जस्टिस बने अश्विनी कुमार मिश्रा

    पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, कार्यवाहक चीफ जस्टिस बने अश्विनी कुमार मिश्रा

    चंडीगढ़.

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत होने के बाद केंद्र सरकार ने सोमवार को हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर दिया। भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद-223 के तहत यह नियुक्ति की है।

    केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने से पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो गया था, जिसके चलते जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के दायित्व सौंपे गए हैं। अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति ने जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय के कार्यों का निर्वहन करने के लिए नियुक्त किया है।

    यह नियुक्ति तब तक प्रभावी रहेगी जब तक हाई कोर्ट को नियमित मुख्य न्यायाधीश नहीं मिल जाता। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा का न्यायिक और विधिक क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है। उनका जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल कालेज से अर्थशास्त्र में बीए (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की और इसके बाद कैंपस लॉ सेंटर, दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। 8 मई 1993 को अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराने के बाद उन्होंने मुख्य रूप से सिविल, संवैधानिक और सेवा संबंधी मामलों में वकालत की। अपने वकालती करियर के दौरान उन्होंने नोएडा प्राधिकरण, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, इलाहाबाद विकास प्राधिकरण, इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन तथा उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन सहित कई सार्वजनिक और वैधानिक संस्थाओं का पक्ष रखा।

    इसके अलावा वह उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भी महत्वपूर्ण मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में पेश होते रहे। वर्ष 2013 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्रदान किया गया। जस्टिस मिश्रा ने 3 फरवरी 2014 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी और 1 फरवरी 2016 को स्थायी न्यायाधीश बने। 21 जुलाई 2025 को उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में हुआ था। न्यायिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट में रहते हुए उनकी पीठ ने चर्चित निठारी सीरियल किलिंग मामले में अहम निर्णय सुनाया था। वहीं पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में उन्होंने अवैध खनन के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए कई महत्वपूर्ण आदेश पारित किए और सेवा तथा संवैधानिक कानून से जुड़े मामलों में उल्लेखनीय निर्णय दिए।

    जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में चार जज हो गए जिनका संबध पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जिस्टस ए जी मसीह व जस्टिस अरुण पल्ली , पंजाब एवं हरियाणा हाई के कोटे से सुप्रीम कोर्ट में है जबकि जस्टिस शील नागू पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ रहते हुए मध्य प्रदेश कोटे से सुप्रीम कोर्ट पंहुचे है।

  • एसीबी जांच में अनियमितताएं उजागर, होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

    एसीबी जांच में अनियमितताएं उजागर, होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

    चंडीगढ़

    होमगार्ड वेलफेयर एवं भर्ती घोटाले की जांच में गृह रक्षी विभाग (होमगार्ड) से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि विभागीय रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर कुछ स्वयंसेवकों (होमगार्ड) का दोबारा नामांकन कराया गया। जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितता की ओर संकेत किया गया है। हालांकि, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के अधिकारी जांच प्रभावित होने का हवाला देते हुए आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार, राज्य मुख्यालय ने अगस्त 2021 में 13 लोगों को दोबारा होमगार्ड के रूप में नामांकित करने की मंजूरी दी थी। बाद में रिकॉर्ड की जांच के दौरान पाया गया कि इनमें से 11 लोगों के नाम फर्जी तरीके से लॉन्ग रोल रजिस्टर में दर्ज किए गए थे। जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन सेंटर कमांडर स्तर पर रिकॉर्ड में फ्लूड लगाकर और बाद में प्रविष्टियां कर हेराफेरी की गई।

    जांच टीम ने 18 और 19 अक्तूबर 2021 को संबंधित कार्यालय पहुंचकर रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की। जांच में पाया गया कि जिन 11 लोगों के नाम दर्ज किए गए थे, उनके व्यक्तिगत नामांकन फॉर्म, सेवा रिकॉर्ड, ड्यूटी कॉल-आउट रजिस्टर, भुगतान प्राप्ति रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध ही नहीं थे। इतना ही नहीं, राज्य मुख्यालय को भेजी गई उनकी सेवा अवधि संबंधी रिपोर्ट भी संदिग्ध पाई गई।

    जांच के बाद पुलिस अधीक्षक ने संबंधित रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेने के साथ राज्य मुख्यालय को इन 11 लोगों की पुनर्नियुक्ति मंजूरी रद्द करने की सिफारिश की थी। इसके अलावा रिकॉर्ड से छेड़छाड़, फर्जी रिपोर्ट भेजने और सरकारी दस्तावेजों में कथित हेराफेरी के आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की भी अनुशंसा की गई है।

    रविवार को दर्ज मिली भर्ती की तारीख
    रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं। कुछ होमगार्ड स्वयंसेवकों की भर्ती की तारीख रविवार के दिन दर्ज मिली, जबकि कुछ की सेवा मुक्ति सरकारी अवकाश के दिन दर्शाई गई है। जांच अधिकारियों ने इसे रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी और सुनियोजित फर्जीवाड़े का संकेत माना है।

    उच्च अधिकारियों तक कब पहुंचेगी जांच की आंच
    एसीबी ने होमगार्ड विभाग के अज्ञात अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। हालांकि अब तक किसी वरिष्ठ अधिकारी को पूछताछ के लिए तलब नहीं किया गया है। शिकायत के अनुसार अनियमितताओं का यह मामला वर्ष 2010 से 2025 के बीच का बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जांच की आंच विभाग के उच्च अधिकारियों तक कब पहुंचेगी और इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होगी।