Category: हरियाणा

  • बिजली व्यवस्था सुधारने पर हरियाणा सरकार का फोकस, ₹81 करोड़ से बनेंगे GIS-बे

    बिजली व्यवस्था सुधारने पर हरियाणा सरकार का फोकस, ₹81 करोड़ से बनेंगे GIS-बे

     चंडीगढ़
     हरियाणा में बिजली सप्लाई बेहतर करने के लिए 26 हजार 161 ट्रांसफामर खरीदे जाएंगे। लाइनमैन व सहायक लाइनमैनों की सुरक्षा के लिए 5000 से 7500 तक टीएंडपी किट की खरीद की जाएगी जिसमें 14 आइटम होंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हरियाणा निवास में हुई हाई पावर्ड परचेज कमेटी (एचपीपीसी) की बैठक में बिजली निगमों के लिए विभिन्न खरीद प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।

    शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा की मौजूदगी में हाई पावर्ड वर्क्स परचेज कमेटी द्वारा विभिन्न बिजलीघरों में जीआइएस-बे के निर्माण कार्य को भी स्वीकृति प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से नेगोसिएशन करते हुए ट्रांसफार्मर्स व सुरक्षा किट की खरीद तथा जीआइएस-बे के निर्माण कार्य के लिए फर्मों के साथ निर्धारित से भी कम दरों पर सहमति कायम की।

    81 करोड़ की आएगी लागत
    दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के लिए थ्री-फेस के 11केवी/433-250वी, 400 केवीए के 100 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर्स, एचवीपीएनएल के लिए 40/50 एमवीए, 132/33 केवी के 28 पावर ट्रांसफामर्स, 25/33.5 एमवीए, 66/11 केवी के 33 पावर ट्रांसफामर्स तथा यूएचबीवीएनएल के लिए 100 केवीए के 26000 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफामर्स की खरीद को हरी झंडी दी गई है। विभिन्न बिजलीघरों में 81 करोड़ रुपये की लागत से जीआइएस-बे का निर्माण कार्य कराया जाएगा।

    कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा भी सरकार की प्राथमिकता
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा बिजली व्यवस्था को और मजबूत करने की ओर विशेष ध्यान दे रही है। सरकार का प्रयास है कि जहां जरूरत हो, वहां पर्याप्त संख्या में ट्रांसफामर्स उपलब्ध करवाए जाएं और एमरजेंसी के लिए भी सभी बिजली निगमों के पास पर्याप्त बैकअप मौजूद हो। उन्होंने कहा कि बिजली निगमों में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा भी सरकार की प्राथमिकता है।

    बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार, ऊर्जा विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशीमा बराड़, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लि. के प्रबंध निदेशक तथा सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के निदेशक डा. आदित्य दहिया तथा ऊर्जा विभाग के विशेष सचिव विक्रम सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

  • मानवीय पहल की मिसाल बने SDM, 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला के बयान लेने खुद कार तक पहुंचे

    मानवीय पहल की मिसाल बने SDM, 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला के बयान लेने खुद कार तक पहुंचे

    रोहतक.

    प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल उस समय देखने को मिली, जब लघु सचिवालय में अपने बेटों को जमीन में हिस्सेदारी देने पहुंची 95 वर्षीय बीमार महिला सुरती देवी को कार्यालय के अंदर लाना संभव नहीं हुआ।

    महिला की परेशानी को देखते हुए एसडीएम आशीष कुमार स्वयं पार्किंग में खड़ी उनकी कार तक पहुंचे और वहीं बैठकर उनके बयान दर्ज किए। सुरती देवी बीमारी के कारण कार से उतरने की स्थिति में नहीं थीं। जमीन में अपने बेटों को हिस्सेदारी देने संबंधी कार्रवाई के लिए उनके बयान और तस्दीक जरूरी थी। ऐसे में एसडीएम ने बुजुर्ग महिला को कार्यालय तक बुलाने के बजाय खुद उनके पास पहुंचकर पूरी प्रक्रिया पूरी कराई।

    एसडीएम आशीष कुमार ने कार में ही महिला से बातचीत कर उनके बयान लिए और पूरी जानकारी समझने के बाद उनकी तस्दीक करवाई। इसके बाद महिला से अंगूठा भी लगवाया गया। एसडीएम के इस संवेदनशील रवैये से वहां मौजूद लोगों ने भी सराहना की। लोगों ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी यदि इसी तरह बुजुर्गों और जरूरतमंदों की परिस्थितियों को समझकर उनकी सुविधा के अनुसार सेवाएं दें तो सरकारी व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।

  • फरीदाबाद के किसान नरेंद्र अत्री की अनोखी पहल, ड्रैगन फ्रूट की खेती से संवारा परिवार का भविष्य

    फरीदाबाद के किसान नरेंद्र अत्री की अनोखी पहल, ड्रैगन फ्रूट की खेती से संवारा परिवार का भविष्य

     फरीदाबाद
    अनेकों किसान आज भी अपनी परंपरागत खेती इसीलिए नहीं छोड़ पा रहे, शायद उनमें कुछ नया करने का जुनून-जज्बा नहीं है। फरीदाबाद की नीमका जेल में तैनात एक हवलदार ने अपने जुनून औ जिद से परंपरागत खेती छोड़कर जिले में एक मिसाल कायम की है।

    जी हां, जिस खेत में कभी गेहूं की बालियां लहलहाती थीं, कभी चावल, ज्वार, मक्का और गन्ना बोया जाता था, वह खेत ड्रैगन फ्रूट की सुगंध से महक रहा है। परंपरागत खेती से यह किसान परिवार बड़ी मशक्कत के बाद हर साल डेढ़-दो लाख रुपये कमाता था, लेकिन नई खेती ने परिवार की जिंदगी संवार दी है।

    लागत 6.5 लाख और हर साल 14 लाख का मुनाफा
    किसान परिवार ने छह बीघे (एक एकड़ से ज्यादा) खेत से इस साल 14 लाख रुपये की कमाई की है। तीन साल पहले फरीदाबाद-पलवल में यह पहल करने वाले वे पहले किसान थे, लेकिन अब दोनों जिलों में तीन-चार अन्य किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं।एक किसान के बदलने और इस जिद-जुनून की कहानी जनवरी 2023 में शुरू हुई थी।

    फरीदाबाद-पलवल की सीमा पर मौजूद जल्हाका गांव के साधारण किसान नरेंद्र अत्री जिला कारागार विभाग में बतौर हवलदार नीमका जेल में तैनात है। एक रोज ड्यूटी के बाद बैरक में पलंग पर लेटे वे खेती-बाड़ी संबंधी यू ट्यूब चेनल पर ड्रैगन फ्रूट की खेती के बारे में सुन-देख रहे थे।

    उसी रोज, उन्होंने अपने खेत से परंपरागत खेती को हटाने का मन बना लिया। छुट्टी वाले दिन घर पहुंचे तो पत्नी-बच्चों से कहा, अब मैं ड्रैगन फ्रूट की खेती करूंगा। बच्चों ने दो-तीन बार मना किया, मनोबल गिराया, लेकिन मूलत: किसान होने के कारण नरेंद्र का फैसला अटल था।

    यूट्यूब देखकर बदली किस्मत
    यूट्यूब पर जो वीडियो देखा था, वह उन्होंने सहेज रखा था। हर रोज उसे कई बार देखते थे। उससे जो सीखा, उसके अनुरूप फरवरी, 2023 में उन्होंने खेत की मिट्टी और ट्यूबवेल के पानी का पीएच लेवल चेक कराया, जो अनुकूल निकला। अगला कदम था, खेत में पोल्स खड़े करना, कलम लाना और उसे लगाना, उसके बाद रिंग लाकर पोल्स पर लगाना। ये सब काम अगले तीन महीने में पूरे हो गए।

    इंतजार शुरू हुआ, कलम से पौधे के विकास और उसकी हाइट का रिंग तक पहुंचना। नौ महीने बाद वह दिन भी आया। पौधे विकसित होते हुए रिंग के अंदर जाकर पेड़ बनकर फैलने लगे। उसी समय पहली बार इनपर फ्रूट आया, किंतु नियमानुसार 15-20 साल तक फसल लेने लेने के लिए उन्हें उसी समय तोड़ना था।

    सभी पेड़ों से पहली बार आया फूलनुमा फ्रूट तोड़ दिया गया। डेढ़ साल बाद पहली बार भरकर फ्रूट हुआ, जो करीब ढाई से तीन टन था। तीन साल बाद अब इस डेढ़ बीघे खेत से करीब आठ टन फ्रूट निकाला जा चुका है।

    थोक मूल्य 200 रुपये किलो के हिसाब से इस साल नरेंद्र अत्री ने 14 लाख रुपये की कमाई की है। नरेंद्र बताते हैं कि पहले दिन से लेकर अब तक उनका महज 6.5 लाख रुपये खर्च हुआ है। यह खेती 10 से 12 साल तक इतना फ्रूट हर साल देगी। लागत शून्य है, कीमत हर साल बढ़ेगी तो मुनाफा भी हर साल बढ़ेगा।

  • Haryana News: जीवन कुंडू मर्डर केस में बनी सहमति, सरकार ने मानी मांगें; 14 दिन बाद अंतिम संस्कार

    Haryana News: जीवन कुंडू मर्डर केस में बनी सहमति, सरकार ने मानी मांगें; 14 दिन बाद अंतिम संस्कार

    हिसार.

    जीवन कुंडू हत्याकांड को लेकर चल रहा आंदोलन सोमवार को सरकार के साथ वार्ता के बाद समाप्ति की ओर बढ़ा। न्याय संघर्ष समिति की छह सदस्यीय कमेटी ने चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की।

    बैठक में मुख्य आरोपित रमेश अत्री की गिरफ्तारी का आश्वासन देने के साथ 15 अगस्त को हांसी में दर्ज मुकदमे रद करने, पकड़े गए वाहनों को वापस लौटाने और पीड़ित परिवार की हरसंभव मदद करने पर सहमति बनी। इसके बाद परिवार ने 14 दिन से रखे गए जीवन के शव का मंगलवार को किनाला में अंतिम संस्कार करने पर सहमति जताई है। इससे पहले महापंचायत ने वार्ता बेनतीजा रहने पर 18 अगस्त से हिसार-दिल्ली, हिसार-सिरसा और हिसार-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग बंद करने की चेतावनी दी थी।

    पूर्व प्रदेश महामंत्री ने कराई मध्यस्थता
    न्याय संघर्ष समिति की कमेटी के साथ भाजपा के पूर्व प्रदेश महामंत्री सुरेंद्र पूनिया भी चंडीगढ़ पहुंचे। उन्होंने सरकार और समिति के बीच वार्ता में मध्यस्थता की। समिति सदस्य पूर्व सरपंच रवि कुंडू ने बताया कि मुख्यमंत्री ने परिवार की हरसंभव मदद का भरोसा दिया और मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया।

    15 अगस्त को हांसी में हुआ था टकराव
    मुख्यमंत्री के हांसी स्थित नेहरू कॉलेज में स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले सिसाय पुल नाके पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। सुबह करीब 6:40 बजे 150 से 200 लोग ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ समारोह स्थल की ओर बढ़े थे। पुलिस के अनुसार बैरिकेड तोड़ने, ट्रैक्टर चढ़ाने और पथराव के प्रयास के बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर लाठीचार्ज किया गया। झड़प में हांसी के एसपी विनोद कुमार समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। मामले में कई धाराओं में केस दर्ज कर गिरफ्तारियां की गई थीं।

  • कचरे के ढेर से बढ़ी चिंता, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की मास्क लगाने की एडवाइजरी

    कचरे के ढेर से बढ़ी चिंता, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की मास्क लगाने की एडवाइजरी

     फतेहाबाद
    हरियाणा के फतेहाबाद समेत पांच शहरों में बीमारियां और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। लोगों को मास्क लगाने की एडवाइजरी जारी की है।

    यह हालात 11 दिनों से सफाई व्यवस्था ठप होने की वजह से बने हैं। फतेहाबाद, जाखल, भूना, टोहाना और रतिया में करीब 1210 टन कचरा सड़कों, बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों के बाहर जमा हो गया है।

    कूड़े के ढेरों से उठ रही दुर्गंध और गंदगी के कारण लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है। लोगों को आशंका है कि यदि जल्द सफाई नहीं हुई तो डेंगू, मलेरिया, डायरिया और अन्य संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

    शहरवासी बोले-टैक्स दे रहे, हमारी क्या गलती
    फतेहाबाद शहर में रहने वाले संजय, राजेश, मनोज और सुरेश का कहना है कि घरों से निकलने वाला कचरा रखने की जगह नहीं बची है। मजबूरी में लोग डंपिंग प्वाइंट पर कूड़ा डाल रहे हैं। प्रशासन को सफाई व्यवस्था बहाल करने के साथ कूड़े के ढेरों का तुरंत उठान करवाना चाहिए।

    उनका कहना है कि जब लोग टैक्स व कूड़ा उठाने का चार्ज दे रहे है तो व्यवस्था बनानी चाहिए, लेकिन नगरपरिषद व नगरपालिका इसमें फेल हुए है।  सफाई यूनियन ने हड़ताल को अब 18 अगस्त तक बढ़ा दिया है।

    ऐसे में आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।वहीं, जिला महामारी रोग विशेषज्ञ विष्णु मित्तल का कहना है कि कचरा इतना फैल गया है कि बीमारियां फैलने का खतरा है, ऐसे में लोग मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकलें।

     

  • हाईटेंशन तार से टकराया कैंटर, 40-50 श्रद्धालुओं में मची चीख-पुकार; गैस सिलेंडर फटने से टला बड़ा हाद

    हाईटेंशन तार से टकराया कैंटर, 40-50 श्रद्धालुओं में मची चीख-पुकार; गैस सिलेंडर फटने से टला बड़ा हाद

     घरौंडा
     शहर के वार्ड नंबर-15 में गंदे नाले के पास रविवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। राजस्थान के बागड़ धाम जा रहे श्रद्धालुओं से भरा कैंटर हाईटेंशन बिजली की तार के संपर्क में आ गया।

    तार छूते ही कैंटर में करंट दौड़ गया और उसमें सवार एक दर्जन से अधिक महिला, पुरुष और बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद कैंटर में आग भी लग गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि कैंटर में रखे गैस सिलेंडर नहीं फटे, वरना हादसा और भी भयावह हो सकता था।

    राजस्थान के बागड़ धाम जा रहे थे श्रद्धालु
    जानकारी के अनुसार घरौंडा से करीब 40 से 50 श्रद्धालु कैंटर में सवार होकर राजस्थान के बागड़ धाम के लिए धार्मिक यात्रा पर निकले थे। कैंटर में श्रद्धालुओं के साथ खाने-पीने का सामान भी रखा हुआ था। इसके अलावा कैंटर में गैस सिलेंडर भी रखे हुए थे, जिनका इस्तेमाल यात्रा के दौरान खाना बनाने के लिए किया जाना था।

    बताया जा रहा है कि कैंटर को शहर के वार्ड नंबर-15 स्थित गंदे नाले के पास खड़ा किया गया था। इसी दौरान कैंटर के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली की तार उसके संपर्क में आ गई। तार के कैंटर को छूते ही उसमें तेज करंट दौड़ गया। देखते ही देखते कैंटर में सवार श्रद्धालु करंट की चपेट में आ गए और कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए।

    करंट लगने के बाद कैंटर में लगी आग
    हाईटेंशन तार के संपर्क में आने के बाद कैंटर में आग भी लग गई। कैंटर के अंदर आग की लपटें उठती देख श्रद्धालुओं और आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। लोग घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने में जुट गए। सबसे बड़ी चिंता कैंटर में रखे गैस सिलेंडरों को लेकर थी।

    यदि आग की चपेट में आने से सिलेंडर फट जाते तो आसपास मौजूद लोगों की जान पर भी बड़ा खतरा पैदा हो सकता था और हादसा बेहद गंभीर रूप ले सकता था।

    स्थानीय लोगों की तत्परता से घायलों को कैंटर से बाहर निकाला गया और उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे के बाद मौके पर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए।

    सभी घायलों को करनाल ट्रामा सेंटर किया रेफर
    हादसे में झुलसे सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद करनाल के ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। गंभीर रूप से झुलसे महिला, पुरुष और बच्चों को उपचार के लिए करनाल ले जाया गया। हादसे की सूचना मिलते ही घायलों के परिजनों में भी हड़कंप मच गया और वे अपने परिजनों की कुशलक्षेम जानने के लिए अस्पताल की ओर दौड़ पड़े।

    धार्मिक यात्रा की खुशियां चीख-पुकार में बदलीं
    बताया जा रहा है कि सभी श्रद्धालु बागड़ धाम की धार्मिक यात्रा को लेकर उत्साहित थे। करीब 40 से 50 लोग एक साथ कैंटर में सवार होकर निकले थे। लेकिन वार्ड नंबर-15 में कुछ देर के लिए कैंटर खड़ा करना उनके लिए जिंदगी का सबसे खौफनाक पल बन गया। हाईटेंशन तार के संपर्क में आते ही कैंटर में बैठे लोगों के बीच चीख-पुकार मच गई।

    चालक की लापरवाही पर भी उठे सवाल
    हादसे के बाद कैंटर चालक की लापरवाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि कैंटर को हाईटेंशन तारों के नीचे खड़ा किया गया था तो वाहन की ऊंचाई और तारों की स्थिति को देखते हुए चालक को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए थी। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह और इसमें किसकी लापरवाही रही, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

    बड़ा सवाल— खतरनाक स्थान पर कैसे खड़ा हुआ कैंटर?
    हादसे ने बिजली की हाईटेंशन तारों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस स्थान पर कैंटर खड़ा था, वहां से हाईटेंशन तार गुजर रही थी। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि तारों की ऊंचाई कितनी थी और क्या वहां भारी वाहनों को खड़ा करने की अनुमति अथवा सुरक्षित व्यवस्था थी।

    अगर करंट लगने के बाद कैंटर में रखे गैस सिलेंडर फट जाते तो हादसे में झुलसे लोगों के अलावा आसपास खड़े लोगों और वाहनों को भी भारी नुकसान हो सकता था। समय रहते लोगों के कैंटर से बाहर निकलने और सिलेंडरों के न फटने से एक और बड़े हादसे की आशंका टल गई।

    पुलिस और प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। हादसे में झुलसे सभी घायलों का करनाल ट्रामा सेंटर में उपचार चल रहा है। घटना के बाद श्रद्धालुओं के परिवारों में दहशत और चिंता का माहौल बना हुआ है।

  • सरकारी मकान किराए पर देने वालों पर प्रशासन सख्त, उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई

    सरकारी मकान किराए पर देने वालों पर प्रशासन सख्त, उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई

    चंडीगढ़.

    सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को चंडीगढ़ में आवंटित सरकारी मकानों के दुरुपयोग, विशेषकर सबलेटिंग (किराये पर देने) की बढ़ती शिकायतों पर सरकार सख्त हो गई है। ऐसे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से स्व-प्रमाणन (सेल्फ-सर्टिफिकेशन) लिया जाएगा, जिन्हें चंडीगढ़ प्रशासन अथवा राज्य सरकार द्वारा सरकारी आवास आवंटित किए गए हैं।

    नियमों की अनदेखी कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक आवंटी को यह प्रमाणित करना होगा कि उसने आवंटित सरकारी आवास किसी अन्य व्यक्ति को किराये पर नहीं दिया है तथा वह स्वयं उसी आवास में रह रहा है।

    निर्माण संबंधी शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही है
    यूटी चंडीगढ़ की हाउस अलॉटमेंट कमेटी के सचिव ने सरकार को अवगत कराया है कि कर्मचारियों को जनरल पूल से आवंटित सरकारी आवासों में सबलेटिंग, अनधिकृत कब्जे, दुरुपयोग तथा बिना अनुमति किए गए निर्माण संबंधी शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा सरकार ने निर्णय लिया है कि सभी पात्र सरकारी कर्मचारियों से स्व-प्रमाणन प्राप्त किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवंटित सरकारी आवास का उपयोग नियमों के अनुरूप किया जा रहा है।

    मुख्य सचिव ने दिए निर्देश
    मुख्य सचिव ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, हरियाणा लोक सेवा आयोग, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग, हरियाणा विधानसभा, पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सीआइडी), लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) के इंजीनियर-इन-चीफ सहित सभी संबंधित कार्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने प्रशासनिक नियंत्रणाधीन ऐसे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से निर्धारित प्रमाणपत्र प्राप्त करना सुनिश्चित करें, जिन्हें सरकारी आवास आवंटित किए गए हैं।

  • पानीपत जंक्शन पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, डॉग स्क्वाड की जांच से यात्रियों में बढ़ी सतर्कता

    पानीपत जंक्शन पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, डॉग स्क्वाड की जांच से यात्रियों में बढ़ी सतर्कता

    पानीपत.

    स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर रेलवे जंक्शन पर शुक्रवार को सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। जीआरपी, आरपीएफ, डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ते (बीडीएस) ने संयुक्त रूप से सघन चेकिंग अभियान चलाया।

    करीब 45 मिनट तक चले इस अभियान के दौरान स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्म, प्रतीक्षालय और अन्य संवेदनशील स्थानों की गहन तलाशी ली गई।

    100 से अधिक यात्रियों के बैग खंगाले
    अभियान के दौरान 100 से अधिक यात्रियों के बैगों की जांच की गई। इसके अलावा प्रतीक्षालय में आराम कर रहे यात्रियों के सामान की भी तलाशी ली गई। डॉग स्क्वायड की मदद से स्टेशन परिसर के हर महत्वपूर्ण हिस्से की बारीकी से जांच की गई, ताकि किसी भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि का समय रहते पता लगाया जा सके। पूरे अभियान के दौरान किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति नहीं मिला। जांच पूरी होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने राहत की सांस ली। अधिकारियों ने यात्रियों से भी अपील की कि स्टेशन पर किसी लावारिस वस्तु को हाथ न लगाएं और ऐसी कोई वस्तु दिखाई देने पर तुरंत रेलवे पुलिस या आरपीएफ को सूचना दें।

    रेलवे जंक्शन पर रखी जा रही विशेष निगरानी
    जीआरपी थाना प्रभारी धर्मपाल ने बताया कि 15 अगस्त को लेकर रेलवे जंक्शन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसी के तहत संयुक्त चेकिंग अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस तक समय-समय पर इसी तरह के अभियान जारी रहेंगे, जिससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

  • हरियाणा में बदले नियम, कोचिंग सेंटरों पर लगेगा रेगुलेशन; आवासीय इलाकों में नर्सिंग होम को मंजूरी

    हरियाणा में बदले नियम, कोचिंग सेंटरों पर लगेगा रेगुलेशन; आवासीय इलाकों में नर्सिंग होम को मंजूरी

    चंडीगढ़.

    मुख्यमंत्री नायब सैनी की अध्यक्षता में वीरवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम प्रस्ताव पास हुए। इनमें कोचिंग संस्थानों के लिए कड़े नियम, 5,714.80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले विश्व बैंक वित्त पोषित वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम, रिहायशी कॉलोनियों में लीज पर नर्सिंग होम खोलने, महिला स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन योजना और शहरी क्षेत्रों के विकास से जुड़े लाइसेंस प्रक्रिया आसान बनाने को मंजूरी दी गई।

    प्रदेश सरकार ने कोचिंग संस्थानों पर एनओसी सहित कई शर्तें जोड़ी
    दिल्ली और लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुए हादसों से सबक लेते हुए प्रदेश सरकार ने कोचिंग संस्थानों के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। नौकरियों, पेशेवर पाठ्यक्रमों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले सभी निजी कोचिंग संस्थानों को अब नामित पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा। छात्रों और अभिभावकों को रिझाने के लिए भ्रामक दावे नहीं किए जा सकेंगे। कोचिंग सेंटर में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। स्कूल-कॉलेजों के समय के दौरान कोचिंग सेंटरों में पढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंत्रिमंडल की बैठक में "हरियाणा निजी कोचिंग संस्थान (पंजीकरण और विनियमन) नियम, 2026" के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

    छात्रों को देनी होंगी बुनियादी सुविधाएं
    छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाएं जैसे फर्नीचर, पर्याप्त रोशनी, पीने योग्य पानी, छात्र और छात्राओं के लिए अलग शौचालय और अग्नि-सुरक्षा उपायों जैसी सुविधाएं देनी होंगी। वहीं, चिकित्सा सहायता या प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट-एड), पार्किंग, पुस्तकालय, वाई-फाई, स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर प्रयोगशाला, छात्रावास और कैंटीन उपलब्ध करानी होंगी। संचालकों को बताना होगा कि भवन अपना है या लीज/किराए पर लिया गया है। अग्नि-सुरक्षा प्रमाणन, संरचनात्मक स्थिरता प्रमाणन और क्या भवन विशेष रूप से सक्षम (दिव्यांग) छात्रों के लिए बाधा मुक्त है। इसके अलावा कर्मचारियों के चरित्र और पूर्ववृत्त (एंटीसिडेंट्स) के सत्यापन के संबंध में भी जानकारी देनी जरूरी होगी।

    पोर्टल के जरिये होगा पंजीकरण
    निजी कोचिंग संस्थान के साथ-साथ नया कोचिंग सेंटर खोलने के लिए नामित पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा। पंजीकरण के लिए दस हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जो इलेक्ट्रानिक माध्यम से देय होगा। संबंधित प्राधिकरण 30 दिनों के भीतर आवेदनों की जांच करेगा और आवेदन सभी प्रकार से पूर्ण पाए जाने पर, तीन साल के लिए वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करेगा। पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए निजी कोचिंग संस्थान को अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र की समाप्ति से कम से कम एक महीने पहले 5,000 रुपये के नवीनीकरण शुल्क के साथ आवेदन करना होगा। आवेदन की जांच और त्रुटियों को दूर करने (यदि कोई हो) के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर नवीनीकरण प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा।

    वेबसाइट पर फीस, पाठ्यक्रमों की जानकारी देनी होगी
    पंजीकृत संस्थानों को निर्धारित रिकॉर्ड बनाए रखने और संबंधित प्राधिकरण को सालाना जानकारी प्रस्तुत करने के अलावा अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर अपेक्षित जानकारी अपलोड करना अनिवार्य होगा। पाठ्यक्रमों और पाठ्यक्रम-सामग्री और शुल्क संरचना, कक्षाओं की संख्या और क्षमता, प्रति बैच अधिकतम छात्रों की संख्या, शिक्षण, परामर्शदाता और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की योग्यता व बायोडाटा और छात्रों की संख्या के अनुपात में कोचिंग क्षेत्र के विवरण से संबंधित व्यापक जानकारी देनी जरूरी।

    वाटर सिक्योर हरियाणा: जल भविष्य को मिलेगी ताकत 45 लाख लोगों को सीधा लाभ
    मंत्रिमंडल की बैठक में विश्व बैंक वित्त पोषित ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ को मंजूरी दी गई। 5,714.80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस एकीकृत जल क्षेत्र कार्यक्रम से प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टरों में करीब 45 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। 4,000.36 करोड़ रुपये का विश्व बैंक ऋण और 1,714.44 करोड़ रुपये राज्य सरकार का हिस्सा होगा। इसे 15 प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टरों में लागू किया जाएगा, जिनमें 48.94 लाख एकड़ सिंचाई योग्य कमांड एरिया शामिल है। नहर सिंचाई की दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ाने, भूजल दोहन कम करने, भूजल रिचार्ज बढ़ाने और उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।

    120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं शुरू होंगी
    सूक्ष्म सिंचाई एवं कमांड एरिया विकास प्राधिकरण के तहत करीब 900 करोड़ रुपये से 620 वाटरकोर्स का पुनर्वास होगा। 600 करोड़ रुपये से 120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के स्तर पर करीब 2 लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि का वर्टिकल ड्रेनेज/सब-सर्फेस ड्रेनेज के जरिए सुधार किया जाएगा। 5 लाख एकड़ में डीएसआर (सीधी बिजाई) को बढ़ावा देने और ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत करीब 1.12 लाख एकड़ में फसल विविधीकरण का लक्ष्य रखा गया है।

    104 नहर चैनलों की होगी मरम्मत
    रियल टाइम जल प्रबंधन को तकनीक से जोड़ते हुए नहरों के स्वचालित एवं रियल टाइम संचालन के लिए 20 एससीएडीए स्थान स्थापित किए जाएंगे। पानी के डिस्चार्ज और प्रवाह की निगरानी के लिए 400 आरटीडीएएस स्थान/माप बिंदु बनाए जाएंगे। इससे नहर संचालन, जल लेखांकन और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डेटा आधारित बनाने में मदद मिलेगी। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के तहत करीब 2,484.87 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 104 नहर चैनलों का पुनर्वास किया जाएगा। इससे करीब 8.75 लाख एकड़ कमांड एरिया (सीसीए) को लाभ मिलेगा। भूजल रिचार्ज को बढ़ावा देने के लिए 248 करोड़ रुपये की लागत से 131 नए जलाशयों का निर्माण किया जाएगा।

    अन्य स्टार्टअप्स के लिए फायदे
    निजी या एंजल निवेशक से 25 लाख जुटाने पर सरकार भी 25 लाख रुपये तक की मैचिंग ग्रांट दे सकेगी। नई तकनीक का लाइसेंस लेने या टेक्नोलाजी ट्रांसफर के लिए 10 लाख तक सहायता मिलेगी। गुणवत्ता प्रमाणन पर खर्च की 50 प्रतिशत राशि, अधिकतम 25 लाख तक, एक बार वापस की जाएगी।

    एच-हब नाम से विश्वस्तरीय इन्क्यूबेटर बनेगा
    विद्यार्थियों को 10 हजार ‘डू-इट-योरसेल्फ’ (डीआईवाई) किट बांटी जाएंगी। एच-हब नाम से विश्वस्तरीय इन्क्यूबेटर स्थापित किया जाएगा, जहां स्टार्टअप को आधुनिक सुविधाओं के साथ तकनीकी और कारोबारी सहयोग मिलेगा। विश्वविद्यालयों और पालीटेक्निक के विद्यार्थी स्टार्टअप में अप्रेंटिसशिप कर सकेंगे। पात्र स्टार्टअप को प्रति अप्रेंटिस 7,500 प्रतिमाह तक स्टाइपेंड का 50 प्रतिशत वापस मिलेगा। एक स्टार्टअप अधिकतम 50 अप्रेंटिस का लाभ ले सकेगा। टेक्नोलाजी स्टार्टअप के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा स्टोरेज का खर्च भी नीति के दायरे में लाया गया है। हरियाणा आधारित स्टार्टअप भारत के किसी भी डेटा सेंटर पर हुए ऐसे खर्च का 75 प्रतिशत (अधिकतम ढाई लाख रुपये सालाना) पांच साल तक वापस ले सकेंगे।

    शहरी विकास से जुड़े लाइसेंस लेना होगा आसान
    कैबिनेट बैठक में हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन आफ अर्बन एरियाज रूल्स-1976 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। संशोधनों का मकसद लाइसेंस से जुड़े आवेदन, उनकी जांच, फैसले की सूचना और लाइसेंस के नवीनीकरण की प्रक्रिया को ज्यादा स्पष्ट बनाना है। यह बदलाव विधानसभा की अधीनस्थ विधान समिति की 2016-17 की 45वीं रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के आधार पर किया गया है।

    लोगों को घर के नजदीक मिलेगी उपचार की सुविधा
    रिहायशी कॉलोनियों में लीज की जमीन पर भी नर्सिंग होम खोले जा सकेंगे। नए नर्सिंग होम के लिए डाक्टर के पास खुद की जमीन की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। बैठक में मौजूदा नीति में संशोधन को मंजूरी दी गई। इससे उन डाक्टरों को राहत मिलेगी, जो अपनी जमीन नहीं होने के कारण रिहायशी इलाकों में नर्सिंग होम शुरू नहीं कर पा रहे थे। लोगों को उनके घर के नजदीक ही उपचार और भर्ती की सुविधा मिल सकेगी।

    महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप के लिए विशेष पैकेज
    महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप के लिए नीति में विशेष पैकेज रखा गया है। उन्हें एक साल तक लीज रेंट का 50 प्रतिशत, अधिकतम 10 लाख रुपये तक वापस मिलेगा। सात साल तक नेट एचजीएसटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति होगी। इसकी सीमा फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट के 100%तक रहेगी। सामान्य स्टार्टअप के लिए नेट एचजीएसटी की 50% प्रतिपूर्ति सात साल तक जारी रहेगी। महिला उद्यमियों के हस्तशिल्प, आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य एवं वेलनेस उत्पाद तथा स्थानीय खाद्य उत्पादों के लिए 50 हजार से एक लाख रुपये तक माइक्रो-ग्रांट भी दिए जाएंगे।

    इन डॉक्टरों को मिलेगा लाभ
    आयुष और एलोपैथिक दोनों पद्धतियों के योग्य चिकित्सक रिहायशी प्लाट पर नर्सिंग होम स्थापित कर सकेंगे। प्लाट डाक्टर के नाम होना जरूरी नहीं बल्कि वह उसे लीज पर लेकर भी सुविधा शुरू कर सकेगा। इसके लिएकन्वर्जन चार्ज देना अनिवार्य होगा। प्लाट पर नर्सिंग होम चलाने के लिए अनुमति लीज की अवधि तक ही वैध रहेगी। डाक्टर के पास संबंधित मेडिकल काउंसिल या आयुष काउंसिल का वैध पंजीकरण नंबर होना चाहिए।

    हर 10वां सामान अब हरियाणा के स्टार्टअप से खरीदेगी सरकार
    कैबिनेट बैठक में हरियाणा स्टेट स्टार्टअप पालिसी-2022 के सप्लीमेंट को मंजूरी दी गई। कारपोरेट सेक्टर को भी स्थानीय स्टार्टअप के साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकारी खरीद में अब प्रदेश सरकार हर दसवां सामान प्रदेश के स्टार्टअप से खरीदेगी। कोई निजी या एंजल निवेशक स्टार्टअप में 25 लाख रुपये लगाता है तो सरकार भी इतनी ही मैचिंग ग्रांट देगी। कारपोरेट कंपनियां किसी स्टार्टअप के साथ पायलट प्रोजेक्ट शुरू करती हैं और उसे आगे बढ़ाकर वास्तविक अनुबंध में बदलती हैं तो सरकार 10 लाख रुपये तक की मैचिंग ग्रांट देगी।

    ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ के मुख्य बिंदु

    • कार्यक्रम की अनुमानित लागत – 5,714.80 करोड़ रुपये
    • विश्व बैंक से ऋण- 4,000.36 करोड़ रुपये
    • राज्य सरकार का हिस्सा- 1,714.44 करोड़ रुपये
    • संभावित प्रत्यक्ष लाभार्थी – 45 लाख प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टर- 15
    • प्रदेश में इस समय सिंचाई योग्य कमांड एरिया- 48.94 लाख एकड़।

    किसानों के लिए क्या बदलेगा?

    • सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
    • नहरों में पानी की संचरण हानि कम करने पर जोर होगा।
    • सूक्ष्म सिंचाई से पानी के अधिक दक्ष उपयोग को बढ़ावा।
    • डीएसआर, फसल विविधीकरण से कृषि क्षेत्र में पानी की मांग घटाने का प्रयास होगा।
    • जलभराव वाली भूमि के सुधार से कृषि क्षेत्र के उपयोग में मदद।
    • भूजल रिचार्ज, उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग से जल स्रोतों पर दबाव कमगा।
    • जलवायु चुनौतियों के बीच किसानों की आय को अधिक टिकाऊ बनाने पर जोर रहेगा।
  • हरियाणा कैबिनेट के बड़े फैसले, कोचिंग संस्थानों के नियम सख्त; स्टार्टअप और नर्सिंग होम नीति में बदलाव

    हरियाणा कैबिनेट के बड़े फैसले, कोचिंग संस्थानों के नियम सख्त; स्टार्टअप और नर्सिंग होम नीति में बदलाव

     चंडीगढ़
     मुख्यमंत्री नायब सैनी की अध्यक्षता में वीरवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम प्रस्ताव पास हुए। इनमें कोचिंग संस्थानों के लिए कड़े नियम, 5,714.80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले विश्व बैंक वित्त पोषित वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम, रिहायशी कॉलोनियों में लीज पर नर्सिंग होम खोलने, महिला स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन योजना और शहरी क्षेत्रों के विकास से जुड़े लाइसेंस प्रक्रिया आसान बनाने को मंजूरी दी गई।

    प्रदेश सरकार ने कोचिंग संस्थानों पर एनओसी सहित कई शर्तें जोड़ी
    दिल्ली और लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुए हादसों से सबक लेते हुए प्रदेश सरकार ने कोचिंग संस्थानों के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। नौकरियों, पेशेवर पाठ्यक्रमों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले सभी निजी कोचिंग संस्थानों को अब नामित पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा।

    छात्रों और अभिभावकों को रिझाने के लिए भ्रामक दावे नहीं किए जा सकेंगे। कोचिंग सेंटर में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। स्कूल-कॉलेजों के समय के दौरान कोचिंग सेंटरों में पढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंत्रिमंडल की बैठक में "हरियाणा निजी कोचिंग संस्थान (पंजीकरण और विनियमन) नियम, 2026" के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

    छात्रों को देनी होंगी बुनियादी सुविधाएं
    छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाएं जैसे फर्नीचर, पर्याप्त रोशनी, पीने योग्य पानी, छात्र और छात्राओं के लिए अलग शौचालय और अग्नि-सुरक्षा उपायों जैसी सुविधाएं देनी होंगी।

    वहीं, चिकित्सा सहायता या प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट-एड), पार्किंग, पुस्तकालय, वाई-फाई, स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर प्रयोगशाला, छात्रावास और कैंटीन उपलब्ध करानी होंगी। संचालकों को बताना होगा कि भवन अपना है या लीज/किराए पर लिया गया है।

    अग्नि-सुरक्षा प्रमाणन, संरचनात्मक स्थिरता प्रमाणन और क्या भवन विशेष रूप से सक्षम (दिव्यांग) छात्रों के लिए बाधा मुक्त है। इसके अलावा कर्मचारियों के चरित्र और पूर्ववृत्त (एंटीसिडेंट्स) के सत्यापन के संबंध में भी जानकारी देनी जरूरी होगी।

    पोर्टल के जरिये होगा पंजीकरण
    निजी कोचिंग संस्थान के साथ-साथ नया कोचिंग सेंटर खोलने के लिए नामित पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा। पंजीकरण के लिए दस हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जो इलेक्ट्रानिक माध्यम से देय होगा।

    संबंधित प्राधिकरण 30 दिनों के भीतर आवेदनों की जांच करेगा और आवेदन सभी प्रकार से पूर्ण पाए जाने पर, तीन साल के लिए वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करेगा

    पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए निजी कोचिंग संस्थान को अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र की समाप्ति से कम से कम एक महीने पहले 5,000 रुपये के नवीनीकरण शुल्क के साथ आवेदन करना होगा। आवेदन की जांच और त्रुटियों को दूर करने (यदि कोई हो) के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर नवीनीकरण प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा।

    वेबसाइट पर फीस, पाठ्यक्रमों की जानकारी देनी होगी
    पंजीकृत संस्थानों को निर्धारित रिकॉर्ड बनाए रखने और संबंधित प्राधिकरण को सालाना जानकारी प्रस्तुत करने के अलावा अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर अपेक्षित जानकारी अपलोड करना अनिवार्य होगा।

    पाठ्यक्रमों और पाठ्यक्रम-सामग्री और शुल्क संरचना, कक्षाओं की संख्या और क्षमता, प्रति बैच अधिकतम छात्रों की संख्या, शिक्षण, परामर्शदाता और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की योग्यता व बायोडाटा और छात्रों की संख्या के अनुपात में कोचिंग क्षेत्र के विवरण से संबंधित व्यापक जानकारी देनी जरूरी।

    वाटर सिक्योर हरियाणा: जल भविष्य को मिलेगी ताकत 45 लाख लोगों को सीधा
    लाभ

    मंत्रिमंडल की बैठक में विश्व बैंक वित्त पोषित ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ को मंजूरी दी गई। 5,714.80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस एकीकृत जल क्षेत्र कार्यक्रम से प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टरों में करीब 45 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

    4,000.36 करोड़ रुपये का विश्व बैंक ऋण और 1,714.44 करोड़ रुपये राज्य सरकार का हिस्सा होगा। इसे 15 प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टरों में लागू किया जाएगा, जिनमें 48.94 लाख एकड़ सिंचाई योग्य कमांड एरिया शामिल है। नहर सिंचाई की दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ाने, भूजल दोहन कम करने, भूजल रिचार्ज बढ़ाने और उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।

    120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं शुरू होंगी
    सूक्ष्म सिंचाई एवं कमांड एरिया विकास प्राधिकरण के तहत करीब 900 करोड़ रुपये से 620 वाटरकोर्स का पुनर्वास होगा। 600 करोड़ रुपये से 120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।

    कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के स्तर पर करीब 2 लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि का वर्टिकल ड्रेनेज/सब-सर्फेस ड्रेनेज के जरिए सुधार किया जाएगा। 5 लाख एकड़ में डीएसआर (सीधी बिजाई) को बढ़ावा देने और ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत करीब 1.12 लाख एकड़ में फसल विविधीकरण का लक्ष्य रखा गया है।

    104 नहर चैनलों की होगी मरम्मत
    रियल टाइम जल प्रबंधन को तकनीक से जोड़ते हुए नहरों के स्वचालित एवं रियल टाइम संचालन के लिए 20 एससीएडीए स्थान स्थापित किए जाएंगे। पानी के डिस्चार्ज और प्रवाह की निगरानी के लिए 400 आरटीडीएएस स्थान/माप बिंदु बनाए जाएंगे। इससे नहर संचालन, जल लेखांकन और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डेटा आधारित बनाने में मदद मिलेगी।

    सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के तहत करीब 2,484.87 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 104 नहर चैनलों का पुनर्वास किया जाएगा। इससे करीब 8.75 लाख एकड़ कमांड एरिया (सीसीए) को लाभ मिलेगा। भूजल रिचार्ज को बढ़ावा देने के लिए 248 करोड़ रुपये की लागत से 131 नए जलाशयों का निर्माण किया जाएगा

    अन्य स्टार्टअप्स के लिए फायदे
    निजी या एंजल निवेशक से 25 लाख जुटाने पर सरकार भी 25 लाख रुपये तक की मैचिंग ग्रांट दे सकेगी। नई तकनीक का लाइसेंस लेने या टेक्नोलाजी ट्रांसफर के लिए 10 लाख तक सहायता मिलेगी। गुणवत्ता प्रमाणन पर खर्च की 50 प्रतिशत राशि, अधिकतम 25 लाख तक, एक बार वापस की जाएगी।

    एच-हब नाम से विश्वस्तरीय इन्क्यूबेटर बनेगा
    विद्यार्थियों को 10 हजार ‘डू-इट-योरसेल्फ’ (डीआईवाई) किट बांटी जाएंगी। एच-हब नाम से विश्वस्तरीय इन्क्यूबेटर स्थापित किया जाएगा, जहां स्टार्टअप को आधुनिक सुविधाओं के साथ तकनीकी और कारोबारी सहयोग मिलेगा। विश्वविद्यालयों और पालीटेक्निक संस्थानों के विद्यार्थी स्टार्टअप में अप्रेंटिसशिप कर सकेंगे।

    पात्र स्टार्टअप को प्रति अप्रेंटिस 7,500 प्रतिमाह तक स्टाइपेंड का 50 प्रतिशत वापस मिलेगा। एक स्टार्टअप अधिकतम 50 अप्रेंटिस का लाभ ले सकेगा।

    टेक्नोलाजी स्टार्टअप के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा स्टोरेज का खर्च भी नीति के दायरे में लाया गया है। हरियाणा आधारित स्टार्टअप भारत के किसी भी डेटा सेंटर पर हुए ऐसे खर्च का 75 प्रतिशत (अधिकतम ढाई लाख रुपये सालाना) पांच साल तक वापस ले सकेंगे।

    शहरी विकास से जुड़े लाइसेंस लेना होगा आसान
    कैबिनेट बैठक में हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन आफ अर्बन एरियाज रूल्स-1976 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। संशोधनों का मकसद लाइसेंस से जुड़े आवेदन, उनकी जांच, फैसले की सूचना और लाइसेंस के नवीनीकरण की प्रक्रिया को ज्यादा स्पष्ट बनाना है।

    यह बदलाव विधानसभा की अधीनस्थ विधान समिति की 2016-17 की 45वीं रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के आधार पर किया गया है।

    लोगों को घर के नजदीक मिलेगी उपचार की सुविधा
    रिहायशी कॉलोनियों में लीज की जमीन पर भी नर्सिंग होम खोले जा सकेंगे। नए नर्सिंग होम के लिए डाक्टर के पास खुद की जमीन की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।

    बैठक में मौजूदा नीति में संशोधन को मंजूरी दी गई। इससे उन डाक्टरों को राहत मिलेगी, जो अपनी जमीन नहीं होने के कारण रिहायशी इलाकों में नर्सिंग होम शुरू नहीं कर पा रहे थे। लोगों को उनके घर के नजदीक ही उपचार और भर्ती की सुविधा मिल सकेगी।

    महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप के लिए विशेष पैकेज
    महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप के लिए नीति में विशेष पैकेज रखा गया है। उन्हें एक साल तक लीज रेंट का 50 प्रतिशत, अधिकतम 10 लाख रुपये तक वापस मिलेगा। सात साल तक नेट एचजीएसटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति होगी। इसकी सीमा फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट के 100%तक रहेगी।

    सामान्य स्टार्टअप के लिए नेट एचजीएसटी की 50% प्रतिपूर्ति सात साल तक जारी रहेगी। महिला उद्यमियों के हस्तशिल्प, आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य एवं वेलनेस उत्पाद तथा स्थानीय खाद्य उत्पादों के लिए 50 हजार से एक लाख रुपये तक माइक्रो-ग्रांट भी दिए जाएंगे।

    इन डॉक्टरों को मिलेगा लाभ
    आयुष और एलोपैथिक दोनों पद्धतियों के योग्य चिकित्सक रिहायशी प्लाट पर नर्सिंग होम स्थापित कर सकेंगे। प्लाट डाक्टर के नाम होना जरूरी नहीं बल्कि वह उसे लीज पर लेकर भी सुविधा शुरू कर सकेगा।

    इसके लिएकन्वर्जन चार्ज देना अनिवार्य होगा। प्लाट पर नर्सिंग होम चलाने के लिए अनुमति लीज की अवधि तक ही वैध रहेगी। डाक्टर के पास संबंधित मेडिकल काउंसिल या आयुष काउंसिल का वैध पंजीकरण नंबर होना चाहिए।

    हर 10वां सामान अब हरियाणा के स्टार्टअप से खरीदेगी सरकार
    कैबिनेट बैठक में हरियाणा स्टेट स्टार्टअप पालिसी-2022 के सप्लीमेंट को मंजूरी दी गई। कारपोरेट सेक्टर को भी स्थानीय स्टार्टअप के साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

    सरकारी खरीद में अब प्रदेश सरकार हर दसवां सामान प्रदेश के स्टार्टअप से खरीदेगी। कोई निजी या एंजल निवेशक स्टार्टअप में 25 लाख रुपये लगाता है तो सरकार भी इतनी ही मैचिंग ग्रांट देगी। कारपोरेट कंपनियां किसी स्टार्टअप के साथ पायलट प्रोजेक्ट शुरू करती हैं और उसे आगे बढ़ाकर वास्तविक अनुबंध में बदलती हैं तो सरकार 10 लाख रुपये तक की मैचिंग ग्रांट देगी।

    ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ के मुख्य बिंदु
        कार्यक्रम की अनुमानित लागत – 5,714.80 करोड़ रुपये
        विश्व बैंक से ऋण- 4,000.36 करोड़ रुपये
        राज्य सरकार का हिस्सा- 1,714.44 करोड़ रुपये
        संभावित प्रत्यक्ष लाभार्थी – 45 लाख प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टर- 15
        प्रदेश में इस समय सिंचाई योग्य कमांड एरिया- 48.94 लाख एकड़।

    किसानों के लिए क्या बदलेगा?

    •     सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
    •     नहरों में पानी की संचरण हानि कम करने पर जोर होगा।
    •     सूक्ष्म सिंचाई से पानी के अधिक दक्ष उपयोग को बढ़ावा।
    •     डीएसआर और फसल विविधीकरण से कृषि क्षेत्र में पानी की मांग घटाने का प्रयास होगा।
    •     जलभराव वाली भूमि के सुधार से कृषि क्षेत्र के उपयोग में मदद।
    •     भूजल रिचार्ज और उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग से जल स्रोतों पर दबाव कम होगा।
    •     जलवायु चुनौतियों के बीच किसानों की आय को अधिक टिकाऊ बनाने पर जोर रहेगा।