Category: हरियाणा

  • हरियाणा में शामलात जमीन की अवैध डील का खुलासा, 112 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

    हरियाणा में शामलात जमीन की अवैध डील का खुलासा, 112 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

    चंडीगढ़.

    राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, फरीदाबाद ने पलवल जिले के ग्राम फास्टकू नगर, तहसील होडल की शामलात देह/भूमि को राजस्व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ कथित मिलीभगत कर गलत तरीके से बेचने और खरीदने तथा सरकार को राजस्व हानि पहुंचाने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है।

    ब्यूरो द्वारा इस मामले में 7 तत्कालीन सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों सहित कुल 112 आरोपियों के विरुद्ध माननीय न्यायालय में चालान (चार्जशीट) पेश किया गया है। चार्जशीट में तत्कालीन तहसीलदार होडल नरेश जोवल, मनबीर सिंह एवं ओम प्रकाश गोदारा, तत्कालीन रजिस्ट्री क्लर्क भगवान सिंह एवं भूप सिंह, तत्कालीन पटवारी ताराचन्द तथा तत्कालीन गिरदावर वीरेन्द्र सिंह के अलावा 105 ग्रामवासी, विक्रेता एवं खरीदार शामिल हैं। आरोपियों के विरुद्ध धारा 420, 120-बी, 409, 467, 468, 471 भारतीय दंड संहिता, धारा 13(1)(डी) सहपठित 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा धारा 13-ए, पंजाब विलेज कॉमन लैंड एक्ट, 1961 के तहत चालान माननीय न्यायालय श्री प्रतीक जैन, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, पलवल के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।

    उच्च न्यायालय के आदेश पर शुरू हुई थी जांच
    यह मामला सी.डब्ल्यूपी. नंबर 10058 ऑफ 2010 में माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ के आदेशों के अनुपालन में शुरू हुई जांच से सामने आया। मैसर्स क्रिस्टल बायोटेक कंपनी द्वारा गांव अतवा, जिला पलवल की शामलात देह की खरीद के संबंध में जांच के आधार पर थाना राज्य सतर्कता ब्यूरो (हरियाणा), गुरुग्राम में मुकदमा नंबर 13 दिनांक 14.05.2012 दर्ज किया गया था। इसके बाद माननीय उच्च न्यायालय द्वारा सी.डब्ल्यूपी. नंबर 10058 ऑफ 2010 तथा सी.डब्ल्यूपी. नंबर 8160 ऑफ 2011 में यह निर्देश दिए गए कि यदि मैसर्स क्रिस्टल बायोटेक कंपनी के अलावा अन्य व्यक्तियों द्वारा जिला पलवल के गांवों की शामलात भूमि से संबंधित वसिकाएं भी गलत पाई जाती हैं, तो उनकी भी जांच की जाए।

    11 वसिकाओं में शामलात भूमि की खरीद-फरोख्त
    इसी क्रम में जांच क्रमांक 02 दिनांक 08.06.2012, पलवल में जांच के दौरान ग्राम फास्टकू नगर, तहसील होडल की शामलात देह की खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया। जांच में पाया गया कि कुल 11 वसिकाओं के माध्यम से ग्राम फास्टकू नगर की 1,856 कनाल 13 मरला शामलात देह/भूमि को ग्रामवासियों द्वारा राजस्व विभाग के तत्कालीन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ कथित सांठगांठ कर अनुचित तरीके से बेचने एवं खरीदने की कार्रवाई की गई। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा वसिकाओं के पंजीकरण तथा इंतकाल दर्ज करने की प्रक्रिया में अपनी आधिकारिक भूमिका का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी भूमि की खरीद-फरोख्त हुई और सरकार को राजस्व की हानि पहुंची।

    जांच में आरोपों की पुष्टि के बाद दर्ज हुआ मुकदमा
    जांच क्रमांक 02/2012, पलवल के दौरान आरोपों की पुष्टि होने पर ग्राम फास्टकू नगर की शामलात भूमि को बेचने वाले ग्रामवासियों/ विक्रेताओं, खरीदारों तथा वसीका पंजीकरण एवं इंतकाल दर्ज करने वाले तत्कालीन सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध अभियोग संख्या 36 दिनांक 10.11.2022 थाना भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, फरीदाबाद में दर्ज किया गया। मामले की विस्तृत जांच के उपरांत अब कुल 112 आरोपियों के विरुद्ध चालान माननीय न्यायालय में पेश किया गया है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा सरकारी भूमि एवं राजस्व से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार, मिलीभगत और पद के दुरुपयोग के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। ब्यूरो का उद्देश्य सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों तथा अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार प्रभावी कार्रवाई करना है।

  • हरियाणा में सफाईकर्मियों का प्रदर्शन हुआ हिंसक, ठेकेदार से मारपीट के बाद सरकारी जीप में तोड़फोड़

    हरियाणा में सफाईकर्मियों का प्रदर्शन हुआ हिंसक, ठेकेदार से मारपीट के बाद सरकारी जीप में तोड़फोड़

    हिसार/पानीपत.

    हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल 28वें दिन भी जारी है। 27वें दिन मंगलवार को वैकल्पिक सफाई व्यवस्था के विरोध में टकराव के मामले सामने आए। कैथल के सीवन में सफाई व्यवस्था का निरीक्षण कर लौट रहे नगर पालिका अधिकारियों की सरकारी जीप पर सफाई कर्मचारियों व उनके स्वजन द्वारा कस्सी से कथित हमला किया गया।

    वार से जीप का पिछला शीशा टूट गया और कनिष्ठ अभियंता व लिपिक बाल-बाल बच गए। जींद में चार दिन बाद कूड़ा उठाने पहुंचे ठेकेदार के कर्मचारियों का हड़तालियों ने विरोध किया और हाथापाई हुई। हिसार में कचरा उठान के दौरान पुलिस से टकराव में पांच पुलिसकर्मियों को हल्की चोटें आईं। फतेहाबाद में पुलिस सुरक्षा में उठान कराया गया। बढ़ती अव्यवस्था के बीच कई सामाजिक संगठन अब हड़ताल के तौर-तरीकों पर सवाल उठाने लगे हैं। उनका कहना है कि मांगों को लेकर आंदोलन के अधिकार के साथ आमजन की सुविधाओं और सार्वजनिक व्यवस्था का ध्यान रखना भी जरूरी है।

    बारिश और बाजारों में कचरे से बढ़ी परेशानी
    यमुनानगर में हड़ताल के 27वें दिन बारिश के कारण डंपिंग प्वाइंटों का कचरा बहकर गलियों और मोहल्लों तक पहुंचा। पानीपत के पालिका बाजार में कचरा डाले जाने से दुकानदार परेशान रहे, हालांकि निजी एजेंसियों ने करीब 300 टन कचरा उठाया। भिवानी में घर-घर कचरा उठान प्रभावित है। अंबाला कैंट में 250 कर्मचारी हड़ताल पर हैं और वैकल्पिक व्यवस्था भी कमजोर पड़ गई है। कैथल में पुलिस की मौजूदगी में डंपिंग प्वाइंटों से कचरा उठाया गया, जबकि रोहतक में कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर सरकार का पुतला फूंका।

    हिसार में उठान के दौरान पुलिस से टकराव
    हिसार में नगर निगम के 667 सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं। मंगलवार को सेक्टर 9-11 और अर्बन एस्टेट में कचरा संग्रहण कराया गया। अर्बन एस्टेट में हड़ताली कर्मचारियों ने इसका विरोध किया। उन्हें पकड़ने के दौरान करीब पांच पुलिसकर्मियों को हल्की चोटें लगीं और कई कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया। फतेहाबाद में नगर परिषद ने पुलिस सुरक्षा में डोर-टू-डोर कचरा उठवाया। 15 वाहनों के साथ पुलिस बल तैनात रहा और करीब 50 कर्मचारियों ने लगभग 150 टन कचरा उठाया। कार्यालय में कूड़ा डालने के मामले में 15 कर्मियों के खिलाफ शिकायत दी गई है। झज्जर में छह दिन बाद फिर लगे कूड़े के ढेर झज्जर में 125 टन कचरा उठाए जाने के छह दिन बाद फिर ढेर लग गए हैं। कर्मचारियों ने दिन में सरकार का पुतला फूंका और शवयात्रा निकाली।

  • 177 KM का नया हाईवे, टोल से राहत; हरियाणा में बदलेगी सफर की तस्वीर

    177 KM का नया हाईवे, टोल से राहत; हरियाणा में बदलेगी सफर की तस्वीर

    अंबाला.

    साल 2027 में हरियाणा के लोगों को एक नई सौगात मिलेगी। अंबाला से शामली तक छह लाइन का हाइवे बनाया जा रहा है। इसका काम तकरीबन 70 फीसदी पूरा भी हो चुका है। इस राजमार्ग से बन जाने से पश्चिमी यूपी का सफर आसान हो जाएगा। वहीं, इस रूट का फायदा हरियाणावासियों को भी खूब मिलेगा। हरियाणा से वेस्ट यूपी तक बन रहा यह हाइवे मार्च, 2027 तक पूरा हो जाएगा।

    4900 करोड़ की लागत से हो रहा निर्माण
    हरियाणा के अंबाला से लेकर उत्तर प्रदेश के बीच बन रहा 122 किलोमीटर लंबा यह हाइवे की लागत 4800 करोड़ रुपये है। जिसके पूरा होने का लक्ष्य मार्च, 2027 रखा है। इस हाइवे को भारतमाला परियोजना के तहत किया जा रहा है। यह साल 2024 में शुरू हुआ था।

    हरियाणा के किन जिलों को फायदा?
    करनाल
    पानीपत
    कुरुक्षेत्र
    यमुनानगर
    अंबाला
    कैथल
    जींद
    रोहतक

    कहां से लेकर कहां तक बना रहा यह हाईवे?
    इस हाइवे का निर्माण अंबाला से शामली के बीच हो रहा है। इस बीच यह छह जिलों से होकर गुजरेगा। हरियाणा के अंबाला के अंतर्गत सोदापुर गांव से इसकी शुरुआत होगी। इसके बाद कुरुक्षेत्र, करनाल और यमुनानगर से होते हुए यह यूपी के सहारनपुर से होकर शामली को जोड़ेगा। खास बात है कि इस पूरे हाइवे पर कोई टोल प्लाजा नहीं होगा। 

    हाइवे से जुड़ी खास बातें…
    हाइवे पर कई स्थानों पर दिल्ली-देहरादून इकोनामिक काॉरिडोर की तर्ज पर रेस्ट एरिया बनाया जाएगा।
    पेट्रोल, सीएनजी पंप, रेस्टोरेंट और शौचालय आदि की सुविधा सुलभ कराई जाएगी।  NHAI बागपत डिवीजन द्वारा शामली से सहारनपुर तक 45 किमी हाइवे का निर्माण कराया जा रहा है। इस हाइवे का 77 किमी का दरमियां अंबाला डिवीजन के अंतर्गत आता है। हाइवे का लगभग 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। मार्च-2027 तक निर्माण कार्य पूरा करा लिया जाएगा।

  • 4800 करोड़ से बन रहा अंबाला-शामली हाईवे, टोल फ्री सफर की मिलेगी सुविधा

    4800 करोड़ से बन रहा अंबाला-शामली हाईवे, टोल फ्री सफर की मिलेगी सुविधा

    अंबाला
     साल 2027 में हरियाणा के लोगों को एक नई सौगात मिलेगी। अंबाला से शामली तक छह लाइन का हाइवे बनाया जा रहा है।

    इसका काम तकरीबन 70 फीसदी पूरा भी हो चुका है। इस राजमार्ग से बन जाने से पश्चिमी यूपी का सफर आसान हो जाएगा। वहीं, इस रूट का फायदा हरियाणावासियों को भी खूब मिलेगा। हरियाणा से वेस्ट यूपी तक बन रहा यह हाइवे मार्च, 2027 तक पूरा हो जाएगा।
    4900 करोड़ की लागत से हो रहा निर्माण

    हरियाणा के अंबाला से लेकर उत्तर प्रदेश के बीच बन रहा 122 किलोमीटर लंबा यह हाइवे की लागत 4800 करोड़ रुपये है। जिसके पूरा होने का लक्ष्य मार्च, 2027 रखा है। इस हाइवे को भारतमाला परियोजना के तहत किया जा रहा है। यह साल 2024 में शुरू हुआ था।

    हरियाणा के किन जिलों को फायदा?
        करनाल
        पानीपत
        कुरुक्षेत्र
        यमुनानगर
        अंबाला
        कैथल
        जींद
        रोहतक

    कहां से लेकर कहां तक बना रहा यह हाईवे?
    इस हाइवे का निर्माण अंबाला से शामली के बीच हो रहा है। इस बीच यह छह जिलों से होकर गुजरेगा। हरियाणा के अंबाला के अंतर्गत सोदापुर गांव से इसकी शुरुआत होगी।

    इसके बाद कुरुक्षेत्र, करनाल और यमुनानगर से होते हुए यह यूपी के सहारनपुर से होकर शामली को जोड़ेगा। खास बात है कि इस पूरे हाइवे पर कोई टोल प्लाजा नहीं होगा। 

    हाइवे से जुड़ी खास बातें…
        हाइवे पर कई स्थानों पर दिल्ली-देहरादून इकोनामिक काॉरिडोर की तर्ज पर रेस्ट एरिया बनाया जाएगा।
        पेट्रोल, सीएनजी पंप, रेस्टोरेंट और शौचालय आदि की सुविधा सुलभ कराई जाएगी। 
        NHAI बागपत डिवीजन द्वारा शामली से सहारनपुर तक 45 किमी हाइवे का निर्माण कराया जा रहा है।
        इस हाइवे का 77 किमी का दरमियां अंबाला डिवीजन के अंतर्गत आता है।
        हाइवे का लगभग 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
        मार्च-2027 तक निर्माण कार्य पूरा करा लिया जाएगा।

  • बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव! 6105 गांवों में 24 घंटे सप्लाई, पोल बदलने का काम शुरू

    बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव! 6105 गांवों में 24 घंटे सप्लाई, पोल बदलने का काम शुरू

    चंडीगढ़.

    हरियाणा सरकार ने बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे आपूर्ति और पुराने बिजली ढांचे को बदलने पर जोर दिया है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने सोमवार को विधानसभा में बिजली विभाग से जुड़े अलग-अलग सवालों के जवाब में बताया कि प्रदेश के 7,250 गांवों में से 6,105 यानी 84.2 प्रतिशत गांवों को 24 घंटे बिजली मिल रही है।

    शेष 1,145 गांवों में 16 घंटे आपूर्ति की जा रही है और उन्हें भी चरणबद्ध तरीके से 24 घंटे बिजली से जोड़ा जाएगा। कालांवाली के कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाला के सवाल के जवाब में अनिल विज ने विधानसभा में बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश ने 40,918.30 करोड़ रुपये की बिजली खरीदी गई। प्रदेश के सभी 95 शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। अनिल विज ने पिहोवा के कांग्रेस विधायक मनदीप चट्ठा के सवाल के जवाब में सदन में कहा कि पिहोवा क्षेत्र में भी बिजली ढांचे में बदलाव होगा। गुलदेहरा और ठसका मीरांजी गांवों के बाहरी क्षेत्र में 11 केवी कृषि फीडरों पर मिले 107 लोहे के पोलों में 16 रेल पोल हैं। शेष 91 लोहे के पोल जनवरी 2027 तक पीसीसी पोल से बदले जाएंगे।

    6,105 गांवों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति – विज
    ऊर्जा मंत्री ने बताया कि हरियाणा सरकार की ‘म्हारा गांव-जगमग गांव’ योजना’’ के तहत प्रदेश के गांवों को चरणबद्ध तरीके से 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दायरे में लाया जा रहा है। प्रदेश के कुल 7,250 गांवों में से 6,105 गांवों यानी 84.2 प्रतिशत गांवों में पहले से ही 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है, जबकि 1,145 गांवों में 16 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है। उन्होंने कहा कि शेष गांवों को भी चरणबद्ध तरीके से 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दायरे में लाया जा रहा है। इसके लिए संबंधित क्षेत्रों में बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने तथा फीडरों के लोड को निर्धारित सीमा के भीतर लाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के तहत 55 शहरी क्षेत्रों तथा 2686 गांवों में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है जबकि 980 गांवों में 16 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है। इसी प्रकार, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के तहत 40 शहरी क्षेत्र तथा 3419 गांवों में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है जबकि 165 गांवों में 16 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है।

    बिजली विभाग में 27,746 नियमित कर्मचारी कार्यरत – विज
    विज ने विधानसभा में बताया कि ऊर्जा विभाग में विभिन्न श्रेणियों के कुल 53,289 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 27,746 पदों पर नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं तथा 25,543 पद रिक्त हैं। उन्होंने बताया कि नियमित कर्मचारियों के अतिरिक्त 15,362 कर्मचारी एचकेआरएनएल/ हारट्रोन/कॉन्ट्रैक्टर/पार्ट-टाइम व सीधे आउटसोर्सिंग के माध्यम से विभिन्न कार्यों में सेवाएं दे रहे हैं। इससे बिजली वितरण एवं आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में विभाग को अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने बताया कि ऊर्जा विभाग में श्रेणी-ए के मंजूर पदों की संख्या 1209, कार्यरत पद 1021 तथा रिक्त पदों की संख्या 188 है। इसी प्रकार, श्रेणी-बी के मंजूर पदों की संख्या 1436, कार्यरत पद 1130 तथा रिक्त पदों की संख्या 306 है। इसी तरह, श्रेणी-सी के मंजूर पदों की संख्या 47717, कार्यरत पद 24654 तथा रिक्त पदों की संख्या 23036 है। इसी प्रकार, श्रेणी-डी के मंजूर पदों की संख्या 2927, कार्यरत पद 941 तथा रिक्त पदों की संख्या 1986 है।

    तूफान के कारण टूटे खम्भों को ठीक किया- विज
    उन्होंने कहा कि हालांकि यह सही है कि सिरसा के गांवों में मई, 2026 से जुलाई, 2026 के दौरान बिजली बाधित हुई है, क्योंकि इस दौरान कई तूफान आएं हैं जिसके कारण से 37892 बिजली कें खम्भे टूटकर गिरे थे। उन्होंने बिजली के अधिकारियों व कर्मचारियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे उन सभी कर्मचारियों का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने इन टूटे हुए बिजली के खम्भों को थोंडे ही समय में ठीक किया। इसके अलावा, श्री विज ने कहा कि जिन गांवो में 16 घंटे बिजली दी जा रही है उन गांवों में 24 घंटे बिजली देने के लिए बिजली विभाग का स्टाफ लगातार प्रयत्नशील है और जब यह गांव 24 घंटे बिजली लेने के लिए तय शर्तें पूरी कर लेंगें तब इन गांवों में 24 घंटे बिजली देना आरंभ कर दी जाएगी।

    सरकार का लक्ष्य निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति – विज
    ऊर्जा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को पर्याप्त, गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली उपलब्ध करवाई जाए। बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, फीडरों के सुदृढ़ीकरण और चरणबद्ध तरीके से अधिक से अधिक गांवों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति से जोड़ने के लिए विभाग द्वारा लगातार कार्य किया जा रहा है।

  • गेस्ट टीचर्स होंगे पक्के? CM नायब सैनी का सकारात्मक रुख, जल्द अधिकारियों संग होगी अहम बैठक

    गेस्ट टीचर्स होंगे पक्के? CM नायब सैनी का सकारात्मक रुख, जल्द अधिकारियों संग होगी अहम बैठक

    चंडीगढ़
     हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पिछले 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे अतिथि अध्यापकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है।

    मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सोमवार देर रात अतिथि अध्यापकों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ एक हाई लेवल मीटिंग की। विधानसभा सत्र समाप्त होने के बाद विधानसभा सचिवालय के भीतर आधी रात तक चली इस बैठक के बाद से ही गेस्ट टीचर्स को पक्का किए जाने को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।

    शिक्षा मंत्री भी थे शामिल
    इस बैठक में हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा और सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अतिथि अध्यापकों के मीडिया प्रभारी डॉ. अजय लोहान ने जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने स्वयं मुख्यमंत्री के समक्ष गेस्ट टीचर्स का पूरा मुद्दा प्रमुखता से उठाया।

    मुख्यमंत्री ने मामले पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया है कि जल्द ही अधिकारियों के साथ एक औपचारिक बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें इस समस्या के अंतिम समाधान पर फैसला लिया जाएगा।

    2014 की नीति की सभी शर्तें पूरी करते हैं गेस्ट टीचर
    प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि गेस्ट टीचर्स 2014 की नीति के तहत तय सभी नियमों और शर्तों को पूरा करते हैं। डॉ. लोहान के अनुसार, कॉलेज लेक्चरर और गेस्ट टीचर्स के नियम व शर्तें बिल्कुल एक समान थीं।

    कॉलेज लेक्चरर 2014 में ही पक्के किए जा चुके हैं, जबकि सरकारी स्कूलों में 21 वर्षों से सेवाएं दे रहे गेस्ट टीचर आज भी अपने नियमितीकरण का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 में बीजेपी ने सरकार बनने पर पहली कलम से गेस्ट टीचर्स को नियमित करने का वादा किया था।

    अतिथि अध्यापकों के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे लगातार उनकी मांगों को लेकर गंभीर हैं और मजबूती से उनके साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री नायब सैनी के सकारात्मक रुख के बाद अब हजारों गेस्ट टीचर्स में जल्द पक्के होने की उम्मीद जग गई है।

  • यमुनानगर में 60 लाख से ज्यादा पेड़, पॉपुलर-सफेदा की 88% हिस्सेदारी; 507 बुजुर्ग पेड़ों को मिल रही पेंशन

    यमुनानगर में 60 लाख से ज्यादा पेड़, पॉपुलर-सफेदा की 88% हिस्सेदारी; 507 बुजुर्ग पेड़ों को मिल रही पेंशन

    यमुनानगर
    जिले की हरियाली का बोझ गांव उठा रहे हैं। राज्य में जंगलों से बाहर करीब 4.01 करोड़ पेड़ हैं। इनमें अकेले जिले के 60 लाख 94 हजार 153 पेड़ हैं। कुल पेड़ों में जिले की हिस्सेदारी करीब 14.86 प्रतिशत है।

    यानी राज्य के जंगलों से बाहर दर्ज करीब हर सातवां पेड़ यमुनानगर में है। लेकिन जिले की इस हरियाली का बड़ा हिस्सा गांवों में है। 490 पंचायतों में 59 लाख 97 हजार 412 पेड़ दर्ज हैं, जबकि शहरी क्षेत्र में सिर्फ 96 हजार 474 पेड़ हैं।

    कुल पेड़ों में ग्रामीण हिस्सेदारी 98.41 प्रतिशत और शहरी हिस्सेदारी महज 1.58 प्रतिशत है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के पेड़ों की संख्या में करीब 62 गुना का अंतर है। आंकड़े शहरों में हरियाली बढ़ाने की बड़ी चुनौती सामने रखते हैं।

    आंकड़ों में यमुनानगर प्रदेश में सबसे अधिक पेड़ों वाला जिला है। प्रदेश के कुल पेड़ों में 14.86 प्रतिशत हिस्सेदारी इसे हरियाली के मामले में अलग स्थान देती है। इसके बावजूद शहरों में पेड़ों की कम संख्या चिंता और चितंन का विषय है।

    जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 1756 वर्ग किलोमीटर यानी 4 लाख 33 हजार 916 एकड़ है। 25 हजार एकड़ क्षेत्र कलेसर राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव प्राणी विहार का है। निजी क्षेत्र को शामिल करने पर जिले के 18.55 प्रतिशत क्षेत्र में वन क्षेत्र आता है। वन क्षेत्र के मामले में प्रदेश में पंचकूला के बाद यमुनानगर दूसरे स्थान पर है।/B

    पौधे लगाने से ज्यादा बड़ी चुनौती बचाना
    हर साल पौधारोपण अभियान चलाए जाते हैं। इसके बावजूद पौधों को बचाना चुनौती बना हुआ है। पौधों की बचत दर 65 से 70 प्रतिशत है। यानी 100 पौधे लगाने पर करीब 30 से 35 पौधे जीवित नहीं रह पाते। इस बार बचत दर 90 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए मौजूदा अधिकतम बचत दर से 20 प्रतिशत अंक का सुधार करना होगा।

    कलेसर में आयोजित 74वें वन महोत्सव में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को पौधों की बचत दर 90 प्रतिशत करने के निर्देश दिए थे। लोगों से पौधे लगाने के बाद पांच साल तक उनकी देखरेख करने की अपील भी की थी।

    15 नर्सरियों में तैयार हुए 16.40 लाख पौधे
    जिले में वन विभाग की 15 नर्सरियां हैं। वर्ष 2025-26 में करीब 16 लाख 40 हजार 767 पौधों की आपूर्ति की जा रही है। इनमें क्लोन यूके प्लांट के 10 लाख 23 हजार 115, सरकारी भूमि के लिए 2 लाख 62 हजार 652, किसानों को निशुल्क देने के लिए 75 हजार, जल शक्ति अभियान के लिए दो लाख और पौधागिरी के 80 हजार पौधे शामिल हैं। वर्ष 2024-25 में कुल 22 लाख 50 हजार 808 पौधों की आपूर्ति हुई थी। पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 27.10 प्रतिशत कम है।

    जिले में पापुलर और सफेदा की संख्या सबसे ज्यादा है। पापुलर के 42 लाख 56 हजार 654 पेड़ हैं। यह कुल पेड़ों का 69.86 प्रतिशत है। सफेदा के 11 लाख 39 हजार 557 पेड़ हैं। इनकी हिस्सेदारी 18.70 प्रतिशत है। दोनों प्रजातियों को मिलाकर 53 लाख 96 हजार 211 पेड़ हैं।

    यानी जिले के कुल पेड़ों में करीब 88.54 प्रतिशत हिस्सेदारी पापुलर और सफेदा की है। प्लाईवुड उद्योग के कारण किसान इन दोनों प्रजातियों की खेती बड़े स्तर पर करते हैं। यमुना नदी के आसपास की परिस्थितियां भी इनके लिए अनुकूल हैं। ये पेड़ करीब तीन से चार साल में तैयार हो जाते हैं।

    75 वर्ष पुराने 507 पेड़ों को पेंशन
    नए पौधे लगाने के साथ पुराने पेड़ों के संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। प्राण वायु देवता योजना के तहत जिले में 75 वर्ष पुराने 507 पेड़ों का चयन किया गया है। इनके संरक्षण के लिए प्रति पेड़ तीन हजार रुपये सालाना पेंशन दी जा रही है। इस हिसाब पेड़ों के संरक्षण पर सालाना 15 लाख 21 हजार रुपये की पेंशन दी जा रही है। योजना में पेड़ों के चयन के मामले में यमुनानगर प्रदेश में रेवाड़ी के बाद दूसरे स्थान पर है।

    शहरों की हरियाली बढ़ाने पर विशेष जोर
    प्रदेश सरकार ने इस बार पौधारोपण के साथ शहरी वानिकी पर भी जोर दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कलेसर में आयोजित वन महोत्सव में शहरों में हरियाली बढ़ाने के लिए विशेष योजनाओं का उल्लेख किया था। 

    वन रक्षा दल के महासचिव चौधरी बलबीर सिंह व सदस्य रविंद्र गुर्जर का कहना है कि पौधा लगाना शुरुआत है, लेकिन असली काम उसे बचाना है। नियमित देखरेख और सुरक्षा की व्यवस्था हो तो बचत दर बढ़ाई जा सकती है। 

    आंकड़ों में यमुनानगर की हरियाली
    आंकड़ा श्रेणी                                                                      विवरण / संख्या
    कुल पेड़                                                                              60,94,153
    हरियाणा में जंगलों से बाहर कुल पेड़                                           करीब 4.01 करोड़
    प्रदेश के कुल पेड़ों में यमुनानगर की हिस्सेदारी                              करीब 14.86%
    ग्रामीण क्षेत्र के पेड़                                                                   59,97,412 (98.41%)
    शहरी क्षेत्र के पेड़                                                                     96,474 (1.58%)
    ग्रामीण-शहरी पेड़ों का अनुपात                                               करीब 62 गुना
    कुल भौगोलिक क्षेत्रफल                                                        4,33,916 एकड़
    कलेसर राष्ट्रीय उद्यान व वन्यजीव प्राणी विहार                           25,000 एकड़
    वन क्षेत्र                                                                            18.55%
    वन विभाग की नर्सरियां                                                        15
    पौधा आपूर्ति में एक साल में कमी                                     6,10,041 पौधे (27.10% की कमी)
    वर्तमान पौधा बचत दर                                                 65% से 70%
    इस बार पौधा बचत का लक्ष्य                                         90%
    प्रदेश में पौधारोपण का कुल लक्ष्य                                    2.10 करोड़ से अधिक
    प्राण वायु देवता योजना (वृद्ध पेड़)                                     507 पेड़ (₹3,000/वर्ष प्रति पेड़, कुल ₹15.21 लाख सालाना)

    प्रमुख प्रजातियों के पेड़ों की हिस्सेदारी
    पेड़ की प्रजाति     संख्या     हिस्सेदारी (%)
    पापुलर     42,56,654     69.86%
    सफेदा     11,39,557     18.70%
    मिक्स     4,59,228     7.53%
    आम     81,507     1.34%
    शीशम     71,476     1.17%
    जामुन     31,707     0.52%
    पापड़ी     14,664     0.24%
    नीम     12,609     0.21%
    अमरूद     11,112     0.18%
    आंवला     5,901     0.10%
    किकर     4,619     0.08%
    पीपल     2,957     0.05%
    पिलखन     1,890     0.03%
    बरगद     272     0.004%

    पौधों की आपूर्ति (वर्षवार तुलना)
    श्रेणी                           2024-25     2025-26
    क्लोन यूके प्लांट            13,37,050     10,23,115
    सरकारी भूमि के लिए     3,58,758     2,62,652
    किसानों को निशुल्क      75,000     75,000
    जल शक्ति अभियान      4,00,000     2,00,0

     

  • हरियाणा के गेस्ट टीचर्स के लिए बड़ी खबर! CM सैनी संग हाई-लेवल मीटिंग के बाद जगी उम्मीद

    हरियाणा के गेस्ट टीचर्स के लिए बड़ी खबर! CM सैनी संग हाई-लेवल मीटिंग के बाद जगी उम्मीद

    चंडीगढ़.

    हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पिछले 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे अतिथि अध्यापकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सोमवार देर रात अतिथि अध्यापकों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ एक हाई लेवल मीटिंग की।

    विधानसभा सत्र समाप्त होने के बाद विधानसभा सचिवालय के भीतर आधी रात तक चली इस बैठक के बाद से ही गेस्ट टीचर्स को पक्का किए जाने को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।

    शिक्षा मंत्री भी थे शामिल
    इस बैठक में हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा और सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अतिथि अध्यापकों के मीडिया प्रभारी डॉ. अजय लोहान ने जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने स्वयं मुख्यमंत्री के समक्ष गेस्ट टीचर्स का पूरा मुद्दा प्रमुखता से उठाया। मुख्यमंत्री ने मामले पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया है कि जल्द ही अधिकारियों के साथ एक औपचारिक बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें इस समस्या के अंतिम समाधान पर फैसला लिया जाएगा।

    2014 की नीति की सभी शर्तें पूरी करते हैं गेस्ट टीचर
    प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि गेस्ट टीचर्स 2014 की नीति के तहत तय सभी नियमों और शर्तों को पूरा करते हैं। डॉ. लोहान के अनुसार, कॉलेज लेक्चरर और गेस्ट टीचर्स के नियम व शर्तें बिल्कुल एक समान थीं। कॉलेज लेक्चरर 2014 में ही पक्के किए जा चुके हैं, जबकि सरकारी स्कूलों में 21 वर्षों से सेवाएं दे रहे गेस्ट टीचर आज भी अपने नियमितीकरण का इंतजार कर रहे हैं।

    उन्होंने याद दिलाया कि 2014 में बीजेपी ने सरकार बनने पर पहली कलम से गेस्ट टीचर्स को नियमित करने का वादा किया था। अतिथि अध्यापकों के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे लगातार उनकी मांगों को लेकर गंभीर हैं और मजबूती से उनके साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री नायब सैनी के सकारात्मक रुख के बाद अब हजारों गेस्ट टीचर्स में जल्द पक्के होने की उम्मीद जग गई है।

  • हरियाणा विधानसभा में सियासी वार-पलटवार, CM का हुड्डा पर तीखा हमला

    हरियाणा विधानसभा में सियासी वार-पलटवार, CM का हुड्डा पर तीखा हमला

    चंडीगढ़.

    विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन वीरवार को विधानसभा गेट के बाहर कांग्रेस विधायकों और चंडीगढ़ पुलिस के कर्मचारियों में धक्का-मुक्की का मुद्दा सोमवार को भी सदन में छाया रहा। "गुंडागर्दी" पर हंगामे के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की ओर इशारा करते हुए तंज कसा कि आपने कोहनी मारकर पुलिस वालों की कमर तोड़ दी।

    इस पर पलटवार करते हुए हुड्डा ने कहा कि अगर मैंने ऐसा किया है तो मेरे खिलाफ एफआइआर दर्ज करा दो। वहीं, कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने चुटकी ली कि जिस पुलिसकर्मी को कोहनी मारी गई, उसके साथ इंसाफ कैसे होगा।

    हुड्डा ने दी चुनौती
    हुड्डा ने चुनौती दी कि आपके कहने से एफआइआर दर्ज नहीं होती तो सदन से इस्तीफा दे जाओ। प्रश्नकाल खत्म होते ही कांग्रेस विधायक भारत भूषण बतरा ने विधायकों के साथ हुए दुर्व्यवहार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘गुंडागर्दी’ शब्द का मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री ने जवाब में प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी को ‘कोहनियां मारकर उसकी कमर तोड़ने’ का आरोप लगाया तो सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। हुड्डा ने कहा कि आरोप लगाए जा रहे हैं तो कार्रवाई भी होनी चाहिए। मामला जब शांत हुआ तो विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने विधानसभा की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नियम भी साफ कर दिए। मुख्य गेट से ही विधानसभा परिसर शुरू हो जाता है। गेट के अंदर आने के बाद किसी तरह का प्रदर्शन या धरना नहीं किया जा सकता। समानांतर सत्र चलाने तथा पोस्टर या तख्ती लेकर आने की भी अनुमति नहीं होती। उन्होंने बताया कि प्रत्येक सत्र से पहले पुलिस और विधानसभा के सिक्योरिटी स्टाफ के साथ सुरक्षा समीक्षा बैठक होती है।

    हम हुड्डा से सीखते हैं, लेकिन उनके रास्ते पर नहीं चलते
    मुख्यमंत्री ने कहा कि हुड्डा सदन के बहुत वरिष्ठ एवं सम्मानित सदस्य हैं। हम उनसे सीखते भी हैं। हालांकि हम उस रास्ते पर नहीं चलते, जो ये सिखाते हैं। हमारा रास्ता अलग है। रही बात गुंडागर्दी को लेकर उनके द्वारा कही गई बात की, तो पूरी कार्यवाही और संदर्भ को देखा जा सकता है। उनका किसी का अपमान करने का आशय नहीं था। कांग्रेस विधायकों द्वारा नारे लगाए जा रहे थे कि "इनकी तरफ से गुंडागर्दी की जा रही है।" उन्होंने केवल इतना कहा था कि “गुंडागर्दी हमारी तरफ से नहीं, आपकी तरफ से चल रही है।” ।

    सज्जन कुमार का अनुयायी बताने पर भड़के कांग्रेसी
    सदन में माहौल गरमा गया जब अनिल विज ने कहा कि "सज्जन कुमार के अनुयायी सुन लीजिए।" इस पर कांग्रेस विधायकों ने सदन ने में हंगामा शुरू कर दिया तो स्पीकर विधायकों को चेतावनी देते हुए कहा कि "नेम करने के लिए मजबूर मत कीजिए।" काले कपड़ों पर विवाद के बीच विज ने कहा कि हुड्डा की यादाश्त कम हो गई है। इन्हें याद नहीं आता कि उनकी सरकार में विधानसभा परिसर कहां तक होता था। इनकी सरकार में हमें परिसर से धक्के देकर निकाल दिया जाता था, जिससे हमें सचिवालय के सामने बैठना पडता था। पानी तक नहीं पीने देते थे। हम तो फिर भी काले कपड़े पहनकर नहीं आते थे।

  • यमुनानगर में सफाई व्यवस्था को मिलेगी मजबूती, 350 नए सफाई कर्मचारियों की भर्ती की तैयारी

    यमुनानगर में सफाई व्यवस्था को मिलेगी मजबूती, 350 नए सफाई कर्मचारियों की भर्ती की तैयारी

    यमुनानगर
    डोर-टू-डोर कचरा उठान और निपटान का कार्य कर रही एजेंसी का कार्यकाल 31 अगस्त को पूरा हो गया है। नए टेंडर को अभी मंजूरी नहीं मिलने के कारण नगर निगम प्रशासन ने व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए चार माह की अवधि के लिए नया टेंडर लगाया है।

    इसके लिए करीब 6 करोड़ 46 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है। जल्द ही एजेंसी को वर्क अलाट कर दिया जाएगा। वर्तमान में डोर-टू-डोर कचरा उठान और निपटान का कार्य एक ही एजेंसी संभाल रही है।

    शहर में दिन के साथ-साथ रात के समय भी कचरा उठाया जा रहा है। नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के 22 वार्डों से प्रतिदिन करीब 250 से 300 टन कचरा निकलता है, जिसका निपटान कैल गांव में स्थापित प्लांट में किया जाता है।

    उठान व निपटान के लिए अलग-अलग होंगी एजेंसियां
    नगर निगम प्रशासन ने सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए इस बार डोर-टू-डोर कचरा उठान और निपटान के कार्य को अलग-अलग करने का निर्णय लिया है। प्रस्तावित नए बड़े टेंडर में यह व्यवस्था होगी। संबंधित प्रस्ताव बीते माह शहरी स्थानीय निकाय विभाग को भेजा जा चुका है।

    ताकि समय रहते मंजूरी मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सके। लेकिन अभी तक मंजूरी न मिल पाने के कारण छोटा टेंडर चार माह के लिए लगाने का निर्णय लिया है। बता दें कि पहले एक ही एजेंसी दोनों कार्यों को संभाल रही थी और इसका टेंडर एक वर्ष के लिए जारी किया गया था। अब नई व्यवस्था के तहत दोनों कार्यों के लिए अलग-अलग एजेंसियां नियुक्त की जाएंगी।

    350 नए सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की तैयारी
    नगर निगम प्रशासन ने सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 350 नए कर्मचारियों की नियुक्ति का भी निर्णय लिया है। ये कर्मचारी एजेंसी के माध्यम से रखे जाएंगे। इसके लिए फाइल प्रशासनिक मंजूरी के लिए शहरी स्थानीय निकाय विभाग को भेजी गई है।

    वर्तमान में निगम में 627 सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि स्वीकृत पदों की संख्या 1197 है। इनमें 560 से अधिक पद खाली पड़े हैं। निगम अधिकारियों के अनुसार करीब 100 कर्मचारियों की ड्यूटी अधिकारियों की कोठियों या अन्य कार्यों में लगी हुई है। ऐसे में नए कर्मचारियों की नियुक्ति होने से सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।

    184 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है निगम का दायरा
    नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी का क्षेत्रफल करीब 184 वर्ग किलोमीटर है। वर्ष 2010 में निगम गठन के समय इसमें 45 गांवों को भी शामिल किया गया था। इन क्षेत्रों में सफाई की जिम्मेदारी भी निगम के कर्मचारियों पर है।

    क्षेत्रफल अधिक होने और कर्मचारियों की कमी के कारण सफाई व्यवस्था को सुचारू रखना निगम प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।नई भर्ती नहीं होने और कर्मचारियों के लगातार सेवानिवृत्त होने के कारण सफाई कर्मियों की संख्या में कमी आई है।

    स्वच्छ सर्वेक्षण में सुधार की उम्मीद
    स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी को 47वां स्थान मिला था, जबकि वर्ष 2023 में निगम की रैंकिंग 221वीं रही थी। इस बार हुए सर्वेक्षण के परिणाम अभी जारी नहीं हुए हैं। निगम प्रशासन को उम्मीद है कि डोर-टू-डोर कचरा उठान और निपटान व्यवस्था नियमित रहने से रैंकिंग में सुधार आएगा।

    नगर निगम कमिश्नर महाबीर प्रसाद का कहना है कि नए टेंडर के लिए प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। जल्द ही एजेंसी को वर्क अलाट कर दिया जाएगा।