Category: हरियाणा

  • विदेश दौरे पर रोक को HC ने बताया बेतुका, हरियाणा कर्मचारियों के अधिकार को दी प्राथमिकता

    विदेश दौरे पर रोक को HC ने बताया बेतुका, हरियाणा कर्मचारियों के अधिकार को दी प्राथमिकता

    चंडीगढ़.

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर लगाई गई पूर्ण पाबंदी को खारिज कर दिया है। अदालत ने इस फैसले को मनमाना और संवैधानिक अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार के तर्कों पर कड़ा ऐतराज जताया।

    मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने कहा कि सरकार की यह पाबंदी उसके द्वारा बताए गए उद्देश्यों के मुकाबले बेहद असंतुलित थी। अदालत ने टिप्पणी की कि सरकार का यह कदम "अखरोट तोड़ने के लिए भारी हथौड़े का इस्तेमाल करने जैसा है।" हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि किसी कर्मचारी को अपने पेशेवर कौशल को बढ़ाने के लिए विदेश जाने से रोकने से सरकार के ईंधन बचाने के लक्ष्य में भला कैसे मदद मिल सकती है?

    क्या है पूरा मामला?
    यह विवाद रोहतक स्थित PGIMS की नर्सिंग ऑफिसर शीतल रानी की याचिका से जुड़ा है। शीतल ने ऑस्ट्रेलिया में एक पेशेवर कोर्स और रजिस्ट्रेशन परीक्षा में शामिल होने के लिए छुट्टी की अर्जी दी थी। फरवरी 2021 में शीतल रानी PGIMS रोहतक में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर तैनात हुईं। जनवरी 2024 में उन्हें ऑस्ट्रेलियाई वीजा आवेदन की मंजूरी मिली और बाद में विजिटर वीजा जारी हो गया। 29 सितंबर में ऑस्ट्रेलिया में उनकी परीक्षा निर्धारित थी, जिसके लिए उन्होंने 'अर्न्ड लीव' के लिए आवेदन किया।

    क्यों खारिज हुई थी छुट्टी?
    हरियाणा सरकार ने 10 जून को एक दिशा-निर्देश जारी किया था। इसके तहत सितंबर तक सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस नीति में केवल गंभीर मेडिकल इलाज के मामलों को ही छूट दी गई थी, जिसके चलते शीतल रानी की छुट्टी की अर्जी निरस्त कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने सरकार के इस आदेश को पूरी तरह खारिज करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता नर्सिंग ऑफिसर को परीक्षा में शामिल होने के लिए ऑस्ट्रेलिया जाने की तुरंत अनुमति दी जाए।

  • नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के आरोप ने मचाई सनसनी, चार्जर लेने गई थी पीड़िता

    नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के आरोप ने मचाई सनसनी, चार्जर लेने गई थी पीड़िता

     पलवल 

    हरियाणा के पलवल में मस्जिद के अंदर रेप करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने बताया कि पलवल के हसनपुर में एक मस्जिद के अंदर अपनी 11 साल की साली को बंधक बनाकर कथित तौर पर रेप करने के आरोप में 30 साल के एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया है। पीड़िता के पिता मस्जिद के मौलवी हैं। पुलिस ने बताया कि आरोपी किसी निजी काम से हसनपुर आया था। पीड़िता के पिता ने उसके ठहरने का इंतजाम मस्जिद परिसर में ही किया था। यह घटना मंगलवार को हुई। हसनपुर के एक प्राइवेट स्कूल में छठी कक्षा की छात्रा अपने पिता के कमरे से मोबाइल फोन चार्जर लेने के लिए मस्जिद परिसर में गई थी।

    पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जब छात्रा मस्जिद में दाखिल हुई तो संदिग्ध ने उसे अकेला पाकर कथित तौर पर एक कमरे के अंदर बुलाया और दरवाजा बंद कर लिया। इसके बाद उसने उसके साथ रेप किया। जांच करने वाले अधिकारी ने बताया कि जब लड़की कुछ देर तक वापस नहीं लौटी तो उसकी मां को शक हुआ, क्योंकि उसे स्कूल जाना था। वह मस्जिद गई और लड़की के चिल्लाने की आवाज सुनकर शोर मचाया।

    जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पीड़िता के पिता और अन्य लोगों ने कमरे का दरवाजा तोड़कर उसे बचाया, लेकिन आरोपी भागने में कामयाब रहा। हसनपुर थाने के एसएचओ सब इंस्पेक्टर विजय पाल ने बताया कि पीड़िता को पलवल के सिविल अस्पताल ले जाया गया। वहां दो दिन तक उसका इलाज करने के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। उन्होंने बताया कि मेडिकल जांच में रेप की पुष्टि हुई है।

    पाल ने कहा कि मंगलवार को आरोपी के खिलाफ 'प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन अगेंस्ट सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट' (पोक्सो एक्ट) की धारा 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न) के तहत एफआईआर दर्ज की गई। एसएचओ ने कहा कि आरोपी को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया।

  • जमीन इंतकाल में देरी पर लगेगा ब्रेक, पटवारी से सीआरओ तक तय होगी समयसीमा; 11वें दिन ऑटो एंट्री

    जमीन इंतकाल में देरी पर लगेगा ब्रेक, पटवारी से सीआरओ तक तय होगी समयसीमा; 11वें दिन ऑटो एंट्री

    पंचकूला
    हरियाणा में जमीन इंतकाल के लिए तहसीलों के चक्कर लगाने वाले लोगों को जल्द बड़ी राहत मिलने जा रही है। राज्य सरकार राजस्व सेवाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था लागू करने जा रही है।

    नई व्यवस्था में पंजीकरण के बाद इंतकाल की प्रक्रिया को अलग-अलग अधिकारियों के स्तर पर तय समय-सीमा में पूरा करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने पर मामला अपने आप अगले अधिकारी के लॉगिन में पहुंचता जाएगा और अंततः 11वें दिन इंतकाल स्वतः जमाबंदी में दर्ज हो जाएगा।

    उपायुक्त सतपाल शर्मा ने बताया कि नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को अनावश्यक रूप से तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना और राजस्व अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना है।

    तकनीक के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निगरानी योग्य बनाया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत पंजीकरण के बाद इंतकाल पहले चार दिन तक पटवारी के लॉगिन में रहेगा। इस अवधि में पटवारी को आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।

    यदि पांचवें दिन तक पटवारी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होती है तो इंतकाल स्वतः कानूनगो के लॉगिन में चला जाएगा। कानूनगो को कार्रवाई के लिए दो दिन का समय मिलेगा। सातवें दिन तक मामला आगे बढ़कर सीआरओ के लागिन में पहुंच जाएगा।

    सीआरओ को आवश्यक कार्रवाई के लिए चार दिन दिए जाएंगे। यदि निर्धारित अवधि में कोई कार्रवाई नहीं होती है तो 11वें दिन इंतकाल स्वतः जमाबंदी में दर्ज हो जाएगा। इस व्यवस्था से किसी एक अधिकारी के स्तर पर फाइल को लंबे समय तक लंबित रखने की गुंजाइश कम होगी और प्रत्येक स्तर पर कार्रवाई की समय-सीमा तय रहेगी।

    लंबित इंतकाल की ऑनलाइन शिकायत, 10 दिन में कार्रवाई
    सरकार लंबित इंतकाल से संबंधित शिकायतों के लिए विशेष ऑनलाइन पेज/पोर्टल भी शुरू करेगी। नागरिक घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कराने के साथ संबंधित दस्तावेज भी आनलाइन अपलोड कर सकेंगे।

    उपायुक्त ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारी को 10 दिनों के भीतर कार्रवाई करनी होगी। यदि नियमों के अनुसार इंतकाल किया जा सकता है तो नागरिक को उसकी प्रति उपलब्ध करवाई जाएगी।

    वहीं, यदि इंतकाल किसी कारण से नहीं किया जा सकता तो संबंधित सीआरओ को स्पीकिंग आर्डर जारी करना होगा। इस आदेश में स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि इंतकाल क्यों नहीं किया जा सकता, किस नियम या कारण के आधार पर मामला स्वीकार नहीं हुआ और जरूरत पड़ने पर आगे की प्रक्रिया क्या होगी।

    जमाबंदी और रजिस्ट्री भी डिजिटल करने पर जोर
    सरकार अधिक से अधिक राजस्व सेवाएं घर बैठे अथवा नजदीकी सीएससी केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध करवाने की दिशा में काम कर रही है। जमाबंदी, इंतकाल, डिजिटल हस्ताक्षरित रजिस्ट्री और अन्य राजस्व रिकार्ड को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध करवाने पर जोर दिया जा रहा है।

    इसके अलावा जमाबंदी में व्यक्ति के हिस्से से संबंधित जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध करवाने, छोटी-मोटी त्रुटियों के सुधार की प्रक्रिया आसान बनाने और तकसीम जैसी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

  • प्याज-लहसुन की तेजी से बढ़ी खाने की लागत, दुकानदारों की कमाई पर पड़ा असर

    प्याज-लहसुन की तेजी से बढ़ी खाने की लागत, दुकानदारों की कमाई पर पड़ा असर

     करनाल
    रसोई में सब्जी का स्वाद बढ़ाने वाले प्याज, लहसुन और अदरक के दाम बढ़ने से घर के बजट के साथ ही होटल, ढाबे और स्ट्रीट फूड का जायका भी महंगा पड़ने लगा है।

    प्याज का थोक भाव इस समय करीब 45 से 50 रुपये किलो है, जबकि खुदरा में यह करीब 60 रुपये किलो बिक रहा है। करीब 10-15 दिन पहले खुदरा प्याज 40 रुपये किलो के आसपास था।

    अदरक थोक में करीब 100 रुपये और खुदरा में 120 से 140 रुपये किलो तक पहुंच गया है। लहसुन का थोक भाव 160 से 200 रुपये और खुदरा भाव 200 से 240 रुपये किलो तक है। करनाल सब्जी मंडी के थोक विक्रेता विवेक के अनुसार लहसुन में पिछले दिनों के मुकाबले स्पष्ट तेजी आई है।

    तड़के का खर्च बढ़ा, रसोई में कटौती
    प्याज-लहसुन के बिना अधिकांश सब्जियों, दाल और ग्रेवी का स्वाद अधूरा माना जाता है। ऐसे में इनके दाम बढ़ने का सीधा असर घरेलू रसोई पर पड़ रहा है। गृहणियां अब खरीदारी में मात्रा का हिसाब लगाने लगी हैं। पहले जहां एक साथ अधिक मात्रा में प्याज और लहसुन खरीदा जाता था, वहीं अब जरूरत के हिसाब से खरीदारी की जा रही है।

    गृहणी संतोष ने बताया कि रोजमर्रा की सब्जियों के साथ मसालों और अन्य सामान के दाम पहले ही बजट बिगाड़ रहे हैं। अब प्याज और लहसुन भी महंगे होने से महीने का हिसाब लगाना मुश्किल हो रहा है। गृहणी कनिका चोपड़ा ने कहा कि स्वाद से समझौता करना आसान नहीं है, इसलिए मात्रा कम करके काम चलाना पड़ रहा है।

    ढाबे-रेस्तरां में लागत बढ़ी, स्ट्रीट फूड पर भी असर
    प्याज, लहसुन और अदरक की खपत घरों के अलावा होटल, रेस्तरां और ढाबों में भी बड़े पैमाने पर होती है। ग्रेवी, छोले, चाप, मंचूरियन, चाइनीज व्यंजन और विभिन्न स्ट्रीट फूड में इनकी रोजाना खपत होती है।

    कीमत बढ़ने से संचालकों की लागत बढ़ गई है। रेस्तरां संचालक बिल्लु ने बताया कि उनके सामने दो विकल्प हैं। या तो बढ़ी लागत खुद वहन करें या फिर खाने की कीमत बढ़ाएं। ग्राहक पहले ही कीमत को लेकर संवेदनशील हैं, इसलिए सीधे दाम बढ़ाना आसान नहीं है। ऐसे में बढ़ी लागत का असर मुनाफे पर पड़ रहा है। स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण है।

    बर्गर, चाट, मोमोज, छोले-कुलचे, नूडल्स और अन्य खाद्य पदार्थों में प्याज का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। कुछ दुकानदार मात्रा में कटौती कर रहे हैं, जबकि कुछ ग्राहकों को पहले की तुलना में कम प्याज दे रहे हैं।

    नतीजा यह कि प्याज-लहसुन-अदरक की तेजी ने सिर्फ रसोई का बजट नहीं बढ़ाया, बल्कि शहर के खानपान कारोबार की लागत भी बढ़ा दी है। अगर तेजी आगे बनी रही तो इसका असर खाने की प्लेट की कीमत और ग्राहकों की जेब दोनों पर दिखाई दे सकता है।

     

  • करनाल समेत 11 जिलों में छात्रों को तोहफा, 145 AC ई-बसों में मुफ्त यात्रा की मंजूरी

    करनाल समेत 11 जिलों में छात्रों को तोहफा, 145 AC ई-बसों में मुफ्त यात्रा की मंजूरी

    करनाल
    हरियाणा रोडवेज में मुफ्त सफर करने वाले विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। अब वे हरियाणा सिटी बस सर्विस लिमिटेड की एसी ई-बसों में भी निश्शुल्क सफर कर सकेंगे। अभी तक यह सुविधा केवल हरियाणा रोडवेज की सामान्य बसों में ही मिलती थी, लेकिन अब ई-बसों में भी इसे लागू कर दिया गया है।

    इस संबंध में एचसीबीएसएल मुख्यालय से 26 अगस्त 2026 को सभी जिलों के महाप्रबंधकों को आदेश जारी कर दिया गया है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि 28 मई 2026 को पानीपत में मुख्यमंत्री हरियाणा द्वारा की गई घोषणा और एचसीबीएसएल के निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदन के बाद यह फैसला लिया है कि जिन विद्यार्थियों के पास वैध हरियाणा रोडवेज स्टूडेंट बस पास हैं, उन्हें एचसीबीएसएल की ई-बसों में भी मुफ्त यात्रा की अनुमति दी जाए।

    वहीं, सामान्य बसों के मुकाबले एसी ई-बसों में किराया भी अधिक होता था। यह आदेश पानीपत, यमुनानगर, अंबाला, सोनीपत, हिसार, रेवाड़ी, करनाल, पंचकूला, रोहतक, कुरुक्षेत्र सहित प्रदेश के 11 जिलों के जीएम को भेजा गया है।

    11 जिलों में दौड़ रही 145 ई-बसें, पानीपत में सबसे ज्यादा 45
    जानकारी के अनुसार वर्तमान में प्रदेश के 11 शहरों में कुल 145 ई-बसें संचालित हो रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा 45 बसें पानीपत में चल रही हैं। ये सभी बसें वातानुकूलित हैं और शहर के अंदर लोकल रूट पर हर स्टॉप पर रुक-रुक कर चलती हैं।

    इससे पहले इन बसों में पास मान्य नहीं था, जिससे विद्यार्थियों को टिकट लेना पड़ता था। जीएम कुलदीप सिंह ने बताया कि अब पास मान्य होने से विद्यार्थियों को गर्मी से राहत मिलेगी और वे एसी बसों में आरामदायक सफर कर सकेंगे।

    करनाल में 5 ई-बसें, 140 सामान्य बसों का संचालन
    यदि करनाल की बात करें तो यहां डिपो में 140 सामान्य रोडवेज बसें संचालित हो रही हैं, जबकि शहर के अंदर 5 ई-बसें चल रही हैं। वहीं पानीपत में 120 सामान्य बसों के साथ 45 ई-बसें चल रही हैं।

    नए आदेश के बाद स्कूल, कालेज, आईटीआई, पालिटेक्निक सहित सभी मान्य शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी जिनके पास हरियाणा रोडवेज का वैध पास है, वे अब इन ई-बसों में बिना कोई किराया दिए सफर कर सकेंगे।

    इन डिपो पर चल रही इतनी ई- बसें
    सरकार के निर्देशानुसार रोडवेज की ओर से 145 के करीब ई-बसें अपनी सेवाएं दे रही हैं। इनमें से पानीपत में 45, कुरुक्षेत्र में 20, यमुनानगर में 20, करनाल में 5, अंबाला में 25, रोहतक में 5, रेवाड़ी में 5, हिसार में 5, पंचकूला में 5, सोनीपत में 10 बसें चल रही हैं। आगे भी जल्द इनकी संख्या बढ़ने वाली हैं।

     

  • हरियाणा में मेडिकल एडमिशन के नए नियम लागू, सीट छोड़ने पर फीस के साथ लगेगा 3 साल का प्रतिबंध

    हरियाणा में मेडिकल एडमिशन के नए नियम लागू, सीट छोड़ने पर फीस के साथ लगेगा 3 साल का प्रतिबंध

    चंडीगढ़
    हरियाणा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस के छात्र अगर दाखिले के बाद सीट छोड़ते हैं तो उन्हें अगले तीन साल तक प्रवेश के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।

    इसके साथ ही 10 लाख रुपये की बांड मनी भी चुकानी होगी। निजी संस्थानों में बीच में कोर्स छोड़ने पर संबंधित शैक्षणिक सत्र की फीस सहित अगले शैक्षणिक सत्र की 50 प्रतिशत फीस भी देनी होगी।

    मैनेजमेंट कैटेगरी में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों पर भी नियम लागू होगा। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राज्य के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त व निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस में दाखिले की प्रक्रिया अधिसूचित कर दी है।

    85 फीसदी सीटें हरियाणा स्टेट मेरिट कैटगरी में भरी जाएंगी
    सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल सीटों में से 15% सीटें नीट-यूजी की अखिल भारतीय मेरिट व 85% सीटें हरियाणा स्टेट मेरिट कैटेगरी से भरी जाएंगी।

    पंडित बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी आफ हेल्थ साइंसेज रोहतक को ऑनलाइन संयुक्त केंद्रीयकृत काउंसलिंग कराने की जिम्मेदारी दी है। निजी मेडिकल व डेंटल संस्थानों में 50% सीटें स्टेट कोटा व 50% मैनेजमेंट कैटेगरी में रहेंगी।

    एनआरआइ कोटा मैनेजमेंट कैटेगरी में से 15% होगा। स्टेट कोटा की पांच प्रतिशत सीटें दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रहेंगी। ओपन मेरिट-स्टेट कोटा सीटों के लिए अभ्यर्थी का हरियाणा का मूल निवासी होना जरूरी है। मैनेजमेंट कैटेगरी के लिए पूरे भारत से अभ्यर्थी पात्र होंगे।

    निजी कॉलेज में एकमुश्त एडवांस राशि नहीं होगी जमा
    निजी मेडिकल कॉलेज पूरे कोर्स की ट्यूशन फीस एकमुश्त एडवांस जमा नहीं करा सकेंगे। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पांच वर्षों की वार्षिक फीस चार लाख 22 हजार 910 रुपये व सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेज में आठ लाख 10 हजार रुपये होगी। रजिस्ट्रेशन-कम-काउंसलिंग फीस सामान्य श्रेणी के लिए 2500 रुपये, हरियाणा के आरक्षित श्रेणी के लिए 1250 रुपये और एनआरआइ के लिए 10,000 रुपये निर्धारित की है।

    तीन साल का प्रतिबंध भी लगेगा, निजी संस्थानों में बीच में कोर्स छोड़ने वाले छात्र को अगले सत्र की 50% फीस भी देनी होगी
    अभ्यर्थी को भरना पड़ेगा बांड सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए पुरुष अभ्यर्थियों को 25 लाख 77 हजार 90 रुपये व महिला अभ्यर्थियों को 23 लाख 19 हजार 381 रुपये का बांड भरना होगा।

    सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कालेज में यह राशि पुरुषों के लिए 21 लाख 90 हजार और महिलाओं के लिए 19 लाख 71 हजार रुपये रखी है।

     

  • धक्का-मुक्की के बाद सियासी घमासान! हरियाणा विधानसभा विवाद पर बीजेपी का पलटवार

    धक्का-मुक्की के बाद सियासी घमासान! हरियाणा विधानसभा विवाद पर बीजेपी का पलटवार

    चंडीगढ़.

    हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन स्पीकर हरविन्द्र कल्याण की सख्ती बिना वजह नहीं थी। इस सख्ती के पीछे स्पीकर के मन में विधायकों की सुरक्षा की चिंता ही छिपी थी। पिछले विधानसभा सत्रों में जिस तरह से सुरक्षा व्यवस्थाओं में सेंध लगती रही है, उसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए ही विधानसभा के बाहर सुरक्षाकर्मी अधिक अलर्ट मोड में दिखे और विधानसभा में स्पीकर ने सख्ती बरती।

    मानसून सत्र में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन ने सदन की कार्यवाही और संसदीय मर्यादा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। काले कपड़े पहनकर और हाथों में तख्तियां लेकर विधानसभा पहुंची कांग्रेस ने सदन के भीतर भी विरोध जारी रखा। नतीजतन स्पीकर को न केवल बार-बार नसीहत देनी पड़ी, बल्कि कठोर निर्णय भी लेने पड़े। प्रदर्शनकारी कांग्रेस विधायक स्पीकर की वेल तक पहुंचे और नारेबाजी की। सुरक्षा कर्मियों के साथ कथित धक्का-मुक्की और सदन की कार्यवाही को बाधित करने जैसे घटनाक्रम भी सामने आए। ऐसे में सवाल उठा कि जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा के लिए आए सदन में कांग्रेस का जोर मुद्दों पर था या अपने राजनीतिक विरोध के प्रदर्शन पर फोकस रहा।

    विरोध के दौरान जब कोई विधायक अपनी बात रखने या नेता सदन में बोलने का प्रयास करता, तो नारेबाजी शुरू हो जाती। इससे चर्चा का माहौल प्रभावित हुआ और सदन की गरिमा पर सवाल उठे। हरियाणा के संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा के अनुसार विपक्ष को सरकार को घेरने और अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन सदन के नियमों और परंपराओं का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से आश्वासन दिए जाने के बावजूद जिद पर अड़े रहना और सदन की कार्यवाही को आगे न बढ़ने देना जनहित के मुद्दों पर बिल्कुल भी केंद्रित नहीं रहा।

    विरोध का तरीका लोकतांत्रिक तो कोई आपत्ति नहीं
    हरियाणा विधानसभा के स्पीकर हरविन्द्र कल्याण का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध जरूरी है, लेकिन विरोध का तरीका भी लोकतांत्रिक होना चाहिए। विधानसभा जनता की आवाज उठाने और मुद्दों पर चर्चा का मंच है। ऐसे में मुद्दों की जगह निजी और राजनीतिक हित अधिक हावी दिखाई दें तथा सदन को चलने ही न दिया जाए, तो यह लोकतंत्र की भावना के प्रति चिंता पैदा करने वाला जरूर है। उन्होंने 31 अगस्त और एक सितंबर को भी विधायकों से सदन की गरिमा का ध्यान रखने का आग्रह किया है।

    भाजपा की नजर में रिमोट कंट्रोल दिल्ली
    कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बाद यह सवाल भी उठा कि राजनीतिक विरोध के लिए सदन की कार्यवाही को लगातार बाधित करना कितना उचित है। रही-सही कसर बरौदा के कांग्रेस विधायक इंदुराज नरवाल ने पूरी कर दी। उन्होंने कांग्रेस के बागी दलित विधायक जरनैल सिंह के हाथों से वह कागज छीन लिया था। संसदीय कार्य मंत्री ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट माना कि कांग्रेस प्रतिनिधियों के आचरण से ऐसा लगा कि उनका रिमोट कंट्रोल दिल्ली से चल रहा है।

  • हरियाणा में मेडिकल सीट छोड़ी तो बड़ा नुकसान! ₹10 लाख देना होगा, 3 साल तक नहीं मिलेगा एडमिशन

    हरियाणा में मेडिकल सीट छोड़ी तो बड़ा नुकसान! ₹10 लाख देना होगा, 3 साल तक नहीं मिलेगा एडमिशन

    चंडीगढ़.

    हरियाणा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस के छात्र अगर दाखिले के बाद सीट छोड़ते हैं तो उन्हें अगले तीन साल तक प्रवेश के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इसके साथ ही 10 लाख रुपये की बांड मनी भी चुकानी होगी।

    निजी संस्थानों में बीच में कोर्स छोड़ने पर संबंधित शैक्षणिक सत्र की फीस सहित अगले शैक्षणिक सत्र की 50 प्रतिशत फीस भी देनी होगी। मैनेजमेंट कैटेगरी में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों पर भी नियम लागू होगा। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राज्य के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त व निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस में दाखिले की प्रक्रिया अधिसूचित कर दी है।

    85 फीसदी सीटें हरियाणा स्टेट मेरिट कैटगरी में भरी जाएंगी
    सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल सीटों में से 15% सीटें नीट-यूजी की अखिल भारतीय मेरिट व 85% सीटें हरियाणा स्टेट मेरिट कैटेगरी से भरी जाएंगी। पंडित बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी आफ हेल्थ साइंसेज रोहतक को ऑनलाइन संयुक्त केंद्रीयकृत काउंसलिंग कराने की जिम्मेदारी दी है। निजी मेडिकल व डेंटल संस्थानों में 50% सीटें स्टेट कोटा व 50% मैनेजमेंट कैटेगरी में रहेंगी। एनआरआइ कोटा मैनेजमेंट कैटेगरी में से 15% होगा। स्टेट कोटा की पांच प्रतिशत सीटें दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रहेंगी। ओपन मेरिट-स्टेट कोटा सीटों के लिए अभ्यर्थी का हरियाणा का मूल निवासी होना जरूरी है। मैनेजमेंट कैटेगरी के लिए पूरे भारत से अभ्यर्थी पात्र होंगे।

    निजी कॉलेज में एकमुश्त एडवांस राशि नहीं होगी जमा
    निजी मेडिकल कॉलेज पूरे कोर्स की ट्यूशन फीस एकमुश्त एडवांस जमा नहीं करा सकेंगे। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पांच वर्षों की वार्षिक फीस चार लाख 22 हजार 910 रुपये व सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेज में आठ लाख 10 हजार रुपये होगी। रजिस्ट्रेशन-कम-काउंसलिंग फीस सामान्य श्रेणी के लिए 2500 रुपये, हरियाणा के आरक्षित श्रेणी के लिए 1250 रुपये और एनआरआइ के लिए 10,000 रुपये निर्धारित की है। अभ्यर्थी को भरना पड़ेगा बांड सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए पुरुष अभ्यर्थियों को 25 लाख 77 हजार 90 रुपये व महिला अभ्यर्थियों को 23 लाख 19 हजार 381 रुपये का बांड भरना होगा। सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कालेज में यह राशि पुरुषों के लिए 21 लाख 90 हजार और महिलाओं के लिए 19 लाख 71 हजार रुपये रखी है।

  • गुरुग्राम मेट्रो को मिली रफ्तार! 160 टन का पहला यू-गर्डर सफलतापूर्वक लॉन्च

    गुरुग्राम मेट्रो को मिली रफ्तार! 160 टन का पहला यू-गर्डर सफलतापूर्वक लॉन्च

    गुरुग्राम.

    पुराने गुरुग्राम में मेट्रो विस्तार परियोजना के निर्माण कार्य ने शुक्रवार देर रात महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर लिया। साइबर पार्क के नजदीक पिलर नंबर 26/27 पर 160 टन वजनी पहले यू-गर्डर को 400 और 600 टन क्षमता वाली हाइड्रोलिक क्रेनों की मदद से सफलतापूर्वक लिफ्ट कर स्थापित किया गया।

    प्रदेश के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने विधिवत पूजन कर यू-गर्डर लिफ्टिंग कार्य का शुभारंभ किया। इसके साथ ही मेट्रो कारिडोर के ऊपरी ढांचे के निर्माण की प्रक्रिया भी धरातल पर शुरू हो गई।

    सुरक्षा प्रोटोकॉल का विशेष ध्यान रखा
    यू-गर्डर की लिफ्टिंग के दौरान निर्धारित तकनीकी मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का विशेष ध्यान रखा गया। भारी-भरकम यू-गर्डर को क्रेनों की सहायता से धीरे-धीरे उठाकर निर्धारित स्थान पर स्थापित किया गया। इस दौरान निर्माण एजेंसी की तकनीकी टीम और विशेषज्ञ पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते रहे। मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि पहले यू-गर्डर का सफलतापूर्वक स्थापित होना गुरुग्राम मेट्रो विस्तार परियोजना के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब निर्माण कार्य ने जमीनी स्तर पर नए चरण में प्रवेश किया है। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम की बढ़ती आबादी और यातायात दबाव को देखते हुए आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। परियोजना में निर्माण की गति के साथ गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

    सेक्टर-33 में तैयार हो रहे यू-गर्डर
    मेट्रो परियोजना के लिए यू-गर्डर का निर्माण सेक्टर-33 स्थित नाहरपुर रूपा के विशेष प्रीकास्ट कास्टिंग यार्ड में किया जा रहा है। प्रत्येक यू-गर्डर की लंबाई करीब 28 मीटर और चौड़ाई 5.05 मीटर है। एक गर्डर में करीब 16 टन रिइनफोर्समेंट स्टील और लगभग 60 घन मीटर एम-60 ग्रेड कंक्रीट का इस्तेमाल किया जाता है। यही यू-गर्डर मेट्रो वायाडक्ट के ऊपरी ढांचे का हिस्सा बनेंगे और इनके ऊपर ट्रैक बिछाए जाएंगे। एक यू-गर्डर का वजन करीब 160 टन होने के कारण इसे निर्माण स्थल तक पहुंचाना और स्थापित करना चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। इसके लिए कास्टिंग यार्ड से गर्डर को करीब 40 मीटर लंबे मल्टी-एक्सल ट्रेलर और पुलर असेंबली के माध्यम से निर्माण स्थल तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद भारी क्षमता वाली हाइड्रोलिक क्रेनों से इसकी लिफ्टिंग की जाती है। पूरी प्रक्रिया के लिए पहले से रूट प्लानिंग, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है।

    पुराने गुरुग्राम को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी
    मेट्रो विस्तार परियोजना को शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम परियोजना माना जा रहा है। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से पुराने गुरुग्राम के विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे रोजाना आवागमन करने वाले हजारों लोगों को तेज, सुविधाजनक और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन विकल्प मिलने की उम्मीद है। इस अवसर पर गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड के निदेशक (परियोजना एवं योजना) एसआर सांगवा, निदेशक (रोलिंग स्टाक एवं इलेक्ट्रिकल) राजेश चतुर्वेदी, निदेशक (वित्त) रजत वर्मा, चीफ आर्किटेक्ट नम्रता कलसी, डीजीएम मधुर गोयल, निगम पार्षद कुलदीप यादव समेत निर्माण एजेंसी के अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और कर्मचारी मौजूद रहे। बता दें कि ओल्ड गुरुग्राम में दो चरण में मेट्रो का विस्तार होना है। पहले चरण का काम चल रहा है। पहले चरण के अंतर्गत मिलेनियम सिटी गुरुग्राम मेट्रो स्टेशन से लेकर सेक्टर-9 तक मेट्रो प्रोजेक्ट का विस्तार होना है। दूसरे चरण के टेंडर की प्रक्रिया अगले सप्ताह शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए तैयारी पूरी हो चुकी है। दूसरे चरण के दौरान सेक्टर-9 से लेकर साइबर हब तक मेट्रो कारिडोर का विस्तार किया जाएगा।

  • CM नायब सिंह के दौरे से पहले कांग्रेस पर शिकंजा, जिला यूथ अध्यक्ष को किया हाउस अरेस्ट

    CM नायब सिंह के दौरे से पहले कांग्रेस पर शिकंजा, जिला यूथ अध्यक्ष को किया हाउस अरेस्ट

    नूंह.

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मेवात दौरे से पहले युवा कांग्रेस के नूंह जिला अध्यक्ष मुबीन खान तेडिया को पुलिस-प्रशासन ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया। प्रशासन को जिला यूथ कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने की भनक लगी थी।

    लोकतंत्र को कैद करने जैसा माहौल
    मुबीन खान तेडिया ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के दौरे से पहले सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि मेवात में लोकतंत्र को कैद करने जैसा माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार ने कोई गलत काम नहीं किया है तो फिर सवालों से डरने की जरूरत क्यों पड़ रही है।

    जारी रहेगी न्याय की लड़ाई
    युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि वे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सिपाही हैं और जनहित के मुद्दों को उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि न डरेंगे और न झुकेंगे। न्याय की लड़ाई जारी रहेगी। हालांकि, पुलिस प्रशासन की ओर से हाउस अरेस्ट किए जाने को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। बता दें कि इससे पहले भी जिला कांग्रेस यूथ अध्यक्ष ने बसों पर मुख्यमंत्री के चित्रों पर कालिख पौती थी जिस कारण इस मामले में केसे भी दर्ज हुआ था।