Category: हरियाणा

  • गन्ने की मशहूर CO-0238 बनी कमजोरी, रेड रॉट से हरियाणा में बढ़ी किसानों की चिंता

    गन्ने की मशहूर CO-0238 बनी कमजोरी, रेड रॉट से हरियाणा में बढ़ी किसानों की चिंता

    चंडीगढ़
     हरियाणा के चीनी संकट की वजह सिर्फ जमाखोरी, निर्यात या चीनी मिलों में स्टाक का रुकना नहीं है। संकट का एक बड़ा सिरा खेतों में भी दिखाई दे रहा है, जहां गन्ने की कभी ‘क्रांतिकारी’ मानी जाने वाली सीओ-0238 किस्म रेड राट यानी लाल सड़न बीमारी की चपेट में है।

    यह वही किस्म है, जिसने उत्तर भारत में गन्ने की उत्पादकता और चीनी रिकवरी को नई ऊंचाई दी थी। इंडियन काउंसिल आफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आइसीएआर) के मुताबिक 2009 में जारी सीओ-0238 ने परीक्षणों में करीब 81 टन प्रति हेक्टेयर गन्ना उत्पादन दिया था। तत्कालीन लोकप्रिय सीओजे-64 की तुलना में इसकी गन्ना उपज करीब 19.96 फीसदी और चीनी की रिकवरी 15.83 फीसदी अधिक थी।

    इसी बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता के कारण हरियाणा के किसानों ने सीओ-0238 किस्म को तेजी से अपनाया था। लेकिन एक ही किस्म पर अत्यधिक निर्भरता आगे चलकर कमजोरी बन गई है।

    केवल किसानों की आशंका नहीं बीमारी
    सीओ-0238 में रेड राट के नए और अधिक आक्रामक “रोगजनक प्रकार सीएफ-13 के उभरने को वैज्ञानिकों ने किस्म की रोग-प्रतिरोधक क्षमता के टूटने से जोड़ा है। यानी जिस किस्म को बीमारी की प्रचलित नस्लों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी माना जाता था, वही नई रोग-नस्ल के सामने कमजोर पड़ने लगी है।

    हरियाणा में बीमारी की मौजूदगी अब केवल किसानों की आशंका नहीं है। आइसीएआर के क्षेत्रीय सर्वेक्षणों में करनाल और आसपास के गन्ना क्षेत्रों में सीओ-0238 में रेड राट दर्ज किया गया है। एक रिपोर्ट में करनाल में 10 फीसदी तक और पलवल क्षेत्र में 10 से 20 फीसदी तक संक्रमण दर्ज किया गया है।

    इसका असर सीओ-0238 के रकबे पर भी दिख रहा है। 2022-23 में हरियाणा के गन्ना क्षेत्र में इस किस्म की हिस्सेदारी करीब 81 फीसदी तक पहुंच गई थी, लेकिन रेड राट और दूसरी समस्याओं के बढ़ते खतरे के बाद इसका क्षेत्र तेजी से घटने लगा है।

    करनाल स्थित आइसीएआर गन्ना प्रजनन केंद्र के वैज्ञानिकों ने सीओ-0238 को रेड राट और टाप बोरर के प्रति कमजोर बताते हुए नई किस्मों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।
    आंकड़ों की एक अहम परत यह भी है कि सीओ-0238 का क्षेत्र घटने का मतलब यह नहीं कि प्रति हेक्टेयर उपज उसी अनुपात में गिर गई।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2022-23 से 2023-24 के बीच सीओ-0238 का क्षेत्र और कुल उत्पादन काफी घटा, लेकिन उसकी प्रति हेक्टेयर उपज में बड़ी गिरावट नहीं आई। इसका अर्थ है कि बीमारी का एक बड़ा आर्थिक असर किस्म के क्षेत्रफल और उपलब्ध गन्ने की कुल मात्रा पर पड़ा है, जबकि खेत-स्तर पर बीमारी से होने वाला वास्तविक नुकसान खेत-दर-खेत अलग है।

    पानीपत में गन्ने की मात्रा के साथ चीनी रिकवरी पर असर
    हरियाणा के पानीपत क्षेत्र के आंकड़े इस संकट का दूसरा पहलू सामने रखते हैं। 2025-26 के पेराई सत्र में किसानों ने गन्ने की प्रति एकड़ पैदावार में करीब 15 फीसदी गिरावट की शिकायत की है। वहीं, चीनी की रिकवरी पिछले सत्र के करीब 9.2 फीसदी से घटकर लगभग 8.5 फीसदी रह गई।

    स्थानीय स्तर पर इसके पीछे भारी बारिश, रेड राट और टाप बोरर (शीर्ष छेदक रोग) को प्रमुख कारणों में बताया गया। यानी बीमारी का असर केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि खेत से मिल तक कितना गन्ना पहुंचा।

    रेड राट गन्ने के अंदरूनी ऊतकों को प्रभावित कर रहा है और संक्रमित गन्ने में सुक्रोज (गन्ने में प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली चीनी) की मात्रा, रस की गुणवत्ता और अंततः चीनी की रिकवरी घट रही है।

    रोहतक चीनी मिल के आंकड़े भी दे रहे दबाव का संकेत
    हरियाणा के रोहतक की मिल के आंकड़े भी लंबी अवधि में दबाव का संकेत देते हैं। 2019-20 में जहां मिल ने करीब 45.91 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की और रिकवरी 9.69 फीसदी रही, वहीं 2024-25 में पेराई घटकर 24.76 लाख क्विंटल और रिकवरी 8.40 फीसदी रह गई।

    यह गिरावट सिर्फ बीमारी से जोड़ना संभव नहीं है, क्योंकि गन्ने की उपलब्धता, पेराई अवधि और दूसरे कृषि कारण भी इसमें शामिल हैं। स्वस्थ गन्ने में बीमारी से प्रभावित पौधे का वजन कम हो रहा है, यह अलग समस्या है।

    विकल्प के तौर पर गन्ने की नई दो प्रजातियां तैयार
    हरियाणा में अब इसका जवाब सीओ-0238 का विकल्प तलाशने में देखा जा रहा है। करनाल स्थित आइसीएआर के गन्ना प्रजनन केंद्र ने सीओ-17018 जैसी नई किस्म विकसित की है, जबकि सीओ-15023 और सीओ-0118 जैसी किस्मों को भी किसानों के सामने विकल्प के रूप में रखा जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सबक यह है कि किसी एक अत्यधिक सफल किस्म पर निर्भरता भी कृषि के लिए जोखिम बन सकती है।

     

  • विमुक्ति दिवस पर CM सैनी का संदेश- केवल दिवस मनाने से नहीं चलेगा, समाज को अधिकार और सुविधाएं भी मिलें

    विमुक्ति दिवस पर CM सैनी का संदेश- केवल दिवस मनाने से नहीं चलेगा, समाज को अधिकार और सुविधाएं भी मिलें

    चंडीगढ़
     हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को अपने चंडीगढ़ आवास पर हरियाणा और पंजाब की घुमंतू एवं विमुक्त जातियों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल विमुक्ति दिवस मनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस समाज को वे अधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए, जिनसे वह लंबे समय तक वंचित रहा है।

    उन्होंने समाज के प्रतिनिधियों से सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचाने का भी आह्वान किया। उन्होंने जानकारी दी कि 702 घुमंतू परिवारों को प्लाट देकर आवास योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश में 1.60 लाख परिवारों को पक्के मकान दिए गए हैं।

    समाज के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि अंग्रेजों ने 1871 में क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के जरिए घुमंतू समाज को जन्मजात अपराधी घोषित कर कलंकित किया था। 31 अगस्त 1952 को इस कानून से मुक्ति मिली, इसलिए इस दिन विमुक्ति दिवस मनाया जाता है।

    उन्होंने समाज के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की स्वतंत्रता और रक्षा में विमुक्त एवं घुमंतू समाज के अनेक महापुरुषों और योद्धाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    मुख्यमंत्री ने सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का ब्योरा देते हुए बताया कि करनाल, पलवल और रोहतक में 702 घुमंतू परिवारों को प्लाट आवंटित किए गए हैं। उन्होंने इसे परिवारों के सुरक्षित भविष्य की नींव बताया।

    उन्होंने बताया कि डा. आंबेडकर आवास नवीनीकरण योजना में मकान मरम्मत की सहायता 30 हजार से बढ़ाकर 80 हजार रुपये की गई है। इससे 85,815 परिवारों को 416 करोड़ रुपये की सहायता मिली है। गरीब परिवारों को 500 रुपये में गैस सिलिंडर उपलब्ध कराने की योजना से 15 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ मिला है।

    8000 से 12000 रुपये तक छात्रवृत्ति…
    मुख्यमंत्री ने घुमंतू समाज से बच्चों को हर हाल में शिक्षित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार 12वीं तक विद्यार्थियों को मुफ्त किताबें, वर्दी और स्टेशनरी देने के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निशुल्क कोचिंग उपलब्ध करा रही है। डा. आंबेडकर मेधावी छात्रवृत्ति योजना के तहत 8,000 से 12,000 रुपये तक छात्रवृत्ति दी जा रही है।

    उन्होंने युवाओं से हुनर सीखने, खेलों में आगे बढ़ने और नशे से दूर रहने का आह्वान किया। साथ ही प्रतिनिधियों से सरकारी योजनाओं की जानकारी समाज के प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने को कहा, ताकि घुमंतू एवं विमुक्त समाज सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त हो सके।

    कार्यक्रम में अखिल भारतीय डीएनटी कल्याण संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह देसुजोदा, हरियाणा घुमंतू जाति विकास बोर्ड के चेयरमैन सरदार जसमेर सिंह बंजारा और पूर्व विधायक लक्ष्मण नापा मौजूद रहे।

  • हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: आय की गलती से योजनाओं से वंचित परिवारों की होगी जांच और सुधार

    हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: आय की गलती से योजनाओं से वंचित परिवारों की होगी जांच और सुधार

    चंडीगढ़
    हरियाणा सरकार परिवार पहचान पत्र (फैमिली आइडी) में आय संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाएगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर इस अभियान के तहत आय से जुड़ी त्रुटियों और विसंगतियों का सत्यापन ग्राम सभाओं के माध्यम से किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र परिवार केवल आय संबंधी गलती के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।

    पीपीपी कोआर्डिनेट डा. सतीश खोला ने बताया कि मुख्यमंत्री ने ग्राम सभाओं की भूमिका को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। ग्राम सभाओं में निर्धारित कोरम पूरा कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्राप्त जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर आय संबंधी शिकायतों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाएगा।

    उन्होंने बताया कि अभियान का पहला चरण दो अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सभी जिलों में प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। हरियाणा के मुख्य सचिव ने सभी उपायुक्तों, अतिरिक्त उपायुक्तों और जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक कर अभियान की रूपरेखा और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    डा. खोला ने कहा कि फैमिली आइडी में आय का सही और अद्यतन विवरण सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने आय संबंधी शिकायत वाले परिवारों से संबंधित ग्राम सभा में आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की।

  • 35 KG दूध देने वाली ‘राधा’ का निधन, PM से सम्मान पाने वाली हरियाणा की शान अब नहीं रही

    35 KG दूध देने वाली ‘राधा’ का निधन, PM से सम्मान पाने वाली हरियाणा की शान अब नहीं रही

    नारनौंद.

    कभी पशु प्रतियोगिताओं के रैंप पर अपनी कद-काठी से लोगों का ध्यान खींचने वाली और फिर 35 किलो 669 ग्राम दूध देकर विश्व स्तर पर हरियाणा की मुर्रा नस्ल का नाम चमकाने वाली ‘राधा’ अब नहीं रही। शनिवार को उसकी मौत की खबर सिंघवा खास पहुंची तो उसे विश्व चैंपियन बनाने वाले पशुपालक ईश्वर सिंह के लिए यह किसी गहरे सदमे से कम नहीं थी।

    करीब एक माह पहले ही उन्होंने राधा को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी पशुपालक सुनील यादव को उपहार में दिया था, लेकिन उससे उनका लगाव कम नहीं हुआ था। वह प्रतिदिन फोन कर राधा की सेहत और खानपान की जानकारी लेते थे। शुक्रवार को राधा ने एक स्वस्थ कटडी को जन्म दिया था। पशुपालक के अनुसार इसके बाद रात तक स्थिति सामान्य थी, लेकिन शनिवार सुबह वह नहीं उठी।

    मुर्रा नस्ल को विश्व स्तर पर अलग पहचान दिलाई
    चिकित्सक को बुलाकर जांच कराई गई। पशुपालक के अनुसार बीमारी के कारण उसकी मौत होने की आशंका जताई गई है। राधा की मौत के साथ ही पशुपालन के क्षेत्र में सिंघवा खास की उस उपलब्धि का एक यादगार अध्याय भी समाप्त हो गया, जिसने मुर्रा नस्ल को विश्व स्तर पर अलग पहचान दिलाई थी। मुर्रा नस्ल की बेहतरीन भैंसों के लिए पहचान रखने वाले सिंघवा खास के ईश्वर सिंह लंबे समय से पशुपालन कर रहे हैं। उनकी धन्नो और हेमा मालिनी नाम की भैंसें भी पशु प्रतियोगिताओं में पहचान बना चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने दूध उत्पादन का नया कीर्तिमान बनाने के लिए राधा को तैयार किया। ईश्वर सिंह के अनुसार उन्होंने इंटरनेट पर अधिक दूध देने वाली भैंसों के रिकार्ड की जानकारी जुटाई। इससे पहले 33 किलो 800 ग्राम दूध का रिकार्ड कैथल के बूढा खेडा के पशुपालक नरेश की भैंस रेशमा के नाम होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद राधा ने 35 किलो 669 ग्राम दूध देकर कीर्तिमान बनाया।

    चार लाख में खरीदी, चैंपियन बनाने के लिए तैयार की खास दिनचर्या
    ईश्वर सिंह ने बताया कि राधा को पिछले वर्ष फतेहाबाद के गांव कन्हेडी से चार लाख रुपये में खरीदा था। उसके लिए साफ गद्दे बिछाए जाते थे। दिन में तीन बार स्नान, महीने में एक बार कटिंग और प्रतिदिन सरसों के तेल से मालिश की जाती थी। गर्मी में कूलर की व्यवस्था रहती थी। आहार में आठ किलो चने, चार किलो बिनोला, दो किलो गेहूं का दलिया और दो किलो गुड सहित विशेष फीड दी जाती थी। राधा को प्रधानमंत्री भी सम्मानित कर चुके थे।

    खबर मिली तो घर में नहीं जला चूल्हा: ईश्वर
    ईश्वर सिंह ने बताया कि राधा को उपहार में देने के बाद भी वह लगातार उसकी जानकारी लेते थे। शनिवार को उसकी मौत की सूचना मिली तो पूरा परिवार दुखी हो गया और घर में चूल्हा तक नहीं जला। उन्होंने कहा कि राधा उनके लिए केवल पशु नहीं थी, बल्कि वर्षों की मेहनत और पशुपालन से जुडे सपने की पहचान बन चुकी थी।

    पशु पालकों में शोक, राधा की उपलब्धि बनी रहेगी याद
    राधा की मौत की सूचना मिलने के बाद क्षेत्र के पशुपालकों ने भी दुख जताया। पशुपालकों का कहना है कि 35.669 किलो दूध देकर राधा ने अकेले अपने पालक का ही नहीं, बल्कि हरियाणा की मुर्रा नस्ल का नाम विश्व स्तर पर पहुंचाया। उसकी उपलब्धि पशुपालकों को बेहतर नस्ल और वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन के लिए प्रेरित करती रहेगी।

  • विधानसभा में सामने आया छात्रवृत्ति का उलझा हिसाब, OBC विद्यार्थियों के भुगतान पर सरकार से सवाल

    विधानसभा में सामने आया छात्रवृत्ति का उलझा हिसाब, OBC विद्यार्थियों के भुगतान पर सरकार से सवाल

    चंडीगढ़
     हरियाणा में ओबीसी विद्यार्थियों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति को लेकर सरकार के विधानसभा में दिए आंकड़ों में ऐसा अंतर सामने आया है, जिसका स्पष्ट मिलान जवाब में नहीं मिलता।

    वर्ष 2024-25 में ओबीसी विद्यार्थियों के 63,893 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 52,023 आवेदन स्वीकृत किए गए। इसके बावजूद छात्रवार विवरण में छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या शून्य दर्ज है।

    वहीं, इसी वर्ष के वित्तीय विवरण में ओबीसी पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 776.04 लाख रुपये का बजट स्वीकृत होने और उसमें से 3.44 करोड़ रुपये वितरित किए जाने की जानकारी दी गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब छात्रवार रिकार्ड में किसी विद्यार्थी को भुगतान नहीं हुआ, तो 3.44 करोड़ रुपये किस अवधि या किन विद्यार्थियों के लिए जारी किए गए।

    आदित्य सुरजेवाला ने पूछे सवाल
    यह मामला कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला के विधानसभा सवाल के जवाब में सामने आया। उन्होंने 2019 से अब तक एससी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के आवेदन, स्वीकृति, वास्तविक भुगतान और बजट वितरण का वर्षवार ब्योरा मांगा था।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में 60,696 ओबीसी विद्यार्थियों ने आवेदन किया। इनमें 50,910 आवेदन स्वीकृत हुए, लेकिन केवल 17,937 विद्यार्थियों को भुगतान किया गया। 2022-23 में 39,745 आवेदन स्वीकृत हुए और 38,483 विद्यार्थियों को भुगतान किया गया। हालांकि 3,8 करोड़ रुपये के स्वीकृत बजट के मुकाबले केवल 7 करोड़ 87 लाख रुपये ही वितरित किए गए।

    हरियाणा सरकार ने छात्रवृत्ति भुगतान में देरी या कमी के लिए निष्क्रिय आधार, सत्यापन में दिक्कत, अधूरे दस्तावेज और बजट की अनुउपलब्धता जैसे कारण बताए हैं। 2025-26 में 38,333 आवेदन आए, 29,784 मंजूर हुए और 25,847 विद्यार्थियों को भुगतान किया गया।

    बीसीए के 75,621 विद्यार्थियों को वजीफा
    नूंह से कांग्रेस विधायक चौधरी आफताब अहमद के सवाल के जवाब में स्कूल शिक्षा विभाग ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में कक्षा 10वीं के 38,364 और कक्षा 12वीं के 37,257 बीसीए विद्यार्थियों, यानी कुल 75,621 विद्यार्थियों को मासिक वजीफा दिया गया।

    सरकार ने स्पष्ट किया कि यह योजना ओबीसी पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति से अलग है। जवाब में यह भी कहा गया कि स्कूल शिक्षा विभाग में बीसी-बी विद्यार्थियों के लिए कोई छात्रवृत्ति योजना संचालित नहीं है।

    वहीं, ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के मामले में 2019-20 से 2026-27 तक लगातार आठ वित्तीय वर्षों में न बजट स्वीकृत होने और न राशि वितरित होने का रिकॉर्ड सरकार ने दिया है।

     

  • परिवार पहचान पत्र की गलत आय जानकारी पर सरकार सख्त, नायब सैनी चलाएंगे सुधार अभियान

    परिवार पहचान पत्र की गलत आय जानकारी पर सरकार सख्त, नायब सैनी चलाएंगे सुधार अभियान

    चंडीगढ़.

    हरियाणा सरकार परिवार पहचान पत्र (फैमिली आइडी) में आय संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाएगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर इस अभियान के तहत आय से जुड़ी त्रुटियों और विसंगतियों का सत्यापन ग्राम सभाओं के माध्यम से किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र परिवार केवल आय संबंधी गलती के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।

    पीपीपी कोआर्डिनेट डा. सतीश खोला ने बताया कि मुख्यमंत्री ने ग्राम सभाओं की भूमिका को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। ग्राम सभाओं में निर्धारित कोरम पूरा कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्राप्त जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर आय संबंधी शिकायतों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान का पहला चरण दो अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सभी जिलों में प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। हरियाणा के मुख्य सचिव ने सभी उपायुक्तों, अतिरिक्त उपायुक्तों और जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक कर अभियान की रूपरेखा और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    डा. खोला ने कहा कि फैमिली आइडी में आय का सही और अद्यतन विवरण सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने आय संबंधी शिकायत वाले परिवारों से संबंधित ग्राम सभा में आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की।

  • टांगरी नदी के कटाव से किसानों की बढ़ी चिंता, जमीन बचाने और मुआवजे की मांग

    टांगरी नदी के कटाव से किसानों की बढ़ी चिंता, जमीन बचाने और मुआवजे की मांग

    रायपुररानी (पंचकूला)
     टांगरी नदी के तेज बहाव ने रायपुररानी क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। नदी के लगातार बदलते रुख और तेज कटाव के कारण खेड़ी, ढंडारडू, बटवाल, हरीपुर, मौली, नटवाल और टोडा सहित कई गांवों में कृषि भूमि प्रभावित हुई है।

    कई स्थानों पर किसानों की जमीन कटकर नदी में समा चुकी है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। तेज बहाव के कारण खटौली से खेड़ी को जोड़ने वाली सड़क का भी काफी हिस्सा नदी में बह गया है। सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों के आवागमन में परेशानी बढ़ गई है।

    वहीं नदी के किनारे लगातार हो रहे कटाव के चलते आसपास की और कृषि भूमि पर भी खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि नदी का बहाव लगातार अपना रुख बदल रहा है।

    यदि समय रहते कटाव रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में और अधिक कृषि भूमि तथा संपर्क मार्ग नदी की चपेट में आ सकते हैं। इससे क्षेत्र के किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।

    प्रशासनिक इंतजामों पर उठाए सवाल
    किसानों ने प्रशासनिक प्रबंधों पर सवाल उठाते हुए रोष जताया है। उनका आरोप है कि टांगरी नदी के कटाव को रोकने के लिए समय रहते पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए।

    किसानों का कहना है कि बरसात और नदी के तेज बहाव से पहले यदि संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा कार्य कराए जाते तो कृषि भूमि और सड़क को होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।

    ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों और नदी किनारे के क्षेत्रों का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। कटाव प्रभावित स्थानों पर पत्थरों, क्रेट वायर और अन्य आवश्यक उपायों के माध्यम से पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की जाए, ताकि आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सके।

    नुकसान का सर्वे कर मुआवजे की मांग
    किसानों ने नदी में समाई कृषि भूमि और फसलों के नुकसान का सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही खटौली-खेड़ी सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से की तत्काल मरम्मत कराकर ग्रामीणों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।

     

  • खट्टर ने दीपेंद्र हुड्डा पर कसा तंज, ‘फितरत के हिसाब से बयान देते हैं नेता’

    खट्टर ने दीपेंद्र हुड्डा पर कसा तंज, ‘फितरत के हिसाब से बयान देते हैं नेता’

    करनाल.

    कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा की ओर से सज्जन सिंह को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार का चरित्र किसी व्यक्ति का होता है, वह उसी प्रकार की बातें करता है।

    सज्जन सिंह पर किस प्रकार के आरोप लगे और किस तरह वह कटघरे में खड़े हुए, यह सभी जानते हैं। ऐसे व्यक्ति का इस प्रकार के शब्दों में व्याख्यान करना कहीं से भी उचित नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने इस मामले में बिना कोई नई बात जोड़े सज्जन सिंह के पुराने विवाद और उन पर लगे आरोपों का हवाला देते हुए हुड्डा की टिप्पणी को अनुचित बताया। उन्होंने मेजर ध्यानचंद की जयंती पर शनिवार की शाम राष्ट्रीय खेल दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बातचीत की।

    नेपाल की त्रासदी पर जताई चिंता
    नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा पर मनोहर लाल ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नेपाल में इस तरह की बड़ी प्राकृतिक त्रासदी पहले कभी हुई हो, ऐसा उन्होंने नहीं सुना। हिमालयी क्षेत्र में बनी कृत्रिम झीलों के टूटने, ग्लेशियरों के नीचे गिरने और नदियों में पानी एकत्र होने के बाद झीलों के टूटने से सैलाब की स्थिति पैदा हुई है। इससे बड़ी संख्या में लोग लापता हुए हैं और जान-माल का भारी नुकसान होने की आशंका है। फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि कितने लोगों की मौत हुई है, लेकिन नुकसान बड़े स्तर पर होने की आशंका है। नेपाल छोटा देश है, इसलिए उसके लिए इस त्रासदी से उबरना चुनौतीपूर्ण होगा। हालांकि दुनिया के कई देश नेपाल की सहायता के लिए आगे आ रहे हैं। भारत भी वहां की आवश्यकता के अनुसार हरसंभव सहयोग करेगा।

    सफाई कर्मचारियों की हड़ताल पर बोले- जल्द होगा समाधान
    प्रदेश में कई सप्ताह से चल रही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल पर भी केंद्रीय मंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार के संज्ञान में यह मामला है और उम्मीद है कि जल्द इसका समाधान हो जाएगा। सफाई कर्मचारियों की पहले भी कई मांगें पूरी की गई हैं और यदि अभी कोई छोटी-मोटी कमी रह गई है तो उसे भी दूर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार कर्मचारियों की मांगों को लेकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • हरियाणा में दूध बेचने के नए नियम, 100 रुपये लीटर से कम कीमत पर जुर्माना

    हरियाणा में दूध बेचने के नए नियम, 100 रुपये लीटर से कम कीमत पर जुर्माना

    पानीपत/हिसार.

    प्रदेश के कई जिलों में दुग्ध उत्पादकों ने दूध के दाम 100 रुपये प्रति किलो करने का निर्णय ले लिया है। शनिवार को कुरुक्षेत्र के बारना गांव में कई नियम तय किए गए। इसी तरह कैथल और जींद के कुछ गांवों में भी ऐसी मांग उठी। हालांकि, दुग्ध एजेंसियों ने दाम नहीं बढ़ाए हैं।

    दुग्ध उत्पादकों का तर्क है कि खल-बिनौले, गुड़, तूड़ा और हरे चारे के दामों के अलावा भैंसों के रेट भी बहुत अधिक हो गए है। उनका तर्क है कि दूध के दाम 60 से 80 रुपये तक ही मिल रहे हैं। बैठक में दूध के दाम बढ़ाने और गांव के सभी दूध विक्रेताओं द्वारा इन्हीं दामों पर दूध-घी बेचने पर सहमति जताई। मखन सिंह ने बताया कि बैठक में भैंस का दूध 100 रुपये और गाय का दूध 80 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचे जाने का निर्णय लिया। भैंस का घी 1500 रुपये प्रति किलोग्राम, जबकि गाय का घी 2200 रुपये प्रति किलोग्राम ही बेचा जाएगा। इससे कम दामों पर बेचेगा तो 5100 रुपये का जुर्माना लगेगा।

    इस वजह से लिया रेट बढ़ाने का फैसला
    कैथल के धनौरी में भी पशुपालकों ने दूध के दाम बढ़ाने पर चर्चा की। भैंस का दूध 100 रुपये प्रति लीटर करने का सामूहिक निर्णय लिया गया है। जींद के सिरसा खेड़ी गांव में कुछ पशुपालकों ने अपने स्तर पर दूध के रेट बढ़ाने का फैसला लिया था। हालांकि गांव में ये फैसला लागू नहीं हुआ। कुछ पशुपालकों के साथ मिलकर भैंसके दूध के रेट 100 रुपया प्रति लीटर करने का फैसला किया था, लेकिन बाकी पशु पालक पहले वाले रेट पर ही दूध बेचते रहे। जिससे उनका फैसला लागू नहीं हो पाया। गांव की सरपंच कविता देवी ने कहा कि गांव में दूध के रेट बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया है। जो रेट चल रहे हैं, उसी के हिसाब से दूध बिक रहा है।

    पशु पालकों ने गांव स्तर पर यूनियन बना कर दी घोषणा
    हांसी में ग्रामीण पशुपालकों ने गांव स्तर पर अपनी यूनियन बनाकर दूध और घी के दामों में बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। 5 सितंबर से गाय का दूध 80 रुपये और भैंस का दूध 100 रुपये प्रति लीटर बेचने का निर्णय लिया गया है। वहीं, गांव में फ्री मिलने वाली लस्सी का रेट भी 20 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है। यह मुहिम हांसी क्षेत्र के गांव भैणी अमीरपुर से शुरू हुई है। इसके बाद राजथल और थुराना के पशुपालकों ने भी एकजुट होकर यह निर्णय लिया है। तय रेट से कम पर दूध बेचने वाले पशुपालक पर जुर्माना लगाने की बात भी कही गई है।

  • नर्सिंग ऑफिसर की याचिका पर बड़ा फैसला, ऑस्ट्रेलिया जाने की मिली अनुमति; सरकार का आदेश रद्द

    नर्सिंग ऑफिसर की याचिका पर बड़ा फैसला, ऑस्ट्रेलिया जाने की मिली अनुमति; सरकार का आदेश रद्द

    चंडीगढ़
    पंजाब एवं हरियाणा  हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर लगाई गई पूर्ण पाबंदी को खारिज कर दिया है। अदालत ने इस फैसले को मनमाना और संवैधानिक अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार के तर्कों पर कड़ा ऐतराज जताया।

    मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने कहा कि सरकार की यह पाबंदी उसके द्वारा बताए गए उद्देश्यों के मुकाबले बेहद असंतुलित थी। अदालत ने टिप्पणी की कि सरकार का यह कदम "अखरोट तोड़ने के लिए भारी हथौड़े का इस्तेमाल करने जैसा है।

    हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि किसी कर्मचारी को अपने पेशेवर कौशल को बढ़ाने के लिए विदेश जाने से रोकने से सरकार के ईंधन बचाने के लक्ष्य में भला कैसे मदद मिल सकती है?

    क्या है पूरा मामला?
    यह विवाद रोहतक स्थित PGIMS की नर्सिंग ऑफिसर शीतल रानी की याचिका से जुड़ा है। शीतल ने ऑस्ट्रेलिया में एक पेशेवर कोर्स और रजिस्ट्रेशन परीक्षा में शामिल होने के लिए छुट्टी की अर्जी दी थी।

    फरवरी 2021 में शीतल रानी PGIMS रोहतक में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर तैनात हुईं। जनवरी 2024 में उन्हें ऑस्ट्रेलियाई वीजा आवेदन की मंजूरी मिली और बाद में विजिटर वीजा जारी हो गया। 29 सितंबर में ऑस्ट्रेलिया में उनकी परीक्षा निर्धारित थी, जिसके लिए उन्होंने 'अर्न्ड लीव' के लिए आवेदन किया।

    क्यों खारिज हुई थी छुट्टी?
    हरियाणा सरकार ने 10 जून को एक दिशा-निर्देश जारी किया था। इसके तहत सितंबर तक सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस नीति में केवल गंभीर मेडिकल इलाज के मामलों को ही छूट दी गई थी, जिसके चलते शीतल रानी की छुट्टी की अर्जी निरस्त कर दी गई थी।

    हाईकोर्ट ने सरकार के इस आदेश को पूरी तरह खारिज करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता नर्सिंग ऑफिसर को परीक्षा में शामिल होने के लिए ऑस्ट्रेलिया जाने की तुरंत अनुमति दी जाए।