Category: खेल

  • प्रतिका रावल ने रचा नया अध्याय, भारत के लिए T20I डेब्यू में उतरते ही मची हलचल

    प्रतिका रावल ने रचा नया अध्याय, भारत के लिए T20I डेब्यू में उतरते ही मची हलचल

    दुबई
    महिला T20 एशिया कप के ग्रुप-A मुकाबले में जब भारत और थाईलैंड की टीमें दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में आमने-सामने आईं, तो हर किसी की निगाहें टॉस पर टिकी थीं। थाईलैंड की सैंड इन कप्तान थिपाचा पुत्थावोंग ने टॉस जीता और पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। लेकिन इस मैच की असली चर्चा टॉस से ज्यादा भारतीय टीम की उस नई सरप्राइज एंट्री को लेकर हो रही है, जिसने पिछले कुछ समय में अपने रिकॉर्ड्स से क्रिकेट जगत में तहलका मचा रखा है।

    जेमिमा रोड्रिग्स की गैरमौजूदगी में भारतीय नीली जर्सी में एक ऐसी धाकड़ बल्लेबाज को T20I डेब्यू कैप सौंपी गई है, जिसके नाम वनडे इतिहास में सबसे तेज रन बनाने के कई विश्व कीर्तिमान दर्ज हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं भारत की नई रन-मशीन प्रतिका रावल की, जो अपने डेब्यू मैच में ही मिडिल ऑर्डर को संभालने और मैदान पर चौके-छक्कों की बरसात करने उतरी हैं।

    कौन हैं प्रतिका रावल? रिकॉर्ड्स देखकर हैरान रह जाएंगे आप
    दिल्ली और रेलवे से घरेलू क्रिकेट में धमाल मचाने वाली 24 साल प्रतिका रावल अपनी आक्रामक और तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाजी के लिए जानी जाती हैं। इंटरनेशनल लेवल पर प्रतिका वनडे क्रिकेट में सबसे तेज 500 रन (मात्र 8 पारियों में) और सबसे तेज 1000 रन (23 पारियों में) बनाने वाली दुनिया की संयुक्त रूप से सबसे तेज महिला बल्लेबाज हैं। वह वनडे में आयरलैंड के खिलाफ 154 रनों की पारी खेल चुकी हैं और वनडे विश्व कप 2025 में भी न्यूजीलैंड के सामने शानदार शतक जड़ चुकी हैं। सीनियर विमेंस वनडे ट्रॉफी में 68.50 के औसत से 411 रन बनाने वाली प्रतिका अपनी उपयोग स्पिन गेंदबाजी से भी विपक्षी टीम को चौंकाने में माहिर हैं।

    फैंस को प्रतिका से उम्मीदें
    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम के लिए इस नए चेहरे का डेब्यू हर क्रिकेट फैन के लिए काफी रोमांचक होने वाला है। देखना दिलचस्प होगा कि वनडे की यह स्टार बल्लेबाज अपने T20I डेब्यू में कैसा गदर मचाती है। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टॉस के दौरान कहा कि वह भी इस मैच में गेंदबाजी करना चाहती थी, लेकिन टॉस उनके हाथों में नहीं है।

    भारत की प्लेइंग 11
    शेफाली वर्मा, स्मृति मंधाना, प्रतिका रावल, हरमनप्रीत कौर, भारती फुलमाली, रिचा घोष, दीप्ति शर्मा, प्रेमा रावत, एन श्री चरणी, क्रांति गौड़, नंदिनी शर्मा

  • श्रीलंका क्रिकेट में सरकारी दखल का असर, महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी गई

    श्रीलंका क्रिकेट में सरकारी दखल का असर, महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी गई

    नई दिल्ली
     इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने श्रीलंका से पहली बार होने वाली महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी का अधिकार छीन लिया है। नए मेजबान देश को लेकर फैसला आईसीसी की अगली बैठक में लिया जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फैसला तब लिया गया जब आईसीसी ने तय किया कि वह श्रीलंका में टूर्नामेंट की मेजबानी के साथ आगे नहीं बढ़ सकता क्योंकि श्रीलंका क्रिकेट को सरकार द्वारा नियुक्त एक अंतरिम प्रशासन चला रहा है।

    14 फरवरी से टूर्मामेंट की शुरुआत
    महिला क्रिकेट में अगले साल पहली बार चैंपियंस ट्रॉफी खेली जाएगी जिसकी शुरुआत 14 फरवरी से होगी जबकि फाइनल मुकाबला 28 फरवरी 2027 को खेला जाना है। इस टूर्नामेंट में कुल छह टीमें हिस्सा लेंगी। 'संडे टाइम्स' की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि श्रीलंका ने टूर्नामेंट की मेजबानी का अधिकार खो दिया है और नए मेजबान देश का फैसला आईसीसी बोर्ड की अगली बैठक में किया जाएगा।

    श्रीलंका से शिफ्ट होगा टूर्नामेंट
    एसएलसी ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी के सेक्रेटरी प्रकाश शैफ्टर ने साप्ताहिक अखबार से कहा, 'हां, इसे श्रीलंका से दूसरी जगह ले जाया गया है। यह टूर्नामेंट किसी दूसरी जगह पर खेला जाएगा, लेकिन अभी मुझे पक्का नहीं पता कि यह कहां खेला जाएगा।' इंटरनेशनल क्रिकेट संस्था का कहना है कि सदस्य देशों में सरकार का कोई दखल नहीं होना चाहिए। आईसीसी ने एसएलसी के प्रतिनिधियों को आईसीसी बोर्ड की बैठक में शामिल होने की इजाजत देने से भी मना कर दिया था, क्योंकि बोर्ड को एक ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी चला रही थी।

    एसएलसी से की चुनाव कराने की मांग
    पिछले महीने एक बयान में आईसीसी ने एसएलसी से जितनी जल्दी हो सके चुनाव कराने को कहा था। आईसीसी ने एक बयान में कहा था, 'आईसीसी बोर्ड को श्रीलंका क्रिकेट के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने बदले हुए संविधान की दिशा में हुई प्रगति पर ध्यान दिया। उन्होंने जल्द से जल्द चुनाव कराने की जरूरत पर जोर दिया और इस बात पर सहमति जताई कि श्रीलंका क्रिकेट अभी के लिए आईसीसी बोर्ड की बैठकों में प्रतिनिधित्व करने में असमर्थ रहेगा।'

    अंतरिम कमेटी ने खेल मंत्री को संविधान का एक ड्राफ्ट सौंपा है। प्रस्तावित बदलाव कानूनी प्रक्रिया से गुजरेंगे और फिर संसद में पेश किए जाएंगे। हालांकि, इस प्रक्रिया के जल्दी पूरी होने की संभावना नहीं है। इसके अलावा, श्रीलंका चैंपियंस ट्रॉफी में हिस्सा लेने से भी पूरी तरह चूक सकता है। आईसीसी रैंकिंग में टॉप पांच टीमों के क्वालिफाई करने की उम्मीद है जबकि मेजबान देश छठी टीम होगी। श्रीलंकाई टीम अभी दुनिया में छठे नंबर पर है और अगर टूर्नामेंट को ऐसे देश में ले जाया जाता है जो आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष छह से बाहर है, तो श्रीलंका क्रिकेट टीम टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले पाएगी।

  • दलीप ट्रॉफी में बड़ा रिकॉर्ड, महज 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने संभाली कप्तानी

    दलीप ट्रॉफी में बड़ा रिकॉर्ड, महज 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने संभाली कप्तानी

    नई दिल्ली
    दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में सेंट्रल जोन के खिलाफ मैदान पर एक बेहद ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। ईस्ट जोन के नियमित कप्तान ईशान किशन के अचानक चोटिल होकर मैदान से बाहर जाने के बाद महज 15 साल के युवा स्टार क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को टीम का कार्यकारी कप्तान बनाया गया। सेंट्रल जोन की पहली पारी के 19वें ओवर में जब वैभव ने कप्तानी की जिम्मेदारी संभाली तो उनके चेहरे पर एक मुस्कुराता हुआ आत्मविश्वास साफ देखा जा सकता था।

    ईशान किशन को लगी चोट
    यह घटना तब घटी जब विकेटकीपिंग कर रहे ईस्ट जोन के कप्तान इशान किशन के दाहिने हाथ की कलाई पर तेजी से गेंद लग गई। दर्द से कराह रहे इशान को तुरंत फिजियो की मदद लेनी पड़ी और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें आगे के इलाज के लिए मैदान से बाहर जाना पड़ा। बाद में इशान के हाथ पर पट्टी बंधी हुई दिखी जबकि विकेटकीपिंग का जिम्मा उनके झारखंड के साथी खिलाड़ी कुमार कुशाग्र ने संभाला।

    पहले गेंदबाजी कर रही ईस्ट जोन की टीम
    मैच की बात करें तो ईस्ट जोन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था। त्रिपुरा के तेज गेंदबाज अभिजीत सरकार ने शुरुआती ओवरों में ही घातक गेंदबाजी करते हुए सेंट्रल जोन के ओपनिंग बल्लेबाज अमन मोखाड़े (8) और कुणाल चंदेला (6) को आउट कर दिया जिससे रजत पाटीदार की कप्तानी वाली सेंट्रल जोन की टीम 36 रनों पर ही अपने 2 महत्वपूर्ण विकेट गंवा बैठी थी।

    पहली बार सीनियर टीम की कप्तानी
    यह पहला मौका है जब वैभव सूर्यवंशी किसी सीनियर पुरुष टीम की कप्तानी करते नजर आए हैं। साल 2024 की शुरुआत में रणजी ट्रॉफी के जरिए फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले वैभव का यह केवल 10वां फर्स्ट-क्लास और दूसरा दलीप ट्रॉफी मैच है। इस महीने की शुरुआत में जब वैभव को ईस्ट जोन का उप-कप्तान नियुक्त किया गया था तब चयनकर्ताओं के फैसले पर काफी बहस हुई थी।

    दलीप ट्रॉफी के पहले दौर में नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ मिली जीत में वैभव सूर्यवंशी बल्ले से कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर सके थे और पहली पारी में केवल 8 रन बनाकर आउट हो गए थे। लेकिन उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाते हुए गेंद से 2 विकेट चटकाए थे और टीम की एक पारी की जीत में अहम भूमिका निभाई थी।

  • थाईलैंड के खिलाफ भारत की दमदार प्लेइंग 11! मंधाना-शेफाली की जोड़ी और रेणुका का होगा जलवा

    थाईलैंड के खिलाफ भारत की दमदार प्लेइंग 11! मंधाना-शेफाली की जोड़ी और रेणुका का होगा जलवा

     नई दिल्‍ली
     भारतीय टीम थाइलैंड के खिलाफ विमंस एशिया कप 2026 की शुरुआत करेगी। 20-20 ओवर का यह मुकाबला रविवार को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। हरमनप्रीत कौर की कप्‍तानी वाली टीम जीत के साथ इस टूर्नामेंट का श्रीगणेश करना चाहती है।

    ऐसे में टीम ने दुबई के मैदान पर जमकर पसीना भी बहाया। थाइलैंड टीम भारत के खिलाफ अब तक कोई मैच नहीं जीत पाई है। दोनों टीमों के बीच 3 बार टक्‍कर हुई है। इस बीच आइए जानते हैं कि कौन सी 11 भारतीय छोरियां थाइलैंड को धूल चटाने के लिए मैदान पर उतरेंगी।

    मंधाना-शेफाली करेंगी शुरुआत
    स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा पारी की शुरुआत कर सकती हैं। दोनों की कोशिश भारत को तेज शुरुआत देने पर होगी। बाएं हाथ की ओपनर मंधाना में पावरप्ले के दौरान विरोधी टीम से मैच छीन लेने की काबिलियत है। वह बल्लेबाजी के लिए अनुकूल मौकों का पूरा फायदा उठाने की कोशिश करेंगी।

    मिडिल आर्डर
    3 नंबर पर प्रतिका रावल नजर आ सकती हैं। कप्‍तान हरमनप्रीत कौर चौथे और विकेटकीपर ऋषा घोष नंबर 5 पर उतर सकती हैं। दोनों जरूरत के हिसाब से अपना खेल खेलेंगी। अगर टॉप ऑर्डर अच्‍छी शुरुआत देता है तो वह रन गति को बढ़ाएंगी, अगर शुरुआत अच्‍छी नहीं होती है तो विकेट गिरने पर लगाम लाएंगी। इसके बाद ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा एक्‍शन में दिख सकती हैं।

    रेणुका पर होंगी नजरें
    गेंदबाजी की कमान अरुंधति रेड्डी, राधा यादव, श्री चरणी, रेणुका सिंह ठाकुर और क्रांति गौड़ को सौंपी जा सकती है। राइट-आर्म पेसर रेणुका सिंह ठाकुर नई गेंद से मूवमेंट हासिल कर सकती हैं और अपनी स्विंग और वेरिएशन से बल्लेबाजों को परेशान करने का हुनर रखती हैं। अगर दुबई की पिच से शुरुआत में थोड़ी भी मदद मिलती है, तो रेणुका बड़ा असर डाल सकती हैं।

    भारत की संभावित प्‍लेइंग 11
    स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, प्रतिका रावल, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), ऋचा घोष (विकेटकीपर), दीप्ति शर्मा, अरुंधति रेड्डी, राधा यादव, श्री चरणी, रेणुका सिंह ठाकुर, क्रांति गौड़।

    थाईलैंड की संभावित प्‍लेइंग 11
    नारुएमोल चाइवाई (कप्तान), नन्नापत कोनचारोएनकाई (विकेटकीपर), चानिदा सुथिरुआंग, नाओमी हैमिल्टन, ओनिचा कामचोमफू, थिपचा पुथावोंग, फन्निता माया, नन्नाफट चाइहान, सुलेपोर्न लाओमी, अपिसारा सुवानचोनराथी, सुनीदा चतुरोंगराटाना।

    भारतीय महिला क्रिकेट टीम
    हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, भारती फुलमाली, दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष (विकेटकीपर), जी कमलिनी, अरुंधति रेड्डी, प्रेमा रावत, राधा यादव, श्री चरणी, रेणुका ठाकुर, नंदनी शर्मा, क्रांति गौड़, प्रतिका रावल।

    थाईलैंड महिला क्रिकेट टीम
    नारुएमोल चाइवाई (कप्तान), नन्नापत कोनचारोएनकाई, नत्थाकन चानथम, चानिदा सुथिरुआंग, सुलेपोर्न लाओमी, ओनिचा कामचोमफू, थिपचा पुथावोंग, फन्निता माया, एफिसारा सुवानचोनराथी, सुनिदा चतुरोंग्रट्टाना, चायनिसा फेंगपैन, नन्नाफट चाइहान, कोरानित सुवानचोनराथी, थानराडा सीसावन, नाओमी हैमिल्टन।

  • घरेलू क्रिकेट में रिकॉर्डों की भरमार, टीम इंडिया में जगह का इंतजार; ये खिलाड़ी बन सकते हैं टेस्ट के दावेदार

    घरेलू क्रिकेट में रिकॉर्डों की भरमार, टीम इंडिया में जगह का इंतजार; ये खिलाड़ी बन सकते हैं टेस्ट के दावेदार

    नई दिल्ली 
    भारत में घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शन को सिलेक्शन का आधार माना जाता है। खासतौर पर टेस्ट क्रिकेट में खिलाड़ियों का सिलेक्शन उनके घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शन पर काफी हद तक निर्भर भी करता है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इंटरनेशनल क्रिकेटर्स को भी खाली समय में घरेलू क्रिकेट में हिस्सा लेने की सलाह दे चुका है। इस कड़ी में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर के खिलाफ सख्त कदम भी उठाए जा चुके हैं। हालांकि, भारत के घरेलू क्रिकेट में कुछ ऐसे खिलाड़ी भी हैं, जो सालों से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सिलेक्टर्स का ध्यान अपनी ओर नहीं खींच पा रहे हैं। इन खिलाड़ियों के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि इन्हें कम से कम टेस्ट टीम में मौका और मैदान पर अपनी काबिलियत दिखाने के लिए टी20 फॉर्मेट से आने वाले खिलाड़ियों के ऊपर तरजीह जरूर मिलनी चाहिए।

    सरफराज खान
    सरफराज खान भारतीय टीम के लिए टेस्ट डेब्यू कर चुके हैं। हालांकि, 2024 में डेब्यू करने के बाद पिछले दो सालों में उन्हें सिर्फ 6 टेस्ट मैच ही खेलने का मौका मिला है। जिन मुकाबलों में सरफराज को मौका भी मिला, तो लगभग हर पारी में उनका बल्लेबाजी क्रम ही बदलता रहा। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 64 की औसत से रन बनाने वाले सरफराज ने अपनी फिटनेस पर काम करते हुए वजन भी घटाया है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें काबिलियत के अनुसार मौके नहीं मिल सके हैं।

    शाहबाज अहमद
    भारत के लिए 3 वनडे और दो टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल चुके शाहबाज अहमद लंबे समय से टेस्ट टीम में मौका मिलने की राह देख रहे हैं। शाहबाज बल्ले के साथ-साथ गेंद से भी अहम योगदान दे सकते हैं। 43 फर्स्ट-क्लास मैचों में शाहबाज 146 विकेट निकाल चुके हैं, जबकि बल्लेबाजी में उन्होंने 2,493 रन बनाए हैं। दलीप ट्रॉफी 2026 में भी शाहबाज अपने प्रदर्शन से हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचने में जुटे हुए हैं।

    अभिमन्यु ईश्वरन
    फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में खेले 114 मुकाबलों में 47 की औसत से 8,396 रन बना चुके अभिमन्यु ईश्वरन भारतीय ड्रेसिंग रूम तक तो पहुंच चुके हैं, लेकिन पिछले तीन साल से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। अनुभव और दमदार रिकॉर्ड होने के बावजूद अभिमन्यु ड्रेसिंग रूम में बैठकर मैदान पर भारत की जर्सी पहनकर उतरने का सपना ही देखते रहे हैं। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में वह 27 शतक और 36 अर्धशतक भी लगा चुके हैं। अभिमन्यु का फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में डेब्यू 2013 में हुआ था और उनकी उम्र डेब्यू का इंतजार करते-करते 30 साल हो चुकी है।

    धर्मेंद्रसिंह जडेजा
    100 फर्स्ट-क्लास मैचों में 423 विकेट। लिस्ट-ए क्रिकेट में 121 विकेट और टी20 में 65 विकेट। यह धर्मेंद्रसिंह जडेजा के बेमिसाल आंकड़े हैं, जिन्होंने साल 2013 में फर्स्ट-क्लास डेब्यू किया था। हालांकि, वह पिछले 13 वर्षों से भारतीय टेस्ट टीम में चुने जाने की आस लगाए बैठे हैं।

    शम्स मुलानी
    घरेलू क्रिकेट में शम्स मुलानी को मुंबई का स्टार ऑलराउंडर माना जाता है। बल्ले और गेंद दोनों से ही वह किसी भी मैच का रुख पलटने का दमखम रखते हैं। 59 फर्स्ट-क्लास मैचों में मुलानी ने 269 विकेट चटकाए हैं, जबकि बल्लेबाजी में वह 2,577 रन बना चुके हैं। मुलानी एक शतक और 22 अर्धशतक भी लगा चुके हैं। रणजी ट्रॉफी 2025-26 में उन्होंने 7 मुकाबलों में 30 विकेट चटकाए थे। घरेलू क्रिकेट में लगातार दमदार प्रदर्शन के बावजूद वह सिलेक्टर्स की निगाहों में अब तक नहीं आ सके हैं।

     

  • जमीनी स्तर से तराशी जाएगी हॉकी प्रतिभा, मध्यप्रदेश में 6-12 साल के बच्चों के लिए फीडर सेंटर

    जमीनी स्तर से तराशी जाएगी हॉकी प्रतिभा, मध्यप्रदेश में 6-12 साल के बच्चों के लिए फीडर सेंटर

    मध्यप्रदेश में 6 से 12 वर्ष उम्र के बच्चों के लिए बनेगा हॉकी का फीडर सेंटर

    स्क्रीन टाइम घटाएं और एक घंटा खेल मैदान में बिताएं : मंत्री सारंग
    राष्ट्रीय खेल दिवस पर भोपाल में मैत्री हॉकी मैच का आयोजन
    प्रदेशभर में हुई विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं एवं फिटनेस गतिविधियां

    भोपाल 
    राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं एवं फिटनेस गतिविधियां आयोजित की गई हैं। राजधानी भोपाल स्थित मेजर ध्यानचंद हॉकी स्टेडियम में मैत्री हॉकी मैचों का आयोजन किया गया। टीटी नगर स्टेडियम में स्पोर्ट्स साइंस सेमिनार, कराते, बॉलीबाल, वेटलिफ्टिंग, फुटबॉल, जूडो, बॉक्सिंग, कुश्ती सहित पैरेंट्स फन गेम्स हुए। इन आयोजनों में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने शामिल होकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। मंत्री सारंग ने 6 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए हॉकी फीडर सेंटर शुरू करने की घोषणा की। मंत्री सारंग ने कहा कि इस फीडर सेंटर में कम उम्र से ही बच्चों की खेल प्रतिभा को उचित प्रशिक्षण एवं मंच देकर उनका समुचित विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा। स्पोर्ट्स साइंस सेमिनार में शामिल होकर मंत्री सारंग ने कहा कि स्क्रीन टाइम घटाएं और एक घंटा खेल मैदान में बिताएं, जिससे युवाओं को शारीरिक, मानसिक सहित समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके। सेमिनार में पोषण, इंजरी सहित अन्य विषयों पर विषय विशेषज्ञों द्वारा खिलाड़ियों को मार्गदर्शन दिया गया।

    भोपाल में हुआ हॉकी का मैत्री मैच

    कार्यक्रम में पहला मैत्री हॉकी मुकाबला एमपी अकादमी और भोपाल वांडर्स के बीच खेला गया। इसमें एमपी अकादमी ने 3-0 से मैच जीता। दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने मैदान पर शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए दर्शकों में उत्साह पैदा किया। मुकाबले के दौरान खिलाड़ियों ने तेज आक्रमण, मजबूत डिफेंस और बेहतर तालमेल का प्रदर्शन किया। वहीं महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से महिला वर्ग में रायसेन क्वीन और भोपाल टाइग्रेस के बीच मैत्री हॉकी मैच हुआ। जिसमें भोपाल टाइग्रेस ने शूट आउट में 3-2 से मैच जीती।

    6 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए फीडर सेंटर में मिलेगा प्रशिक्षण

    मंत्री सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में 11 खेल अकादमियों का संचालन किया जा रहा है। इन अकादमियों में प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण देकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जा रहा है। मंत्री सारंग ने कहा कि अब खेल अकादमियों के लिए प्रतिभाओं को और कम उम्र से तैयार करने की व्यवस्था की जा रही है। इसके तहत 6 से 12 वर्ष तक के बच्चों को फीडर सेंटर के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रयास है कि प्रतिभाओं की तलाश केवल अकादमी स्तर पर नहीं, बल्कि उससे भी नीचे स्तर से हो। फीडर सेंटर के माध्यम से छोटे बच्चों की खेल प्रतिभा को पहचाना जाएगा, उन्हें प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जाएगा और उनकी क्षमता अनुसार आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

    जमीनी स्तर से होगा टैलेंट सर्च

    मंत्री सारंग ने कहा कि यह मध्यप्रदेश में जमीनी स्तर से खेल प्रतिभाओं को तलाशने और तैयार करने की दिशा में नया प्रयोग है। अभी तक जहां खिलाड़ियों का चयन अपेक्षाकृत बड़े स्तर पर होता था, वहीं अब गांव, ब्लॉक और स्थानीय स्तर तक प्रतिभा खोजने की प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा। मंत्री सारंग ने कहा कि 6 से 12 वर्ष की उम्र बच्चों में खेल कौशल विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण होती है। इसी उम्र में यदि बच्चों को सही प्रशिक्षण, उचित मार्गदर्शन और खेल का वातावरण मिले तो उन्हें भविष्य के उत्कृष्ट खिलाड़ी के रूप में तैयार किया जा सकता है। फीडर सेंटर में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे चलकर खेल अकादमियों से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। इस प्रकार फीडर सेंटर से लेकर अकादमी और फिर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खिलाड़ियों के विकास की एक मजबूत श्रृंखला तैयार होगी।

    अकादमी तक पहुंचेगी नई प्रतिभाएं

    मंत्री सारंग ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करना नहीं है, बल्कि खिलाड़ी तैयार करने की पूरी व्यवस्था को मजबूत करना है। फीडर सेंटर इस पूरी व्यवस्था की शुरुआती कड़ी होंगे। यहां से तैयार होने वाले प्रतिभाशाली बच्चों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार संबंधित खेलों में आगे बढ़ाया जाएगा। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रदेश में संचालित 11 खेल अकादमियां उत्कृष्ट खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण देने का कार्य कर रही हैं। अब फीडर सेंटर के माध्यम से इन अकादमियों के लिए प्रतिभाओं की एक मजबूत और सतत पाइपलाइन तैयार होगी।

  • 5 वनडे के तिलक पर बड़ी जिम्मेदारी, 2027 वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया ने शुरू की खास तैयारी

    5 वनडे के तिलक पर बड़ी जिम्मेदारी, 2027 वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया ने शुरू की खास तैयारी

    नई दिल्ली
    भारतीय क्रिकेट टीम 2027 के वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों को नया आयाम देने में जुट गई है। अजीत अगरकर की अगुआई वाली चयन समिति की नजरें युवा बाएं हाथ के बल्लेबाज तिलक वर्मा पर टिकी हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक तीन साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में अब तक केवल 5 वनडे खेलने वाले तिलक वर्मा को मध्यक्रम में श्रेयस अय्यर के मुख्य बैकअप के रूप में देखा जा रहा है।

    तिलक वर्मा पर हर किसी की नजर
    दाएं हाथ के बल्लेबाजों से भरे भारतीय टॉप और मिडिल ऑर्डर में तिलक वर्मा एक बाएं हाथ के बल्लेबाज के तौर पर विविधता लाते हैं। इसके साथ ही टीम मैनेजमेंट उन्हें अपनी ऑफ-स्पिन गेंदबाजी सुधारने के लिए भी लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। दरअसल, भारतीय टॉप ऑर्डर में गेंदबाजी विकल्पों की भारी कमी रही है जिससे मुख्य गेंदबाजों पर अतिरिक्त दबाव बनता है। तिलक की पार्ट-टाइम गेंदबाजी टीम को वो संतुलन प्रदान कर सकती है जिसकी तलाश लंबे समय से की जा रही है।

    लिस्ट-ए करियर में तिलक वर्मा का दमदार प्रदर्शन
    अगर तिलक वर्मा के ओवरऑल लिस्ट-ए (50 ओवर फॉर्मेट) करियर पर नजर डालें तो उनके आंकड़े बेहद शानदार रहे हैं। उन्होंने अब तक खेले 36 लिस्ट-ए मुकाबलों की 33 पारियों में 47.60 की बेहतरीन औसत से 1,333 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से 5 शतक और 6 अर्धशतक निकले हैं जिसमें 156* रन उनका सर्वोच्च स्कोर रहा है। सिर्फ बल्ले से ही नहीं बल्कि गेंदबाजी में भी उन्होंने 25 पारियों में 11 विकेट चटकाए हैं। यही वजह है कि सेलेक्टर्स उनके इस ऑलराउंड प्रदर्शन पर भरोसा जता रहे हैं।

    4 ओवर की गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी
    बीसीसीआई के एक सूत्र ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए टीम की मौजूदा स्थिति और जरूरत पर स्पष्ट बयान दिया, 'कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल का मानना है कि मध्यक्रम के लिए हमारे पास कोई ठोस बैकअप तैयार नहीं है। हार्दिक पंड्या और नीतीश कुमार रेड्डी की चोटों के इतिहास को देखते हुए टीम मैनेजमेंट टॉप ऑर्डर में एक ऐसा बल्लेबाज चाहता है जो वनडे में कम से कम 4 ओवर की गेंदबाजी का योगदान दे सके।'

    टीम मैनेजमेंट की यह चिंता बेवजह नहीं है। पिछले कुछ समय में टीम संतुलन बनाए रखने के लिए अक्षर पटेल या वाशिंगटन सुंदर जैसे निचले क्रम के ऑलराउंडरों को नंबर 5 या 6 पर प्रमोट करना पड़ा था। यहां तक कि इंग्लैंड दौरे के समय ईशान किशन को भी अय्यर से ऊपर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया था।

    दिग्गजों को लेकर भी चिंता
    इसके अलावा, टीम के अनुभवी खिलाड़ियों की बढ़ती उम्र और फिटनेस समस्याएं भी चयनकर्ताओं के सामने एक बड़ी चुनौती हैं। बीसीसीआई सूत्र ने आगे कहा, 'टीम के पास रोहित शर्मा और विराट कोहली के रूप में दो उम्रदराज खिलाड़ी हैं जिन्हें अक्सर छोटी-मोटी चोटों से जूझना पड़ता है। वहीं, जब तक विश्व कप आएगा तब तक केएल राहुल भी 35 साल से अधिक के हो चुके होंगे।'

    न्यूजीलैंड दौरे से होगी तैयारी शुरू
    भारतीय टीम की वर्ल्ड कप तैयारियों की असली परीक्षा अक्टूबर में न्यूजीलैंड दौरे से शुरू होगी। 27 सितंबर से वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली घरेलू वनडे सीरीज में प्रमुख सीनियर खिलाड़ियों को आराम दिए जाने की संभावना है जिससे तिलक वर्मा जैसे युवाओं को अपनी दावेदारी मजबूत करने का बेहतरीन मौका मिलेगा।

  • टेनिस के महानायक रोजर फेडरर को हॉल ऑफ फेम सम्मान, मंच पर हुए भावुक

    टेनिस के महानायक रोजर फेडरर को हॉल ऑफ फेम सम्मान, मंच पर हुए भावुक

      न्यूयॉर्क
    महान स्विस टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर शनिवार को अमेरिका के रोड आइलैंड स्थित न्यूपोर्ट में इंटरनेशनल टेनिस हॉल ऑफ फेम में शामिल किए जाएंगे। अपने शानदार करियर को याद करते हुए 45 वर्षीय फेडरर ने कहा कि टेनिस की दुनिया में बिताए 25 साल उनके लिए बेहद खास रहे और उन्होंने इस दौरान सिर्फ मैच और खिताब ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में कई दोस्त भी बनाए। फेडरर ने कहा कि संन्यास लेने के बाद उन्हें यह एहसास हुआ कि किसी खिलाड़ी की विरासत सिर्फ उसके जीते हुए मैचों और ट्रॉफियों से तय नहीं होती। कोर्ट के बाहर उसका व्यवहार, लोगों से उसका जुड़ाव और खेल के प्रति उसका रवैया भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

    'सिर्फ जीत और ट्रॉफियां ही सब कुछ नहीं'
    फेडरर ने कहा कि जब वह खेलते थे, तब उन्हें लगता था कि उनकी पहचान उनके फोरहैंड, बैकहैंड, ब्रेक प्वाइंट बचाने और जीत हासिल करने से है। लेकिन संन्यास के बाद उन्हें समझ आया कि लोग उन्हें उनके व्यवहार के लिए भी याद करते हैं। उन्होंने कहा, 'जब आप संन्यास लेते हैं तो आपको एहसास होता है कि लोग आपको सिर्फ आपके खेल के लिए याद नहीं रखते। वे यह भी याद रखते हैं कि आपने लॉकर रूम, मीडिया, टूर्नामेंट अधिकारियों और बॉल बॉयज के साथ कैसा व्यवहार किया।'

    पत्नी मिर्का के भाषण के बाद भावुक हुए फेडरर
    मिर्का के स्वागत-परिचय भाषण के बाद फेडरर को मंच पर बुलाया गया। उन्होंने माहौल को हल्का करने की कोशिश करते हुए मजाक में कहा कि उन्हें इस समय रूमाल और धूप के चश्मे की जरूरत है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने आंसुओं को रोक नहीं पा रहे थे।

    45 वर्षीय फेडरर ने मंच पर पहुंचते ही कहा कि यह सम्मान उनके लिए बेहद खास है और इसके बाद बोलना आसान नहीं होगा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में पत्नी मिर्का से पूछा कि कहीं उन्होंने इस समारोह की तैयारी चुपके से तो नहीं की थी।

    बचपन के आदर्श और कोच को किया याद
    भावुक भाषण के दौरान फेडरर ने अपने बचपन के आदर्श स्टीफन एडबर्ग और लंबे समय तक उनके कोच रहे सेवेरिन लुथी को भी याद किया। उन्होंने टेनिस के इतिहास में खुद को इस प्रतिष्ठित सूची का हिस्सा बनाए जाने को अपने लिए बेहद खास बताया। 'स्विस मैस्ट्रो' के नाम से मशहूर फेडरर ने कहा कि टेनिस की समृद्ध विरासत का हिस्सा बनना उनके लिए बहुत मायने रखता है।

    ऐसा रहा फेडरर का शानदार करियर
    फेडरर ने अपने शानदार करियर में 20 ग्रैंड स्लैम एकल खिताब जीते। इनमें रिकॉर्ड आठ विंबलडन, छह ऑस्ट्रेलियन ओपन और एक फ्रेंच ओपन खिताब शामिल है। वह लगातार 237 सप्ताह तक एटीपी रैंकिंग में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी रहे। फेडरर करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करने वाले केवल आठ पुरुष खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने 2004 से 2008 तक लगातार पांच यूएस ओपन खिताब जीते और लगातार 10 ग्रैंड स्लैम फाइनल में जगह बनाई, जिसमें से आठ में उन्हें जीत मिली।

    हॉल ऑफ फेम के 272वें सदस्य बने फेडरर
    फेडरर इंटरनेशनल टेनिस हॉल ऑफ फेम में शामिल होने वाले 272वें सदस्य बने। इस समारोह में उनके साथ पूर्व खिलाड़ी और प्रसारक मैरी कैरिलो को भी हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया। पहले से हॉल ऑफ फेम का हिस्सा रहीं महान खिलाड़ी बिली जीन किंग ने कैरिलो का परिचय कराया। किंग ने 69 वर्षीय कैरिलो की खेल पत्रकारिता में उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी खास जगह बनाई है। कैरिलो ने सम्मान मिलने पर कहा कि हॉल ऑफ फेम के दिग्गजों के बीच खड़ा होना उनके सपने से भी बढ़कर है।

    पहली बार न्यूपोर्ट पहुंचेंगे फेडरर
    फेडरर ने बताया कि उन्होंने अपने करीब 25 साल लंबे करियर में दुनिया के कई हिस्सों की यात्रा की, लेकिन वह अभी तक न्यूपोर्ट नहीं गए थे। अब शनिवार को उन्हें इंटरनेशनल टेनिस हॉल ऑफ फेम में शामिल किया जाएगा। इस मौके पर उनके साथ पूर्व खिलाड़ी और मशहूर ब्रॉडकास्टर मैरी कैरिलो को भी सम्मानित किया जाएगा।

    फेडरर के करियर में न्यूयॉर्क, लंदन और पेरिस जैसे बड़े टेनिस शहरों के अलावा कई ऐसे स्थान भी शामिल रहे, जहां उन्होंने प्रदर्शनी मुकाबले खेले। दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में राफेल नडाल के खिलाफ उनके प्रदर्शनी मुकाबले को करीब 52 हजार दर्शकों ने देखा था। वहीं मेक्सिको सिटी में अलेक्जेंडर ज्वेरेव के खिलाफ मुकाबले में 42 हजार से अधिक दर्शक पहुंचे थे।

     

  • VIP बनने के बजाय आम यात्री बने श्रीनाथ, मेट्रो वाली तस्वीर ने सोशल मीडिया पर जीता दिल

    VIP बनने के बजाय आम यात्री बने श्रीनाथ, मेट्रो वाली तस्वीर ने सोशल मीडिया पर जीता दिल

    बेंगलुरु

    भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज और मौजूदा ICC मैच रेफरी जवागल श्रीनाथ एक बार फिर अपनी सादगी की वजह से सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं. 1990 के दशक में अपनी तेज और स्विंग गेंदबाजी से बल्लेबाजों को परेशान करने वाले श्रीनाथ मैदान के बाहर भी अपने शांत और विनम्र स्वभाव के लिए जाने जाते रहे हैं। 

    हाल ही में सोशल मीडिया पर श्रीनाथ की एक तस्वीर तेजी से वायरल हुई. इसमें वह बेंगलुरु मेट्रो में एक आम यात्री की तरह सफर करते नजर आ रहे हैं. तस्वीर में उनके हाथ में ट्रॉली बैग है और वह ब्लू जींस और स्काई ब्लू शर्ट पहने दिखाई दे रहे हैं। 

    बड़े क्रिकेट स्टार होने के बावजूद बिना किसी तामझाम के पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने वाली यह तस्वीर लोगों को काफी पसंद आई. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनकी सादगी की तारीफ की। 

    फैंस ने शेयर किए अपने अनुभव
    तस्वीर वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने कमेंट सेक्शन में श्रीनाथ से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए. कुछ लोगों ने लिखा कि वे उन्हें बेंगलुरु में पहले भी आम लोगों की तरह घूमते-फिरते देख चुके हैं। 

    कई लोगों ने कहा कि क्रिकेट में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद श्रीनाथ के व्यवहार में कोई दिखावा नहीं दिखाई देता. कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि कर्नाटक के कई पूर्व क्रिकेटर अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं। 

     राहुल द्रविड़ का भी हुआ जिक्र
    सोशल मीडिया पर श्रीनाथ की चर्चा के बीच लोगों ने Rahul Dravid की सादगी को भी याद किया. यूजर्स ने साल 2017 की एक पुरानी वायरल तस्वीर का जिक्र किया, जिसमें द्रविड़ बेंगलुरु में आयोजित एक साइंस एग्जीबिशन के दौरान अपने बेटे समित और दूसरे बच्चों के साथ कतार में खड़े नजर आए थे। 

    बताया जाता है कि द्रविड़ ने अपनी सेलिब्रिटी हैसियत का इस्तेमाल कर सीधे अंदर जाने के बजाय एक आम अभिभावक की तरह लाइन में अपनी बारी का इंतजार किया था. उस तस्वीर की सोशल मीडिया पर काफी तारीफ हुई थी। 

    पहले भी चर्चा में रही है श्रीनाथ की सादगी
    यह पहला मौका नहीं है जब श्रीनाथ की सादगी
    ने लोगों का ध्यान खींचा हो. इससे पहले LinkedIn पर एक तस्वीर शेयर की गई थी, जिसमें वह मैसुरु रेलवे स्टेशन पर पीठ पर बैग लटकाए ट्रेन का इंतजार करते नजर आए थे। 

    बिना किसी खास दिखावे के आम लोगों की तरह सफर करना और सार्वजनिक जगहों पर सहज अंदाज में नजर आना उनकी पहचान का हिस्सा बन गया है. हालांकि, बेंगलुरु मेट्रो में वायरल हो रही यह तस्वीर वास्तव में कब ली गई थी, इसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल स्पष्ट नहीं है। 

    जवागल श्रीनाथ का क्रिकेट करियर
    श्रीनाथअपने दौर के सबसे तेज भारतीय गेंदबाजों में शामिल रहे हैं. उन्होंने भारत के लिए 67 टेस्ट और 229 वनडे मैच खेले. अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर के बाद वह ICC मैच रेफरी के रूप में भी काम कर रहे हैं। 

  • रूट के नाम नया ‘महारिकॉर्ड’, घरेलू मैदान पर सबसे सफल टेस्ट बल्लेबाज बने

    रूट के नाम नया ‘महारिकॉर्ड’, घरेलू मैदान पर सबसे सफल टेस्ट बल्लेबाज बने

       लंदन

    इंग्लैंड की टेस्ट टीम के कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज जो रूट ने अपने शानदार करियर में एक और बड़ा मुकाम हासिल किया है. रूट अब घरेलू मैदान पर टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज रिकी पोंटिंग को पीछे छोड़ दिया। 

    जो रूट ने पाकिस्तान के खिलाफ लॉर्डस टेस्ट मैच में इंग्लैंड के लिए दूसरी पारी में 24 रन बनाए और उन्हें मोहम्मद अली ने एलबीडब्ल्यू आउट किया. हालांकि ये 24 रन ही उन्हें रिकॉर्ड बुक में सबसे ऊपर पहुंचाने के लिए काफी थे. अब इंग्लैंड में रूट के नाम 7594 टेस्ट रन हो गए हैं, जबकि पोंटिंग ने ऑस्ट्रेलिया में 7578 रन बनाए थे. भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर 7216 रनों के साथ इस सूची में तीसरे स्थान पर हैं। 

    जो रूट ने इंग्लैंड में अब तक 89 टेस्ट की 156 पारियों में 7594 रन बनाए हैं. इस दौरान उनका औसत 53.85 रहा है. घरेलू मैदान पर उन्होंने 24 शतक और 35 अर्धशतक लगाए हैं, जबकि उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 254 रन रहा है. वहीं रिकी पोंटिंग ने ऑस्ट्रेलिया में 92 टेस्ट की 154 पारियों में 7578 रन बनाए. उनका औसत 56.97 रहा और उन्होंने 23 शतक के अलावा 38 अर्धशतक लगाए. घरेलू टेस्ट में उनका सर्वोच्च स्कोर 257 रन रहा. इस सूची में सचिन तेंदुलकर के बाद श्रीलंका के महेला जयवर्धने और साउथ अफ्रीका के जैक्स कैलिस का नंबर आता है। 

    सचिन के रिकॉर्ड पर रूट की निगाहें
    जो रूट अब टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने के सचिन तेंदुलकर के ऑलटाइम रिकॉर्ड के भी करीब पहुंचते जा रहे हैं. रूट के नाम पर अब तक 168 टेस्ट मैचों में 14208 रन दर्ज हैं. वहीं 'क्रिकेट के भगवान' तेंदुलकर ने अपने टेस्ट करियर में 15921 रन बनाए थे. यानी रूट उनसे 1713 रन पीछे हैं। 

    जो रूट का रिकॉर्ड उस समय आया जब इंग्लैंड ने पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट में अपनी स्थिति मजबूत कर रखी है. बारिश और खराब रोशनी के कारण तीसरे दिन (29 अगस्त) सिर्फ 24.5 ओवरों का खेल हो सका. दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड ने 7 विकेट पर 177 रन बना लिए थे और उसकी कुल बढ़त 357 रनों की हो चुकी थी। 

    डैन लॉरेंस 50 और ओली रॉबिन्सन 2 रनों पर नॉटआउट हैं. इंग्लैंड ने पहली पारी में 290 रन बनाए थे, जिसके जवाब में पाकिस्तान की पूरी टीम सिर्फ 110 रनों पर सिमट गई थी. इंग्लैंड ने सीरीज के पहले टेस्ट में भी पारी और 103 रनों से बड़ी जीत हासिल की थी।