Category: हरियाणा

  • अंबाला से पंचकूला तक अधूरी निकाय व्यवस्था, महीनों से खाली पड़ी हैं डिप्टी मेयर की कुर्सियां

    अंबाला से पंचकूला तक अधूरी निकाय व्यवस्था, महीनों से खाली पड़ी हैं डिप्टी मेयर की कुर्सियां

     अंबाला
     प्रदेश के नगर निगमों में अजीब तस्वीर दिखाई दे रही है। शहरों को मेयर मिल चुके हैं, सदन बन चुके हैं, पार्षद शपथ ले चुके हैं, लेकिन सत्ता की दो अहम कुर्सियां सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर की अब भी खाली हैं।

    मार्च 2025 में हुए नगर निगम चुनावों के बाद गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, रोहतक, करनाल, पानीपत और यमुनानगर में मेयरों ने कामकाज संभाल लिया। मई 2026 में अंबाला, सोनीपत और पंचकूला में भी नए सदन अस्तित्व में आ गए। लेकिन प्रदेश के अधिकांश नगर निगमों में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

    मार्च 2025 में मानेसर नगर निगम का भी चुनाव हुआ था केवल यहीं पर सीनियर और डिप्टी मेयर का चुनाव हो सका है। नगर निगम कानून आज भी उस दौर की कहानी कहता है जब मेयर का चुनाव पार्षद किया करते थे। अब मेयर सीधे जनता चुनती है, लेकिन कानून की कई धाराओं में आज भी पार्षदों द्वारा मेयर चुनने का जिक्र दर्ज है।

    नगर निगम की राजनीति में सीनियर डिप्टी मेयर का पद केवल सम्मान का विषय नहीं होता। इसे अक्सर भविष्य की राजनीति का लांचिंग पैड माना जाता है। पंचकूला का नाम शायद इसलिए भी याद रखा जाएगा क्योंकि वहां 2021 से 2026 तक का पूरा कार्यकाल निकल गया है।

    अंबाला में हाई कोर्ट की लेनी पड़ी थी शरण
    अंबाला में 2013 में निगम बनने के बाद मेयर के साथ-साथ निर्धारित समय के भीतर सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव भी हो गया था। दूसरे कार्यकाल में मामला इतना लंबा खिंचा कि चुनाव कराने के लिए तत्कालीन छह पार्षदों जिनमें जसबीर सिंह, फकीर चंद, राजेश मेहता, अमनदीप कौर, राजेश सिंगला इत्यादि को हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी।

    दिसंबर 2020 में चुनाव हुए, जनवरी 2021 में शपथ ग्रहण हुआ, लेकिन सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर के चुनाव आठ दिसंबर 2022 में जाकर हुए। लगभग दो साल तक दोनों कुर्सियां खाली रहीं। इस साल अंबाला में 13 मई को चुनाव परिणाम आए, 28 मई को शपथ ग्रहण होने के बावजूद अगली प्रक्रिया का इंतजार जारी है।

  • हांसी में गिरा मोबाइल टावर, सिवानी में दिखा धूल का विशाल बवंडर, मौसम ने बदली करवट

    हांसी में गिरा मोबाइल टावर, सिवानी में दिखा धूल का विशाल बवंडर, मौसम ने बदली करवट

     हिसार
    सुबह तक सामान्य दिख रहा मौसम सोमवार दोपहर अचानक बदला और देखते ही देखते प्रदेश के कई जिलों में धूलभरी आंधी, तेज हवाएं और वर्षा का दौर शुरू हो गया। कई स्थानों पर दोपहर में ही अंधेरा जैसा वातावरण बन गया।

    हांसी में हल्की ओलावृष्टि हुई और तेज आंधी के कारण एक मोबाइल टावर गिर गया। भिवानी जिले के सिवानी क्षेत्र में करीब 100 मीटर ऊंचा धूल का बवंडर दिखाई दिया। गुरुग्राम, सोनीपत, फतेहाबाद, सिरसा, रेवाड़ी, झज्जर और अन्य जिलों में वर्षा दर्ज की गई।

    मौसम में आए इस अचानक बदलाव ने लोगों को गर्मी और उमस से राहत दी, लेकिन कई स्थानों पर जनजीवन भी प्रभावित हुआ। हांसी क्षेत्र में तेज हवाओं और वर्षा के साथ ओलावृष्टि दर्ज की गई। आंधी इतनी तेज थी कि शहर के बड़सी गेट एरिया में एक मोबाइल टावर गिर गया।

    कई स्थानों पर पेड़ों की टहनियां टूटने और अवरोध पैदा होने की सूचनाएं भी मिलीं। सिवानी में दिखा धूल का विशाल बवंडर भिवानी जिले के सिवानी क्षेत्र में धूल का ऊंचा बवंडर लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। तेज हवाओं के साथ उठे इस बवंडर के वीडियो इंटरनेट मीडिया पर भी प्रसारित हुए।

    मौसम विशेषज्ञ इसे अस्थिर वायुमंडलीय परिस्थितियों का परिणाम मान रहे हैं। गुरुग्राम में सड़कों पर भरा पानी गुरुग्राम में तेज वर्षा के बाद कई सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई। सोनीपत, फतेहाबाद, रेवाड़ी, झज्जर और सिरसा सहित अनेक जिलों में भी वर्षा दर्ज की गई।

    कई स्थानों पर तेज हवाओं के कारण बिजली और यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। आने वाले दिनों में भी बदलाव के संकेत मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में कहीं-कहीं वर्षा और तेज हवाओं की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। हालांकि अगले पांच दिनों में अधिकतम तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि की संभावना भी जताई गई है। फिलहाल प्रदेश में हीटवेव जैसी स्थिति नहीं है।

    पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से प्रदेश में मौसम में बदलाव देखने को मिला है। आगामी दिनों में भी कुछ क्षेत्रों में वर्षा और तेज हवाएं चल सकती हैं। – डॉ. चंद्रशेखर डागर, वरिष्ठ मौसम विशेषज्ञ, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार

     

  • रोहतक हादसे के पीड़ितों को मुआवजा, मुख्यमंत्री ने दिए राहत के निर्देश

    रोहतक हादसे के पीड़ितों को मुआवजा, मुख्यमंत्री ने दिए राहत के निर्देश

     रोहतक
    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को रोहतक के डी-पार्क क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड स्थल का निरीक्षण किया और प्रभावित दुकानदारों से मुलाकात कर घटना की पूरी जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री ने अग्निकांड में जान गंवाने वाले कपिल, सौरभ और अमन के परिजनों से भी मिलकर गहरी संवेदना व्यक्त की तथा उन्हें हर संभव सरकारी सहायता का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद और पीड़ादायक है। सरकार इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों और व्यापारियों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत एवं सहायता कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो।

    मुख्यमंत्री ने राहत कोष से पूर्ण रूप से नष्ट हुई दुकानों के लिए 5-5 लाख रुपये और आंशिक रूप से प्रभावित दुकानों के लिए 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। इसके अलावा आग की चपेट में आकर नष्ट हुई रेहड़ियों के मालिकों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

    पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा
    उन्होंने बताया कि शहरी स्थानीय निकाय विभाग की रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित दुकानदारों के नुकसान का आकलन कर अलग से मुआवजा भी दिया जाएगा, ताकि व्यापारियों को अपने कारोबार को दोबारा खड़ा करने में मदद मिल सके।

    बता दें कि 9 जून को माडल टाउन स्थित डी-पार्क के निकट भीषण आग लगने से करीब एक दर्जन दुकानें जलकर राख हो गई थीं। हादसे में तीन लोगों की जिंदा जलने से मौत हो गई थी, जबकि लाखों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ था।

    घटना के बाद से व्यापारी संगठनों की ओर से पीड़ितों के लिए उचित मुआवजे और राहत की मांग की जा रही थी। मुख्यमंत्री के दौरे और मुआवजे की घोषणा के बाद प्रभावित परिवारों और व्यापारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

  • रोहतक डी-पार्क हादसे के बाद हरकत में सरकार, सीएम सैनी ने पीड़ितों का जाना हाल, मदद का भरोसा दिया

    रोहतक डी-पार्क हादसे के बाद हरकत में सरकार, सीएम सैनी ने पीड़ितों का जाना हाल, मदद का भरोसा दिया

    रोहतक.

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को रोहतक के डी-पार्क क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड स्थल का निरीक्षण किया और प्रभावित दुकानदारों से मुलाकात कर घटना की पूरी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अग्निकांड में जान गंवाने वाले कपिल, सौरभ और अमन के परिजनों से भी मिलकर गहरी संवेदना व्यक्त की तथा उन्हें हर संभव सरकारी सहायता का भरोसा दिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद और पीड़ादायक है। सरकार इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों और व्यापारियों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत एवं सहायता कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो। मुख्यमंत्री ने राहत कोष से पूर्ण रूप से नष्ट हुई दुकानों के लिए 5-5 लाख रुपये और आंशिक रूप से प्रभावित दुकानों के लिए 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। इसके अलावा आग की चपेट में आकर नष्ट हुई रेहड़ियों के मालिकों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

    पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा
    उन्होंने बताया कि शहरी स्थानीय निकाय विभाग की रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित दुकानदारों के नुकसान का आकलन कर अलग से मुआवजा भी दिया जाएगा, ताकि व्यापारियों को अपने कारोबार को दोबारा खड़ा करने में मदद मिल सके। बता दें कि 9 जून को माडल टाउन स्थित डी-पार्क के निकट भीषण आग लगने से करीब एक दर्जन दुकानें जलकर राख हो गई थीं।

    हादसे में तीन लोगों की जिंदा जलने से मौत हो गई थी, जबकि लाखों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ था। घटना के बाद से व्यापारी संगठनों की ओर से पीड़ितों के लिए उचित मुआवजे और राहत की मांग की जा रही थी। मुख्यमंत्री के दौरे और मुआवजे की घोषणा के बाद प्रभावित परिवारों और व्यापारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

  • नए हरियाणवी गाने पर आपत्ति, अश्लीलता के आरोप में कार्रवाई की मांग

    नए हरियाणवी गाने पर आपत्ति, अश्लीलता के आरोप में कार्रवाई की मांग

     हिसार
     हरियाणा में कुछ समय पहले रैपर बादशाह के चर्चित गीत टटीरी को लेकर उठा विवाद अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब हरियाणवी गीत कालेज वाली छोरी विवादों में घिर गया है।

    हिसार में हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों ने इस गाने में कंडक्टरों और कालेज जाने वाली छात्राओं को लेकर कथित आपत्तिजनक शब्दों के प्रयोग का आरोप लगाते हुए पुलिस और महिला आयोग से कार्रवाई की मांग की है।

    रोडवेज कर्मचारियों का कहना है कि गाने में कंडक्टरों और बसों से कालेज आने-जाने वाली छात्राओं की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है। इससे न केवल रोडवेज कर्मचारियों की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है, बल्कि छात्राओं के बारे में भी अनुचित संदेश जाता है

    कर्मचारियों ने हिसार सिटी थाना पुलिस को लिखित शिकायत देने के साथ-साथ हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष को भी शिकायत भेजी है। कर्मचारियों ने मांग की है कि गाने को इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म से हटाया जाए और इसके लेखक, निर्देशक व गायक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

    एक्टर नवीन नारू बोले- जान बूझकर गाने को बनाया जा रहा विवादित
    वहीं इस गाने में अभिनय कर रहे नवीन नारू ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह गीत केवल मनोरंजन के उद्देश्य से बनाया गया है और इसमें किसी वर्ग या पेशे को निशाना नहीं बनाया गया है। उन्होंने दावा किया कि गाने की लोकप्रियता कुछ लोगों को रास नहीं आ रही, इसलिए इसे विवादित बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

    नवीन ने बताया कि गाने की शूटिंग हिसार में हुई है और रिलीज के बाद इसे दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला है। इंटरनेट मीडिया पर इस गाने पर बड़ी संख्या में रील भी बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में भी तीन सदस्य कंडक्टर हैं, इसलिए किसी पेशे का अपमान करने का सवाल ही नहीं उठता।

    पुलिस कर रही जांच
    शिकायत मिलने के बाद मामला प्रशासन और पुलिस के संज्ञान में आया है। पुलिस का कहना है कि शिकायत की जांच की जा रही है। यदि जांच में गाने में अश्लील या आपत्तिजनक टिप्पणियां पाए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।

    गौरतलब है कि इससे पहले बादशाह के टटीरी गीत को लेकर भी हरियाणा में काफी विवाद हुआ था। टटीरी गाने को लेकर रोडवेज अधिकारियों ने भी शिकायतें दी थी। वहीं अब दोबारा से रोडवेज कर्मियों ने कालेज वाली छोरी को लेकर शिकायत दी है। इस गाने के विवाद ने हरियाणवी संगीत जगत में नई बहस छेड़ दी है।

  • राजपुरा में सैनी समाज सम्मेलन, हरियाणा CM बोले- राष्ट्र और समाज निर्माण में निभानी होगी अहम जिम्मेदारी

    राजपुरा में सैनी समाज सम्मेलन, हरियाणा CM बोले- राष्ट्र और समाज निर्माण में निभानी होगी अहम जिम्मेदारी

    राजपुरा 

    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि सैनी समाज को अब केवल समर्थक की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पंचायत से लेकर विधानसभा और संसद तक अपनी मजबूत एवं निर्णायक भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए हर स्तर पर प्रभावी पैरवी की जाएगी। मुख्यमंत्री शुक्रवार को पंजाब के राजपुरा में सैनी समाज वेलफेयर कमेटी द्वारा आयोजित सैनी महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

    इस अवसर पर कमेटी की ओर से उनका भव्य स्वागत और अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं को शॉल भेंट कर सम्मानित भी किया। नायब सैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय और उनका आवास जनता के लिए चौबीसों घंटे खुला रहता है। जनकल्याण, सामाजिक न्याय और समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

    समाज को संगठित होकर आगे बढ़ना होगा, तभी सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर उसकी भागीदारी और प्रभाव बढ़ेगा। सम्मेलन में सैनी समाज कल्याण समिति के सर्कल चेयरमैन जैलदार जसविंदर सिंह सैनी, महिन्दर सैनी, प्रधान जतिन्दर सैनी, चेयरमैन गुरनाम, अंगद सैनी, गुरदर्शन सैनी, रणबीर सिंह, सर्वजीत कौर, एमसी लक्की और दविन्दर सैनी सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

    पंजाब सरकार पर साधा निशाना
    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान किए गए कई वादे पूरे नहीं हुए, जिसके कारण लोग स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों और आम लोगों से जुड़े कई मुद्दों पर पंजाब सरकार अपेक्षित परिणाम देने में विफल रही है।

    केंद्र और प्रदेश की योजनाओं का किया उल्लेख
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने गरीब, पिछड़े और वंचित वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया है। उन्होंने हरियाणा सरकार द्वारा गुरु तेग बहादुर जी के 350वें प्रकाश पर्व के अवसर पर किए गए विभिन्न कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सिरसा विश्वविद्यालय में गुरु तेग बहादुर चेयर स्थापित की गई है, जबकि फरीदाबाद, धमतान साहिब, यमुनानगर और अंबाला में भी उनके नाम से विभिन्न परियोजनाएं विकसित की गई हैं।

    किसानों और महिलाओं के लिए योजनाएं गिनाईं
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित कर रही है। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। महिलाओं को रियायती दर पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने सहित कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की गई हैं। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों, दिव्यांगों और विधवा महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नियमित रूप से दिया जा रहा है।
    ओबीसी वर्ग को मिला मजबूत प्रतिनिधित्व
    नायब सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने विभिन्न स्तरों पर पिछड़े वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देने का कार्य किया है।

  • महिला आयोग में नेतृत्व परिवर्तन: रेनू भाटिया के इस्तीफे के बाद उषा प्रियदर्शनी और मीना परमार चर्चा में

    महिला आयोग में नेतृत्व परिवर्तन: रेनू भाटिया के इस्तीफे के बाद उषा प्रियदर्शनी और मीना परमार चर्चा में

     चंडीगढ़
     चंडीगढ़ कुरुक्षेत्र में नर्सिंग स्टाफ से विवाद के चलते हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया के इस्तीफे के बाद प्रदेश सरकार ने आयोग का पुनर्गठन कर दिया है। हरियाणा सरकार ने राज्य महिला आयोग का विस्तार करते हुए नई नियुक्तियों की घोषणा की है।

    इस बदलाव के तहत उषा प्रियदर्शनी को आयोग का नया अध्यक्ष  और मीना परमार को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पूर्व अध्यक्ष रेणु भाटिया के इस्तीफे के बाद आयोग के इस नए नेतृत्व से महिला अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में तेजी आने की उम्मीद है।

    आइए, विस्तार से समझते हैं कि उषा प्रियदर्शनी और मीना परमार कौन हैं और संगठन में इनका अब तक का सफर कैसा रहा है…
    ऊषा प्रियदर्शी का जन्म 12 अगस्त 1972 को राजस्थान में हुआ। स्नातक तक शिक्षित उषा के पति नीरज प्रियदर्शी अधिवक्ता हैं। निवास स्थान गुरुग्राम के सुशांत लोक फेज-तीन में है। राजनीति में ऊषा 25 साल से भाजपा में सक्रिय हैं। ओबीसी मोर्चा भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष सहित महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष हैं।

    मीना परमार का जन्म 10 सितंबर 1976 को भिवानी के गांव खरक कलां में हुआ था, वे स्नातक पास हैं। इनके पति अर्जुन सिंह लेक्चरर हैं। भिवानी के सेक्टर 13 में निवास है। मीना 26 साल से राजनीति में हैं। वर्ष 2016 से 2019 तक भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष रहीं। 2021 में महिला मोर्चा की महामंत्री बनीं।

    साढ़े चार साल तक पद पर रहीं रेनू भाटिया
    साढ़े चार साल तक अध्यक्ष के पद पर रहीं रेनू भाटिया महिला आयोग की चेयरपर्सन का कार्यकाल तीन साल का होता है, लेकिन रेनू भाटिया साढ़े चार साल तक इस पद पर रहीं। उन्होंने 19 जनवरी 2022 को चेयरपर्सन के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। उनका कार्यकाल पिछले साल 18 जनवरी को पूरा हो गया था। हालांकि 26 नवंबर 2024 को महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जारी एक पत्र के जरिये कार्यकाल अगले आदेश तक बढ़ाया था, जिस पर विवाद छिड़ा है।

     

     

  • PAK यात्रा पर झटका: 94 सिख श्रद्धालुओं को बॉर्डर से वापस भेजा गया, जांच के आदेश जारी

    PAK यात्रा पर झटका: 94 सिख श्रद्धालुओं को बॉर्डर से वापस भेजा गया, जांच के आदेश जारी

    कुरुक्षेत्र.

    हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) की ओर से श्रीगुरु अर्जुन देव महाराज के शहीदी गुरु पर्व पर पाकिस्तान की धार्मिक यात्रा के लिए भेजे गए सिखों के जत्थे को अटारी-वाघा बॉर्डर से वापस भेजे जाने के बाद मामला पूरी तरह गरमा गया है।

    प्रशासनिक और दस्तावेजी प्रक्रिया में हुई गंभीर चूक के कारण 94 श्रद्धालुओं को पाकिस्तान में प्रवेश नहीं मिल सका और उन्हें बार्डर से बैरंग लौटना पड़ा। इस बड़ी लापरवाही के बाद जहां श्रद्धालुओं में भारी रोष है, वहीं एचएसजीएमसी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है। बुधवार देर रात जत्थे के वापस कुरुक्षेत्र लौटने के बाद वीरवार सुबह एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा तुरंत मुख्य कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के साथ आपातकालीन बैठक की। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने जांच कमेटी गठित करने की घोषणा की। कमेटी ने साफ किया है कि इस ऐतिहासिक चूक के लिए जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी।

    गृह मंत्रालय तक दौड़े अधिकारी, पर नहीं मिली क्लीयरेंस
    सूत्रों के मुताबिक, यात्रा के लिए आवश्यक दस्तावेज समय रहते बार्डर पर तैनात सुरक्षा और आव्रजन (इमिग्रेशन) अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाए थे। बुधवार को जब जत्थे को बार्डर पर रोके जाने की खबर आई, तो एचएसजीएमसी के आला अधिकारी तुरंत चंडीगढ़ भागे और गृह मंत्रालय के अधिकारियों से संपर्क साधा। मंत्रालय से संपर्क करने पर जो सच सामने आया, वह चौंकाने वाला था। पता चला कि जिला स्तर से जो अधिकृत सूची गृह विभाग को भेजी जानी चाहिए थी, वह समय पर पहुंची ही नहीं। वीजा जारी होने के बाद भी सूची को वापस जिलों में नहीं भेजा गया। तालमेल की कमी के कारण श्रद्धालुओं को जरूरी क्लीयरेंस नहीं मिल सकी। अब संबंधित विभाग के कर्मचारी खुद को पाक-साफ बताते हुए एक-दूसरे पर जिम्मेदारी मढ़ने में लगे हैं।

  • कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ाव पर कार्रवाई, महिला टीचर को विभाग ने किया सस्पेंड

    कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ाव पर कार्रवाई, महिला टीचर को विभाग ने किया सस्पेंड

    रोहतक
     हरियाणा के रोहतक जिले के एक सरकारी स्कूल में कार्यरत एक अतिथि शिक्षिका को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले सप्ताह हुए एक प्रदर्शन में शामिल होने के कुछ दिनों बाद निलंबित कर दिया गया है। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित किया गया था। जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी ने  शिक्षिका सुलेखा दलाल को आठ जून से निलंबित करने का आदेश जारी किया। हालांकि आदेश में निलंबन का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।

    खुद को बताया था कॉकरोच की मां
    आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान रोहतक खंड शिक्षा अधिकारी का कार्यालय उनका मुख्यालय रहेगा और उन्हें बिना पूर्व अनुमति के वहां से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। गौरतलब है कि एक वीडियो क्लिप में दलाल को जंतर-मंतर पर आयोजित सीजेपी के प्रदर्शन के बोलते हुए देखा गया था। वीडियो में कथित तौर पर उन्हें यह कहते हुए सुना गया कि यह लड़ाई है। इस बार ‘करो या मरो’ की लड़ाई है। अब ‘कॉकरोच की मां’ मैदान में उतर चुकी है। हम किसी समूह का हिस्सा नहीं हैं, हम अपने बच्चों के साथ हैं। एक मां पूरे देश की मां होती है।

    क्या बोली टीचर

        निलंबन को लेकर पूछे जाने पर दलाल ने कहा कि उन्हें इसके कारण की जानकारी नहीं है।
        उन्होंने कहा कि मैं कई वर्षों से काम कर रही हूं। मुझे यह नहीं पता था कि वहां (प्रदर्शन में) शामिल नहीं हुआ जा सकता।
        मुझे लगता है कि निलंबन से पहले मुझे कारण बताया जाना चाहिए था।
        शिक्षिका ने बताया कि उनके स्नातक पुत्र ने उस भर्ती परीक्षा में भाग लिया था, जिसमें कथित अनियमितताएं सामने आई हैं।
        उन्होंने कहा कि इसलिए मेरा बेटा और एक अभिभावक के रूप मैं प्रभावित हैं।

    मेरा किसी पार्टी या संगठन से कोई संबंध नहीं
    उन्होंने कहा कि मैं वहां केवल एक चिंतित मां के रूप में गई थी। मैंने जो कहा, वह एक मां का दर्द था। मेरा किसी पार्टी या संगठन से कोई संबंध नहीं है। उल्लेखनीय है कि अतिथि शिक्षक की नियुक्ति सरकार द्वारा अस्थायी रिक्तियों को भरने के लिए अनुबंध के आधार पर की जाती है। सीजेपी का प्रदर्शन छह जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ था, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से आए छात्रों और युवाओं ने कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही की मांग की थी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। यह समूह हाल के हफ्तों में परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया अभियानों के जरिए चर्चा में आया है और खुद को शिक्षा क्षेत्र में सुधार की मांग करने वाला युवा मंच बताता है।

     

  • NCR सीमा बदलने की तैयारी, हरियाणा का दायरा घट सकता है 60 फीसदी तक

    NCR सीमा बदलने की तैयारी, हरियाणा का दायरा घट सकता है 60 फीसदी तक

    पंचकूला
    वर्तमान में हरियाणा के 22 जिलों में से 14 जिले एनसीआर यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आते हैं। इनमें से पांच जिले जल्द ही बाहर हो सकते हैं।

    जी हां, हरियाणा सरकार इस बाबत 16 जून को बड़ा फैसला ले सकती है। ये पांच जिले कौन से हैं, सरकार यह फैसला क्यों ले रही है और यह NCR होता है क्या है? आइए इसे पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं।

    क्या है NCR?
    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का संदर्भ दिल्ली के पड़ोसी राज्यों के जिलों से संबंधित है। दरअसल, 1951 के बाद दिल्ली में औद्योगिक विकास तेजी से हुआ। जिससे देश की राजधानी में अन्य राज्यों के लोग भी रोजगार और बेहतर सुविधाओं के लिए प्रवास करने लगे।

    दिल्ली पर इस बढ़ती आबादी और भीड़-भाड़ के दबाव को कम करने के लिए NCR की परिकल्पना की गई। इसी उद्देश्य के साथ साल 1985 में NCR प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) का गठन किया गया, ताकि पूरे क्षेत्र का विकास एक व्यवस्थित योजना के तहत हो सके। अत: पड़ोसी राज्यों के कुछ शहर और जिलों में इसका विस्तार (100 KM तक) कर दिल्ली जैसी सुविधाएं और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सके।

    मौजूदा समय में एनसीआर में तीन राज्यों (हरियाणा, यूपी और राजस्थान) के 24 जिले शामिल हैं। इस सूची में सबसे ज्यादा जिले (14) हरियाणा के हैं, इन्हीं 14 जिलों के पांच जिलों को बाहर करने के प्रस्ताव पर अगले सप्ताह बैठक की जाएगी।

    हरियाणा के इन पांच जिलों में करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी शामिल है।। इस बाबत एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की 16 जून को होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी।

    सरकार क्यों ले रही यह फैसला?
    दिल्ली से 100 किलोमीटर के दायरे से बाहर के जिलों को एनसीआर से बाहर करने के लिए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा और आवास व शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने प्रयास शुरू किए थे। रीजनल प्लान-2041 के तहत एनसीआर सीमा को नए सिरे से तय करने का प्रस्ताव है।

    हरियाणा सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली तो राज्य का एनसीआर क्षेत्र करीब 60 फीसदी तक सिमट सकता है। बैठक के मसौदे में प्रस्ताव है कि एनसीआर की सीमा राजघाट से 100 किमी के दायरे तक सीमित की जाए। अभी हरियाणा के 14 जिले किसी न किसी रूप में एनसीआर का हिस्सा हैं, जिसका कुल क्षेत्रफल 25 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक है।

    NCR से बाहर होने की वजह
    हरियाणा सरकार का तर्क है कि एनसीआर (NCR) के सख्त नियमों के कारण इन 5 जिलों को फायदे से ज्यादा भारी आर्थिक और व्यापारिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    दिल्ली से दूर मौजूद जींद या महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में औद्योगिक विकास ठप होने की आशंका है। NGT और GRAP के कड़े नियमों के कारण उद्योगों और फैक्ट्रियों पर लगातार सख्त कार्रवाई होती है। इसके साथ ही 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर रोक से स्थानीय व्यापारियों और किसानों का परिवहन बजट बिगड़ जाता है।

    नए फॉर्मूले में क्या होगा?
    नए फॉर्मूले के लागू होने पर यह क्षेत्र घटकर करीब 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर तक रह सकता है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने उन तहसीलों को भी एनसीआर में शामिल रखने का सुझाव दिया है, जिनका कुछ हिस्सा 100 KM की सीमा में आता है, जबकि हरियाणा का तर्क है कि केवल एनसीआर की सीमा में पूरी तरह आने वाली तहसीलों को ही रखा जाए।