Category: हरियाणा

  • हरियाणा में नकली पनीर-घी के खिलाफ बड़ा एक्शन, 70% पनीर फेल; उत्पादन से बिक्री तक पर रोक

    हरियाणा में नकली पनीर-घी के खिलाफ बड़ा एक्शन, 70% पनीर फेल; उत्पादन से बिक्री तक पर रोक

     चंडीगढ़
     हरियाणा में दूध की जगह वनस्पति तेल, स्टार्च और रसायनों से बने पनीर और घी की बिक्री को अब अपराध माना जाएगा। प्रदेश सरकार ने एनालॉग या नान-डेयरी पनीर और घी के उत्पादन व बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे सामान को न केवल जब्त कर नष्ट किया जाएगा, बल्कि दोषी को जेल की सजा भी काटनी पड़ सकती है।

    ढाबों और होटलों में मक्खन के नाम पर परोसे जा रहे वनस्पति तेल तथा देसी घी के नाम पर मिठाइयों में पाम आयल के इस्तेमाल से लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने यह कदम उठाया है।

    बाजार में बिक रहा 70 फीसदी पनीर नकली
    हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की सरकारें पहले ही नकली पनीर और घी पर प्रतिबंध लगा चुकी हैं। अब हरियाणा भी इस लिस्ट में शामिल हो गया है। प्रदेश में स्थिति यह है कि बाजार में बिक रहा 70 प्रतिशत पनीर नकली है।
    यह वीडियो भी देखें

    एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक पनीर के कुल 285 नमूने लिए गए, जिनमें 200 नमूने फेल निकले। इनमें 171 निम्न स्तरीय और 29 असुरक्षित श्रेणी में पाए गए। अधिकतर निर्माता कच्चे दूध की बजाय दुग्ध पाउडर या वनस्पति तेल से छेना या पनीर तैयार कर रहे हैं।

    त्योहारी मौसम शुरू होने से पहले ही नकली पनीर और मिलावटी घी का इस्तेमाल रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा आयुक्त डा. मनोज कुमार ने नियम अधिसूचित कर दिए हैं। यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।

    अगर किसी पनीर या देसी घी को इस तरह बाजार में बेचा जाता है कि ग्राहक उसे असली दूध से बना उत्पाद समझे, तो उसे नकली या इमिटेशन डेयरी प्रोडक्ट की श्रेणी में माना जाएगा। एनालाग या नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण पर रोक के साथ ही ऐसे उत्पाद की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग, स्टोरेज और सप्लाई तथा थोक व खुदरा बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। पनीर व छेना के लिए कई मानक पूरे करने होंगे।

    क्या होता है एनालॉग पनीर?
    एनालॉग पनीर को बनाने में दूध की बजाय वनस्पति तेल या फैट, पाम आयल, स्टार्च, सोया या दूसरे पौधों से मिलने वाले प्रोटीन जैसी चीजों का उपयोग किया जाता है। स्टेबलाइजर, इमल्सीफायर और फ्लेवर मिलाए जाते हैं।

    पैक्ड पनीर बेच रहे हैं तो पैकेट पर “नॉन-डेयरी” या “एनालॉग” लिखा होना अनिवार्य होगा। होटल-ढाबे में परोसे जा रहे पनीर को लेकर मेनू में “एनालॉग” लिखना पड़ेगा।

    घी के नाम पर हो रहा ‘खेल’ “पूजा हेतु घी”, “दीया हेतु घी”, “वनस्पति घी”, “कुकिंग घी”, “टेबल घी” और “हवन हेतु घी के नाम पर वनस्पति तेलों व वनस्पति वसा से बना सामान बेचा जा रहा है। रासायनिक पदार्थ, सुगंध और कणिकायन कारक मिलने से सुगंधित हो जाता है। मिठाइयों में इनका खूब प्रयोग हो रहा है।

     

  • फिर जेल से बाहर आएगा राम रहीम! मिली 21 दिन की पैरोल, पांच साल में 17वीं बार रिहाई

    फिर जेल से बाहर आएगा राम रहीम! मिली 21 दिन की पैरोल, पांच साल में 17वीं बार रिहाई

    रोहतक.

    डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर पैरोल मिल गई है। राम रहीम को 21 दिन की पैरोल दी गई है। यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा काट रहा राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है।

    जेल से निकलने के बाद वह रोहतक से सीधा सिरसा पहुंचेगा। इससे पहले डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को मई, 2026 में 23 दिन की पैरोल दी गई थी। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने साल 25 अगस्त, 2017 में गुरमीत राम रहीम को दो साध्वियों से दुष्कर्म मामले में दोषी करार दिया था। जिसके बाद साल 28 अगस्त, 2017 को दोनों मामलों में अदालत ने राम रहीम को 10-10 साल यानी कुल 20 साल की सजा सुनाई थी।

    पैरोल की अवधि को कारावास की अवधि में नहीं गिना जाता
    कारागार नियमों के अनुसार, दोषी प्रतिवर्ष अधिकतम 10 सप्ताह की पैरोल का लाभ उठा सकते हैं। पैरोल पर बिताया गया समय सजा की अवधि में जोड़ा जाता है और इसे जेल में बिताए गए समय में नहीं गिना जाता। 10 वर्ष से अधिक की सजा पाए दोषियों को प्रतिवर्ष तीन सप्ताह की पैरोल भी मिलती है, जिसे जेल में बिताए गए समय में गिना जाता है। राम रहीम को एक पूर्व डेरा प्रबंधक और एक पत्रकार की हत्याओं में दोषी ठहराया गया था, हालांकि उच्च न्यायालय ने उन्हें दोनों मामलों में बरी कर दिया था।

  • नकली पनीर बेचना पड़ेगा भारी! हरियाणा में आज से नॉन-डेयरी प्रोडक्ट्स पर प्रतिबंध

    नकली पनीर बेचना पड़ेगा भारी! हरियाणा में आज से नॉन-डेयरी प्रोडक्ट्स पर प्रतिबंध

    चंडीगढ़.

    हरियाणा में दूध की जगह वनस्पति तेल, स्टार्च और रसायनों से बने पनीर और घी की बिक्री को अब अपराध माना जाएगा। प्रदेश सरकार ने एनालॉग या नान-डेयरी पनीर और घी के उत्पादन व बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है।

    ऐसे सामान को न केवल जब्त कर नष्ट किया जाएगा, बल्कि दोषी को जेल की सजा भी काटनी पड़ सकती है। ढाबों और होटलों में मक्खन के नाम पर परोसे जा रहे वनस्पति तेल तथा देसी घी के नाम पर मिठाइयों में पाम आयल के इस्तेमाल से लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने यह कदम उठाया है।

    बाजार में बिक रहा 70 फीसदी पनीर नकली
    हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की सरकारें पहले ही नकली पनीर और घी पर प्रतिबंध लगा चुकी हैं। अब हरियाणा भी इस लिस्ट में शामिल हो गया है। प्रदेश में स्थिति यह है कि बाजार में बिक रहा 70 प्रतिशत पनीर नकली है। एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक पनीर के कुल 285 नमूने लिए गए, जिनमें 200 नमूने फेल निकले। इनमें 171 निम्न स्तरीय और 29 असुरक्षित श्रेणी में पाए गए। अधिकतर निर्माता कच्चे दूध की बजाय दुग्ध पाउडर या वनस्पति तेल से छेना या पनीर तैयार कर रहे हैं। त्योहारी मौसम शुरू होने से पहले ही नकली पनीर और मिलावटी घी का इस्तेमाल रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा आयुक्त डा. मनोज कुमार ने नियम अधिसूचित कर दिए हैं। यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। अगर किसी पनीर या देसी घी को इस तरह बाजार में बेचा जाता है कि ग्राहक उसे असली दूध से बना उत्पाद समझे, तो उसे नकली या इमिटेशन डेयरी प्रोडक्ट की श्रेणी में माना जाएगा। एनालाग या नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण पर रोक के साथ ही ऐसे उत्पाद की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग, स्टोरेज और सप्लाई तथा थोक व खुदरा बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। पनीर व छेना के लिए कई मानक पूरे करने होंगे।

    क्या होता है एनालॉग पनीर?
    एनालॉग पनीर को बनाने में दूध की बजाय वनस्पति तेल या फैट, पाम आयल, स्टार्च, सोया या दूसरे पौधों से मिलने वाले प्रोटीन जैसी चीजों का उपयोग किया जाता है। स्टेबलाइजर, इमल्सीफायर और फ्लेवर मिलाए जाते हैं। पैक्ड पनीर बेच रहे हैं तो पैकेट पर “नॉन-डेयरी” या “एनालॉग” लिखा होना अनिवार्य होगा। होटल-ढाबे में परोसे जा रहे पनीर को लेकर मेनू में “एनालॉग” लिखना पड़ेगा। घी के नाम पर हो रहा ‘खेल’ “पूजा हेतु घी”, “दीया हेतु घी”, “वनस्पति घी”, “कुकिंग घी”, “टेबल घी” और “हवन हेतु घी के नाम पर वनस्पति तेलों व वनस्पति वसा से बना सामान बेचा जा रहा है। रासायनिक पदार्थ, सुगंध और कणिकायन कारक मिलने से सुगंधित हो जाता है। मिठाइयों में इनका खूब प्रयोग हो रहा है।

  • हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी स्कूलों में प्रवेश से पहले लेनी होगी अनुमति

    हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी स्कूलों में प्रवेश से पहले लेनी होगी अनुमति

    चंडीगढ़
    हरियाणा सरकार ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा है कि सरकारी स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों की एंट्री प्रतिबंधित रहेगी।

    यहां तक कि किसी बच्चे के अभिभावक को भी बिना अनुमति स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। मंत्री के मुताबिक, बिना जांच-पड़ताल के किसी भी व्यक्ति को स्कूल में प्रवेश देना विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं है।

    शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि स्कूल में किसी बाहरी व्यक्ति की एंट्री स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) की अनुमति के बाद ही होनी चाहिए। उनका कहना है कि बिना जांच किए किसी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश देने से यह पता नहीं चल सकता कि वह व्यक्ति वहां आकर क्या गतिविधि करेगा। इसलिए विद्यार्थियों और खासकर छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू की जा रही है।

    मंत्री के अनुसार, गांव के प्रबुद्ध और जिम्मेदार लोगों को स्कूल से संबंधित आवश्यक कार्यों के लिए अनुमति के साथ प्रवेश दिया जा सकेगा। इसका उद्देश्य स्कूलों में प्रवेश पूरी तरह बंद करना नहीं, बल्कि अनधिकृत और बिना सत्यापन वाले प्रवेश पर रोक लगाना है।

    इस व्यवस्था से स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच संपर्क के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया बनाए जाने की उम्मीद है। किसी अभिभावक को बच्चे से संबंधित जरूरी काम होने पर स्कूल प्रबंधन से अनुमति लेनी होगी।

    शिक्षा विभाग में भी लागू हुआ नया स्थायी आदेश
    दूसरी ओर, हरियाणा के स्कूल शिक्षा विभाग ने विभागीय कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए नया स्थायी आदेश जारी किया है। इस आदेश में अलग-अलग स्तर के अधिकारियों के अधिकार और जिम्मेदारियां स्पष्ट कर दी गई हैं। अब विभाग के विभिन्न मामलों का निपटारा तय स्तर के अधिकारी कर सकेंगे।

    नए आदेश के साथ पुराने सभी आदेश रद कर दिए गए हैं। इसका मकसद फाइलों के निपटारे में स्पष्टता लाना और यह तय करना है कि किस प्रकार का मामला किस अधिकारी के पास जाएगा।

    बड़े नीतिगत मामले मुख्यमंत्री स्तर पर
    नए आदेश के मुताबिक, ग्रुप-ए अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति, निलंबन, सजा और विदेश भेजने जैसे महत्वपूर्ण मामले मुख्यमंत्री के स्तर पर निपटाए जाएंगे। बड़े नीतिगत फैसले, गंभीर वित्तीय अनियमितताएं तथा सरकारी स्कूलों को खोलने या बंद करने से जुड़े मामले भी मुख्यमंत्री स्तर पर जाएंगे।

    स्कूल शिक्षा मंत्री के स्तर पर ग्रुप-बी, सी और डी कर्मचारियों की नियुक्ति और सजा से जुड़े मामले आएंगे। इसके अलावा अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी देने, प्रशिक्षण के लिए भेजने, शिक्षा नियमों में बदलाव और एसीआर से संबंधित अपीलों जैसे मामलों पर भी मंत्री स्तर से फैसला लिया जाएगा।

    एसीएस और प्रमुख सचिव स्तर पर अपीलों समेत कई मामले
    अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव स्तर पर अपील, परिवीक्षा अवधि बढ़ाने, छोटे दंड, विधानसभा समितियों को जवाब, सेवा अवधि बढ़ाने, ऑडिट आपत्तियों और पूछताछ अधिकारी की नियुक्ति जैसे मामलों का निपटारा किया जा सकेगा।

    वहीं सचिव और विशेष सचिव स्तर पर क्षेत्रीय अधिकारियों की सजा के खिलाफ अपील, छोटे कर्मचारियों की सजा, एक लाख रुपये तक की वित्तीय हानि माफ करने, मेडिकल बिल पास करने तथा पासपोर्ट के लिए एनओसी देने जैसे मामले निपटाए जाएंगे।

    संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव को भी अधिकार
    संयुक्त सचिव/अतिरिक्त सचिव स्तर पर छुट्टियां मंजूर करने, 25 हजार रुपये तक की हानि माफ करने, नाम या जन्मतिथि में बदलाव और निजी स्कूलों से संबंधित शिकायतों जैसे मामलों का निपटारा किया जा सकेगा।

    शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के नए आदेश में यह भी व्यवस्था की गई है कि यदि मंत्री या कोई वरिष्ठ अधिकारी शहर से बाहर है और किसी मामले में तत्काल निर्णय जरूरी है, तो संबंधित अधिकारी के नीचे का अधिकृत अधिकारी फैसला ले सकेगा।

    हालांकि, ऐसे फैसले की जानकारी बाद में संबंधित मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी को देना अनिवार्य होगा। किसी निर्णय पर केवल इस आधार पर सवाल नहीं उठाया जा सकेगा कि फाइल संबंधित अधिकारी के पास निर्धारित क्रम के अनुसार नहीं पहुंची थी।

  • हरियाणा में 10 नए IMT बनेंगे, डिफेंस उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार

    हरियाणा में 10 नए IMT बनेंगे, डिफेंस उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार

    चंडीगढ़
    हरियाणा में जल्द ही रक्षा क्षेत्र के लिए नई नीति लांच की जाएगी। रक्षा उपकरणों के विनिर्माण और संबंधित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्थानों पर क्लस्टर आधारित विकास की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।

    मुंबई में आयोजित हैपनिंग हरियाणा 2.0 में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने निवेशकों के साथ राउंड टेबल कांफ्रेंस में कहा कि हिसार स्थित महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट के साथ मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है।

    इसी क्षेत्र में डिफेंस क्लस्टर को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा। इसके अतिरिक्त जेवर एयरपोर्ट के निकट हरियाणा क्षेत्र में एक अन्य औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की योजना पर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है।

    उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिेंह के साथ निवेशकाें और उद्योगपतियों के साथ चर्चा में नायब ने कहा कि 10 नए आइएमटी स्थापित करने के लिए भूमि खरीदने का काम तेजी से चल रहा है। प्रदेश को ऐसा भरोसेमंद, रिस्पान्सिव और इन्वेस्टर-फ्रेंडली राज्य बनाएंगे।

    निवेशकों के सभी सुझावों पर संबंधित विभागों के साथ मिलकर टाइम-बाउंड एक्शन प्लान में बदलने का प्रयास किया जाएगा। भूमि, अप्रूवल और अन्य प्रक्रियाओं से संबंधित विषयों के सरलीकरण के लिए भी सरकार आवश्यक सुधार करेगी।

    निवेशकों की पोर्टफोलियो कंपनियां हरियाणा में एक्सपेंशन, मैन्युफैक्चरिंग, जीसीसी टेक्नोलाजी और लाजिस्टिक के क्षेत्र में अवसर तलाश रही हैं। प्रदेश सरकार केवल निवेश नहीं, बल्कि उद्योग जगत के साथ लांग-टर्म पार्टनरशिप स्थापित करना चाहती है।

    ग्लोबल इन्वेस्टर समिट का दिया न्योता
    मुख्यमंत्री ने निवेशकों और उनकी लीडरशिप टीम को अप्रैल 2027 में हरियाणा में आयोजित होने वाले हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में भागीदारी करने का निमंत्रण दिया।उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में निवेश का ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया जाए, जहां नीतियों का सरलीकरण, तेज अप्रूवल, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल्ड मैनपावर और प्रभावी इन्वेस्टर फैसिलिटेशन एक साथ उपलब्ध हों।

    राउंड टेबल कांफ्रेंस में बड़ी कंपनियों जैसे ईक्यूटी, वारबर्ग पिंकस, डेविडसन केम्पनर इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स इंडिया, प्रेमजी इन्वेस्ट, वाटरफील्ड एडवाइजर्स, 360वन(अल्टरनेट्स), समारा कैपिटल, आइवीकैप वेंचर्स, ओमान इंडिया ज्वाइंट इन्वेस्टमेंट फंड, ब्लैक साइल, द इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट आफ इंडिया – ग्रोथ अपार्चुनिटी फंड, ग्लोबल साउथ कैपिटल, एटामिक कैपिटल, एक्विलाक कैपिटल, जशविक कैपिटल, यूनिकार्न वीसी, बीपीईएल इंडिया, गाजा कैपिटल इत्यादि के एमडी, फाउंडर और सीईओ ने सुझाव दिये। सरकार की ओर से मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डा. अमित अग्रवाल ने निवेश की संभावनाओं के बारे में बताया।

     

  • बिना वैध अधिकार संपत्ति पर कब्जा नहीं चलेगा, हाई कोर्ट ने साफ किया मालिक का हक

    बिना वैध अधिकार संपत्ति पर कब्जा नहीं चलेगा, हाई कोर्ट ने साफ किया मालिक का हक

    चंडीगढ़
     पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति संपत्ति का किरायेदार साबित नहीं होता, लेकिन वह मालिक की संपत्ति पर बिना किसी वैध अधिकार के कब्जा किए हुए है, तो मालिक को केवल इस आधार पर कब्जा लेने से वंचित नहीं किया जा सकता कि मालिक-किरायेदार का संबंध साबित नहीं हुआ।

    कोर्ट ने ऐसे व्यक्ति के कब्जे को अनधिकृत कब्जा या अतिक्रमण के समान माना है। जस्टिस परमोध गोयल ने फरीदाबाद के उदय पाल की 27 साल पुरानी नियमित दूसरी अपील खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। मामला फरीदाबाद के गांव ऊंचागांव की एक आवासीय संपत्ति से संबंधित है।

    रघुबीर सिंह ने दावा किया कि वह संपत्ति के मालिक हैं और उन्होंने 1986 में मकान का निर्माण कराने के बाद उदय पाल को 250 रुपये मासिक किराये पर दिया था। आरोप है कि उदय पाल ने अप्रैल 1990 से किराया देना बंद कर दिया, जिससे 8,200 रुपये का बकाया हो गया।

    किरायेदारी समाप्त करने के लिए 10 सितंबर 1993 को कानूनी नोटिस भेजा गया था। इसके बाद रघुबीर सिंह ने मकान का कब्जा, बकाया किराया और उपयोग एवं कब्जे के हर्जाने की मांग करते हुए मुकदमा दायर किया।

    उदय पाल ने किरायेदारी से इनकार करते हुए दावा किया कि उसने लगभग नौ वर्ष पहले 150 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से संपत्ति रघुबीर सिंह से खरीद ली थी। उसका कहना था कि बिक्री की 50 प्रतिशत राशि देकर कब्जा ले लिया गया था और शेष राशि भी बाद में अदा कर दी गई।

    ट्रायल कोर्ट ने रघुबीर सिंह के स्वामित्व को स्वीकार किया, लेकिन किरायेदारी साबित न होने के कारण कब्जे का मुकदमा खारिज कर दिया। हाई कोर्ट में उदय पाल ने दलील दी कि जब ट्रायल कोर्ट ने माना कि किरायेदारी का संबंध नहीं था, तो उसे बेदखल करने के लिए दायर मुकदमा खारिज किया जाना चाहिए था।

    हालांकि, हाई कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों निचली अदालतों ने पाया है कि संपत्ति रघुबीर सिंह की है और उदय पाल यह साबित करने में विफल रहा कि उसने संपत्ति खरीदी थी।

    जस्टिस गोयल ने स्पष्ट किया कि यदि उदय पाल को किरायेदार नहीं माना जाता, तब भी उसका कब्जा अनधिकृत है। कोर्ट ने कहा कि यदि यह स्थापित हो जाता है कि प्रतिवादी बिना किसी अधिकार के संपत्ति पर कब्जा किए हुए है, तो मालिक कब्जा वापस प्राप्त कर सकता है।

  • हरियाणा सफाई कर्मचारियों को जॉब सिक्योरिटी का प्रस्ताव, वेतन बढ़कर 22590 रुपये होगा

    हरियाणा सफाई कर्मचारियों को जॉब सिक्योरिटी का प्रस्ताव, वेतन बढ़कर 22590 रुपये होगा

     चंडीगढ़
    हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने कर्मचारियों के वेतन और जाब सिक्योरिटी को लेकर अपना आधिकारिक पक्ष सामने रखा है। सरकार के मुताबिक वर्तमान में सफाई कर्मचारियों को कुल 20,590 रुपये मासिक दिए जा रहे हैं। इसमें 19,000 रुपये मासिक वेतन तथा 1,590 रुपये भत्ते के रूप में शामिल हैं।

    सरकार ने कहा है कि वह पालिका रोल पर कार्यरत कर्मचारियों को जाब सिक्योरिटी देने के लिए तैयार है। जाब सिक्योरिटी मिलने के बाद कर्मचारियों का कुल मासिक भुगतान बढ़कर 22,590 रुपये हो जाएगा। इसमें 21,000 रुपये मासिक वेतन और 1,590 रुपये भत्ते शामिल होंगे। सरकार के अनुसार जाब सिक्योरिटी के नियमों के तहत कर्मचारियों को हर साल वेतन में होने वाली वार्षिक वृद्धि का लाभ भी मिलेगा।

    कर्मचारियों की मांगें मानने संबंधी दावे खारिज
    सरकार के इस बयान के बीच सफाई कर्मचारियों की मांगों को लेकर आंदोलन और तेज होने के संकेत हैं। कर्मचारी संगठनों ने सरकार के दावों को स्वीकार करने के बजाय कई अहम सवाल उठाए हैं। नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा एवं अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने सरकार की ओर से सफाई कर्मचारियों की मांगें मानने संबंधी दावे को खारिज किया है।

    संगठनों का कहना है कि सरकार के प्रेस नोट में जिन मांगों को ‘सैद्धांतिक रूप से स्वीकृत’ बताया गया है, उनमें से कई मांगों का लाभ कर्मचारियों को पहले से मिल रहा है या वे सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच हुए पुराने समझौते का हिस्सा हैं।

    आज तक आवश्यक आदेश जारी नहीं किए गए
    नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री, महासचिव मांगेराम तिगरा तथा अग्निशमन विभाग के प्रधान राजेंद्र सिंद और महासचिव गुलशन भारद्वाज ने कहा कि 13 मई को सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच हुए समझौते में 22 मांगों में से 17 मांगों को सरकार पहले ही स्वीकार कर चुकी थी।

    इन मांगों को लागू करने के लिए सरकारी पत्र और आदेश जारी किए जाने थे, लेकिन उनके अनुसार आज तक आवश्यक आदेश जारी नहीं किए गए।

    कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि अब उन्हीं मांगों को दोबारा ‘सैद्धांतिक सहमति’ के तौर पर पेश करना कर्मचारियों के साथ छलावा है। उनका कहना है कि कर्मचारी केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अपने अधिकारों को लागू करने वाले स्पष्ट सरकारी आदेश चाहते हैं

    संगठन के नेताओं ने सरकार से 13 मई के समझौते को तत्काल लागू करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने पालिका रोल कर्मचारियों को नियमित करने, ठेका प्रथा समाप्त करने, सफाई एवं सीवर कर्मचारियों की स्थायी भर्ती करने और समान काम के लिए समान वेतन लागू करने की मांग दोहराई है।

  • हरियाणा में बारिश का इंतजार, कमजोर मानसून के बीच उमस भरी गर्मी और कहीं-कहीं बूंदाबांदी

    हरियाणा में बारिश का इंतजार, कमजोर मानसून के बीच उमस भरी गर्मी और कहीं-कहीं बूंदाबांदी

    हिसार.

    हरियाणा-एनसीआर दिल्ली में मानसून कमजोर पड़ने से एक बार फिर उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है। वर्ष 2025 में हरियाणा में मानसून जून के अंतिम सप्ताह में पूरे प्रदेश में सक्रिय हो गया था। जून से सितंबर तक मानसूनी अवधि में सामान्य से करीब 34 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई थी।

    इस दौरान करीब 568.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। अधिक वर्षा और बादलों की आवाजाही के कारण तापमान सामान्य या सामान्य से थोड़ा नीचे रहा। अधिकतर दिनों में औसत तापमान करीब 28 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। वहीं, इस वर्ष जुलाई और अगस्त में औसत अधिकतम तापमान करीब 32 से 36 डिग्री सेल्सियस चल रहा है, जो बीते वर्ष की तुलना में करीब चार से पांच डिग्री अधिक है। न्यूनतम तापमान भी 25 से 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। वर्षा और बादलों की आवाजाही के बावजूद कई दिनों में तापमान अधिक रहने से गर्मी का असर महसूस हुआ। अब मानसूनी गतिविधियां कमजोर होने से उमस और बढ़ गई है।

    मानसून कमजोर रहने की संभावना, हिसार सबसे गर्म
    मौसम विशेषज्ञ डा. चंद्रमोहन ने बताया कि आने वाले दिनों में भी मानसून कमजोर रहने की संभावना है। प्रदेश के केवल उत्तरी और पूर्वी जिलों में हल्की मानसूनी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं, जबकि अधिकांश हिस्सों में मौसम परिवर्तनशील लेकिन शुष्क बना हुआ है। राजस्थान की ओर से लगातार चल रही पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी गर्म हवाओं के कारण मानसूनी हवाओं पर असर पड़ रहा है।

    मानसून टर्फ के एक बार फिर तराई क्षेत्रों की ओर पहुंचने से हरियाणा-एनसीआर दिल्ली में मानसून ब्रेक की स्थिति बन सकती है। कुछ स्थानों पर छिटपुट बूंदाबांदी या हल्की वर्षा हो सकती है, लेकिन लगातार वर्षा की संभावना कम है। गर्म और नम हवाओं के कारण लोगों को पसीना छुड़ाने वाली उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ेगा। रविवार को हिसार में दिनभर बीच-बीच में बादलों की आवाजाही बनी रही, लेकिन बारिश नहीं हुई। हिसार प्रदेश में सबसे गर्म रहा। यहां अधिकतम तापमान 37.7 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    मानसून से पहले ही दिखने लगा वापसी जैसा असर
    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी हवाओं का प्रभाव तथा मानसून की कमजोर गतिविधियां इस समय मौसम को प्रभावित कर रही हैं। आमतौर पर इस तरह की स्थिति मानसून की वापसी के बाद देखने को मिलती है, लेकिन इस बार मानसून की विदाई से पहले ही इसका असर दिखाई देने लगा है। वर्षा की कमी और नम हवाओं के कारण तापमान बहुत अधिक नहीं होने के बावजूद उमस के चलते गर्मी ज्यादा महसूस हो रही है। आने वाले दिनों में भी बारिश की गतिविधियां सीमित रहने से उमस भरी गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है।

    तापमान (डिग्री सेल्सियस में)
    जिला – अधिकतम – न्यूनतम

    हिसार – 37.7 – 26.7
    भिवानी – 37.0 – 26.9
    चरखी दादरी – 36.2 – 28.0
    महेंद्रगढ़ – 35.5 – 26.4
    करनाल – 34.0 – 25.6

  • सिफारिश से नहीं बनेगा जिलाध्यक्ष! हरियाणा कांग्रेस ने उम्मीदवारों के लिए रखी परीक्षा

    सिफारिश से नहीं बनेगा जिलाध्यक्ष! हरियाणा कांग्रेस ने उम्मीदवारों के लिए रखी परीक्षा

    चंडीगढ़.

    हरियाणा कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर पार्टी हाईकमान ने अब सिफारिश और गुटबाजी के प्रभाव को सीमित करने की तैयारी कर ली है। जिलाध्यक्ष की नियुक्ति के लिए नेताओं को अब केवल राजनीतिक पकड़ और वरिष्ठ नेताओं की पैरवी के भरोसे नहीं रहना होगा, बल्कि तय प्रक्रिया के तहत अपनी योग्यता और संगठनात्मक अनुभव का ब्योरा भी देना होगा।

    नई व्यवस्था का पहला प्रयोग हिसार जिलाध्यक्ष के चयन में किया जाएगा। इसके बाद पार्टी इसे अन्य जिलों में भी लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों से तीन पन्नों का प्रोफार्मा भरवाया जाएगा, जिसमें 20 से अधिक सवाल होंगे। इसमें दावेदार से पूछा जाएगा कि वह कांग्रेस से कब जुड़ा, क्या कभी पार्टी छोड़कर किसी अन्य दल में गया, अब तक संगठन या पार्टी में किन-किन पदों पर जिम्मेदारी निभाई और उसका राजनीतिक एवं संगठनात्मक अनुभव क्या रहा।

    प्रोफार्मा में दावेदार की जाति और उपजाति, इंटरनेट मीडिया पर सक्रियता एवं दक्षता समेत अन्य संगठनात्मक जानकारियां भी मांगी जाएंगी। इसका मकसद केवल नामों का पैनल तैयार करना नहीं, बल्कि दावेदारों की राजनीतिक पृष्ठभूमि और संगठन में उनकी सक्रियता का तुलनात्मक आकलन करना माना जा रहा है। बता दें कि हिसार के जिलाध्यक्ष बजरंग दास गर्ग हटाने से पहले स्वयं ही यह पद छोड़ चुके हैं, जबकि फरीदाबाद के जिला प्रधान बलजीत कौशिक को केंद्रीय पर्यवेक्षक ने पद से हटाने की घोषणा की है।

    छह नामों का पैनल जाएगा हाईकमान के पास
    नई प्रक्रिया के तहत केंद्रीय पर्यवेक्षक दावेदारों की जानकारी जुटाने के बाद छह नामों का पैनल तैयार करेंगे। यह पैनल कांग्रेस हाईकमान को भेजा जाएगा और अंतिम फैसला केंद्रीय स्तर पर होगा। यानी स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली नेताओं की सिफारिश के बजाय तय प्रक्रिया और हाईकमान के आकलन को प्राथमिकता मिलने की संभावना है। हिसार में यह जिम्मेदारी केंद्रीय पर्यवेक्षक अजय कुमार लल्लू को दी गई है। पंचकूला और फरीदाबाद में भी शहरी और ग्रामीण संगठन के लिए जिलाध्यक्षों का चयन किया जाना है। हांसी में भी जिलाध्यक्ष का फैसला होना बाकी है। इसके अलावा पांच ऐसे जिलाध्यक्षों को बदले जाने की तैयारी है, जिनका संगठनात्मक प्रदर्शन अपेक्षित नहीं माना गया है। प्रदेश प्रभारी संजय सतीशचंद्र दत्त इन जिलाध्यक्षों की रिपोर्ट केंद्रीय चयन समिति को अपनी संस्तुति के साथ भेज चुके हैं। प्रदेश में जिला कांग्रेस अध्यक्षों के चयन और संगठन की समीक्षा के लिए कांग्रेस ने चार केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं।

    • डा. एन रघुवीरा रेड्डी — आंध्र प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष
    • यशोमति ठाकुर — महाराष्ट्र की पूर्व मंत्री
    • उमंग सिंघार — मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष
    • अजय कुमार लल्लू — उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष
  • सिरसा में सफाई कर्मचारियों का बड़ा विरोध, साथियों को हिरासत में लेने पर नगर परिषद कार्यालय बंद

    सिरसा में सफाई कर्मचारियों का बड़ा विरोध, साथियों को हिरासत में लेने पर नगर परिषद कार्यालय बंद

    सिरसा.

    जिला प्रशासन की तरफ से पुलिस की मौजूदगी में पांचों शहराें में सफाई करने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सोमवार अलसुबह रानियां और कालांवाली में सफाई अभियान चलाए जाने के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया।

    वहीं, सुबह सिरसा बस स्टैंड के समक्ष सफाई करने के दौरान प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। जिससे रोषित अन्य कर्मचारियों ने सिरसा नगर परिषद के गेट पर ताला जड़ दिया और कार्यालय में आवाजाही बंद कर दी। शहर के बस स्टैंड डंपिंग प्वाइंट पर सुबह नौ बजे सफाई करने के लिए जेसीबी चलाने का प्रयास शुरू किया तो हड़ताल कर्मचारी उसके आगे खड़े हो गए। इसी दौरान पुलिस ने सख्ती करते हुए करीब 10 सफाई कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया और शहर थाना में पहुंचा दिया। मामले की सूचना अन्य कर्मचारियों को मिली तो उन्होंने नगर परिषद के गेट पर ताला लगा दिया। जिसके पश्चात अन्य सभी कर्मचारी एकत्र होकर शहर थाना के पास पहुंच गए और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।

    कर्मचारियों का कहना है कि सरकार उनके साथ धक्का कर रही है। उनकी मांगों को मानने की बजाए हिरासत में ले रही है। इसी तरह रानियां में अलसुबह दो बजे पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी से सफाई करने का अभियान शुरू किया गया तो हड़ताली कर्मचारियों ने विरोध कर दिया। जिसके पश्चात पुलिस ने रानियां से करीब 11 कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया। इसी तरह से कालांवाली में भी 20 के करीब कर्मचारियों को हिरासत में लेकर सफाई कार्य करवाया गया है।